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Monday, February 22, 2021

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पहली से 8वीं तक के बच्चों को इस साल भी बिना परीक्षा किया जाएगा पास

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पहली से 8वीं तक के बच्चों को इस साल भी बिना परीक्षा किया जाएगा पास


बिहार के सरकारी प्रारंभिक स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.66 करोड़ बच्चे इस साल भी बिना वार्षिक परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किए जाएंगे। राज्य शिक्षा विभाग ने कोरोना संकट की वजह से लम्बे समय तक स्कूल बंदी और बच्चों के कॅरियर को देखते हुए यह फैसला लिया है। 


मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा, 'पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने तीन माह की कैच-अप क्लास आयोजित करने का फैसला किया है। इन कक्षाओं में स्टूडेंट्स को बेसिक व जरूरी टॉपिक्स पढाए जाएंगे ताकि अगली कक्षा के कोर्स की पढ़ाई के दौरान उन्हें कोई दिक्कत न आए। इन कक्षाओं से उन स्डूडेंट्स को खासा लाभ होगा जो टीवी, इंटरनेट, स्मार्टफोन के अभाव के चलते ऑनलाइन क्लास में हिस्सा नहीं ले सके थे। मार्च मध्य में इन कक्षाओं के शुरू होने की उम्मीद है।'


इस बीच शिक्षा विभाग ने 9वीं कक्षा में पंजीकृत 13.17 लाख बच्चों की परीक्षा 26 फरवरी से 3 मार्च के बीच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। 


बिहार बोर्ड ने अधिकारियों ने कहा, 'हमने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वह 24 फरवरी तक सभी ओएमआर शीट प्राप्त कर लें। 4 मार्च से विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं होंगी।'

राज्य में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाओं के लिए विद्यालय साढ़े 10 माह बाद 8 फरवरी से खुले हैं। राज्यभर के प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1 से पांच) अब भी बंद हैं।


गौरतलब हो कि कोरोना संकट की वजह से शैक्षिक सत्र 2019-20 में भी वार्षिक परीक्षा नहीं ली जा सकी थी और दसवीं, 12वीं को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं के बच्चों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्देश दिया था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने 13 मार्च 2020 को ही राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश दे दिया था। बच्चे अगली कक्षा में प्रोन्नत तो हो गए लेकिन उनकी पढ़ाई आरंभ नहीं हो सकी। कई महीने बाद किताबें पाठ्य पुस्तक निगम की साइट पर अपलोड की जा सकीं। अलबत्ता दूरदर्शन पर कक्षाएं चलाकर शिक्षा विभाग और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने बच्चों को शिक्षण से जोड़े रखने की कोशिश जरूर की। 


पिछले साल 1.94 करोड़ छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में प्रोन्नत हुए थे  
शैक्षिक सत्र 2019-20 में कोरोना संकट के चलते जारी स्कूलबंदी के कारण दसवीं छोड़ पहली से 11वीं तक के सरकारी स्कूलों में नामांकित सभी बच्चों को बिना वार्षिक परीक्षा लिए ही अगली कक्षाओं में प्रोन्नति दे दी गयी थी। इस बाबत 8 अप्रैल 2020 को विभाग ने आदेश जारी किया था। इस निर्णय से 1.94 करोड़ छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में प्रोन्नत हो गए थे। इनमें पहली से आठवीं तक के 1.66 करोड़, 9वीं के 16 लाख और 11वीं के करीब 12 लाख विद्यार्थी शामिल थे।

Sunday, January 24, 2021

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं।


निर्माण कार्य में आवंटित राशि का उपभोग न किये जाने पर शिक्षक पर एफआईआर किये जाने पर पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी।


हाईकोर्ट ने फंड का दुरुपयोग करने के मामले में शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर बिहार सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की बहाली छात्रों को शिक्षा देने के लिए की जाती है। लेकिन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में लगाने की बजाए उन्हें दूसरे काम में लगाया दिया जाता हैं। 
शिक्षकों का मुख्य कार्य छात्रों को शिक्षित करने के लिए उन्हें शिक्षा प्रदान करने का है।


हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य है कि बिहार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र से हटा कर उन्हें स्कूल भवन के निर्माण कार्य में लगा ठेकेदार के रूप में स्थापित कर दिया है। यही नहीं आवंटित राशि का उपयोग नहीं किये जाने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्त बना दिया गया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक को अभियुक्त बनाये जाने के पूर्व विभाग ने जिम्मेवारी तक तय नहीं की है। कोर्ट ने शिक्षक को अग्रिम जमानत दे दी। 


मामला गोपालगंज जिले के कटेया थाना कांड संख्या 172/2016 से सम्बंधित है। इस केस में शिक्षक शैलेश कुमार को आवंटित निधि का उचित उपयोग नहीं किये जाने को लेकर विभाग ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर शिक्षक ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर अग्रिम जमानत देने का गुहार लगाई गई थी। अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पचास हजार के दो मुचलकों पर अग्रिम जमानत दे दी।

Wednesday, December 2, 2020

बिहार : इम्तिहान में 50% से कम अंक आए तो जाएगी गुरुजी की नौकरी! शिक्षक संघ ने सरकार पर किया पलटवार

बिहार : इम्तिहान में 50% से कम अंक आए तो जाएगी गुरुजी की नौकरी!  शिक्षक संघ ने सरकार पर किया पलटवार


शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बिहार शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) एक नया प्रयोग करने का मन बनाया है. इस नियम के तहत शिक्षकों को प्रोन्नति के बदले अब इम्तिहान देना होगा और 50 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले शिक्षक को नौकरी से निकाला जा सकता है.


