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Saturday, March 6, 2021

एडेड माध्यमिक स्कूलों में अब जल्द विनियमित होंगे तदर्थ शिक्षक

एडेड माध्यमिक स्कूलों में अब जल्द विनियमित होंगे तदर्थ शिक्षक



लखनऊ : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में वर्ष 2000 से पूर्व भर्ती 550 तदर्थ शिक्षकों को जल्द विनियमित किया जाएगा। करीब 21 वर्षो से नियमित होने की राह देख रहे इन शिक्षकों को जल्द तोहफा मिलेगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इनके विनियमितीकरण का खाका तैयार कर लिया है। दूसरी ओर वर्ष 2000 के बाद आए तदर्थ शिक्षकों को भर्ती परीक्षा में अलग से वेटेज देकर राहत दी जाएगी। एडेड माध्यमिक स्कूलों में पढ़ा रहे इन 550 तदर्थ शिक्षकों को राहत देने के लिए सूची तैयार की जा रही है।

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक 2021 के विरोध में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) का हल्ला बोल

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक 2021 के विरोध में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) का हल्ला बोल

शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों के मूल अधिकारों को खत्म करने की चाल है शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक, बेसिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी होंगे प्रभावित



प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा अधिकरण विधेयक 2021 के विरोध में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) लामबंद हो गया है। शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। विधेयक तथा अधिकरण को वापस लेने की मांग संबंधी ज्ञापन डीएम के माध्यम से सीएम को भेजा।


इस मौके पर ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने कहा कि अधिकरण विधेयक उत्तर प्रदेश के प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा के शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों के लिए डेथ वारंट है। इस विधेयक से सेवा विवाद संबंधी मामलों में शिक्षकों के उच्च न्यायालय में जाने पर रोक लगाई जा रही है। यहां तक कि अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील में भी उच्च न्यायालय जाने पर रोक लगाई जा रही है। शिक्षकों तथा शिक्षणोत्तर कर्मचारियों के मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा है। इस मौके पर संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार शुक्ल, डॉ. देवी शरण त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

Friday, March 5, 2021

राजकीय माध्यमिक शिक्षकों को पदस्थापन आदेश का इंतजार, प्रधानाचार्य पद के लिए छह माह पहले हुई थी डीपीसी

राजकीय माध्यमिक शिक्षकों को पदस्थापन आदेश का इंतजार, प्रधानाचार्य पद के लिए छह माह पहले हुई थी डीपीसी


प्रयागराज : प्रदेश के राजकीय माध्यमिक कॉलेजों में तैनात शिक्षकों को पदोन्नत पद दिए जाने के लिए उनसे कॉलेजों का विकल्प लिया जा रहा है। इसमें पुरुष संवर्ग की तैनाती होनी है, जबकि महिला संवर्ग की पदोन्नति भी छह माह पहले हो चुकी है और पदस्थापन के लिए विकल्प भी मांगा गया। लेकिन, अब तक आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे शिक्षिकाओं में नाराजगी है। निदेशालय की ओर से कहा गया है कि प्रकरण माध्यमिक शिक्षा निदेशक स्तर पर लंबित है, जल्द ही आदेश जारी होगा।


राजकीय माध्यमिक कॉलेजों में तैनात शिक्षिकाओं का प्रधानाध्यापक पद के लिए लगभग छह माह पहले विभागीय पदोन्नति कमेटी की बैठक हुई थी, इसमें अर्ह शिक्षिकाओं को पदोन्नत करके उनसे लगभग दो माह पहले पदस्थापन के लिए कॉलेजों का विकल्प मांगा गया था। अब तक महिला संवर्ग का पदस्थापन आदेश नहीं हुआ। शिक्षिकाएं इसकी राह देख रही हैं। अब पुरुष संवर्ग से विकल्प मांगने पर उनमें नाराजगी भी है।

इसी तरह से एलटी (पुरुष संवर्ग) से प्रवक्ता के लिए पदोन्नति अब तक नहीं हो पायी है। इसको लेकर एलटी (पुरुष संवर्ग) के शिक्षकों में नाराजगी है। ऐसे ही एलटी (महिला) की प्रवक्ता के लिए हंिदूी सहित कई विषयों की डीपीसी होनी है। शिक्षा निदेशालय की ओर से कहा गया है कि शिक्षिकाओं से लिए विकल्प को निदेशक माध्यमिक शिक्षा से अनुमोदन को भेजा है वहां जल्द आदेश निर्गत हो सकते हैं। साथ ही एलटी ग्रेड शिक्षकों को पदोन्नति दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग से संपर्क बना है। तारीख तय होते ही प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

शिक्षक विधायकों पर वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दे न उठाने का आरोप, सरकार पर राहत पैकेज पर निर्णय न लेने पर जताई नाराजगी

शिक्षक विधायकों पर वित्तविहीन शिक्षकों के मुद्दे न उठाने का आरोप,  सरकार पर राहत पैकेज पर निर्णय न लेने पर जताई नाराजगी


वित्तविहीन॒ शिक्षक महासभा ने विधान परिषद में वित्तविहीन शिक्षकों की नुमाइंदगी करने वाले विधायकों पर सदन में शिक्षकों की समस्याएं नहीं उठाने का आरोप लगाया है। महासभा के देवीपाटन मंडल अध्यक्ष दिनेश मिश्रा ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद प्रदेश के साढ़े तीन लाख वित्तविहीन शिक्षक भूखमरी के कगार से गुजर रहे हैं। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 


उन्होंने कहा कि सरकार ने विधान परिषद चुनाव से पहले वित्तविहीन शिक्षकों को राहत पैकेज देने पर विचार का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। हमेशा बजट से पहले वित्तविहीन शिक्षकों की मांग सरकार के समक्ष रखी जाती है, लेकिन इस बार शिक्षक विधायकों ने ऐसा नहीं किया। 


उन्होंने मांग की कि सरकार को वित्तविह़ीन शिक्षकों की सेवा नियमाबली बनाकर उन्हें मुख्य धारा से जोड़े। वित्तविहीन शिक्षकों के मतों से विधायक बने शिक्षक नेता अब सरकार की गोद में बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर वित्तविहीन शिक्षकों का संघर्ष जारी रहेगा।

Thursday, March 4, 2021

बोर्ड परीक्षा तक माध्यमिक शिक्षकों के तबादले पर रोक

बोर्ड परीक्षा तक माध्यमिक शिक्षकों के तबादले पर रोक


लखनऊ : उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बुधवार को विधान परिषद में बताया कि यूपी बोर्ड परीक्षा होने तक राजकीय और अशासकीय सहायताप्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगी रहेगी। प्रदेश के आठ महत्वाकांक्षी जिलों में शिक्षकों की कमी के मद्देनजर रोक जारी रहेगी।


शिक्षक दल के सुरेश कुमार त्रिपाठी और ध्रुव कुमार त्रिपाठी की ओर से माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण के विषय में जारी शासनादेश में संशोधन की मांग पर वह सदन में जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के एकल स्थानांतरण के कारण पद रिक्त हो जाता है और बच्चों की पढ़ाई के लिए वहां दूसरा अध्यापक नहीं मिलता है। इससे पढ़ाई बाधित होती है। इसलिए यह व्यवस्था की गई है कि यदि विद्यालय में छात्रों को पढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था है, तभी ट्रांसफर किया जाएगा।

पदोन्नति की धीमी गति से नाराज हैं माध्यमिक शिक्षक

पदोन्नति की धीमी गति से नाराज हैं माध्यमिक शिक्षक 


लखनऊ। उत्तर प्रदेश राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पारसनाथ पांडेय ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों (एलटी ग्रेड) और प्रवकताओं को समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से शिक्षकों में नाराजगी है।


 पांडेय ने कहा कि प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता संवर्ग में 50 प्रतिशत पद लोक सेवा आयोग के जरिये और 50 प्रतिशत पद सहायक अध्यापकों की पदोन्‍नति से भरने का प्रावधान है। एलटी संवर्ग से प्रवक्ता संवर्ग में 2008 से प्रमोशन नहीं होने के कारण प्रदेश के लगभग सभी इंटर कॉलेज में प्रवकताओं के पद खाली हैं।


 उन्होंने कहा कि आयोग के जरिये समय-समय पर सीधी भर्ती में तो चयन होता रहा है, लेकिन प्रमोशन के पद नहीं भरने से पुरुष संवर्ग में प्रवक्ता के 1800 से अधिक और महिला संवर्ग में प्रवक्ता के 1200 पद रिक्त हैं।

Wednesday, March 3, 2021

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत जूनियर कक्षाओं से ही शुरू होगा व्यावसायिक शिक्षा में प्रशिक्षण

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत जूनियर कक्षाओं से ही शुरू होगा व्यावसायिक शिक्षा में प्रशिक्षण


व्यावसायिक शिक्षा में दिलचस्पी बढ़ाने के लिए बुनियादी शिक्षा से ही विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को बिजली का काम, बढ़ई या किसी व्यावसायिक शिल्पकार का प्रशिक्षु बन कर काम करना पड़ेगा। स्कूलों में 10 दिन बस्ता रहित पीरियड में ये अनुभव दिया जाएगा। । अपने काम का अनुभव देने के लिए नई शिक्षा नीति में ये प्राविधान किया गया है।


स्थानीय समुदाय व राज्य स्थानीय जरूरतों के मुताबिक ऐसे कौशलों की मैपिंग करनी होंगी। जिस तरह की जरूरत उस क्षेत्र में होगी, उसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। मसलन, मिट्टी के बर्तनों का निर्माण, बढ़ईगिरी, धातु का काम, बागवानी, कलाकार आदि के साथ विद्यार्थियों को प्रशिक्षु बन कर काम करना पड़ेगा। 10 दिन सभी स्कूलों में एक पीरियड बस्ता रहित होगा।

इसके अलावा कक्षा छह से 12 तक व्यावसायिक विषयों को समझने के लिए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। ये कोर्स ऑनलाइन भी हो सकते हैं। साल भर में ऐसे बस्तारहित दिन तय कर विभिन्न प्रकार की कलाओं, क्विज, खेल और व्यावसायिक हस्तकलाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

यूपी बोर्ड में व्यावसायिक शिक्षा के हस्तकला संबंधित विषय कक्षा 11 से शुरू होते हैं। वैकल्पिक शिक्षा में कक्षा 9-10 में रीटेल, सुरक्षा, स्वास्थ्य व स्वास्थ सेवाएं, आईटी पढ़ाया जाता है लेकिन कक्षा 11 में ऐसे कई व्यावसायिक शिक्षा के विषय हैं जिनमें युवा खुद का काम शुरू कर सकते हैं।

Monday, February 22, 2021

200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत

200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत


राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा।


लखनऊ  ।  राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में बना था। तभी से एडेड माध्यमिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है, लेकिन वर्ष 1971 में इन स्कूलों को सरकार ने अनुदान सूची पर लेना शुरू किया था। वर्तमान समय में प्रदेश भर में करीब 4500 सहायता प्राप्त अशासकी माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।

प्रयोगशालाएं हो गईं कबाड़

लखनऊ में 94 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें बहुत से ऐसे स्कूल हैं, जिनके भवन की मरम्मत से लेकर अन्य सुविधाओं का अभाव है। सरकार की ओर से इन स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन की ग्रांट दी जाती है। कक्षा एक से आठ तक फीस भी नहीं ली जाती, जिसकी वजह से स्कूलों की स्थिति खराब होती चली गई। लखनऊ इंटरमीडिएट कालेज हो या हरि चंद इंटर कालेज। यहां प्रयोगशालाएं खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में योगी सरकार ने पहली बार 200 करोड़ रुपये के बजट का प्राविधान किया है।
 

डा. आरपी मिश्रा ने कहा कि शिक्षक संघ लगातार मांग उठा रहा था कि राजकीय स्कूलों की तर्ज पर सरकार एडेड माध्यमिक विद्यालयों को भी अवस्थापना सुविधाओं के लिए फंड दे। जिससे इन स्कूलों की स्थिति भी ठीक कराई जा सके। अब बजट में प्राविधान किया गया है।

लखनऊ मंडल के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालयों में बजट देने का निर्णय अच्छा है। इससे इन स्कूलों में जरूरी मरम्मत, छात्र सुविधाएं आदि की जा सकेंगी।

Wednesday, February 17, 2021

अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी

अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी



प्रयागराज। प्रदेश में अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी हुई है। शासन ने भर्ती पर रोक लगा रखी है। हालांकि कुछ कॉलेजों ने शासन से विशेष अनुमति लेकर अपने यहां भर्तियां की हैं, लेकिन ज्यादातर कॉलेजों में भर्तियां नहीं हुईं हैं। अब नए शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


दरअसल, अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक अशासकीय विद्यालयों में भर्ती की प्रक्रिया प्रबंधन के जिम्मे होती थी। भर्ती में मनमानी और गड़बड़ी के अक्सर आरोप लगते रहते थे। ऐसे में शासन को भर्ती पर रोक लगानी पड़ी। तैयारी थी कि भर्ती संस्थाओं के माध्यम से ऐसे महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में भर्ती कराई जाएगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के 2003 पदों पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इसमें अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालय शामिल नहीं हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भी अशासकीय विद्यालयों में टीजीटी-पीजीटी भर्ती शुरू करने वाला हैं, लेकिन इसमें भी अल्पसंख्यक अशासकीय विद्यालय शामिल नहीं हैं।


प्रदेश में अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों की संख्या 21 है। इनमें से कुछ महाविद्यालयों की ओर से शासन में प्रार्थनापत्र देकर भर्ती की अनुमति मांगी गई थी। इन महाविद्यालयों में भर्ती भी हुई, लेकिन ज्यादातर अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों में अब भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर रोक लगी हुई है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन होने वाला है। आयोग के गठन के बाद अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों में भर्ती शुरू होने के पूरे आसार हैं।

Sunday, February 14, 2021

यूपी : हर माध्यमिक स्कूल की होगी खुद की वेबसाइट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हो रही कवायद

यूपी : हर माध्यमिक स्कूल की होगी खुद की वेबसाइट, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हो रही कवायद


लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2021 22 से डिजिटल लिटरेसी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय की वेबसाइट तैयार करने के साथ स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम, वर्चुअल लैब और कंप्यूटर शिक्षकों की व्यवस्था होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।


योजना के अनुसार राजकीय विद्यालयों में 2021-22 से कक्षा 6 से कोडिंग लागू कर उसे चरणबद्ध तरीके से कक्षा 8 तक बढ़ाया जाएगा। शिक्षण, मूल्यांकन, नियोजन और प्रशासन में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए राज्य शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना भी होगी। इसके जरिए नवीनतम ज्ञान, कार्यप्रणाली के नियोजन, क्रियान्वयन, समीक्षा और मार्गदर्शन, परामर्श साझा करने का अवसर मिलेगा। मंच में आईटी, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा के साथ शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा माध्यमिक शिक्षा में विभिन्न स्रोतों से एकत्रित आंकड़ों की प्रमाणिकता, एकीकृत शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी 

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की छब्बीसवें चरण की समय-सारिणी जारी

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व  e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की छब्बीसवें चरण की समय-सारिणी जारी।


Saturday, February 13, 2021

अध्यापक के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक क्यों लटकाये रखा? : हाईकोर्ट ने पूछा सवाल

अध्यापक के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक क्यों लटकाये रखा? : हाईकोर्ट ने पूछा सवाल


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक तथा वित्त एवं लेखाधिकारी, बलिया को तीन मार्च को स्पष्टीकरण के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही व्यक्तिगत हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा है कि याची के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक दबाये क्यों रखा? 


कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 26 फरवरी तक याची के बकाया वेतन के सत्यापन का कार्य पूरा करने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूíत सलिल कुमार राय ने परमात्मानंद सिंह की याचिका पर दिया है। 


याचिका पर अधिवक्ता काशीनाथ सिंह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि 2015 से 2021 तक क्या किया गया, इसकी जानकारी नहीं दी। जिला विद्यालय निरीक्षक की लापरवाही प्रकट होती है। कोर्ट ने निरीक्षक व लेखाधिकारी दोनों को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है।

Wednesday, February 10, 2021

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की पचीसवें चरण की समय-सारिणी जारी

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व  e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की पचीसवें चरण की समय-सारिणी जारी


Tuesday, February 9, 2021

बर्खास्तगी प्रस्ताव लंबित रहते नहीं दिया जा सकता बहाली आदेश : हाईकोर्ट

बर्खास्तगी प्रस्ताव लंबित रहते नहीं दिया जा सकता बहाली आदेश : हाईकोर्ट 



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कालेज की प्रबंध समिति ने अध्यापक की बर्खास्तगी का प्रस्ताव पारित किया है तो इस प्रस्ताव के लंबित रहते अध्यापक की बहाली का आदेश नहीं दिया जा सकता है। जिला विद्यालय निरीक्षक को निलंबन आदेश का अनुमोदन देने से इंकार कर बहाली का आदेश देने का अधिकार नहीं है।


कोर्ट ने निरीक्षक को प्रबंध समिति के प्रस्ताव को दस्तावेजों सहित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को अग्रसारित करने का निर्देश दिया है। बोर्ड को निरीक्षक के आदेश की अनदेखी कर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने जन सेवक इंटर कालेज सलारपुर पवई ,आजमगढ़  की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने प्रतिवाद किया।  


प्रबंध समिति ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य को अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया और अनुमोदन के लिए डीआईओएस को भेजा। जिसने निलंबन का अनुमोदन करने से इंकार कर कार्यवाहक प्रधानाध्यापक को बहाल करने का निर्देश दिया। जिसे प्रबंध समिति ने यह कहते हुए चुनौती दी कि समिति ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापक को बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। ऐसे में बहाली का आदेश देना गलत है। उसे रद्द किया जाए।

Monday, February 8, 2021

नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द

नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द


लखनऊ। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया है कि केंद्र के उच्च शिक्षा आयोग की तर्ज पर प्रदेश में नए शिक्षा सेवा आयोग का जल्द गठन किया जाएगा। जिसमें शिक्षकों से जुड़ी कई चीजें होंगी। इसमें शिक्षकों का समावेश होगा। ऑनलाइन पठन-पाठन की प्रक्रिया का समावेश हो। उनको और प्रोत्साहन देने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह जानकारी ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में शिक्षकों के बीच दी।

बतौर विशिष्ट अतिथि उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ई- कंटेंट और ऑनलाइन लर्निंग का स्कोप बढ़ा है। नई शिक्षा नीति में भी यूपी ने काफी कात किया है । टास्क फोर्स बनाकर हर महीने की 04 तारीख को बैठक करते हैं। स्टीयरिंग कमेटी का भी गठन किया गया है।

भाषा विवि भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए-नए विषयों
पर शोध हो रहा है। सिर्फ भवन सुंदर बनाने से काम नहीं चलता। शिक्षक-छात्र भी अच्छे होने चाहिए। पठन-पाठन बेहतर हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय की हर सकारात्मक पहल में उसके साथ है। विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में भाषा के केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है और यदि विश्वविद्यालय इस ओर पहल करते हुए नए पाठ्यक्रम शुरू करता है तो नए पदों के लिए भी संस्तुति प्रदान करेंगी ।

यूपी बोर्ड के बड़े कदम, परिणाम में बेहतरी के लिए दोबारा परीक्षा का प्रावधान

यूपी बोर्ड के बड़े कदम, परिणाम में बेहतरी के लिए दोबारा परीक्षा का प्रावधान


प्रयागराज : यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर में समान शिक्षा, परीक्षा व परिणाम की त्रिवेणी बहा रहा है। बोर्ड प्रबंधन का मकसद सिर्फ यहीं तक नहीं है कि परीक्षा नकलविहीन हो, बल्कि अन्य बोर्ड की तरह यहां छात्र-छात्रएं पढ़ें और आगे बढ़ें इसीलिए एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। परिणाम में भी यदि किसी छात्र-छात्र में यह कसक रह गई है कि वह और बेहतर कर सकता है तो उसे भी दोबारा परीक्षा का अवसर देने का खाका खींचा जा चुका है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) तकनीक का साथ लेकर सतत सुधारों की ओर अग्रसर है। एक समय था जब सीबीएसई व यूपी बोर्ड के सफलता प्रतिशत में बड़ा अंतर रहा। सीबीएसई के परीक्षार्थी 90 फीसद या और अधिक अंकों से उत्तीर्ण होते थे, वहीं यूपी बोर्ड में 75 प्रतिशत अंक पाना ही टेढ़ी खीर थी। हाईस्कूल व इंटर के ओवरऑल परिणाम में भी फासला साफ दिखता था। इसे खत्म करने के लिए 2011 में मॉडरेशन प्रणाली लागू की गई, इससे परीक्षार्थियों के साथ ही समूचे परिणाम में उछाल आया। अब यूपी बोर्ड में भी 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की लंबी सूची है।

मोदी सरकार की सबका विकास सबका विश्वास की नीति को अमल में लाने के लिए 2018 में समान शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया गया। बोर्ड में कक्षा नौ से 12वीं तक चरणबद्ध तरह से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया। अधिकांश विषयों में यह लागू हो चुका है तो कामर्स व अंग्रेजी में नए सत्र से लागू होने जा रहा है। इसी के साथ देश में एनसीईआरटी की सबसे सस्ती किताबों से यूपी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में पढ़ाई हो रही है। अब नई शिक्षा नीति के साथ बोर्ड कई नव प्रयोग करने जा रहा है।


बोर्ड में अंक सुधार व कंपार्टमेंट परीक्षा का चलन रहा है। इसमें सीमित विषय में ही छात्र-छात्रएं परीक्षा देकर अंक बढ़ा सकते थे या फिर अनुत्तीर्ण परीक्षा उत्तीर्ण कर सकते हैं। पिछले साल पहली बार इंटर में कंपार्टमेंट परीक्षा का प्रविधान हुआ। अब इससे भी आगे बढ़कर सभी छात्र-छात्रएं पूरी परीक्षा ही दोबारा दे सकते हैं यानी विषयों का कोई बंधन नहीं है, यदि उन्हें लगता है कि वे दोबारा परीक्षा देकर और बेहतर अंक अर्जित कर सकते हैं तो उनके लिए दरवाजे अगले साल से खोले जाने की तैयारी है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल कहते हैं कि यह शुरुआत भर है, आगे और भी बहुत कुछ बेहतर किया जाएगा।

Thursday, February 4, 2021

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड


यूपी के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अब चौरी-चौरा जनआक्रोश के शहीदों की वीरगाथाएं किताबों में पढ़ सकेंगे। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग चौरी चौरा की घटना को यूपी बोर्ड के पाठयक्रम में शामिल करने जा रहा है।  मुख्‍यमंत्री ने चौरी चौरा जनआक्रोश को शताब्‍दी समारोह के रूप में मनाए जाने के निर्देश दिए हैं।


इसी क्रम में पहले चरण में गोरखपुर मंडल के 400 से अधिक राजकीय व एडेड माध्‍यमिक विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इससे छात्र वहां के शहीदों की गाथाओं से रूबरू हो सकेंगे। 

गोरखपुर के चौरी चौरा में 4 फरवरी 1922 में आजादी के वीर जवानों ने अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ंत के बाद पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। इसमें 23 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। इस घटना को चौरी चौरा जनआक्रोश के रूप में जाना जाता है। शहीदों के इसी शौर्य की कहानी को अब पाठयक्रम का हिस्‍सा बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्र चौरी चौरा जनक्रांति में शहीद अपने वीरों के इतिहास से रूबरू हो सकेंगे।

गोरखपुर मंडल के छात्र करेंगे चौरी चौरा का भ्रमण

मुख्‍यमंत्री के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग छात्रों को न सिर्फ वीरों के इतिहास को पाठयक्रम के रूप में पढ़ाएगा बल्कि छात्रों को शहीदों के स्‍थल चौरी चौरा का भ्रमण भी कराएगा। 

पहले चरण में गोरखपुर मंडल के देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर व गोरखपुर के 87 राजकीय विद्यालयों, 333 अशासकीय सहायता प्राप्‍त विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा शहीद स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इसमें मंडल के निजी स्‍कूलों को भी शामिल किया जाएगा। 

छात्रों के बीच होंगी प्रतियोगिताएं

चौरी चौरा शताब्‍दी समारोह के दौरान प्रदेश के सभी माध्‍यमिक विद्यालयों में चार फरवरी 2021 से आगामी एक साल तक छात्र-छात्राओं के बीच निबंध, चित्रकला व पोस्टर, क्विज, स्लोगन, कविता लेखन व भाषण प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। इसके लिए पहले विद्यालय स्तर से शुरुआत होगी। फिर यह क्रम राज्य स्तर तक जारी रहेगा। तीन फरवरी 2022 को गोरखपुर में मंडल स्तरीय प्रतियोगिता कराई जाएगी।

Monday, February 1, 2021

यूपी बोर्ड : वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित

यूपी बोर्ड : वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित


UPMSP UP Board Exam 2021 : यूपी बोर्ड इंटर की प्रायोगिक परीक्षाएं 3 फरवरी से, 50-50 प्रतिशत अंक आंतरिक व बाह्य परीक्षक देंगे



 प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा का पहला चरण बुधवार से शुरू हो रहा है। परीक्षा प्रदेश के 10 मंडलों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी कराई जाएगी। पहले चरण की परीक्षा में 7505 परीक्षक लगाए गए हैं, जो 12 फरवरी तक इम्तिहान लेंगे। वहीं, हाईस्कूल में आंतरिक मूल्यांकन प्रधानाचार्य के माध्यम से होगा।

यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इंटर के प्रयोगात्मक विषयों में 50 प्रतिशत अंक आंतरिक परीक्षक व इतने ही अंक वाह्य परीक्षक देंगे। वहीं, व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए जो कालेज प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्र बना है, वहां संबंधित विषयों के शिक्षक 50 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन के तहत देंगे और वाह्य परीक्षक भी इतने ही अंक दे सकेंगे। इंटर परीक्षा में पंजीकृत संस्थागत व व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के अनिवार्य विषय खेल व शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षा विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य कराएंगे।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की वर्ष 2021 की इंटरमीडिएट प्रयोगात्मक परीक्षाएं दो चरणों में होंगी। पहले चरण में 3 से 12 फरवरी और दूसरे चरण की प्रयोगात्मक परीक्षा 13 से 22 फरवरी तक होगी।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने बताया कि पहले चरण में आगरा, सहारनपुर, बरेली, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या, आजमगढ़, देवीपाटन तथा बस्ती मंडल के जिलों में 10,58,617 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। दूसरे चरण में शेष मंडलों के जिलों में परीक्षा होगी। इसके लिए परीक्षक नियुक्त कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि परीक्षकों के नियुक्ति पत्र परिषद की वेबसाइट पर विद्यालयों को ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं। नियुक्ति पत्र क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए भी जिलों में भेजे गए हैं।


यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाएं 3 से 22 फरवरी तक दो चरणों में कराई जाएंगी। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि पहले चरण में 3 से 12 फरवरी तक आगरा, सहारनपुर, बरेली, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, फैजाबाद, आजमगढ़, देवीपाटन तथा बस्ती मंडल में प्रैक्टिकल कराए जाएंगे। 

दूसरे चरण में 13 से 22 फरवरी अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी तथा गोरखपुर मंडलों में प्रयोगात्मक परीक्षाएं होगी। प्रायोगिक परीक्षा के संबंध में अन्य आवश्यक जानकारी तथा परीक्षकों की नियुक्ति आदि की सूचना परिषद के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों से प्राप्त होगी। 

इंटरमीडिएट के प्रयोगात्मक विषयों में निर्धारित पूर्णांक में से पचास प्रतिशत अंक आंतरिक परीक्षक तथा पचास प्रतिशत अंक बाह्य परीक्षक देंगे। इसी प्रकार व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए केन्द्र निर्धारित किए जाएंगे उनके अध्यापक पचास प्रतिशत अंक आन्तरिक मूल्यांकन व्यवस्था के तहत देंगे और शेष पचास प्रतिशत अंक बाह्य परीक्षक देंगे। 

इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पंजीकृत सभी रेगुलर व प्राइवेट परीक्षार्थियों की अनिवार्य विषय नैतिक योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षाएं विद्यालय स्तर पर प्रधानाचार्य कराएंगे। कोविड -19 से बचाव की गाइडलाइन्स को अपनाते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रयोगात्मक परीक्षा कराई जाएगी।

सीसीटीवी की निगरानी में कराएंगे प्रैक्टिकल
शुचिता बनाए रखने के उददेश्य से प्रधानाचार्य प्रयोगात्मक परीक्षाएं सीसीटीवी की निगरानी में परीक्षा कराएंगे। परीक्षाओं से संबंधित रिकार्डिंग प्रधानाचार्य सुरक्षित रखी जाएगी और उन्हें अपने क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षाएं पिछले साल की तरह विद्यालय स्तर पर आन्तरिक मूल्यांकन (प्रोजेक्ट कार्य) के आधार पर कराई जाएगी। हाईस्कूल के व्यक्तिगत परीक्षार्थी अपने अग्रसारण केन्द्र के प्रधानाचार्य से सम्पर्क कर प्रयोगात्मक परीक्षा में सम्मिलित होंगे। हाईस्कूल की प्रयोगात्मक परीक्षा (आंतरिक मूल्यांकन नैतिक खेल एवं शारीरिक शिक्षा तथा इंटरमीडिएट की खेल एवं शारीरिक शिक्षा के प्रांप्ताक विद्यालयों के प्रधानाचार्य के माध्यम से बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। इसके लिए 25 जनवरी  से वेबसाइट खुलेगी।


Sunday, January 31, 2021

व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को व्यवसाय और स्वरोजगार में दक्ष बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम लागू किया जाएगा। शैक्षिक सत्र 2022-23 से कक्षा 9 से इसकी शुरुआत कर चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक लागू किया जाएगा। वर्ष 2024-25 तक माध्यमिक के 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस करते हुए बच्चों को प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पॉलीटेकिभनक सहित अन्य संस्थानों के प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। वहीं, बच्चों के लिए इंटर्नशिप और साल में दो से तीन बार कॅरिअर काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में राजकीय विद्यालयों के साथ उन माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले से व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और संसाधन उपलब्ध हैं।


जिला स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सत्र 2021-22 से सर्वे किया जाएगा। स्थानीय मांग और आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों में ट्रेड्स का निर्धारण किया जाएगा। ट्रेड्स का चयन सर्वे, रोजगार कार्यालय और स्थानीय इंडस्ट्री से प्राप्त सूचना का विश्लेषण करने के बाद किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सामान्य शिक्षा और सामान्य शैक्षिक संस्थानों में व्यावसायिक प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बच्चों में रोजगार के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता विकसित हो।


सेवाए निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकस
विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेकिभनक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक में व्यावसायिक शिक्षा में समाजोपयोगी उत्पादन कार्य, कार्यानुभव के प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को हस्तकौशल और कार्यानुभव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की चौबीसवें चरण की समय-सारिणी जारी

दूरदर्शन, उत्तर प्रदेश (DD UP), e-vidhya-9 व  e-vidhya-11 चैनल पर यू.पी. बोर्ड की कक्षा-9 एवं 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण की चौबीसवें चरण की समय-सारिणी जारी