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Friday, September 11, 2020

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

 
प्रयागराज : सोशल मीडिया पर पीएम और सीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उक्त मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर रद कर दी है। यह आदेश शिक्षक नेता नंदलाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूíत मनोज मिश्र व न्यायमूíत अनिल कुमार नवम की पीठ ने दिया। 


याची की ओर से अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की। एटा के मिरहची थाना क्षेत्र में स्थित इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व शिक्षक नेता नंदलाल यादव ने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। उसका संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर मिरहची थाने की पुलिस ने आइटी एक्ट की धारा 66-ए के तहत एफआइआर दर्ज की थी। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि धारा 66-ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।

Monday, September 7, 2020

फर्रुखाबाद : सम्प्रेक्षण गृह से शिक्षक सम्बद्ध, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

फर्रुखाबाद : रोक के बाद भी तीन शिक्षकों को बीएसए ने सम्प्रेक्षण गृह से किया सम्बद्ध, जिले में सम्बद्ध हैं 56 शिक्षक, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

फर्रुखाबाद :  बीएसए ने दूरदराज के ब्लाकों में तैनात तीन शिक्षकों को राजकीय संप्रेक्षण गृह में संबद्ध किया है। उनको विद्यालय से कार्यमुक्त करने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया है। ये स्थिति तब है जब शासन से शिक्षकों के संबद्धीकरण पर रोक है। जिले में 56 शिक्षक संबद्ध हैं, इनको रिलीव कर किसी भी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र अभी तक बीईओ ने नहीं दिया। जिले में पहले से 56 शिक्षक मूल विद्यालय से दूसरे स्कूल या बीएसए कार्यालय से संबद्ध हैं।




इनका संबद्धीकरण समाप्त कर मूल विद्यालय में भेजने का आदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने दिया था। उन्होंने बीएसए से शिक्षकों को मूल विद्यालय के लिए रिलीव करने और किसी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र मांगा था। संबद्ध शिक्षकों को मूल विद्यालय रिलीव नहीं किया गया है। बीएसए ने 14 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय खजुरिया शमसाबाद के सहायक अध्यापक अभयकांत, प्राथमिक विद्यालय कायमगंज के अध्यापक अनुराग सोमवंशी व प्राथमिक विद्यालय धनी नासा के सहायक अध्यापक विजय प्रताप को राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा फतेहगढ़ में संबद्ध कर दिया है। इनको किशोर अपचारियों को ऑनलाइन शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी है।


 बीएसए लालजी यादव ने बताया कि किशोर अपचारियों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा के अधीक्षक ने पत्र भेजा था। उन्होंने चार शिक्षकों के नाम दिए थे, तीन शिक्षकों को ही संबद्ध किया गया है। अधीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि पिछले सत्र में यही शिक्षक तैनात थे, इस कारण इन्हीं को संबद्ध करने के लिए बीएसए को पत्र भेजा था।




Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, September 3, 2020

रिटायरमेंट की उम्र में स्मार्टफोन चलाना सीख रहे गुरुजी

रिटायरमेंट की उम्र में स्मार्टफोन चलाना सीख रहे गुरुजी

 

केस वन: केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज में भूगोल के प्रवक्ता बृजलाल 31 मार्च को 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे। अम्बेडकरनगर के बृजलाल अब तक की-पैड वाला साधारण फोन इस्तेमाल करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उन्होंने जून में स्मार्ट मोबाइल खरीदकर क्लास के बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनवाया। चूंकि खुद बहुत अच्छे से न तो स्मार्टफोन चला पाते हैं और न फोटो खींच पाते हैं इसलिए रोज स्कूल खुलने से आधा घंटा पहले पहुंच जाते हैं। अध्यापक कक्ष में बैठकर उस दिन पढ़ाने वाले विषय को कॉपी पर लिखते हैं और फिर साथी शिक्षकों से अनुरोध करके नोट्स व्हाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट करा देते हैं।


केस टू: गोपाल विद्यालय इंटर कॉलेज कोरांव के शिक्षक आजाद बहादुर सिंह की भी यही स्थिति है। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने लॉकडाउन के बाद 18 अप्रैल को स्मार्टफोन खरीदा और अब अपने साथी शिक्षकों और परिवार के सदस्यों की मदद से ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं।

इसे शिक्षकों के पढ़ाने का जज्बा कहें या विभाग के दबाव का असर लेकिन एक सच यह भी है कि रिटायरमेंट की उम्र में पहुंच चुके कई शिक्षक अब स्मार्टफोन चलाना सीख रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को यू-ट्यूब, व्हाट्सएप आदि माध्यमों से बच्चों को पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसकी निगरानी प्रधानाचार्य से लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक और यूपी बोर्ड के सचिव तक कर रहे हैं। ऐसे में कई शिक्षक एंड्रायड फोन खरीदकर उसे सीखने की मशक्कत करते नजर आ रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर वशिष्ठ सेवा संघ इंटर कॉलेज महेवा नहवाई मांडा के शिशिर श्रीवास्तव को ही लें। 31 मार्च को रिटायर होने जा रहे शिशिर ने 11 अप्रैल को स्मार्ट फोन खरीदा है। मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज कौंधियारा के शिक्षक रामदेव भी 31 मार्च को रिटायर होंगे। उन्होंने भी 22 अप्रैल को स्मार्टफोन खरीदा है। इसी स्कूल के संतोष शुक्ला 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने 21 अप्रैल को स्मार्टफ़ोन खरीदकर ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया है।

इनका कहना है

कोरोना ने स्कूली शिक्षा के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी की है। इससे निपटने के लिए पूरा विभाग गंभीरता से प्रयास कर रहा है। निश्चित रूप से शिक्षकों ने अभूतपूर्व सहयोग दिया है। कई शिक्षक रिटायर होने वाले हैं लेकिन इसके बावजूद स्मार्टफोन सीखकर पढ़ाई करा रहे हैं। आरएन विश्वकर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक

Wednesday, September 2, 2020

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध


अधिकारियों में तालमेल नहीं और शिक्षक हो रहे कोरोना काल में  परेशान

प्रयागराज। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश में विरोधाभास पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से ब्लॉक-4 की गाइड लाइन में स्कूल-कॉलेज एवं शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। 


21 सितंबर से स्कूलों में 50 फीसदी टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टॉफ को ऑनलाइन शिक्षा एवं परामर्श के लिए बुलाया जा सकता है। यह आदेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। जबकि, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के निर्देश पर जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही सभी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है।


लखनऊ : अनलॉक 4 की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्र सरकार ने 21 सितंबर के बाद 50 फीसदी स्टाफ को ही स्कूल बुलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद प्रदेश में बिना रोस्टर सभी शिक्षकों को रोज बुलाया जा रहा है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस पर नाराजगी जताते हुए रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार 30 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश हैं। ऐसे में शिक्षकों समेत सभी कर्मचारियों को बुलाने से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे। 


यूपी में लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छोटे स्कूल तो छोड़ दें शहर के कई नामचीन स्कूल तक इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा  प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।


राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न होने का कारण बताकर शिक्षकों की छंटनी शुरू कर दी है। कई छोटे स्कूलों ने तो अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया है। अब बड़े और नामचीन स्कूलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।


गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।


प्री-प्राइमरी और प्राइमरी में हाल ज्यादा खराब
राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है। इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। कई बंद भी हो चुके हैं। जो स्कूल ऑनलाइन क्लासेज चला भी रहे हैं वहां, बच्चों की संख्या कम होने के कारण वेतन तक कम कर दिया गया है।


अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।

Saturday, August 29, 2020

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग


किसी के घर में राशन का संकट, कोई नहीं जमा कर पा रहा बच्चों की फीस

कोरोना काल में वेतन देने का सरकारी कोशिश बेअसर, नौकरी पर संकट भी


प्रयागराज। सरकारी दावे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं। खासकर वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक तो भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। अपने ही बच्चों की फीस जमा कर पाने में असमर्थ शिक्षकों के घर में अकसर राशन का संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे में साथी शिक्षक एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।


नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची। शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।

Friday, August 28, 2020

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में।





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Friday, August 14, 2020

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇

लखनऊ। बुलंदशहर के सिकंदरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, थपरावली के व्यायाम शिक्षक पंकज यादव को आपस में मारपीट के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार को न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर मारपीट की ख़बरें चली थीं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसका संज्ञान लेते हुए दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇 

उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर, आधा दर्जन शिक्षकों की बहाली को लेकर नहीं गम्भीर महकमा

उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर।


लापरवाही में निलंबित किए गए शिक्षकों की बहाली को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। महीनों बाद भी जिले के निलंबित आधा दर्जन शिक्षकों की अब तक बहाली नहीं हो सकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र देकर जांच आख्या के आधार पर न तो कार्रवाई हुई और न ही बहाली। बहाली में हो रहे विलंब से स्कूलों की पठन पाठन व्यवस्था प्रभावित है। साथ ही शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।




पूर्व बीएसए बीके शर्मा ने साल 2019 में स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाह मिले दर्जनों शिक्षकों को निलंबित किया था। इसके अलावा प्रभारी बीएसए राकेश कुमार, सीडीओ व वर्तमान बीएसए प्रदीप पांडेय ने कई निलंबन किए। कुछ समय पहले कई शिक्षक बहाल हुए पर अभी कई की बहाली लटकी है, जबकि नियमानुसार तीन महीने के भीतर इनकी बहाली हो जानी चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि निलंबित शिक्षक को 15 दिन के भीतर आरोप पत्र देकर उसका पक्ष लिया जाए। इसके बाद जांच आख्या के आधार पर उस पर अनुशासात्मक कारवाई हो या फिर उसकी बहाली की जाए। इसके बाद भी नियम कायदों को ताक पर रखकर तमाम शिक्षकों को कई महीनों बाद भी बहाल नहीं किया गया है।




इस मामले में बीएसए प्रदीप पांडेय का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आख्या मिल रही है, उसी आधार पर शिक्षकों को बहाल किया जा रहा है। अभी इन शिक्षकों की आख्या नहीं आई है, इसलिए बहाली या कार्रवाई नहीं की गई है। आख्या मांगी गई है जल्द आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी। किसी शिक्षकों को आसपास का स्कूल नहीं दिया जाएगा। जो जहां है वहीं रहेगा।




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Wednesday, August 5, 2020

प्रतापगढ़ : आठ माह में बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए दिव्यांग अध्यापक, मेडिकल बोर्ड की जांच से बचने के लिए किया खेल, विभाग में हड़कंप

प्रतापगढ़ : आठ माह में बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए दिव्यांग अध्यापक, मेडिकल बोर्ड की जांच से बचने के लिए किया खेल, विभाग में हड़कंप, पहले जिले में थे 1170 और अब नई संख्या छिपा रहा विभाग।

प्रतापगढ़ :  बेसिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग बनकर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों की जांच मेडिकल बोर्ड से होने का विभाग में पत्र आते ही लगभग आधे दिव्यांग शिक्षक सामान्य कोटे में चयन होने का दावा कर रहे हैं। बीबीसी से आई रिपोर्ट में खुलासा होने से विभागीय अधिकारी दंग हैं। हालत यह है कि विभाग ने बीईओ पर शिकंजा कसते हुए नियुक्ति पत्र मांग लिया है। इससे जिलेभर में हड़कंप मचा है। बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों शिक्षकों के मूल अभिलेखों को मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसमें सभी शैक्षिक प्रमाणपत्रों को भी अपलोड करने को कहा गया है। इस बीच जिलेभर में शिक्षकों के अभिलेखों की जांच के लिए अभियान चलाया गया।




इनमें दिव्यांग शिक्षकों की सूचना अलग से मांग कर मेडिकल बोर्ड से विकलांगता की जांच कराने को कहा गया। बेसिक शिक्षा विभाग के पास शासन का पत्र आते ही खंड शिक्षा अधिकारियों से ऐसे अध्यापकों की सूची मांग ली गई। शिक्षक नेताओं ने खेल करते हुए अपने चहेते दिव्यांग शिक्षकों को बचाने के लिए उनकी नियुक्ति को सामान्य कोटे में दिखा दिया। आलम यह है कि आठ माह पहले विभाग की गणना में जहां 1170 दिव्यांग शिक्षक थे, वहीं इन दिनों इनकी संख्या आधी हो गई है। हालांकि विभाग यह कहकर बचाव कर रहा है कि अभी बीईओ ने रिपोर्ट ही नहीं दी है। विभाग ने अब सभी शिक्षकों से नियुक्ति पत्र मांग लिया है।

तबादले, प्रमोशन में दिखाते हैं दिव्यांग प्रमाणपत्र ::  बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसे भी दिव्यांग शिक्षक हैं, जो तबादला और प्रमोशन लेने में दिव्यांग प्रमाणपत्र दिखाते हैं। वह दिव्यांग भत्ता लेने से कतराते हैं। विभाग में लगभग 300 दिव्यांग शिक्षक हैं, जो भत्ते का लाभ उठा रहे हैं।

जो शिक्षक होशियारी दिखा रहे हैं, वह बच नहीं पाएंगे। मानव संपदा पोर्टल पर भी नियुक्ति पत्र अपलोड करना होगा। विभाग ने भी नियुक्ति पत्र तलब किया है। अगर कोई गलत सूचना देता है तो उसकी नौकरी भी जा सकती है। अभी दिव्यांग शिक्षकों की वास्तविक संख्या नहीं आई है। अशोक कुमार सिंह बीएसए।


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आजमगढ़ : पैनकार्ड फर्जीवाड़े में दो शिक्षकों की सेवा समाप्त, एसआईटी की जांच में 28 शिक्षक हुए थे चिन्हित, पांच शिक्षकों की 27 जुलाई को हो चुकी है बर्खास्तगी

आजमगढ़ : पैनकार्ड फर्जीवाड़े में दो शिक्षकों की सेवा समाप्त, एसआईटी की जांच में 28 शिक्षक हुए थे चिन्हित, पांच शिक्षकों की 27 जुलाई को हो चुकी है बर्खास्तगी।


आजमगढ़ :  एक पैन कार्ड का इस्तेमाल अलग-अलग जनपदों । में दो-दो शिक्षकों द्वारा अलग अलग खाता नंबरों के साथ प्रयोग किए जाने का प्रकरण सामने आया था। एसआईटी व एसटीएफ की जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसमें जिले के ऐसे 28 शिक्षक चिन्हित हुए थे। जिसमें पांच शिक्षकों के फर्जी होने की पुष्टि होने पर पहले ही बर्खास्तगी हो चुकी है वहीं दो और फर्जी शिक्षक चिन्हित होने पर प्रभारी बीएसए ने मंगलवार को नियुक्ति तिथि से इनकी सेवा समाप्त कर दी और खंड शिक्षाधिकारियों को रिकवरी का आदेश भी जारी कर दिया।


बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में लगातार फर्जीवाड़ा सामने आ रहे है। बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच सरकार एसआईटी व एसटीएफ से करा रही है। इसी जांच के दौरान आईआईटी व एसटीएफ ने वेतन भुगतान के फाइलों की जांच के दौरान एक नया फर्जीवाड़ा पकड़ा। जिसमें एक ही पैन कार्ड पर दो शिक्षकों द्वारा अगल-अलग जनपदों व खाता नंबरों पर वेतन आहरित कोरोना पकड़ा गया। पूरे प्रदेश में ऐसे 192 शिक्षक चिन्हित हुए थे जिसमें 28 शिक्षक जिले के भी शामिल थे। एसआईटी ने बकायदा सूची तैयार कर बेसिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराया और फिर निदेशालय से सूचना जिलों को उपलब्ध करा दी गई। जिले के 28 शिक्षक इस फर्जीवाड़े में चिन्हित हुए थे। जिन्हें बेसिक शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर सत्यापन के लिए बुलाया था। 28 में से कुल सात शिक्षकों ने अपना सत्यापन नहीं कराया।

इन्हें दो बार अलग-अलग तिथियों में नोटिस भेजी गई। अंतिम नोटिस 17 जुलाई को भेजी गई थी। जिसमें सात दिनों के अंदर मूल अभिलेखों के साथ कार्यालय पहुंच कर सत्यापन का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी इन सात शिक्षकों ने सत्यापन नहीं कराया। जिस पर बीएसए ने 27 जुलाई को इन पांच शिक्षकों की नियुक्ति तिथि से सेवा समाप्त करने का आदेश निर्गत करने के साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को रिकवरी का आदेश भी जारी कर दिया।

शेष बचे दो अन्य शिक्षकों पर मंगलवार को प्रभारी बीएसए ने कार्रवाई किया और दोनों की नियुक्ति तिथि से सेवा समाप्त करते हुए रिकवरी का आदेश निर्देश किया। सेवा समाप्त किए गए शिक्षकों में जय शिव प्रताप चंद हरैया ब्लाक के प्रावि शानूपुर पर तैनात थे और सर्विस बुक में अपना पता सल्लाहपुर देवरिया बताया था। वहीं दूसरे बस्ती शिक्षक अनिल कुमार अतरौलिया ब्लाक के प्रावि सिकरौरा पर तैनात थे।




पूर्व में इन शिक्षकों पर हुई है कार्रवाई

आजमगढ़ : प्रभारी बीएसए अमरनाथ राय ने बताया कि प्रावि शोधनपट्टी बिलरियागंज पर तैनात रेखा पुत्री अवधेश कुमार सिंह निवासी सिविल लाइंस आजमगढ़, प्रावि भीलमपुर महराजगंज पर तैनात राजेश कुमार पुत्र राम दुलारे निवासी ग्राम मैलानी पोस्ट खलीलाबाद जिला संत कबीर नगर, प्रावि धनसिंहपुर कोयलसा पर तैनात आवेश कुमार पुत्र सतीश चंद्र वर्मा निवासी चांदमारी, इमिलिया जिला मऊ, प्रावि सीही सठियांव पर तैनात नेहा शुक्ला पुत्री ब्रह्मानंद शुक्ला निवासी ग्राम इमली पोस्ट रामपुर जिला गोरखपुर व प्रावि पिचरी अतरौलिया पर तैनात बांके बिहारी पुत्र किशोर प्रसाद निवासी सलेमपुर, सलेमपुर देवरिया ने अपना सत्यापन नहीं कराया। ऐसी स्थिति में इन सभी को नियुक्ति तिथि से 27 जुलाई को ही बर्खास्त कर दिया गया है।

फर्जी डॉक्यूमेंट पर पाई थी परिवार की नौकरी, बर्खास्त

आजमगढ़ : जूनियर हाई स्कूल मुबारकपुर बालक पर 2018 में पुष्पा देवी पत्नी मन्नू कुमार निवासी कोपागंज जिला मऊ की बतौर परिचर मृतक आश्रित पद पर तैनाती हुई थी। पुष्पा के डॉक्युमेंटों का भी सत्यापन कराया गया तो वह फर्जी पाया गया। जिस पर प्रभारी बीएसए ने मंगलवार को पुष्पा देवी की नियुक्ति भी नियुक्ति तिथि से समाप्त करते हुए रिकवरी का आदेश जारी किया है। पुष्पा देवी के कई डॉक्यूमेंट सत्यापन में फेल पाए गए है।


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Thursday, July 30, 2020

फतेहपुर : अंग्रेजी माध्यम शिक्षकों को मिलेगा ऑनलाइन प्रशिक्षण

फतेहपुर : अंग्रेजी माध्यम के समस्त परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को सम्पर्क फाउंडेशन बैठक एप डाउनलोड कराने के सम्बंध में।

















फतेहपुर : अंग्रेजी माध्यम शिक्षकों को मिलेगा ऑनलाइन प्रशिक्षण।

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों में उत्कृष्ट स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम से विभाग संचालित कर रहा है। इन विद्यालयों का शैक्षिक स्तर मजबूत किए जाने के लिए अब समग्र शिक्षा अभियान के तहत संपर्क फाउंडेशन शिक्षक शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर दक्ष करेगा।




राज्य शैक्षिक और अनुसंधान परिषद-एससीइआरटी ने अंग्रेजी माध्यम के चयनित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की शैक्षिक दशा सुधारने के लिए हाथ मिलाया है। जिले में 139 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाओं को एप डाउनलोड किए जाने के निर्देश बीएसए ने दिए हैं। प्ले स्टोर से एप डाउनलोड होने के बाद अक्टूबर माह में अंग्रेजी और गणित की नवाचारी पद्धतियों के प्रशिक्षण से शिक्षकों को लैस किया जाएगा।

बीएसए देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि निदेशक समग्र शिक्षा और एससीईआरटी के निर्देश पर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं 1. को एप लोड कराने के निर्देश दिए गए हैं। एप डाउनलोड करने वाले सभी अध्यापकों के नाम और स्कूल की सूची बनाकर खंड शिक्षा अधिकारी देंगे। इसकी सूचना फाउंडेशन को भेजी जाएगी। अक्टूबर माह में प्रशिक्षण शुरू होगा और कार्ययोजना के मुताबिक इन सभी शिक्षक शिक्षकों को जुड़ना होगा।


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Monday, July 27, 2020

फतेहपुर : अब परिषदीय शिक्षकों को भी घोषित करें "कोरोना वारियर्स", सोशल मीडिया पर शिक्षकों ने बुलंद की मांग

फतेहपुर : अब परिषदीय शिक्षकों को भी घोषित करें "कोरोना वारियर्स", सोशल मीडिया पर शिक्षकों ने बुलंद की मांग।

फतेहपुर : कोरोना काल में राष्ट्रनिर्माण में योगदान दे रहे परिषदीय शिक्षकों ने भी खुद को कोरोना वायरस का दर्जा दिए जाने की मांग की है। उनका तर्क है कि कोरोना के प्रकोप के दौर में वह अपने परिवार को खतरे में डालकर समाज के बीच रहकर काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें भी बीमा कौरव कोरोना से मृत्यु होने पर परिजनों को आर्थिक मदद का भरोसा मिलना चाहिए। शिक्षक अपने संघों से इस मांग को शासन के समक्ष रखने की आवाज उठा रहे हैं।

गत एक जुलाई से परिषदीय स्कूलों के शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रसार व प्रकोप के बीच शिक्षकों को अपने व परिवार की चिंता सताने लगी है। इसके लिए सोशल मीडिया व शिक्षकों के समूहों में जबरदस्त चर्चा जारी है।

शिक्षकों की मांग है कि जिस तरह सरकार ने पुलिस, डॉक्टर व सफाईकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा देकर उनके परिजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है उसी तरह की सुरक्षा उनके परिवारीजनों को भी मिलनी चाहिए। इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि अन्य विभागों के कर्मचारी व अधिकारी तो अपने दफ्तरों में रहकर ही काम करते हैं लेकिन परिषदीय शिक्षक लगातार समाज के बीच रहकर काम कर रहा है। वह अभिभावकों के स्मार्टफोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड कराने से लेकर राशन, ड्रेस व पुस्तक वितरण के साथ मिड डे मील की फीडिंग के लिए भी भटक रहा है।




मांग : परिषदीय शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर बुलंद की अपनी मांग स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस की तरह कर रहे समाज के लिए काम

खतरों से खेलकर राष्ट्र निर्माण : 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि हमारे पास न तो पुरानी पेंशन है और न ही फंड, इसलिए हमारे परिवार की सुरक्षा आवश्यक है। कहते हैं कि यदि दुर्भाग्य से कोरोना के कारण उनकी मौत होती है तो उनके परिजनों की आर्थिक सुरक्षा कैसे हो पाएगी। हम भी तो समाज के बीच रहकर विपत्ति की इस घड़ी में राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।



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Saturday, July 25, 2020

उच्च शिक्षा : शासन के पास होगा शिक्षकों का डाटा बैंक, मानव सम्पदा पोर्टल पर अपलोड होगा शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का विवरण

समय सीमा पूरी, 40% शिक्षक कर्मचारियों का हुआ सत्यापन, मानव सम्पदा पोर्टल पर एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षक- कर्मचारियों का ब्योरा होना है अपलोड।

प्रयागराज : शिक्षक व कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, तैनाती में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए शासन ने सबका ब्योरा एकत्र करने का निर्णय लिया है। इसके मद्देनजर अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षक व कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन करने की प्रक्रिया 24 जुलाई को पूरी करनी थी। लेकिन, समयसीमा बीतने के बाद सिर्फ 40 प्रतिशत शिक्षक व कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सका है।

शासन ने मानव संपदा पोर्टल पर सूबे के एडेड डिग्री कालेजों के शिक्षक व कर्मचारियों ब्योरा अपलोड करके सत्यापन करना था। उच्च शिक्षा निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि ब्योरा अपलोड का कार्य लगभग पूरा हो गया। नेटवर्क में दिक्कत आ रही है। इसके बावजूद सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वह जितना जल्दी हो सके, सत्यापन का कार्य पूरा करके उसकी रिपोर्ट निदेशालय को भेजें।

प्राचार्य को करना है सत्यापन : उच्च शिक्षा निदेशक सभी जिलों के एडेड डिग्री कालेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया था कि वह अपने यहां के सभी कर्मचारियों व शिक्षकों का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही उसका सत्यापन करके रिपोर्ट निदेशालय को भेजें।

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शासन के पास होगा शिक्षकों का डाटा बैंक।

 प्रयागराज  ::  प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है, ताकि सभी शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का डाटा बैंक तैयार किया जा सके।


शिक्षकों एवं कर्मचारियों की तैनाती में डुप्लीकेसी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस बाबत उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर व्यापक पैमाने पर हुई गड़बड़ी सामने आने के बाद शासन की ओर से अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी शिक्षकों की तैनाती को लेकर जांच कराई जा रही है। इस बारे में सभी राजकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों से शिक्षकों के बारे में विवरण मांगा गया है।





इसी क्रम में सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि राकीय एवं सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का पूरा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर तत्काल अपलोड कर दिया जाए। विवरण अपलोड किए जाने के बाद संबंधित कर्मचारी का डाटा सत्यापित किया जाएगा।

मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारी की व्यक्तिगत सूचना, सेवा प्रारंभ करने की सूचन अपलोड की जानी है। साथ ही प्रत्येक कर्मचारी को अपने कोड के आधार पर लॉगिन करके अपना हाईस्कूल का प्रमाणपत्र और पैन कार्ड की स्कैन कॉपी मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करनी है। इसके अलावा जिन कर्मचारियों को जीपीएफ या प्रान नंबर आवंटित नहीं हुआ है, वे ई-सैलरी कोड के कॉलम में ट्रेजरी कोड अंकित करेंगे।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि डुप्लीकेसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। मानस संपदा पोर्टल पर सभी कर्मचारियों का विवरण अपलोड होने के बाद शासन एवं निदेशालय के पास कर्मचारियों का पूरा डाटा बैंक होगा, जिसके माध्यम से किसी भी वक्त ऑनलाइन माध्यम से किसी भी कर्मचारियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकेगी। इससे शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियेां की तैनाती को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी।



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फतेहपुर : बीत गया पिछला सत्र, अंग्रेजी स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों को नहीं आवंटित कर सका स्कूल, कागजों में अंग्रेजी माध्यम, हकीकत में हिंदी माध्यम में होती रही पढ़ाई

फतेहपुर : बीत गया पिछला सत्र, अंग्रेजी स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षकों को नहीं आवंटित कर सका स्कूल, कागजों में अंग्रेजी माध्यम, हकीकत में हिंदी माध्यम में होती रही पढ़ाई।

फतेहपुर : पिछला शैक्षिक सत्र बीतने के बाद अब नवीन सत्र भी शुरू हो गया लेकिन जिले का बेसिक शिक्षा विभाग पिछले वर्ष घोषित किए गए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को शिक्षक मुहैया नहीं करा सका।




शासन की मंशा के मुताबिक जिले के 75 प्राथमिक एवं 19 उच्च प्राथमिक स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का दर्जा प्रदान कर शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई थी।पहले सत्र की सफलता को देशासन की मंशा मुताबिक जिले से कुल 94 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित करने का फैसला किया गया।





पांच सौ से अधिक शिक्षकों ने इन स्कूलों में पदस्थापित होने के लिए आवेदन किए थे। विभाग अगस्त माह तक आवेदन करने वाले शिक्षकों की लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार ही करा सका था।

कागज में अंग्रेजी जमीन में हिन्दी ::  पहले सत्र में 65 प्राथमिक स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बदला था तो वहीं पिछले सत्र में 19 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल करते हुए कुल 94 स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम का दर्जा दिया था। इन स्कूलों में हिन्दी माध्यम से ही पढ़ाई होती रही। सूत्र बताते हैं कि पिछले सत्र में जब शिक्षकों के म्युचुअल ट्रांसफर किए गए थे कुछ ऐसे शिक्षकों को भी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भेज दिया गया जो अंग्रेजी स्कूलों में पदस्थापित होने की अर्हता नहीं रखते हैं।


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Friday, July 24, 2020

फतेहपुर : शिक्षकों के बाद बच्चों के आधार नामांकन का होगा सत्यापन

फतेहपुर : शिक्षकों के बाद बच्चों के आधार नामांकन का होगा सत्यापन।

फतेहपुर : शिक्षा विभाग में मिल रहे तमाम फर्जीवाड़े को लेकर शासन अब सख्त दिख रही है। सभी बॉ विद्यालयों के स्टाफसमेत परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों एवं शिक्षामित्र, अनुदेशकों आदि के कागजातों का सत्यापन कार्य कराया जा रहा है। अब स्कूलों में बच्चों के फर्जी आंकड़ेबाजी के संदेह पर सभी छात्र छात्राओं के आधार कार्ड का भी सत्यापन कराए जाने कीशासन से संकेत मिलने लगे हैं। जिले के परिषदीय स्कूलों में दो लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। जिसमें परिषदीय सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चे इसमें शामिल हैं। गैर जिलों में नौकरी हासिल करने में कई शिक्षक शिक्षकों ने खूब फर्जीवाड़ा किया है। शिक्षकों के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों की संख्या का सत्यापन करवाने जा रहा है। इसके बाद बच्चों की फर्जी संख्या परलगाम लगने की उम्मीद है। माना जा रहा है अधिकतर स्कूलों में बच्चों के पंजीकरण में फर्जीवाड़ा कर भ्रष्टाचार की शिकायतें शासन तक पहुंचने के बाद बच्चों के पंजीकरण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अनुशासन ने पंजीकृत बच्चों के आधार कार्ड सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए तीन स्तरों पर काम किया जाएगा। पहला बच्चों की आधार संख्या की फीडिंग हैं तो उसका सत्यापन होगा और यदि बच्चे का आधार कार्ड नहीं तो उसका कार्ड बनाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग यूआईडीएआई ने रजिस्ट्रार नामित किया है। इसके लिए हरविकास खंड में आधार नामांकन की व्यवस्था पहले से ही की जा चुकी है। आधार कार्ड इसी से बनाया जाएगा। हालांकि विभाग का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यदि आता है तो आधार सत्यापन कराया जाएगा।




कुछ ऐसे होता है फर्जीवाड़ा ::  स्कूलों में पंजीकृत बच्चों की संख्या को लेकर फर्जीवाड़े की आशंका हमेशा जताई जाती है। कई शहर की सीमाओं से सटे स्कूलों में संख्या बढ़ा कर लिखी जाती है। एक ही बच्चा आसपास के कई स्कूलों में पंजीकृत कर लिया जाता है। क्योंकि पहले इसके आधार पर ही शिक्षकों की संख्या तय की जाती थी। वहीं, पंजीकृत संख्या के आधार पर ही यूनिफार्म, स्वेटर, जूते-मोजे, स्कूल बैग, किताबें आदि खरीदी जाती हैं। मिड डे मील की मानीटरिंग से आईवीआरएस के जरिए होने के बाद मासिक या सालाना औसत निकाला जाता है तो वह पंजीकृत बच्चों की संख्या से काफी कम रहता है।


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Wednesday, July 22, 2020

कोरोना संकट के चलते शासन से वित्तविहीन शिक्षकों को ₹15 हजार दिए जाने की मांग, 3 माह से वेतन का संकट

कोरोना संकट के चलते शासन से वित्तविहीन शिक्षकों को ₹15 हजार दिए जाने की मांग, 3 माह से वेतन का संकट


 उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) ने सीएम और माध्यमिक शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिसमें मांग की गई है कि कोरोना वायरस के संकट के चलते वित्तविहीन शिक्षक-शिक्षिकाओं को तीन माह से वेतन नहीं मिला है। आर्थिक संकट बुरी तरह से चरमरा गया है।


इसलिए इन साथियों को प्रति माह 15 हजार रुपये का मानदेय राजकीय कोष से दिया जाए। उप मुख्यमंत्री और माध्यमिक शिक्षामंत्री को अन्य कई समस्याओं को लेकर 11 सूत्रीय मांग पत्र भेजा है।

Thursday, July 16, 2020

फतेहपुर : दस वर्षों में नियुक्त बेसिक शिक्षकों की होगी जांच, अब शासन के आदेश के मद्देनजर विभाग ने शिक्षकों से मांगे दस्तावेज

फतेहपुर : दस वर्षों में नियुक्त बेसिक शिक्षकों की होगी जांच, अब शासन के आदेश के मद्देनजर विभाग ने शिक्षकों से मांगे दस्तावेज।

फतेहपुर :: जिले में 2010 से अब तक विभिन्न शिक्षक भर्तियों के अधीन नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच कराकर सूची शासन को मुहैया कराई जाएगी। शासन की मंशा पर बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वर्ष 2010 से अब तक जिले में तैनाती पाने वाले सभी बेसिक शिक्षकों से उनके सभी शैक्षिक एवं नियुक्ति सम्बन्धी अभिलेख एकत्र कराए जाएं। अनामिका एवं फर्जी नियुक्तियों से संबंधित मामलों के सामने आने के बाद सभी शिक्षकों की जांच कराई जाएगी। पिछले दस वर्षों के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक पद परहुई विभिन्न शिक्षक भर्ती शासन के रडार पर हैं। एक तरफ जहां सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय एवं डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से शिक्षा स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले शिक्षकों के अभिलेखों की एसआईटी जांच कराई जा रही है तो वहीं अब पिछले नौ वर्षों में कई शिक्षक भर्तियों के अधीन नौकरी पाने वाले शिक्षकों की जांच कराने का निर्णय किया गया है। 2018 में शासन द्वारा गठित की गई समिति ने जांच कराने का फैसला किया था। इसके बाद अब अनामिका एवं फर्जी शिक्षकों के सामने आने के बाद शासन ने बड़े पैमाने पर जांच कराने का फैसला किया है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि 2010 से अब तक जितनी भी सहायक शिक्षक पद पर भर्ती हुई हैं उनकी अलग अलग सूची तैयार की जाए। प्रत्येक भर्ती के अन्तर्गत कितने शिक्षक नियुक्त किए गए हैं, सभी को चिन्हित किया जाए। उन्होंने ताकीद दी कि यह मामला शासन की प्राथमिकता में है इसलिए निर्धारित अवधि में सूचना निर्धारित फार्म के साथ उपलब्ध कराएं।





बीआरसी में शिक्षकों की भीड़ ::  इस समय 2010 से बाद नियुक्त हुए शिक्षकों के साथ शिक्षामित्रों एवं अंशकालिक अनुदेशकों के शैक्षिक अभिलेखों समेत अन्य सभी प्रपत्रों की जांच कराई जा रही है। इसके लिए निर्धारित प्रारूप पर विवरण भराकर अभिलेखों की स्वप्रमाणित फोटोप्रतियां भी जमा कराई जा रही हैं। इसके चलते ब्लॉक संसाधन केन्द्रों में शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों की खासी भीड़ एकत्र हो रही है।

शिक्षकों का होने लगा पुलिस वेरिफिकेशन ::  नियुक्तियों में धांधली देख शासन ने पिछली भर्ती से शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन भी शुरू करा दिया है। शासन ने भी पहले 2010 से अब तक सभी भर्तियों के अधीन चयनित हुए शिक्षकों का उनके पतों पर पुलिस वेरिफिकेशन कराने का फैसला किया था। कहा जा रहा है कि शासन अब प्रत्येक बिन्दु की बारीकी से जांच कराएगा। हालांकि 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अधीन नियुक्त हुए शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन कराने में पसीने छूट गए थे।


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Wednesday, July 15, 2020

फतेहपुर : मॉड्यूल (ध्यानाकर्षण, आधारशिला एवं शिक्षण संग्रह) पर आधारित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण के सम्बन्ध में विस्तृत निर्देश जारी, देखें

फतेहपुर : मॉड्यूल (ध्यानाकर्षण, आधारशिला एवं शिक्षण संग्रह) पर आधारित ऑनलाइन शिक्षक प्रशिक्षण के सम्बन्ध में विस्तृत निर्देश जारी, देखें।





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