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Saturday, September 19, 2020

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।

Sunday, September 13, 2020

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग                 


बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने व्यापक जनहित में केन्द्र व राज्य सरकारों से अपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन से संक्रमित देश में आर्थिक मंदी से भीषण बेरोजगारी एवं जीवन में अभूतपूर्व संकट झेल रहे करोड़ों लोगों के सामने बच्चों के फीस जमा करने की समस्या बेहद गंभीर है। जिसके कारण लोगों को कई जगह अब धरना-प्रदर्शन आदि के रूप में सामने आना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को पुलिस के डण्डे खाने पड़ रहे हैं, जो अति-दु:खद है। 


मायावती ने शनिवार सुबह ट्विट किया-



उन्होंने कहा कि ऐसे 'एक्ट आफ गॉड' के समय में संवैधानिक मंशा के अनुरूप सरकार को कल्याणकारी राज्य होने की भूमिका खास तौर से काफी बढ़ जाती है। केन्द्र व राज्य सरकारेंअपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी व प्राइवेट स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति करें अथार्त व्यापक जनहित में बच्चों की स्कूल फीस माफ करें।

Sunday, August 30, 2020

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

Wednesday, August 26, 2020

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

फीस जमा नहीं होने पर बच्चों के नाम न काटने को लेकर हाईकोर्ट ने मांगे सुझाव

याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को दो हफ्त में हलफनामा पेश करने के निर्देश

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी ने शासनादेश को दी है चुनौती


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना के दौर में फीस जमा न होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का नाम न काटने के मामले में याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार से सुझाव मांगे हैं। न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से दाखिल अतुल कुमार व एक अन्य की याचिका पर दिया।


याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक यूपी सरकार के 4 जुलाई के उस शासनादेश को चुनौती देकर रद्द करने की गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना आपदा के चलते फीस जमा नहीं होने पर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के नाम न काटे जाएं। अधिवक्ता की दलील थी कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य सरकार को ऐसा शासनादेश जारी करने की शक्ति नहीं है। ऐसे में यह खारिज करने लायक है। 



कोर्ट ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के बाद याचियों से पूछा कि क्या वे अपने शिक्षकों व स्टाफ को बगैर किसी कटौती के नियमित वेतन दे रहे हैं। साथ ही यह सुझाव भी पेश करने को कहा है कि अगर जरूरतमंद विद्यार्थियों को किस्तों में फीस जमा किए जाने की अनुमति दी जाती है तो इसकी वसूली सुनिश्चित करने के लिए क्या एहतियात या शर्तें लगाई जानी चाहिए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद नियत करते हुए इन्हीं पहलुओं पर याचियों और महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह को हलफनामे पर लिखित सुझाव पेश करने के निर्देश दिए हैं।

Saturday, August 15, 2020

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज

यूपी में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, हुई खारिज।


नई दिल्ली : यूपी के निजी स्कूलों द्वारा मासिक फीस वसूली नहीं करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इजाजत दी है कि वह इस मामले में फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं।




शुक्रवार को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

यूपी के निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदेश सरकार को शासनादेश जारी करने के लिए याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि कोरोना काल में निजी स्कूल मासिक फीस वसूली नहीं करें। लेकिन, याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पैरेंट्स एसोसिएशन ने दायर की थी।


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Monday, August 10, 2020

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस, विभाग ने लिया फैसला

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस

प्रदेश भर के राजकीय,अनुदानित और निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 3 लाख छात्रों के लिए खुशखबरी है। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इस बार छात्रों की वार्षिक फीस नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है।




प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव संजीव सिंह ने बताया कि राजकीय पॉलीटेक्निक में छात्रों की फीस प्राविधिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तय की जाती है। यह एक साल के लिए होती है। वर्तमान में यह 11326 रुपए है। वहीं, निजी संस्थानों में फीस बढ़ाने या पुनः निर्धारण करने का फैसला फीस नियमन समिति करती है। निजी संस्थानों के छात्रों को  करीब 30 हजार रुपए वार्षिक शुल्क जमा करना पड़ता है। इस बार उसमें भी किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 

फीस न बढ़ने की मांग कर रहे थे छात्र
पॉलीटेक्निक के छात्र मुहिम चलाकर सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार मांग करते रहे हैं कि इस बार फीस न बढ़ाई जाए, क्योंकि लॉकडाउन के चलते उनके परिजनों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में फीस वृद्धि कर उन पर नया बोझ लादना सही नहीं होगा।


