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Tuesday, May 4, 2021

तालाबंदी के दौरान स्कूल नहीं ले सकते पूरी फीस : सुप्रीमकोर्ट

तालाबंदी के दौरान स्कूल नहीं ले सकते पूरी फीस : सुप्रीमकोर्ट


'सुप्रीम' आदेश: जब स्कूल खुले ही नहीं तो पूरी फीस कैसे? 15 फीसदी कटौती अनिवार्य


कोरोना महामारी की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं, ऐसे में विद्यार्थी उन सभी सुविधाओं से वंचित रह गए, जो उन्हें विद्यालय जाने पर हमेशा से मिलती आई हैं। इसलिए सभी शैक्षणिक संस्थान अपनी फीस कम करें।- सुप्रीम कोर्ट


कोरोना महामारी की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं, ऐसे में विद्यार्थी उन सभी सुविधाओं से वंचित रह गए, जो उन्हें विद्यालय जाने पर हमेशा से मिलती आई हैं। इसलिए सभी शैक्षणिक संस्थान अपनी फीस कम करें। संस्थानें विद्यार्थियों से सत्र 2020-21 की वार्षिक फीस ले सकते हैं, किंतु उन्हें इसमें 15 फीसदी की कटौती करनी पड़ेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह फैसला सुनाया गया।


जस्टिस एएम खानविल्कर और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने शैक्षणिक संस्थानों को छह किश्तों में 5 अगस्त 2021 तक फीस लेने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई विद्यार्थी समय पर फीस जमा कर पाने में असमर्थ है, तो उन परिस्थितियों में कक्षा दसवीं और बारहवीं के छात्रों का परिणाम रोका नहीं जा सकता। विद्यालय ऐसे छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक नहीं सकते हैं।


यह था पूरा मामला

हाल ही में राजस्थान सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 72 के तहत राज्य के 36,000 सहायता प्राप्त निजी और 220 सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों को वार्षिक फीस में 30 फीसदी कटौती करने का निर्देश दिया था। लेकिन इसे संविधान के अनुच्छेद 19.1.जी के तहत विद्यालयों को व्यवसाय करने के लिए दिए गए मौलिक अधिकार का विरूद्ध मानते हुए विद्यालयों ने सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।


इस्तेमाल न की गई सुविधाओं की फीस नहीं ले सकते विद्यालय

न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा अपीलकर्ता (विद्यालय) शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए 2016 के कानून के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शुल्क वसूल कर सकते हैं, लेकिन शैक्षणिक संस्थान सत्र 2020-21 के लिए विद्यार्थियों द्वारा इस्तेमाल न की गईं सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें।’


उच्चतम न्यायालय ने एक बड़े फैसले में स्कूलों को आदेश दिया कि वे छात्रों से स 2020-21 की वार्षिक फीस ले सकते हैं लेकिन इसमें 15 फीसदी की कटौती करें क्योंकि छात्रों ने उनसे वे सुविधा नहीं ली जो स्कूल आने पर लेते।

 
जस्टिस एएम खानविल्कर की पीठ ने आदेश दिया कि ये फीस छह किश्तों में 5 -अगस्त 2021 तक ली जाएगी और फीस नहीं देने पर या देरी पर 10वीं और 12वीं छात्रों का रिजल्ट नहीं रोका जाएगा और न ही उन्हें परीक्षा में बैठने से रोका जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई माता-पिता फीस देने की स्थिति में नहीं है तो स्कूल उनके मामलों पर विचार करेंगे लेकिन उनके बच्चे का रिजल्ट नहीं रोकेंगे।


पीठ ने माना कि यह आदेश डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसमें यह कहीं भी नहीं है कि सरकार महामारी की रोकथाम के लिए शुल्क और फीस या अनुबंध में कटौती करने का आदेश दे सकती है। इस एक्ट में अथोरिटी का आपदा के प्रसार की रोकथाम के उपाए करने के लिए अधिकृत किया गया है।


15 फीसदी बचत हुई
शीर्ष अदालत ने कहा कि स्कूलों में लॉकडाउन के दौरान बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, स्टेशनरी और रखरखाव की कीमत बचाई हैं। ये बचत 15 फीसदी के आसपास बैठती है। ऐसे में छात्रों से ये पैसा वसूलना शिक्षा का व्यावसायीकरण करने जैसा होगा।


क्या था मामला
मामला राजस्थान 36 हजार सहायता प्राप्त निजी स्कूलों और 220 सहायता प्राप्त अल्पसंयख्क स्कूलों का है। राजस्थान सरकार ने स्कूलों को आदेश दिया था कि लॉकडाउन को देखते हुए स्कूल छात्रों से 30 फीसदी कटौती करें। स्कूलों को फीस में कटौती करने का आदेश डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 72 के तहत दिया गया था। इस आदेश को स्कूलों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि ये आदेश उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19.1 जी के तहत मिले व्यावसाय करने के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है।

Sunday, April 25, 2021

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक 

अभिभावकों ने कहा, स्कूल ट्यूशन फीस की जगह एनुअल चार्ज जोड़कर वसूल रहे कंपोजिट फीस


प्रयागराज : कोरोना संकट के बीच खुले स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल वाले ऑफलाइन क्लास के - दौर में भी अभिभावकों से एनुअल - चार्ज वसूल रहे हैं। इसमें कंप्यूटर क्लास स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोट्र्स, लैब सहित डेवलपमेंट चार्ज सहित कई दूसरे चार्ज को जोड़कर वसूला जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों ने फीस का ब्रेकअप खत्म करके सीधे वार्षिक एवं तिमाही फीस तय कर दी है। स्कूल वालों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों में जिला विद्यालय निरीक्षक तक अपनी बात | पहुंचाई है लेकिन उनके यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


निजी स्कूलों की ओर से मनमाना फीस वसूली के खिलाफ जब अभिभावकों ने आवाज उठाई तो स्कूलों ने ट्यूशन फीस सहित पूरी फीस को एक में मिलाकर कंपोजिट फीस के नाम वसूलना शुरू कर दिया। बीते शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की ओर से जब ऑनलाइन क्लास के दौर में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे शुल्क वसूलने का विरोध शुरू हुआ तो इससे बचाव के लिए अधिकतर स्कूलों ने एनुअल चार्ज को 'कंपोजिट फीस में शामिल कर दिया मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के साथ ही अभिभावकों पर एनुअल चार्ज भी थोप दिए गए हैं। 


एनुअल चार्ज को कंपोजिट फीस में शामिल करते हुए एक महीने की बजाय तीन महीने की फीस वसूली जा रही है। इस बारे में जब जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अब दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद तीन महीने की जगह एक महीने की फीस वसूले जाने के बारे में आदेश जारी किया जाएगा।



अभिभावकों ने उठाई आवाज, कोरोना संक्रमण काल में बंद हों ऑनलाइन कक्षाएं

प्रयागराज पूरे देश में कोरोना संक्रमण की मार के बीच स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिए गए हैं। अभिभावकों को ऑनलाइन क्लास से बच्चों को जोड़ने के साथ तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से ऑनलाइन क्लास पर रोक लगाने के साथ ही फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।

Thursday, March 25, 2021

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील


लखनऊ : उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कोविड-19 के मद्देनजर स्कूल प्रबंधकों से इस साल भी फीस न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार का सहयोग देते हुए जैसे पिछले साल फीस नहीं बढ़ाई, उसी तरह इस साल भी करें, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उप मुख्यमंत्री बुधवार को लामार्टीनियर गल्र्स कालेज में आयोजित कोरोना योद्धाओं के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कोरोना काल के दौरान पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 23 प्रमुख लोगों को सम्मानित किया।



Sunday, February 21, 2021

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति
BEd- BTC Scholorship and Fees Refund 2021



प्रदेश के बी.एड.पाठ्यक्रम में अध्ययनरत गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश सरकार ने बी.एड.और बी.टी.सी. की सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामले में इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाली शिक्षण संस्थाओं की जांच करने के आदेश दिये थे।


इसके लिए पिछले साल अक्तूबर में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय जांच कमेटी भी गठित की गयी थी मगर बीती 16 फरवरी को शासन से एक आदेश जारी करके इस राज्य स्तरीय कमेटी को निरस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गयी जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और सम्बंधित उप जिलाधिकारी को सदस्य बनाया गया।


इस जांच कमेटी को अपनी आठ बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट आगामी 10 मार्च को शासन को सौंपने के निर्देश दिये गये थे। मगर अब इस समय सीमा को घटाकर 26 फरवरी तक कर दिया गया है। 26 फरवरी तक समाज कल्याण निदेशालय और शासन को यह जांच रिपोर्ट जिलों से मिल जाएगी, उसके बाद जांच रिपोर्ट में जो शिक्षण संस्थाएं बी.एड., बी.टी.सी. व अन्य पाठ्यक्रमों छात्रवृत्ति तथा फीस भरपाई के फर्जीवाड़े में लिप्त पायी जाएंगी उन्हें छोड़कर बाकी अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं के बी.एड.के पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


चूंकि कोरोना संकट की वजह से मौजूदा शैक्षिक सत्र में बीटीसी का सत्र शून्य कर दिया गया है इसलिए बीटीसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई नहीं दी जाएगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति अनुभाग से जुड़े अधिकारियों से मिली है। बी.एड.पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को प्रथम वर्ष 51 हजार 250 रूपये, और 30 हजार द्वितीय वर्ष में बतौर फीस भरपाई दी जाती है इसके अलावा हर साल दो वर्ष के इस पाठ्यक्रम में हर साल लगभग 9 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिलती है।


2019-20 के शैक्षिक सत्र में समाज कल्याण विभाग से बी.एड.पाठ्यक्रम के 1लाख 12 हजार और सामान्य वर्ग 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जिस पर अनुसूचित जाति के बच्चों पर 442 करोड़ और सामान्य वर्ग के बच्चों पर 45.86 करोड़ रूपये का व्यय आया था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने भी पिछले शैक्षिक सत्र में करीब 80 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को बी.एड.पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया था।

Monday, February 8, 2021

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क


अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है।


गोरखपुर । मदरसों में अब निशुल्क पढ़ाई नहीं होगी। मान्यता प्राप्त और गैर अनुदानित मदरसे अब हिसाब से शुल्क का निर्धारण कर सकेंगे। मदरसा शिक्षा परिषद ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी है। मदरसा प्रबंधन को शैक्षिक सत्र शुरू होने के एक माह पहले छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क का अनुमोदन करेगी। प्रदेश में यह पहली बार होगा कि मदरसों के छात्रों से किसी तरह का शुल्क लिया जाएगा। अब तक मुफ्त शिक्षा दी जाती है। छात्र-छात्राओं से किसी भी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाता रहा।

अगले सत्र से लिया जाएगा शुल्‍क

अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा, हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है। शुल्क संरचना का निर्धारण करते समय क्षेत्रीय असमानता, आर्थिक विषमता तथा शैक्षिक स्तर का भी विशेष ध्यान रखना होगा। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क, संयुक्त वार्षिक शुल्क एवं विकास शुल्क लिया जा सकेगा। विद्यार्थियों को फीस की रसीद देनी होगी।

पहले नहीं ली जाती रही फीस

दरअसल मदरसे लोगों से मिलने वाले चंदे से चलते हैं इसलिए वहां पढऩे वाले बच्‍चों से किसी तरह ही फीस नहीं ली जाती। हास्टल में रहने वाले बच्‍चों के लिए भी खाने व रहने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता, लेकिन उनसे भी शुल्क लिया जाएगा। गोरखपुर में दस अनुदानित और दौ सौ मान्यता प्राप्त व गैर अनुदानित मदरसे हैं जिनमें तकरीबन 32 हजार से ज्यादा बच्‍चे बढ़ते हैं। ऐसे में शुल्क लिए जाने पर 30 हजार बच्‍चे प्रभावित होंगे। उनके सामने फीस देकर शिक्षा ग्रहण करने की समस्‍या पैदा हो जाएगी। कुल मिलाकर अब मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुल्‍क देना ही पड़ेगा। शुल्‍क न दे पाने की स्थिति में पढ़ाई नहीं हो पाएगी। मदरसा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भेजकर शुल्क लिए जाने के निर्णय से अवगत करा दिया है।

Sunday, December 27, 2020

अब स्कूलों में मनमानी फीस पर लगेगा अंकुश, शिक्षा मंत्रालय ने मजबूत तंत्र बनाने की तेज की पहल, संस्थानों की गुणवत्ता के आधार पर फीस का मानक होगा तय


नई दिल्ली : बच्चों को स्कूल बैग के बोझ से मुक्ति दिलाने के बाद केंद्र सरकार का ध्यान अब शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस से अभिभावकों को राहत दिलाने पर है। इसको लेकर सरकार तेजी से काम कर रही है। माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र तक स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वह एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर देगी, जिससे मनमानी फीस पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगी। मनमानी फीस पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनाने का सुझाव दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा मंत्रलय एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाने में जुटा है, जिससे फीस का विवाद सदैव के लिए खत्म हो जाए। साथ ही निजी क्षेत्र के बेहतर शैक्षणिक संस्थानों को इससे कोई नुकसान भी न हो। यही वजह है कि इस पूरी व्यवस्था को संस्थानों की ग्रेडिग से जोड़ा जाएगा। यानी जो शैक्षणिक संस्थान गुणवत्ता के आधार पर जिस ग्रेड का होगा, वह एक निर्धारित दायरे तक ही अपनी फीस रख सकेगा। साथ ही बढ़ोत्तरी की भी उसकी एक सीमा होगी। इसके साथ ही जो भी फीस वह लेगा, उसकी उसे हर साल आनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से अपने नोटिस बोर्ड पर जानकारी साझा करनी होगी। मौजूदा समय में निजी संस्थानों में फीस को लेकर कोई अंकुश नहीं है। खासबात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में किस ग्रेड का संस्थान अधिकतम कितनी फीस ले सकेगा, यह निर्धारित रहेगा। ग्रेड निर्धारण सरकार के स्तर पर तरीके से किया जाएगा।

Wednesday, December 23, 2020

UGC ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को चेताया, कोर्स ज्वाइन न वाले पहले साल के स्टूडेंट्स की पूरी फीस रिफंड करें

UGC ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को चेताया, कोर्स ज्वाइन न वाले पहले साल के स्टूडेंट्स की पूरी फीस रिफंड करें


प्रवेश रद्द कराने वाले छात्रों को लौटानी होगी फीस, UGC का फरमान


नई दिल्ली : प्रवेश रद कराने वाले छात्रों की पूरी फीस वापस न करना उच्च शिक्षण संस्थानों को भारी पड़ सकता है। यूजीसी ने ऐसे संस्थानों को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की फीस में किसी तरह की कटौती और उसे वापस करने में देरी की गई, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यूजीसी की ओर से सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को पहले ही निर्देश दिए गए थे जिसमें कहा गया था कि चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान यदि स्नातक और परास्नातक के पहले वर्ष में प्रवेश ले चुका कोई छात्र अपना प्रवेश निरस्त कराता है तो उसकी फीस वापस कर दी जाए। साथ ही कहा था कि यदि छात्र ने 30 नवंबर 2020 तक अपना प्रवेश निरस्त कराया है तो उसकी पूरी फीस वापस की जाए। लेकिन यदि इसके बाद निरस्त कराता है, तो एक हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस काट कर पूरी फीस लौटाई जाए। यूजीसी का मानना था कि कोरोना के चलते छात्रों के परिजन आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि कोई छात्र किसी कारण अपना प्रवेश रद कराता है तो उसकी फीस लौटा दी जाए।


उच्च शिक्षा सेक्टर नियंत्रक यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को चेतावनी दी है। यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से कहा है कि ऐसे कॉलेज और यूनिलर्सिटीज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो पहले साल के ऐसे स्टूडेंटस की फीस वापस नहीं कर रहे जो आर्थिक समस्या और किसी और कारण से कोर्स ज्वाइन नहीं कर पाए हैं। सभी यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर को यूजीसी के चैयरमैन रजनीश जैन ने एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि यूजीसी को सैकड़ों शिकायतें मिली हैं, शिकायतों में बताया गया है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्टूडेंट्स की फीस रिफंड नहीं कर रहे हैं। 


आपको बता दें कि यूजीसी ने अपनी एकेडमिक गाइडलाइंस में साफ लिखा था कि अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स सेशन 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण स्टूडेंट्स आर्थिक समस्या से गुजर रहे हैं, जिसके चलते इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 31 दिसंबर तक एडमिशन में जीरो कैंसलेशन चार्जेस हों।


पत्र में लिखा गया है कि    अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स सेशन 2020-21 में 31 दिसंबर तक किए रद्द किए गए, एडमिशन वापस लिए गए की पूरी फीस जो स्टूडेंट से ली गई है वापस की जाएगी। इसमें 1000 रुपए से ज्यादा की प्रोसिंग फीस की कटौती ही की जाएगी। वहीं यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने चिंता जाहिर की है कि अभी तक कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी के खिलाफ कई शिकायतें जो इन निर्देशों को नहीं मान रही हैं।

Monday, November 30, 2020

लॉकडाउन में फीस वसूलने पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, महाराजगंज बीएसए से मांगा जवाब

लॉकडाउन में फीस वसूलने पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, महाराजगंज बीएसए से मांगा जवाब



नो क्लास-नो फीस को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने महराजगंज के बीएसए को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। उनसे 2 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। बीएसए ने हाईकोर्ट के नोटिस का संज्ञान लेते हुए नौतनवा क्षेत्र के नौ निजी स्कूल संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा है। इससे नौतनवा क्षेत्र के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।अभिभावक संघ नौतनवा के अध्यक्ष वसीम खान ने 16 अक्तूबर को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर लॉकडाउन के दौरान कस्बे में संचालित निजी विद्यालयों द्वारा स्कूल बंद होने के बावजूद मनमाने तरीके से फीस वसूलने का शिकायत की थी।


वसीम समेत 12 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की बेंच ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए निर्देश जारी किया कि याचिकाकर्ता द्वारा पार्टी बनाए गए 9 विद्यालय की फीस वसूलने की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान बंद विद्यालय किसी भी तरह का शुल्क नहीं वसूल सकते हैं। उच्च न्यायालय ने 2 दिसंबर तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जवाब-तलब किया है। 

बीएसए ने नौ स्कूलों से मांगा स्पष्टीकरण 
उच्च न्यायालय के नोटिस का अनुपालन कराते हुए बीएसए ने 24 नवंबर 2020 को नौतनवा कस्बे के सभी नौ स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। बीएसए ओम प्रकाश यादव ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर नौ स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। यदि स्कूलों ने मनमानी से फीस वसूली की होगी तो कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।

Saturday, November 21, 2020

स्कूलों की फीस माफी के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को कितना हो रहा नुकसान, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा जवाब

स्कूलों की फीस माफी के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब


प्रयागराज। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को रहे नुकसान तथा कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नत करने सहित कई मांगों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से जवाब मांगा है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्राइवेट स्कूल लॉकडाउन की अवधि की फीस अभिभावकों से न बसूलें।


मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोबिंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। - याचिका की अगली सुनवाई चार दिसंबर को होगी। संस्था ने याचिका में एक शोध का हवाला देते हुए कहा है कि ऑनलाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक और मानसिक नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर रही है।


ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को कितना हो रहा नुकसान, हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक से मांगा जवाब

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को रहे नुकसान तथा कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नत करने सहित कई मांगों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से जवाब मांगा है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्राइवेट स्कूल लॉकडाउन की अवधि की फीस अभिभावकों से न वसूलें। 


मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका की अगली सुनवाई चार दिसंबर को होगी। संस्था ने याचिका में एक शोध का हवाला देते हुए कहा है कि ऑनलाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक और मानसिक नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर रही है। संस्था का कहना है कि वह एक ट्रस्ट है, जो बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, विकास व कल्याण के लिए काम करता है।


संस्था का कहना है कि जब लॉकडाउन में स्कूल बंद थे तो प्राइवेट स्कूलों को फीस नहीं लेनी चाहिए और स्कूलों की फीस व अध्यापकों के वेतन को रेगुलेट किया जाए। साथ ही बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। याचिका पर राज्य सरकार के अधिवक्ता राजीव सिंह ने प्रतिवाद किया।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा आठ तक के बच्चों को परीक्षा के बगैर प्रोन्नत करने और लॉकडाउन के दौरान गैर वित्त पोषित प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस मांगने पर रोक लगाने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की याचिका पर दिया है।


कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। याचिका पर राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता राजीव सिंह ने प्रतिवाद किया। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, विकास व कल्याण के कार्य कर रही संस्था का कहना है कि जब लाकडाउन में स्कूल बंद थे तो प्राइवेट स्कूलों को फीस नहीं लेनी चाहिए। स्कूलों की फीस व अध्यापकों का वेतन रेगुलेट किया जाए। साथ ही कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए।


याची का यह भी कहना है कि आन लाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक व मानसिक नुकसान हो रहा है। उनकी क्षमता पर असर पड़ रहा है। इसके लिए शोध का भी हवाला दिया गया।

Saturday, September 26, 2020

एक महीने की भी फीस न देने वाले छात्रों को स्कूल में नहीं मिलेगा प्रवेश - निजी स्कूलों ने शासन को कराया अवगत

एक महीने की भी फीस न देने वाले छात्रों को स्कूल में नहीं मिलेगा प्रवेश

12 अक्टूबर से विद्यालय खोलने की मांग, फीस जमा न करने वालों को नहीं मिलेंगी कक्षाएं।

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला को सौंपा ज्ञापन।


अक्तूबर में अगर निजी स्कूल खुलें तो उन छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा, जिन्होंने अभी तक एक भी महीने की फीस जमा नहीं कराई है।


निजी स्कूलों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने अपने इस निर्णय से शासन को लिखित में अवगत करा दिया है। पहले चरण में केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए ही स्कूल खोलने का प्रस्ताव है।


एसो. अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि निजी स्कूलों को 30 से 40 प्रतिशत तक छात्रों की ही फीस मिली है। बार-बार कहने के बावजूद ऐसे कई अभिभावक हैं जिन्होंने अप्रैल से अभी तक एक भी महीने की फीस जमा नहीं कराई है। 12 अक्तूबर से स्कूल खोलने का प्रस्ताव शासन को सौंप दिया है।


इसमें साफ तौर पर स्कूलों के निर्णय से शासन को अवगत करा दिया है कि जिन अभिभावकों ने एक भी महीने की फीस नहीं दी है, उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी निजी स्कूलों के प्रबंधन ने एकमत से यह निर्णय लिया है। अभिभावकों को पहले भी निर्देश दिया था कि जिन्हें फीस देने में कठिनाई है, वे साक्ष्य के साथ 20 प्रतिशत तक फीस कटौती को आवेदन कर सकते हैं।


बताया कि अभी केवल बड़े क्लास खोलने का ही प्रस्ताव दिया है। वहीं, जो छात्र नहीं आना चाहते हैं तो उनकी इच्छा है। इतना ही नहीं जो स्कूल अभी नहीं खोलना चाहते, उन पर भी कोई दबाव नहीं होगा। छात्र केवल अभिभावकों की अनुमति से ही स्कूल आएंगे।


शासन को एसओपी भी सौंपी
अध्यक्ष ने बताया कि सभी स्कूलों ने बात कर शासन के निर्देश अनुसार स्कूल खोलने को एसओपी भी तैयार कर शासन को सौंप दी है। इसके अनुसार 12 अक्तूबर से 10वीं और 12वीं की ही पढ़ाई शुरू होगी। इन्हें प्रोजेक्ट वर्क, प्रैक्टिकल और मिड टर्म परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। स्थिति को देखते हुए बाद में 9वीं और 11वीं के छात्रों को पढ़ाई के लिए बुलाया जाएगा। 


लखनऊ । अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने 12 अक्टूबर से दो शिफ्टों में विद्यालय खोले जाने की मांग की है। इस संबंध में प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला को ज्ञापन दिया है। एसोसिएशन ने यह साफ कर दिया है कि जिन बच्चों की एक भी माह की फीस लॉकडाउन से अबतक नहीं जमा की गई है वह उन्हें कक्षाएं नहीं देंगे। फीस जमा न करने वाले बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट भी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालय खोले जाने को लेकर कोविड-19 से विद्यार्थियों की सुरक्षा के मानक भी निर्धारित किए हैं।


एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिन बच्चों की फीस नहीं जमा है उनके अभिभावक धीरे-धीरे फीस जमा कर दें। क्योंकि विद्यालय प्रबंधन को स्टॉफ का वेतन देना है और इसक अलावा अन्य खर्च भी हैं। जिन अभिभावकों के पास आर्थिक समस्या है वह विद्यालय प्रबंधन से मिलकर अपनी समस्या बताएं और एक से दो माह की फीस जमा कर दें। बाकी की फीस के लिए कुछ समय प्रबंधन से मांग लें।


एसोसिएशन ने विद्यालय खोलने को यह बनाए मानक

एक कक्षा में 20 से अधिक विद्यार्थी नहीं होंगे। सीट से सीट की दूरी तीन फिट होगी। सुबह पहली शिफ्ट में आठ से 11 बजे तक 10वीं और 12वीं की कक्षाएं संचालित होंगी। दूसरी पाली में दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक कक्षा नौ और 11 की कक्षाएं संचालित होंगी। प्रवेश और निकास द्वार की अलग-अलग व्यवस्था होगी। 

कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर रहे विद्यालयों में अगर कोई बच्चा संक्रमित होता है तो विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं होगी। प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले विद्यालय के खिलाफ शासन सख्त कार्यवाही करे। 

प्रवेश द्वार से लेकर कक्षाओं तक गोले बने होंगे। शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखा जाएगा। अगर किसी बच्चे को बीच में बाहर जाने की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए पास जारी किया जाएगा। एक बार में एक ही बच्चा बाहर जा सकेगा। बिना मास्क के बच्चों का विद्यालय में प्रवेश नहीं होगा। निकास और प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होगी। 

Saturday, September 19, 2020

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।

Sunday, September 13, 2020

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग                 


बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने व्यापक जनहित में केन्द्र व राज्य सरकारों से अपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन से संक्रमित देश में आर्थिक मंदी से भीषण बेरोजगारी एवं जीवन में अभूतपूर्व संकट झेल रहे करोड़ों लोगों के सामने बच्चों के फीस जमा करने की समस्या बेहद गंभीर है। जिसके कारण लोगों को कई जगह अब धरना-प्रदर्शन आदि के रूप में सामने आना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को पुलिस के डण्डे खाने पड़ रहे हैं, जो अति-दु:खद है। 


मायावती ने शनिवार सुबह ट्विट किया-



उन्होंने कहा कि ऐसे 'एक्ट आफ गॉड' के समय में संवैधानिक मंशा के अनुरूप सरकार को कल्याणकारी राज्य होने की भूमिका खास तौर से काफी बढ़ जाती है। केन्द्र व राज्य सरकारेंअपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी व प्राइवेट स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति करें अथार्त व्यापक जनहित में बच्चों की स्कूल फीस माफ करें।

Sunday, August 30, 2020

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

Wednesday, August 26, 2020

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को दो हफ्त में हलफनामा पेश करने के निर्देश

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी ने शासनादेश को दी है चुनौती


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना के दौर में फीस जमा न होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का नाम न काटने के मामले में याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार से सुझाव मांगे हैं। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से दाखिल अतुल कुमार व एक अन्य की याचिका पर दिया।


याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक यूपी सरकार के 4 जुलाई के उस शासनादेश को चुनौती देकर रद्द करने की गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना आपदा के चलते फीस जमा नहीं होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के नाम न काटे जाएं। अधिवक्ता की दलील थी कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य सरकार को ऐसा शासनादेश जारी करने की शक्ति नहीं है। ऐसे में यह खारिज करने लायक है। 



कोर्ट ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद याचियों से पूछा कि क्या वे अपने शिक्षकों व स्टाफ को बगैर किसी कटौती के नियमित वेतन दे रहे हैं। साथ ही यह सुझाव भी पेश करने को कहा है कि अगर जरूरतमंद विद्यार्थियों को किस्तों में फीस जमा किए जाने की अनुमति दी जाती है तो इसकी वसूली सुनिश्चित करने के लिए क्या एहतियात या शर्तें लगाई जानी चाहिए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद नियत करते हुए इन्हीं पहलुओं पर याचियों और महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह को हलफनामे पर लिखित सुझाव पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Saturday, August 15, 2020

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज।


नई दिल्ली : यूपी के निजी स्कूलों द्वारा मासिक फीस वसूली नहीं करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इजाजत दी है कि वह इस मामले में फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं।




शुक्रवार को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

यूपी के निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदेश सरकार को शासनादेश जारी करने के लिए याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि कोरोना काल में निजी स्कूल मासिक फीस वसूली नहीं करें। लेकिन, याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पैरेंट्स एसोसिएशन ने दायर की थी।


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Monday, August 10, 2020

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस, विभाग ने लिया फैसला

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस

प्रदेश भर के राजकीय,अनुदानित और निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 3 लाख छात्रों के लिए खुशखबरी है। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इस बार छात्रों की वार्षिक फीस नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है।




प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव संजीव सिंह ने बताया कि राजकीय पॉलीटेक्निक में छात्रों की फीस प्राविधिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तय की जाती है। यह एक साल के लिए होती है। वर्तमान में यह 11326 रुपए है। वहीं, निजी संस्थानों में फीस बढ़ाने या पुनः निर्धारण करने का फैसला फीस नियमन समिति करती है। निजी संस्थानों के छात्रों को  करीब 30 हजार रुपए वार्षिक शुल्क जमा करना पड़ता है। इस बार उसमें भी किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 

फीस न बढ़ने की मांग कर रहे थे छात्र
पॉलीटेक्निक के छात्र मुहिम चलाकर सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार मांग करते रहे हैं कि इस बार फीस न बढ़ाई जाए, क्योंकि लॉकडाउन के चलते उनके परिजनों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में फीस वृद्धि कर उन पर नया बोझ लादना सही नहीं होगा।


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Friday, August 7, 2020

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

 
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों का नाम न काटने के शासनादेश को चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी की मांग पर निर्देश दिया कि 12 अगस्त को अगली सुनवाई पर किसी जिम्मेदार अफसर को रिकॉर्ड के साथ मदद के लिए पेश कराएं अन्यथा अदालत मामले की करेगी और अंतरिम राहत देने के अनुरोध पर गौर करेगी। 


न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल करुणेश सिंह पवार को खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से अतुल कुमार और एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक याचिका में यूपी सरकार के जुलाई के शासनादेश को रद्द करने की भी गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों के नाम न काटे स्कूलों

Tuesday, August 4, 2020

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

 
आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


केस वन
माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


केस टू
दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

Saturday, August 1, 2020

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

 

लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है।


शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे।


इन मदो में दी गई राहत : ’ फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ’ पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ’ स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।


ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी।

Friday, July 24, 2020

गुजरात सरकार का फीस नहीं लेने का जैसे ही हुआ आदेश, प्राइवेट स्कूलों ने बंद कर दी ऑनलाइन क्लास

गुजरात सरकार का फीस नहीं लेने का जैसे ही हुआ आदेश, प्राइवेट स्कूलों ने बंद कर दी ऑनलाइन क्लास


गुजरात में कई निजी स्कूलों ने गुरुवार से ऑनलाइन कक्षाएं अनिश्चित काल के लिए रोक दी हैं। ऐसा राज्य सरकार के उस आदेश के बाद किया गया है जिसमें कहा गया था कि जब तक स्कूल फिर से खुल न जाएं, उन्हें छात्रों से फीस नहीं लेनी चाहिए। पिछले सप्ताह जारी एक अधिसूचना में गुजरात सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्कूल बंद रहने तक स्व-वित्तपोषित स्कूलों को छात्रों से ट्यूशन शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया था।


इसके अलावा शैक्षणिक सत्र 2020-21 में स्कूलों को शुल्क में बढो़तरी करने से भी मना किया गया है। इस कदम से नाखुश गुजरात के लगभग 15,000 स्व-वित्तपोषित स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक यूनियन ने ऑनलाइन कक्षाएं रोकने का फैसला किया है।


स्व-वित्तपोषित स्कूल प्रबंधन संघ के प्रवक्ता दीपक राज्यगुरु ने गुरुवार को कहा कि राज्य के लगभग सभी स्व-वित्तपोषित स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने से इनकार कर रहे हैं। 


उन्होंने कहा, 'अगर सरकार का मानना ​​है कि ऑनलाइन शिक्षा वास्तविक शिक्षा नहीं है, तो हमारे छात्रों को ऐसी शिक्षा देने का कोई मतलब नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा तब तक निलंबित रहेगी, जब तक सरकार इस आदेश को वापस नहीं लेती है।' उन्होंने कहा कि संघ राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएगा।