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Thursday, July 30, 2020

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन,  सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन।

आगरा : : शिक्षकों के वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में बुधवार को शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर तालाबंदी कर सामाजिक गिरफ्तारी भी दी। हालांकि गिरफ्तारी के बाद शिक्षकों का वेतन और शिक्षामित्रों का मानदेय जारी कर दिया गया।



राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ के बैनर तले प्रदेश संयोजक मुकेश डागुर व वीरेन्द्र छौंकर के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर में ने एसडीएम महेंद्र कुमार व क्षेत्राधिकारी नम्रता श्रीवास्तव का सामाजिक गिरफ्तारी दी। शिक्षकों ने सीएम महेंद्र कुमार को बेसिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।


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अलीगढ़ : संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले 22 शिक्षकों की होगी जांच


अलीगढ़ : संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड करने वाले 22 शिक्षकों की होगी जांच


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में काम करने वाले 22 शिक्षकों के खिलाफ जांच की तलवार लटक गई है। संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी से बीएड करने वाले इन शिक्षकों के नाम एसआईटी ने अपने संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची में शामिल किए हैं, जिसके बाद इन सभी के शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन करवाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।


जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में फर्जी शिक्षकों का प्रकरण उजागर होने के बाद विभाग लगातार शिक्षकों की जांच करवा रहा है। इस दौरान एसआईटी ने विभाग को 16 ऐसे शिक्षकों की सूची भेजी है जिनकी डिग्री संदेहास्पद है और इसकी जांच कराई जानी चाहिए। इन सभी शिक्षकों ने है वाराणसी स्टेशन वाराणसी के संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री हासिल की है।


 एसआईटी से 16 शिक्षकों की सूची हासिल होने के बाद विभाग ने मानव सम्पदा पोर्टल पर अपलोड जानकारी से मिलान करके 6 शिक्षकों के नाम और शामिल किए हैं जिन्होंने संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से ही बीएड किया है। इन सभी के मामले भी एक जैसे हैं और संदेह के घेरे में है। अब विभाग ने इन सभी 22 शिक्षकों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन विद्यालयों में कार्यरत है यह शिक्षक

जिले के जिन शिक्षकों की बीएड डिग्री की जांच विभाग ने शुरु करी है वह सभी अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों की ड्यूटी प्रावि दीनापुर बिजौली, प्रावि नगला बाटुल, प्रावि पाली मुकीमपुर, प्रावि सांकरा, प्रावि खैमपुर, प्रावि नगला मढ़ैया, प्रावि भवानीपुर, प्रावि अजाहरी, प्रावि सरकोरिया, प्रावि नगला पटवारी, प्रावि सीयपुर, प्रावि आजादनगर, प्रावि केसीनगला, प्रावि नगला भोपा, प्रावि महारावल, प्रावि उटवारा नम्बर 1, प्रावि उटवारा नम्बर 2, प्रावि जट्टारी नम्बर 2, प्रावि शाहनगर सौरोला, प्रावि सिकंदरपुर, प्रावि संग्रामपुर, प्रावि टीकरी कनोवी में कार्यरत है। इन सभी के बीएड डिग्री का सत्यापन किया जाएगा।

शिक्षकों की बीएड डिग्री में संदेह की स्थिति होने के कारण इनके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है। अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आई तो इनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। -डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी

आक्रोश : हेडमास्टरों की जांच के लिए अधीनस्थ संविदाकर्मियों को दी गयी जिम्मेदारी


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत होने वाले विकास कार्यों की जांच संविदा पर काम करने वाले शिक्षकों को सौंपी गई है। विभाग के पोर्टल पर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट अपलोड करने के लिए इन शिक्षकों की ट्रेनिंग भी पूरी कराई जा चुकी है।


जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा निदेशालय से आने वाली विकास कार्यों की राशि से वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में जिले के विभिन्न स्कूलों में विकास कार्य कराए गए हैं। इसके साथ ही कार्य करती योजना के तहत ग्राम पंचायत से मिलने वाली विकास राशि से भी विकास काम हो रहे हैं। इसमें स्कूलों में चार दिवारी, शौचालय, पीने के पानी के लिए हैंडपंप, फर्नीचर, स्पोर्ट्स किट ऑन लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। अब निदेशालय ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पिछले 3 सालों में किए गए इन सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। 


लेकिन विभाग की ओर से यह कार्य विशेष शिक्षकों और विभाग में काम करने वाले फिजियोथैरेपिस्ट को सौंपा गया है। यह विशेष शिक्षक व फिजियोथैरेपिस्ट विभाग में संविदा शिक्षक के रूप में कार्य करते हैं। इसके साथ ही इन सभी की ड्यूटी स्कूलों में हेड मास्टर के अंडर में रहती है। ऐसे में अब जब इन सभी शिक्षकों को विद्यालय में जाकर किए गए विकास कार्यों को देख कर बहुत ही सत्यापन करने के लिए कहा गया है तो या इस काम से कतरा रहे हैं।


 इसका कारण यह है कि संविदा पर काम करने वाले सभी शिक्षक किसी न किसी हेड मास्टर के अंडर में ही अपनी ड्यूटी करते हैं। विद्यालय से जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर इन सभी शिक्षकों की संविदा को आगे बढ़ाया जाता है। इसके साथ ही विभाग में इस बात का भी विरोध हो रहा है कि संविदा पर काम करने वाले यह शिक्षक किस तरह से स्कूलों का भौतिक सत्यापन करेंगे।

विकास कार्यो की रिपोर्ट नकारात्मक गई तो संबंधित पर होगी कार्यवाही

परिषदीय स्कूलों में होने वाले सभी कामकाज हेड मास्टर की देखरेख में और एसएमसी सदस्यों की स्वीकृति के बाद ही कराए जाते हैं। विद्यालय के सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराना हेडमास्टर की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर भौतिक सत्यापन के दौरान किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई गई और वहां के काम मांगों के अनुकूल ना मिले तो उस हेड मास्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। जिसके कारण हेड मास्टर की मांग लिया है कि अगर यह जांच कराई जा रही है तो इसके लिए उच्च अधिकारियों को नियुक्त किया जाए।


निदेशालय ने स्कूलों में किए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए विशेष शिक्षकों और फिजियोथैरेपिस्ट की नियुक्ति किए जाने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी विभाग की ओर से इस काम को रोक दिया गया है और जल्दी ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। विभाग के अगले आदेश आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। -डॉ लक्ष्मीकांत पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी

Wednesday, July 29, 2020

हाथरस : कार्यालय में विभिन्न कार्यों हेतु सिटीजन चार्टर घोषित, शिकायत निस्तारण हेतु फोन / वाट्सएप्प नंबर व ईमेल आईडी जारी, देखें

हाथरस : कार्यालय में विभिन्न कार्यों हेतु सिटीजन चार्टर घोषित, शिकायत निस्तारण हेतु फोन / वाट्सएप्प नंबर व ईमेल आईडी जारी, देखें

जालौन : शिक्षकों पर अनुचित दबाव बनाकर नियमविरुद्ध यू-डायस (DCF) ऑनलाइन भराने के सम्बन्ध में RSM द्वारा की गई शिकायत पर जांच का आदेश

जालौन : शिक्षकों पर अनुचित दबाव बनाकर नियमविरुद्ध यू-डायस (DCF) ऑनलाइन भराने के सम्बन्ध में RSM द्वारा की गई शिकायत पर जांच का आदेश





