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Thursday, November 19, 2020

मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा तलब, सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश

मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा तलब, सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश

शिक्षा विभाग : सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश, मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा मांगा।

प्रयागराज :  सरकारी स्कूलों और मदरसों में कितने बच्चे एक विषय के रूप में उर्दू पढ़ रहे हैं, यह जानने के लिए शिक्षा विभाग डाटा तैयार करेगा। शिक्षा निदेशक (बेसिक) डॉ. सर्वेश विक्रम बहादुर सिंह ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कक्षावार संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सूचना को निर्धारित प्रारूप में भरकर प्रदेश के पाठ्य पुस्तक अधिकारी को ई- मेल करना है। चार शैक्षिक सत्रों की सूचना मांगी गई है।


शिक्षा निदेशक ने प्रदेश में संचालित परिषदीय, उच्च माध्यमिक विद्यालयों, राजकीय विद्यालयों, अशासकीय सहायत प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों, समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं सहायता प्राप्त मदरसों में शैक्षिक सत्र 2017-18, 2018-19, 2019-20 तथा 2020-21 में कक्षा एक से आठ तक उर्दू माध्यम एवं एक विषय के रूप में उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कक्षावार संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि जिले विद्यालयों और मदरसों में बच्चे उर्दू विषय पढ़ रहे हैं। इसका विवरण जुटाया पढ़ जा रहा है। निदेशायल से उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छत्राओं को ब्योरा क्यों मांगा गया है इसकी जानकारी नहीं है लेकिन सभी विद्यालयों को ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गए हैं।

Tuesday, November 17, 2020

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन।

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत प्रदेश भर में संचालित मदरसा परिषद की परीक्षाओं में बीते तीन साल से निरंतर परीक्षार्थियों की संख्या कम हो रही है। वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18 एवं वर्ष 2018-19 में हुई बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। वहीं प्रदेश में संचालित 558 अनुदानित मदरसों की ओर से बोर्ड को अतिरिक्त पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। प्रस्ताव में जो छात्र संख्या दिखाई जा रही हैं, वह बेहद ज्यादा है। इसके आधार पर ही मदरसों में पद सृजन की मांग मदरसा प्रबंधन की ओर से की जा रही है। एक तरफ परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या कम होना और वहीं उसी वर्ष में भेजे गए अतिरिक्त पद सृजन प्रस्ताव में छात्र संख्या ज्यादा होना मदरसा बोर्ड को अखर गया है। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सख्त पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। परीक्षार्थी कम होने और अतिरिक्त पद सृजन की मांग करने से आशंका जतायी जा रही है कि मदरसों में पद सृजन के लिए प्रस्ताव में छात्र संख्या बढ़ा कर दिखायी जा रही है।


रजिस्ट्रार ने कहा, मामला चिंताजनक

मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने पद सृजन के प्रस्ताव में झूठी छात्र संख्या बताने के मामले को बेहद चिंताजनक बताया है। कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजते समय कई बिन्दुओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है या जाबूझकर इसकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य मे ऐसा फिर करने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एक सप्ताह करें परीक्षण

रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक सप्ताह का समय देते हुए पदों का पुन: परीक्षण कर दोबारा रिपोर्ट भेजने को कहा है। अधिकारियों को मदरसों के प्रस्ताव व बोर्ड परीक्षा में शामिल छात्र संख्या का मिलान करने के साथ ही सभी बिन्दुओं का अवलोकन कर रिपोर्ट भेजनी होगी।

मदरसा परीक्षाओं में छात्र संख्या कम होने के कई कारण हैं लेकिन अतिरिक्त पद सृजन के लिए छात्र संख्या बढ़ाकर दिखाना गलत है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्तरों पर प्रस्ताव का अवलोकन करें।

नंद गोपाल गुप्ता नंदी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

Sunday, November 15, 2020

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित परीक्षाओं में हर साल छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षा में 1,82,259 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था,


जबकि 2019 में दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ छात्रों की घटती संख्या के बावजूद प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसे अतिरिक्त पदों के सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को भेज रहे हैं। इस पर उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को प्रस्तावों के पुनरावलोकन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि गत तीन वर्षों में परीक्षा फार्म भरने व परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 


