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Monday, May 10, 2021

फतेहपुर : छह महीने से वेतन के लिए भटक रहे 475 शिक्षक, गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन

फतेहपुर : छह महीने से वेतन के लिए भटक रहे 475 शिक्षक, गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन


फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग में वेतन को लेकर मारामारी है। छह महीने पहले नियुक्त 475 शिक्षकों के अभी तक वेतन नहीं मिला है। ये शिक्षक वेतन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी के शिकार हैं। इनके साथ नियुक्त अन्य जिलों के शिक्षकों को वेतन भुगतान किया जा चुका है।


प्रदेश के पिछड़े जिलों में शुमार और सूची में सातवें स्थान पर दर्ज जिले शिक्षा का स्तर मजबूत करने के लिए शासन ने पूरा जोर लगा रखा है। जिले के 26503 स्कूलों में सृजित शत प्रतिशत पद भरने के लिए शासन पूरा प्रयास कर रहा है। इसके तहत नवंबर 2020 में जिले के प्राथमिक स्कूलों के 475 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। पूरे छह महीने गुजर गए, लेकिन इन्हे वेतन के नाम पर एक धेला नहीं मिला है। ऐसे में ये शिक्षक आर्थिक तंगी के शिकार हैं। इन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल में पेट्रोल भराने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। खास बात तो यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग में शैक्षिक मूल अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराकर वेतन भुगतान कराने का प्रावधान है। इस लंबी अवधि में विभाग इन शिक्षकों के अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराने में असफल रहा है।

बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिले में नवनियुक्त तीन बीईओ को शिक्षकों के अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराने के लिए लगाया गया है। सत्यापन का काम पूरा होने पर वेतन जारी कर दिया जाएगा। ऑफलाइन सत्यापन पूरा होने पर बकाए वेतन के एरियर का भुगतान किया जाएगा।

गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन

अंतरजनपदीय तबादले पर आए दो सौ शिक्षक भी तीन महीने से वेतन के लिए भटक रहे हैं। इनके साथ आए 175 शिक्षकों को विभाग ने वेतन जारी कर दिया है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिन शिक्षकों का ब्योरा उनके जिलों से आ चुका है, उन्हें वेतन भुगतान कर दिया गया है। जिनका ब्यौरा प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें वेतन भुगतान नहीं किया गया है।

प्रयागराज : कोरोना संक्रमित शिक्षकों ने दिया प्रत्यावेदन, राहत के आसार, संगठन ने केवल बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का किया विरोध

प्रयागराज : कोरोना संक्रमित शिक्षकों ने दिया प्रत्यावेदन, राहत के आसार, संगठन ने केवल बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का किया विरोध


कोरोना ड्यूटी के दौरान संक्रमित शिक्षकों को वेतन जारी करने के मकसद से बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने रविवार को ऐसे शिक्षकों से प्रत्यावेदन लिया। तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर अपनी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट और दूसरी जांच के लिए दिए सैंपल आदि साक्ष्य के साथ आवेदन पत्र सौंपा।


प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने भी बीएसए को 23 शिक्षकों की सूची भेजते हुए वेतन जारी करने की मांग की है। शिक्षकों का वेतन रोकने की निंदा करते हुए कहा है कि कोरोना की रोकथाम में सिर्फ परिषदीय शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई जबकि अन्य संवर्ग के शिक्षकों व कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगनी चाहिए।


प्रयागराज:- इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम (आई. ट्रिपलसी) में अनुपस्थित पाए गए जिन शिक्षकों का अप्रैल माह का वेतन रोका गया है, उनमें सी कई शिक्षकों को राहत मिलने के आसार हैं। ड्यूटी पर तैनात तमाम शिक्षक खुद संक्रमित हो गए थे और इसी वजह से वे ड्यूटी पर नहीं पहुंच सके। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने ऐसे शिक्षकों से कोविड पॉजिटिव होने के प्रमाण सहित उनसे प्रत्यावेदन लिए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भी कई शिक्षकों के नाम बीएसए को दिए गए हैं।

कोविड संक्रमित जो मरीज होम आइसालेशन में हैं, उनका हालचाल जानने के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी आई. ट्रिपलसी में लगाई गई थी। निरीक्षण के दौरान आई. ट्रिपलसी में 92 शिक्षक अनुपस्थित मिले, जिनका अप्रैल माह 2021 का वेतन रोक लिया गया, जबकि इनमें से तमाम शिक्षक खुद कोविड से संक्रमित हो गए थे और इसी वजह से ड्यूटी पर नहीं पहुंच सके। शिक्षकों का कहना है कि संक्रमित कर्मचारियों को स्वास्थ्य लाभ के लिए 28 दिनों की छुट्टी दिए जाने का सरकारी नियम है, लेकिन शिक्षा विभाग ने इस नियम की अनदेखी की।