पटना. बिहार में लगातार शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल के बाद एक बार फिर शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) नया प्रयोग करने जा रहा है. इस बार बिहार में नया प्रयोग शिक्षकों की प्रोन्नति के नाम पर होगा, जिसमें 8 वर्ष सेवा दे चुके शिक्षकों को प्रोन्नति के बदले अब इम्तिहान देना होगा. आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।    शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार (Sanjay Kumar) की मानें तो जल्द ही नए नियम के तहत शिक्षकों की परीक्षा ली जाएगी और इस परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक वालों को प्रोन्नति मिलेगी. जबकि 50 से 75 प्रतिशत लाने वालों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा. इसके अलावा 50 प्रतिशत से नीचे अंक लाने वालों को सेवा से हटाने पर विचार होगा.


 हालांकि शिक्षा विभाग ने इन नियमों पर अभी मुहर नहीं लगाई है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों की मानें तो गुणवत्ता शिक्षा को लेकर दिसम्बर के अंतिम सप्ताह तक इस तरह के नियम बनाये जा सकते हैं.


सरकार के निशाने पर हैं नियोजित शिक्षक

आपको बता दें कि राज्य के पौने 4 लाख नियोजित शिक्षक एक बार फिर नीतीश सरकार के सीधे रडार पर हैं, जिनके वेतनमान को लेकर कई वर्षों से चल रही लड़ाई अब तक खत्म नहीं हो सकी है. इस बीच, प्रोन्नति की आस में बैठे शिक्षकों को इस नए नियम के बाद बड़ा झटका भी लग सकता है. हालांकि मेधावी शिक्षकों को इससे फायदा होगा. जबकि सिर्फ डिग्री और नम्बर के आधार पर बहाल शिक्षकों को न तो प्रोन्नति मिलेगी बल्कि नौकरी जाने का भी डर बना रहेगा. यह नियम अगर लागू होता है तो प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के शिक्षकों के लिए होगा.


शिक्षक संघ ने कही ये बात
शिक्षा विभाग के इस नए नियमों को लेकर शिक्षक संघ के कई नेताओं आनंद कौशल और शिक्षक नेता मार्कण्डेय पाठक, अश्विनी पाण्डेय, आनंद मिश्रा ने इसे शिक्षक विरोधी नियम बताया है. उन्‍होंने कहा कि अगर यह शिक्षकों के लिए लागू होता है तो क्यों नहीं इसे हर विभाग में भी लागू किया जाए, जहां कम काबिल और निकम्मे अधिकारी से लेकर कर्मचारी भी सरकार से मोटी रकम लेकर लगातार चूना लगा रहे हैं.

खबर स्त्रोत : लिंक

Saturday, June 6, 2020

बिहार : स्कूल फीस मामले में पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, HC बोला- विकट परिस्थिति में किसको फीस देने को कहें

बिहार : स्कूल फीस मामले में पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार, HC बोला- विकट परिस्थिति में किसको फीस देने को कहें


पटना हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली के लिए डीएम की ओर से जारी निर्देश पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने स्कूल को डीएम व आपदा प्रबंधन विभाग से गुहार लगाने की छूट दी है। कोर्ट का कहना था कि इस विकट परिस्थिति में किसी को मनमानी की छूट नहीं दी जा सकती। इस समय किसको पैसा देने का आदेश दिया जाए, जबकि हर किसी का काम-धंधा लगभग ठप है। वकील की प्रैक्टिस बंद है। ऐसे में आप ही बताइए कि किसे फीस देने के लिए कहा जाए।


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को संत पॉल इंटरनेशनल स्कूल की अर्जी पर सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि 25 मार्च को आपदा प्रबंधन विभाग और 10 अप्रैल को डीएम ने आदेश जारी कर एक साथ तीन महीने की फीस नहीं लेने तथा बस फीस व अन्य शुल्क नहीं लेने का निर्देश दिया है। स्कूल प्रबंधन को शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा चाहिए। मगर स्कूल के पास इतना पैसा नहीं है कि वह दे सकें। स्कूल की हर दलील को कोर्ट ने नामंजूर कर अर्जी खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट के रुख को देखते हुए स्कूल के वकील गौतम केजरीवाल ने अपना पक्ष डीएम व आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव तथा डीईओ के समक्ष रखने की बात कही। कोर्ट ने उनके अनुरोध को मंजूर करते हुए स्कूल को डीएम, प्रधान सचिव तथा डीईओ के समक्ष बात रखने की छूट देते हुए अर्जी को निष्पादित कर दिया।


देखकर नहीं लगता कि स्कूल की माली हालात खराब है
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अशुतोष रंजन पांडेय ने कोर्ट को बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग और डीएम ने कोरोना संक्रमण से बचाव के दौरान लॉकडाउन को देखते हुए यह निर्देश जारी किया है। स्कूल नामी तथा काफी पुराना है। स्कूल को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि इसकी माली हालत खराब है और स्कूल को फीस वसूलने की छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कई स्कूल मनमानी कर रहे हैं। डीएम के आदेश के बावजूद फीस के साथ बस चार्ज और अन्य शुल्क वसूलने के लिए अभिभावकों पर दबाव डाल रहे हैं।