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Saturday, May 1, 2021

स्कूल लगातार छह घंटे तक चला रहे ऑनलाइन क्लास, बीमार हो रहे बच्चे

स्कूल लगातार छह घंटे तक चला रहे ऑनलाइन क्लास, बीमार हो रहे बच्चे


प्रयागराज : कोरोना संक्रमण के बीच शहर के निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक एवं बच्चे परेशान हैं। स्कूल सुबह आठ बजे से दिन में तीन बजे तक ऑनलाइन क्लास चला रहे हैं। ऐसे में लगातार छह घंटे मोबाइल, लैपटॉप पर निगाह लगाए बच्चों की आंख, गर्दन और सिर में दर्द शुरू हो गया है। दिनभर की ऑनलाइन क्लास के फेर में बच्चे ठीक से सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना तक नहीं कर पा रहे हैं। 


अभिभावकों का कहना है कि छह घंटे लगातार पढ़ाई से मोबाइल का दिन भर का डाटा खर्च होने से बच्चों को परेशानी हो रही है। दो ऑनलाइन क्लास के बीच रखें 15 मिनट का अंतरालः अभिभावकों एवं बच्चों का कहना है कि स्कूल वालों को चाहिए कि वह हर क्लास के बीच में 15 मिनट का अंतराल रखें जिससे आंख पर मोबाइल का बुरा प्रभाव न पडे। मनोविज्ञानी डॉ. कमलेश तिवारी का कहना है कि ऑनलाइन क्लास के कारण भी बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनके लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनिसेफ ने इस बारे में चेतावनी जारी की है।


यूनिसेफ ने कहा कि बच्चे जब भी मोबाइल, लैपटॉप आदि का प्रयोग करें, उस दौरान घर का कोई बड़ा उनके साथ हो। ध्यान रहे कि बच्चे लगातार आधे घंटे से अधिक मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर का प्रयोग न करें।


स्कूल कम करें ऑनलाइन क्लास

कोरोना की वजह से सभी निजी स्कूलों की ओर से अप्रैल के पहले सप्ताह से ही ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। मनोविज्ञानियों का कहना है कि कोरोना को लेकर बने माहौल की वजह से पूरा समाज भय के माहौल में है। ऐसे में बच्चों को मानसिक दबाव से बचाने के लिए इस समय ऑनलाइन क्लास कम करना चाहिए। 

देखा यह जा रहा है। कि बच्चे बड़े हों अथवा छोटे, सभी के लिए स्कूलों की ओर से पूरे दिन छह घंटे की ऑनलाइन क्लास चलाई जा रही है। इस दौरान छह घंटे की क्लास में बच्चों को बीच में खेलने, खाने के साथ अपने साथियों से बातचीत करने का मौका मिल जाता था। 

ऑनलाइन क्लास के दौरान तो बच्चों को लगातार मोबाइल पर आंख गड़ाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, ऐसे में बच्चे गर्दन में जकड़न सहित आँख में दर्द और जलन जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इससे अभिभावकों में भय व्याप्त हो गया है।

Friday, April 30, 2021

निजी स्कूलों की मनमानी शिक्षकों पर पड़ रही भारी

निजी स्कूलों की मनमानी शिक्षकों पर पड़ रही भारी


लखनऊ: निजी अस्पताल हों या निजी स्कूल, पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। कोरोना काल में निजी अस्पतालों की हकीकत किसी से छिपी न रह गई, तो वहीं रही-सही कसर निजी स्कूल पूरी कर रहे हैं।


प्रदेश सरकार ने कक्षा आठ तक के सभी परिषदीय, मान्यता व सहायता प्राप्त विद्यालयों में 20 मई तक शिक्षक, अनुदेशक व शिक्षा मित्रों के लिए वर्क फ्रॉम होम के आदेश जारी किए हैं। पहले यह अनुमति 30 अप्रैल तक थी, उसे बढ़ाया गया है। सरकार ने संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय लिया है, मगर निजी स्कूल रोजाना शिक्षकों को बुला रहे हैं। इसके चलते शिक्षक संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।

गंभीर बात यह है कि स्कूलों के इस तानाशाही रवैये की जानकारी प्रशासनिक अमले को भी है, मगर इनकी ऊंची रसूख के चलते कोई भी अधिकारी इन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।


हमारे सभी शिक्षक वर्क फ्रॉम होम पर हैं। सभी घर से ही आनलाइन क्लास ले रहे हैं, किसी शिक्षक को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होगी तब तक किसी को बुलाया भी नहीं जाएगा। -डा. जगदीश गांधी, संस्थापक, सिटी मांटेसरी स्कूल (सीएमएस)


किसी भी शाखा में शिक्षकों को नहीं बुलाया जा रहा है। सभी शिक्षक आनलाइन क्लास ले रहे हैं। फीस जमा करने य अन्य ऑफिस वर्क के लिए एक-दो लोग ही अल्टरनेट डेज में बुलाए जा रहे हैं। -अनिल अग्रवाल, एमडी, सेंट जोसफ ग्रुप ऑफ स्कूल्स

