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Tuesday, April 6, 2021

विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच के प्राथमिक शिक्षकों को पुरानी पेंशन से आच्छादित किये जाने हेतु मुख्यमंत्री के नाम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का ज्ञापन

विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच के प्राथमिक शिक्षकों को पुरानी पेंशन से आच्छादित किये जाने हेतु मुख्यमंत्री के नाम राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का ज्ञापन
 


तेज होगा पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन, सेवारत शिक्षक एकीकरण मंच की बैठक में निर्णय

तेज होगा पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन,  सेवारत शिक्षक एकीकरण मंच की बैठक में निर्णय


प्रयागराज : शिक्षक हितों की लड़ाई को पूरे दमखम के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए भी संघर्ष तेज होगा। अब संगठन में युवाओं को ही पद मिलेगा। वरिष्ठों को संरक्षक मंडल में स्थान दिया जाएगा। यह फैसला सोमवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की सेवारत शिक्षक एकीकरण मंच के बैनर तले हुई बैठक में लिया गया।


केपी इंटर कॉलेज में जुटे शिक्षकों ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ’ की लड़ाई की बदौलत, वेतन वितरण अधिनियम, वेतन समानता, पेंशन समानता जैसे लाभ अब तक मिले। दुर्भाग्य है कि अब पेंशन, भत्ते एक एक कर बंद हो रहे हैं। सब कुछ निजीकरण की ओर बढ़ रहा है।


 कुलभास्कर आश्रम कृषि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सात फरवरी को लखनऊ में बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (सेवारत) का गठन का निर्णय लिया। संगठन में सभी पद सेवारत शिक्षकों को दिए जाएंगे। प्रांतीय उपाध्यक्ष रमेश सिंह ने कहा कि अब पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई, शिक्षक सेवा अधिकरण विधेयक 2021 का विरोध तेज होगा। अन्य समस्याओं को भी सूचीबद्ध कर उनके समाधान की रणनीति बनाई जाएगी।


 बैठक में प्रांतीय मंत्री डॉ. सुनील गिरि, मुरादाबाद से सुखबीर सिंह, राकेश कुमार वर्मा, अनिल चौहान, बिजनौर के विनोद कुमार, विनेश त्यागी, राजेंद्र सोलंकी, रामपुर से सोमपाल संह, जैनपुर से सरोज सिंह, तेरस यादव, गाजीपुर से आंजनेय सिंह, वाराणसी से राणाप्रताप सिंह, चित्रकूट से मनोज कुमार पांडेय के अतिरिक्त प्रयाग के सुरेंद्र प्रताप, बृजेश खरे, राम बाबू सिंह आदि मौजूद रहे।

Monday, April 5, 2021

पुरानी पेंशन और कैशलेस इलाज के लिए कर्मचारी व शिक्षक करेंगे आंदोलन

पुरानी पेंशन और कैशलेस इलाज के लिए कर्मचारी व शिक्षक करेंगे आंदोलन


लखनऊ। पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, वेतन विसंगति और रोके गए भत्तों की बहाली को लेकर प्रदेश के कर्मचारियों, शिक्षकों, अधिकारियों, पेंशनर्स संगठनों ने आंदोलन का एलान किया है। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में रविवार को हुई बैठक में तय किया गया है कि अप्रैल-मई में ब्लॉक स्तर पर बैठक और जिलास्तर पर समितियों के गठन के बाद जून में पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा।


बैठक में तय किया गया कि अगर जरूरत पड़ी तो हड़ताल भी की जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ही कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का नाम दिया था। लेकिन, कुछ ही दिनों में योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। बैठक का संचालन मंच के प्रधान महासचिव सुशील कुमार त्रिपाठी ने किया। बैठक में मंच के उपाध्यक्ष सतीश कुमार पांडेय, रामराज दुबे, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एसपी मिश्रा, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह, उद्यान से अविनाश चंद्र श्रीवास्तव समेत विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए।

Wednesday, March 3, 2021

यूपी : पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं, सदन में पुरानी पेंशन का मामला उठाने पर सरकार का जवाब

यूपी : पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं, सदन में पुरानी पेंशन का मामला उठाने पर सरकार का जवाब

पुरानी पेंशन पर सरकार का दो टूक जवाब, पुरानी पेंशन प्रदान करने का नहीं है कोई प्रस्ताव




लखनऊ। विधान परिषद में प्रश्न प्रहर के दौरान सपा के सदस्य डॉ. मान सिंह यादव ने पुरानी पेंशन स्कीम का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नई पेंशन स्कीम का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। 75 हजार रुपये के वेतन से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक को 650 रुपये की पेंशन मिल रही है। भाजपा के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि सरकारी पुरानी पेंशन स्कीम लागू करेगी या नहीं।



वित्त राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि न्यू पेंशन स्कीम में सरकार ने अपना शेयर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है । निवेश पीएफआरडीए के माध्यम से किया जा रहा है। बेहतर रिटर्न मिल रहा है। नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि फिलहाल पुरानी पेंशन लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Saturday, January 16, 2021

पुरानी पेंशन की बहाली समेत अन्य मांगों को लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ का धरना व उपवास

पुरानी पेंशन की बहाली समेत अन्य मांगों को लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ का धरना व उपवास


लखनऊ। पुरानी पेंशन की बहाली, वित्तविहीन शिक्षकों, व्यावसायिक अनुदेशकों एवं कम्प्यूटर शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन, वंचित तदर्थ शिक्षकों को विनियमित किए जाने, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा समेत 11 सूत्री मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर धरना देकर उपवास रखेगा।


संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ आरपी मिश्र ने बताया कि प्रदेश व्यापी संघर्ष कार्यक्रम के अंतर्गत उपवास रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।

Tuesday, December 29, 2020

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान


पुरानी पेंशन के स्थान पर शुरू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी और चिंता का सबब बन गई है। वेतन से उनका अंशदान तो कट रहा है। मगर सरकार का अंशदान नहीं जमा हो रहा है। पिछले 13 महीने से यह स्थिति बनी हुई। इसका कारण बजट की कमी बताया जा रहा है। सरकार के रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है।


जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। 


शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान नहीं जमा कर रही है। शिक्षकों के मुताबिक हर शिक्षक का सरकार पर एक-एक लाख रुपये बकाया है। उनके अनुसार अकेले बनारस में चार अरब रुपए का अंशदान चाहिए। एनपीएस के नियम के मुताबिक जबतक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी।

भविष्य में होगा नुकसान

एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

हर महीने चाहिए 25 करोड़

एक अनुमान के मुताबिक वाराणसी में जितने शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए प्रति महीने 25 करोड़ रुपए चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।

माध्यमिक विद्यालयों में भी यही समस्या

प्राथमिक के साथ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहां सोलह महीने से अंशदान न जमा होने की शिकायत है। पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने इस मुद्दे पर बात की थी। डीआईओएस ने भी बजट न होने की समस्या बताई थी।


'इस वित्तीय वर्ष में एनपीएस में अंशदान जमा करने के लिए बजट नहीं आया। इस बारे में शासन और शिक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा। एनपीएस में सरकारी अंशदान जमा जाएगा।' - अनूप मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा)


'सरकार शिक्षकों का बकाया एनपीएस नहीं देगी तो शिक्षक आंदोलन कर सकते हैं। एनपीएस की अपनी कटौती रोकवाने के लिए न्यायालय की शरण में जा सकते हैं। नई पेंशन योजना शिक्षकों को नुकसान पहुंचा रही है।' - शशांक कुमार पांडेय, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग