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Thursday, August 8, 2019

शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश



शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश। 



Friday, July 26, 2019

यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां


यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां। 




Tuesday, July 23, 2019

अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन



अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन। 




Tuesday, July 16, 2019

अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर लग सकता है संपत्ति कर, तृतीय वित्त आयोग व यूपी नगर पालिका परिषद वित्तीय संसाधन बोर्ड ने की सिफारिश।



अधिक फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों पर लग सकता है संपत्ति कर, तृतीय वित्त आयोग व यूपी नगर पालिका परिषद वित्तीय संसाधन बोर्ड ने की सिफारिश। 



Sunday, June 23, 2019

मांग : निजी स्कूलों के शिक्षक जल्द हों पूर्णकालिक, विरोध के हक छीनने को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला


मांग : निजी स्कूलों के शिक्षक जल्द हों पूर्णकालिक, विरोध के हक छीनने को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला। 




Thursday, May 23, 2019

प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में नहीं लागू हो सकता वेतन आयोग - हाईकोर्ट


प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में नहीं लागू हो सकता वेतन आयोग - हाईकोर्ट। 


Friday, April 26, 2019

शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के 45, 872 बच्चों को मिला इस वर्ष निजी स्कूलों में प्रवेश का मौका


शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के 45, 872 बच्चों को मिला इस वर्ष निजी स्कूलों में प्रवेश का मौका


Thursday, April 25, 2019

फतेहपुर : माफिया के आगे नतमस्तक शिक्षा विभाग, नियम कायदों को ताक पर रखकर दी जा रही स्कूलों को मान्यता, शिक्षा को बना दिया गया व्यवसाय

फतेहपुर : माफिया के आगे नतमस्तक शिक्षा विभाग, नियम कायदों को ताक पर रखकर दी जा रही स्कूलों को मान्यता, शिक्षा को बना दिया गया व्यवसाय।






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Thursday, March 28, 2019

प्राइवेट स्कूल : स्कूलों में बिक रहीं किताबें, टीचरों को बना दिया 'सेल्समैन'




बच्चे के भविष्य पर कोई बात न आए, यह सोचकर अक्सर अभिभावक स्कूलों के फरमान के आगे झुक जाते हैं। ऐसे में उनका सहारा मजबूत सरकारी तंत्र ही बन सकता है। शिकायत मिलने का इंतजार करने की जगह अधिकारियों को मजबूत निगरानी तंत्र बनाना चाहिए, तभी अभिभावकों को राहत मिल सकेगी।
चार कमरों में सजी दुकान


ला-मार्टिनियर बॉयज में भी अभिभावक क्लास 6, 7 और 8 की किताबें पेमेंट देकर स्कूल से खरीद सकते हैं। स्कूल की बुक लिस्ट 2019-20 में बाकायदा ‘बुक शैल बी अवेलेबल फ्रॉम द कॉलेज ऑन पेमेंट’ का ऑप्शन है।

नहीं दिया कोई जवाब: स्कूल के स्तर पर किताबों की बिक्री के मामले में लामार्टिनियर बॉयज स्कूल का पक्ष जानने के लिए कई बार कोशिश की गई। बार-बार कॉल और मेसेज किया गया, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
असोसिएशन से जुड़े सभी स्कूलों ने फीस में नियमानुसार 9.23% ही बढ़ोतरी की है। किसी स्कूल में परिसर में कॉपी-किताबें बेची जा रही हैं तो इस पर बात की जाएगी और इसे रोका जाएगा।

-अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष,

अनऐडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन

अधिनियम के अनुसार, कोई निजी स्कूल परिसर में कोई व्यावसायिक काम नहीं कर सकता। स्कूल परिसर में किताबें बेच रहा है तो नियम विरुद्ध है। अभिभावक जिला विद्यालय निरीक्षक ऑफिस में लिखित शिकायत कर सकते हैं। इसके बाद उचित कार्रवाई होगी।

-डॉ. मुकेश सिंह, डीआईओएस



स्टेशनरी खरीदिए... लेकिन हमारी पसंद से


कई निजी स्कूलों ने किताबों के साथ स्टेशनरी की लिस्ट भी अपने हिसाब से तय की है। अभिभावकों को कलर बॉक्स, पेंसिल और पेंट ब्रश और फेविकोल तक तय ब्रैंड का खरीदना पड़ रहा है। लामार्टिनियर बॉयज स्कूल में नर्सरी क्लास की बुक लिस्ट 2019-20 में अनडस्ट चॉक, रंगीन चॉक, प्लास्टिक क्रियॉन्स, वॉटर कलर, शेड पेंसिल और ब्रश तक का ब्रैंड लिखा है। इसी तरह सेंट फ्रांसिस स्कूल ने नर्सरी क्लास के लिए 6 पेंसिल और 6 इरेजर पहले से ही निर्धारित कर दी हैं।
एलडीए कॉलोनी सेक्टर-आई स्थित एलपीएस में कमरों में किताबों की बिक्री हो रही है। इन कमरों के बाहर बाकायदा किताबों की रेट लिस्ट भी चस्पा है।
अभिभावकों को तय दुकान से खरीदनी पड़ रहीं खास ब्रैंड की स्टेशनरी


सीबीएसई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें

सीबीएसई बोर्ड से जुड़े स्कूल सिलेबस में एनसीईआरटी की किताबें ही शामिल कर सकते हैं, लेकिन निजी स्कूल कमिशन के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें चलवा रहे हैं। इंदिरानगर निवासी एक अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा दिल्ली पब्लिक स्कूल में छठी में पढ़ता है। उनसे निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को कहा गया है, जिनकी कीमत करीब 5 हजार रुपये है, जबकि निशातगंज स्थित बुक स्टोर के मालिक नावेद के मुताबिक, एनसीईआरटी का सेट 500 रुपये में मिल जाता है।

30% तक कमाते हैं कमिशन

निजी प्रकाशक अपनी किताबें लागू करवाने के लिए स्कूलों को कमिशन देते हैं। स्कूल भी दुकानदारों से कमिशन वसूलते हैं। इस तरह स्कूलों को 10 से 30 फीसदी तक कमिशन मिलता है। स्कूल अभिभावकों को लिस्ट थमा कर मौखिक तौर पर बता देते हैं कि किस दुकान से किताबें खरीदनी हैं। सेंट फिडेलिस सहित कई स्कूलों ने वेबसाइट पर दुकानों का नाम अपलोड कर रखा है। तय दुकान से किताबें लेने पर अभिभावकों को कोई छूट नहीं मिलती, जबकि खुले बाजार में उन्हें 20% तक की छूट आराम से मिल जाती है।

एक ही बार में वसूल रहे हजारों

उप्र स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनिमय) अधिनियम-2018 के मुताबिक, स्कूल 20 हजार से अधिक शुल्क होने पर इसमें 9.23% से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकते। इसके साथ साल में चार शुल्क के अलावा कोई और शुल्क नहीं ले सकते, लेकिन निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा दूसरे मदों में भी वसूली कर रहे हैं। अभिभावक संघ के सदस्य राजेश के मुताबिक, गोमतीनगर कॉन्वेंट स्कूल हर साल अनुअल फीस लेता है। वहीं, लॉरेटो कॉन्वेंट कई मदों में पैसे वसूलता है, लेकिन इस बार स्कूल की वेबसाइट पर साल 2019-20 की फीस का ब्योरा अपलोड नहीं किया गया है।

•सैयद सना, लखनऊ: अभिभावकों का शोषण रोकने के लिए सरकार ने नियम बनाए, लेकिन निजी स्कूल मानने को तैयार नहीं हैं। कुछ स्कूलों ने परिसर में ही किताबों की दुकान सजा ली है और किताब बेचने के लिए टीचरों की ड्यूटी लगा दी है। वहीं, कुछ स्कूल तय दुकानों से खास ब्रैंड की ही किताबें और स्टेशनरी खरीदने को बाध्य कर रहे हैं। जरूरत हो या न हो... पेंसिल, कलर, फेविकोल सहित हर सामान तय दुकान से ही खरीदनी होगा।


