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Monday, March 1, 2021

यूपी : छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड व मानदेय में कटौती, सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव

यूपी : छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड व मानदेय में कटौती, सब्सिडी बढ़ाने का प्रस्ताव


लखनऊ। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में चालू वित्त वर्ष के मुकाबले छात्रवृत्ति और छात्रवेतन में बड़ी कटौती का प्रस्ताव है। जबकि वाहनों की खरीद, पेट्रोल-डीजल, भूमि खरीद, टेलीफोन और सब्सिडी में आवंटन बढ़ने जा रहा है। हालांकि मेहमाननवाजी में खर्च घटाने की योजना है।


 प्रदेश सरकार विभिन्‍न शैक्षिक कार्यक्रमों के अंतर्गत छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवेतन पर बड़ा खर्च करती रही है। पिछले वित्त वर्ष में 5060 करोड़ रुपये इस मद में वास्तविक रूप से खर्च किए गए थे। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने आवंटन बढ़ाया और 5115 करोड़ रुपये खर्च की व्यवस्था की। पर आगामी वित्त वर्ष में इस मद में 20.85 प्रतिशत कटौती करते हुए 4,048 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। इससे छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति घटने के आसार हैं। इसी तरह मानदेय के रूप में होने वाले खर्च में भी 9.64 प्रतिशत कमी की योजना है।


हालांकि विभिन्‍न मदों में दी जाने वाली सब्सिडी 10 फीसदी से अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इनमें कई विभागों की सब्सिडी में वृद्धि की योजना है तो कई में कटौती हो रही है। कृषि में लगभग 11 फीसदी, लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन में 122 व हथकरघा में 64 फीसदी की वृद्धि का प्रस्ताव है तो भारी एवं मध्यम उद्योग की सब्सिडी में 32 फीसदी, ग्राम्थ विकास में 17 और पशुधन में 48 फीसदी कटौती की योजना है। 


सरकार ई-ऑफिस को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में कागजों व छपाई सामग्री के प्रयोग कम होने की उम्मीद है। ज्यादातर विभागों में यह व्यवस्था लागू है। कैबिनेट व बजट तक पेपरलेस करने की पहल हो गई है। लेकिन कार्यालय में उपयोग किए जाने वाली फॉर्म की छपाई व लेखन सामग्री के मद में 20.37 प्रतिशत वृद्धि की योजना है। इसी तरह कार्यालयों को चलाने के लिए डाक खर्च, सज्जा की खरीद, जनरेटर व डीजल पर खर्च और मशीनों व उपकरणों के रखरखाव आदि मद में चालू वित्त वर्ष की अपेक्षा 90.38 प्रतिशत तक वृद्धि की योजना है।



विकास को मिलेगी रफ़्तार : सरकार योजनाओं ब परियोजनाओं के लिए भूमि के अधिग्रहण व भूमि की खरीद पर बड़ा खर्च करती है। चालू वित्त वर्ष में इस मद में 2416 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मगर 11,631 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया वित्त वर्ष 2021-22 में इस मद में है। प्रदेश में कई बड़े इन्फ्रास्ट्रकचर प्रोजेक्ट चल रहे हैं। आवंटन में बड़ी वृद्ध से विकास योजनाओं के लिए जमीन की व्यवस्था आसानो से की जा सकेगी। इसके लिए पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी।

Tuesday, February 23, 2021

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी


मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये आवंटित होने से शिक्षकों के बकाया वेतन का कुछ भुगतान होने की उम्मीद जगी है। इस योजना में प्रदेश के करीब 25 हजार शिक्षकों का बीते चार साल का वेतन बकाया है। 


मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय प्रोग्राम में सम्मिलित मदरसा आधुनिकीकरण योजना में प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक कार्यरत हैं। मदरसों में काम करने वाले आधुनिकीकरण शिक्षकों मे स्नातक शिक्षक को 8000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र को 8000 में से मात्र 3600 रुपये और 15000 में से मात्र 4800 रुपये देने रहते हैं। 


केंद्र सरकार ने चार साल से अपना अंशदान नहीं दिया है। इसकी वजह से राज्य सरकार का अंशदान भी नहीं मिल पाया। शिक्षकों का मानदेय करीब 977 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है।

संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा, निदेशालय का होगा गठन

संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा, निदेशालय का होगा गठन 


संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को सरकार निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा देगी। राजकीय संस्कृत विद्यालयों और माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।


देववाणी संस्कृत को नया जीवन तकनीक बनाएगी उज्ज्वल भविष्य। उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।