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बिना सुरक्षा किट दिए लगाई शिक्षकों की ड्यूटी, वेतन रोके जाने के डर से शिक्षक कर रहे हैं सर्वे, उपज रहा है आक्रोश

बिना सुरक्षा किट दिए लगाई शिक्षकों की ड्यूटी, वेतन रोके जाने के डर से शिक्षक कर रहे हैं सर्वे, उपज रहा है आक्रोश


लखनऊ। कोरोना के लक्षण जानने के लिए परिषदीय विद्यालयों के 600 से ज्यादा शिक्षकों को स्वास्थ्य सर्वे के लिए तैनात कर दिया गया है। मगर उन्हें सुरक्षा किट तक मुहैया नहीं कराई गई है। इससे शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य सर्वे नहीं किया तो वेतन रोक दिया जाएगा। अपनी सुरक्षा दांव पर लगाकर वे सर्वे का काम कर रहे हैं। 


परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को कोविड 19 के सर्वे कार्य में लगा दिया गया है। शिक्षकों को रोजाना घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे करना है। लेकिन इस कार्य के लिए शिक्षकों को एक भी सुरक्षा किट मुहैया नहीं कराई गई है। शिक्षक खुद ही अपना मास्क, शील्ड, ग्लव्स, सैनिटाइजर आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षकों को संक्रमित क्षेत्र में भी जाना पड़ रहा है। इससे शिक्षकों को खुद संक्रमित होने का डर है। सर्वे के लिए भी सबसे ज्यादा शिक्षकों तैनात की गई है। इसको लेकर शिक्षकों में गहरा 1. रोष है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को भी कोरोना योद्धाओं की भांति सुविधाएं मिलें।


होम आइसोलेशन और अंतिम संस्कार की निगरानी के लिए नोडल नामित

लखनऊ। कोविड संक्रमितों को होम आइसोलेशन में रख कर तय प्रोटोकॉल के तहत इलाज मुहैया हो रहा है या नहीं इसकी निगरानी के लिए एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। यह जानकारी डीएम अभिषेक प्रकाश ने दी। उन्होंने बताया कि होम आइसोलेशन के दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर सीधे नोडल प्रभारी के मोबाइल नम्बर 9415005002 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। 


नोडल प्रभारी नियमित तौर पर नगर आयुक्त व सीएमओ से सामंजस्य बना कर इसकी अपडेट रिपोर्ट मंडलायुक्त को दंगे। डीएम ने इसके साथ ही संक्रमण से होने वाली मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत परिजनों की मौजूदगी में जल्दी से जल्दी करवाने की जिम्मेदारी भी बता प्रभारी एडीएम प्रशासन को सौपी है। इसके लिए कोविड संक्रमितों के इलाज को चित लेवल एक, दो और तीन के अस्पतालों में एक एक लेखपाल की तैनाती भी की जाएगी।

प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना केसों के चलते शिक्षकों ने की सरकार से कर्मचारियों की भांति रोस्टर की मांग

प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना केसों के चलते शिक्षकों ने की सरकार से कर्मचारियों की भांति रोस्टर की मांग


प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, मंगलवार को 3490 नये केस आये तो अब तक कुल संख्या 74 हजार के करीब हो चुकी है। इस बीच शिक्षकों ने सरकार से गुहार से लगायी है कि जिस तरह से सचिवालय में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को बुलाकर काम कराया जा रहा है उसी तरह से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया जाना चाहिए। 



इस बारे में शिक्षक संगठनों ने भी सरकार से अपील की है शिक्षकों को रोस्टर के हिसाब से बुलाया जायेगा तो उनको आने में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं कई शिक्षक आक्रोशित भी हैं कि शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय आते-आते कई शिक्षक बुखार से पीड़ित हैं लेकिन अधिकारियों के आदेश के चलते फिर भी उन्हें आना पड़ रहा है। शिक्षकों कहना है कि मौजूदा समय में सवारी साधन की भी स्थिति इतनी खराब है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है। उसके बाद भी शिक्षकों की ड्यूटी घर-घर अभिभावकों से मिलने के लिए कोरोनावायरस के रूप में लगा दी गयी है। इस संबंध में शिक्षक यह भी कहते हैं कि अन्य सरकारी कर्मचारियों को कोरोना वायरस सरकार ने माना है तो उनके लिए उचित मुवाअजा भी निर्धारित किया गया है, लेकिन यहां तो मौत होने के बाद उनकी पेंशन तक नहीं है।


यात्रा के दौरान कोरोना का ज्यादा खतरा

लखनऊ मंडल में आने वाले लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, लखीमपुर के अधिकांश शिक्षकों का कहना है कि जब वह बस या मैक्सी कैब से यात्रा करके अपने विद्यालय पहुंचते है तो इस दौरान सवारियों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता है, इस स्थिति में कभी भी कोरोना वायरस फैल सकता है।


बीआरसी पर भी बढ़ा खतरा

वहीं ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर कार्यालय बीआरसी पर भी कोरोना का खतरा बढ़ रहा है, मानव संपदा पोर्टल पर चल रहे कार्य के चलते शिक्षक भारी संख्या  में बीआरसी पर पहुंच रहे हैं, जहां न तो सोशल डिस्टेसिंग का पालन हो पा रहा है न ही वेबसाइट चलने से कार्य में तेजी आ पा रही है। 


"प्रदेश में कोरोना के तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। शिक्षक जिस तरह सवारी करके विद्यालय पहुंच रहे है, ऐसे में रोस्टर लागू किया जाना बहुत जरूरी हैं नहीं तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।" -महेश मिश्रा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

"स्कूल में जो भी कार्य हैं वह रोस्टर के हिसाब से शिक्षक जाये तो भी किए जा सकते हैं, कोई भी शिक्षक अपने कामों से नहीं भाग रहा है, और फिर जब सचिवालय में रोस्टरलागू है तो विद्यालय में क्यों नहीं?" -विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

कोरोना संक्रमण की स्थिति में बीएड की प्रवेश परीक्षा आयोजन पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

कोरोना संक्रमण की स्थिति में  बीएड की प्रवेश परीक्षा पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

 
कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस हालात में 9 अगस्त को प्रस्तावित बीएड प्रवेश परीक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश पत्र जारी करने के बाद अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। 


अभ्यर्थी शक्ति राजभर ने सोशल मीडिया पर अपना प्रवेश पत्रसाझा किया है। वह कहते हैं कि उन्होंने प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ के परीक्षा केन्द्रों पर पेपर देने का विकल्प भरा था। उन्हें 250 किमी दूर बलरामपुर में एमएलके पीजी कॉलेज में परीक्षा केन्द्र आवंटित किया गया है। 


प्रयागराज के बृजेश सिंह लिखते हैं कि उन्होंने प्रयागराज में परीक्षा केन्द्र का विकल्प भरा था। केन्द्र इटावा में दिया गया है। कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात में परीक्षा देने जाने का मतलब जान जोखिम में डालना है। प्रति आजाद लखनऊ विश्वविद्यालय को अपनी आपत्ति टैग करते हुए सोशल मीडिया में लिखा है कि कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। विवि प्रशासन को व्यवहारिक सोच के साथ इस परीक्षा पर फैसला लेना चाहिए। अंकित गौर लिखते हैं कि इन हालात में अभ्यर्थी न तो परीक्षा केन्द्र तक पहुंचेंगे.


