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Tuesday, November 24, 2020

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम



★ क्लिक करके देखें संबंधित आदेश

📌  परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों हेतु "योगाभ्यास प्रतियोगिता" वर्ष 2020-21 के आयोजन के सम्बन्ध में 


प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए योगाभ्यास प्रतियोगिता कराई जाएगी। विभाग की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में शिक्षकों को अनुलोम-बिलोम, कपालभाती, भस्विका, उदगीथ, उज्जाई आसन करने होंगे।


यह प्रतियोगिता पंचायत स्तर से शुरू होकर ब्लाक एवं जिला स्तर के साथ प्रदेश स्तर पर कराई जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा की ओर से खंड शिक्षाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि जिले के सभी पंचायतों के विद्यालयों में यह प्रतियोगिता 28 नवंबर को होगी। विकास खंड स्तर पर दो दिसंबर को बहादुरपुर, सैदाबाद, हंडिया, धनुपुर, प्रतापपुर, तीन दिसंबर को कप बहरिया, मऊआइमा, होलागढ़, सोरांव, चार दिसंबर को कौड़िहार-1, डरहार-2, चाका, जसरा, शंकरगढ़, नगर क्षेत्र एवं पांच दिसंबर को करछना, मेजा, उरुवा, मांडा, कोरांव, कौधियारा के बीआरसी पर प्रतियोगिता होगी।

Wednesday, November 18, 2020

प्रतापगढ़ : तीन शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने से फैली सनसनी

प्रतापगढ़ : तीन शिक्षकों के कोरोना संक्रमित होने से फैली सनसनी

■  लालगंज इलाके में तैनात हैं तीनों शिक्षक


प्रतापगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग के तीन शिक्षकों समेत जिले में 18 और लोग संक्रमित मिले हैं। तीनों शिक्षक लालगंज क्षेत्र के अलग-अलग प्राथमिक स्कूलों में तैनात हैं।


लालगंज के डगरारा, कटरावलीपुर और अर्जुनपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक-एक शिक्षक जांच में कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। कुंडा के पूरे दत्तू की एक महिला बीमार चल रही थी। परिजनों ने उसे प्रयागराज के एसआरएन में दो दिनों पहले भर्ती कराया। मंगलवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 


स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महिला के घर पहुंचकर परिजनों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा। शहर में एक महिला समेत तीन लोग संक्रमित मिले। पट्टी में दो, कोहड़ौर में एक और संडवाचंद्रिका में एक महिला की रिपोर्ट पाजिटिव आई। वहीं सीएमओ के साथ रहे डीपीएम राजशेखर व उनके चालक सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की रिपोर्ट निगेटिव आने से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।

Sunday, November 15, 2020

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब

छात्र हैं नहीं फिर भी शिक्षक बढ़ाने का भेज रहे प्रस्ताव, अतिरिक्त पदों के सृजन प्रस्ताव पर मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार ने माँगा जवाब


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से संचालित परीक्षाओं में हर साल छात्रों की संख्या कम होती जा रही है। इस वर्ष मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षा में 1,82,259 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था,


जबकि 2019 में दो लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। दूसरी तरफ छात्रों की घटती संख्या के बावजूद प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसे अतिरिक्त पदों के सृजन सम्बन्धी प्रस्ताव उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को भेज रहे हैं। इस पर उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। रजिस्ट्रार ने प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को प्रस्तावों के पुनरावलोकन का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि गत तीन वर्षों में परीक्षा फार्म भरने व परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 


एक ओर जहां छात्रों की संख्या कम हो रही है वहीं दूसरी ओर अधिक छात्रों की संख्या प्रदर्शित कर अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसा पाया गया और अधिक छात्र संख्या दर्शाकर पद सृजन के प्रस्ताव भेजे गए तो संबंधित जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले में दस अनुदानित मदरसों में से कइयों ने शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को प्रस्ताव दिया है। रजिस्ट्रार के पत्र से मदरसों में खलबली मच गई है।

Tuesday, October 27, 2020

शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर

शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर 

 
लंदन। शिक्षकों के मूल्यांकन के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शुमार हैं। 35 देशों के वैश्विक सर्वे में भारत छठवें पायदान पर है। चीन इस सूची में शीर्ष पर है।


इसके अलावा घाना, सिंगापुर, कनाडा और मलयेशिया भारत से ऊपर हैं। ब्रिटेन की वारके फाउंडेशन के पिछले सप्ताह जारी हु सर्वे के मुताबिक भारत में शिक्षकों को लेकर लोगों में अलग सम्मान है। उनसे जब भी शिक्षकों का जिक्र होता है तो उनके लिए अच्छे विचार ही आते हैं। शिक्षकों को मूल्यांकन करते वक्‍त ज्यादातर लोगों को लगता है कि शिक्षक सबसे भरोसेमंद, बुद्धिमान, बच्चों का ख्याल रखने वाले और प्रेरणास्नोत होते हैं।


वारके फाउंडेशन और ग्लोबल टीचर प्राइज के संस्थापक सनी वारके के मुताबिक रिपोर्ट साबित करती है कि शिक्षकों का सम्मान करना केवल एक महत्वपूर्ण नैतिक कर्तव्य नहीं है जो देश के बेहती शैक्षिक परिणामों के लिए जारूरी है। शैक्षिक परिणामों के लिए आवश्यक है।


कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर के स्कूल व विश्वविद्यालयों के करीब 1.5 बिलियन विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। मौजूदा दौर में सबसे जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दुनिया भर में लोगाें को अच्छे शिक्षक मिलें। यह रिपोर्ट 2018 में 35 देशों के ग्लोबल टीचर स्टेटस इंडेक्स के आंकड़ों पर आधारित है।

Friday, October 9, 2020

फतेहपुर : तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त, भेजा गया आदेश

फतेहपुर : तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त, भेजा गया आदेश।

फतेहपुर :  बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने तीन शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। गुरुवार को तीनों शिक्षकों के पते पर सेवा समाप्ति का आदेश रजिस्टर्ड डाक से भेज दिया गया है। तीनों शिक्षक लंबे समय से बिना किसी सूचना के अपने स्कूलों से गायब थे।


हसवा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मिचकी में नियुक्त सहायक अध्यापक राजेश कुमार सात मई 2015 से बिना किसी सूचना के स्कूल से गायब थे। इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बक्सपुर के सहायक अध्यापक संजय कुमार वर्मा पहली जुलाई 2017 से स्कूल से गायब थे। मलवां ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बुधइयापुर में नियुक्त सहायक अध्यापक देवेश चंद्र गुप्ता छह नवंबर 2017 से बिना सूचना के स्कूल से गायब थे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें कई बार नोटिस जारी कर स्कूल आने के आदेश दिए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। 


बीएसए ने तीनों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी है। बीएसए ने बताया कि तीनों शिक्षकों के पते पर सेवा समाप्ति का आदेश रजिस्टर्ड डाक से भेज दिया गया है।

Thursday, October 8, 2020

माध्यमिक : अब वित्तविहीन शिक्षकों को आर्थिक सहायता देगी सरकार, सीएम ने विभाग के अफसरों के साथ किया मंथन

माध्यमिक : अब वित्तविहीन शिक्षकों को आर्थिक सहायता देगी सरकार, सीएम ने विभाग के अफसरों के साथ किया मंथन।

लखनऊ : कोरोना काल में वित्तविहीन शिक्षकों को आर्थिक राहत देकर योगी सरकार बड़ा राजनीतिक दांव खेलने जा रही है। वित्तविहीन शिक्षकों को आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 2 और 3 अक्तूबर को आयोजित बैठकों में मंथन किया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी अब वित्तविहीन शिक्षकों को राहत देने के लिए उस पर आने वाले खर्च का आकलन कर रहे हैं। 

प्रदेश के 20 हजार 558 वित्तविहीन विद्यालयों में साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। कोरोना संकट काल में शिक्षा सत्र 2020-21 में अब तक स्कूलों का विधिवत संचालन नहीं शुरू हुआ है। वर्तमान स्थिति में भी 30 से 40 प्रतिशत तक अभिभावक नियमित स्कूल फीस जमा नहीं  करा रहे हैं। स्कूल फीस नहीं मिलने का सबसे ज्यादा असर वित्तविहीन शिक्षकों पर हुआ है। स्कूल प्रबंधन ने वित्तविहीन शिक्षकों के वेतन में 50 प्रतिशत की कटौती की। सैंकड़ों स्कूलों में वित्तविहीन शिक्षकों को वेतन नहीं दिया गया है। 


ऐसे में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वित्तविहीन शिक्षकों को आर्थिक राहत देने का प्रस्ताव तैयार किया। 2 और 3 अक्टूबर को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ इस पर मंथन किया।


वित्तविहीन शिक्षकों आर्थिक राहत देने पर विचार किया गया है, अभी इसका आकलन किया जा रहा है। उसके बाद इस संबंध में उच्च स्तर पर निर्णय किया जाएगा। -विनय कुमार पांडेय, निदेशक माध्यमिक शिक्षा

Monday, October 5, 2020

शिक्षकों बिन स्कूल में कैसे हो पढ़ाई? राजधानी के नगर क्षेत्र के 22 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नहीं, 69 में सिर्फ एक शिक्षक

शिक्षकों बिन स्कूल में कैसे हो पढ़ाई? राजधानी के नगर क्षेत्र के 22 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नहीं, 69 में सिर्फ एक शिक्षक

 
सरकार ने 15 अक्टूबर से माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को बुलाकर पढ़ाई कराने की तैयारी शुरू की है। इन विद्यालयों में संसाधन भी हैं और शिक्षक भी, लेकिन ऐसी सूरत परिषदीय विद्यालयों की नहीं। लखनऊ के नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है। आलम यह है कि कुल 254 में से 22 में तो कोई शिक्षक ही नहीं हैं। 69 में सिर्फ एक गुरुजी के भरोसे पूरा विद्यालय है। परिषदीय विद्यालयों में सीनियर कक्षा के बच्चों को बुलाकर पढ़ाई कराने का निर्णय हुआ है।


