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Sunday, April 11, 2021

स्कूल खोल सकेंगे अपना कार्यालय, लखनऊ डीएम ने जारी किए निर्देश

स्कूल खोल सकेंगे अपना कार्यालय, लखनऊ डीएम ने जारी किए निर्देश


लखनऊ। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने शनिवार देर रात निर्देश जारी कर शहर के स्कूलों को प्रशासनिक कार्यों के लिए कार्यालय खोलने की अनुमति दे दी है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि देर रात आकस्मिक बैठक के बाद जिलाधिकारी ने यह आदेश किया। इसके तहत स्कूल अब अपने स्टाफ को बुला सकेंगे।


शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए भी स्कूल जा सकेंगे। इस दौरान स्कूलों को कोविड प्रोटोकॉल और शासन द्वारा जारी एसओपी का पालन करना पड़ेगा। गौरतलब है कि स्कूल पूर्ण रूप से बंद होने की वजह से दाखिला करने, फीस जमा करने, रिपोर्ट कार्ड बनाने और ऑनलाइन पढ़ाई कराने आदि की प्रक्रिया बाधित हो रही थी, जिसको लेकर स्कूलों ने अपनी मांग भी उठाई थी।

Friday, April 9, 2021

लखनऊ : 15 अप्रैल तक स्कूल पूरी तरह रहेंगे बन्द, शिक्षकों को भी नहीं जाना होगा स्कूल

लखनऊ : 15 अप्रैल तक स्कूल पूरी तरह रहेंगे बन्द, शिक्षकों को भी नहीं जाना होगा स्कूल


लखनऊ। लोग कंफ्यूज न हों, खासकर स्कूल प्रबंधन। स्कूल बंद का मतलब पूरी तरह से बंद है। टीचरों को भी स्कूल नहीं आना है। परीक्षा और प्रैक्टिकल के लिए छूट दी गई है, वो भी कोरोना प्रोटोकॉल के सख्त पालन के दायरे के तहत। 


यह जानकारी जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने एक बार फिर बृहस्पतिवार को अमर उजाला की ओर से 'जागो लखनऊ जागो' मुहिम के तहत आयोजित बेबिनर में दी. कोरोना संक्रमण के चलते बुधवार को जिलाधिकारी ने स्कूल बंद करने की घोषणा की थी, लेकिन स्पष्ट आदेश न होने की वजह से कुछ स्कूलों ने शिक्षकों को बुला लिया था। वेबिनार में जिलाधिकारी ने आदेशों को स्पष्ट करते हुए कहा कि आने वाले समय में समीक्षा की जाएगी, जैसे हालात होंगे, उसी के आधार पर फैसले होंगे।


आदेश की स्पष्ट जानकारी न  होने पर स्कूल पहुंचे शिक्षक
लखनऊ। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश की ओर से बुधवार को जारी स्कूल बंद के आदेशों के बावजूद बृहस्पतिवार को कई निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षक तय समय पर पहुंच गए। बताया गया कि उन्हें आदेश की स्पष्ट जानकारी नहीं थी। जब पता चला कि शिक्षकों को भी छात्रों की तरह स्कूल नहीं आना है तो वे वापस लौट गए। इसके अलावा परिषदीय विद्यालय, राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भी कई शिक्षक स्कूल पहुंच गए। 


अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहेब लाल मिश्रा ने बताया कि सुबह काफी शिक्षक कॉलेज पहुंच गए थे। बाद में बताया गया कि कॉलेज पूर्ण रूप से बंद है, जिसके बाद जे वापस लौट गए। नगर क्षेत्र समेत काकोरी, बीकेटी, मोहनलालगंज व अन्य ब्लॉकों के परिषदीय विद्यालयों में भी शिक्षक पहुंचे थे, जिन्हें बाद में कार्यवाहक बीएसए पीएन सिंह की तरफ से शिक्षकों को विद्यालय न आने का आदेश मोबाइल पर फॉरिवर्ड कराकर शिक्षकों को वापस भेजा गया।

लखनऊ। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कहा है की 15 अप्रैल तक स्कूलों के बंद रहने के दौरान न कोई ट्रेनिंग होगी और न ही कोई शिक्षक स्कूल जाएगा। केवल उन्हीं में शिक्षक व बच्चे स्कूल जाएंगे जहां परीक्षाएं व प्रैक्टिकल चल रहे होंगे। इसके अलावा सब कुछ बंद रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट किया है। सरकारी, अर्द्ध सरकारी तथा प्राइवेट सहित सभी स्कूलों को इसका आदेश मानना होगा।


Sunday, April 4, 2021

मिड-डे मील के हिसाब किताब में हुए फिसड्डी तो लखनऊ के 1600 स्कूलों पर लटकी कार्यवाईकी तलवार

मिड-डे मील के हिसाब किताब में हुए फिसड्डी तो लखनऊ के  1600 स्कूलों पर लटकी कार्यवाईकी तलवार


कोरोना के कारण लॉकडाउन में मिड डे मील के राशन व कन्वर्जन कास्ट का हिसाब शिक्षक नहीं दे पा रहे हैं। स्कूलों के 1600 स्कूलों  ने इसका हिसाब नहीं दिया है। हिसाब न देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक पीएन सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।


 कोरोना काल में प्रदेश के सभी प्राइमरी व जूनियर स्कूल बंद थे। इसकी वजह से स्कूलों में मिड डे मील नहीं बना था। शासन ने इस अवधि का मिड डे मील व कन्वर्जन कास्ट बच्चों के खातों में भेजने तथा बच्चों को राशन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। कन्वर्जन कास्ट की रकम स्कूलों के खातों में भेजी गई थी जबकि राशन के लिए स्कूलों के शिक्षकों को पर्ची बनाकर कोटेदारों को देना था। जिसके अनुसार कोटेदारों को बच्चों व उनके अभिभावकों को चावल और गेहूं उपलब्ध कराना था।


पहले चरण में 29 मई 2020 को शासन ने 76 दिनों का राशन व कन्वर्जन कास्ट स्कूलों के खातों में भेजा। इसमें प्राइमरी स्कूलों के प्रति छात्र को 7 किलो 600 तथा जूनियर स्कूलों के छात्रों को 11 किलो 400 ग्राम गेहूं/ चावल उपलब्ध कराना था। इसके अलावा प्राइमरी के बच्चों को  374 रुपये तथा जूनियर की बच्चों को 561 रुपए कन्वर्जन कास्ट दी जानी थी।  शासन ने 7 अक्टूबर 2020 को 49 दिन का और राशन तथा कन्वर्जन कास्ट बच्चों को देने का निर्देश दिया था। 49 दिनों के लिए प्राइमरी के बच्चों को 4 किलो 900 ग्राम तथा जूनियर के बच्चों को सात किलो 350 ग्राम राशन देना था। इसी तरह प्राइमरी के बच्चों को 243.5 रुपए और जूनियर के बच्चों को 365 रुपए कन्वर्जन कास्ट देनी थी। 


शासन ने मांगा हिसाब
अब शासन इसका हिसाब मांग रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 22 फरवरी को ही पत्र लिखकर राजधानी के सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से इसका हिसाब देने को कहा था। कितने बच्चों को मिड-डे मील गया, कितने को नहीं दिया गया। कितने बच्चों के बैंक खाते मिल पाए और कितनों को नहीं। यह सब हिसाब शिक्षकों को देना था लेकिन करीब 1600 स्कूलों के शिक्षकों ने हिसाब नहीं दिया है। प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक पीएन सिंह ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया है। उनसे तत्काल इसका हिसाब व उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। 


138 दिनों का और जारी हुआ राशन व कन्वर्जन कास्ट
शासन में प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए 138 दिनों का और राशन तथा कन्वर्जन कास्ट जारी किया है। जबकि जूनियर स्कूलों के बच्चों के लिए 124 दिनों का राशन व कन्वर्जन कास्ट दिया है। प्राइमरी के बच्चों को 13 किलो 800 ग्राम तथा जूनियर के बच्चों को 18 किलो 600 ग्राम गेहूं चावल मिलेगा। इसके अलावा प्राइमरी के बच्चों को 685 रुपये कन्वर्जन कास्ट तथा जूनियर के बच्चों को 923 कन्वर्जन कास्ट मिलेगा। इसका आदेश 27 मार्च 2021 को हुआ लेकिन अभी तक यह कन्वर्जन कास्ट और राशन भी बच्चों को नहीं वितरित हुआ है।

Wednesday, March 31, 2021

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी

राजधानी के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की कर रहे तैयारी



शहर के निजी स्कूल पांच अप्रैल से नया सत्र शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मंगलवार को निजी स्कूलों के संगठन-‘अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन’ (अप्सा) की हुई वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में प्रदेश के अन्य जिलों के स्कूलों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।


एक साल बाद पहली बार ऐसा होगा जब स्कूलों में एक साथ मॉन्टेसरी से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों की पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि जूनियर कक्षाओं के लिए अभी ऑनलाइन पढ़ाई का क्रम भी समानांतर जारी रहेगा। स्कूल खोलने का निर्णय लेने के बाद स्कूलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। अप्सा के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि शासन ने चार अप्रैल तक कक्षा आठ तक के विद्यालयों को बंद रखने का आदेश दिया है। इसका पालन करते हुए नए शैक्षणिक सत्र में पांच अप्रैल से सभी स्कूल खुल जाएंगे। हालांकि स्कूल अपनी सहूलियत के अनुसार एक अप्रैल से खुलेंगे तो उनमें प्रशासनिक कार्य होगा। विधिवत पढ़ाई पांच से ही प्रारंभ होगी। इस दौरान जिन स्कूलों में रिजल्ट जारी नहीं हुए हैं, वहां स्टाफ रिजल्ट तैयार करने से लेकर दाखिले की प्रकिया पूरी करेगा।


सीनियर कक्षाओं में होगी फुल स्ट्रेंथ
अनिल अग्रवाल ने बताया कि सीनियर कक्षा नौ से 12 तक में फुल स्ट्रेंथ में पढ़ाई शुरू होगी। जबकि मॉन्टेसरी से कक्षा आठ तक के आधे-आधे छात्रों को बुलाया जाएगा। वहीं जिन स्कूलों में इंफ्राट्रक्चर बढ़िया है वे फुल स्ट्रेंथ में बच्चों को बुला सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ऑनलाइन गतिविधियां भी जारी रहेंगी। एक-डेढ़ हफ्ते बाद इनमें भी सभी बच्चे एक साथ आना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि कोरोना की रोकथाम के सारे इंतजाम पूर्व की भांति ही किए जाएंगे। मास्क, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य रहेगा। वहीं कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है।


मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह से
वहीं मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई छह और सात अप्रैल से शुरू होंगी। यहां पर गुड फ्राइडे को लेकर आयोजन व तैयारियां चल रही हैं। इसके बाद ही कुछ छह तो कुछ सात अप्रैल से खुलेंगे। कैथेड्रल, ला मार्ट, सेंट फ्रांसिस समेत अन्य मिशनरी स्कूल छह और सात अप्रैल से खुलेंगे।


