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Friday, August 14, 2020

हाथरस : सहायक/शिक्षामित्र/अनुदेशक को आवश्यकतानुसार विद्यालय बुलाने पर प्र0अ0 लेंगे निर्णय, विभागीय कार्य पूर्ण न होने व विद्यालय खुलने पर प्र0अ0 का होगा निलम्बन, आदेश देखें

हाथरस : सहायक/शिक्षामित्र/अनुदेशक को आवश्यकतानुसार विद्यालय बुलाने पर प्र0अ0 लेंगे निर्णय, विभागीय कार्य पूर्ण न होने व विद्यालय खुलने पर प्र0अ0 का होगा निलम्बन, आदेश देखें

हाथरस : स्वन्त्रता दिवस समारोह 2020 के सम्बन्ध में बीएसए का आदेश जारी

हाथरस : स्वन्त्रता दिवस समारोह 2020 के सम्बन्ध में बीएसए का आदेश जारी


फतेहपुर : 15 अगस्त 2020 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के सम्बन्ध में डीएम ने जारी किया आदेश, देखें कार्यक्रम विवरण

फतेहपुर : 15 अगस्त 2020 को स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के सम्बन्ध में डीएम ने जारी किया आदेश, देखें कार्यक्रम विवरण।

















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बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇
नए निर्देश के बाद अब BEO भी होंगे निलंबित, शिक्षक पहले ही हो चुके निलंबित



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇 

हमीरपुर : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

हमीरपुर : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।





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माध्यमिक शिक्षा : सत्र 2020-21 का मासिक शैक्षिक पंचांग जारी, क्लिक करके करें डाउनलोड

माध्यमिक शिक्षा : सत्र 2020-21 का मासिक शैक्षिक पंचांग जारी,  क्लिक करके करें डाउनलोड


17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी सामने आयी है। इन शिक्षकों के शैक्षिक अंक पत्र व प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर क्षेत्रीय अधिकारी मामले की गहन पड़ताल में जुटे हैं।


क्षेत्रीय. अधिकारियों को 17 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट निदेशालय को भेजनी है। निदेशालय रिपोर्ट की पड़ताल करके उसे शासन को भेजेगा। इसमें जिनके दस्तावेज गड़बड़ होंगे उन्हें निलंबित करके कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। 


बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि जिन शिक्षकों के दस्तावेजों में खामियां मिली हैं, उनकी जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। क्षेत्रीय अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने पर शिक्षकों का पक्ष सुना जाएगा, फिर अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

वाराणसी : परिषदीय विद्यालयों को तीन साल में भेजी गई कंपोजिट ग्रांटों की होगी जांच, मची खलबली

वाराणसी : परिषदीय विद्यालयों को तीन साल में भेजी गई कंपोजिट ग्रांटों की होगी जांच, मची खलबली

 
वाराणसी : बेसिक शिक्षा विभाग ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों का परिवेश बदलने में जुटा हुआ है। इसके अलावा कायाकल्प करने के लिए छात्रसंख्या के आधार पर विद्यालयों को कंपोजिट ग्रांट भी दिया गया है। वहीं कुछ विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट का दुरूपयोग किया जा रहा है। इसे देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) मधुसुदन हुल्गी ने पिछले तीन सालों के कंपोजिट ग्रांटों से कराए गए कार्यों की जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने बीएसए को निर्देश भी दिया है। इसे लेकर विद्यालयों में खलबली मची हुई है।


छात्र संख्या के आधार पर ग्रांट दिया जाता है

समग्र शिक्षा अभियान के तहत सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को रंगाई-पुताई, पेंटिंग अग्निशमन यंत्र, स्टेशनरी, टाट-पट्टी, रोडियो प्रोग्राम, विद्युत उपकरणों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, बागवानी, शिक्षण अधिगम सामग्री सहित विभिन्न मदों में खर्च करने के लिए छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट दिया जाता है।


11 अध्यापकों का वेतन रोकने का निर्देश

सभी विद्यालयों को शान के मानक के अनुरूप कार्य कराने का निर्देश है। वहीं निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने कंपोजिट ग्रांट के उपयोग में व्यापक पैमाने पर अनियमितता मिली। इसे देखते हुए सेवापुरी विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय (अमिनी) के हेडमास्टर सहित सभी 11 अध्यापकों का अग्रिम आदेश तक के लिए वेतन रोकने का निर्देश दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी डीपी सिंह की संस्तुति पर विद्यालय के सभी स्टाफो को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।

हेडमास्टर सहित 11 अध्यापकों का अग्रिम आदेश तक के लिए रोका वेतन


■ छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट ग्रांट इस प्रकार है-

● 01 से 15 छात्रसंख्या पर तक 12500
● 16 से 100 छात्रसंख्या पर तक 25000
● 101 से 250 छात्रसंख्या पर तक 50000
● 251 से 1000 छात्रसंख्या पर तक 75000
● 1000 से अधिक छात्र होने पर 100000

किताबों में सिमटकर रह गया सरकारी स्कूलों का पाठ्यक्रम

किताबों में सिमटकर रह गया सरकारी स्कूलों का पाठ्यक्रम

 
पीलीभीत: केंद्र सरकार द्वारा 31 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया। केंद्र सरकार की एडवाइजरी के अनुपालन में राज्य सरकारों द्वारा भी गाइडलाइन जारी की गई। 31 अगस्त तक बच्चों को छुट्टी देकर राहत दी गई तो वहीं शिक्षकों को विद्यालयों में बुलाया जाने लगा।



कोरोना संक्रमण काल में ऑनलाइन पढ़ाई की अवधारणा को बृहद स्तर पर क्रियान्वित किया गया। प्रारंभ में ऑनलाइन पढ़ाई पर अधिकारियों की निगरानी रही जिससे बच्चों को लाभ मिलता रहा लेकिन समय निकलने के साथ ही अधिकारियों ने ऑनलाइन शिक्षा की हकीकत जानने से मुंह फेर रखा है। निजी विद्यालयों में शिक्षकों को विद्यालय बुलाकर लाइव क्लासेस या वीडियो लेक्चर व कंटेंट बच्चों तक पहुंचाया जा रहा है लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चों का पाठ्यक्रम किताबों में सिमटता जा रहा है।

सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है व बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देने के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों द्वारा आदेश का अनुपालन कराने में बरती जा रही कोताही से बच्चों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई शिक्षक जो ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाने में खुद को असहज महसूस करते हैं, वे घरों में कोचिंग पढ़ा रहे हैं। ऐसे शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से लाइव क्लास लेने या वीडियो लेक्चर तैयार कर स्कूल के बच्चों को उपलब्ध कराने में रुचि नहीं लेते हैं।

31 अगस्त तक विद्यार्थियों के लिए विद्यालय बंद रहेंगे। अपर मुख्य सचिव के आदेश पर शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। सभी शिक्षक विद्यालय में मौजूद रहकर ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं संचालित करेंगे।
- संतप्रकाश, जिला विद्यालय निरीक्षक

स्कूली शिक्षा महानिदेशक के आदेश पर विभागीय कामकाज निपटाने व योजनाओं का लाभ बच्चों तक सुनिश्चित कराने के लिए शिक्षकों को विद्यालय भेजा जा रहा है। सभी शिक्षकों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर इसकी रिपोर्ट भी ली जाती है। - देवेंद्र स्वरूप, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

फतेहपुर : बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी, शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना तय, प्रेरणा लक्ष्य के मानक से बच्चों की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन

फतेहपुर : बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी, शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना तय, प्रेरणा लक्ष्य के मानक से बच्चों की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन।


फतेहपुर :: बेसिक शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना निर्धारित किया है। अब कक्षा पांच तक के बच्चों के मूल्यांकन का आधार भाषा और गणित होगी। शिक्षकों का मूल्यांकन भी बच्चों की योग्यता के आधार पर होगा। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से भी इस पर सवाल-जवाब हो सकता है।

तय मानकों की बात करें तो भाषा विषय में कक्षा एक के बच्चे को निर्धारित सूची में पांच शब्दों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। कक्षा दो के छात्र को भाषा की किताब में 20 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा तीन के छात्र में 30 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा चार के बच्चे में किताब का छोटा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों का सही जवाब देने की क्षमता तथा कक्षा पांच के छात्र में बड़ा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत सवालों के सही जवाब देने की क्षमता का मानक बना है।



इसी प्रकार गणित विषय में कक्षा एक के छात्र को निर्धारित सूची में पांच संख्याएं सही पढ़ने की क्षमता, कक्षा दो को छात्र में एक अंक का जोड़ना और घटाना आना चाहिए। कक्षा तीन के छात्र में हासिल वाले जोड़ और घटाने के सवाल 75 प्रतिशत हल करने की क्षमता का मानक है कक्षा चार के छात्र को गुणा के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय हैं। कक्षा पांच के छात्र में भाग के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय किया गया है।

सर्व शिक्षा से जारी पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि यह मानक बच्चों के साथ शिक्षक और विभागीय अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को कंठस्थ होना चाहिए। अगर कोई अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करता है, तो उसे इसी मानक के आधार पर बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का आकलन करना होगा। बीएसए देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रेरणा लक्ष्य की प्रतिलिपि सभी बीईओ के माध्यम से स्कूलों में भेज दी गई है।


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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय : मुक्त विवि में प्रमोट किए गए छात्र-छात्राएं, अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं सितंबर में संभावित

मुक्त विवि में प्रमोट किए गए छात्र-छात्राएं

अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं सितंबर में संभावित, परीक्षा तिथि पर 16 के बाद निर्णय लेगा विवि प्रशासन

 उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय ने कोविड-19 के कारण स्नातक प्रथम एवं द्वितीय और परास्नातक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया है। विद्यार्थियों को 31 अगस्त तक अपनी अगली कक्षा में प्रवेश लेना है। स्नातक एवं परास्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सितंबर में संभावित हैं। विवि प्रशासन 16 अगस्त

पहले 24 अगस्त को परीक्षाएं प्रस्तावित थीं, लेकिन कोविड 19 के कारण इन्हें स्थगित करना पड़ा। अब सितंबर में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं संभावित हैं। 16 अगस्त के बाद परीक्षा तिथि को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा। बाकी विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट कर

के बाद परीक्षा की तिथि पर निर्णय लेगा। मुविवि के प्रदेश में 11 क्षेत्रीय केंद्र हैं, जो प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ, बरेली, झांसी, कानपुर, आगरा, आजमगढ़, मेरठ एवं गाजियाबाद में स्थित हैं। प्रदेश में इनसे जुड़े 1100 सक्रिय अध्ययन केंद्र हैं, जहां कुल पचास हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष और परास्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किया गया है प्रवेश प्रभारी डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि मुविवि में अध्ययनरत प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की सत्र जून-2020 की
परीक्षाएं कोविड-19 महामारी के कारण आयोजित नहीं की जा सकेंगी। ऐसे में मुविवि में संचालित सभी पाठ्यक्रमों के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को कुलपति द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार क्रमशः अपने पाठ्यक्रम के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में प्रोन्नत कर दिया गया है। ऐसे विद्यार्थियों को 31 अगस्त तक मुविवि की वेबसाइट के माध्यम से अगली कक्षा में पंजीकरण कराकर अपना प्रवेश सुनिश्चित करना है उधर मुकिवि प्रशासन ने स्नातक एवं परास्नातक अंतिम वर्ष और अन्य पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करना छात्रों के हित में नहीं : यूजीसी

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करना छात्रों के हित में नहीं: यूजीसी

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षा छात्र के शैक्षणिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती हैं इन परीक्षाओं को रद्द करना किसी सूरत में छात्रों के हित में नहीं है। महाराष्ट्र और दिल्ली सरकार के हलफनामे के जवाब में आयोग ने कोर्ट में कहा, राज्य सरकार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द नहीं कर सकतीं। आयोग ने कहा, अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने के लिए 6 जुलाई को जारी किए गए दिशा-निर्देश विशेषज्ञों की सिफारिश पर आधारित हैं। इन्हें विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है। ऐसे में यह दावा करना पूरी तरह गलत है कि इन दिशा-निर्देशों के आधार पर परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है। 

शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्‍यर्थियों से ज्‍यादा चिंता सरकार को, विवि के अंतिम वर्ष के रिजल्ट के बाद ही डीएलएड में प्रवेश, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ.सतीश द्विवेदी ने कहा कि सरकार, शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्‍यर्थियों से ज्‍यादा चिंतित है। उन्‍होंने कहा कि 69000 शिक्षकों की भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वहां से निर्णय आ जाने के बाद ही बचे हुए पदों पर नई भर्ती संभव हो सकेगी। शिक्षकों की समय से भर्ती हो, इसको लेकर अभ्यर्थियों से ज्यादा चिंता सरकार को है। इसमें देरी के लिए सिर्फ सरकार ही जिम्मेदार नहीं।


गुरुवार को ‘हिन्दुस्तान’ गोरखपुर की ओर से अनलॉक 3.0 के दौरान ‘कोरोना काल में कैसे पढ़ें बच्चे’ विषय पर ई-संवाद आयोजित किया गया था। इसमें पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री ने अपनी बात रखी।  



● 50 हजार शिक्षकों की भर्ती हो चुकी है प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान
● 30 छात्रों पर एक शिक्षक की उपलब्धता मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल


उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से भर्ती को लेकर तय मानक पर कोर्ट का निर्णय नहीं आ जाता, तब तक हम नई भर्ती कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह अभ्यर्थियों की हर तकलीफ और सवालों से वाकिफ हैं लेकिन सरकार के काम करने का अपना एक पैमाना है। 


गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सीएम की प्राथमिकता 
सतीश द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार के तीन साल के कार्यकाल के दौरान बेसिक स्कूलों में 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती की गई है। यदि यही 69000 शिक्षकों की भर्ती हो गई होती तो शायद ही कोई ऐसा स्कूल बचता, जो शिक्षक विहीन होता। मुख्यमंत्री की उच्च प्राथमिकता है कि मानक के अनुसार हर 30 छात्र पर एक शिक्षक की उपलब्धता व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।


सांसद रविकिशन शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में नेट कनेक्टिवटी की समस्या बताते हुए अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पर निगरानी की अपील की। पैनलिस्ट गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वीके सिंह और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जेपी पांडेय ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया।


विवि के अंतिम वर्ष के रिजल्ट के बाद ही डीएलएड में प्रवेश
डीएलएड के नए सत्र में प्रवेश के सवाल पर सतीश द्विवेदी ने कहा कि जब तक विश्वविद्यालयों के स्नातक अंतिम वर्ष के परिणाम नहीं आ जाते, प्रवेश प्रकिया शुरू नहीं की जाएगी। जो छात्र डीएलएड अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं वे यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई करते रहें। यूजीसी के मानक के अनुसार अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराएंगे।


नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न

नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न।

नई दिल्ली : नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा में कई ऐसे बुनियादी बदलाव किए गए हैं जो आने वाले समय में देश की शिक्षा में बड़े बदलाव आ सकते हैं। नई नीति लागू होने के बाद स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम और उसका तौर-तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा।

छात्र-छात्राओं को भावी जरूरतों के अनुरूप विषय पढ़ाए जाएंगे। कक्षा छह से कृत्रिम बुद्धिमता की पढ़ाई भी इसी रणनीति का हिस्सा है। मकसद उनमें अभिरुचि पैदा करना है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक कहते हैं कि कक्षा छह से दो बड़े बदलाव हुए हैं। एक वोकेशनल शिक्षा आरंभ करना तथा दूसरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अध्ययन। इसका मकसद छात्रों को रोजगारोन्मुख बनाना और इनोवेशन में उनकी दिलचस्पी पैदा करना है। बच्चों को कक्षा छह से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में कुछ पाठ पढ़ाए जाएंगे।




नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का पूरा पैटर्न बदल जाएगा। पहले तीन साल की प्री-स्कूलिंग बच्चे आंगनबाड़ियों में करेंगे तथा बाद के दो साल तक स्कूलों में पढ़ेंगे। इस प्रकार पहले पांच साल नर्सरी से कक्षा दो तक बच्चों को बुनियादी तौर पर मजबूत बनाया जाएगा। इसके बाद अगले तीन साल के दौरान वे प्राइमरी शिक्षा ग्रहण करेंगे।मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि नीति को पूरे देश ने स्वीकार किया है। सूबों में अलग-अलग दलों की सरकार के बावजूद सबने इसे प्रगतिशील बताया है।

काफी विचार विमर्श किया गया : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इसे लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को खत्म करने वाला बताया है। इसलिए इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में कोई अड़चन नहीं आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भी कहा था कि जितना विचार-विमर्श इस नीति को तैयार करने में हुआ है, उतना दुनिया की किसी नीति पर नहीं हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती राज्यों को एक मंच पर लाने की थी जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक सफल रहे। शिक्षा नीति पर बनी समिति के चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने भी इस बात के लिए सराहना की है।


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उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर, आधा दर्जन शिक्षकों की बहाली को लेकर नहीं गम्भीर महकमा

उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर।


लापरवाही में निलंबित किए गए शिक्षकों की बहाली को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। महीनों बाद भी जिले के निलंबित आधा दर्जन शिक्षकों की अब तक बहाली नहीं हो सकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र देकर जांच आख्या के आधार पर न तो कार्रवाई हुई और न ही बहाली। बहाली में हो रहे विलंब से स्कूलों की पठन पाठन व्यवस्था प्रभावित है। साथ ही शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।




पूर्व बीएसए बीके शर्मा ने साल 2019 में स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाह मिले दर्जनों शिक्षकों को निलंबित किया था। इसके अलावा प्रभारी बीएसए राकेश कुमार, सीडीओ व वर्तमान बीएसए प्रदीप पांडेय ने कई निलंबन किए। कुछ समय पहले कई शिक्षक बहाल हुए पर अभी कई की बहाली लटकी है, जबकि नियमानुसार तीन महीने के भीतर इनकी बहाली हो जानी चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि निलंबित शिक्षक को 15 दिन के भीतर आरोप पत्र देकर उसका पक्ष लिया जाए। इसके बाद जांच आख्या के आधार पर उस पर अनुशासात्मक कारवाई हो या फिर उसकी बहाली की जाए। इसके बाद भी नियम कायदों को ताक पर रखकर तमाम शिक्षकों को कई महीनों बाद भी बहाल नहीं किया गया है।




इस मामले में बीएसए प्रदीप पांडेय का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आख्या मिल रही है, उसी आधार पर शिक्षकों को बहाल किया जा रहा है। अभी इन शिक्षकों की आख्या नहीं आई है, इसलिए बहाली या कार्रवाई नहीं की गई है। आख्या मांगी गई है जल्द आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी। किसी शिक्षकों को आसपास का स्कूल नहीं दिया जाएगा। जो जहां है वहीं रहेगा।




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CBSE Compartment Exam 2020 : सीबीएसई ने जारी किया कंपार्टमेंट एग्जाम का शेड्यूल, सितम्बर में होगी परीक्षा

CBSE Compartment Exam 2020 :  सीबीएसई ने जारी किया कंपार्टमेंट एग्जाम का शेड्यूल, सितम्बर में होगी परीक्षा।

CBSE Compartment Exam 2020 Updates : सीबीएसई बोर्ड कंपार्टमेंटल परीक्षाओं के रद्द होने की तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए आखिरकार सीबीएसई ने कंपार्टमेंटल एग्जाम के शेड्यूल की घोषणा कर दी। 10वीं और 12वीं के लिए इसी साल परीक्षा आयोजित की जाएगी। सीबीएसई कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए 13 से 20 अगस्त तक फॉर्म भरे जाएंगे। वहीं, 1 से 15 जुलाई तक एग्जाम नहीं देने वाले छात्रों के ऑप्शनल एग्जाम के फॉर्म भी भरे जाएंगे।  खबर के मुताबिक सीबीएसई बोर्ड कंपार्टमेंटल परीक्षाएं सितम्बर महीने से शुरू की जा सकती हैं।






कोरोना काल में सीबीएसई के कंपार्टमेंट परीक्षा लेने के फैसले के खिलाफ देश भर के 800 से ज्यादा छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। दायर याचिका में कहा गया है कि अभी तक कंपार्टमेंट परीक्षा का कोई शेड्यूल तय नहीं किया गया है, जबकि अधिकांश कॉलेज एग्जाम और एडमिशन की डेडलाइन जारी कर चुके हैं। वहीं, याचिका में सुप्रीम कोर्ट से महामारी के खत्म होने तक सीबीएसई के कंपार्टमेंट परीक्षा कराने के फैसले पर रोक लगाने के लिए कहा गया है। सीबीएसई 10वीं में इस बार 1,50,198 स्टूडेंट्स और 12वीं के 87,651 स्टूडेंट्स की कंपार्टमेंट आई थी। कुछ दिनों पहले सीबीएसई ने ग्रेस मार्क्स देकर छात्रों को पास करने से साफ इनकार कर दिया था बोर्ड ने कहा था कि जो छात्र एक और दो विषय में फेल हैं, उन्हें कंपार्टमेंटल परीक्षा देनी ही होगी।

















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यूपी बोर्ड परीक्षा 2020-21 मार्च-अप्रैल में, एकेडमिक कैलेंडर जारी, देखें

यूपी बोर्ड परीक्षा 2020-21 मार्च-अप्रैल में, एकेडमिक कैलेंडर जारी, देखें।


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने बृहस्पतिवार को शैक्षिक पंचांग (एकेडमिक कैलेंडर) जारी कर दिया। सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण अबकी बार यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 मार्च-अप्रैल में कराने का कार्यक्रम तय किया गया है। बोर्ड सचिव ने स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के लिए 18 अगस्त 2020 की तिथि तय की है। साथ ही हर महीने के अंत में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन परीक्षाएं भी होंगी।





यूपी बोर्ड सचिव की ओर से जारी शैक्षिक पंचांग में विभिन्न कक्षाओं में ऑनलाइन, ऑफलाइन शिक्षण कार्य पूरा करने के लिए 31 जनवरी 2021 तक का समय तय किया गया है। प्रयोगात्मक परीक्षाएं फरवरी 2021 के पहले एवं दूसरे सप्ताह में कराने की तैयारी है, जबकि प्री-बोर्ड परीक्षाएं फरवरी 2021 में तीसरे और चौथे सप्ताह में कराने की बात कही गई है।


जारी पंचांग के अनुसार अप्रैल 2021 में नया शैक्षिक सत्र शुरू करने की योजना है। बोर्ड ने अपने शैक्षिक पंचांग में पूरे वर्ष ऑनलाइन कक्षाएं और ऑनलाइन परीक्षा के साथ एनसीसी, स्काउट-गाइड की गतिविधियों के संचालन की बात भी कही है। बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों ,मंडलीय शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को शैक्षिक पंचांग भेज दिया गया है।











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