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Saturday, September 19, 2020

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी



Right to Education दाखिला न देने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी की सूची। बीएसए बोले नोटिस के बाद भी दाखिला न लेने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई। ...


लखनऊ । तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीते वर्षो की तरह इस बार भी तमाम निजी स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का दाखिला लेने में आनाकानी शुरू कर दी है। अभी तक दाखिला न लेने वाले करीब 21 स्कूलों को चिन्हित कर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नोटिस जारी की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉक्टर दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर लिया गया है अगर वह दाखिला नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ सख्ती से पेश आया जाएगा।बहरहाल अब यह देखना है कि विभाग इन स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिला पाता है या नहीं?


 इन स्कूलों को जारी हुई नोटिस
एग्जान मोंटेसरी स्कूल कैंपवेल रोड,एविज कान्वेंट स्कूल गढ़ी पीर खां, बीएसडी एकेडमी बरौरा, सेंट्रल अकैडमी सेक्टर 4 विकास नगर, टाउन हॉल पब्लिक स्कूल ठाकुरगंज, लखनऊ पब्लिक स्कूल राजाजीपुरम, सिटी इंटरनेशनल स्कूल ठाकुरगंज, न्यू पब्लिक स्कूल देवपुर पारा, राजकुमार एकेडमी मेहंदीगंज, ग्रीनलैंड स्कूल गोमती नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल जानकीपुरम विस्तार, संस्कार पब्लिक स्कूल इंदिरा नगर, टिनी टॉय स्कूल अलीगंज, टाउन हॉल स्कूल सेक्टर के अलीगंज, कैरियर कान्वेंट स्कूल सेक्टर 5 विकास नगर।

Wednesday, September 2, 2020

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे। 


यूपी में लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छोटे स्कूल तो छोड़ दें शहर के कई नामचीन स्कूल तक इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा  प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।


राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न होने का कारण बताकर शिक्षकों की छंटनी शुरू कर दी है। कई छोटे स्कूलों ने तो अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया है। अब बड़े और नामचीन स्कूलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।


गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।


प्री-प्राइमरी और प्राइमरी में हाल ज्यादा खराब
राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है। इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। कई बंद भी हो चुके हैं। जो स्कूल ऑनलाइन क्लासेज चला भी रहे हैं वहां, बच्चों की संख्या कम होने के कारण वेतन तक कम कर दिया गया है।


अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।

Sunday, August 30, 2020

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

Saturday, August 8, 2020

ऑनलाइन क्लास व्यवस्था को को निजी स्कूलों के बच्चों की हरी झंडी

ऑनलाइन क्लास व्यवस्था को को निजी स्कूलों के बच्चों की हरी झंडी 

 
लखनऊ : कोरोना काल में चल रही ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था का माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सर्वे कराया। इसमें राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आइसीएसई से संचालित निजी विद्यालयों के कक्षा नौ से 12 तक के करीब 70 हजार विद्यार्थियों ने पहले फेस में प्रतिभाग किया। इनमें 90 फीसद बच्चों ने इस व्यवस्था को हरी झंडी दे दी। यह जानकारी डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने दी।


बच्चों ने दिए ये सुझाव

शिक्षकों को नॉर्मल बोर्ड के स्थान पर स्मार्ट बोर्ड का प्रयोग करना चाहिए, नेटवर्क की समस्या दूर की जाए, भौतिक विज्ञान और गणित के कांसेप्ट स्लाइड द्वारा प्रदर्शित किए जाए, साप्ताहिक टेस्ट लिया जाए, सरकार वाईफाई की व्यवस्था मुफ्त करे, बच्चों को इंग्लिश के साथ हंिदूी में भी समझाया जाए, वीडियो कांफ्रेंसिंग की जानी चाहिए, कक्षाओं में महामारी का एक टॉपिक होना चाहिए, क्लास का समय 11 से दोपहर एक बजे तक रखा जाए।

सर्वे में 70 हजार विद्यार्थी हुए शामिल : राजधानी में यूपी बोर्ड से संचालित विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक करीब दो लाख विद्यार्थी हैं। वहीं, आइसीएसई और सीबीएसई से संचालित विद्यालयों में करीब एक लाख है। सर्वे के मुताबिक, 81 फीसद विद्यार्थी टीवी के माध्यम से संचालित कक्षाओं से पढ़ाई कर रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी बोर्ड से संचालित राजकीय, एडेड और कुछ निजी विद्यालयों के विद्यार्थी हैं। जबकि, सर्वे में जो 70 हजार विद्यार्थी शामिल हुए हैं, वे अधिकतर निजी विद्यालयों के हैं।

Friday, August 7, 2020

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

 
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों का नाम न काटने के शासनादेश को चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी की मांग पर निर्देश दिया कि 12 अगस्त को अगली सुनवाई पर किसी जिम्मेदार अफसर को रिकॉर्ड के साथ मदद के लिए पेश कराएं अन्यथा अदालत मामले की करेगी और अंतरिम राहत देने के अनुरोध पर गौर करेगी। 


न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल करुणेश सिंह पवार को खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से अतुल कुमार और एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक याचिका में यूपी सरकार के जुलाई के शासनादेश को रद्द करने की भी गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों के नाम न काटे स्कूलों

Saturday, August 1, 2020

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

 

लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है।


शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे।


इन मदो में दी गई राहत : ’ फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ’ पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ’ स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।


ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी।

Friday, July 10, 2020

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब
   
याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग कोर्ट से की गई थी.


नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस (School Fees) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग होती है. याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है. 


बताते चलें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.  


अभिभावकों ने अपनी याचिका में फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए जैसी मांग भी कोर्ट से की थी. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लाॉकडाउन जारी है. ऐसे में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अनलॉक 2 की घोषणा करते हुए जारी बंदिशों में कुछ छूट दी है. लेकिन अभी-भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना ने तांडव मचा रखा है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को वापस लॉकडाउन की घोषणा की है.

Sunday, July 5, 2020

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल, शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे

छह जुलाई से सभी माध्यमिक शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे, 

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल


प्रदेश सरकार ने दिया निर्देश स्कूलों की फीस जमा कराएं अभिभावक, एकमुश्त देने में असमर्थ तो किश्तों में दे सकेंगे फीस


फीस न जमा होने पर न काटें बच्चे का नाम, ऑनलाइन क्लास से भी न रोका जाए।


इस दौरान एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, एक समय में ज्यादा अभिभावकों को नहीं बुलाया जाएगा





कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन से बंद चल रहे माध्यमिक विद्यालयों को शासन द्वारा छह जुलाई से खोलने का निर्णय लिया है। यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व संस्कृत बोर्ड सहित सभी बोर्डो से संबंधित विद्यालय सोमवार से खुल जाएंगे और शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इन विद्यालयों में पहुंचेगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्र छात्राओं के एडमीशन भी किए जाएंगे। हालांकि छात्र छात्राएं अभी विद्यालय नहीं आएंगे उनकी छुट्टी रहेगी। सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया होगी। अभी तक माध्यमिक विद्यालय बन्द चल रहे थे। सोमवार से माध्यमिक विद्यालय खुल जाएंगे और सभी विद्यालयों में शिक्षक भी पहुचेंगे। 


ऑनलाइन कक्षाएं नियमित

दिशा निर्देशों में बताया गया है कि छह जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। 10 जुलाई से नियमित ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाए। सभी कक्षा अध्यापक एवं विषय अध्यापक विद्यालय में ही रह कर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करेंगे। जिसकी मानिटरिंग जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से की जाएगी।


लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जो अभिभावक कोरोना संकट के कारण एकमुश्त फीस जमा कराने में असमर्थ हैं, वे स्कूल प्रबंधन के समक्ष किस्तों में फीस जमा कराने का प्रार्थना पत्र दें। विद्यालय प्रबंधन उस पर गंभीरता से विचार करेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करानी होगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा और न ही स्कूल से उसका नाम काटा जाएगा। फीस को लेकर अगर अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 


गौरतलब है कि वित्तविहीन विद्यालयों के संगठनों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि अभिभावक सरकार के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए फीस जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि राज्य व केंद्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक या बड़े संस्थान के कर्मचारी व अधिकारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के आदेश पर वित्तविहीन विद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों नियमित वेतन देना पड़ रहा है।

Wednesday, July 1, 2020

निजी स्कूलों के शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम

निजी स्कूलों के  शिक्षक-कर्मियों के वेतन में 50 फीसद कटौती, फीस न आने से उपजे हालात, आधे वेतन पर करना होगा काम


लॉकडाउन से उपजे हालात का असर निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पड़ेगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने शिक्षक कर्मचारियों के वेतन में 50 प्रतिशत कटौती के फरमान जारी किए हैं।


इसके पीछे बच्चों की फीस न जमा होने को कारण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि पहली जुलाई से राजधानी के निजी स्कूल सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए ही खोले जाएंगे। वेतन आधा किये जाने और संक्रमण खतरे के बावजूद स्कूल बुलाए जाने के विरोध की आहट भी सुनाई देने लगी है। कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च के बाद से स्कूल बंद चल रहे हैं। शिक्षक अपने अपने घरों से ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहे थे।


एक जुलाई से शिक्षकों को बुलाया गया है। कोरोना से निपटने के लिए सभी जरूरी एहतियात अपनाए जाएंगे। -अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

Monday, June 29, 2020

प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


लखनऊ: आमतौर पर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। पर इस बार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन प्राइवेट से बेहतर रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 72.45 प्रतिशत बच्चे पास हुए, जबकि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 83.70 रहा। यानी, प्राइवेट स्कूलों से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा।


शनिवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। इंटरमीडिएट में परीक्षा देने वालों में से 74.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इनमें बालकों के पास होने का प्रतिशत 68.88 रहा, जबकि बालिकाओं का 81.96। वहीं, ये विद्यार्थी किस तरह के विद्यालयों में पढ़ते थे, इस नजरिये से देखें तो शासकीय (सरकारी) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बेहतर रहा। 


यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ऐडेड माध्यमिक स्कूलों का भी परफॉर्मेंस पास होने के मानकों पर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा रहा। प्रदेश में 785 शासकीय विद्यालय हैं, जिनमें से 84,523 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 70,744 विद्यार्थी पास हुए। इस तरह से यहां पर पास प्रतिशत 83.70 रहा। वहीं, 4077 ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में 7,43,604 विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। इनमें से 5,82,433 पास हुए। यानी, पास प्रतिशत 78.33 रहा। वहीं, प्रदेश में चल रहे 12,482 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 15,92,903 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11,54,009 पास हुए। यानी, 72.45 प्रतिशत।


यही नहीं, प्रदेश में 111 प्राइवेट स्कूल ऐसे रहे, जिनमें पास होने का प्रतिशत 20 से भी कम रहा। जबकि केवल सात ही सरकारी स्कूल थे, जिनमें पास होने वालों का प्रतिशत 20 से कम रहा और ऐसे ही ऐडेड स्कूलों की संख्या 18 रही।


हाईस्कूल में प्राइवेट का परफॉर्मेंस तीन प्रतिशत ज्यादा
इंटरमीडिएट में जहां निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकले, वहीं हाईस्कूल की परीक्षाओं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत सरकारी की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा रहा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से 82.08% विद्यार्थी पास हुए, जबकि प्राइवेट स्कूलों के 85.11% विद्यार्थी परीक्षा पास कर सके। ऐडेड स्कूलों का परफॉर्मेंस 79.77 प्रतिशत रहा।


नकल के लिए बदनाम जिलों की हालत रही पतली
नकल के लिए बदनाम रहे जिलों की हालत भी इस साल कुछ पतली ही रही। परिणाम में उनका वह दबदबा नहीं रहा, जैसा की बीते वर्षों में दिखता रहा है। जैसे अलीगढ़ की स्थिति इस कदर खराब हुई कि इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उसका स्थान 75वें पर है। यहां केवल 56.39 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके। हरदोई भी नकल के लिए खासा बदनाम रहा है, लेकिन इस साल परिणाम के तौर पर यह प्रदेश के जिलों में 43वें स्थान पर रहा है। बाराबंकी का स्थान 49वां, रायबरेली का 50वां और गोंडा का 52वां नंबर रहा है। देवरिया में केवल 61.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि बलिया में पास प्रतिशत 57.57 रहा।

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

Saturday, June 27, 2020

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Saturday, June 20, 2020

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव


लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालय जुलाई से स्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग पर दबाव बना रहे हैं। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े संगठनों ने विभाग को अलग-अलग चरणों में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी दिया है। 


