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Sunday, July 12, 2020

यूपी बोर्ड : अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को करना पड़ेगा इंतजार, डिजिटल से चलेगा काम

यूपी बोर्ड : अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को करना पड़ेगा इंतजार, डिजिटल से चलेगा काम


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा 2020 का अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को इंतजार करना पड़ सकता है। बोर्ड ने 15 जुलाई से जिलों में वितरण कराने का ऐलान किया था लेकिन, अंकपत्र अभी क्षेत्रीय कार्यालयों में ही नहीं पहुंच सके हैं। अगले सप्ताह से क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचने के आसार हैं। यूपी बोर्ड के निर्देश पर प्रधानाचार्य अंकपत्र की ऑनलाइन डिजिटल कॉपी पहली जुलाई से वितरित कर रहे हैं। 


यह पहल इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते मार्कशीट छपने में देरी हुई है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि छात्र-छात्राओं को डिजिटल अंकपत्र वितरित किया जा रहा है, उसमें कोई दिक्कत नहीं आ रही साथ ही अगली कक्षाओं में प्रवेश के लिए वह मान्य होगा। जल्द ही अंक सह प्रमाणपत्र जिलों में पहुंचाए जाएं। इंटर का अंकपत्र 30 जुलाई तक भेजे जाने का ऐलान पहले ही किया जा चुका है।

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक कालेजों में पाठ्यक्रम घटाया जाना है। बोर्ड प्रशासन पाठ्यक्रम सिर्फ इसी वर्ष के लिए कम करेगा, अगले वर्षो में तय पाठ की पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई यह एलान कर चुका है, जबकि बोर्ड के प्रस्ताव पर शासन से अनुमोदन का इंतजार किया जा रहा है। विभाग कोरोना संक्रमण का प्रभाव पठन-पाठन पर कब तक पड़ेगा इसका अनुमान लगा रहा है इसीलिए आदेश देने में विलंब हो रहा है।


शैक्षिक सत्र अप्रैल से ही शुरू है। प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक कालेजों के लिए हर वर्ष का शैक्षिक पंचांग जारी होता है, इसमें किस माह में कितनी पढ़ाई होती है इसका जिक्र रहता है। जुलाई आधा बीत रहा है और अब तक कालेजों को संचालित करने के हालात नहीं है। हालांकि बोर्ड प्रशासन हाईस्कूल व इंटर के अभ्यर्थियों से परीक्षा फार्म भरा रहा है और कक्षा नौ व 11 में पंजीकरण करा शुरू करा चुका है। इससे भी पढ़ाई नहीं हो रही है, यह जरूर है कि ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्रओं को पढ़ाने का दावा किया जा रहा है ऐसे छात्रों की संख्या बहुत कम है। यूपी बोर्ड ने पहले 2020 का परिणाम जारी किया और फिर पाठ्यक्रम घटाने का प्रस्ताव तैयार किया। इसमें शासन को अलग-अलग सुझाव दिया गया है। 



आसार हैं कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम करने का एलान करेगा और यह कटौती सिर्फ इसी वर्ष के लिए होगी। शासन प्रस्ताव का अनुमोदन करके पाठ्यक्रम घटाने का एलान कभी भी कर सकता है। यह भी संकेत है कि कंपार्टमेंट परीक्षा और पाठ्यक्रम की घोषणा एक साथ कर दी जाए। ज्ञात हो कि हाईस्कूल व इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि उन्हें शासन के आदेश का इंतजार है।

माध्यमिक : आम शिक्षकों का स्थानांतरण बंद, पहुंच वालों के लिए कोई रोक नहीं


माध्यमिक : आम शिक्षकों का स्थानांतरण बंद, पहुंच वालों के लिए कोई रोक नहीं

प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के स्थानांतरण पर निदेशक की रोक का कोई असर नहीं


प्रयरागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के स्थानांतरण में निदेशक की रोक के बाद भी मनमाने तरीके से पहुंच वाले शिक्षकों के स्थानांतरण लगातार हो रहे हैं। प्रदेश के हजारों शिक्षक सरकार की ओर से स्थानांतरण पर लगी रोक के हटाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। साल भर से 32 शिक्षक-शिक्षिकाओं की फाइल सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी शिक्षा निदेशालय में निदेशक. माध्यमिक के आदेश का इंतजार कर रही हैं।


वहीं स्थानांतरण पर रोक के बाद भी प्रदेश सरकार में पहुंच रखने वाली दो शिक्षिकाओं और एक शिक्षक का स्थानांतरण आदेश चुपचाप जारी कर दिया गया। जो स्थानांतरण हुए उसमें पहला, मई में प्रयागराज से लखनऊ जबकि बाकी दो स्थानांतरण बीती नौ जुलाई को हुए। इसमें एक वाराणसी में एक स्कूल से दूसरे स्कूल और दूसरा बांदा के एक स्कूल से कानपुर नगर स्थानांतरण का है। ये स्थानांतरण गुपचुप तरीके से हो रहे हैं जबकि शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने ऑफलाइन स्थानांतरण की पत्रावली शिक्षा निदेशालय को अग्रसारित करने पर रोक लगा रखी है। 


डीआईओएस ने निदेशक को नहीं दी सूचना
शिक्षा निदेशक की ओर से ऑनलाइन स्थानांतरण के लिए प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षकों से चार बार जानकारी मांगी गई। इसमें प्रदेश के मात्र पांच जिला विद्यालय निरीक्षकों ने ही जानकारी भेजी। शिक्षा निदेशक की ओर से चार बार दिए गए आदेश का पालन न किए जाने पर भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थानांतरण को लेकर 11 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है जबकि अधिकारी पहुंच वालों का गुचचुप तरीके से स्थानांतरण कर दे रहे हैं।

Thursday, July 9, 2020

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती

यूपी बोर्ड की किताबें NCERT से भी 80 फीसदी तक सस्ती



यूपी बोर्ड की किताबें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से भी 80 फीसदी तक सस्ती हैं। कक्षा 11 अंग्रेजी की किताब स्नैपशॉट बाजार में सिर्फ 7 रुपये में मिल रही है जबकि एनसीईआरटी की यही किताब 35 रुपये में मिल रही है। 

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म, 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू

यूपी बोर्ड में प्रधानाचार्य चवन्नी में भरवाएंगे परीक्षा फार्म,  2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2021 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बोर्ड की ओर से हाईस्कूल के छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क 501 और इंटरमीडिएट के लिए 601 रुपये रखा गया है। इस शुल्क में स्कूल के प्रधानाचार्यों को फार्म भरने के लिए मात्र 25 पैसे (चवन्नी) दिया जा रहा है। स्कूलों को इसी 25 पैसे में बच्चों का ऑनलाइन फार्म भरवाना होगा। प्रधानाचार्यों का कहना है कि ऑनलाइन फार्म भरने के लिए साइबर कैफे अथवा ऑनलाइन काम करने वाली किसी एजेंसी की सेवा लेनी होगी, इसके लिए कम से कम प्रति फार्म दो रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में प्रधानाचार्यों ने सवाल उठाया है कि 25 पैसे में कैसे फार्म भरा जाएगा।


प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजेश कुमार शर्मा का कहना है कि प्रधानाचार्यों की ओर से हर साल आवेदन शुल्क में स्कूल का खर्च बढ़ाने की मांग की जाती है, सरकार और बोर्ड की ओर से आश्वासन भी मिलता है परंतु होता कुछ नहीं है। एक बार फिर से यूपी बोर्ड के परीक्षा शुल्क में स्कूलों को फिर से चवन्नी ही मिली है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रवक्ता एसपी तिवारी का कहना है कि यह कितना अव्यवहारिक है कि बोर्ड जब ऑफलाइन आवेदन होता था, उसी समय का आवेदन खर्च हमें दे रहा है जबकि फीस 200 से 500 रुपये तक पहुंच गई।


बोर्ड की ओर से माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश लेने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त रखी गई है। कोरोना संकट के काल में प्रधानाचार्यों ने पांच अगस्त तक शुल्क जमा करने और प्रवेश पूरा होने को अव्यवहारिक बताया है।
बच्चे स्कूल आ नही रहे हैं, उनके लिए स्कूल 31 जुलाई तक बंद हैं। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करना और प्रवेश लेना मुश्किल होगा। पांच अगस्त तक परीक्षा शुल्क नहीं जमा करने पर छात्रों, अभिभावकों को 100 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा।

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई



ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई


यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं।...
जेएनएन, मेरठ। यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई, लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं। हालात तो ये हैं कि बहुत से प्रकाशक किताबों से रायल्टी तक नहीं निकाल पा रहे।

प्रदेश में यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी पैटर्न की किताबों के प्रकाशन के लिए चार प्रकाशक अधिकृत किए गए हैं। इनमें रवि आफसेट प्रिटर्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा, राजीव प्रकाशन प्रयागराज, आलोक प्रिटर्स आगरा और काका संस नोएडा हैं। मेरठ के बहुत से प्रकाशक यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें व एनसीईआरटी से इतर किताबें प्रकाशित करते हैं। प्रकाशकों पर कोविड का व्यापक असर पड़ा है। मार्च में प्रकाशकों ने किताबें छाप दीं, लेकिन इस समय तक मुश्किल से 20 फीसद ही विक्रेताओं के पास पहुंच पाई। ये कहते हैं प्रकाशक


मार्च में किताबें सप्लाई कर दी थीं। बच्चे किताब नहीं खरीद रहे हैं, जिस वजह से दुकानदार किताब लेने को तैयार नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मांग शून्य है। दुकान और प्रकाशक दोनों जगह स्टाक भरे हैं। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है। इस साल रायल्टी भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यह रायल्टी बोर्ड के माध्यम से एनसीईआरटी को जाती है। अतुल जैन, डायरेक्टर, रवि आफसेट प्रिटर एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा 


करीब 25 फीसद किताबें ही मार्केट में सप्लाई हुई थीं। 75 फीसद स्टॉक गोदाम में है। स्कूल कब खुलेंगे पता नहीं। यूपी बोर्ड में छात्रों के पास किताबें नहीं होंगी तो वे क्या पढ़ेंगे। बच्चों को प्रोत्साहित करें। किताबें खरीदें, स्वयं अध्ययन करें। अजय रस्तोगी, डायरेक्टर, चित्रा प्रकाशन, मेरठ 


यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें प्रकाशित करते हैं। इस बार मांग शून्य है। बच्चे किताब नहीं खरीद पा रहे हैं। जब तक स्कूल नहीं खुलेंगे, किताबों की मांग नहीं आएगी। सौरभ जैन, डायरेक्टर, विद्या प्रकाशन मेरठ 


किताबों की बिक्री के लिए विकल्प देना होगा। स्कूल के अंदर स्टाल लगा दिए जाएं, सेक्शन वाइज कक्षा में किताबें रख दी जाएं। अभिभावक को बुलाकर किताबें दी जा सकती हैं। मोहित जैन, नगीन प्रकाशन, मेरठ 


80 फीसद पुस्तक विक्रेताओं के पास जा चुकी हैं। लेकिन ये बच्चों तक नहीं पहुंची हैं। अगर अप्रैल में किताबें उपलब्ध करा दी जाती तो बहुत अच्छा रहता। यूपी बोर्ड में ऑनलाइन पढ़ाई तभी होगी जब हाथ में किताब हो। कोरोना की वजह से किताबों की बिक्री की सरकार ने अनुमति नहीं दी। अजय रस्तोगी, रीडर्स च्वाइस, मेरठ


माध्यमिक में भी अब राज्य पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन

माध्यमिक में भी अब राज्य पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन


माध्यमिक -राज्य अध्यापक पुरस्कार : शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के लिए मानक तय, खेलकूद ओर सह शैक्षणिक गतिविधियों पर भी मिलेगा पुरस्कार,  माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी की नीति

 
माध्यमिक शिक्षा में खेलकूद और नवाचार के साथ सह- शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी अब राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार के मानक अलग-अलग होंगे। पुरस्कार के लिए ऑनलाइन ही आवेदन देना होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पहली बार राज्य अध्यापक पुरस्कार की नोति जारी को है। इस नीति में प्रधानाचायों और शिक्षकों द्वाय स्कूल में जनसहयोग से कराए गए सौंदर्यीकरण और अबस्थापना सुविधा के कार्यों के भी अंक दिए जाएंगे। प्रधानाध्यापक और अध्यापकों को आवेदन के साथ अपनी उपलब्धियों का वीडियो भी भेजना होगा। पुरस्कार के लिए प्रधानाचार्यों की Re अवधि 15 वर्ष तय की गई है। इसमें कम से कम पांच वर्ष प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करना अनिवार्य किया गया हैं। अध्यापकों के लिए सेवा अवधि 10 वर्ष की रहेगी। पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनेगी। 


मंडल स्तर पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय और प्रदेश स्तर पर विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनेगी। जिला और मंडल स्तरीय समिति आवेदक शिक्षकों का साक्षात्कार भी लेगी। इसमें आवेदक शिक्षक व प्रधानाचार्य को डिजिटल प्रजेटेशन देना होगा। जिला स्तरीय समिति अधिकतम तीन नाम की संस्तुति मंडल स्तरीय समिति को करेगी, मंडल स्तरीय समिति अधिकतम दो नाम कौ संस्तुति प्रदेश समिति को भेजेगी।


हर वर्ष ऐसे चलेगा कार्यक्रम 
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए 15 अप्रैल से 15 मई तक ऑनलाइन आबेदन लिए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति द्वारा आवेदन पत्रों का परीक्षण एवं स्थलीय सत्यापन कर 16 मई से 15 जुलाई तक पुरस्कार के लिए पात्र अध्यापकों का प्रस्ताव मंडल स्तरीय समिति को भेजा जाएगा। मंडल स्तरीय समिति 16 से 31 जुलाई तक पात्र शिक्षकों का चयन कर सूची राज्य स्तरीय समिति को भेजेगी। राज्य स्तरीय समिति 1 से 20 अगस्त के बीच चयन करेगी।


कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन 15 से 30 जुलाई तक लिए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति 1 से 10 अगस्त तक आवेदन पत्रों का सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण कर स्तरीय समिति को सूची सौंपेगी। मंडल स्तरीय समिति पात्र शिक्षकों की सूची 11 से 17 अगस्त तक राज्य स्तरीय समिति को भेजेगी। राज्य स्तरीय समिति 15 से 25 अगस्त के बीच राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए पात्र शिक्षकों का चयन करेगी।


 अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी राज्य अध्यापक पुरस्कार के आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे अध्यापकों को इसके लिए चुना जाएगा। इसके लिए हर वर्ष 15 अप्रैल से 15 मई तक आवेदन लिए जाएंगे। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला ले लिया गया है। 


इस वर्ष आवेदन 15 से 30 जुलाई तक लिए जाएंगे। जिला स्तर कमेटी एक से 10 अगस्त, मंडलीय कमेटी 11 से 17 अगस्त, राज्य स्तरीय कमेटी 18 से 25 अगस्त तक अध्यापकों का चयन करेगी। बेसिक में पहले से ही राज्य अध्यापक पुरस्कार के मानक तय हर वर्ष 9 हैं। हर वर्ष 75 अध्यापक पुरस्कृत करने का नियम है। अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी मानक तय कर दिए गए हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त व जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। राज्य स्तरीय कमेटी एक से 20 अगस्त तक चुनाव करेगी।

Sunday, July 5, 2020

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल, शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे

छह जुलाई से सभी माध्यमिक शिक्षक एवं कर्मचारियों को स्कूल जाना अनिवार्य, विद्यार्थी नहीं आएंगे, 

आज से खुलेंगे सभी बोर्डों के माध्यमिक स्कूल


प्रदेश सरकार ने दिया निर्देश स्कूलों की फीस जमा कराएं अभिभावक, एकमुश्त देने में असमर्थ तो किश्तों में दे सकेंगे फीस


फीस न जमा होने पर न काटें बच्चे का नाम, ऑनलाइन क्लास से भी न रोका जाए।


इस दौरान एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी, एक समय में ज्यादा अभिभावकों को नहीं बुलाया जाएगा





कोरोना संक्रमण को लेकर लॉक डाउन से बंद चल रहे माध्यमिक विद्यालयों को शासन द्वारा छह जुलाई से खोलने का निर्णय लिया है। यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व संस्कृत बोर्ड सहित सभी बोर्डो से संबंधित विद्यालय सोमवार से खुल जाएंगे और शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी इन विद्यालयों में पहुंचेगे। इसके साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ छात्र छात्राओं के एडमीशन भी किए जाएंगे। हालांकि छात्र छात्राएं अभी विद्यालय नहीं आएंगे उनकी छुट्टी रहेगी। सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया होगी। अभी तक माध्यमिक विद्यालय बन्द चल रहे थे। सोमवार से माध्यमिक विद्यालय खुल जाएंगे और सभी विद्यालयों में शिक्षक भी पहुचेंगे। 


ऑनलाइन कक्षाएं नियमित

दिशा निर्देशों में बताया गया है कि छह जुलाई से विद्यालय खुलने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। 10 जुलाई से नियमित ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाए। सभी कक्षा अध्यापक एवं विषय अध्यापक विद्यालय में ही रह कर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करेंगे। जिसकी मानिटरिंग जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से की जाएगी।


लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जो अभिभावक कोरोना संकट के कारण एकमुश्त फीस जमा कराने में असमर्थ हैं, वे स्कूल प्रबंधन के समक्ष किस्तों में फीस जमा कराने का प्रार्थना पत्र दें। विद्यालय प्रबंधन उस पर गंभीरता से विचार करेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शनिवार को यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करानी होगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि फीस के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा और न ही स्कूल से उसका नाम काटा जाएगा। फीस को लेकर अगर अभिभावकों को कोई शिकायत है तो वे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। 


गौरतलब है कि वित्तविहीन विद्यालयों के संगठनों ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि अभिभावक सरकार के आदेश का गलत अर्थ निकालते हुए फीस जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि राज्य व केंद्र सरकार, बोर्ड, निगम, बैंक या बड़े संस्थान के कर्मचारी व अधिकारियों को नियमित रूप से वेतन मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के आदेश पर वित्तविहीन विद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों नियमित वेतन देना पड़ रहा है।

यूपी बोर्ड : 10वीं-12वीं के छात्रों को मिलेंगे त्रुटिहीन अंकपत्र

10वीं-12वीं के छात्रों को मिलेंगे त्रुटिहीन अंकपत्र

पहली बार ग्रीवांस सेल में आ रही आपत्तियों का मांगा ब्योरा, अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में करेंगे संशोधन


यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा 2020 में शामिल 52.57 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को कोरोना काल में त्रुटिहीन अंकपत्र सह प्रमाणपत्र मिलेंगे। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने प्रयागराज, वाराणसी, मेरठ, बरेली और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों में स्थापित ग्रीवांस सेल में रिजल्ट घोषित होने के बाद प्राप्त शिकायतों और आपत्तियों के निस्तारण का ब्योरा मांगा है ताकि मूल सह प्रमाणपत्र की छपाई से पहले ये संशोधन कर लिए जाएं। इससे छात्र छात्राओं को मूल अंकपत्र में संशोधन के लिए महीनों बोर्ड कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे। 


कोरोना के कारण अंकपत्र सह प्रमाणपत्र की छपाई का काम शुरू नहीं हो सका है। यही कारण है कि पहली बार डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र बच्चों को भेजे गए हैं ताकि उन्हें प्रवेश आदि में परेशानी न हो। रिजल्ट घोषित होने के एक दिन बाद 28 जून से सभी पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों में ग्रीवांस सेल भी सक्रिय हो गई है। इस बार छात्र या माता पिता के नाम में तो बहुत कम गड़बड़ी है क्योंकि परीक्षा से पहले वेबसाइट खोलकर संशोधन का मौका दे दिया गया था। लेकिन इस बार कोरोना के कारण एक मूल्यांकन केंद्र से दूसरे में कॉपियों को भेजने के कारण कई छात्रों के रिजल्ट अपूर्ण हैं। एक से दूसरे स्कूल कॉपी भेजने में मिसिंग हो गई और अंकपत्र में विषय का नंबर नहीं चढ़ पाया।


