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Tuesday, May 4, 2021

तालाबंदी के दौरान स्कूल नहीं ले सकते पूरी फीस : सुप्रीमकोर्ट

तालाबंदी के दौरान स्कूल नहीं ले सकते पूरी फीस : सुप्रीमकोर्ट


'सुप्रीम' आदेश: जब स्कूल खुले ही नहीं तो पूरी फीस कैसे? 15 फीसदी कटौती अनिवार्य


कोरोना महामारी की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं, ऐसे में विद्यार्थी उन सभी सुविधाओं से वंचित रह गए, जो उन्हें विद्यालय जाने पर हमेशा से मिलती आई हैं। इसलिए सभी शैक्षणिक संस्थान अपनी फीस कम करें।- सुप्रीम कोर्ट


कोरोना महामारी की वजह से सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हैं, ऐसे में विद्यार्थी उन सभी सुविधाओं से वंचित रह गए, जो उन्हें विद्यालय जाने पर हमेशा से मिलती आई हैं। इसलिए सभी शैक्षणिक संस्थान अपनी फीस कम करें। संस्थानें विद्यार्थियों से सत्र 2020-21 की वार्षिक फीस ले सकते हैं, किंतु उन्हें इसमें 15 फीसदी की कटौती करनी पड़ेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह फैसला सुनाया गया।


जस्टिस एएम खानविल्कर और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने शैक्षणिक संस्थानों को छह किश्तों में 5 अगस्त 2021 तक फीस लेने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई विद्यार्थी समय पर फीस जमा कर पाने में असमर्थ है, तो उन परिस्थितियों में कक्षा दसवीं और बारहवीं के छात्रों का परिणाम रोका नहीं जा सकता। विद्यालय ऐसे छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक नहीं सकते हैं।


यह था पूरा मामला

हाल ही में राजस्थान सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 72 के तहत राज्य के 36,000 सहायता प्राप्त निजी और 220 सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों को वार्षिक फीस में 30 फीसदी कटौती करने का निर्देश दिया था। लेकिन इसे संविधान के अनुच्छेद 19.1.जी के तहत विद्यालयों को व्यवसाय करने के लिए दिए गए मौलिक अधिकार का विरूद्ध मानते हुए विद्यालयों ने सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।


इस्तेमाल न की गई सुविधाओं की फीस नहीं ले सकते विद्यालय

न्यायमूर्ति खानविलकर ने कहा अपीलकर्ता (विद्यालय) शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए 2016 के कानून के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शुल्क वसूल कर सकते हैं, लेकिन शैक्षणिक संस्थान सत्र 2020-21 के लिए विद्यार्थियों द्वारा इस्तेमाल न की गईं सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें।’


उच्चतम न्यायालय ने एक बड़े फैसले में स्कूलों को आदेश दिया कि वे छात्रों से स 2020-21 की वार्षिक फीस ले सकते हैं लेकिन इसमें 15 फीसदी की कटौती करें क्योंकि छात्रों ने उनसे वे सुविधा नहीं ली जो स्कूल आने पर लेते।

 
जस्टिस एएम खानविल्कर की पीठ ने आदेश दिया कि ये फीस छह किश्तों में 5 -अगस्त 2021 तक ली जाएगी और फीस नहीं देने पर या देरी पर 10वीं और 12वीं छात्रों का रिजल्ट नहीं रोका जाएगा और न ही उन्हें परीक्षा में बैठने से रोका जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई माता-पिता फीस देने की स्थिति में नहीं है तो स्कूल उनके मामलों पर विचार करेंगे लेकिन उनके बच्चे का रिजल्ट नहीं रोकेंगे।


पीठ ने माना कि यह आदेश डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसमें यह कहीं भी नहीं है कि सरकार महामारी की रोकथाम के लिए शुल्क और फीस या अनुबंध में कटौती करने का आदेश दे सकती है। इस एक्ट में अथोरिटी का आपदा के प्रसार की रोकथाम के उपाए करने के लिए अधिकृत किया गया है।


15 फीसदी बचत हुई
शीर्ष अदालत ने कहा कि स्कूलों में लॉकडाउन के दौरान बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, स्टेशनरी और रखरखाव की कीमत बचाई हैं। ये बचत 15 फीसदी के आसपास बैठती है। ऐसे में छात्रों से ये पैसा वसूलना शिक्षा का व्यावसायीकरण करने जैसा होगा।


क्या था मामला
मामला राजस्थान 36 हजार सहायता प्राप्त निजी स्कूलों और 220 सहायता प्राप्त अल्पसंयख्क स्कूलों का है। राजस्थान सरकार ने स्कूलों को आदेश दिया था कि लॉकडाउन को देखते हुए स्कूल छात्रों से 30 फीसदी कटौती करें। स्कूलों को फीस में कटौती करने का आदेश डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 72 के तहत दिया गया था। इस आदेश को स्कूलों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि ये आदेश उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19.1 जी के तहत मिले व्यावसाय करने के मौलिक अधिकार के विरुद्ध है।

Sunday, April 25, 2021

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक 

अभिभावकों ने कहा, स्कूल ट्यूशन फीस की जगह एनुअल चार्ज जोड़कर वसूल रहे कंपोजिट फीस


प्रयागराज : कोरोना संकट के बीच खुले स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल वाले ऑफलाइन क्लास के - दौर में भी अभिभावकों से एनुअल - चार्ज वसूल रहे हैं। इसमें कंप्यूटर क्लास स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोट्र्स, लैब सहित डेवलपमेंट चार्ज सहित कई दूसरे चार्ज को जोड़कर वसूला जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों ने फीस का ब्रेकअप खत्म करके सीधे वार्षिक एवं तिमाही फीस तय कर दी है। स्कूल वालों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों में जिला विद्यालय निरीक्षक तक अपनी बात | पहुंचाई है लेकिन उनके यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


निजी स्कूलों की ओर से मनमाना फीस वसूली के खिलाफ जब अभिभावकों ने आवाज उठाई तो स्कूलों ने ट्यूशन फीस सहित पूरी फीस को एक में मिलाकर कंपोजिट फीस के नाम वसूलना शुरू कर दिया। बीते शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की ओर से जब ऑनलाइन क्लास के दौर में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे शुल्क वसूलने का विरोध शुरू हुआ तो इससे बचाव के लिए अधिकतर स्कूलों ने एनुअल चार्ज को 'कंपोजिट फीस में शामिल कर दिया मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के साथ ही अभिभावकों पर एनुअल चार्ज भी थोप दिए गए हैं। 


एनुअल चार्ज को कंपोजिट फीस में शामिल करते हुए एक महीने की बजाय तीन महीने की फीस वसूली जा रही है। इस बारे में जब जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अब दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद तीन महीने की जगह एक महीने की फीस वसूले जाने के बारे में आदेश जारी किया जाएगा।



अभिभावकों ने उठाई आवाज, कोरोना संक्रमण काल में बंद हों ऑनलाइन कक्षाएं

प्रयागराज पूरे देश में कोरोना संक्रमण की मार के बीच स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिए गए हैं। अभिभावकों को ऑनलाइन क्लास से बच्चों को जोड़ने के साथ तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से ऑनलाइन क्लास पर रोक लगाने के साथ ही फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।

Thursday, March 25, 2021

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील

इस साल भी फीस न बढ़ाएं निजी स्कूल, उपमुख्यमंत्री ने की निजी स्कूल प्रबंधकों से अपील


लखनऊ : उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कोविड-19 के मद्देनजर स्कूल प्रबंधकों से इस साल भी फीस न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सरकार का सहयोग देते हुए जैसे पिछले साल फीस नहीं बढ़ाई, उसी तरह इस साल भी करें, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उप मुख्यमंत्री बुधवार को लामार्टीनियर गल्र्स कालेज में आयोजित कोरोना योद्धाओं के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कोरोना काल के दौरान पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 23 प्रमुख लोगों को सम्मानित किया।



Sunday, February 21, 2021

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति
BEd- BTC Scholorship and Fees Refund 2021



प्रदेश के बी.एड.पाठ्यक्रम में अध्ययनरत गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश सरकार ने बी.एड.और बी.टी.सी. की सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामले में इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाली शिक्षण संस्थाओं की जांच करने के आदेश दिये थे।


इसके लिए पिछले साल अक्तूबर में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय जांच कमेटी भी गठित की गयी थी मगर बीती 16 फरवरी को शासन से एक आदेश जारी करके इस राज्य स्तरीय कमेटी को निरस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गयी जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और सम्बंधित उप जिलाधिकारी को सदस्य बनाया गया।


इस जांच कमेटी को अपनी आठ बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट आगामी 10 मार्च को शासन को सौंपने के निर्देश दिये गये थे। मगर अब इस समय सीमा को घटाकर 26 फरवरी तक कर दिया गया है। 26 फरवरी तक समाज कल्याण निदेशालय और शासन को यह जांच रिपोर्ट जिलों से मिल जाएगी, उसके बाद जांच रिपोर्ट में जो शिक्षण संस्थाएं बी.एड., बी.टी.सी. व अन्य पाठ्यक्रमों छात्रवृत्ति तथा फीस भरपाई के फर्जीवाड़े में लिप्त पायी जाएंगी उन्हें छोड़कर बाकी अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं के बी.एड.के पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


चूंकि कोरोना संकट की वजह से मौजूदा शैक्षिक सत्र में बीटीसी का सत्र शून्य कर दिया गया है इसलिए बीटीसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई नहीं दी जाएगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति अनुभाग से जुड़े अधिकारियों से मिली है। बी.एड.पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को प्रथम वर्ष 51 हजार 250 रूपये, और 30 हजार द्वितीय वर्ष में बतौर फीस भरपाई दी जाती है इसके अलावा हर साल दो वर्ष के इस पाठ्यक्रम में हर साल लगभग 9 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिलती है।


2019-20 के शैक्षिक सत्र में समाज कल्याण विभाग से बी.एड.पाठ्यक्रम के 1लाख 12 हजार और सामान्य वर्ग 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जिस पर अनुसूचित जाति के बच्चों पर 442 करोड़ और सामान्य वर्ग के बच्चों पर 45.86 करोड़ रूपये का व्यय आया था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने भी पिछले शैक्षिक सत्र में करीब 80 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को बी.एड.पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया था।

Monday, February 8, 2021

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क


अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है।


गोरखपुर । मदरसों में अब निशुल्क पढ़ाई नहीं होगी। मान्यता प्राप्त और गैर अनुदानित मदरसे अब हिसाब से शुल्क का निर्धारण कर सकेंगे। मदरसा शिक्षा परिषद ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी है। मदरसा प्रबंधन को शैक्षिक सत्र शुरू होने के एक माह पहले छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क का अनुमोदन करेगी। प्रदेश में यह पहली बार होगा कि मदरसों के छात्रों से किसी तरह का शुल्क लिया जाएगा। अब तक मुफ्त शिक्षा दी जाती है। छात्र-छात्राओं से किसी भी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाता रहा।

अगले सत्र से लिया जाएगा शुल्‍क

अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा, हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है। शुल्क संरचना का निर्धारण करते समय क्षेत्रीय असमानता, आर्थिक विषमता तथा शैक्षिक स्तर का भी विशेष ध्यान रखना होगा। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क, संयुक्त वार्षिक शुल्क एवं विकास शुल्क लिया जा सकेगा। विद्यार्थियों को फीस की रसीद देनी होगी।

पहले नहीं ली जाती रही फीस

दरअसल मदरसे लोगों से मिलने वाले चंदे से चलते हैं इसलिए वहां पढऩे वाले बच्‍चों से किसी तरह ही फीस नहीं ली जाती। हास्टल में रहने वाले बच्‍चों के लिए भी खाने व रहने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता, लेकिन उनसे भी शुल्क लिया जाएगा। गोरखपुर में दस अनुदानित और दौ सौ मान्यता प्राप्त व गैर अनुदानित मदरसे हैं जिनमें तकरीबन 32 हजार से ज्यादा बच्‍चे बढ़ते हैं। ऐसे में शुल्क लिए जाने पर 30 हजार बच्‍चे प्रभावित होंगे। उनके सामने फीस देकर शिक्षा ग्रहण करने की समस्‍या पैदा हो जाएगी। कुल मिलाकर अब मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुल्‍क देना ही पड़ेगा। शुल्‍क न दे पाने की स्थिति में पढ़ाई नहीं हो पाएगी। मदरसा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भेजकर शुल्क लिए जाने के निर्णय से अवगत करा दिया है।

Sunday, December 27, 2020

अब स्कूलों में मनमानी फीस पर लगेगा अंकुश, शिक्षा मंत्रालय ने मजबूत तंत्र बनाने की तेज की पहल, संस्थानों की गुणवत्ता के आधार पर फीस का मानक होगा तय


नई दिल्ली : बच्चों को स्कूल बैग के बोझ से मुक्ति दिलाने के बाद केंद्र सरकार का ध्यान अब शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस से अभिभावकों को राहत दिलाने पर है। इसको लेकर सरकार तेजी से काम कर रही है। माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र तक स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वह एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर देगी, जिससे मनमानी फीस पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगी। मनमानी फीस पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनाने का सुझाव दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा मंत्रलय एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाने में जुटा है, जिससे फीस का विवाद सदैव के लिए खत्म हो जाए। साथ ही निजी क्षेत्र के बेहतर शैक्षणिक संस्थानों को इससे कोई नुकसान भी न हो। यही वजह है कि इस पूरी व्यवस्था को संस्थानों की ग्रेडिग से जोड़ा जाएगा। यानी जो शैक्षणिक संस्थान गुणवत्ता के आधार पर जिस ग्रेड का होगा, वह एक निर्धारित दायरे तक ही अपनी फीस रख सकेगा। साथ ही बढ़ोत्तरी की भी उसकी एक सीमा होगी। इसके साथ ही जो भी फीस वह लेगा, उसकी उसे हर साल आनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से अपने नोटिस बोर्ड पर जानकारी साझा करनी होगी। मौजूदा समय में निजी संस्थानों में फीस को लेकर कोई अंकुश नहीं है। खासबात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में किस ग्रेड का संस्थान अधिकतम कितनी फीस ले सकेगा, यह निर्धारित रहेगा। ग्रेड निर्धारण सरकार के स्तर पर तरीके से किया जाएगा।