एक ओर जहां छात्रों की संख्या कम हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिक छात्रों की संख्या प्रदर्शित कर अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसा पाया गया और अधिक छात्र संख्या दर्शाकर पद सृजन के प्रस्ताव भेजे गए तो संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में दस अनुदानित मदरसों में से कइयों ने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रस्ताव दिया है। रजिस्ट्रार के पत्र से मदरसों में खलबली मच गई है।

Friday, November 13, 2020

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।


मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत प्रदेश के 25 हजार शिक्षकों को दो महीने दस दिन (70 दिन) का वेतन मिलेगा। दरअसल, मदरसा शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्र ने अपने हिस्से के 50 करोड़ 89 लाख रुपये जारी कर दिए।



मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत स्नातक शिक्षकों को 8000 और परास्नातक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र क्रमश: 3600 रुपये और 4800 रुपये देता है, लेकिन चार साल से केंद्र ने अपना अंशदान जारी नहीं किया था।इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि केंद्र से जारी धनराशि वर्ष 2016-17 की प्रथम किस्त का 40 फीसदी है। धीमी गति से मानदेय रिलीज करने से मानदेय और अधिक लंबित होता जा रहा है।  शिक्षकों के वेतन में मिलने वाला केंद्रांश बीते चार साल से नहीं मिल रहा है, जो अब बढ़कर 977 करोड़ रुपये हो गया है। 

Thursday, November 5, 2020

प्रदेश के सभी मदरसे होंगे ऑनलाइन, बच्चों को शिक्षा के अलावा अन्य सुविधाएं भी कराई जाएंगी मुहैया।

प्रदेश के सभी मदरसे होंगे ऑनलाइन, बच्चों को शिक्षा के अलावा अन्य सुविधाएं भी कराई जाएंगी मुहैया।

लखनऊ :  समानता के आधार पर बच्चों को शिक्षा व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रदेश के सभी मदरसों को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी मदरसों व उनके एकत्र छात्रावासों में रह रहे बच्चों किया जा रहा है। इसका मकसद है कि जैसे अन्य छात्रावासों के बच्चों को छात्रवृत्ति या अन्य सुविधाएं मिलती हैं, वैसे ही मदरसों के बच्चों को भी मिलें। इन बच्चों के अधिकारों का भी संरक्षण हो। राज्य सरकार ने इसके लिए अभियान चलाकर प्रदेश के सभी मदरसों को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने को कहा है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता के अनुसार सभी जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को इस काम में लगाया गया है।


जेजे एक्ट के दायरे में आएंगे मदरसे : प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कई मदरसे हैं। कई बार इन मदरसों के बच्चे किसी वजह से भागकर जब शिकायत करते हैं और संबंधित विभाग मदरसों के जिम्मेदारों से संपर्क करता है तो जवाब मिलता है कि वह अल्पसंख्यक कल्याण या किसी अन्य विभाग से संबद्ध नहीं हैं। इसे देखते हुए सरकार ने सभी मदरसों को ऑनलाइन कर उन्हें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के दायरे में लाने का फैसला किया है।

Sunday, November 1, 2020

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम।

 
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद मदरसों में ऑनलाइन परीक्षाएं करा सकता है। इसकी शुरुआत गृह परीक्षाओं से होगी। यह परीक्षाएं नवंबर व दिसंबर में आयोजित की जाएंगी। मदरसा बोर्ड वर्तमान शैक्षिक सत्र में सिलेबस भी कम करने जा रहा है। इसके लिए जल्द ही मदरसा शिक्षा परिषद की बैठक होने जा रही है। इसमें मदरसों के ऑनलाइन फॉर्म भरने की तिथि से लेकर परीक्षा कार्यक्रम, सिलेबस व परीक्षाओं के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।




कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश के मदरसे भी पिछले छह महीने से बंद चल रहे थे। वर्तमान में मदरसे भले ही खुल गए हों, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इनमें छात्र-छात्रओं की उपस्थिति बहुत कम है। अभिभावक अपने बच्चों को मदरसों में नहीं भेज रहे हैं। मदरसा बोर्ड के सामने सबसे पहले गृह परीक्षाएं आयोजित कराना बड़ी चुनौती है। गृह परीक्षा मदरसा प्रबंधक कराते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में परीक्षा का मॉडल बोर्ड को तय करना है।


इसलिए बोर्ड ऑनलाइन परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि बोर्ड के सामने चुनौती मदरसों में इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की भी है। साथ ही मदरसों में निम्न वर्ग के बच्चे आते हैं। इनकी ऑनलाइन परीक्षा किस तरह से कराई जाए, इस पर भी मंथन चल रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि कितने बच्चों के घरों में मोबाइल फोन की उपलब्धता है। मदरसा बोर्ड छोटे बच्चों की टेलीफोनिक परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। इसमें टेलीफोन के जरिए बच्चों से कुछ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसी आधार पर बच्चों को परीक्षा में अंक दिए जाएंगे। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मदरसा बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। यह बैठक नवंबर के पहले पखवाड़े में प्रस्तावित है।

Thursday, October 29, 2020

मदरसा : पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत, अंकपत्र और प्रमाणपत्र में विरोधाभास।

मदरसा : पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत, अंकपत्र और प्रमाणपत्र में विरोधाभास।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत पैदा हो गई है। परिषद द्वारा संचालित मुंशी / मौलवी और आलिम के पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा के बाद जो अंकपत्र और प्रमाण पत्र जारी किये गये उन पर मुंशी, मौलवी, आलिम के बजाए सीनियर सेकेण्ड्री अंकित किया गया। इस बदलाव की वजह से परिषद की परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं के समक्ष कई दिक्कतें पैदा हो रही हैं।

इस बाबत मदरसा शिक्षकों के संगठन आल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महामंत्री वहीदुल्लाह खान ने परिषद के रजिस्ट्रार आर. पी. सिंह को एक पत्र भी लिखा है । पत्र में कहा गया है कि शासनादेश-विभागीय आदेश में स्पष्ट तौर पर माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा मुंशी, मौलवी को हाईस्कूल तथा आलिम के पाठ्यक्रम को इण्टर के बराबर दर्जा दिया गया है। 1995 के एक अन्य आदेश में कहीं भी सेकेण्ड्री या फिर सीनियर सेकेण्ड्री का जिक्र नहीं है । माध्यमिक शिक्षा का उक्त आदेश ही केंद्र अथवा राज्य सरकार के सभी विभागों, कालेजों और सभी राज्य या केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में उपलब्ध है।


पत्र में कहा गया है कि कार्मिक विभाग द्वारा सभी विभागों को सेवाओं के संबंध में प्रमाण-पत्र की समकक्षता के लिए मुंशी, मौलवी को हाईस्कूल और आलिम को इण्टर के समकक्ष मानने के आदेश जारी किये गये हैं। आदेश में उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परीक्षा या प्रमाण पत्र में सेकेण्ड्री या हायर सेकेण्ड्री का कोई उल्लेख नहीं है। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 30 जनवरी 2009 और केंद्रीय कार्मिक विभाग के 23 फरवरी 2010 में सीबीएसई/ आईसीएसई की सेकेण्ड्री, हायर सेकेण्ड्री की समकक्षता मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परीक्षा मुंशी, मौलवी तथा आलिम को ही दी गयी है।


अंक पत्र और प्रमाण पत्र में विरोधाभास 

उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा परीक्षाओं के नाम में बदलाव से परिषद द्वारा जारी वर्ष 2020 से पूर्व की परीक्षाओं के अंक पत्र और प्रमाण पत्र और वर्ष 2020 में जारी अंक पत्र व प्रमाण-पत्र में विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गयी है। संगठन की ओर से इस बारे में शासन की ओर से स्पष्ट संशोधन आदेश जारी किये जाने की मांग की गयी है। ताकि मुंशी, मौलवी और आलिम की परीक्षाओं के अंक पत्र और प्रमाण पत्र, सेकेण्ड्री और हायर सेकेण्ड्री के समतुल्य हर विभाग या प्रतिष्ठान में मान्य किए जाएं।