पांचों क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिवों को निर्देश दिया है कि टैबुलेशन रजिस्टर और छात्र छात्राओं के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र आदि त्रुटि रहित मुद्रित हों इसके लिए ग्रीवांस सेल के माध्यम से जो भी शिकायत आपत्तियां प्राप्त हुई हैं उनका निराकरण करके इसके साथ ही कार्यालय स्तर पर यदि कोई संशोधन आदि अवशेष हों तो उनकी एडवाइज तैयार कराकर उसे प्रमाणित करते हुए तत्काल संबंधित कम्प्यूटर फर्मों को उपलब्ध करा दिए जाएं। - दिव्यकान्त शुक्ल, सचिव


Saturday, July 4, 2020

माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य द्वारा शैक्षणिक तथा शिक्षणेत्तर कर्मियों को सहयोग हेतु बुलाने की सशर्त अनुमति व ऑनलाइन टीचिंग आदि के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी

माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य द्वारा शैक्षणिक तथा शिक्षणेत्तर कर्मियों को सहयोग हेतु बुलाने की सशर्त अनुमति व ऑनलाइन टीचिंग आदि के सम्बन्ध में दिशा-निर्देश जारी।

यूपी में 6 जुलाई से खुल जाएंगे स्कूल, शिक्षक आएंगे और चलेगी ऑनलाइन क्लास

उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी शिक्षा बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षण और नए सत्र के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मियों को 6 जुलाई से बुलाने की अनुमति दे दी है। विद्यालयों में स्टाल लगाकर किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा फीस न देने वाले सामर्थ्यवान अभिभावकों से प्राथमिकता के आधार पर फीस वसूली जाएगी। आर्थिक कठिनाइयों के कारण असमर्थ अभिभावकों के प्रार्थना पत्र देने पर उनसे किश्तों में फीस वसूली जाएगी।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने इस बारे में जारी आदेश में कहा है कि अनलॉक-2 में सत्र नियमित करने और छात्रों के व्यापक हित में माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों आदि को 6 जुलाई से बुलाये जाने की अनुमति दी गई है। कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए विद्यालय भवन, फर्नीचर आदि को रोज पूर्णत: सैनिटाइज करना होगा। प्रवेश से पहले थर्मल स्कैनिंग की जाए। तापमान सामान्य से अधिक होने पर विद्यालय में प्रवेश न दिया जाए तथा इसकी सूचना सीएमओ को दी जाए।


उन्होंने कहा है कि अभिभावक संघ की जल्दी बैठक बुलाकर उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की जानकारी दी जाए। अधिकारियों, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। प्रत्येक कक्षा के लिए प्रतिदिन कक्षावार व विषयवार समय सारिणी बना कर अधिकतम 15 जुलाई तक ऑनलाइन पढ़ाई प्रारम्भ कर दी जाए। लॉक डाउन की अवधि में परिवहन शुल्क न लिये जाने और शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए शुल्क वृद्धि न किये जाने संबंधी शासनादेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

श्रीमती शुक्ला ने कहा है कि शुल्क जमा न करने के कारण किसी छात्र को ऑनलाइन पठन-पाठन से वंचित न किया जाए और न ही इस आधार पर किसी छात्र का नाम विद्यालय से काटा जाए।






माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर


राज्य मुख्यालय : फर्जी शिक्षकों की भर्ती का शोर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग तक ही सीमित है जबकि राजकीय इंटर और सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी बहुत बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं। एलटी ग्रेड में 2014 में हुई 6645 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया इसी फर्जीवाड़े के चलते ही पूरी नहीं हो पाई थी। हालांकि यहां जांच के आदेश हो चुके हैं लेकिन अभी इसमें तेजी नहीं आई है। 


सभी मंडलीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सहायताप्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के प्रमाणपत्र वे अपने पास रख लें। अभी ये प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन के पास हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सत्यापन की कार्रवाई शुरू होगी। वहीं राजकीय इंटर कॉलेजों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर मौजूद हैं। वहां से भी सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि माध्यमिक शिक्षा में फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर पहले से ही है लेकिन इसके लिए कोई पुख्ता प्रयास नहीं किए गए। 



2014 में 6645 पदों पदों के लिए 27 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे क्योंकि उस समय मंडलवार आवेदन लिए जाते थे लेकिन भर्ती के बाद जैसे ही सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई उसमें फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने लगे। ज्यादातर मंडलों में 60 से 65 फीसदी चयनितों के प्रमाणपत्र फर्जी निकले थे। इस भर्ती में 2 हजार के आासपास पद ही भर पाएं लेकिन 2016 में इस पर रोक लगा दी गई। इसके बाद ही एलटी ग्रेड भर्ती को लोक सेवा आयोग को देने का फैसला लिया गया।

Friday, July 3, 2020

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद


गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा साबित हो रही बेमकसद बेसिक में 25 प्रतिशत, माध्यमिक में 30 फीसद बच्चे ही ले रहे लाभ


फ़तेहपुर : कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के दौर में बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई गई कि छात्र छात्राओं की शिक्षा प्रभावित न हो सके।लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई का सच जमीनी हकीकत से दूर है। अभी तक नासिक में 75 प्रतिशत तो माध्यमिक में 70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। 


खासकर ग्रामीणांचलों में स्थित विद्यालयों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा बेमकसद साबित हो रही है। इसका कारण है कि अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के पास न ही एडायड फोन हैं और जहां मोबाइल हैं भी वहां गांवों में नेटवर्किंग की समस्या है। 


ऐसे अव्यवस्थाएं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बच्चों का ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए व्हाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य ऐपों के माध्यम से ग्रुप बनाकरबच्चों को जोड़ा गया। विद्यालयों के कक्षाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई कि वह अपने कक्षा के सभी बच्चों को ग्रुप में जोड़ कर प्रतिदिन निर्धारित समय में शिक्षण सामग्री प्रेषित करेंगे और उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी देंगे। 

Wednesday, July 1, 2020

यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को

यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव सेवानिवृत्त, चार्ज दिव्यकान्त शुक्ल को 



प्रयागराज। यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव शिक्षा विभाग में अपनी 29 वर्ष की सेवा के बाद मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गई। इसके बाद सचिव का पद प्रभार यूपी बोर्ड के नवनियुक्त विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल दिव्यकांत शुक्ल को दिया गया है। 