Sunday, April 25, 2021

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक 

अभिभावकों ने कहा, स्कूल ट्यूशन फीस की जगह एनुअल चार्ज जोड़कर वसूल रहे कंपोजिट फीस


प्रयागराज : कोरोना संकट के बीच खुले स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल वाले ऑफलाइन क्लास के - दौर में भी अभिभावकों से एनुअल - चार्ज वसूल रहे हैं। इसमें कंप्यूटर क्लास स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोट्र्स, लैब सहित डेवलपमेंट चार्ज सहित कई दूसरे चार्ज को जोड़कर वसूला जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों ने फीस का ब्रेकअप खत्म करके सीधे वार्षिक एवं तिमाही फीस तय कर दी है। स्कूल वालों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों में जिला विद्यालय निरीक्षक तक अपनी बात | पहुंचाई है लेकिन उनके यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


निजी स्कूलों की ओर से मनमाना फीस वसूली के खिलाफ जब अभिभावकों ने आवाज उठाई तो स्कूलों ने ट्यूशन फीस सहित पूरी फीस को एक में मिलाकर कंपोजिट फीस के नाम वसूलना शुरू कर दिया। बीते शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की ओर से जब ऑनलाइन क्लास के दौर में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे शुल्क वसूलने का विरोध शुरू हुआ तो इससे बचाव के लिए अधिकतर स्कूलों ने एनुअल चार्ज को 'कंपोजिट फीस में शामिल कर दिया मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के साथ ही अभिभावकों पर एनुअल चार्ज भी थोप दिए गए हैं। 


एनुअल चार्ज को कंपोजिट फीस में शामिल करते हुए एक महीने की बजाय तीन महीने की फीस वसूली जा रही है। इस बारे में जब जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अब दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद तीन महीने की जगह एक महीने की फीस वसूले जाने के बारे में आदेश जारी किया जाएगा।



अभिभावकों ने उठाई आवाज, कोरोना संक्रमण काल में बंद हों ऑनलाइन कक्षाएं

प्रयागराज पूरे देश में कोरोना संक्रमण की मार के बीच स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिए गए हैं। अभिभावकों को ऑनलाइन क्लास से बच्चों को जोड़ने के साथ तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से ऑनलाइन क्लास पर रोक लगाने के साथ ही फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।

Saturday, April 24, 2021

लखनऊ : कोरोना के चलते स्कूलबन्दी पर निजी स्कूल प्रबंधकों ने सरकार से आर्थिक पैकेज मांगा

लखनऊ : कोरोना के चलते स्कूलबन्दी पर निजी स्कूल प्रबंधकों ने सरकार से आर्थिक पैकेज मांगा


निजी स्कूल के शिक्षकों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान करें। बीते वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण अभिभावकों ने फीस देने से इनकार कर दिया था। लिहाजा शिक्षकों के सामने वेतन का संकट है।


स्कूल बीच में कुछेक दिनों के लिए खुले जरूर लेकिन नए सत्र की शुरुआत से पहले ही बंद कर दिए गए। शिक्षक संगठनों ने जुलाई से नए सत्र की मांग की है। वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा है कि इन स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षक भुखमरी की कगार पर हैं। 90 फीसदी शिक्षकों को एक साल से वेतन नहीं मिल रहा है। वे घर बैठ गए हैं क्येांकि प्रबंधकों ने नए प्रवेश होने पर ही बुलाने का आश्वासन दिया है। सरकार जुलाई से नया सत्र करे तो इससे लाभ मिल सकता है। 


प्रदेश में 21 हजार से ज्यादा निजी स्कूल हैं जो यूपी बोर्ड से जुड़े हैं। बीते वर्ष नया सत्र शुरू होने से पहले ही कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हो गया। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। इस वर्ष लगभग एक महीने से भी कम समय के लिए स्कूल खुले लेकिन अभिभावक जब तक फीस जमा करते तब तक फिर स्कूल बंद कर दिए गए। इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक अमूमन निम्न आय वर्ग से आते हैं। लिहाजा बामुश्किल 10 फीसदी फीस भी नहीं जमा हो पाई। इस वर्ष भी अभिभावकों ने स्कूल खुलने पर फीस जमा करने के लिए कहा है। फीस न होने पर प्रबंधकों ने शिक्षकों को वेतन नहीं दिया था।

Tuesday, April 20, 2021

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव

शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, निजी स्कूल नई किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बना रहे दबाव


प्रयागराज : पिछले सत्र में एक भी दिन विद्यार्थी स्कूल नहीं गए। बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की। नए सत्र पर भी कोरोना की काली छाया पड़ रही है। तमाम स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, कुछ में चल रही है। कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई दोबारा शुरू करा दी है। इन सब के बीच राहत वाली बात यह कि स्कूलों में किसी भी तरह का पाठ्यक्रम नहीं बदला है। विद्यार्थी पुरानी किताबें लेकर आगे की पढ़ाई कर सकते हैं।


