DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label फीस. Show all posts
Showing posts with label फीस. Show all posts

Friday, July 3, 2020

फीस जमा करने के दबाव पर अभिभावक नाराज, ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की मिल रही चेतावनी


लखनऊ। शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं फोन करके अभिभावकों को धमकाया जा रहा है कि फीस न दी गई तो बच्चे का नाम कट जाएगा। इसे लेकर अभिभावकों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे लगातार थोड़ी थोड़ी फीस जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद दबाव बनाया जा रहा है। राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईएससी से मान्यता प्राप्त करीब एक हजार निजी स्कूल चल रहे हैं। जुलाई से ही ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है। गुरुवार को हजरतगंज के एक निजी स्कूल से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए फोन किया गया और बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं। फीस न जमा कर पाने की स्थिति में स्कूल की ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की चेतावनी दी गई। वहीं इस पूरे मामले में अभिभावक संगठन के अभिषेक खरे की मानें तो सक्षम अभिभावक लगातार फीस जमा कर रहे हैं। उसके बावजूद स्कूल लगातार दबाव बना रहे हैं। जिससे अभिभावक काफी परेशान हैं।

लोहिया विविः पूरी फीस लेने का किया विरोध

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने पूरी फीस न लिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कोरोना महामारी के चलते काफी अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वे पूरी फीस देने में असमर्थ हैं। इसलिए फीस किश्तों में ली जाए। विवि प्रशासन ने 25 जून को सूचना जारी करके छात्रों से 1 से 4 जुलाई के बीच फीस जमा करने को कहा। छात्रों ने 28 जून को इसका विरोध करते हुए कुलपति को ईमेल से मांग पत्र भेजकर फीस किश्तों में लेने. यूटिलिटी चार्ज को नए सत्र की फीस में समायोजित करने की मांग की थी। मगर उनके मांग पत्र पर कुलपति ने विचार नहीं किया और 6 से 20 जुलाई के ही जमा करने व उसके बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं।

कोरोना संक्रमण की इस स्थिति में निजी स्कूलों को शासन के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। अन्यथा विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

Monday, June 29, 2020

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

Saturday, June 27, 2020

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Friday, June 26, 2020

नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


School Fees In Lockdown : अभिभावक संघ के अनुसार महज 2-3 घंटे की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पूरी फीस लेना गलत है। स्कूल एसोसिएशन की दलील है कि वे सिलेबस को अपने हिसाब से पूरा कराने की कर रहे हैं कोशिश



नई दिल्ली। कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के चलते स्कूल-कॉलेज मार्च से बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई में नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन क्लासेज (Online Classes) चलाई जा रही हैं। मगर इन्हीं के बीच फीस को लेकर स्कूल प्रशासन और पैरेंट्स के बीच ठन गई है। स्कूल प्रबंधन जहां समय से फीस भरने को कह रहा है। वहीं अभिभावकों की दलील है कि महज 2 से 3 घंटे के लिए वे पूरी फीस नहीं दे सकते हैं। इस बात को लेकर अभिभावक संघ (Parents Association) हल्लाबोल की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मसले का हल नहीं निकला तो वे 26 तारीख से आंदोलन करेंगे।


इस सिलसिले में उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) के फ़ीस वसूलने (School Fees In Lockdown) के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था। इसके बाद सरकार ने कहा था कि ऑनलाइन क्लास देने वाले प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। मगर सरकार के इस फैसले से अभिभावक संघ सहमत नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभिभावक संघ के अध्यक्ष राम कुमार का कहना है कि सिर्फ़ 2 घंटे की ऑनलाइन क्लास हो रही है। इसमें भी कई बार नेटवर्क की दिक्कत होती है, तो कभी लाइट चली जाती है या अन्य समस्याएं आ जाती हैं। इससे पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती है। ऐसे में ट्यूशन फीस के नाम पर पूरी फीस वसूली बिल्कुल गलत है। इसका विरोध किया जाएगा। मालूम हो कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों की ओर से लिए जा रहे फीस को लेकर गुरुग्राम में भी अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी। यहां के पैरेंट्स एसोसिएशन ने भी आंदोलन की धमकी दी थी।


अभिभावक संघ इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी में है। संघ के अध्यक्ष का कहना है कि वे फ़ीस के मुद्दे पर किसान यूनियन के साथ मिलकर प्रदेशभर में आंदोलन करेंगे। वे 26 तारीख से सड़कों पर उतरकर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। वहीं इस मसले पर स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि वे पूरे सिलेबस को 2-3 घंटे में पूरा कराने की कोशिश कर रहे हैं। वे स्कूल के सिलेबस के हिसाब से ही प्लानिंग कर रहे हैं। ऐसे में ट्यूशन फीस लेना गलत नहीं है। क्योंकि इसी के जरिए शिक्षकों को उनकी सैलरी दी जा सकेगी।

Saturday, June 20, 2020

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव


लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालय जुलाई से स्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग पर दबाव बना रहे हैं। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े संगठनों ने विभाग को अलग-अलग चरणों में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी दिया है। 


इस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने सभी जिला माध्यमिक विभाग विद्यालय निरीक्षकों से स्कूल डीआई खोलने पर सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं। कांग्रेस प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते 15 मार्च से सभी स्कूल बंद हैं। सरकार ने वित्तविहीन विद्यालयों को लॉकडाउन की अवधि में एक मुश्त फीस की वसूली नहीं करने, फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी का नाम नहीं काटने और फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिक्षकों को भी पूरा वेतन देने के निर्देश दिए हैं।


माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी का कहना है कि वित्तविहीन विद्यालयों में फीस नहीं मिलने से चार महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जुलाई में स्कूल खोलने के लिए सरकार से आग्रह किया है ताकि कक्षा 6 से 9 और 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम तैयार किया जा सके। उन्होंने कक्षा 9 से 11 की कक्षाएं भी संचालित करने के लिए आग्रह किया है। 


वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण काल मे स्कूलों को खोलने के लिए विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखूरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी स्कूलों को खोलने के लिए शिक्षक संघों, जिला विद्यालय निरीक्षकों सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रस्ताव और सुझाव के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी।

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी


 यूपी, लखनऊ : यूपी में कोरोना महामारी के कारण निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी नहीं की गई है । स्कूल पिछले साल की फीस ही लेंगे। इस फैसले को सख्ती से लागू करवाया गया है। निजी स्कूल विद्यार्थियों की फीस माफ करेंगे, ऐसा कोई आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी नहीं किया गया है।



 यदि कोई फीस माफी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार कर रहा है और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह आश्वासन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने मेरठ स्कूल फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल को दिया। 



विधानभवन में स्थित कार्यालय में डिप्टी सीएम से मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने भरोसा दिलाया कि निजी स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी हैं।

Friday, June 19, 2020

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई


19 Jun 2020

समस्या
ताजनगरी के कॉन्वेंट स्कूल अब अभिभावकों की सहमति पर ही खुलेंगे। साथ ही स्कूलों की समस्याओं को जब तक सरकार नहीं समझेगी। तब तक भी स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं कराई जाएगी। शहर के प्रमुख सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों के संगठन एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल ऑफ आगरा (अप्सा) ने यह फैसला लिया है। साथ ही स्कूल खुलने के बाद सेनेटाइजेशन का जिम्मा भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लेना होगा। अप्सा ने सरकार द्वारा ‘पात्र-सक्षम माता-पिता' की परिभाषा को परिभाषित करने की मांग भी की है, ताकि उस श्रेणी में आने वाले अभिभावकों से फीस मिल सके।


अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता के अनुसार देशभर में लगभग 2 करोड़ शिक्षक 5 लाख निजी स्कूलों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों ने लॉकडाउन के दौरान अपनी जिम्मेदारी समझी। छात्रों के शिक्षण की निरंतरता बनी रहे एवं उनकी पढ़ाई की प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन व लाइव कक्षाएं लीं। साथ ही विषय संबंधित असाइनमेंट, वर्कशीट, नोट्स आदि भी ऑंनलाइन भेजे। विद्यार्थियों को घर से ही ऑनलाइन टेस्ट, हॉली-डे होमवर्क, समरकैंप आदि गतिविधियों से जोड़े रखा। डॉ. गुप्ता के अनुसार केंद्र व राज्य शासित कार्यालयों के सभी कर्मचारियों, सरकारी शिक्षकों, विधायकों, सांसदों को पूरा वेतन मिला है। इनमें से ज्यादातर के बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। अगर सभी को वेतन पूरा मिला है, तो स्कूलों को फीस देने में क्या समस्या है। फीस मांगने पर स्कूल प्रबंधन के प्रति उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं। क्या यह उचित है?


