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Wednesday, November 18, 2020

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं

बीएड-बीटीसी पाठ्यक्रम में फिलहाल शुल्क भरपाई नहीं


लखनऊ। शासन ने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को पूर्व दशम (कक्षा 9 व 10) छात्रवृत्ति योजना के तहत 135 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दे दी है। लेकिन बीएड और बीटीसी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। 


बीएड-बीटीसी कॉलेजों को पिछले वर्षों में किए गए भुगतान की जांच चल रही है। इसलिए यह फैसला किया गया है। इन पाठ्यक्रमों के मामले में जांच रिपोर्ट आने के के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। वहीँ, दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत बीएड- पाठ्यक्रम के लिए दी गई राशि को छोड़ शेष राशि निदेशक के निवर्तन पर रखने का आदेश दिया गया है।

बेसिक शिक्षा विभाग की 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती में देरी के खिलाफ प्रदर्शन

बेसिक शिक्षा विभाग की 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती में देरी के खिलाफ प्रदर्शन


अंबेडकरनगर। उर्दू शिक्षकों की भर्ती में लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को पीस पार्टी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया। कहा गया कि 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती होनी थी, लेकिन शासन द्वारा जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। इससे उर्दू शिक्षक बनने की उम्मीद लगाए युवक-युवतियों को तगड़ा झटका लगा है। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू की गई, तो कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।


जिलाध्यक्ष अफजाल अंसारी ने कहा कि प्रदेश में 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती होनी थी। युवाओं ने इसके लिए आवेदन भी किया। इसके बाद से भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। आरोप लगाते हुए कहा कि शासन जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया में विलंब कर रहा है। प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकार की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा ने सबका साथ, सबका विकास नारा दिया था, इसे अब भूल रही है।
अल्पसंख्यकों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनके हित की अनदेखी की जा रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मांग करते हुए कहा कि उर्दू शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को अविलंब शुरू किया जाए। 


वक्ताओं ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया न शुरू होने से बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक युवतियां को तगड़ा झटका लगा है। कहा कि वर्ष 2016 में इसे लेकर राष्ट्रीय आह्वान पर पीस पार्टी कार्यकर्ताओं ने 56 दिन का धरना दिया था।


उस समय भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक नहीं शुरू हो सकी। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू की गई, तो कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। बाद में राज्यपाल को संबोधित शिकायतीपत्र नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इस दौरान हाजी वलीउल्लाह, गुलाम रसूल, मोहम्मद अख्तर, हाजी मुनीर, धर्मदेव, सरदार आलम आदि मौजूद रहे।

कामगारों के बेटे-बेटियों को पांच हजार तक मिलेगी छात्रवृत्ति, देखें विद्यार्थियों को किस स्तर पर कितना रुपया मिलेगा?

कामगारों के बेटे-बेटियों को पांच हजार तक मिलेगी छात्रवृत्ति, देखें विद्यार्थियों को किस स्तर पर कितना रुपया मिलेगा? 


प्रयागराज : कामगारों के बेटे-बेटियों के लिए अच्छा अवसर है। कामगारों के कक्षा एक से लेकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले बेटे-बेटियों को सौ से पांच हजार रुपये तक छात्रवृत्ति मिलेगी। इसके लिए श्रम विभाग में ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। लेकिन, छात्रवृत्ति उन्हीं छात्र-छात्रओं को मिलेगी, जिनकी कक्षा में उपस्थिति 70 फीसद होगी। 


संत रविदास शिक्षा सहायता योजना के तहत कक्षा एक से इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बेटे-बेटियों को हर महीने सौ से पांच हजार रुपये छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है। यह लाभ उनके दो बच्चों के लिए है। आवेदन करने पर पंजीयन संख्या, बैंक खाता नंबर, पिछली कक्षा उत्तीर्ण होने की मार्कशीट, अगली कक्षा में प्रवेश लेने का प्रमाण पत्र लगाना होगा।


किस कक्षा के विद्याíथयों को कितना वजीफा (रुपये में)

● एक से पांच तक- 100₹
● छह से आठ तक- 150₹
● नौंवी-दसवीं - 200₹
● 11 वीं-12 वीं- 250₹
◆ आइटीआई प्रशिक्षण पर- 500₹
◆ राजकीय संस्थान से पॉलीटेक्निक करने पर- 800₹
◆ स्नातक - 1000₹
◆ स्नातकोत्तर- 2000₹
★ राजकीय संस्थान से इंजीनियरिंग करने पर-3000₹
★ मेडिकल की पढ़ाई करने पर- 5000₹

सीबीएसई 10वीं 12वीं परीक्षा में चैप्टर के बॉक्स से पूछे जाएंगे वैल्यू बेस्ड प्रश्न, दिशानिर्देश जारी

CBSE 10th 12th Exam 2021 : सीबीएसई 10वीं 12वीं परीक्षा में चैप्टर के बॉक्स से पूछे जाएंगे वैल्यू बेस्ड प्रश्न, दिशानिर्देश जारी



CBSE 10th 12th Exams 2020 : 10वीं और 12वीं परीक्षा के दौरान आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न की अफवाहें ना हों, हर प्रश्न सिलेबस के अंदर के हों, इसके लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वैल्यू बेस्ड प्रश्न को लेकर दिशा-निर्देश जारी किया है। बोर्ड की मानें तो बोर्ड परीक्षा में प्रश्न कई तरह से पूछे जाएंगे। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। हर चैप्टर के बाद जो प्रश्न दिये रहते हैं, उन प्रश्न के अलावा चैप्टर के अंदर से भी प्रश्न पूछे जायेंगे। ये प्रश्न चैप्टर के अंदर बने बॉक्स से रहेंगे।  इसके लिए बोर्ड ने सभी स्कूलों को इसका निर्देश दिया है। स्कूलों को इसकी जानकारी छात्रों को देनी है। अभी चूंकि बोर्ड एग्जाम के कुछ महीने रह गये हैं। ऐसे में सभी शिक्षकों को चैप्टर के बॉक्स को पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। 


ज्ञात हो कि पिछले कई सालों से कई विषयों की परीक्षा के बाद आउट ऑफ सिलेबस की अफवाहें होती रही हैं, जबकि बाद में बोर्ड को इसके लिए प्रूव देकर सिलेबस के अंदर प्रश्न पूछे जाने की बात बतानी पड़ती है। इससे छात्र और अभिभावक गुमराह होते है। इन तमाम चीजों से बचने के लिए बोर्ड ने इस बार परीक्षा शुरू होने के पहले सभी स्कूलों को दिशा निर्देश जारी किया है। 


सभी प्रश्न एनसीईआरटी बुक्स से ही आएंगे
बोर्ड की मानें तो सारे प्रश्न एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से ही रहेंगे। दूसरी पब्लिकेशन से कोई प्रश्न नहीं पूछे जायेंगे। ज्ञात हो हर प्रश्न के लिए इस बार विकल्प रहेगा। हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य है। हर एक प्रश्न का विकल्प रहेगा। 


सभी विषयों में पूछे जाएंगे वैल्यू बेस्ड प्रश्न 
बोर्ड की मानें तो दसवीं और 12वीं के सभी विषयों में वैल्यू बेस्ड प्रश्न को रखा गया है। बारहवीं के विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय में सभी विषय में वैल्यू बेस्ड प्रश्न पूछे जायेंगे। वैल्यू बेस्ड प्रश्न आठ से 12 अंक के होंगे। वहीं दसवीं के भी सभी विषय में वैल्यू बेस्ड प्रश्न आठ से दस अंक के पूछे जायेंगे। 


■   बोर्डे के निर्देश

- चैप्टर में दिये गये प्रश्न के  अलावा चैप्टर के अंदर से भी प्रश्न पूछे जायेंगे 

- चैप्टर में दिये गये बाक्स को स्कूल अच्छे से पढ़ाएं, क्योंकि बॉक्स से भी प्रश्न आ सकते हैं 

- वैल्यू बेस्ड प्रश्न भी रहेंगे, ये प्रश्न चैप्टर के अंदर से रहेंगे

- हर प्रश्न का निश्चित अंक और शब्द भी निर्धारित रहेगा, उसी में उत्तर देना है 

संयम भारद्वाज (परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई) ने कहा, बोर्ड परीक्षा में कोई प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस नहीं होता है। काफी सावधानी से प्रश्न पत्र तैयार किए जाते हैं। चैप्टर के अंदर या बाहर कहीं से भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ऐसे में छात्र को अपनी पूरी तैयारी करनी चाहिए। सारे प्रश्न एनसीईआरटी से ही रहेंगे।

Tuesday, November 17, 2020

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के राज्य/निजी विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः आरम्भ किये जाने के सम्बन्ध में

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के राज्य/निजी विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः आरम्भ किये जाने के सम्बन्ध में


यूपी में 23 नवंबर से खुलेंगे विश्वविद्यालय और कॉलेज, योगी सरकार ने जारी कीं गाइडलाइंस


विश्वविद्यालयों व कालेजों में 23 से लगेंगी कक्षाएं, रोस्टर के अनुसार बुलाए जाएंगे केवल 50 फीसद विद्यार्थी

लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) की कक्षाएं 23 नवंबर से लगेंगी। अभी तक सिर्फ पीएचडी और पीजी विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को ही पढ़ाई के लिए कैंपस बुलाया जा रहा था, लेकिन अब सभी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की कक्षाएं कैंपस में लगेंगी। 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही दो गज की शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर बैठाए जाएंगे। रोस्टर इस तरह तैयार किया जाएगा कि विद्यार्थी एक दिन के अंतर पर बुलाए जाएंगे।

विश्वविद्यालयों व कालेजों को खोलने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग की ओर से मंगलवार को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई। इसमें कहा गया कि संस्थान में यदि हॉल या कमरे बड़े हैं, तब भी अधिकतम 200 विद्यार्थी फेस मास्क और दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती से पालन करते हुए ही बैठाए जाएंगे। क्लास का आकार यदि छोटा है तो उसे और सेक्शन में बांटा जा सकेगा। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं का भी विकल्प दिया जाएगा। 

कोर्स का एक हिस्सा विद्यार्थी आनलाइन ही पढ़ेंगे। बाहरी लोगों का कैंपस में प्रवेश प्रतिबंधित होगा। कैंपस में थूकने पर भी प्रतिबंध रहेगा। विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। इंफ्रारेड थर्मामीटर के साथ पल्स ऑक्सीमीटर की भी व्यवस्था संस्थानों में की जाएगी। प्रयोगशालाओं में भी विद्यार्थियों के छोटे-छोटे बैच बनाए जाएंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों में जिम को खोला जाएगा ताकि विद्यार्थी कसरत कर सकें, लेकिन स्वीमिंग पूल पूरी तरह बंद रहेंगे। विद्यार्थी वेब पेज मनोदर्पण और राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 8445440632 पर भी काउंसिलिंग करा सकेंगे।

■ रोस्टर के अनुसार बुलाए जाएंगे केवल 50 फीसद विद्यार्थी

■ आनलाइन क्लास भी चलेंगी, थूकने व बाहरी लोगों पर रहेगा प्रतिबंध

हॉस्टल के कमरे में एक विद्यार्थी रहेगा, 14 दिन क्वारंटाइन
विश्वविद्यालय व कॉलेजों के हॉस्टल में विद्यार्थियों को चरणबद्ध ढंग से बुलाया जाएगा। विभिन्न स्थानों से आ रहे विद्यार्थियों को 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जाएगा। एक कमरे में एक विद्यार्थी ही रहेगा। वहीं मेस में भीड़ न हो इसके लिए उसका समय बढ़ाया जाएगा। डाइनिंग हॉल में छोटे-छोटे बैच में छात्र भेजे जाएंगे। विद्यार्थी नकद लेन-देन नहीं कर सकेंगे।


उत्तर प्रदेश में करीब 8 महीनों से बंद विश्वविद्यालय और कॉलेजों को 23 नवंबर से फिर से खोला जाएगा। शुरुआत में इन्हें 50 छात्रों की प्रतिशत उपस्थिति के साथ ही खोला जाएगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को विश्वविद्यालय और कॉलेज खोले जाने को लेकर दिशानिर्देश भी अधिसूचित कर दिए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते मार्च माह से राज्य में विश्वविद्यालय और कॉलेज बंद हैं। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका गर्ग ने सभी जिला मजिस्ट्रेट और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को भेजे अपने आदेश में कहा है कि कक्षाएं चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू की जाएं। कक्षाएं इस तरह से लगें कि कैंपस में छात्रों की भीड़ न इकट्ठी हो। 


■   गाइडलाइंस की मुख्य बातें - 

- 50 प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति के साथ कक्षाएं शुरू की जा सकती है। सभी छात्रों को मास्क पहनना होगा। कैंपस और कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग संबंधी गाइडलाइंस का पालन करना होगा। हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना होगा। 

- गाइडलाइंस के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को विद्यार्थियों व स्टाफ के लिए थर्मल स्कैनिंग एवं हैंड वाश का बंदोबस्त करना होगा। 

- वाइस चांसलर और प्रिंसपलों से कहा गया है कि संस्थानों को चलाने के लिए एसओपी (स्टैंडर्ज ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन किया जाए। 

- कोविड-19 से लड़ने के लिए शैक्षणिक संस्थान किसी नजदीकी अस्पताल और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ से टाईअप भी कर सकते हैं। 

- सभी विद्यार्थियों को आयोग्य सेतु एप डाउनलोड करनी होगी। 

- गाइडलाइंस में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे जब भी घर से बाहर निकलें तो हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करें। अगर उनका बच्चा स्वस्थ नहीं है तो उसे घर से बाहर न जाने दें। 

- केवल वही शैक्षणिक संस्थान खुलेंगे जो कन्टेनमेंट जोन के बाहर होंगे। 

- कन्टेनमेंट जोन में रहने वाले छात्र, शिक्षक और कर्मचारी संस्थान में प्रवेश नहीं करेंगे। 

- शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण के लिये छात्रों को प्रोत्साहित करना होगा। 

- कक्षाओं में छात्र बुक, लैपटॉप, नोट्स आपस में शेयर नहीं करेंगे। 
- दो छात्रों के बीच छह फीट की दूरी होना अनिवार्य है। 

- संस्थान के गेट पर छात्रों के प्रवेश करते समय और निकलते समय कोई भीड़ न लगे, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जाए। 

- विश्वविद्यालयों को हेल्थ प्रोटोकॉल के साथ हॉस्टल खोलने की इजाजत होगी। कोरोना लक्षण वाले छात्रों को हॉस्टल में ठहरने की इजाजत नहीं होगी। डाइनिंग टेबल से परहेज करें और छोटे छोटे समूहों में खाना खाएं। कॉमन एरिया में जाते समय मास्क पहनें। स्विमिंग पूल बंद रहेंगे। हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी कमरा शेयर नहीं कर सकेगे।

- तनाव से निपटने और मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के लिए छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को मनोदर्पण वेबपेज के बारे में बताया जाए।















यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

छात्रों को आने वाले बजट में मिल सकता है स्मार्टफोन या लैपटॉप का तोहफा, अनिवार्य बन चुकी आनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने की तैयारी

छात्रों को आने वाले बजट में मिल सकता है स्मार्टफोन या लैपटॉप का तोहफा,  अनिवार्य बन चुकी आनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने की तैयारी


कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से सभी को जोड़ने में जुटी सरकार

अभी 38 फीसद से ज्यादा बच्चों के पास नहीं है कोई साधन

संसाधन विहीन छात्रों में करीब 44 फीसद बच्चे सरकारी स्कूलों के


नई दिल्ली:- कोरोना महामारी के चलते घरों में रहकर ही पढ़ने को मजबूर स्कूली छात्रों को केंद्र सरकार आने वाले आम बजट में कुछ बड़ा तोहफा दे सकती है। फिलहाल जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन, टैब, लैपटॉप या टेलीविजन जैसे उपकरणों की सुविधा मुहैया कराई जा सकती है। इन दिनों सरकार का ध्यान ऑनलाइन पढ़ाई पर केंद्रित है। पहली से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए सरकार पहले ही 12 नए टीवी चैनल लांच करने की घोषणा कर चुकी है, जिसकी तैयारी तेजी से चल रही है।


 सूत्रों की मानें तो स्कूली बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन, टैब, लैपटॉप या फिर टीवी जैसे साधन मुहैया कराने के विकल्पों पर सरकार इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि हाल में आई विभिन्न रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया है कि अभी भी 38 फीसद से अधिक छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ने के लिए कोई साधन नहीं हैं। असर (एनुअल स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट) नामक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक संसाधन विहीन छात्रों में करीब 44 फीसद बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। वहीं, निजी स्कूलों में ऐसे बच्चों की संख्या भी करीब 26 फीसद है।
 

शिक्षा मंत्रालय के सामने कई राज्यों ने उठाया है यह मुद्दा 
केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय के सामने यह मुद्दा कई राज्यों ने भी उठाया है। खास कर जब वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर राज्यों के साथ सीधी चर्चा करने में जुटी है। राज्यों का कहना है कि वह अपने यहां ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था बनाना चाहते हैं, लेकिन सभी बच्चों के पास इससे जुड़ने के लिए साधन नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक यह हाल तब है जबकि, बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन खरीदे भी हैं। 


रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में नामांकित छात्रों में से सिर्फ 36 फीसद बच्चों और उनके परिवारों के पास स्मार्टफोन थे, जो बढ़कर अब करीब 61 फीसद हो गई है। सरकार स्कूली शिक्षा को मजबूती देने के लिए हर साल राज्यों को वित्तीय मदद देती है। यह साल और भी खास है, क्योंकि इस साल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर तेजी से काम होना है। ऐसे में बजट में भी इसके लिए खास प्रावधान किए जा सकते हैं।

पॉलीटेक्निक में दाखिले के लिए अब बचे दो ही मौके, काउंसिलिंग के 7वें चरण में 14,271 विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटित

पॉलीटेक्निक में दाखिले के लिए अब बचे दो ही मौके, काउंसिलिंग के 7वें चरण में 14,271 विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटित।

लखनऊ : प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थानों में दाखिले के लिए अब विद्यार्थियों के पास सिर्फ दो ही मौके बचे हैं। यानी संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की काउंसिलिंग का सिर्फ आठवां व नौवां चरण ही बचा है। सातवें चरण का परिणाम सोमवार को जारी कर दिया गया। इसमें 14,271 विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटित हुए हैं। इनमें फार्मेसी पाठ्यक्रम के करीब 9 हजार विद्यार्थी हैं। वहीं, आठवें चरण के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एआईसीटीई के आदेशानुसार 30 नवंबर तक दाखिले की प्रक्रिया पूरी करनी है।


परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि सातवें चरण में जिन विद्यार्थियों को कॉलेज आवंटित हुए हैं, उन्हें आवंटित संस्था में 18 नवंबर तक प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराना होगा। वहीं, उन्हें खुद के लॉगिन से परिषद के खाते में 19 नवंबर तक निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। साथ ही उसी दिन तक आवंटित संस्था में दाखिले की औपचारिकताएं भी पूरी करनी होगी।

वैश्य ने बताया कि आठवें चरण के लिए 19 नवंबर तक पंजीकरण होगा। विद्यार्थी 20 व 21 नवंबर को कॉलेज का चयन कर सकेंगे। इसका परिणाम 22 नवंबर को घोषित किया जाएगा। वहीं, जो विद्यार्थी सातवें चरण तक सीट आवंटित होने के बाद भी दाखिला नहीं ले पाए हैं या किसी कारणवश काउंसिलिंग से बाहर हो गए हो, वे भी आठवें चरण की काउंसिलिंग के पात्र होंगे ऐसे विद्यार्थियों की संख्या चार हजार से ज्यादा है। ये विद्यार्थी मुख्य काउंसिलिंग लिंक से 20 व 21 नवंबर को कॉलेज का चयन कर सकेंगे।

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन

डिजी--शिक्षकों के पद बढ़ाने को ज्यादा छात्र संख्या दिखा रहे मदरसा प्रबंधन।

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत प्रदेश भर में संचालित मदरसा परिषद की परीक्षाओं में बीते तीन साल से निरंतर परीक्षार्थियों की संख्या कम हो रही है। वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18 एवं वर्ष 2018-19 में हुई बोर्ड परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। वहीं प्रदेश में संचालित 558 अनुदानित मदरसों की ओर से बोर्ड को अतिरिक्त पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। प्रस्ताव में जो छात्र संख्या दिखाई जा रही हैं, वह बेहद ज्यादा है। इसके आधार पर ही मदरसों में पद सृजन की मांग मदरसा प्रबंधन की ओर से की जा रही है। एक तरफ परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या कम होना और वहीं उसी वर्ष में भेजे गए अतिरिक्त पद सृजन प्रस्ताव में छात्र संख्या ज्यादा होना मदरसा बोर्ड को अखर गया है। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सख्त पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। परीक्षार्थी कम होने और अतिरिक्त पद सृजन की मांग करने से आशंका जतायी जा रही है कि मदरसों में पद सृजन के लिए प्रस्ताव में छात्र संख्या बढ़ा कर दिखायी जा रही है।


रजिस्ट्रार ने कहा, मामला चिंताजनक

मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने पद सृजन के प्रस्ताव में झूठी छात्र संख्या बताने के मामले को बेहद चिंताजनक बताया है। कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजते समय कई बिन्दुओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है या जाबूझकर इसकी उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य मे ऐसा फिर करने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

एक सप्ताह करें परीक्षण

रजिस्ट्रार ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को एक सप्ताह का समय देते हुए पदों का पुन: परीक्षण कर दोबारा रिपोर्ट भेजने को कहा है। अधिकारियों को मदरसों के प्रस्ताव व बोर्ड परीक्षा में शामिल छात्र संख्या का मिलान करने के साथ ही सभी बिन्दुओं का अवलोकन कर रिपोर्ट भेजनी होगी।

मदरसा परीक्षाओं में छात्र संख्या कम होने के कई कारण हैं लेकिन अतिरिक्त पद सृजन के लिए छात्र संख्या बढ़ाकर दिखाना गलत है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी स्तरों पर प्रस्ताव का अवलोकन करें।

नंद गोपाल गुप्ता नंदी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

Monday, November 16, 2020

गोरखपुर के 86 शिक्षामित्रों को देना होगा इस्तीफा, जानिए क्या है बड़ी वजह

गोरखपुर के 86 शिक्षामित्रों को देना होगा इस्तीफा, जानिए क्या है बड़ी वजह

◾सार◾
◾नवनियुक्त शिक्षकों के रूप में दोबारा मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज कराना होगा सर्विस रिकार्ड

◾बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों का ब्यौरा जल्द जल्द पोर्टल पर अपलोड करने का दिया निर्देश

◾विस्तार◾
परिषदीय विद्यालयों में हुई 31277 शिक्षकों की भर्ती के तहत नियुक्ति हासिल करने वाले 86 शिक्षकों को अपना ब्यौरा दोबारा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। पोर्टल पर डाटा अपडेट होने की सुविधा न होने की वजह से पहले सभी शिक्षामित्रों को इस्तीफा की जानकारी अपडेट करनी होगी। इसके बाद इनके ब्यौरा को पोर्टल से हटाकर सहायक अध्यापक के रूप में अपडेट किया जाएगा। इसे लेकर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा सचिव का आदेश गोरखपुर के बीएसए दफ्तर पहुंच गया है।

आदेश के मुताबिक जिले में नियुक्ति हासिल करने वाले 517 शिक्षकों का ब्यौरा प्राथमिकता के आधार पर मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों का ब्यौरा अपलोड होने में आने वाली परेशानी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को राहत दी है।

इस्तीफा देने वाले शिक्षकों को इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही संबंधित ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी से सत्यापित भी कराना होगा। तत्पश्चात इन शिक्षकों को ईएचआरएमएस कोड आवंटित करते हुए मानव संपदा पोर्टल पर पुरानी प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण कराना होगा।

बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि शिक्षामित्रों से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड होने में परेशानी आ रही थी। क्योकिं इन शिक्षकों ने शिक्षामित्र के रूप में पूर्व में ही पंजीकरण कराया है। अब इनसे इस्तीफा लेकर पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर पुरानी जानकारी को हटाया जाएगा। उसके बाद इनके सहायक अध्यापक के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

आगरा : RTE के तहत प्रवेश हुआ या नहीं, विभाग कर रहा तस्दीक

आगरा : RTE के तहत प्रवेश हुआ या नहीं, विभाग कर रहा तस्दीक।

आगराः शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसमें पात्र विद्यार्थियों को स्कूलों ने प्रवेश दिया कि नहीं, इसकी तस्दीक करने के लिए कवायद शुरू हो चुकी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों को पत्र लिखकर प्रवेश पाने वाले इन विद्यार्थियों की जानकारी मांगी है।


बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) राजीव कुमार यादव ने बताया कि जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पहले चरण में 1585, दूसरे चरण में 494 और तीसरे चरण में 119 बच्चों के नाम लाटरी में निकल चुके हैं। इस वर्ष तीन चरण में 2198 विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए पत्र जारी कर दिए गए हैं। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी के प्रवेश कराना सुनिश्चित करें और इसकी जानकारी विद्यार्थियों को भी उपलब्ध कराएं।

कई स्कूल नहीं दे रहे हैं प्रवेशः विभाग को शिकायत मिल रही है कि कई स्कूल लाटरी में आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। इसके लिए स्कूलों से जानकारी मांग कर स्थिति स्पष्ट की जा रही है।


वह मांगी है जानकारी

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रवेश पाने वाले करीब 300 स्कूलों से बच्चों का बैंक खाता संख्या मांग जा रहा है, जिसमें फीस प्रतिपूर्ति भेजी जाएगी। इसके साथ प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या और आवंटित विद्यार्थियों की संख्या भी मांगी गई है। अभी तक सिर्फ 25 फीसद स्कूलों ने ही सूचना उपलब्ध कराई है।

आगरा : तीस अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, शासन के पाले में फैसला

आगरा : तीस अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, शासन के पाले में फैसला।

प्रक्रिया : बेसिक शिक्षा परिषद की सहायक अध्यापक भर्ती का मामला, 30 मामलों पर शासन से लिया जा रहा है मार्गदर्शन

आगरा: परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के 31277 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। इसके अंतर्गत जिले में 581 अभ्यर्थियों को विद्यालय आवंटन हो चुका है। चयनित 30 अभ्यर्थियों पर फैसला शासन स्तर से लिया जाना है, इस कारण उन्हें नौकरी फिलहाल मिलते-मिलते रुक गई है।


बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) राजीव कुमार यादव ने बताया कि शासन ने जिले में काउंसिलिंग से 674 अभ्यर्थियों को आवंटित किया था, जिनमें से 611 अभ्यर्थी काउंसिलिंग में शामिल हुए और उन्होंने अपने प्रमाण-पत्रों को जमा कराया। उनमें से पहले चरण में 560 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए और 51 अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र आपत्तियों के कारण रोके गए थे। विद्यालय आवंटन काउंसिलिंग तक 51 में से 21 अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निस्तारण स्थानीय स्तर पर साक्ष्य लेकर कर दिया गया, लेकिन अब भी 30 अभ्यर्थियों के नियुक्ति और विद्यालय आवंटन पत्र पर रोक है।


उन पर फैसला शासन स्तर से होगा। यह हैं आपत्तियां: विभाग ने जिन 30 अभ्यर्थियों के नियुक्ति और विद्यालय आवंटन पत्रों पर रोक लगाई हैं, उनमें से 20 अभ्यर्थियों के मूल अंकों और आवेदन पत्रों में लिखे गए अंकों में अंतर हैं। इस पर शासन स्तर से ही फैसला लिया जाना है। साथ ही चार मामले अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के हैं, जबकि यह भर्ती प्रदेश के स्थानीय निवासियों के लिए ही थी। इसके साथ अन्य मामलों में जाति, जन्म और मूल निवास प्रमाण पत्र में अंतर है।

यह है स्थिति इन 30 मामलों में : से 20 पर बेसिक शिक्षा विभाग ने आपत्ति लगाई थी, जबकि 10 मामले उन 4 मामलों में शामिल थे, जिन पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्राचार्य अहिबरन सिंह ने आपत्ति लगाई थी।

बीएसए ने आपत्तियों के आधार पर अभ्यर्थियों से साक्ष्य लेकर उनमें से 24 का तो निस्तारण कर दिया, लेकिन 10 मामलों में वह साक्ष्यों से संतुष्ट नहीं हुए।

आगरा : तीस अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, शासन के पाले में फैसला

आगरा : तीस अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत, शासन के पाले में फैसला।

प्रक्रिया : बेसिक शिक्षा परिषद की सहायक अध्यापक भर्ती का मामला, 30 मामलों पर शासन से लिया जा रहा है मार्गदर्शन

आगरा: परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के 31277 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं। इसके अंतर्गत जिले में 581 अभ्यर्थियों को विद्यालय आवंटन हो चुका है। चयनित 30 अभ्यर्थियों पर फैसला शासन स्तर से लिया जाना है, इस कारण उन्हें नौकरी फिलहाल मिलते-मिलते रुक गई है।


बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) राजीव कुमार यादव ने बताया कि शासन ने जिले में काउंसिलिंग से 674 अभ्यर्थियों को आवंटित किया था, जिनमें से 611 अभ्यर्थी काउंसिलिंग में शामिल हुए और उन्होंने अपने प्रमाण-पत्रों को जमा कराया। उनमें से पहले चरण में 560 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए और 51 अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र आपत्तियों के कारण रोके गए थे। विद्यालय आवंटन काउंसिलिंग तक 51 में से 21 अभ्यर्थियों की आपत्तियों का निस्तारण स्थानीय स्तर पर साक्ष्य लेकर कर दिया गया, लेकिन अब भी 30 अभ्यर्थियों के नियुक्ति और विद्यालय आवंटन पत्र पर रोक है।


उन पर फैसला शासन स्तर से होगा। यह हैं आपत्तियां: विभाग ने जिन 30 अभ्यर्थियों के नियुक्ति और विद्यालय आवंटन पत्रों पर रोक लगाई हैं, उनमें से 20 अभ्यर्थियों के मूल अंकों और आवेदन पत्रों में लिखे गए अंकों में अंतर हैं। इस पर शासन स्तर से ही फैसला लिया जाना है। साथ ही चार मामले अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के हैं, जबकि यह भर्ती प्रदेश के स्थानीय निवासियों के लिए ही थी। इसके साथ अन्य मामलों में जाति, जन्म और मूल निवास प्रमाण पत्र में अंतर है।

यह है स्थिति इन 30 मामलों में : से 20 पर बेसिक शिक्षा विभाग ने आपत्ति लगाई थी, जबकि 10 मामले उन 4 मामलों में शामिल थे, जिन पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) प्राचार्य अहिबरन सिंह ने आपत्ति लगाई थी।

बीएसए ने आपत्तियों के आधार पर अभ्यर्थियों से साक्ष्य लेकर उनमें से 24 का तो निस्तारण कर दिया, लेकिन 10 मामलों में वह साक्ष्यों से संतुष्ट नहीं हुए।

Sunday, November 15, 2020

धन नहीं तो कैसे पहचाने जाएं फर्जी शिक्षक, सत्यापन शुल्क के अभाव में पूरा काम पड़ा ठप

धन नहीं तो कैसे पहचाने जाएं फर्जी शिक्षक, सत्यापन शुल्क के अभाव में पूरा काम पड़ा ठप



प्रयागराज |  प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत पाठशालाओं में फर्जी शिक्षकों की पहचान में बजट का रोड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों सत्यापन के निर्देश दिए थे। लेकिन सत्यापन शुल्क देने के लिए रुपये नहीं होने के कारण पूरा काम ठप पड़ा है। अकेले प्रयागराज में 2989 शिक्षकों के अलग-अलग विश्वविद्यालयों एवं बोर्ड से 10 हजार से अधिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए 40 लाख रुपये की आवश्यकता है।


जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के पास बजट नहीं होने के कारण सत्यापन रिपोर्ट शासन को उपलब्ध नहीं करा पा रहे। अपर निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने पिछले दिनों सभी मंडलीय उप शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर तीन दिन में सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं विशेष सचिव शासन जय शंकर दुबे ने 8 जुलाई को दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। पूरी रिपोर्ट 31 जुलाई तक मांगी गई थी।

लेकिन बजट के अभाव में डेडलाइन बीते दो महीने बाद भी सत्यापन नहीं हो सका है यही स्थिति पूरे प्रदेश की बनी हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षकों ने शिक्षा निदेशालय से सत्यापन शुल्क के रूप में लाखों रुपये की डिमांड की है। 

जगह-जगह फर्जी मार्कशीट की दुकान

प्रयागराज |  वेबसाइट पर उपलब्ध है सूची हाईस्कूल और इंटर के फर्जी अंकपत्र क्रिकेट जौनपुर, लखनऊ से लेकर ग्वालियर, दिल्ली तक फैला है। रुपये लेकर फर्जी अंकपत्र बांटने का काम कोरोना महामारी के दौरान भी नहीं थमा है। पिछले छह महीने में यूपी बोर्ड को आधा दर्जन से अधिक सत्यापन के मामले मिले हैं जो फर्जी है। गुरुकुल विवि वृन्दावन मथुरा, हिन्दी साहित्य सम्मेलन की प्रथमा व मध्यमा, राजकीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान लखनऊ और राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान लखनऊ, वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ बदायूं, मध्य भारत ग्वालियर, एमएच एजुकेशनल विद्यापीठ जौनपुर आदि अनाधिकृत संस्थाओं ने 10वीं एवं 12वीं के अंकपत्र जारी किए हैं। इन संस्थाओं की समकक्षता के संबंध में बीएसए मथुरा, डीआईओएस लखनऊ, अटल विहारी बाजपेवी हिन्दी विवि भोपाल, रोडवेज विभाग बरेली, जिला कमांडेंट होमगार्ड लखनऊ आदि ने पूछताछ की है। अफसरों का कहना है कि यूपी बोर्ड की ओर से पत्र भेजा रहा है कि इन संस्थाओं से जारी अंकपत्र या प्रमाणपत्र का विधिक अस्तित्व नहीं है।

वेबसाइट पर उपलब्ध है सूची
देशभर में अधिकृत एवं मान्य संस्थाओं की सूची यूपी बोर्ड की वेबरइट www.upmsp.edu. in है। सभी राज्यों की विधि द्वारा स्थापित माध्यमिक शिक्षा परिषदों से संवालित 10वीं तथा 12वी परीक्षाएं यूपी बोर्ड के समकक्ष हैं। सीबीएसई सीआईएससीई की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं भी मान्य एनआईओएस की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा इस प्रतिबंध के साथ मान्य है कि यह परीक्षा कम से कम पांच विषयों में पास की गई हो।

जिला विद्यालय निरीक्षकों के खेल में प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती के पद कभी पूरे नहीं भर पाये

जिला विद्यालय निरीक्षकों के खेल में प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती के पद कभी पूरे नहीं भर पाये


■  घपलेबाजी

• माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की हर भर्ती में होता है खेल
• दो दशक की हर भर्ती में विज्ञापित पदों से कम पर हुआ चयन
• टीजीटी-पीजीटी 2016 के चयनित शिक्षक तैनाती को भटक रहे


जिला विद्यालय निरीक्षकों के खेल में प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती के पद कभी पूरे नहीं भर पाते। पिछले दो दशक में हुई भर्तियों पर गौर करें तो हर बार प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) के विज्ञापित पदों की तुलना में कम चयन हो सका है।


डीआईओएस पहले तो रिक्त पदों की सूचना भेज देते हैं लेकिन उसके बाद पीछे से स्कूल प्रबंधकों से साठगांठ कर किसी न किसी बहाने पद भरने की अनुमति देते हैं और चयन बोर्ड को पत्र भेजकर सत्यापन निरस्त करने को कहते हैं। इसी का नतीजा है कि चयनित शिक्षक तैनाती के लिए अरसे तक दर-दर की ठोकरें खाते हैं।


टीजीटी-पीजीटी 2016 के 125 से अधिक चयनित शिक्षकों को तैनाती नहीं मिल सकी है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। समायोजन की मांग लेकर ये चयनित शिक्षक स्कूल प्रबंधक, डीआईओएस कार्यालय, शिक्षा निदेशालय से लेकर चयन बोर्ड तक भटक रहे हैं। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट भी चयन बोर्ड को फटकार चुका है।


कब-किस भर्ती में भरे कितने पद

2013 के टीजीटी में विज्ञापित 6028 पदों में से 4795 और पीजीटी के 1117 में से 922 पर चयन हो सका। 2011 के टीजीटी के 1479 पदों में से 1397 और पीजीटी के 393 में से 313, 2010 के टीजीटी के 5990 में से 5662 जबकि पीजीटी में 959 में से 843 पद भरे जा सके थे। टीजीटी 2004 के 3039 पदों में से 2808 और पीजीटी के 1359 पदों में से 1304 पर चयन प्रक्रिया पूरी हुई थी। 2002 के टीजीटी के 3787 पदों में से 3415 पद भरे गए थे। दो दशक में अपवाद रूप में 2010 की भर्ती रही जिसमें टीजीटी के 4038 व पीजीटी के सभी 892 पदों पर भर्ती हुई थी। 2016 की भर्ती अभी चल रही है।

उच्च शिक्षा : शिक्षकों द्वारा तैयार 62000 ई-कंटेंट से समृद्ध हुआ पोर्टल, विद्यार्थियों को मिली सुविधा

उच्च शिक्षा : शिक्षकों द्वारा तैयार 62000 ई-कंटेंट से समृद्ध हुआ पोर्टल, विद्यार्थियों को मिली सुविधा


 कोविड-19 के प्रकोप के चलते इस बार उच्च शिक्षा संस्थानों में अब तक दाखिला पूर्ण नहीं हो सका है। इसके चलते स्नातक व स्नातकोत्तर की आनलाइन क्लास भी बाधित चल रही है। वहीं, राज्य विश्वविद्यालयों के अध्यापक भी इधर बीच ई-कंटेंट को लेकर उदासीन हो गए थे। दो माह पहले शासन के ई-पोर्टल पर तीस हजार ई-कंटेंट अपलोड किए गए थे। इस पर राज्यपाल/कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के कड़ी नाराजगी भी जताई थी। उन्होंने सभी राज्य विश्वविद्यालयों को ई-कंटेंट बढ़ाने का निर्देश दिया था। सख्त निर्देश के बाद पोर्टल पर ई-कंटेंट की संख्या अचानक बढ़ गई है। वर्तमान में पोर्टल पर 62000 ई-कंटेंट अपलोड हो चुके हैं।


इसमें महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षकों द्वारा तैयार 6600 पाठ्य सामग्री भी शामिल है। पोर्टल पर ई-कंटेंट अपलोड करने के मामले में काशी विद्यापीठ सूबे में तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर आगरा व दूसरे नंबर पर लखनऊ है। इसके अलावा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय (जौनपुर), जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (बलिया) सहित सूबे के अन्य राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा ई-कंटेंट के रूप में पाठ्य सामग्री शामिल है। इस प्रकार ई-लाइब्रेरी में अब हंिदूी और अंग्रेजी में हजारों टेक्स्ट, आडियो-वीडियो फार्म में शिक्षण सामग्री उपलब्ध है।

ऐसे में अब घर बैठे स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए ई-पोर्टल नामक विशाल ई-प्लेटफार्म की सुविधा मौजूद है। किसी भी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय के छात्र अब सूबे के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के व्याख्यान, नोट्स का उपयोग आसानी से कर सकते हैं।

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित परीक्षाओं में हर साल छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षा में 1,82,259 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था,


जबकि 2019 में दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ छात्रों की घटती संख्या के बावजूद प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसे अतिरिक्त पदों के सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को भेज रहे हैं। इस पर उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को प्रस्तावों के पुनरावलोकन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि गत तीन वर्षों में परीक्षा फार्म भरने व परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 


एक ओर जहां छात्रों की संख्या कम हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिक छात्रों की संख्या प्रदर्शित कर अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसा पाया गया और अधिक छात्र संख्या दर्शाकर पद सृजन के प्रस्ताव भेजे गए तो संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में दस अनुदानित मदरसों में से कइयों ने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रस्ताव दिया है। रजिस्ट्रार के पत्र से मदरसों में खलबली मच गई है।

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था 


कोरोना संक्रमण से उपजे हालात से निपटने के लिए हर किसी ने एहतियात भरे कदम उठाए हैं। इन्हीं में से एक माध्यमिक शिक्षा विभाग भी है। तकनीकी और संसाधनों के लिए हमेशा से उपेक्षित कहा जाने वाला माध्यमिक शिक्षा विभाग अब हाईटेक बनकर उभरा है। यही कारण है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं ही नहीं अब ऑनलाइन परीक्षा कराए जाने का भी निर्णय ले डाला है। 


जिला विद्यालय निरीक्षक, डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, 20 नवंबर से शुरू हो रहे छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था की गई है। जो छात्र स्कूल आकर परीक्षा देना चाहते हैं वह स्कूल आकर परीक्षा देंगे। और वे जिनके अभिभावक कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों को स्कूल भेजने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, अबे घर से ही ऑनलाइन परीक्षाएं दे सकते हैं।


जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार बच्चों को गूगल मीट, जूम आदि के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराए जाएंगे बच्चों को उनके उत्तर लिखकर ई-मेल के जरिए भेजना होगा। यदि किसी बच्चे के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या आ रही है तो उसे व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराया जाएगा। बच्चे परीक्षा ईमानदारी के साथ दें इसकी जिम्मेदारी खुद अभिभावकों को सौंपी जा रही है।


अभिभावकों की भी मिल रही सराहना
यूपी बोर्ड के तहत संचालित स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की व्यवस्था को अभिभावकों की भी सराहना मिल रही है। छमाही परीक्षा को भी ऑनलाइन माध्यम से कराए जाने के प्रयास को भी अभिभावक खूब समर्थन दे रहे हैं।

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच


कोरोना संक्रमण के चलते शैक्षिक सत्र 2020-21 प्रभावित जरूर हुआ है। नियमित कक्षाएं न चालू रहकर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं अन्य सुविधाओं के लिए भी विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मगर इन सब के बावजूद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपना सारा शेड्यूल पटरी पर होने का दावा किया है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी विभाग का दावा है  की परीक्षाएं अपने निर्धारित कैलेंडर के अनुसार ही कराई जाएंगी। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि प्रायोगिक परीक्षाओं को विभाग कैसे कराएगा।


अभी तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही थी, मगर अब 25% से अधिक विद्यार्थी कॉलेज आने लगे हैं। दीपावली बाद बच्चों की संख्या में इजाफा होगा। प्रैक्टिकल संबंधित सारे उपकरण कॉलेज में उपलब्ध हैं।


क्या कहते हैं के राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल
राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल धीरेंद्र मिश्रा के मुताबिक, प्रैक्टिकल कराए जाने के संबंध में शिक्षकों के साथ बैठक भी की गई है। एक साथ विद्यार्थियों की भीड़ न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए, उन्हें शिफ्टवार बुलाया जाएगा। बोर्ड से निर्देश के बाद प्रयास किया जाएगा कि अगले एक से डेढ़ महीने के दौरान सिलेबस से जुड़ी प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी करा ली जाए।


क्या कहते हैं जिला विद्यालय निरीक्षक
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, स्कूलों में उपस्थिति प्रतिशत बढ़ी है। दो दिन पहले हुई वर्चुअल बैठक में स्कूलों की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्कूलों में शत-प्रतिशत भी बच्चों की हाजिरी पाई गई। प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कॉलेजों को तैयार रहने के लिए भी कह दिया गया है। परिषद से प्रायोगिक परीक्षाओं के संबंध में जैसे दिशा निर्देश मिलते हैं, वैसा किया जाएगा।

राजधानी लखनऊ में RTE अंतर्गत हज़ार से अधिक बच्चों की पढ़ाई दांव पर, नहीं म‍िल सका प्रवेश, निजी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाई हेतु हिम्मत नहीं जुटा पा रहा विभाग।

राजधानी लखनऊ में RTE अंतर्गत हज़ार से अधिक बच्चों की पढ़ाई दांव पर, नहीं म‍िल सका प्रवेश, निजी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाई हेतु हिम्मत नहीं जुटा पा रहा विभाग।


 कई साल से शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करने वाले निजी स्कूलों पर बेसिक शिक्षा विभाग इस बार भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। हर बार की तरह इस बार भी दाखिले की समय सीमा समाप्त हो गई और करीब एक हज़ार से अधिक बच्चे दाखिले से वंचित रह गए। मगर जिम्मेदारों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी नोटिस जारी करने तक सीमित रह गए। ऐसे में सवाल इस बात का है की दाखिला न पाने वाले एक हज़ार बच्चों का भविष्य क्या होगा? स्वाभाविक है कि उन्हें इस बार क्या बिना दाखिले व पढ़ाई के ही रहना होगा।


दरअसल, राजधानी में शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए इस बार तीसरे चरण में 17 जुलाई से 10 अगस्त तक आवेदन करना था। 11 से 12 अगस्त के बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र का सत्यापन कर उन्हें लॉक करना था। विभाग की ओर से 14 अगस्त को लॉटरी निकाली गई और 30 अगस्त तक पात्र बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित कराया जाना था। मगर हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदार तमाम बच्चों को दाखिला दिलाने में नाकाम साबित हुए। इससे भी अधिक गंभीर बात यह रहेगी जिम्मेदारों ने इन निरंकुश निजी स्कूलों पर कोई ठोस कार्रवाई करने की इस बार भी हिम्मत नहीं दिखाई। शायद यही कारण है कि निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में दिलचस्पी नहीं दिखाते।


राजधानी में ऑनलाइन माध्यम से 11729 और ऑफलाइन माध्यम से करीब 900 पात्र बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिला दिलाया जाना था। मगर दाखिले को लेकर विभाग द्वारा निर्धारित तारीख बीतने के बाद भी महज करीब 10000 बच्चों को ही निजी स्कूलों में दाखिला मिल सका। जबकि करीब एक हजार से अधिक बच्चे इस बार अभी दाखिले से वंचित रह गए हैं। आरटीई को लेकर बच्चों को निशुल्क शिक्षा मुहैया कराने को लेकर अधिकारियों की ओर से बड़े-बड़े दावे भी किए जाते हैं, मगर  राजधानी के हाल को देखकर  प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


'इस सत्र अभी तक करीब 10000 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया गया है। व्यवहारिक रूप से अभी भी दाखिले हो रहे हैं। जिन स्कूलों ने बच्चों को दाखिला नहीं दिया हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।'  -दिनेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ

ठंड की आमद और स्वेटर का पता नहीं, बेसिक शिक्षा विभाग में लेटलतीफी वाला रवैया

ठंड की आमद और स्वेटर का पता नहीं, बेसिक शिक्षा विभाग में लेटलतीफी वाला रवैया 


लखनऊ: ठंड ने अपनी आमद दर्ज करा दी है यही कारण है कि लोग ने स्वेटर और मफलर के साथ घर से बाहर निकलना शुरू कर दिया है। मगर दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग के तहत संचालित परिषदीय स्कूल के बच्चों को अभी स्वेटर नसीब नहीं हुआ है। खुद अभिभावक भी स्वेटर के लिए स्कूलों से संपर्क कर रहे हैं।जबकि विभाग की ओर से बीते कई दिनों से दावा किया जा रहा है  कि जल्द ही स्वेटर वितरित हो जाएंगे।


मौजूदा समय में कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद हैं। इसकारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। मगर सरकारी निर्देशों के तहत उन्हें ठंड से पहले स्वेटर वितरित हो जाना है। जिला स्तर पर अधिकारियों ने खाना पूरी करने के लिए एक दो स्कूलों में कुछ बच्चों को स्वेटर वितरित कराए। मगर शारीरिक दूरी के मानक का पालन नहीं किया गया। इसे लेकर तमाम सवाल खड़े हुए। जिसके बाद से विभाग ने किनारा ही काट लिया।


इसे बेसिक शिक्षा विभाग का दुर्बल रवैया ही कहा जाएगा कि  नवंबर का आधा महीना भी चुका है मगर विभाग द्वारा परिषदीय विद्यालय के बच्चों को स्वेटर नहीं मुहैया कराया जा सके। अगर ऐसा ही रवैया विभाग का रहा तो इस जाड़े को बच्चों को बिना स्वेटर ही काटना होगा।


बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि स्वेटर आ चुके हैं। उनके वितरण का काम युद्ध स्तर पर कराया जाएगा। प्रयास यही है कि नवंबर अंत तक जिले के सभी परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के सभी बच्चों को स्वेटर मिल जाएं।

दिवाली बीती, कई राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी, यूपी में कक्षा 9 से 12 खुले - कक्षा 1 से 8 पर अभी कोई निर्णय नहीं

दिवाली बीती, कई राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी, यूपी में कक्षा 9 से 12 खुले - कक्षा 1 से 8 पर अभी कोई निर्णय नहीं।


कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण सात महीने से भी ज्यादा समय से स्कूल बंद हैं. सरकार की अनलॉक प्रक्र‍िया के दौरान 15 अक्टूबर से कई राज्यों में स्कूल खुल गए हैं. इसके लिए सरकार के निर्देश के अनुसार राज्यों ने अपने राज्य में अलग अलग एसओपी तैयार की है. वहीं दीवाली के बाद भी कई राज्य स्कूल खोल रहे हैं. 


यूपी-बिहार, झारखंड आदि राज्यों ने स्कूल खोल दिए हैं। लेकिन अभी 9 से 12 तक के लिए ही ओपन हुए हैं। कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों को खोलने की SOP तैयार हो रही है। फिलहाल शासन स्तर पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।


लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी स्कूल बंद हैं. महाराष्ट्र सरकार ने भी दिवाली के बाद स्कूल खोलने का फैसला लिया है. सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस संबंध में कहा है कि हम सभी एहतियाती कदम उठाते हुए दिवाली के बाद स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार कर रहे हैं. इसके लिए राज्य सरकार ने स्कूलों के लिए एसओपी तैयार की है. इसके अनुसार स्कूलों में शिफ्ट के हिसाब से पढ़ाई होगी.


अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्य में नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अगले आदेश तक स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है. सरकार ने कहा है कि वो पेरेंट्स, स्टूडेंट्स, स्कूल और डॉक्टरों आदि से राय लेकर ही अपनी एसओपी तैयार करने के बाद स्कूल खोलेंगे.


असम में दो नवंबर से केवल कक्षा 6 वीं से 12 वीं तक के छात्रों को स्कूल आने की अनुमति दी गई थी. साथ ही राज्य ने स्कूलों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की. असम में स्कूलों के लिए ऑड इवन की व्यवस्था लागू की गई है. यहां कक्षा 6, 8 और 12 के छात्र सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को स्कूल में आएंगे, जबकि अन्य तीन दिन कक्षा 7, 9 और 11 के छात्र आएंगे.


आंध्र प्रदेश में दो नवंबर से स्कूल चरणबद्ध तरीके से फिर से खोले गए. कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए दिन-प्रतिदिन के कार्यक्रम से लेकर मिड डे मील में भी बदलाव किया गया है. यहां सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुपालन में एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी सावधानी बरत रहे हैं. आंध्र प्रदेश में कक्षाएं सुबह 9:15 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक लगने का प्रावधान किया गया. प्रत्येक कक्षा में सोशल डिस्टेंस का पालन के साथ कक्षाओं में केवल 16 छात्र बैठने की व्यवस्था है. इसे देखते हुए शैक्षणिक वर्ष को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है. अधिकारियों ने कहा कि आंध्र प्रदेश में कक्षा 9 और 10 के छात्र सोमवार से वैकल्पिक दिनों में स्कूल जाना शुरू कर सकते हैं.


अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु में 16 नवंबर यानी दिवाली के बाद से स्कूल खुल जाएंगे. अरुणाचल प्रदेश में जहां 10वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए दिवाली के बाद स्कूल खुलेंगे. वहीं, तमिलनाडु में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए क्लास चलाने का निर्णय सरकार की ओर से किया गया है. इन दोनों राज्यों में स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए मास्क लगाना जरूरी है.


गोवा में 10वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल 21 नवंबर से खुल जाएंगे. सभी स्कूलों को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है. राज्य सरकार इस संबंध में जल्द ही गाइडलाइंस जारी करेगी. वहीं हरियाणा में भी 16 नवंबर से राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुल जाएंगे. इन राज्यों में राज्य सरकार ने स्कूलों के लिए एसओपी तैयार की है.


पश्चिम बंगाल सरकार ने फिलहाल स्कूल न खोलने का फैसला किया है. ममता सरकार ने कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 नवंबर तक राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है. यदि 30 नवंबर के बाद हालात सामान्य होंगे तो कोविड मामलों की समीक्षा के बाद सरकार 1 दिसंबर से स्कूल खोल सकती है.


हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 नवंबर से कक्षा 9 से 12 वीं के छात्रों के लिए नियमित आधार पर स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया गया था. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ये निर्णय लिया गया है. स्कूल जाने के इच्छुक छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी, हालांकि, उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी. इसके अलावा, राज्य के कॉलेज गृह मंत्रालय के एसओपी और गाइडलाइन का पालन करते हुए खुलेंगे. जो कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए फ‍िर से बंद कर द‍िए गए हैं.

Saturday, November 14, 2020

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच


वाराणसी : प्राथमिक से लगायत विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कराए जा रहे हैं ताकि शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवापुस्तिकाएं आनलाइन की जा सके।


सेवापुस्तिका आनलाइन होने से माध्यमिक व उच्च शिक्षा के शिक्षकों व कर्मचारियों को अवकाश के लिए आनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिल जाएगी। इसके लिए शिक्षकों व कर्मचारियों को दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना होगा। दूसरी ओर मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की जांच भी हो रही है।


पोर्टल के माध्यम से बेसिक शिक्षा में कई शिक्षकों के अभिलेख संदिग्ध मिले हैं। ऐसे शिक्षकों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। इसे देखते हुए अब माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों की जांच पोर्टल से शुरू कर दी गई है। वहीं, दूसरी ओर शासन ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से पोर्टल पर विवरण अपलोड करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गत दिनों महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से फार्म भी भरवाए गए थे।

यूपी बोर्ड: स्कूल 31 जनवरी तक पूरी कर लें प्रयोगात्मक कक्षाएं

यूपी बोर्ड: स्कूल 31 जनवरी तक पूरी कर लें प्रयोगात्मक कक्षाएं



प्रयागराज। यूपी बोर्ड सचिव ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों से 31 जनवरी तक 12 वीं की प्रयोगात्मक कक्षाएं पूरी कर लेने का निर्देश दिया है। स्कूल में प्रयोगात्मक कार्य पूरा कर लेने के बाद बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में कराई जाएंगी। 


यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि12 वीं की प्रयोगात्मक परीक्षा और हाईस्कूल के नैतिक शिक्षा, योग, खेल, शारीरिक शिक्षा के ग्रेड एवं आंतरिक मूल्यांकन के अंक और इंटरमीडिएट में नैतिक शिक्षा, योग, खेल, शारीरिक शिक्षा के लिखित एवं प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक 15 फरवरी तक बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। स्कूलों में प्रैक्िटकल संशोधित पाठ्यक्रम के आधार पर होंगे।

Friday, November 13, 2020

CBSE Single Girl Child Scholarship: सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन शुरू, विज्ञप्ति जारी

CBSE Single Girl Child Scholarship: सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन शुरू, विज्ञप्ति जारी। 

 सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन शुरू, हर माह मिलेंगे 500 रूपये


CBSE Scholarship for Single Girl Child 2020: सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है कैंडिडेट्स इसके लिए अब अप्लाई कर सकते हैं.


CBSE Scholarship for Single Girl Child 2020: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड {CBSE-सीबीएसई} ने सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप 2020 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पात्र और इच्छुक कैंडिडेट्स इसके लिए अब आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए पात्र कैंडिडेट्स सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाएं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने की अंतिम तारीख 10 दिसंबर, 2020 है.


कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन फॉर्म की हार्ड कॉपी (केवल नवीनीकरण) 28 दिसंबर 2020 को या उससे पहले जमा करनी है. सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप 2020 के लिए केवल वे छात्राएं अप्लाई कर सकती है जो साल 2020 में सीबीएसई से एफिलिएटेड स्कूलों से कक्षा 10वीं की परीक्षा पास की है. उन छात्राओं को जिन्होनें सभी प्रकार की पात्रताओं को पूरा करते हैं उन्हें दो साल तक – कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं के दौरान, हर महीने 500 रूपये प्रदान किये जायेंगें.



सीबीएसई सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप 2020: स्कीम के प्रकार

कैंडिडेट्स छात्रवृति के लिए दो प्रकार की कैटेगरी के लिए अप्लाई कर सकते हैं.  ये कैटेगरी निम्नलिखित दो प्रकार की है.


■ सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए: 12वीं कक्षा की स्टडी के लिए सीबीएसई मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम.

■ 2019 में सिंगल गर्ल चाइल्ड 10वीं पास के लिए सीबीएसई मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम के तहत ऑनलाइन आवेदन का नवीनीकरण.


योग्यता: सभी सिंगल गर्ल चाइल्ड स्टूडेंट्स, जिन्होंने साल 2020 में कक्षा 10वीं की CBSE बोर्ड की परीक्षा में कम से कम 60 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों और जो अब CBSE बोर्ड से एफिलिएटेड स्कूलों में कक्षा 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कर रही हो.  इसके साथ ही जिन छात्राओं की ट्यूशन फीस प्रति माह 1,500 से अधिक नहीं है, वे इस स्कॉलरशिप स्कीम के लिए योग्य हैं.


CBSE Scholarship का उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य उन माता-पिता के प्रयासों को पहचानना है जो लड़कियों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने और मेधावी स्टूडेंट्स को प्रोत्साहन करने केलिए सदैव प्रयास रत रहते हैं.


परिषदीय स्कूलों की बंदी के दौरान वाट्सएप बना ऑनलाइन शिक्षा का सबसे बड़ा जरिया

परिषदीय स्कूलों की बंदी के दौरान वाट्सएप बना ऑनलाइन शिक्षा का सबसे बड़ा जरिया


लखनऊ : कोरोना आपदा में परिषदीय स्कूलों की बंदी के दौरान इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के लिए वाट्स एप सबसे बड़ा माध्यम बना है। वहीं आनलाइन शिक्षा के लिए बहुप्रचारित दीक्षा एप से बच्चे और उनके अभिभावक दूरी बनाए हुए हैं।



सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से इंटरएक्टिव वायस रिस्पांस सिस्टम (आइवीआरएस) के जरिये शिक्षकों और बच्चों व उनके अभिभावकों से हाल ही में की गई पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है। 


आइवीआरएस के जरिये की गई पड़ताल में पता चला कि 98 फीसद शिक्षक बच्चों से वाट्स एप के जरिये जुड़े हैं। ऑनलाइन शिक्षा के लिए वाट्स एप सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला माध्यम है। हालांकि 20 फीसद अभिभावक ऐसे भी पाए गए जो बच्चों की पढ़ाई के लिए वाट्स एप का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

एक तैयारी में दे सकेंगे शिक्षक पात्रता की दो परीक्षाएं, UPTET फरवरी माह में संभावित तो CTET 31 जनवरी को

एक तैयारी में दे सकेंगे शिक्षक पात्रता की दो परीक्षाएं,  UPTET फरवरी माह में संभावित तो CTET 31 जनवरी को


प्रतियोगी परीक्षाएं वर्ष भर होती हैं और हजारों प्रतियोगी उनमें शामिल होते आ रहे हैं। नए साल में शिक्षक पात्रता की ऐसी दो परीक्षाएं एक माह के अंतराल में होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि प्रतियोगियों को एक ही तैयारी में दोनों परीक्षाएं देने का अवसर मिलेगा। संयोग से दोनों परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की तादाद लाखों में होती है। उनमें से एक का कार्यक्रम घोषित है और दूसरे का शासनादेश जारी हो गया है। परीक्षा तारीख इसी माह घोषित होगी।


राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई का निर्देश है कि वर्ष में दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई जाए। केंद्र सरकार पिछले वर्ष तक छह-छह माह के अंतराल पर दो परीक्षाएं कराती आ रही है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह परीक्षा एक बार ही आयोजित हो रही है। सीटीईटी यानी केंद्र की परीक्षा पांच जुलाई को होना प्रस्तावित था लेकिन, कोरोना संक्रमण की वजह से नहीं हो सकी थी। अब यह परीक्षा 31 जनवरी 2021 को कराने की तारीख तय है। देशभर में परीक्षा केंद्र के शहरों की संख्या 112 से बढ़ाकर 135 की गई है। अभ्यर्थियों से केंद्र बदलने के आवेदन इन दिनों लिए जा रहे हैं।


उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2020 का गुरुवार को शासनादेश जारी हो गया है। यह परीक्षा अब फरवरी माह के अंत में संभावित है। शासन ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है। परीक्षा प्रदेश के सभी जिलों में कराई जानी है कड़े निर्देश हैं कि उन्हीं राजकीय व एडेड कालेजों को केंद्र बनाया जाए, जिनकी छवि साफ हो। इस बार भी आवेदकों की संख्या करीब 15 लाख के आसपास हो सकती है। सचिव जल्द ही परीक्षा तारीख और आनलाइन आवेदन लेने का कार्यक्रम जारी करेंगे।


यह परीक्षा अहम क्यों : सभी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, तभी वे प्राथमिक स्तर की शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में प्रतिभाग कर सकते हैं। इसमें सामान्य व आरक्षित वर्ग के लिए अलग-अलग कटऑफ अंक तय हैं। हालांकि हर बार परीक्षा में उत्तीर्ण होने वालों की तादाद काफी कम रहती है।


दो स्तर की होती है परीक्षा
टीईटी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की होती है। दोनों परीक्षाओं का आयोजन एक ही दिन दो पालियों में होता रहा है। अभ्यर्थी दोनों के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले में पाठ्यक्रम इंटर स्तर का ही है।

डीएलएड परीक्षा के दोनों पाली में आउट हुए थे पर्चे, गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, दो हजार में उपलब्ध कराते थे डीएलएड का पेपर

डीएलएड परीक्षा के दोनों पाली में आउट हुए थे पर्चे,  गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, दो हजार में उपलब्ध कराते थे डीएलएड का पेपर


इटावा : डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) -2018 के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में बुधवार को दोनों पाली के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। मामले में पुलिस ने सॉल्वर गैंग से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ कॉलेज के प्रधानाचार्य संजय शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराया है, वहीं तीन फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।


एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि बुधवार को प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बचन सिंह को डीआइओएस राजू राणा और सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व केंद्र व्यवस्थापक संजय शर्मा ने डीएलएड परीक्षा-2018 की द्वितीय पाली के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के आउट होने की जानकारी दी। कुछ अभ्यर्थियों के वाट्सएप पर भी प्रश्नपत्र उपलब्ध होने की बात बताई। 


इस पर प्रभारी निरीक्षक ने इटावा के फ्रेंड्स कालोनी थाना के श्यामनगर भरथना रोड निवासी शिवम यादव, जसवंतनगर के जनकपुर निवासी मनीष कुमार सिंह, बसरेहर के पत्तापुरा निवासी निखिल कुमार, मूल रूप से इटगांव व हाल पता फ्रेंड्स कालोनी थाना के शिवपुरीशाल पचावली निवासी प्रशांत कुमार सिंह और नई मंडी यदुवंश नगर निवासी सचिन कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित सचिन कुमार ने बताया कि दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति तय करके वाट्सएप पर पेपर उपलब्ध करा रहे थे।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों के स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी।

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में कार्यरत अध्यापकों के स्थानांतरण को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।


यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राहुल मिश्र व कई अन्य की याचिकाओं पर अधिवक्ता सीमांत सिंह व अन्य को सुनकर दिया है। याचिका में कहा गया है कि कॉलेजों में नई नियुक्तियां होने के बाद भी स्थानांतरित हो चुके अध्यापकों को कार्यमुक्त करने में मनमानी की जा रही है। याचियों का स्थानांतरण 20 जून 2019 को कर दिया गया लेकिन उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया। इस बीच लोक सेवा आयोग ने प्रदेश में 3317 पदों पर अध्यापकों की नियुक्ति कर दी है। इसके बावजूद याचियों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है जबकि कई अन्य कॉलेजों में इसी स्थिति के बावजूद कार्यमुक्त किया जा रहा है।


अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि राजकीय इंटर कॉलेजों के अध्यापकों की स्थानांतरण नीति में प्रावधान है कि जिन कॉलेजों में दो ही अध्यापक हैं वहां स्थानांतरण के बाद अध्यापक को तब तक कार्यमुक्त न किया जाए, जब तक उसकी जगह दूसरा अध्यापक कार्यभार ग्रहण न कर ले। याचिका में कहा गया है कि विभाग ने स्थानांतरण होने के बावजूद याचियों के कॉलेज में पद रिक्त नहीं दिखाए हैं जिससे नव नियुक्त अध्यापकों को वहां तैनाती नहीं दी जा रही है।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।


मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत प्रदेश के 25 हजार शिक्षकों को दो महीने दस दिन (70 दिन) का वेतन मिलेगा। दरअसल, मदरसा शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्र ने अपने हिस्से के 50 करोड़ 89 लाख रुपये जारी कर दिए।



मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत स्नातक शिक्षकों को 8000 और परास्नातक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र क्रमश: 3600 रुपये और 4800 रुपये देता है, लेकिन चार साल से केंद्र ने अपना अंशदान जारी नहीं किया था।इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि केंद्र से जारी धनराशि वर्ष 2016-17 की प्रथम किस्त का 40 फीसदी है। धीमी गति से मानदेय रिलीज करने से मानदेय और अधिक लंबित होता जा रहा है।  शिक्षकों के वेतन में मिलने वाला केंद्रांश बीते चार साल से नहीं मिल रहा है, जो अब बढ़कर 977 करोड़ रुपये हो गया है। 

Thursday, November 12, 2020

अमेठी: हटाए गए कस्तूरबा के 19 अंशकालिक शिक्षक, कार्रवाई से मचा हड़कंप

अमेठी: हटाए गए कस्तूरबा के 19 अंशकालिक शिक्षक,  कार्रवाई से मचा हड़कंप


अमेठी। बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में संविदा पर तैनात 19 अंशकालिक शिक्षकों को हटा दिया है। हटाए गए शिक्षकों में अधिकांश असंगत विषयों का शिक्षण कार्य कर रहे थे। शासन के निर्देश पर हुई कार्रवाई से हटाए गए शिक्षकों में हड़कंप मचा है।


जिले के सभी 13 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन होता है। इन विद्यालयों में पूर्णकालिक के साथ ही अधिकांश अंशकालिक टीचर वर्ष 2010 से पहले से काम कर रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2013 में केजीबीवी में अंशकालिक टीचर्स की नियुक्ति व उनके रिन्यूवल के नियमों में परिवर्तन किया था।


शासन ने पिछले दिनों सभी जिलों के बीएसए को पत्र भेजकर असंगत विषयों का शिक्षण कार्य करने वालों के साथ ऐसे अंशकालिक टीचर्स को हटाने का निर्देश दिया था जिस विषय में पूर्णकालिक टीचर की तैनाती हो।


शासन के निर्देश पर बीएसए विनोद कुमार मिश्र ने जिन टीचर्स की संविदा समाप्त कर दी है उनमें केजीबीवी भादर के राम शिरोमणि व वीना सिंह, संग्रामपुर की मालती देवी व अजय कुमार पांडेय, शाहगढ़ के लव कुश गुप्ता, अमेठी की लक्ष्मी तिवारी, जामो की आरती गुप्ता व संगीता मिश्रा, बहादुरपुर की सीमा मिश्रा व नीतू सिंह, सिंहपुर के अमित कुमार सिंह, भेटुआ की अनिता, मुसाफिरखाना के धर्मेंद्र कुमार व रजनी सिंह, शुकुल बाजार की संध्या सिंह, शंकर पाल व सुनीता सिंह, तिलोई के सूर्यकांत ओझा व जगदीशपुर केजीबीवी की माधुरी शामिल हैं।


बीएसए की ओर से पिछले तीन नवंबर को की गई इस कार्रवाई के मंगलवार को सार्वजनिक होने के बाद जद में आने वाले सभी 19 शिक्षकों में हड़कंप मचा है।


बीएसए द्वारा पदमुक्त किए जाने की कार्रवाई के बाद पांच शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। अनशन पर बैठे शंकर पाल, सीमा मिश्रा, नीतू सिंह, वीना सिंह व मालती देवी का कहना है कि वे शासन के नियमों में फिट बैठती हैं। बावजूद इसके उन्हें हटा दिया गया। अनशन पर बैठे शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा विभाग पर नियम विरुद्ध तरीके से बिना टीईटी शिक्षकों को समायोजित करने का भी आरोप लगाया। शिक्षकों ने बीएसए को ज्ञापन देकर समायोजन होने तक अनशन जारी रखने की बात कही है।

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें



फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स अब सूबे की और अनामिकाओं की तलाश के लिए राज्य सरकार के मानव संपदा पोर्टल को भी खंगाल रही है। सीतापुर से पांच नवंबर को गिरफ्तार फर्जी प्रधानाध्यापक देवरिया निवासी ऋषिकेश मणि त्रिपाठी से मिली जानकारियों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षकों की तलाश की जा रही है। ऋषिकेश सीतापुर में बजरंग भूषण के नाम से नौकरी कर रहा था। अनामिका प्रकरण की ही तर्ज पर आरोपित ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता ने भी सीतापुर में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। 


गोरखपुर में तैनात शिक्षिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए स्नेहलता ने यह नौकरी हासिल की थी और पति के पकड़े जाने के बाद से वह फरार है। एसटीएफ ने स्नेहलता की तलाश के लिए दो टीमों को लगाया है। एसटीएफ के एएसपी सत्यसेन यादव ने बताया कि गोरखपुर में तैनात सहायक अध्यापिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों पर सूबे में तीन और स्वाती तिवारी सहायक अध्यापिका की नौकरी कर रही थीं। इनमें बराबंकी व देवरिया में तैनात दो फर्जी शिक्षिकाओं को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ऋषिकेश की पत्नी का असली नाम स्नेहलता तिवारी है। ऋषिकेश से पूछताछ में सामने आया था कि उसने ही अपनी पत्नी की नौकरी फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगवाई थी। 


ऋषिकेश ने बताया कि उसके पिता राममणि त्रिपाठी देवरिया के अशोक इंटर कॉलेज में लेक्चरर थे और उन्होंने ने ही बजरंग भूषण व स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता फर्जी नाम से सीतापुर के हरिहरपुर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी कर रही थी। उसकी तलाश कराई जा रही है। एएसपी ने बताया कि आगरा के दयालबाग एजूकेशन इंस्टीट्यूटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बजरंग भूषण की शिकायत पर इस प्रकरण की जांच शुरू की गई थी। 


एसटीएफ को फर्जी शिक्षकों से जुड़ी कई और शिकायतें मिली हैं। मानव संपदा पोर्टल के जरिए उनकी भी जांच की जा रही है। स्वाती तिवारी के दस्तावेजों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षिकाओं की नियुक्ति की भी आशंका है। दूसरे के दस्तावेजों पर नाम-पता बदलकर नौकरी कर रहे कई और फर्जी शिक्षक एसटीएफ के निशाने पर हैं। ध्यान रहे, पूर्व में अनामिका नाम की शिक्षिका के दस्तावेजों के जरिए इसी नाम पर कई फर्जी शिक्षिकाओं के नौकरी हासिल करने का मामला पकड़ा गया था।

माध्यमिक शिक्षा में एक और शिक्षक भर्ती की तैयारी शुरू, शासन के आदेश पर डीआईओएस से रिक्त पदों का मांगा गया ब्योरा।

माध्यमिक शिक्षा में एक और शिक्षक भर्ती की तैयारी शुरू, शासन के आदेश पर डीआईओएस से रिक्त पदों का मांगा गया ब्यौरा।

प्रयागराज : प्रदेश के एडेड माध्यमिक कालेजों में शिक्षक भर्ती की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के लिए खुशखबरी है। एक और शिक्षक भर्ती की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे रिक्त पदों का अधियाचन आनलाइन भेजे। साथ ही चयन बोर्ड से अनुरोध किया गया है कि वे वेबसाइट फिर से खोलें।


माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने पिछले वर्ष पहली बार जिलों से आनलाइन आवेदन लिए थे और प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक पीजीटी-टीजीटी के 15508 रिक्त पदों का विज्ञापन 2020 जारी किया गया है। इन दिनों आनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। इसी बीच शासन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में शिक्षा निदेशालय प्रयागराज को निर्देश दिया कि सभी जिलों से एडेड माध्यमिक कालेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों का अधियाचन फिर लिया जाए। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. महेंद्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे शासन के आदेश पर अशासकीय सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 और 2020-21 की रिक्ति के सापेक्ष अधियाचन तत्काल भेजे जाएं।

UP Polytechnic : प्रवेश परीक्षा में न शामिल होने वाले छात्रों को भी यूपी पॉलीटेक्निक में दाखिले का मौका।

UP Polytechnic : प्रवेश परीक्षा में न शामिल होने वाले छात्रों को भी यूपी पॉलीटेक्निक में दाखिले का मौका।

उत्तर प्रदेश में पॉलीटेक्निक की प्रवेश परीक्षा में न शामिल होने वाले छात्रों को भी दाखिले का मौका मिलेगा। वेबसाइट पर सीधे दाखिला लेने वाले और प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए काउंसलिंग की लिंक अलग-अलग दी गई है।


परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि सातवें चरण की काउंसलिंग चल रही है। बिना प्रवेश परीक्षा वाले छात्र 12 नवंबर तक पंजीकरण करा सकते है। वहीं 13 से 15 नवंबर तक विकल्प भरे जाएंगे। 16 नवंबर को परिणाम जारी होंगे। जिसके बाद 18 नवंबर तक छात्रों को आवंटित संस्था में डॉक्यूमेंट सत्यापन कराना होगा।