स्कूल की तरफ से नई किताबों को खरीदने का भी दबाव नहीं बनाया जाएगा। कुछ स्कूलों ने तो पुस्तक बैंक भी बनाई है जिसमें वह पुरानी किताबें एकत्र कर जरूरतमंद बच्चों को दे रहे हैं। इसके लिए वह किसी भी तरह का शुल्क नहीं ले रहे। यह कदम कोरोना काल में अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।


हालांकि तमाम अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूलों की तरफ से नई किताबों को खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ स्कूल विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान यूनिफार्म पहनकर बैठने के लिए भी निर्देशित कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चे घर में हैं तो यूनिफार्म की क्या जरूरत है। कोरोना काल में अनावश्यक रूप से ड्रेस खरीदने का दबाव ठीक नहीं हैं।


सभी स्कूलों में दोबारा शुरू हुईं ऑनलाइन कक्षाएं, अभिभावकों की शिकायत, स्कूल नई किताबें खरीदने के लिए बना रहे दबाव


निजी स्कूल अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। आर्थिक बोझ भी डाल रहे हैं जबकि पढ़ाई सुचारू ढंग से नहीं हो रही है। कापियों के मूल्य बढ़ने के साथ ही कुछ स्कूल नई किताब खरीदने का भी दबाव बना रहे हैं। इसके लिए खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। - विजय गुप्त, अभिभावक एकता समिति।

मेरा पुत्र सिविल लाइंस के निजी विद्यालय में पढ़ता है। पिछले सत्र में आधा पाठ्यक्रम भी नहीं पूरा कराया जा सका। नए सत्र में फीस 15 फीसद बढ़ा दी गई है। स्कूल प्रबंधन से मांग है कि कोरोना काल में फीस माफ की जाए। ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़े। - संजय द्विवेदी, अभिभावक।

इस बार भी कक्षाएं ऑनलाइन शुरू हो गई हैं। पुरानी किताबें मिलें तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। नई किताबों का कोई दबाव नहीं है। - फादर थामस कुमार, प्रधानाचार्य सेंट जोसफ इंटर कॉलेज।

पुरानी किताबें मिल जाएं तो उसे लेकर पढ़ाई करें। हां कॉपियों को जरूर लेना होगा। इस बार कॉपियां अनिवार्य रूप से जांची जाएंगी। सुझाव भी बच्चों को दिए जाएं। -डा. विनीता इसूवियस, प्रधानाचार्य जीएचएस।

पुरानी किताबें यदि बच्चों को मिल जाएं तो वह उसे लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षक भी अध्ययन सामग्री बच्चों के वाट्सएप पर भेज रहे हैं, वेबसाइट पर भी मैटर है। -डेविड ल्यूक, प्रधानाचार्य, बीएचएस।

स्कूल में करीब 150 बच्चों ने पुरानी किताबें जमा कराई हैं। उसे जरूरतमंदों को दिया जा रहा है। अन्य विद्यार्थी भी स्कूल या अपने आसपास के बच्चों को किताबें दे सकते हैं। - अर्चना तिवारी, प्रधानाचार्य, टैगोर पब्लिक।

Monday, April 5, 2021

कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


कमीशन का खेल या NCERT फेल?, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते निजी स्कूल


सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


नई दिल्ली । शिक्षा व्यवस्था किसी भी देश का भविष्य निर्धारित करती है। लेकिन जब शिक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम में चलाई जाने वाले किताबों पर निजी स्कूल एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने की मनमानी करते हैं तो अभिभावकों का परेशान होना लाजिमी है। देशभर में सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) से संबंधित हर स्कूल के अलग कोर्स और किताबें हैं।


इन स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगवाने के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवाई जाती है। एनसीईआरटी की किताबों का अधिकतम मूल्य अगर 50 से 150 रूपए हैं तो वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 600 रूपये तक की होती हैं।


वहीं, सरकारी स्कूल आज भी एनसीईआरटी की किताबें ही खरीदते हैं। अब सवाल ये हैं कि क्या निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले ज्यादा बेहतर है या निजी स्कूल कमीशन के फेर में उनकी किताबें स्कूलों में लगवाते हैं?


एनसीईआरटी की किताबें उबाऊ और सामग्री की कमी

मयूर विहार फेज-1 स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबें पुराने ढर्रे पर चली आ रही है, किताबें काफी उबाऊ भी हैं और उनमें सामग्री की भी कमी है। किताब में केवल संक्षिप्त सवाल होते है, जो छात्र को प्रैक्टिस करने के लिए कम पड़ते हैं। आप यह आलेख प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।वहीं, द्वारका स्थित एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्या के मुताबिक उनके स्कूल में वो फिलहाल कुछ किताबें विदेशी प्रकाशकों की इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक निजी प्रकाशकों की किताबें 21वीं सदी के छात्रों के हिसाब से हैं।


राजेंद्र नगर स्थित सलवान पब्लिक स्कूल के एक शिक्षक के मुताबिक एनसीईआरटी की कुछ किताबें कई बार बाजार में ही उपलब्ध नहीं होती या देरी से मिलती है। वहीं, निजी प्रकाशकों की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती है इसलिए स्कूल निजी प्रकाशकों पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों की निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल करने को लेकर लगभग यही तर्क है।

