DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label माध्यमिक शिक्षा. Show all posts
Showing posts with label माध्यमिक शिक्षा. Show all posts

Friday, May 14, 2021

यूपी बोर्ड में हाईस्कूल व इंटर के विद्यार्थी ले सकेंगे NCC, शासन ने हाईस्कूल में छह विषयों को वैकल्पिक रूप में किया मान्य

यूपी बोर्ड में हाईस्कूल व इंटर के विद्यार्थी ले सकेंगे NCC

शासन ने हाईस्कूल में छह विषयों को वैकल्पिक रूप में किया मान्य



प्रयागराज : प्रदेश में यूपी बोर्ड से संबंद्ध 27 हजार माध्यमिक कालेजों में पढ़न वाले छात्र-छात्रओं के लिए खुशखबरी है। अब वे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) की भी पढ़ाई कर सकेंगे। एनसीसी को वैकल्पिक विषय में शासन ने मान्य कर दिया गया है। ये विद्यार्थियों पर निर्भर है कि वे चाहें तो इस विषय की भी पढ़ाई कर सकते हैं। बोर्ड प्रशासन इसकी लिखित परीक्षा वर्ष 2023 से निरंतर कराएगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) में एनसीसी नया विषय नहीं है, बल्कि अभी तक इसकी पढ़ाई अतिरिक्त विषय के रूप में कराई जाती रही है। बोर्ड प्रशासन ने नौ फरवरी 2021 को एनसीसी को वैकल्पिक विषय के रूप में मान्य करने का प्रस्ताव भेजा था। शासन ने इस पर मंथन करने के बाद सात अप्रैल को आदेश कर दिया है। 


ऐसे में छात्र-छात्रएं इसी वर्ष से एनसीसी की हाईस्कूल व इंटर में वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाई कर सकते हैं। असल में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई में एनसीसी की पढ़ाई होती है, उसी तर्ज पर यूपी बोर्ड में पहले कोर्स तैयार किया गया और अब उसे वैकल्पिक विषय के रूप में मान्य किया गया है। इसकी लिखित परीक्षा 2023 से कराई जाएगी। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा संबंधित बटालियन स्तर पर होगी।


हाईस्कूल में छह विषय वैकल्पिक : शासन ने हाईस्कूल में सिर्फ एनसीसी ही नहीं छह विषयों को वैकल्पिक रूप में मान्य किया है। इनमें प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, आपदा प्रबंधन, सोलर सिस्टम रिपेयर, मोबाइल रिपेयर व एनसीसी शामिल हैं। यानी अब इस कक्षा के छात्र-छात्रएं हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान के साथ छह विषयों में एक कोई भी विषय चुन सकते हैं। यह कदम छात्र-छात्रओं की एनसीसी के प्रति ललक जगाने के लिए उठाया गया है।

इंटर में मानविकी वर्ग वालों को मौका

इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले विज्ञान व कामर्स वर्ग के छात्र-छात्रओं को एनसीसी पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। सिर्फ मानविकी यानी कला वर्ग के विद्यार्थी ही एनसीसी को वैकल्पिक विषय के रूप में चुन सकते हैं। इसके अलावा 17 अन्य विषय भी वैकल्पिक विषयों में शामिल हैं।

एलटी ग्रेड, प्रवक्ता शिक्षकों को वेतन जारी करने का निर्देश

एलटी ग्रेड, प्रवक्ता शिक्षकों को वेतन जारी करने का निर्देश


प्रयागराज । प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों (पुरुष, महिला) में नवनियुक्त एलटी ग्रेड एवं प्रवक्ता शिक्षकों को वेतन जारी करने का आदेश अपर निदेशक (राजकीय) ने दिया।

 प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में अपर शिक्षा निदेशक डॉ. अंजना गोयल ने कहा है कि इन शिक्षकों के मार्च एवं अग्रेतर माह के वेतन का भुगतान उनसे शपथ पत्र लेकर जारी कर दिया जाए। 


अपर निदेशक ने अपने पत्र में कहा है कि नवनियुक्त शिक्षकों को होली से पहले वेतन भुगतान का निर्देश अपर मुख्य सचिव माध्यमिक ने दिया था।

Monday, May 10, 2021

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत शासन के निर्देश के बाद प्रदेश के समस्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई तक पठन-पाठन बन्द करने सम्बंधी आदेश जारी

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत शासन के निर्देश के बाद प्रदेश के समस्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई तक पठन-पाठन बन्द करने सम्बंधी आदेश जारी


प्रयागराज : प्रदेश में सभी माध्यमिक कालेजों व उच्च शिक्षा संस्थानों को 20 मई तक बंद कर दिया गया है। उच्च शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने रविवार को ही कोरोना कर्फ्यू की समय सीमा बढ़ाते हुए इस संबंध में निर्देश दिए थे। माध्यमिक कालेजों व उच्च शिक्षा संस्थानों को पहले 15 मई तक बंद रखने के निर्देश थे, अब समय सीमा 20 मई तक बढ़ा दी गई है। 

इस दौरान कालेजों के परिसर में किसी भी शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी व अधिकारी की उपस्थिति नहीं रहेगी। साथ ही इस अवधि में ऑनलाइन परीक्षाएं व कक्षाएं भी स्थगित रहेंगी। ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं चलेंगी।


Saturday, May 8, 2021

कोरोना संक्रमण नियंत्रण में आने तक ऑनलाइन ही होगी पढ़ाई

कोरोना संक्रमण नियंत्रण में आने तक ऑनलाइन ही होगी पढ़ाई


लखनऊ। कोरोना संक्रमण नियंत्रण में आने तक बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ाई ऑनलाइन ही होगी। गर्मी की छुट्टी के बाद जुलाई से ऑनलाइन क्लासेज संचालित कराने की तैयारी है। फिलहाल ऑनलाइन कक्षाएं स्थगित चल रही हैं।

 
प्रदेश सरकार ने बेसिक स्कूलों स्कूलों में 20 और माध्यमिक स्कूलों में 15 मई तक शिक्षण कार्य बंद कर रखा है। 20 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू हो जाएंगी।


दोनों विभाग के अधिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिकों ने जिस प्रकार सितंबर तक कोरोना की तीसरी लहर आने और बच्चों के लिए अधिक घातक होने की जानकारी दी है, ऐसे में कक्षाओं का संचालन ऑनलाइन कराना ही उचित होगा। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने कहा कि शासन से निर्देश के बाद ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की जाएंगी।

UP बोर्ड परीक्षा पर अभी भी असमंजस की स्थिति

UP बोर्ड परीक्षा पर अभी भी असमंजस की स्थिति


 
माध्यमिक शिक्षा विभाग 20 मई तक स्थगित हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में है। विभाग के अधिकारी का कहना है कि संक्रमण की वर्तमान स्थिति में परीक्षा कराना संभव नहीं है। ऐसे में सीबीएसई की तर्ज पर हाई स्कूल की परीक्षा को रद्द कर इंटरमीडिएट परीक्षा ही आयोजित कराने का विचार है। 


विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार का कहना है कि ऐसा सुझाव आया है, लेकिन उस पर उप मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री से मार्गदर्शन लेने के बाद ही निर्णय किया जाएगा।

Wednesday, May 5, 2021

यूपी बोर्ड : परीक्षा तैयारियों पर कोरोना का ग्रहण

यूपी बोर्ड : परीक्षा तैयारियों पर कोरोना का ग्रहण



प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 भले ही स्थगित हैं लेकिन बोर्ड मुख्यालय व क्षेत्रीय कार्यालयों में तैयारियां अनवरत चलती हैं। इधर, कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ने का असर मुख्यालय व क्षेत्रीय कार्यालयों पर पड़ा है।






अफसर से लेकर कर्मचारी तक संक्रमण का शिकार हैं। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि बोर्ड के अधिकांश अधिकारी व कर्मचारियों की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी। आमतौर पर पंचायत चुनाव व अन्य निर्वाचन कार्य में यूपी बोर्ड प्रशासन नहीं लगाया जाता रहा है, क्योंकि बोर्ड में हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाओं की तैयारियां लगभग वर्ष भर चलती हैं।


 इस बार चुनिंदा अधिकारी व कर्मियों को छोड़कर अधिकांश को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई। चुनाव कराकर लौटने वाले संक्रमण का शिकार हैं या फिर घरों में आइसोलेट हैं। बोर्ड के एक उप सचिव का निधन भी हो चुका है, वहीं कई उप सचिव इन दिनों संक्रमण से जूझ रहे हैं। प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव कई दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं।

Tuesday, May 4, 2021

मांग : सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को भी मिले चिकित्सा सुविधा

मांग : सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को भी मिले चिकित्सा सुविधा



लखनऊ। उप्र. माध्यमिक शिक्षणेतर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को भी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की तरह चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग की है। 


प्रांतीय महामंत्री संतोष तिवारी ने बताया कि कोरोना से हर वर्ग प्रभावित है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों की सेवाएं, पदनाम और कार्य राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों के समान है। फिर भी उन्हें चिकित्सीय लाभ से बंचित किया जा रहा है।

Sunday, May 2, 2021

UP: उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूल 15 मई तक बंद, ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित

UP: उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूल 15 मई तक बंद, ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित


उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा परिषद के सभी स्कूल 15 मई तक बंद कर दिए गए हैं।

School Closed In UP कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्राथमिक स्कूलों के बाद अब उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूल भी 15 मई तक बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित रहेगी। शिक्षक छात्र व अन्य कर्मियों को स्कूल नहीं जाना होगा।


लखनऊ । कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्राथमिक स्कूलों के बाद अब उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्कूल भी 15 मई तक बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित रहेगी। शिक्षक, छात्र व अन्य कर्मियों को स्कूल नहीं जाना होगा। माध्यमिक शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को विभागीय कार्य घर से ही करना होगा। इन दिनों शिक्षक व कर्मचारियों को प्रशासनिक दायित्व मिलने पर पूरा करना होगा।

शासन ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए पहले माध्यमिक स्कूलों को 30 अप्रैल तक बंद करने का आदेश दिया था। 20 अप्रैल को जारी शासनादेश में निर्देश हुआ था कि शिक्षक वर्क फ्रॉम होम रहते हुए छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई कराएं। शासन ने अब माध्यमिक स्कूलों को 15 मई तक बंद करने का आदेश दिया है साथ ही इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित रहेगी। महामारी की वजह से शिक्षण कार्य बंद होने से शिक्षक व कर्मचारी विभागीय कार्य घर से ही पूरा करें। यह जरूर है कि जिला प्रशासन या फिर सक्षम प्राधिकारी की ओर से दिया गया प्रशासनिक कार्य करना होगा।

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं पर अभी कोई निर्णय नहीं

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं पर अभी कोई निर्णय नहीं



प्रयागराज : कोरोना संक्रमण निरंतर बढ़ने की वजह से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। जिस तरह के हालात हैं उसमें अभी किसी तरह का कार्यक्रम घोषित करने की भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि उपमुख्यमंत्री समेत विभागीय बड़े अफसर संक्रमण की चपेट में हैं साथ ही माध्यमिक कालेजों की ऑनलाइन पढ़ाई तक बंद है। इस माह परीक्षा कार्यक्रम घोषित नहीं होगा। संकेत है कि हालात में सुधार होने पर ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की परीक्षाएं पहले त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव और फिर कोरोना संक्रमण की वजह से स्थगित चल रही हैं। शासन ने 10वीं व 12वीं की परीक्षाओं के लिए दो बार परीक्षा कार्यक्रम जारी किया था। पहली बार परीक्षाएं 24 अप्रैल से और दूसरी बार आठ मई से होना प्रस्तावित थी। हाईकोर्ट के आदेश पर पंचायत चुनाव की तारीखें घोषित होने व दूसरी बार कोविड-19 का प्रकोप बढ़ने से परीक्षाओं को स्थगित किया गया। 


उपमुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने अप्रैल माह में कहा था कि परीक्षाओं के संबंध में मई के पहले सप्ताह में बैठक करके निर्णय लिया जाएगा। इसी बीच माध्यमिक शिक्षा के अफसर व मंत्री तक संक्रमण की गिरफ्त में आ गए, ऐसे में बैठक अभी नहीं हो रही है। कहा जा रहा है कि हालात सुधरने पर मुख्यमंत्री इस संबंध में फैसला करेंगे। परीक्षाएं अब जून के अंत या फिर जुलाई में ही संभावित हैं।


ज्ञात हो कि सीबीएसई व आइसीएसई बोर्ड भी परीक्षाएं स्थगित कर चुका है। सीबीएसई ने तो हाईस्कूल की परीक्षा रद कर दी है और इंटर की परीक्षाओं पर जून में निर्णय होगा। परीक्षार्थी सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड से भी निर्णय की उम्मीद लगाए थे लेकिन, दोनों का परीक्षा ढांचा अलग होने से एक जैसे निर्णय की उम्मीद नहीं है, बल्कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं देर से ही सही होने की उम्मीद है।

Thursday, April 29, 2021

UP Board Exam : यूपी बोर्ड के सचिव का ऑनलाइन संवाद, मूल्यांकन में नरमी बरतें, पूरी कॉपी को जरूर पढ़ें शिक्षक

UP Board Exam : यूपी बोर्ड के सचिव का ऑनलाइन संवाद,  मूल्यांकन में नरमी बरतें, पूरी कॉपी को जरूर पढ़ें शिक्षक


यूपी बोर्ड के सचिव ने प्रदेश के सभी जिलों के प्रधानाचार्यों विषय-विशेषज्ञों और डीआइओएस से संवाद में मूल्यांकन को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए। इसके साथ ही परीक्षार्थियों के हित में अभी से निर्णय लेने की बात कही है।


कानपुर  ।  कोरोना महामारी के बीच यह कोशिश होनी चाहिए कि, मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों के साथ नरमी रखें। हिंदी का विशेष ध्यान रखते हुए, अगर परीक्षार्थी ने वर्तनी की कोई गलती नहीं की तो उसे अंक दें। पिछले वर्ष हिंदी में फेल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। इसलिए इस सत्र में सावधानी के साथ मूल्यांकन करें। यूूपी बोर्ड सचिव डॉ.दिव्यकांत शुक्ला ने यह चर्चा, प्रदेश के हर जिले के प्रधानाचार्यों, विषय- विशेषज्ञों व डीआइओएस से की।


दरअसल, कुछ दिनों पहले यूपी बोर्ड परीक्षा की स्कीम जारी हो गई थी। आठ मई से परीक्षाएं शुरू होनी थीं। हालांकि अचानक से कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ा और परीक्षाएं टाल दी गईं। अब परीक्षाओं पर 20 मई के बाद फैसला होगा। अगर परीक्षाएं होंगी तो मूल्यांकन भी होगा। कोरोन महामारी की इस दूसरी लहर में मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों के हित में काफी हद तक फैसला लेने की हिदायत शिक्षकों को अभी से दी गई है।


