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Saturday, April 3, 2021

यूपी बीएड सत्र 2021-22 हेतु कॉलेजों की संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 15 अप्रैल तक

यूपी बीएड सत्र 2021-22 हेतु कॉलेजों की संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 15 अप्रैल  तक


शासन ने सत्र 2021-22 में बीएड पाठ्यक्रम के अलावा महाविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर नए विषय की पढ़ाई शुरू करने तथा नए महाविद्यालय खोले जाने से संबंधित प्रस्तावों के निस्तारण की संशोधित समय-सारिणी जारी कर दी है। इसके तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) एवं संबद्धता के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 15 अप्रैल तक किया जा सकेगा। पहले यह तिथि 15 जनवरी थी।


उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्रवण कुमार सिंह की तरफ से जारी शासनादेश के अनुसार नए पाठ्यक्रमों के लिए विश्वविद्यालय में एनओसी प्रस्ताव ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी से बढ़ाकर 15 अप्रैल, विश्वविद्यालय में ऑनलाइन जमा किए गए प्रस्तावों के भूमि संबंधी अभिलेखों का राजस्व विभाग से सत्यापन कराए जाने की अंतिम तिथि पांच फरवरी से बढ़ाकर 30 अप्रैल तथा एनओसी ऑनलाइन जारी किए जाने की तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 10 मई 2021 कर दी गई है।


इसी तरह महाविद्यालयों की जांच के लिए निरीक्षण मंडल के गठन की अंतिम तिथि 15 अप्रैल से बढ़ा कर 20 मई, निरीक्षण मंडल द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर पांच जून, विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता ऑनलाइन दिए जाने की अंतिम तिथि 10 मई से बढ़ाकर 15 मई, शासन में अपील करने की अंतिम तिथि 20 मई से बढ़ाकर 30 जून तथा शासन स्तर पर अपील निस्तारित करने की अंतिम तिथि 10 जून से बढ़ाकर 10 जुलाई 2021 कर दी गई है।

Thursday, March 25, 2021

नई शिक्षा नीति : 2022 से ही लागू हो सकता है चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम, जानिए कोर्स के बारे में

नई शिक्षा नीति : 2022 से ही लागू हो सकता है चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम, जानिए कोर्स के बारे में


वर्ष 2030 के बाद केवल चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले ही शिक्षक भर्ती के लिए योग्य अभ्यर्थी होंगे। यह प्रावधान नई शिक्षा नीति में दिया गया है। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए गठित उच्च शिक्षा विभाग की स्टीयरिंग कमेटी यह कोर्स वर्ष 2022 से लागू करने पर विचार कर रही है। ऐसे में आपके लिए यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इस चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम क्या-क्या होगा। पढ़िए...


इंटीग्रेटेड बीएड प्रोग्राम के चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से आपको अपने विषय के साथ-साथ बीएड के विषयों को पढ़ने का भी मौका मिलेगा। उदाहरण के तौर पर अगर कोई विद्यार्थी केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) से बीएससी ऑनर्स के साथ बीएड करना चाहता है तो वह स्नातक के दौरान बीएससी के साथ बीएड के सेक्शन भी पढ़ पाएगा। तीन साल में बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई पूरी होने पर चौथे साल में उसे बीएड के बचे सेक्शन पढ़ने होंगे। साथ ही इंटर्नशिप भी करनी होगी। इस तरह 5 साल में मिलने वाली डिग्री अब चार साल में इंटीग्रेटेड बीएससी-बीएड के नाम से मिल जाएगी और विद्यार्थियों का एक साल भी बच जाएगा।


वहीं क्रेडिट सिस्टम अभ्यर्थियों को बीच में ही कोर्स छोड़नी की भी अनुमति देता है। दाखिला लेने के बाद अगर किसी विद्यार्थी को बीएड की पढ़ाई नहीं करनी है, तो उसे तीन साल बाद स्नातम की डिग्री मिल जाएगी। साथ ही इन तीन सालों में विद्यार्थी ने बीएड कोर्स से संबंधित जिन भी विषयों की पढ़ाई की होगी, उसे उन विषयों का सर्टिफिकेट भी मिल जाएगा। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। यह सर्टिफिकेट विद्यार्थी के एकेडमिक बैंक क्रेडिट में जमा हो जाएगा। अगर भविष्य में कभी विद्यार्थी फिर से बीएड की पढ़ाई करना चाहेगा तो यह क्रेडिट उसके काम आएगा।


बता दें सबसे पहले बीएड प्रोग्राम एक साल का हुआ करता था और वर्तमान में यह दो वर्ष का है। अब यह जल्द ही चार वर्ष (इंटीग्रेटेड) का होने जा रहा है। हालांकि अभी तक यह एक संभावित मॉडल है, जिसे जल्द ही अंतिम स्वरूप दिया जा सकता है।

Thursday, March 11, 2021

बीएड : बढ़ाई जा सकती है प्रवेश परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि

बीएड : बढ़ाई जा सकती है प्रवेश परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि


उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की कम संख्या को देखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 मार्च निर्धारित है, जिसे 31 मार्च तक किया जा सकता है। पंजीकरण तो काफी संख्या में हुए हैं लेकिन फीस जमा कर आवेदन पक्का करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या काफी कम है।


आवेदन करने में अभ्यर्थियों को कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। विवि द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर अभ्यर्थियों ने समस्याएं बताई हैं। प्रमाण पत्र न बन पाने की समस्या ज्यादा है। आवेदन प्रक्रिया को लेकर सोमवार को एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी।


