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Wednesday, February 24, 2021

शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने की उठाई मांग

शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने की उठाई मांग

लखनऊ। शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सुरेश कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में असाध्य रोगों के इलाज के लिए शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने का मुद्दा उठाया। कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए ध्रुव कुमार ने कहा कि शिक्षक कल्याण कोष और अनिवार्य बीमा की जो व्यवस्था थी उसे खत्म कर दिया गया है। सरकार ने शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा की कोई घोषणा बजट में भी नहीं की है। 


इसके जवाब में नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा कहा कि कोविड काल के दौरान सभी का निशुल्क इलाज किया गया है। शिक्षकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा पहले से दी जाती रही है। शिक्षकों को चिकित्सीय सहायता की जो सुविधाएं पूर्व में दी जाती थीं, उसे सपा सरकार ने 18 जून 2015 को खत्म कर दिया था। निर्दलीय समूह के राज बहादुर सिंह चंदेल ने वित्त विहीन शिक्षकों को पारिश्रमिक देने का मामला उठाया। इस पर नेता सदन ने कहा कि न तो मुख्यमंत्री ने और न ही उन्होंने ऐसा कोई वादा किया था

मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी

मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी


लखनऊ : प्रदेश सरकार अब मदरसा शिक्षकों का भी तबादला करेगी। इसके लिए सरकार मदरसा नियमावली में संशोधन करने जा रही है। नियमावली में ऐसे प्रविधान किए जा रहे हैं, जिससे प्रबंधकों की मनमानी पर भी अंकुश लग सके। सरकार मदरसा शिक्षकों की भर्तियां भी चयन आयोग से कराने पर विचार कर रही है।


प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें करीब नौ हजार शिक्षक हैं। मदरसों के लिए उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा नियमावली लागू है। प्रदेश सरकार इस नियमावली में नई शिक्षा नीति के अनुसार संशोधन करने जा रही है।

Monday, February 15, 2021

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी


राजधानी के सभी ब्लाकों और नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुलने शुरू हो चुके हैं। लेकिन इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की वापसी कोरोना ड्यूटी से अभी तक नहीं हो सकी । इस स्थिति में विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सभी ब्लाकों के बीईओ का कहना है शिक्षकों की ड्यूटी कोरोना पीरीयड में लगायी गयी थी, लेकिन अभी तक शिक्षकों की वापसी नहीं हो पायी है। इस स्थिति में शिक्षकों की कमी है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है शासन की ओर से जो निर्णय होगा उसका पालन किया जायेगा। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि शिक्षकों की वापसी 1 मार्च तक स्कूलों में हो जायेगी।



हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी पर विभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी परःविभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों समेत सभी नगर क्षेत्र से 18 से 20 शिक्षक कोरोना ड्यू टी पर लगाये 
गये थे। लेकिन अभी तक इनकी वापसी नहीं हो पायी है। जबकि स्कूल खुलते बच्चे आने भी शुरू हो गये हैं और मध्यान्ह भोजन भी बनना शुरू हो गया है।


डीएम के आदेश पर लगी है ड्यूटी : कोरोना काल में हर ब्लाक से शिक्षकों की ड्यूटी जिलाधिकारी के आदेश पर लगायी गयी थी, लेकिन अभी इनकी वापसी कबतक होगी इस पर भी निर्णय जिला प्रशासन को ही लेना है। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है एक मार्च से शिक्षकों की वापसी हो सकती है।

Tuesday, February 9, 2021

नवनियुक्त शिक्षक - शिक्षिकाओं के लिए ढूंढे जा रहे रिश्ते, BSA ऑफिस, BRC व स्कूलों तक पहुँच रहे लोग

नवनियुक्त शिक्षक - शिक्षिकाओं के लिए ढूंढे जा रहे रिश्ते, BSA ऑफिस, BRC व स्कूलों तक पहुँच रहे लोग



कन्नौज:- इंत्रनगरी के प्राथमिक स्कूलों को मिले करीब 1400 सहायक शिक्षक और शिक्षिकाओं में से बिन व्याहे लोगों में वर-वधू की तलाश शुरू हो गई है। इसके लिए बेसिक शिक्षा महकमे और परिषदीय स्कूलों में लोग पहुंच रहे हैं। परिचित टीचर और कर्मियों से भी जानकारी कर रहे हैं। 


शादी के लिए लोग सरकारी वर या वधू की तलाश अधिक करते हैं, इसमें शिक्षा महकमे से जुड़े लोगों की वरीयता अधिक रहती है। शिक्षक की नौकरी सम्मान और मकान की मानी जाती है। जिले में पहले चरण में 312 और दूसरे चरण में 1081 ने नौकरी के लिए काउंसिलिंग कराई गई थी। इसमें कई अविवाहित शिक्षक और शिक्षिकाएं भी हैं। दूसरी शिफ्ट में करीब 600 महिला टीचर हैं। 


इन दिनों बीएसए दफ्तर में नए टीचरों की जानकारी के लिए लोग पहुंच रहे हैं। बाबू समेत अन्य कर्मियों से रिश्ते के बाबत नए मास्साव की कुंडली खंगाल रहे हैं। बीआरसी और कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले परिचित टीचर से भी नए शिक्षक और शिक्षिकाओं के बारे में जानकारी कर रहे हैं। 


दूसरे जिलों के अध्यापकों के लिए यह भी है वजह 
शिक्षक भर्ती के दौरान कई ऐसे युवक-युवतियां हैं, जो दूसरे जिले से हैं उनकी यहां तैनाती हुई है। उनमें से कई अविवाहित हैं। ऐसे मैं उनके अभिभावकों का यह मानना है कि अपने बच्चों के लिए अगर यही उनके ही विभाग में ही काम करने वालों के बीच से कोई मुनासिब रिश्ता मिल जाए तो यह दोनों के लिए बेहतर सावित होगा। 


बीआरसी से ही थी तलाश
बीआरसी सदर में जब नई भर्ती के शिक्षकों की हाजिरी लग रही थी, तब से ही लोगों को रिश्ते की तलाश थी। अब स्कूलों का आवंटन हो जाने के बाद से प्रक्रिया में तेजी आई है, कारण स्कूल में परिचितों को ही इसमें मध्यस्त बनाना चाहते हैं। 


क्या कहते हैं बीएसए
बीएसए केके ओझा ने बताया कि अनुमान नई भर्ती के बाद लोग उनमें से अपनी पसंद का रिश्ता तलाश करते है। कुछ अभिभावको ने महकमे में आकर ऐसी जानकारी भी मांगी है। वह खुद से इस बारे में कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि यह परिवारों के बीच का मामला है।

Sunday, February 7, 2021

बेसिक शिक्षकों ने भी मांगी GIC प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता

बेसिक शिक्षकों ने भी मांगी GIC प्रधानाचार्य की अर्हता


प्रयागराज। पीसीएस-2021 के जारी किए गए विज्ञापन में जीआईसी प्रधानाचार्य की भर्ती के लिए हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों या उससे ऊपर तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव मांगा गया है। अब बेसिक शिक्षकों ने आयोग से मांग की है कि उन्हें भी भर्ती के लिए अर्ह माना जाए।

उनका तर्क है कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में भी तमाम नेट/जेआरएफ, पीएचडी, एमएसी, एमटेक योग्यताधारी पढ़ा रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी तीन या इससे अधिक वर्षों का अनुभव होने की स्थिति में भर्ती के लिए अर्ह माना जाए।

Sunday, January 31, 2021

कई बेसिक शिक्षक भी बने खंड शिक्षा अधिकारी

कई बेसिक शिक्षक भी बने खंड शिक्षा अधिकारी


खंड शिक्षाधिकारी भर्ती में परिषदीय स्कूल के शिक्षक से लेकर आपूर्ति अधिकारी तक का चयन हुआ है। कौड़िहार द्वितीय ब्लॉक में कार्यरत शिक्षिका अंशु मालिनी शुक्ला का चयन खंड शिक्षाधिकारी पद पर हुआ है। उन्हें मेरिट में 17वां और महिलाओं में चौथा स्थान मिला है। इससे पहले उनका चयन रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के पद पर भी हुआ था।




प्रतापपुर के सहायक अध्यापक राम पूजन पटेल, प्राथमिक विद्यालय बमैला हंडिया के प्रभारी प्रधानाध्यापक रवि शंकर उपाध्याय, कौंधियारा के राजित लाल रत्नाकर व शाहिन अंसारी, मऊआइमा की नीलम साक्यावर, शंकरगढ़ के शुभम कुमार, मांडा के शिक्षक मनोजीत राव, बहादुरपुर की शिक्षिका माधुरी मिश्रा व रवीन्द्र कुमार मिश्रा का भी चयन हुआ है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति से जुड़े और सोरांव में तैनात शिक्षक दिनेश त्रिपाठी और समिति के पूर्व महासचिव सावन कुमार दुबे भी सफल हुए हैं।



फूलपुर के आपूर्ति निरीक्षक सुनील कुमार सिंह भी सफल हुए हैं। 2009 से आपूर्ति निरीक्षक के पद पर तैनात सुनील को 36वीं रैंक मिली है। सुनील सिंह ने शुरुआत में प्राथमिक शिक्षक के रूप में काम किया। उसके बाद डिप्टी जेलर, फिर आपूर्ति निरीक्षक और अब खंड शिक्षाधिकारी के पद पर चयन हुआ।

केपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र सिंह की पुत्री प्रज्ञा सिंह का चयन खंड शिक्षाधिकारी के पद पर हुआ है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा शास्त्र विषय में जेआरएफ प्रज्ञा सिंह ने केपी ट्रेनिंग कॉलेज से बीएड और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमएड किया है।

Saturday, January 30, 2021

बेसिक शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’

बेसिक शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी ‘आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका’



सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदलने की तैयारी है। इस बार एनसीईआरटी ने बच्चों के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित किताबें भेजी हैं। साथ ही उन किताबों को कैसे पढ़ाना है। इसके लिए शिक्षकों को भी छह-छह किताबों का एक सेट भी दिया है। यह किताबें शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके बताएंगी।


एनसीईआरटी ने इस बार कक्षा एक से तीन तक के लिए सहज नाम से पुस्तकें भेजी हैं। कक्षा एक के लिए सहज-1, कक्षा दो के लिए सहज-2 और कक्षा तीन के लिए सहज-3 किताबें आई हैं। सहज में कक्षा के हिसाब से भाषा और गणित विषय की सामग्री दी गई है, जिसका मकसद बच्चों में भाषा और गणित का विकास करना है। इसके अलावा पहली बार उक्त कक्षाओं को पढ़ाने वाले हर शिक्षक के लिए छह-छह किताबों का सेट भेजा गया है। इन किताबों का नाम आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका रखा गया है। 

हर कक्षा के लिए एक किताब, भाषा और एक गणित विषय पर आधारित है। इस प्रकार कक्षा एक से तीन तक के लिए कुल छह किताबों का एक-एक सेट हर शिक्षक के लिए आया है। बच्चों के लिए आई सहज पुस्तिका को कैसे पढ़ाना है? यह सब आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका में दिया गया है। यानी सहज पुस्तिका को पढ़ाने के लिए शिक्षकों को आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका पुस्तिकाओं का गहन अध्ययन करना होगा।


शिक्षकों को भेजे गए सेट
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका किताबों के सेट भेज दिए हैं। इसके अलावा प्रत्येक बीआरसी, डीपीओ, एसआरजी, एआरपी को भी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका का एक-एक सेट तथा डायट को दो सेट भेजे गए हैं।


मॉडल टीचिंग प्लान
आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका के सेट में मॉडल टीचिंग प्लान दिए गए हैं। राज्य परियोजना निदेशक विजयकिरण आनंद ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मॉडल टीचिंग प्लान को समझने के लिए प्रत्येक शिक्षक सेट का अध्ययन अच्छे से करे।


कक्षा एक से तीन तक के बच्चों में भाषा और गणित के विकास के लिए एनसीईआरटी से सहज नाम से किताबें आई हैं। इसके अलावा पहली बार एनसीईआरटी ने उक्त कक्षाओं को सहज पुस्तिका पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका नाम से किताबों का सेट भेजा है, जिसमें मॉडल टीचिंग प्लान दिए गए हैं। यानी सहज किताबों को कैसे पढ़ाना है। इसकी पूरी जानकारी आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका में दी गई है। - रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए

Sunday, January 24, 2021

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं

पटना हाईकोर्ट ने दी शिक्षा विभाग को नसीहत : शिक्षकों की तैनाती शिक्षा देने के लिए होती है, उन्हें शिक्षा के काम में ही लगाएं, ठेकेदार न बनाएं।


निर्माण कार्य में आवंटित राशि का उपभोग न किये जाने पर शिक्षक पर एफआईआर किये जाने पर पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी।


हाईकोर्ट ने फंड का दुरुपयोग करने के मामले में शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर बिहार सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की बहाली छात्रों को शिक्षा देने के लिए की जाती है। लेकिन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में लगाने की बजाए उन्हें दूसरे काम में लगाया दिया जाता हैं। 
शिक्षकों का मुख्य कार्य छात्रों को शिक्षित करने के लिए उन्हें शिक्षा प्रदान करने का है।


हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य है कि बिहार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र से हटा कर उन्हें स्कूल भवन के निर्माण कार्य में लगा ठेकेदार के रूप में स्थापित कर दिया है। यही नहीं आवंटित राशि का उपयोग नहीं किये जाने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्त बना दिया गया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक को अभियुक्त बनाये जाने के पूर्व विभाग ने जिम्मेवारी तक तय नहीं की है। कोर्ट ने शिक्षक को अग्रिम जमानत दे दी। 


मामला गोपालगंज जिले के कटेया थाना कांड संख्या 172/2016 से सम्बंधित है। इस केस में शिक्षक शैलेश कुमार को आवंटित निधि का उचित उपयोग नहीं किये जाने को लेकर विभाग ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर शिक्षक ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर अग्रिम जमानत देने का गुहार लगाई गई थी। अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पचास हजार के दो मुचलकों पर अग्रिम जमानत दे दी।

Thursday, January 21, 2021

देशभर में सबसे मुश्किल यूपी में शिक्षक बनना

देशभर में सबसे मुश्किल यूपी में शिक्षक बनना


यूपी में शिक्षक बनना पूरे देश में सबसे कठिन काम है। शिक्षक भर्ती की अर्हता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) तय करता है। एनसीटीई ने शिक्षक बनने के लिए बीएड, डीएलएड आदि के अलावा टीईटी को अनिवार्य माना है। 


वहीं यूपी में टीईटी के बाद एक और लिखित परीक्षा देनी होती है। अन्य राज्यों में डीएलएड 12वीं के बाद ही होता है जबकि यूपी में डीएलएड में दाखिले की योग्यता स्नातक है।

Saturday, January 16, 2021

श्रद्धांजलि : शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश शर्मा, लगातार 50 साल तक उठाते रहे सदन में शिक्षकों की आवाज

शिक्षक संघ की राजनीति में 50 साल तक एकछत्र राज करने वाले शिक्षक पूर्व एमएलसी ओम प्रकाश शर्मा का निधन

50 साल से थे शिक्षक संघ सीट से एमएलसी, नवंबर में मिली थी करारी हार

श्रद्धांजलि : शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश शर्मा, लगातार 50 साल तक उठाते रहे सदन में शिक्षकों की आवाज


शिक्षक राजनीति के वटवृक्ष थे ओमप्रकाश,50 साल से थे जीत की गारंटी, संघर्ष था मूलमंत्र Meerut Newsओमप्रकाश शर्मा का शिक्षक राजनीति में करिश्माई दखल था।

ओमप्रकाश शर्मा ने शिक्षक राजनीति में एक मुकाम हासिल किया था। उनके विरोधी भी मानते हैं कि उनके राजनीतिक दबदबे तक पहुंचना किसी सियासतदां के लिए मुश्किल हागा। सूबे में सरकारों का आना-जाना लगा रहा। राष्ट्रीय दलों से सत्ता सरककर क्षेत्रीय दलों के पाले में आ गई।


मेरठ । शिक्षक राजनीति के स्तंभ रहे ओमप्रकाश शर्मा की सियासी परछाई बेहद लंबी थी। शिक्षक राजनीति में लगातार 50 साल की मैराथन पारी खेलने के बाद पिछले चुनावों में क्रीज से बाहर हुए, लेकिन शिक्षकों के हित में उनकी आवाज आज भी बुलंद थी। राजनीति के पंडित बताते हैं कि उनकी एक आवाज पर सूबे के कोने-कोने से शिक्षक हाथ उठाकर खड़े हो जाते थे। सत्तर और अस्सी के दशक में उन्हें कई दिग्गजों ने मंत्री बनाने का भी आफर दिया, लेकिन वो सिद्धांतों की डगर से नहीं भटके।

नहीं हुए थे टस से मस
ओमप्रकाश शर्मा के विरोधी भी मानते हैं कि उनके राजनीतिक दबदबे तक पहुंचना किसी सियासतदां के लिए मुश्किल हागा। सूबे में सरकारों का आना-जाना लगा रहा। राष्ट्रीय दलों से सत्ता सरककर क्षेत्रीय दलों के पाले में आ गई। प्रदेश की सियासत में भारी बदलाव नजर आया, लेकिन शर्मा का वजूद दलगत सियासत की मोहताज नहीं रही।

बदलते दौर में चौधरी चरण सिंह की सरकार से लेकर कांग्रेस, जनता दल, सपा, बसपा और भाजपा ने सत्ता संभाला, लेकिन उनका राजनीतिक दुर्ग अभेद्य रहा। उनके आठ बार एमएलसी रहने के दौरान 19 मुख्यमंत्रियों ने यूपी की कमान संभाली। कहते हैं कि हेमवती नंदन बहुगुणा और मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मंत्री बनाने के अलावा लखनऊ से संसदीय चुनाव लडऩे का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन शर्मा टस से मस नहीं हुए।

87 साल की उम्र में भी जमकर लड़े चुनाव
शिक्षक राजनीति में ओम प्रकाश का करिश्माई दखल ऐसा रहा कि सूबे का शिक्षक उनकी एक आवाज पर उठ खड़ा होता था। 87 साल की उम्र में एमएलसी चुनाव लड़े। वक्त काफी आगे निकल चुका था। संगठन में भी भारी मतभेद उभरा, और जिलाध्यक्षों की उनके महामंत्रियों से ठन गई। संगठन में नए लोग भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं सके। लंबे समय से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सूबे में संगठन को बड़ी ताकत और विस्तार दिया। आखिरकार भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा से चुनाव हार गए। लेकिन उनका कद ऐसा था कि चुनाव जीतने के बाद श्रीचंद शर्मा ओमप्रकाश से मिलने उनके घर गए। पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

ओमप्रकाश शर्मा के निधन से शिक्षा जगत की राजनीति में रिक्तता आ गई है। वो कई दशकों तक राजनीति में अपने मूल्यों के साथ आगे बढ़ते रहे। संघर्ष किया, और शिक्षकों का भरोसा जीता। भगवान उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। - डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा


मेरठ :  शिक्षक संघ की राजनीति में 50 साल तक एकछत्र राज करने वाले शिक्षक एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा का आज निधन हो गया। वे करीब 84 साल के थे। हालांकि उनका निधन किन कारणों से हुआ इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं हो पाई है लेकिन पूर्व एमएलसी के निधन की खबर मिलते ही उनके समर्थकों का घर पर तांता लगना शुरू हो गया। बताया जाता है कि उन्होंने खुद को कुछ अस्वस्थ महसूस किया और उसके बाद उनके चिकित्सक पुत्र ने उनका उपचार शुरु किया लेकिन इसके कुछ ही देर बाद उनका निधन हो गया।


उतर प्रदेश शिक्षक राजनीति का 50 साल से नेतृत्व कर रहे शिक्षक नेता व निवर्तमान एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा एक बड़ा नाम थे । 50 साल तक ओमप्रकाश शर्मा के इर्द-गिर्द ही शिक्षकों, कर्मचारियों की राजनीति घूमती रही। ओम प्रकाश शर्मा ने विधान परिषद का पहला चुनाव 1970 में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतिम चुनाव उन्होंने 2014 में जीता था। शर्मा की लोकप्रियता 90 के दशक में इतनी थी कि सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई और साढ़े 10 बजे तक उन्हें प्रथम वरीयता के 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल जाते थे। 


गत दिनों मिली हार पर उन्होंने साफ कहा था कि हार से शिक्षकों के आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शिक्षक हित में आंदोलन जारी रहेगा। चुनाव हारने के बाद भी पूर्व एमएलसी ओम प्रकाश शर्मा शिक्षकों के हित के लिए प्रयासरत थे। शनिवार काे भी वे जीआईसी में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे।

Monday, January 11, 2021

सदन में उठेगा शिक्षकों के पद कम करने का मुद्दा

सदन में उठेगा शिक्षकों के पद कम करने का मुद्दा


प्रयागराज। माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के पद लगातार कम किए जा रहे हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भी शिक्षक भर्ती में विलंब कर रहे है। नियुक्ति प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। यह मुद्दा अब सदन में उठेगा। यह बात एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने रविवार को एक होटल में आयोजित शिक्षक संघ की बैठक में कही।

शिक्षक दल का नेता बनने के बाद शिक्षक संघ के साथ पहली बार बैठक कर रहे एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने शिक्षकों से उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। कहा हय कार्य विभाग का है, वह अपने स्तर पर सत्यापन कराए। कहा कि यह मुद्दा भी सदन में उठाएंगे। 


कोरोना काल में तमाम वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। शुल्क न मिलने से स्कूल प्रबंधन ने वेतन नहीं दिया। अब समान कार्य का समान वेतन देने की मांग सदन में उठेगी। पुरानी पेंशन योजना को भी बहाल कराने के लिए भी संघर्ष होगा।


उन्होंने बताया कि प्रदेश भर के शिक्षक 16 जनवरी को अवकाश पर रहेंगे और अपने जनपद में सुबह 11 से शाम चार बजे तक उपवास पर रहते हुए धरना देंगे। शिक्षकों की समस्याओं को लेकर डीआईओएस के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी प्रेषित किया जाएगा। वहीं, एक फरवरी को प्रत्येक विद्यालय से एक-एक शिक्षक लखनऊ स्थित ाश्क्षिा निदेशक के शिविर कार्यालय में इकट्ठा होंगे और उपवास पर रहकर धरना देंगे। बैठक में जिला अध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री अनुज कुमार पांडेय, कुंज बिहारी मिश्र, रामसेवक त्रिपाठी, जगदीश प्रसाद आदि शामिल हुए।

Friday, January 8, 2021

शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षक संवर्ग आमने सामने

शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षक संवर्ग आमने सामने।


प्रयागराज : शिक्षा विभाग के समूह-ख संवर्ग में पदोन्नति से पहले ही राजकीय शिक्षक व निरीक्षण शाखा संघ आमने-सामने है। दोनों अनुपात प्रतिशत अधिक पाने की पैरवी में जुटे हैं। हालांकि शिक्षा निदेशालय का दावा है कि पदोन्नति के लिए गोपनीय आख्या पुराने कोटे के तहत मांगी गई है, जिसमें पुरुष शाखा का 61, महिला शाखा का 22 व निरीक्षण शाखा का 17 अनुपात प्रतिशत है।



उप्र शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह ख के पदों पर पदोन्नति छह साल से नहीं हो सकी है। प्रदेश में इस संवर्ग के अब गिने-चुने अफसर बचे हैं, जबकि रिक्त पदों की तादाद करीब पांच सौ है। 2018 में भी विभागीय पदोन्नति समिति ने सूची फाइनल की थी लेकिन, उस पर कोर्ट ने रोक लगा दी। शासन ने इस संवर्ग के पदों को भरने के लिए पांच नवंबर को आदेश दिया। शिक्षा निदेशालय ने 23 दिसंबर को सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से पदोन्नति के लिए गोपनीय आख्या मांगी। यह पत्र इंटरनेट पर वायरल हुआ और सूची के अनुसार यह कयास लगे कि निरीक्षण शाखा का कोटा बढ़ाया है। अपर शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने स्पष्ट किया कि अनुपात प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं है।


महिलाएं भी कोटे से असहज : पदोन्नति में महिला शाखा का कोटा सिर्फ 22 प्रतिशत होने से महिला शिक्षिकाएं भी असहज हैं। वे भी अपना कोटा बढ़ाने की मांग कर रही हैं। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. राजेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि महिलाओं व पुरुषों का कोटा बराबर करने की मांग हो रही है।

Saturday, December 5, 2020

क्या शिक्षकों के हितों की बात कर पाएंगे राजनीतिक दलों के शिक्षक एमएलसी?

यूपी : दिग्गजों के हारने से अब उच्च सदन में कुंद होगी शिक्षकों से जुड़े मुद्दों की धार, अंदरूनी गुटबाजी ले डूबी


● हार से विधान परिषद में कम हुआ अध्यापकों का प्रतिनिधित्व
● ओमप्रकाश शर्मा जैसे दिग्गज की हार से उच्च सदन ने खोया अग्रदूत

 क्या शिक्षकों के हितों की बात कर पाएंगे राजनीतिक दलों के शिक्षक एमएलसी? 


शिक्षक एमएलसी के नतीजे आ चुके हैं। 6 में से 4 सीटें भाजपा व सपा के पास हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी हैं कि क्या ये नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर शिक्षक हितों की बात कर पाएंगे? वित्तविहीन महासभा के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी इस बार सत्ताधारी दल के टिकट से जीते हैं, ऐसे में वे कैसे सरकार के खिलाफ जाते हुए शिक्षकों की मांगों को सदन में उठाएंगे, इस पर शिक्षकों की नजरें रहेंगी। 


एडेड और वित्तविहीन की लड़ाई का फायदा राजनीतिक दलों को पहुंचा है और नतीजे इसकी पुष्टि करते हैं। वित्तविहीन शिक्षक आरोप लगाते रहे हैं कि एडेड स्कूल के शिक्षक संघों ने सदन में सिर्फ अपने फायदे की बात उठाई। यही कारण था कि वित्तविहीन शिक्षकों ने लड़ाई लड़ कर अपने वोट बनवाए और पिछली बार वित्तविहीन महासभा के अध्यक्ष उमेश द्विवेदी सदन भी पहुंचे। प्रदेश में वित्तविहीन शिक्षकों की संख्या 2 लाख से भी ज्यादा है लेकिन इस बार उमेश द्विवेदी भाजपा के टिकट पर जीते हैं। भाजपा के टिकट पर सदन पहुंचे अन्य दो एमएलसी भी खांटी भाजपाई पहले हैं और शिक्षक बाद में। ऐसे में वे किस तरह शिक्षक हितों की बात करेंगे, ये देखने वाली बात होगी।  वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय, सेवा नियमावली, प्रबंधन का उत्पीड़न या एडेड स्कूलों में प्रबंधन के खेल आदि से निजात शिक्षकों की पुरानी मांगे हैं। 


फैजाबाद-गोरखपुर से जीते शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी वित्तविहीन महासभा के अजय सिंह के साथ कांटे की टक्कर के बाद जीते हैं। अजय सिंह हालांकि भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन भाजपा ने उन्हें यहां से टिकट न देते हुए ध्रुव कुमार को ही समर्थन दे दिया था।  मौजूदा नतीजे के बाद अब विधान परिषद में शिक्षक एमएलसी की 8 सीटों में तीन भाजपा के पास, दो शर्मा गुट, एक सपा, एक वित्तविहीन और एक चंदेल गुट के पास है यानी अब केवल सशिक्षक दलों के चार नेता सदन में हैं और बाकी के चार दलों के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे। 


लखनऊ : विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में शिक्षक संगठनों के पराभव से उच्च सदन में शिक्षकों से जुड़े मुद्दें की धार कुंद होगी। शिक्षकों के हितों से जुड़े विषयों को जिस शिद्दत से शिक्षक संगठन सदन में उठाते थे और उसके प्रति आग्रही होते थे, अब ऐसा शायद न हो पाए। वजह यह है कि शिक्षक कोटे की जिन छह सीटों पर चुनाव हुए, उनमें से चार सीटों पर राजनीतिक दलों के उम्मीदवार जीते हैं जो सदन में अपनी पार्टियों की लाइन के हिसाब से चलेंगे। उच्च सदन में अध्यापकों का प्रतिनिधित्व करने वाले शर्मा गुट और चंदेल गुट की ताकत कम हो गई है।


विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद सदन में शिक्षक दल का संख्याबल पांच से घटकर दो रह गया है। वहीं उमेश द्विवेदी के भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने और चेत नारायण सिंह की पराजय से निर्दलीय समूह (चंदेल गुट) की ताकत भी आधी रह गई है। ओम प्रकाश शर्मा जैसे धुरंधर भी अब सदन में मौजूद नहीं रहेंगे। ऐसे में अब उच्च सदन में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राज बहादुर सिंह चंदेल, सुरेश कुमार त्रिपाठी और ध्रुव कुमार त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ सदस्यों पर शिक्षक बिरादरी से जुड़े मुद्दों को असरदार तरीके से उठाने का अधिक दारोमदार होगा।

अतीत में था दबदबा

कभी शिक्षक दल का दबदबा विधान परिषद की शिक्षक कोटे की सभी आठों सीटों पर होता था और उसका संख्या बल दहाई तक पहुंचा था। शिक्षक दल की इसी ताकत ने 1997 में उसके नेता ओम प्रकाश शर्मा को विधान परिषद में नेता विरोधी दल का रुतबा दिलाया था । ओम प्रकाश शर्मा की बढ़ती उम्र के तकाजे, अंदरूनी गुटबाजी, और वर्ष 2007 में पंचानन राय की मृत्यु के बाद से ही शिक्षक दल का प्रभाव कम होने लगा था। मतभेद के चलते शिक्षक दल से छिटककर अलग हुए नेताओं ने अलग ठीहे बनाए या तलाशे ।

Wednesday, December 2, 2020

बिहार : इम्तिहान में 50% से कम अंक आए तो जाएगी गुरुजी की नौकरी! शिक्षक संघ ने सरकार पर किया पलटवार

बिहार : इम्तिहान में 50% से कम अंक आए तो जाएगी गुरुजी की नौकरी!  शिक्षक संघ ने सरकार पर किया पलटवार


शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बिहार शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) एक नया प्रयोग करने का मन बनाया है. इस नियम के तहत शिक्षकों को प्रोन्नति के बदले अब इम्तिहान देना होगा और 50 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले शिक्षक को नौकरी से निकाला जा सकता है.


पटना. बिहार में लगातार शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल के बाद एक बार फिर शिक्षा विभाग (Bihar Education Department) नया प्रयोग करने जा रहा है. इस बार बिहार में नया प्रयोग शिक्षकों की प्रोन्नति के नाम पर होगा, जिसमें 8 वर्ष सेवा दे चुके शिक्षकों को प्रोन्नति के बदले अब इम्तिहान देना होगा. आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।    शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार (Sanjay Kumar) की मानें तो जल्द ही नए नियम के तहत शिक्षकों की परीक्षा ली जाएगी और इस परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक वालों को प्रोन्नति मिलेगी. जबकि 50 से 75 प्रतिशत लाने वालों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा. इसके अलावा 50 प्रतिशत से नीचे अंक लाने वालों को सेवा से हटाने पर विचार होगा.


 हालांकि शिक्षा विभाग ने इन नियमों पर अभी मुहर नहीं लगाई है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों की मानें तो गुणवत्ता शिक्षा को लेकर दिसम्बर के अंतिम सप्ताह तक इस तरह के नियम बनाये जा सकते हैं.


सरकार के निशाने पर हैं नियोजित शिक्षक

आपको बता दें कि राज्य के पौने 4 लाख नियोजित शिक्षक एक बार फिर नीतीश सरकार के सीधे रडार पर हैं, जिनके वेतनमान को लेकर कई वर्षों से चल रही लड़ाई अब तक खत्म नहीं हो सकी है. इस बीच, प्रोन्नति की आस में बैठे शिक्षकों को इस नए नियम के बाद बड़ा झटका भी लग सकता है. हालांकि मेधावी शिक्षकों को इससे फायदा होगा. जबकि सिर्फ डिग्री और नम्बर के आधार पर बहाल शिक्षकों को न तो प्रोन्नति मिलेगी बल्कि नौकरी जाने का भी डर बना रहेगा. यह नियम अगर लागू होता है तो प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक के शिक्षकों के लिए होगा.


शिक्षक संघ ने कही ये बात
शिक्षा विभाग के इस नए नियमों को लेकर शिक्षक संघ के कई नेताओं आनंद कौशल और शिक्षक नेता मार्कण्डेय पाठक, अश्विनी पाण्डेय, आनंद मिश्रा ने इसे शिक्षक विरोधी नियम बताया है. उन्‍होंने कहा कि अगर यह शिक्षकों के लिए लागू होता है तो क्यों नहीं इसे हर विभाग में भी लागू किया जाए, जहां कम काबिल और निकम्मे अधिकारी से लेकर कर्मचारी भी सरकार से मोटी रकम लेकर लगातार चूना लगा रहे हैं.

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Sunday, November 29, 2020

फतेहपुर : नवनियुक्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के अभिमुखीकरण के सम्बन्ध में डायट प्राचार्य का आदेश जारी।

फतेहपुर : नवनियुक्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के अभिमुखीकरण के सम्बन्ध में डायट प्राचार्य का आदेश जारी।











फतेहपुर : जनपद को मिले नए शिक्षकों की लगी क्लास, दिया गया प्रशिक्षण।

प्रशिक्षण : राजकीय माध्यमिक 81 तो परिषदीय स्कूलों में 471 शिक्षक हुए हैं तैनात, माध्यमिक के लिए जीआईसी में तो बेसिक के लिए डायट में दिया गया शिक्षकों को प्रशिक्षण

फतेहपुर : जिले में चल रही शिक्षकों की कमी को देखते हुए शासन द्वारा बीते दिनों राजकीय माध्यमिक विद्यालयों समेत परिषदीय विद्यालयों में भारी संख्या में नए शिक्षकों की तैनाती की गई है। अब इन्हें अपने दायित्वों को निष्ठा के साथ निर्वहन कराने के लिए इनको प्रशिक्षण दिया जा रहा है । माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में नवनियुक्त 81 शिक्षकों को शहर के राजकीय इंटर कालेज में तो परिषदीय विद्यालयों के 471 शिक्षक शिक्षिकाओं को डायट परिसर में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया | जिसमें वक्ताओं ने उन्हें कई बिंदुओं पर जानकारी दी।


परिषदीय शिक्षकों को भी पढ़ाया गया पाठः बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में तैनाती पाए 471 शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए डायट प्रशासन द्वारा परिसर में एक दिन में 50 के बैच में 25- 25 शिक्षकों को बुलाकर प्रशिक्षण दिया गया। डायट प्राचार्य नजरुददीन अंसारी के नेतृत्व में डायट प्रवक्ताओं ने कई बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया गया। प्रथम बैच में डायट प्रवक्ता विनय कुमार मिश्र एवं द्वितीय में कुलदीप पाण्डेय द्वारा शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचा, गुणवत्ता संवर्धन, ऑपरेशन कायाकल्प आदि बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी।



जीआईसी में तीन दिवसीय उन्मुखी प्रशिक्षण

जिले के राजकीय इंटर कालेज एवं राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नई तैनाती पाए 81 शिक्षकों के लिए बुधवार से तीन दिवसीय उन्मुखी प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। शहर के राजकीय इंटर कालेज में आयोजित कार्यशाला में पहले दिन डीआईओएस महेन्द्र प्रताप सिंह, प्रधानाचार्य उदय प्रभात एवं प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष प्रभूदत्त दीक्षित समेत अन्य के द्वारा नए शिक्षकों को कई बिंदुओं पर जानकारी देते हुए उन्हें निष्ठापूर्वक कार्य किए जाने की नसीहत दी गई।

फतेहपुर : नवनियुक्त शिक्षकों का आज से दो दिन का प्रशिक्षण शुरू, 25-25 के समूहों में दोनों पालियों में होगा प्रशिक्षण।

फतेहपुर : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बुधवार से नवनियुक्त शिक्षकों को दो दिवसीय प्रशिक्षण देने जा रहा है। दो पालियों में होने वाले प्रशिक्षण में 25-25 के समूह में शिक्षक शामिल होंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

डायट प्राचार्य नजरुद्दीन अंसारी ने बताया कि नवनियुक्त 471 शिक्षकों को नई तकनीकि से पठन पाठन का तरीका समझाने के लिए इस प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण 28 दिसंबर तक चलेगा। डायट प्राचार्य ने बताया कि परिषदीय स्कूलों के निरीक्षण में प्रायः देखा जा रहा है कि कक्षा पांच के बच्चे हिंदी भाषा और 100 तक की गिनती तक नहीं पढ़ पाते हैं। कक्षा आठ तक फेल न करने की व्यवस्था होने के कारण इन बच्चों को अगली कक्षा में प्रोन्नति करना स्कूलों की मजबूरी है। इसके पीछे कारण है कि शिक्षकों के पढ़ाने के तौर तरीके बच्चों की समझ से परे हैं। यही कारण है कि शिक्षक जो भी पढ़ाते हैं, वह उनके समझ में नहीं आता है। ऐसे में डायट ने इसके लिए जिले नवनियुक्त 471 सहायक अध्यापकों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया गया है। दो दिनी प्रशिक्षण 25-25 के समूह में दो पालियों में कराया जाएगा।

बताया कि बुधवार से डायट में सुबह 9.30 बजे से प्रशिक्षण का शुभारंभ होगा। इन शिक्षकों को पठन पाठन के नए तरीके बताए जाएंगे, जिससे वह बच्चों को प्रेरणा एप, मिशन कायाकल्प के माध्य से पढ़ाकर आधारभूत सांचा मजबूत कर सकें।

Tuesday, November 24, 2020

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम



★ क्लिक करके देखें संबंधित आदेश

📌  परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों हेतु "योगाभ्यास प्रतियोगिता" वर्ष 2020-21 के आयोजन के सम्बन्ध में 


प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए योगाभ्यास प्रतियोगिता कराई जाएगी। विभाग की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में शिक्षकों को अनुलोम-बिलोम, कपालभाती, भस्विका, उदगीथ, उज्जाई आसन करने होंगे।


यह प्रतियोगिता पंचायत स्तर से शुरू होकर ब्लाक एवं जिला स्तर के साथ प्रदेश स्तर पर कराई जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा की ओर से खंड शिक्षाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि जिले के सभी पंचायतों के विद्यालयों में यह प्रतियोगिता 28 नवंबर को होगी। विकास खंड स्तर पर दो दिसंबर को बहादुरपुर, सैदाबाद, हंडिया, धनुपुर, प्रतापपुर, तीन दिसंबर को कप बहरिया, मऊआइमा, होलागढ़, सोरांव, चार दिसंबर को कौड़िहार-1, डरहार-2, चाका, जसरा, शंकरगढ़, नगर क्षेत्र एवं पांच दिसंबर को करछना, मेजा, उरुवा, मांडा, कोरांव, कौधियारा के बीआरसी पर प्रतियोगिता होगी।

Wednesday, November 18, 2020

प्रतापगढ़ : तीन शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने से फैली सनसनी

प्रतापगढ़ : तीन शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने से फैली सनसनी

■  लालगंज इलाके में तैनात हैं तीनों शिक्षक


प्रतापगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग के तीन शिक्षकों समेत जिले में 18 और लोग संक्रमित मिले हैं। तीनों शिक्षक लालगंज क्षेत्र के अलग-अलग प्राथमिक स्कूलों में तैनात हैं।


लालगंज के डगरारा, कटरावलीपुर और अर्जुनपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक-एक शिक्षक जांच में कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। कुंडा के पूरे दत्तू की एक महिला बीमार चल रही थी। परिजनों ने उसे प्रयागराज के एसआरएन में दो दिनों पहले भर्ती कराया। मंगलवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 


स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला के घर पहुंचकर परिजनों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। शहर में एक महिला समेत तीन लोग संक्रमित मिले। पट्टी में दो, कोहड़ौर में एक और संडवाचंद्रिका में एक महिला की रिपोर्ट पाजिटिव आई। वहीं सीएमओ के साथ रहे डीपीएम राजशेखर व उनके चालक सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की रिपोर्ट निगेटिव आने से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।

Sunday, November 15, 2020

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित परीक्षाओं में हर साल छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षा में 1,82,259 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था,


जबकि 2019 में दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ छात्रों की घटती संख्या के बावजूद प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसे अतिरिक्त पदों के सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को भेज रहे हैं। इस पर उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को प्रस्तावों के पुनरावलोकन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि गत तीन वर्षों में परीक्षा फार्म भरने व परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 


एक ओर जहां छात्रों की संख्या कम हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिक छात्रों की संख्या प्रदर्शित कर अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसा पाया गया और अधिक छात्र संख्या दर्शाकर पद सृजन के प्रस्ताव भेजे गए तो संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में दस अनुदानित मदरसों में से कइयों ने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रस्ताव दिया है। रजिस्ट्रार के पत्र से मदरसों में खलबली मच गई है।

Tuesday, October 27, 2020

शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर

शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर 

 
लंदन। शिक्षकों के मूल्यांकन के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शुमार हैं। 35 देशों के वैश्विक सर्वे में भारत छठवें पायदान पर है। चीन इस सूची में शीर्ष पर है।


इसके अलावा घाना, सिंगापुर, कनाडा और मलयेशिया भारत से ऊपर हैं। ब्रिटेन की वारके फाउंडेशन के पिछले सप्ताह जारी हु सर्वे के मुताबिक भारत में शिक्षकों को लेकर लोगों में अलग सम्मान है। उनसे जब भी शिक्षकों का जिक्र होता है तो उनके लिए अच्छे विचार ही आते हैं। शिक्षकों को मूल्यांकन करते वक्‍त ज्यादातर लोगों को लगता है कि शिक्षक सबसे भरोसेमंद, बुद्धिमान, बच्चों का ख्याल रखने वाले और प्रेरणास्नोत होते हैं।


वारके फाउंडेशन और ग्लोबल टीचर प्राइज के संस्थापक सनी वारके के मुताबिक रिपोर्ट साबित करती है कि शिक्षकों का सम्मान करना केवल एक महत्वपूर्ण नैतिक कर्तव्य नहीं है जो देश के बेहती शैक्षिक परिणामों के लिए जारूरी है। शैक्षिक परिणामों के लिए आवश्यक है।


कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर के स्कूल व विश्वविद्यालयों के करीब 1.5 बिलियन विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। मौजूदा दौर में सबसे जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दुनिया भर में लोगाें को अच्छे शिक्षक मिलें। यह रिपोर्ट 2018 में 35 देशों के ग्लोबल टीचर स्टेटस इंडेक्स के आंकड़ों पर आधारित है।

Friday, October 9, 2020

फतेहपुर : तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त, भेजा गया आदेश

फतेहपुर : तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त, भेजा गया आदेश।

फतेहपुर :  बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। गुरुवार को तीनों शिक्षकों के पते पर सेवा समाप्ति का आदेश रजिस्टर्ड डाक से भेज दिया गया है। तीनों शिक्षक लंबे समय से बिना किसी सूचना के अपने स्कूलों से गायब थे।


हसवा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मिचकी में नियुक्त सहायक अध्यापक राजेश कुमार सात मई 2015 से बिना किसी सूचना के स्कूल से गायब थे। इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बक्सपुर के सहायक अध्यापक संजय कुमार वर्मा पहली जुलाई 2017 से स्कूल से गायब थे। मलवां ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बुधइयापुर में नियुक्त सहायक अध्यापक देवेश चंद्र गुप्ता छह नवंबर 2017 से बिना सूचना के स्कूल से गायब थे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें कई बार नोटिस जारी कर स्कूल आने के आदेश दिए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। 


बीएसए ने तीनों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। बीएसए ने बताया कि तीनों शिक्षकों के पते पर सेवा समाप्ति का आदेश रजिस्टर्ड डाक से भेज दिया गया है।