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Friday, August 7, 2020

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

फीस जमा न होने पर स्कूली बच्चों के नाम न काटने के शासनादेश को निजी स्कूलों ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

 
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों का नाम न काटने के शासनादेश को चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी की मांग पर निर्देश दिया कि 12 अगस्त को अगली सुनवाई पर किसी जिम्मेदार अफसर को रिकॉर्ड के साथ मदद के लिए पेश कराएं अन्यथा अदालत मामले की करेगी और अंतरिम राहत देने के अनुरोध पर गौर करेगी। 


न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल करुणेश सिंह पवार को खंडपीठ ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स ऑफ यूपी की ओर से अतुल कुमार और एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों के अधिवक्ता मनीष वैश्य के मुताबिक याचिका में यूपी सरकार के जुलाई के शासनादेश को रद्द करने की भी गुजारिश की गई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना के चलते फीस जमा न होने पर प्राइवेट के बच्चों के नाम न काटे स्कूलों

Tuesday, August 4, 2020

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

 
आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


केस वन
माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


केस टू
दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

Saturday, August 1, 2020

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

 

लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है।


शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे।


इन मदो में दी गई राहत : ’ फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ’ पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ’ स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।


ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी।

Friday, July 24, 2020

गुजरात सरकार का फीस नहीं लेने का जैसे ही हुआ आदेश, प्राइवेट स्कूलों ने बंद कर दी ऑनलाइन क्लास

गुजरात सरकार का फीस नहीं लेने का जैसे ही हुआ आदेश, प्राइवेट स्कूलों ने बंद कर दी ऑनलाइन क्लास


गुजरात में कई निजी स्कूलों ने गुरुवार से ऑनलाइन कक्षाएं अनिश्चित काल के लिए रोक दी हैं। ऐसा राज्य सरकार के उस आदेश के बाद किया गया है जिसमें कहा गया था कि जब तक स्कूल फिर से खुल न जाएं, उन्हें छात्रों से फीस नहीं लेनी चाहिए। पिछले सप्ताह जारी एक अधिसूचना में गुजरात सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्कूल बंद रहने तक स्व-वित्तपोषित स्कूलों को छात्रों से ट्यूशन शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया था।


इसके अलावा शैक्षणिक सत्र 2020-21 में स्कूलों को शुल्क में बढो़तरी करने से भी मना किया गया है। इस कदम से नाखुश गुजरात के लगभग 15,000 स्व-वित्तपोषित स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक यूनियन ने ऑनलाइन कक्षाएं रोकने का फैसला किया है।


स्व-वित्तपोषित स्कूल प्रबंधन संघ के प्रवक्ता दीपक राज्यगुरु ने गुरुवार को कहा कि राज्य के लगभग सभी स्व-वित्तपोषित स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने से इनकार कर रहे हैं। 


उन्होंने कहा, 'अगर सरकार का मानना ​​है कि ऑनलाइन शिक्षा वास्तविक शिक्षा नहीं है, तो हमारे छात्रों को ऐसी शिक्षा देने का कोई मतलब नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा तब तक निलंबित रहेगी, जब तक सरकार इस आदेश को वापस नहीं लेती है।' उन्होंने कहा कि संघ राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाएगा।

Friday, July 10, 2020

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब

लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब
   
याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग कोर्ट से की गई थी.


नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस (School Fees) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग होती है. याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है. 


बताते चलें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.  


अभिभावकों ने अपनी याचिका में फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए जैसी मांग भी कोर्ट से की थी. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लाॉकडाउन जारी है. ऐसे में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अनलॉक 2 की घोषणा करते हुए जारी बंदिशों में कुछ छूट दी है. लेकिन अभी-भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना ने तांडव मचा रखा है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को वापस लॉकडाउन की घोषणा की है.

Thursday, July 9, 2020

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म, 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म,  2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड की ओर से हाईस्कूल के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 501 और इंटरमीडिएट के लिए 601 रुपये रखा गया है। इस शुल्क में स्कूल के प्रधानाचार्यों को फार्म भरने के लिए मात्र 25 पैसे (चवन्नी) दिया जा रहा है। स्कूलों को इसी 25 पैसे में बच्चों का ऑनलाइन फार्म भरवाना होगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि ऑनलाइन फार्म भरने के लिए साइबर कैफे अथवा ऑनलाइन काम करने वाली किसी एजेंसी की सेवा लेनी होगी, इसके लिए कम से कम प्रति फार्म दो रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में प्रधानाचार्यों ने सवाल उठाया है कि 25 पैसे में कैसे फार्म भरा जाएगा।


प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश कुमार शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्यों की ओर से हर साल आवेदन शुल्क में स्कूल का खर्च बढ़ाने की मांग की जाती है, सरकार और बोर्ड की ओर से आश्वासन भी मिलता है परंतु होता कुछ नहीं है। एक बार फिर से यूपी बोर्ड के परीक्षा शुल्क में स्कूलों को फिर से चवन्नी ही मिली है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रवक्ता एसपी तिवारी का कहना है कि यह कितना अव्यवहारिक है कि बोर्ड जब ऑफलाइन आवेदन होता था, उसी समय का आवेदन खर्च हमें दे रहा है जबकि फीस 200 से 500 रुपये तक पहुंच गई।


बोर्ड की ओर से माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश लेने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त रखी गई है। कोरोना संकट के काल में प्रधानाचार्यों ने पांच अगस्त तक शुल्क जमा करने और प्रवेश पूरा होने को अव्यवहारिक बताया है।
बच्चे स्कूल आ नही रहे हैं, उनके लिए स्कूल 31 जुलाई तक बंद हैं। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करना और प्रवेश लेना मुश्किल होगा। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क नहीं जमा करने पर छात्रों, अभिभावकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा।

Sunday, July 5, 2020

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल, शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे

छह जुलाई से सभी माध्यमिक शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे, 

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल


प्रदेश सरकार ने दिया निर्देश स्कूलों की फीस जमा कराएं अभिभावक, एकमुश्त देने में असमर्थ तो किश्तों में दे सकेंगे फीस


फीस न जमा होने पर न काटें बच्चे का नाम, ऑनलाइन क्लास से भी न रोका जाए।


इस दौरान एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, एक समय में ज्यादा अभिभावकों को नहीं बुलाया जाएगा





कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन से बंद चल रहे माध्यमिक विद्यालयों को शासन द्वारा छह जुलाई से खोलने का निर्णय लिया है। यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व संस्कृत बोर्ड सहित सभी बोर्डो से संबंधित विद्यालय सोमवार से खुल जाएंगे और शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इन विद्यालयों में पहुंचेगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्र छात्राओं के एडमीशन भी किए जाएंगे। हालांकि छात्र छात्राएं अभी विद्यालय नहीं आएंगे उनकी छुट्टी रहेगी। सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया होगी। अभी तक माध्यमिक विद्यालय बन्द चल रहे थे। सोमवार से माध्यमिक विद्यालय खुल जाएंगे और सभी विद्यालयों में शिक्षक भी पहुचेंगे। 


ऑनलाइन कक्षाएं नियमित

दिशा निर्देशों में बताया गया है कि छह जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। 10 जुलाई से नियमित ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाए। सभी कक्षा अध्यापक एवं विषय अध्यापक विद्यालय में ही रह कर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करेंगे। जिसकी मानिटरिंग जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से की जाएगी।


लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जो अभिभावक कोरोना संकट के कारण एकमुश्त फीस जमा कराने में असमर्थ हैं, वे स्कूल प्रबंधन के समक्ष किस्तों में फीस जमा कराने का प्रार्थना पत्र दें। विद्यालय प्रबंधन उस पर गंभीरता से विचार करेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करानी होगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा और न ही स्कूल से उसका नाम काटा जाएगा। फीस को लेकर अगर अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 


गौरतलब है कि वित्तविहीन विद्यालयों के संगठनों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि अभिभावक सरकार के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए फीस जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि राज्य व केंद्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक या बड़े संस्थान के कर्मचारी व अधिकारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के आदेश पर वित्तविहीन विद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों नियमित वेतन देना पड़ रहा है।

Friday, July 3, 2020

फीस जमा करने के दबाव पर अभिभावक नाराज, ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की मिल रही चेतावनी


लखनऊ। शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं फोन करके अभिभावकों को धमकाया जा रहा है कि फीस न दी गई तो बच्चे का नाम कट जाएगा। इसे लेकर अभिभावकों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे लगातार थोड़ी थोड़ी फीस जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद दबाव बनाया जा रहा है। राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईएससी से मान्यता प्राप्त करीब एक हजार निजी स्कूल चल रहे हैं। जुलाई से ही ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है। गुरुवार को हजरतगंज के एक निजी स्कूल से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए फोन किया गया और बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं। फीस न जमा कर पाने की स्थिति में स्कूल की ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की चेतावनी दी गई। वहीं इस पूरे मामले में अभिभावक संगठन के अभिषेक खरे की मानें तो सक्षम अभिभावक लगातार फीस जमा कर रहे हैं। उसके बावजूद स्कूल लगातार दबाव बना रहे हैं। जिससे अभिभावक काफी परेशान हैं।

लोहिया विविः पूरी फीस लेने का किया विरोध

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने पूरी फीस न लिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कोरोना महामारी के चलते काफी अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वे पूरी फीस देने में असमर्थ हैं। इसलिए फीस किश्तों में ली जाए। विवि प्रशासन ने 25 जून को सूचना जारी करके छात्रों से 1 से 4 जुलाई के बीच फीस जमा करने को कहा। छात्रों ने 28 जून को इसका विरोध करते हुए कुलपति को ईमेल से मांग पत्र भेजकर फीस किश्तों में लेने. यूटिलिटी चार्ज को नए सत्र की फीस में समायोजित करने की मांग की थी। मगर उनके मांग पत्र पर कुलपति ने विचार नहीं किया और 6 से 20 जुलाई के ही जमा करने व उसके बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं।

कोरोना संक्रमण की इस स्थिति में निजी स्कूलों को शासन के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। अन्यथा विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

Monday, June 29, 2020

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

Saturday, June 27, 2020

अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा


अभिभावकों ने फीस न दिया तो स्कूल बंद कर सकते हैं संचालन, निजी स्कूलों ने साझा की पीड़ा

अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने का स्पष्ट निर्देश दे सरकार

कहा जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। ...


लखनऊ । 18 मार्च से स्कूल बंद हैं। तब से फीस कलेक्शन न के बराबर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो फीस जमा होने का ग्राफ जीरो है। अभिभावकों से स्कूलों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो स्कूलों को संचालन बंद करना पड़ सकता है। यह कहना था अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अनिल अग्रवाल का।


शुक्रवार को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, कनफेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल (सीआईएस),पूर्वांचल स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से हज़रतगंज स्थिति क्राइस्ट चर्च कॉलेज में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसके तहत स्कूलों ने अपनी समस्याओं को साझा किया। अनिल अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों द्वारा लॉकडाउन के दौरान से ही ऑनलाइन एजुकेशन मुहैया कराई जा रही है मगर अभिभावक सहयोग नहीं कर रहे हैं, फीस न आने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित हुआ है। 


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनजीवन सामान्य हो चुका है तो अभिभावक स्कूल फीस देने में क्यों गुरेज कर रहे हैं। फीस ही स्कूलों की आमदनी का एक मात्र जरिया है। अगर स्कूलों को 30 ही प्राप्त नहीं होगी तो संचालन कैसे संभव हो पाएगा।


सीआईएस के सचिव राहुल केसरवानी ने कहाकि कुछ लोगों द्वारा या भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने तीन महीने की फीस माफ कर दी है, जबकि सरकार ने न तो पूर्व में ही न ही वर्तमान में ही कोई फीस माफ करने का आदेश जारी नहीं किया। सशक्त अभिभावक फीस दे ताकि अशक्त अभिभावकों को मदद दी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में स्कूलों से करीब आठ से दस लाख शिक्षक- कर्मचारी जुड़े हैं। ऐसे में फीस न मिलने से इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों में जावेद आलम समेत तमाम लोग मौजूद रहे। 


85 प्रतिशत अभिभावक फीस देने में सक्षम कन्फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट स्कूल्स के अध्यक्ष विशाल जैन ने बताया कि पश्चिमी यूपी में स्कूलों को न के बराबर फीस मिली है। करीब 15 प्रतिशत अभिभावक ऐसे होंगे जो फिलहाल फीस देने में सक्षम नहीं होंगे, लेकिन बाकी 85 प्रतिशत अभिभावकों को फीस जमा कर देनी चाहिए। नहीं तो आने वाले समय में शिक्षकों और स्टाफ के रोजगार पर असर पड़ सकता है।


निजी स्कूलों के संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वे अभिभावकों को स्कूलों की फीस जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करे। अभिभावकों में भ्रम की स्थिति है कि लॉकडाउन अवधि की फीस माफ कर दी जाएगी। इसके चक्कर में अभिभावक फीस जमा नहीं कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि वे बड़ी मुश्किल से अपने स्टाफ को दो महीने का वेतन दे पाए यदि अभिभावकों ने फीस जमा नहीं की तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

Friday, June 26, 2020

नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


नई दिल्ली : स्कूल फीस को लेकर भड़का अभिभावक संघ, 26 से आंदोलन की दी धमकी


School Fees In Lockdown : अभिभावक संघ के अनुसार महज 2-3 घंटे की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए पूरी फीस लेना गलत है। स्कूल एसोसिएशन की दलील है कि वे सिलेबस को अपने हिसाब से पूरा कराने की कर रहे हैं कोशिश



नई दिल्ली। कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) के चलते स्कूल-कॉलेज मार्च से बंद हैं। बच्चों की पढ़ाई में नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन क्लासेज (Online Classes) चलाई जा रही हैं। मगर इन्हीं के बीच फीस को लेकर स्कूल प्रशासन और पैरेंट्स के बीच ठन गई है। स्कूल प्रबंधन जहां समय से फीस भरने को कह रहा है। वहीं अभिभावकों की दलील है कि महज 2 से 3 घंटे के लिए वे पूरी फीस नहीं दे सकते हैं। इस बात को लेकर अभिभावक संघ (Parents Association) हल्लाबोल की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मसले का हल नहीं निकला तो वे 26 तारीख से आंदोलन करेंगे।


इस सिलसिले में उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) के फ़ीस वसूलने (School Fees In Lockdown) के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था। इसके बाद सरकार ने कहा था कि ऑनलाइन क्लास देने वाले प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। मगर सरकार के इस फैसले से अभिभावक संघ सहमत नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभिभावक संघ के अध्यक्ष राम कुमार का कहना है कि सिर्फ़ 2 घंटे की ऑनलाइन क्लास हो रही है। इसमें भी कई बार नेटवर्क की दिक्कत होती है, तो कभी लाइट चली जाती है या अन्य समस्याएं आ जाती हैं। इससे पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती है। ऐसे में ट्यूशन फीस के नाम पर पूरी फीस वसूली बिल्कुल गलत है। इसका विरोध किया जाएगा। मालूम हो कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों की ओर से लिए जा रहे फीस को लेकर गुरुग्राम में भी अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी। यहां के पैरेंट्स एसोसिएशन ने भी आंदोलन की धमकी दी थी।


अभिभावक संघ इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी में है। संघ के अध्यक्ष का कहना है कि वे फ़ीस के मुद्दे पर किसान यूनियन के साथ मिलकर प्रदेशभर में आंदोलन करेंगे। वे 26 तारीख से सड़कों पर उतरकर स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। वहीं इस मसले पर स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि वे पूरे सिलेबस को 2-3 घंटे में पूरा कराने की कोशिश कर रहे हैं। वे स्कूल के सिलेबस के हिसाब से ही प्लानिंग कर रहे हैं। ऐसे में ट्यूशन फीस लेना गलत नहीं है। क्योंकि इसी के जरिए शिक्षकों को उनकी सैलरी दी जा सकेगी।

Saturday, June 20, 2020

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव

फीस के चक्कर मे वित्तविहीन विद्यालय बना रहे स्कूल खोलने का दबाव, विभाग ने मांगा सुझाव व प्रस्ताव


लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालय जुलाई से स्कूल खोलने के लिए शिक्षा विभाग पर दबाव बना रहे हैं। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े संगठनों ने विभाग को अलग-अलग चरणों में स्कूल खोलने का प्रस्ताव भी दिया है। 


इस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने सभी जिला माध्यमिक विभाग विद्यालय निरीक्षकों से स्कूल डीआई खोलने पर सुझाव और प्रस्ताव मांगे हैं। कांग्रेस प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते 15 मार्च से सभी स्कूल बंद हैं। सरकार ने वित्तविहीन विद्यालयों को लॉकडाउन की अवधि में एक मुश्त फीस की वसूली नहीं करने, फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी का नाम नहीं काटने और फीस नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिक्षकों को भी पूरा वेतन देने के निर्देश दिए हैं।


माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी का कहना है कि वित्तविहीन विद्यालयों में फीस नहीं मिलने से चार महीने से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जुलाई में स्कूल खोलने के लिए सरकार से आग्रह किया है ताकि कक्षा 6 से 9 और 11 के बच्चों का परीक्षा परिणाम तैयार किया जा सके। उन्होंने कक्षा 9 से 11 की कक्षाएं भी संचालित करने के लिए आग्रह किया है। 


वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण काल मे स्कूलों को खोलने के लिए विभाग की विशेष सचिव आर्यका अखूरी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। कमेटी स्कूलों को खोलने के लिए शिक्षक संघों, जिला विद्यालय निरीक्षकों सहित अन्य स्रोतों से प्राप्त प्रस्ताव और सुझाव के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी।

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी

निजी स्कूलों की फीस माफी का कोई आदेश नहीं हुआ जारी


 यूपी, लखनऊ : यूपी में कोरोना महामारी के कारण निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी नहीं की गई है । स्कूल पिछले साल की फीस ही लेंगे। इस फैसले को सख्ती से लागू करवाया गया है। निजी स्कूल विद्यार्थियों की फीस माफ करेंगे, ऐसा कोई आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी नहीं किया गया है।



 यदि कोई फीस माफी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार कर रहा है और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह आश्वासन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने मेरठ स्कूल फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल को दिया। 



विधानभवन में स्थित कार्यालय में डिप्टी सीएम से मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को उन्होंने भरोसा दिलाया कि निजी स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी हैं।

Friday, June 19, 2020

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई

निर्णय : अभिभावक कहेंगे, सरकार समस्या समझेगी तभी खुलेंगे स्कूल, आगरा में निजी कान्वेंट स्कूलों ने फीस न मिलने तक बन्द की पढ़ाई


19 Jun 2020

समस्या
ताजनगरी के कॉन्वेंट स्कूल अब अभिभावकों की सहमति पर ही खुलेंगे। साथ ही स्कूलों की समस्याओं को जब तक सरकार नहीं समझेगी। तब तक भी स्कूलों में पढ़ाई शुरू नहीं कराई जाएगी। शहर के प्रमुख सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों के संगठन एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल ऑफ आगरा (अप्सा) ने यह फैसला लिया है। साथ ही स्कूल खुलने के बाद सेनेटाइजेशन का जिम्मा भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लेना होगा। अप्सा ने सरकार द्वारा ‘पात्र-सक्षम माता-पिता' की परिभाषा को परिभाषित करने की मांग भी की है, ताकि उस श्रेणी में आने वाले अभिभावकों से फीस मिल सके।


अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता के अनुसार देशभर में लगभग 2 करोड़ शिक्षक 5 लाख निजी स्कूलों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों ने लॉकडाउन के दौरान अपनी जिम्मेदारी समझी। छात्रों के शिक्षण की निरंतरता बनी रहे एवं उनकी पढ़ाई की प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए ऑनलाइन व लाइव कक्षाएं लीं। साथ ही विषय संबंधित असाइनमेंट, वर्कशीट, नोट्स आदि भी ऑंनलाइन भेजे। विद्यार्थियों को घर से ही ऑनलाइन टेस्ट, हॉली-डे होमवर्क, समरकैंप आदि गतिविधियों से जोड़े रखा। डॉ. गुप्ता के अनुसार केंद्र व राज्य शासित कार्यालयों के सभी कर्मचारियों, सरकारी शिक्षकों, विधायकों, सांसदों को पूरा वेतन मिला है। इनमें से ज्यादातर के बच्चे निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। अगर सभी को वेतन पूरा मिला है, तो स्कूलों को फीस देने में क्या समस्या है। फीस मांगने पर स्कूल प्रबंधन के प्रति उत्पीड़न का आरोप लगाते हैं। क्या यह उचित है?


मांग
● सरकार अभिभावकों को फीस का भुगतान करने के दे निर्देश
● फीस ना मिलने पर ऑनलाइन-ऑंफलाइन पढ़ाई नहीं संभव