मांग
● सरकार अभिभावकों को फीस का भुगतान करने के दे निर्देश
● फीस ना मिलने पर ऑनलाइन-ऑंफलाइन पढ़ाई नहीं संभव

Wednesday, June 17, 2020

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण, अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस बढ़ोतरी पर कसी नकेल, राज्यपाल ने दी अनुमति

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण

निजी विद्यालय अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क, राज्यपाल ने राज्य सरकार के अध्यादेश को दी मंजूरी


 वित्तविहीन विद्यालय अब मनमाने तरीके से शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे। फीस वसूली को नियंत्रित करने के लिए कैबिनेट ने यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश-2020 को मंजूरी दे दी है। इसमें अधिनियम-2018 की धारा 2,4,8,9 और 11 में संशोधन किया गया है। इसके तहत शुल्क को नियमित करने का अधिकार प्रदेश सरकार के पास होगा। 


राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। इससे स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। सरकार ने कोरोना संकटकाल में अभिभावकों को राहत देने के लिए वित्तविहीन विद्यालयों को इस वर्ष फीस नहीं बढ़ाने, विद्यार्थियों से लॉकडाउन की अवधि का परिवहन शुल्क नहीं लेने और एकमुश्त फीस नहीं वसूलने का आदेश जारी किया था वित्तविहीन विद्यालयों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


मंडल स्तर पर अपील प्राधिकरण : मनमानी फीस वसूली के मामलों में जिला शुल्क नियामक समिति के निर्णयों के खिलाफ अपीलों के समय पर निस्तारण के लिए अब राज्य स्तर की जगह मंडल स्तर पर मंडलीय स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अपील प्राधिकरण का भी गठन किया जाएगा। अभिभावक इसके निर्णय के खिलाफ मंडल स्तर पर ही अपील कर सकेंगे।

Saturday, June 6, 2020

बिहार : स्कूल फीस मामले में पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, HC बोला- विकट परिस्थिति में किसको फीस देने को कहें

बिहार : स्कूल फीस मामले में पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, HC बोला- विकट परिस्थिति में किसको फीस देने को कहें


पटना हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के लिए डीएम की ओर से जारी निर्देश पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने स्कूल को डीएम व आपदा प्रबंधन विभाग से गुहार लगाने की छूट दी है। कोर्ट का कहना था कि इस विकट परिस्थिति में किसी को मनमानी की छूट नहीं दी जा सकती। इस समय किसको पैसा देने का आदेश दिया जाए, जबकि हर किसी का काम-धंधा लगभग ठप है। वकील की प्रैक्टिस बंद है। ऐसे में आप ही बताइए कि किसे फीस देने के लिए कहा जाए।


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को संत पॉल इंटरनेशनल स्कूल की अर्जी पर सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि 25 मार्च को आपदा प्रबंधन विभाग और 10 अप्रैल को डीएम ने आदेश जारी कर एक साथ तीन महीने की फीस नहीं लेने तथा बस फीस व अन्य शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया है। स्कूल प्रबंधन को शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा चाहिए। मगर स्कूल के पास इतना पैसा नहीं है कि वह दे सकें। स्कूल की हर दलील को कोर्ट ने नामंजूर कर अर्जी खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट के रुख को देखते हुए स्कूल के वकील गौतम केजरीवाल ने अपना पक्ष डीएम व आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव तथा डीईओ के समक्ष रखने की बात कही। कोर्ट ने उनके अनुरोध को मंजूर करते हुए स्कूल को डीएम, प्रधान सचिव तथा डीईओ के समक्ष बात रखने की छूट देते हुए अर्जी को निष्पादित कर दिया।


देखकर नहीं लगता कि स्कूल की माली हालात खराब है
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अशुतोष रंजन पांडेय ने कोर्ट को बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग और डीएम ने कोरोना संक्रमण से बचाव के दौरान लॉकडाउन को देखते हुए यह निर्देश जारी किया है। स्कूल नामी तथा काफी पुराना है। स्कूल को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि इसकी माली हालत खराब है और स्कूल को फीस वसूलने की छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कई स्कूल मनमानी कर रहे हैं। डीएम के आदेश के बावजूद फीस के साथ बस चार्ज और अन्य शुल्क वसूलने के लिए अभिभावकों पर दबाव डाल रहे हैं।

Friday, May 29, 2020

एकमुश्त फीस नहीं ले सकेंगे विश्वविद्यालय और कॉलेज : यूजीसी

एकमुश्त फीस नहीं ले सकेंगे विश्वविद्यालय और कॉलेज : यूजीसी।



नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालय और कॉलेजों से कहा है कि वे एक साथ इकट्ठी फीस नहीं ले सकते। कोरोना के चलते अभिभावक परेशान हैं. ऐसे में उसे एक साथ सेमेस्टर व परीक्षा फीस नहीं मांगनी चाहिए। संस्थानों को इसके समाधान के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशने को कहा गया है। दरअसल छात्रों और अभिभावकों ने यूजीसी कोविड-19 छात्र शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत दी है। उनकी शिकायत पर यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने सभी 750 विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखा है। उन्होंने सभी संस्थानों से आग्रह किया कि महामारी के चलते सबको दिक्कत है। ऐसे में वे बीच का रास्ता निकालें, ताकि संस्थानों व छात्रों को परेशानी न हो।





 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, May 16, 2020

प्रयागराज : शासन की रोक के बावजूद निजी स्कूल वसूल रहे अतिरिक्त शुल्क, शासन ने ट्यूशन फीस के अलावा किसी प्रकार के शुल्क लेने पर लगाई है रोक

शासन की रोक के बावजूद निजी स्कूल वसूल रहे अतिरिक्त शुल्क, शासन ने ट्यूशन फीस के अलावा किसी प्रकार के शुल्क लेने पर लगाई है रोक।


प्रयागराज। कोरोना संकट के चलते शासन की ओर से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे प्रकार के शुल्क की वसूली पर रोक है। इसके बावजूद शहर के तमाम स्कूल अभिभावकों से पुरानी फीस के बहाने अतिरिक्त शुल्कों की वसूली कर रहे हैं। कुछ स्कूल वाले तो फीस का ब्रेकअप ही नहीं दिखा रहे हैं, जबकि नियम है कि हर स्कूल को फीस का ब्रेकअप देना होगा कि वह किस मद में कितनी फीस ले रहे हैं फीस का ब्रेकअप नहीं होने से अभिभावक मात्र ट्यूशन फीस की जगह पूरी फीस जमा करने को बाध्य हैं। नियमानुसार स्कूलों को फीस का विवरण स्कूल की वेबसाइट पर देना अनिवार्य है, लेकिन कई स्कूलों ने ऐसा नहीं किया। पिछले दिनों शासन के आदेश के बाद डीएम ने भी इस संबंध में स्कूलों के प्रबंधन और जिला विद्यालय निरीक्षक के साथ बैठक में वर्तमान शैक्षिक सत्र में फीस न बढ़ाने, प्रवेश, परिवहन, कंप्यूटर, बिजली, खेल आदि के शुल्क नहीं लेने का आदेश दिया था।

डीएम के आदेश के बाद भी फीस तो पुरानी ले रहे हैं, लेकिन उसमें पिछले बार की तरह ही अतिरिक्त शुल्क जुड़े हुए हैं। डीएम ने स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक में स्कूलों से फीस का विवरण जिला विद्यालय निरीक्षक के पास मेल करने को कहा था लेकिन स्कूलों ने यह विवरण भी नहीं भेजा। वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन अभिभावकों के पास मैसेज करके और क्लास टीचर के जरिए दबाव बनाकर फीस जमा करने को कहा रहे हैं।






 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Thursday, May 14, 2020

स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ याचिका दाखिल, इलाहाबाद हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई

स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ याचिका दाखिल, इलाहाबाद हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई।



स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ याचिका दाखिल, इलाहाबाद हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई


प्रयागराज : प्राइवेट स्कूलों द्वारा आपदा के दौरान भी पूरी फीस वसूले जाने और अभिभावकों पर दबाव डालने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।

याचिका हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुशांत चंद्रा और आदर्श भूषण ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई निजी स्कूल अभिभावकों पर अप्रैल माह की पूरी फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। उनकी ओर से लगातार यह मैसेज भेजा जा रहा है कि छात्र का दाखिला स्कूल जारी रखने के लिए फीस जमा करें। एक स्कूल द्वारा भेजे गए मैसेज का हवाला भी याचिका में दिया गया है। याची का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण लोगों के व्यापार और काम धंधे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। आमदनी काफी कम हो गई है। तनख्वाह में भी कटौती हो रही है। ऐसी स्थिति में स्कूलों द्वारा सिर्फ जरूरत भर की ही फीस ली जानी चाहिए। याचिका में बढ़ी फीस को कम करने और फीस जमा करने की समयावधि बढ़ाने की मांग की गई है।






 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Friday, May 1, 2020

प्रयागराज : स्कूलों ने माना शासन का निर्देश, कम कर दी बढ़ी फीस

प्रयागराज : स्कूलों ने माना शासन का निर्देश, कम कर दी बढ़ी फीस।





 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Monday, April 27, 2020

कोरोना वायरस की असाधारण परिस्थितियों के दृष्टिगत शैक्षिक सत्र 2020-21 में विद्यालयों द्वारा शुल्क वृद्धि न किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी

कोरोना वायरस की असाधारण परिस्थितियों के दृष्टिगत शैक्षिक सत्र 2020-21 में विद्यालयों द्वारा शुल्क वृद्धि न किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी।


यूपी में पैरेंट्स को राहत : प्राइवेट स्कूलों में फीस ना बढ़ाने का आदेश जारी


प्रदेश के निजी स्कूल इस शैक्षिक सत्र में फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। जिन स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है, उन्हें अपना आदेश वापस लेना पड़ेगा। ये आदेश यूपी बोर्ड, आईसीएससी, सीबीएसई व अन्य  बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने यह जानकारी दी है।

डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण उपजी कठिन परिस्थितियों के कारण राज्य सरकार ने अभिभावकों को राहत देने का निर्णय लिया है। लॉकडाउन के कारण कुछ छात्र–छात्राओं के अभिभावकों के रोजगार भी  प्रभावित हुए हैं और ऐसे छात्रों के अभिभावकों को शुल्क जमा किए जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत बेसिक शिक्षा परिषद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (आईसीएसई),  इंटरनेशनल बेक्कलॉरेट (आईबी) और इंटरनेशनल जनरल सर्टिफिकेट आफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईजीसीएसई) के स्कूल  2020–21 के सत्र में फीस नहीं बढ़ाएंगे। 


स्कूलों को 2019–20 में नए प्रवेश व  हर कक्षा के लिए निर्धारित शुल्क संरचना के अनुसार ही  फीस लेनी होगी। यदि किसी स्कूल ने  इस सत्र ( 2020–21)  में फीस बढ़ाई है और  बढ़ी हुई दरों से शुल्क लिया जा चुका है तो बढे हुए अतिरिक्त शुल्क को अगले महीनों में समायोजित किया जाएगा। विभाग इससे पहले मासिक आधार पर शुल्क लेने का निर्णय भी जारी कर चुका हैं। जो लोग त्रैमासिक शुल्क नही दे सकते हैं उन पर दबाव न डाला जाए । यदि स्कूल इस आदेश को न माने तो प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अधिनियम–2018 के तहत गठित जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष  शिक़ायत की जा सकती है।



सभी बोर्डों के निजी स्कूल इस साल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस, आदेश जारी



सभी आईआईटी में इस साल नहीं बढ़ेगी फीस, मानव संसाधन विकास मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी

सभी आईआईटी में इस साल नहीं बढ़ेगी फीस, मानव संसाधन विकास मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी।


IIT/IIIT: देश के शीर्ष तकनीकी शिक्षण संस्थानों में इस साल नहीं बढ़ेगी ट्यूशन फीस, मानव संसाधन विकास मंत्री ने की घोषणा

Publish Date:Mon, 27 Apr 2020 10:04 AM (IST)






















 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

लखनऊ : अभिभावकों से एक माह की फीस जमा करने की निजी स्कूल प्रबंधकों ने की अपील

लखनऊ : अभिभावकों से एक माह की फीस जमा करने की निजी स्कूल प्रबंधकों ने की अपील।


लखनऊ ट्रांस गोमती स्कूल वीइकल ओनर्स वेलफेयर असोसिशन ने उठाई आवाज•एनबीटी, लखनऊ : अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस न वसूले जाने के आदेश के खिलाफ लखनऊ ट्रांस गोमती स्कूल वीइकल ओनर्स वेलफेयर असोसिएशन भी विरोध में उतर आया है। असोसिएशन के अध्यक्ष अंशु मिश्रा ने बताया कि इन दिनों स्कूल अपनी फीस में कई तरह की कटौतियां कर रहे हैं। इसे देखते हुए वह भी ट्रांसपोर्ट फीस में 20 प्रतिशत की छूट देने को तैयार हैं। उनका कहना है कि फीस का 25 फीसदी हिस्सा ईंधन में खर्च होता है और उन्हें भी ड्राइवर और स्टाफ को वेतन देना होता है। साथ ही टैक्स भी देना पड़ता है। फीस न लेने पर लोन पर वाहन खरीदने वाले संचालकों को समस्या होगी।

अंशु मिश्रा ने बताया कि केवल 15 फीसदी ट्रांसपोर्ट स्कूल मुहैया करवाते हैं, जबकि 85 फीसदी ट्रांसपोर्ट निजी होते हैं। लॉकडाउन में सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं। ऐसे में शासन ने पहले स्कूलों को अभिभावकों से तीन महीने की फीस अडवांस में न लिए जाने का आदेश दिया था। बाद में उसके स्थान पर उनसे मासिक फीस लेने की छूट दे दी। इसी को लेकर असोसिएशन ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में अभिभावक भी उनका सहयोग पहले कि तरह करते रहें।
अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस न लेने के आदेश का विरोध










 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Sunday, April 26, 2020

प्रयागराज : एकमुश्त फीस वसूली पर लगी रोक तो स्कूलों ने खोजा नया तरीका, शिक्षकों को वेतन देने के नाम पर मांग रहे फीस

प्रयागराज : एकमुश्त फीस वसूली पर लगी रोक तो स्कूलों ने खोजा नया तरीका, शिक्षकों को वेतन देने के नाम पर मांग रहे फीस।






 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Tuesday, April 21, 2020

लॉक डाउन अवधि में विद्यालय बन्द रहने तक परिवहन शुल्क न लिए जाने हेतु आदेश जारी, देखें

लॉक डाउन अवधि में विद्यालय बन्द रहने तक परिवहन शुल्क न लिए जाने हेतु आदेश जारी, देखें।

बस व वैन का शुल्क लॉकडाउन अवधि में विभाग हुआ सख्त, सख्त कार्यवाई के दिए निर्देश

Monday, April 20, 2020

फीस पर अभिभावकों, स्कूल प्रबंधनों में घमासान, अभिभावकों की है शिकायत- स्कूल प्रबंधन लगातार फीस जमा करने का बना रहे दबाव

फीस पर अभिभावकों, स्कूल प्रबंधनों में घमासान, अभिभावकों की है शिकायत- स्कूल प्रबंधन लगातार फीस जमा करने का बना रहे दबाव।







 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Sunday, April 19, 2020

स्कूल बंद तो बच्चों से परिवहन शुल्क क्यों?, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने सभी DIOS से मांगी रिपोर्ट

स्कूल बंद तो बच्चों से परिवहन शुल्क क्यों?, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने सभी DIOS से मांगी रिपोर्ट।






 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।