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Sunday, July 5, 2020

हरदोई : लापरवाही : वेतन की रिकवरी में हो रही देरी, अभी तक लिए गए वेतन की नहीं हो सकी गणना

हरदोई : लापरवाही : वेतन की रिकवरी में हो रही देरी, अभी तक लिए गए वेतन की नहीं हो सकी गणना।

धनराशि की गणना : अभी तक लिए गए वेतन की गणना ही नहीं हो सकी बीईओ व लेखाधिकारी को करनी है धनराशि की गणना

हरदोई : बेसिक शिक्षा विभाग में जाली व टेम्पर्ड डिग्री के सहारे नौकरी करने वाले सहायक अध्यापकों ने सरकार को कई करोड़ रुपये का चूना लगाया है। एसआईटी की जांच में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई में पता नहीं क्यों देरी हो रही है। जिले में 16 शिक्षकों की सूची शासन से आई है। इनमें से एक के खिलाफ भी वेतन की रिकवरी करने के लिए आरसी अब तक नहीं जारी की गई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की फर्जी व टेम्पर्ड बीएड डिग्री के सहारे 16 लोग नौकरी पा गए।इसमें दो का केस कोर्ट में चल रहा है, जबकि 14 के खिलाफ एफआईआर से लेकर अन्य कार्रवाई के लिए हरी झंडी शासन दे चुका है। इन शिक्षकों से वेतन की रिकवरी करने की प्रक्रिया करीब छह महीने पहले शुरू की थी, जो कागजों तक सिमटकर रह गई है।





विभागीय लिपिक प्रवीण मिश्रा का कहना है कि बर्खास्तगी के लिए जब पत्र भेजा गया था तब उसमें रिकवरी करने के निर्देश भी दिए गए थे। उच्चाधिकारियों ने खंड शिक्षा अधिकारियों व वित्त एवं लेखाधिकारी को वेतन की गणना करने व रिकवरी कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी जानकारी बीईओ व लेखाधिकारी को भलीभांति है। उधर वित्त एवं जिलाधिकारी योगेश पाण्डेय का कहना है कि किन शिक्षकों के वेतन की गणना बिक्री होनी है, उसका संपूर्ण ब्यौरा अभी नहीं मिला है। बीएसएफ के स्तर से लिखित पत्र मिलते ही रिकवरी के लिए कागजी कार्यवाही की जाएगी। बीएसए हेमन्तराव का कहना है किसी भी जालसाज शिक्षक को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अपनी तैनाती के दौरान किस विद्यालय से कितना वेतन पाया है, उसकी गणना कराकर जल्द रिकवरी के लिए आरसी जारी कराई जाएगी।


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कासगंज : शिक्षकों से 52 बिंदुओं पर मांगा गया जवाब, जांच के दायरे में आए शिक्षकों को तीन पेज का फार्म भरना होगा

कासगंज : शिक्षकों से 52 बिंदुओं पर मांगा गया जवाब, जांच के दायरे में आए शिक्षकों को तीन पेज का फार्म भरना होगा


कासगंज : 2010 से अब तक हुई शिक्षकों की भर्ती के बाद जिले में तैनात शिक्षक- शिक्षकों की जांच नये सिरे से शुरू हो गई है। समिति में अब बेसिक शिक्षा अधिकारी के शामिल होने के बाद जांच में तेजी आ गई है। जांच के दायरे में आए शिक्षक-शिक्षिकाओं को एक तीन पेज का फार्म भरना होगा। जिसमें 52 विंदुओं पर जानकारी दर्ज करने को कहा गया है। फार्म जमा होने के बाद जांच कमेटी सभी का सत्यापन कराएगी।






Saturday, July 4, 2020

कौशाम्बी : फर्जीवाड़े में महिला समेत दो शिक्षक बर्खास्त, होगी वेतन रिकवरी

कौशाम्बी : फर्जीवाड़े में महिला समेत दो शिक्षक बर्खास्त, होगी वेतन रिकवरी।

मंझनपुर  : फर्जी मार्कशीट पर नौकरी करने वाले शिक्षकों पर लगातार गाज गिर रही है। दो और शिक्षकों को बीएसए ने शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया। इनमें एक महिला शिक्षक भी शामिल है दोनों पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तैनात हैं। अब इस रिकवरी की तैयारी हो रही है। चाय के हमीरपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तैनात सीमा यादव की मार्कशीट संदिग्ध थी। इनके मूल अभिलेखों की जांच चल रही थी। एसआईटी जांच में खुलासा हुआ कि सीमा यादव की बीएड की डिग्री फर्जी है। सीमा यादव ने भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की बीएड की डिग्री लगाई थी। इसी तरह कौशाम्बी ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सचवारा में तैनात राजेश शुक्ला की भी डिग्री फर्जी मिली है। इनकी भी बीएड की डिग्री आगरा विवि की थी। आरोप तय होने पर बीएसए राजकुमार पंडित ने दोनों को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही रिकवरी की कार्रवाई शुरू करा दी है।






चार अध्यापकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

कोरांव : प्रदेश में फर्जी शिक्षिका की चल रही जांच के क्रम में शुक्रवार को कोरांव के भी चार अध्यापक ऐसे पाये गये जिन्होंने अभिलेखों में हेराफेरी कर परिषदीय अध्यापक की नौकरी प्राप्त कर ली। बीएसएफ के आदेश पर बीईओ कोरांव ने चारों अध्यापकों के खिलाफ कोरांव थाने में तहरीर दी है। बीईओ सीताराम यादव के अनुसार जिन चार अध्यापकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, उनमें प्रधानाध्यापक पीयूष कुमार तिवारी, महेश कुमार सिंह प्रावि सिपौवा निवासी रेही कला अरैल, विजय कुमार प्रावि खजुरी प्रथम शामिल है।


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माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर


राज्य मुख्यालय : फर्जी शिक्षकों की भर्ती का शोर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग तक ही सीमित है जबकि राजकीय इंटर और सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी बहुत बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं। एलटी ग्रेड में 2014 में हुई 6645 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया इसी फर्जीवाड़े के चलते ही पूरी नहीं हो पाई थी। हालांकि यहां जांच के आदेश हो चुके हैं लेकिन अभी इसमें तेजी नहीं आई है। 


सभी मंडलीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सहायताप्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के प्रमाणपत्र वे अपने पास रख लें। अभी ये प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन के पास हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सत्यापन की कार्रवाई शुरू होगी। वहीं राजकीय इंटर कॉलेजों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर मौजूद हैं। वहां से भी सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि माध्यमिक शिक्षा में फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर पहले से ही है लेकिन इसके लिए कोई पुख्ता प्रयास नहीं किए गए। 



2014 में 6645 पदों पदों के लिए 27 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे क्योंकि उस समय मंडलवार आवेदन लिए जाते थे लेकिन भर्ती के बाद जैसे ही सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई उसमें फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने लगे। ज्यादातर मंडलों में 60 से 65 फीसदी चयनितों के प्रमाणपत्र फर्जी निकले थे। इस भर्ती में 2 हजार के आासपास पद ही भर पाएं लेकिन 2016 में इस पर रोक लगा दी गई। इसके बाद ही एलटी ग्रेड भर्ती को लोक सेवा आयोग को देने का फैसला लिया गया।

Friday, July 3, 2020

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख


प्रयागराज : प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद शासन स्तर पर प्रदेश के परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में 2010 के बाद चयनित शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से सभी शिक्षकों से तीन दिन के भीतर जरूरी अभिलेख मांगे हैं।


अभिलेख देने के साथ शिक्षकों को अपनी ओर से एक शपथ पत्र भी देना होगा, जिसमें किसी प्रकार की गलती पर रिकवरी सहित वेतन की वसूली और एफआईआर कराने की बात कही गई है। जिला स्तर पर एडीम नजूल की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने तय किया कि यह पता लगाया जाएगा कि जिन अध्यापकों का नाम चयन सूची में थे, क्या वास्तव में वही शिक्षक वर्तमान समय में काम कर रहें या नहीं।


यह भी पता लगाने को कहा गया है कि जिन शिक्षकों का नाम चयन सूची में है, क्या उन्होंने उस पद के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करना होगा। दिव्यांगजनों के प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच की जाए। चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के साथ उनके पैन, आधार के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा की ओर से जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों को जारी पत्र में सभी शिक्षकों से शपथ पत्र भी मांगा गया है, जिसका प्रोफार्मा भी उसमें दिया गया है। 

Wednesday, July 1, 2020

आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश

आगरा : दो शिक्षकों की दो-दो जिलों में तैनाती, जांच के आदेश


आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग में आगरा में दो ऐसे शिक्षक तैनात मिले हैं जिनकी तैनाती दूसरे जिलों में भी है। जांच में पता चला है कि इनमें से एक मनोज कुमार की तैनाती कासगंज में भी है। संतोष कुमारी की तैनाती कन्नौज में भी है। अनामिका शुक्ला जैसे इस फर्जीवाड़े का पता चलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार यादव ने जांच के आदेश दिए हैं। 


वित्त एवं लेखाधिकारी पंकज कुमार सिंह ने इन शिक्षकों के बारे में रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी है। प्रारंभिक तौर पर की गई जांच पड़ताल में मनोज कुमार की तैनाती सैंया ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय, जाजऊ के सहायक अध्यापक के पद पर होने के साथ कासगंज में भी है। दोनों जगह पर्सनल अकाउंट नंबर (पैन) एक ही दिया गया है हालांकि जन्मतिथि, आधार संख्या, नियुक्ति तिथि और खाता संख्या अलग-अलग हैं।