वह सचिव के पद पर स्थाई नियुक्ति होने तक संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज मंडल के साथ वर्तमान पद का दायित्व संभालेंगे। नीना श्रीवास्तव 31 मार्च 2020 को अवकाश ग्रहण कर रहीं थीं, लेकिन शासन ने यूपी बोर्ड परीक्षा को देखते हुए उनका कार्यकाल 30 जून तक बढ़ा दिया था।

Tuesday, June 30, 2020

रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


वर्ष 2020 के हाईस्कूल और इंटर का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाला यूपी बोर्ड अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया। प्रदेश में शिक्षा का विस्तार करने के उद्देश्य से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद गठित किया गया था। बोर्ड ने 1923 में पहली बार परीक्षा कराई थी जिसमें हाईस्कूल के 5655 और इंटर के 89 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। 2020 की परीक्षा बोर्ड की 98वीं परीक्षा थी। 2022 में परीक्षा के 100 साल पूरे हो जाएंगे।


परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार ने 1972 में मेरठ, 1978 में वाराणसी, 1981 में बरेली, 1986 में इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) तथा 2017 में गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की। छात्रसंख्या के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। 2020 की परीक्षा के लिए 56,07,118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। जितने छात्र 10वीं-12वीं की परीक्षा देते हैं उतनी दुनिया के 80-85 देशों की आबादी नहीं है।


हर दो दशक में ऐसे बढ़ी परीक्षार्थियों की संख्या
वर्ष         10वीं           12वीं ( छात्र-छात्राओं की संख्या)
1923      5655         89
1939      15545       5447
1959      155211     100970
1979      874438    516047
1999      2276571   1114301
2019      3192587   2603169



समय के साथ बदला काम का तरीका
समय के साथ बोर्ड ने अपने काम का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ सालों में बोर्ड ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर नकल पर रोक लगाई है। वहीं, परीक्षार्थियों को सहूलियत दी है। उदाहरण के तौर पर इस साल से स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को अंकपत्रों एवं प्रमाणपत्रों में संशोधन, द्वितीय प्रतिलिपि आदि घर बैठे मिल रही है। परीक्षा के लिए केंद्रों के आवंटन से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर वाली मार्क्सशीट तक ऐसे दर्जनों काम हैं जो बोर्ड ने तकनीक के माध्यम से बेहतर किए हैं।


प्रमुख बदलाव
2018 से बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण कम्प्यूटर के जरिए ऑनलाइन
2019 से सीसीटीवी के साथ वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में परीक्षा 
2020 में परीक्षा केंद्रों की वेबकास्टिंग कराने की शुरुआत की गई
2018-19 सत्र से मान्यता संबंधी कार्रवाई ऑनलाइन कराई गई
2017-18 से फर्जी पंजीकरण रोकने को बच्चों के आधार नंबर लिए गए
2019 में 39 विषयों की परीक्षा में दो की जगह एक पेपर देना पड़ा
2018-19 सत्र से कक्षा 9 से 12 तक में एनसीईआरटी कोर्स लागू किया गया

Monday, June 29, 2020

प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


लखनऊ: आमतौर पर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। पर इस बार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन प्राइवेट से बेहतर रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 72.45 प्रतिशत बच्चे पास हुए, जबकि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 83.70 रहा। यानी, प्राइवेट स्कूलों से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा।


शनिवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। इंटरमीडिएट में परीक्षा देने वालों में से 74.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इनमें बालकों के पास होने का प्रतिशत 68.88 रहा, जबकि बालिकाओं का 81.96। वहीं, ये विद्यार्थी किस तरह के विद्यालयों में पढ़ते थे, इस नजरिये से देखें तो शासकीय (सरकारी) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बेहतर रहा। 


यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ऐडेड माध्यमिक स्कूलों का भी परफॉर्मेंस पास होने के मानकों पर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा रहा। प्रदेश में 785 शासकीय विद्यालय हैं, जिनमें से 84,523 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 70,744 विद्यार्थी पास हुए। इस तरह से यहां पर पास प्रतिशत 83.70 रहा। वहीं, 4077 ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में 7,43,604 विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। इनमें से 5,82,433 पास हुए। यानी, पास प्रतिशत 78.33 रहा। वहीं, प्रदेश में चल रहे 12,482 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 15,92,903 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11,54,009 पास हुए। यानी, 72.45 प्रतिशत।


यही नहीं, प्रदेश में 111 प्राइवेट स्कूल ऐसे रहे, जिनमें पास होने का प्रतिशत 20 से भी कम रहा। जबकि केवल सात ही सरकारी स्कूल थे, जिनमें पास होने वालों का प्रतिशत 20 से कम रहा और ऐसे ही ऐडेड स्कूलों की संख्या 18 रही।


हाईस्कूल में प्राइवेट का परफॉर्मेंस तीन प्रतिशत ज्यादा
इंटरमीडिएट में जहां निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकले, वहीं हाईस्कूल की परीक्षाओं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत सरकारी की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा रहा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से 82.08% विद्यार्थी पास हुए, जबकि प्राइवेट स्कूलों के 85.11% विद्यार्थी परीक्षा पास कर सके। ऐडेड स्कूलों का परफॉर्मेंस 79.77 प्रतिशत रहा।


नकल के लिए बदनाम जिलों की हालत रही पतली
नकल के लिए बदनाम रहे जिलों की हालत भी इस साल कुछ पतली ही रही। परिणाम में उनका वह दबदबा नहीं रहा, जैसा की बीते वर्षों में दिखता रहा है। जैसे अलीगढ़ की स्थिति इस कदर खराब हुई कि इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उसका स्थान 75वें पर है। यहां केवल 56.39 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके। हरदोई भी नकल के लिए खासा बदनाम रहा है, लेकिन इस साल परिणाम के तौर पर यह प्रदेश के जिलों में 43वें स्थान पर रहा है। बाराबंकी का स्थान 49वां, रायबरेली का 50वां और गोंडा का 52वां नंबर रहा है। देवरिया में केवल 61.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि बलिया में पास प्रतिशत 57.57 रहा।

Sunday, June 28, 2020

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट

■    यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट


● पहले इसके लिए यूपी बोर्ड की वेबसाइट upresults.nic.in पर जाएं
● यहां 10वीं या 12वीं एग्जाम रिजल्ट पर क्लिक करें
● इसके बाद अपना रोल नंबर यहां इंटर करें
● फिर आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा
● रिजल्ट देखने के बाद स्क्रीन का प्रिंट अवश्य लें
● यूपी बोर्ड की वेबसाइट व अन्य जानकारी


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं का रिजल्ट  आज 27 जून घोषित होगा। स्टूडेंट अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर पाएंगे, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।