बताया जा रहा है कि उसमें आवेदन की तिथि 31 मार्च तक बढ़ाने पर विचार किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा अभ्यर्थी आवेदन कर सकें। आवेदन प्रक्रिया 18 फरवरी से शुरू हुई थी। 19 मई को प्रवेश परीक्षा प्रस्तावित है। अभी तक 3,35,543 छात्रों ने पंजीकरण कराया है लेकिन शुल्क जमा कर आवेदन पक्का करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या महज 1,58,617 है।
 
गत वर्ष करीब 4,32,000 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। निर्धारित तिथि के अनुसार अब महज 10 दिन ही शेष हैं। बीएड की राज्य प्रवेश समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेयी ने बताया कि छात्रों द्वारा हेल्पलाइन नंबर पर बताई गई समस्याओं के आधार पर फ्रिक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चन बनाया गया है, जिससे संबंधित उत्तर भी दिए गए हैं। इसमें ईडब्लूएस प्रमाण पत्र, स्नातक अंतिम वर्ष के अंक, रोल नंबर आदि से संबंधित जानकारी दी गई है। विवि ने इसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। वहीं आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी अभ्यर्थी लिंग, परीक्षा केंद्र, विषय वर्ग और भरांक में संसोधन कर सकेंगे।

Saturday, March 6, 2021

IGNOU BEd admission 2021: बीएड जनवरी सेशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू, 11 अप्रैल को होगी परीक्षा, क्लिक करके करें आवेदन

IGNOU BEd admission 2021: बीएड जनवरी सेशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू, 11 अप्रैल को होगी परीक्षा

GNOU BEd admission 2021: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, इग्नू
IGNOU BEd admission 2021 इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी इग्नू ने जनवरी 2021 सत्र के लिए बीएड प्रोगाम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में इस प्रोगाम में दाखिले के लिए उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर मौजूद के इस लिंक पर क्लिक करके आवेदन कर सकते हैं।




IGNOU BEd admission 2021: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, इग्नू (Indira Gandhi National Open University) ने जनवरी 2021 सत्र के लिए बीएड प्रोगाम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में इस प्रोगाम में दाखिले के लिए उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर मौजूद htps:// sedservices.ignou.ac.in/ entrancebed/ के इस लिंक पर क्लिक करके आवेदन कर सकते हैं। वहीं इस सेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करने की आखिरी तारीख 2 20 मार्च, 2021 है। वहीं बीएड की परीक्षा 11 अप्रैल, 2021 को विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इग्नू बीएड प्रोगाम की न्यूनतम अवधि 2 वर्ष है। वहीं इस शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी और हिंदी दोनों में होगा।

IGNOU BEd admission 2021: इन तिथियों का रखें ध्यान

ऑनलाइन आवेदन शुरू करने की तारीख: 2 मार्च 2021

इग्नू बीएड एंड ओपनमैट 2021 के आवेदन करने की आखिरी तारीख- 20 मार्च, 2021


इग्नू बीएड एंड ओपनमैट 2021 के लिए लिखित परीक्षा: 11 अप्रैल 2021


एजुकेशन क्वालिफिकेशन

बीएड प्रोगाम में दाखिले के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य या मानवता में मास्टर डिग्री होना चाहिए। वहीं उम्मीदवारों के अंक 50% अंक होने चाहिए। इसके अलावा बैचलर इन इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी में स्पेशल साइंस और मैथ्स में 55 फीसदी अंक लाने वाले भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इग्नू ने हाल ही में बीएड एंड ओपेनमेट 2021 (BEd & OPENMAT 2021) प्रोगाम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी हाल ही में शुरू किए गया था। ओपनमेट एमबीए कोर्स में अप्लाई करने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत अंकों के साथ संबंधित विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार छूट प्रदान की जाएगी।

ये होगी फीस

बीएड प्रोगाम के लिए अप्लाई करना चाहते हैं उन्हें 55000 रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अलावा ओपेनमेट प्रोगाम के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को 2000 रुपये प्रति पाठ्यक्रम शुल्क देना होगा

Saturday, February 27, 2021

बी.एड- 2021 के छात्र-छात्राओं को मिलेगा छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ

बी.एड- 2021 के छात्र-छात्राओं को मिलेगा छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ

प्रदेश में बी.एड. के अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ा वर्ग के गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिये जाने के आदेश जारी हो गये हैं। बीएड और बीटीसी के छात्र-छात्राओं को पूर्व में दी गई छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि के मामलों की जांच के चलते बीएड की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि के वितरण पर रोक लगी हुई थी जबकि बीटीसी का सत्र कोरोना संकट की वजह से इस बार शून्य घोषित कर दिया गया है। गुरुवार को इस बार में समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा की ओर से एक आदेश जारी किया गया।


इस आदेश में कहा गया है कि वित्त विभाग के 5 नवम्बर 2020 के शासनादेश के जरिये बीएड / बीटीसी की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई भुगतान के सम्बंध में लगी रोक हटाए जाने के सम्बंध में निर्णय लिया गया है। इस शासनादेश में आगे कहा गया है कि एसोसिएशन आफ माइनारिटीज इंस्टीट्यूटशन प्रयागराज बनाम उ.प्र.राज्य व अन्य के मामले में हाईकोर्ट के 15 दिसम्बर 2020 को पारित आदेश के अनुपालन के क्रम में बीएड और बीटीसी व अन्य सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामलों की जांच जारी रहेगी।

इस जांच के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति, बीटीसी शिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी जांच के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा गठित समिति जांच करती रहेगी। इसी तरह बीएड व अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों की मान्यता से संबंधित प्रकरणों की जांच के लिए उच्च शिक्षा की जांच कमेटी द्वारा वर्तमान और आगामी वर्षों में की जाने वाली जांच जारी रहेगी।

मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा यह जांच आठ बिन्दुओं पर की जाएगी। बताते चलें कि पिछले शैक्षिक सत्र 2019-20 में समाज कल्याण विभाग द्वारा बीएड के 1 लाख 123 और सामान्य वर्ग के गरीब 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जबकि पिछड़ा वर्ग के करीब 80 हजार बीएड छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए थे।

Sunday, February 21, 2021

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति

बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति
BEd- BTC Scholorship and Fees Refund 2021



प्रदेश के बी.एड.पाठ्यक्रम में अध्ययनरत गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश सरकार ने बी.एड.और बी.टी.सी. की सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामले में इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाली शिक्षण संस्थाओं की जांच करने के आदेश दिये थे।


इसके लिए पिछले साल अक्तूबर में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय जांच कमेटी भी गठित की गयी थी मगर बीती 16 फरवरी को शासन से एक आदेश जारी करके इस राज्य स्तरीय कमेटी को निरस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गयी जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और सम्बंधित उप जिलाधिकारी को सदस्य बनाया गया।


इस जांच कमेटी को अपनी आठ बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट आगामी 10 मार्च को शासन को सौंपने के निर्देश दिये गये थे। मगर अब इस समय सीमा को घटाकर 26 फरवरी तक कर दिया गया है। 26 फरवरी तक समाज कल्याण निदेशालय और शासन को यह जांच रिपोर्ट जिलों से मिल जाएगी, उसके बाद जांच रिपोर्ट में जो शिक्षण संस्थाएं बी.एड., बी.टी.सी. व अन्य पाठ्यक्रमों छात्रवृत्ति तथा फीस भरपाई के फर्जीवाड़े में लिप्त पायी जाएंगी उन्हें छोड़कर बाकी अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं के बी.एड.के पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


चूंकि कोरोना संकट की वजह से मौजूदा शैक्षिक सत्र में बीटीसी का सत्र शून्य कर दिया गया है इसलिए बीटीसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई नहीं दी जाएगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति अनुभाग से जुड़े अधिकारियों से मिली है। बी.एड.पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को प्रथम वर्ष 51 हजार 250 रूपये, और 30 हजार द्वितीय वर्ष में बतौर फीस भरपाई दी जाती है इसके अलावा हर साल दो वर्ष के इस पाठ्यक्रम में हर साल लगभग 9 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिलती है।


2019-20 के शैक्षिक सत्र में समाज कल्याण विभाग से बी.एड.पाठ्यक्रम के 1लाख 12 हजार और सामान्य वर्ग 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जिस पर अनुसूचित जाति के बच्चों पर 442 करोड़ और सामान्य वर्ग के बच्चों पर 45.86 करोड़ रूपये का व्यय आया था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने भी पिछले शैक्षिक सत्र में करीब 80 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को बी.एड.पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया था।

Wednesday, February 17, 2021

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच


लखनऊ : प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति में होने वाले घपले को देखते हुए बीएड व बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की जांच कराने जा रही है। इसके लिए सरकार ने सभी जिलों में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच समिति को पांच मार्च तक अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशालय को देनी होगी। वहीं, समाज कल्याण निदेशालय को 10 मार्च तक सरकार को रिपोर्ट देनी है।


छात्रवृत्ति में होने वाले घपलों पर अंकुश लगाने के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई उच्चस्तरीय बैठक में जिला स्तर पर जांच समिति गठित करने का फैसला हुआ। इसी के तहत समाज कल्याण विभाग ने मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।

इसमें संबंधित उप जिलाधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी/जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। इस समिति को कॉलेजों व संस्थानों में आठ ¨बदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट देनी है।

इसमें पहले ¨बदु के तहत सॉफ्टवेयर के जरिये समान नाम, समान पिता का नाम और समान जन्मतिथि वाले मामलों की जांच करते हुए छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग रोकने और दूसरे जांच ¨बदु में दूसरे प्रदेशों के हाईस्कूल बोर्ड से पास छात्रों को अत्यधिक संख्या में प्रवेश कराके उनकी छात्रवृत्ति का दुरुपयोग रोकना है। तीसरे जांच ¨बदु में आवेदन पत्र में यूपी बोर्ड को चयनित करने के स्थान पर यूपी बोर्ड के हाईस्कूल रोल नंबर/अंक पत्र को कई बार प्रयोग करते हुए फार्म भरवाने के मामले और चौथे ¨बदु में स्वीकृत सीटों से अधिक संख्या में प्रवेश दिलाने व छात्रवृत्ति की धनराशि का गबन करने की जांच होगी।

पांचवें ¨बदु में पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेकर छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों द्वारा प्रथम वर्ष की परीक्षा में न बैठने तथा द्वितीय वर्ष में काफी संख्या में पढ़ाई छोड़ देने के मामले होंगे, जबकि छठे ¨बदु में संस्थानों में पाठ्यक्रम की मान्यता व स्वीकृत सीटों की संख्या आदि की जांच करनी है। सातवें ¨बदु में एनआइसी के समक्ष पोर्टल पर बैक एंड डाटा का भी सत्यापन किया जाएगा। फर्जी व संदिग्ध डाटा की जांच जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित दूसरी समिति करेगी। आठवें ¨बदु के तहत जांच समिति छात्रों की पात्रता के साथ माता-पिता की वास्तविक आय की भी जांच करेगी।