टीकाकरण के लिए शासन को भेजी जाएगी सूची
अध्यक्ष ने बताया कि शिक्षकों और कर्मचारियों को कोविड टीका लगाने के लिए शासन को लिस्ट भेजी जाएगी। स्कूलों से इसका ब्यौरा मांगा गया है। शिक्षकों की सूची शासन को भेज दी जाएगी, जिनकी टीका लगाने की व्यवस्था अस्पताल में की जाएगी। टीकाकरण होने से अभिभावकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

Saturday, March 20, 2021

लखनऊ : एक अप्रैल से प्री स्कूल खोलने को तैयार निजी स्कूल प्रबंधन, SOP भी कर दी जारी

लखनऊ : एक अप्रैल से प्री स्कूल खोलने को तैयार निजी स्कूल प्रबंधन, SOP भी कर दी जारी


शहर के प्री स्कूलों में सालभर बाद एक अप्रैल से फिर से नन्हें-मुन्हें बच्चों की आवाजें सुनाईं देंगी। लखनऊ प्री स्कूल एसोसिएशन ने स्कूल खोलने के लिए शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार एसओपी भी जारी की है। छोटे बच्चों की कक्षाएं डेढ़ घंटे के लिए होंगी। दो शिफ्ट में बच्चे बुलाए जाएंगे। एक बैच में 10 बच्चों को ही बैठाने का निर्देश है।


लखनऊ प्री स्कूल एसोसिएशन के महासचिव डॉ. तुषार चेतवानी ने बताया कि  करीब 1200 विभिन्न प्री स्कूल हैं जो सालभर से बंद हैं। कुछ बड़े प्री स्कूलों में ही ऑनलाइन गतिविधियां चल रही हैं। एक अप्रैल से स्कूलों को खोलने की तैयारी है। इसके लिए एसोसिएशन की तरफ से एसओपी जारी की गई है, जो पूरी तरह से शासन के नियमों के आधार पर बनाई गई है।

महासचिव ने बताया कि अभिभावक छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए आतुर हैं। एंट्री लेवल जैसे नर्सरी कक्षाओं के लिए करीब 100 प्रतिशत अभिभावक सहमति देने को तैयार हैं। स्कूल खुलने से पहले अभिभावकों को आमंत्रित किया जाएगा। वे प्री स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर वे स्कूल प्रबंधन के साथ बैठकर वार्ता करेंगे।


एसओपी के महत्वपूर्ण अंश
- डेढ़ घंटे की एक शिफ्ट होगी। दो शिफ्टों में बच्चों को बुलाया जाएगा।
- लंच ब्रेक नहीं होगा। बच्चे मास्क पहनकर आएंगे।
- अभिभावकों की लिखित सहमति पर बच्चों को बुलाया जाएगा। एक कक्षा में 10 बच्चे होंगे।
- रोजाना हर पाली से पहले स्कूल को सैनिटाइज किया जाएगा।
- कोविड प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य।
- छोटे बच्चों को प्रोटोकॉल के बारे में जागरूक किया जाएगा।
- यदि किसी बच्चे को तकलीफ होगी तो अभिभावक के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- तबीयत खराब होने पर शिक्षक व स्टाफ को भी घर भेज दिया जाएगा।
- स्कूल में पर्याप्त मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजर, फेस कवर की व्यवस्था करनी होगी। 

Wednesday, March 17, 2021

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल

पांच अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई, कोरोना के प्रसार के बीच अभिभावकों ने उठाये सवाल


लखनऊ। निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई पांच अप्रैल से शुरू होगी। इसके लिए स्कूलों ने तैयारी शुरू कर दी है। छठी से 12वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पहले की तरह चलेंगी। एक से पांच तक के बच्चों की कक्षाओं के लिए स्कूल अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। जिन स्कूलों ने एक मार्च से इनकी क्लास नहीं शुरू कीं, वे भी पांच अप्रैल से इन कक्षाओं की पढ़ाई शुरू कराने जा रहे हैं।


वर्तमान सत्र खत्म हो रहा है। अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं। इस बीच अधिकतर निजी स्कूल पांच अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। वहीं, जिन स्कूलों में अभी तक प्री-प्राइमरी की कक्षाएं नहीं शुरू हुईं, वे भी नए सत्र से बच्चे बुला रहे हैं। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्री प्राइमरी से 12वीं तक की कक्षाएं पांच अप्रैल से शुरू हो जाएंगी। एक साल बाद पूरी तरह से स्कूल खोलने की स्टाफ ने तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच सरकार का कोई नया आदेश आता है तो उसका भी पालन किया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि नए सत्र से सभी कक्षाओं का संचालन शुरू होगा। शासन के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।


सहमति पर बुलाए जाएंगे बच्चे
कई स्कूल कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति मांग रहे हैं। पॉयनियर मोंटेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने बताया कि प्राइमरी बच्चों को आना है कि नहीं यह अभिभावकों पर छोड़ दिया है। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या ऋचा खन्ना ने बताया कि पांचवीं तक के बच्चों के लिए अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं। कानपुर रोड स्थित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल की प्रिंसिपल पूनम गौतम ने बताया कि एक अप्रैल से जूनियर व सीनियर सेक्शन की पढ़ाई शुरू होगी। प्राइमरी की पढ़ाई सहमति के आधार पर पांच अप्रैल से शुरू होगी। वहीं, दी मिलेनियम स्कूल रायबेरली रोड की प्रिंसिपल मंजुला गोस्वामी ने बताया कि ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प बंद नहीं होगा। सहमति पर ही बच्चों को बुलाया जाएगा।

अभिभावकों का विरोध
राजधानी में कोरोना के मामले फिर बढ़ने लगे हैं। ऐसे में अभिभावकों की ओर से नए सत्र से स्कूल खोलने का विरोध शुरू हो गया है, खासकर छोटे बच्चों को बुलाने को लेकर। लखनऊ अभिभावक विचार परिषद अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एक बार फिर कोरोना पैर पसार रहा है। ऐसे में नए सत्र से स्कूल खोलने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। खासकर पांच तक के बच्च्चों के लिए। वे सरकार को प्रस्ताव भेजकर छोटे बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू न कराने की मांग करेंगे।

Thursday, March 11, 2021

राजधानी के 200 प्राइमरी स्कूल एकल शिक्षक

राजधानी के 200 प्राइमरी स्कूल एकल शिक्षक


राजधानी के करीब 200 प्राइमरी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं। शिक्षक के अवकाश पर जाते ही तालाबंदी की नौबत आ जाती है। अकेले ग्रामीण क्षेत्र के ही 120 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं। जबकि तीन बंद चल रहे हैं।


राजधानी में ही प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पूरी नहीं हो पा रही है। शहरी सीमा से सटे स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है। एक एक स्कूल में 6 से 9 शिक्षक हैं। वहीं तमाम स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक अध्यापक के भरोसे चल रहे हैं। प्राइमरी और अपर प्राइमरी दोनों का यही हाल है। इसकी वजह से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 


यहां सबसे ज्यादा दिक्कत

प्राइमरी स्कूल नारायणपुर प्रथम, नारायणपुर द्वितीय, मिर्जापुर, रसूलपुर इठुरिया, शाहपुर मझिगवां, प्राइमरी स्कूल महेंद्र, प्राथमिक विद्यालय हुलास खेड़ा, पाल खेड़ा, जगन खेड़ा तथा प्राइमरी विद्यालय नानमऊ सहित कुल 200 में केवल एक ही अध्यापक हैं। जबकि करीब 30 विद्यालय ऐसे हैं जिसमें एक शिक्षक के अलावा शिक्षामित्र भी मौजूद हैं।


शहर से सटे 70 स्कूलों में 6 से लेकर 9 टीचर

चिनहट, बीकेटी, सरोजिनी नगर, मोहनलालगंज, मलिहाबाद के शहर से सटे करीब 70 स्कूल ऐसे हैं जिनमें 6 से 9 टीचर हैं। हालांकि इन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है। इसीलिए संख्या के अनुरूप टीचर हैं।


नगर क्षेत्र के 80 स्कूलों में शिक्षकों की कमी

शहरी क्षेत्र के करीब 80 स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। इनमें से करीब दो दर्जन स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है। इनमें दूसरे स्कूलों के शिक्षक लगाए गए हैं। जैसे-तैसे काम चल रहा है। इसके अलावा बाकी स्कूलों में एक एक शिक्षक है। इनके अवकाश पर जाने से स्कूलों में तालाबंदी की नौबत आ जाती है। उदयगंज, तेलीबाग, शकूरपुर, हैबतमऊ, मवाईया तथा नीलमथा में भी शिक्षकों की काफी कमी है।


500 टीचर आए फिर भी एकल हैं विद्यालय

इस वर्ष राजधानी को करीब 500 नए टीचर मिले हैं। इसमें से 341 टीचर दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर लखनऊ आए हैं। यह ज्वाइन भी कर चुके हैं। 131 नए शिक्षकों की भर्ती हुई है। इनकी भी तैनाती हो चुकी है। करीब 20 शिक्षक ट्रांसफर से लखनऊ आए हैं। इस तरह कुल 492 शिक्षक नए आए हैं। इसके बावजूद स्कूल एकल व बंद चल रहे हैं।

 

 कोई भी स्कूल बंद नहीं है। सभी में पढ़ाई चल रही है। जहां शिक्षक कम हैं वहां दूसरे स्कूलों के शिक्षक लगा दिए जाते हैं। शिक्षामित्र भी स्कूलों को संभाल रहे हैं। जहां कमी है वहां जल्दी ही नए शिक्षक पहुंचेंगे। - दिनेश कुमार, बेसिक शिक्षा, अधिकारी

Monday, February 15, 2021

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी


राजधानी के सभी ब्लाकों और नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुलने शुरू हो चुके हैं। लेकिन इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की वापसी कोरोना ड्यूटी से अभी तक नहीं हो सकी । इस स्थिति में विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सभी ब्लाकों के बीईओ का कहना है शिक्षकों की ड्यूटी कोरोना पीरीयड में लगायी गयी थी, लेकिन अभी तक शिक्षकों की वापसी नहीं हो पायी है। इस स्थिति में शिक्षकों की कमी है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है शासन की ओर से जो निर्णय होगा उसका पालन किया जायेगा। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि शिक्षकों की वापसी 1 मार्च तक स्कूलों में हो जायेगी।



हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी पर विभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी परःविभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों समेत सभी नगर क्षेत्र से 18 से 20 शिक्षक कोरोना ड्यू टी पर लगाये 
गये थे। लेकिन अभी तक इनकी वापसी नहीं हो पायी है। जबकि स्कूल खुलते बच्चे आने भी शुरू हो गये हैं और मध्यान्ह भोजन भी बनना शुरू हो गया है।


