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Thursday, August 13, 2020

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स।


यूजीसी ने नई शिक्षा नीति आने के बाद सक्रियता दिखाई है जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थान अब सिर्फ वैश्विक और राष्ट्रीय जरूरतों के लिहाज से ही मैनपावर तैयार नहीं करेंगे, बल्कि वह स्थानीय व देश के छोटे-छोटे कामधंधों को लेकर भी प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने का काम करेंगे। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों में साफ्ट स्किल सहित विभिन्न कौशल से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे। यूजीसी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है। वह जल्द ही संस्थानों को ऐसे कोर्स शुरू करने की अनुमति देने की तैयारी में है। 




नई शिक्षा नीति के बाद यूजीसी ने दिखाई रुचि
यूजीसी ने यह सक्रियता नई शिक्षा नीति आने के बाद दिखाई है, जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को आगे आने को कहा गया है। इसे लेकर सीमित अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उन क्षेत्रों की पहचान खुद ही करना होगा और इसे आगे भी बढ़ाना होगा। नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि देश में अभी भी ढेरों ऐसे कारोबार और कामकाज पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं, जिन्हें तकनीकी लिहाज से मजबूती देने की जरूरत है। प्रशिक्षित मैनपावर की उपलब्धता न होने से इस दिशा में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। 

नैक में बेहतर रैंकिंग रखने वाले संस्थान शुरू कर सकेंगे
सूत्रों के मुताबिक यूजीसी की अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। इसको लेकर उनको पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। वैसे भी पीएम मोदी ने स्थानीय चीजों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फार लोकल का नारा दिया है। इस पूरी मुहिम को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालयों को अब तक कोई भी नया कोर्स शुरू करने के लिए यूजीसी से अनुमति लेनी होती है, हालांकि नैक की रैकिंग में बेहतर स्थान रखने वाले स्वायत्त संस्थानों के लिए ऐसी अनुमति की जरूरत नहीं है। साफ्ट स्किल से जुड़े कोर्सो को शुरू करने के विवि को भी अनुमति की कोई जरूरत नहीं पडे़गी। खासबात यह है कि नई शिक्षा नीति और सरकार का जिस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोगों को हुनरमंद बनाने पर जोर है, उसे देखते हुए ये कोर्स उसके लक्ष्य को आसान बना सकते हैं। नीति में वर्ष 2025 तक पचास फीसद लोगों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा जाना है। 
ये हो सकते हैं साफ्ट स्किल कोर्स 
बता दें कि सरकार स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देना चाहती है। उसके लिए प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। बढ़ई, काष्ठकला, बुनकर यानी कपड़े की बुनाई से जुड़े कोर्स, राजमिस्त्री, मिट्टी, कांच से जुड़ी कारीगरी के कोर्स के अतिरिक्त अलग-अलग राज्यों में स्थानीय छोटे-छोटे कामधंधों के कौशल से जुड़े अनेक कोर्स शुरू किए जा सकते हैं।

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Saturday, August 1, 2020

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षा पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

UGC ने छात्रों को मामला सुप्रीम कोर्ट में रहने के चलते मुगालते में न रहने की दी सलाह, परीक्षा के लिए रहें तैयार



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 30 सितंबर से पहले अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस मुद॒दे पर 10 अगस्त की सुनवाई से पहले पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। उधर, यूजीसी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी इस मुगालते में न रहें कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो परीक्षा नहीं होगी, वे अपनी पढ़ाई जारी रखें। 


जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को परीक्कीषा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। साथ हो, महाराष्ट्र सरकार के बकील को राज्य आपदा प्रबंधन समिति द्वारा पारित 19 जुन के आदेश को रिकॉर्ड पर लाने को कहा। महाराष्ट्र सरकार परीक्षा नहीं कराना चाहती है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने कहा, असम और बिहार में भयंकर बाढ़ है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने के फैसले को रदूद करना चाहिए। 


यूजीसी ने बृहस्पतिवार को कोर्ट में अंतिम वर्ष को परीक्षा कराने के निर्णय को वाजिब बताते हुए कहा था कि तमाम पहलुओं पर गौर करने व उनके बीच संतुलन बनाते डर परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। इसलिए अंतिम वर्ष की परीक्षा के संबंध में छह जुलाई के दिशा-निर्देशों में बदलाव नहीं किया जाएगा।


कोरोना के बीच सितंबर में होने वाली अंतिम वर्ष/सेमेस्टर की परीक्षाओं पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया है। परीक्षाएं रद करने की मांग वाली याचिकाओं पर कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश देने से इन्कार करते हुए केंद्र से इस मुद्दे पर गृह मंत्रलय का रुख स्पष्ट करने को कहा है।


सुनवाई के दौरान यूजीसी ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी को यह नहीं मान लेना चाहिए कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर विचार कर रहा है, इसलिए अंतिम वर्ष/सेमेस्टर परीक्षा पर रोक रहेगी। जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में कहा कि वह इस मुद्दे पर कोई आदेश नहीं दे रही है। अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। इस पीठ में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और एम.आर. शाह भी शामिल थे। केंद्र और यूजीसी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे गृह मंत्रलय के रुख के बारे में कोर्ट को अवगत कराएंगे।

Monday, July 6, 2020

विवि-कॉलेजों की परीक्षाएं हो सकती हैं रद, 31 जुलाई तक बंद रहेंगे शिक्षण संस्थान, यूजीसी एक-दो दिन में कर सकता है फैसला

विवि-कॉलेजों की परीक्षाएं हो सकती हैं रद, 31 जुलाई तक बंद रहेंगे शिक्षण संस्थान, यूजीसी एक-दो दिन में कर सकता है फैसला

आंतरिक आकलन या पिछले सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर सभी को किया जा सकता है पास 

बाद में परीक्षा का भी  मिलेगा मौका, अगले एक-दो दिन में जारी हो जाएगी संशोधित गाइडलाइन



नई दिल्ली : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की लंबित परीक्षाएं भी अब रद की जा सकती हैं। हालांकि जो विश्वविद्यालय व कॉलेज ऑनलाइन या फिर घर बैठे ही छात्रों से ओपेन बुक जैसे तरीके से परीक्षाएं कराने में सक्षम होंगे, उन्हें इसे लेकर छूट भी मिलेगी।


 वैसे तो मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ज्यादातर विश्वविद्यालय और कॉलेजों ने परीक्षाएं कराने से हाथ खड़े कर दिए है। साथ ही इसकी रिपोर्ट भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी दोनों को दी है। मौजूदा समय में देश में करीब एक हजार विश्वविद्यालय और 45 हजार से ज्यादा कॉलेज हैं।