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Sunday, July 12, 2020

69000 भर्ती : नकल माफिया एसटीएफ को भी दे रहे मात, सुराग नहीं


69000 भर्ती : नकल माफिया एसटीएफ को भी दे रहे मात, सुराग नहीं

-चंद्रमा यादव समेत चार आरोपी महीने भर बाद भी पकड़ से दूर
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-पिछले महीने स्थानांतरित कर एसटीएफ को सौंपी गई थी विवेचना


प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह में शामिल नकल माफिया एसटीएफ को भी मात दे रहे हैं। मामले में फरार चल रहे चंद्रमा यादव समेत चार आरोपी महीने भर बाद भी नही ंपकड़े जा सके हैं। शासन से सोरांव पुलिस से स्थानांतरित कर विवेचना पिछले महीने एसटीएफ को सौंपी थी। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ चार जून को हुआ था। सोरांव पुलिस ने मामले मेें महज छह दिन के भीतर 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें सरगना केएल पटेल भी शामिल था।


प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नौ जून को शासन ने विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी। जिसके बाद टीईटी पेपर लीक मामले के आरोपी चंद्रमा यादव को भी मामले में वांछित किया गया। मायापति दुबे, आलोक उर्फ धर्मेंद्र व दुर्गेश समेत तीन आरोपी पहले से फरार थे। एसटीएफ की टीम ने शहर में विभिन्न स्थानों केअलावा कौशांबी, प्रतापगढ़, भदोही में दबिश दी लेकिन आरोपियों का अब तक कोई सुराग नहीं हासिल कर पाई है। मामले में एसटीएफ अफसरों का यही कहना है कि फरार आरोपियों के हरसंभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास लगातार जारी हैं। विवेचना प्रचलित है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


शिवकुटी में दर्ज केस में भी नहीं हुई कार्रवाई
69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के सरगना केएल पटेल पिछले साल रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली की कोशिश करते पकड़े गए गिरोह के भी संपर्क में था। जिस पर शिवकुटी थाने में दर्ज मामले मेें उसे आरोपी बनाया गया था। सोरांव मामले में गिरफ्तारी के बाद शिवकुटी पुलिस ने भी अपने मुकदमे में उसका रिमांड बनवाया था। हालांकि अब तक इस मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके खिलाप साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। साक्ष्यों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

Wednesday, June 24, 2020

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा : सरगना ने भाई-बहन को भी पास कराई परीक्षा


69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा : सरगना ने भाई-बहन को भी पास कराई परीक्षा


प्रयागराज : सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा की जांच में जुटी स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) को नया सुराग मिला है। पता चला है कि गिरोह के सरगना डॉ. केएल पटेल की मदद से उसके एक भाई और बहन ने भी लिखित परीक्षा पास की है। शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में दोनों को अच्छे अंक मिले हैं। इस आधार पर एसटीएफ छानबीन कर रही है।


कई छात्रों ने एसटीएफ को अलग माध्यम से दी गई शिकायतों में कई अभ्यर्थियों के नाम और अंक के बारे में भी जानकारी दी है। बताया गया कि प्रतापगढ़, भदोही, प्रयागराज, कौशांबी के अलावा दूसरे जिले के कई ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने गिरोह के जरिए पैसा देकर लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की है। हालांकि यह साफ नहीं हुआ है कि उन्हें कितने अंक मिले हैं लेकिन माना जा रहा कि 110 से ज्यादा नंबर मिले होंगे।


वहीं, भाई और उसकी बहन को भी करीब 120 से अधिक नंबर मिलने की बात कही गई है। लगातार मिल रही शिकायतों को एसटीएफ के अधिकारी तस्दीक कर रहे हैं। जिन अभ्यर्थियों के बारे में सूचनाएं अब तक मिली हैं, उनकी सच्चाई के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने और दो अभ्यर्थियों समेत 12 लोगों की गिरफ्तारी के बाद मामले की विवेचना एसटीएफ कर रही है। जांच शुरू करने के साथ ही एसटीएफ के पास शिकायतें आ रही हैं, जिसकी सच्चाई का पता अधिकारी लगा रहे हैं। हालांकि वह कुछ भी बोलने से अभी कतरा रहे हैं।


फरार अभियुक्तों की तलाश
मामले में फरार चल रहे स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव, मायापति दुबे, दुर्गेश पटेल और संदीप पटेल समेत अन्य की तलाश में एसटीएफ की दो टीम काम कर रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी भी की जा रही है, मगर कोई पकड़ में नहीं आ सका है।

Sunday, June 21, 2020

69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार : अब STF करेगी अभ्यर्थियों की बातचीत के वायरल आडियो की जांच


69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार : अब STF करेगी अभ्यर्थियों की बातचीत के वायरल आडियो की जांच


शिक्षक भर्ती में सेटिंग का एक अन्य वीडियो भी हुआ था वायरल


प्रयागराज। शिक्षक भर्ती परीक्षा में रुपये लेकर पास कराने की बातचीत संबंधी वीडियो मिलने के बाद एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। वैसे यह परीक्षा में सेटिंग चलने के आरोपों से संबंधित इकलौता वीडियो नहीं। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद एक और ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हआ था। इसमें एक व्यक्ति किसी चयनित अभ्यर्थी से बात करते हुए सुनाई पड़ रहा था। 


खास बात यह है कि 140 नंबर पाकर सफल हुआ अभ्यर्थी बातचीत में जुगाड़ से परीक्षा पास करने की बात भी कबूलता सुनाई पड़ता है। दूसरे व्यक्ति ने जब उससे यह पूछा कि उसने परीक्षा पास करने के लिए कितने रुपये दिए, तो वह यह कहता सुनाई देता है कि इस बारे में चाचा ही बता पाएंगे। हालांकि वह चाचा का नाम नहीं बताता। अभ्यर्थी यह भी कहता सुनाई पड़ता है कि परीक्षा में उसकी बहन भी सफल हुई है।


69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार खंगाल रही एसटीएफ अब वायरल आडियो की भी जांच करेगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने एसटीएफ के महानिदेशक को अनुरोध पत्र भेजा है।...


प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार खंगाल रही एसटीएफ अब वायरल आडियो की भी जांच करेगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने एसटीएफ के महानिदेशक को अनुरोध पत्र भेजा है। वायरल आडियो संदेश में दो कथित अभ्यर्थी परीक्षा पास कराने के लिए लेन-देन की चर्चा कर रहे हैं, इसकी फोरेंसिक जांच चल रही है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।


सोशल मीडिया पर फरवरी 2020 में एक आडियो संदेश खूब वायरल हुआ। इसमें दो लोग परीक्षा पास कराने के लेन-देन पर चर्चा कर रहे थे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इसका संज्ञान लिया और 11 मार्च को सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उप्र को आदेश दिया कि इस आडियो की फोरेंसिक जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। सचिव परीक्षा नियामक ने 12 मार्च को आडियो संदेश की सीडी फोरेंसिक जांच के लिए निदेशक राजकीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला महानगर लखनऊ भेजी।


कोरोना संक्रमण बढऩे से इस मामले की जांच रिपोर्ट परीक्षा संस्था को कई माह बीतने पर भी नहीं मिली। 11 मई को सचिव परीक्षा नियामक ने ईमेल पर पत्र भेजकर जांच आख्या मांगी, फिर भी कोई जवाब नहीं आया। सचिव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा से जांच रिपोर्ट दिलाने का अनुरोध किया, डीजी को भी इसमें सफलता नहीं मिली, तब राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान प्रयागराज के प्रोफेसर राकेश कुमार श्रीवास्तव को जांच आख्या लेने भेजा, वह भी खाली हाथ लौट आए। सचिव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को इससे अवगत कराया।


डीजी के निर्देश पर सचिव परीक्षा नियामक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने स्पेशल टास्क फोर्स के महानिरीक्षक को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले के साथ वायरल आडियो संदेश की भी एसटीएफ जांच करके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कराए। असल में फोरेंसिक लैब पुलिस महकमे के अधीन है, उसे जांच रिपोर्ट जल्द मिल जाएगी। सचिव ने एसटीएफ को सारे रिकॉर्ड भेज दिए हैं।

Friday, June 19, 2020

शिक्षकों की ऐसी भी भर्ती जिसकी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पड़ा जांच का ‘जाल’, करीब 40 हजार पद खाली

शिक्षकों की एक भर्ती ऐसी भी है, जिसकी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जांच का ‘जाल’ 

करीब 40 हजार पद खाली, टास्क फोर्स की जांच पर पड़ा पर्दा

 

शिक्षकों की एक भर्ती ऐसी भी है, जिसकी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जांच का ‘जाल’ फेंका गया। प्रदेश के चार हजार से ज्यादा कालेजों में पदों के सत्यापन का जिम्मा टास्क फोर्स को मिला। एक साल हो रहा लेकिन, अब तक जांच के जाल में कितने पद हैं? ये सार्वजनिक नहीं हो सका है और न भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ। एडेड माध्यमिक कालेजों में प्रवक्ता और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक चयन की ये भर्ती पदों के हिसाब से अब तक की सबसे बड़ी है।


अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक चयन उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड करता है। 2019 में चयन बोर्ड ने पहली बार जिला विद्यालय निरीक्षकों से ऑनलाइन अधियाचन (रिक्त पदों का ब्योरा) मांगा। जुलाई से सात अगस्त तक करीब 40 हजार अधियाचन मिले थे। उनमें से डीआइओएस ने कितने पदों को सत्यापित किया, ये स्पष्ट नहीं है। 


भर्ती का विज्ञापन जारी करने से पहले माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पदों की संख्या ज्यादा होने पर सवाल उठाया, तर्क था कि कालेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्रओं की संख्या से शिक्षकों के स्वीकृत पद अधिक हैं। जिलों से मिले अधियाचन का सत्यापन कराने के लिए टास्क फोर्स का गठन हुआ। जांच में सामने आया कि कई कालेजों में छात्रों की संख्या कम है और वहां कार्यरत शिक्षक ज्यादा हैं

Friday, June 12, 2020

शिक्षक भर्ती के मास्टरमाइंड के पास थे कई मुन्नाभाई, बुंदेलखंड के 100 से ज्यादा लोगों से साधा था संपर्क


शिक्षक भर्ती के मास्टरमाइंड  के पास थे कई मुन्नाभाई,  बुंदेलखंड के 100 से ज्यादा लोगों से साधा था संपर्क



झांसी। शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड डॉक्टर केएल पटेल ने पूरे बुंदेलखंड में अपना जाल फैला रखा था। सिंडिकेट से जुड़े गुर्गे सरकारी भर्तियां निकलते ही सक्रिय हो जाते थे और फॉर्म भरने वालों से संपर्क साधने लगते थे। डॉक्टर के पास कई मुन्नाभाई थे, जो परीक्षा में बतौर सॉल्वर बनाए जाते थे। पेपर आउट करने से लेकर नकल तक का ठेका लिया जाता था। बताया गया कि बुंदेलखंड के 100 से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए डॉक्टर के गुर्गों ने संपर्क साधा था। इसमें झांसी के गरौठा क्षेत्र में रहने वाला एक युवक भी शामिल है।
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बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाला मास्टरमाइंड झांसी के बंगरा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नोटा में मेडिकल ऑफिसर के पद पर साल 2017 से तैनात था। पिछले तीन सालों में डॉक्टर और फर्जीवाड़ा करने वाले सिंडिकेट से जुड़े सदस्यों ने बहुत गहरी जड़ें कर ली थीं। शिक्षक भर्ती कराने के लिए गैंग के गुर्गों ने पूरे बुंदेलखंड के सौ से ज्यादा लोगों पर फंदा डालने की कोशिश की। इसमें से कई लोग गैंग के जाल में फंस भी गए। सूत्रों ने बताया कि इसमें गरौठा का रहने वाला केएल पटेल का जान-पहचान वाला युवक भी शामिल है। इससे भी शिक्षक बनाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए थे। एक-एक सदस्य से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 10 से 20 लाख रुपये तक ऐंठे गए। बताया गया कि आवेदक से अलग-अलग तरीके से सौदा तय होता था। सॉल्वर बैठाने, पेपर आउट और नकल कराने के लिए अलग-अलग दरें तय थीं। इसमें सबसे ज्यादा पैसा सॉल्वर बैठाने के लिए लिया जाता था।

शिक्षक भर्ती मामलाः जाली मार्कशीट बनाने वाले गिरोह से भी जुड़े डॉक्टर के तार


शिक्षक भर्ती मामलाः जाली मार्कशीट बनाने वाले गिरोह से भी जुड़े डॉक्टर के तार


झांसी में तैनात 69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चिकित्सक केएल पटेल के तार जाली मार्कशीट बनाने वाले गिरोह से भी जुड़े होने की आशंका है। पता चला है कि सरकारी नौकरी लगवाने के लिए डॉक्टर कई विश्वविद्यालयों के जाली मार्कशीट व डिग्री तैयार करवाने का ठेका भी लेता था।


इसके लिए अभ्यर्थी से अलग से पैसे लिए जाते थे। बताया गया कि डॉक्टर बुंदेलखंड, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी, आगरा समेत देश-प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों के जाली दस्तावेज तैयार करवाता था। फर्जी नियुक्तियां कराकर करोड़ पति बने केएल पटेल ने खुद को दूसरों की नजरों से बचाने के लिए भी तरीके अपनाए थे। किसी को शक न हो, इसलिए वह बहुत साधारण बना रहता था।


यहां तक की वो कार तक नहीं रखता था। प्रयागराज आने-जाने के दौरान वह ट्रेन में यात्रा करता था। क्षेत्रीय स्तर पर आने-जाने के लिए मोटरसाइकिल का उपयोग करता था। स्टाफ से भी कम बातचीत करता था। जैसे ही लोगों को उसके शिक्षक भर्ती का मास्टर माइंड होने की जानकारी हुई तो सब भौचक रह गए हैं।
पता चला है कि फूलपुर का रहने वाला केएल पटेल बार-बार अपने घर चला जाता था। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि वह बहुत कम समय झांसी में रहता था। बिना बताए फूलपुर चला जाता था। फर्जीवाड़े सामने आने के बाद अब अंदर खाने से उससे जुड़ी जानकारियां सामने आने लगी हैं।


डॉक्टर की डिग्री पर भी लोगों को शक
फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति कराने वाले डॉक्टर केएल पटेल की डिग्री, मार्कशीट पर भी कई लोगों को शक है। स्वास्थ्य विभाग में दिन भर इस बात को लेकर चर्चा होती रही कि कहीं डॉक्टर ने खुद भी फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर नौकरी तो नहीं पा ली है? जाहिर सी बात है कि एसटीएफ की जांच में इन बिंदुओं की भी पड़ताल होगी। ऐसे में डॉक्टर के शैक्षणिक दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जा सकता है।