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Wednesday, July 1, 2020

निजी स्कूलों के शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम

निजी स्कूलों के  शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम


लॉकडाउन से उपजे हालात का असर निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पड़ेगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षक कर्मचारियों के वेतन में 50 प्रतिशत कटौती के फरमान जारी किए हैं।


इसके पीछे बच्चों की फीस न जमा होने को कारण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि पहली जुलाई से राजधानी के निजी स्कूल सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए ही खोले जाएंगे। वेतन आधा किये जाने और संक्रमण खतरे के बावजूद स्कूल बुलाए जाने के विरोध की आहट भी सुनाई देने लगी है। कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च के बाद से स्कूल बंद चल रहे हैं। शिक्षक अपने अपने घरों से ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहे थे।


एक जुलाई से शिक्षकों को बुलाया गया है। कोरोना से निपटने के लिए सभी जरूरी एहतियात अपनाए जाएंगे। -अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

Monday, June 29, 2020

प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


लखनऊ: आमतौर पर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। पर इस बार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन प्राइवेट से बेहतर रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 72.45 प्रतिशत बच्चे पास हुए, जबकि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 83.70 रहा। यानी, प्राइवेट स्कूलों से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा।


शनिवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। इंटरमीडिएट में परीक्षा देने वालों में से 74.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इनमें बालकों के पास होने का प्रतिशत 68.88 रहा, जबकि बालिकाओं का 81.96। वहीं, ये विद्यार्थी किस तरह के विद्यालयों में पढ़ते थे, इस नजरिये से देखें तो शासकीय (सरकारी) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बेहतर रहा। 


यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ऐडेड माध्यमिक स्कूलों का भी परफॉर्मेंस पास होने के मानकों पर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा रहा। प्रदेश में 785 शासकीय विद्यालय हैं, जिनमें से 84,523 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 70,744 विद्यार्थी पास हुए। इस तरह से यहां पर पास प्रतिशत 83.70 रहा। वहीं, 4077 ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में 7,43,604 विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। इनमें से 5,82,433 पास हुए। यानी, पास प्रतिशत 78.33 रहा। वहीं, प्रदेश में चल रहे 12,482 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 15,92,903 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11,54,009 पास हुए। यानी, 72.45 प्रतिशत।


यही नहीं, प्रदेश में 111 प्राइवेट स्कूल ऐसे रहे, जिनमें पास होने का प्रतिशत 20 से भी कम रहा। जबकि केवल सात ही सरकारी स्कूल थे, जिनमें पास होने वालों का प्रतिशत 20 से कम रहा और ऐसे ही ऐडेड स्कूलों की संख्या 18 रही।


हाईस्कूल में प्राइवेट का परफॉर्मेंस तीन प्रतिशत ज्यादा
इंटरमीडिएट में जहां निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकले, वहीं हाईस्कूल की परीक्षाओं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत सरकारी की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा रहा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से 82.08% विद्यार्थी पास हुए, जबकि प्राइवेट स्कूलों के 85.11% विद्यार्थी परीक्षा पास कर सके। ऐडेड स्कूलों का परफॉर्मेंस 79.77 प्रतिशत रहा।


नकल के लिए बदनाम जिलों की हालत रही पतली
नकल के लिए बदनाम रहे जिलों की हालत भी इस साल कुछ पतली ही रही। परिणाम में उनका वह दबदबा नहीं रहा, जैसा की बीते वर्षों में दिखता रहा है। जैसे अलीगढ़ की स्थिति इस कदर खराब हुई कि इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उसका स्थान 75वें पर है। यहां केवल 56.39 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके। हरदोई भी नकल के लिए खासा बदनाम रहा है, लेकिन इस साल परिणाम के तौर पर यह प्रदेश के जिलों में 43वें स्थान पर रहा है। बाराबंकी का स्थान 49वां, रायबरेली का 50वां और गोंडा का 52वां नंबर रहा है। देवरिया में केवल 61.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि बलिया में पास प्रतिशत 57.57 रहा।

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

Saturday, June 27, 2020

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Saturday, June 20, 2020

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव


लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालय जुलाई से स्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग पर दबाव बना रहे हैं। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े संगठनों ने विभाग को अलग-अलग चरणों में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी दिया है। 


इस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने सभी जिला माध्यमिक विभाग विद्यालय निरीक्षकों से स्कूल डीआई खोलने पर सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं। कांग्रेस प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते 15 मार्च से सभी स्कूल बंद हैं। सरकार ने वित्तविहीन विद्यालयों को लॉकडाउन की अवधि में एक मुश्त फीस की वसूली नहीं करने, फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी का नाम नहीं काटने और फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिक्षकों को भी पूरा वेतन देने के निर्देश दिए हैं।


माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी का कहना है कि वित्तविहीन विद्यालयों में फीस नहीं मिलने से चार महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जुलाई में स्कूल खोलने के लिए सरकार से आग्रह किया है ताकि कक्षा 6 से 9 और 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम तैयार किया जा सके। उन्होंने कक्षा 9 से 11 की कक्षाएं भी संचालित करने के लिए आग्रह किया है। 


वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण काल मे स्कूलों को खोलने के लिए विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखूरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी स्कूलों को खोलने के लिए शिक्षक संघों, जिला विद्यालय निरीक्षकों सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रस्ताव और सुझाव के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी।

प्राइवेट स्कूलों में लागू होगा एक टेबल, एक छात्र का नियम, जुलाई अंत से स्कूल खोलने का प्रस्ताव


प्राइवेट स्कूलों में लागू होगा एक टेबल, एक छात्र का नियम, जुलाई अंत से स्कूल खोलने का प्रस्ताव। 


लखनऊ। मार्च मध्य से स्कूल बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान तो हो ही रहा है, वहीं निजी स्कूलों को अभिभावकों से फीस जमा कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में शासन से जुलाई के अंत से स्कूल खोलने का आग्रह किया है। कोरोना को देखते हुए इन्होंने सुरक्षा इंतजामों का भी प्रस्ताव शासन को भेजा है। कक्षाओं में छात्रों के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहे, इसके लिए एक टेबल, एक छात्र का नियम लागू होगा।


 अनऐडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने स्कूल खोलने पर कैसे कक्षाएं चलाई जाएंगी, क्या नियम लागू होंगे, इसे लेकर भी उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को प्रस्ताव भेजा है। संगठन अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्कूलों में एक टेबल, एक छात्र नियम लागू होगा। यह नियम वहां लागू हो सकता है, जहां टेबल छोटी हैं। टेबल पांच फीट लंबी है तो दो छात्र किनारे पर बैठ सकते हैं।


 जिन स्कूलों में सेक्शन ज्यादा है वे 4-4 घंटे की शिफ्ट में खोले जाएं। कक्षाओं को दो भागों में बांट लिया जाए और दोनों को अलग-अलग दिन बुलाया जाए। इस तरह से एक बार में 25 से ज्यादा छात्र नहीं होंगे। स्कूल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई कराए। जिस दिन बच्चे न आएं, उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया जाए। स्कूलों को समय-समय पर सैनिटाइज करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रों को मास्क और सैनिटाइजर के साथ आना होगा।


 शिक्षक व सभी स्टाफ को भी मास्क पहनना होगा। स्कूल में प्रवेश से पहले सभी की स्क्रीनिंग होगी। विभाग को शासन के निर्देश का इंतजार निजी स्कूलों ने जुलाई के अंत में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा है, वहीं विभाग को शासन की निर्देशों का इंतजार है। 


डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही निर्देश जारी होंगे, नियमों का पालन करते हुए स्कूल खोले जाएंगे। बीएसए दिनेश कुमार ने भी बताया कि स्कूल खोलने को लेकर अभी निर्देश नहीं आए हैं। इस बीच सरकारी स्कूल तैयारी में जुटे हैं। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहेब लाल मिश्रा ने बताया कि टेबल के ऊपर लाल निशान लगा दिया गया है। छात्र इसके सामने ही बैठेंगे। कॉलेज को सैनिटाइज भी करवाया जा रहा है।

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी


 यूपी, लखनऊ : यूपी में कोरोना महामारी के कारण निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी नहीं की गई है । स्कूल पिछले साल की फीस ही लेंगे। इस फैसले को सख्ती से लागू करवाया गया है। निजी स्कूल विद्यार्थियों की फीस माफ करेंगे, ऐसा कोई आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी नहीं किया गया है।



 यदि कोई फीस माफी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार कर रहा है और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह आश्वासन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने मेरठ स्कूल फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल को दिया। 



विधानभवन में स्थित कार्यालय में डिप्टी सीएम से मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने भरोसा दिलाया कि निजी स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी हैं।

Friday, June 19, 2020

संकट : स्कूल खुलने की स्थिति स्पष्ट न होने से बढ़ी दुविधा, बिना फीस टीचरों की सैलरी काटने लगे राजधानी के निजी स्कूल!

संकट : स्कूल खुलने की स्थिति स्पष्ट न होने से बढ़ी दुविधा,  बिना फीस टीचरों की सैलरी काटने लगे राजधानी के निजी स्कूल!

लखनऊ कोरोना से बचाव के लिए स्कूल बंद चल रहे हैं। स्कूल खोलने को लेकर प्रबंधक सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच तीन महीने से स्कूल बंद होने और फीस न मिलने से आर्थिक संकट भी छाने लगा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब फीस ही नहीं मिलेगी तो शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को वेतन कैसे देंगे। ऐसे में कई स्कूलों ने मई के वेतन में कटौती भी की है। 


60% मिली सैलरी
सेंट फ्रांसिस कॉलेज और सेंट पॉल जैसे मिशनरीज स्कूलों ने टीचिंग स्टाफ की सैलरी में 40 फीसदी कटौती की है। शहर में लखनऊ डायोसिस सोसायटी के तहत चलने वाले स्कूलों में सैलरी में कटौती कर दी गई है। सोसायटी के प्रवक्ता फादर डोनॉल्ड डिसूजा ने बताया कि स्कूलों में मई की सैलरी में कटौती का फैसला लिया गया है। हमने सभी स्कूलों में टीचिंग स्टाफ को 60 फीसदी और फोर्थ क्लास कर्मचारियों को 75 फीसदी सैलरी देने का फैसला लिया है। जुलाई में फीस आने के बाद बाकी बची राशि दी जाएगी। यह फैसला शहर में चल रहे हमारे 20 स्कूलों और बाकी 10 जिलों में चल रहे स्कूलों पर लागू होगा।


 बढ़ेगी दिक्कत
एसकेडी अकैडमी के निदेशक मनीष सिंह का कहना है कि उनके यहां 650 का स्टाफ है। मई की सैलरी तो दे दी गई, लेकिन वर्तमान हालात में जून की सैलरी में दिक्कत हो सकती है। बमुश्किल दस फीसदी अभिभावकों ने बच्चों की फीस जमा की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जुलाई में स्कूल खुलेंगे या नहीं। नए दाखिले भी नहीं हो रहे। खर्चों में की कटौती पायनियर मांटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह के अनुसार स्कूल के दूसरे खर्चों में कटौती करके स्टाफ की सैलरी दी गई है। स्कूलों के लिए सबसे बड़ा रेवेन्यू फीस ही हैं। कई लोग 3 महीने की फीस माफी के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं। सरकार को स्कूल, अभिभावक सभी की स्थिति पर विचार करते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए।


सक्षम हैं तो फीस दें
 दिल्ली पब्लिक स्कूल के मीडिया प्रवक्ता अर्चना मिश्रा के अनुसार सामान्य तौर पर फीस से सैलरी निकाली जाती थी। वर्तमान में मैनेजमेंट दे रहा है, लेकिन कब तक। सक्षम अभिभावक भी फीस नहीं दे रहे। स्थितियों को देखते हुए लोगों को फीस देनी चाहिए।

Sunday, March 22, 2020

सकारात्मक पहल : प्राइवेट स्कूलों में कोरोना की वजह से अब ऑनलाइन रिजल्ट

सकारात्मक पहल : प्राइवेट स्कूलों में कोरोना की वजह से अब ऑनलाइन रिजल्ट

Thursday, August 8, 2019

शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश



शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश। 



Friday, July 26, 2019

यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां


यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां। 




Tuesday, July 23, 2019

अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन



अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन। 




Tuesday, July 16, 2019

अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर लग सकता है संपत्ति कर, तृतीय वित्त आयोग व यूपी नगर पालिका परिषद वित्तीय संसाधन बोर्ड ने की सिफारिश।



अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर लग सकता है संपत्ति कर, तृतीय वित्त आयोग व यूपी नगर पालिका परिषद वित्तीय संसाधन बोर्ड ने की सिफारिश। 



Sunday, June 23, 2019

मांग : निजी स्कूलों के शिक्षक जल्द हों पूर्णकालिक, विरोध के हक छीनने को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला


मांग : निजी स्कूलों के शिक्षक जल्द हों पूर्णकालिक, विरोध के हक छीनने को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला। 




Thursday, May 23, 2019

प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में नहीं लागू हो सकता वेतन आयोग - हाईकोर्ट


प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में नहीं लागू हो सकता वेतन आयोग - हाईकोर्ट। 


Friday, April 26, 2019

शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के 45, 872 बच्चों को मिला इस वर्ष निजी स्कूलों में प्रवेश का मौका


शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के 45, 872 बच्चों को मिला इस वर्ष निजी स्कूलों में प्रवेश का मौका


Thursday, April 25, 2019

फतेहपुर : माफिया के आगे नतमस्तक शिक्षा विभाग, नियम कायदों को ताक पर रखकर दी जा रही स्कूलों को मान्यता, शिक्षा को बना दिया गया व्यवसाय

फतेहपुर : माफिया के आगे नतमस्तक शिक्षा विभाग, नियम कायदों को ताक पर रखकर दी जा रही स्कूलों को मान्यता, शिक्षा को बना दिया गया व्यवसाय।






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Thursday, March 28, 2019

प्राइवेट स्कूल : स्कूलों में बिक रहीं किताबें, टीचरों को बना दिया 'सेल्समैन'




बच्चे के भविष्य पर कोई बात न आए, यह सोचकर अक्सर अभिभावक स्कूलों के फरमान के आगे झुक जाते हैं। ऐसे में उनका सहारा मजबूत सरकारी तंत्र ही बन सकता है। शिकायत मिलने का इंतजार करने की जगह अधिकारियों को मजबूत निगरानी तंत्र बनाना चाहिए, तभी अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।
चार कमरों में सजी दुकान


ला-मार्टिनियर बॉयज में भी अभिभावक क्लास 6, 7 और 8 की किताबें पेमेंट देकर स्कूल से खरीद सकते हैं। स्कूल की बुक लिस्ट 2019-20 में बाकायदा ‘बुक शैल बी अवेलेबल फ्रॉम द कॉलेज ऑन पेमेंट’ का ऑप्शन है।

नहीं दिया कोई जवाब: स्कूल के स्तर पर किताबों की बिक्री के मामले में लामार्टिनियर बॉयज स्कूल का पक्ष जानने के लिए कई बार कोशिश की गई। बार-बार कॉल और मेसेज किया गया, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
असोसिएशन से जुड़े सभी स्कूलों ने फीस में नियमानुसार 9.23% ही बढ़ोतरी की है। किसी स्कूल में परिसर में कॉपी-किताबें बेची जा रही हैं तो इस पर बात की जाएगी और इसे रोका जाएगा।

-अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष,

अनऐडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन

अधिनियम के अनुसार, कोई निजी स्कूल परिसर में कोई व्यावसायिक काम नहीं कर सकता। स्कूल परिसर में किताबें बेच रहा है तो नियम विरुद्ध है। अभिभावक जिला विद्यालय निरीक्षक ऑफिस में लिखित शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद उचित कार्रवाई होगी।

-डॉ. मुकेश सिंह, डीआईओएस



स्टेशनरी खरीदिए... लेकिन हमारी पसंद से


कई निजी स्कूलों ने किताबों के साथ स्टेशनरी की लिस्ट भी अपने हिसाब से तय की है। अभिभावकों को कलर बॉक्स, पेंसिल और पेंट ब्रश और फेविकोल तक तय ब्रैंड का खरीदना पड़ रहा है। लामार्टिनियर बॉयज स्कूल में नर्सरी क्लास की बुक लिस्ट 2019-20 में अनडस्ट चॉक, रंगीन चॉक, प्लास्टिक क्रियॉन्स, वॉटर कलर, शेड पेंसिल और ब्रश तक का ब्रैंड लिखा है। इसी तरह सेंट फ्रांसिस स्कूल ने नर्सरी क्लास के लिए 6 पेंसिल और 6 इरेजर पहले से ही निर्धारित कर दी हैं।
एलडीए कॉलोनी सेक्टर-आई स्थित एलपीएस में कमरों में किताबों की बिक्री हो रही है। इन कमरों के बाहर बाकायदा किताबों की रेट लिस्ट भी चस्पा है।
अभिभावकों को तय दुकान से खरीदनी पड़ रहीं खास ब्रैंड की स्टेशनरी


सीबीएसई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें

सीबीएसई बोर्ड से जुड़े स्कूल सिलेबस में एनसीईआरटी की किताबें ही शामिल कर सकते हैं, लेकिन निजी स्कूल कमिशन के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें चलवा रहे हैं। इंदिरानगर निवासी एक अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली पब्लिक स्कूल में छठी में पढ़ता है। उनसे निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को कहा गया है, जिनकी कीमत करीब 5 हजार रुपये है, जबकि निशातगंज स्थित बुक स्टोर के मालिक नावेद के मुताबिक, एनसीईआरटी का सेट 500 रुपये में मिल जाता है।

30% तक कमाते हैं कमिशन

निजी प्रकाशक अपनी किताबें लागू करवाने के लिए स्कूलों को कमिशन देते हैं। स्कूल भी दुकानदारों से कमिशन वसूलते हैं। इस तरह स्कूलों को 10 से 30 फीसदी तक कमिशन मिलता है। स्कूल अभिभावकों को लिस्ट थमा कर मौखिक तौर पर बता देते हैं कि किस दुकान से किताबें खरीदनी हैं। सेंट फिडेलिस सहित कई स्कूलों ने वेबसाइट पर दुकानों का नाम अपलोड कर रखा है। तय दुकान से किताबें लेने पर अभिभावकों को कोई छूट नहीं मिलती, जबकि खुले बाजार में उन्हें 20% तक की छूट आराम से मिल जाती है।

एक ही बार में वसूल रहे हजारों

उप्र स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनिमय) अधिनियम-2018 के मुताबिक, स्कूल 20 हजार से अधिक शुल्क होने पर इसमें 9.23% से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकते। इसके साथ साल में चार शुल्क के अलावा कोई और शुल्क नहीं ले सकते, लेकिन निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा दूसरे मदों में भी वसूली कर रहे हैं। अभिभावक संघ के सदस्य राजेश के मुताबिक, गोमतीनगर कॉन्वेंट स्कूल हर साल अनुअल फीस लेता है। वहीं, लॉरेटो कॉन्वेंट कई मदों में पैसे वसूलता है, लेकिन इस बार स्कूल की वेबसाइट पर साल 2019-20 की फीस का ब्योरा अपलोड नहीं किया गया है।

•सैयद सना, लखनऊ: अभिभावकों का शोषण रोकने के लिए सरकार ने नियम बनाए, लेकिन निजी स्कूल मानने को तैयार नहीं हैं। कुछ स्कूलों ने परिसर में ही किताबों की दुकान सजा ली है और किताब बेचने के लिए टीचरों की ड्यूटी लगा दी है। वहीं, कुछ स्कूल तय दुकानों से खास ब्रैंड की ही किताबें और स्टेशनरी खरीदने को बाध्य कर रहे हैं। जरूरत हो या न हो... पेंसिल, कलर, फेविकोल सहित हर सामान तय दुकान से ही खरीदनी होगा।


एलडीए कॉलोनी सेक्टर-आई स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में घुसते ही चार कमरों में किताब की दुकानें खुली हैं। यहां किताबें बेचने के लिए टीचरों की ड्यूटी लगाई गई है। इन कमरों तक पहुंचने में अभिभावकों को परेशानी न हो, इसके लिए जगह-जगह आगे जाने का रास्ता दिखाने वाले पेपर चस्पा हैं। बाहर के किसी व्यक्ति को भनक न लगे, इसके लिए गार्ड और आया को भी इस काम में लगाया गया है।

दुकान को बताया कैम्प: स्कूल में ही किताबों की बिक्री के बारे में पूछने पर प्रबंधक लोकेश सिंह ने दलील दी कि स्कूल की ब्रांचों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें दी जा रही हैं। अभिभावकों के अनुरोध पर तीन दिन के लिए कैम्प लगाया है। हम किसी तरह की स्टेशनरी नहीं बेच रहे और न ही अभिभावकों को किसी दुकान से किताबें लेने के लिए कह रहे हैं।

Friday, March 15, 2019

कक्षा-6 से परास्नातक तक की शिक्षा देने वाले प्राइवेट संस्थानों को उनके कार्य प्रकृति के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना संविधान के अनुच्छेद-226 की न्यायिक पुनरावलोकन शक्तियों के अधीन, प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ भी याचिका संभव 


•एनबीटी ब्यूरो, प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कक्षा-6 से परास्नातक तक की शिक्षा देने वाले प्राइवेट संस्थानों को उनके कार्य प्रकृति के कारण संविधान के अनुच्छेद-226 की न्यायिक पुनरावलोकन शक्तियों के अधीन माना है। कोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद-12 के तहत प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हो सकती है। यह फैसला तीन सदस्यीय पूर्णपीठ ने दिया है। अब तक प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ याचिका पोषणीय नहीं मानी जाती थी।

Saturday, December 29, 2018

हरदोई : कक्षा 8 तक के प्राइमरी स्तर के हिंदी/अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की अस्थाई मान्यता संबंधी बिंदुवार निर्देश जारी, देखें

हरदोई : कक्षा 8 तक के प्राइमरी स्तर के हिंदी/अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की अस्थाई मान्यता संबंधी बिंदुवार निर्देश जारी, देखें।