Thursday, October 22, 2020

यूपी : मदरसों के बच्चे भी बनेंगे स्काउट-गाईड व एनसीसी कैडेट

यूपी : मदरसों के बच्चे भी बनेंगे स्काउट-गाईड व एनसीसी कैडेट

 
प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मदरसों में अध्ययनरत छात्रों को एनसीसी स्काउट गाइड तथा राष्ट्रीय सेवा योजना से जोड़े जाने का निर्णय लिया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एनसीसी स्काउट गाइड तथा राष्ट्रीय सेवा योजना से जोड़ने से छात्रों में अनुशासन राष्ट्रीय एकता और सेवा कार्य की भावना को विकसित करना इसका उद्देश्य है।


अल्पसंख्यक विभाग द्वारा अन्य योजनाओं- कार्यक्रमों के बारे में अवगत कराना है कि मदरसों में वैकल्पिक विषयों की शिक्षा का माध्यम हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी निर्धारित किया गया है। विभाग द्वारा ऑनलाइन मदरसा पोर्टल की भी स्थापना की गई है। इस पोर्टल के स्थापित होने से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।अल्पसंख्यक विभाग द्वारा इस वर्ष पोर्टल के माध्यम से मदरसा परिषद की मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल एवं फज़िल स्तर की परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। 


अल्पसंख्यक विशेष कर मुस्लिम समुदाय के ऐसे छात्र जो अरबी, फारसी मदरसों में अध्ययनरत हैं, को आधुनिक ज्ञान विज्ञान से परिचित कराने तथा राष्ट्रीय एकता को बलवती बनाने के उद्देश्य से मदरसा पाठ्यक्रम में संशोधन किया गया है। संशोधित पाठ्यक्रम के तहत एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को लागू किया गया है।

Wednesday, October 21, 2020

मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियां बढ़ाएगी यूपी सरकार, बनेगी कार्ययोजना

मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियां बढ़ाएगी यूपी सरकार, बनेगी कार्ययोजना।
                                                                       
लखनऊ : प्रदेश सरकार राज्य के सभी अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका  कनिष्ठ पांडे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के संबंध में  सर्वोच्च अदालत द्वारा जारी प्रश्नावली के संबंध में यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश के अल्पंसख्यक विभाग के सभी  उपनिदेशक-मंडलीय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों और सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 'उत्तर प्रदेश खेल विकास एवं प्रोत्साहन नियमावली 2020' के अनुसार मदरसों में भी खेल गतिविधियों का प्रचार प्रसार और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चत की जाए। 



'खेलो इंडिया ऐप' पर खेल में रुचि रखने वाले शिक्षकों का पंजीकरण आदि कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। इसके साथ ही मदरसों में खेल संस्कृति के विकास और प्रचार-प्रसार की एक कार्ययोजना बनाकर तैयार की जाए। इसके अलावा इस क्रम में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हर महीने परिषद कार्यालय की ई-मेल आईडी पर भेजी जाए।

Friday, October 16, 2020

शर्तों के साथ मदरसों में 19 अक्टूबर से शुरू होगी पढ़ाई, 50 फीसदी छात्र ही जायेंगे बुलाये

शर्तों के साथ मदरसों में 19 अक्टूबर से शुरू होगी पढ़ाई, 50 फीसदी छात्र ही जायेंगे बुलाये

 
 लखनऊ : प्रदेश सरकार शर्तों के साथ 19 अक्टूबर से मदरसों में पढ़ाई शुरू कराने जा रही है। मदरसों में सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी, कामिल एवं फाजिल की कक्षाएं दो पालियों में चलेंगी। पहली पाली में सेकेंडरी व फाजिल और दूसरी पाली में सीनियर सेकेंडरी व कामिल की पढ़ाई होगी। प्रत्येक दिन कक्षा में 50 फीसद छात्र ही बुलाए जाएंगे।


