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Thursday, September 27, 2018

महराजगंज : परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा कायाकल्प (ग्रेडेड लर्निंग) कार्यक्रम के संचालन हेतु बी०आर०पी० टीम का गठन करते हुए बीएसए ने जारी किया आवश्यक दिशानिर्देश

महराजगंज : परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा कायाकल्प (ग्रेडेड लर्निंग) कार्यक्रम के संचालन हेतु बी०आर०पी० टीम का गठन करते हुए बीएसए ने जारी किया आवश्यक दिशानिर्देश, आदेश देखें-



Friday, September 14, 2018

SCIRT : साझा प्रयास से मिलेगी शिक्षा, वर्ड विजन और सीसीआरडी की ओर से आयोजित हुआ कार्यक्रम एजूकेशन कॉन्क्लेव

साझा प्रयास से मिलेगी शिक्षा

सुधार

जागरण संवाददाता, लखनऊ: स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीइआरटी) ने सरकारी स्कूलों की भी शक्ल बदल दी है। शिक्षकों और समुदायों के प्रयास से शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा हो गया है। क्लास के हिसाब से शिक्षक किस तरह की शिक्षा की तकनीक अपनाएं, इसके अलावा अभिभावकों के प्रयास आदि पर फोकस किया जा रहा है। यह बात एससीइआरटी की संयुक्त निदेशक दीपा तिवारी ने वल्र्ड विजन इंडिया और कोलीशन फॉर चाइल्ड राइट्स एंड डेवलपमेंट (सीसीआरडी) की ओर से दयाल पैराडाइज में आयोजित एजुकेशन कांक्लेव में कही।

दीपा तिवारी ने बताया कि एनसीइआरटी ने कक्षा एक से आठ तक के लिए लर्निग आउटकम तय किया है। इसमें अभिभावकों को एक फोल्डर दिया जाता है, जिसमें उन्हें यह टिक करना होता है कि बच्चों को कितना आया कितना नहीं। वहीं एससीइआरटी प्राइमरी और अपर प्राइमरी के शिक्षकों को प्रैक्टिल प्रशिक्षण भी दे रहा है, जिससे शिक्षा का नया दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।

योजना में पारदर्शिता जरूरी : अमित मेहरोत्र, प्रोग्राम मैनेजर, यूनिसेफ ने कहा कि सीएसआर को हम सब इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से अपने बेस्ट मॉडल्स और प्रोजेक्ट्स का एक समूह बनाकर बताएं कि हम कैसे साझा रूप में इस को आगे ले जा सकते हैं। यूनिसेफ ने एक लिटरेसी चेक लिस्ट टूल बनाया है। अपने क्षेत्र के शिक्षा अधिकारियों के साथ जा कर जांच करिए कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है या नहीं।

>>वल्र्ड विजन और सीसीआरडी की ओर से आयोजित हुआ कार्यक्रम

>>सरकार, गैर सरकारी संगठन के साझा प्रयास से एजूकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन

शिक्षा को मजबूत करने के लिए चल रही हैं कई योजनाएं

वल्र्ड विजन की सीईओ चेरियन थॉमस ने बताया कि गैर सरकारी संस्थाओं का सबसे मुख्य काम सरकार को उनके कार्यो में सहायता पहुंचाना है। इसमें आपसी समंवय में सहायता पहुंचाना, संवेदीकरण, अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा करना/ विभिन्न विषयों पर संचार सामग्री तैयार कर साझा करना शामिल है।

Sunday, September 2, 2018

फतेहपुर : बच्चों को ‘खींच’ रही ज्ञान की ‘रोशनी’, शिक्षकों के प्रयास से बदली अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की तस्वीर

फतेहपुर :  बच्चों को ‘खींच’ रही ज्ञान की ‘रोशनी’,  शिक्षकों के प्रयास से बदली अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की तस्वीर।

फतेहपुर : ये स्कूल भी चार माह पहले अन्य परिषदीय विद्यालयों जैसा था। न तो बच्चों की संख्या पर्याप्त थी और न ही पढ़ाई का माहौल था। इसी बीच स्कूल को अंग्रेजी माध्यम का बनाया गया तो शिक्षकों की नियुक्ति की गई। बस, देखते ही देखते इस स्कूल की तस्वीर बदल गई। हम बात कर रहे हैं ऐरायां विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर की, जहां प्रधानाध्यापक अंबिका प्रसाद और सहायक अध्यापक आनंद मिश्र ने ज्ञान की ऐसी ज्योति जलाई कि बच्चे 4-5 किमी की दूरी पैदल नापकर यहां पढ़ने के लिए पहुंचते हैं।



