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Saturday, September 26, 2020

हाथरस : सरप्लस समायोजित कार्यभार ग्रहण न करने वाले 34 शिक्षकों का वेतन बहाल किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी

हाथरस : सरप्लस समायोजित कार्यभार ग्रहण न करने वाले 34 शिक्षकों का वेतन बहाल किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी



Monday, September 21, 2020

हाथरस : परिषदीय शिक्षकों के वेतन खातों व पैन नंबर में परिवर्तन न करने के सम्बन्ध में

हाथरस : परिषदीय शिक्षकों के वेतन खातों व पैन नंबर में परिवर्तन न करने के सम्बन्ध में



Wednesday, September 16, 2020

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची।















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Friday, September 11, 2020

मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय

मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 1994 से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान के आदेश को लेकर लंबित अवमानना याचिका की शीघ्र सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि आदेश की अवहेलना करने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बलिया संतोष कुमार राय के खिलाफ आरोप तय किया गया है। कोविड-19 के प्रकोप के कारण अभी सामान्य तौर पर न्यायालय नहीं चल रहा है। स्थिति सामान्य होने पर सुनवाई की मांग को लेकर दोबारा अर्जी दाखिल की जाए।


यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा की अवमानना याचिका पर प्रस्तुत शीघ्र सुनवाई की अर्जी को निरस्त करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता बीएन सिंह का कहना है कि याची दो जुलाई 1994 से जूनियर हाईस्कूल बलिया में बिना वेतन के पढ़ा रहा है। वह भुखमरी की कगार पर है। उसकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में की गई है। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2002 को उसकी याचिका मंजूर करते हुए बीएसए को नियमित वेतन भुगतान का निर्देश दिया था। साथ ही नौ फीसदी ब्याज के साथ बकाया वेतन का तीन माह में भुगतान करने का भी निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नहीं किया गया।


अवमानना याचिका दाखिल होने पर कोर्ट ने आदेश पालन का समय दिया लेकिन फिर भी पालन नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का अवमानना आरोप तय करते हुए जवाब मांगा है। 23 जुलाई 2019 को याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में लॉक डाउन के कारण सुनवाई नहीं होने पर याची ने कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। कोर्ट ने न्यायालय के सामान्य रूप से कार्य करने पर प्रार्थना पत्र देने की सलाह देते हुए अर्जी खारिज कर दी है।

Saturday, September 5, 2020

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित।

लखनऊ : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं।

कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी। इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे।विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है। इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं।


शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी : शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियां भी विश्वविद्यालयों ने भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।

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एक साल से लंबित हैं वेतन संरक्षण के मामले

लखनऊ -राज्य मुख्यालय : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे फिलहाल पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी।




इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे। विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है।


 इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए विश्वविद्यालयों की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियों भी विश्वविद्यालयों भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं।


लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।


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Wednesday, August 26, 2020

खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समकक्ष वेतन और भत्ते देने की मांग

खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समकक्ष वेतन और भत्ते देने की मांग

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय विद्यालय निरीक्षक संघ ने खंड शिक्षा अधिकारियों को केंद्र सरकार के विद्यालय प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समान वेतन और भत्ते देने की मांग की है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश द्विबेदी से मुलाकात कर लंबित मांगों पर बात की। 


साथ ही 32 सालों से प्रोन्नति नहीं मिलने से अधिकारियों का मनोबल कमजोर होने का भी मुद॒दा उठाया। मंत्री ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में राज्य अत कर्म परिषद के अध्यक्ष एसपी तिवारी, संघ के महामंत्री वीरेंद्र , उपाध्यक्ष संजय शुक्ल, संयुक्त मंत्री आरपी यादव व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।