प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षा के लिए एनसीईआरटी बेहतर

इन सभी निजी स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती है। इस पर निजी स्कूलों की तर्क है कि बोर्ड की परीक्षाओं में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी की किताबों से ही आते हैं।

करोल बाग स्थित दिल्ली सरकार के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य हंस राज मोदी बताते हैं कि उनके स्कूल में सभी छात्रों के लिए एनसीईआरटी की किताबें ही इस्तेमाल होती हैं। अगर किसी विषय में एनसीईआरटी की किताब नहीं है तो स्कूल छात्रों को सपोर्ट मटेरियल उपलब्ध कराता है। उनके मुताबिक स्कूल के सभी छात्र बोर्ड के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एनसीईआरटी का ही इस्तेमाल करते हैं क्योंकि जितना अच्छा कान्सेप्ट (संकल्पना) एनसीईआरटी की किताबें से समझ आता है उतना शायद ही किसी निजी प्रकाशक की किताबों से आए।

स्कूलों का बंधा होता है कमीशन

दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम के मुताबिक शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को अपनी सूची में शामिल करने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल से ही दुकान का पता बताया जाता है कि कहां से निजी प्रकाशक की किताब खरीदनी है और किताब में लिखे दाम पर ही किताब खरीदनी पड़ती है। क्योंकि स्कूलों की कमीशन बंधा होता है। उनके मुताबिक किताब वितरण के जो ठेके दुकानों को दे रखे थे उसमें भी मनमर्जी चलाई जाती है, स्कूलों को जहां से कमीशन कम हुआ वहां से हटाकर दूसरी जगह आवंटित कर दिया जाता है। 

वहीं, फेसबुक, ट्वीटर पर एनसीईआरटी बनाम निजी प्रकाशकों की किताबों को लेकर मुद्दा उठा रहे शिक्षाविद और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निरंजन कुमार के मुताबिक आज सबसे ज्यादा परेशान निम्न मध्यम वर्गीय परिवार है। वो जैसे तैसे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाता हैं उस पर भी स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को खरीदने का जो दबाव बनाया है वो अभिभावकों के लिए सही नहीं है। उनके मुताबिक स्कूलों का काम सिर्फ शिक्षा देना होना चाहिए न कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करना।

एनसीईआरटी सचिव मेजर हर्ष कुमार ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और प्रोफेसर काफी शोध के बाद छात्रों के लिए किताबें तैयार करते हैं। इन्हें तैयार करने में भी लंबा समय लगता है। एनसीईआरटी की किताबें देशभर के 22 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में चलती हैं और ये देशभर के छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। आज सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र इन्हीं किताबों से पढ़कर उत्तीर्ण होते हैं। इसका दाम बी निजी प्रकाशकों के मुकाबले बहुत कम होता है। निजी स्कूलों को इन किताबों को आठवीं तक की कक्षा में जरूर शामिल करना चाहिए।

Wednesday, March 31, 2021

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी



शहर के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मंगलवार को निजी स्कूलों के संगठन-‘अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन’ (अप्सा) की हुई वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।


एक साल बाद पहली बार ऐसा होगा जब स्कूलों में एक साथ मॉन्टेसरी से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों की पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि जूनियर कक्षाओं के लिए अभी ऑनलाइन पढ़ाई का क्रम भी समानांतर जारी रहेगा। स्कूल खोलने का निर्णय लेने के बाद स्कूलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अप्सा के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि शासन ने चार अप्रैल तक कक्षा आठ तक के विद्यालयों को बंद रखने का आदेश दिया है। इसका पालन करते हुए नए शैक्षणिक सत्र में पांच अप्रैल से सभी स्कूल खुल जाएंगे। हालांकि स्कूल अपनी सहूलियत के अनुसार एक अप्रैल से खुलेंगे तो उनमें प्रशासनिक कार्य होगा। विधिवत पढ़ाई पांच से ही प्रारंभ होगी। इस दौरान जिन स्कूलों में रिजल्ट जारी नहीं हुए हैं, वहां स्टाफ रिजल्ट तैयार करने से लेकर दाखिले की प्रकिया पूरी करेगा।


सीनियर कक्षाओं में होगी फुल स्ट्रेंथ
अनिल अग्रवाल ने बताया कि सीनियर कक्षा नौ से 12 तक में फुल स्ट्रेंथ में पढ़ाई शुरू होगी। जबकि मॉन्टेसरी से कक्षा आठ तक के आधे-आधे छात्रों को बुलाया जाएगा। वहीं जिन स्कूलों में इंफ्राट्रक्चर बढ़िया है वे फुल स्ट्रेंथ में बच्चों को बुला सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ऑनलाइन गतिविधियां भी जारी रहेंगी। एक-डेढ़ हफ्ते बाद इनमें भी सभी बच्चे एक साथ आना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि कोरोना की रोकथाम के सारे इंतजाम पूर्व की भांति ही किए जाएंगे। मास्क, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य रहेगा। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है।


मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह से
वहीं मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह और सात अप्रैल से शुरू होंगी। यहां पर गुड फ्राइडे को लेकर आयोजन व तैयारियां चल रही हैं। इसके बाद ही कुछ छह तो कुछ सात अप्रैल से खुलेंगे। कैथेड्रल, ला मार्ट, सेंट फ्रांसिस समेत अन्य मिशनरी स्कूल छह और सात अप्रैल से खुलेंगे।


टीकाकरण के लिए शासन को भेजी जाएगी सूची
अध्यक्ष ने बताया कि शिक्षकों और कर्मचारियों को कोविड टीका लगाने के लिए शासन को लिस्ट भेजी जाएगी। स्कूलों से इसका ब्यौरा मांगा गया है। शिक्षकों की सूची शासन को भेज दी जाएगी, जिनकी टीका लगाने की व्यवस्था अस्पताल में की जाएगी। टीकाकरण होने से अभिभावकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

Saturday, March 27, 2021

कोरोना की रफ्तार पकड़ने पर प्राइवेट स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन क्लास चलाने पर शुरू किया विचार, परिषदीय विद्यालयों में भी ई पाठशाला को जारी रखने का निर्देश

कोरोना की रफ्तार पकड़ने पर प्राइवेट स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन क्लास चलाने पर शुरू किया विचार, परिषदीय विद्यालयों में भी ई पाठशाला को जारी रखने का निर्देश


कोरोना बढ़ने के साथ-साथ अब स्कूलों ने फिर से ऑनलाइन कक्षाएं चलाने पर विचार शुरू कर दिया है। अन एडेड स्कूल एसोसिएशन ने जहां 30 मार्च को इस मामले पर अहम बैठक बुलाई है वहीं मिशनरी स्कूलों ने जूनियर तक की कक्षाओं को ऑनलाइन ही चलाने की तैयारी की है। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भी अब फिर से ऑनलाइन घर से पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है।


कोरोना बढ़ने से स्कूल संचालक तथा बच्चों के अभिभावक दोनों चिंतित हैं। गुरुवार को सिटी मांटेसरी स्कूल के शिक्षकों के पॉजिटिव मिलने के बाद अब राजधानी के स्कूल संचालकों के साथ अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। कई अभिभावक भी ऑनलाइन क्लास की ही मांग कर रहे थे।

स्कूल संचालक जहां फिर से ऑनलाइन कक्षाएं चलाने पर विचार कर रहे हैं, वहीं सरकारी प्राइमरी स्कूलों में भी इसको लेकर मंथन शुरू हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में मीटिंग भी की है। जिसमें उन्होंने घरकी पढ़ाई अभियान पर जोर दिया है। घर की पढ़ाई के लिए ई पाठशाला के साथ ही व्हाट्सएप क्लास जारी रखने का निर्देश दिया गया है। इसी के साथ महानिदेशक ने बच्चों के अभिभावकों को व्हाट्सएप क्लास से जोड़े रखने को कहा है ताकि समय पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके।


सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 20% बच्चों तक भी नहीं पहुंच पाई ऑनलाइन पढ़ाई

प्राइवेट तथा मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने कुछ हद तक ऑनलाइन पढ़ाई जरूर की है। लेकिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को कुछ नहीं मिला है। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे गरीब तबके के होते हैं। इनके पास मोबाइल, लैपटॉप और कनेक्शन उपलब्ध नहीं हो पाया। इनके परिवारीजनों ने भी इनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी 20% तक की पहुंच का दावा करते हैं। लेकिन यह आंकड़े भी सही नहीं है । ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हुई । अब अगर फिर से सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो बच्चों का अगला सत्र भी खराब होना तय है।


पांच अप्रैल से कक्षाएं शुरू करने की योजना में हो सकता है बदलाव

मिशनरी स्कूल एक से पांच अप्रैल के बीच में खुल रहे हैं। सेंट फ्रांसिस स्कूल में एक शिक्षक के पॉजिटिव आने के बाद अब स्कूलों ने फिर से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की तैयारी कर ली है। हालांकि पहले सेंट फ्रांसिस ने पांच अप्रैल से ऑफलाइन कक्षाएं चलाने की बच्चों को जानकारी दी थी। लेकिन अब इसमें बदलाव की तैयारी है। इस संबंध में अभी अभिभावकों को कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि राजधानी के लगभग सभी मिशनरी स्कूलों ने कक्षा 8 तक के बच्चों की ऑनलाइन ही कक्षाएं चलाने की तैयारी की है। ऐसे में फिर से बच्चों को ऑनलाइन क्लास लेनी पड़ सकती है।

Thursday, March 25, 2021

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील


लखनऊ : उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कोविड-19 के मद्देनजर स्कूल प्रबंधकों से इस साल भी फीस न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार का सहयोग देते हुए जैसे पिछले साल फीस नहीं बढ़ाई, उसी तरह इस साल भी करें, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उप मुख्यमंत्री बुधवार को लामार्टीनियर गल्र्स कालेज में आयोजित कोरोना योद्धाओं के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कोरोना काल के दौरान पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 23 प्रमुख लोगों को सम्मानित किया।



Wednesday, March 17, 2021

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल


लखनऊ। निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई पांच अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए स्कूलों ने तैयारी शुरू कर दी है। छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पहले की तरह चलेंगी। एक से पांच तक के बच्चों की कक्षाओं के लिए स्कूल अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। जिन स्कूलों ने एक मार्च से इनकी क्लास नहीं शुरू कीं, वे भी पांच अप्रैल से इन कक्षाओं की पढ़ाई शुरू कराने जा रहे हैं।


वर्तमान सत्र खत्म हो रहा है। अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं। इस बीच अधिकतर निजी स्कूल पांच अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। वहीं, जिन स्कूलों में अभी तक प्री-प्राइमरी की कक्षाएं नहीं शुरू हुईं, वे भी नए सत्र से बच्चे बुला रहे हैं। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्री प्राइमरी से 12वीं तक की कक्षाएं पांच अप्रैल से शुरू हो जाएंगी। एक साल बाद पूरी तरह से स्कूल खोलने की स्टाफ ने तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच सरकार का कोई नया आदेश आता है तो उसका भी पालन किया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि नए सत्र से सभी कक्षाओं का संचालन शुरू होगा। शासन के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।


सहमति पर बुलाए जाएंगे बच्चे
कई स्कूल कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति मांग रहे हैं। पॉयनियर मोंटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने बताया कि प्राइमरी बच्चों को आना है कि नहीं यह अभिभावकों पर छोड़ दिया है। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या ऋचा खन्ना ने बताया कि पांचवीं तक के बच्चों के लिए अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। कानपुर रोड स्थित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की प्रिंसिपल पूनम गौतम ने बताया कि एक अप्रैल से जूनियर व सीनियर सेक्शन की पढ़ाई शुरू होगी। प्राइमरी की पढ़ाई सहमति के आधार पर पांच अप्रैल से शुरू होगी। वहीं, दी मिलेनियम स्कूल रायबेरली रोड की प्रिंसिपल मंजुला गोस्वामी ने बताया कि ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प बंद नहीं होगा। सहमति पर ही बच्चों को बुलाया जाएगा।

अभिभावकों का विरोध
राजधानी में कोरोना के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में अभिभावकों की ओर से नए सत्र से स्कूल खोलने का विरोध शुरू हो गया है, खासकर छोटे बच्चों को बुलाने को लेकर। लखनऊ अभिभावक विचार परिषद अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एक बार फिर कोरोना पैर पसार रहा है। ऐसे में नए सत्र से स्कूल खोलने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। खासकर पांच तक के बच्च्चों के लिए। वे सरकार को प्रस्ताव भेजकर छोटे बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू न कराने की मांग करेंगे।

Monday, February 8, 2021

निजी स्कूलों का दावा - 50 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने की दी सहमति

निजी स्कूलों का दावा - 50 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने की दी सहमति


राजधानी लखनऊ में 50 फीसदी अभिभावकों ने कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई की अनुमति दे दी है। यह दावा किया है निजी स्कूलों ने।

उनका कहना है कि पढ़ाई दोबारा ऑफलाइन शुरू करने को लेकर सहमति पत्र आने शुरू हो गए हैं। कोई व्हाट्सएप से सहमति दे रहा है तो कोई स्कूल के एप पर।
कई अभिभावक अभी इंतजार करने के मूड में है। 10 फरवरी से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। मालूम हो कि कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों की पढ़ाई पहले से ही ऑफलाइन चल रही है।

अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्कूलों में 50 फीसदी अभिभावकों की सहमति आ गई है।

सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज में पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग के बाद करीब 60 प्रतिशत अभिभावकों ने सहमति दी है। अवध कॉलेजिएट के प्रबंधक सर्वजीत सिंह ने बताया कि उनके यहां 40 प्रतिशत अभिभावक सहमती दे चुके हैं।

लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेस के संस्थापक प्रबंधक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि उनके यहां सभी शाखा में करीब 50 फीसदी तक की सहमती मिल गई है।

सिटी मोंटेसरी स्कूल के सभी शाखाओं में 40 से 50 फीसदी अभिभावकों ने सहमति दी है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि वे इस हफ्ते सभी अभिभावकों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद कक्षाएं शुरू करेंगे। ब्राइटलैंड इंटर कॉलेज में अभिभावकों की सहमति 50 प्रतिशत से अधिक है।


दोनों मोड में चलेंगी कक्षाएं
अनिल अग्रवाल ने बताया कि 14 दिन तक बच्चों की रोज ऑफलाइन और ऑनलाइन कक्षाएं चलेंगी। स्थिति को देखते हुए बाद में कक्षा 9 से 12 की भांति रेगुलर किया जाएगा। अभी एक कक्षा में 24 बच्चों को बैठा कर पढ़ाएंगे। कक्षाएं तीन घंटे चलेंगी और लंच ब्रेक नहीं दिया जाएगा।

Saturday, January 16, 2021

खोले जाएं कक्षा 06 से 08 तक के विद्यालय, प्राइवेट स्कूल संचालकों की मांग

खोले जाएं कक्षा 06 से 08 तक के विद्यालय, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मांग

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मांग, कहा- विद्यालय खुलने पर कोविड प्रोटोकॉल का होगा पालन