इस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने सभी जिला माध्यमिक विभाग विद्यालय निरीक्षकों से स्कूल डीआई खोलने पर सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं। कांग्रेस प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते 15 मार्च से सभी स्कूल बंद हैं। सरकार ने वित्तविहीन विद्यालयों को लॉकडाउन की अवधि में एक मुश्त फीस की वसूली नहीं करने, फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी का नाम नहीं काटने और फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिक्षकों को भी पूरा वेतन देने के निर्देश दिए हैं।


माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी का कहना है कि वित्तविहीन विद्यालयों में फीस नहीं मिलने से चार महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जुलाई में स्कूल खोलने के लिए सरकार से आग्रह किया है ताकि कक्षा 6 से 9 और 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम तैयार किया जा सके। उन्होंने कक्षा 9 से 11 की कक्षाएं भी संचालित करने के लिए आग्रह किया है। 


वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण काल मे स्कूलों को खोलने के लिए विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखूरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी स्कूलों को खोलने के लिए शिक्षक संघों, जिला विद्यालय निरीक्षकों सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रस्ताव और सुझाव के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी।

प्राइवेट स्कूलों में लागू होगा एक टेबल, एक छात्र का नियम, जुलाई अंत से स्कूल खोलने का प्रस्ताव


प्राइवेट स्कूलों में लागू होगा एक टेबल, एक छात्र का नियम, जुलाई अंत से स्कूल खोलने का प्रस्ताव। 


लखनऊ। मार्च मध्य से स्कूल बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान तो हो ही रहा है, वहीं निजी स्कूलों को अभिभावकों से फीस जमा कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में शासन से जुलाई के अंत से स्कूल खोलने का आग्रह किया है। कोरोना को देखते हुए इन्होंने सुरक्षा इंतजामों का भी प्रस्ताव शासन को भेजा है। कक्षाओं में छात्रों के बीच पर्याप्त दूरी बनी रहे, इसके लिए एक टेबल, एक छात्र का नियम लागू होगा।


 अनऐडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने स्कूल खोलने पर कैसे कक्षाएं चलाई जाएंगी, क्या नियम लागू होंगे, इसे लेकर भी उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को प्रस्ताव भेजा है। संगठन अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्कूलों में एक टेबल, एक छात्र नियम लागू होगा। यह नियम वहां लागू हो सकता है, जहां टेबल छोटी हैं। टेबल पांच फीट लंबी है तो दो छात्र किनारे पर बैठ सकते हैं।


 जिन स्कूलों में सेक्शन ज्यादा है वे 4-4 घंटे की शिफ्ट में खोले जाएं। कक्षाओं को दो भागों में बांट लिया जाए और दोनों को अलग-अलग दिन बुलाया जाए। इस तरह से एक बार में 25 से ज्यादा छात्र नहीं होंगे। स्कूल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई कराए। जिस दिन बच्चे न आएं, उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया जाए। स्कूलों को समय-समय पर सैनिटाइज करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि छात्रों को मास्क और सैनिटाइजर के साथ आना होगा।


 शिक्षक व सभी स्टाफ को भी मास्क पहनना होगा। स्कूल में प्रवेश से पहले सभी की स्क्रीनिंग होगी। विभाग को शासन के निर्देश का इंतजार निजी स्कूलों ने जुलाई के अंत में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा है, वहीं विभाग को शासन की निर्देशों का इंतजार है। 


डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही निर्देश जारी होंगे, नियमों का पालन करते हुए स्कूल खोले जाएंगे। बीएसए दिनेश कुमार ने भी बताया कि स्कूल खोलने को लेकर अभी निर्देश नहीं आए हैं। इस बीच सरकारी स्कूल तैयारी में जुटे हैं। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहेब लाल मिश्रा ने बताया कि टेबल के ऊपर लाल निशान लगा दिया गया है। छात्र इसके सामने ही बैठेंगे। कॉलेज को सैनिटाइज भी करवाया जा रहा है।

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी


 यूपी, लखनऊ : यूपी में कोरोना महामारी के कारण निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी नहीं की गई है । स्कूल पिछले साल की फीस ही लेंगे। इस फैसले को सख्ती से लागू करवाया गया है। निजी स्कूल विद्यार्थियों की फीस माफ करेंगे, ऐसा कोई आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी नहीं किया गया है।



 यदि कोई फीस माफी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार कर रहा है और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह आश्वासन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने मेरठ स्कूल फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल को दिया। 



विधानभवन में स्थित कार्यालय में डिप्टी सीएम से मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने भरोसा दिलाया कि निजी स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी हैं।

Friday, June 19, 2020

संकट : स्कूल खुलने की स्थिति स्पष्ट न होने से बढ़ी दुविधा, बिना फीस टीचरों की सैलरी काटने लगे राजधानी के निजी स्कूल!

संकट : स्कूल खुलने की स्थिति स्पष्ट न होने से बढ़ी दुविधा,  बिना फीस टीचरों की सैलरी काटने लगे राजधानी के निजी स्कूल!

लखनऊ कोरोना से बचाव के लिए स्कूल बंद चल रहे हैं। स्कूल खोलने को लेकर प्रबंधक सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच तीन महीने से स्कूल बंद होने और फीस न मिलने से आर्थिक संकट भी छाने लगा है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब फीस ही नहीं मिलेगी तो शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को वेतन कैसे देंगे। ऐसे में कई स्कूलों ने मई के वेतन में कटौती भी की है। 


60% मिली सैलरी
सेंट फ्रांसिस कॉलेज और सेंट पॉल जैसे मिशनरीज स्कूलों ने टीचिंग स्टाफ की सैलरी में 40 फीसदी कटौती की है। शहर में लखनऊ डायोसिस सोसायटी के तहत चलने वाले स्कूलों में सैलरी में कटौती कर दी गई है। सोसायटी के प्रवक्ता फादर डोनॉल्ड डिसूजा ने बताया कि स्कूलों में मई की सैलरी में कटौती का फैसला लिया गया है। हमने सभी स्कूलों में टीचिंग स्टाफ को 60 फीसदी और फोर्थ क्लास कर्मचारियों को 75 फीसदी सैलरी देने का फैसला लिया है। जुलाई में फीस आने के बाद बाकी बची राशि दी जाएगी। यह फैसला शहर में चल रहे हमारे 20 स्कूलों और बाकी 10 जिलों में चल रहे स्कूलों पर लागू होगा।


 बढ़ेगी दिक्कत
एसकेडी अकैडमी के निदेशक मनीष सिंह का कहना है कि उनके यहां 650 का स्टाफ है। मई की सैलरी तो दे दी गई, लेकिन वर्तमान हालात में जून की सैलरी में दिक्कत हो सकती है। बमुश्किल दस फीसदी अभिभावकों ने बच्चों की फीस जमा की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जुलाई में स्कूल खुलेंगे या नहीं। नए दाखिले भी नहीं हो रहे। खर्चों में की कटौती पायनियर मांटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह के अनुसार स्कूल के दूसरे खर्चों में कटौती करके स्टाफ की सैलरी दी गई है। स्कूलों के लिए सबसे बड़ा रेवेन्यू फीस ही हैं। कई लोग 3 महीने की फीस माफी के लिए सरकार से अपील कर रहे हैं। सरकार को स्कूल, अभिभावक सभी की स्थिति पर विचार करते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए।


सक्षम हैं तो फीस दें
 दिल्ली पब्लिक स्कूल के मीडिया प्रवक्ता अर्चना मिश्रा के अनुसार सामान्य तौर पर फीस से सैलरी निकाली जाती थी। वर्तमान में मैनेजमेंट दे रहा है, लेकिन कब तक। सक्षम अभिभावक भी फीस नहीं दे रहे। स्थितियों को देखते हुए लोगों को फीस देनी चाहिए।

Sunday, March 22, 2020

सकारात्मक पहल : प्राइवेट स्कूलों में कोरोना की वजह से अब ऑनलाइन रिजल्ट

सकारात्मक पहल : प्राइवेट स्कूलों में कोरोना की वजह से अब ऑनलाइन रिजल्ट

Thursday, August 8, 2019

शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश



शिक्षा का मिला अधिकार, मिटा नहीं तिरस्कार, RTE कानून के तहत कान्वेंट और निजी स्कूल नहीं कर रहे प्रवेश। 



Friday, July 26, 2019

यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां


यूपी के 27 निजी विवि के लिए एक समान कानून बनाने का विधेयक विधानसभा से हुआ पास, नहीं हो सकेगीं राष्ट्रद्रोही गतिविधियां। 




Tuesday, July 23, 2019

अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन



अब नहीं चल सकेंगे 10 साल पुराने स्कूली वाहन, परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के लिए जारी की नई गाइडलाइन।