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Tuesday, January 12, 2021

फीस न जमा करने पर छात्रों का नाम काटने पर हाईकोर्ट ने मांगी सरकारी नीति

फीस न जमा करने पर छात्रों का नाम काटने पर हाईकोर्ट ने मांगी सरकारी नीति


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शासनादेश के विपरीत गौतमबुद्ध नगर के कुछ प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस न जमा करने वाले छात्रों को आनलाइन शिक्षा न देने व रजिस्टर से नाम काटने की शिकायत को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। याचिका को सुनवाई के लिए 21 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गो¨वद माथुर व न्यायमूíत सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने प्रवीन अटल व 22 अन्य की जनहित याचिका पर दिया है।


 याचियों का कहना है कि राज्य सरकार ने कोविड-19 लाकडाउन के कारण चार जुलाई 2020 को नीति घोषित की है कि यदि छात्र फीस जमा नहीं करते तो उनकी आनलाइन कक्षा बंद नहीं होगी। रजिस्टर से छात्रों का नाम भी नहीं काटा जाएगा।

Wednesday, December 23, 2020

UGC ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को चेताया, कोर्स ज्वाइन न वाले पहले साल के स्टूडेंट्स की पूरी फीस रिफंड करें

UGC ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को चेताया, कोर्स ज्वाइन न वाले पहले साल के स्टूडेंट्स की पूरी फीस रिफंड करें


प्रवेश रद्द कराने वाले छात्रों को लौटानी होगी फीस, UGC का फरमान


नई दिल्ली : प्रवेश रद कराने वाले छात्रों की पूरी फीस वापस न करना उच्च शिक्षण संस्थानों को भारी पड़ सकता है। यूजीसी ने ऐसे संस्थानों को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की फीस में किसी तरह की कटौती और उसे वापस करने में देरी की गई, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यूजीसी की ओर से सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को पहले ही निर्देश दिए गए थे जिसमें कहा गया था कि चालू शैक्षणिक सत्र के दौरान यदि स्नातक और परास्नातक के पहले वर्ष में प्रवेश ले चुका कोई छात्र अपना प्रवेश निरस्त कराता है तो उसकी फीस वापस कर दी जाए। साथ ही कहा था कि यदि छात्र ने 30 नवंबर 2020 तक अपना प्रवेश निरस्त कराया है तो उसकी पूरी फीस वापस की जाए। लेकिन यदि इसके बाद निरस्त कराता है, तो एक हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस काट कर पूरी फीस लौटाई जाए। यूजीसी का मानना था कि कोरोना के चलते छात्रों के परिजन आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि कोई छात्र किसी कारण अपना प्रवेश रद कराता है तो उसकी फीस लौटा दी जाए।


उच्च शिक्षा सेक्टर नियंत्रक यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को चेतावनी दी है। यूजीसी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से कहा है कि ऐसे कॉलेज और यूनिलर्सिटीज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो पहले साल के ऐसे स्टूडेंटस की फीस वापस नहीं कर रहे जो आर्थिक समस्या और किसी और कारण से कोर्स ज्वाइन नहीं कर पाए हैं। सभी यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर को यूजीसी के चैयरमैन रजनीश जैन ने एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि यूजीसी को सैकड़ों शिकायतें मिली हैं, शिकायतों में बताया गया है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्टूडेंट्स की फीस रिफंड नहीं कर रहे हैं। 


आपको बता दें कि यूजीसी ने अपनी एकेडमिक गाइडलाइंस में साफ लिखा था कि अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स सेशन 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण स्टूडेंट्स आर्थिक समस्या से गुजर रहे हैं, जिसके चलते इस बात को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 31 दिसंबर तक एडमिशन में जीरो कैंसलेशन चार्जेस हों।


पत्र में लिखा गया है कि    अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स सेशन 2020-21 में 31 दिसंबर तक किए रद्द किए गए, एडमिशन वापस लिए गए की पूरी फीस जो स्टूडेंट से ली गई है वापस की जाएगी। इसमें 1000 रुपए से ज्यादा की प्रोसिंग फीस की कटौती ही की जाएगी। वहीं यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने चिंता जाहिर की है कि अभी तक कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी के खिलाफ कई शिकायतें जो इन निर्देशों को नहीं मान रही हैं।

Monday, November 23, 2020

शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली तो शिक्षण संस्थान होंगे जिम्मेदार, 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा


शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली तो शिक्षण संस्थान होंगे जिम्मेदार, 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा


यूपी में समाज कल्याण विभाग ने कसा शिकंजा, 630 संस्थानों को 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा।


लखनऊ । समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ यदि विद्यार्थियों को नहीं मिलता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संस्थान के संचालक की होगी। समाज कल्याण विभाग ने राजधानी की सभी 630 शिक्षण संस्थानों को फीस, मान्यता और प्रवेश की क्षमता सहित पूरा विवरण ऑनलाइन विभाग को देने का अंतिम अवसर दिया है। 25 नवंबर तक सभी को पूरा विवरण ऑनलाइन करना है। ऐेसा न करने वाले शिक्षण संस्थान के विद्यार्थी शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह जाएंगे जिसके लिए संस्थान ही जिम्मेदार होगा।



आर्थिक रूप से कमजोर मेधावियों को मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति पर भी कोरोना का ग्रहण न लगे और सभी को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए समाज कल्याण विभाग ने संस्थानों का पूरा विवरण ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। इस बार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए सामान्य वर्ग के 52,500 लाख रुपये और अनुसूचित जाति व जनजाति के शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति के लिए 98,012 लाख रुपये का बजट स्वीकृत है। पूर्व दशम कक्षा नौ और 10 और दशमोत्तर कक्षा 12 के ऊपर विद्यार्थियों को पैसा दिया जाएगा। विद्यार्थी वेबसाइट scholarship.up.nic.in पर जाकर जानकारी ले सकते हैं। पॉलीटेक्निक और आइटीआइ की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होेने की कगार पर है। अब आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार मैनेजमेंट कोटे के विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। जीरो फीस की व्यवस्था भी खत्म हो गई है। सामान्य वर्ग के इंटर में 60 फीसद और स्नातक में 55 फीसद वाले को ही शुल्क प्रतिपूर्ति मिलेगी।


जिला समाज कल्याण अधिकारी डा.अमरनाथ यती ने बताया कि शुल्क प्रतिपूर्ति को पारदर्शी बनाने के विभागीय निर्णय के सापेक्ष ऐसा किया गया है। शिक्षण संस्थान विवरण देने में लापरवाही कर रहे हें। 25 नवंबर तक अंतिम मौका दिया जा रहा है। इसके बाद उन्हें लाभ से वंचित किया जाएगा। 15 दिसंबर तक ऑनलाइन दिए गए विवरण की जांच की जाएगी। गड़बड़ी मिली तो कानूनी कार्रवाई भी होगी।

Wednesday, November 18, 2020

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं


लखनऊ। शासन ने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को पूर्व दशम (कक्षा 9 व 10) छात्रवृत्ति योजना के तहत 135 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दे दी है। लेकिन बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। 


बीएड-बीटीसी कॉलेजों को पिछले वर्षों में किए गए भुगतान की जांच चल रही है। इसलिए यह फैसला किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के मामले में जांच रिपोर्ट आने के के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। वहीँ, दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बीएड- पाठ्यक्रम के लिए दी गई राशि को छोड़ शेष राशि निदेशक के निवर्तन पर रखने का आदेश दिया गया है।

Tuesday, September 22, 2020

शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज

सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज।


राज्य मुख्यालय  : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के आदेश से नया विवाद छिड़ गया है। इस प्रक्रिया से एक तरफ शिक्षकों की जांच लटक गई है तो दूसरी तरफ सत्यापन के लिए जमा होने वाले शुल्क को लेकर फैसला नहीं हो पा रहा है। शिक्षक संगठनों ने यह शुल्क शिक्षकों से ही लिए जाने पर नाराजगी जताई है। शासन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन उन बोर्डों या विश्वविद्यालयों से करा लें, जहां से वे जारी किए गए हैं। 

इससे पहले जिलावार गठित जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ-साथ उनके सेवा संबंधी अभिलेखों एवं शैक्षिक अभिलेखों की जांच की थी। अब एक नया विवाद यह शुरू हो गया है कि सत्यापन के लिए शुल्क कौन अदा करेगा? कई विश्वविद्यालय अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए पहले ही शुल्क जमा करा लेते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है कि कुछ महाविद्यालय यह शुल्क शिक्षकों से ही वसूल रहे हैं। संगठन ने लखनऊ के ही एक महाविद्यालय का उदाहरण भी दिया है, जिसने सत्यापन कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही डाल दी है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार यह जांच 31 जुलाई तक पूरी होनी थी लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में यह जांच अब स्थगित कर दी जानी चाहिए।

Saturday, September 19, 2020

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

40 लाख देंगे तभी चेक होंगे प्रयागराज के 3732 शिक्षकों के प्रमाण पत्र, सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

 
प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के लिए सिर्फ प्रयागराज में विभाग को करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। करीब दो महीने पहले भेजे गए 3732 शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र का सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से नहीं हो सका है। विश्वविद्यालयों ने प्रपत्रों की जांच के लिए शुल्क मांगा है।

‘अनामिका’ प्रकरण सामने आने के बाद सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रपत्रों की जांच कर संबंधित विश्वविद्यालयों को भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। डीआइओएस कार्यालय के पास सत्यापन शुल्क के नाम पर कोई भी बजट न होने से यह कार्य अभी अधर में है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में 378 राजकीय विद्यालय के शिक्षक हैं, इनमें 250 महिला व 128 पुरुष हैं। वित्तपोषित कॉलेजों के कुल 3286 अध्यापक हैं, इनमें 809 महिला व 2477 शिक्षक हैं। 68 संस्कृत विद्यालयों के भी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए विश्वविद्यालयों के पास भेजा गया है।


सत्यापन के लिए विवि के शुल्क

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक डिग्री के सत्यापन के लिए 500 रुपये, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वद्यिालय में 500 रुपये, आइआइटी दिल्ली में 1000 रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण में दो हजार रुपये शुल्क देने पर ही डिग्री का सत्यापन संभव है।