एलडीए कॉलोनी सेक्टर-आई स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में घुसते ही चार कमरों में किताब की दुकानें खुली हैं। यहां किताबें बेचने के लिए टीचरों की ड्यूटी लगाई गई है। इन कमरों तक पहुंचने में अभिभावकों को परेशानी न हो, इसके लिए जगह-जगह आगे जाने का रास्ता दिखाने वाले पेपर चस्पा हैं। बाहर के किसी व्यक्ति को भनक न लगे, इसके लिए गार्ड और आया को भी इस काम में लगाया गया है।

दुकान को बताया कैम्प: स्कूल में ही किताबों की बिक्री के बारे में पूछने पर प्रबंधक लोकेश सिंह ने दलील दी कि स्कूल की ब्रांचों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें दी जा रही हैं। अभिभावकों के अनुरोध पर तीन दिन के लिए कैम्प लगाया है। हम किसी तरह की स्टेशनरी नहीं बेच रहे और न ही अभिभावकों को किसी दुकान से किताबें लेने के लिए कह रहे हैं।

Friday, March 15, 2019

कक्षा-6 से परास्नातक तक की शिक्षा देने वाले प्राइवेट संस्थानों को उनके कार्य प्रकृति के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना संविधान के अनुच्छेद-226 की न्यायिक पुनरावलोकन शक्तियों के अधीन, प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ भी याचिका संभव 


•एनबीटी ब्यूरो, प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कक्षा-6 से परास्नातक तक की शिक्षा देने वाले प्राइवेट संस्थानों को उनके कार्य प्रकृति के कारण संविधान के अनुच्छेद-226 की न्यायिक पुनरावलोकन शक्तियों के अधीन माना है। कोर्ट ने कहा है कि अनुच्छेद-12 के तहत प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हो सकती है। यह फैसला तीन सदस्यीय पूर्णपीठ ने दिया है। अब तक प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों के खिलाफ याचिका पोषणीय नहीं मानी जाती थी।

Saturday, December 29, 2018

हरदोई : कक्षा 8 तक के प्राइमरी स्तर के हिंदी/अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की अस्थाई मान्यता संबंधी बिंदुवार निर्देश जारी, देखें

हरदोई : कक्षा 8 तक के प्राइमरी स्तर के हिंदी/अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों की अस्थाई मान्यता संबंधी बिंदुवार निर्देश जारी, देखें।

Monday, December 17, 2018

नए फीस अध्यादेश में 9 से 9.5 फीसदी फीस बढ़ाने का ही प्रावधान, अनऐडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन की बैठक में लिया गया निर्णय, 7 फीसदी फीस बढ़ाएंगे कई प्राइवेट स्कूल 


• एनबीटी सं, लखनऊ : नए सत्र में प्राइवेट स्कूल सात फीसदी फीस बढ़ाएंगे। यह निर्णय अनएडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन की बैठक में रविवार को लिया गया। असोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि नया फीस अध्यादेश 2019 से लागू होना है। इसमें प्राइवेट स्कूलों को 9 से 9.5 फीसदी फीस बढ़ाने की छूट दी गई है। हालांकि इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल महज सात फीसदी फीस ही बढ़ाने जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि इस अध्यादेश में स्कूलों को छूट दी गई है कि वह नए छात्रों की फीस में इजाफा कर सकते हैं। लेकिन प्राइवेट कॉलेज ऐसा कुछ करने नहीं जा रहे हैं। क्योंकि इससे फीस में एकरूपता खत्म हो जाएगी। 

असोसिएशन खुद डीएम को इस पर कार्रवाई के लिए लिखेगा। इसके अलावा असोसिएशन ने कोड ऑफ एथिकल कंडक्ट भी बनाने पर सहमति जताई है। इसके तहत हर स्कूल में अभिभावकों के लिए एक ग्रीवांस सेल बनाई जाएगी। साथ ही एक फोन नंबर या ई-मेल आईडी जैसी व्यवस्था बनाने की भी तैयारी की जा रही है। इस पर अभिभावक अपनी शिकायतों को दर्ज कर सकेंगे।

Wednesday, August 29, 2018

श्रावस्ती : मान्टेसरी विद्यालय: नाम अंग्रेजी माध्यम, शिक्षा दी जाती हिंदी मीडियम

श्रावस्ती : मान्टेसरी विद्यालय: नाम अंग्रेजी माध्यम, शिक्षा दी जाती हिंदी मीडियम।

Tuesday, August 14, 2018

एल्बेंडाजॉल की राह में रोड़ा : निजी स्कूलों की मनमानी से छूटे सवा करोड़ बच्चे

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : स्वास्थ्य विभाग ने तो स्कूल न जाने वाले बच्चों की भी परवाह करते हुए उन्हें पेट के कीड़े मारने वाली दवा खिलाने के लक्ष्य में शामिल किया था, लेकिन निजी स्कूलों ने इसे लेकर न तो अपने विद्यार्थियों की सेहत की चिंता की और न ही सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम का लिहाज किया। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश में लगभग सवा करोड़ बच्चे कीड़े मारने की दवा खाने से वंचित रह गए।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ.हरिओम दीक्षित ने बताया कि यू-डाइस संस्था द्वारा किए गए स्कूलों के सर्वेक्षण के आधार पर छह से 19 साल तक के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों में से करीब 80 फीसद को कीड़े मारने की दवा खिलाने के लक्ष्य में शामिल किया गया था। इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में जाने वाले एक से पांच साल तक के 80 फीसद बच्चों के साथ स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्रों में न जाने वाले बच्चों को भी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर शामिल करते हुए कुल 7.09 करोड़ बच्चों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। चूंकि अगस्त 2016 में लक्ष्य के सापेक्ष 63.73 फीसद और फरवरी 2017 में 84.49 फीसद बच्चों को कीड़े मारने की दवा खिलाई गई थी, इसलिए इस बार इससे आगे जाने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन निजी स्कूलों के असहयोग ने स्वास्थ्य विभाग को करीब 83 फीसद पर ही रोक दिया।

निजी स्कूलों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव ने भी बच्चों को सेहतमंद रखने वाली एल्बेंडाजॉल की राह में रोड़ा अटकाया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का अनुभव बताता है कि कई जगह जहां ग्रामीणों को दवा पर विश्वास नहीं है तो कई जगह लापरवाही के कारण बच्चे इससे वंचित हो रहे है। डॉ. दीक्षित ने बताया कि छूटे बच्चों को 17 अगस्त के मॉपअप राउंड में शामिल करने के लिए सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है।

लखनऊ : राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस पर निजी स्कूलों ने नहीं किया आदेश का पालन, बच्चों को कृमिनाशक न देने पर नौ स्कूलों को नोटिस


जागरण संवाददाता, लखनऊ: राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस पर गत 10 अगस्त को सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले नौ निजी स्कूलों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों ने अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को कृमिनाशक अल्बेंडाजोल की खुराक नहीं दी थी। 1सोमवार को इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में गहन चर्चा हुई। बैठक में बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक भी मौजूद रहे। सीएमओ की ओर से इन्हें निर्देश दिया गया कि वह निजी स्कूलों से समन्वय स्थापित कर आगामी 17 अगस्त को दूसरे राउंड में छूटे हुए सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से अल्बेंडाजोल की खुराक दिलवाएं। ताकि राष्ट्रीय अभियान का लक्ष्य अधूरा न रहे। 1समीक्षा बैठक के दौरान कार्यक्रम से संबंधित समस्त सुपरवाइजरों, आशाओं व अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी छूटे बच्चों (पंजीकृत व गैरपंजीकृत) को हर हाल में अल्बेंडाजोल की गोली खिलाने के लिए निर्देशित किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक से भी विशेष अनुरोध किया गया है कि वह सभी बोर्ड से जुड़े स्कूलों में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उचित कार्रवाई करें। इनको दिया गया नोटिस मिलेनियम पब्लिक स्कूल’ किड्जी स्कूल1’ टेंडर हार्ट स्कूल सेंट्रल एकेडमी’ सेंट क्लेयर कॉन्वेंट स्कूल1’ बेबी मार्टिन इंटरनेशनल स्कूल1’ लखनऊ पब्लिक इंटर कालेज1’ सेंट फ्रांसिस स्कूल, गोमतीनगर विस्तार1’ गुरुकुल एकेडमी, इंदिरानगर।’>>मुख्य चिकित्साधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया फैसला1

Wednesday, August 8, 2018

अध्यादेश की जगह अब लाया जाएगा विधेयक, निजी स्कूलों के फीस नियंत्रण पर मानसून सत्र में कानून

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में संचालित निजी स्कूलों द्वारा छात्रों से वसूल किये जा रहे मनमाने शुल्क पर नियंत्रण के लिए सरकार मानसून सत्र में कानून बनाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश, 2018 की जगह अब उप्र स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक-2018 को विधान मंडल के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि प्रदेश के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ कराने के लिए निजी स्कूलों द्वारा मनमाने शुल्क पर अंकुश लगाने को अध्यादेश लागू किया गया है। यह शैक्षिक सत्र 2018-19 से लागू है। अध्यादेश की जगह अब विधेयक लाया जाएगा।

इस विधेयक में जन सामान्य की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडल स्तर पर बनाई गई समिति के स्थान पर शुल्क को विनियमित करने के लिए हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति का गठन किया जा रहा है। जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में गठित की जाने वाली समिति को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अधीन दीवानी न्यायालय और अपीलीय न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी। इस समिति के सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। प्रस्तावित निर्णय से छात्र, छात्रओं एवं उनके अभिभावकों पर निजी विद्यालयों द्वारा डाले जा रहे वित्तीय अधिभार से मुक्ति मिलेगी। प्रस्तावित निर्णय के अन्तर्गत कोई शुल्क नहीं लगा है। शासन को कोई राजस्व नहीं प्राप्त होगा और सभी कार्यवाही जनहित में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए की जा रही है।

सरकारी भवनों से आसानी से बेदखल होंगे अवैध कब्जाधारीराब्यू, लखनऊ : राज्य संपत्ति विभाग के भवनों पर अवैध रूप से काबिज संस्थाओं, राजनीतिक दल, कर्मचारी व अन्य संगठन, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, पत्रकार, अधिकारी और एनजीओ जैसे सभी आवंटियों को आसानी से बेदखल किया जा सकेगा। मंगलवार को कैबिनेट द्वारा उप्र सार्वजनिक भू-गृहादि (कतिपय अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) नियमावली-2018 को मंजूरी देने से राज्य संपत्ति विभाग की मुश्किलें कम होंगी।115 दिन के नोटिस पर पुलिसिया कार्रवाई होगी : आवंटन निरस्त होने के बाद राज्य संपत्ति विभाग को अधिकार होगा कि आवंटी को भवन खाली करने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी करें। इस अवधि में भवन खाली नहीं होता है तो मजिस्टेट व पुलिस बल को साथ लेकर खाली कराने की कार्रवाई की जा सकेगी।

Tuesday, August 7, 2018

निजी स्कूलों के लिए लाए गए अध्यादेश का नहीं हो रहा दुरुपयोग, इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया भरोसा

लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में राज्य सरकार द्वारा निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए लाये गये अध्यादेश को चुनौती देने के मामले में सरकार ने स्पष्ट किया है कि अध्यादेश का कत्तई दुरुपयोग नहीं किया जा रहा है। किसी निजी शैक्षिक संस्थान पर तभी कार्यवाही की जा रही है जब कोई शिकायत मिल रही है।



यह भी कहा गया कि निजी संस्थानों से फीस, छात्रों एवं शिक्षकों सहित अन्य जो भी ब्यौरा मांगा जा रहा हैं वह नियमों के तहत ही किया जा रहा है। वहीं बागपत में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एक निजी संस्थान को परेशान किये जाने पर सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि वह इस मामले में उचित संज्ञान लेंगे। इस मामले की अगली सुनवायी आठ अगस्त को होगी।