◆ बोर्ड का नाम : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद
◆ परीक्षा का नाम : कक्षा 10वीं/12वीं का बोर्ड एग्जाम
◆ आधिकारिक वेबसाइट : upmsp.nic.in
◆ रिजल्ट की वेबसाइट : upresults.nic.in

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा का परिणाम शनिवार को उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ में घोषित करेंगे। इसी के साथ परीक्षा में शामिल 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का इंतजार खत्म हो जाएगा। इस बार 10वीं-12वीं की परीक्षा एक साथ 18 फरवरी को शुरू हुई थी। 10वीं की परीक्षा 3 मार्च को इंटर की परीक्षा 6 मार्च को समाप्त हुई थी। की परीक्षा में हाईस्कूल के 3022607 और इंटर के 2584511 कुल 5607118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से पांच लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने बीच में ही पेपर छोड़ दिया था। इससे पहले 2019 में 10वीं व 12वीं में 5795756 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इस लिहाज से 2020 की परीक्षा में 188638 परीक्षार्थियों की कमी हुई थी। परीक्षा के लिए 7784 केंद्र बनाए गए थे जो 2019 की तुलना में 570 कम था। इस बार 1 जुलाई 2019 को ही परीक्षा का टाइम टेबल घोषित कर दिया गया था।


लखनऊ/प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा का परिणाम आज 27 जून को दोपहर 12:30 बजे यहां लोक भवन में जारी किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा यह परिणाम जारी करेंगे। परीक्षा में इस बार 51 लाख से अधिक 51 लाख से परीक्षा थीं शामिल हुए थे। परिणाम बोर्ड अधिक मात्रा ने दी है परीक्षा की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।


 इस बार इंटरमीडिएट में एक विषय में फेल होने वाले परीक्षार्थी को पहली बार कंपार्टमेंट में शामिल होने का मौका मिलेगा। बोर्ड की ओर से कोरोना संक्रमण के चलते पहली बार ही परीक्षार्थियों डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र, प्रवेश लेने से लेकर नौकरी तक में मान्य होंगे। 


लखवऊ । UP board result 2020 : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का परिणाम 27 जून को एक साथ घोषित होगा। यूपी बोर्ड  हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय पर शनिवार को दोपहर 12.30 बजे जारी होगा। इसकी सारी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह परिणाम दिल्ली में भी रफी मार्ग आइएनएस बिल्डिंग से भी उसी समय जारी होगा। स्टूडेंट्स रिजल्ट जारी होने के बाद यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in और upresults.nic.in पर देख सकेंगे।


यूपी बोर्ड ने इस वर्ष 10वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 3 मार्च 2020 के मध्य सफलता पूर्वक पूरी कराई थी, जबकि 12वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 6 मार्च 2020 के बीच कराई गई थी।परीक्षा में 56 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें हाईस्कूल के 30,22,607 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट के 25,84,511 परीक्षार्थी थे। इन परीक्षार्थियों के लिए प्रदेश भर में 7784 परीक्षा केंद्र बनाए गए। प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इस बार बोर्ड परीक्षाओं की निगरानी के लिए प्रदेश भर में कुल 19 लाख कैमरे लगाए गए। इसके साथ ही इस परीक्षा के लिए 1.88 लाख कक्ष निरीक्षक नियुक्त किये गए। इन्हें परीक्षा केंद्र पर अपने पहचानपत्र और आधार कार्ड के साथ ड्यूटी करने को कहा गया था।


परीक्षा में पहले से ज्यादा बरती गई सख्ती : यूपी बोर्ड के अनुसार, इस बार परीक्षा में पहले से ज्यादा सख्ती बरती गई। सभी परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरा, वॉयस रिकॉर्डर, ब्रॉडबैंड, राउटर जैसी तकनीकों से लैस किया गया था। हर जिले में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया गया था, जिसे लखनऊ में शिक्षा निदेशक के कार्यालय से जोड़ा गया था। पूरी परीक्षा स्पेशल टास्क फोर्स, जिलाधिकारी और पुलिस की देखरेख में संपन्न कराई गई।


रंगीन उत्तर पुस्तिकाओं का उपयोग : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार परीक्षा की कॉपियों को चार रंगों में बनवाई थी। ये कॉपियां नीला, पीला, हरा और गुलाबी रंग की थीं। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में क्रमांक भी दर्ज किये गए थे। इसका उद्देश्य परीक्षा को नकलविहीन बनाना था। उत्तर पुस्तिकाओं में क्रमांक दर्ज होने से इन्हें बाहरी कॉपियों से बदला नहीं जा सका।

UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इस बार और भी बढ़ गई है। जबकि द्वितीय और तृतीय श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या में कमी आई है। ससम्मान परीक्षा पास करने वाले परीक्षार्थियों में इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में मामूली कमी आई है।


3.41 प्रतिशत ससम्मान हुए पास
इस बार इंटर की परीक्षा के लिए पंजीकृत 25,86,339 परीक्षार्थियों में से 24,84,479 परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से 18,54,099 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। सफल होने वाले इन परीक्षार्थियों में से 63,193 यानी 3.41 प्रतिशत ससम्मान पास हुए हैं। ससम्मान पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 0.05 प्रतिशत की मामूली कमी हुई है। पिछले वर्ष 3.46 प्रतिशत परीक्षार्थी ससम्मान पास हुए थे।


33.91 प्रतिशत प्रथम श्रेणी में पास
इंटर में सफलता पाने वाले 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 6,28,734 परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की है। यह संख्या कुल परीक्षार्थियों का 33.91 प्रतिशत है। प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 1.94 प्रतिशत बढ़ी है। 2019 में सफलता पाने वाले 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 5,26,896 यानी 31.97 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की थी।


आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास
इंटर में पास हुए 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 53.62 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सेकेंड डिवीजन मिला है। सेकेंड डिवीजन से पास होने वाले परीक्षार्थियों की कुल संख्या 9,94,161 है। गत वर्ष की तुलना में इस श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में मामूली यानी 0.03 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष परीक्षा में 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 53.65 प्रतिशत को सेकेंड डिवीजन मिला था।


6.55 फीसदी को मिली तृतीय श्रेणी
इस वर्ष सिर्फ 6.55 प्रतिशत परीक्षार्थी ही तृतीय श्रेणी में सफल हुए हैं। इंटर में पास हुए 1854099 परीक्षार्थियों में से 121528 तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं । तृतीय श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 1.38 प्रतिशत कम हुई है। पिछले वर्ष 7.14 प्रतिशत परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में पास हुए थे।


2.51 प्रतिशत ग्रेस मार्क्स से पास
इस वर्ष 46,483 परीक्षार्थी ऐसे हैं, जिन्हें ग्रेस मार्क देकर पास किया गया है। यह संख्या परीक्षा में शामिल कुल परीक्षार्थियों का 2.51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में ग्रेस मार्क्स के साथ पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई है। पिछले वर्ष 49,255 यानी 2.99 प्रतिशत परीक्षार्थी ग्रेस मार्क से पास हुए थे।

UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। ...

प्रयागराज । प्यारी हिंदी, हमारी हिंदी का नारा विशेष दिवस पर खूब गूंजता है। मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव शायद नारों तक ही सिमट कर रह गया है, प्यारी हिंदी को हम सब वैसा प्यार नहीं करते जिसकी उसे दरकार है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर का परीक्षा परिणाम इसकी पुष्टि कर रहा है। दोनों परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं, क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। बोर्ड की ओर से जारी हिंदी विषय का यह आंकड़ा शर्मसार करने वाला है, क्योंकि उत्तर प्रदेश हिंदी पट्टी का अहम व देश में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य है।


यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर का विषयवार परिणाम जारी किया है। इंटर की हिंदी परीक्षा में 1,08,207 व सामान्य हिंदी में 1,61,753 सहित कुल 2,69,960 परीक्षार्थी अनिवार्य प्रश्नपत्र में उत्तीर्ण होने लायक अंक नहीं ला पाए। ऐसे ही हाईस्कूल की हिंदी परीक्षा में 5,27,680 व प्रारंभिक हिंदी में 186 सहित कुल 5,27,866 परीक्षार्थी फेल हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में कुल 7,97,826 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण हैं। ये वे परीक्षार्थी हैं, जो हिम्मत जुटाकर परीक्षा में शामिल हुए थे। हैरत यह भी है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार हाईस्कूल में फेल होने वालों की संख्या बढ़ी है, जबकि इंटर के हिंदी विषय में फेल होने वालों का आंकड़ा तेजी से घटा है। वैसे भी इंटर के परीक्षार्थियों को हाईस्कूल की अपेक्षा अधिक परिपक्व माना जाता है। ज्ञात हो कि मातृभाषा में अनुत्तीर्ण होने वालों का इतना खराब परिणाम पहली बार नहीं आया है, बल्कि पिछले साल तो फेल होने वालों की तादाद दस लाख को पार गई थी।


दोनों परीक्षाओं में मातृभाषा हिंदी की परीक्षा देना अनिवार्य है और इसका असर पूरे परीक्षा परिणाम पर पर पड़ता है लेकिन, इस पर शिक्षक गंभीर हैं न परीक्षार्थी और न ही उनके अभिभावक, क्योंकि हर साल हिंदी में फेल होने वालों की तादाद लाखों में रहती है।


यही नहीं दोनों परीक्षाओं में 2,91,793 परीक्षार्थी शामिल होने तक का साहस नहीं जुटा सके। बोर्ड के अनुसार हाईस्कूल के हिंदी विषय में 1,43,246 व प्रारंभिक हिंदी में 1745 सहित कुल 1,43,306 और इंटर के हिंदी 56,092 व सामान्य हिंदी विषय में 92,395 सहित कुल 1,48,487 ने परीक्षा से ही किनारा कर लिया। इस तरह देखा जाए तो हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से हिंदी में फेल व किनारा करने वालों की तादाद 10 लाख 89 हजार 619 है। 

Saturday, June 27, 2020

UP Board Result: 10वीं-12वीं के रिजल्ट हुए घोषित, रिया और अनुराग ने मारी बाजी, टॉप-10 मेधावी छात्रों को सम्मानित करेंगे सीएम योगी


टॉप-10 मेधावी छात्रों को सम्मानित करेंगे सीएम योगी

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटर के टॉप 10 मेधावियों का सम्मान करेगी। सीएम ने परीक्षा में सफल छात्र छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एक जुलाई से मार्कशीट बांटी जाएगी, इसलिए मास्क या फेस कवर जरूर लगाएं व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। सीएम ने कहा कि महामारी के बीच समय पर परीक्षा व लॉकडाउन के बावजूद समय से परीक्षा परिणाम घोषित करने वाले बधाई के पात्र हैं।

UP Board Result: 10वीं-12वीं के रिजल्ट हुए घोषित, रिया-अनुराग ने मारी बाजी

UP Board 12th Result 2020: दसवीं और बारहवीं कक्षा का रिजल्ट जारी, टॉपर्स को एक लाख रुपये और लैपटॉप मिलेगा


■ ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट

● पहले इसके लिए यूपी बोर्ड की वेबसाइट upresults.nic.in पर जाएं
● यहां 10वीं या 12वीं एग्जाम रिजल्ट पर क्लिक करें
● इसके बाद अपना रोल नंबर यहां इंटर करें
● फिर आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा
● रिजल्ट देखने के बाद स्क्रीन का प्रिंट अवश्य लें
● यूपी बोर्ड की वेबसाइट व अन्य जानकारी


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं का रिजल्ट  आज 27 जून को घोषित हुआ। स्टूडेंट अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर पाएंगे, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।

◆ बोर्ड का नाम : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद
◆ परीक्षा का नाम : कक्षा 10वीं/12वीं का बोर्ड एग्जाम
◆ आधिकारिक वेबसाइट : upmsp.nic.in
◆ रिजल्ट की वेबसाइट : upresults.nic.in

UP Board 12th Result 2020: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। सूबे के उप मुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने दसवीं और बारहवीं के परिणाम घोषित किए। लंबे वक्त से रिजल्ट का इंतजार कर रहे विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए दसवीं और 12वीं के नतीजे देख सकते हैं। 


उत्तर प्रदेश बोर्ड ने कक्षा 10वीं और 12वीं के रिजल्ट का ऐलान कर दिया है. कोरोना वायरस महामारी के बीच इस साल का रिजल्ट पिछले साल से बेहतर रहा है. 10वीं 83.31 प्रतिशत और 12वीं में 74.63 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं. लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है. दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं में लड़कियों का पासिंग परसेंटेज लड़कों से ज्यादा रहा है. हाईस्कूल में रिया जैन (Riya Jain) तो इंटरमीडिएट में अनुराग मलिक (Anurag Malik) ने टॉप किया है। दोनों ही छात्र बागपत के बडौत के श्री राम एसएन अन्तर कॉलेज के हैं। एक ही स्कूल के दो टॉपर निकले हैं जिन्हें सरकार बड़े पैकेज के साथ सम्मानित भी करेगी।



उप मुख्यमंत्री ने कहा कि दसवीं और बारहवीं कक्षा में कुल 51,30,481 परीक्षार्थी शामिल हुए। दसवीं कक्षा में  27,44,976 परीक्षार्थी और बारहवीं कक्षा में 23,85, 505 परीक्षार्थी शामिल रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना इस वर्ष परिणाम अच्छा रहा। 


दसवीं में रिया जैन और बारहवीं में अनुराग मलिक ने किया टॉप
इस साल के रिजल्ट में लड़कों के मुकाबले लड़कियां का प्रदर्शन बेहतर रहा है। दसवीं कक्षा में 23 लाख 982 छात्र पास विद्यार्थी पास हुए हैं। दसवीं में इस साल बड़ौत-बागपत की रिया जैन ने टॉप किया है। रिया ने 96.67 फीसदी नंबरों के साथ टॉप किया है। दसवीं में दूसरा स्थान अभिमन्यु वर्मा का रहा है। उन्होंने 95.83 फीसदी अंकों के साथ टॉप किया है। वह साई इंटर कॉलेज बाराबंकी के विद्यार्थी हैं। वहीं, तीसरा स्थान योगेश प्रताप सिंह और राजेंद्र प्रताप सिंह का रहा। इन दोनों ही विद्यार्थियों ने 95.33 फीसदी अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा में टॉप किया है। योगेश प्रताप सदभावना इंटर कॉलेज बाराबंकी के विद्यार्थी हैं।


वहीं, इंटरमीडिएट में बड़ौत-बागपत के अनुराग मलिक ने टॉप किया है। उन्होंने 97 फीसदी नंबरों के साथ टॉप किया है। दूसरे स्थान प्रयागराज के प्रांजल सिंह का रहा है। उन्होंने 96 फीसदी अंकों के साथ टॉप किया है। तीसरे स्थान उत्कर्ष शुक्ला का रहा है जिन्होंने 94.80 फीसदी अंकों के साथ टॉप किया है। वो औरैया के रहने वाले हैं।


टॉपर्स को लैपटॉप और एक लाख रुपये की राशि
यूपी सरकार ने टॉपर्स को लैपटॉप देने की घोषणा की है। इसके अलावा दसवीं और बारहवीं कक्षा के टॉपर्स विद्यार्थियों को सरकार एक लाख रुपये की सहायता राशि भी देगी। 20 टॉपर्स के घर तक सरकार पक्की सड़क बनाएगी। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट अप्रैल महीने में जारी किया गया था। इस साल वैश्विक कोरोना महामारी की वजह से बोर्ड के परिणाम देरी से जारी हुए हैं। इस साल दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं 18 फरवरी में शुरू हुई थीं और 6 मार्च तक चली थी। कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए लॉकडाउन की घोषणा के चलते परीक्षाओं के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी हुई थी। जिसकी वजह से इस साल रिजल्ट की घोषणा में भी देरी हुई।


उत्तर प्रदेश बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट
upresults.nic.in
upmsp.edu.in 


कैसे देखें अपना 10वीं और 12वीं कक्षा का रिजल्ट
सबसे पहले विद्यार्थी यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in/ upmsp.edu.in है। 
यहां विद्यार्थियों को दसवीं और बारहवीं कक्षा के रिजल्ट का लिंक मिलेगा।
विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं कक्षा के रिजल्ट लिंक पर क्लिक करके अपना रोल नंबर और विवरण भरें।
विद्यार्थियों की तरफ से जानकारी भरते ही रिजल्ट खुल जाएगा।
अब विद्यार्थी अपना रिजल्ट डाउनलोड कर लें या फिर उसका प्रिंट ले लें।


गौरतलब है कि पिछले साल यूपी बोर्ड के दसवीं कक्षा का रिजल्ट 80.07 फीसदी रहा था। उससे पहले साल 2018 में दसवीं के परिणाम 75.16 फीसदी रहा था। जबकि साल 2017 में  81.18 फीसदी, 2016 में  87.66 फीसदी और  साल 2015 में दसवीं का परिणाम  83.74 फीसदी रहा था। वहीं, पिछले साल बारहवीं में 70.06 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे। साल 2018 में बारहवीं कक्षा में 72.43 फीसदी और साल 2017 में 82.62 फीसदी रिजल्ट रहा था। उससे पहले साल 2016 में बारहवीं कक्षा का रिजल्ट 87.99 फीसदी और 2015 में 88.83 फीसदी रहा था। 
 

यूपी बोर्ड : 99 साल में दूसरी बार घोषित होगा लखनऊ से परिणाम, जाने 2020 में पहली बार क्या हुआ

यूपी बोर्ड : 99 साल में दूसरी बार घोषित होगा लखनऊ से परिणाम, जाने 2020 में पहली बार क्या हुआ


99 साल के इतिहास में यह दूसरा अवसर होगा जबकि बोर्ड परीक्षा का परिणाम प्रयागराज की बजाय लखनऊ से जारी होगा। इससे पहले प्रयागराज से ही नतीजे जारी होते थे। अब से कुछ देर का इंतजार हैं और नतीजे 12 बजे ऑनलाइन जारी कर दिए जाएंगे।


इससे पहले बसपा सरकार में 2007 में हाईस्कूल परीक्षा का परिणाम लखनऊ से जारी किया गया था। हालांकि इंटर का रिजल्ट प्रयागराज से ही जारी हुआ था। उस समय संजय मोहन माध्यमिक शिक्षा निदेशक और बोर्ड के सभापति थे जबकि सचिव बासुदेव थे।


आपको बता दें कि इस बार कोरोना महामारी के कारण नतीजे जारी होने में देरी हो रही है। बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाएं कोरोना का संक्रमण फैलने से पहले क्रमश: 3 और 6 मार्च को समाप्त हो गई थी। कॉपी जांचने का काम 16 मार्च को शुरू हुआ था लेकिन कोरोना के कारण 18 मार्च से टालना पड़ा था। उसके बाद 5 मई से ग्रीन जोन और 12 मई से ऑरेंज जोन में मूल्यांकन शुरू होकर जून के पहले सप्ताह तक सभी जिलों में कॉपियां जांचने का काम पूरा हो गया। समय से रिजल्ट देने के लिए पहली बार यूपी बोर्ड ने अलग से पोर्टल बनाकर छात्र-छात्राओं के प्रैक्टिकल एवं लिखित परीक्षा समेत अन्य सूचनाओं को अपडेट किया। इससे एक तो बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों को रिजल्ट तैयार करवाने के लिए दूसरे राज्य नहीं जाना पड़ा और समय के अंदर रिजल्ट भी तैयार हो गया।


2020 में पहली बार क्या हुआ
- पांच जिलों में सिलाई वाली कॉपी से कराई गई परीक्षा
- 10वीं और 12वीं की कॉपियों की लाइनें चार अलग-अलग रंगों में थी
- इंटर में एक विषय में फेल छात्रों को कम्पार्टमेंट देकर पास होने का मौका
- इस बार ऑनलाइन लिए जाएंगे स्क्रूटनी के आवेदन
- छात्रों में तनाव दूर करने को टोल फ्री नंबर जारी किए गए
- सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए