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Sunday, March 28, 2021

शिक्षामित्रों को नहीं मिल पाया मानदेय, होली हुई बेरंग

शिक्षामित्रों को नहीं मिल पाया मानदेय, होली हुई बेरंग


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षामित्र इस बार दो महीने से मानदेय न मिलने से परेशान हैं। सरकार ने सभी कर्मचारियों को होली से पहले वेतन, मानदेय देने का निर्देश दिया था किंतु विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगभग एक लाख तीस हजार शिक्षामित्रों को फरवरी और मार्च माह का मानदेय नहीं मिल सका है। जिसके कारण शिक्षामित्रों के परिवार में होली का त्यौहार सूना है।


 उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष लखनऊ सुशील कुमार यादव ने बताया की मुख्यमंत्री ने सभी विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी किया था की होली के त्यौहार से पहले सबको वेतन व मानदेय मिल जाना चाहिए, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते शिक्षामित्रों को फरवरी एवं मार्च माह का मानदेय नहीं मिल पाया है। जिसके कारण सभी शिक्षामित्रों के परिवार में होली का त्यौहार सूना है। 



संघ मुख्यमंत्री से मांग करता है कि होली से पहले मानदेय जारी न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। जिससे भविष्य में ऐसा दोबारा ना हो।

Saturday, March 20, 2021

यूपी : शिक्षामित्र इस साल नहीं मनाएंगे होली, सरकार की वादाखिलाफी से नाराज

यूपी : शिक्षामित्र इस साल नहीं मनाएंगे होली, सरकार की वादाखिलाफी से नाराज


लखनऊ। उप्र. दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी से नाराज शिक्षामित्र इस बार होली नहीं मनाएंगे। प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्रों को सरकार से बहुत उम्मीद थी।


लेकिन सरकार के चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में भी सीएम ने शिक्षामित्रों के लिए कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा मित्रों में मायूसी छा गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को श्रमिकों से भी कम मानदेय मिल रहा है। आर्थिक तंगी से शिक्षामित्र न माता- पिता का इलाज करा पा रहे हैं और न परिवार का पालन-पोषण ठीक से नहीं कर पा रहे हैं।

Saturday, March 6, 2021

फतेहपुर : वित्तविहीन शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता है मानदेय, सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार ने दिया जवाब, माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की दी चेतावनी

वित्तविहीन शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता है मानदेय, सदन में बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार ने दिया जवाब, माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की दी चेतावनी

फतेहपुर : शिक्षक संगठनों की मांग को दरकिनार करते हुए सरकार ने वित्त विहीन शिक्षकों के मानदेय का भुगतान करने से साफ मना कर दिया है। इसका लिखित जवाब बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने दिया है। उधर, माध्यमिक शिक्षक संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।


माध्यमिक शिक्षक संघ की मांग को लेकर शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने सदन में सवाल उठाया था। जिसमें कहा था कि कोरोना काल में वित्त विहीन शिक्षकों को मानदेय न मिलने से उनकी स्थिति खराब हो गई है। इसलिए उन्हें मानदेय दिया जाए। इसके जवाब में 24 फरवरी को मंत्री ने लिखित जवाब दिया है।

जिसमें कहा है कि वित्त विहीन शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का मानदेय प्रबंधतंत्र अपने निजी स्रोतों से करते हैं। इन विद्यालयों के लिए शासन स्तर से किसी तरह के अनुदान देने की व्यवस्था नहीं है। ऐसी हालत में इन्हें सरकारी खजाने में मानदेय देना संभव नहीं है।

उधर, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक शुक्ला ने कहा कि सरकार समान कार्य के समान वेतन के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर रही है। ऐसे में संघ जल्द ही बड़ा आंदोलन करेंगे।

Friday, March 5, 2021

मांग : शिक्षामित्रों का मानदेय दोगुना करे प्रदेश सरकार

मांग : शिक्षामित्रों का मानदेय दोगुना करे प्रदेश सरकार

उप्र. दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने की मांग

लखनऊ। उप्र. दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने प्रदेश सरकार से शिक्षामित्रों का मानदेय दोगुना करने की मांग की - है। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में मात्र दस हजार मानदेय में जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की रिपोर्ट को सरकार ने अब तक लागू नहीं किया है। यही नहीं सालभर में शिक्षामित्रों को सिर्फ 11 महीने का मानदेय दिया जा रहा है।


 उन्होंने कहा कि सरकार ने सदन में माना है कि शिक्षामित्र और अनुदेशक भी कई स्कूलों में एकल शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया जाना दुखद है। उन्होंने सरकार से शिक्षामित्रों को वरीयता का एक और मौका देने के लिए सहायक अध्यापकों की भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग की है।

Wednesday, February 24, 2021

केंद्र से बजट मिलने पर होगा प्रेरकों के अवशेष मानदेय का भुगतान

केंद्र से बजट मिलने पर होगा प्रेरकों के अवशेष मानदेय का भुगतान



बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि प्रेरकों के बकाया मानदेय का  भुगतान केंद्र सरकार की ओर से किया जाता है। 


प्रदेश सरकार ने केंद्र को प्रेरकों के मानदेय भुगतान का बजट जारी करने का प्रस्ताव भेजा है। केंद्र से बजट मिलते ही प्रेरकों के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।

परिवर्तन लागत और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

परिवर्तन लागत और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं


सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने मिड डे मील योजना में परिवर्तन लागत में वृद्धि और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का सवाल रखा।  


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि मिड डे मील योजना के तहत परिवर्तन लागत में वृद्धि करने, रसोइयों का मानदेय बढ़ाने, बच्चों को खाने के लिए बर्तन व कक्ष उपलब्ध कराने और रसोई को अध्ययन कक्ष से दूर स्थापित करने की सरकार की कोई योजना नहीं है।

Tuesday, February 23, 2021

क्या यूपी में शिक्षामित्रों का बढ़ेगा मानदेय? इस सवाल पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब

क्या यूपी में शिक्षामित्रों का बढ़ेगा मानदेय? इस सवाल पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब


विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान बेसिक शिक्षा मंत्री ने बसपा के श्याम सुंदर शर्मा के सवाल पर कहा कि शित्रामित्रों का मानदेय बढ़ाने पर सरकार फिलहाल कोई विचार नहीं कर रही। 


हुआ यूं कि प्रश्नकाल के दौरान बसपा के श्याम सुंदर शर्मा ने सवाल के जरिये जानना चाहा कि क्या सरकार शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शिक्षा मित्रों का मानदेय 3500 रुपये तक किया गया था। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया। फिलहाल, शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने पर कोई विचार नहीं हो रहा है।


इस पर श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई सीमा तय नहीं की है कि मानदेय न बढ़ाया जाए। सरकार चाहे तो दस हजार रुपये से बढ़ा भी सकती है। शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सदस्य बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं। ऐसा किसी खास वजह से किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने  टिप्पणी करते हुए कुछ ऐसा कहा जिस पर बसपा सदस्यों ने आपत्ति कर दी।


इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मंत्री के लिखित जवाब में स्पष्ट है कि मानदेय बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इस पर भी बसपा सदस्यों ने आपत्ति जारी रखी तो बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने अपने स्थान पर खड़े होकर कहा कि उनका ऐसा कोई आशय नहीं था। अगर उनकी बात से किसी को ठेंस लगी है तो वह क्षमा प्रार्थी है और अपने  शब्द वापस लेते हैं। इसके बाद ही मामला शांत हुआ।

Monday, February 15, 2021

शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और 10 लाख के सामूहिक बीमा के साथ मानदेय प्रतिमाह 30 हजार करने की मांग

शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और 10 लाख के सामूहिक बीमा के साथ मानदेय प्रतिमाह 30 हजार करने की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने सरकार से परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग की है। रविवार को दारुलशफा स्थित कार्यालय में आयोजित संघ की प्रांतीय बैठक में शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की समस्याओं पर चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए अनिल यादव ने कहा कि सरकार को शिक्षकों की जिले के अंदर स्थानांतरण की प्रक्रिया जल्द शुरू होनी चाहिए। परिषदीय शिक्षकों, एवं अनुदेशकों का 10 लाख का सामूहिक बीमा कराया जाए। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा से एनजीओ का दखल खत्म किया जाना चाहिए । उन्होंने शिक्षामित्रों के लिए बैठक में नई नियमावली बनाकर मानदेय 30 हजार रुपये करने, 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराकर उनका वेतन भुगतान कराने की भी मांग की। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों का भी 31 मार्च तक परिचय पत्र जारी करने और डायरी उपलब्ध कराने की मांग की।


उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट को भी सरकार जल्द लागू करे। संघ के प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र कुमार, संदीप दत्त, रश्मिकांत द्विवेदी, दिनेश यादव, पवन विद्या वर्मा, विद्या निवास यादव, फारूख अहमद सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

Monday, January 25, 2021

इसी हफ्ते जारी होगा शिक्षामित्रों का दो महीने का बकाया मानदेय

इसी हफ्ते जारी होगा शिक्षामित्रों का दो महीने का बकाया मानदेय


लखनऊ. प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को दो महीने से मानदेय नहीं मिला है. राज्य सरकार ने नवम्बर और दिसम्बर का भुगतान रोककर रखा है. ऊपर से अब धीरे धीरे जनवरी भी समाप्ति की ओर है. ऐसे में शिक्षा मित्रों और उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है लेकिन, खुशखबरी की बात ये है कि इसी हफ्ते बकाये मानदेय का भुगतान हो सकता है. डीजी स्कूली शिक्षा विजय किरण आनंद ने न्यूज़18 को बताया कि हर हाल में इस हफ्ते शिक्षामित्रों के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा. किसी भी सूरत में कोई भी विलंब की संभावना नहीं है.


बता दें कि बजट का आवंटन न हो पाने के कारण शिक्षामित्रों को मानदेय नहीं दिया जा सका है. अब बजट से संबंधित फाइल चल रही है और इसके जल्द ही जारी होने की संभावना बढ़ी है. उम्मीद की जा रही है कि इस हफ्ते के आखिर तक हर हाल में बजट जारी हो जायेगा और बकाये मानदेय का भुगतान बेसिक शिक्षा विभाग कर देगा. बता दें कि मानदेय न मिलने के कारण शिक्षामित्रों का नया साल सूखा-सूखा ही रहा. हालांकि शिक्षामित्रों के नेता अनिल यादव (अध्यक्ष, यूपी दूरस्थ बीटीसी शिक्षामित्र संघ) ने कहा कि उन्होंने कई दिन पहले विभागीय अफसरों से भेंट करके भुगतान की मांग की थी लेकिन, अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है.


बजट का आवंटन न हो पाने के कारण शिक्षामित्रों को मानदेय नहीं दिया जा सका है. अब बजट से संबंधित फाइल चल रही है और इसके जल्द ही जारी होने की संभावना बढ़ी है. उम्मीद की जा रही है कि इस हफ्ते के आखिर तक हर हाल में बजट जारी हो जायेगा।

इतना मिलता है मासिक मानदेय
प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में तैनात डेढ़ लाख शिक्षा मित्रों को 10 हजार रूपये प्रति माह के हिसाब से मानदेय दिया जाता है. इनके मानदेय में 60 फीसदी केन्द्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार का अंशदान होता है. इसी वजह से अक्सर बजट जारी होने में दिक्कत होती है और मानदेय का भुगतान लटक जाता है. प्रदेश में दो तरह के शिक्षा मित्र प्राइमरी स्कूलों में तैनात हैं. 1 लाख 35 हजार सर्व शिक्षा अभियान के तहत जबकि लगभग 15 हजार बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत.

Friday, January 8, 2021

सूबे के शिक्षामित्रों को दो माह से नहीं मिला मानदेय

सूबे के  शिक्षामित्रों को दो माह से नहीं मिला मानदेय


प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में कार्य लगभग डेढ़ लाख शिक्षामित्रों को नवंबर व दिसंबर का मानदेय अभी तक नहीं मिला है, जिसके चलते कोरोना काल में वे अपने परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पा रहे हैं।



शासन की ओर से अभी तक पिछले दो माह का मानदेय भुगतान का बजट जिलों को नहीं भेजा गया है। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि समायोजन निरस्त होने के बाद से शिक्षामित्र वैसे ही अवसाद ग्रस्त हैं, अब दो माह से मानदेय न मिलने से आधिक रूप से संकट से जूझ रहे हैं।

Monday, November 23, 2020

कमेटी की रिपोर्ट लागू करने के लिए सीएम को पत्र लिखेंगे शिक्षामित्र

कमेटी की रिपोर्ट लागू करने के लिए सीएम को पत्र लिखेंगे शिक्षामित्र


लखनऊ । प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्र 25 नवंबर को मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट लागू करने को मांग करेंगे।


उप्र. दूरस्थ शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने एक साल पहले अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी, लेकिन सरकार ने इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। 


शिक्षा मित्र सवा दो साल से मात्र 10 हजार रुपये के मानदेय पर काम कर रहे हैं, जबकि शिक्षा मित्रों से सहायक अध्यापकों के समान ही कार्य कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की नीतियों के कारण शिक्षा मित्र तनाव में रहते हैं।

Friday, November 13, 2020

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।

मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलेगा 70 दिन का मानदेय, केंद्र ने जारी किए 50 करोड़।


मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत प्रदेश के 25 हजार शिक्षकों को दो महीने दस दिन (70 दिन) का वेतन मिलेगा। दरअसल, मदरसा शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल नंदी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्र ने अपने हिस्से के 50 करोड़ 89 लाख रुपये जारी कर दिए।



मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत स्नातक शिक्षकों को 8000 और परास्नातक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र क्रमश: 3600 रुपये और 4800 रुपये देता है, लेकिन चार साल से केंद्र ने अपना अंशदान जारी नहीं किया था।इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि केंद्र से जारी धनराशि वर्ष 2016-17 की प्रथम किस्त का 40 फीसदी है। धीमी गति से मानदेय रिलीज करने से मानदेय और अधिक लंबित होता जा रहा है।  शिक्षकों के वेतन में मिलने वाला केंद्रांश बीते चार साल से नहीं मिल रहा है, जो अब बढ़कर 977 करोड़ रुपये हो गया है। 

Sunday, October 18, 2020

यूपी में आरोग्य मित्रों को दोगुने मानदेय की सौगात, अब पांच की जगह मिलेगा 10 हजार रुपये महीना

यूपी में आरोग्य मित्रों को दोगुने मानदेय की सौगात, अब पांच की जगह मिलेगा 10 हजार रुपये महीना।
  
उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत आने वाले चिकित्सालयों में कार्यरत आरोग्य मित्रों का मानदेय दोगुना कर दिया गया है।


आरोग्य मित्रों को वर्तमान में मानदेय के रूप में पांच हजार रुपये प्राप्त होता है जिसे बढ़ाकर अब 10 हजार रुपये कर दिया गया है।


अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवार एवं मातृ शिशु कल्याण अमित मोहन प्रसाद ने मानदेय बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है।


उन्होंने स्पष्ट किया है कि आरोग्य मित्रों के मानदेय का भुगतान संबंधित चिकित्सालय द्वारा योजना के अंतर्गत प्राप्त धनराशि से किया जाएगा। इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं किया जाएगा।

Thursday, September 10, 2020

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय

मदरसा शिक्षकों को चार साल से नहीं मिला केन्द्रांश मानदेय।

लखनऊ। मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कार्यरत 25 हजार शिक्षकों के केंद्रांश मानदेय चार साल से नहीं मिला है। इन शिक्षकों ने शासन के जरिये केंद्र को 8,000 और परास्नातक शिक्षकों को सरकार से मानदेय जारी करवाने की मांग की है। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद ने बताया कि योजना के अंतर्गत स्नातक शिक्षकों 15,000 मानदेय मिलता है। केंद्र सरकार को 8,000 में से 3600 रुपये और 15,000 में से 4,800 रुपये देने होते हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने चार साल से रुपये बकाया हो चुका है। राज्य सरकार ने केंद्रांश जारी करने के लिए कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिख चुकी हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण से एक टीम दिल्ली भेज कर अड़चनें दूर कराने की मांग की।



'जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर लगाएं रोक

लखनऊ : मदरसा शिक्षकों ने बोर्ड रजिस्ट्रार से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। शिक्षकों का आरोप है कि अधिकारी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए जारी शासनादेश के विपरीत अभिलेख मांग कर रहे हैं। प्रदेश के अनुदानित मदरसों के सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए एक सितंबर को शासनादेश जारी किया गया था। टीचर्स एसोसिएशन मदरसे अरबिया के महामंत्री हाजी दीवान साहेब जमा खां ने बताया कि बहराइच, मऊ, अंबेडकर नगर, वाराणसी मे अधिकारी अपना अलग प्रोफॉर्मा जारी कर अनुभव प्रमाण पत्र भी मांग रहे हैं।

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Saturday, September 5, 2020

शिक्षामित्रों को तीन माह से मानदेय का संकट, जून माह के मानदेय की उम्मीद अधर में

शिक्षामित्रों को तीन माह से मानदेय का संकट,  जून माह के मानदेय की उम्मीद अधर में

 

प्रयागराज : कोरोना संक्रमण के दौरान शिक्षामित्रों का नया रूप सामने आया है। वह केवल छात्र-छात्रओं की पढ़ाई ही नहीं करा रहे, बल्कि लोग स्वस्थ रहें इसका भी जतन कर रहे हैं। कोरोना योद्धा के रूप में कार्य करने वाले शिक्षामित्रों को तीन माह का मानदेय नहीं मिल सका है। इससे जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। उन्हें जून माह का मानदेय भुगतान होगा भी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।


प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से अधिक शिक्षामित्र तैनात हैं। अधिकांश जिलों में डीएम के आदेश पर शिक्षामित्रों को जून माह में सरकारी राशन की दुकानों पर नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया। पिछले वर्ष तक सरकार शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय नहीं दे रही है। ज्ञात हो कि शीर्ष कोर्ट के आदेश पर सरकार अगस्त 2018 से शिक्षामित्रों को संविदाकर्मी के रूप में 11 माह तक दस हजार रुपये प्रति माह देती रही है, जबकि पहले समायोजित शिक्षामित्रों को करीब 40 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता था।


इधर, शिक्षामित्रों को नए तरीके से मानदेय भुगतान होना है। इससे उन्हें जून, जुलाई व अगस्त माह का मानदेय नहीं मिल सका है, हालांकि सरकार ने जुलाई माह का भुगतान करने के लिए धन जारी कर दिया है लेकिन, तकनीक तैयार न होने से उन्हें भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं, जून माह के भुगतान पर असमंजस बना है। प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 20 वर्षो से एक शिक्षक के समान शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षामित्रों व उनके परिजनों की जिंदगी बदहाल है। वजह केवल तीन माह से मानदेय न मिलना ही नहीं है। बल्कि शिक्षामित्रों को समय पर मानदेय न मिलना आम बात है।


वादे के बाद भी भुगतान नहीं

शिक्षामित्र संघ उप्र के संयोजक शिवपूजन सिंह ने जून माह के मानदेय की मांग प्रदेश सरकार से किया था। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया, किंतु शिक्षामित्रों को जून माह का मानदेय नहीं मिला है।

Wednesday, September 2, 2020

चार माह से नहीं मिल रहा कस्तूरबा शिक्षकों को मानदेय

चार माह से नहीं मिल रहा कस्तूरबा शिक्षकों को मानदेय

 

प्रयागराज : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों को चार महीने से मानदेय नहीं मिल रहा है।


पिछले दिनों प्रदेशभर में शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी के मामले प्रकाश में आए थे। अनामिका प्रकरण सामने आने के बाद सभी जगहों पर सतर्कता बढ़ा दी गई। शिक्षकों व कर्मचारियों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच भी शुरू की गई। प्रयागराज में संचालित बीस विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के भी अभिलेख सत्यापन के लिए मांगे गए।


 इस दौरान सभी कर्मचारियों व शिक्षकों के मानदेय रोक दिए गए। यही वजह है कि मई, जून, जुलाई और अगस्त का पारिश्रमिक कर्मचारियों को नहीं मिला। समन्वयक ताज अंसारी ने बताया कि जिला स्तर पर सभी 243 कर्मियों के अभिलेखों की जांच पूरी कर ली गई है। सभी प्रपत्रों को संबंधित बोर्डो व विश्वविद्यालयों में भी सत्यापन के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक चरण में कोई भी संदिग्ध नहीं प्रतीत हुआ। जल्द ही पारिश्रमिक का भुगतान करा दिया जाएगा।

Saturday, August 29, 2020

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग


किसी के घर में राशन का संकट, कोई नहीं जमा कर पा रहा बच्चों की फीस

कोरोना काल में वेतन देने का सरकारी कोशिश बेअसर, नौकरी पर संकट भी


प्रयागराज। सरकारी दावे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं। खासकर वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक तो भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। अपने ही बच्चों की फीस जमा कर पाने में असमर्थ शिक्षकों के घर में अकसर राशन का संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे में साथी शिक्षक एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।


नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची। शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।

Sunday, August 23, 2020

हरदोई : रसोइयों ने मांगा लॉकडाउन का बकाया मानदेय

हरदोई : रसोइयों ने मांगा लॉकडाउन का बकाया मानदेय
 

हरदोई। रसोइया जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को बीएसए हेमंत राव को शिक्षा निदेशक के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।  पदाधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान क्वारंटीन सेंटरों में काम करने वाले रसोइयों के बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग की।


सौंपे गए ज्ञापन में जिलाध्यक्ष रामकुमार गौतम ने कहा कि रसोइयों ने कठिन समय में भी क्वारंटीन सेंटरों में दो माह का तक अपना काम ईमानदारी से किया, लेकिन अब तक का करने वाले रसोइयों को उस अवधि का मानदेय नहीं मिला है। कहा कि मानदेय न मिलने के कारण वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। 


कोरोना काल में लोगों को परेशानी न हो इसके लिए रसोइयों ने क्वारंटीन सेंटर पर बिना किसी संपत्ति के दिन रात काम किया है।
बावजूद इसके उनके बकाया रुपये अभी तक नहीं दिए गए। इससे परेशान होकर पदाधिकारियों ने जल्द से जल्द बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग की। इस मौके पर रामश्री, कमला, रेशमा, सुनीता, श्यामा व सुशीला आदि मौजूद रहीं।

Saturday, August 22, 2020

वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को मानदेय देने का प्रस्ताव नहीं : उप-मुख्यमंत्री

वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को मानदेय देने का प्रस्ताव नहीं : उप-मुख्यमंत्री।

लखनऊ : विधान परिषद में उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने बताया कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के मानदेय भुगतान के लिए प्रदेश सरकार ने इन विद्यालयों को एक-एक माह की फीस लेने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में सरकार द्वारा वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को मानदेय देने का कोई प्रस्ताव नहीं है।




शून्य प्रहर में शिक्षक दल के सुरेश कुमार त्रिपाठी और सपा के मधुकर जेटली की वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को मानदेय दिलाये जाने के संबंध में कार्यस्थगन सूचना के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों से इस साल फीस न बढ़ाने और परिवहन शुल्क न लेने के लिए कहा गया है।

निर्दलीय समूह के राज बहादुर सिंह चंदेल ने कानपुर नगर के लल्लू प्रसाद इंटर कालेज की प्रबन्ध समिति द्वारा गंभीर वित्तीय अनियमितता किये जाने का मामला उठाया। अधिष्ठाता ने कार्यस्थगन सूचना अस्वीकार कर दी।

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Wednesday, August 5, 2020

शिक्षामित्रों को जुलाई के मानदेय के लिए करना पड़ेगा इंतजार, अब नई प्रणाली से होगा भुगतान


शिक्षामित्रों को जुलाई के मानदेय के लिए करना पड़ेगा इंतजार, अब नई प्रणाली से होगा भुगतान

शिक्षामित्रों को अब पीएफएमएस से होगा मानदेय भुगतान 
राज्य परियोजना निदेशक के आदेश के बाद जिले में तैयारियां शुरू 


मैनपुरी जिले में कार्यरत शिक्षामित्रों को मानदेय भुगतान के लिए अब नई प्रणाली शुरू की जाएगी । शासन ने शिक्षामित्रों को पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) से मानदेय भुगतान के निर्देश दिए हैं। 


परियोजना निदेशक के निर्देश के बाद जिले में पीएफएमएस को प्रभावी बनाने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया है । नई प्रणाली के कारण जिले के सभी 1950 शिक्षामित्रों को जुलाई के मानदेय के लिए इंतजार करना होगा। 


जिले के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्रों को अभी तक सर्व शिक्षा अभियान के तहत मानदेय का भुगतान किया जाता था लेकिन जुलाई से उनके मानदेय के भुगतान के लिए शासन ने पीएफएमएस व्यवस्था की है।