यूपी बोर्ड सचिव के साथ मूल्यांकन को लेकर हुए ऑनलाइन संवाद में शामिल हुए चाचा नेहरू इंटर कॉलेज गोविंद नगर के प्रधानाचार्य डॉ.अनवेश सिंह ने बताया कि इस सत्र में मूल्यांकन के दौरान यह भी जानकारी दी गई, कि परीक्षार्थी की पूरी कॉपी को पढ़ना है। ऐसा न हो, कि पहले पेज पर ही भद्दा लेखन देखकर उसे शून्य अंक दे दिए जाएं। उन्होंने कहा, कि इस सत्र के मूल्यांकन में परीक्षकों को बहुत अधिक सावधानी के साथ कॉपियां जांचनी होंगी और परीक्षार्थी के प्रति नरम व्यवहार रखते हुए मूल्यांकन कार्य करना होगा।

Friday, April 23, 2021

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन माध्यम से वर्क फ्रॉम होम आदेश जारी, ई लर्निंग / डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराने का निर्देश

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन माध्यम से वर्क फ्रॉम होम आदेश जारी, ई लर्निंग / डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कराने का निर्देश

माध्यमिक कालेजों में छात्र-छात्राओं की ई-लर्निग से पढ़ाई


 लखनऊ : प्रदेश के माध्यमिक कालेजों में छात्र-छात्रओं की पढ़ाई अब ई-लर्निग के माध्यम से शुरू होगी। कोरोना संक्रमण की विकट स्थिति को देखते हुए यह आदेश दिया गया है। शिक्षक अपने घर से ही वर्क फ्राम होम प्रणाली के तहत पठन-पाठन कराएंगे। सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, उप शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने का निर्देश दिया गया है।



शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से संयुक्त शिक्षा निदेशक शिविर कार्यालय भगवती सिंह ने भेजे आदेश में लिखा है कि शासन ने डिजिटल माध्यम से पठन-पाठन कराने के लिए 20 अप्रैल को ही निर्देश जारी किया है। यह कदम कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण, छात्र हित व सुरक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। शिक्षकों को ऑनलाइन पठन-पाठन कार्य अधिक से अधिक कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं इसलिए सारी व्यवस्थाएं जल्द दुरुस्त की जाएं। इसके लिए डीआइओएस को जिले में संचालित सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य का वाट्सएप ग्रुप बनाया जाए। इसी तरह से प्रधानाचार्य सभी शिक्षकों का ग्रुप तैयार करेंगे। वहीं, अध्यापक छात्रों का कक्षावार व विषयवार ग्रुप बनाएंगे। ऑनलाइन कक्षाओं के लिए स्वयंप्रभा चैनल, ई-ज्ञानगंगा व अन्य माध्यमों से व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।


Friday, April 16, 2021

यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों को प्रमोट करने का आधार नहीं तो इसके आसार भी नहीं

यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों को प्रमोट करने का आधार नहीं तो  आसार भी नहीं


 लखनऊ: यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों को प्रमोट करने के आसार नहीं हैं। बोर्ड प्रशासन इस पर मंथन जरूर कर रहा है, लेकिन उसे फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं मिल रहा जिस पर वह छात्र-छात्रओं को अगली कक्षा में प्रोन्नत कर सके।


ज्ञात हो कि बुधवार को सीबीएसई ने चार मई से होने वाली हाईस्कूल व इंटर परीक्षाओं के संबंध में बड़ा निर्णय लिया। हाईस्कूल की परीक्षा रद हो गई, उनके परीक्षार्थी अगली कक्षा में प्रमोट होंगे। वहीं, इंटर के संबंध में एक जून को निर्णय लिया जाएगा। भले ही इन दिनों सीबीएसई व यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लगभग समान हो गया है लेकिन, दोनों की परीक्षा प्रणाली में बड़ा अंतर है। 


सीबीएसई में जहां मासिक टेस्ट के अलावा छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन है। इससे केंद्रीय बोर्ड छात्र-छात्रओं के प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल में प्रमोट आसानी से कर सकता है। इसके उलट यूपी बोर्ड में कक्षा नौ तक का रिकॉर्ड बोर्ड मुख्यालय पर नहीं भेजा जाता, मासिक टेस्ट होते नहीं और छमाही का रिजल्ट भी सभी स्कूल नहीं देते। इधर प्री बोर्ड यानी हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से पहले स्कूल स्तर की परीक्षा कराने पर जोर दिया गया। इस बार फरवरी में इम्तिहान हुए भी हैं लेकिन, उसका रिकॉर्ड भी बोर्ड के पास नहीं है। 


यूपी बोर्ड में अधिकांश कालेज वित्तविहीन हैं, जबकि राजकीय व अशासकीय कालेज एक तिहाई ही हैं। अब यदि बोर्ड जिलों से नौवीं और प्री बोर्ड का रिकॉर्ड मांगे तो स्थिति असहज हो सकती है। सीबीएसई के निर्णय के बाद से इस ओर मंथन जरूर हुआ, लेकिन प्रमोट करने का निर्णय का आधार नहीं मिल रहा।

Thursday, April 15, 2021

UP Board 10th 12th Exam 2021 : यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं भी 20 मई तक स्थगित

UP Board 10th 12th Exam 2021 : यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं भी 20 मई तक स्थगित


UP Board 10th 12th Exam 2021: कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षाएं 20 मई तक स्थगित कर दी हैं। यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं भी 15 मई तक टाल दी गई हैं। रुहेलखण्ड यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में फैसला लिया गया है।



इससे पहले उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बुधवार को कहा था कि यूपी बोर्ड की तारीखों पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना पीक का आकलन समय-समय पर किया जा रहा है। हमारे 19 अधिकारी जो बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित हैं, इनमें से 17 अधिकारी संक्रमित हैं। 


हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं एक साथ 8 मई से शुरू होनी थीं। 10वीं की परीक्षा 12 कार्य दिवसों में सम्पन्न होकर 25 मई को समाप्त होनी थी जबकि 12वीं की परीक्षा 15 कार्य दिवसों में सम्पन्न होकर 28 मई को समाप्त होनी थी। लेकिन अब बोर्ड हालात की समीक्षा करने के बाद नया टाइम टेबल जारी करेगा।

■ 2021 की परीक्षा के लिए पंजीकृत छात्र छात्राएं
★ हाईस्कूल 
● 1674022 बालक
● 1320290 बालिकाएं
● योग 2994312 

★ इंटरमीडिएट
● 1473771 बालक
● 1135730 बालिकाएं
● योग - 2609501

महायोग: 5603813


यूपी बोर्ड से पहले सीबीएसई, छत्‍तीसगढ़ बोर्ड, पंजाब बोर्ड, राजस्थान बोर्ड, महाराष्ट्र बोर्ड, एमपी बोर्ड भी कोरोना के कारण अपनी परीक्षाएं स्थगित कर चुके हैं। सीबीएसई ने 10वीं की परीक्षा रद्द कर इंटरनल असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट निकालने का फैसला किया है।

Wednesday, April 14, 2021

यूपी बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को कोरोना वैक्सीन लगाये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी

यूपी बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को कोरोना वैक्सीन लगाये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी

यूपी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने वालों को प्राथमिकता पर लगेगी वैक्सीन


कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण सीबीएसई ने भले ही अपनी परीक्षाएं टाल दी हैं लेकिन यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारियां बदस्तूर चल रही है। हालांकि परीक्षा में शामिल हो रहे 56 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए शासन ने शिक्षकों व कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगवाने के आदेश दिए हैं।


विशेष सचिव शासन उदयभानु त्रिपाठी ने सभी डीएम, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, सचिव यूपी बोर्ड, संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को मंगलवार को आदेश भेजा है कि बोर्ड परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले एवं आयु के अनुसार वैक्सीनेशन के लिए पात्र शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को टीकाकरण उत्सव के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन लगवाई जाए।


सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि शासन से आदेश मिले हैं, उसके अनुपालन में परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों को टीका लगवाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के अफसरों को इस संबंध में आदेश भेजे जा रहे हैं।


Monday, April 12, 2021

UP Board Exam 2021: परीक्षा से पहले यूपी बोर्ड का तोहफा, नंबर देने में नहीं होगी कंजूसी, स्टेप मार्किंग के जरिये मिलेंगे उदारता से नम्बर

UP Board Exam 2021: परीक्षा से पहले यूपी बोर्ड का तोहफा, नंबर देने में नहीं होगी कंजूसी, स्टेप मार्किंग के जरिये मिलेंगे उदारता से नम्बर

मेहनत का मिलेगा पूरा फल, स्टैप मार्किंग पर रहेगा जोर


UP Board Exam 2021 विद्यार्थियों को एक और राहत देने की तैयारी। मेहनत का मिलेगा पूरा फल स्टैप मार्किंग पर रहेगा जोर। बोर्ड इसके लिए सीबीएसई के प्रशिक्षकों से जिले के मूल्यांकन केंद्र उप नियंत्रकों को आनलाइन मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण दिला चुका है


आगरा । कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ इसका खौफ भी लगातार बढ़ रहा है। वहीं पंचायत चुनाव के कारण उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा पहले ही टल चुकी है, जो अब आठ मई से शुरू होगी। बोर्ड ने इसका संशोधित कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने विद्यार्थियों को एक और राहत देते हुए उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में उदारता बरतते हुए नंबर देने की अपील परीक्षकों से की है।


बोर्ड इसके लिए सीबीएसई के प्रशिक्षकों से जिले के मूल्यांकन केंद्र उप नियंत्रकों को आनलाइन मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण दिला चुका है, जो अन्य प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षित करेंगे, ताकी प्रधानाचार्य अपने शिक्षकों को समय से प्रशिक्षित कर लें। ऐसे में बोर्ड ने दोबारा बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच परीक्षकों से अपील की है कि वह इस बार उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के पुराने ढर्रे को बदलकर विद्यार्थियों को उदारता के साथ अंक देने की सोच मन में रखें।


प्रशिक्षण में विशेषज्ञ प्रधानाचार्यों को निर्देश मिले हैं कि अन्य बोर्ड के विद्यार्थी हिंदी जैसे विषय में 90, 95 और 100 तक अंक पाते हैं। जबकि यूपी बोर्ड के विद्यार्थी हिंदी भाषी क्षेत्र से होने पर भी मुश्किल 60 अंक ही ला पाते हैं। ऐसे में उनकी उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन में विशेष ध्यान दिया जाए, ताकी उनका अंक फीसद न प्रभावित हो।


● - अंक देने में परीक्षक उदारता बरतें।

● - स्टेप मार्किंग पर ध्यान दें।

● - उत्तर देखकर विद्यार्थी के बौद्धिक स्तर का आंकलन कर अंक दें।

● - छोटे उत्तर में यदि सभी तथ्य समाहित हैं, तो उस पर गौर करें।

● - उत्तर पुस्तिका व अवार्ड ब्लैंक में अंकों की भिन्नता न हो।

● - उपप्रधान परीक्षक खासतौर से उत्तर पुस्तिका व अवार्ड ब्लैंक की रेंडम जांच करें।

● - कुल अंकों का मूल्यांकन करने के बाद एक बार मिलान जरूर करें।

● - अंकों में ओवरराइटिंग से बचें, पूर्णांक के अनुसार ही अंक दें।

यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार मुश्किल हालात को देखते हुए स्टैप मार्किंग के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए मूल्यांकन केंद्रों को निर्देश दिए जाएंगे।

Sunday, April 11, 2021

उत्तर प्रदेश : कक्षा 01 से 12वीं तक के सभी सरकारी / गैर सरकारी विद्यालयों में 30 अप्रैल तक पठन-पाठन स्थगित

प्रदेश में कक्षा 01 से 12वीं तक के सभी सरकारी / गैर सरकारी विद्यालयों में 30 अप्रैल तक पठन-पाठन स्थगित



प्रदेश में कक्षा 01 से 12वीं तक के सभी सरकारी / गैर सरकारी विद्यालयों में 30 अप्रैल तक पठन-पाठन स्थगित रखा जाए। कोचिंग सेंटर भी बंद रहें।  इस अवधि में पूर्व निर्धारित परीक्षाएं हो सकती हैं और आवश्यकता के अनुरूप शिक्षक व अन्य स्टाफ आ सकते हैं।





यूपी में स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग संस्थान भी 30 अप्रैल तक बंद
 

लखनऊ: खतरनाक स्तर पर पहुंचे चुके कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार धीरे-धीरे पाबंदियों को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। लगातार संक्रमण के मामले बढ़ते देख कक्षा एक से बारहवीं तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल व कोचिंग सेंटर तीस अप्रैल तक बंद करने का निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिया है। साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए बंद स्थान पर अधिकतम पचास और खुले पर सौ व्यक्तियों को अनुमति की नई व्यवस्था बना दी गई है।

मुख्यमंत्री ने रविवार को कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ जारी इस जंग में पिछले वर्ष प्रदेश के सभी जिलों ने कोविड प्रबंधन का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया था। टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट को ध्यान में रखते हुए प्रभावी प्रयास किए जाएं। आरटीपीसीआर विधि से प्रतिदिन एक लाख टेस्ट किए जाएं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हुए कम से कम 30 से 35 लोगों को ट्रेस करते हुए उनकी जांच कराएं।

 मुख्यमंत्री ने लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी और प्रयागराज में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने पर जोर दिया। कहा कि लखनऊ के एरा मेडिकल कालेज, टीएस मिश्र मेडिकल कालेज और इंटीग्रल को डेडीकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में चलाएं। प्रत्येक कोविड हॉस्पिटल में कम से कम 700 बेड उपलब्ध रहें। 




शासन ने मांगी यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यों की रिपोर्ट

शासन ने मांगी यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यों की रिपोर्ट


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा से संबंधित कार्यों के अनुश्रवण की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। निरीक्षण के दौरान मिलने वाली खामियों का निस्तारण करने के बाद यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण के लिए विभिन्न जिलों में अधिकारियों को नामित किया गया है।


प्रयागराज में निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण के लिए अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय), शिक्षा निदेशालय प्रयागराज अंजना गोयल को नामित किया गया है। वहीं, फतेहपुर और प्रतापगढ़ के लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद दिव्यकांत शुक्ल को नामित किया गया है। इनके अलावा रायबरेली, सुल्तानपुर, सीतापुर, वाराणसी, बहराइच, चंदौली एवं जौनपुर, बलिया, बिजनौर, बलरामपुर, बदायूं एवं शाहजहांपुर, जालौन एवं झांसी, संतकबीरनगर, लखनऊ, हरदोई के लिए भी अफसरों को नामित किया गया है।


अपर मुख्य सचिव अनिल कुमार की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बोर्ड परीक्षाओं के नकलविहीन आयोजन और परीक्षाओं की शुचिता, विश्वसनीयता एवं विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए परीक्षा कार्यों के अनुश्रवण की जिम्मेदारी अफसरों को सौंपी गई है। निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण की रिपोर्ट संबंधित लिंक पर अपलोड करनी होगी। इनमें निरीक्षणकर्ता अधिकारियों की ओर से खामियां इंगित की जाएंगी, जिनका निराकरण अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक और सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद का करना है। साथ ही 17 अप्रैल तक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करानी है।

Friday, April 9, 2021

पूर्व बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने आय से अधिक मामले में दर्ज किया केस

पूर्व बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने आय से अधिक मामले में दर्ज किया केस


🔴 समाजवादी सरकार में बड़ा था वासुदेव यादव का रुतबा

🔵 एक समय में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के बनाये गए थे निदेशक

🔴 दो दो विभागों के निदेशक बनाये जाने पर हाईकोर्ट ने भी उठाए गए थे सवाल

🔵 विजिलेंस ने भ्रष्टाचार से संपत्ति जुटाने के साक्ष्य एकत्र किये

🔴 आय से अधिक खर्च करने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद केस दर्ज

FIR Against Samajwadi Party MLC पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी में शामिल समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विवेचना शुरू की जा रही है।


बड़ा था वासुदेव यादव का रुतबा: वासुदेव यादव अखिलेश सरकार में बेहद रसूखदार थे। सपा सरकार में उनके प्रभाव का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग में निदेशक स्तर के अन्य अफसरों के रहते हुए भी उन्हेंं माध्यमिक शिक्षा के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक की कुर्सी भी सौंप दी गई थी। इतना ही नहीं, अखिलेश सरकार के सत्तारूढ़ होते ही उनके खिलाफ चल रहीं तमाम जांचें एक-एक कर खत्म कर दी गईं और उन्हेंं माध्यमिक शिक्षा निदेशक बनाया गया। इसके कुछ दिनों बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश चंद्र कनौजिया को हटाकर वासुदेव को इस कुर्सी पर भी बैठा दिया गया। 


उन्हेंं दो विभागों का निदेशक बनाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी सरकार से सवाल किया था और फिर उन्हेंं इनमें से एक पद से हटाने के लिए कहा था लेकिन वह दोनों कुॢसयों पर बने रहे। अखिलेश सरकार में उनकी पहुंच का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हेंं सेवा विस्तार देने के प्रस्ताव से असहमति जताने पर तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार को वर्ष 2014 में सरकार ने निलंबित कर दिया था। उनके इस निलंबन की वजह लैपटॉप वितरण में लापरवाही बताई गई थी। 


लखनऊ। प्रदेश के शिक्षा निदेशक रहे समाजवादी पार्टी से विधान परिषद के सदस्य वासुदेव यादव अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस गए हैं। उनके खिलाफ सर्तकता विभाग ने गुरुवार को केस दर्ज कर लिया है। विजिलेंस की जांच में फंसे वासुदेव यादव शिक्षा निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल में भी बेहद चर्चित रहे थे।


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी में शामिल समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विवेचना शुरू की जा रही है। इससे पहले खुली जांच में विजिलेंस की टीम ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से संपत्ति जुटाने के साक्ष्य एकत्र किए थे। अब शासन की अनुमति लेकर जांच एजेंसी ने अपने कदम को आगे बढ़ाते हुए केस दर्ज किया है।


समाजवादी पार्टी से एमएलसी व पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के विरुद्ध सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बीते महीने जांच में आय से अधिक संपत्ति प्राप्त की थी। मिली है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजिलेंस विभाग की सिफारिश पर वासुदेव यादव के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने की अनुमति दे दी थी। प्रदेश में सूबे में भाजपा की सरकार के गठन के बाद पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार की कई शिकायतें सामने आई थीं। शासन ने 12 सितंबर 2017 को वासुदेव यादव की संपत्तियों की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने उनके विरुद्ध खुली जांच की, जिसमें एक सितंबर 1978 से 31 मार्च 2014 के बीच वासुदेव यादव की आय के साथ खर्च तथा अॢजत की गईं चल-अचल संपत्तियों की पड़ताल की।


विजिलेंस जांच में सामने आया कि इस अवधि के दौरान वासुदेव यादव की कुल आय करीब 89.42 लाख रुपये थी, जबकि उन्होंने 1.86 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अॢजत कीं। इस जांच में कुल आय से दो गुना से भी अधिक खर्च करने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद विजिलेंस ने उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। उनकी कई अन्य बेनामी संपत्तियों की जानकारियां भी सामने आई हैं। इसके शासन ने न्याय विभाग से विधिक सलाह लेने के बाद एमएलसी वासुदेव के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की अनुमति प्रदान की।

Thursday, April 8, 2021

राजकीय माध्यमिक विद्यालय इंटर कॉलेजों में बायोमेट्रिक ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में

राजकीय माध्यमिक विद्यालय इंटर कॉलेजों में बायोमेट्रिक ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में।

राजकीय माध्यमिक शिक्षकों को राइट टाइम करने की तैयारी, बायोमैट्रिक से लगेगी हाजिरी

इंटर कालेजों में बायोमेट्रिक ऐप से होगी हाजिरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के बाद अब राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों की भी स्कूलों में उपस्थिति पर राज्य सरकार सख्ती करने की तैयारी कर रही है। अब इन स्कूलों में भी बायोमीट्रिक ऐप के माध्यम से हाजिरी ली जाएगी। विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से स्कूलों का ब्योरा मंगवाया है।

 इसके लिए अपर शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई गई है। सरकारी प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में राज्य सरकार इस सत्र से टैबलेट के माध्यम से बायोमीट्रिक हाजिरी लेगी। प्रदेश के कुछ माध्यमिक के स्कूलों में उत्साही कारण बायोमीट्रिक हाजिरी का प्राविधान लागू किया गया है लेकिन यह नियम अभी माध्यमिक शिक्षा में अनिवार्य रूप से लागू नहीं है। 

शिक्षकों की स्कूलों में उपस्थिति प्रदेश में बड़ा मुद्दा रही है और प्रॉक्सी शिक्षकों का मुद्दा मुख्यमंत्री खुद कई मंचों से उठा चुके हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों से पूछा है कि उनके यहां कितने स्कूल प्रधानायापकों या डीआईओएस के हैं और कहां- कहां बायोमीट्रिक सिस्टम लगा है और काम कर रहा है या नहीं। इसके लिए बनी कमेटी जल्द ही शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। माध्यमिक राजकीय विद्यालयों में बायोमीट्रिक मशीन से हाजिरी लगाने की यह कवायद पहले भी हो चुकी है लेकिन शिक्षक संगठनों के विरोध के कारण इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया।

 सरकारी प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में इस सत्र से टैबलेट के माध्यम से हाजिरी ली जाएगी। इसमें स्कूल आने व जाने के समय शिक्षकों को अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी वहीं विद्यार्थियों की हाजिरी भी निश्चित समय अंतराल पर ली जाएगी।


 सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कालेजों में शिक्षकों को राइट टाइम करने की कवायद शासन ने शुरू कर दी है। इसके लिए उनकी उपस्थिति बायोमैट्रिक मशीन से लगाने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल शासन ने इस संबंध में जिले से वर्तमान स्थिति की सूचना मांगी है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस कवायद की शुरुआत करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक से दो दिन में जानकारी मांगी गई है कि कितने विद्यालयों में बायोमैट्रिक की व्यवस्था है। अपर शिक्षा निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजा है। उन्होंने जानकारी मांगी है कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कालेजों में शिक्षकों की उपस्थिति बायोमैट्रिक एप के माध्यम से सुनिश्चित कराई जाए। इसके लिए प्रदेश स्तर पर अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।

समिति ने मांगी रिपोर्ट
समिति ने जिला विद्यालय निरीक्षक से सूचना मांगी है कि जिले में कितने राजकीय विद्यालय संचालित हैं, उनमें से कितने विद्यालयों में बायोमैट्रिक मशीनें लगी हैं और कितने विद्यालयों में बायोमैट्रिक मशीन पर शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। साथ ही कितने विद्यालयों में बायोमैट्रिक मशीन स्थापित नहीं है और उसे स्थापित न करने का कारण क्या है?

Tuesday, April 6, 2021

यूपी बोर्ड नई तकनीक के साथ कर रहा कदमताल, कॉलेजों को ऑनलाइन मान्यता देने की प्रक्रिया जल्द

यूपी बोर्ड नई तकनीक के साथ कर रहा कदमताल, कॉलेजों को ऑनलाइन मान्यता देने की प्रक्रिया जल्द


प्रयागराज : यूपी बोर्ड लगातार नई तकनीक के साथ कदमताल कर रहा है। नए कालेजों को कक्षा 9 से 12वीं तक की मान्यता देने की प्रक्रिया में इस बार बदलाव हो रहा है। अब वेबसाइट पर ही कालेजों के संबंध में आपत्तियां ली जाएंगी और उसी पर संबंधित विभागों को निस्तारण भी करना होगा। इसके लिए वेबसाइट में बदलाव किया जा रहा है, इसीलिए आवेदन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसी माह से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) में नए कालेजों को मान्यता देने के लिए ऑनलाइन आवेदन इधर कई वर्ष से लिए जा रहे हैं। साथ ही बोर्ड की वेबसाइट पर मान्यता पाने वाले कालेजों की सूची का प्रकाशन भी होता रहा है लेकिन, संबंधित कालेजों के संबंध में मिलने वाली आपत्तियां व उनका निस्तारण पिछले वर्ष तक ऑफलाइन ही होता रहा है। शासन को गड़बड़ियों की शिकायतें भी मिलीं, इसे देखते हुए निर्णय लिया गया कि इस प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी कर दिया जाए। आवेदन वाली वेबसाइट पर ही आपत्तियां प्रदर्शित होंगी और सभी विभाग कालेजों के संबंध में मिली आपत्तियों का निस्तारण भी ऑनलाइन करेंगे। बदलाव का जिम्मा बोर्ड प्रशासन व एनआइसी को दिया है, दोनों इन दिनों वेबसाइट में संशोधन कर रहे हैं।


बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इसी माह से बदली व्यवस्था के तहत ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे, साथ ही मान्यता देने की नई समय सारिणी जारी की जाएगी।