DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label फर्जी. Show all posts
Showing posts with label फर्जी. Show all posts

Tuesday, January 19, 2021

यूपी : बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने किया खबर का खण्डन, सांसद विधायकों की सिफारिश पर स्थानांतरण की खबर तथ्यहीन और निराधार

यूपी : बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने किया खबर का खण्डन,  सांसद विधायकों की सिफारिश पर स्थानांतरण की खबर तथ्यहीन और निराधार। 




ऐसा संज्ञान में आया है कि किसी समाचार पत्र में छपा है कि सांसदों- विधायकों के सिफारिश पर स्थानांतरण होंगे।  यह खबर पूरी तरह से तत्थहीन और निराधार है।  विभाग में स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। स्थानांतरण की सूची जारी हो चुकी है इसलिए स्थानांतरण को लेकर सचिवालय अथवा किसी विभागीय अधिकारियों के कार्यालय में सम्पर्क करने का प्रयास न करें। - Dr. Satish Dwivedi , बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन। 

Monday, January 11, 2021

72825 शिक्षक भर्ती के 11 बेसिक शिक्षकों की नौकरी खतरे में, जानिए क्यों?

72825 शिक्षक भर्ती के 11 बेसिक शिक्षकों की नौकरी खतरे में।

● अलग-अलग जिलों में 2007 व 2008 में पाया बीटीसी प्रशिक्षण

● मई 2016 में मेडिकल बोर्ड गठित रिपोर्ट मिलने पर प्रमाणपत्र शून्य


गड़बड़झाला: जांच में पकड़े गए फर्जी दिव्यांग बने 11 बेसिक शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र रद्द


प्रयागराज : परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से 11 शिक्षकों का बीटीसी प्रमाण पत्र रद कर दिया है। आने वाले दिनों में उनको सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाएगी। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि 72825 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत कई चयनित होकर नौकरी कर रहे हैं। 



सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिव्यांग कोटे से प्रवेश लेकर आगे भी उसका लाभ लेने वाले शिक्षकों की जांच चल रही है। जांच के दौरान 11 ऐसे शिक्षकों की जानकारी हुई, जिन्होंने दिव्यांग कोटे में प्रवेश लेकर नौकरी में भी उसका प्रयोग किया था। जांच में खुलासा होने के बाद ऐसे 11 शिक्षकों का बीटीसी प्रमाण पत्र रद किया गया है।


प्रदेश सरकार फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हथियाने वालों पर हमलावर है। जांच में 11 प्राथमिक शिक्षक फर्जी दिव्यांग मिले हैं। उन्होंने न केवल दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे बीटीसी का प्रशिक्षण लिया, बल्कि उसी आधार पर शिक्षक के रूप में चयनित होने में सफल रहे। इन सभी का बीटीसी प्रमाणपत्र शून्य (यानी रद) कर दिया गया है, अब उन्हें सेवा से भी बर्खास्त करने की तैयारी है। मेडिकल रिपोर्ट आने में साढ़े चार साल से अधिक समय लगा है।

प्रदेश के सात जिलों में चिन्हित यह शिक्षक पहले फर्जी दिव्यांग बनकर बीटीसी का दो वर्षीय प्रशिक्षण कोर्स पाने के लिए चयनित हुए, फिर उन्होंने वर्ष 2007 व 2008 में प्रशिक्षण सत्र में कोर्स पूरा करने के बाद शिक्षक भर्ती में दिव्यांग बनकर ही दावेदारी की। नियुक्ति पाने के बाद उनकी शिकायत हुइर्, लेकिन उस पर पर्दा पड़ा रहा। कुछ अभ्यर्थी इस फर्जीवाड़े के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। 

शीर्ष कोर्ट ने उप्र राज्य बनाम र¨वद्र कुमार शर्मा व अन्य की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए तीन फरवरी, 2016 को आदेश दिया कि इन अभ्यर्थियों की जांच मेडिकल बोर्ड गठित करके कराई जाए। शासन ने इसके अनुपालन में 13 मई, 2016 को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। यह काम अब साढ़े चार साल बाद पूरा हुआ और जिला चयन समिति ने 11 शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र को शून्य करने की संस्तुति की। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि सभी के बीटीसी प्रमाणपत्र शून्य कर दिए गए हैं। अब जल्द ही शिक्षकों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है।

कई और लोगों पर भी की जाएगी कार्रवाई जल्द
विभिन्न जिलों से दिव्यांग बने करीब छह और प्रशिक्षण पाने वालों की रिपोर्ट आ गई है। जिला चयन समिति ने उनका प्रमाणपत्र भी शून्य करने की संस्तुति की गई है। सचिव का कहना है कि उनके प्रमाणपत्रों की जांच हो रही है, जल्द ही उन्हें भी शून्य करार दिया जाएगा।

Sunday, January 10, 2021

मदरसों शिक्षकों के नाम पर फर्जीवाड़े को लेकर सरकार सख्त, मानव सम्पदा में विवरण होगा फीड, तबादला नीति भी ला सकती है सरकार

अनुदानित मदरसा शिक्षकों डाटा होगा मानव सम्पदा पोर्टल पर फीड

मदरसों शिक्षकों के नाम पर फर्जीवाड़े को लेकर सरकार सख्त, मानव सम्पदा में विवरण होगा फीड, तबादला नीति भी ला सकती है सरकार


उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षकों की गड़बड़ियों को रोकने के लिए अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड करा रही है। इससे सभी मदरसा शिक्षकों का विवरण एक स्थान पर मिल जाएगा।


सरकार मदरसा शिक्षकों के लिए तबादला नीति भी ला सकती है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता आएगी बल्कि मदरसा शिक्षा में भी सुधार होगा।


शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर होगा फीड
उत्तर प्रदेश में 560 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें नौ हजार शिक्षक पढ़ाते हैं। इनका वेतन प्रदेश सरकार देती है। पहले चरण में अनुदानित मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड किया जाएगा।


इसके बाद दूसरे चरण में मान्यता प्राप्त अन्य मदरसा शिक्षकों के विवरण ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे वे मदरसा शिक्षक भी पकड़ में आ जाएंगे, जो एक साथ कई मदरसों में काम कर रहे हैं। कई बार मदरसा प्रबंधक मान्यता लेने के लिए दूसरे मदरसों के शिक्षकों को अपने यहां दिखा देते हैं। इस पर भी नई व्यवस्था में लगाम लग सकेगी।


लखनऊ : प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षकों की गड़बड़ियां रोकने के लिए अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड करा रही है। इससे सभी मदरसा शिक्षकों का विवरण एक स्थान पर मिल जाएगा। सरकार मदरसा शिक्षकों के लिए तबादला नीति भी ला सकती है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता आएगी, बल्कि मदरसा शिक्षा में भी सुधार होगा।




प्रदेश में 560 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें नौ हजार शिक्षक पढ़ाते हैं। इनका वेतन प्रदेश सरकार देती है। पहले चरण में अनुदानित मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में मान्यता प्राप्त अन्य मदरसा शिक्षकों के विवरण ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे वे मदरसा शिक्षक भी पकड़ में आ जाएंगे, जो एक साथ कई मदरसों में काम कर रहे हैं। कई बार मदरसा प्रबंधक मान्यता लेने के लिए दूसरे मदरसों के शिक्षकों को अपने यहां दिखा देते हैं।

Sunday, December 20, 2020

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी को जमानत नहीं


69000 शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी को जमानत नहीं

शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी केएल पटेल की गैंगस्टर में जमानत खारिज


शिक्षक भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी करके फर्जी कागजात तैयार कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने के मामले के आरोपित केएल पटेल की गैंगस्टर मामले में जमानत अर्जी विशेष न्यायालय ने खारिज कर दी। यह आदेश प्रभारी विशेष न्यायाधीश अतीकउद्दीन ने आरोपित केएल पटेल उर्फ कृष्ण लाल पटेल की जमानत अर्जी पर उसके अधिवक्ता एवं गैंगस्टर मामले में शासन की ओर से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक अतुल सिंह चौहान के तर्को तैयार करते हैं और अभ्यर्थियों से साठगांठ को सुन कर दिया।


अदालत ने कहा कि आरोपित एक संगठित गिरोह का मुखिया है जो कि आपराधिक प्रवृत्ति का है। मामले की परिस्थितियों एवं उच्चतम न्यायालय की दी गई नजीरों के प्रकाश में आरोपित को जमानत पर रिहा किए जाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। लोक अभियोजक अतुल सिंह चौहान ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपित ने एक संगठित गिरोह बना रखा है जिसका वह स्वयं लीडर है जो कि शिक्षक भर्ती घोटाला में फर्जी दस्तावेज तैयार कर के अभ्यर्थियों से मोटी रकम को वसूलता है और उसके कब्जे से फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। 


मामला यह था कि सोरांव थाने पर थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज किया था कि 13 अक्टूबर 2020 को दौरान क्षेत्र भ्रमण उन्हें सूचना मिली कि केएल. पटेल नाम  के व्यक्ति ने एक गैंग बनाया है जिसका वह स्वयं लीडर है। उसके गैंग में तमाम लोग अन्य जुड़े हुए हैं यह लोग सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी कागजात कर उनसे मोटी रकम वसूलते हैं, ऐसा करके अनुचित लाभ अर्जित करते हैं । आरोपित की ओर से तर्क दिया गया था कि वह 20 अक्टूबर 2020 से जेल में बंद है उसे फर्जी फंसा दिया गया है । उसके विरुद्ध सिर्फ एक मुकदमा पंजीकृत है जिसमें उसकी जमानत हो गई है।


जिला न्यायालय ने शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी केएल पटेल उर्फ कृष्ण लाल पटेल की गैंगेस्टर मामले में जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट अतीकउद्दीन ने  विशेष लोक अभियोजक अतुल सिंह चौहान को सुन कर दिया है। प्रकरण सोरांव थाने का है। अभियुक्त पर आरोप है कि वह गैंग बनाकर गैंग के सदस्यों द्वारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी कागजात तैयार कर अनुचित लाभ कमाते थे।


अभियुक्त गैंग लीडर है। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी में कहा गया है कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसकी कोई भूमिका नहीं है। जिस मुकदमे के आधार पर उसके ऊपर गैंगस्टर की कार्यवाही की गई है, उसमें  सत्र न्यायालय ने जमानत दे दी है।

Sunday, December 13, 2020

रायबरेली : कस्तूरबा में फर्जी शिक्षिका की नियुक्ति मामले में नपे डीसी, राज्य परियोजना निदेशक ने दिया मूल विभाग में भेजने का निर्देश

रायबरेली : कस्तूरबा में फर्जी शिक्षिका की नियुक्ति मामले में नपे डीसी, राज्य परियोजना निदेशक ने दिया मूल विभाग में भेजने का निर्देश

अनामिका शुक्ला प्रकरण

रायबरेली : करीब नौ महीने पहले उजागर हुए कस्तूरबा में नियुक्त शिक्षिका अनामिका शुक्ला का प्रकरण फिर सुर्खियों में आ गया है। प्रदेश के कई जिलों की तरह बछरावां स्थित कस्तूरबा विद्यालय में भी अनामिका शुक्ला तैनात थी जिसके खिलाफ मार्च में मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई और फिर उसकी संविदा समाप्त कर दी गई थी। अब इस प्रकरण में जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) को हटाने का आदेश दिया गया है। राज्य परियोजना निदेशक ने तत्काल प्रभाव से उन्हें मूल विभाग में भेजने को कहा है।


राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अस्थायी रूप से सृजित डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर (बालिका शिक्षा) के पद पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात अनिल कुमार तिवारी को तत्काल प्रभाव से मूल विभाग माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड में प्रत्यावर्तित किया जाता है। निदेशक ने कहा है कि तथाकथित अनामिका शुक्ला के आवेदन पत्र में इंगित कमियों, संबंधित से पत्र व्यवहार में शिथिलता बरतने तथा अभिलेखों का सत्यापन कराए बिना दो लाख 58 हजार 298 रुपये मानदेय का भुगतान किए जाने, संपूर्ण नियुक्ति प्रक्रिया में बिना मूल अभिलेखों को प्राप्त किए ही नियुक्ति पत्र निर्गत करने के संबंध में अनियमितता और लापरवाही बरती गई है।

राज्य परियोजना निदेशक ने अनिल कुमार तिवारी को निर्देशित किया है कि अपने पटल से संबंधित समस्त कार्यों का प्रभार बीएसए को हस्तगत कराते हुए मूल विभाग माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड में योगदान देना सुनिश्चित करें।

Thursday, December 10, 2020

अनामिका शुक्ला की नियुक्ति मामले में जिला समन्वयक कार्यमुक्त

अनामिका शुक्ला की नियुक्ति मामले में जिला समन्वयक कार्यमुक्त


प्रयागराज : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अनामिका शुक्ला पुत्री सुभाष चन्द्र शुक्ला मैनपुरी नाम के एक ही प्रमाणपत्र पर कई जिलों में नौकरी हथियाने के मामले में प्रयागराज के जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) ताज मोहम्मद को कार्यमुक्त करने का आदेश हुआ है। उन्हें अनामिका शुक्ला की नियुक्ति प्रक्रिया में बिना मूल अभिलेखों को प्राप्त किए ही नियुक्ति पत्र जारी करने की लापरवाही और शिथिलता का दोषी पाया गया है।


कस्तूरबा विद्यालय सोरांव में अनामिका शुक्ला नाम से विज्ञान शिक्षिका की फर्जी नियुक्ति सितंबर 2019 में 22 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर हुई थी। नियुक्ति के बाद मानदेय जारी करने से पहले सत्यापन के लिए भेजा गया था। मार्च में मानदेय जारी होने से पहले ही फर्जीवाड़े की जानकारी हो गई तो भुगतान रोक दिया गया। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने मामले की जांच मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक रमेश कुमार तिवारी को सौंपी थी। एडी बेसिक की 6 जून की रिपोर्ट पर महानिदेशक ने 23 नवंबर को जिला समन्वयक को कार्यमुक्त करते हुए मूल विभाग माध्यमिक शिक्षा में वापस भेजने के आदेश दिए थे।


बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि दस्तावेजों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण अभी जिला समन्वयक को कार्यमुक्त नहीं किया जा सका है। जल्द ही कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि प्रयागराज के अलावा अम्बेडकरनगर, सहारनपुर, बागपत और अलीगढ़ आदि जिलों में भी इसी नाम से विज्ञान शिक्षिका की नियुक्ति के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था।