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Thursday, April 29, 2021

त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2021 की मतगणना में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन न किये जाने की स्थिति में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने दी सामूहिक बहिष्कार की चेतावनी, ज्ञापन देखें


त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन-2021 की मतगणना में कोरोना गाइडलाइन का पालन न किये जाने की स्थिति में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने दी सामूहिक बहिष्कार की चेतावनी, ज्ञापन देखें

यूपी में कक्षा आठ तक के सभी स्कूल 20 मई तक बंद, टीचर घर से करेंगे काम

कोविड-19 की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान शैक्षिक सत्र के अंत (20 मई 2021) तक Work From Home की अनुमति, बेसिक शिक्षा मंत्री की  ट्विटर पर घोषणा

यूपी में कक्षा आठ तक के सभी स्कूल 20 मई तक बंद, टीचर घर से करेंगे काम


उत्तर प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूल अब सत्र के अंत यानी 20 मई तक बंद रहेंगे और शिक्षकों को घर से काम करने की इजाजत होगी। 

राज्य के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने बृहस्पतिवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए कहा "कोविड-19 की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब वर्तमान शैक्षिक सत्र के अंत (20 मई 2021) तक बेसिक शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शिक्षिकाओं को घर से कार्य करने की अनुमति होगी।" 

इससे पहले कक्षा एक से आठ तक के सभी परिषदीय /सहायता प्राप्त/ मान्यता प्राप्त व अन्य बोर्डो के विद्यालय को 30 अप्रैल तक शैक्षिक कार्य बंद किए जाने का आदेश जारी किया गया था।


कोविड-19 की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब वर्तमान शैक्षिक सत्र के अंत (20 मई 2021) तक बेसिक शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शिक्षिकाओं को घर से कार्य करने (Work From Home) की अनुमति होगी।
@basicshiksha_up 

साभार : ट्विटर

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी, UGC जारी करेगा गाइडलाइन

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी, UGC जारी करेगा गाइडलाइन


विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी
Covid Seond Wave देश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है। जल्द ही इसके लिए यूजीसी गाइडलाइन जारी करेगा।


नई दिल्ली  ।  देश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है। जल्द ही इसके लिए यूजीसी गाइडलाइन जारी करेगा। इसके साथ पाठ्यक्रम में भी कटौती की जा सकती है। इसके अलावा देश के विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के काफी संख्या में कोरोना से पीड़ित होने की खबरें आ रही हैं। इससे पहले कई राज्यों की परीक्षाएं रद कर दी गई हैं या निलंबित कर दी गई हैं। इसमें यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा रद कर दी गई और कक्षा 12 वीं की परीक्षा को रद कर दिया गया है।


उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम

उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करने का फैसला किया है। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को हासिल होगी, जो गुणवत्ता के एक तय मानक को पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुविधा को विस्तार मिलने से दाखिले से वंचित रहने के बाद भी छात्र अपनी पसंद के विषयों और पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस बीच एआइसीटीई ने बड़ी संख्या में अपने कोर्सों को ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ), कंप्यूटर एप्लीकेशन, डाटा साइंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेवल एंड टूरिज्म के साथ प्रबंधन और उससे जुड़े कोर्स शामिल हैं।



यूजीसी ने टीकाकरण से जुड़ी रणनीति पर शुरू किया काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने टीकाकरण से जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी अपने स्तर पर योजना तैयार करने को कहा गया है। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन के मुताबिक टीकाकरण के इससे पहले के चरणों में भी सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को तय उम्र के दायरे में आने वाले संस्थान के सभी लोगों का टीकाकरण कराने के लिए कहा गया था। साथ ही इसे लेकर आम लोगों को जागरूक करने को कहा था।
    

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 20 अप्रैल, 2021 को यूजीसी नेट परीक्षा,दिसंबर 2020 परीक्षा को स्थगित कर दिया था। IIT मद्रास और अन्ना विश्वविद्यालय ने अपनी सेमेस्टर परीक्षाओं और यहां तक कि ऑनलाइन परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया है। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) ने कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए मई में प्रस्तावित सीए फाइनल और सीए इंटरमीडिएट परीक्षा स्थगित कर दी है। आइसीएआइ की ओर से जारी महत्वपूर्ण सूचना में बताया गया है कि कोविड-19 की मौजूदा समस्या से छात्रों को बचाना बेहद जरूरी है। इसलिए 21 मई की सीए फाइनल और 22 मई की सीए इंटरमीडिएट की परीक्षा स्थगित की जा रही है।


बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में 3,60,960 नए मामले आए। पिछले एक सप्ताह से तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इस दौरान 3,293 लोगों की मौत से देश में कोरोना से अब तक हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर दो लाख से अधिक हो गया। ऐसा पहली बार है जब कोरोना से इतनी तादाद में मौतें हुईं और नए मामले सामने आए।

केंद्रीय विद्यालय : नौवीं में एडमिशन के लिए नहीं होगी लिखित परीक्षा

केंद्रीय विद्यालय :  नौवीं में एडमिशन के लिए नहीं होगी लिखित परीक्षा

वहीं, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए चल रही प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करते हुए एक बड़ी राहत दी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने कोरोना महामारी को देखते हुए 2021 में कक्षा 9वीं में दाखिलों के लिए होने वाली लिखित परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है।



 कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से कई परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं। बुधवार, 28 अप्रैल, 2021 को जारी एक आदेश के अनुसार केंद्रीय विद्यालय संगठन ने एडिमशन प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने का फैसला किया है। इससे पहले तक कक्षा 9वीं में लिखित परीक्षा के आधार पर ही दाखिला दिया जाता था। इस बार प्राथमिक श्रेणी के आधार पर दाखिले किए जाएंगे।

कोरोना का असर : स्कूलों में समय से पहले हुईं गर्मी की छुट्टियां, KVS ने भी किया एलान

केंद्रीय विद्यालयों में  03 मई से 20 जून तक गर्मियों की छुट्टियां



 केंद्रीय विद्यालयों में तीन मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा कर दी गई है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने सभी विद्यालयों को इसका आदेश जारी किया है। आमतौर पर हर साल केंद्रीय विद्यालयों में 15 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होता था। कोरोना को देखते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन ने यह निर्णय लिया है। ग्रीष्मफकालीन अवकाश 20 जून तक रहेगा।

नई दिल्ली : कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए केंद्रीय विद्यालय सहित देश के ज्यादातर स्कूलों में इस बार तय समय से पहले ही गर्मी की छुट्टियां घोषित होनी शुरू हो गई हैं। हालांकि फिजिकल तौर पर संक्रमण के खतरे को देखते हुए यह स्कूल पहले ही बंद कर दिए गए थे, लेकिन आनलाइन पढ़ाई जारी रखी गई थी। जिसके लिए शिक्षकों को हर दिन स्कूल आना होता था। फिलहाल स्कूलों में हर साल गर्मी की छुट्टियां 15 मई के बाद शुरू होती थी, लेकिन स्थिति को देखते हुए इस बार पहले ही घोषित किया जा रहा है।

इस बीच स्कूलों का सबसे बड़ा संगठन केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने अपने देश भर के स्कूलों में तीन मई से गर्मी की छुट्टियां का एलान कर दिया है। फिलहाल इन स्कूलों में हर बार यह छुट्टियां 15 मई के बाद होती थी। संगठन ने यह फैसला कोरोना संकटकाल में छात्रों-शिक्षकों को तनाव से राहत देने के लिए किया है। अब यह स्कूल 21 जून के बाद खोले जाएंगे। यानी इन स्कूलों में अब कोई भी शैक्षणिक गतिविधियां 21 जून के बाद ही शुरू होगी। वैसे भी दो मई से प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाएं स्थगित या फिर रद हो गई हैं। इसे लेकर कोई भी फैसला एक जून के बाद स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा। सीबीएसई ने स्पष्ट किया था, कि बारहवीं की स्थगित बोर्ड परीक्षाओं का जब भी एलान होगा, तो उसके बाद भी छात्रों को कम से कम पंद्रह दिन का समय दिया जाएगा। इसके तहत एक जून को कोई निर्णय होता भी है, तब भी इनकी नई तारीखें 15 जून के बाद की ही होगी।

■ केंद्रीय विद्यालय संगठन ने तीन मई से स्कूल बंद करने का किया एलान

■ हर बार 15 मई के बाद ही होती थी यह छुट्टियां, 21 जून के बाद खुलेंगे


इसके साथ ही केंद्रीय विद्यालयों में तीन मई से 20 जून, 2021 तक गर्मियों की छुट्टियों की घोषणा भी कर दी गई है। बुधवार, 28 अप्रैल, 2021 को जारी एक आदेश के माध्यम से जानकारी दी गई है कि गर्मी वाले स्थानों के लिए ग्रीष्मावकाश की अवधि में बदलाव किए हैं। इसके तहत तीन मई से 20 जून, 2021 तक गर्मी वाले क्षेत्रों के केंद्रीय विद्यालयों में छुट्टियों की घोषणा की जाती है। 




आदेश के तहत, आगरा, चंडीगढ़, कोलकाता, देहरादून, दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, जम्मू, पटना, रांची, सिल्चर, तिनसुकिया, गुरुग्राम, चेन्नई, एर्णाकुलम, हैदराबाद, जबलपुर, गुवाहाटी, वाराणसी, रायपुर, भुवनेश्वर, अहमदाबाद, बेंगलुरु, मुंबई और भोपाल में ग्रीष्मावकाश तीन मई से शुरू हो जाएंगे। हालांकि, यह आदेश सर्दी वाले स्थानों, अधिक सर्दी वाले स्थान जैसे- लेह और कारिगल आदि में लागू नहीं होगा। 

केंद्रीय विद्यालय : पहली कक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली लॉटरी स्थगित

देशभर में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ रहे मामलों के बीच, केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए चल रही प्रवेश प्रक्रिया को कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण फिलहाल टाल दिया है।  


केंद्रीय विद्यालय : पहली कक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली लॉटरी स्थगित 

देशभर के केंद्रीय विद्यालयों में अप्रैल में शुरू हुई नए सत्र में प्रवेश के लिए दाखिला प्रक्रिया इसी माह पूरी की जानी थी। हालांकि, अब कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में आने के उपरांत ही यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।


 केंद्रीय विद्यालय संगठन ने दाखिला प्रक्रिया पर औपचारिक तौर पर जानकारी देते हुए कहा, देश में कोविड-19 मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। ऐसे में संगठन ने अप्रैल, 2021 में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए होने वाली लॉटरी स्थगित कर दी है। केवीएस की ओर से निर्णय किया गया है कि कोरोना संक्रमण का प्रसार कम होने और दोबारा स्कूल खुलने के बाद ही इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। 

UP Board Exam : यूपी बोर्ड के सचिव का ऑनलाइन संवाद, मूल्यांकन में नरमी बरतें, पूरी कॉपी को जरूर पढ़ें शिक्षक

UP Board Exam : यूपी बोर्ड के सचिव का ऑनलाइन संवाद,  मूल्यांकन में नरमी बरतें, पूरी कॉपी को जरूर पढ़ें शिक्षक


यूपी बोर्ड के सचिव ने प्रदेश के सभी जिलों के प्रधानाचार्यों विषय-विशेषज्ञों और डीआइओएस से संवाद में मूल्यांकन को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए। इसके साथ ही परीक्षार्थियों के हित में अभी से निर्णय लेने की बात कही है।


कानपुर  ।  कोरोना महामारी के बीच यह कोशिश होनी चाहिए कि, मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों के साथ नरमी रखें। हिंदी का विशेष ध्यान रखते हुए, अगर परीक्षार्थी ने वर्तनी की कोई गलती नहीं की तो उसे अंक दें। पिछले वर्ष हिंदी में फेल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। इसलिए इस सत्र में सावधानी के साथ मूल्यांकन करें। यूूपी बोर्ड सचिव डॉ.दिव्यकांत शुक्ला ने यह चर्चा, प्रदेश के हर जिले के प्रधानाचार्यों, विषय- विशेषज्ञों व डीआइओएस से की।


दरअसल, कुछ दिनों पहले यूपी बोर्ड परीक्षा की स्कीम जारी हो गई थी। आठ मई से परीक्षाएं शुरू होनी थीं। हालांकि अचानक से कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ा और परीक्षाएं टाल दी गईं। अब परीक्षाओं पर 20 मई के बाद फैसला होगा। अगर परीक्षाएं होंगी तो मूल्यांकन भी होगा। कोरोन महामारी की इस दूसरी लहर में मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों के हित में काफी हद तक फैसला लेने की हिदायत शिक्षकों को अभी से दी गई है।


यूपी बोर्ड सचिव के साथ मूल्यांकन को लेकर हुए ऑनलाइन संवाद में शामिल हुए चाचा नेहरू इंटर कॉलेज गोविंद नगर के प्रधानाचार्य डॉ.अनवेश सिंह ने बताया कि इस सत्र में मूल्यांकन के दौरान यह भी जानकारी दी गई, कि परीक्षार्थी की पूरी कॉपी को पढ़ना है। ऐसा न हो, कि पहले पेज पर ही भद्दा लेखन देखकर उसे शून्य अंक दे दिए जाएं। उन्होंने कहा, कि इस सत्र के मूल्यांकन में परीक्षकों को बहुत अधिक सावधानी के साथ कॉपियां जांचनी होंगी और परीक्षार्थी के प्रति नरम व्यवहार रखते हुए मूल्यांकन कार्य करना होगा।

गोरखपुर : चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित 28 शिक्षकों ने गंवाई जान, सैकड़ों परिजनों समेत बीमार, शिक्षक संगठनों ने की 50 लाख मुआवजे की मांग

गोरखपुर : चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित 28 शिक्षकों ने गंवाई जान, सैकड़ों परिजनों समेत बीमार,   शिक्षक संगठनों ने की 50 लाख मुआवजे की मांग


गोरखपुर। पंचायत चुनाव की ड्यूटी से लौटे बेसिक और माध्यमिक के 28 शिक्षकों की अलग-अलग तिथियों पर | मौत हो गई है। इस सिलसिले में शिक्षक संघों ने प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन दिया है। उनका कहना है कि 14 से 28 अप्रैल के बीच ही सभी शिक्षकों की मौत हुई है। शिक्षकों के परिजन भी संक्रमित हैं। लिहाजा, मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख का मुआवजा दिया जाना चाहिए।


गोरखपुर में पहले चरण का मतदान 15 अप्रैल को हुआ था। इससे पहले मतदान कराने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। कई बैठकें भी हुई। इसपर शिक्षक संघों ने आपत्ति की और संक्रमण की तेजी का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया स्थगित करने की मांग की लेकिन ऐसा नहीं हो सका।


प्राथमिक शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गट और चेतनारायण गुट के पदाधिकारियों का कहना है कि चुनाव ड्यूटी में लगाए गए बेसिक शिक्षा विभाग के 23 शिक्षकों की अब तक मौत हो चुकी है। तमाम शिक्षक व उनके परिजन गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। अब मतगणना में लगाने की कवायद चल रही है। इससे कई शिक्षकों का परिवार बर्बाद हो सकता है। जब तक कोरोना संक्रमण कम न हो जाए तब तक मतगणना नहीं होनी चाहिए।


जान गंवाने वाले माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक
माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ दिग्विजयनाथ पांडेय ने बताया कि भगवती कन्या इंटर कॉलेज के अमर मल्ल, श्री गांधी इंटर कॉलेज हरपुर बुधहट के रामेश्वर, एमएसआई इंटर कॉलेज के अफजाल अहमद, स्वावलंबी इंटर कॉलेज विशुनपुरा के अनिल गौतम, तुलसीदास इंटर कॉलेज के अनिल गौतम का निधन कोरोना संक्रमण की वजह से हुआ है।


परिषदीय स्कूलों के इन शिक्षकों की हुई मृत्यु
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री श्रीधर मिश्र ने बताया कि चरगांवा ब्लॉक से पुष्पा पांडेय, रविंद्र आर्य, विनय तिवारी, खोराबार ब्लॉक से श्रीनारायण धर दुबे, अंजुम फातिमा, रेखा सिंह, इशरावती उपाध्याय, जंगल कौड़िया से अनुराधा, रूखसाना, सोनिया यादव, पिपरौली ब्लॉक दिग्विजय सिंह, बिलकिस फातिमा, खजनी ब्लॉक से रिजवानुल्ला, निशा राय, विजय बहादुर, कौड़ीराम ब्लॉक से रमाशंकर यादव, बड़हलगंज ब्लॉक से विध्यवासिनी राय, राजमती देवी, ब्रह्मपुर से बृजेश त्रिपाठी, भटहट ब्लॉक से दमयंती देवी, नगर क्षेत्र से किरण सिंह, सरदारनगर ब्लॉक से जुबैदा खातून, बॉसगांव ब्लॉक से केशव प्रसाद का निधन कोरोना संक्रमण की वजह से हुआ है।

प्राथमिक शिक्षक संघ (सुशील पांडे गुट) द्वारा शिक्षकों व कार्मिकों की जीवन की सुरक्षा के मद्देनजर मतगणना स्थगित करने हेतु पत्र

प्राथमिक शिक्षक संघ (सुशील पांडे गुट) द्वारा शिक्षकों व कार्मिकों की जीवन की सुरक्षा के मद्देनजर मतगणना स्थगित करने हेतु पत्र





यूपी एजुकेशनल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी उठाई मतगणना स्थगित करने की मांग

यूपी एजुकेशनल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी उठाई मतगणना स्थगित करने की मांग



लखनऊ। यूपी एजुकेशनल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी पंचायत चुनाव की मतगणना को स्थगित करने की मांग की है। 



एसोसिएशन के अध्यक्ष कौस्तुभ कुमार सिंह ने राज्य निर्वाचन आयुक्त को इस संबंध में ज्ञापन भेजा है। इसमें कहा गया है कि जिन मतपत्रों की गिनती की जानी है, उन्हें कई लोगों ने छुआ है। इनमें कई लोग संक्रमित भी रहे होंगे। इससे मतगणना में लगे कर्मियों के संक्रमित होने की आशंका है। 


मतगणना रोकने का फैसला ले राज्य निर्वाचन आयोग, शिक्षक महासंघ ने ज्ञापन देकर कहा बहिष्कार के लिए न करें विवश

मतगणना रोकने का फैसला ले राज्य निर्वाचन आयोग, शिक्षक महासंघ ने ज्ञापन देकर कहा बहिष्कार के लिए न करें विवश

उत्तर प्रदेश के 550 से ज्यादा शिक्षकों की जिंदगी निगल गया कोरोना, शिक्षक महासंघ का दावा


प्रयागराज । पंचायत चुनाव की ड्यूटी से लौटने के बाद कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक पूरे प्रदेश में 550 शिक्षकों की मौत हो चुकी है। यह दावा करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ ने प्रदेश सरकार से पंचायत चुनाव की मतगणना स्थगित कराने की मांग की है। 

शिक्षक महासंघ का दावा है कि कोरोना की वजह से उन जिलों में अधिक शिक्षकों की मौत हुई है, जहां पंचायत चुनाव हो चुका है। पहले चरण में चुनाव वाले प्रयागराज जिले में 28 प्राथमिक शिक्षक एवं 10 माध्यमिक शिक्षकों की मौत हुई । उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि मौत के मुंह में समाने वाले अधिकतर शिक्षक चुनाव ड्यूटी के बाद संक्रमित हुए हैं। जान गंवाने वाले अधिकतर शिक्षक पंचायत चुनाव में मतदान और उससे पहले हुए प्रशिक्षण के बाद बीमार पड़े. जिन्हें इलाज नहीं मिल सका।


लखनऊ। उप्र शिक्षक महासंघ और उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए 2 मई को होने वाली पंचायत चुनाव की मतगणना स्थगित करने की मांग की है।


एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी, विधान परिषद में नेता शिक्षक दल सुरेश कुमार त्रिपाठी और प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा समेत कई नेताओं ने निर्वाचन आयोग को इस संबंध में ज्ञापन भेजा है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में अब तक 577 शिक्षकों व कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है। वहीं, मतदान कराकर लौटे कई कर्मचारी व शिक्षक संक्रमण से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक व कर्मचारियों के प्रति इस प्रकार की संवेदनहीनता शिक्षक व कर्मचारियों को मतगणना कार्य के बहिष्कार के लिए विवश कर रही है। ज्ञापन में शिक्षक महासंघ के संयोजक हेम सिंह पुंडीर के हस्ताक्षर भी हैं।


मतगणना के बाबत कोई भी निर्णय लेने के लिए निर्वाचन आयोग ही अधिकृत है। वह जो भी फैसला लेगा, उसका हम पालन करेंगे। - राजेंद्र कुमार तिवारी, मुख्य सचिव

Wednesday, April 28, 2021

ऐलान : आयोग करे स्थगित अन्यथा करेंगे मतगणना का बहिष्कार, हजारों शिक्षक अब तक संक्रमित


ऐलान : आयोग करे स्थगित अन्यथा करेंगे मतगणना का बहिष्कार, हजारों शिक्षक अब तक संक्रमित


◆ चुनाव ड्यूटी कर चुके हजारों शिक्षक हो चुके हैं संक्रमित

◆ मृतक शिक्षकों के परिवारों के लिए 50-50 लाख मुआवजा मांगा

लखनऊ । शिक्षकों ने कोरोना संक्रमण के बीच पंचायत चुनाव की मतगणना का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है। शिक्षकों का कहना है कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी कर चुके हजारों शिक्षक संक्रमित हो चुके हैं और लगभग हर जिले से 10 से 15 शिक्षकों की मौत की सूचना है। 


विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा है कि चुनाव आयोग मतणना स्थगित करें, अन्यथा शिक्षक इसका बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि इस चुनाव की वजह से संक्रमण गांवों तक पहुंच गया है। सैकड़ों शिक्षकों की मतदान के दौरान ड्यूटी लगी और वे वहां से संक्रमित होकर लौटे सैकड़ों की शिक्षकों की मौत हो चुकी है। शिक्षकों के परिवारों में भय का माहौल है। 


वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने भी मतगणना स्थगित करने की मांग करते हुए कहा है कि मृतक शिक्षकों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कहा है कि अपने साथियों की मौत और संक्रमण के फैलाव को देखते हुए शिक्षक अब मतगणना की ड्यूटी करने से डर रहे हैं

CBSE और CISCE ने 11वीं में एडमिशन के लिए छात्रों से मांगा विषय का विकल्प, मई से शुरू होंगी क्लासेस

CBSE और CISCE ने 11वीं में एडमिशन के लिए छात्रों से मांगा विषय का विकल्प, मई से शुरू होंगी क्लासेस


प्रयागराज : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल एग्जामिनेशन्स (सीआईएससीई) की ओर से 10वीं की बोर्ड परीक्षा निरस्त करने और बच्चों को प्रमोट करने के निर्णय के बाद स्कूलों ने 11वीं में प्रवेश की तैयारी शुरू कर दी है। स्कूलों ने बच्चों को 11वीं में विषय चुनने के लिए ऑनलाइन फॉर्म भेजा है और विषय आवंटन के बाद मई के पहले सप्ताह में कक्षाएं शुरू की जाएंगी।


महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रिंसिपल सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि विषय चुनने के लिए फॉर्म बच्चों को ऑनलाइन दे चुके हैं। एक-दो दिन में विषय दे दिए जाएंगे और एक मई से क्लास शुरू होगी। हालांकि दूसरे स्कूल से आने वाले बच्चों को रिजल्ट आने के बाद विषय आवंटन होगा। उन्हें एक्स्ट्रा क्लास और ब्रिज कोर्स से छूटा कोर्स पूरा कराएंगे।


इसी प्रकार सेंट जोसेफ कॉलेज के 10वीं के छात्र छात्राओं को भी ऑनलाइन फॉर्म दे दिए गए हैं। प्रिंसिपल फादर थॉमस कुमार का कहना है कि 10वीं के प्री बोर्ड सही से नहीं हो सके थे। इसलिए कक्षा 9 की परफार्मेंस के आधार पर विषय का आवंटन होगा। 3 मई से ऑनलाइन क्लास शुरू करने की तैयारी है। 

एडेड स्कूलों में पढ़ाई से लेकर शिक्षकों की भर्ती तक सरकार के हवाले

एडेड स्कूलों में पढ़ाई से लेकर शिक्षकों की भर्ती तक सरकार के हवाले


अब एडेड स्कूलों में भी पढ़ाई से लेकर शिक्षकों तक की गुणवत्ता पर सरकार शिकंजा कसेगी। राज्य सरकार पहली बार एडेड जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। वहीं यहां पर मिशन प्रेरणा के साथ मानव संपदा पोर्टल भी अनिवार्य कर दिया गया है। इन स्कूलों में सरकारी स्कूलों वाला शैक्षणिक कैलेण्डर लागू होगा।


मिशन प्रेरणा के तहत यहां के लर्निंग गोल भी वहीं होंगे जो सरकार ने तय किए हैं। वहीं यहां भी विद्यार्थियों के सीखने के लिए वे सभी मॉड्यूल लागू होंगे जो सरकारी स्कूलों में चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही यहां के विद्यार्थियों की आधार सीडिंग का काम भी शुरू हो गया है। अभी तक सरकार इन स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन देती है, साथ ही निःशुल्क यूनिफार्म, पाठ्य पुस्तकें व मिड डे मील की व्यवस्था सरकारी स्कूलों की तर्ज पर की जाती है। सरकार ने तय किया है कि जब ये स्कूल सरकारी सहायता से चलते हैं तो यहां भी पढ़ाई की गुणवत्ता पर सरकार नजर रखेगी।


प्रदेश में लगभग आठ हजार एडेड स्कूल हैं जिनमें जूनियर हाईस्कूल, प्राइमरी व माध्यमिक के वे स्कूल शामिल हैं जहां कक्षा एक से आठ तक की कक्षाएं चलाई जाती हैं।

मतगणना प्रशिक्षण का बॉयकॉट करने का आह्वान, कई असमय मौतों से कर्मचारियों में भय का माहौल

मतगणना  प्रशिक्षण का बॉयकॉट करने का आह्वान, कई असमय मौतों से कर्मचारियों में भय का माहौल


लखीमपुर खीरी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मतगणना ड्यूटी में लगाए गए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिए जाने का बहिष्कार करने का एलान किया है और मतगणना को स्थगित करने की मांग करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन भेजा है। इसके साथ ही अटेवा संघ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी मतगणना स्थगित करने की मांग संबंधी ज्ञापन डीएम को दिए हैं।


राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ के प्रदेश संयुक्त महामंत्री व जिलाध्यक्ष संतोष मौर्य ने कहा है कि पंचायत चुनाव में हमने अपने कई साथियों को खो दिया है, जो निर्दोष थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि कार्यकारिणी ने यह निर्णय लिया है कि कोई भी शिक्षक साथी दो मई को होने वाली मतगणना और उसके पूर्व प्रशिक्षण में प्रतिभाग नहीं करेगा।


उधर, अटेवा पेंशन बचाओ मंच के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित ज्ञापन एडीएम अरुण कुमार सिंह को सौंपा है। उन्होंने दिवगंत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के परिजन को 50-50 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल मुहैया कराने एवं संक्रमित कर्मियों के इलाज का पूरा खर्च सरकार से देने की मांग की है। अटेवा मंच ने सरकार से मांग की है कि पंचायत चुनाव की मतगणना को स्थगित कर दिया जाए, क्योंकि मद्रास हाईकोर्ट ने भी माना है कि करोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है।


राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पुष्कर और जिला मंत्री अजय कुमार पाठक के नेतृत्व में कर्मचारियों ने डीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।

कोरोना से हुई मौतों को देखते हुए मतगणना स्थगित करने की कर्मचारी संगठनों की मांग

कोरोना से हुई मौतों को देखते हुए मतगणना स्थगित करने की कर्मचारी संगठनों की मांग



लखनऊ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों की कोरोना से हुई मौत को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने मतगणना स्थगित करने की मांग की है। शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसे में इसे टालना चाहिए। मतगणना में संक्रमण की आशंका ज्यादा हैं।


खंड शिक्षा अधिकारी संघ के महासचिव वीरेंद्र कुमार कनौजिया ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है कि मतगणना में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना संभव नहीं होगा। इसके पहले चुनाव ड्यूटी में ही कई खंड शिक्षा अधिकारी संक्रमित हुए और कुछ की मौत भी हो गई है। ऐसे में मतगणना तत्काल स्थगित कर दी जानी चाहिए। उन्होंने मृत खंड शिक्षा अधिकारियों के परिवारीजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और मृतक आश्रित को नौकरी देने की मांग की। 


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय सिंह व राजकीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी बमतगणना टालने की मांग की है। 


राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि पूरे चुनाव भर सरकार से मांग की जाती रही कि वे कर्मचारियों को समुचित किट उपलब्ध करवाकर ड्यूटी करवाएं। लेकिन सरकार ने नहीं सुना। लिहाजा मतगणना टाल देनी चाहिए। ग्राम पंचायतीराज सफाई कर्मचारी संगठन समेत कई अन्य संगठनों ने भी मतगणना टालने की मांग की है।

Tuesday, April 27, 2021

कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी संघ ने की मतगणना स्थगित किए जाने की मांग

  कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी संघ ने की मतगणना स्थगित किए जाने की मांग


मद्रास हाई कोर्ट ने कहा- कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार, क्यों दर्ज न हो हत्या का केस

  

मद्रास हाई कोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि अगर दो मई को आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार नहीं किया तो मतगणना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी.

हाई कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अधिकारियों को ऐसी बातें याद दिलानी पड़ती है. जब कोई व्यक्ति जीवित बचेगा तभी तो लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेगा.



चेन्नईदेश में जानलेवा कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है. इस बीच मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है. हाई कोर्ट ने कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग के अधिकारी जिम्मेदार हैं. ऐसे में क्यों ना चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोपों पर मुकदमा दर्ज किया जाए
मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी ने सख्त रुख अपनाने हुए कहा कि चुनाव आयोग ही कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है. साथ ही मद्रास हाई कोर्ट ने चेतावनी भी दी है कि अगर दो मई को आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार नहीं किया तो मतगणना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी
कोरोना के ताजा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी और सेंथिल रामामूर्ति की बेंच ने कहा कि संवैधानिक अधिकारियों को ऐसी बातें याद दिलानी पड़ती है. जब कोई व्यक्ति जीवित बचेगा तभी तो लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेगा. हाई कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि आप उस वक्त कहा थे, जब बड़ी बड़ी रैलियां हो रही थीं.

AIADMK के विधायक ने दायर किया था केस


दरअसल तमिलनाडु कैबिनेट में मंत्री और करूर से AIADMK के विधायक एमआर विजय भास्कर ने हाई कोर्ट में केस दायर किया है. विजय भास्कर की ओर से कहा गया था कि करूर में 77 प्रत्याशियों की वोट्स काउंटिंग के लिए केवल 2 काउंटिंग रूम बनाए गए हैं. कोरोना काम में काउंटिंग के लिए स्पेस नहीं दिया गया.

कोविड- 19 मरीजों के इलाज में लगे कर्मचारी की मृत्यु पर आश्रितों को मिलेंगे 50 लाख, केंद्र ने जारी किया शासनादेश

पीड़ित परिवार द्वारा विभाग के माध्यम से क्लेम करना होगा, राजनाथ सिंह ने भी की पुष्टि

लखनऊ । इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्रा एवं महामंत्री प्रेमचंद्र ने बताया कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में लगे कर्मचारी की मौत होने पर उसके आश्रितों को 50 लाख रुपये की राशि का भुगतान करने का केंद्र ने शासनादेश जारी कर दिया गया है। संबंधित परिवार द्वारा विभाग के माध्यम से क्लेम करने पर तत्काल भुगतान कर दिया जाएगा। इस बाबत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी यह पुष्टि की है।

इप्सेफ पदाधिकारियों ने देश के सभी मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि शासनादेश के अनुसार मृतक आश्रितों को इस राशि के भुगतान करने की तत्काल व्यवस्था करें। वीपी मिश्रा ने कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों से भी कहा है कि हुई वर्चुअल बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार वे भी ऐसे परिवार को भुगतान कराने में सहयोग करें। यदि कहीं कोई कठिनाई हो तो अवगत कराएं।

राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने यूपी के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मांग की है कि प्रदेश में कोविड-19 महामारी के इलाज में लगे कोरोना वायरस के कारण मृत कर्मचारियों के आश्रितों को तत्काल 50 लाख रुपये का भुगतान कराने की व्यवस्था करें।


कोरोना से 160 शिक्षक ने तोड़ा दम, शिक्षक संगठनों ने आंकड़े पेश कर पंचायत चुनाव के कारण संक्रमण बढ़ने का किया दावा

 अब तक कोरोना से 160 शिक्षक ने तोड़ा दम, इन जिलों में हुई शिक्षकों की कोरोना से मौत

कोरोना संक्रमण के दूसरे चरण में कफी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। रोजाना 35 से 36 हजार के करीब संक्रमण के नये केस मिल रहे हैं, प्रतिदिन का मौत का आकड़ा 250 पहुंच गया है।

इसी बीच बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर स्कूल भले ही बंद चल रहे हैं, लेकिन इनमें पढ़ाने वाले काफी शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में लगाया गया है, वहीं लखनऊ समेत सभी जिलो में 16 हजार के करीब शिक्षकों को कोरोना ड्यूटी में लगाया गया है। कोरोना से बचाव के लिए शिक्षकों को कोई सरकारी सुविधा भी नहीं है। लखनऊ समेत अलग-अलग जिलो में करीब 160 शिक्षक कोरोना काल के गाल में समा चुके हैं, इन शिक्षकों के मृतक आश्रितों को क्या लाभ मिलेगा इस स्थिति अभी साफ नहीं दूसरी ओर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मौत हुई है, अलग-अलग जिलो में तैनात 5 खंड शिक्षा भी संक्रमण के चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं।


पंचायत चुनाव के चौथे चरण में भी बढ़ेगा संक्रमण का दायरा
वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का दावा है कि कोरोना का दायरा अभी तक हुए पंचायत चुनाव के बाद बढ़ा है, तीसरे चरण का चुनाव हो चुका है, जबकि चौथे चरण का चुनाव 28 तारीख को होने जा रहा है, इसके बाद लगातार कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ेगा। इस संबंध राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और उ प्र. प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन की ओर से चुनाव आयोग दिल्ली से लेकर राष्ट्रपति व राज्यपाल तक पत्र भी लिखे जा चुके हैं, उसके बाद भी काई हल नहीं " निकला।


इन जिलों में हुई शिक्षकों की कोरोना से मौत

लखनऊ में 19 शिक्षक, जौनपुर में 5, सोनभद्र में 6, कुशीनगर में 5, बुलंदशहर में 5, देवरिया में 5, गोरखपुर में 4, हाथरस में 6, हरदोई में 10, लखीमपुर में 10, सीतापुर में 8, प्रतापगढ़ में 7, गजियाबाद में 6, महराजगंज में 6, मथुरा में 5, शाहजहां पुर में 8, उन्नाव में 4, गोंडा में 6, बहराइच में 4, श्रावस्ती में 3, बलरामपुर में 4 शिक्षकों की मौत हुई हैं। ये वह आकड़े हैं जो शिक्षक संगठनों की ओर से दिए गये हैं, इसमें शिक्षकों का संगठनों का कहना है कि अभी काफी संख्या में और भी आकड़े हैं जो एकत्र किए जा रहे हैं।



संक्रमण की चपेट में निदेशालय
बेसिक शिक्षा निदेशालय का शिविर कार्यालय निशातगंज भी कोरोना की चपेट में हैं, यहां एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना की चपेट में अभी लगभग पूरा स्टाफ आ चुका है। कुछ अधिकारी घर से भी अपना काम कर रहे हैं।

कोरोना काल में चुनाव नहीं होने चाहिए। " थे। उसके बाद भी जिन शिक्षकों व खंड शिक्षा अधिकारियों की मौत हुई है, उनको सरकार कोरोना वारियर्स माने और 50 लाख रुपये का मुवाअजा देते हुए मृतक आश्रित में नौकरी दे 
विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष उ.प्र. प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

चुनाव के चलते कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ा है, इसमें काफी संख्या में शिक्षक शिकार हुए हैं, मृतक शिक्षकों के आश्रितों को जल्द से जल्द लाभ दिया जाना चाहिए, सरकार इनको कोरोना वारियर्स भी माने और मृतक आश्रित में नौकरी भी दी जानी चाहिए।
 महेश मिश्रा, मंडलीय अध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक संघ, स्नातक एसोसिएशन

प्रतापगढ़ : कोरोना संक्रमण से जिले के 12 शिक्षक हो चुके मृतक, बीएसए कार्यालय में आयोजित की गई शोक सभा

  



प्रतापगढ़ : कोरोना की दूसरी लहर ने जिले में कोहराम मचा रखा है। इलाज में थोड़ी सी चूक से लोगों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है। जिले में अब तक 90 से अधिक लोग जान गवां चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के 13 शिक्षकों की भी संक्रमण की चपेट में आने से मौत हो गई।

जिले में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। हर दिन संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में अब तक सक्रिय मरीजों की संख्या 2561 के पार पहुंच चुकी है। इलाज में लापरवाही बरतने पर लोगों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
जिले में अब तक मौतों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है। गौर करने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के मुताबिक है।

मौत के वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हैं। संक्रमण की चपेट में आने से बेसिक शिक्षा विभाग के 13 शिक्षकों की भी मौत हो गई। इनमें पंकज पांडेय, गोविंद प्रसाद श्रीवास्तव, डा. रश्मि सिंह, बद्री नारायण, अयाजुद्दीन, जगतपाल यादव, अभिषेक श्रीवास्तव, रंजीत कुमार, प्रियंका सिंह, प्रदीप कुमार तिवारी, धर्मा देवी, ज्ञानेश त्रिपाठी और अवनीश तिवारी शामिल हैं। इसके अलावा एक अनुचर सुरेश गौड़ की भी मौत हुई है। इससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

बीएसए कार्यालय में आयोजित हुई शोक सभा

प्रतापगढ़। बीएसए कार्यालय में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को शोकसभा आयोजित हुई। जिसमें कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले शिक्षकों को श्रद्धांजलि दी गई। कर्मचारियों एवं शिक्षकों ने मृत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि ईश्वर परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 

पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने वाले 135 शिक्षक, शिक्षा मित्र व अनुदेशकों की मृत्यु, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमंत्री से पंचायत चुनाव स्थगित करने व परिजनों को सहायता की मांग की

  

लखनऊ। प्रदेश में पंचायत चुनाव से संबंधित ड्यूटी करने वाले 135 शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की मृत्यु हो गई है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमंत्री से पंचायत चुनाव तत्काल स्थगित कर संक्रमितों का निशुल्क इलाज व मृतकों के परिजनों को 50 लाख की सहायता व अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है।

महासभा के प्रवक्ता वीरेंद्र मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा है कि कोविड 19 की भयंकर महामारी के बीच प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही हैं। पंचायत चुनाव से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक व सुरक्षाकर्मी प्रतिदिन संक्रमित हो रहे हैं और अनगिनत मौतों के साथ जनमानस सहमा हुआ है। उन्होंने कहा है कि जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है उनके परिवारों में बेचैनी है। वर्तमान हालात को देखते हुए कोई भी चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहता है। चुनाव में प्रथम चरण के प्रशिक्षण से लेकर तीसरे चरण के मतदान तक हजारों शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। जहां-जहां चुनाव हो चुके हैं चुके चुके वहां कोविड संक्रमण कई गुना बढ़ गया है।

मिश्र ने मुख्यमंत्री को बताया है कि चुनाव प्रशिक्षण व ड्यूटी के बाद अब तक हरदोई व लखीमपुर में 10-10, बुलंदशहर, हाथरस, सीतापुर, शाहजहांपुर में 8-8,भदोही, लखनऊ व प्रतापगढ़ में 7-7, सोनभद्र, गाजियाबाद व गोंडा में 6-6, कुशीनगर, जौनपुर, देवरिया, महाराजगंज व मथुरा में 5-5, गोरखपुर, ब बहराइच, उन्नाव व बलरामपुर में 4-4 तथा श्रावस्ती में तीन शिक्षक, शिक्षा मित्र या अनुदेशक की आकस्मिक मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा है कि महासंघ ने चुनाव से पूर्व शिक्षकों के टीकाकरण की मांग की थी। गृह मंत्रालय ने पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में पोलिंग पार्टियों का टीकाकरण करने की अनुमति दे दी थी। इस आदेश के आधार पर प्रदेश में भी पंचायत चुनाव की पोलिंग पार्टियों का टीकाकरण किया जा सकता था। लेकिन महासंघ की मांग पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।

महासंघ ने पत्र पर कार्यवाही के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी व प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार को भी भेजा है।



परिषदीय स्कूलों में अब अभिभावकों को स्कूल बुलाकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में होगी चर्चा

परिषदीय स्कूलों में अब अभिभावकों को स्कूल बुलाकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में होगी चर्चा


गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में अब अभिभावकों की कक्षाएं लगेंगी। उन्हें स्कूल में बुलाकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में अध्यापक चर्चा करेंगे। अभ्यास कार्य की जांच करने के साथ ही बच्चों लिए गृहकार्य भी दिए जाएंगे। इसके साथ ही रोजाना संबंधित विषय के अध्यापक पांच-पांच विद्यार्थियों से फोन पर बातचीत कर उनकी पढ़ाई का हाल जानेंगे।




कोरोना महामारी के बीच नए सत्र की शुरुआत के साथ ही सरकार ने एहतियात के तौर पर परिषदीय स्कूलों में अध्यापन कार्य को मई तक स्थगित कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई एक बार फिर प्रभावित न हो, इस संबंध में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की जाएंगी। कोरोना की पहली लहर के दौरान भी विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कराई थी। इसके सफल परिणाम भी दिखे थे। इसबार शिक्षक बच्चों के बजाय अभिभावकों को स्कूल बुलाएंगे। 


इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश गोरखपुर के बेसिक शिक्षा विभाग में पहुंचा है। कोविड की दूसरी लहर
की वजह से विद्यालयों में पठन- पाठन प्रभावित हो गया है। स्कूल बंद होने के कारण इस बार शत-प्रतिशत बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। प्राइमरी स्कूलों में फिर से ई-पाठशाला शुरू की जाएगी। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सभी स्कूलों के शिक्षकों को भी स्कूल आने के निर्देश दिए गए हैं। 


प्रत्येक शिक्षक हर दिन अपनी कक्षा के कम से कम दो बच्चों के अभिभावकों को स्कूल में बुलाकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में चर्चा करेंगे। बच्चों के अभ्यास कार्य की जांच भी करेंगे तथा बच्चों को गृहकार्य देंगे।


व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर होगी शैक्षणिक सामग्री
महानिदेशक स्कूली शिक्षा के पत्र के मुताबिक शिक्षक, शिक्षा मित्र एवं अनुदेशकों को कक्षावार, विषय वार शैक्षणिक सामग्री एवं कंटेंट अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर करना होगा शिक्षक अभिभावकों से बच्चों के घर पर चल रही पढ़ाई के बारे में स्थिति जानेंगे और समीक्षा भी करेंगे। उनको पढ़ाई से संबंधित समस्याओं का समाधान भी शिक्षक करेंगे। अभिभावकों को विषय संबंधित पाठों के बारे में भी शिक्षक समझाएंगे।


दूरदर्शन भी बनेगा माध्यम
प्रत्येक कक्षा और विषय के लिए मासिक पंचांग के अनुसार शैक्षणिक सामग्री साझा की जाएगी। कंटेंट अभिभावकों के व्हाट्सएप पर शेयर किए जाएंगे। दूरदर्शन पर प्रसारित ई-कंटेंट को देखने के लिए बच्चों को प्रेरित किया जाएगा। शिक्षक प्रतिदिन बच्चों की शिक्षा को लेकर की गई गतिविधियों को एक डायरी में भी दर्ज करेंगे।


कोविड महामारी के चलते बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा सकता है। इसलिए अभिभावकों को अनुरोध कर स्कूल पर बुलाकर बच्चों की पढ़ाई से जुड़े कार्य प्रदान किए जाएंगे। वहीं कॉपियों की जांच भी की जाएगी। इसके साथ ही पांच- पांच बच्चों से रोजाना बात कर पढ़ाई की प्रगति पूछी जाएगी और काम दिया जाएगा। इसका निर्देश मिला है, पालन कराया जाएगा। -बीएन सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

बहराइच : शिक्षक संगठन का बड़ा आरोप, चुनाव प्रशिक्षण में लापरवाही के कारण कार्मिक हुए कोरोना संक्रमित

बहराइच : शिक्षक संगठन का बड़ा आरोप, चुनाव प्रशिक्षण में लापरवाही के कारण कार्मिक हुए कोरोना संक्रमित।



बहराइच। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कार्मिकों के प्रशिक्षण के दौरान जिला प्रशासन की ओर से लापरवाही बरतने व उसके कारण शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने का गंभीर आरोप लगाया है।

शिक्षक संघ की ओर से डीएम को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रशिक्षण के दौरान 4-4 शिक्षकों को 6 फुट की एक ही बेंच पर बिठाया गया । इसके साथ ही इसके पीछे लगी बेंच को को भी बस 1 फुट की दूरी पर रखा गया । 


यही नहीं प्रशिक्षण की निगरानी आला अधिकारी करते रहे, लेकिन किसी ने भी सोशल डिस्टेंसिंग के पालन पर ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते कई जिले के सैकड़ों शिक्षक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यही नहीं कई ऐसे शिक्षक भी है ।

Monday, April 26, 2021

अब परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की बजाए अभिभावक जाएंगे स्कूल, मिशन प्रेरणा की ई पाठशाला का तीसरा चरण शुरू

अब परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की बजाए अभिभावक जाएंगे स्कूल, मिशन प्रेरणा की ई पाठशाला का तीसरा चरण शुरू


नए शिक्षा सत्र लागू होते ही स्कूली बच्चों की पढ़ाई कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण की वजह से प्रभावित हो गई। मई माह तक सभी विद्यालयों में शिक्षण कार्य ठप कर दिया गया है। बीते वर्ष की भांति फिर से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों के बच्चों की फिर से ऑनलाइन कक्षा शुरू कराने जा रहा है। इस संबंध में महानदेशक स्कूल शिक्षा ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि शिक्षक बच्चों के बजाय अभिभावकों को स्कूल बुलाएं और 5 बच्चों से प्रतिदिन मोबाइल पर बात करें।


देशभर में कोविड-19 का संक्रमण बढ़ गया है। जिस कारण विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। स्कूल बंद होने के कारण इस बार शत-प्रतिशत बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। प्राइमरी स्कूलों में फिर से ई-पाठशाला शुरू की जाएगी। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सभी स्कूलों के शिक्षकों को भी स्कूल आने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्एक शिक्षक हर दिन अपनी कक्षा के कम से कम 2 बच्चों के अभिभावकों को स्कूल में बुलाकर बच्चों की पढ़ाई के बारे में चर्चा करेंगे। बच्चों के अभ्यास कार्य की जांच भी करेंगे तथा बच्चों को गृह कार्य भी देंगे।


इस संबंध में महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि शिक्षक, शिक्षा मित्र एवं अनुदेशकों को कक्षावार, विषय वार शैक्षिक सामग्री एवं कंटेंट अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर किया जाएगा। शिक्षक अभिभावकों से बच्चों के घर पर चल रही पढ़ाई के बारे में हाल जानेंगे और समीक्षा भी करेंगे। उनकी पढ़ाई से संबंधित समस्याओं का समाधान भी शिक्षक करेंगे। अभिभावकों को विषय संबंधित पाठों के बारे में भी शिक्षक समझाएंगे।


दूरदर्शन भी बनेगा फिर से माध्यम
प्रत्एक कक्षा और विषय के लिए मासिक पंचांग के अनुसार शैक्षणिक सामग्री साझा की जाएगी। कंटेंट अभिभावकों के व्हाट्सएप पर शेयर किए जाएंगे। दूरदर्शन पर प्रसारित ई-कंटेंट को देखने के लिए बच्चों को प्रेरित किया जाएगा। शिक्षक प्रतिदिन बच्चों की शिक्षा को लेकर की गई गतिविधियों को एक डायरी में भी दर्ज करेंगे।


शिक्षक करेंगे 5 बच्चों से बात
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि महानिदेशक द्वारा दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। शिक्षकों को प्रतिदिन 5-5 बच्चों से फोन पर बात करनी होगी। घर पर चल रही पढ़ाई की समीक्षा की जाएगी। उनकी पढ़ाई से संबंधित समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। इससे सभी बच्चे अपने शिक्षकों के संपर्क में भी रहेंगे।


मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला का तीसरा चरण शुरू किया गया
कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण पठन-पाठन की स्थिति बाधित होने के कारण मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला का तीसरा चरण शुरू किया गया है। इसके लिए शत प्रतिशत बच्चों तक पहुंच बनाने एवं उन्हें लर्निंग आउटकम पर शिक्षक देने के निर्देश जारी किए गए हैं।


कार्यवाहक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को ऑनलाइन शिक्षा दिए जाने की व्यवस्था करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षकों को पहले से बने व्हाट्सएप ग्रुप से बच्चों एवं अभिभावकों को जोड़कर ऑनलाइन क्लासेस एवं गूगल मीट आदि के बारे में जानकारी देने के भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। 


चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों के परिवार को 50 लाख की सहायता की मांग

चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों के परिवार को 50 लाख की सहायता की मांग


लखनऊ। यूपी प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने प्रदेश सरकार से चुनाव प्रशिक्षण व ड्यूटी के बाद मृतक शिक्षा मित्रों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है। साथ ही पंचायत चुनाव तत्काल स्थगित करने का आग्रह किया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल व सदस्य प्रदेश कार्यसमिति अवधेश मणि मिश्र ने संयुक्त रूप से बताया है कि त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन के दो चरण के चुनाव के बाद सैकड़ों शिक्षा मित्र साथी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। दर्जनों की जान चली गई है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि चुनाव के दौरान कोविड 19 के गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। इसका खामियाजा चुनाव में लगे शिक्षकों, शिक्षा मित्रों व अन्य कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। 


चुनाव प्रशिक्षण से चुनाव संपन्न होने तक हर जिले में सैकड़ों शिक्षामित्र कोविड 19 से संक्रमित हुए हैं। संघ पदाधिकारियों ने सरकार से मृतक शिक्षकों शिक्षा मित्रों व कर्मचारियों के परिवार को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहयोग देने की मांग की है।

कोरोना प्रभाव : बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को डिजिटल कंटेंट पहुंचाएगा बेसिक शिक्षा विभाग

कोरोना प्रभाव : बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को डिजिटल कंटेंट पहुंचाएगा बेसिक शिक्षा विभाग


आजमगढ़। सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को डिजिटल कंटेंट पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वर्ग, विषय और चैप्टर के आधार पर हर दिन का कंटेंट तैयार किया जा रहा है। शुरुआत में व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों तक डिजिटल कंटेंट पहुंचाया जाएगा।


व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बच्चों या फिर उनके अभिभावकों के पास कंटेंट भेजे जाएंगे, जिससे बच्चे अभ्यास कर सकेंगे। बच्चों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से भी गणित समेत अन्य विषयों की जानकारी दी जाएगी। सरकार ने 2020 में अप्रैल के पहले सप्ताह से ही डिजिटल कंटेंट बच्चों को उपलब्ध कराना शुरू किया था। 30 फ़ीसदी बच्चों तक ही डिजिटल कंटेंट पहुंच पा रहे थे। चार लाख बच्चों तक डिजिटल कंटेंट नियमित पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि बहुतायत ऐसे बच्चे रहे जिनके पास मोबाइल तक नहीं थे।


उन्हें ऑफलाइन या फिर दूसरे माध्यम से पढ़ाने की भी तैयारी की जा रही है। डिजिटल कंटेंट के साथ-साथ सभी बच्चों के हाथों में पाठ्य पुस्तकें हो इसके लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। जल्द से जल्द सभी बच्चों को किताबें मिल सके इसके लिए स्कूलों तक किताब पहुंचाने की गाइडलाइन भेजी गई थी। स्कूल के शिक्षक और क्लास वार बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया जा रहा है।


विद्यालय बंद है। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा। व्हाट्सएप ग्रुप पर बच्चों को कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि वह घर पर रहकर पढ़ाई कर सके। साथ ही अन्य संसाधनों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जाएगी। - अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।

ऑनलाइन ई कंटेंट बनाएंगे तभी गुरुजी पुरस्कार पाएंगे

ऑनलाइन ई कंटेंट बनाएंगे तभी गुरुजी पुरस्कार पाएंगे




वाराणसी। राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। आवेदन में यह देखा जाएगा कि ई मटेरियल का शिक्षक ने कितना उपयोग किया है। आईसीटी आधारित अभिनव प्रयोग में वीडियो आदि से शिक्षण सामग्री बनाने में कितनी मदद ली गई। 


राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ऐसे शिक्षकों को प्रोत्साहन दे रही है जो आईसीटी यानी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का अधिकाधिक प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों को पुरस्कार के लिए आवेदन 31 मई तक प्रेरणा पोर्टल के माध्यम से करना होगा।


 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू हो चुके है, जिन शिक्षकों ने ज्यादा से ज्यादा ई कंटेंट का उपयोग किया होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

Sunday, April 25, 2021

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक

ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक 

अभिभावकों ने कहा, स्कूल ट्यूशन फीस की जगह एनुअल चार्ज जोड़कर वसूल रहे कंपोजिट फीस


प्रयागराज : कोरोना संकट के बीच खुले स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल वाले ऑफलाइन क्लास के - दौर में भी अभिभावकों से एनुअल - चार्ज वसूल रहे हैं। इसमें कंप्यूटर क्लास स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोट्र्स, लैब सहित डेवलपमेंट चार्ज सहित कई दूसरे चार्ज को जोड़कर वसूला जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों ने फीस का ब्रेकअप खत्म करके सीधे वार्षिक एवं तिमाही फीस तय कर दी है। स्कूल वालों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों में जिला विद्यालय निरीक्षक तक अपनी बात | पहुंचाई है लेकिन उनके यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


निजी स्कूलों की ओर से मनमाना फीस वसूली के खिलाफ जब अभिभावकों ने आवाज उठाई तो स्कूलों ने ट्यूशन फीस सहित पूरी फीस को एक में मिलाकर कंपोजिट फीस के नाम वसूलना शुरू कर दिया। बीते शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की ओर से जब ऑनलाइन क्लास के दौर में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे शुल्क वसूलने का विरोध शुरू हुआ तो इससे बचाव के लिए अधिकतर स्कूलों ने एनुअल चार्ज को 'कंपोजिट फीस में शामिल कर दिया मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के साथ ही अभिभावकों पर एनुअल चार्ज भी थोप दिए गए हैं। 


एनुअल चार्ज को कंपोजिट फीस में शामिल करते हुए एक महीने की बजाय तीन महीने की फीस वसूली जा रही है। इस बारे में जब जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अब दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद तीन महीने की जगह एक महीने की फीस वसूले जाने के बारे में आदेश जारी किया जाएगा।



अभिभावकों ने उठाई आवाज, कोरोना संक्रमण काल में बंद हों ऑनलाइन कक्षाएं

प्रयागराज पूरे देश में कोरोना संक्रमण की मार के बीच स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिए गए हैं। अभिभावकों को ऑनलाइन क्लास से बच्चों को जोड़ने के साथ तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से ऑनलाइन क्लास पर रोक लगाने के साथ ही फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।

शिक्षक सीखेंगे डिजिटल तकनीक, सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से करेगा प्रशिक्षित

Teachers CBSE  IBM digital
शिक्षक सीखेंगे डिजिटल तकनीक, सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से करेगा प्रशिक्षित

देशभर से 200 कंप्यूटर साइंस शिक्षक, आईटी शिक्षक व एआई पढ़ाने वाले किए जाएंगे प्रशिक्षित


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने डिजिटल तकनीक के महत्व को समझते हुए शिक्षकों को ट्रेंड करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से देशभर के 200 कंप्यूटर साइंस, आईटी व एआई(आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस) पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित करने जा रहा है। द ग्लोबल टीचर्स अकादमी फॉर डिजिटल टेक्नॉलाजी सीबीएसई की एक पहल है। इसका उदेश्य एआई शिक्षकों व मेंटर का एक ऐसा समूह बनाना है जो कि स्कूलों में एआई शिक्षा को बढ़ा सकते हैं। 



बोर्ड का मानना है कि यह शिक्षक स्कूली छात्रों के बीच 21वीं सदी की तकनीकों का प्रसार करेंगे। इसके लिए शिक्षकों को 26 अप्रैल से 25 मई तक ऑनलाइन प्रशिक्षित किया जाएगा। यह ट्रेंड शिक्षक सीबीएसई व आईबीएम के सहयोग से अगले छ: माह में दस हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। यह शिक्षक छात्रों को उनकेएआई प्रोजेक्ट्स में भी मदद करेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाइव सेशन, हैंड्स ऑन सेशन आयोजित किए जाएंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को वैश्विक स्तर की काफी तकनीकों को सीखने व समझने का मौका मिलेगा। जिनका इस्तेमाल वह शिक्षण में भी कर सकेंगे। 


कार्यक्रम को पूरा करने वाले शिक्षकों को आईबीएम प्रोफेशनल बैज प्रदान किया जाएगा। इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए बोर्ड ने किसी प्रकार की फीस नहीं रखी है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।  हिस्सा लेने के लिए बोर्ड ने एक लिंक उपलब्ध कराया है, जिसके माध्यम से शिक्षक 25 अप्रैल से पहले पंजीकृत हो सकते हैं। 

उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय


उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय


कोरोना संकट को देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे।
कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे। यूजीसी ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।


नई दिल्ली । कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत अब वह अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेगे। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को हासिल होगी, जो गुणवत्ता के एक तय मानक को पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुविधा को विस्तार मिलने से दाखिले से वंचित रहने के बाद भी छात्र अपनी पसंद के विषयों और पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।

योजना पर तेजी से काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस बीच एआइसीटीई ने बड़ी संख्या में अपने कोर्सों को ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ), कंप्यूटर एप्लीकेशन, डाटा साइंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेवल एंड टूरिज्म के साथ प्रबंधन और उससे जुड़े कोर्स शामिल हैं।


एआइसीटीई ने छूट दी

खास बात है कि अब तक तकनीकी कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से पढ़ाने की अनुमति कुछ ही संस्थानों को मिली थी लेकिन इस पहल के बाद एआइसीटीई ने गुणवत्ता के तय मानकों को हासिल करने वाले सभी संस्थानों को ऐसे कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से संचालित करने की छूट दे दी है। इसके लिए अब उन्हें अनुमति भी लेनी होगी।


यूजीसी ने भी तेज की पहल

वहीं यूजीसी ने भी इसे लेकर अपनी पहल तेज की है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों से गुणवत्ता के मानकों के आधार पर ऑनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से कोर्सों को शुरू करने की अनुमति दी है। इस बीच संस्थानों के लिए गुणवत्ता के जो मानक तय किए गए है, वह राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) और एनबीए (नेशनल बोर्ड आफ एक्रेडेशन) की रैकिंग पर आधारित है।


कोरोना संकट के बीच पहल

उच्च शिक्षण संस्थानों के ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को ऑनलाइन करने की यह पहल उस समय शुरू हुई है, जब कोरोना के चलते संस्थानों में दाखिले से लेकर पढ़ाई, परीक्षा आदि का पूरा तंत्र लड़खड़ाया हुआ है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। ऐसे में कोई भी छात्र अपनी मनचाही पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके तहत उसे ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा जैसे विकल्प भी मुहैया कराए जा रहे हैं। कोरोना संकट को देखते हुए वैसे भी सरकार का पूरा जोर ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर है। 

छह माह बाद 69000 भर्ती शिक्षकों को वेतन भुगतान की जगी उम्मीद

छह माह बाद 69000 भर्ती शिक्षकों को वेतन भुगतान की जगी उम्मीद

वेतन का इंतजार कर रहे यूपी के प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की जागी उम्मीद, ऑनलाइन सत्यापन शुरू


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69000 भर्ती में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों को अब वेतन भुगतान की उम्मीद जगी है। दूसरे जिलों में तैनाती पाने वाले शिक्षक छह माह से वेतन की राह देख रहे थे, कई आर्थिक तंगी से परेशान थे। अंतर जिला तबादले पर मनचाहे जिलों में तैनाती पाने वाले शिक्षकों को भी भुगतान नहीं मिल रहा है। विभागीय मंत्री की सख्ती से बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने ऑनलाइन सत्यापन शुरू किया है। अगले माह वेतन मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 शिक्षकों की तैनाती जिलों के पिछड़े क्षेत्रों में की गई है। अक्टूबर 2020 में की अधिकांश जिलों में नवनियुक्त शिक्षकों को स्कूल आवंटित हुए थे। शिक्षकों का वेतन भुगतान अभिलेखों के सत्यापन के बाद होने के निर्देश हैं। ऐसे में कोरोना महामारी उन्हें भुगतान नहीं मिल सका है। इससे नवनियुक्त शिक्षक बहुत परेशान थे, वजह कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी कोरोना से संक्रमित हो गए तो शिक्षकों का सभी शैक्षिक संस्थानों सत्यापन होने के बाद भी वेतन आदेश जारी नहीं हुआ। 


शिक्षक यह मांग कर रहे थे कि शासन जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से वेतन भुगतान कराए व जिनका पूर्ण सत्यापन नहीं हुआ हैं उनके दो सत्यापन के आधार पर वेतन जारी किया जाए। इसी तरह से अंतर जिला स्थानांतरण के तहत अपने गृह या पड़ोसी जिले में आए अध्यापकों का भी वेतन भुगतान तीन महीने से इंतजार है। सभी शिक्षकों के आवश्यक प्रपत्र लेखा कार्यालयों में भी पहुंच चुके हैं लेकिन वे ब्लाकों को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। 


उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि इससे वेतन बनाने में असुविधा हो रही है। इसका विभागीय मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने संज्ञान लेकर भुगतान जल्द कराने के आदेश दिए हैं। वहीं, परिषद सचिव ने ऑनलाइन सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।

खाली नहीं रहेगी बच्चों के MDM की थाली

खाली नहीं रहेगी बच्चों के MDM की थाली


प्रयागराज कोराना आपदा के बीच देश भर में स्कूल बंद हैं। लेकिन, बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर कोई असर न पड़े, इसे लेकर सरकार की ओर से तैयारी कर ली गई है। मिड डे मील प्राधिकरण की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि बंद स्कूलों में भी बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाए। सरकार की ओर से बच्चों के लिए पौष्टिक खाने की व्यवस्था की गई है। जिला स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि स्कूल बंद हैं तो भी बच्चों को सूखा राशन और खाना पकाने की कुकिंग कॉस्ट उपलब्ध कराई जाए। 2020-21 शैक्षिक सत्र में भी बच्चों को सूखा राशन एवं कुकिंग कॉस्ट उपलब्ध कराई गई थी।

प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय विद्यालयों के साथ ही माध्यमिक विद्यालयों में भी आठवीं तक के बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है। केंद्र सरकार की मिड डे मील योजना का लाभ देश भर के लगभग 12 करोड़ बच्चों को मिलेगा। इस बीच बढ़ते संक्रमण से नए शैक्षिक सत्र में प्रदेश सरकार ने 15 मई तक स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। ऐसे में बच्चों को घर बैठे पढ़ाने की योजना पर काम शुरू है। इस बार भी बच्चों को ऑनलाइन, टेलीविजन, रेडियो से पढ़ाने की तैयारी है। मिड-डे मील कोआर्डिनेटर राजीव त्रिपाठी कहते हैं, बीते वर्ष भी सरकार की योजना के अनुरूप बच्चों को मिड डे मील योजना का लाभ पहुंचाया गया था।

Saturday, April 24, 2021

कोरोना टीकाकरण की नई मुहिम के अगुवा बनेंगे विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने बनाई रणनीति


कोरोना टीकाकरण की नई मुहिम के अगुवा बनेंगे विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने बनाई रणनीति


इनमें से भी बड़ी संख्या ऐसे आयु वर्ग की है, जो विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यनरत है, यूजीसी ने इससे जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी योजना तैयार करने को कहा गया है। इसका स्वरूप क्या होगा यह टीकाकरण के नए चरण को लेकर सरकार की योजना सामने आने के बाद अगले हफ्ते तक साफ हो सकेगा।


नई दिल्ली ।  देश भर में एक मई से कोरोना टीकाकरण का एक नया चरण शुरू होने जा रहा है। इसमें 45 साल की उम्र से नीचे और 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को भी टीका लगाया जाएगा। उम्मीद है कि टीकाकरण के इस नई मुहिम से कोरोना संक्रमण की रफ्तार थामने में मदद मिलेगी। सरकार के फैसले से टीकाकरण के दायरे में देश की एक बड़ी आबादी आ गई है। इनमें से भी बड़ी संख्या ऐसे आयु वर्ग की है, जो मौजूदा समय में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यनरत है। जिन्हें इस चरण में प्राथमिकता पर टीका लगाने की तैयारी है। 

यूजीसी ने इससे जुड़ी रणनीति पर शुरू किया काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इससे जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी अपने स्तर पर योजना तैयार करने को कहा गया है। इसका स्वरूप क्या होगा, यह टीकाकरण के नए चरण को लेकर सरकार की योजना सामने आने के बाद अगले हफ्ते तक साफ हो सकेगा। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन में पढ़ रहे हैं। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन के मुताबिक टीकाकरण के इससे पहले के चरणों में भी सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को तय उम्र के दायरे में आने वाले संस्थान के सभी लोगों का टीकाकरण कराने के लिए कहा गया था। साथ ही इसे लेकर आम लोगों को जागरूक करने को कहा था। 


उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, असम सहित कई राज्यों ने 18 से 45 साल की आयु वर्ग को मुफ्त में टीका उपलब्ध कराने का एलान किया है। माना जा रहा है कि यदि टीकाकरण की इस मुहिम में मई और जून तक उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े ज्यादातर छात्रों का टीकाकरण हो जाता है, तो जुलाई से संस्थानों को सुचारु रूप से शुरू किया जा सकता है।


गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय और करीब पचास हजार कालेज हैं। इनमें करीब पचास केंद्रीय विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त करीब डेढ़ सौ दूसरे उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

KVS : केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शिक्षकों को दी वर्क फ्रॉम होम की अनुमति, पढ़ें जरूरी निर्देश

  
KVS : केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शिक्षकों को दी वर्क फ्रॉम होम की अनुमति, पढ़ें जरूरी निर्देश

केंद्रीय विद्यालयों ने टीचर्स को दी इजाजत, घरों से लें ऑनलाइन क्लास


CBSE, CISCE, और अन्य बोर्डों ने अपने बोर्ड परीक्षा 21 को रद्द और स्थगित कर दिया है. कोविड-19 के प्रभावों को रोकने के लिए कई राज्यों में तालाबंदी लागू की गई.

COVID-19 के प्रसार को सीमित करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है.

नई दिल्ली. केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने शिक्षकों को घर से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने और स्कूलों में आने से रोकने की अनुमति दी है. संगठन ने शुक्रवार को राज्य की सरकार द्वारा कोविड-19 की दूसरी लहर के मद्देनजर ऑफलाइन कक्षाओं को निलंबित करने का निर्देश दिया. संगठन ने छात्रों, शिक्षकों, स्कूल स्टाफ और अभिभावकों के बीच COVID-19 के प्रसार को सीमित करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है.

केवीएस द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने जहां भी फिजिकल क्लास के संचालन की अनुमति दी है, वहां के उपायुक्त और प्रिंसिपल को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि उपयुक्त COVID प्रोटोकॉल का पालन किया जाए.

आधिकारिक अधिसूचना के मुातबिक, जहां भी राज्य सरकारों द्वारा फिजिकल क्लासेज की अनुमति दी गई है, क्षेत्र के डीसी और प्रधानाचार्य को सुनिश्चित करना चाहिए कि उपयुक्त COVID प्रोटोकॉल बनाए रखा जाए. COVID प्रोटोकॉल के अनुसार कक्षाओं के निलंबन के मामले में, KVS (HQ) को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाए.

नोटिस में आगे कहा गया है, "कोई भी निर्णय लेते समय, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि छात्रों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है."

केवीएस ने घर से काम करने वाले सभी शिक्षकों को फोन पर उपलब्ध होने के लिए कहा है. प्राचार्य आवश्यकता के अनुसार स्कूलों में शिक्षकों को बुला सकते हैं. किसी भी शिक्षक को प्रिंसिपल की पूर्व अनुमति के बिना स्टेशन छोड़ने की अनुमति नहीं होगी. आदेशों के अनुसार, माता-पिता को नियमित रूप से अकादमिक लेनदेन के बारे में अवगत कराया जाना चाहिए और एक ऑनलाइन अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित करके COVID-19 संबंधित प्रोटोकॉल के प्रति संवेदनशील हो.


KVS IMP Notice : केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने महामारी के दौरान क्लासेस चलाने को लेकर नोटिस जारी किया है जिससे कि शिक्षकों, स्कूल स्टाफ  और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

केवीएस ने सभी शिक्षकों को अनुमति दी है कि वे घर से ही ऑनलाइन क्लासेस ले सकते हैं, इसके लिए उन्हें स्कूल जाने की जरूरत नहीं है। यानी शिक्षक वर्क फ्रॉम होम कर सकते हैं।


हालांकि संगठन ने सभी शिक्षकों को यह भी निर्देश दिया है कि वर्क फ्रॉम होम करने के दौरान व फोन पर उपलब्ध रहेंगे।

स्कूल प्रिंसिपलों को अनुमति होगी कि जब जरूरत हो तब वे वर्क फ्रॉम होम कर रहे शिक्षकों को कॉल कर सकेंगे या उनसे मिल सकेंगे। केवीएस ने शिक्षकों को निर्देश दिया कि प्रिंसिपल के बिना अनुमति के कोई भी शिक्षक स्टेशन न छोड़ें।

केवीएस ने अपने नोटिस में स्कूलों से कहा कि इस दौरान ऑनलाइन क्लासेस जारी रखें। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। राज्य सरकार या इलाके के जिलाधिकारी जब भी ऑफलाइन कक्षाओं की अनुमति देते हैं तो प्रिंसपलों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे जरूरी कोरोना गाइडलाइन्स का पालन कराना सुनिश्चित करेंगे। कभी भी ऑफलाइन शुरू से पूर्व स्क्ल के स्टाफ और शिक्षकों को पहले से ही बताना होगा। कक्षाएं रद्द होने पर केवीएस मुख्यालय को सूचित करना होगा।

NTSE : डेढ़ लाख छात्रों को है छात्रवृत्ति का इंतजार, दो साल से फंसा है रिजल्ट

NTSE : डेढ़ लाख छात्रों को है छात्रवृत्ति का इंतजार, दो साल से फंसा है रिजल्ट


दसवीं परीक्षा पास किये एक साल से अधिक हो गया। 11वीं से अब 12वीं में चले गये लेकिन अभी तक छात्रवृत्ति का रिजल्ट नहीं मिला। यह हाल नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन (एनटीएसई) छात्रवृत्ति का है। छात्रवृत्ति परीक्षा पिछले दो साल से हो रही है, लेकिन अभी तक छात्रों को रिजल्ट नहीं मिला है। इसमें 2019 का फाइनल रिजल्ट और 2020 का पीटी का रिजल्ट शामिल है। एससीईआरटी की मानें तो दोनों सत्र मिलाकर लगभग डेढ़ लाख छात्र शामिल हुए हैं। 


ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण के कारण एनटीएसई रिजल्ट जारी नहीं हो पा रहा है। 2019 का पीटी रिजल्ट निकलने के समय मार्च 2020 में लॉकडाउन लग गया। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में ही पीटी का रिजल्ट जारी हुआ था। इसके बाद नवंबर 2020 में सेकेंड फेज की परीक्षा ली गयी। इसका रिजल्ट भी तक जारी नहीं हुआ है। वहीं 2020 की पीटी जनवरी 2021 में ली गयी। लेकिन अभी पीटी का ही रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। 


प्लस टू से लेकर पीएचडी तक मिलती छात्रवृत्ति
उच्च शिक्षा पाने के लिए छात्रवृत्ति परीक्षा ली जाती है। दसवीं के छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। चयनित छात्रों को 11वीं से छात्रवृत्ति मिलना शुरू होता है। यह छात्रवृत्ति पीएचडी तक मिलती है। स्नातक में इसमें हर महीने 12 सौ रुपये दिये जाते हैं। वहीं आगे पीजी और पीएचडी के लिए यूजीसी के नियम के अनुसार छात्रवृत्ति दी जाती है। 


गिरिवल दयाल (निदेशक, एससीईआरटी) ने कहा, पीटी का रिजल्ट तैयार हो गया है। भारत सरकार के पास एप्रूवल के लिए भेजा गया है। विधानसभा चुनाव के कारण इस बार जनवरी अंतिम सप्ताह में पीटी परीक्षा ली गयी थी। अभी रिजल्ट तैयार है। बस एप्रूवल मिलने के बाद जारी किया जायेगा। 


मई के दूसरे सप्ताह में सेकेंड फेज की परीक्षा 
एनसीएसई के सेकेंड फेज की परीक्षा मई के दूसरे सप्ताह में  होती है। इससे पहले नवंबर में फर्स्ट फेज की परीक्षा ली जाती है। फर्स्ट फेज में चयनित छात्र सेकेंड फेज की परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन इस बार फर्स्ट फेज नवंबर के बदले जनवरी में हुआ। वहीं कई राज्यों में फरवरी में परीक्षा ली गयी। अभी फर्स्ट फेज का रिजल्ट जाने में देरी होगी।

लखनऊ : कोरोना के चलते स्कूलबन्दी पर निजी स्कूल प्रबंधकों ने सरकार से आर्थिक पैकेज मांगा

लखनऊ : कोरोना के चलते स्कूलबन्दी पर निजी स्कूल प्रबंधकों ने सरकार से आर्थिक पैकेज मांगा


निजी स्कूल के शिक्षकों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान करें। बीते वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण अभिभावकों ने फीस देने से इनकार कर दिया था। लिहाजा शिक्षकों के सामने वेतन का संकट है।


स्कूल बीच में कुछेक दिनों के लिए खुले जरूर लेकिन नए सत्र की शुरुआत से पहले ही बंद कर दिए गए। शिक्षक संगठनों ने जुलाई से नए सत्र की मांग की है। वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष व शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा है कि इन स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षक भुखमरी की कगार पर हैं। 90 फीसदी शिक्षकों को एक साल से वेतन नहीं मिल रहा है। वे घर बैठ गए हैं क्येांकि प्रबंधकों ने नए प्रवेश होने पर ही बुलाने का आश्वासन दिया है। सरकार जुलाई से नया सत्र करे तो इससे लाभ मिल सकता है। 


प्रदेश में 21 हजार से ज्यादा निजी स्कूल हैं जो यूपी बोर्ड से जुड़े हैं। बीते वर्ष नया सत्र शुरू होने से पहले ही कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हो गया। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। इस वर्ष लगभग एक महीने से भी कम समय के लिए स्कूल खुले लेकिन अभिभावक जब तक फीस जमा करते तब तक फिर स्कूल बंद कर दिए गए। इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक अमूमन निम्न आय वर्ग से आते हैं। लिहाजा बामुश्किल 10 फीसदी फीस भी नहीं जमा हो पाई। इस वर्ष भी अभिभावकों ने स्कूल खुलने पर फीस जमा करने के लिए कहा है। फीस न होने पर प्रबंधकों ने शिक्षकों को वेतन नहीं दिया था।