प्रदेश में संस्कृत के विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की हालत किसी से छिपी नहीं है। देववाणी संस्कृत जो पढ़ना भी चाहते हैं, वे कालेजों की हालत देखकर आगे नहीं बढ़ते। योगी सरकार ने इसके लिए बड़ी पहल की है।



 उप्र संस्कृत शिक्षा निदेशालय के गठन और उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। साथ ही संस्कृत विद्यालयों में पढऩे वाले निर्धन छात्रों को गुरुकुल पद्धति के अनुसार मुफ्त छात्रावास व भोजन की व्यवस्था की जाएगी। यानी अब संस्कृत पढऩे वालों की संख्या बढ़ेगी और उनका भविष्य भी बेहतर होगा।

Monday, February 22, 2021

200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत

200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत


राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा।


लखनऊ  ।  राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में बना था। तभी से एडेड माध्यमिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है, लेकिन वर्ष 1971 में इन स्कूलों को सरकार ने अनुदान सूची पर लेना शुरू किया था। वर्तमान समय में प्रदेश भर में करीब 4500 सहायता प्राप्त अशासकी माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।

प्रयोगशालाएं हो गईं कबाड़

लखनऊ में 94 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें बहुत से ऐसे स्कूल हैं, जिनके भवन की मरम्मत से लेकर अन्य सुविधाओं का अभाव है। सरकार की ओर से इन स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन की ग्रांट दी जाती है। कक्षा एक से आठ तक फीस भी नहीं ली जाती, जिसकी वजह से स्कूलों की स्थिति खराब होती चली गई। लखनऊ इंटरमीडिएट कालेज हो या हरि चंद इंटर कालेज। यहां प्रयोगशालाएं खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में योगी सरकार ने पहली बार 200 करोड़ रुपये के बजट का प्राविधान किया है।
 

डा. आरपी मिश्रा ने कहा कि शिक्षक संघ लगातार मांग उठा रहा था कि राजकीय स्कूलों की तर्ज पर सरकार एडेड माध्यमिक विद्यालयों को भी अवस्थापना सुविधाओं के लिए फंड दे। जिससे इन स्कूलों की स्थिति भी ठीक कराई जा सके। अब बजट में प्राविधान किया गया है।

लखनऊ मंडल के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालयों में बजट देने का निर्णय अच्छा है। इससे इन स्कूलों में जरूरी मरम्मत, छात्र सुविधाएं आदि की जा सकेंगी।

Tuesday, February 2, 2021

बजट में यूपी के चार जिलों को तोहफा, लखनऊ, बिजनौर, सोनभद्र और श्रावस्ती में खुलेंगे एकलव्य विद्यालय

बजट में  यूपी के चार जिलों को तोहफा, लखनऊ, बिजनौर, सोनभद्र और श्रावस्ती में खुलेंगे एकलव्य विद्यालय


केन्द्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों में एकलव्य विद्यालय खोले जाने के प्रस्ताव के क्रम में अगले वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश में चार एकलव्य विद्यालय और खोले जाएंगे। इस बारे में प्रस्ताव केन्द्र  सरकार को भेजा जा चुका है। यह विद्यालय लखनऊ, बिजनौर, दुध्धी सोनभद्र और श्रावस्ती में खोले जाएंगे। सोनभद्र जैसे पहाड़ी इलाके में इसकी निर्माण लागत 48 करोड़ और मैदानी इलाकों में 38 करोड़ रूपये आती है।


उ.प्र.सरकार के अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग के उप निदेशक आर.पी.सिंह ने बताया कि अभी प्रदेश के बहराइच और लखीमपुर खीरी में एकलव्य विद्यालय चल रहे हैं। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। एक सोनभद्र में खुलने वाला है और एक ललितपुर में निर्माणाधीन है। उन्होंने बताया कि यह एकलव्य विद्यालय नि:शुल्क आवासीय विद्यालय होते हैं जिनमें नब्बे प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। यह सहशिक्षा वाले विद्यालय होते हैं। यह आश्रम पद्धति की तर्ज पर संचालित होने वाले विद्यालय होते हैं मगर इनके निर्माण व संचालन के मानक आश्रम पद्वति विद्यालयों से ज्यादा बेहतर होते हैं।

Tuesday, January 26, 2021

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च की बीस फीसद राशि खर्च की जाए।

नई दिल्ली । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर सरकार जिस तरह से पूरी ताकत से जुटी है, उससे साफ है कि इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बजट में अलग से वित्तीय प्रविधान किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन भी दिया है। इसमें नीति के अमल से जुड़ी जरूरतों को प्रमुखता से रखा गया है। वैसे भी देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में जिस तरह स्कूली बच्चों को नई नीति के तहत किताबें मुहैया कराने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं, उसमें ज्यादा जरूरत पैसों की होगी।


