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Wednesday, July 29, 2026

शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त,  कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

आयोग को कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार, पर आरटीई कानून का भी करना होगा पालन


नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का सांविधानिक अधिकार है, लेकिन यह भी उसकी जिम्मेदारी है कि इससे शिक्षकों पर अनावश्यक कार्यभार न पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्य तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह टिप्पणी शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लगाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।


 न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति  की अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार है। हालांकि, बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 27 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि किसी भी शिक्षक को स्कूल समय के दौरान चुनाव संबंधी कार्य नहीं दिया जा रहा है।


महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी रखें ध्यान

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिक्षक पूरे दिन छह से आठ घंटे पढ़ाने के बाद चुनाव संबंधी अतिरिक्त कार्य करेंगे तो उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ेगा। अदालत ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और विशेष रूप से महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखने की सलाह दी।

Thursday, January 8, 2026

अनियमितताओं को लेकर समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समायोजन करने की मांग को लेकर संगठन और एमएलसी हुए मुखर

अनियमितताओं को लेकर समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करते हुए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए समायोजन करने की मांग को लेकर संगठन और एमएलसी हुए मुखर







बिना कार्यमुक्त, कार्यभार ग्रहण कराए यू-डायस पर बदल दिए विद्यालय, अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए तीसरे चरण के समायोजन को रद्द करने की RSM की मांग

महासंघ ने शिक्षकों के समायोजन में लगाया अनियमितता का आरोप, अफसरों को भेजा ज्ञापन 


लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्राथमिक संवर्ग ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। साथ ही इन समायोजन को निरस्त करने की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक के विद्यालयों में शिक्षकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षकविहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों को समायोजित करने का आदेश शासन ने दिया था। इस क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक की जानी थी। लेकिन, जिला स्तर पर समायोजन में काफी गड़बड़ी की गई हैं।

उन्होंने कहा है कि जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण व विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर अलग-अलग मानक अपनाए गए हैं। कई जिलों में वरिष्ठ तथा कई में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित कर दिया गया है। इसमें शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की गणना शिक्षक के रूप में की गई है, जो पूर्व में जारी विभागीय आदेशों के विरुद्ध है। वहीं कुछ जिलों में सरप्लस शिक्षकों से विकल्प लेकर विद्यालय आवंटित किये गए हैं, तो कुछ में बिना विकल्प लिए ही शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया है।

प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जिलों में बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर शिक्षक भेज दिया गया। जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी। वहां से शिक्षक नहीं लिया गया। समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं।

प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन ने जिला स्तर पर किये गए समायोजन को निरस्त करने और कमियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजा गया है। 




अनियमितताओं के चलते जिला स्तर पर किए गए तीसरे चरण के समायोजन को निरस्त करने की RSM की मांग 

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ने उच्चाधिकारियों को भेजा ज्ञापन


लखनऊ । राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग) ने शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में की गई अनियमितता उजागर करते हुए इसे निरस्त करने की मांग उठाई है। प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा के अध्यापकों के शैक्षिक सत्र 2025-26 में तीसरे चरण के समायोजन में शिक्षक विहीन व एकल विद्यालयों में सरप्लस अध्यापकों को समायोजित करने के आदेश शासन द्वारा दिये गए थे जिसके क्रम में जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा अन्तः जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन की कार्यवाही 30 दिसंबर तक सम्पन्न की जानी थी, परन्तु जनपद स्तर पर समायोजन में भारी अनितामितायें की गयी हैं। 

जनपद स्तर पर सरप्लस शिक्षकों का निर्धारण एवं विद्यालय आवंटन में एकरूपता न होकर मनमाने तरीके से अलग-अलग मानक अपनाये गए हैं, जिससे कई जनपदों में वरिष्ठ शिक्षक तथा कई जनपदों में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस मानकर समायोजित किया गया है। प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने बताया कि प्रदेश के कुछ जनपदों एक बंद विद्यालयों को खोलने के लिए दूसरे विद्यालय को एकल कर में शिक्षक भेज दिया गया, जबकि अन्य विद्यालयों में संख्या पर्याप्त थी, वहाँ से शिक्षक नहीं लिया गया। 

समायोजित शिक्षकों को विद्यालय से कार्यमुक्त/कार्यभार ग्रहण कराये बिना ही यू-डायस पोर्टल पर उनके विद्यालय बदल दिये गए हैं, जो कि बेसिक शिक्षा परिषद में स्थापित विभागीय व्यवस्था के एकदम विपरीत है। प्रदेशीय मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन द्वारा जनपद स्तर पर किये गए नियमविरुद्ध समायोजन को निरस्त करने और त्रुटियों को दूर कराकर एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के उपरान्त ही समायोजन की कार्यवाही करने की मांग अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, बेसिक शिक्षा निदेशक व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को ज्ञापन भेजकर की गई है।







तीसरे समायोजन में हो रही व्यापक अनियमितताओं तथा SIR में लगे BLO को शीत अवकाश का प्रतिकर अवकाश दिए जाने के सम्बंध में की मांग 


Tuesday, December 9, 2025

शिक्षामित्रों को बीएलओ ड्यूटी के दबाव से राहत दिलाएं, शिक्षामित्र संघ की मांग

शिक्षामित्रों को बीएलओ ड्यूटी के दबाव से राहत दिलाएं, शिक्षामित्र संघ की मांग 


लखनऊ। प्रदेश में बीएलओ के काम में लगे शिक्षकों व शिक्षामित्रों की नाराजगी कम नहीं हो रही है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने आए दिन शिक्षामित्रों के साथ हो रही दुर्घटना को देखते हुए उनको बीएलओ ड्यूटी के दबाव से राहत दिलाने की मांग की है। साथ ही इस कार्य में अन्य कर्मचारियों को भी तैनात करने की मांग उठाई है। सोमवार को संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से मिला। 


संघ के अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि बीएलओ ड्यूटी में लगे कई शिक्षामित्रों के साथ दुर्घटना हो चुकी है। हाल ही में गोंडा के शिक्षामित्र नान बच्चा सोनकर की तबीयत बहुत खराब हो गई है। वे लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में आईसीयू में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि महानिदेशक ने डीएम गोंडा से बात करके तत्काल प्रभाव से शिक्षामित्र की आर्थिक मदद करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से निर्वाचन कार्य में लगे सभी शिक्षामित्रों को बीमा कवर का लाभ देने की मांग की।


मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दिया ज्ञापन: शिक्षामित्र संघ ने देर शाम मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को सभी बीएलओ शिक्षामित्रों को बीमा का लाभ देने की मांग की है। जैसे निर्वाचन के समय किसी भी घटना पर सरकार द्वारा सहायता की जाती है, उसी तरह की सहायता बीएलओ शिक्षामित्र की जाए। मुख्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि वे केंद्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस गंभीर विषय पर कार्रवाई की मांग करेंगे। 

Tuesday, December 2, 2025

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक, बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक,  बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

01 दिसम्बर 2025
 लखनऊः विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान में तैनात कई बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) की मौत के बाद पूरे प्रदेश में शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। संगठनों का कहना है कि शिक्षकों का मूल कार्य बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन प्रशासन उन्हें जबरन निर्वाचन संबंधी कठिन और दबाव भरे कामों में लगा रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कई शिक्षकों को पहली बार यह जिम्मेदारी मिली है। तकनीकी दिक्कतों, जनसहयोग की कमी और लक्ष्य पूरा न होने पर दिए जा रहे दंडात्मक निर्देशों के कारण वे भारी तनाव में हैं।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि मौजूदा हालात शिक्षक समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर रहे हैं। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। संगठन ने मांग की है कि मृत शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिजन को सरकारी नौकरी, माता पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा और बच्चों की निश्शुल्क शिक्षा दी जाए। 10 दिसंबर से परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं और उसके बाद निपुण आकलन होना है। ऐसे में विद्यालयों में स्टाफ की कमी से परीक्षाएं प्रभावित होंगी। इसलिए सभी शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से तुरंत मुक्त किया जाए।



शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग, शिक्षक संगठनों ने बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

कहा- स्कूलों में प्रभावित हो रही पढ़ाई, बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

दिवंगत बीएलओ के परिजनों को नौकरी और 50 लाख मुआवजा देने की मांग

27 नवंबर 2025
लखनऊ। शिक्षक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि काम के दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे शिक्षकों में भी भय व्याप्त है। संगठनों ने सीएम से शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग की है। साथ ही काम का तनावमुक्त माहौल बनाने की मांग उठाई है।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व महामंत्री उमाशंकर सिंह ने सीएम को पत्र भेजकर यह मांग उठाई है। इसमें उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी लगने से परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम में भी शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाने पर स्पष्ट रोक है। परिषदीय स्कूलों में 10 दिसंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं ऐसे में इस समय बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने बीएलओ पर अधिकारियों द्वारा दबाव बनाने का आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने मांग की दिवंगत बीएलओ के परिजनों को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया जाए।

साथ ही एसआईआर के काम का समय बढ़े और बीएलओ के सहयोग के लिए दो अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। अनिल ने कहा, जिन अधिकारियों दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हुए हैं उसकी जांच कराके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

Saturday, August 23, 2025

बेसिक शिक्षकों को BLO ड्यूटी से मुक्त करने की PSPSA ने उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग से की मांग

बेसिक शिक्षकों को BLO ड्यूटी से मुक्त करने की PSPSA ने उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग से की मांग


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को बीएलओ व बीएलओ सुपरवाइजर की ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की गई है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन भेजा है।


एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा है कि सामान्य ग्राम पंचायत निर्वाचन 2026 के अंतर्गत परिषदीय शिक्षकों की बीएलओ व सुपरवाइजर के रूप में ड्यूटी लगाई जा रही है। यह गैर शैक्षणिक कार्य है। साथ ही नियमों के अनुसार भी नहीं है। अधिकांश परिषदीय शिक्षक बीएलओ स्थल की मतदाता सूची का न तो मतदाता है और न 10 किलोमीटर की परिधि के निवासी हैं। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित होता है। वर्तमान में विद्यालयों के विलय आदि की प्रक्रिया चल रही है। परीक्षाएं भी जल्द प्रस्तावित हैं। 


Thursday, August 14, 2025

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण के सम्बन्ध में शैक्षणिक संस्थानों के प्रवेश रजिस्टर की उपलब्धता सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा बूथ लेवल अधिकारियों तक कराने हेतु आदेश

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण के सम्बन्ध में शैक्षणिक संस्थानों के प्रवेश रजिस्टर की उपलब्धता सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा बूथ लेवल अधिकारियों तक कराने हेतु आदेश 


Tuesday, June 10, 2025

BLO : बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षामित्र, अनुदेशक या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं

बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षामित्र, अनुदेशक या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं 


लखनऊ । बीएलओ की तैनाती के लिए ईआरओ यानी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर की मर्जी नहीं चलेगी। निर्वाचन आयोग के सचिव पवन दीवान की ओर से यूपी समेत सभी राज्यों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। अब बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षा मित्र या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं की जा सकेगी। 


यह निर्देश मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सभी जिलों के डीईओ, ईआरओ तक पहुंचाने के बाद 20 जून तक जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी। इस संबंध में 23 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक में निर्णय लिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग की ओर से निर्देश दिए गए हैं। 


इसमें मतदाता सूची 2023 मैनुअल के निर्देशों में संशोधन किया गया है। इसके अनुसार ईआर ओ मतदाता सूची के प्रत्येक हिस्से के लिए एक बीएलओ तैनात करेगा। बीएलओ राज्य सरकार के ग्रुप सी या उससे ऊपर के नियमित सेवारत कर्मचारियों में से होगा। 


नियमित राज्य या स्थानीय कर्मचारी न होने की स्थिति में ईआरओ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों अनुबंध शिक्षकों या केन्द्र सरकार के कर्मचारियों में से बीएलओ की नियुक्ति कर सकता है। बावजूद इसके इस मामले में सीईओ को ईआरओ की ओर से हस्ताक्षर किया हुआ एक अनुपलब्धता प्रमाणपत्र देना होगा। ईआरओ के प्रमाणपत्र को जिलाधिकारी यानी डीईओ सत्यापित करते हुए आगे भेजेंगे।


सिर्फ लखनऊ में ही 3387 बीएलओ

सिर्फ लखनऊ में ही 3387 बीएलओ की तैनाती है। बावजूद इसके 1200 से 1500 तक बीएलओ चुनाव में कम पड़ जाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एडेड स्कूलों के टीचरों की ड्यूटी लगाई गई थी। अब समूह घ से नीचे के कर्मचारियों की तैनाती से पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।

Thursday, September 19, 2024

निपुण लक्ष्य हासिल करने में जुटे बेसिक शिक्षकों को BLO ड्यूटी से मुक्त करने के सम्बन्ध में RSM का सीएम योगी को ज्ञापन

निपुण लक्ष्य हासिल  करने में जुटे बेसिक शिक्षकों को BLO ड्यूटी से मुक्त करने के सम्बन्ध में RSM का सीएम योगी को ज्ञापन


Wednesday, January 24, 2024

बीएलओ बने शिक्षकों का इसी सप्ताह हो सकता है स्थानांतरण, मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य पूर्ण होने से खुली स्थानांतरण की राह

बीएलओ बने शिक्षकों का इसी सप्ताह हो सकता है स्थानांतरण, मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य पूर्ण होने से खुली स्थानांतरण की राह


प्रयागराज : प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद अंतःजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण के लिए तालमेल (पेयर) बनाए उन शिक्षक व शिक्षिकाओं को भी अब कार्यमुक्त करने की राह खुल गई है, जिनका पारस्परिक स्थानांतरण बेसिक शिक्षा परिषद सचिव ने बीएलओ का दायित्व निर्वहन करने के कारण रोक दिया था। इसके पहले शिक्षकों की ओर से निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगकर कार्यमुक्त और कार्यभार ग्रहण कराने की मांग की गई थी।


जिले के अंदर पारस्परिक स्थानांतरण देने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने शिक्षक/शिक्षिकाओं से आपस में तालमेल बनवाया था। लंबी प्रतीक्षा के बाद यह स्थानांतरण पाने की उम्मीद में शिक्षक/ शिक्षिकाओं ने तालमेल बनाया था। 


जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा सत्यापन कराए जाने के बाद 20752 शिक्षक/शिक्षिकाएं इसके लिए अर्ह पाए गए थे। इन सभी को 11 से 13 जनवरी के मध्य कार्यमुक्त और नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश प्रदेश के सभी बीएसए को परिषद सचिव ने दिए थे। 


यह प्रक्रिया शुरू ही हुई कि 12 जनवरी को उन शिक्षक/ शिक्षिकाओं को कार्यमुक्त करने से सचिव के आदेश पर बीएसए ने रोक दिया, जिनके ऊपर बीएलओ को दायित्व था। उन्हें भी कार्यमुक्त करने से रोक दिया गया, जिन्होंने भिन्न विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) के शिक्षकों के साथ तालमेल बनाया था। हालांकि भिन्न विद्यालय वाले मामले में सचिव ने अपना आदेश बदलकर कार्यमुक्त और कार्यभार कराने के निर्देश दिए।

Friday, January 19, 2024

मांग : बीएलओ और छुट्टी पर चल रही महिला शिक्षकों को करें कार्यमुक्त

मांग : बीएलओ और छुट्टी पर चल रही महिला शिक्षकों को करें कार्यमुक्त


लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षकों के परस्पर तबादले में आ रही दिक्कतों को लेकर बृहस्पतिवार को विभागीय अधिकारियों से मुलाकात की। इसके माध्यम से उन्होंने बीएलओ ड्यूटी में लगे शिक्षकों, छुट्टी पर चल रही महिला शिक्षकों के नियमानुसार रिलीविंग की मांग की।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव अपर्णा यू, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा, बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल से अलग-अलग मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया और कहा कि जिन शिक्षकों का स्थानांतरण बीएलओ होने के कारण रोका गया है, इनके लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेकर जल्द आदेश किया जाए। 


जिन महिला शिक्षकों का स्थानांतरण सीसीएल या मैटरनिटी लीव पर होने के कारण नहीं हो सका है, पोर्टल पर आवेदन लेकर उनको इसका लाभ दिया जाए। इस दौरान प्रदेश सचिव श्याम शंकर यादव, अमित सिंह, इरशाद अली आदि भी उपस्थित थे।

Friday, May 12, 2023

चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षक, बीएलओ, कर्मचारियों को एक दिन का अवकाश दिए जाने संबंधी बीएसए बुलंदशहर का आदेश जारी

चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षक, बीएलओ, कर्मचारियों को एक दिन का अवकाश दिए जाने संबंधी बीएसए बुलंदशहर का आदेश जारी


Friday, January 6, 2023

UP : सहायक अध्यापकों से कानून के खिलाफ बीएलओ ड्यूटी न लेने का हाईकोर्ट ने दिया DGSE को निर्देश

UP : सहायक अध्यापकों से कानून के खिलाफ बीएलओ ड्यूटी न लेने का हाईकोर्ट ने दिया DGSE को निर्देश



प्रयागराज : कोर्ट ने महानिदेशक स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह याची की अर्जी पर जिलाधिकारी कौशाम्बी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कौशाम्बी को कानून का पालन करने का जरूरी निर्देश जारी करें। सहायक अध्यापकों से गैर शैक्षणिक कार्य न कराया जाए।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 की धारा 27 के उपबंधों का पालन करते हुए सहायक अध्यापकों से गैर शैक्षणिक कार्य न लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने महानिदेशक स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह याची की अर्जी पर जिलाधिकारी कौशाम्बी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कौशाम्बी को कानून का पालन करने का जरूरी निर्देश जारी करें।


सहायक अध्यापकों से गैर शैक्षणिक कार्य न कराया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने आनंद कुमार व 73 अन्य कौशाम्बी के प्राइमरी स्कूलों के सहायक अध्यापकों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।


याची की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने सुनीता शर्मा केस में स्पष्ट तौर पर सहायक अध्यापकों से गैर शैक्षणिक कार्य न लेने का निर्देश जारी किया है। इसके बावजूद याचियों को बीएलओ ड्यूटी पर लगाया जा रहा है। याचीगण का कहना  है कि बीएलओ ड्यूटी अन्य कर्मचारियों से ली जाए। बहुत जरूरी हो तो छुट्टियों में लगाया जाए। कोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापकों से अनिवार्य शिक्षा कानून के खिलाफ  बीएलओ का कार्य लेने का आदेश कायम रहने योग्य नहीं है।

Thursday, November 25, 2021

अध्यापकों से BLO ड्यूटी कराने के मामले की सुनवाई करेगी विशेष न्यायपीठ

अध्यापकों से BLO ड्यूटी कराने के मामले की सुनवाई करेगी विशेष न्यायपीठ



 प्रयागराज : बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों से मतदाता सूची के सत्यापन का कार्य लिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं व विशेष अपीलों की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की विशेष पीठ करेगी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कमलेश यादव की विशेष अपील पर दिया है। 


अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बीएलओ ड्यूटी लगाए जाने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है। वहीं, शिवशंकर सिंह केस में 16 अगस्त 2021 के आदेश से एकलपीठ ने बीएलओ ड्यूटी लगाने के आदेश पर रोक लगा दिया। दो न्यायपीठ के फैसले में भिन्नता है, उसका निराकरण किया जाय। इस संबंध में लखनऊ पीठ व इलाहाबाद प्रधानपीठ में लंबित कई विशेष अपीलों व याचिकाओं का हवाला दिया गया।


 अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एकलपीठ द्वारा याचिका खारिज करने का निर्णय सही है। कोर्ट ने बड़ी संख्या में लंबित याचिकाओं को देखते हुए सरकारी अधिवक्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ खंडपीठ के सभी मुकदमों की सूची प्रस्तुत करने और साथ ही निदेशक बेसिक शिक्षा से जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।


 साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यदि निदेशक मांगी गई सूचनाएं नहीं उपलब्ध कराते हैं या अपूर्ण जानकारी दी जाती हैं तो अदालत उनको व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानेगी।

Tuesday, November 23, 2021

हरदोई में बीएलओ की ड्यूटी से परेशान शिक्षक ने फांसी लगाकर दी जान, चार दिसंबर को थी शादी

हरदोई में बीएलओ की ड्यूटी से परेशान शिक्षक ने फांसी लगाकर दी जान, चार दिसंबर को थी शादी


शहर के मुहल्ला सुभाषनगर में किराए के मकान में रह रहे परिषदीय विद्यालय के शिक्षक ने फांसी लगाकर जान दे दी। मूल रूप से लखनऊ निवासी शिक्षक की टोडरपुर विकास खंड में तैनाती थी। घटना के पीछे बीएलओ व टीकाकरण ड्यूटी से परेशान रहना बताया गया है। शिक्षक अनिल कुमार की शादी शहर के राधानगर में तय हुई थी। चार दिसंबर को ही शादी थी



हरदोई  । शहर के मुहल्ला सुभाषनगर में किराए के मकान में रह रहे परिषदीय विद्यालय के शिक्षक ने फांसी लगाकर जान दे दी। मूल रूप से लखनऊ निवासी शिक्षक की टोडरपुर विकास खंड में तैनाती थी। घटना के पीछे बीएलओ व टीकाकरण ड्यूटी से परेशान रहना बताया गया है। हालांकि, कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ड्यूटी को लेकर कोई शिकायत की बात सामने आई है।


लखनऊ के प्रियदर्शनी कालोनी 01-277 सेक्टर बी निवासी अनिल कुमार पुत्र गोधन लाल का वर्ष 2018 शिक्षक भर्ती में चयन हुआ था और टोडरपुर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय करावां में वह सहायक अध्यापक थे। वर्तमान में वह सुभाषनगर में किराए के मकान में अपने भाई अतुल कुमार के साथ रहते थे। अतुल कुमार भी बावन के प्राथमिक विद्यायल सौरंगपुर में सहायक अध्यापक है। 


अतुल कुमार ने बताया कि भाई अनिल कुमार बीएलओ और कोबिड टीकाकरण ड्यूटी को लेकर परेशान रहते थे। सोमवार को उन्हें शाहाबाद बीएलओ प्रशिक्षण में जाना था, लेकिन नहीं गए वह विद्यालय चला गया, जबकि उसकी पत्नी नीतू आजादनगर स्थित अपने मायके गई थी। घर पर भाई अनिल कुमार ही थे।


अतुल कुमार के अनुसार शाम को जब वह घर वापस लौटा तो कमरा अंदर से बंद था। दरवाजा घटखटाने के बाद नहीं खुला तो उसने दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा तोड़ते देख कि उसका शव छत के कुंडे से रस्सी से लटका था। उसके होश उड़ गए। उसने पुलिस को घटना को जानकारी दी, जिसके बाद सभी मौके पर पहुंचे। अनिल कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में जान देने का कारण ड्यूटी से परेशानी बताया है। कोतवाल दीपक शुक्ला ने बताया कि अतुल कुमार का कहना है कि भाई अनिल कुमार बाइक चलाना नहीं जानते थे और तभी ड्यूटी को लेकर परेशान रहते थे। उन्होंने बताया कि किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है और न ही कोई सुसाइड नोट मिला है। 


चार दिसंबर को थी शादीः शिक्षक अनिल कुमार की शादी शहर के राधानगर में तय हुई थी। चार दिसंबर को ही शादी थी, स्वजन का कहना है कि घर में शादी की तैयारियां चल रहीं थी, किसी को क्या पता था कि इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। अनिल कुमार के जान देने के स्वजन में कोहराम मचा है वहीं उनके साथी शिक्षक व अन्य में शोक है।

Sunday, October 31, 2021

गोण्डा : कोर्ट आर्डर के बाद प्रा0शि0संघ की मांग पर जिलाधिकारी की सहमति अनुसार शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने का आदेश जारी

गोण्डा : कोर्ट आर्डर के बाद प्रा0शि0संघ की मांग पर जिलाधिकारी की सहमति अनुसार शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने का आदेश जारी



Wednesday, September 29, 2021

हाथरस : बीएलओ ड्यूटी न करने पर वेतन रोकने के आदेश को मा0 उच्च न्यायालय ने किया रद्द, वेतन देने का आदेश जारी

हाथरस : बीएलओ ड्यूटी न करने पर वेतन रोकने के आदेश को मा0 उच्च न्यायालय ने किया रद्द, वेतन देने का आदेश जारी





 

Tuesday, September 21, 2021

बीएसए को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का हक नहीं, बीएलओ की ड्यूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

बीएसए को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का हक नहीं, बीएलओ की ड्यूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

 
■  मामला : देखें कोर्ट आर्डर 👇

● बीएलओ की डॺूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

● कोर्ट ने कहा, शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते 


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। साथ ही बीएलओ ड्यूटी नहीं करने वाले सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का बीएसए फिरोजाबाद का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सहायक अध्यापक को वेतन सहित सेवा में बहाल करने का आदेश भी दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सहायक अध्यापक कैलाश बाबू की याचिका पर अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार बीएसए ने याची की बूथ लेवल अधिकारी के कार्य के लिए ड्यूटी लगाई थी। ड्यूटी न करने पर सात अगस्त 2021 को बीएसए फिरोजाबाद में याची का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। 


अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का तर्क था कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। साथ ही जहां तक बीएलओ ड्यूटी का सवाल है, हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सुनीता शर्मा व अन्य के केस में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। कोर्ट ने इस तर्क के मद्देनजर बीएसए का सात अगस्त 2021 का आदेश रद्द कर दिया और याची को वेतन सहित बहाल करने का निर्देश दिया है।



HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
Court No. - 6
Case :- WRIT - A No. - 12203 of 2021

Petitioner :- Kailash Babu And Another
Respondent :- State Of U.P. And 4 Others
Counsel for Petitioner :- Agnihotri Kumar Tripathi
Counsel for Respondent :- C.S.C.,Archana Singh,Bhupendra Kumar Yadav

Hon'ble Pankaj Bhatia,J.
Heard learned counsel for the parties.
The present writ petition has been filed challenging the order dated 07.08.2021, passed by Basic Shiksha Adhikari, Firozabad (respondent no. 5) whereby the salary of the petitioner has been stopped on account of non-performing the duties of booth level officer.

The counsel for the petitioners argues that the said order is bad on more than one count, firstly, the respondent has no authority under law to stop the salary even if the allegations are accepted to be correct and, secondly, this Court, in the case of Sunita Sharma vs. State of U.P. and others, 2015 (3) ESC 1289 (All.) (DB) had taken a decision that the petitioners being forced to carry out the duties of BLO is without any authority of law. The decision of this Court in the case of Sunita Sharma (supra) is very clear that the teachers similar to the petitioners cannot be forced to carry out the duties of BLO.

In view of the said judgement coupled with the fact that the respondent has no authority to withhold the salary as has been done by means of the impugned order dated 07.08.2021 (Annexure 1 to the writ petition) the same is set aside insofar as it relates to the petitioners with directions that the petitioners shall be permitted to continue to work and shall be paid salary to which they are entitled under law.
The petition is disposed off in terms of the said direction.

Copy of the order downloaded from the website of Allahabad High Court shall be accepted/treated as certified copy of the order.

Order Date :- 17.9.2021
Puspendra

Friday, August 13, 2021

हाथरस : 32 बीएलओ को मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी, देखें

हाथरस : 32 बीएलओ को मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी, देखें






 

Tuesday, June 15, 2021

यूपी विधानसभा चुनाव में बीएलओ नहीं बनेंगे शिक्षामित्र

यूपी विधानसभा चुनाव में बीएलओ नहीं बनेंगे शिक्षामित्र


लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2022 की मतदाता सूची पुनरीक्षण और मतदान से जुड़े कार्यों के लिए शिक्षा मित्रों को बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) नियुक्त नहीं किया जाएगा।


निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों को बीएलओ नियुक्त न करने, पहले से बीएलओ नियुक्त शिक्षा मित्रों को हटाकर अन्य कर्मचारियों को बीएलओ बनाने के दिए हैं। 


प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.63 लाख बूथ है। प्रत्येक बूथ पर एक बीएलओ नियुक्त किया जाता है। हर जिले में बड़ी संख्या में शिक्षा मित्रों को बीएलओ नियुक्त किया गया है। 


निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए शिक्षा मित्रों को बीएलओ नियुक्त न करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने आयोग के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि शिक्षा मित्रों को बीएलओ पद से हटाना गलत है।

Sunday, December 6, 2020

परिषदीय शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी पर हाइकोर्ट ने दिया नए सिरे से विचार कर निर्णय लेने का निर्देश

परिषदीय शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी पर हाइकोर्ट ने दिया नए सिरे से विचार कर निर्णय लेने का  निर्देश


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों की चुनाव में बीएलओ ड्यूटी लगाने के मामले में एसडीएम कासगंज से दो माह में नए सिरे से विचार कर निर्णय लेने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने समिता महेश्वरी व कई अन्य की याचिका पर अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है।


एसडीएम कासगंज ने याचियों की स्थानीय चुनाव में बूथ लेबल अफसर के तौर पर ड्यूटी लगा दी है जबकि हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रादेशिक शिक्षक संघ बांदा के मामले में कहा है कि प्राथमिक शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती। ऐसा करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। सरकारी वकील का कहना था कि एसडीएम हाईकोर्ट के निर्णय के आलोक में अपने आदेश पर दो माह में पुनर्विचार कर निर्णय लेंगे। सरकारी वकील के इस कथन के बाद कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।