लखनऊ: कोरोना की वैक्सीन आ चुकी है। संक्रमण की दर कम हो रही है। ऐसे में लंबे समय से बंद चल रहे कक्षा छह से आठ तक के स्कूल खोले जाएं। यह कहना है अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का।


शुक्रवार को हजरतगंज स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल ने कहा कि 19 अक्टूबर 2020 को नौ से 12 तक की कक्षाएं तीन घंटे तक चलाने के आदेश दिए गए थे। सरकार ने इसे बढ़ाकर पांच घंटे तक स्कूल खोलने की मंजूरी दे दी है। अब स्कूल में भोजनावकाश भी होगा। स्कूल अपने स्तर पर कोविड से निपटने के इंतजाम सुनिश्चित कर चुके हैं। ऐसे में छह से आठ तक के स्कूलों को खोलने की भी अनुमति दी जाए।


बच्चों को किया जाएगा प्रमोट: एसोसिएशन का कहना है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी बच्चों को प्रमोट किया जायेगा। मगर इसके लिए उन्हें परीक्षा देना अनिवार्य है।


फीस वृद्धि के सवाल से किनारा: एसोसिएशन का कहना है कि करीब 22 प्रतिशत अभिभावकों ने इस बार फीस नहीं जमा की है। अगले सत्र में निजी स्कूलों की फीस में कितने प्रतिशत वृद्धि होगी, इस सवाल पर पदाधिकारी किनारा काटते रहे। उनका कहना है कि इस बात की घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस मौके पर एसोसिएशन की सचिव माला मेहरा, पायनियर मांटेसरी स्कूल के प्रबंधक बृजेंद्र सिंह, सेंट फ्रांसिस के फादर ऑलविन मौरिष मौजूद रहे।

Saturday, September 19, 2020

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी



Right to Education दाखिला न देने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी की सूची। बीएसए बोले नोटिस के बाद भी दाखिला न लेने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई। ...


लखनऊ । तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीते वर्षो की तरह इस बार भी तमाम निजी स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का दाखिला लेने में आनाकानी शुरू कर दी है। अभी तक दाखिला न लेने वाले करीब 21 स्कूलों को चिन्हित कर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नोटिस जारी की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉक्टर दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर लिया गया है अगर वह दाखिला नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ सख्ती से पेश आया जाएगा।बहरहाल अब यह देखना है कि विभाग इन स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिला पाता है या नहीं?


 इन स्कूलों को जारी हुई नोटिस
एग्जान मोंटेसरी स्कूल कैंपवेल रोड,एविज कान्वेंट स्कूल गढ़ी पीर खां, बीएसडी एकेडमी बरौरा, सेंट्रल अकैडमी सेक्टर 4 विकास नगर, टाउन हॉल पब्लिक स्कूल ठाकुरगंज, लखनऊ पब्लिक स्कूल राजाजीपुरम, सिटी इंटरनेशनल स्कूल ठाकुरगंज, न्यू पब्लिक स्कूल देवपुर पारा, राजकुमार एकेडमी मेहंदीगंज, ग्रीनलैंड स्कूल गोमती नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल जानकीपुरम विस्तार, संस्कार पब्लिक स्कूल इंदिरा नगर, टिनी टॉय स्कूल अलीगंज, टाउन हॉल स्कूल सेक्टर के अलीगंज, कैरियर कान्वेंट स्कूल सेक्टर 5 विकास नगर।

Wednesday, September 2, 2020

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे। 


यूपी में लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छोटे स्कूल तो छोड़ दें शहर के कई नामचीन स्कूल तक इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा  प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।


राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न होने का कारण बताकर शिक्षकों की छंटनी शुरू कर दी है। कई छोटे स्कूलों ने तो अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया है। अब बड़े और नामचीन स्कूलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।


गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।


प्री-प्राइमरी और प्राइमरी में हाल ज्यादा खराब
राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है। इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। कई बंद भी हो चुके हैं। जो स्कूल ऑनलाइन क्लासेज चला भी रहे हैं वहां, बच्चों की संख्या कम होने के कारण वेतन तक कम कर दिया गया है।


अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।

Sunday, August 30, 2020

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

Saturday, August 8, 2020

ऑनलाइन क्लास व्यवस्था को को निजी स्कूलों के बच्चों की हरी झंडी

ऑनलाइन क्लास व्यवस्था को को निजी स्कूलों के बच्चों की हरी झंडी 

 
लखनऊ : कोरोना काल में चल रही ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था का माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सर्वे कराया। इसमें राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आइसीएसई से संचालित निजी विद्यालयों के कक्षा नौ से 12 तक के करीब 70 हजार विद्यार्थियों ने पहले फेस में प्रतिभाग किया। इनमें 90 फीसद बच्चों ने इस व्यवस्था को हरी झंडी दे दी। यह जानकारी डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने दी।


बच्चों ने दिए ये सुझाव

शिक्षकों को नॉर्मल बोर्ड के स्थान पर स्मार्ट बोर्ड का प्रयोग करना चाहिए, नेटवर्क की समस्या दूर की जाए, भौतिक विज्ञान और गणित के कांसेप्ट स्लाइड द्वारा प्रदर्शित किए जाए, साप्ताहिक टेस्ट लिया जाए, सरकार वाईफाई की व्यवस्था मुफ्त करे, बच्चों को इंग्लिश के साथ हंिदूी में भी समझाया जाए, वीडियो कांफ्रेंसिंग की जानी चाहिए, कक्षाओं में महामारी का एक टॉपिक होना चाहिए, क्लास का समय 11 से दोपहर एक बजे तक रखा जाए।

सर्वे में 70 हजार विद्यार्थी हुए शामिल : राजधानी में यूपी बोर्ड से संचालित विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक करीब दो लाख विद्यार्थी हैं। वहीं, आइसीएसई और सीबीएसई से संचालित विद्यालयों में करीब एक लाख है। सर्वे के मुताबिक, 81 फीसद विद्यार्थी टीवी के माध्यम से संचालित कक्षाओं से पढ़ाई कर रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी बोर्ड से संचालित राजकीय, एडेड और कुछ निजी विद्यालयों के विद्यार्थी हैं। जबकि, सर्वे में जो 70 हजार विद्यार्थी शामिल हुए हैं, वे अधिकतर निजी विद्यालयों के हैं।

Friday, August 7, 2020

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

 
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों का नाम न काटने के शासनादेश को चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी की मांग पर निर्देश दिया कि 12 अगस्त को अगली सुनवाई पर किसी जिम्मेदार अफसर को रिकॉर्ड के साथ मदद के लिए पेश कराएं अन्यथा अदालत मामले की करेगी और अंतरिम राहत देने के अनुरोध पर गौर करेगी। 


न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल करुणेश सिंह पवार को खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से अतुल कुमार और एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक याचिका में यूपी सरकार के जुलाई के शासनादेश को रद्द करने की भी गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों के नाम न काटे स्कूलों

Saturday, August 1, 2020

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

 

लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है।


शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे।


इन मदो में दी गई राहत : ’ फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ’ पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ’ स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।


ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी।

Friday, July 10, 2020

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब
   
याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग कोर्ट से की गई थी.


नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस (School Fees) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग होती है. याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है. 


बताते चलें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.  


अभिभावकों ने अपनी याचिका में फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए जैसी मांग भी कोर्ट से की थी. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लाॉकडाउन जारी है. ऐसे में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अनलॉक 2 की घोषणा करते हुए जारी बंदिशों में कुछ छूट दी है. लेकिन अभी-भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना ने तांडव मचा रखा है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को वापस लॉकडाउन की घोषणा की है.

Sunday, July 5, 2020

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल, शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे

छह जुलाई से सभी माध्यमिक शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे, 

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल


प्रदेश सरकार ने दिया निर्देश स्कूलों की फीस जमा कराएं अभिभावक, एकमुश्त देने में असमर्थ तो किश्तों में दे सकेंगे फीस


फीस न जमा होने पर न काटें बच्चे का नाम, ऑनलाइन क्लास से भी न रोका जाए।


इस दौरान एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, एक समय में ज्यादा अभिभावकों को नहीं बुलाया जाएगा





कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन से बंद चल रहे माध्यमिक विद्यालयों को शासन द्वारा छह जुलाई से खोलने का निर्णय लिया है। यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व संस्कृत बोर्ड सहित सभी बोर्डो से संबंधित विद्यालय सोमवार से खुल जाएंगे और शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इन विद्यालयों में पहुंचेगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्र छात्राओं के एडमीशन भी किए जाएंगे। हालांकि छात्र छात्राएं अभी विद्यालय नहीं आएंगे उनकी छुट्टी रहेगी। सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया होगी। अभी तक माध्यमिक विद्यालय बन्द चल रहे थे। सोमवार से माध्यमिक विद्यालय खुल जाएंगे और सभी विद्यालयों में शिक्षक भी पहुचेंगे। 


ऑनलाइन कक्षाएं नियमित

दिशा निर्देशों में बताया गया है कि छह जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। 10 जुलाई से नियमित ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाए। सभी कक्षा अध्यापक एवं विषय अध्यापक विद्यालय में ही रह कर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करेंगे। जिसकी मानिटरिंग जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से की जाएगी।


लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जो अभिभावक कोरोना संकट के कारण एकमुश्त फीस जमा कराने में असमर्थ हैं, वे स्कूल प्रबंधन के समक्ष किस्तों में फीस जमा कराने का प्रार्थना पत्र दें। विद्यालय प्रबंधन उस पर गंभीरता से विचार करेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करानी होगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा और न ही स्कूल से उसका नाम काटा जाएगा। फीस को लेकर अगर अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 


गौरतलब है कि वित्तविहीन विद्यालयों के संगठनों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि अभिभावक सरकार के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए फीस जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि राज्य व केंद्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक या बड़े संस्थान के कर्मचारी व अधिकारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के आदेश पर वित्तविहीन विद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों नियमित वेतन देना पड़ रहा है।