Thursday, February 4, 2021

NCTE ने बीटीसी, बीएड व डीएलएड कॉलेजों से मांगी जानकारी

एनसीटीई ने बीटीसी, बीएड कॉलेजों से मांगी जानकारी

प्रयागराज। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने प्रदेश के सभी बीएड, बीटीसी एवं एमएड कॉलेजों को मान्यता संबंधी प्रपत्र उनके पास नहीं भेजने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। एनसीटीई ने कॉलेजों से महीने भर के भीतर मान्यता संबंधी प्रपत्र जमा करने का निर्देश दिया है। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विवि से जुड़े प्रयागराज मंडल के प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर एवं प्रयागराज जिले के बीएड, एमएड को भी रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में खुले बीटीसी कॉलेजों को रिपोर्ट देनी होगी।


एनसीटीई की ओर से देशभर के राज्य विश्वविद्यालयों एवं राज्य सरकार की ओर से संचालित बीएड,बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम का संचालन करने वाले कॉलेजों के सभी प्रपत्रों की जांच कराने का निर्णय के बाद कॉलेज प्रबंधन में खलबली है। जांच के दौरान जो कॉलेज प्रपत्र नहीं दिखा सकेंगे, उन कॉलेजों मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी। कॉलेज संचालकों का कहना है कि वह मान्यता से संबंधित प्रपत्र जमा कर चुके हैं। राज्य विवि के कुलपति प्रो. केएन सिंह ने कहा कि एनसीटीई की तरफ से अभी ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है।

Tuesday, January 26, 2021

नवीन सत्र हेतु बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 19 मई को कराने की तैयारी, 01 फरवरी को जारी होगा विज्ञापन

नवीन सत्र हेतु बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 19 मई को कराने की तैयारी, 01 फरवरी को जारी होगा विज्ञापन

UP BEd Joint Entrance Exam 2021: जानें लखनऊ विश्वविद्यालय 2021 में कब कराएगा बीएड प्रवेश परीक्षा कराएगा


संयुक्त प्रवेश परीक्षा (बीएड) 2021 का आयोजन आगामी 19 मई को किया जाएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय में सोमवार को हुई सलाहकार समिति की बैठक में यह तिथि प्रस्तावित की गई है। इस पर अन्तिम मुहर शासन की ओर से लगाई जाएगी। बीएड 2021 की प्रवेश समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेई ने बताया कि  दाखिले की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक फरवरी तक सूचना जारी की जाएगी। 

बता दें कि शासन ने लखनऊ विश्वविद्यालय को शैक्षिक सत्र 2021 की बीएड प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षाशास्त्र विभाग की प्रो. अमिता बाजपेई को इसकी जिम्मेदारी दी है। 

विश्वविद्यालय में सोमवार को सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। प्रो.अमिता बाजपेई ने बताया कि 19 मई को  प्रवेश परीक्षा कराए जाने की तिथि प्रस्तावित की गई है। शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा। आगामी एक फरवरी को विज्ञापन जारी किया जाएगा जिसमें प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने संबंधी सभी निर्देश शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस बार शुल्क में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई है।  सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 15 सौ रुपए होगा। वहीं, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को 750 शुल्क देना होगा। 
पिछले साल की तरह इस बार भी ईडब्ल्यूएस कोठे की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा जीरो फीस पर दाखिले नहीं दिए जाएंगे। इसके लिए भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही स्पष्ट निर्देश भी जारी किए जाएंगे।


लखनऊ विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सत्र 2021-22 की संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा आगामी 19 मई को कराने की तैयारी की है। एक फरवरी को विज्ञापन जारी किया जाएगा। 


सोमवार को विश्वविद्यालय में एडवाइजरी कमेटी की बैठक में तारीखें प्रस्तावित की गई। इसका प्रस्ताव जल्द शासन को जाएगा।

Thursday, December 3, 2020

बीएड- बीटीसी छात्रों की शुल्क भरपाई पर लगी रोक, गड़बड़ियां मिलने पर फैसला, सम्बन्धित विभागों को निर्देश जारी

बीएड- बीटीसी छात्रों की शुल्क भरपाई पर लगी रोक, गड़बड़ियां मिलने पर फैसला, सम्बन्धित विभागों को निर्देश जारी।

लखनऊ :  प्रदेश में बीएड व बीटीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई पर रोक लगा दी गई है। योजना में लगातार मिल रहीं गड़बड़ियों पर शासन ने यह फैसला किया है। समाज कल्याण समेत सभी संबंधित विभागों को इसके निर्देश दे दिए गए हैं। बीएड व बीटीसी संस्थानों को इस मद में किए गए भुगतान की जांच कराई जा रही है। इसमें लखनऊ के टीडीएल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, सिटी कॉलेज, विकट इंस्टीट्यूट और कानपुर के श्री शक्ति डिग्री कॉलेज में गड़बड़ियां मिलीं। लखनऊ के तीनों संस्थानों में किसी भी शिक्षक के वेतन संबंधी बैंक साक्ष्य नहीं मिले। 

जबकि, यह अनिवार्य है। जिला प्रशासन की जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि ये संस्थान केवल प्रवेश लेने व परीक्षा कराने तक सीमित हैं। कानपुर के संस्थान में 17 शिक्षकों में से 10 ही परीक्षा नियामक प्राधिकारी के यहां से अनुमोदित मिले। अभी अन्य जिलों की रिपोर्ट नहीं आई है, मगर वहां भी गड़बड़ियों की आशंका है। इसी आधार पर शासन ने बीएड व बीटीसी पाठयक्रम के लिए दी जाने वाली राशि जारी करने की अनुमति नहीं दी है।

Wednesday, November 18, 2020

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं


लखनऊ। शासन ने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को पूर्व दशम (कक्षा 9 व 10) छात्रवृत्ति योजना के तहत 135 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दे दी है। लेकिन बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। 


बीएड-बीटीसी कॉलेजों को पिछले वर्षों में किए गए भुगतान की जांच चल रही है। इसलिए यह फैसला किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के मामले में जांच रिपोर्ट आने के के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। वहीँ, दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बीएड- पाठ्यक्रम के लिए दी गई राशि को छोड़ शेष राशि निदेशक के निवर्तन पर रखने का आदेश दिया गया है।

