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Sunday, September 13, 2020

कोरोना के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा तैयारियों पर लगा ग्रहण

 कोरोना के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा तैयारियों पर लगा ग्रहण

 
शैक्षिक सत्र आधा सत्र बीत रहा है, अभी कॉलेजों में प्रवेश चल रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमित शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के 27 हजार से अधिक संबद्ध कॉलेजों में कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परीक्षा फार्म भरे जाने से इम्तिहान की तैयारियां अधर में हैं। वजह, परीक्षार्थियों की संख्या तय नहीं है। जुलाई माह से चल रहे प्रवेश में छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम है। इसीलिए पंजीकरण की तारीखें दो बार बढ़ाई जा चुकी हैं, फिर भी तय नहीं है कि अपेक्षित छात्र-छात्राएं प्रवेश ले लेंगे। 


यूपी बोर्ड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं कराने का तय शेड्यूल रहा है। मुख्यालय में उसी के अनुसार वर्षभर कार्य चलता रहता है। सितंबर माह में आमतौर पर सभी कालेजों से आधारभूत सूचनाएं मांगी जाती रही हैं, ताकि उसी के अनुसार परीक्षा केंद्र निर्धारण किया जा सके। 2021 की परीक्षा के लिए अभी शुरुआत भी नहीं हो सकी है। यह जरूर है कि बोर्ड सचिव ने पिछले माह हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा कराने का अनुमानित माह घोषित किया है। उसके बाद से सारी प्रक्रिया ठप है। अक्टूबर में परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति और नवंबर में केंद्र निर्धारण का कार्य पूरा होता रहा है।


अभी कंपार्टमेंट परीक्षा पर असमंजस : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा 2020 में एक विषय में अनुत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षा होनी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा चुके हैं साथ ही शासन को परीक्षा तारीख तय करने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है, अब तक तारीख का इंतजार हो रहा है।

तो दोगुने हो जाएंगे परीक्षा केंद्र : 2021 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा में यदि पिछले वर्ष की तरह ही परीक्षार्थी आवेदन करते हैं तो परीक्षा केंद्रों की तादाद दोगुनी हो जाएगी। शासन ने कुछ दिन पहले कोविड-19 को देखते हुए इस संबंध में सूचना मांगी थी। उसमें कहा गया कि पिछले वर्ष 7783 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई थी, शारीरिक दूरी का अनुपालन करने में केंद्रों की संख्या दोगुनी करनी होगी।

इस माह के अंत तक पंजीकरण : यूपी बोर्ड प्रशासन फिलहाल कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश व परीक्षा फार्म भरने में जुटा है। इस माह के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। उसके बाद ही परीक्षा की तैयारी शुरू होगी। वहीं, पढ़ाई ऑनलाइन कराई जा रही है।

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में कटौती कर सकती है सरकार, नियमों में करना होगा बदलाव

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में कटौती कर सकती है सरकार, नियमों में करना होगा बदलाव

 
लखनऊ : गरीब विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में प्रदेश सरकार इस बार कटौती कर सकती है। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल कॉलेजों के खर्च में भी कमी आई है। इसलिए सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति की रकम कम करने पर विचार कर रही है। साथ ही ऑनलाइन कक्षाओं को मान्यता देने के लिए नियमावली में भी बदलाव किया जाएगा।


प्रदेश में समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग हर साल 57 लाख से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति देते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण छात्रवृत्ति की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। पहले चरण की छात्रवृत्ति दो अक्टूबर को बांटी जाती है। इसलिए समाज कल्याण विभाग ने दिशा-निर्देश मांगे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में छात्रवृत्ति किस प्रकार बांटी जाए, इसे लेकर अपर मुख्य सचिव वित्त के साथ समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण के अफसरों की एक बैठक हो चुकी है। इसमें कोई निर्णय नहीं हो सका। ऑनलाइन पढ़ाई में स्कूल, कॉलेज व संस्थानों का खर्च कम हुआ है, जबकि डेटा, लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्ट फोन के लिए विद्यार्थियों का खर्च बढ़ गया है। शिक्षण संस्थान में छात्रों के न जाने से बिजली-पानी व प्रयोगशाला से संबंधित खर्च भी बच रहे हैं।


’>>उच्चस्तरीय बैठक में जल्द हो सकता है फैसला

’>>हर साल 57 लाख विद्यार्थियों को दी जाती है छात्रवृत्ति

नियमों में करना होगा बदलाव

कक्षा में 75 फीसद उपस्थिति के नियम में भी बदलाव करना होगा। पाठ्यक्रम के लिए एनबीए (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन) व नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल) की अनिवार्यता भी इस साल स्थगित करनी होगी।

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग                 


बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने व्यापक जनहित में केन्द्र व राज्य सरकारों से अपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन से संक्रमित देश में आर्थिक मंदी से भीषण बेरोजगारी एवं जीवन में अभूतपूर्व संकट झेल रहे करोड़ों लोगों के सामने बच्चों के फीस जमा करने की समस्या बेहद गंभीर है। जिसके कारण लोगों को कई जगह अब धरना-प्रदर्शन आदि के रूप में सामने आना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को पुलिस के डण्डे खाने पड़ रहे हैं, जो अति-दु:खद है। 


मायावती ने शनिवार सुबह ट्विट किया-



उन्होंने कहा कि ऐसे 'एक्ट आफ गॉड' के समय में संवैधानिक मंशा के अनुरूप सरकार को कल्याणकारी राज्य होने की भूमिका खास तौर से काफी बढ़ जाती है। केन्द्र व राज्य सरकारेंअपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी व प्राइवेट स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति करें अथार्त व्यापक जनहित में बच्चों की स्कूल फीस माफ करें।

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान।

फतेहपुट : संकट काल में भले ही परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए विद्यालय बंद चल रहे हों लेकिन इनको निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली अभी जिले में 40 प्रतिशत ही शुरू हो गई है। इस बार भी प्रशासन सामग्री समय से देने के लिए शासन प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेजी पर हैं।

यूनिफार्म का वितरण हो पाया है कि अब स्वेटर वितरण की कवायद भी स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से स्वेटर की खरीद की जाएगी।

बच्चों को इस साल समय से निदेशालय और समग्र शिक्षा अभियान शैक्षिक सत्र में सभी बच्चों को 31 अक्टूबर तक स्वेटर बांटने का निर्देश दिया है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को हर साल निःशुल्क एक स्वेटर देने का प्रावधान है। पिछले सत्रों में स्कूलों में स्वेटर देने के लिए बीएसए को स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण की कार्यवाही रिपोर्ट रोजाना बेसिक शिक्षा के राज्य परियोजना कार्यालय को भेजने के निर्देश है। शासन ने चालू विद्यार्थियों को दिसंबर के अंत तक मुश्किल स्वेटर मिल पाए थे। इस पर विभाग की खूब किरकिरी हुई थी। इस प्रशासन ने समय से बच्चों को स्वेटर मुहैया कराने को नियत समय में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।




ई-टेंडरिंग के साथ जैम पोर्टल से होगी खरीद :  इस साल भी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चों को स्वेटर दिए जाने हैं। जिसकी खरीद और आपूर्ति जिला स्तर पर जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण के लिए शासन ने समय सारणी भी तय की है। बेसिक शिक्षा निदेशालय से जारी निर्देशो में सभी बीएसए को स्वेटर खरीद के सिलसिले में जिला स्तरीय समिति की बैठक की तिथि, जेम पोर्टल पर स्वेटर खरीदने के लिए ई टेंडर के प्रकाशन और बिड अपलोड करने और खोलने की तारीख की जानकारी देनी होगी।




समूह की महिलाओं ने दिखाई तेजी : परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब 2 लाख 32 हजार 909 छात्र-छात्राओं को यूनीफार्म दिया जाना है। जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार देने के लिए इस बार करीब 65 हजार यूनीफार्म सिलने का काम सौंपा गया है।  जिन्होंने अब तक करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। जिसका भुगतान एसएमसी द्वारा यूनीफार्म वितरण के बाद किया जाता है। हो रही लेट लतीफी को लेकर विभागीय हस्ताक्षेप के बाद समूह की महिलाओं ने यूनीफार्म तैयार करने में अब तेजी दिखाई है, जिसके चलते समय से ड्रेस वितरण कार्य पूरा हो सके।

बोले जिम्मेदार : परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को यूनीफार्म वितरण कार्य तेजी | पर है। करीब 40 फीसदी बच्चों को वितरण किया जा चुका है। प्रशासनिक कमेटी |द्वारा जेम पोर्टल से स्वेटर खरीद की जाएगी। इसके पूर्व ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया कराई जा रही है।

-शिवेंद्र प्रताप सिंह




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लखनऊ : बड़े स्कूल नहीं ले रहे हैं गरीब बच्चों के दाखिले, अधिकारी बेबस

लखनऊ : बड़े स्कूल नहीं ले रहे हैं गरीब बच्चों के दाखिले, अधिकारी बेबस।

लखनऊ : प्रमुख संवाददाताबड़े स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले कराने में बेसिक शिक्षा के जिले के अधिकारी बेबस नजर आ रहे हैं। वह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय अभिभावकों को अदालत जाने की सलाह दे रहे हैं। इसकी वजह से अभिभावक अपने बच्चों को दाखिले के लिए भटक रहे हैं। राजधानी के तमाम बड़े स्कूलों ने आरटीई के तहत गरीब बच्चों को एडमिशन देने से मना कर दिया है।




बीएसए कार्यालय ने इस वर्ष आरटीई के तहत करीब 10,947 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में दाखिले के लिए चयनित किया है। इसमें छोटे बड़े सभी कॉलेजों को शामिल हैं। सूची जारी होने के बाद अब बच्चों के अभिभावक जब दाखिले के लिए स्कूलों में जा रहे हैं तो वहां उन्हें ठेंगा दिखाया जा रहा। स्कूल संचालक दाखिले से साफ मना कर दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि एडमिशन नहीं लेंगे जिससे शिकायत करना हो करो।

------------------------इन स्कूलों में नहीं ले रहे हैं दाखिलेशहर के कई बड़े स्कूल ऐसे हैं जो एक भी गरीब बच्चे का एडमिशन नहीं ले रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक सिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेंट्रल एकैडमी, पायनियर मांटेसरी स्कूल तथा सिटी मांटेसरी स्कूल जैसे कई अन्य कॉलेज भी हैं जिन्होंने एडमिशन नहीं लिया है।-------------------सीएमएस ने 48 बच्चों की खुद जांच करा कर बताया अयोग्य सिटी मांटेसरी स्कूल ने 48 बच्चों को यह कहकर वापस कर दिया है कि यह बच्चे दूसरी जगह पढ़ रहे थे। इसलिए एडमिशन के लिए अर्ह नहीं हैं। अब सवाल यह उठता है कि बीएसए कार्यालय की रिपोर्ट सही मानी जाय या सीएमएस की। अगर बीएसए कार्यालय ने परीक्षण के बाद इन्हें स्कूल आवंटित किया तो सीएमएस यह कैसे लिख रहा है कि यह बच्चे दूसरी जगह पढ़ रहे हैं। ----------------------मेरे दोनों बेटे चैतन्य व लक्ष्यदीप का नाम सेंट्रल एकेडमी के लिए आया।

मैं वहां गया तो स्कूल ने एडमिशन से मना कर दिया। कहा जिससे शिकायत करना हो करो एडमिशन नहीं लेंगे। अधिकारी अदालत जाने की सलाह दे रहे हैं।महेंद्र यादव, अभिभावक, विकास नगर----------मेरी बच्ची विदुषी दीक्षित को आर्मी पब्लिक स्कूल एलाट किया गया। वहां एडमिशन कराने पहुंचा तो बता दिया कि वहां नर्सरी की क्लास नहीं चलती। अब कहां जाएं।जितेश दीक्षित, नरही-----


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Saturday, September 12, 2020

CBSE : कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी, क्लिक करके करें डाउनलोड

CBSE : कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी।

CBSE Compartment Admit Card 2020 Released : सीबीएसई बोर्ड (CBSE Board) ने 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड जारी किया गया है। सीबीएसई बोर्ड ने परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड ऑफिशियल पोर्टल cbse.nic.in पर रिलीज किया है। ऐसे में जो भी परीक्षार्थी इस एग्जाम में शामिल होने वाले हैं, वे आधिकारिक पोर्टल पर लॉगइन करके कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके भी कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।


▪️ 👉🏻 यहां क्लिक करके डायरेक्ट एडमिट कार्ड करें डाउनलोड 👈🏻▪️


▪️👉🏻 ऑफिशियल वेबसाइट पर जाने के लिए यहां करें क्लिक 👈🏻▪️






10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राएं आधिकारिक पोर्टल cbse.nic.in पर जाएं। इसके बाद होमपेज पर दिए लिंक पर क्लिक करें, जिस पर लिखा हुआ है कि 10वीं और 12वीं कंपार्टमेंट परीक्षा के एडमिट कार्ड लिंक डाउनलोड करें लिखा हुआ है। अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जाएगा। इसके बाद आवेदन संख्या, रोल नंबर और उम्मीदवार का नाम एंटर करें। इसके बाद आपके सामने एडमिट कार्ड ओपन हो जाएगा। एडमिट कार्ड भविष्य के लिए प्रिंटआउट संभालकर रखें।

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हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान


उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने अधिवक्ता के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है। इसमें बीएसए पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। बीएसए दफ्तर का बहिष्कार करने की बात भी शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने पत्र में कही है।


जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामवीर सिंह एवं महामंत्री अनिल कुमार ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रमेशचंद्र शर्मा के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है, जिसमें मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शिक्षक संघ के किसी भी प्रत्यावेदन का संज्ञान नहीं लिया जा रहा। नोटिस में अन्य आरोप भी लगाए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने अध्यापकों को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं शिक्षक संघ के प्रति अनुचित व्यवहार करने के कारण कार्यालय का बहिष्कार करने की भी बात कही है।


 नोटिस के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सिविल कोर्ट के नोटिस का निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर जूनियर संगठन ने मेरे नोटिस का कोई तर्क संगत जवाब नहीं दिया तो इनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी। -मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

यूपी के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए हिन्दी में बनाएंगे वीडियो

 
अब माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक एनसीईआरटी के लिए भी वीडियो बनाएंगे। इसके लिए एनसीईआरटी विषय और पाठ के नाम बताएगा और उसके मुताबिक विभाग शिक्षकों को चयनित कर वीडियो बना कर भेजेगा। इसे पीएम ई-विद्या चैनल पर चलाया जाएगा। अभी तक यूपी के शिक्षकों के वीडियो यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए ही प्रसारित किए जा रहे हैं। 



हिन्दी में वीडियो बनाने के लिए यूपी से साधा संपर्कएनसीईआरटी लॉकडाउन में हर कक्षा के लिए ई-विद्या चैनल शुरू किया है और इस पर कक्षावार वीडियो का प्रसारण होता है। ये चैनल निशुल्क हैं और पूरे देश में प्रसारित किए जा रहे हैं। हिन्दी पट्टी के प्रदेशों के लिए पाठों के वीडियो हिन्दी में बनवाने के लिए एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क साधा है। दरअसल, ये ख्याल उन्हें यूपी के वीडियो देख कर आया है। 


लॉकडाउन के दौरान यूपी बोर्ड ने दूरदर्शन व स्वयंप्रभा (अब पीएम ई विद्या) चैनल पर स्लॉट लेकर प्रसार शुरू किया। इस चैनल पर वीडियो चलाने के लिए एनसीईआरटी का अनुमोदन लेना पड़ता है। इन वीडियो को देखने के बाद ही एनसीईआरटी ने यूपी से संपर्क से साधा।860 वीडियो एनसीईआरटी ने पास किएयूपी ने लॉकडाउन के दौरान ही वीडियो बनवाने की शुरुआत की और हजारों की संख्या में शिक्षकों ने वीडियो भेजे। इनमें से 860 वीडियो एनसीईआरटी ने प्रसारण के लिए पास कर दिए। 


निदेशालय स्तर पर एक टीम का गठन किया गया है जो वीडियो का परीक्षण कर एनसीईआरटी भेजती है या रिजेक्ट करती है। वीडियो बनाने वाले 134 शिक्षकों को शिक्षक दिवस के मौके पर ई प्रमाणपत्र भी दिए गए। 

परिवार के लिए ‘प्रतिष्ठा’ बन गई मार्कशीट, पीएम मोदी ने किया साफ- वर्ष 2022 से नए पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

परिवार के लिए ‘प्रतिष्ठा’ बन गई मार्कशीट, पीएम मोदी ने किया साफ- वर्ष 2022 से नए पाठ्यक्रम से होगी पढ़ाई

 
नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को साफ किया कि साल 2022 से छात्रों की पढ़ाई नई शिक्षा नीति के तहत तैयार हो रहे पाठ्यक्रम से ही होगी। शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा समस्याओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि एक बड़ी समस्या यह भी है कि हमारे देश में सीखने पर आधारित शिक्षा की जगह मार्क्‍स और मार्कशीट वाली शिक्षा व्यवस्था हावी है। सच्चाई यह है कि मार्कशीट अब मानसिक प्रेशर शीट और परिवार की प्रेस्टीज शीट बन गई हैं यानी इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया गया है।


प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में स्कूल शिक्षा से जुड़े शिक्षकों के दो दिवसीय सम्मेलन को वचरुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई से मिल रहे तनाव से अपने बच्चों को निकालना ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर बेवजह का दबाव न पड़े। साथ ही कोशिश यह भी होनी चाहिए कि केवल एक परीक्षा से छात्रों का मूल्यांकन न किया जाए, बल्कि उनके विकास के अलग-अलग पहलुओं से जुड़ा मूल्यांकन हो। यही वजह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों को मार्कशीट की जगह उनके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए एक रिपोर्ट कार्ड का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें छात्र की विशिष्ट क्षमता, योग्यता, रवैया, प्रतिभा, स्किल (कौशल), क्षमता शामिल होगा।



पीएम ने कहा ‘जब हम आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाएंगे तो छात्र इस नए पाठ्यक्रम के साथ नए भविष्य की तरफ कदम बढ़ाएंगे।’ यह पाठ्यक्रम दूरदर्शी, भविष्य निर्माण करने वाला और वैज्ञानिक होगा। वहीं मातृभाषा में पढ़ाई पर सवाल खड़ा करने वालों को भी पीएम ने जवाब दिया और कहा कि यहां हमें यह समझने की जरूरत है कि भाषा शिक्षा का माध्यम है। भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है। किताबी पढ़ाई में फंसे-फंसे कुछ लोग यह फर्क भूल जाते है।


एजुकेशन इन 21 फर्स्ट सेंचुरी'' कॉन्क्लेव में पूरे देश के शिक्षा मंत्रियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली साबित होगी।



प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में दुनिया के हर क्षेत्र में बदलाव आया है। हर व्यवस्था बदल गई। इन तीन दशकों में हमारे जीवन का शायद ही कोई पक्ष ऐसा होगा, जिसमें बदलाव नहीं आया हो। लेकिन वो मार्ग, जिस पर चलते हुए समाज भविष्य की तरफ बढ़ता है, वो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही थी। पुरानी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना अत्यावश्यक हो गया था।

बच्चों को प्रेक्टिकल शिक्षा से जोड़ें

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि शिक्षक खुद अपने हिसाब से लर्निंग मटेरियल तैयार करें, बच्चे अपना टॉय म्यूजियम बनाएं, पालकों को जोड़ने के लिए स्कूल में कम्यूनिटी लाइब्रेरी हो, तस्वीरों के साथ बहुभाषायी शब्दकोष हो, स्कूल में भी किचन गार्डन हो, ऐसे कितने ही विषयों पर बात हुई है, अनेक नए सुझाव दिए गए हैं। मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे प्रिंसिपल्स और शिक्षक पूरे उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि शिक्षक बच्चों को Fun Learning, Playful Learning, Activity Based Learning और Discovery Based Learning का माहौल दें। बच्चे जैसे-जैसे क्लास में आगे बढ़ें, उनमें ज्यादा सीखने की भावना का विकास हो, बच्चों का मन, उनका मस्तिष्क वैज्ञानिक और तार्किक तरीके से सोचना शुरू करे, उनमें Mathematical Thinking और Scientific Temperament विकसित हो, ये बहुत आवश्यक है और Mathematical Thinking का मतलब केवल यही नहीं है कि बच्चे Mathematics के प्रॉब्लम ही सॉल्व करें, बल्कि ये सोचने का एक तरीका है। ये तरीके हमें उन्हें सिखाना है। ये हर विषय को, जीवन के पहलुओं को Mathematical और Logical रूप से समझने का दृष्टिकोण है, ताकि मस्तिष्क अलग-अलग perspective में analyse कर सके। बच्चों के दृष्टिकोण, मन और मस्तिष्क का विकास बहुत जरूरी है, और इसलिए ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसके तौर-तरीकों पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है।

बच्चों को सही उम्र में शिक्षित करना

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में 5 + 3 + 3 + 4 की व्यवस्था बहुत सोच- समझकर की गई है। इसमें Early Childhood Care and Education को एक बुनियाद के रुप में  शामिल किया गया है। आज हम देखें तो प्री स्कूल की Playful Education शहरों में, प्राइवेट स्कूलों तक ही सीमित है। वो अब गाँवों में भी पहुंचेगी, गरीब के  घर तक  पहुंचेगी। मूलभूत शिक्षा पर ध्यान इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

बच्चों को प्रकृति से जोड़ें

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़ें, जिससे उनका समावेशित विकास हो। बच्चे इसमें रुचि भी लेते हैं, और एक साथ बहुत सारी चीजें सीखते हैं। बच्चों को आसान और नए-नए तौर-तरीकों से पढ़ाना होगा। हमारे ये प्रयोग, New age learning का मूलमंत्र होना चाहिए- Engage, Explore, Experience, Express और Excel. यानि कि, students अपनी रूचि के हिसाब से गतिविधियों में, घटनाओं में, projects में engage हों। इसे अपने हिसाब से explore करें। इन गतिविधियों, घटनाओं, projects को विभिन्न दृष्टिकोण को अपने experience से सीखें। ये उनका personal experience हो सकता है या collaborative experience हो सकता है। फिर बच्चे रचनात्मक तरीके से Express करना सीखें। इन सब को मिला कर ही फिर excel करने का रास्ता बनता है। अब जैसे कि, हम बच्चों को पहाड़ों पर, ऐतिहासिक जगहों पर, खेतों में, सुरक्षित मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स में लेकर जा सकते हैं।

नई शिक्षा नीति में सिलेबस और बस्ते का बोझ कम

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम को कम किया गया है। इसमें आधारभूत बिन्दुओं पर जोर दिया गया है। लर्निंग को समग्र एवं Inter-Disciplinary, Fun based और complete experience बनाने के लिए एक National Curriculum Framework develop किया जायेगा। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को 21वीं सदी के कौशल के साथ आगे बढ़ाने पर जोर देती है। इसलिए, छात्र शुरुआत से ही कोडिंग सीखें, Artificial Intelligence को समझें, Internet of Things, Cloud Computing, Data Science और Robotics से जुड़ें।

मूल्यांकन के लिये परख की स्थापना

वर्तमान में मार्क्स और मार्क्स-शीट एजुकेशन हावी है। जिससे बच्चों एवं अभिभावकों में मेंटल स्ट्रैस बढ़ता था। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से इसका समाधान होगा। परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर इसका बेवजह का दबाव न पड़े और कोशिश ये हो कि केवल एक परीक्षा से छात्र-छात्राओं का मूल्यांकन न किया जाए, बल्कि Self-assessment, Peer-To-Peer assessment से छात्रों के विकास के विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन हो। इसलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मार्क्सशीट की जगह Holistic report card  पर बल दिया गया है। Holistic report card विद्यार्थियों के unique potential, aptitude, attitude, talent, skills, efficiency, competency और possibilities की detailed sheet होगी। मूल्यांकन प्रणाली के संपूर्ण सुधार के लिए एक नये राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र “परख” की स्थापना भी की जाएगी।

मातृ भाषा में शिक्षा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति भाषा शिक्षा का माध्यम है, भाषा ही सारी शिक्षा नहीं है। बच्चों को उस भाषा में शिक्षा देना चाहिये जिसे बच्चा आसानी से सीख सके, चीजें Learn कर सके, वही भाषा पढ़ाई की भाषा होनी चाहिए। नहीं तो विषय से ज्यादा बच्चे की ऊर्जा भाषा को समझने में लग जाती है। इन्हीं सब बातों को समझते हुए ज़्यादातर देशों में भी आरंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाती है। 

PISA की top ranking वाले सब देशों में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाती है। इसलिए जहां तक संभव हो, कम से कम कक्षा पांच तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा रखने की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कही गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा के अलावा कोई अन्य भाषा सीखने, सिखाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अंग्रेजी के साथ साथ जो भी विदेशी भाषाएँ अंतर्राष्ट्रीय पटल पर सहायक हैं, वो बच्चे पढ़ें, सीखें, तो अच्छा ही होगा। लेकिन साथ साथ सभी भारतीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि हमारे युवा देश के अलग अलग राज्यों की भाषा, वहाँ की संस्कृति से परिचित हो सकें, हर क्षेत्र का एक दूसरे से रिश्ता मजबूत हो।

शिक्षक ही है विद्यार्थियों का भविष्य निर्माता

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस यात्रा के पथप्रदर्शक देश के शिक्षक ही हैं। इसलिए सभी शिक्षकों को काफी कुछ नया सीखना है, काफी कुछ पुराना भुलाना भी है। वर्ष 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत का हर student, राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा तय गए दिशा-निर्देशों में पढ़े।

कोरोना से बचाव की जानकारी दें शिक्षक

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये दो गज दूरी, मास्क या फेस्क कवर, बुजुर्गों का ख्याल रखना, स्वच्छता आदि का संदेश शिक्षकों को अपने विद्यार्थियों को देना होगा। शिक्षक ये सब बड़ी आसानी से विद्यार्थियों के माध्यम से यह संदेश घर-घर पहुंचा सकते हैं।

स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री इंदर सिंह परमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विचारों के अनुरुप राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल के निर्देश दिये। मंत्री श्री परमार ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित होगी। मध्यप्रदेश इस नीति के आधार पर नये प्रगतिशील समाज की रचना के लिए तैयार हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, भयमुक्त और समानता के आधार पर उन्नति के अवसर प्रदान करने वाली स्कूल शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

प्रमुख साचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विभाग की तैयारियों और योजनाओं की बारे में सारगर्भित जानकारी दी। इस अवसर पर आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र श्री लोकेश कुमार जाटव और उप सचिव श्री प्रमोद सिंह तथा स्कूल शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीबीएसई ने दी 12वीं के छात्रों को भी सब्जेक्ट रिप्लेस की सुविधा

सीबीएसई ने दी 12वीं के छात्रों को भी सब्जेक्ट रिप्लेस की सुविधा।


प्रयागराज :  सीबीएसई ने आगामी बोर्ड परीक्षा के लिए बड़ा बदलाव किया है। आगामी बोर्ड परीक्षा से 12वीं के छात्र-छात्राओं को सब्जेक्ट रिप्लेस की सुविधा दी जा रही है। इसके तहत मुख्य विषयों में से किसी एक विषय में फेल छात्र को अतिरिक्त विषय का अंक जोड़कर पास कर दिया जाएगा। बोर्ड की ओर से अभी तक यह सुविधा 10वीं के छात्रों को ही मिली थी। 2021 की बोर्ड परीक्षा से 12वीं के छात्रों को भी इस सुविधा का लाभ दिया जाएगा।





सीबीएसई ने छात्रों के रिजल्ट में सुधार हो लिए यह कवायद की है। अभी तक किसी छात्र को एक विषय में एक या दो अंक कम मिले हैं तो वह फेल हो जाता था और उसे कंपार्टमेंट परीक्षा देनी होती थी। अब नई व्यवस्था में एक विषय में फेल होने के बाद छात्र उस विषय को अतिरिक्त विषय से बदल सकेगा। वहीं बोर्ड का कहना है कि छात्र अतिरिक्त विषय के रूप में स्किल सब्जेक्ट का भी चुनाव कर सकते हैं। स्किल सब्जेक्ट को मेन सब्जेक्ट से बदला जा सकेगा। सब्जेक्ट रिप्लेस करने की सुविधा मुख्य तीन विषयों में से किसी एक में फेल होने की दशा में मिलेगी।


10वीं के रिजल्ट में 20 फीसदी की बढ़ोतरी

सीबीएसई की ओर से पहली बार 2020 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में मेन सब्जेक्ट को अतिरिक्त विषय से रिप्लेस किए जाने से 20 फीसदी ऐसे छात्र जो फेल हो गए थे, पास हो गए। ऐसे छात्रों ने मुख्य विषय के एक विषय को अतिरिक्त विषय से रिप्लेस कर दिया। इससे 20 फीसदी रिजल्ट बेहतर हुआ था।
2021 की बोर्ड परीक्षा से 12वीं के बच्चों को यह सुविधा दी जा रही है। मुख्य विषय को अतिरिक्त विषय से रिप्लेस किया जा सकेगा। इस बदलाव से छात्रों को पास होने का एक विकल्प मिलेगा। इससे छात्रों में अतिरिक्त विषय खासकर स्किल सब्जेक्ट के प्रति रुझान बढ़ेगा। -संयम भारद्वाज, परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई।


CBSE 12वीं : एक विषय से फेल तो बदले में अतिरिक्त विषय का विकल्प।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा 2021 में 12वीं बोर्ड परीक्षार्थी को अतिरिक्त विषय को रिप्लेस करने का विकल्प दिया है। अगर 12वीं बोर्ड देने वाला कोई छात्र अपने तीन मुख्य विषय में से किसी एक विषय में फेल हो गया तो अतिरिक्त विषय से उसे बोर्ड रिप्लेस कर देगा। इससे छात्र को उत्तीर्णता का रिजल्ट मिलेगा। अभी तक यह सुविधा 10वीं के छात्रों को ही मिली थी। बोर्ड ने 10वीं बोर्ड परीक्षार्थी को 2020 में यह सुविधा दी थी लेकिन 2021 से 12वीं के छात्रों को भी मिलेगा। ज्ञात हो कि 2020 के 12वीं बोर्ड का रिजल्ट काफी खराब हो गया है। पटना जोन के बिहार की बात करें तो एक लाख से अधिक छात्र 12वीं में शामिल हुए थे। लेकिन 36 हजार से अधिक परीक्षार्थी फेल हो गये। छात्रों के रिजल्ट में सुधार हो, इसके लिए बोर्ड द्वारा यह सुविधा दी जा रही है। अभी तक अगर किसी एक विषय में एक या दो अंक कम हैं तो वो फेल हो जाते हैं और उन्हें फिर कंपार्टमेंटल परीक्षा में शामिल होना होता है। लेकिन अब एक विषय में फेल होने के बाद छात्र के पास रिप्लेस करने का विकल्प रहेगा।

CBSE पूरी तरह पेपरलेस बना, ई-हरकारा पोर्टल से सुनी जा रही स्कूलों की बात
अतिरिक्त विषय के प्रति बढ़ेगा रुझान  :
बोर्ड द्वारा अतिरिक्त विषय का विकल्प देने से छात्रों में अतिरिक्त विषय लेने का रुझान बढ़ेगा। बोर्ड की मानें तो छात्र अतिरिक्त विषय के तौर स्कील विषय भी रख सकते हैं। स्कील विषय को भी मुख्य विषय से रिप्लेस किया जा सकेगा।


रिजल्ट में 20% की बढ़ोतरी
बोर्ड की मानें तो 10वीं के 2020 के रिजल्ट में बढ़ोतरी हुई है। लगभग 20 फीसदी ऐसे छात्र थे जो मुख्य विषय में फेल हो गये थे। ऐसे में बोर्ड ने छात्र के मुख्य एक विषय का अंक अतिरिक्त विषय से रिप्लेस कर दिया। मुख्य तीन विषय में छात्र के अतिरिक्त विषय को जोड़ दिया गया। इससे छात्र पास हो गये। इससे 20 फीसदी रिजल्ट बेहतर हुआ था।

12वीं बोर्ड में 2021 से यह लागू होगा। इससे छात्रों को पास होने का एक विकल्प मिलेगा। साथ में अतिरिक्त विषय खासकर स्कील विषय के प्रति रुझान भी बढ़ेगा।
- संयम भारद्वाज, परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई


10वीं व 12वीं में गलत प्रश्न पर पूरे अंक देगा सीबीएसई 
सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए ऑनलाइन एग्जाम सेंटर मैनेजमेंट सिस्टम (ओईसीएमएस) बनाया है। इसके माध्यम से परीक्षा के दौरान हर दिन प्रश्न पत्र पर स्कूलों से फीडबैक लिया जायेगा। इसके लिए स्कूल में विषयवार शिक्षकों की टीम बनायी जायेगी। यह टीम अपना फीडबैक 24 घंटे के अंदर बोर्ड को भेजेगी। प्रश्न पत्र पर शिक्षकों के फीडबैक के आधार पर मार्किंग स्कीम तैयार की जायेगी। पिछले कुछ सालों में 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र में गलतियां होती है। कई बार इसको लेकर छात्रों द्वारा आवाज उठायी जाती है। कई बार बोर्ड एक्सपर्ट द्वारा यह पकड़ में आता है। ऐसे में छात्रों को नुकसान नहीं हो, इसके लिए बोर्ड द्वारा इस बार ओईसीएमएस से बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने प्रश्नों पर नजर रखी जायेगी। अगर परीक्षा के दौरान किसी प्रश्न पत्र में कोई प्रश्न गलत होगा, तो ऐसे केस में सीबीएसई द्वारा उस प्रश्न पर पूरे अंक दिये जायेंगे।


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पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 12 व 15 सितम्बर को , 28 सितम्बर को आएगा परिणाम

पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 12 व 15 सितम्बर को , 28 सितम्बर को आएगा परिणाम


राज्य मुख्यालय : प्राविधिक शिक्षा परिषद से संबद्ध प्रदेश के 150 राजकीय, 19 अनुदानित एवं 1127 निजी पॉलीटेक्निक संस्थाओं की लगभग 2.40 लाख सीटों पर प्रवेश के लिए आफलाइन परीक्षा 12 सितंबर को सभी 75 जिलों में और आनलाइन परीक्षा 15 सितंबर को 23 जिलों में होगी। परीक्षा की तैयारियों के संबंध में अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा एस. राधा चौहान ने शुक्रवार को शासनादेश जारी किया। शासनादेश के अनुसार परीक्षा ग्रुप ए में उपलब्ध 1,53,934 सीटों पर प्रवेश के लिए आफलाइन परीक्षा 12 सितंबर को होगी, जिसमें 2,78,145 परीक्षार्थियों के शामिल होने की संभावना है।

 इस परीक्षा के लिए सभी 75 जिलों में 731 केंद्र बनाए गए हैं। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से दोहपर 12 बजे तक होगी। इसी दिन परीक्षा ग्रुप ई-1 व ई-2 की प्रवेश परीक्षा अपराह्न 2.30 बजे से 5.30 बजे तक होगी, जिसमें 58758 सीटें हैं। यह परीक्षा 196 केंद्रों पर होगी। इसमें 66306 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसी तरह परीक्षा ग्रुप बी, सी, डी, एफ, जी, एच व आई के लिए आनलाइन परीक्षा 15 सितंबर को सुबह 9 बजे से 12 बजे तक होगी। इस परीक्षा ग्रुप में 16140 सीटें उपलब्ध हैं। परीक्षा में 22597 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसी दिन परीक्षा ग्रुप के-1 से 8 तक की आनलाइन परीक्षा अपराह्न 2.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक होगी।



 इस परीक्षा ग्रुप में 6140 अभ्यर्थी हैं और इसमें 22597 अभ्यर्थी हिस्सा लेंगे। परीक्षा में बायोमैट्रिक हाजिरी लगेगी इस वर्ष प्रत्येक अभ्यर्थी की परीक्षा के समय बायोमैट्रिक उपस्थिति (फेशियल रिकग्नीशन) दर्ज कराने की व्यवस्था की गई है। प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मानक से अधिक तापमान वाले अभ्यर्थियों को अलग कक्ष में परीक्षा देने की व्यवस्था की गई है। संयोजक व जोनल अधिकारी बनाए गए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने 12 सितंबर को आफलाइन परीक्षा कराने के लिए सभी जिलों के लिए 75 जिला संयोजक और 251 जोनल अधिकारी बनाए गए हैं, जो परीक्षा का नियंत्रण करेंगे।

 इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक केंद्र पर केंद्र अधिकारी तथा उड़ाका दल सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। परीक्षा के बाद ओएमआर शीट की दूसरी प्रति सील्ड पैकेटों में कोषागार में रखी जाएगी।

28 को घोषित होगा परिणाम :  शासनादेश में कहा गया है कि प्रवेश परीक्षा का परिणाम 28 सितंबर को परिषद की वेबसाइट पर घोषित किया जाएगा। इसके बाद 30 सितंबर से आनलाइन काउंसलिंग शुरू होगी। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए हेल्प सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसका टोल फ्री नंबर 1800-180-6589 है। इसके अलावा 0522-2630678, 2630667 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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पॉलीटेक्निक : परीक्षा केंद्र पर छात्र सुधार सकेंगे प्रवेश पत्र की गलती, 12 सितम्बर को प्रस्तावित है पहली प्रवेश परीक्षा।

लखनऊ : प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साथ फार्मेसी के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 12 सितम्बर को परीक्षा होगी। राजधानी में इस परीक्षा के लिए करीब 34 केन्द्र बनाए गए हैं। यहां 12 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल होंगे।



ऐसे अभ्यर्थी जिनके प्रवेश पत्र में किसी तरह की गलती हो गई है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। परीक्षा केन्द्र पर सुधार करने का मौका मिलेगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि प्रवेश परीक्षा के दिन छात्रों को परीक्षा के डेढ़ घंटे पहले बुलाया गया है। सभी केन्द्रों पर सुधार के लिए एक प्रपत्र दिया है। इसमें अभ्यर्थी अपने पिता के नाम से लेकर जन्मतिथि तक में हुई गलती सुधार सकते हैं। नाम में सिर्फ स्पेलिंग ही सुधारी जा सकेगी। एसके वैश्य ने बताया कि अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र की प्रति लेकर जानाहोगा। एक प्रति में कोरोना के लक्षण होने के संबंध में स्वप्रमाणित प्रमाण पत्र देना होगा। ऐसे अभ्यर्थी जिनके प्रवेश पत्र की फोटो स्पष्ट नहीं है, उन्हें प्रवेश पत्र के साथ दो फोटो भी ले जानी होंगी।



अभ्यर्थी रखें ध्यान :  मास्क, सैनिटाइजर की शीशी, रुमाल और पानी की बोतल साथ ले जा सकते है। बोतल पारदर्शी होनी चाहिए। प्रवेश पत्र की दो कॉपी व स्वघोषणा पत्र भी साथ लाना होगा।

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अगले साल से ऑनलाइन होगी पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा, परिषद के सचिव ने की घोषणा।


उत्तर प्रदेश में 12 व 15 सितंबर को होगी पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा पहली बार ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में होगी।

लखनऊ, जेएनएन।  प्रदेशभर के पॉलिटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से कराई जाएगी। ऑफलाइन मोड में 12 सितंबर को और ऑनलाइन मोड के तहत 15 सितंबर को परीक्षा होगी। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद का दावा है कि कोरोना संक्रमण से उपजे हालात को ध्यान में रखते हुए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगले वर्ष होने वाली पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही कराई जाएगी।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि परिषद की वेबसाइट पर 5 सितंबर को अपलोड किया जा चुका है। परीक्षार्थी प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।बॉक्सदो पालियों में होगी परीक्षासचिव एसके वैश्य ने बताया कि परीक्षा के लिए प्रदेश भर में करीब 950 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें अधिकांशत पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल हैं।




12 सितंबर को होने वाली ऑफलाइन परीक्षा के तहत परीक्षार्थियों को संबंधित केंद्र पर समय से पहले पहुंचना होगा। पहली पाली की परीक्षा सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा 2:30 से 5:30 बजे के मध्य होगी। पहली पाली के अंतर्गत 3 वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिले की चाह रखने वाले अभ्यर्थी शामिल होंगे और दूसरी पाली में 2 वर्षीय फार्मेसी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी शामिल होंगे। वहीं ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा 15 सितंबर को दो पालियों में होगी। इसके लिए प्रदेश भर के 21 जिलों में केंद्र बनाए गए हैं।


ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में सुबह 9 से 12 के तहत ग्रुप बी सी डी एफ जी एच आई ग्रुप की परीक्षाएं होंगी। इसी तरह दूसरी पाली 2:30 से शाम 5:30 बजे तक होगी। इसके तहत के 1 से के 8 ग्रुप की प्रवेश परीक्षा होगी। ऑनलाइन परीक्षा के तहत दोनों पालियों में कुल 47175 परीक्षार्थी सम्मिलित होंगे। वहीं ऑफलाइन परीक्षा के तहत करीब 344451 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

ऑनलाइन परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी
47175- ऑफलाइन परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी: 344451-परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्र : 927-परीक्षा के लिए लगाए गए जोनल अधिकारी: 251-कुल केंद्र व्यवस्थापक:927-ऑनलाइन परीक्षा का समय प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक और शाम को 2:30 से 5:30 बजे तक-ऑफलाइन परीक्षा का समय प्रातः 9:00 से 12:00 तक और सायं 2:30 से 5:30 तक-कितने ग्रुपों की होगी परीक्षा:18-कितने जनपदों में होगी परीक्षा ऑफलाइन परीक्षा: 75 जनपद -ऑनलाइन परीक्षा: 24 जनपद

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पॉलीटेक्निक : ऑनलाइन परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी, बनी हेल्पलाइन।

लखनऊ : प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षाओं के प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए। प्राविधिक शिक्षा परिषद ने ऑनलाइन परीक्षा के प्रवेश-पत्र सोमवार को वेबसाइट jeecup.nic.in पर उपलब्ध करा दिए हैं। यह परीक्षा 15 सितंबर को प्रस्तावित है।




छात्र अपने लॉगिन से प्रवेश-पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं । जो छात्र अपना लॉगिन आईडी एवं पासवर्ड भूल गये हैं वे अपना विवरण भरकर भी प्रवेश -पत्र डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र के साथ स्वघोषणा -पत्र एवं निर्देश भी अभ्यर्थी डाउनलोड करें । स्वघोषणा पत्र की प्रति परीक्षा के समय केन्द्र पर अभ्यर्थी द्वारा जमा की जाएगी।

उधर 12 सितंबर को प्रस्तावित ऑनलाइन परीक्षा के प्रवेश पत्र बीती 5 सितंबर को ही जारी किए जा चुके हैं।

प्राविधिक शिक्षा परिषद विभिन्न डिप्लोमा इंजीनियरिंग (ग्रुप-ए), डिप्लोमा इन फार्मेसी (ग्रुप-ई 1& ई 2), पाठ्यक्रमों में शैक्षिक सत्र 2020- 21 में अभ्यर्थियों की प्रवेश परीक्षा शनिवार को होगी। पहली पाली में कुल 2,78,145 अभ्यर्थी एवं दूसरी पाली में 66,306 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं।

इनको छोड़ कर शेष अन्य डिप्लोमा, पोस्ट डिप्लोमा , पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा 15 सितंबर को प्रदेश के 24 जनपदों में होगी। यह सीबीटी ( कंप्यूटर आधारित टेस्ट ) ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा होगी। जानकारी के अनुसार परीक्षा में करीब 46 हजार अभ्यर्थी शामिल होंगे।




इस हेल्पलाइन पर मिलेगी मदद : जिन अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या हो वे परिषद के टोल फ्री नंबर 18001806589 अथवा 0522-2630678 , 2630667 पर सम्पर्क कर अपनी समस्या का निवारण कर सकते हैं अथवा ईमेल jeecup help@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।

अभ्यर्थी रखें ध्यान :▪️परीक्षा के लिए अभ्यर्थी 1.30 घण्टा पूर्व परीक्षा केन्द्रों पर पहुंचेंगे।

▪️अभ्यर्थी अपने साथ परीक्षा केन्द्रों पर प्रवेश-पत्र, छोटा सैनिटाईजर , मास्क, पानी की बोतल व लेखन सामग्री लेकर आयेंगे।

▪️अभ्यर्थी को मोबाइल फोन, पर तथा किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को परीक्षा कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं है।

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उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह

उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह।

डिजिटल लाइब्रेरी : • पांच सितंबर से पोर्टल क्रियाशील, डिजिटल लाइब्रेरी दिया गया नाम।

ई-कंटेंट पोर्टल पर विवि व कॉलेजों के शिक्षक अपलोड कर रहे


लखनऊ : अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने बताया कि सितंबर व अक्तूबर माह को 'विद्यादान माह' के रूप में मनाए जाने का फैसला किया गया है। इस माह के दौरान उच्च शिक्षा की डिजिटल लाइब्रेरी में अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले शिक्षकों और उनकी शिक्षण संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा यह पुरस्कार 6 श्रेणियों में दिया जाएगा।



उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का कार्य प्रगति पर है। विभाग ने एनआईसी के सहयोग से रिकार्ड समय (दो माह) में ई-कंटेंट पोर्टल विकसित किया है। इसमें पर सभी राज्य व निजीविश्वविद्यालयों तथा राजकीय, सहायता प्राप्त व निजी महाविद्यालयों के शिक्षकों ने स्वेच्छा से गुणवत्तापरक ई-कन्टेन्ट अपलोड कर रहे हैं। यह पार्ट 5 सितंबर से प्रयोगात्मक रूप से क्रियाशील हो गया है, जो यूपी उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा ने बताया कि अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करने को 6 श्रेणियों में शिक्षण संस्थाओं एवं शिक्षक को पुरस्कृत किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी में राज्य और निजी विश्वविद्यालय की कैटेगरी के तहत सबसे अधिक ई कन्टेट अपलोड करने वाले तीन राज्य व निजी विवि, राज्य विवि की कैटेगरी में अपने से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रेरित करते हुए उनसे अधिक से अधिक ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले तीन राज्य विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों की कैटेगरी में राजकीय महाविद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में से सबसे अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले 7 महाविद्यालयों तथा नोडल विवि की कैटेगरी में ई-कन्टेन्ट विकसित करने के लिए विषयवार चयनित नोडल विवि में से तीन को पुरस्कृत किया जाएगा। विषयवार कैटेगरी में प्रत्येक विषय में सबसे अधिक-कंटेंट अपलोड करने वाले 2 शिक्षक तथा सभी विषयों की कैटेगरी में पूरे प्रदेश में 10 शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाएगा।


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Friday, September 11, 2020

बहराइच : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

बहराइच : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।


मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय

मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 1994 से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान के आदेश को लेकर लंबित अवमानना याचिका की शीघ्र सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि आदेश की अवहेलना करने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बलिया संतोष कुमार राय के खिलाफ आरोप तय किया गया है। कोविड-19 के प्रकोप के कारण अभी सामान्य तौर पर न्यायालय नहीं चल रहा है। स्थिति सामान्य होने पर सुनवाई की मांग को लेकर दोबारा अर्जी दाखिल की जाए।


यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा की अवमानना याचिका पर प्रस्तुत शीघ्र सुनवाई की अर्जी को निरस्त करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता बीएन सिंह का कहना है कि याची दो जुलाई 1994 से जूनियर हाईस्कूल बलिया में बिना वेतन के पढ़ा रहा है। वह भुखमरी की कगार पर है। उसकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में की गई है। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2002 को उसकी याचिका मंजूर करते हुए बीएसए को नियमित वेतन भुगतान का निर्देश दिया था। साथ ही नौ फीसदी ब्याज के साथ बकाया वेतन का तीन माह में भुगतान करने का भी निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नहीं किया गया।


अवमानना याचिका दाखिल होने पर कोर्ट ने आदेश पालन का समय दिया लेकिन फिर भी पालन नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का अवमानना आरोप तय करते हुए जवाब मांगा है। 23 जुलाई 2019 को याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में लॉक डाउन के कारण सुनवाई नहीं होने पर याची ने कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। कोर्ट ने न्यायालय के सामान्य रूप से कार्य करने पर प्रार्थना पत्र देने की सलाह देते हुए अर्जी खारिज कर दी है।

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

ऑनलाइन पढ़ाई में नहीं होगा खिलवाड़, ई-कंटेंट पोर्टल पर 30 सितंबर तक अपलोड होगा कंटेंट

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

 
लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहे शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को घर बैठे बेहतर ई-कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है। ई-कंटेंट पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को घर बैठे हर विषय की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होनी शुरू भी हो गई है।


उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर सितंबर और अक्टूबर महीने में विद्यादान माह मनाया जाएगा। इन दो महीनों में शिक्षकों को विशेष तौर पर अधिक से अधिक ई-कंटेंट उपलब्ध करवने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ज्यादा ई-कंटेंट उपलब्ध कराने वाले 10 शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के मुताबिक बीती पांच सितंबर से ई-कंटेंट पोर्टल पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध होने लगी है।


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के स्नातक व परास्नातक के विद्यार्थी पोर्टल पर क्लिक कर आसानी से किसी भी विषय का ई-कंटेंट हासिल कर सकेंगे। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार किए जा चुके हैं और अब इसे तेजी से अपलोड किया जा रहा है।


लखनऊ : यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई में अब खिलवाड़ नहीं हो पाएगा। कोरोना संक्रमण के चलते बीते मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आईं थीं। कई शिक्षकों ने ई-कंटेंट के मैटीरियल के तौर विषय की किताब स्कैन कर डाल दी थी, लेकिन अब ई-कंटेंट पोर्टल तैयार किया गया है और स्क्रीनिंग के बाद ही इस पर ई-कंटेंट अपलोड किया जा रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार व कॉपीराइट अधिनियम का पालन करने के लिए शिक्षकों से एक प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। विश्वविद्यालय व कॉलेज स्तर से लेकर उच्च शिक्षा विभाग तक इसकी निगरानी की जा रही है।


उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए ई-कंटेंट पोर्टल  पर स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के विषयवार कंटेंट अपलोड करने का काम शुरू हो गया है। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार भी किए जा चुके हैं। स्क्रीनिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। 30 सितंबर तक सभी विषयों के ई-कंटेंट को अपलोड करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स के अलग-अलग विषयों के ई-कंटेंट तैयार करने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों को नोडल विश्वविद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। 


विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व लखनऊ विश्वविद्यालय को ई-कंटेंट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह कॉमर्स का ई-कंटेंट लखनऊ विश्वविद्यालय व आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय को और मैनेजमेंट के ई-कंटेंट का जिम्मा झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपा गया है।

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

 
प्रयागराज : सोशल मीडिया पर पीएम और सीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उक्त मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर रद कर दी है। यह आदेश शिक्षक नेता नंदलाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूíत मनोज मिश्र व न्यायमूíत अनिल कुमार नवम की पीठ ने दिया। 


याची की ओर से अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की। एटा के मिरहची थाना क्षेत्र में स्थित इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व शिक्षक नेता नंदलाल यादव ने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। उसका संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर मिरहची थाने की पुलिस ने आइटी एक्ट की धारा 66-ए के तहत एफआइआर दर्ज की थी। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि धारा 66-ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।

ऑनलाइन शिक्षा: जागरूकता के अभाव में नहीं हो रहा प्रभाव, न अभिभावक ले रहे रुचि न बच्चे

ऑनलाइन शिक्षा: जागरूकता के अभाव में नहीं हो रहा प्रभाव, न अभिभावक ले रहे रुचि न बच्चे


 
प्रयागराज : कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही स्कूली शिक्षा ऑनलाइन कर दी गई। तमाम विद्यार्थियों के पास संसाधन की कमी आड़े आ रही है तो कुछ के पास संसाधन हैं भी तो वे उदासीन हैं। अभिभावक भी सजग नहीं हैं। वाट्सएप ग्रुप पर शिक्षक जब सवाल पूछते हैं तो उन्हें पखवारे बाद भी उत्तर नहीं मिलता है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है।



प्राथमिक विद्यालय गड़रा के इंचार्ज प्रधानाध्यापक शिवभान सिंह ने बताया कि स्कूल में कुल 136 विद्यार्थी हैं जब कि वाट्सएप ग्रुप पर 20 विद्यार्थी जुड़े हैं। नियमित रूप से विषयवार वीडियो बनाकर ग्रुप में भेज रहे हैं। कई बार टेक्स मैसेज व वाइस मैसेज भी भेजते हैं लेकिन न तो अभिभावक रुचि लेते हैं और न बच्चे। 


प्राथमिक विद्यालय गौहानी की इंचार्ज प्रधानाध्यापक सुचिता सिंह ने बताया कि 73 विद्यार्थी स्कूल में हैं, सिर्फ 10 वाट्सएप ग्रुप पर हैं। शुरू में तो तीन-चार बच्चों ने रिस्पांस दिया लेकिन अब कोई भी रिप्लाई नहीं करता। यहां तक कि ग्रुप में भेजे गए संदेश भी नहीं देखते। 


प्राथमिक विद्यालय बघोलवा आदिवासी बस्ती के प्रधानाध्यापक डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि 60 बच्चे विद्यालय में है। वाट्सएप से 18 विद्यार्थी जुड़े हैं लेकिन एक भी पठन पाठन को लेकर सक्रिय नहीं हैं। जितनी भी पाठ्य सामग्री भेजी जाती है उसे कभी न तो अभिभावक देखते हैं और न बच्चे। हां कुछ बच्चों के घर जाकर गृह कार्य दे आते हैं तो वे उसे कर लेते हैं। इस संबंध में अभिभावक भी जागरूक नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने में शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

69000 शिक्षक भर्ती: शिक्षामित्र के आवेदन फार्म में त्रुटि सुधार कराने का आदेश

69000 शिक्षक भर्ती: शिक्षामित्र के आवेदन फार्म में त्रुटि सुधार कराने का आदेश


69000 शिक्षक भर्ती: आवेदन की छोटी गलती सुधारने की अनुमति देने का निर्देश
 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती 2019 में शामिल शिक्षामित्र को उनके आवेदन फार्म में की गई मामूली त्रुटि सुधारने का अवसर देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची अपना प्रत्यावंदन संबंधित प्राधिकारी को दें। कामेंद्र सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया। याची के अधिवक्ता अग्निहांत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि याची आवेदन फार्म में अपने शिक्षामित्र के अनुभव वाला कालम भरना भूल गया है। 


इस संबंध में उसने ब्रेसिक शिक्षा विभाग का प्रत्यावेदन देकर त्रुटि सुधार का अनुरोध किया था। लेकिन, उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि साप्रीम कार्ट ने मामूली त्रुटियों को सुधारन का मौका देने का आदेश दिया है, इसलिए याची को भी सुधार का मौका दिया जाय। कोर्ट ने याची को दो सप्ताह के भीतर अपना प्रत्यावेदन बेसिक शिक्षा विभाग को देने का निर्देश दिया है.


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के आवेदन फार्म में सर्टिफिकेट व अंकपत्र नंबर की गलती को छोटी गलती मानते हुए सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को गलती सुधारने की अनुमति देने का आदेश दिया है। 


यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने धर्मेन्द्र कुमार व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सत्येन्द्र चंद्र त्रिपाठी को सुनकर दिया है।  याचिका में ऐसे ही कुछ मामलों में न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए गलती सुधारने की अनुमति देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसी अनुमति देने से चयन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ता है।

परिषदीय प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बिजली बिल भुगतान का जिम्मा अब पंचायतों को

परिषदीय प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बिजली बिल भुगतान का जिम्मा अब पंचायतों को 




उरई : राज्य वित्त आयोग के तहत आवंटित होने वाले बजट से प्रधान अब इस बिल का भुगतान करेंगे। शासनादेश जारी होते ही उरई के बिजली विभागने पंचायती राज विभाग को दो करोड़ का बिल थमाया है। शासन ने ग्रामीण इलाकों में चल रहे प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बिजली बिलों का भुगतान की जिम्मेदारी अब ग्राम प्रधानों को सौंपी है। इसके पहले बिल भुगतान शिक्षा विभाग खुद करता था। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 4624 प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में बिजली विभाग का दो करोड़ बकाया है।


 इसे बिजली विभाग ने पंचायती राज विभाग को भेज  दिया। इनका भुगतान प्रधान राज्य वित्त से करेंगे। जिला पंचायत राज अधिकारी ने अभय यादव ने बिलों को संबंधित ग्राम प्रधानों को भेज दिए हैं।उनको भुगतान कराने के निर्देश जारी किए हैं। बिल भुगतान के झंझट से  प्रधानों की परेशानी बढ़ गई है। 3 तन के सरकार ने स्कूलों लिए जो नई प्रक्रिया शुरूकी है उससे ग्राम पंचायतों  के विकास कार्योकि लिएआने वाले फंड का बड़ा हिस्सा है इसमें खर्च होगा।

सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान

सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान।


सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान।

देश में लगातार कोरोना के मामलों में इजाफा हो रहा है। भारत में अब तक  4,370,128 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। वहीं देश के सभी राज्यों ने ज्यादातर पाबंदियों को हटा दिया है।



इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी। जिसमें परीक्षा के समय सावधानी के कई नियमों के बारे में बताया गया है।

मंत्रालय ने साफ किया है कि सभी को छींकते या खांसते समय मुंह ढंंकना होगा। साथ ही किसी भी जगह थूकने की इजाजत नहीं है। जो छात्र कोरोना से पीड़ित हैं उन भी विचार चल रहा है।



जो छात्र कंटेनमेंट जोन में हैं, उन पर परीक्षा एजेंसियां को विचार करने को कहा गया है जिसमें विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। सभी स्टाफ के साथ परीक्षार्थियों को अपने स्वास्थ्य की जानकारी देनी पड़ सकती है।

साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि परीक्षार्थियों को इस बारे में जानकारी दे दी जाएगी, एडमिट कार्ड के साथ उन्हें पानी और सैनिटाइजर जैसी कौन सी वस्तुएं ले जाने की अनुमति होगी।

मंत्रालय ने कहा कि परीक्षार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अभिवावक  भी आते हैं, वे लगातार वहीं रहते  हैं, उस दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा। उन्हें शारीरिक दूरी के साथ मास्क लगाना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इस के मद्देनजर भीड़ से बचने के लिए परीक्षाएं टुकड़ों में कराई जा सकती हैं।


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फतेहपुर : 07- 30 सितम्बर 2020 तक तृतीय राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित होने के फलस्वरूप विद्यालयों में गतिविधियां कराए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें

फतेहपुर : 07- 30 सितम्बर 2020 तक तृतीय राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित होने के फलस्वरूप विद्यालयों में गतिविधियां कराए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें।




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पूरक परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की मदद नहीं कर पायेगा सीबीएसई

पूरक परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की मदद नहीं कर पायेगा सीबीएसई।

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि इस महीने 12वीं कक्षा प्रवेश कॉलेजों और की पूरक परीक्षा में शामिल होने जा रहे छात्रों की सीबीएसई की खास मदद नहीं कर पाएगा। क्योंकि उच्च शिक्षा के लिए उनका विश्वविद्यालयों में होना है।

याचिका पर सुनवाई : शीर्ष अदालत ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह कहा। उक्त याचिका में केंद्रीय माध्यमिकशिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की पूरक परीक्षाएं आयोजित करने के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि यह परीक्षार्थियों की सेहत के लिए नुकसानदायक होगा। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा से कहा, "उन छात्रों का प्रवेश कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में होना है, इसमें सीबीएसई पूरक परीक्षा देने वाले छात्रों की कुछ खास मदद नहीं कर पाएगी।"





कोरोना के कारण मुख्य परीक्षाएं नहीं हो सकी : तन्खा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण सीबीएसई मुख्य परीक्षाएं आयोजित नहीं करवा सका और मूल्यांकन की मिश्रित प्रणालियों के आधार पर परिणाम घोषित किए गए। इसकी वजह से कई छात्रों को पूरक परीक्षा में बैठना पड़ रहा है।उन्होंने कहा,"पूरक परीक्षाओं में बैठने वाले करीब पांच लाख छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ करना जरूरी है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने कहा कि करीब 87,000 छात्र फेल हो गए और सीबीएसई के पास इस मुद्दे का कोई समाधान नहीं है।



फिलहाल, कोर्ट ने याचिका की एक प्रति केंद्र को भेजने का निर्देश देने के साथ ही मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 14 सितंबर तय की।

अस्थायी प्रवेश देने का अनुरोध कर सकती है : न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भी पीठ का हिस्सा हैं। इस पर तन्खा ने कहा कि सीबीएसई कॉलेजों से इन छात्रों को अस्थायी प्रवेश देने या पूरक परीक्षाओं का परिणाम घोषित होने तक इंतजार करने का अनुरोध कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कि पूरक परीक्षाएं 22 सितंबर से 29 सितंबर के मध्य होनी हैं। तब तक विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश बंद हो चुका होगा। ऐसे में पूरक परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल पाएगा और उनका पूरा साल बेकार चला जाएगा।

सुनवाई : याचिका में पूरक परीक्षाएं आयोजित करने के फैसले को चुनौती दी गई, परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के हितों का ध्यान रखना जरूरी बताया

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UP Board : स्कूल-कॉलेज बंद होने के बाद भी खूब हुए दाखिले, नामांकन घटा पर लाखों ने बढ़ाए हाथ

UP Board : स्कूल-कॉलेज बंद होने के बाद भी खूब हुए दाखिले, नामांकन घटा पर लाखों ने बढ़ाए हाथ।

यूपी बोर्ड के कॉलेजों में कक्षा 9 व 11 में नौ लाख 38 हजार 370 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। वहीं हाईस्कूल व इंटर में प्रदेश भर में 354984 ने परीक्षा फार्म भरा है।

प्रयागराज : कोरोना वायरस के संक्रमण के कठिन दौर में छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने हौंसला नहीं छोड़ा है। नए शिक्षा सत्र के पांच माह बीत चुके हैं और स्कूल-कालेजों के दरवाजे बंद हैं, फिर भी प्रवेश लेने वालों की तादाद लाखों में हैं। इस बार दाखिला लेने वालों का आंकड़ा पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम जरूर है लेकिन, सभी में हार न मानने की जिद बरकरार है। यही वजह है कि यूपी बोर्ड से संबंद्ध माध्यमिक कॉलेजों में कक्षा 9 व 11 में नौ लाख 38 हजार 370 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। वहीं, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में प्रदेश भर में सिर्फ 3,54,984 ने परीक्षा फार्म भरा है। हालांकि लेट फीस के साथ 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म 24 सितंबर तक भरे जा सकते हैं।

यूपी बोर्ड के 27 हजार से अधिक माध्यमिक कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया तय समय पर शुरू हुई है। पहले अगस्त के पहले सप्ताह तक प्रवेश होना था बाद में उसे बढ़ाया गया। इन कॉलेजों में 31 अगस्त तक कक्षा नौ में 4,81,272 और 11 में 4,57,098 सहित कुल 9,38,370 ने प्रवेश लिया है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम है लेकिन, यह संख्या भी छात्र-छात्राओं का जज्बा बयां करती है।


इसी तरह से स्कूलों में भी प्रवेश की गति काफी धीमी जरूर है लेकिन, ऐसा शायद ही कोई स्कूल-कालेज होगा जहां प्रवेश न हुआ हो। यूपी बोर्ड में 10वीं और 12वीं के परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तारीख सोमवार थी। 2021 के लिए परीक्षा फार्म बिना विलंब शुल्क ऑनलाइन अपलोड करने की तारीख खत्म हो गई है। इस दौरान प्रदेश भर में सिर्फ 3,54,984 ने ही परीक्षा फार्म भरा है। अब परीक्षा फार्म विलंब शुल्क के साथ भरे जा सकते हैं। माना जा रहा है कि उसी समय परीक्षा फार्म भरने वालों की अंतिम संख्या सामने आ सकेगी।




स्कूल-कालेजों में प्रवेश कम होने के बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई लगभग सभी कर रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन की मजबूरी है कि वे चाहकर भी ऑनलाइन पढ़ाई बंद नहीं कर सकते, वरना वे दूसरे स्कूलों की ओर रुख कर सकते हैं। यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल कहते हैं कि दूरदर्शन के साथ ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। कठिन दौर में सभी शिक्षक व अधिकारी कार्य में जुटे हैं।

फार्म अपलोड करने की अंतिम तारीख 24 सितंबर तक : यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक मान्यता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का ऑनलाइन पंजीकरण व परीक्षा फार्म भरवाने का कार्य चल रहा है। कक्षा 9 व 11 बिना विलंब शुल्क पंजीकरण पूरा हो चुका है। सोमवार मध्यरात्रि परीक्षा फार्म भरने का कार्य भी पूरा हो चुका है। अब विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण व परीक्षा फार्म भरवाने का कार्य चल रहा है। सितंबर माह के अंत तक इसकी सूचना सार्वजनिक हो सकेगी। यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के कालेजों में 10वीं व 12वीं के लिए परीक्षा फार्म भरने की तारीख बढ़ाई गई थी। यह प्रक्रिया प्रदेश भर में चल रही है।


हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2015 को विशेष अपील पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों की दशा सुधारने के लिए जब तक मंत्री, नेता, आइएएस व पीसीएस अधिकारी के बच्चे इन स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, इनकी हालत नहीं सुधरेगी। कोर्ट ने सभी मंत्रियों, नेताओं व अधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़वाएं। मुख्य सचिव को छह माह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। उस पर अमल नहीं हो सका है। यही वजह है कि पिछले वर्षों में इन स्कूलों में पंजीकरण आंकड़ा भले बढ़ा लेकिन स्कूलों की हालत ज्यों की त्यों है।

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Thursday, September 10, 2020

देवरिया : स्‍कूल खुलने का इंतजार किए बगैर प्रधानाध्‍यापक ने शुरू करा दी पढ़ाई, सस्‍पेंड

देवरिया:स्‍कूल खुलने का इंतजार किए बगैर प्रधानाध्‍यापक ने शुरू करा दी पढ़ाई, सस्‍पेंड 

कोरोना संक्रमण के चलते स्‍कूलों की बंदी अभी जारी है लेकिन देवरिया के एक प्रधानाध्‍यापक ने बच्‍चों को बुलाकर पढ़ाई शुरू करा दी। प्रधानाध्‍यापक को सस्‍पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। बीईओ ने प्रधानाध्यापक के निलंबन की संस्तुति के साथ ही सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
देवरिया के देसही क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय शामपुर में कोविड-19 में प्रतिबंध के बावजूद बच्चों को बुलाकर पढ़ाने का फोटो वायरल हो गया। जानकारी होने पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ज्ञानचंद्र मिश्र ने बुधवार को विद्यालय का निरीक्षण किया। 12:48 मिनट पर विद्यालय का गेट बंद मिला। मौके पर मिले ग्रामीणों से बीईओ ने पूछताछ की तो स्कूल में बच्‍चों को बुला कर कक्षाएं चलाने का मामला सही पाया गया। एक ग्रामीण ने बताया कि उसके घर के पांच बच्चे पढ़ने आते हैं, जिसमें से तीन बच्चे बुधवार को भी स्कूल गए थे लेकिन एमडीएम का भोजन नहीं मिलता है।


इस पर बीईओ ने प्रधानाध्यापक को फोन कर मौके पर बुलाया। विद्यालय खुलने के बाद उपस्थिति पंजिका के निरीक्षण में विद्यालय से जाने के समय का हस्ताक्षर बना पाया गया। गांववालों ने बताया कि विद्यालय 11:30 बजे तक खुलता है। बीईओ के सवाल पर प्रधानाध्यापक प्रतिबंध के बावजूद बच्चों को बुलाकर पढ़ाने का स्पष्ट कारण नहीं दे सके। सहायक अध्यापक ने खंड शिक्षा अधिकारी से कहा कि बच्‍चों को प्रधानाध्यापक बुलाते हैं। बीईओ ने प्रतिबंध में बच्चों को बुलाने और विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में अग्रिम हस्ताक्षर बनाने के आरोप में प्रधानाध्यापक जुल्फेकार खां को निलंबित करने की संस्‍तुति की। इसके साथ ही सहायक अध्‍यापक और शिक्षामित्र जमीर आलम सिद्दिकी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
प्राथमिक विद्यालय शामपुर में बच्चों को पढ़ाने की फोटो वायरल हुई थी। मौके पर 12:48 पहुंचा तो विद्यालय बंद मिला। ग्रामीणों से जानकारी मिली कि स्कूल में रोज बच्चे पढ़ने आते हैं। कोविड-19 में स्कूल खोलने पर अभी प्रतिबंध है। यह एक गंभीर मामला है। नियमों का उल्लघंन करने पर प्रधानाध्यापक के निलंबन की संस्तुति बीएसए स्‍तर से की जा रही है। सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र को नोटिस जारी किया जा रहा है।

एजुकेशन वॉरियर्स में डिप्टी सीएम ने स्कूलों से की अपील : फीस न दे पाने वालों के नाम नहीं काटे

'फीस न दे पाने वालों के नाम नहीं काटे

एजुकेशन वॉरियर्स में डिप्टी सीएम ने स्कूलों से की अपील

कार्यक्रम में डॉ. दिनेश शर्मा ने बेहतर काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया।

डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि जो लोग सक्षम हैं वे स्कूलों की फीस दें, लेकिन जो किन्हीं वजहों से फीस नहीं दे पा रहे हैं, उनके लिए स्कूल रियायत वरतें और क्या का नाम न काटें। उन्होंने ये वातें एनबीटी और टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा कोविड-19 की वदली परिस्थितियों में बेहतर काम करने वालों के सम्मान समारोह और परिचर्चा 'एजुकेशन वॉरियर्स' में कहीं।

पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के कैंप कार्यालय के सभागार में बुधवार को हुए कार्यक्रम में डॉ. शर्मा ने कहा कि लखनऊ की प्रबंधक असोसिएशन पहली ऐसी असोसिएशन है, जिसने फैसला लिया है कि वह 20% फीस कम करेगी। मैकाले शिक्षा पद्धति का अंतः नई शिक्षा नीति पर डॉ.शर्मा ने कहा कि यह मैकाले की शिक्षा पद्धति के अंत की शुरुआत है। सवा दो लाख लोगों के सुझाव के साथ इसे 21 से गाइडेंस के लिए स्कूल खुलना मुश्किल

लखनऊ : नौवीं से 12वीं कक्षा के बच्चों के गाइडेंस के लिए 21 सितंबर से स्कूल खुलना मुश्किल है। शिक्षा विभाग का कहना है कि संक्रमण की यही स्थिति रही तो स्कूल खोलना संभव नहीं होगा। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का कहना है कि 15 सितंबर के बाद इस पर फैसला किया जाएगा।

तैयार किया गया है । नीति में व्यक्स्था है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के ऑफ कैंपस यहां खोले जाएंगे और यहां के वेहतर शिक्षण संस्थानों के ऑफ कैंपस विदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को प्ले ग्रुप में बदलने का फैसला अभिनव प्रयोग है। हमने यूपी में इसे

लागू करने के लिए टास्क फोर्स वनाई है। सिलेबस को गतिशील बनाएगी नई शिक्षा नीति' 

घर-घर जाकर परिषदीय शिक्षक ढूंढेंगे कोरोना मरीज

Prayagraj: घर-घर जाकर परिषदीय शिक्षक ढूंढेंगे कोरोना मरीज

 
प्रयागराज : कोरोना का संक्रमण थम नहीं रहा है। इस बीच ऐसे भी मामले आ रहे हैं कि लोग कोविड अस्पताल या होम आइसोलेशन से बचने के लिए अपनी तकलीफ छिपा रहे हैं, जिसके कारण संक्रमण बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शहरी क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य को लेकर सर्वे शुरू किया जा रहा है। यह सर्वे परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक करेंगे। वह परिवार के सदस्य और उनकी सेहत को लेकर विवरण दर्ज करेंगे, जिसे कोरोना कंट्रोल रूम को सौंप दिया जाएगा।



सर्वे के लिए 1200 शिक्षकों की मोहल्लेवार ड्यूटी लगाई जा रही है। वह वोटर लिस्ट लेकर प्रत्येक घर में जाएंगे। पूछेंगे कि परिवार में कितने सदस्य हैं। उनका स्वास्थ्य कैसा है। कितने लोग बाहर से आए हैं। कोई अब तक कोरोना संक्रमण का शिकार हुआ है या नहीं। किसी को बुखार या अन्य समस्या का विवरण भी दर्ज करेंगे। वोटर लिस्ट से सभी सदस्यों के नामों का भी सत्यापन भी किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि शिक्षकों को ड्यूटी रिसीव करा दी गई है। सभी अध्यापक मतदाता सूची के अनुसार सर्वे कर विवरण अपने खंड शिक्षाधिकारी को देंगे।

यह विवरण कोरोना कंट्रोल रूम के नोडल अधिकारी को सौंप दिया जाएगा। बीएसए ने कहा है कि यह सामजिक दायित्व है, इसलिए शिक्षकों को इसमें सहयोग करना चाहिए। यह सर्वे एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाना है।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग उन परिवारों पर फोकस करेगी, जिनके यहां के किसी सदस्य में कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध मरीज होंगे। उद्देश्य सिर्फ यह कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके।

यूपी बोर्ड ने फिर बढ़ाई आवेदन और पंजीकरण की तारीखें, देखें अधिकृत विज्ञप्ति

यूपी बोर्ड ने फिर बढ़ाई आवेदन और पंजीकरण की तारीखें, देखें अधिकृत विज्ञप्ति

 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड के 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में बढ़ते कोरोना संक्रमण का असर दिख रहा है। पिछले वर्षो की अपेक्षा काफी कम संख्या में छात्र-छात्रओं ने 9 से 12वीं तक में प्रवेश लिया है। इससे बोर्ड प्रशासन को पंजीकरण व परीक्षा फार्म भरने की तारीखें दूसरी बार बढ़ाना पड़ा है।


यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के कालेजों में कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण और 10वीं व 12वीं के लिए परीक्षा फार्म भरने की तारीखें एक बार फिर बढ़ाई जा रही हैं। प्रधानाचार्य सभी संस्थागत व व्यक्तिगत छात्र-छात्रओं से 21 सितंबर तक पंजीकरण व परीक्षा शुल्क ले सकेंगे।


संशोधित परीक्षा फार्म कार्यक्रम


● कक्षा 10वीं व 12वीं में प्रवेश लेने व परीक्षा शुल्क लेने की अंतिम तारीख - 21 सितंबर

● प्रधानाचार्य की ओर से परीक्षा शुल्क को कोषागार में जमा कराने की अंतिम तारीख - 28 सितंबर

● कोषागार में जमा शुल्क की सूचना ऑनलाइन वेबसाइट पर अपलोड करने की अंतिम तारीख - 30 सितंबर

● प्रति छात्र 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ कोषागार में जमा कराने की अंतिम तारीख - 21 सितंबर

● विलंब शुल्क के साथ जमा परीक्षा शुल्क की सूचना अपलोड कराने की अंतिम तारीख - 30 सितंबर

● वेबसाइट पर अपलोड छात्र-छात्रओं के विवरण की चेकलिस्ट - एक से पांच अक्टूबर

● जांच के बाद विवरण में संशोधन - छह से 15 अक्टूबर तक

● फोटो युक्त नामावली डीआइओएस कार्यालय भेजने की अंतिम तारीख - 25 अक्टूबर

● कक्षा 9वीं व 11वीं में प्रवेश लेने व पंजीकरण लेने की अंतिम तारीख - 21 सितंबर

● प्रति छात्र 50 रुपये विलंब शुल्क के साथ कोषागार में जमा कराने की अंतिम तारीख - 30 सितंबर

● विलंब शुल्क के साथ जमा पंजीकरण शुल्क की सूचना ऑनलाइन अपलोड कराने की अंतिम तारीख - 30 सितंबर

● वेबसाइट पर अपलोड छात्र-छात्रओं के विवरण की चेकलिस्ट - एक से पांच अक्टूबर

● जांच के बाद विवरण में संशोधन - छह से 15 अक्टूबर तक

●  फोटो युक्त नामावली डीआइओएस कार्यालय भेजने की अंतिम तारीख - 25 अक्टूबर


लखनऊ : यूपी बोर्ड परीक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षा आवदेन की विलंब शुल्क के साथ अंतिम तिथि 21 सितंबर है। डीआइओएस ने यूपी बोर्ड से संचालित सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द बचे हुए बच्चों का परीक्षा के लिए आवेदन कराएं। इसके साथ ही नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के पंजीकरण कार्य में भी तेजी लाएं।



डीआइओएस ने बताया कि कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए विलंब शुल्क के साथ एकमुश्त परीक्षा शुल्क कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि 21 सितंबर है। इन छात्र-छात्रओं का विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने की अंतिम तिथि 24 सितंबर है। वेबसाइट पर छात्रों का ब्योरा चेक करने की तिथि 25 सितंबर से चार अक्टूबर निर्धारित की गई है। इन दिनों में विद्यार्थी अपने नाम, स्कूल, अभिभावकों के नाम, जन्मतिथि आदि एक बार चेक कर सकेंगे। किसी प्रकार की त्रुटि होने पर उसे पांच से 14 अक्टूबर के बीच संसोधित कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं व 11वीं की कक्षा के विद्यार्थियों के पंजीकरण शुल्क कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि भी 21 सितंबर ही है।