Sunday, May 9, 2021

कोविड ड्यूटी के दौरान कई शिक्षक संक्रमित और अब वेतन भी बाधित

कोविड ड्यूटी के दौरान कई शिक्षक संक्रमित और अब वेतन भी बाधित



प्रयागराज : कोरोना संक्रमण से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की कुशलता जानने के लिए इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम (आई. ट्रिपलसी) में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें से 92 शिक्षक ड्यूटी से नदारद मिल हैं, जिनका अप्रैल माह का वेतन रोक लिया गया है। हालांकि शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षकों में रोष है, क्योंकि इनमें से तमाम शिक्षक खुद कोविड संक्रमण का शिकार हो गए थे और इसी वजह से वे आई. ट्रिपलसी में ड्यूटी करने नहीं पहुंच सके।



शिक्षकों को ड्यूटी दी गई थी कि वे फोन के माध्यम से उन रोगियों के स्वास्थ्य की कुशलता पूछते रहें, जो कोविड संक्रमण के कारण होम आइसोलेशन में हैं। शिक्षक ड्यूटी पर आ रहे हैं या नहीं, इसके लिए आई. ट्रिपलसी का निरीक्षण कराया गया, जिसमें 92 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। ऐसे शिक्षकों को अप्रैल माह 2021 का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।


इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने कार्यालय आदेश भी जारी कर दिया है। उधर, शिक्षक में इस कार्रवाई से रोष है। उनका कहना है कि शिक्षकों ने जान हथेली पर लेकर अपनी ड्यूटी की । धनूपुर के सुरजीत गौतम, अनिल कुमार, संजय कुमार, फूलपुर के अंकित कुमार, उग्रसेन सिंह तोमर, शंकरगढ़ के शिवम मिश्र, सुरेंद्र कुमार समेत तमाम शिक्षक कोविड संक्रमण की चपेट में आ गए। शिक्षकों का आरोप है कि उनके प्रति सहानुभूति दिखाने की बजाय उनका वेतन रोकना अन्याय है।


संक्रमित शिक्षकों को नहीं मिल रहा स्वास्थ्य लाभ का समय

प्रयागराज : कोरोना पर नियंत्रण के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को भी जिम्मेदारी दी गई है। वह कोविड कंट्रोल रूम में ड्यूटी दे रहे हैं। पिछले दिनों कई शिक्षक ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गए थे। वे सभी आइसोलेशन में थे तभी दोबारा ड्यूटी पर बुलाया जाने लगा। शासन का निर्देश है कि 28 दिन बाद ही स्वस्थ होने पर ड्यूटी के लिए किसी कर्मचारी को बुलाया जाए।


पीड़ित शिक्षक उमाशंकर यादव का कहना है कि कमजोरी व अन्य समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। डॉक्टर ने सावधानी बरतने व आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी है। 92 अध्यापकों का अप्रैल का वेतन भी रोक दिया गया है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के जिला संयुक्त मंत्री अफरोज अहमद ने बताया कि इस प्रकरण में बीएसए से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा कि संक्रमण के शिकार अध्यापक साक्ष्य के साथ प्रत्यावेदन दें तो उनका वेतन अवमुक्त कर दिया जाएगा। अजय सिंह ने भी इसका समर्थन किया है।

Saturday, May 8, 2021

वेतन न मिलने से इलाज नहीं करवा पा रहे अंतर्जनपदीय व नवनियुक्त बेसिक शिक्षक

वेतन न मिलने से इलाज नहीं करवा पा रहे अंतर्जनपदीय व नवनियुक्त बेसिक शिक्षक


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में नवनियुक्त और तबादला पाये शिक्षकों को पिछले तीन माह से अधिकारियों की लापरवाही से वेतन नहीं मिल पाया है। इस स्थिति में कोरोना संक्रमण व अन्य बीमारियों की चपेट में आये शिक्षक अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। इस संबंश में शिक्षक संगठनों की ओर से मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक को अधिकारियों की ओर से लापरवाही कि लिखित शिकायत भेजी गयी है। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ लखनऊ मंडल की ओर से मांग करते हुए कहा गया कि शिक्षकों को वेतन तत्काल जारी कराया जाये, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ की ओर से भी तत्काल वेतन भुगतान कराये जाने
की मांग की गयी है।


सत्यापन न होने से शिक्षकों का अधर में लटका वेतन

यूनाइटेड टीचर एसोसिएशन यूटा की ने भी नवनियुक्त शिक्षकों के अभिलेखों की जांच में देरी पर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी और अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार को ज्ञापन भेजा है। इसके साथ ही महानिदेशक भी पत्र लिखा है। यूटा के प्रदेश
अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कहा कि 69 हजार भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पाये शिक्षकों के अभिलेखों के सत्यापन की मांग की गयी है ताकि समय से वेतन मिल सके।


एलपीसी आने के बाद भी वेतन नहीं
इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक संगठन की कार्यकारी अध्यक्ष रीना त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षकों के एलपीसी आने | के बाद भी वेतन नहीं किया रहा है, इससे परेशानी हो रही है।


वेतन न जारी करना गलत
इस संबंध में महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्या कहती है कि शिक्षकों का वेतन भुगतान न किया जाना गलत है, अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।


अधिकारी ध्यान दें
इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री खुश्तर रहमान कहते है कि पाये शिक्षको को शिक्षको सारा काम पूरा हो चुका है, वहीं नवनियुक्त शिक्षकों को जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है वेतन दिया जाना चाहिए, अधिकारी लापरवाही न करें।


परेशानी में हैं शिक्षक
इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मंडलीय अध्यक्ष आदेश तत्काल जारी किया जाना चाहिए, ताकि कोरोना संक्रमण काल में परेशानी से जूझ रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।



शिक्षकों के वेतन संबंधी जो भी परेशानी है उसे तत्काल निपटाया जायेगा, इस संबंध में सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा निर्देश भी जारी किए गये है। - पीएन सिंह, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक

Thursday, May 6, 2021

सत्यापन के फेर में अटका 69000 नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन

सत्यापन के फेर में अटका 69000 नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन


गोरखपुर। जिले में तैनात 537 शिक्षकों का वेतन दस्तावेज के सत्यापन और कोविड महामारी के चलते अटक गया है। संबंधित बोर्ड से हाईस्कूल से लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विश्वविद्यालयों से अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों की सुस्त प्रक्रिया के चलते बमुश्किल अभी 610 शिक्षकों के सत्यापन कार्य को ही पूरा किया जा सका है। शेष शिक्षकों को सत्यापन प्रक्रियाधीन है। कई दफा इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया है, मगर मामला जस का तस है।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री श्रीधर मिश्रा ने बताया कि संघ की ओर से वेतन भुगतान को लेकर सत्यापन में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है। आसपास के जिलों से सत्यापन कार्य को पूरा करा लिया गया है, मगर मगध विश्वविद्यालय समेत अन्य बाहरी विवि से सत्यापन कार्य पूरा होने में समय लग जा रहा है। बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि सत्यापन कार्य में तेजी लाने के लिए संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यालय से पत्राचार कराया गया है। आसपास के जनपद का मामला होने पर सत्यापन के लिए कर्मचारी तक को भेज दिया जाता है। ज्यादा दूरी की वजह से पत्राचार पर ही पूरी व्यवस्था टिकी है ।

Wednesday, May 5, 2021

अंतर्जनपदीय स्थानांतरित शिक्षकों को तीन महीने से वेतन का इंतजार

अंतर्जनपदीय स्थानांतरित शिक्षकों को तीन महीने से वेतन का इंतजार


प्रयागराज : अंतर जनपदीय तबादले से जिले में आए लगभग 700 परिषदीय शिक्षकों को तीन महीने बाद भी वेतन का इंतजार है। 31 दिसंबर को हुए ट्रांसफर के बाद शिक्षकों को उनके नए स्थानांतरित जिलों में एक और दो फरवरी को कार्यमुक्त करके 4 फरवरी को पदस्थापित किया गया।


तीन महीने बीतने के बाद भी अंतर्जनपदीय और पारस्परिक स्थानांतरण से आए शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जा सका है। इन स्थानांतरित शिक्षकों की सेवा पुस्तिका और एलपीसी 12 फरवरी को ही भेजे जाने का निर्देश हुआ था।


लेकिन तीन बार सचिव बेसिक शिक्षा परिषद और शिक्षा निदेशक के आदेश के बाद भी भुगतान प्रारम्भ नहीं किया जा सका है। स्थानांतरण से आए शिक्षक सुधेश पांडेय का कहना है कि वेतन भुगतान न होने से शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


शिक्षकों के लोन, बच्चों की फीस आदि बहुत से खर्चें हैं जो वेतन न मिलने के कारण बाधित हैं और संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। शिक्षक विवेकानंद ने कहा कि विभाग को शिक्षकों की समस्या पर गंभीरता से विचार करते हुए तुरन्त वेतन भुगतान करना चाहिए। शिक्षक हरिशंकर ओझा, राजेन्द्र प्रसाद, प्रशांत मिश्रा, आशुतोष शुक्ला, संजीव त्रिपाठी, राकेश विश्वकर्मा, शेषमणि शुक्ला, विनीत जायसवाल, भावना श्रीवास्तव, नेहा मिश्रा, नीलम चौधरी ने बीएसए से वेतन भुगतान की मांग की है।