शेष 50 फीसद अगले दिन बुलाए जाएंगे।अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही छात्र-छात्रएं मदरसों में पढ़ाई के लिए बुलाए जाएंगे। सरकार ने मदरसों के लिए स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि मदरसे खोले जाने से पहले उन्हें सैनिटाइज किया जाए। यह प्रक्रिया प्रतिदिन प्रत्येक पाली के बाद नियमित रूप से की जाए। मदरसों में हैंडवॉश, सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनिंग एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। यदि किसी को खांसी, जुखाम या बुखार के लक्षण हों तो उन्हें प्राथमिक उपचार देते हुए घर वापस कर दिया जाए। मदरसों में ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रखी जाए। जो छात्र ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुविधा मुहैया कराई जाए।

Monday, October 12, 2020

मोबाइल एप पर NCERT की किताबों की तालीम हासिल करेंगे मदरसे के छात्र, मोबाइल एप की मिली मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप

मोबाइल एप पर NCERT की किताबों की तालीम हासिल करेंगे मदरसे के छात्र, मोबाइल एप की मिली मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप।

लखनऊ : मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित और गैर अनुदानित मदरसों के सभी छात्र छात्राएं अब मोबाइल एप पर एनसीईआरटी की किताबों से तालीम हासिल करेंगे। मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मोबाइल एप तैयार करने की मंजूरी दे दी है। एप पर दीनियात (धर्मशास्त्र) और एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम हिंदी, अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी उपलब्ध एप बनाने की जिम्मेदारी यूपी रहेगा।

डिस्को को दी गई है। प्रदेश सरकार ने तीन साल पहले तैतानिया (कक्षा 1 से 5 ) फोकानिया ( कक्षा 5 से 8 ) और आलिया व उच्च आलिया स्तर ( हाई स्कूल व उसके ऊपर ) के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई की मंजूरी दी थी प्रदेश में मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें से 558 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। तैतानिया और फोकानिया के बच्चों को हिंदी अंग्रेजी गणित सामाजिक विज्ञान की शिक्षा बेसिक शिक्षा परिषद की है किताबों से दी जाती रही है। बेसिक शिक्षा विभाग सर्व शिक्षा अभियान के तहत निशुल्क किताबें उपलब्ध कराता है।


आलिया व उच्च स्तर के मदरसों में विकल्प के तौर पर शामिल गणित विज्ञान व कंप्यूटर इतिहास भूगोल विषयों को बतौर अनिवार्य विषय लागू करते हुए सभी स्तर के मदरसों में आधुनिक विषयों के लिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के मदरसा बोर्ड के प्रस्ताव को प्रदेश सरकार ने साल 2017 में मंजूरी दी थी। तय हुआ था कि हिंदी व अंग्रेजी को छोड़कर सभी विषयों की किताबें उर्दू में होंगी ताकि उर्दू को मजबूती मिलने के साथ ही उड़ बोर्ड का औचित्य भी बरकरार रहे। बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि एप को मदरसा पोर्टल से जोड़ा जाएगा। मदरसों को एप का लिंक भेजकर सभी को एप से जोड़ा जाएगा। एप का मकसद ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही बच्चों को शिक्षा सामग्री आसानी से मुहैया कराना है उन्होंने बताया कि एप पर पाठ्यक्रम मौजूद रहेगा। इससे मदरसा प्रबंधन को किसी तरह का संशय भी नही रहेगा।

सरकार ने एप तैयार करने जिम्मेदारी यूपी डिस्को को दी है। सरकार ने मोबाइल एप की दी मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप, दीनियात और एनसीईआरटी का उपलब्ध रहेगा पाठ्यक्रम

गैर अनुदानित मदरसों को भी मिलेगा फायदा

मोबाइल एप पर एनसीईआरटी की शिक्षण सामग्री उपलब्ध होने का सबसे बड़ा फायदा गैर अनुदानित मदरसों को होगा। बच्चों को किताबों के लिए भटकना नही पड़ेगा। वहीं एप पर दीनियात की किताबें भी मिलना आसान होगा।

Saturday, October 10, 2020

प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं, 15 अक्टूबर से मदरसा खोलने की तैयारी

प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं, 15 अक्टूबर से मदरसा खोलने की तैयारी।

लखनऊ : कोरोना काल में गड़बड़ाई शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जहां शैक्षिक संस्थानों को खोलने की तैयारी है, वहीं मदरसों में अब तक प्रवेश प्रक्रिया ही नहीं शुरू हो सकी है। ऐसे में 15 अक्टूबर से मदरसों में शिक्षण कार्य कैसे शुरू होगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं मदरसों में मार्कशीट वितरण का भी काम अधूरा है।


प्रदेश में मदरसा शिक्षा बोर्ड से संचालित करीब 16 हजार मदरसे हैं। लेकिन इनमें नए सत्र के लिए बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इनमें 560 अनुदानित मदरसे भी शामिल हैं। कोरोना काल में शैक्षिक संस्थानों की खोलने के लिए जारी गाइडलाइन में मदरसों को खोलने की बात भी कही गई है।


बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने 15 अक्टूबर से जिला स्तर पर होने वाली बैठक में मदरसों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को भी बुलाने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्रार का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी करना मदरसा प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अंकपत्र मदरसों को भेज दिए गए हैं। उनका वितरण किया जा रहा है।

Thursday, September 10, 2020

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय।

लखनऊ। मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत 25 हजार शिक्षकों के केंद्रांश मानदेय चार साल से नहीं मिला है। इन शिक्षकों ने शासन के जरिये केंद्र को 8,000 और परास्नातक शिक्षकों को सरकार से मानदेय जारी करवाने की मांग की है। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि योजना के अंतर्गत स्नातक शिक्षकों 15,000 मानदेय मिलता है। केंद्र सरकार को 8,000 में से 3600 रुपये और 15,000 में से 4,800 रुपये देने होते हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने चार साल से रुपये बकाया हो चुका है। राज्य सरकार ने केंद्रांश जारी करने के लिए कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिख चुकी हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण से एक टीम दिल्ली भेज कर अड़चनें दूर कराने की मांग की।



'जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर लगाएं रोक

लखनऊ : मदरसा शिक्षकों ने बोर्ड रजिस्ट्रार से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। शिक्षकों का आरोप है कि अधिकारी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए जारी शासनादेश के विपरीत अभिलेख मांग कर रहे हैं। प्रदेश के अनुदानित मदरसों के सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए एक सितंबर को शासनादेश जारी किया गया था। टीचर्स एसोसिएशन मदरसे अरबिया के महामंत्री हाजी दीवान साहेब जमा खां ने बताया कि बहराइच, मऊ, अंबेडकर नगर, वाराणसी मे अधिकारी अपना अलग प्रोफॉर्मा जारी कर अनुभव प्रमाण पत्र भी मांग रहे हैं।

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Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, August 27, 2020

उत्तर प्रदेश में पहली बार मदरसा बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करेगी योगी सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार यूपी बोर्ड की तर्ज पर पहली बार मदरसा बोर्ड के मेधावी छात्र और छात्राओं का भी सम्मान करने जा रही है। यूपी सरकार इसके टॉपरों को एक-एक लाख रुपये, टैबलेट व प्रशस्ति पत्र प्रदान करेगी। साथ ही मॉडर्न विषय मैथ, साइंस व कंप्यूटर के तीन-तीन टॉपरों को भी 51-51 हजार रुपये व टैबलेट प्रदान किए जाएंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह कार्यक्रम किस प्रकार आयोजित किया जाए, इस पर सरकार मंथन कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्येय वाक्य 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। इससे पहले किसी भी सरकार ने मदरसा बोर्ड के मेधावियों का सम्मान नहीं किया है, लेकिन योगी सरकार ने प्रदेश में पहली बार मदरसा बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।


सरकार सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी), सीनियर सेकेंडरी (आलिम), कामिल व फाजिल के 10-10 यानी कुल 40 छात्र-छात्राओं को एक-एक लाख रुपये व टैबलेट प्रदान करेगी। इसके अलावा सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी के मैथ, साइंस व कंप्यूटर विषय के तीन-तीन यानी कुल 18 मेधावी छात्र-छात्राओं को 50-50 हजार रुपये, टैबलेट व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।

यह पुरस्कार रेगुलर छात्र-छात्राओं को ही मिलेगा। छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देने पर जो खर्च आएगा, उसे उत्तर प्रदेश मदरसा विकास निधि से पूरा किया जाएगा। इस पुरस्कार के शुरू होने से उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के छात्र-छात्राओं में भी प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत होगी। मदरसा बोर्ड ने कोरोना संक्रमण के कारण मेधावियों का सम्मान किए जाने के तरीके पर सरकार से दिशा-निर्देश मांगे हैं। सरकार से दिशा-निर्देश आते ही मेधावियों को पुरस्कार दिया जाएगा

Wednesday, August 5, 2020

मदरसों में फर्जीवाड़ा की आशंका, नहीं जमा कर रहे प्रमाण पत्र

मदरसों में फर्जीवाड़ा की आशंका, नहीं जमा कर रहे प्रमाण पत्र

 
 प्रयागराज : फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में नौकरी पाने वाली अनामिका शुक्ला प्रकरण का राजफाश होने के बाद मदरसों में भी जांच शुरू हुई है। जांच टीम ने 15 दिन में सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्र मांगे है, लेकिन समय पूरा होने के बाद भी कइयों ने दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए।



जिले में 124 मदरसे हैं और इनमें 400 से अधिक शिक्षक तैनात हैं। इनकी जांच के लिए 17 जुलाई को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर 15 दिन का समय दिया गया। कमेटी ने सभी मदरसों से शिक्षकों के योग्यता संबंधी मूल प्रमाण पत्र मांगे थे, लेकिन अभी तक सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्र नहीं मिले हैं। करीब आधे शिक्षकों के ही प्रमाण पत्र कमेटी के पास आए हैं। जिन मदरसों से प्रमाण पत्र नहीं आ रहे हैं उनमें फर्जीवाड़ा की आशंका है। 


जांच कमेटी के सदस्य और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि दस्तावेजों के सत्यापन से स्पष्ट हो जाएगा कि कौन फर्जी है। उन्होंने बताया कि अभी तक 19 मदरसों ने अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के योग्यता संबंधी प्रमाण पत्र नहीं सौंपे हैं। उन्हें तीन दिन का समय और दिया गया है। इस अवधि में दस्तावेज नहीं जमा हुए तो कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, July 21, 2020

मदरसों के शिक्षकों के दस्तावेजों का किया जाएगा सत्यापन

मदरसों के शिक्षकों के दस्तावेजों का किया जाएगा सत्यापन



प्रयागराज। सहायता प्राप्त मदरसों के अध्यापकों के दस्तावेजों का भी सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट शासन को भेजनी है। 


कस्तूरबा गांधी विद्यालय समेत अन्य संस्थानों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर वेतन लिए जाने के मामले सामने आए हैं। इसे देखते हुए मदरसों में मॉडिफिकेशन के अंतर्गत नियुक्ति शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के भी सत्यापन का निर्णय लिया गया है।

Thursday, July 16, 2020

सूबे के 25 हजार मदरसा शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय


सूबे के 25 हजार मदरसा  शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय



 रामपुर: केंद्र सरकार ने मदरसों की हालत सुधारने के लिए मदरसा आधुनिकीकरण योजना चलाई है। इसके तहत दीनी तालीम के साथ ही दुनियाबी तालीम भी दी जाती है। इसी के लिए हिदी, अंग्रेजी, गणित और साइंस पढ़ाने के लिए शिक्षक लगाए गए हैं। प्रदेशभर में 25500 शिक्षक हैं। स्नातक शिक्षकों को आठ हजार रुपये मानदेय मिलता है। इसमें दो हजार प्रदेश सरकार और छह हजार केंद्र सरकार देती है। परास्नातक शिक्षकों को 15 हजार मानदेय मिलता है। इसमें 12 हजार केंद्र सरकार और तीन हजार प्रदेश सरकार देती है। प्रदेश सरकार अपने हिस्से का मानदेय तो दे रही है। लेकिन, केंद्र सरकार ने 50 माह से मानदेय नहीं दिया है। इससे मदरसा शिक्षकों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।



संयुक्त मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक समूह उत्तर प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष शहजादे अली अंसारी कहते हैं कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 8584 आच्छादित मदरसों में कार्यरत 25500 शिक्षक हैं। जिनमें जनपद रामपुर के 98 आच्छादित मदरसों में 32 स्नातक शिक्षक तथा 231 परास्नातक शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह यहां कुल 263 शिक्षक हैं। पिछले 50 माह से केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रांश की धनराशि नहीं दी है, जबकि प्रदेश सरकार अपनी ओर से राज्यांश निरंतर दे रही है।ऐसी स्थिति में शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इस संबंध में कई आला अफसरों और मंत्रियों को भी अवगत कराया। लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिल सका है।

Thursday, July 2, 2020

मदरसा बोर्ड रिजल्ट : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र

मदरसा बोर्ड : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र।


रिजल्ट

लखनऊ  :: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वर्ष 2020 की वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने बाजी मारी है। इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में बालिका परीक्षार्थियों की संख्या 55,457 है और पास होने वाली बालिकाओं का प्रतिशत 84.42 है। कल पास होने वाले बालक परीक्षार्थियों की संख्या-60175 है और पास हुए बालकों का प्रतिशत 79.86 रहा है। टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की धनराशि, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।





प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने लखनऊ में समाज कल्याण निदेशालय के सभागार में उ.प्र. मदरसा शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र 2019 20 की वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार श्रेष्ठ शिक्षा और संसाधनों के साथ मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य है की मदरसा छात्रों को रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो, जिससे वे राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकें।

उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की वर्ष 2020 की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल एवं फाजिल की परीक्षा में उत्तीर्ण होने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त मेधावी छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की राशि के चेक, टैबलेट, मेडल एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान राशि का व्यय अरबी-फारसी मदरसा विकास निधि से किया जाएगा। सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी के गणित एवं विज्ञान विषय में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 51,000 रुपये का चेक, एक टैबलेट, मॉडल एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी) सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल व फाजिल की वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षाएं इस वर्ष 25 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक प्रदेश के 552 परीक्षा केन्द्रों में हुई थीं।

प्रमुख बातें : परीक्षार्थियों में कुल 1,38,241 छात्र-छात्राएं संस्थागत तथा 44,017 छात्र-छात्राएं व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित हुए। परीक्षा वर्ष में कुल सम्मिलित परीक्षार्थियों ( 1,82,259) में कुल 41,207 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। कुल 1,15,650 परीक्षार्थी उत्तीर्ण तथा कुल 25,402 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।

उत्तीर्ण परीक्षार्थियों का कुल प्रतिशत 81.99

टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये मिलेंगे, प्रोत्साहन के लिए टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।


01 लाख 82 हजार 259 परीक्षार्थी मदरसा वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हुए

97 हजार 348 छात्र तथा 84 हजार 911 छात्राएं शामिल हुए





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Friday, June 26, 2020

अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच

अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच।


राज्य मुख्यालय : शिक्षकों की नियुक्तियों में हुए घोटाले की नित नयी परत खुलने के साथ ही प्रदेश सरकार ने राज्य के अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की भी जांच करवाए जाने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार के विशेष सचिव जे.पी.सिंह ने इस बारे में उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा है।









इस पत्र में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के 16 जून को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रदेश में कार्यरत सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की विधिवत जांच कराए जाने के बाबत एक सप्ताह में कार्ययोजना बना कर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत करवाने को कहा गया है। इसी क्रम में राज्य के अनुदानित अरबी-फारसी मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच करवाए जाने के संबंध में एक कार्ययोजना बनाकर शासन को दो दिनों में अवगत करवाएं। उधर, परिषद के रजिस्ट्रार आर.पी.सिंह ने बताया कि यह कार्ययोजना शुक्रवार तक शासन को उपलब्ध करा दी जाएगी।

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