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Thursday, October 29, 2020

बदलेगा परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने का तौर तरीका - स्कूल शिक्षा महानिदेशक

बदलेगा परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने का तौर तरीका - स्कूल शिक्षा महानिदेशक

 
लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाने के तौर-तरीके में बदलाव देखने को मिलेगा। बच्चों को पढ़ाने के लिए पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पाठ्यपुस्तकों और हस्तपुस्तिकाओं का इस्तेमाल तो जारी रहेगा, लेकिन कक्षा एक से तीन तक के बच्चे भाषाई कौशल और गणितीय दक्षता सरलता और रुचिकर गतिविधियों के माध्यम से हासिल कर सकें, अब कक्षा शिक्षण में जोर इस पर होगा।


 इसके लिए स्कूलों और शिक्षकों को नई शिक्षण सामग्री भी मुहैया करायी जा रही है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि शिक्षण संग्रह में पढ़ाने की तकनीक में वृद्धि के लिए जरूरी गतिविधियों का इस्तेमाल बताया गया है।

Saturday, September 12, 2020

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

 
अब माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए भी वीडियो बनाएंगे। इसके लिए एनसीईआरटी विषय और पाठ के नाम बताएगा और उसके मुताबिक विभाग शिक्षकों को चयनित कर वीडियो बना कर भेजेगा। इसे पीएम ई-विद्या चैनल पर चलाया जाएगा। अभी तक यूपी के शिक्षकों के वीडियो यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए ही प्रसारित किए जा रहे हैं। 



हिन्दी में वीडियो बनाने के लिए यूपी से साधा संपर्कएनसीईआरटी लॉकडाउन में हर कक्षा के लिए ई-विद्या चैनल शुरू किया है और इस पर कक्षावार वीडियो का प्रसारण होता है। ये चैनल निशुल्क हैं और पूरे देश में प्रसारित किए जा रहे हैं। हिन्दी पट्टी के प्रदेशों के लिए पाठों के वीडियो हिन्दी में बनवाने के लिए एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क साधा है। दरअसल, ये ख्याल उन्हें यूपी के वीडियो देख कर आया है। 


लॉकडाउन के दौरान यूपी बोर्ड ने दूरदर्शन व स्वयंप्रभा (अब पीएम ई विद्या) चैनल पर स्लॉट लेकर प्रसार शुरू किया। इस चैनल पर वीडियो चलाने के लिए एनसीईआरटी का अनुमोदन लेना पड़ता है। इन वीडियो को देखने के बाद ही एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क से साधा।860 वीडियो एनसीईआरटी ने पास किएयूपी ने लॉकडाउन के दौरान ही वीडियो बनवाने की शुरुआत की और हजारों की संख्या में शिक्षकों ने वीडियो भेजे। इनमें से 860 वीडियो एनसीईआरटी ने प्रसारण के लिए पास कर दिए। 


निदेशालय स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है जो वीडियो का परीक्षण कर एनसीईआरटी भेजती है या रिजेक्ट करती है। वीडियो बनाने वाले 134 शिक्षकों को शिक्षक दिवस के मौके पर ई प्रमाणपत्र भी दिए गए। 

Monday, September 7, 2020

दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी


दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी


Friday, June 19, 2020

साक्षात्कार : नई शिक्षा नीति से निकलेगी स्वर्णिम भविष्य की राह : निशंक


साक्षात्कार : नई शिक्षा नीति से निकलेगी स्वर्णिम भविष्य की राह : निशंक


कोरोना संक्रमण की आंच जब भारत में पड़ने लगी, वह छात्रों के लिए परीक्षाओं का काल था। दसवीं, बारहवीं के बाद भविष्य के सपने देखने और बुनने का काल था। लेकिन कोरोना और लॉकडाउन ने सब कुछ बीच में ही रोक दिया। चिंता बड़ी थी। परीक्षा के नतीजों के लिए अभी इंतजार हो रहा है, लेकिन अच्छी बात यह हुई कि पढ़ाई नहीं रुकी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इसे सुनिश्चित किया। दैनिक जागरण के संपादक मंडल के साथ निशंक ने नई शिक्षा नीति, भविष्य के रोडमैप को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत है एक अंश :


सवाल : लॉकडाउन के बाद पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन स्कूलों के खुलने को लेकर असमंजस है। स्कूलों को कब तक खोलने की योजना है?
जवाब : कोरोना संकट के कठिन समय में हमने चुनौतियों को अवसर में तब्दील करने की कोशिश की है। हम ऑनलाइन माध्यम से छात्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। रही बात स्कूलों को खोलने की, तो परिस्थितियों के आधार पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा। जब भी स्कूल खोले जाएंगे, गृह और स्वास्थ्य मंत्रलय के निर्देशों के बाद ही यह फैसला लिया जाएगा।


सवाल : देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण की स्थिति उतनी व्यापक नहीं है। ऐसी स्थिति में इन क्षेत्रों में स्कूलों को खोलने में क्या संकोच है?
जवाब- कोरोना संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्रीजी लगातार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। मैं भी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों और छात्रों के साथ संवाद कर रहा हूं। राज्यों की जो परिस्थितियां होंगी, उसके आधार पर वे निर्णय ले सकते हैं। लेकिन, उन्हें गृह और स्वास्थ्य मंत्रलय के साथ चर्चा करके ही यह फैसला लेना होगा।


सवाल- ऑनलाइन के जरिये क्या शिक्षा की मंशा पूरी हो पाएगी? फिलहाल यह पढ़ाई छात्रों पर बोझ जैसा दिखने लगा है, जिसमें घंटों कंप्यूटर के सामने बच्चे बैठे होते हैं।
जवाब- ऐसी परिस्थितियों में हम कर भी क्या सकते हैं? ऑनलाइन के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है। हम कहना चाहते हैं, कि ऑनलाइन शिक्षा भी अब जरूरी है। दूरस्थ शिक्षा के जरिये पहले से ही शिक्षा दी जा रही है। जब स्थिति सामान्य होगी, तब ऑनलाइन और क्लास रूम दोनों के जरिये शिक्षा कैसे और कितने समय देनी है, इस पर फैसला लिया जाएगा।


सवाल- लेकिन दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता हमेशा से कठघरे में रही है। इसे दोयम दर्जे का माना जाता है।
जवाब- ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर हम काफी सचेत हैं। इसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाने से जुड़े सभी जरूरी कदमों पर विचार करने को कहा गया है। दूरस्थ शिक्षा के स्तर में कोई कमी नहीं होने देंगे। हर तीन महीने में अपने स्तर पर इसकी समीक्षा करेंगे।


सवाल- दूरदराज या ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे बच्चे जिनके पास कंप्यूटर नहीं हैं, उनके लिए ऑनलाइन शिक्षा का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में उन्हें पढ़ाने की क्या योजना है?
सवाल- यह बात सही है कि अब भी बड़ी संख्या में छात्रों के पास कंप्यूटर और इंटरनेट नहीं है। ऐसे में हम दूसरे माध्यमों से भी उन तक पहुंचने और उन्हें पढ़ाने की योजना पर काम कर रहे है। हाल ही में हमने स्वयंप्रभा के 32 चैनलों में से स्कूलों के लिए 12 नए चैनल शुरू करने का फैसला लिया है। पीएम-ई-विद्या के तहत वन क्लास-वन चैनल योजना है। इसमें पहली से बारहवीं तक के प्रत्येक क्लास के लिए एक चैनल होगा। फिर भी जो छात्र इसमें भी छूटेंगे, उन्हें रेडियो से जरिये पढ़ाने को लेकर भी काम कर रहे हैं।


सवाल- नई शिक्षा नीति में निजी क्षेत्र को स्वायत्तता न देने जैसी आशंका जताई जा रही है। हकीकत क्या है?
जवाब- नहीं ऐसा नहीं है। हम तो स्वायत्तता के पक्षधर हैं। मोदी सरकार के आने के बाद हम ज्यादा से ज्यादा संस्थानों को स्वायत्तता दे रहे हैं। हाल ही में 20 संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इनमें 10 सरकारी और 10 निजी संस्थान हैं।


सवाल- उच्च शिक्षण संस्थान में प्रवेश के लिए कट ऑफ 98 फीसद या उससे ज्यादा जा रहा है। ऐसे में आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में छात्रों को प्रवेश नहीं मिलता है। इस विसंगति को कैसे ठीक करेंगे?
जवाब- सभी संस्थानों के प्रवेश के अपने नियम हैं और अपनी क्षमता है। इसके अलावा हम सौ शीर्ष संस्थानों में ऑनलाइन कोर्स शुरू करने जा रहे हैं। इसके शुरू होने से यह गैप खत्म होगा और जिन्हें रेगुलर प्रवेश नहीं मिल पाएगा, वे ऑनलाइन या दूरस्थ के जरिये इन संस्थानों से पढ़ाई कर सकेंगे।


सवाल- उच्च शिक्षण संस्थानों को लेकर जब भी दुनिया की कोई रैंकिंग जारी होती है, वह दिन शर्मिदगी भरा होता है, क्योंकि हमारे संस्थान उस रैंकिंग में नहीं दिखते हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?
जवाब- देश के लोगों को अब शर्मिदा होने की जरूरत नहीं है। जो स्थिति आप बता रहे हैं, वह 2013 के पहले की स्थिति थी। लेकिन अब हमारे संस्थान क्यूएस रैंकिंग और टाइम रैंकिंग दोनों में आते हैं। हमारे संस्थानों से पढ़े बच्चे आज दुनियाभर की शीर्ष कंपनियों में अग्रणी भूमिका में हैं।


सवाल- क्या पाठ्यक्रम में बदलाव की भी कोई योजना है?
जवाब- हमेशा प्रत्येक पांच वर्ष में पाठ्यक्रम में परिवर्तन होता है। नई शिक्षा नीति में हमारा फोकस ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान के साथ भारत केंद्रित होगा। ऐसे में जब हम भारत केंद्रित की बात कर रहे हैं, तो पाठ्यक्रम में भी बदलाव होगा। उसे जोड़ेंगे। जो भारत के लिए गौरव की बात है। नई शिक्षा नीति संस्कारों से युक्त होगी।

Thursday, May 7, 2020

स्कूलों के लिए सरकार ने तैयार किया मास्टर प्लान, बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित अभिभावकों को मिलेगी राहत

स्कूलों के लिए सरकार ने तैयार किया मास्टर प्लान, बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित अभिभावकों को मिलेगी राहत।




एचआरडी मंत्रालय ने स्कूलों के लिए एक सेफ्टी गाइड लाइन तैयार करने का भी काम शुरु किया है। जिसे लाकडाउन खत्म होने से पहले ही तैयार कर सभी शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की योजना है।

नई दिल्ली : कोरोना संकट के बीच बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावकों के लिए यह खबर थोड़ी राहत देने वाली है। जिसमें लॉकडाउन खत्म होने के बाद स्कूलों में प्रवेश,नामांकन, अधूरी रह गई बोर्ड परीक्षाओं और मूल्यांकन जैसे कामों को शुरु करने की अनुमति मिल सकती है। इन गतिविधियों के संचालन की इजाजत अभी सिर्फ ग्रीन जोन में रहेगी। स्थिति को देखते हुए इसे बाद में हॉट स्पॉट को छोड़कर दूसरे सभी क्षेत्रों में भी शुरु करने की अनुमति दी जा सकती है।

इस बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 17 मई को लाकडाउन खत्म होने के बाद केंद्रीय विद्यालयों की प्रवेश प्रक्ति्रया को शुरु करने के संकेत दिए है। इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों के लिए एक सेफ्टी गाइड लाइन तैयार करने का भी काम शुरु किया है। जिसे लाकडाउन खत्म होने से पहले ही तैयार कर सभी शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की योजना है। फिलहाल इस काम में एनसीईआरटी और केंद्रीय विद्यालय संगठन को लगाया गया है।


बच्चों की पढ़ाई को लेकर फैसला जून के बाद

प्रवेश प्रक्रिया को स्कूलों के गर्मी की छुट्टियों से खुलने से पहले ही पूरी करने की तैयारी है। वैसे भी केंद्रीय विद्यालयों सहित देश के ज्यादतर स्कूलों में 15 मई के बाद गर्मी की छुट्टी शुरू हो जाएगी, जो करीब 30 जून तक रहेगी। इस बीच गर्मी में अतिरिक्त क्लास लगाने की योजना को भी टाल दिया गया है। यानी अब स्कूलों में पढ़ाई को लेकर कोई भी फैसला जून के बाद स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा।


स्कूलों के लिए सेफ्टी प्लान तैयार करने में जुटे विशेषज्ञों के मुताबिक वह सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखकर प्लान तैयार कर रहे है। खासकर जो क्षेत्र कोरोना के संक्त्रमण से पूरी तरह से मुक्त है, वहां शैक्षणिक गतिविधियों को शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं है। बाकी क्षेत्रों में भी कुछ प्रतिबंधों के साथ इन्हें शुरू किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए स्थानीय प्रशासन की अनुमति जरूरी रहेगी। गौरतलब है कि स्कूलों का शैक्षणिक सत्र में वैसे तो अप्रैल से ही शुरू हो गया है, लेकिन लाकडाउन के चलते स्कूलों के बंद होने से अभी तक प्रवेश, नामांकन जैसी प्रक्ति्रयाएं अटकी पड़ी है।





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Wednesday, January 22, 2020

महराजगंज : रिमीडियल कक्षा संचालन सम्बन्धी स्टेशनरी एवं शिक्षण सामग्री की सूची तथा सम्बन्धित सामग्री की उपलब्धता एस०एम०सी० के माध्यम से करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी

महराजगंज : रिमीडियल कक्षा संचालन सम्बन्धी स्टेशनरी एवं शिक्षण सामग्री की सूची तथा सम्बन्धित सामग्री की उपलब्धता एस०एम०सी० के माध्यम से करने के सम्बन्ध में निर्देश जारी।