तैयारियों पर वीडियो जारी किया 
बीएड प्रवेश परीक्षा करा रहे लविवि की ओर से तैयारियों को लेकर एक वीडियो जारी किया गया है। इसमें, राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेई का कहना है कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता के आधार पर केन्द्र आवंटित करने के बाद भी बहुत अधिक संख्या में अभ्यर्थी बच गए हैं। उनको अन्य शहरों में भेजा गया है। दावा है कि अभ्यर्थियों की सुविधा प्राथमिकता रही है। | से अपील है कि वह निश्चित होकर केन्द्रों पर जाकर परीक्षा दें। और न ही परीक्षा दे पाएंगे। 


अभ्यर्थी रानू कुमार ने लिखा है कि परीक्षा केन्द्रों पर भीड़भाड़ के माहौल में अगर सिर्फ एक सैनिटाइजर की बोतल और मास्क काफी होता तो देश में इस बीमारी को लेकर इतनी खतरा न बढ़ता।

सीएम तक पहुंची शिक्षक भर्ती की शिकायत, मानक के विपरीत शिक्षकों की नियुक्ति का मामला

सीएम तक पहुंची शिक्षक भर्ती की शिकायत, मानक के विपरीत शिक्षकों की नियुक्ति का मामला
 

प्रयागराज : 69 हजार शिक्षक भर्ती का प्रकरण अभी शांत भी नहीं हुआ कि सहायता प्राप्त विद्यालयों में मानक के विपरीत शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। इस प्रकरण की शिकायत भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से की है।


सत्र 2015-16 में जिले भर के दर्जनभर सहायता प्राप्त विद्यालयों में करीब सौ शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। इसमें राधा रमण इंटर कालेज, मैरीवाना मेकर, द्वारका प्रसाद गल्र्स कालेज, रमा देवी इंटर कालेज आदि हैं। इन स्कूलों में दो से लेकर दस शिक्षकों की नियुक्ति की गई। यह नियुक्ति शुरुआत से ही विवादों में रही। 


पिछले दिनों भाजपा नेता दिवाकर त्रिपाठी ने आरटीआइ के जरिए नियुक्ति के सभी दस्तावेज डीआइओएस से मांगे। आरटीआइ के जरिए सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि इन स्कूलों में भर्ती के विज्ञापन मानक के विपरीत निकाले गए थे। उस विज्ञापन में भर्ती का फार्मेट नहीं दिया गया था बल्कि केवल सूचना निकाली गई। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत कम थी, उसके बावजूद शिक्षक पद स्वीकृत कर भर्ती की गई। 


भाजपा नेता दिवाकर त्रिपाठी ने नियुक्ति में मिली भगत का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री को शिकायत कर आरोपितों पर कार्रवाई की मांग की है। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि भर्ती का विज्ञापन विद्यालय प्रबंधन ने दिया था। यह सभी नियुक्तियां नियमानुसार हुई हैं। भाजपा नेता के आरोप निराधार हैं।

चित्रकूट मण्डल : चार फीसदी पर अटकी राशन और कन्वर्जन कास्ट की योजना, छह लाख में से 24 हजार बालकों को ही मिल पाया लाभ

चित्रकूट मण्डल : चार फीसदी पर अटकी राशन और कन्वर्जन कास्ट की योजना, छह लाख में से 24 हजार बालकों को ही मिल पाया लाभ।

बांदा : लॉकडाउन के दौरान बंद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को घर बैठे राशन व पैसा देने की योजना चित्रकूट धाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पाई। महज चार फीसदी बच्चों को ही योजना का लाभ मिला है। चारों जनपदों में छह लाख बच्चों में सिर्फ 24 हजार बच्चों को ही पैसा और राशन मिला है। अधिकारी बजट का अभाव बता रहे हैं।




प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 24 मार्च से 26 जून तक बंद रहे परिषदीय स्कूलों के पहली कक्षा से 8वीं तक के बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत 76 दिन के मिड-डे मील का राशन और कन्वर्जन कास्ट का पैसा देने के निर्देश दिए थे। चित्रकूट धाम मंडल के चारों जनपदों में 9,684 विद्यालय हैं। इनमें 6,03,880 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल बंद रहने के दौरान मिड-डे मील के राशन और कन्वर्जन कास्ट का लाभ सिर्फ 24,603 बच्चों को मिल पाया है। यह मात्र चार फीसदी है। 5,79,277 बच्चे राशन व पैसा पाने से वंचित हैं। परिषदीय व प्राइमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे को 76 दिन का राशन कुल 7 किलो 600 ग्राम और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 4.14 रुपये की दर से तथा जूनियर में 11 किलो 400 ग्राम राशन और कन्वर्जन कास्ट प्रति बालक 5.66 रुपये की दर से दी जानी है। राशन कोटे की दुकान से मिलेगा। कन्वर्जन कास्ट का पैसा खाते में भेजा जाएगा।

लॉकडाउन में स्कूलों के बंद रहने की अवधि के मिड-डे मील के लिए शासन ने फिलहाल कुल 40 फीसदी बजट दिया है। यह खर्च किया जा चुका है। शेष बजट के लिए शासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है।

गंगा सिंह राजपूत, अपर निदेशक (बेसिक शिक्षा) चित्रकूट धाम मंडल, बांदा




लखनऊ : शिक्षकों के मूल शैक्षिक अभिलेख अब जांच के लिए नहीं जमा करवाए जाएंगे

लखनऊ : शिक्षकों के मूल शैक्षिक अभिलेख अब जांच के लिए नहीं जमा करवाए जाएंगे


उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा विभाग व उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभिलेखों की जांच के लिए शिक्षकों से किसी भी कीमत पर मूल अभिलेख जमा न करवाए जाएं। माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के अभिलेखों की जांच के दौरान कई जिलों में शिक्षकों से मूल अभिलेख जमा करवाए जा रहे थे।


लखनऊ: दस्तावेज सत्यापन के लिए 22 में से पहुंचे दो कॉलेज, शैक्षिक प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज जांचे जाने का सरकार का आदेश शिक्षकों को रास नहीं आ रहा
 

लखनऊ : शैक्षिक प्रमाण पत्र समेत अन्य दस्तावेज जांचे जाने का सरकार का आदेश शिक्षकों को रास नहीं आ रहा। दस्तावेज सत्यापन के लिए जुबली इंटर कॉलेज में पहले दिन मंगलवार को टीम इंतजार करती रही। 22 कॉलेजों के ¨प्रसिपलों को अपने-अपने शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन कराने के लिए पहुंचना था, मगर उसमें भी महज दो कॉलेज के ¨प्रसिपल ही पहुंचे। वे भी आधे-अधूरेदस्तावेज के साथ, जिन्हें टीम ने वापस कर दिया।


राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में राजधानी के करीब डेढ़ सौ से अधिक सरकारी, एडेड और संस्कृत विद्यालयों के लगभग 3400 शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन होने हैं। पहले दिन यानी मंगलवार को 22 कॉलेजों को सत्यापन के लिए बुलाया गया था। जुबली इंटर कॉलेज के ¨प्रसिपल धीरेंद्र मिश्र ने बताया कि जो शिक्षक आए थे उनके दस्तावेज भी पूरे नहीं थे। इस कारण उन्हें पूरे दस्तावेज के साथ आने के लिए कहा गया है। सत्यापन कार्य 4 अगस्त तक चलेगा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री एवं प्रवक्ता डॉ. महेंद्र नाथ राय का कहना है कि कई शिक्षक ऐसे भी हैं, जिनके मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र वर्षो पुराने होने के कारण खराब हो गए हैं।


प्रमाण पत्र गुम होने की दशा में उसे पुन: बनवाने के लिए संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थान तक दौड़ लगाना शिक्षकों की मजबूरी बन जाएगी। महेंद्र नाथ राय ने कहा कि जब दस्तावेज की छायाप्रति से भी सत्यापन किया जा सकता है तो मूल प्रमाण पत्र क्यों जमा कराए जा रहे हैं? उन्होंने सरकार से मांग की है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए फिलहाल शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन का कार्य टाल दिया जाए।


पहले दिन नहीं खुल सका सत्यापन का खाता जुबली इंटर कॉलेज में सत्यापन के लिए स्कूलों का इंतजार करती रही टीम, जो पहुंचे भी वो आधे-अधूरे दस्तावेज के साथ

69000 शिक्षक भर्ती : पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने दिल्‍ली में ओबीसी आयोग पर दिया धरना

69000 शिक्षक भर्ती : पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने दिल्‍ली में ओबीसी आयोग पर दिया धरना
 


बेसिक शिक्षा परिषद में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में आरक्षण नियमों का पालन नहीं करने के बिरोध में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को नई दिल्‍ली स्थित राष्ट्रीय ओबीसी आयोग कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया।



अभ्यर्थियों ने आयोग से भर्ती में नियमानुसार आरक्षण व्यवस्था लागू कराने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि राष्ट्रीय ओबीसी आयोग ने भर्ती पर रोक लगाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया, लेकिन विभाग ने अब तक नोटिस का जवाब तक नहीं दिया है। अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति से मुलाकात की। 


प्रजापति ने आश्वासन दिया कि जब तक सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देगी, तब तक भर्ती पर आयोग की रोक रहेगी। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। धरना- प्रदर्शन करने वालों में राजेश कुमार, विजय कुमार, , मनोज प्रजापति, सुशील कुमार, आशीष, लोहा सिंह पटेल समेत सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल हुए।

सीबीएसई-आईसीएसई छोड़ यूपी बोर्ड के इंग्लिश मीडियम स्कूलों की ओर रुख, लॉक डाउन में खराब आर्थिक स्थिति के चलते अभिभावकों ने लिया फैसला

सीबीएसई-आईसीएसई छोड़ यूपी बोर्ड के इंग्लिश मीडियम स्कूलों की ओर रुख, लॉक डाउन में खराब आर्थिक स्थिति के चलते अभिभावकों ने लिया फैसला।

प्रयागराज : कोरोना महामारी से स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। हालत यह है कि बड़ी संख्या में अभिभावकों ने बच्चों के स्कूल बदल दिए हैं। सीबीएसई आईसीएसई स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का अभिभावक एवं यूपी बोर्ड के इंग्लिश मीडियम स्कूलों में एडमिशन करा रहे हैं। उनका मानना है कि जब क्लास नहीं चलनी है तो सीबीएसई, आईसीएसई स्कूलों को मोटी फीस क्यों जमा करें, जबकि यूपी बोर्ड से जुड़े इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बहुत कम फीस लगती है।





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अपने जनपद में पॉलीटेक्निक की प्रवेश परीक्षा दे सकेंगे छात्र

अपने जनपद में पॉलीटेक्निक की प्रवेश परीक्षा दे सकेंगे छात्र।

लखनऊ : कोरोना संक्रमण को देखते हुए छात्र अब अपने ही जिले में पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा दे सकेंगे। पहले जो परीक्षा केंद्र निर्धारित किए गए थे, उन्हें निरस्त कर दिया गया है। पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए 12 और 15 सितंबर पंजीकरण कराया है।



संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए 3,90,894 छात्रों ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि छात्रों को अब अपने जिले में ही प्रवेश परीक्षा देने की सुविधा दी जा रही है ताकि उन्हें दूरस्थ जगहों पर न भटकना पड़े। प्रवेश परीक्षा केंद्र बनाने की प्रक्रिया में राजकीय और सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में 150 राजकीय और 19 अनुदानित पॉलीटेक्निक संस्थान हैं। सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए इन केंद्रों पर काफी संख्या में छात्र प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर गठित कमेटी परीक्षा केंद्रों और छात्रों की संख्या की समीक्षा कर रही है। यदि किसी जिले में छात्र ज्यादा होंगे तो दूसरे निजी कॉलेजों में परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए निजी कॉलेजों से भी अनुमति पत्र मांगा जा रहा है। जिन पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन परीक्षा होगी, उनके लिए कंप्यूटर सेंटरों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। परीक्षा केंद्र निर्धारित होते ही एडमिट कार्ड ऑनलाइन अपलोड कर दिए जाएंगे।

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Tuesday, July 28, 2020

छात्रवृत्ति चाहे राज्य दे या केंद्र सरकार, आधार हुआ अनिवार्य

छात्रवृत्ति चाहे राज्य दे या केंद्र सरकार,  आधार हुआ अनिवार्य

 

प्रयागराज। भारत सरकार या राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति में इस बार आधार अनिवार्य कर दिया गया है। आधार न होने की दशा में छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति के लिए आवेदन ही नहीं कर सकेंगे। 2020- 21 के लिए इसे अनिवार्य किया गया है। समाज कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन में इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। आधार नंबर का वेरिफिकेशन न होने पर फॉर्म सबमिट नहीं होगा।


आधार बेस भुगतान की प्रक्रिया के तहत विद्यार्थियों के आधार नंबर से लिंक बैंक खाते में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि जाएगी। छात्रों का बैंक खाता जिस बैंक में खुला होगा वह बैंक पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम से मैप होना चाहिए। छात्रवृत्ति को आधार बनवाना होगा, आधार को बैंक से लिंक कराएं। हाईस्कूल अंकपत्र- प्रमाण पत्र में दर्ज नाम ही आधार में होने चाहिए। जन्मतिथि गलत है तो अपडेट कराएं। आधार नंबर, नाम, पिता या पति का नाम, लिंग और जन्मतिथि का सत्यापन होने के के बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगी। इसे भरने के बाद ही फॉर्म सबमिट होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने पर यूजीसी से मांगा जवाब
 

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कालेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यूजीसी से तीन दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट मामले पर 31 जुलाई को फिर सुनवाई करेगा।


न्यायमूर्ति अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया कि वे याचिकाओं की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और यूजीसी के वकील को दें। कोर्ट ने यूजीसी को तीन दिन में याचिका का जवाब देने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता कोई प्रतिउत्तर दाखिल करना चाहते हैं तो अगली सुनवाई 31 जुलाई से पहले दाखिल कर दें। कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हैं जिसमें कालेजों और विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के 6 जुलाई के आदेश को चुनौती दी गई है। 


याचिका में कोरोना के अलावा बिहार व असम में बाढ़ के कारण छात्रों को होने वाली परेशानी का भी मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि करीब 390 विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराने की प्रक्रिया में हैं।

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल के अंकपत्र में देरी के आसार

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल के अंकपत्र में देरी के आसार

 

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का परिणाम घोषित हुए एक माह पूरा हो गया है। लेकिन, परीक्षार्थियों को अब तक अंक पत्र हासिल नहीं हो पा रहा है। यह जरूर है कि डिजिटल अंकपत्र जरूर वितरित किया जा रहा है। जिलों में सभी परीक्षार्थियों को वितरित करने में देरी की वजह कोरोना संकट है। हाईस्कूल का अंकपत्र इस माह के अंत तक क्षेत्रीय कार्यालयों में पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन कागज की कमी से देरी होने का अंदेशा है।


उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने 27 जून को हाईस्कूल व इंटर का परिणाम घोषित किया था, उसी दिन यह भी ऐलान हुआ था कि इंटर का अंकपत्र 15 और हाईस्कूल का 31 जुलाई से वितरित किया जाएगा। इस बीच छात्र-छात्रओं की सहूलियत के लिए डिजिटल अंकपत्र देने के निर्देश हुए थे। जैसे-तैसे इंटर का अंकपत्र प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय कुछ दिन पहुंच गया है लेकिन उसका वितरण अभी जिलों में शुरू नहीं हो सका है।


वहीं, प्रिंटिंग संस्थाओं ने हाईस्कूल के अंकपत्र में देरी होने का संकेत बोर्ड का भेजा है। संस्थाओं का कहना है कि हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की संख्या अधिक है, उस अनुपात में कागज नहीं मिल पा रहा है। अफसरों का कहना है कि 10 अगस्त तक अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंच सकते हैं, बोर्ड के अफसर यह समय कम करने पर जोर दे रहे हैं लेकिन छपाई का कार्य बाधित है। सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पूरा प्रयास हो रहा है कि जिलों में दोनों अंक पत्रों का वितरण कराया जाए। इंटर की प्रक्रिया शुरू हो रही है ऐसे ही हाईस्कूल का अंकपत्र भी मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल अंकपत्र से प्रवेश आदि में दिक्कत नहीं आ रही है।

फेलोशिप के लिए अब नेट पास करना जरूरी, UGC ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की

फेलोशिप के लिए अब नेट पास करना जरूरी, UGC ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की


नई दिल्ली : एससी, ओबीसी व अल्पसंख्यक समाज के प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए इनसे जुड़ी राष्ट्रीय फेलोशिप स्कीमों में बदलाव किया गया है। जिन्हें हासिल करने के लिए अब नेट ( नेशनल इलिजबिलटी टेस्ट) पास करना जरूरी होगा। यूजीसी ने इसे लेकर गाइडलाइन जारी की है। साथ ही कहा है कि इससे समाज के प्रतिभाशाली छात्रों को आगे आने का मौका मिलेगा। अभी तक इन सभी फेलोशिप स्कीमों में चयन पीजी कोर्स के अंकों के आधार पर किया जाता था।


यूजीसी का मानना है कि इन सभी फेलोशिप के लिए चयन की अब तक जो प्रक्रिया थी, उससे बड़ी संख्या में समाज के प्रतिभाशाली छात्र वंचित रह जाते थे। इसी कारण संबंधित मंत्रलयों को इसमें बदलाव का सुझाव दिया गया। इस सुझाव पर मंत्रलयों ने अपनी सहमति दे दी है। इस निर्णय के मद्देनजर अल्पसंख्यकों के लिए चल रही मौलाना आजाद फेलोशिप स्कीम की नई गाइडलाइन जारी की गई है। यह 2019-20 से ही लागू मानी जाएगी। 


इससे पहले इन सभी स्कीमों की फेलोशिप राशि में भी बढ़ोतरी की गई थी। इसके तहत सीनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए हर महीने 35 हजार रुपए और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए 31 हजार रुपए दिए जाते हैं। इन फेलोशिप स्कीमों के लिए वित्तीय मदद संबंधित मंत्रलय उपलब्ध कराता था। बाकी फेलोशिप को लेकर भी गाइडलाइन जारी की जा रही है।

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने धीमी जांच पर उठाए सवाल

69000 शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने धीमी जांच पर उठाए सवाल


प्रयागराज : सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा में मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव समेत अन्य फरार अभियुक्तों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग अब आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने की है। उन्होंने स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) की धीमी जांच और कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सवाल उठाए हैं। साथ ही आइजी एसटीएफ को पत्र लिखकर अपेक्षित कार्रवाई न होने की शिकायत की है। 


प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा को लेकर सोरांव थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस फर्जीवाड़े में धूमनगंज निवासी चंद्रमा यादव, भदोही का मायापति दुबे, प्रतापगढ़ का दुर्गेश पटेल और सरगना डॉ. केएल पटेल के दो साले समेत कुल आठ अभियुक्त अभी तक फरार चल रहे हैं। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि उन्होंने 15 जून 2020 को प्रयागराज एसटीएफ के एसपी को डॉक्यूमेंट, ऑडियो व वीडियो रिकाíडंग के साथ कई जानकारी वाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव सहित कई अभियुक्त फरार हैं। उन्होंने विवेचना में देरी और लापरवाही होने पर परिणाम गलत होने की आशंका जताई है।


 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 की परीक्षा के दौरान लीक हुए पर्चे और पकड़े गए साल्वर गिरोह के खिलाफ दर्ज मुकदमों में भी आधी-अधूरी कार्रवाई का आरोप भी अमिताभ ठाकुर ने लगाया है। कहा है कि प्रयागराज समेत अन्य शहरों में कुल 18 मुकदमे दर्ज किए गए थे। उनकी विवेचना धीमी है।

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य

बांदा : 1868 स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प, समन्वयक ने उजागर किए कायाकल्प के अधूरे कार्य।

बांदा ::  नए शिक्षा सत्र में जिले के 1868 विद्यालयों के बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ेगा। कहीं पीने का नहीं तो कहीं शौचालय नदारद हैं। तमाम स्कूलों में रसोईघर और बिजली कनेक्शन का अभाव है। विभागीय जिला समन्वयक द्वारा उप निदेशक (बेसिक) को भेजी गई रिपोर्ट में ये खामियां उजागर हुई हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 124 स्कूल सभी सुविधाओं से संतृप्त और लैस हैं। शासन ने मार्च 2019 में परिषदीय स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी 'ऑपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों को दी थीं, लेकिन ग्राम पंचायतों ने सभी स्कूलों के बुनियादी सुविधाओं से लैस नहीं किया। स्कूलों की ताजा हालत सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक (निर्माण) द्वारा दो दिन पूर्व बेसिक शिक्षा उप निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट से उजागर हुई है।


समन्वयक की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के 1992 परिषदीय स्कूलों में मात्र 124 स्कूलों में ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत कार्य कराए गए हैं। 1868 स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1992 परिषदीय विद्यालयों में 620 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। 844 स्कूलों में बालक व बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। 692 स्कूलों में रसोईघर, 1925 स्कूलों में हैंडवाशिंग यूनिट, 1217 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन और बाउंड्रीवाल नहीं है। 1947 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय व रैप नहीं बने हैं। 120 विद्यालयों में श्यामपट्ट (ब्लैक बोर्ड) नहीं हैं। 1198 स्कूलों की कक्षाओं में फर्श या टायल्स नहीं हैं।





पहले शौचालय और पंचायत भवन बनेंगे : जिला समन्वयक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि जिला पंचायत राज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण को शासन के निर्देशानुसार पहले कराया जा रहा है।

शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में 14 बिंदुओं पर संतृप्त करने का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा है। उन्हें ही सभी स्कूलों में यह कार्य कराना है। अधूरे कार्यों के बारे में शासन को पत्राचार किया गया है। -हरिश्चंद्र नाथ, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बांदा।

शासन ने 125 दिनों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय और पंचायत घर बनाए जाने के आदेश दिए हैं। इसलिए पहले ये दोनों कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के बाद ऑपरेशन कायाकल्प' से स्कूलों में काम होंगे। -संजय यादव, जिला पंचायत राज अधिकारी बांदा।


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फतेहपुर : राज्य अध्यापक पुरस्कार को 13 मास्साबों ने किया आवेदन, देखें सूची

फतेहपुर : राज्य अध्यापक पुरस्कार को 13 मास्साबों ने किया आवेदन, देखें सूची


फतेहपुर :: बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के उत्कृष्ट शिक्षक शिक्षकों का उत्साहवर्धन करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर वर्ष राज्य अध्यापक पुरस्कार दिया जाता है। वर्ष 2019 के राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए इस बार भी ऑनलाइन आवेदन मागे गए। जिसमें जिले के आठ ब्लाकों से 13 शिक्षक शिक्षिकाओं ने आवेदन किया। आवेदन मिलने के बाद विभाग द्वारा इनका कई बिंदुओं पर सत्यापन कराया गया है।



शिक्षक दिवस यानि पांच सितम्बर को मुख्यमंत्री द्वारा लखनऊ में चयनित मास्साबों को पुरस्कृत किया जाना है। इसके पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सम्बंधित खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से आवदेकों का सत्यापन कराया है। जिसमें आवेदन व्यक्तिगत टयूशन में लिप्त न हो, स्थानीय समुदाय में छवि की स्थिति, समाज, अभिभावक एवं छात्रों को उत्प्रेरित करने का कार्य, शैक्षिक क्षमता एवं उसमें सुधान करने की चेष्टा, बच्चों के प्रति वास्तविक स्नेह समेत 16 बिंदुओं पर जांच करते हुए आवेदन का सत्यापन कराया गया है। प्रदेश स्तर की चयन समिति द्वारा चयनित मास्साबों के नामों की घोषणा की जानी है। आवेदन मिलने के बाद विभाग द्वारा इनका कई बिंदुओं पर सत्यापन कराया गया है।


इंतजार : आवेदकों की विभिन्न बिंदुओं पर विभाग ने कराई जांच, आठ ब्लाकों से शिक्षक शिक्षकों ने किया है आवेदन।

*इन शिक्षकों ने किया आवेदन*

अम्बिका प्रसाद मिश्र, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर ऐरायां,

बृजेन्द्र सिंह प्राथमिक विद्यालय नरौली हथगाम,

राम प्रसाद प्राथमिक विद्यालय अहिंदा हथगाम,

आनंद कुमार मिश्र, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर ऐरायां,

प्रकाश चन्द्र द्विवेदी उच्च प्राथमिक विद्यालय जलालपुर भिटौरा,

सर्वेश कुमार अवस्थी प्राथमिक विद्यालय बाबूपुर अमौली,

धर्मेद्र कुमार प्राथमिक विद्यालय जगतपुर गाडा द्वितीय तेलियानी,

अर्चना अरोड़ा प्राथमिक विद्यालय बरेठी खुर्द खजुहा,

चम्पा प्राथमिक विद्यालय आदर्श मसवानी नगर क्षेत्र,

देवव्रत त्रिपाठी प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर गढ़ा विजईपुर,

बबलू सोनी प्राथमिक विद्यालय कोरांव हथगाम,

साधना प्राथमिक विद्यालय ढोढिया तेलियानी,

माया देवी प्राथमिक विद्यालय कुटीपर ऐरायां शामिल हैं।



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CBSE: नए नियमों से पुनर्मूल्यांकन में एक विषय के नंबर बदलने पर दूसरे पर पड़ेगा असर

CBSE: नए नियमों से पुनर्मूल्यांकन में एक विषय के नंबर बदलने पर दूसरे पर पड़ेगा असर।

सीबीएसई की ओर से जारी नए मूल्यांकन नियमों का असर पुनर्मूल्यांकन में छात्रों के दूसरे विषयों के नंबर पर पड़ेगा। बोर्ड की ओर से पुनर्मूल्यांकन से पहले जारी दिशा निर्देश में कहा गया है कि छात्र की ओर से जिस विषय के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया गया है, उसमें अंक बढ़ेंगे तो उन विषयों के नंबर भी बढ़ जाएंगे, जिसकी परीक्षा न होने के चलते असेसमेंट किया गया था।



पुनर्मूल्यांकन में छात्रों को नंबर बढ़ने पर जहां लाभ होगा तो नंबर कम होने की स्थिति में नुकसान भी होगा। पुनर्मूल्यांकन में नंबर कम होने की स्थिति में दोहरा नुकसान होगा, इस संबंध में सीबीएसई ने स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

सीबीएसई की ओर से 2020 की परीक्षा में कई विषयों की परीक्षा नहीं होने के चलते उसमें पहले तीन विषयों के अंक के आधार पर असेसमेंट करके अंक दिया गया है। ऐसे में जिन विषयों की परीक्षा हुई है, परीक्षार्थी उसमें अंक बढ़ाने के लिए आवेदन करेंगे तो अंक बढ़ने की स्थिति में असेसमेंट वाले विषयों के अंक बढ़ जाएंगे।
नंबर कम हुए तो असेसमेंट वाले विषयों के अंक कम हो जाएंगे, इससे छात्रों को दोहरा नुकसान होगा। गंगा गुरुकुलम की प्रधानाचार्या अल्पना डे का कहना है कि जिन बेस्ट थ्री सब्जेक्ट के अंक के आधार पर असेसमेंट किया गया, उसमें किसी भी विषय के अंक बढ़ते या घटते हैं तो औसत अंक दिया जाएगा। उनका कहना है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि नंबर बढ़ने पर लाभ और घटने पर छात्र को नुकसान होगा। इसका असर 10 वीं की तुलना में बारहवीं में अधिक होगा।

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प्रयागराज : बिना सुरक्षा मानक के कंप्यूटर अनुदेशकों की कोरोना जांच केंद्र पर लगी ड्यूटी, सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर ड्यूटी नहीं पहुंचे अनुदेशको को बीएसए ने नोटिस जारी कर किया जवाब तलब

प्रयागराज : बिना सुरक्षा मानक के कंप्यूटर अनुदेशकों की कोरोना जांच केंद्र पर लगी ड्यूटी, सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर ड्यूटी नहीं पहुंचे अनुदेशको को बीएसए ने नोटिस जारी कर किया जवाब तलब।

परिषदीय विद्यालयों के अस्थाई कंप्यूटर अनुदेशकों को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सुरक्षा मानकों को पूरा किए बिना केपी कॉलेज स्थित कोरोना जांच केंद्र पर ड्यूटी लगा दी। कोराना के भय के चलते मात्र 7000 रुपये के मानदेय पर काम करने वाले कंप्यूटर अनुदेशक ड्यूटी पर नहीं पहुंचे तो बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इनके खिलाफ नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। कोरोना जांच केंद्र पर ड्यूटी पर लगाए गए अनुदेशकों का कहना है कि उनके लिए सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अनुदेशकों ने जांच केंद्र पर ड्यूटी के लिए पीपीई किट की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।





बीएसए की ओर से 12 कंप्यूटर अनुदेशकों को नोटिस भेजकर जुलाई महीने का मानदेय रोके जाने और तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। बीएसए की ओर से इन कंप्यूटर अनुदेशकों की ड्यूटी कोरोना जांच केंद्र पर डाटा फीडिंग के लिए लगाई गई थी। ड्यूट पर नहीं आने वाले अनुदेशकों को भेजी नोटिस में बीएसए ने कहा है कि उनके नहीं आने से कोरोना की जांच में बांधा पड़ी। बीएसए ने इन अनुदेशकों से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है नहीं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में उच्च प्राथमिक अनुदेशक कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष भोलानाथ पांडेय का कहना है कि अनुदेशकों ने कभी किसी विभागीय आदेश की अवहेलना नहीं की है। उनका कहना है कि बिना पीपीई किट और कोरोना से बचाव का प्रशिक्षण दिए बिना कोविड-19 की डाटा फीडिंग में लगा दिया गया। डाटा फीडिंग के बगल में ही कोरोना की जांच चल रही है, ऐसी स्थिति में किसी अनुदेशक के साथ दुर्घटना हो जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, उनके परिवार की चिंता के बारे में अधिकारी आश्वासन दें तो अनुदेशक अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए तैयार हैं।


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संत कबीरनगर : मध्याह्न भोजन और कन्वर्जन कास्ट का वितरण समय से नहीं कराए जाने पर सभी खंड शिक्षाधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से बीएसए ने लगाई रोक

संत कबीरनगर : मध्याह्न भोजन और कन्वर्जन कास्ट का वितरण समय से नहीं कराए जाने पर सभी खंड शिक्षाधिकारियों के वेतन पर तत्काल प्रभाव से बीएसए ने लगाई रोक।

कबीरनगर : लॉकडाउन की अवधि में परिषदीय और सहायताप्राप्त विद्यालयों के बच्चों को मध्याह्न भोजन की प्रतिपूर्ति के लिए राशन और धनराशि दिया जाना था। यह कार्य विद्यालय स्तर से पूरा किया जाना था। अद्यतन कार्य पूरा नहीं होने को लेकर बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने सोमवार को जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।




जारी पत्र में बीएसए ने लिखा है कि जून माह में ही मध्याह्न भोजन और कन्वर्जन कास्ट उपलब्ध करवा दिया गया था। इसका वितरण समय अनुसार नहीं हो सका। इससे अनुश्रवण की लचर स्थिति सामने आती है। उन्होंने जिले के नौ ब्लाकों के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन बाधित करते हुए 30 जुलाई तक अनिवार्य रूप से लाभान्वित छात्रों की संख्या का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।


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फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में बनेगा एकेडमिक कैलेंडर, बीएसए ने खण्ड शिक्षाधिकारियों को दिया निर्देश

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में बनेगा एकेडमिक कैलेंडर, बीएसए ने खण्ड शिक्षाधिकारियों को दिया निर्देश।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग ने एकेडमिक कैलेंडर पर काम कराना भी शुरू करा दिया है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में एकेडमिक कैलेंडर बनवाएं।




राज्यपाल ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सुझाव दिए हैं। आठ माह पूर्व जब उन्होंने जिले में रात्रि प्रवास के बाद सुबह थरियांव के परिषदीय स्कूलों का निरीक्षण करते हुए वहां पढ़ने वाले बच्चों से मिलकर जिले के शैक्षिक स्तर को परखा था। लखनऊ में बीते दिन हुए कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षा पर चिता जताते हुए प्रदेश को देश के टॉप-5 में शामिल करने का आह्वान किया था। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि एकेडमिक कैलेंडर बनाए जाने के निर्देश मिले हैं। सभी खंड शिक्षाधिकारी इस काम में जुट गए हैं। कोरोना संकट की वजह से दिक्कत आ रही है। शैक्षिक कैलेंडर में कक्षावार कोर्स को माह वार बांटा जाएगा। वहीं साल भर में पड़ने वाले महापुरुषों के नाम जिनमें छुट्टियां नहीं होती हैं वह भी दर्ज होंगे। कैलेंडर के साथ ही राज्यपाल की मंशा के मुताबिक पढ़ाई को पोस्टर और चित्र के माध्यम से सुग्राही बनाया जाएगा। इस काम में अभिभावकों का सहयोग लिया जाएगा।


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आजमगढ़ : बेसिक शिक्षा विभाग के पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त, फर्जी अभिलेख पर पाई थी नौकरी

आजमगढ़ : बेसिक शिक्षा विभाग के पांच शिक्षकों की सेवा समाप्त, फर्जी अभिलेख पर पाई थी नौकरी।

आजमगढ़ :  बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों पर नौकरी कर रहे पांच सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। महानिदेशक स्कूल एवं राज्य परियोजना के आदेश पर बर्खास्त शिक्षकों से नियुक्ति से लेकर अब तक आहरित धनराशि की रिकवरी के लिए वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।




जिन सहायक अध्यापकों की सेवा समाप्त की गई है, उसमें शिक्षा क्षेत्र कोयलसा के प्राथमिक विद्यालय धनसिंहपुर में तैनात रहे मऊ जनपद के चांदमारी इमिलिया गांव निवासी आवेश कुमार पुत्र सतीश चंद्र शर्मा, शिक्षा क्षेत्र सठियांव के प्राथमिक विद्यालय सींहीं, निवासी इमलीडीह पोस्ट बारीपुर जनपद गोरखपुर की नेहा शुक्ला पुत्री ब्रह्मानंद शुक्ला, शिक्षा क्षेत्र बिलरियागंज के प्राथमिक विद्यालय शोधनपट्टी पर तैनात सहयक अध्यापक निवासी भुवनेश्वर प्रताप सिंह, 443, सिविल लाइन आजमगढ़, शिक्षा क्षेत्र महराजगंज के प्राथमिक विद्यालय पर तैनात रहे राजेश कुमार पुत्र रामदुलारे निवासी खलीलाबाद, जनपद संतकबीरनगर एवं शिक्षा क्षेत्र अतरौलिया के प्राथमिक विद्यालय पचरी पर तैनात बांकेबिहारी लाल पुत्र किशोर प्रसाद निवासी सल्लहपुर, तहसील सलेमपुर जनपद देवरिया शामिल हैं।


जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले थे

शासन के निर्देश पर जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले थे। कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी। निर्धारित मूल प्रमाणपत्रों के साथ संबंधित सहायक अध्यापक कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए और ना ही अपना कोई प्रत्यावेदन ही दिया।इसलिए महानिदेशक के निर्देश पर इनकी सेवा समाप्त कर दी गई है।

-अमरनाथ राय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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Monday, July 27, 2020

अब गाड़ियों से निशुल्क पहुंचाई जाएंगी किताबें, जनपद गोरखपुर को 22 लाख रुपये जारी

अब गाड़ियों से निशुल्क पहुंचाई जाएंगी किताबें

परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं निशुल्क किताबें मुहैया कराई जा रही हैं। कोरोना काल में किताबें अभिभावकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की थी। अब शासन स्तर से तय कर दिया गया है कि किताबें गाड़ियों से पहुंचाई जाएंगी। इसके लिए 22 लाख रुपये जारी किए गए हैं। जिले के तीन हजार विद्यालयों में परिषदीय विद्यालय पढ़ने वाले 3,63,000 विद्यार्थियों को किताबों का वितरण किया जाना है। पुरानी व्यवस्था में किताबें जिले से बीआरसी और वहां से संकुल पर पहुंचाई जाती थी। यहां से शिक्षक किताबें अपने अपने स्कूल पर ले जाते थे। इसके लिए शिक्षकों को कोई वाहन भत्ता नहीं मिलता था। इसकी वजह से कई बार किताबें स्कूल पर समय से नहीं पहुंच पाती थीं या शिक्षकों को किताबें अपने वाहनों से ले जानी पड़ती थीं। अब व्यवस्था में शासन ने बदलाव किया है। बीएसए ने कहा कि किताबों को बच्चों तक पहुंचाना प्राथमिकता है। शासन ने परिवहन व्यय बजट जारी कर दिया है।

जालौन : विद्यालयों के संविलियन के सम्बन्ध में खण्ड शिक्षा अधिकारी जालौन ने जारी किये दिशा-निर्देश

जालौन : विद्यालयों के संविलियन के सम्बन्ध में खण्ड शिक्षा अधिकारी जालौन ने जारी किये दिशा-निर्देश



पुरानी पेंशन, पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि, चिकित्सा भत्ता जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत शिक्षणेत्तर कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन के मूड में, डिप्टी सीएम से करेंगे वार्ता

पुरानी पेंशन, पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि, चिकित्सा भत्ता जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत शिक्षणेत्तर कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन के मूड में, डिप्टी सीएम से करेंगे वार्ता


पुरानी पेंशन, पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि, चिकित्सा भत्ता जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत शिक्षणोतर कर्मचारी एक बार फिर सक्रियता बढ़ाने वाले हैं। कोरोना संक्रमण काल में आंदोलन स्थगित करने वाले कर्मचारी अगस्त में लखनऊ कूच करने की तैयारी कर रहे हैं। वह उच्च शिक्षा मंत्रलय का प्रभार देख रहे डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से लंबित मांगों को लेकर निर्णायक वार्ता की तैयारी कर रहे हैं। डिप्टी सीएम का रुख देखने के बाद कर्मचारी आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे।


प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 50 हजार के लगभग शिक्षणोतर कर्मचारी कार्यरत हैं। वह योग्यताधारी कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति देने, राजकीय कर्मचारियों के समान तीन सौ दिनों के अवकाश का नगदीकरण, चिकित्सा भत्ता, आवास की सुविधा, प्रबंध समिति में भागीदारी, पुरानी पेंशन बहाली, कर्मचारियों की नियुक्ति पर लगी रोक हटाने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। 


मांगें पूरी करवाने के लिए 28 व 29 जनवरी को शिक्षा निदेशालय प्रयागराज पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। उन्हें मार्च में लखनऊ में प्रदर्शन करना था। लेकिन, कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के कारण आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। इधर, अनलॉक घोषित होने पर कर्मचारी आंदोलन को गति देने में जुट गए हैं। वह उच्च शिक्षा मंत्रालय का प्रभार देख रहे डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा से लंबित मांगों को लेकर निर्णायक वार्ता की तैयारी कर रहे हैं। डिप्टी सीएम का रुख देखने के बाद कर्मचारी आंदोलन की रूपरेखा तय  करेंगे।


प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 50 हजार के लगभग शिक्षणेतर कर्मचारी कार्यरत हैं। वह योग्यताधारी कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति देने, राजकीय कर्मचासियों के समान तीन सौ दिनों के अवकाश का नगदीकरण, चिकित्सा भत्ता, आवास की सुविधा, प्रबंध समिति में भागीदारी, पुरानी पेंशन बहाली, कर्मचारियों की नियुक्ति पर लगी रोक हटाने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। मांगें पूरी करवाने के लिए 28 व 29 जनवरी को शिक्षा 
निदेशालय प्रयागराज पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था उन्हें मार्च में लखनऊ में प्रदर्शन करना था। लेकिन, कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के कारण आंदोलन स्थगित कर दिया गया था इधर अनलॉक घोषित होने पर कर्मचारी आंदोलन को गति देने में जुट गए हैं।

समाज कल्याण के स्कूलों के बच्चों को नहीं मिलेगी यूनीफार्म, शासन की तरफ से नहीं दिया गया इस मद में धन

प्रयागराज : समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित स्कूलों के बच्चों को इस बार भी यूनिफॉर्म नहीं मिल पाएगी। शासन की तरफ से इस मद में धन नहीं दिया गया है। परिषदीय विद्यालयों और राजकीय विद्यालयों के बच्चों को यूनीफार्म वितरण करने के लिए धन आ गया है। रकम सभी विद्यालयों की प्रबंध समिति के खातों में भी भेज दी है। प्रधानाध्यापक अपने स्तर से कपड़े के लिए कोटेशन मांग रहे हैं। उसके बाद स्वयं सहायता समूहों की मदद से यूनीफार्म तैयार कराकर विद्यार्थियों को दी जाएगी। प्रत्येक विद्यार्थी को दो सेट यूनीफार्म देनी है। प्रदेश में कुल 571 विद्यालयों में 30 प्रयागराज में हैं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि सिर्फ परिषदीय और राजकीय विद्यालयों के बच्चों को यूनीफार्म देने के लिए बजट आया है। उसी के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। अभी समाज कल्याण विभाग के विद्यालयों के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है।

प्रमोशन, वेतन विसंगति को लेकर शिक्षक परेशान, 2008 से राजकीय कॉलेज में एलटी ग्रेड को नहीं मिली प्रोन्नति

प्रमोशन, वेतन विसंगति को लेकर शिक्षक परेशान, 2008 से राजकीय कॉलेज में एलटी ग्रेड को नहीं मिली प्रोन्नति


लखनऊ :: प्रदेश के 800 से ज्यादा राजकीय इंटर कॉलेजों में से किसी में भी नियमित प्रधानाचार्य नहीं है। वर्ष 2008 से राजकीय इंटर कॉलेजों में एलटी ग्रेड को प्रोन्नति नहीं दी गई। 2001 से एसीपी यानी एश्योर्ड कॅरिअर प्रमोशन का भी लाभ नहीं मिला।




वहीं खण्ड शिक्षा अधिकारियों को भी 2011 से प्रोन्नति नहीं दी गई। बेसिक और माध्यमिक के बीच संवर्गों को अलग करने को लेकर घोषणाएं भले हुई हों लेकिन अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। राजकीय शिक्षकों के प्रमोशन के लिए कई बार गोपनीय आख्या मांगी गई लेकिन प्रवक्ता पद पर प्रोन्नति नहीं दी।


वहीं प्रधानाचार्य पदों पर डीपीसी को लगभग 2 वर्ष हो चुके हैं लेकिन उसका रिजल्ट अभी तक नहीं दिया गया। मामला कोर्ट में है और शिक्षकों का आरोप है कि लचर पैरवी के अभाव में उनके मामला लटक गया है। प्रधानाचार्य के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से और 50 फीसदी प्रोन्नति से भरे जाते हैं।


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लखनऊ : मूल अभिलेख जमा नहीं करेंगे शिक्षक, रविवार को हुई माध्यमिक शिक्षक संघ की ऑनलाइन बैठक में लिया गया फैसला


लखनऊ। माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों ने जांच के लिए मूल अभिलेख जमा करने से इनकार कर दिया है। मा.शिक्षक संघ की रविवार को हुई ऑनलाइन बैठक में यह फैसला लिया गया।

शासन के स्तर पर शुरू की गई शिक्षकों की जांच के लिए डीआईओएस ने शिक्षकों को मूल अभिलेख जमा करने का निर्देश दिया है उधर शिक्षकों का कहना है कि मूल अभिलेख जमा करने पर उनके खोने का खतरा है। संघ के प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्र का कहना है कि शिक्षकों के शैक्षणिक अभिलेखों/प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय द्वारा की जानी है। डीआई ओएस के स्तर पर मूल अभिलेख जमा कराने का कोई औचित्य ही नहीं है।