DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label शिक्षा नीति. Show all posts
Showing posts with label शिक्षा नीति. Show all posts

Thursday, September 17, 2020

यूपी : नई शिक्षा नीति के लिए 7 फोकस ग्रुप का गठन

नई शिक्षा नीति, 2020 : स्कूलों के विद्यार्थी भी करेंगे इंडस्ट्री इंटर्नशिप, अंतर-विषयी पढ़ाई पर होगा जोर

 यूपी : नई शिक्षा नीति के लिए 7 फोकस ग्रुप का गठन


नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सात फोकस ग्रुप का गठन कर दिया है। ये समूह पाठ्यक्रम, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्कूल प्रबंधन, सबके लिए शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और शिक्षा में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने जैसे विषयों पर प्रस्ताव तैयार करेंगे। नीति के क्रियान्वयन के लिए बनी स्टीयरिंग कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने निर्देश दिए कि ये वर्किंग ग्रुप यदि चाहें तो बाहरी विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं।बैठक में नीति के कई पहलुओं पर चर्चा हुई और अलग-अलग समूहों का गठन किया गया। इन समूहों में विभागीय अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। सभी विषयों पर विस्तार के चर्चा हुई और तय किया गया कि ये फोकस ग्रुप एक हफ्ते में बैठक कर रूपरेखा तैयार करेंगे और स्टीयरिंग कमेटी की बैठक एक हफ्ते बाद फिर होगी। 


इन फोकस ग्रुप का हुआ गठन

1-पाठ्यक्रम व शिक्षाशास्त्र-सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली, उर्वशी साहनी, बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह, जेडी भगवती सिंह, मशिप के सचिव दिव्यकांत शुक्ला व विशेष सचिव आर्यका अखौरी

 2-मूल्यांकन व आकलन, परीक्षा रिफार्म - पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवनेश कुमार, दिव्यकांत शुक्ल, जेडी प्रदीप कुमार, विशेष सचिव जय शंकर दुबे 

3-शिक्षकों के क्षमता संवर्धन व भर्ती-पवनेश कुमार, राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की निदेशक ललिता प्रदीप, चयन बोर्ड की सचिव र्कीति गौतम, सांत्वना तिवारी, जेडी अजय कु सिंह, डीडी विकास श्रीवास्तव, राजू राना, कुमार राघवेन्द्र सिंह

4-शिक्षा में टेक्नोलॉजी- एकेटीयू के कुलपति विनय पाठक, एचसीएल फाउण्डेशन के ऑपरेशन हेड योगेश कुमार, विवेक नौटियाल, सुधीर कुमार, आर्यका अखौरी

5-कौशल व कॅरिअर- एनआईओएस के पूर्व अध्यक्ष महेश चन्द्र पंत, एनएसडीसी के पूर्व सीईओ जयंत कृष्णा, कॅरिअर काउंसिलर अमृता दास, एडी मंजू शर्मा, हरवंश सिंह, बृजेश मिश्र, कमलेश तिवारी, उदयभानु त्रिपाठी

6-विद्यार्थी सपोर्ट सिस्टम- उर्वशी साहनी, ममता अग्रवाल, भगवत प्रसाद पटेल, एमपी सिंह, उदयभानु त्रिपाठी

7-स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम व निजी निवेश- अशोक गांगुली, संध्या तिवारी, पूर्व सचिव बेशिप रूबी सिंह, ललिता प्रदीप, मनोज द्विवेदी, प्रेम चन्द्र यादव, जय शंकर दुबे


लखनऊ : माध्यमिक स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी अब इंडस्ट्री में इंटर्नशिप कराई जाएगी, ताकि वे स्वरोजगार के लिए प्रेरित हो सकें। हर दो से तीन महीने में 10 दिन बैगलेस होंगे। विद्यार्थी इस दौरान बिना बस्ते के स्कूल आएंगे और इंडस्ट्री में जाकर ट्रेनिंग लेंगे। वहीं वोकेशनल एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। तनाव रहित, खेल-खेल में और खुद प्रयोग कर विद्यार्थी सीखें, इस पर जोर दिया जाएगा।


नई शिक्षा नीति, 2020 को लागू करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की अध्यक्षता में बनाई गई स्टियरिंग कमेटी की बुधवार को हुई बैठक में कई प्रस्तावों पर विचार किया गया और इन्हें लागू कराने के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों की करियर काउंसिलिंग भी की जाएगी। सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में ई-लर्निंग को और बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों के प्रशिक्षण और स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थी अपने कोर्स के साथ अन्य मनपसंद कोर्स भी आसानी से चुन सकेंगे। अंतर-विषयी पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाएगा।

Tuesday, September 15, 2020

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए माध्यमिक शिक्षा में गठित की स्टीयरिंग कमेटी

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए माध्यमिक शिक्षा में गठित की स्टीयरिंग कमेटी।

राज्य मुख्यालय :  माध्यमिक शिक्षा विभाग में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए स्टीयरिंग कमेटी का गठन कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 12 सदस्य कमेटी का गठन किया गया है।

इस कमेटी में सदस्य के तौर पर और सीबीएसई अध्यक्ष अशोक गांगुली, माध्यमिक शिक्षा विभाग की पूर्व सचिव संध्या तिवारी, एकेटीयू के कुलपति विनय पाठक, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष महेश चंद्र पंत, सीबीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवनेश कुमार, बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह, एनएसडीसी के पूर्व सीईओ जयंत कृष्णा, करियर काउंसलर अमृता दास, एचसीएफ की उर्वशी साहनी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक, विशेष सचिव व अन्य सचिव इसके पदेन सदस्य होंगे।

इसके अलावा राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की निदेशक ललिता प्रदीप, संयुक्त शिक्षा निदेशक भगवती सिंह और विवेक नौटियाल को समिति की सहायता के लिए नामित किया गया है।





New Education Policy 2020 : यूपी में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए बनी 13 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी।

यूपी में नई शिक्षा नीति को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए गठित स्टीयरिंग कमेटी माध्यमिक स्कूलों में पाठ्यक्रम को अपडेट करने व परीक्षा के पैटर्न में बदलाव करने सहित कई सुझाव देगी।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में नई शिक्षा नीति 2020 को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया है। कमेटी में माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय को सचिव बनाया गया है। ये कमेटी माध्यमिक स्कूलों में पाठ्यक्रम को अपडेट करने और परीक्षा के पैटर्न में बदलाव करने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव देगी। इसकी पहली बैठक बुधवार को होगी और इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।

नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए गठित स्टीयरिंग कमेटी में सीबीएसई के पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली, माध्यमिक शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव संध्या तिवारी, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक, राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष महेश चंद्र पंत, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के पूर्व परीक्षा नियंत्रक पवनेश कुमार, बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह, एनएसडीसी के पूर्व सीईओ जयंत कृष्णा, करियर काउंसलर अमृता दास, एसएचईएफ डॉ उर्वशी साहनी और माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव को पदेन सदस्य बनाया गया है। कमेटी द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों को लागू किया जाएगा।

बता दें कि पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों की स्टीयरिंग कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। कमेटी की अगली बैठक 28 सितंबर को होगी। टास्क फोर्स सभी पहलुओं पर निर्णय लेगी और अंतर विभागीय समन्वय स्थापित करेगी। डॉ. शर्मा ने कहा था कि इस नीति के पूरी तरह से लागू होने के बाद लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति का प्रभाव खत्म हो जाएगा। नई नीति के तहत भारत के विश्वविद्यालय विदेशों में अपने कैंपस खोल सकते हैं और विदेशी विश्वविद्यालयों के कैम्पस भारत में खुल सकते हैं।

उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा था कि इस नीति के तहत सभी श्रेणी और वर्गों के छात्र-छात्राओं को समान शिक्षा मिलेगी। 34 वर्षों के बाद ऐसी नीति आई है, जिसमें बुनियादी से लेकर उच्च शिक्षा के स्तर पर ध्यान दिया गया है। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति का व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। डॉ शर्मा ने कहा कि रोजगारपरक शिक्षा प्रारंभिक कक्षाओं से ही विद्यार्थियों को दी जाए। शिक्षा के दौरान ही रोजगार की संभावनाओं को हासिल किया जा सके।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, September 12, 2020

परिवार के लिए ‘प्रतिष्ठा’ बन गई मार्कशीट, पीएम मोदी ने किया साफ- वर्ष 2022 से नए पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

परिवार के लिए ‘प्रतिष्ठा’ बन गई मार्कशीट, पीएम मोदी ने किया साफ- वर्ष 2022 से नए पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

 
नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को साफ किया कि साल 2022 से छात्रों की पढ़ाई नई शिक्षा नीति के तहत तैयार हो रहे पाठ्यक्रम से ही होगी। शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा समस्याओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि एक बड़ी समस्या यह भी है कि हमारे देश में सीखने पर आधारित शिक्षा की जगह मार्क्‍स और मार्कशीट वाली शिक्षा व्यवस्था हावी है। सच्चाई यह है कि मार्कशीट अब मानसिक प्रेशर शीट और परिवार की प्रेस्टीज शीट बन गई हैं यानी इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया गया है।


प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में स्कूल शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के दो दिवसीय सम्मेलन को वचरुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई से मिल रहे तनाव से अपने बच्चों को निकालना ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर बेवजह का दबाव न पड़े। साथ ही कोशिश यह भी होनी चाहिए कि केवल एक परीक्षा से छात्रों का मूल्यांकन न किया जाए, बल्कि उनके विकास के अलग-अलग पहलुओं से जुड़ा मूल्यांकन हो। यही वजह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों को मार्कशीट की जगह उनके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए एक रिपोर्ट कार्ड का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें छात्र की विशिष्ट क्षमता, योग्यता, रवैया, प्रतिभा, स्किल (कौशल), क्षमता शामिल होगा।



पीएम ने कहा ‘जब हम आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएंगे तो छात्र इस नए पाठ्यक्रम के साथ नए भविष्य की तरफ कदम बढ़ाएंगे।’ यह पाठ्यक्रम दूरदर्शी, भविष्य निर्माण करने वाला और वैज्ञानिक होगा। वहीं मातृभाषा में पढ़ाई पर सवाल खड़ा करने वालों को भी पीएम ने जवाब दिया और कहा कि यहां हमें यह समझने की जरूरत है कि भाषा शिक्षा का माध्यम है। भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है। किताबी पढ़ाई में फंसे-फंसे कुछ लोग यह फर्क भूल जाते है।


एजुकेशन इन 21 फर्स्ट सेंचुरी'' कॉन्क्लेव में पूरे देश के शिक्षा मंत्रियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली साबित होगी।



प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में दुनिया के हर क्षेत्र में बदलाव आया है। हर व्यवस्था बदल गई। इन तीन दशकों में हमारे जीवन का शायद ही कोई पक्ष ऐसा होगा, जिसमें बदलाव नहीं आया हो। लेकिन वो मार्ग, जिस पर चलते हुए समाज भविष्य की तरफ बढ़ता है, वो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही थी। पुरानी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना अत्यावश्यक हो गया था।

बच्चों को प्रेक्टिकल शिक्षा से जोड़ें

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि शिक्षक खुद अपने हिसाब से लर्निंग मटेरियल तैयार करें, बच्चे अपना टॉय म्यूजियम बनाएं, पालकों को जोड़ने के लिए स्कूल में कम्यूनिटी लाइब्रेरी हो, तस्वीरों के साथ बहुभाषायी शब्दकोष हो, स्कूल में भी किचन गार्डन हो, ऐसे कितने ही विषयों पर बात हुई है, अनेक नए सुझाव दिए गए हैं। मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे प्रिंसिपल्स और शिक्षक पूरे उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षक बच्चों को Fun Learning, Playful Learning, Activity Based Learning और Discovery Based Learning का माहौल दें। बच्चे जैसे-जैसे क्लास में आगे बढ़ें, उनमें ज्यादा सीखने की भावना का विकास हो, बच्चों का मन, उनका मस्तिष्क वैज्ञानिक और तार्किक तरीके से सोचना शुरू करे, उनमें Mathematical Thinking और Scientific Temperament विकसित हो, ये बहुत आवश्यक है और Mathematical Thinking का मतलब केवल यही नहीं है कि बच्चे Mathematics के प्रॉब्लम ही सॉल्व करें, बल्कि ये सोचने का एक तरीका है। ये तरीके हमें उन्हें सिखाना है। ये हर विषय को, जीवन के पहलुओं को Mathematical और Logical रूप से समझने का दृष्टिकोण है, ताकि मस्तिष्क अलग-अलग perspective में analyse कर सके। बच्चों के दृष्टिकोण, मन और मस्तिष्क का विकास बहुत जरूरी है, और इसलिए ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसके तौर-तरीकों पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है।

बच्चों को सही उम्र में शिक्षित करना

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में 5 + 3 + 3 + 4 की व्यवस्था बहुत सोच- समझकर की गई है। इसमें Early Childhood Care and Education को एक बुनियाद के रुप में  शामिल किया गया है। आज हम देखें तो प्री स्कूल की Playful Education शहरों में, प्राइवेट स्कूलों तक ही सीमित है। वो अब गाँवों में भी पहुंचेगी, गरीब के  घर तक  पहुंचेगी। मूलभूत शिक्षा पर ध्यान इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

बच्चों को प्रकृति से जोड़ें

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ें, जिससे उनका समावेशित विकास हो। बच्चे इसमें रुचि भी लेते हैं, और एक साथ बहुत सारी चीजें सीखते हैं। बच्चों को आसान और नए-नए तौर-तरीकों से पढ़ाना होगा। हमारे ये प्रयोग, New age learning का मूलमंत्र होना चाहिए- Engage, Explore, Experience, Express और Excel. यानि कि, students अपनी रूचि के हिसाब से गतिविधियों में, घटनाओं में, projects में engage हों। इसे अपने हिसाब से explore करें। इन गतिविधियों, घटनाओं, projects को विभिन्न दृष्टिकोण को अपने experience से सीखें। ये उनका personal experience हो सकता है या collaborative experience हो सकता है। फिर बच्चे रचनात्मक तरीके से Express करना सीखें। इन सब को मिला कर ही फिर excel करने का रास्ता बनता है। अब जैसे कि, हम बच्चों को पहाड़ों पर, ऐतिहासिक जगहों पर, खेतों में, सुरक्षित मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स में लेकर जा सकते हैं।

नई शिक्षा नीति में सिलेबस और बस्ते का बोझ कम

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम को कम किया गया है। इसमें आधारभूत बिन्दुओं पर जोर दिया गया है। लर्निंग को समग्र एवं Inter-Disciplinary, Fun based और complete experience बनाने के लिए एक National Curriculum Framework develop किया जायेगा। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को 21वीं सदी के कौशल के साथ आगे बढ़ाने पर जोर देती है। इसलिए, छात्र शुरुआत से ही कोडिंग सीखें, Artificial Intelligence को समझें, Internet of Things, Cloud Computing, Data Science और Robotics से जुड़ें।

मूल्यांकन के लिये परख की स्थापना

वर्तमान में मार्क्स और मार्क्स-शीट एजुकेशन हावी है। जिससे बच्चों एवं अभिभावकों में मेंटल स्ट्रैस बढ़ता था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से इसका समाधान होगा। परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर इसका बेवजह का दबाव न पड़े और कोशिश ये हो कि केवल एक परीक्षा से छात्र-छात्राओं का मूल्यांकन न किया जाए, बल्कि Self-assessment, Peer-To-Peer assessment से छात्रों के विकास के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन हो। इसलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मार्क्सशीट की जगह Holistic report card  पर बल दिया गया है। Holistic report card विद्यार्थियों के unique potential, aptitude, attitude, talent, skills, efficiency, competency और possibilities की detailed sheet होगी। मूल्यांकन प्रणाली के संपूर्ण सुधार के लिए एक नये राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र “परख” की स्थापना भी की जाएगी।

मातृ भाषा में शिक्षा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति भाषा शिक्षा का माध्यम है, भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है। बच्चों को उस भाषा में शिक्षा देना चाहिये जिसे बच्चा आसानी से सीख सके, चीजें Learn कर सके, वही भाषा पढ़ाई की भाषा होनी चाहिए। नहीं तो विषय से ज्यादा बच्चे की ऊर्जा भाषा को समझने में लग जाती है। इन्हीं सब बातों को समझते हुए ज़्यादातर देशों में भी आरंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाती है। 

PISA की top ranking वाले सब देशों में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाती है। इसलिए जहां तक संभव हो, कम से कम कक्षा पांच तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा रखने की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कही गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा के अलावा कोई अन्य भाषा सीखने, सिखाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अंग्रेजी के साथ साथ जो भी विदेशी भाषाएँ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सहायक हैं, वो बच्चे पढ़ें, सीखें, तो अच्छा ही होगा। लेकिन साथ साथ सभी भारतीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि हमारे युवा देश के अलग अलग राज्यों की भाषा, वहाँ की संस्कृति से परिचित हो सकें, हर क्षेत्र का एक दूसरे से रिश्ता मजबूत हो।

शिक्षक ही है विद्यार्थियों का भविष्य निर्माता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस यात्रा के पथप्रदर्शक देश के शिक्षक ही हैं। इसलिए सभी शिक्षकों को काफी कुछ नया सीखना है, काफी कुछ पुराना भुलाना भी है। वर्ष 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत का हर student, राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा तय गए दिशा-निर्देशों में पढ़े।

कोरोना से बचाव की जानकारी दें शिक्षक

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये दो गज दूरी, मास्क या फेस्क कवर, बुजुर्गों का ख्याल रखना, स्वच्छता आदि का संदेश शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को देना होगा। शिक्षक ये सब बड़ी आसानी से विद्यार्थियों के माध्यम से यह संदेश घर-घर पहुंचा सकते हैं।

स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री इंदर सिंह परमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विचारों के अनुरुप राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल के निर्देश दिये। मंत्री श्री परमार ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी। मध्यप्रदेश इस नीति के आधार पर नये प्रगतिशील समाज की रचना के लिए तैयार हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, भयमुक्त और समानता के आधार पर उन्नति के अवसर प्रदान करने वाली स्कूल शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

प्रमुख साचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विभाग की तैयारियों और योजनाओं की बारे में सारगर्भित जानकारी दी। इस अवसर पर आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र श्री लोकेश कुमार जाटव और उप सचिव श्री प्रमोद सिंह तथा स्कूल शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

Saturday, September 5, 2020

फतेहपुर : राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के क्रियान्वयन हेतु व्यापक प्रचार एवं विचार विमर्श किए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें

फतेहपुर : राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के क्रियान्वयन हेतु व्यापक प्रचार एवं विचार विमर्श किए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें।






 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, August 29, 2020

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ AIPTF ने नई शिक्षा नीति 2020 को बतलाया आकर्षक, समावेशी न होने पर उठाए सवाल

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ AIPTF ने नई शिक्षा नीति 2020 को बतलाया आकर्षक, समावेशी न होने पर उठाए सवाल



Saturday, August 8, 2020

PM Modi on NEP : नई शिक्षा नीति में भेड़चाल की कोई जगह नहीं, नए भारत की नींव होगी तैयार, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पीएम मोदी ने किया संबोधित

PM Modi on NEP : नई शिक्षा नीति में भेड़चाल की कोई जगह नहीं, नए भारत की नींव होगी तैयार, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पीएम मोदी ने किया संबोधित



नई शिक्षा नीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की नए भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है। इसमें भेड़चाल की कोई जगह नहीं है। ...
नई दिल्ली, एजेंसियां। बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना को आगे बढ़ाने के बजाय भेड़चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।


 नई शिक्षा नीति में भेड़चाल की कोई जगह नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है। उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, उच्च शिक्षण संस्थानों के निदेशकों और कालेजों के प्राचार्यो को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे और नीति को तैयार वाली कमेटी के अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन भी मौजूद रहे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है। इसमें उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर अलग-अलग कई सत्र भी रखे गए हैं। 


पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हर देश,अपनी शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मूल्य के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुसार सुधार करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के लिए तैयार रखे, भविष्य तैयार करे। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है।

लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया

इससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में आज का ये इवेंट बहुत महत्वपूर्ण है। इस कॉन्क्लेव से भारत के एजुकेशन वर्ल्ड को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। जितनी ज्यादा जानकारी स्पष्ट होगी फिर उतना ही आसान इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना भी होगा। तीन-चार साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद, लाखों सुझावों पर लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया है। 


देशभर में नई शिक्षा नीति पर व्यापक चर्चा हो रही है

पीएम मोदी ने इस दौरान यह भी कहा कि आज देशभर में नई शिक्षा नीति पर व्यापक चर्चा हो रही है। अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपनी राय दे रहे हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को समीक्षा कर रहे हैं। ये एक स्वस्थ चर्चा है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है। जहां तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात है, मैं पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं।  यह खुशी की बात है कि आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पक्षपात है, या किसी एक ओर झुकी हुई है। 


स्थानीय भाषा पर क्यों किया गया फोकस?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है। अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें 'व्हाट टू थिंक' पर फोकस रहा है, जबकि इस शिक्षा नीति में 'हाऊ टू थिंक' पर बल दिया जा रहा है। ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि आज जिस दौर में हम हैं, वहां इन्फॉर्मेशन और कंटेट की कोई कमी नहीं है। अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और एनालिसिस बेस्ड तरीकों पर जोर दिया जाए। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। उच्च शिक्षा को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के पीछे यही सोच है। 


नए युग में खुद को रि-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक पेशे में ही नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे निरंतर खुद को रि-स्किल और अप-स्किल करते रहना होगा। जब गांवों में जाएंगे, किसान को, श्रमिकों को, मजदूरों को काम करते देखेंगे, तभी तो उनके बारे में जान पाएंगे, उन्हें समझ पाएंगे, उनके श्रम का सम्मान करना सीख पाएंगे। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्र शिक्षा और श्रम की गरिमा पर बहुत काम किया गया है। 

हम सभी को एक साथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब संस्थान और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी ये बदलाव दिखेंगे होंगे, तभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा का रास्ता इन दोनों मतों के बीच में है। इससे गुणवत्ता को प्रोत्साहन मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एक साथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है।

सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 

पीएम मोदी ने कहा कि यहां से विश्विद्यालय, कॉलेज, स्कूल शिक्षा बोर्ड, अलग-अलग राज्यों, अलग-अलग हित धारकों के साथ संवाद और समन्वय का नया दौर शुरु होने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ सर्कुलर जारी करके, नोटिफाई करके लागू नहीं होगी। इसके लिए मन बनाना होगा, आप सभी को दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए आपके लिए ये कार्य एक महायज्ञ की तरह है। 

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया

पीएम मोदी ने इस दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए कहा कि आज गुरुवर रवींद्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे - 'उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।' निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है। 

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने क्या कहा

इससे पहले नई शिक्षा नीति पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि शिक्षा नीति पब्लिक डोमेन पर डालने के बाद जो सवा दो लाख से भी ज्यादा सुझाव आए हैं उस एक-एक सुझाव का विश्लेषण करने के बाद जो अमृत निकला है वो आज आपके सामने है।

नई शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषताएं

-नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

-पढ़ाई की रुपरेखा 5+3+3+4 के आधार पर तैयारी की जाएगी। इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं शामिल हैं। 

-सरकार ने वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। स्कूली शिक्षा के बाद हर बच्चे के पास कम से कम एक लाइफ स्किल होगी। इससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहेगा तो कर सकेगा। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6फीसद शिक्षा में लगाया जाए, जो अभी 4.43% है। 

-नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का ऑफर दिया जाएगा। यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा। 

- शिक्षा के क्षेत्र में पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम को लागू किया गया है। एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। इससे ऐसे छात्रों को बहुत फायदा होगा जिनकी किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छूट जाती है।