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Sunday, September 27, 2020

ओबीसी अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव किया, पिछड़ा वर्ग आयोग की रोक के बावजूद भर्ती की कोशिश पर उपजा आक्रोश

ओबीसी अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव किया, पिछड़ा वर्ग आयोग की रोक के बावजूद भर्ती की कोशिश पर आक्रोश


ओबीसी एससी अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर किया जबरदस्त प्रदर्शन, पुलिस प्रशासन को छकाया


लखनऊ।   69000 शिक्षकों की भर्ती में अनिमियता का आरोप लगाते हुए ओबीसी, एससी व एसटी के अभ्यर्थियों ने शनिवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने जोरदार नारेबाजी की तथा शिक्षा निदेशालय के पास रोड जाम करने का प्रयास किया। उनकी संख्या ज्यादा देख प्रशासन ने इन्हें ईको गार्डेन धरना स्थल खदेड़ा। 


अभ्यर्थियों ने कहा कि वह अब तभी वापस जाएंगे जब मुख्यमंत्री उन्हें न्याय का आश्वासन देंगे। उनका कहना था कि भर्ती में ओबीसी व एसी के छात्रों के साथ नाइंसाफी की गयी है। अभ्यर्थियों ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में घोर अनियमितायें की हैं। 


भर्ती प्रक्रिया पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 2020 में में ही रोक लगा दी थी। फिर किस आधार पर भर्ती की जा रही है। आयोग ने ओबीसी के साथ नाइंसाफी की जानकारी पर ही रोक लगायी थी। अभ्यर्थियों ने कहा कि जब सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ है तो शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची, शैक्षिक गुणांक सहित वर्गवार इसकी सूची क्यों नहीं जारी की जा रही है। क्यों नहीं आयोग को इसकी पूरी सूचना दी जा रही है।


 एमआरसी की आड़ में ओबीसी व एससी का आरक्षण छीना जा रहा है। इसे अभ्यर्थी बर्दास्त नहीं करेंगे। कोर्ट व आयोग में मूल चयन सूची उपलब्ध करायी जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं होगी, मुख्यमंत्री से न्याय का आश्वासन नही मिलेगा तब तक वह नहीं जाएंगे। उनका धरना अनवरत जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का कहना था कि आयोग का फैसला आने के बाद हो भर्ती की जाए। सरकार जल्दबाजी क्यों कर रही है? 


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक मांग नहीं मानी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हंगामे के बाद बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल तथा संयुक्त निदेशक गणेश कुमार अभ्यर्थियों से मिलने धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अभ्यर्थियों ने अधिकारियों से लिखित आश्वासन मांगा। लेकिन अधिकारियों ने लिखित आश्वासन देने में असमर्थता जताई।

Monday, September 21, 2020

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

 
लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के ओबीसी अभ्यर्थियों ने 67 हजार 887 चयनित अभ्यर्थियों में से 31 हजार 361 को नियुक्ति देने के सरकार के निर्णय को राष्ट्रीय ओबीसी आयोग को अवमानना बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने भर्ती पर स्थगन आदेश दे रखा है, उसके बाद सरकार नियुक्ति कैसे कर सकती है।


 अभ्यर्थियों ने आगामी दिनों में लखनऊ में आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, विभाग का दावा है कि आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है, नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत ही दी जा रही है। आरक्षण एवं एमआरसी लीगल टीम के प्रवक्ता विजय यादव का कहना है कि ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति ने 7 जुलाई को भर्ती पर रोक लगाई थी। 


आयोग ने स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होने के बाद भी आयोग की ओर से मामले में निर्णय देने तक भर्ती पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग के आदेश के तहत अभी तक सरकार इस 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की वर्ग बार शैक्षिक गुणांक सहित मूल चयन सूची उपलब्ध नहीं कराई है।

Saturday, September 12, 2020

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान


उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने अधिवक्ता के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है। इसमें बीएसए पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। बीएसए दफ्तर का बहिष्कार करने की बात भी शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने पत्र में कही है।


जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामवीर सिंह एवं महामंत्री अनिल कुमार ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रमेशचंद्र शर्मा के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है, जिसमें मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शिक्षक संघ के किसी भी प्रत्यावेदन का संज्ञान नहीं लिया जा रहा। नोटिस में अन्य आरोप भी लगाए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने अध्यापकों को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं शिक्षक संघ के प्रति अनुचित व्यवहार करने के कारण कार्यालय का बहिष्कार करने की भी बात कही है।


 नोटिस के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सिविल कोर्ट के नोटिस का निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर जूनियर संगठन ने मेरे नोटिस का कोई तर्क संगत जवाब नहीं दिया तो इनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी। -मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।

Tuesday, September 8, 2020

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार




प्रयागराज : शिक्षा सेवा अधिकरण के मुद्दे पर सोमवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई। बैठक में सबने एक स्वर में कहा कि शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में बनना ही कानून व संविधान सम्मत है। इससे कम कुछ स्वीकार नहीं किया जाएगा।


एसोसिशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार गैरकानूनी निर्णय लेकर प्रयागराज की गरिमा से खिलवाड़ कर रही है, जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वादे के अनुरूप शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में स्थापित किया जाय, क्योंकि यहीं हाईकोर्ट की प्रधान पीठ है। अगर हमारी मांग की अनदेखी की गई तो सरकार को उसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी, क्योंकि वकील अपने अधिकार व सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। वहीं, मंगलवार को लोक संपत्ति क्षतिपूर्ति दावा अधिकरण के मुद्दे पर शहर के सभासदों की बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष जमील अहमद आजमी ने की।

Sunday, September 6, 2020

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

 
प्रयागराज : उप्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय व कानून के खिलाफ जाकर शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने की कड़ी निंदा की है। सरकार को नौकरशाही के इशारे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना करने का दोषी करार दिया है।


एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार तिवारी ने की। संचालन सचिव जीपी सिंह ने किया। एसोसिएशन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के केस में स्पष्ट रूप से निर्णय दिया है कि अधिकरण वहीं गठित हो जहां हाईकोर्ट हो। उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम में स्पष्ट लिखा गया है कि उप्र का हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट है। लखनऊ में इसकी खंडपीठ है। 


इलाहाबाद हाईकोर्ट का मुख्यालय प्रयागराज में होने के नाते किसी भी अधिकरण का मुख्यालय भी प्रयागराज में ही होना चाहिए, क्योंकि प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ स्थित है। हर अधिकरण पर हाईकोर्ट का क्षेत्रधिकार व नियंत्रण होता है। ऐसे में अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में न बनाकर लखनऊ में बनाना कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नौकरशाही के दबाव में आकर कानून व सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के विपरीत, शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है।


मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र : इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरनाथ त्रिपाठी ने शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री को ई-मेल से पत्र भेजकर विरोध किया है और कहा है कि कैबिनेट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के मद्रास बार एसोसिएशन केस, यूपी अमल्गमेशन आर्डर के तहत नसीरुद्दीन केस के फैसले व उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम के उपबंधों का खुला उल्लंघन है। 


त्रिपाठी ने प्रदेश के महाधिवक्ता एवं विधायी कार्य देखने वाले अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा है कि सही कानूनी सलाह न देने के कारण सरकार गलत फैसले ले रही है और सुप्रीम कोर्ट में जीतने वाले मुकदमे हारती जा रही है। त्रिपाठी ने प्रयागराज में ही शिक्षा सेवा अधिकरण स्थापित करने की मांग की है और कहा है कि मुख्यमंत्री नेताओं व नौकरशाही के दबाव में फैसले न लेकर कानूनी दायित्व निभाए।


शिक्षा प्राधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। सरकार के इस फैसले से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर प्रयागराज की गरिमा एवं पहचान से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।


सुभाष चौराहा पर एकत्रित कार्यकर्ता घेरा बनाकर बैठ गए थे। उनका कहना कि जिले का नाम बदलने के साथ सरकार इसकी सूरत और पहचान बदलने की साजिश कर रही है। यहां से सभी मुख्यालय हटाए जा रहे हैं। सरकार यह निर्णय प्रयागराज वालों के साथ धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाहाबाद की उपेक्षा मंत्रियों को भारी पड़ेगी। आंदोलन की अगुवाई कर रही ऋचा सिंह ने मंत्रियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सवाल उठाया।

Wednesday, September 2, 2020

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध


अधिकारियों में तालमेल नहीं और शिक्षक हो रहे कोरोना काल में  परेशान

प्रयागराज। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश में विरोधाभास पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से ब्लॉक-4 की गाइड लाइन में स्कूल-कॉलेज एवं शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। 


21 सितंबर से स्कूलों में 50 फीसदी टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टॉफ को ऑनलाइन शिक्षा एवं परामर्श के लिए बुलाया जा सकता है। यह आदेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। जबकि, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के निर्देश पर जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही सभी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है।


लखनऊ : अनलॉक 4 की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्र सरकार ने 21 सितंबर के बाद 50 फीसदी स्टाफ को ही स्कूल बुलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद प्रदेश में बिना रोस्टर सभी शिक्षकों को रोज बुलाया जा रहा है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस पर नाराजगी जताते हुए रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार 30 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश हैं। ऐसे में शिक्षकों समेत सभी कर्मचारियों को बुलाने से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।