खास बात यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में साफ कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए जरूरी है कि शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च का बीस फीसद राशि खर्च की जाए। जो मौजूदा समय में कुल सरकारी खर्च का सिर्फ दस फीसद ही है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें, तो नीति में भले ही शिक्षा पर खर्च में दोगुनी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, लेकिन यह मौजूदा परिस्थितियों में एक साथ करना संभव नहीं है। यह जरूर है कि यह बढ़ोतरी आने वाले सालों में एक क्रमबद्ध तरीके से की जा सकती है। इसकी शुरुआत सरकार की ओर से इसी साल से की जा सकती है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर वैसे तो शिक्षा मंत्रालय ने दो क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें एक क्षेत्र ऐसा है, जिनमें उन सारी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके अमल के लिए पैसों की कोई जरूरत नहीं होगी। बल्कि इन्हें मंत्रालय के स्तर पर प्रशासनिक तरीके से अंजाम दिया जाना है। जबकि दूसरे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को रखा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत होगी।

फिलहाल इनमें जो अमल है, उनमें स्कूली बच्चों को खाने के साथ नाश्ता भी देना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, स्कूली शिक्षा में प्री-स्कूल को शामिल करना, शिक्षकों के खाली पदों को भरना, शोध को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने सहित ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार इस बार शिक्षा नीति के अमल को लेकर कुछ सतर्क भी है, क्योंकि इससे पहले जो नीति बनाई गई, उस पर पैसों के अभाव में ठीक से अमल नहीं हो सका था। हरेक नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसद तक खर्च करने की सिफारिश की गई, लेकिन अभी भी शिक्षा पर जीडीपी के चार फीसद के आसपास खर्च किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शिक्षा का कुल बजट करीब एक लाख करोड़ रुपये था।

Saturday, December 19, 2020

शिक्षकों को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए अब मिलेंगे 15 लाख, 3 साल में करना होगा पूरा

शिक्षकों को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए अब मिलेंगे 15 लाख, 3 साल में करना होगा पूरा



विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना शुरू की जा रही है। इस योजना के जरिये मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट (वृहद शोध परियोजना) के लिए शिक्षकों को 15 लाख और माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट (लघु शोध परियोजना) के लिए पांच लाख रुपये उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिए जाएंगे। दोनों ही रिसर्च प्रोजेक्ट को तीन वर्ष में पूरा करना होगा। इसमें भारतीय संस्कृति एवं विरासत, स्वास्थ्य व पर्यावरण जैसे विषयों पर शोध को प्राथमिकता दी जाएगी।


राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय डिग्री कॉलेजों व एडेड डिग्री कॉलेजों के स्थायी शिक्षक ही इस योजना के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे। सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षक आवेदन के पात्र नहीं होंगे। वृहद शोध परियोजना के तहत 15 लाख रुपये का प्रोजेक्ट उन शिक्षकों को दिया जाएगा, जिन्होंने पहले कम से कम दो मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट हासिल किए हों, 15 वर्ष से शोध करा रहे हों और कम से कम 20 रिसर्च पेपर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रमाणित किए गए रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुए हों। वहीं माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए शिक्षक के पास कम से कम 10 साल का शोध कराने का अनुभव होना चाहिए।


प्रत्येक रिसर्च प्रोजेक्ट में एक प्रमुख शोधकर्ता व दूसरा सह प्रमुख शोधकर्ता होगा। उच्च शिक्षा विभाग 33.3 प्रतिशत रिसर्च प्रोजेक्ट साइंस, 33.3 प्रतिशत रिसर्च प्रोजेक्ट कॉमर्स व मैनेजमेंट और बाकी रिसर्च प्रोजेक्ट अन्य विषयों के लिए देगी। कोशिश की जाएगी कि जितने भी रिसर्च प्रोजेक्ट दिए जाएं, उनमें 50 प्रतिशत विश्वविद्यालय व 50 प्रतिशत कॉलेजों को मिलें। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव योगेंद्र दत्त त्रिपाठी के मुताबिक कॉलेज शिक्षकों का तबादला यदि दूसरे कॉलेज में होता है तो यह रिसर्च प्रोजेक्ट वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा।


