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Saturday, April 17, 2021

प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्डो की परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित

प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्डो की परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित


लखनऊ: सीबीएसई व यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं के बाद अब प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्डो की परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने 15 अप्रैल को यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित करने का निर्देश दिया था। उसी क्रम में शासन ने प्रदेश के अन्य बोर्डो की हर प्रकार की परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित कर दी हैं। आइसीएसई बोर्ड, माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड व मदरसा बोर्ड में गृह व आंतरिक परीक्षाएं भी अब नहीं हो सकेंगी।




Wednesday, March 24, 2021

मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं भी मई के अंत में होंगी

मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं भी मई के अंत में होंगी


लखनऊ : पंचायत चुनाव व यूपी बोर्ड परीक्षा की तिथि आगे बढ़ने की चल रही चर्चाओं के कारण मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं की तिथि भी अंतिम नहीं हो सकी है। 28 व 29 मार्च को शबे बरात है। होली भी 29 मार्च को है। इसके बाद मदरसों में नौ अप्रैल से 43 दिनों का वार्षिक अवकाश शुरू हो जाएगा। यह 21 मई तक चलेगा।


 ऐसे में अब मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं मई के अंत में ही होने की उम्मीद है। इस बार 1.72 लाख छात्र-छात्रओं ने आवेदन किया है।

Wednesday, February 24, 2021

मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी

मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी


लखनऊ : प्रदेश सरकार अब मदरसा शिक्षकों का भी तबादला करेगी। इसके लिए सरकार मदरसा नियमावली में संशोधन करने जा रही है। नियमावली में ऐसे प्रविधान किए जा रहे हैं, जिससे प्रबंधकों की मनमानी पर भी अंकुश लग सके। सरकार मदरसा शिक्षकों की भर्तियां भी चयन आयोग से कराने पर विचार कर रही है।


प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें करीब नौ हजार शिक्षक हैं। मदरसों के लिए उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा नियमावली लागू है। प्रदेश सरकार इस नियमावली में नई शिक्षा नीति के अनुसार संशोधन करने जा रही है।

Tuesday, February 23, 2021

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी


मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये आवंटित होने से शिक्षकों के बकाया वेतन का कुछ भुगतान होने की उम्मीद जगी है। इस योजना में प्रदेश के करीब 25 हजार शिक्षकों का बीते चार साल का वेतन बकाया है। 


मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय प्रोग्राम में सम्मिलित मदरसा आधुनिकीकरण योजना में प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक कार्यरत हैं। मदरसों में काम करने वाले आधुनिकीकरण शिक्षकों मे स्नातक शिक्षक को 8000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र को 8000 में से मात्र 3600 रुपये और 15000 में से मात्र 4800 रुपये देने रहते हैं। 


केंद्र सरकार ने चार साल से अपना अंशदान नहीं दिया है। इसकी वजह से राज्य सरकार का अंशदान भी नहीं मिल पाया। शिक्षकों का मानदेय करीब 977 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है।

Wednesday, February 17, 2021

यूपी : मदरसों में भी शुरू होंगी कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं, आदेश जारी

यूपी : मदरसों में भी शुरू होंगी कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं, आदेश जारी

प्रदेश के अनुदानित एवं मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाओं में पढ़ाई शुरू किये जाने के आदेश जारी कर दिये गये हैं। उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आर.पी.सिंह ने इस बारे में सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक आदेश बुधवार को जारी किया हे। 


इस आदेश में कहा गया है कि मदरसों की कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई शुरू करवा दी जाए और कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं की पढ़ाई पहली मार्च से शुरू करवाने की तैयारी की जाए। बताते चलें कि इन मदरसों में कोरोना संक्रमण की वजह से आफलाइन नियमित पढ़ाई बंद चल रही थी।


Wednesday, February 10, 2021

मदरसों में भी आज से शुरू होगी पढ़ाई

मदरसों में भी आज से शुरू होगी पढ़ाई



लखनऊ: कोरोना संक्रमण के कारण लंबे समय से बंद चल रहे मदरसों में बुधवार से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। बेसिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर मदरसों में सबसे पहले फौकानिया यानी कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई शुरू होगी। इसके बाद तहतानिया यानी कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं एक मार्च से लगेंगी। मदरसों में पढ़ाई शारीरिक दूरी के मानक को अपनाते हुए की जाएगी। 

Monday, February 8, 2021

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क

मदरसों में निशुल्क पढ़ाई बंद, अब सभी से लिए जाएंगे निर्धारित शुल्‍क


अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है।


गोरखपुर । मदरसों में अब निशुल्क पढ़ाई नहीं होगी। मान्यता प्राप्त और गैर अनुदानित मदरसे अब हिसाब से शुल्क का निर्धारण कर सकेंगे। मदरसा शिक्षा परिषद ने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी है। मदरसा प्रबंधन को शैक्षिक सत्र शुरू होने के एक माह पहले छात्रों से लिए जाने वाले शुल्क का अनुमोदन करेगी। प्रदेश में यह पहली बार होगा कि मदरसों के छात्रों से किसी तरह का शुल्क लिया जाएगा। अब तक मुफ्त शिक्षा दी जाती है। छात्र-छात्राओं से किसी भी तरह का शुल्‍क नहीं लिया जाता रहा।

अगले सत्र से लिया जाएगा शुल्‍क

अगले शैक्षिक सत्र में प्राइवेट स्कूलों की तरह मदरसों में भी पहले से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा, हालांकि यह शुल्क प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी कम होगी। परिषद ने शुल्क संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाया है। शुल्क संरचना का निर्धारण करते समय क्षेत्रीय असमानता, आर्थिक विषमता तथा शैक्षिक स्तर का भी विशेष ध्यान रखना होगा। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क, संयुक्त वार्षिक शुल्क एवं विकास शुल्क लिया जा सकेगा। विद्यार्थियों को फीस की रसीद देनी होगी।

पहले नहीं ली जाती रही फीस

दरअसल मदरसे लोगों से मिलने वाले चंदे से चलते हैं इसलिए वहां पढऩे वाले बच्‍चों से किसी तरह ही फीस नहीं ली जाती। हास्टल में रहने वाले बच्‍चों के लिए भी खाने व रहने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता, लेकिन उनसे भी शुल्क लिया जाएगा। गोरखपुर में दस अनुदानित और दौ सौ मान्यता प्राप्त व गैर अनुदानित मदरसे हैं जिनमें तकरीबन 32 हजार से ज्यादा बच्‍चे बढ़ते हैं। ऐसे में शुल्क लिए जाने पर 30 हजार बच्‍चे प्रभावित होंगे। उनके सामने फीस देकर शिक्षा ग्रहण करने की समस्‍या पैदा हो जाएगी। कुल मिलाकर अब मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुल्‍क देना ही पड़ेगा। शुल्‍क न दे पाने की स्थिति में पढ़ाई नहीं हो पाएगी। मदरसा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को भेजकर शुल्क लिए जाने के निर्णय से अवगत करा दिया है।

Saturday, February 6, 2021

मान्यता प्राप्त गैर अनुदानित मदरसे तय कर सकेंगे शुल्क, मदरसा शिक्षा परिषद ने शुल्क विनियमन के लिए तय की प्रक्रिया

मान्यता प्राप्त गैर अनुदानित मदरसे तय कर सकेंगे शुल्क, मदरसा शिक्षा परिषद ने शुल्क विनियमन के लिए तय की प्रक्रिया

लखनऊ : उप्र मदरसा शिक्षा परिषद ने मान्यताप्राप्त गैर अनुदानित मदरसे अब अपने हिसाब से शुल्क निर्धारित कर सकेंगे। परिषद ने शुल्क विनियमन के लिए प्रक्रिया तय कर दी है। इसके लिए प्रत्येक मदरसा प्रबंध समिति शैक्षिक सत्र शुरू होने से एक माह पहले आगामी शैक्षिक सत्र के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क का अनुमोदन करेगी।


गौरतलब है कि परिषद की नियमावली में मान्यताप्राप्त गैर अनुदानित मदरसों में शुल्क लेने के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि मदरसे के शुल्क संग्रह की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई गई है। शुल्क संरचना का निर्धारण करते समय क्षेत्रीय असमानता, आर्थिक अवसंरचना एवं शैक्षिक स्तर इत्यादि का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें रजिस्ट्रीकरण शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क, संयुक्त वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क आदि का स्पष्ट प्रावधान किया जाना जरूरी है। विद्यार्थियों को शुल्क की रसीद भी दी जाएगी। जबकि छात्रावास शुल्क का निर्धारण अलग से किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रबंध समिति द्वारा अनुमोदित शुल्क संरचना का विवरण शिक्षा सत्र के पहले जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा अगर प्रबंध समिति के अनुमोदित शुल्क संरचना पर किसी को कोई आपत्ति होती है तो वह प्रदेश में विषमता और संस्था की पहले से लागू उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अधिनियम-2018 के तहत गठित जिला शुल्क नियामक समिति में अपील कर सकता है। 


मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन ने किया स्वागत

इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में मदरसों के लिए फीस प्रतिपूर्ति के लिए बनी नई गाइडलाइन स्वागत किया गया। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने कहा कि इससे मदरसों को एक नई दिशा मिलेगी और सभी बोर्ड से समानता करने में आसानी होगी।

Thursday, February 4, 2021

असम : अप्रैल से बंद होंगे सभी सरकारी मदरसे

असम : अप्रैल से बंद होंगे सभी सरकारी मदरसे


असम में सभी सरकारी मदरसों को आगामी एक अप्रैल से बंद किया जा रहा है। ऐसे 620 से अधिक संस्थानों को आम स्कूलों में बदल दिया जाएगा। राज्य सरकार ने अपने सेक्युलर स्वरूप के कारण धार्मिक शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है।


राज्य सरकार ने विगत 30 दिसंबर को विधानसभा में एक कानून पारित किया था जिसके तहत सरकारी खर्च से चलने वाले राज्य के सभी मदरसों को आम स्कूलों में बदलने का फैसला लिया गया था। इस फैसले पर अमल एक अप्रैल से होगा। असम के शिक्षा और वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि शिक्षा विभाग को असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने असम रिपीलिंग एक्ट-2020 को मंजूरी दे दी है। 


हालांकि राज्य सरकार को अभी निजी स्तर पर चल रहे सैकड़ों मदरसों पर कोई फैसला लेना बाकी है। सरमा ने ट्वीट करके कहा कि असम सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक और प्रगतिशील है। मदरसा एजुकेशन प्रॉवैंशियलाइजेशन एक्ट, 1995 और असम मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2018 को खत्म कर दिया गया है। अब सभी सरकारी मदरसे सामान्य स्कूलों की तरह ही संचालित होंगे।

Wednesday, February 3, 2021

मदरसा परीक्षा के लिए अब 10 फरवरी तक होंगे आवेदन, आवेदन की सुस्ती के चलते हुआ फैसला

मदरसा परीक्षा के लिए अब 10 फरवरी तक होंगे आवेदन, आवेदन की सुस्ती के चलते हुआ फैसला

लखनऊ :  उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं के लिए अब 10 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन किए जा  सकेंगे। पहले अंतिम तिथि 31 हुआ फैसला जनवरी थी। आवेदन की सुस्ती के चलते मदरसा परिषद ने आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाई है।


रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि अंतिम तिथि तक प्रदेश भर से मात्र एक लाख ही आवेदन हुए हैं। परीक्षा शुल्क और जरूरी निर्देश मदरसा शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध है। रजिस्ट्रार ने बताया कि चालान के जरिए राजकोष में परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 9 फरवरी तय की गई है। ऑफलाइन आवेदन मंजूर नहीं किए जाएंगे।

Tuesday, February 2, 2021

मदरसों की वार्षिक परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

मदरसों की वार्षिक परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित सेकेण्ड्री, सीनियर सेकेण्ड्री, कामिल एवं फाजिल आदि पाठ्यक्रमों की इस साल होने वाली वार्षिक परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गयी है। परिषद के रजिस्ट्रार आरपीसिंह ने यह जानकारी दी है।


उन्होंने बताया कि परीक्षा शुल्क चालान के माध्यम से राजकोष में जमा करने की आखिरी तारीख नौ फरवरी तय की गयी है।  ऑनलाइन आवेदन फार्म मदरसा पोर्टल http://madarsaboard.upsdc.gov.in पर भरने की आखिरी तारीख 10 फरवरी निर्धारित की गयी है। पहले आनलाइन आवेदन पत्र भरने की आखिरी तारीख 31 जनवरी तय की गयी थी।


उन्होंने बताया कि आवेदन पत्र केवल आनलाइन ही स्वीकार होंगे, किसी भी सूरत में आफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किये जाएंगे। परीक्षा शुल्क का विवरण और विस्तृत दिशा निर्देश परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

Saturday, January 16, 2021

यूपी के मदरसों में अब प्रबंधक नहीं कर सकेंगे सीधी भर्ती, मानव सम्‍पदा पोर्टल पर ऑनलाइन होगा शिक्षकों-कर्मचारियों का ब्‍यौरा

यूपी के मदरसों में अब प्रबंधक नहीं कर सकेंगे सीधी भर्ती, मानव सम्‍पदा पोर्टल पर ऑनलाइन होगा शिक्षकों-कर्मचारियों का ब्‍यौरा


उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त और अनुदानित मदरसों के प्रबंधकों व संचालकों की मनमानी अब नहीं चलने वाली। प्रदेश सरकार इन मदरसों के संचालन के लिए नियमावली तैयार करवा रही है। इसके साथ ही उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के अधीन 'मानव सम्पदा' पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल पर उक्त मदरसों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध रहेगा। प्रदेश में कुल 560 मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसे हैं और इनमें करीब नौ हजार शिक्षक तथा हजारों की तादाद में शिक्षणेत्तर कर्मचारी हैं।


यह जानकारी प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में दी। श्री रजा ने बताया कि उक्त सभी मदरसों में कार्यरत कार्मिकों का पूरा ब्यौरा जब मानव सम्पदा पोर्टल पर सार्वजनिक कर दिया जाएगा तो साफ हो जाएगा कि कौन सा शिक्षक किस मदरसे में कार्यरत है और उसकी शैक्षिक योग्यता क्या है। उन्होंने बताया कि अभी ऐसी भी शिकायतें आती हैं कि एक शिक्षक कई मदरसों में पढ़ा कर एक नहीं बल्कि कई मदरसों से वेतन प्राप्त कर रहे हैं। मानव सम्पदा पोर्टल पर सारी जानकारी सार्वजनिक हो जाने के बाद इस फर्जीवाड़े पर भी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि अभी तक यह सारी लिखा पढ़ी मैनुअली होने की वजह से ऐसे फर्जीवाड़े पकड़े नहीं जा पा रहे थे।

मोहसिन रजा ने बताया कि इस बारे में मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति जता दी है। उन्होंने बताया कि मदरसों के आलिम, फाजिल की योग्यता प्राप्त करने वालों को स्नातकोत्तर डिग्री के बराबर मान्यता दिये जाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में उर्दू के प्रवक्ता व प्रोफेसर आदि के पदों पर ऐसे युवाओं को नौकरियां मिल सकें।


एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि राज्य अलपसंख्यक आयोग और राज्य हज कमेटी में चेयरमैन व कार्यकारिणी सदस्यों के खाली पदों पर जल्द ही मनोनयन कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि उ.प्र.सेण्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और उ.प्र.शिया सेण्ट्रल वक्फ बोर्ड की सारी वक्फ सम्पत्तियों का विशेष आडिट भी करवाया जाएगा।

Monday, January 11, 2021

मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं के लिए 31 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं के लिए 31 जनवरी तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की साल 2021 के सेकंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन सोमवार से किये जा सकेंगे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय की गई है। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


उत्तर प्रदेश शिक्षा मदरसा परिषद द्वारा संचालित वर्ष 2021 की परीक्षाओं में भाग लेने वाले सेकंडरी, सीनियर सेकंडरी, कामिल और फाजिल के छात्र व छात्रएं 11 जनवरी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। आवेदन मदरसों के माध्यम से ऑनलाइन ही किए जा सकेंगे। इस बार किसी भी दशा में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि इन आवेदनों से जुड़े परीक्षा शुल्क और जरूरी दिशा निर्देश मदरसा शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय की गई है। चालान के जरिये परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी तय की गई है। उन्होंने कहा कि ऑफलाइन आवेदन मंजूर नहीं किए जाएंगे।

Sunday, January 10, 2021

मदरसों शिक्षकों के नाम पर फर्जीवाड़े को लेकर सरकार सख्त, मानव सम्पदा में विवरण होगा फीड, तबादला नीति भी ला सकती है सरकार

अनुदानित मदरसा शिक्षकों डाटा होगा मानव सम्पदा पोर्टल पर फीड

मदरसों शिक्षकों के नाम पर फर्जीवाड़े को लेकर सरकार सख्त, मानव सम्पदा में विवरण होगा फीड, तबादला नीति भी ला सकती है सरकार


उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षकों की गड़बड़ियों को रोकने के लिए अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड करा रही है। इससे सभी मदरसा शिक्षकों का विवरण एक स्थान पर मिल जाएगा।


सरकार मदरसा शिक्षकों के लिए तबादला नीति भी ला सकती है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता आएगी बल्कि मदरसा शिक्षा में भी सुधार होगा।


शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर होगा फीड
उत्तर प्रदेश में 560 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें नौ हजार शिक्षक पढ़ाते हैं। इनका वेतन प्रदेश सरकार देती है। पहले चरण में अनुदानित मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड किया जाएगा।


इसके बाद दूसरे चरण में मान्यता प्राप्त अन्य मदरसा शिक्षकों के विवरण ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे वे मदरसा शिक्षक भी पकड़ में आ जाएंगे, जो एक साथ कई मदरसों में काम कर रहे हैं। कई बार मदरसा प्रबंधक मान्यता लेने के लिए दूसरे मदरसों के शिक्षकों को अपने यहां दिखा देते हैं। इस पर भी नई व्यवस्था में लगाम लग सकेगी।


लखनऊ : प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षकों की गड़बड़ियां रोकने के लिए अहम कदम उठाने जा रही है। अब सरकार मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड करा रही है। इससे सभी मदरसा शिक्षकों का विवरण एक स्थान पर मिल जाएगा। सरकार मदरसा शिक्षकों के लिए तबादला नीति भी ला सकती है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता आएगी, बल्कि मदरसा शिक्षा में भी सुधार होगा।




प्रदेश में 560 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें नौ हजार शिक्षक पढ़ाते हैं। इनका वेतन प्रदेश सरकार देती है। पहले चरण में अनुदानित मदरसा शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर फीड किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में मान्यता प्राप्त अन्य मदरसा शिक्षकों के विवरण ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे वे मदरसा शिक्षक भी पकड़ में आ जाएंगे, जो एक साथ कई मदरसों में काम कर रहे हैं। कई बार मदरसा प्रबंधक मान्यता लेने के लिए दूसरे मदरसों के शिक्षकों को अपने यहां दिखा देते हैं।

Monday, January 4, 2021

सहूलियत : बोर्ड परीक्षाओं से पहले मदरसा परिषद कम करेगा 30 फीसद कोर्स

सहूलियत : बोर्ड परीक्षाओं से पहले मदरसा परिषद कम करेगा 30 फीसद कोर्स

उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की ओर से संचालित मदरसों में कोरोना महामारी की वजह से कोर्स घटाने का निर्णय लिया गया है। मदरसा बोर्ड से पहले यूपी बोर्ड, सीबीएससी और आईसीएसई बोर्ड भी कोविड-19 की वजह से शैक्षिक सत्र 2020-21 के पाठ्यक्रम से 30 फीसद तक घटा चुके हैं। मदरसा बोर्ड की शैक्षिक सत्र 2020-21 की परीक्षाएं यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के साथ ही होंगी। इसलिए मदरसा बोर्ड ने हायर सेकेण्ड्री, सीनियर सेकेण्ड्री के साथ ही कामिल और फाजिल के पाठ्यक्रम को 30 फीसद कम करने का निर्णय लिया है। कुछ महीनों बाद ही परीक्षाएं संभावित हैं। कोरोना के दौर में अन्य बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड में भी ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गई थीं। जिसके माध्यम से 60 से 70 फीसद तक पाठ्यक्रम पढ़ाया जा चुका है। अब मदरसा बोर्ड की तरफ से कोर्स कम करने की घोषणा कर दी गई है। जो मदरसा छात्र-छात्राओं के लिए राहत वाली खबर है। अब परीक्षाओं की तैयारी छात्र-छात्राओं को कम पाठ्यक्रम के साथ करनी होगी। परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र भी कम कोर्स के साथ ही बनाए जाएंगे।


कौन से पाठ हटेंगे कौन से रहेंगे
यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई की ओर से काफी पहले ही न सिर्फ 30 प्रतिशत कोर्स कम करने की घोषणा कर दी गई थी। बल्कि कौन-कौन से पाठ हटाए जाएंगे ये भी साफ कर दिया गया। अब मदरसा बोर्ड ने वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिए कोर्स कम करने की घोषणा की है लेकिन किस पाठ्यक्रम से कौन-कौन से पाठ हटाए जाएंगे ये निर्णय होना बाकी है। यह फैसला विषय विशेषज्ञों की स्क्रीनिंग कमेटी करेगी। कमेटी के निर्णय पर ही तय किया जाएगा कि मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम से किस-किस पाठ को हटाया जा सकता है।

कोरोना की वजह से लिया फैसला
मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने कहा कि अन्य बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड ने भी 30 प्रतिशत कोर्स घटाने का निर्णय शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए लिया है। घटाए गए कोर्स के आधार पर ही परीक्षाएं होगी। कोरोना महामारी की वजह से ही यह निर्णय लिया है।

मदरसा बोर्ड से जुड़ी अहम बातें एक नजर में-
प्रदेश में अनुदानित मदरसों की संख्या- 558
प्रदेश में मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या-16500
वर्ष 2020 बोर्ड परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों की संख्या- 1,82,259
वर्ष-2020 में उत्तीर्ण छात्राओं की संख्या-55,457
वर्ष-2020 में उत्तीर्ण छात्रों की संख्या- 60,175

Thursday, December 31, 2020

जनवरी में भरे जाएंगे अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों के वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म

जनवरी में भरे जाएंगे अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों के वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म


लखनऊ : प्रदेश के अनुदानित एवं मान्यता प्राप्त मदरसों की वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म जनवरी में भरे जाएंगे। हालांकि, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने ऑनलाइन फार्म भरने की तिथि अभी घोषित नहीं की है। साथ ही मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं कब आयोजित होंगी, इस पर भी अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।




मदरसा बोर्ड को यूपी बोर्ड व सीबीएसई के फैसले इंतजार है। इनके अनुरूप ही मदरसों में भी वार्षिक परीक्षाएं कराई जाएंगी।

Thursday, November 19, 2020

मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा तलब, सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश

मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा तलब, सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश

शिक्षा विभाग : सभी जिलों के बीएसए को शिक्षा निदेशक ने भेजा आदेश, मदरसे और विद्यालय में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा मांगा।

प्रयागराज :  सरकारी स्कूलों और मदरसों में कितने बच्चे एक विषय के रूप में उर्दू पढ़ रहे हैं, यह जानने के लिए शिक्षा विभाग डाटा तैयार करेगा। शिक्षा निदेशक (बेसिक) डॉ. सर्वेश विक्रम बहादुर सिंह ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कक्षावार संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सूचना को निर्धारित प्रारूप में भरकर प्रदेश के पाठ्य पुस्तक अधिकारी को ई- मेल करना है। चार शैक्षिक सत्रों की सूचना मांगी गई है।


शिक्षा निदेशक ने प्रदेश में संचालित परिषदीय, उच्च माध्यमिक विद्यालयों, राजकीय विद्यालयों, अशासकीय सहायत प्राप्त प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों, समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं सहायता प्राप्त मदरसों में शैक्षिक सत्र 2017-18, 2018-19, 2019-20 तथा 2020-21 में कक्षा एक से आठ तक उर्दू माध्यम एवं एक विषय के रूप में उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कक्षावार संख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि जिले विद्यालयों और मदरसों में बच्चे उर्दू विषय पढ़ रहे हैं। इसका विवरण जुटाया पढ़ जा रहा है। निदेशायल से उर्दू पढ़ने वाले छात्र-छत्राओं को ब्योरा क्यों मांगा गया है इसकी जानकारी नहीं है लेकिन सभी विद्यालयों को ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गए हैं।

Tuesday, November 17, 2020

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन।

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत प्रदेश भर में संचालित मदरसा परिषद की परीक्षाओं में बीते तीन साल से निरंतर परीक्षार्थियों की संख्या कम हो रही है। वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18 एवं वर्ष 2018-19 में हुई बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। वहीं प्रदेश में संचालित 558 अनुदानित मदरसों की ओर से बोर्ड को अतिरिक्त पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। प्रस्ताव में जो छात्र संख्या दिखाई जा रही हैं, वह बेहद ज्यादा है। इसके आधार पर ही मदरसों में पद सृजन की मांग मदरसा प्रबंधन की ओर से की जा रही है। एक तरफ परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या कम होना और वहीं उसी वर्ष में भेजे गए अतिरिक्त पद सृजन प्रस्ताव में छात्र संख्या ज्यादा होना मदरसा बोर्ड को अखर गया है। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सख्त पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। परीक्षार्थी कम होने और अतिरिक्त पद सृजन की मांग करने से आशंका जतायी जा रही है कि मदरसों में पद सृजन के लिए प्रस्ताव में छात्र संख्या बढ़ा कर दिखायी जा रही है।


रजिस्ट्रार ने कहा, मामला चिंताजनक

मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने पद सृजन के प्रस्ताव में झूठी छात्र संख्या बताने के मामले को बेहद चिंताजनक बताया है। कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजते समय कई बिन्दुओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है या जाबूझकर इसकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य मे ऐसा फिर करने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एक सप्ताह करें परीक्षण

रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक सप्ताह का समय देते हुए पदों का पुन: परीक्षण कर दोबारा रिपोर्ट भेजने को कहा है। अधिकारियों को मदरसों के प्रस्ताव व बोर्ड परीक्षा में शामिल छात्र संख्या का मिलान करने के साथ ही सभी बिन्दुओं का अवलोकन कर रिपोर्ट भेजनी होगी।

मदरसा परीक्षाओं में छात्र संख्या कम होने के कई कारण हैं लेकिन अतिरिक्त पद सृजन के लिए छात्र संख्या बढ़ाकर दिखाना गलत है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्तरों पर प्रस्ताव का अवलोकन करें।

नंद गोपाल गुप्ता नंदी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

Sunday, November 15, 2020

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित परीक्षाओं में हर साल छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षा में 1,82,259 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था,


जबकि 2019 में दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ छात्रों की घटती संख्या के बावजूद प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसे अतिरिक्त पदों के सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को भेज रहे हैं। इस पर उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को प्रस्तावों के पुनरावलोकन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि गत तीन वर्षों में परीक्षा फार्म भरने व परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 


एक ओर जहां छात्रों की संख्या कम हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिक छात्रों की संख्या प्रदर्शित कर अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसा पाया गया और अधिक छात्र संख्या दर्शाकर पद सृजन के प्रस्ताव भेजे गए तो संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में दस अनुदानित मदरसों में से कइयों ने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रस्ताव दिया है। रजिस्ट्रार के पत्र से मदरसों में खलबली मच गई है।

Friday, November 13, 2020

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।


मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत प्रदेश के 25 हजार शिक्षकों को दो महीने दस दिन (70 दिन) का वेतन मिलेगा। दरअसल, मदरसा शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्र ने अपने हिस्से के 50 करोड़ 89 लाख रुपये जारी कर दिए।



मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत स्नातक शिक्षकों को 8000 और परास्नातक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र क्रमश: 3600 रुपये और 4800 रुपये देता है, लेकिन चार साल से केंद्र ने अपना अंशदान जारी नहीं किया था।इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि केंद्र से जारी धनराशि वर्ष 2016-17 की प्रथम किस्त का 40 फीसदी है। धीमी गति से मानदेय रिलीज करने से मानदेय और अधिक लंबित होता जा रहा है।  शिक्षकों के वेतन में मिलने वाला केंद्रांश बीते चार साल से नहीं मिल रहा है, जो अब बढ़कर 977 करोड़ रुपये हो गया है।