डीएम के आदेश पर लगी है ड्यूटी : कोरोना काल में हर ब्लाक से शिक्षकों की ड्यूटी जिलाधिकारी के आदेश पर लगायी गयी थी, लेकिन अभी इनकी वापसी कबतक होगी इस पर भी निर्णय जिला प्रशासन को ही लेना है। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है एक मार्च से शिक्षकों की वापसी हो सकती है।

Friday, February 5, 2021

किराए में चलने वाले और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज

किराए में चलने वाले  और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज 


लखनऊ : किराए के एक कमरे, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या वाले परिषदीय स्कूलों की सूरत बदलने जा रही है। इन स्कूलों को अधिक कमरों व जगह वाले स्कूलों में मर्ज किया जाएगा, जहां बच्चों को डिजिटल क्लास सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राजधानी में करीब 1200 से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिसमें करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें महज आधा दर्जन स्कूल, एक कमरे वाले, किराए के भवन, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या की स्थिति में जैसे-तैसे चल रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। ऐसे हालात को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि जिन स्कूलों के पास अधिक स्थान है, वहां एक कमरे वाले स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। 


बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश मिले हैं। ज्यादा स्थान वाले स्कूलों में मर्ज करने का प्रस्ताव परिषद को भेजा जाएगा।

Monday, February 1, 2021

लखनऊ : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण कार्यमुक्ति/कार्यभार ग्रहण हेतु पत्रावली तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी

लखनऊ  : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण कार्यमुक्ति/कार्यभार ग्रहण हेतु पत्रावली तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी



Saturday, January 30, 2021

पहल पड़ी भारी : बिना आदेश चलायी जा रही मोहल्ला क्लास, छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने साधी चुप्पी

पहल पड़ी भारी :  बिना आदेश चलायी जा रही मोहल्ला क्लास, छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने साधी चुप्पी


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में इन दिनों बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है, ऐसे में बच्चे शिक्षा से वंचित न हो इसके लिए काफी संख्या में शिक्षकों ने बिना किसी आदेश के मोहल्ला - क्लास की शुरूआत की है। लेकिन ये पहल उनके लिए भारी पड़ रही है।


राजधानी समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में शुरू हुई इस पहल से बच्चों को तो लाभ मिल रहा है, लेकिन जब शिक्षक स्कूल से निकलकर गांव की ओर जाते हैं - उनके साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जिसमें गुरूवार - को सीतापुर की घटना सबसे बड़ा उदाहरण बन गयी। 


जहां संधना थाना क्षेत्र में एक शिक्षिका जो मोहल्ला क्लास चलाकर बच्चों का भविष्य सवारने निकली थी, लेकिन दो लोगों न उससे छेड़छाड़ किया। इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज की गयी है । इसी तरह से गोंडा में एक प्रकरण सामने आया इस संबंध में शिक्षिका ने बीएसए से मदद भी मांगी जिसकी कोई मदद नहीं की गयी, वहीं लखीमपुर, बांदा बलिया, देवारिया, हाथरस व हमीरपुर से महिला शिक्षकों से अभ्रदता की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभाग अधिकारी इस पर चुप्पी साधे रहते हैं।

शिक्षकों ने खोला मोर्चा

आये दिन हो रही महिला शिक्षकों की घटनाओं को देखते हुए शिक्षकों ने जिम्मेदार हुक्मरानें के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष महेश मिश्रा ने एसपी आरपी सिंह से फोन पर बातचीत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षकों की मांग है सीतापुर जैसी घटनाएं न हो इस पर पुलिस प्रशासन को भी आगे आना होगा और विभाग के अधिकारियों को भी ध्यान देना होगा।

मोहल्ला क्लास चलाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं

सरकारी स्कूलों के तहत गांव-गांव में मोहल्ला क्लास चलाये जाने का स्पष्ट आदेश नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक अपने प्रयास से ये जोखिम उठा रहे हैं, हैरानी की बात ये ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा के नाम पर पुलिस की भी लापरवाही सामने निकल कर आती है।

"मोहल्ला क्लासें जहां-जहां भी चल रही है, उसमें ग्रामीणों को भी सहयोग करना चाहिए, बाकी शिक्षकों को कोई जबरदस्ती नहीं है।"  -बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए, लखीमपुर

बच्चे स्कूलो में बलाये जाने चाहिए,

"मोहल्ला क्लास से कुछ नहीं होने वाला है, भले ही कोरोना की सख्त गाइडलाइन का पाल करना पड़े।' -महेश मिश्रा, मंडलीय व जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

"मोहल्ला क्लास के लिए कोई ऊपर से आदेश नहीं है, लेकिन शिक्षकों ने पहल शुरू की है तो ये" अच्छी बात है, गांव वालों को सहयोग करना चाहिए। -दिनेश कुमार, बीएसए लखनऊ

"शिक्षक अपने प्रयास से मोहल्ला क्लास चला रहे हैं, ऊपर से आदेश कोई भी नहीं है, लेकिन ये पहल सराहनीय है, इसका सम्मान होना चाहिए।" -हेमंत राव, बीएसए हरदोई

साभार - अमृत विचार

Wednesday, January 20, 2021

अच्छी खबर: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा देशभर में इंटर्नशिप का मौका

अच्छी खबर: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा देशभर में इंटर्नशिप का मौका


लखनऊ विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के छात्रों को अब राजधानी समेत देशभर में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। इसको लेकर आज लखनऊ विश्वविद्यालय और इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स ने इंस्टिट्यूट ऑफ़ टूरिज़्म स्टडीज़ लखनऊ विश्वविद्यालय में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। एमओयू पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आलोक कुमार राय ने भी हस्ताक्षर किए। इंडियन एसोसिएशन टूर ऑपरेटर्स  की ओर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चैप्टर के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।


लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर में इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज संचालित है। यहां स्नातक में बीबीए टूरिज्म और पीजी में मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रवल मैनेजमेंट का कोर्स पढ़ाया जाता है। इनमें करीब 300 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इंस्टीट्यूट की कोआर्डिनेटर अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक बीबीए टूरिज्म में चौथे सेमेस्टर के बाद दो महीने की ट्रेनिंग होती है। वहीं पीजी में मास्टर ऑफ टूरिज्म एवं ट्रैवल्स मैनेजमेंट में एक साल के बाद ट्रेनिंग का प्राविधान है। छात्र-छात्राओं को लखनऊ और दिल्ली में ही यह ट्रेनिंग कराई जाती है। एमओयू होने के बाद इसका दायर बढ़ जाएगा।

Sunday, January 10, 2021

नई पहल : कर्मयोगी स्कीम के तहत पढ़ाई के साथ कमाई भी करेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स

नई पहल :  कर्मयोगी स्कीम के तहत पढ़ाई के साथ कमाई भी करेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स


एक स्टूडेंट को एक दिन में 2 घंटे काम करने की होगी अनुमति


लखनऊ यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स के लिए कर्मयोगी स्कीम की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत स्टूडेंट्स को पढ़ाई जारी रखने के साथ ही पार्ट टाइम जॉब करने का अवसर मिलेगा। यानी अब यूनिवर्सिटी के सहयोग से स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर सकेंगे। इस बारे में यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने बताया कि स्कीम के तहत एक स्टूडेंट को एक दिन में अधिकतम 2 घंटे काम करने की अनुमति मिलेगी।


एक एकेडमिक ईयर में 50 दिन कर सकेंगे काम

कर्मयोगी स्कीम के तहत एक एकेडमिक ईयर में एक स्टूडेंट अधिकतम 50 दिन काम कर सकता है। उन्हें उनकी इच्छा और क्षमता के मुताबिक यूनिवर्सिटी का तरफ से ही काम दिए जाएंगे। स्टूडेंट्स क्लास करने के बाद यह काम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाएंगे। एक स्टूडेंट को प्रति घंटे 150 रुपए के हिसाब से वेतन दिया जाएगा। यानी कि एक स्टूडेंट साल में 15 हजार रुपए तक कमा सकेगा।


यूनिवर्सिटी कैंपस में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को मिलेगी सुविधा

कुलपति के मुताबिक फिलहाल यह स्कीम सिर्फ लखनऊ यूनिवर्सिटी के कैंपस में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए शुरू की गई है। हालांकि, कुलपति चाहते हैं कि संबद्ध कॉलेज भी अपने स्तर पर इस तरह की पहल शुरू करें। ऐसी योजनाओं से स्टूडेंट्स काम का आदर करना सीखेंगे और स्टूडेंट्स का टैलेंट यूनिवर्सिटी के काम आएगा। साथ ही स्टूडेंट्स का अपनी यूनिवर्सिटी के साथ उनका जुड़ाव गहरा होगा और उन्हें आर्थिक मदद भी मिलेगी।

Tuesday, January 5, 2021

लखनऊ : RTE के तहत दाखिला न देने वाले स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित रह गया विभाग

लखनऊ : RTE के तहत दाखिला न देने वाले स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित रह गया विभाग


■ निजी स्कूलों की मनमानी के वजह से सैकड़ों बच्चे पढ़ाई से वंचित

■ कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति बच्चों के भविष्य से खिलवाड़


लखनऊ : सब पढ़ें सब बढ़ें। कोई पीछे न रहे। सभी को समान अवसर मिले। इसी उद्देश्य से शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों को दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का भी दाखिला लेना अनिवार्य किया गया, लेकिन उनकी मनमानी जारी है। स्कूल में प्रवेश न देने वाले ऐसे चार स्कूलों के खिलाफ नोटिस जारी की गई है। बड़ा सवाल यह है कि दाखिला न पाने वाले बच्चों का भविष्य का क्या होगा? क्या इन बच्चों को यह सत्र बिना पढ़ाई के ही समाप्त हो जाएगा। अब देखना यह कि शिक्षा विभाग हर बार की तरह मनमानी करने वाले स्कूलों के खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगा या कार्रवाई भी करेगा।


30 अगस्त तक होना था बच्चों का प्रवेश : राजधानी समेत प्रदेश भर में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए इस बार तीसरे चरण में 17 जुलाई से 10 अगस्त 2020 तक आवेदन करना था। 11 से 12 अगस्त के बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र का सत्यापन कर उन्हें लॉक किया गया। विभाग की ओर से 14 अगस्त 2020 को लॉटरी निकाली गई और 30 अगस्त 2020 तक पात्र बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित कराया जाना था। मगर हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदार तमाम बच्चों को दाखिला दिलाने में नाकाम साबित हुए।


★ इन स्कूलों को जारी किया गया है नोटिस
●एलपीएस राजाजीपुरम
● सेंट जोसेफ राजाजीपुरम
● सीएमएस, स्टेशन रोड
● बाल विद्या मंदिर, चारबाग


शीतकालीन अवकाश के बाद सोमवार को स्कूल खुले हैं। आरटीइ के तहत जो बच्चा पात्र पाया जाएगा, उसका दाखिला लिया जाएगा। - ऋषि खन्ना, प्रवक्ता, सीएमएस

बच्चे का घर उस वार्ड में नहीं होगा, जिस वार्ड में स्कूल है। अगर विभाग ने नियमों में कोई बदलाव किया हो तो, उसे सार्वजनिक रूप से अवगत कराएं। हम पात्र बच्चे को दाखिला देने के लिए तैयार हैं। - अनिल अग्रवाल, प्रबंधक, सेंट जोसफ

अभी तक स्कूल बंद थे। जो भी पात्र बच्चे हैं, उनका दाखिला लिया जाएगा। - एसपी सिंह, प्रबंधक, एलपीएस


इस सत्र में अभी तक 8500 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया गया है। जिन स्कूलों ने प्रवेश नहीं लिया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सभी स्कूलों से नियमों का पालन कराया जाएगा। -दिनेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ

Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

Sunday, December 27, 2020

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी।

उपस्थिति पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू, चुनिन्दा विद्यालयों में 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण शुरू।


 नए साल में परिषदीय विद्यालयों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग द्वारा विद्यालयों को टेबलेट देने की घोषणा अब मूर्त रूप लेने जा रही है। प्रायोगिक तौर पर राजधानी लखनऊ के चुनिन्दा विद्यालयों में 31 दिसम्बर से 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहा तो नए साल पर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी टेबलेट वितरित किया जाएगा।


परिषदीय विद्यालयों के कार्यो को डिजिटल करने एवं शिक्षकों पर ऩजर रखने के लिए विभाग ने पहले स्मार्ट फोन को हथियार बनाने की रणनीति तैयार की थी। प्रेरणा पोर्टल पर सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने एवं सेल्फि के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की सुगबुगाहट हुई तो शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। शिक्षकों के मुखर विरोध से बेसिक शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया। शिक्षकों का तर्क था कि सभी शिक्षकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है और न ही वे इण्टरनेट का उपयोग करते है। इसके बाद विभाग ने समस्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को टेबलेट देने की महत्वाकांक्षी योजना पर अमल शुरू किया। 


कोरोना काल में टेबलेट के लिए टेण्डर आमन्त्रित किए गए थे, किन्तु कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति में अधिकांश कम्पनि ने टेण्डर ही नहीं डाले। इसके बाद दोबारा टेण्डर निकाले गए। इस बार कई कंपनियों ने टेबलेट की आपूर्ति करने में रुचि दिखाई। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) विजय किरण आनन्द द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 3 कंपनियों द्वारा लखनऊ के 15 परिषदीय विद्यालयों में 31 दिसम्बर से टेबलेट का डेमो/परीक्षण प्रारम्भ किया जा रहा है। 


यह परीक्षण 16 जनवरी 2021 तक होगा। गौरतलब है कि परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के बारे में सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वे समय से विद्यालयों में उपस्थित नहीं होते है। अधिकारियों के निरीक्षण में भी कई बार शिक्षक बिना किसी सूचना के विद्यालय से गायब मिलते है। सूत्रों का कहना है कि टेबलेट आने से शिक्षक विद्यालयों में समय से एवं नियमित उपस्थित रहेगे। विभाग द्वारा ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे परिषदीय विद्यालयों की सूरत निखर रही है।





Tuesday, December 22, 2020

लेटलतीफी : कड़ाके की सर्दी में भी परिषदीय बच्चों को नहीं मिल पाए जूते-मोजे

लेटलतीफी : कड़ाके की सर्दी में भी परिषदीय बच्चों को नहीं मिल पाए जूते-मोजे


राजधानी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालयों के करीब 1.96 लाख बच्चों को शासन की तरफ से निशुल्क जूते और मोजे नहीं मिले हैं। सर्दियां शुरू होने से पहले बच्चों के पैरों में जूते मोजे होने चाहिए थे, लेकिन अब तक कोई खेप नहीं आई है। 


शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की सारी संख्या विभाग को बहुत पहले उपलब्ध करा दी गई है। कोरोना काल में भी एक जुलाई से स्कूल खोले गए। मिड-डे मील का राशन, कुकिंग की लागत देने का कार्य किया गया। किताबें बंटवाई और अब स्वेटर भी बांट रहे हैं। समय पर जूते-मोजे आ गए होते तो इसी दौरान अभिभावकों को दे दिया गया होता। बार-बार अभिभावकों को स्कूल न बुलाना पड़ता।


टेंडर में हुई देरी
विभागीय जानकारी के अनुसार, शासन की तरफ से जूतों के लिए टेंडर जारी करने में देरी हुई है। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। बताया जा रहा है कि इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम कीमत में में जूते मंगाए जा रहे हैं। वहीं, जूते-मोजे वितरण का कार्यक्रम तय न होने की वजह से भी यह अटका हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा जूते वितरण का कार्यक्रम गोरखपुर में कराए कराए जाने की बात चल रही है। कार्यक्रम फाइनल न होने पर वितरण प्रक्रिया अभी ठप पड़ी है।


बच्चों को बस्ते भी नहीं मिले
इस बार बच्चों को विभाग की तरफ से बस्ते भी नहीं मिले हैं। इस संबंध में शासन से अभी कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुआ है। बस्ता वितरित करने की प्रक्रिया की तैयारी को लेकर बेसिक शिक्षा कार्यालय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।


वितरण के लिए खेप नहीं आई
बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि शासन से सभी बच्चों को जूते-मोजे उपलब्ध कराने का आदेश तो आ गया है, लेकिन अभी तक वितरण के लिए खेप नहीं आई है।

Monday, December 21, 2020

शासन का स्पष्ट आदेश, इस साल शिक्षकों को नहीं मिलेगा शीतकालीन अवकाश

शासन का स्पष्ट आदेश, इस साल शिक्षकों को नहीं मिलेगा शीतकालीन अवकाश




परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष नहीं होगा शीतकालीन अवकाश, विभाग ने शिक्षकों में फैले भ्रम को लेकर दी सफाई


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2020-21 में शीतकालीन अवकाश नहीं होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने 2021-22 के शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर जारी आदेश को लेकर फैले भ्रम के बाद विभाग ने अपनी सफाई दी है। विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने 14 अगस्त को टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि कार्य निर्धारण का आदेश जारी किया था। इसमें पांचवें बिंदु पर शैक्षिक सत्र 2021-22 में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश और 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। 

इस पर शिक्षकों और विद्यार्थियों में चर्चा थी कि इस साल 31 दिसंबर से 14 जनवरी 2021 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। लखनऊ के बीएसए दिनेश कुमार ने बताया कि जारी आदेश 2021-22 के लिए है। लिहाजा इस सत्र में अबकाश नहीं होगा। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि इस साल कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलों का संचालन नहीं हो रहा है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों से शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े दूसरे कराए जाने हैं।

प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को इस सत्र से शीतकालीन अवकाश नहीं मिलेगा। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को शीतकालीन अवकाश सत्र 2021- 22 से दिया जाएगा। इस संबंध में 14 अगस्त 2020 को अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने एक आदेश भी जारी कर रखा है। इसमें उन्होंने टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि एवं कार्य निर्धारण की बात लिखी थी। इसमें बिंदु संख्या 5 पर ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश के बारे में स्पष्ट बताया गया है।


आदेश में 2021-22 से ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश की बात कही गई है। शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा। जबकि ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 मई से 15 जून तक रहेगा। ग्रीष्म काल के पश्चात 16 जून से नया सत्र शुरू होगा। बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि कुछ जगह इसी सत्र से शीत कालीन अवकाश होने की भ्रामक सूचना वायरल हो रही है। यह सही नहीं है। इस सत्र में स्कूलों में शीत कालीन अवकाश नहीं होगा। 



छुट्टी मामले में अफसरों की फटकार के बाद बैकफुट पर प्रतापगढ़ बीएसए


प्रतापगढ़। परिषदीय स्कूलों में 25 दिसंबर से दस जनवरी तक अबकाश बताने वाले बीएसए के सुर अफसरों कौ फटकार मिलते ही बदल गए। उन्होंने कहा कि यह अवकाश अगले वर्ष के लिए है। इधर, बीएसए सोशल मीडिया पर भी स्कूलों के खुले रहने की जानकारी देते रहे। शनिवार को अमर उजाला में जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में 25 दिसंबर से दस जनवरी तक अवकाश रहने की खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षक सोशल मीडिया पर खुशी का इजहार करने लगे। 


विभागीय अफसरों के अधिकृत ग्रुपों में खबर चलने के बाद लखनऊ में बैठे अफसरों ने बीएसए को फोनकर फटकार लगाई और बताया कि वर्ष 2021-22 के शैक्षिक सत्र के लिए यह अवकाश निश्चित किया गया है। इधर बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मैंने उस समय ध्यान नहीं दिया था।

Saturday, December 19, 2020

लखनऊ : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

लखनऊ : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।


लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को वितरित स्वेटर की गुणवत्ता और इनके अंडरसाइज होने की जांच शुरू हो गई है । इसकी दोहरी जांच कराई जा रही है। जिला स्तर पर टास्क फोर्स जांच कर रही है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर भी इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद के आदेश के बाद शुक्रवार को बीएसए दिनेश कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी जांच के काम में लगा दिया है।


प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को घटिया स्वेटर वितरित करने का मामला संज्ञान में आया था। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इस मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। महानिदेशक ने जिलेवार टास्क फोर्स बनाई थी। जो जांच कर रही है । अब उन्होंने 17 दिसंबर को आदेश जारी कर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी इसकी जांच कराने का निर्देश दिया है। स्वेटर की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयक स्वयं करेंगे। इन अधिकारियों को प्रत्येक ब्लाक के 10 विद्यालयों में जाकर जांच करनी होगी। एक विद्यालय के न्यूनतम 5 छात्र तथा 5 छात्राओं के अभिभावकों से संपर्क करना होगा। रिपोर्ट में उन्हें विकासखंड का नाम, विद्यालय का नाम, नामांकित छात्र का नाम व कक्षा, अभिभावक का नाम व मोबाइल नंबर तथा अभिभावक का फीडबैक देना ह होगा। अभिभावक से पूछना होगा कि बच्चों को स्वेटर मिला है अथवा नहीं। स्वेटर की साइज ठीक है या नहीं। गुणवत्ता संतोषजनक है अथवा नहीं। यह सारी रिपोर्ट 24 दिसंबर 2020 तक हर हाल में महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजनी होगी।


बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने स्कूलों में स्वेटर की जांच के लिए रूट चार्ट जारी कर दिया है। सभी ब्लॉकों के साथ नगर क्षेत्र के 10- 10 स्कूलों की जांच के लिए रूट चार्ट बनाया गया है। किन-किन स्कूलों में जांच करनी है। इसकी सूची भी उन्होंने जारी कर दी है।