Thursday, October 29, 2020

कानपुर विवि : बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के 20 हजार छात्र छात्राएं होंगे प्रमोट

कानपुर विवि : बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के 20 हजार छात्र छात्राएं होंगे प्रमोट

 
कानपुर : छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय परिसर व संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के छात्र छात्रएं इस वर्ष प्रमोट किए जाएंगे। इसके लिए महाविद्यालयों से छात्र छात्रओं के आंतरिक परीक्षा के अंक मंगाए जाएंगे। उन अंकों को जोड़कर विश्वविद्यालय से संबद्ध 260 से अधिक बीएड व एमएड कॉलेजों प्रथम वर्ष के करीब 22 हजार छात्र छात्रओं को प्रमोट किया जाएगा।


इन छात्र छात्रओं को प्रमोट करने के बाद इनका मूल्यांकन द्वितीय वर्ष की परीक्षा के आधार पर होगा। बीएड व एमएड द्वितीय व अंतिम वर्ष की परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर उन्हें औसत अंक देकर उनकी डिवीजन तय होगी। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुए लॉक डाउन के कारण बीएड व एमएड प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं हो पाई थीं। पिछले सात माह से बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के छात्र छात्रएं अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे थे।

Friday, October 23, 2020

बीएड और डीएलएड प्रशिक्षण को एकीकृत करने का यूपी के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने दिया सुझाव

बीएड और डीएलएड प्रशिक्षण को एकीकृत करने का यूपी के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने दिया सुझाव 

कक्षा 1 से 8 तक के लिए बीएड डिग्रीधारी शिक्षक ही उचित : सतीश द्विवेदी

 
लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने बीएड एवं डीएलएड की ट्रेनिंग को एक करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से 8 तक के लिए बीएड डिग्रीधारी शिक्षक ही उचित रहेंगे।


उन्होंने उच्च शिक्षा में सेवारत शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन और रिफ्रेशनल कोर्स की तरह बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के लिए भी कोर्स चलाने का सुझाव दिया। वे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई एनसीईआरटी की 57वीं जनरल काउंसिल में बोल रहे थे। 


द्विवेदी ने प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में किए जा रहे सुधारों एवं नवाचारों की जानकारी देते हुए उपलब्धियां बताईं। कहा, गवर्नेंस एवं अनुश्रवण की व्यवस्था को सुधारने के लिए विभाग का एकीकृत प्रेरणा पोर्टल एवं मानव संपदा पोर्टल विकसित कर पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। एससीईआरटी की जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों एवं परिषद के नियंत्रणाधीन इकाइयों में प्रबक्‍ताओं की नियुक्ति की गई है। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों एवं राज्य स्तरीय संस्थानों में नवनियुक्त प्रवक्ताओं का ऑनलाइन कंप्यूटर प्रशिक्षण कराया गया।

Thursday, October 1, 2020

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति अनियमितता की जांच के दायरे में आये निजी व एडेड बीएड व बीटीसी कालेज

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति अनियमितता की जांच के दायरे में आये निजी व एडेड बीएड व बीटीसी कालेज


 लखनऊ : निजी क्षेत्र के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) में दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की अनियमितताएं सामने आने पर शासन ने अब प्रदेश में संचालित निजी और एडेड बीएड व बीटीसी कालेजों में भी इसकी जांच कराने का निर्णय किया है। शासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है।



वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने निर्देश दिया है कि निजी व एडेड बीएड और बीटीसी कॉलेजों में विभिन्न वर्गों के छात्र-छात्रओं को दी जा रही छात्रवृत्ति का लाभ पात्र लाभार्थियों को ही मिल रहा है या नहीं, इसकी सघनता से जांच करायी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर एक टीम बनाकर संबंधित जिले के जिलाधिकारी के साथ इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले कॉलेजों की जांच की जाए।

बुधवार को विधान भवन में समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के तहत छात्रवृत्ति योजना को लेकर वह बैठक कर रहे थे।

वित्त मंत्री ने ली बैठक, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

Tuesday, September 15, 2020

बीएड : निजी संस्थानों की फीस तय न होने से बढ़ सकती हैं छात्रों की मुसीबतें

बीएड : निजी संस्थानों की फीस तय न होने से बढ़ सकती हैं छात्रों की मुसीबतें।

निजी संस्थानों के लिए चालू शिक्षण सत्र में बीएड की फीस निर्धारित नहीं होने से छात्रों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। फीस का निर्धारण न होने से निजी संस्थानों के विद्यार्थियों को राज्य विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम की न्यूनतम फीस के बराबर भुगतान करना होगा।



राज्य विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों की फीस में भारी अंतर है। निजी बीएड शिक्षण संस्थानों के लिए वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक प्रथम वर्ष में 51,250 रुपये और द्वितीय वर्ष में 30,000 रुपये फीस थी। इसके बाद 2019-20 के लिए भी इसी दर से शुल्क निर्धारित किया गया। चालू सत्र में निजी संस्थानों के लिए सक्षम स्तर से बीएड की फीस निर्धारित नहीं की गई है।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों के लिए पूरी फीस की भरपाई करती है, जबकि बीएड  में अन्य वर्गों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति की कैपिंग लगाई गई है। इस साल कोरोना संकट के कारण ऑनलाइन क्लासेज ही चल रही हैं। इसलिए प्रदेश सरकार शुल्क भरपाई में कटौती करने पर भी विचार कर रही है। इसके पीछे तर्क है कि ऑनलाइन क्लासेज से संस्थानों का व्ययभार कम हुआ है।


 सक्षम स्तर से बीएड में ली जाने वाली फीस का निर्धारण जरूरी

अधिकारियों का कहना है कि 2 अक्तूबर को शुल्क प्रतिपूर्ति की जानी है। इसलिए सक्षम स्तर से बीएड में ली जाने वाली फीस का निर्धारण जरूरी है। चाहें इसकी राशि कम या ज्यादा हो, क्योंकि किसी भी स्थिति में यह राज्य विश्वविद्यालय में ली जाने वाली फीस से अधिक ही निर्धारित होगी।

अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति मद का एक चौथाई बजट बीएड पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्रों पर व्यय होता है। कुल दो हजार करोड़ रुपये के सालाना बजट में से करीब 450 करोड़ रुपये बीएड के विद्यार्थियों को दिया जाता है। सामान्य वर्ग में आवेदन करने वाले पात्र विद्यार्थियों की संख्या करीब 25000 रहती है।


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Sunday, August 30, 2020

बीएड में प्रवेश हेतु काउंसलिंग और परीक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी

बीएड में प्रवेश हेतु काउंसलिंग और परीक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी



कोरोना काल में बीएड के प्रवेश से लेकर वार्षिक परीक्षा कराने की गाइडलाइन नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एनसीटीई ने जारी कर दी है। एहतियात के साथ कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाए, जबकि पढ़ाई के 200 दिन पूरे होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा करा सकते हैं। 


बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा हो चुकी है। अब पांच सितंत्र को परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद काउंसिलिंग व कॉलेजों में प्रवेश देने का सिलसिला शुरू होगा। बीएड कॉलेजों में प्रवेश के मद्देनजर एनसीटीई ने गाइडलाइन बनाई है। यह गाइडलाइन कॉलेज में काउंसिलिंग के लिए आने वाले उम्मीदवारों के लिए है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सभी के दूर-दूर बैठने की व्यवस्था की जाएगी। 



यह हैं प्रवेश की गाइडलाइन

● एक कक्ष में एक ही काउंटर होगा। प्रत्येक काउंटर के सामने दो गज की
● दूरी पर सफेद गोले बनाए जाएं। उनगोलों में ही छात्र-छात्राओं को खड़ा किया जाए।
● ऐसे में मास्क का उपयोग करना जरूरी है।
● टोकन से छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाए।
● प्रवेश के दौरान उनकी थर्मल स्क्रीनिंग हो।
● शौचालय, पेजयल वाले स्थलों को सैनिटाइज किया जाए।
● काउंसलिंग के दौरान दस्तावेज सत्यापन के स्थान सैनिटाइज किए जाए।
● कॉलेजों में कर्मचारियों की रोटेशन में झ्यूटी लगाई जाए।


छात्रों को वार्षिक परीक्षा का इंतजार
सीएसजेएमयू के विद्यार्थी बीएड की वार्षिक परीक्षा का इंतजार पांच महीने से कर रहे हैं। नियमानुसार प्रवेश से 200 दिन पढ़ाई पूरी होने के बाद वार्षिक परीक्षा हो जानी चाहिए। पढ़ाई प्रारंभ हुए नौ महीने बीत चुके हैं, जबकि जो परीक्षा कराने की जो गाइडलाइन एनसीटीई की है, उसके अंतर्गत मानक के अनुसार कक्षाएं लगे पांच महीने से ऊपर बीत चुका है। स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी का कहना है कि एनसीटीई से संपर्क किए जाने पर बताया गया कि परीक्षा कराना विवि की जिम्मेदारी है। अगर कक्षाएं पूरी लग चुकी है तो परीक्षा आयोजित कराई जा सकती हैं।

Monday, August 10, 2020

लापरवाही : बीएड प्रवेश परीक्षा में हिंदी का सवाल रिपीट, अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति

लापरवाही : बीएड प्रवेश परीक्षा में हिंदी का सवाल रिपीट, अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति

 
बीएड प्रवेश परीक्षा का पेपर तैयार करने में हुई लापरवाही सामने आई है। पहली पाली में सामान्य ज्ञान और हिंदी के पेपर में हिंदी का सवाल दो बार पूछ लिया गया। अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति है कि अब मार्किंग किस आधार पर की जाएगी। हालांकि, अभ्यर्थियों को पेपर सामान्य और संतुलित लगा, लेकिन तर्कशास्त्र के सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझाया।


पहली पाली में सामान्य ज्ञान के 50 सवाल और हिंदी अथवा अंग्रेजी में से किसी एक विषय के 50 सवाल यानी कुल 100 सवाल हल करने थे। दूसरी पाली की परीक्षा में तर्कशास्त्र और विषय के 50-50 सवाल थे। तीन-तीन घंटे की दो पालियों में कुल 100-100 सवाल हल करने थे। पहली पाली में हिंदी का एक सवाल रिपीट हुआ है।


बुकलेट संख्या - जे में 75वें और 88वें नंबर पर एक ही सवाल दो बार पूछा गया, ‘निम्नलिखित में रूढ़ शब्द कौन सा है?’ अभ्यर्थियों को समझ में नहीं आया कि दोनों सवालों का जवाब दें या एक ही बार उत्तर दें। कुछ ने दो तो कुछ ने एक बार ही उत्तर दिया। अभ्यर्थियों के बीच इस बात को लेकर असमंजस है कि मार्किंग किस आधार पर की जाएगी? 


सामान्य ज्ञान में कोरोना से जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछा गया। अभ्यर्थी इस आधार पर अनुमान लगा रहा है कि पेपर सेटिंग काफी पहले ही तैयार कराया जा चुका था, क्योंकि पहले यह परीक्षा अप्रैल में प्रस्तावित थी लेकिन लॉकडाउन के कारण स्थगित हो गई थी। दौलत हुसैन इंटर कॉलेज केंद्र में परीक्षा देने जौनपुर से आईं सृष्टि ने बताया कि जो पढ़ा था, उसमें से बहुत कम सवाल पूछे गए। सोनी यादव ने बताया कि पेपर संतुलित था, वहीं नीतू यादव का कहना था कि पेपर कठिन आया। अभ्यर्थी नीतू और प्रतिभा के मुकाबले पिछले साल के मुकाबले इस बार तर्कशास्त्र से जुड़े सवाल ज्यादा कठिन थे। 

परीक्षा कक्ष में मानक से अधिक बैठाए गए अभ्यर्थी
परीक्षा केंद्रों के लिए अभ्यर्थियों को बैठाने के मानक तय किए गए थे। एक कक्ष में अधिकतम 24 अभ्यर्थियों को ही बैठाया जा सकता था, लेकिन डीपी गर्ल्स इंटर कॉलेज में एक-एक कमरे में 28-28 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वहीं, आर्य कन्या कॉलेज के ऊपरी तल पर स्थित कमरों में भी मानक से अधिक अभ्यर्थियों को बैठाया गया था।

बीएड परीक्षा में कोरोना से बचाव के निर्देशों के उल्लंघन पर नूतन ठाकुर ने की परीक्षा आयोजकों पर एफआईआर की मांग

बीएड परीक्षा में कोरोना से बचाव के निर्देशों के उल्लंघन व सोशल डिस्टेंसिंग के पालन न करने पर परीक्षा आयोजकों पर एफआईआर की मांग 

 
एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने आज हुए बीएड परीक्षा में सोशल डिस्टेंस तथा कोरोना से बचाव के समस्त निर्देशों का पूरी तरह से खुलेआम उल्लंघन होने के संबंध में परीक्षा संचालक लखनऊ विश्वविद्यालय के अधिकारीगण के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग की है. 


प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में नूतन ने कहा कि जहाँ एक ओर केंद्र एवं राज्य सरकारें निरंतर कोरोना से बचाव के लिए नए-नए निर्देश दे रही है, वहीँ इस परीक्षा ने इन पूरे प्रयासों को मिटटी में मिला दिया, जहाँ लाखों की संख्या में अभ्यर्थी एवं अन्य लोग बहुत ही भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर एकसाथ एकत्र हुए तथा सोशल डिस्टेंस का नियम पूरी तरह दरकिनार हो गया और लोक स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ हुआ.


नूतन ने कहा कि परीक्षा संचालक इन तथ्यों से पूरी तरह भिज्ञ थे और उनसे हजारों अभ्यर्थियों से अनुरोध भी किया, इसके बाद भी वे जानबूझ कर इस ओर पूरी तरह लापरवाह रहे. 
अतः उन्होंने उत्तरदायी अधिकारीगण के विरुद्ध महानगर थाना, लखनऊ में एफआईआर की मांग की है. साथ ही उन्होंने 16 अगस्त 2020 को यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा संपादित होने वाले बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) प्रवेश परीक्षा को स्थगित किये जाने की भी मांग की है.

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : हिंदी और रीजनिंग के प्रश्नों में उलझे परीक्षार्थी, सामान्य ज्ञान भी रहा टफ

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : हिंदी और रीजनिंग के प्रश्नों में उलझे परीक्षार्थी, सामान्य ज्ञान भी रहा टफ


उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए। तर्कशास्त्र (रीजनिंग) के सवालों ने भी अभ्यर्थियों को खूब उलझाया। बीएड प्रवेश परीक्षा में पहली पाली में अंग्रेजी अथवा हिंदी के 50 सवाल पूछे गए थे। इसके अलावा सामान्य ज्ञान से 50 सवाल थे। हिंदी का पर्चा सामान्य जरूर था, लेकिन बुकलेट संख्या जे में प्रश्न संख्या 75 और 88 एक ही था। इसमें पूछा गया था कि निम्नलिखित में रूढ़ शब्द कौन सा है। दोनों में विकल्प भी एक थे।


अभ्यर्थियों ने बताया कि सभी बुकलेट में इस सवाल का दोहराव था। ऐसे में इसका मूल्यांकन कैसे होगा, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद दूसरी पाली में विषय से संबंधित 50 सवाल और तर्कशास्त्र के 50 सवाल पूछे गए थे। अभ्यर्थियों की मानें तो तर्कशास्त्र के सवालों ने उन्हें खूब उलझाया। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसके पहले प्रस्तावित परीक्षा का जो पर्चा तैयार किया गया था उससे ही पेपर करा लिया गया। क्योंकि, कोरोना महामारी से जुड़े एक भी सवाल नहीं पूछे गए थे।


जीके के प्रश्नों ने किया परेशान
बीएड प्रवेश परीक्षा में जनरल नॉलेज के सवालों ने छात्रों को खासा परेशान किया। परीक्षार्थियों ने कहा कि कोरोना काल में परीक्षा को लेकर असमंजस रहा। इससे परीक्षा की तैयारी नहीं हो सकी। पेपर कठिन रहा। 


लूकरगंज परीक्षा केंद्र के संदीप ने कहा कि केंद्र पर सेनिटाइजर नहीं रहा। अमूमन प्रश्न सरल रहा लेकिन जनरल नॉलेज थोड़ा कठिन था। वहीं, प्रमोद कुमार ने कहा परीक्षा अच्छी रही। पहली पाली में अच्छा पेपर हुआ लेकिन दूसरी पाली में थोड़ा कठिन था। जनरल नॉलेज से कठिन प्रश्न पूछे गए थे।


सचिन मौर्य ने बताया कि डीवीएस जीपी गोविंदपुर परीक्षा केंद्र पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई गई। परीक्षा मॉडल साधारण था, सबसे ज्यादा प्रश्न जनरल नॉलेज से पूछे गए। वहीं, धर्मेंद्र पटेल ने कहा कि दूसरी पॉली के प्रश्नपत्र में जनरल नॉलेज के प्रश्न काफी कठिन रहे। केंद्र पर कोविड-19 से निपटने के लिए उचित उपाय नहीं किए गए थे। 

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : कई शहरों में उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां, जान जोखिम में डालकर देने पहुंचे बीएड प्रवेश परीक्षा, न दिखी सोशल डिस्टेंसिंग न थर्मल स्कैनिंग

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : कई शहरों में उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां


जान जोखिम में डालकर देने पहुंचे बीएड प्रवेश परीक्षा, न दिखी सोशल डिस्टेंसिंग न थर्मल स्कैनिंग


लखनऊ समेत प्रदेश भर में  संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड 2020 शुरू हो गई है। जैसे-तैसे परीक्षार्थियों को केंद्र में प्रवेश देकर परीक्षा शुरू कराई गई।


राजधानी लखनऊ में परीक्षा को लेकर किए गए  तमाम दावों की पोल रविवार सुबह खुल गई। कोरोना महामारी के बावजूद सामाजिक दूरी जैसे प्रोटोकॉल तक पूरे नहीं हो सके। केकेसी, केकेसी, ए पी सेन कॉलेज में ना तो थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था दिखी और ना ही अन्य व्यवस्थाएं। 


सिर्फ केंद्र में ही नहीं, बल्कि केंद्र तक पहुंचने में भी अभ्यर्थियों को काफी मेहनत करनी पड़ी। बाराबंकी से केकेसी पर परीक्षा देने आए सुरेश सिंह और सुल्तानपुर से अाई आयुषी ने बताया कि बस तक नहीं मिल रही है। पहुंचने के लिए प्राइवेट गाडियां करनी पड़ी है।


44 केंद्रों पर नियमों को भूले स्टूडेंट
मेरठ के 44 केंद्रों पर बीएड एंट्रेंस सुबह नौ बजे शुरू हो गया। प्रतिबंध के बीच हो रहे इस एंट्रेंस में स्टूडेंट और परिजन निजी वाहनों से केंद्रों तक पहुंचे। सभी केंद्रों पर कार और बाइक की लाइन लगी रही। मास्क और सेनेटाइजर साथ लाने के निर्देशों के बावजूद कुछ स्टूडेंट मास्क लगाकर नहीं पहुंचे। सभी केंद्रों पर ऐसे स्टूडेंट के लिए मास्क दिए गए। केंद्रों पर स्टूडेंट की एंट्री हाथों को सेनेटाइज कराने के बाद हुई। केंद्रों के बाहर स्टूडेंट दो गज की दूरी के नियमों को भी भूल गए।


 एडमिट कार्ड को फोटोकॉपी लेकर नहीं पहुंचने से स्टूडेंट को चक्कर काटने पड़े। हालांकि कुछ केंद्रों के आसपास फ़ोटो स्टेट की दुकानें देरी से खुलीं। यहां पर स्टूडेंट की एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी कराने के लिए लाइन लगी रही। प्रशासन द्वारा प्रतिबंध में ई-रिक्शा और ऑटो संचालन की छूट देने से स्टूडेंट को राहत मिली। नौ से 12 और दो से पांच बजे की दो पालियों में हो  रहे इस एंट्रेंस में स्टूडेंट को इस बार अंतराल के बीच बाहर आने की अनुमति नहीं रहेगी। स्टूडेंट को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक केंद्र के अंदर रहना होगा। मेरठ में 18 हजार 800 एंट्रेंस के लिए पंजीकृत हैं।



लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा शहर के 74 केंद्रों पर कराई गई। प्रथम पाली में 84 और दूसरी पाली में 84.5 फीसदी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। बीएड प्रवेश परीक्षा के नोडल अफसर एवं प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार शेषनाथ पांडेय ने बताया कि परीक्षा में शामिल होने के लिए शहर में 25,366 अभ्यर्थी पंजीकृत रहे। पहली पाली में कुल 21,391 ने परीक्षा में हिस्सा लिया। जबकि, 3975 ने परीक्षा छोड़ दी। इस तरह पहली पाली में अभ्यर्थियों की उपस्थिति 84 फीसद रही। वहीं, दूसरी पाली में पांच अभ्यर्थी बढ़ गए। इस वजह से कुल 21,396 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3970 ने परीक्षा छोड़ दी। 


रजिस्ट्रार ने बताया कि प्रयागराज में दो केंद्रों पर तीन अभ्यर्थियों को तेज बुखार की शिकायत मिली। ऐसे में गाइडलाइन के अनुपालन में तीनों को अलग कमरे में बैठाकर उनकी परीक्षा ली गई। हमीदिया कॉलेज में दो और आर्य कन्या में एक अभ्यर्थी में तेज बुखार की शिकायत मिली थी।


सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां
बीएड प्रवेश में शामिल होने वाले अभ्यर्थी एवं अभिभावकों ने सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाईं। इविवि के केपीयूसी गेट पर घंटों भीड़ जमा रही। इससे पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं परीक्षार्थियों का कहना है कि कुलभाष्कर इंटर कॉलेज में गेट देर से खुलने के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाया। परीक्षार्थियों ने यह भी कहा कि गेट पर सुबह लगभग 8 बजे तक लिस्ट नहीं लगाई गई थी। इस कारण अचानक लगी लिस्ट में अपना नाम ढूंढने के लिए छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी।