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Wednesday, October 21, 2020

मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियां बढ़ाएगी यूपी सरकार, बनेगी कार्ययोजना

मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियां बढ़ाएगी यूपी सरकार, बनेगी कार्ययोजना।
                                                                       
लखनऊ : प्रदेश सरकार राज्य के सभी अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका  कनिष्ठ पांडे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के संबंध में  सर्वोच्च अदालत द्वारा जारी प्रश्नावली के संबंध में यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश के अल्पंसख्यक विभाग के सभी  उपनिदेशक-मंडलीय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों और सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 'उत्तर प्रदेश खेल विकास एवं प्रोत्साहन नियमावली 2020' के अनुसार मदरसों में भी खेल गतिविधियों का प्रचार प्रसार और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चत की जाए। 



'खेलो इंडिया ऐप' पर खेल में रुचि रखने वाले शिक्षकों का पंजीकरण आदि कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। इसके साथ ही मदरसों में खेल संस्कृति के विकास और प्रचार-प्रसार की एक कार्ययोजना बनाकर तैयार की जाए। इसके अलावा इस क्रम में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हर महीने परिषद कार्यालय की ई-मेल आईडी पर भेजी जाए।

Friday, October 16, 2020

शर्तों के साथ मदरसों में 19 अक्टूबर से शुरू होगी पढ़ाई, 50 फीसदी छात्र ही जायेंगे बुलाये

शर्तों के साथ मदरसों में 19 अक्टूबर से शुरू होगी पढ़ाई, 50 फीसदी छात्र ही जायेंगे बुलाये

 
 लखनऊ : प्रदेश सरकार शर्तों के साथ 19 अक्टूबर से मदरसों में पढ़ाई शुरू कराने जा रही है। मदरसों में सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी, कामिल एवं फाजिल की कक्षाएं दो पालियों में चलेंगी। पहली पाली में सेकेंडरी व फाजिल और दूसरी पाली में सीनियर सेकेंडरी व कामिल की पढ़ाई होगी। प्रत्येक दिन कक्षा में 50 फीसद छात्र ही बुलाए जाएंगे।


शेष 50 फीसद अगले दिन बुलाए जाएंगे।अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही छात्र-छात्रएं मदरसों में पढ़ाई के लिए बुलाए जाएंगे। सरकार ने मदरसों के लिए स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि मदरसे खोले जाने से पहले उन्हें सैनिटाइज किया जाए। यह प्रक्रिया प्रतिदिन प्रत्येक पाली के बाद नियमित रूप से की जाए। मदरसों में हैंडवॉश, सैनिटाइजर, थर्मल स्कैनिंग एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। यदि किसी को खांसी, जुखाम या बुखार के लक्षण हों तो उन्हें प्राथमिक उपचार देते हुए घर वापस कर दिया जाए। मदरसों में ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रखी जाए। जो छात्र ऑनलाइन पढ़ाई करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुविधा मुहैया कराई जाए।

Monday, October 12, 2020

मोबाइल एप पर NCERT की किताबों की तालीम हासिल करेंगे मदरसे के छात्र, मोबाइल एप की मिली मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप

मोबाइल एप पर NCERT की किताबों की तालीम हासिल करेंगे मदरसे के छात्र, मोबाइल एप की मिली मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप।

लखनऊ : मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित और गैर अनुदानित मदरसों के सभी छात्र छात्राएं अब मोबाइल एप पर एनसीईआरटी की किताबों से तालीम हासिल करेंगे। मदरसों में ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मोबाइल एप तैयार करने की मंजूरी दे दी है। एप पर दीनियात (धर्मशास्त्र) और एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम हिंदी, अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी उपलब्ध एप बनाने की जिम्मेदारी यूपी रहेगा।

डिस्को को दी गई है। प्रदेश सरकार ने तीन साल पहले तैतानिया (कक्षा 1 से 5 ) फोकानिया ( कक्षा 5 से 8 ) और आलिया व उच्च आलिया स्तर ( हाई स्कूल व उसके ऊपर ) के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई की मंजूरी दी थी प्रदेश में मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें से 558 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। तैतानिया और फोकानिया के बच्चों को हिंदी अंग्रेजी गणित सामाजिक विज्ञान की शिक्षा बेसिक शिक्षा परिषद की है किताबों से दी जाती रही है। बेसिक शिक्षा विभाग सर्व शिक्षा अभियान के तहत निशुल्क किताबें उपलब्ध कराता है।


आलिया व उच्च स्तर के मदरसों में विकल्प के तौर पर शामिल गणित विज्ञान व कंप्यूटर इतिहास भूगोल विषयों को बतौर अनिवार्य विषय लागू करते हुए सभी स्तर के मदरसों में आधुनिक विषयों के लिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के मदरसा बोर्ड के प्रस्ताव को प्रदेश सरकार ने साल 2017 में मंजूरी दी थी। तय हुआ था कि हिंदी व अंग्रेजी को छोड़कर सभी विषयों की किताबें उर्दू में होंगी ताकि उर्दू को मजबूती मिलने के साथ ही उड़ बोर्ड का औचित्य भी बरकरार रहे। बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने बताया कि एप को मदरसा पोर्टल से जोड़ा जाएगा। मदरसों को एप का लिंक भेजकर सभी को एप से जोड़ा जाएगा। एप का मकसद ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही बच्चों को शिक्षा सामग्री आसानी से मुहैया कराना है उन्होंने बताया कि एप पर पाठ्यक्रम मौजूद रहेगा। इससे मदरसा प्रबंधन को किसी तरह का संशय भी नही रहेगा।

सरकार ने एप तैयार करने जिम्मेदारी यूपी डिस्को को दी है। सरकार ने मोबाइल एप की दी मंजूरी, यूपी डिस्को तैयार करेगा एप, दीनियात और एनसीईआरटी का उपलब्ध रहेगा पाठ्यक्रम

गैर अनुदानित मदरसों को भी मिलेगा फायदा

मोबाइल एप पर एनसीईआरटी की शिक्षण सामग्री उपलब्ध होने का सबसे बड़ा फायदा गैर अनुदानित मदरसों को होगा। बच्चों को किताबों के लिए भटकना नही पड़ेगा। वहीं एप पर दीनियात की किताबें भी मिलना आसान होगा।

Saturday, October 10, 2020

प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं, 15 अक्टूबर से मदरसा खोलने की तैयारी

प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं, 15 अक्टूबर से मदरसा खोलने की तैयारी।

लखनऊ : कोरोना काल में गड़बड़ाई शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जहां शैक्षिक संस्थानों को खोलने की तैयारी है, वहीं मदरसों में अब तक प्रवेश प्रक्रिया ही नहीं शुरू हो सकी है। ऐसे में 15 अक्टूबर से मदरसों में शिक्षण कार्य कैसे शुरू होगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं मदरसों में मार्कशीट वितरण का भी काम अधूरा है।


प्रदेश में मदरसा शिक्षा बोर्ड से संचालित करीब 16 हजार मदरसे हैं। लेकिन इनमें नए सत्र के लिए बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इनमें 560 अनुदानित मदरसे भी शामिल हैं। कोरोना काल में शैक्षिक संस्थानों की खोलने के लिए जारी गाइडलाइन में मदरसों को खोलने की बात भी कही गई है।


बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने 15 अक्टूबर से जिला स्तर पर होने वाली बैठक में मदरसों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों को भी बुलाने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्रार का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी करना मदरसा प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि अंकपत्र मदरसों को भेज दिए गए हैं। उनका वितरण किया जा रहा है।

Thursday, September 10, 2020

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय।

लखनऊ। मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत 25 हजार शिक्षकों के केंद्रांश मानदेय चार साल से नहीं मिला है। इन शिक्षकों ने शासन के जरिये केंद्र को 8,000 और परास्नातक शिक्षकों को सरकार से मानदेय जारी करवाने की मांग की है। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि योजना के अंतर्गत स्नातक शिक्षकों 15,000 मानदेय मिलता है। केंद्र सरकार को 8,000 में से 3600 रुपये और 15,000 में से 4,800 रुपये देने होते हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने चार साल से रुपये बकाया हो चुका है। राज्य सरकार ने केंद्रांश जारी करने के लिए कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिख चुकी हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण से एक टीम दिल्ली भेज कर अड़चनें दूर कराने की मांग की।



'जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर लगाएं रोक

लखनऊ : मदरसा शिक्षकों ने बोर्ड रजिस्ट्रार से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। शिक्षकों का आरोप है कि अधिकारी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए जारी शासनादेश के विपरीत अभिलेख मांग कर रहे हैं। प्रदेश के अनुदानित मदरसों के सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए एक सितंबर को शासनादेश जारी किया गया था। टीचर्स एसोसिएशन मदरसे अरबिया के महामंत्री हाजी दीवान साहेब जमा खां ने बताया कि बहराइच, मऊ, अंबेडकर नगर, वाराणसी मे अधिकारी अपना अलग प्रोफॉर्मा जारी कर अनुभव प्रमाण पत्र भी मांग रहे हैं।

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Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।