उप्र राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव विशेषज्ञ कमेटी के पास भेजा जाएगा। विशेषज्ञ कमेटी का अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव को बनाया गया है। इसमें साइंस, कॉमर्स व मैनेजमेंट के दो-दो विशेषज्ञ शामिल होंगे। वहीं अनुश्रवण के लिए विश्वविद्यालय की संबंधित फैकल्टी के डीन व डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की अध्यक्षता में अनुश्रवण कमेटी बनेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही रिसर्च प्रोजेक्ट की धनराशि दी जाएगी।

Tuesday, November 17, 2020

छात्रों को आने वाले बजट में मिल सकता है स्मार्टफोन या लैपटॉप का तोहफा, अनिवार्य बन चुकी आनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने की तैयारी

छात्रों को आने वाले बजट में मिल सकता है स्मार्टफोन या लैपटॉप का तोहफा,  अनिवार्य बन चुकी आनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने की तैयारी


कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने में जुटी सरकार

अभी 38 फीसद से ज्यादा बच्चों के पास नहीं है कोई साधन

संसाधन विहीन छात्रों में करीब 44 फीसद बच्चे सरकारी स्कूलों के


नई दिल्ली:- कोरोना महामारी के चलते घरों में रहकर ही पढ़ने को मजबूर स्कूली छात्रों को केंद्र सरकार आने वाले आम बजट में कुछ बड़ा तोहफा दे सकती है। फिलहाल जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन, टैब, लैपटॉप या टेलीविजन जैसे उपकरणों की सुविधा मुहैया कराई जा सकती है। इन दिनों सरकार का ध्यान ऑनलाइन पढ़ाई पर केंद्रित है। पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए सरकार पहले ही 12 नए टीवी चैनल लांच करने की घोषणा कर चुकी है, जिसकी तैयारी तेजी से चल रही है।


 सूत्रों की मानें तो स्कूली बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन, टैब, लैपटॉप या फिर टीवी जैसे साधन मुहैया कराने के विकल्पों पर सरकार इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि हाल में आई विभिन्न रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि अभी भी 38 फीसद से अधिक छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ने के लिए कोई साधन नहीं हैं। असर (एनुअल स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट) नामक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक संसाधन विहीन छात्रों में करीब 44 फीसद बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। वहीं, निजी स्कूलों में ऐसे बच्चों की संख्या भी करीब 26 फीसद है।
 

शिक्षा मंत्रालय के सामने कई राज्यों ने उठाया है यह मुद्दा 
केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय के सामने यह मुद्दा कई राज्यों ने भी उठाया है। खास कर जब वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर राज्यों के साथ सीधी चर्चा करने में जुटी है। राज्यों का कहना है कि वह अपने यहां ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था बनाना चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चों के पास इससे जुड़ने के लिए साधन नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक यह हाल तब है जबकि, बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन खरीदे भी हैं। 


रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में नामांकित छात्रों में से सिर्फ 36 फीसद बच्चों और उनके परिवारों के पास स्मार्टफोन थे, जो बढ़कर अब करीब 61 फीसद हो गई है। सरकार स्कूली शिक्षा को मजबूती देने के लिए हर साल राज्यों को वित्तीय मदद देती है। यह साल और भी खास है, क्योंकि इस साल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर तेजी से काम होना है। ऐसे में बजट में भी इसके लिए खास प्रावधान किए जा सकते हैं।

Saturday, November 7, 2020

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ( समग्र शिक्षा) अंतर्गत स्वीकृत नवीन राजकीय हाईस्कूल में कार्यरत शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मियों के वेतन आदि भुगतान हेतु धनराशि अवमुक्त

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ( समग्र शिक्षा) अंतर्गत स्वीकृत नवीन राजकीय हाईस्कूल में कार्यरत शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मियों के वेतन आदि भुगतान हेतु धनराशि अवमुक्त।

Saturday, August 29, 2020

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प


लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प अब राज्य बित्त आयोग के बजट से किया जाएगा। परिषदीय स्कूलों में पानी, बिजली, फर्नीचर, शौचालय, चारदीयारी, कक्षा कक्ष निर्माण और रंग-रोगन आदि कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए थे। ग्राम पंचायतों को अपने बजट से यह काम करवाना था। 


प्रदेश के 80 हजार स्कूलों में यह काम शुरू भी हो गया था, लेकिन उसके बाद ग्राम प्रधान अपने लिए चुनावी वर्ष होने के कारण स्कूलों के कायाकल्प की जगह सामुदायिक भवन और सामुदायिक शौचालय बनवाने को प्राथमिकता देने लगे। कई ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने स्कूल परिसर में ही शौचालय व सामुदायिक भवन जनवाना शुरू कर दिया। बेसिक शिक्षा विभाग को आदेश जारी कर इस पर रोक लगवानी पड़ी। 


विभाग के अधिकारियों ने गांवों में स्कूलों के कायाकल्प का काम प्रभावित होने की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बताया कि अब राज्य वित्त आयोग और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड सहित अन्य मदों के बजट से स्कूलों का कायाकल्प कराया जाएगा।

Tuesday, June 30, 2020

वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड

वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड


कोरोना के कारण पारंपरिक शिक्षा प्रभावित होने और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर को लेकर पहली बार शिक्षा बजट तैयार हो रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन क्लास, विशेष कोर्स तैयार करने और छात्रों को लैपटॉप, मोबाइल देने के लिए बित्त मंत्रालय से 63,206.4 करोड़ रुपये की मांग की है।


 इसके अलावा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए 1,13,684.51 करोड़ रुपये का फंड मांगा है। कोबिड-19 के चलते शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदलने वाली है। बजट को लेकर वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत मंत्रालय के अधिकारियों कौ बैठक हुई। ऑनलाइन शिक्षा की योजनाओं के लिए बित्त आयोग से बजट की मांग की गई है। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बैठक में प्रेजेंटेशन भी दी

Wednesday, February 26, 2020

फतेहपुर : खेलकूद प्रतियोगिताओं की हो रही अनदेखी, देखें जिले का खेल बजट

फतेहपुर : खेलकूद प्रतियोगिताओं की हो रही अनदेखी, देखें जिले का खेल बजट।





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Tuesday, December 10, 2019

बोर्ड परीक्षा : 150 करोड़ से होगी बोर्ड की परीक्षा, बढ़ा बजट

बोर्ड परीक्षा : 150 करोड़ से होगी बोर्ड की परीक्षा, बढ़ा बजट।









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Saturday, July 6, 2019

बजट : नई शिक्षा नीति व राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन पर मुहर, शिक्षा में व्यापक सुधार के साथ उच्च शिक्षा में फिर गौरव हासिल करने का रोडमैप



बजट : नई शिक्षा नीति व राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन पर मुहर, शिक्षा में व्यापक सुधार के साथ उच्च शिक्षा में फिर गौरव हासिल करने का रोडमैप।  









Friday, July 5, 2019

आम बजट में शिक्षकों की नियुक्तियों पर खास जोर होगा, उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर हो सकता है बड़ा एलान


आम बजट में शिक्षकों की नियुक्तियों पर खास जोर होगा, उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर हो सकता है बड़ा एलान। 



Saturday, May 11, 2019

फतेहपुर : जिले में तैयार होगी खिलाड़ियों की "नर्सरी", शासन स्तर से बजट जारी, प्रत्येक विद्यालय में खेल के लिए आरक्षित होगा पीरियड

फतेहपुर : जिले में तैयार होगी खिलाड़ियों की "नर्सरी", शासन स्तर से बजट जारी, प्रत्येक विद्यालय में खेल के लिए आरक्षित होगा पीरियड।





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Wednesday, April 24, 2019

प्रयागराज : बच्चों की शिक्षा पर नहीं खर्च हो सके 1.25 करोड़, आरटीई अंतर्गत बच्चों के निजी विद्यालयों की फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि वापस

प्रयागराज : बच्चों की शिक्षा पर नहीं खर्च हो सके 1.25 करोड़, आरटीई अंतर्गत बच्चों के निजी विद्यालयों की फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि वापस।







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Tuesday, April 2, 2019

दो साल से आश्रम पद्धति विद्यालयों में नहीं लगे सोलर पैनल, कमीशन के फेर में फंसा काम


दो साल से आश्रम पद्धति विद्यालयों में नहीं लगे सोलर पैनल, कमीशन के फेर में फंसा काम। 


Thursday, March 28, 2019

फतेहपुर : एक करोड़ 96 लाख से 938 विद्यालयों में एसएमसी कराएगी वायरिंग, काम मे अनियमितता मिलने पर होगी कार्रवाई


फतेहपुर : एक करोड़ 96 लाख से 938 विद्यालयों में एसएमसी कराएगी वायरिंग, काम मे अनियमितता मिलने पर होगी कार्रवाई।






Sunday, March 24, 2019

फतेहपुर : मिडडे-मील के लिए स्कूलों में भेजे गए 12 करोड़ रुपये, जुलाई महीने तक स्कूलों में मिडडे-मील पकाने में धन की कमी नहीं आयेगी आड़े - बीएसए


फतेहपुर : मिडडे-मील के लिए स्कूलों में भेजे गए 12 करोड़ रुपये, जुलाई महीने तक स्कूलों में मिडडे-मील पकाने में धन की कमी नहीं आयेगी आड़े - बीएसए।