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Thursday, July 27, 2017

चंदौली : सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से आहत शिक्षा मित्रों ने विरोध में निकाला जुलूस, बीएसए का घेराव, प्रदर्शन

जागरण संवाददाता, चंदौली : सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से आहत शिक्षा मित्रों ने बुधवार को जुलूस निकालकर विरोध प्रकट किया। मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक अपर जिलाधिकारी को सौंपा। शिक्षा मित्रों ने कहा प्रदेश सरकार 1.70 लाख शिक्षा मित्रों के भविष्य के साथ न्याय करे। इसके पूर्व सदर ब्लाक में सभा हुई और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। शिक्षा मित्रों ने कहा न्यायालय ने अपने फैसले के पैरा 26 की अंतिम लाइन में कहा है कि शिक्षा मित्रों, समायोजित शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है। इसलिए अब पूरी आशा राज्य सरकार से है। राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करे। शिक्षा मित्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उचित निर्णय ले। वक्ताओं ने कहा 25 जुलाई को आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से 1.70 लाख शिक्षा मित्रों के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। लंबे समय से शिक्षा मित्र कड़ी मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा के सुधार में शिक्षा मित्र अहम कड़ी साबित हुए हैं। पूर्व की सरकार ने उनके मेहनत का ही प्रतिफल उन्हें दिया और दो-दो वर्ष का प्रशिक्षण दिलाकर सहायक अध्यापक पद पर उनका समायोजन कर दिया। उनका समायोजन रद होने से उनकी मन: स्थिति और कार्य करने की क्षमता गड़बड़ा गई है। सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उन्हें उनके सहायक अध्यापक पद पर बहाल करे। सभा में चेतावनी दी गई कि शिक्षा मित्र अपनी मांगों के समर्थन में गुरुवार से आंदोलन करेंगे। इस मौके पर जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव, राजेश सिंह, हेमंत मौर्य, श्रीराम द्विवेदी, अजीत, जेपी सिंह, ओपी, जयप्रकाश पांडेय, धर्मेंद्र, मनोज, सोनी, सुमन, सुषमा, संध्या, मनोरमा आदि शिक्षा मित्र मौजूद थे।

मुख्यालय पर जुलूस निकाल विरोध प्रकट करते शिक्षामित्र ’ जागरणजासं, नौगढ़(चंदौल ): उच्चतम न्यायालय के निर्णय से क्षुब्ध समायोजित शिक्षकों ने ब्लाक संसाधन केंद्र पर बुधवार को प्रदर्शन कर धरना दिया। सभा के दौरान शिक्षक पद पर समायोजित होने वालों ने टीईटी की परीक्षा होने तक पद पर बने रहने देने की सरकार से मांग की। 

धरने के दौरान पहुंचे बीएसए का घेराव कर प्रदर्शन किया गया। शिक्षकों ने कहा कि न्यायालय ने 17 वर्षों के अनुभव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पूर्ववर्ती सपा सरकार ने अनुभव के वरीयता को आधार मानते हुए सहायक अध्यापक पद पर समायोजन किया था। हाईकोर्ट के समायोजन रद्द के निर्णय को सही ठहराया, जो न्यायोचित नहीं है। निर्णय से शिक्षक काफी मर्माहत हैं और बेसिक विद्यालयों में पठन-पाठन पर भी इसका असर पड़ेगा।

बीएसए ने कहा अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। जो भी निर्णय शासन द्वारा लिया जाएगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान संतोष कुमार, पंकज दुबे, संत नारायण यादव, नंदलाल, कैलाश यादव, अशोक, भोलानाथ, चंदा, सविता, अनूप, प्रमोद, रामकेश समेत कई शिक्षक शामिल थे।

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