शिक्षकों के समर्पण से अभिभावक भी प्रभावित हैं। यही वजह है कि 67 बच्चों से शुरू हुआ विद्यालय का सफर मौजूदा समय में 106 तक पहुंच चुका है। इस स्कूल में रहीमपुर धरमंगदपुर, खजुरिहापुर, देवराजपुर, मलकनपुर तथा ऐरायां सादात गावों के बच्चे रोजाना कांवेंट स्कूल की तरह टाई, बेल्ट, आइकार्ड व जूते मोजे पहनकर पढ़ने आते हैं। किताबों का अभाव भी यहां के बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा नहीं बन पाई। शिक्षकों द्वारा कराए जाने वाले नियमित अभ्यास और सरलता से समझाने के कारण ही बच्चे अंग्रेजी भाषा में बेसिक चीजों को आत्मसात करने लगे हैं।



दोनों शिक्षक निजी प्रयास से ब्लैक बोर्ड, लर्निग कार्नर के साथ टीएलएम बनाकर बच्चों को अंग्रेजी भाषा में पारंगत कर रहे हैं। यही नहीं स्कूल सफाई में भी नजीर बना हुआ है। स्कूल की दीवारों में पेंट से जागरूकता संदेश व चित्रों के जरिये बच्चों को सामाजिक सरोकारों के प्रति भी उनका कर्तव्य सिखाया जाता है।


  मिल चुका है प्रशस्ति पत्र : मलूकपुर विद्यालय के शिक्षक आनंद मिश्र को उनके निजी प्रयासों के लिए पूर्व एसडीएम, बीईओ तथा मौजूदा ग्राम प्रधान मैनाज बेगम ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बीईओ वीरेंद्र पांडेय ने बताया कि दूसरे विद्यालय के शिक्षकों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।



■ पूर्व तैनाती वाले स्कूलों से आए बच्चे : प्रधानाध्यापक अंबिका प्रसाद पूर्व सत्र तक रहीमपुर धरमंगदपुर गांव के परिषदीय स्कूल में पढ़ाते थे, जबकि आनंद मिश्र बहेरा सादात में तैनात थे। दोनों शिक्षकों का शिक्षा के प्रति लगाव देखकर विभाग ने मलूकपुर अंग्रेजी स्कूल में तबादला किया। उनके पीछे इन गांवों के बच्चे भी दूर होने के बावजूद यहां पढ़ने आने लगे।

Monday, August 6, 2018

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनी उच्च शिक्षा परिषद बेहाल, अध्यक्ष का पद 16 माह से खाली

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनी उच्च शिक्षा परिषद बेहाल, अध्यक्ष का पद 16 माह से खाली।


Sunday, July 29, 2018

उच्च शिक्षा में लगातार बढ़ रहा निजी क्षेत्र का वर्चस्व,  निजी क्षेत्र के संस्थानों में गुणवत्ता को लेकर भी उठ रहे सवाल

उच्च शिक्षा में लगातार बढ़ रहा निजी क्षेत्र का वर्चस्व,  निजी क्षेत्र के संस्थानों में गुणवत्ता को लेकर भी उठ रहे सवाल।


Wednesday, June 13, 2018

विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा की तैयारी, शोध के बढ़ावे के लिए हजार करोड़ के फंड के साथ 20 संस्थानों को उच्चस्तर का बनाने की कोशिश

नई दिल्ली : शिक्षा का क्षेत्र सिर्फ निवेश का ही क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन मोदी सरकार ने इस मिथक को तोड़ने की कोशिश की है। उसने अपने संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने जैसी एक बड़ी योजना पेश की है। सरकार का मानना है कि दुनिया के दूसरे देश जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विकास कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं, तो वह भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं है। 



अभी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका-इंग्लैंड जैसे देशों में जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले यह छात्र हर साल करीब 66 हजार करोड़ रुपए खर्च करते हैं। अमेरिका जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में दूसरे देशों से आने वाले छात्रों की बड़ी भागीदारी है।1भारत सरकार का उद्देश्य साफ है कि अपने संस्थान विश्वस्तरीय हों, तो इससे दुनिया में भारत की साख बढ़ेगी। बाहर के छात्र भारत पढ़ने आएंगे। भारत इससे विदेशी पूंजी भी जुटा सकेगा। अपने छात्र लाभान्वित होंगे और वह जो धन विदेश में खर्च करते हैं, अपने देश में रह जाएगा।


इस बदलाव के लिए संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती के साथ-साथ उनकी स्वायत्तता और गुणवत्ता पर जोर है। शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है। एक हजार करोड़ का एक फंड बना है। हेफा जैसे वित्तीय सहायता देने वाली एजेंसी का भी गठन किया है। इसके जरिए संस्थानों को अब शोध के लिए भरपूर पैसा दिया जा रहा है। सरकार 20 संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की योजना पर काम कर रही है।

Tuesday, June 12, 2018

गुणवत्ता बढ़ाने को नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च की स्थापना, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की छवि सुधारने का होगा प्रयास

इलाहाबाद : केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ.सत्यपाल सिंह ने कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विशेष कदम उठाया जा रहा है। के निर्धारित विषयों पर विधिवत परामर्श होगा कि यह राष्ट्र के कितने काम आएगा। इसके लिए ‘नेशनल काउंसिल फॉर रिसर्च’ की स्थापना की जाएगी। यह सभी मंत्रलयों का सामूहिक उपक्रम होगा। मेधावी छात्रों के लिए 70 हजार रुपये प्रति माह की प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप की शुरुआत इसी सत्र से की जा रही है ताकि का बेहतर परिणाम आ सके।


सोमवार को सर्किट हाउस में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि देशभर में विश्वविद्यालयों की घटती रैंकिंग चिंता का विषय है। इसके लिए नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग सेंटर की स्थापना की जा रही है। इसका उद्देश्य अगले दस वर्षो में देश के एनआइटी, आइआइटी और विश्वविद्यालयों की छवि वैश्विक स्तर पर सुधारना होगा।


इसमें सभी सरकारी और प्राइवेट संस्थाएं शामिल की जाएंगी। इविवि की शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न अनियमितता के सवाल पर उन्होंने कहा कि यूजीसी की कमेटी जो भी जांच रिपोर्ट देगी, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यहां के शिक्षक भर्ती सहित जो शिकायत मिल रही हैं, उस पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रलय नजर रखे है।


प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह।नई पॉलिसी में लिखित परीक्षा नहीं : नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में सहायक आचार्य की भर्ती में लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं होगा। भर्ती साक्षात्कार के आधार पर की जाएगी। इसका आधार एपीआइ होगा।

Sunday, June 10, 2018

यूजीसी ने उठाए कदम, विश्वविद्यालयों की परीक्षा का अब बदलेगा पैटर्न

नई दिल्ली : उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने में जुटी सरकार ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कालेजों की परीक्षा के पैटर्न को अब बदलने की तैयारी है। यूजीसी ने इसे लेकर पहल तेज की है। साथ ही देश भर के विवि के शिक्षकों, छात्रों, परीक्षा नियंत्रकों और शिक्षा क्षेत्र के जुड़े विशेषज्ञों से राय मांगी है। हालांकि विश्वविद्यालयों की परीक्षा में यह बदलाव कब से लागू होगा, इसे लेकर यूजीसी ने अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया है।



यूजीसी ने उच्च शिक्षा के परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर यह कदम हाल ही में गुणवत्ता को सुधारने के लिए गठित कमेटी की सिफारिश के बाद उठाया है। कमेटी का मानना था कि गुणवत्ता सुधार के लिए पाठ्यक्रम के साथ पुराने हो चुके परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव की जरूरत है। इस दौरान कमेटी ने बदलाव के कुछ उपाय भी सुझाए थे। इसके तहत ग्रेडिंग और क्रेडिट ट्रांसफर जैसी प्रणाली को लाने की भी वकालत की थी। हालांकि यूजीसी ने ऐसे किसी भी बदलाव से पहले अलग-अलग मुद्दों को लेकर राय मांगी है। इनमें जिन विषयों पर फोकस किया गया है, उनमें परीक्षा के उद्देश्य, ऐसी परीक्षा प्रणाली जिसे भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में आसानी से लागू किया जाए।



साथ ही इसमें कौन-कौन सी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। यूसीसी इसके साथ ही छात्रों की एक ऐसी योग्यता परीक्षा भी कराना चाहती है जिससे छात्रों के पूर्ण विकास की जानकारी मिल सके। इसके साथ ही यूजीसी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहे दूसरे देशों की परीक्षा प्रणाली को जानने में रुचि दिखाई है। इनमें सबसे ज्यादा फोकस उन देशों को लेकर है, जहां हर साल पढ़ाई के लिए बड़ी संख्या में भारतीय छात्र जाते है।




यूजीसी ने हाल ही में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाठ्यक्रम में निरंतर सुधार की प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही नैक की रैकिंग में खरे उतरने वाले करीब 60 विश्वविद्यालयों और कालेजों को स्वायत्तता भी प्रदान की है। इसके बाद अब यह यूजीसी के हस्तक्षेप से मुक्त रहेंगे। साथ ही जरूरत और मांग के मुताबिक कोई भी नया कोर्स भी शुरू कर सकेंगे।

Tuesday, April 24, 2018

फतेहपुर : नगर क्षेत्र में 85 स्कूल और कुल 70 शिक्षक, एकल शिक्षकों के सहारे चल रही है प्राथमिक शिक्षा की गाड़ी, 20 जगहों पर केवल शिक्षामित्र

■ अवकाश पर जाने से कई स्कूलों में लग जाता ताला,

■ एक शिक्षक को दो स्कूलों की संभालनी पड़ती जिम्मेदारी

फतेहपुर : नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का पुरसाहाल नहीं है। शिक्षकों की बेहद कमी के चलते शासन के आदेश हवा में तैर रहे हैं। जिम्मेदार चाह कर भी इन स्कूलों की बदहाली को दूर नहीं कर पा रहे हैं। एक जगह तैनाती के साथ शिक्षकों को अन्य कामों के संपादन के लिए दूसरे स्कूलों का दायित्व निभाना पड़ रहा है। पठन पाठन का कार्य भगवान भरोसे ही चल रहा है।


नगर क्षेत्र मुख्यालय एवं ¨बदकी में 85 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित किए जा रहे हैं इन स्कूलों में चालू सत्र में महज 70 शिक्षक की तैनात है। बीते सत्र में 6 शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं आने वाले समय में इसी क्रम में सेवानिवृत्त का सिलसिला चलेगा। विभाग के शिक्षकों की इतनी तैनाती नहीं है कि वह कुल स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही तैनात कर पाए। शासन के दिशा निर्देश पर एक विद्यालय में दो से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं लेकिन इनमें से प्रधानाध्यापक को छोड़कर दूसरे शिक्षकों को अन्य स्कूलों का दायित्व विशेष आदेश पर दिया गया है। प्राथमिक की पांच कक्षाएं एवं उच्च प्राथमिक की तीन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अधिसंख्य जगहों में एकल शिक्षक के सहारे शिक्षा की गाड़ी चल रही है।



शिक्षकों की कमी के चलते शैक्षिक स्तर का क्या हाल होगा इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। जब शिक्षा के मंदिरों में गुरुजन ही नहीं होंगे तो फिर नौनिहालों कैसे पढ़ लिखकर बढ़ेंगे। यही वजह है कि लोग अपने पाल्यों को ऐसे विद्यालयों में प्रवेश कराने से कतराते हैं।


■ 20 प्राथमिक स्कूल शिक्षामित्रों के हवाले : बेसिक शिक्षा के प्राथमिक स्कूल बदहाली से उबर नहीं पा रहे हैं। शिक्षकों के टोटे की वजह से 20 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें न चाहकर भी शिक्षामित्रों के हवाले कर दिया गया है। तमाम बंदिशों के बाद मिले दायित्व के शिक्षामित्र निभा रहे हैं।

एक अथवा दो शिक्षामित्र पांच कक्षाओं की जिम्मेदार उठा रहे हैं। अधिकारियों के आदेश के अनुपालन में जहां दायित्व निर्वहन कर रहे हैं वहीं तमाम अड़चनों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। निरीक्षण के समय खामी पकड़े जाने के बाद अधिकारी त्वरित फटकार आदि लगाने के बाद कार्यवाही की कलम नहीं चला पाते हैं। दोनों क्षेत्रों में 38 शिक्षामित्र कार्यरत हैं।

नगर क्षेत्र में शिक्षकों की कमी के चलते 20 स्कूलों को शिक्षामित्रों से संचालित करवाया जा रहा है। शासन की तमाम योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए नियमित शिक्षकों से इन विद्यालयों का काम लिया जा रहा है। शिक्षकों की कमी का असर पठन पाठन में पड़ रहा है जिसे दूर करने का प्रयास हो रहा है। विशेष आदेश के जरिए एमडीएम आदि योजनाओं के लिए शिक्षकों को लगाकर खाता संचालित कराया जा रहा है। - नाहिद इकबाल फारूकी, खंड शिक्षाधिकारी नगर

Monday, March 26, 2018

शैक्षिक संस्थाओं के मूल्यांकन में छात्रों और अभिभावकों की दखल, नेशनल असेसमेंट एंड अक्रीडिशन काउंसिल (NAC) ने किया बदलाव

नई दिल्ली : शैक्षिक संस्थाओं के गुणात्मक मूल्यांकन में सुधार के लिए नेशनल असेसमेंट एंड अक्रीडिशन काउंसिल (एनएएसी) ने सभी संस्थानों के लिए अपनी जानकारियां ऑनलाइन करना अनिवार्य कर दिया है। पहली बार काउंसिल ने ऐसी प्रश्नावली उपलब्ध कराई है जिससे संस्थानों के आकलन और मूल्यांकन में छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को शामिल किया जा सके।


एनएएसी की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के प्रेसीडेंट वीरेंद्र एस. चौहान ने एक साक्षात्कार में बताया, ‘शैक्षिक संस्थाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया में पहली बार छात्रों और उनके अभिभावकों की संतुष्टि को आवश्यक महत्व दिया है। इसके लिए विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई है जिसमें छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को शामिल किया गया है। काउंसिल विभिन्न छात्रों और उनके अभिभावकों से इन प्रश्नों के जवाब जानेगी, लेकिन उनकी पहचान उजागर नहीं की जाएगी।

Monday, December 18, 2017

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान का चलेगा अभियान, प्रत्येक विषय में 25 फीसद कमजोर छात्र होंगे चिह्नित


■ दसवीं व बारहवीं के कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश, 



नई दिल्ली : सरकारी स्कूलों में दसवीं व बारहवीं कक्षा के परिणाम बेहतर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत 150 सरकारी स्कूलों में 25 फीसद (एक चौथाई) कमजोर विद्यार्थियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। 



दसवीं व बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम बेहतर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने इस शैक्षणिक वर्ष में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिसके तहत 28 फरवरी तक सभी शिक्षकों के अवकाश रद कर दिए गए हैं। वहीं, निदेशालय ने अपने अधिकारियों को स्कूलों को गोद देते हुए उन्हें स्कूल का मेंटर अधिकारी नियुक्त किया हुआ है। पूर्व में जिला उपशिक्षा निदेशकों को स्कूलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया था। जिसके आधार पर शिक्षा निदेशालय ने निम्न प्रदर्शन करने वाले 150 सरकारी स्कूलों की सूची तैयार की है। 



इन स्कूलों के प्रधानाचार्य को निदेशालय निर्देश दिया है कि वे अपने स्कूल में दसवीं व बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों में से 25 फीसद कमजोर विद्यार्थियों की सूची तैयार करें। सूची प्रत्येक विषय के आधार पर तैयार की जानी चाहिए। निदेशालय ने कहा है कि कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनका प्री बोर्ड, मॉक टेस्ट लिया जाए। साथ ही कमजोर विद्यार्थियों की उपस्थिति का रिकार्ड भी प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है। 



वहीं, जोन व जिला उपशिक्षा निदेशकों को निदेशालय ने स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता बनाए रखने का निर्देश दिया है। स्कूल के मेंटर अधिकारियों को स्कूल का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए 19 दिसंबर से पहले अपने स्कूल का मुआयना करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि इन गतिविधियों के आधार पर 22 दिसंबर को समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।


Thursday, December 14, 2017

महराजगंज : नामिका निरीक्षण से परिषदीय स्कूलों की सुधारी जाएगी गुणवत्ता, शिक्षण-कौशल व टीएलएम के प्रयोग का होगा मूल्यांकन

महराजगंज : नामिका निरीक्षण से परिषदीय स्कूलों की सुधारी जाएगी गुणवत्ता, शिक्षण-कौशल व टीएलएम के प्रयोग का होगा मूल्यांकन।

Thursday, December 7, 2017

नई शिक्षा नीति में संस्कृति व संस्कारों को मिलेगी तवज्जो, निजी और सरकारी स्कूलों में असमानता होगी खत्म


नई शिक्षा नीति में संस्कृति व संस्कारों को मिलेगी तवज्जो, निजी और सरकारी स्कूलों में असमानता होगी खत्म

Wednesday, November 22, 2017

पैसे लेकर डिग्री बांटने वाले कालेजों पर लगेगा ताला, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में जुटी सरकार ने देश भर के सभी कालेजों की जांच के दिए निर्देश

नई दिल्ली : उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में जुटी सरकार ने फिलहाल तय मानकों को पूरा न करने वाले कालेजों पर ताला लगाने का फैसला लिया है। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने इसे लेकर देश भर के सभी कालेजों की जांच के निर्देश दिए है। मंत्रलय के पास हालांकि पहले से ही तय मानकों को पूरा किए बगैर संचालित हो रहे ऐसे कालेजों को लेकर ढेरों शिकायत लंबित है। इनमें ज्यादातर ऐसे मामले है जिनमें राज्य सरकारों की ओर कोई जवाब ही नहीं दिया गया। 


■ देश भर के सभी कालेजों की होगी जांच, मंत्रलय ने दिए निर्देश 

■ खराब गुणवत्ता और मानक पूरे न करने की शिकायतों पर उठाया कदम


मंत्रलय ने हाल ही इन शिकायतों के आधार पर कालेजों की जांच शुरू की, तो और भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। हजारों ऐसे कालेज हैं, जहां पर्याप्त शिक्षक तो दूर छात्रों के बैठने के लिए कमरे भी नहीं हैं। देश में मौजूदा समय में वैसे भी करीब 40 हजार कालेज संचालित हो रहे हैं। इनमें सबसे अधिक कालेज उत्तर प्रदेश में हैं। इसके अलावा भी जिन राज्यों में सबसे अधिक कालेज हैं, उनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश हैं। इनमें 75 फीसद कालेजों का संचालन निजी प्रबंधन के हाथों में है। 

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■ 400 बीएड कालेजों को बंद करने की सिफारिश :

एनसीटीई ने तय मानकों के तहत संचालित न होने वाले देश भर के करीब 400 बीएड कालेजों को बंद करने की सिफारिश की है। जांच टीम ने अपने निरीक्षण में ऐसे स्कूलों की वीडियोग्राफी भी कराई है।उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। हमने देश भर के सभी कालेजों की जांच कराने के निर्देश दिए है। तय मानकों पर खरे न उतरने वाले कालेजों पर ताला लगेगा। हाल ही में हमने करीब 400 बीएड कालेजों को तय मानकों पर खरे न पाए जाने पर बंद करने की प्रक्रिया शुरू की है।- डॉ. सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री 


एक तरह की दुकानों में तब्दील हो गए उच्च शिक्षा संस्थानों के खिलाफ की ही जानी चाहिए, लेकिन बेहतर होगा कि उन्हें बंद करने के साथ ही सुधारने पर भी ध्यान दिया जाए। यह तब संभव होगा जब गड़बड़ी करने वाले शिक्षा संस्थानों को जवाबदेह बनाने के साथ उनकी सतत निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था बनेगी। अभी ऐसा कोई सक्षम तंत्र न राज्यों के स्तर पर दिखता है और न ही केंद्र के स्तर पर जो छल कर रहे निजी शिक्षा संस्थानों की नकेल कस सके। यदि तमाम उच्च शिक्षा संस्थान बिना मानकों के चल रहे हैं तो इसका अर्थ है कि उनकी उस तंत्र से घालमेल है जिन पर मानक लागू कराने की जिम्मेदारी है। आखिर ऐसे संस्थान खुल ही कैसे गए जो मानक पूरा नहीं करते?


Saturday, September 30, 2017

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाएंगे हर संभव कदम, डिप्टी सीएम ने जताई प्रतिबद्धता

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाएंगे हर संभव कदम, डिप्टी सीएम ने जताई प्रतिबद्धता।


Sunday, September 24, 2017

महराजगंज : विद्यालयों को आदर्श बनाने के लिए सुपर 60 परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापकों/प्रभारियों के साथ बीएसए ने की बैठक


महराजगंज : बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षक व खंड शिक्षा अधिकारी परिषदीय विद्यालयों को आदर्श बनाने की दिशा में कार्य करें। आदर्श विद्यालय के आस-पास स्थित विद्यालयों के जिम्मेदार भी वहां की व्यवस्था को देख विद्यालय को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करें। यह बातें बेसिक शिक्षा अधिकारी जगदीश प्रसाद शुक्ल ने शनिवार को सदर पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित जिले के सुपर 60 परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों व प्रभारी प्रधानाध्यापकों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक विद्यालय स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। खंड शिक्षा अधिकारी भी अपने क्षेत्र में नियमित तरीके से विद्यालयों की जांच करें व बेहतरी की दिशा में आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान करें। इस दौरान खंड शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार, हेमवंत कुमार, छनमन प्रसाद गोंड़, संतोष शुक्ला, श्यामसुदंर पटेल, तारकेश्वर पटेल,सह समन्वयक रेयाज अहमद खां, बैजनाथ सिंह, राकेश सिंह, सुनील गौतम, राजकुमार पटेल, संजय पटेल, संजय वर्मा, बैजनाथ, धर्मेंद्र कुममार, वरेश कुमार, वीरेंद्र यादव, रिजवानुल्लाह खां, मौसम, अनीता पांडेय, किरन, शशिबाला, मनौवर अली, सुशील शाही, विमलेश गुप्ता,नागेंद्र, प्रेमचंद, सतीशचंद, नंदकिशोर यादव, कृष्णा मद्धेशिया, होशिला चौरसिया, धन्नू चौहान,जयनाथ, विजय प्रकाश अनुचर उपस्थित रहे।

Saturday, August 26, 2017

जौनपुर के बीएसए ने बनाया नॉलेज पैरामीटर, बेसिक शिक्षा मंत्री महोदय से मिली बीएसए मीटिंग में तारीफ

■ जौनपुर के बीएसए ने नॉलेज पैरामीटर बनाया


बैठक में संदीप सिंह ने जौनपुर जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नालेज पैरामीटर कार्यक्रम की तारीफ करते हुए कहा कि इससे अन्य बीएसए को भी सीख लेने की जरूरत है। जौनपुर बीएसए की वेबसाइट पर इसे देखा जा सकता है। इससे शिक्षकों की जवाबदेही के साथ गुणवत्ता भी बढ़ रही है। नालेज पैरामीटर को प्रगति, स्थिति व गिरावट जैसे तीन मानकों में बांटा हैं जिसके माध्यम से छात्रों एवं शिक्षकों की शिक्षा प्रगति की जांच की जा सकेगी।


Wednesday, March 29, 2017

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग में शुरू हुई सुधार की पहल,  समय पालन के साथ स्कूल निरीक्षण और शिक्षक समस्याओं का होगा समाधान,  अधिकारियों कर्मचारियों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक में निकला नतीजा

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग में शुरू हुई सुधार की पहल,  समय पालन के साथ स्कूल निरीक्षण और शिक्षक समस्याओं का होगा समाधान,  अधिकारियों कर्मचारियों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक में निकला नतीजा।


Monday, March 27, 2017

फतेहपुर :  लंबित कार्यों के निष्पादन एवं विद्यालयों में शत-प्रतिशत उपस्थिति व शैक्षणिक गुणवत्ता के सुधार हेतु अधिकारियों/ कर्मचारियों व शिक्षक संगठनों के जिला / ब्लाक पदाधिकारियों की आपातकालीन बैठक कल 28 मार्च को आयोजित

फतेहपुर :  लंबित कार्यों के निष्पादन एवं विद्यालयों में शत-प्रतिशत उपस्थिति व शैक्षणिक गुणवत्ता के सुधार हेतु अधिकारियों/ कर्मचारियों व शिक्षक संगठनों के जिला / ब्लाक पदाधिकारियों की आपातकालीन बैठक कल 28 मार्च को आयोजित।


Monday, March 6, 2017

एटा : पोर्टल की शिकायतें लंबित देख भड़के डीएम,शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति सुधार को बीएसए को दिए निर्देश