दरअसल जस्टिस डीके अरोरा एवं जस्टिस रजनीश कुमार की बेंच इस मामले की सुनवायी कर रही है। सेंट टेरेसा डे स्कूल एवं अन्य चार संस्थानों की ओर से अलग अलग याचिकायें दाखिल की गयीं है।

Wednesday, July 11, 2018

अत्याचार : फीस नहीं देने पर 16 बच्चियों को छह घंटे तक बेसमेंट में बंधक बनाया, शिकायत पर मामला दर्ज

नई दिल्ली : राजधानी में राबिया प्राथमिक स्कूल में फीस जमा नहीं कराने पर प्राथमिक विद्यालय की 16 बच्चियों को छह घंटे तक बेसमेंट में बंधक बनाने का मामला सामने आया है। छुट्टी के वक्त अभिभावक बच्चियों को लेने स्कूल गए तो पता चला कि बच्चों को बेसमेंट में बंद कर दिया गया है। इसके बाद अभिभावक हंगामा करने लगे। हौज काजी थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आइपीसी की धारा-342 यानी बंधक बनाने व जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।



अभिभावकों ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि सोमवार सुबह सात बजे उन्होंने बच्चियों को स्कूल भेजा था। छुट्टी के समय दोपहर 12.30 बजे जब वह बच्चियों को लेने गए तो स्कूल के एक कर्मचारी ने बताया कि फीस जमा नहीं कराने पर बच्चियों को सुबह से ही स्कूल की बेसमेंट में बैठाकर दरवाजे पर ताला लगा दिया गया है। इसके बाद परिजनों ने अंदर घुसकर बेसमेंट से दोपहर एक बजे बच्चियों को बाहर निकाला। छह घंटे तक बेसमेंट में बंद रहने से गर्मी के कारण बच्चियों की हालत खराब हो गई थी। पुलिस ने राबिया स्कूल के खिलाफ एफआइआर तो दर्ज कर ली है पर प्रिंसिपल को नामजद नहीं किया है।



■ फीस जमा न करने पर छात्र को घर भेजने का आरोप

नोएडा : सेक्टर-25 स्थित सनराइज विले स्कूल में एक बच्चे की फीस जमा न होने पर उसे घर भेजकर फीस लाने को कहा गया। ऑल नोएडा स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन (एएनएसपीए) का आरोप है कि बच्चे को दोपहर में 6-7 किलोमीटर दूर घर भेजा गया। वहीं, स्कूल की ¨प्रसिपल रजनी जैन का कहना है कि ऐसी कोई घटना हमारे स्कूल में नहीं हुई। आरोप सरासर गलत हैं।


Friday, July 6, 2018

31 जिलों में बीएसए गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही करने से रहें हैं कतरा, शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से फीस सार्वजनिक करने वाले स्कूलों का ब्योरा किया तलब 


राज्य ब्यूरो, लखनऊ : शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से प्रदेश के उन स्कूलों का ब्योरा तलब किया है जिन्होंने चालू शैक्षिक सत्र में वसूली जाने वाली फीस का विवरण विद्यालय के सूचनापट पर प्रदर्शित करने के साथ उसे वेबसाइट पर भी अपलोड किया हो। यह ब्योरा 15 जुलाई तक भेजने का निर्देश दिया गया है। यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है जिन स्कूलों ने यह सूचना सार्वजनिक नहीं की है, वे ऐसा करें।


निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार उप्र स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश, 2018 को बीती नौ अप्रैल को प्रदेश में लागू कर चुकी है। अध्यादेश में यह प्रावधान है कि प्रदेश के सभी विद्यालय प्रत्येक शैक्षिक सत्र में प्रवेश प्रारंभ होने के 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर शुल्क का विवरण अपलोड करेंगे और सूचनापट पर प्रकाशित भी करेंगे। वहीं चालू शैक्षिक सत्र (2018-19) में स्कूलों को यह विवरण अध्यादेश लागू होने के 30 दिन के अंदर वेबसाइट पर अपलोड और सूचनापट पर प्रकाशित करने की व्यवस्था है। 



चालू सत्र में बंद कराये 1658 गैर मान्यताप्राप्त स्कूल


राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश में गैर मान्यताप्राप्त विद्यालयों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत वर्ष 2018-19 में 2542 मान्यताविहीन स्कूलों को नोटिस जारी की गई है। इनमें से 44 जिलों में 1658 स्कूल बंद कराये गए हैं। वहीं 169 स्कूलों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी गई है। यह बात और है कि 31 जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय को अब तक कोई जानकारी नहीं उपलब्ध करायी है। 

प्रदेश में बड़े पैमाने पर गैर मान्यताप्राप्त विद्यालय संचालित किये जा रहे हैं। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत बिना मान्यता प्राप्त किये कोई भी विद्यालय संचालित नहीं किया जा सकता है।


मान्यताप्राप्त विद्यालयों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत वर्ष 2018-19 में 2542 मान्यताविहीन स्कूलों को नोटिस जारी की गई है। इनमें से 44 जिलों में 1658 स्कूल बंद कराये गए हैं। वहीं 169 स्कूलों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी गई है। यह बात और है कि 31 जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय को अब तक कोई जानकारी नहीं उपलब्ध करायी है।


Thursday, July 5, 2018

स्कूली बच्चों को ढो रहे बिना फिटनेस वाले वाहन, विभागीय अधिकारी और स्कूल संचालक नहीं दे रहे ध्यान

जागरण संवाददाता, मथुरा: साल-दर-साल बढ़ती घटनाओं के बाद भी स्कूली वाहनों के हालात नहीं सुधर रहे। दिखावे के तौर पर इन्हें टिप टॉप करा दिया गया है, लेकिन अंदर से ये जर्जर हाल हैं। सुरक्षा के मानकों को तो खूंटी पर टांग दिया है। अधिकांश बसों और अन्य छोटे वाहनों में खिड़कियों पर जालियां नहीं हैं, मगर जिम्मेदार अधिकारी इस ओर बेपरवाह बने हुए हैं। जिले में शिक्षा के क्षेत्र में जो विद्यालय अपना जलवा रखते हैं, उनके वाहनों में भी सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। रतनलाल फूल कटोरी सरस्वती बालिका विद्यालय की बसों की फिटनेस तो शानदार दिखती है, लेकिन सुरक्षा मानकों में पिछड़ी है। गोवर्धन चौराहे पर इस विद्यालय की एक बस के अंदर देखा तो उसमें फस्र्ट एड का बॉक्स तक नहीं था। भूतेश्वर पर भी श्रीजी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर बालिका विभाग की मिनी बस रंग रोगन से चमक रही थी, लेकिन खिड़की पर जाली तक नहीं थीं। इन बसों के चालकों के खिलाफ एआरटीओ प्रवर्तन मनोज मिश्र द्वारा कार्रवाई भी की गई। वहीं कई स्कूली बसें और अन्य वाहन बिना फिटनेस के बच्चों को लाने और पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जिससे नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है। 1100 से अधिक स्कूली वाहनों की फिटनेस नहीं : सहायक संभागीय कार्यालय मथुरा में 800 स्कूली बस पंजीकृत हैं। इनमें से तकरीबन 100 बसों की फिटनेस अब तक नहीं हुई है। करीब 350 छोटे वाहन भी स्कूली वाहनों के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन इनसे अधिक छोटे और बड़े वाहन बिना पंजीकरण कराए ही बच्चों को लाने और पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। 118 स्कूली वाहनों पर हुई कार्रवाई: एआरटीओ प्रवर्तन द्वारा छटीकरा चौराहा, गोवर्धन चौराहा, भूतेश्वर आदि क्षेत्र में चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान 18 स्कूली बसों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान 11 बसें सीज हुईं। तीन के खिलाफ ओवरलो¨डग और दो चालकों पर ड्राइ¨वग लाइसेंस न होने पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा दो अन्य बसों पर कार्रवाई की गई। स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इन बसों के मानक पूरे नहीं हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है।