अपना स्कूल खाली, दूसरे विद्यालय में करेंगे पढ़ाई

नगर क्षेत्र के जोन एक-दो, तीन और चार में करीब 254 विद्यालय हैं। इनमें कई ऐसे विद्यालय हैं जहां शिक्षक नहीं हैं। वहां दूसरे विद्यालय के शिक्षामित्र भेजे जाते हैं। शिक्षकों की कमी के कारण प्राथमिक विद्यालय पिपराघाट के बच्चे कैबिनेटगंज प्राथमिक विद्यालय भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। दुबग्गा समेत कई इलाकों में ऐसे विद्यालय हैं जिनके बच्चे दूसरे विद्यालय जाएंगे।

विद्यालयों में बुलाए गए बच्चे तो कैसे चलेंगी कक्षाएं


इन विद्यालयों में नहीं शिक्षक

जोन एक : अमीनाबाद, आजादनगर, बाजार झाऊलाल, बेहसा-एक, बेहसा-दो, मुक्ति खेड़ा।

जोन दो : चक्कर पुरवा, धनेहर खेड़ा, गौरी खेड़ा-एक, गौरी दो, गोदौंदा, हैवतमऊ मवैया, हसनपुरिया।

जोन तीन : कुंडरी रकाबगंज, मार्टिन पुरवा, लोकमान गंज, मारवाड़ी गली, मटियारी, नया गदौरा, रानीगंज।

जोन चार : शंकर पुरवा, उदयगंज।

एकल शिक्षक व्यवस्था

’ जोन एक के 20 विद्यालयों में।

’ जोन दो के 19 विद्यालयों में।

’ जोन तीन के 20 विद्यालयों में।

’ जोन चार के 10 विद्यालयों में।

नगर क्षेत्र में शिक्षकों की कमी है। यहां सीधे पो¨स्टग का कोई प्रावधान नहीं है। यह शासन की व्यवस्था है। जहां, शिक्षक नहीं हैं वहां पर अन्य विद्यालयों को शिक्षकों को भेजकर विद्यालय खोले जा रहे हैं। - दिनेश कुमार, बीएसए

45 फीसद विद्यालय ऐसे हैं जहां या तो शिक्षक नहीं हैं या एकल शिक्षक की व्यवस्था है। शासन को नगर क्षेत्र की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए बिना ज्येष्ठता खोए ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों को नगर क्षेत्र में समायोजित करना चाहिए। - विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक, प्रशिक्षित स्नातक एसो.

Friday, October 2, 2020

प्रयागराज : बेसिक शिक्षा के बर्खास्त 49 शिक्षकों से पौने तीन करोड़ रुपये की होगी वसूली, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर कर रहे थे नौकरी।

प्रयागराज : बेसिक शिक्षा के बर्खास्त 49 शिक्षकों से पौने तीन करोड़ रुपये की होगी वसूली, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर कर रहे थे नौकरी।


प्रयागराज : स्कूलों में फर्जी अंकपत्र व प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाने वाले 49 शिक्षकों के विरुद्ध बेसिक शिक्षा परिषद कार्रवाई कर चुका है। उनकी बर्खास्तगी के बाद अब रिकवरी की भी तैयारी शुरू हो चुकी है। पूर्व में सभी शिक्षकों के विरुद्ध रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी।


बीएसए संजय कुशवाहा ने बताया कि पिछले दिनों विभाग में तैनात शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच की गई थी। उसमें कुल 62 अध्यापक ऐसे पाए गए थे जिनके शैक्षिक प्रमाणपत्र संदिग्ध थे। बाद में सभी कागजातों की गहनता से जांच की गई तो वे फर्जी पाए गए। हालांकि अभी इनमें से 13 लोग ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में दी गई नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। शेष 49 अध्यापकों ने जवाब दिया। उनके प्रपत्र और जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इस पर विभाग ने सभी को बर्खास्त कर दिया था। उसी समय सभी दोषी शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। उसके बाद वेतन आहरण संबंधी विवरण एकत्र कर शिक्षकों से वसूली की प्रक्रिया पूरी करने के लिए आगणन कराया गया। अब 49 अध्यापकों से कुल पौने तीन करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी।

’>>फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर कर रहे थे नौकरी

’>>इन सभी पर दर्ज कराया जा चुका है मुकदमा

Friday, September 11, 2020

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

पीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले एटा के शिक्षक को कोर्ट से मिली राहत

 
प्रयागराज : सोशल मीडिया पर पीएम और सीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उक्त मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर रद कर दी है। यह आदेश शिक्षक नेता नंदलाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूíत मनोज मिश्र व न्यायमूíत अनिल कुमार नवम की पीठ ने दिया। 


याची की ओर से अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की। एटा के मिरहची थाना क्षेत्र में स्थित इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व शिक्षक नेता नंदलाल यादव ने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। उसका संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर मिरहची थाने की पुलिस ने आइटी एक्ट की धारा 66-ए के तहत एफआइआर दर्ज की थी। इसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि धारा 66-ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है।

Monday, September 7, 2020

फर्रुखाबाद : सम्प्रेक्षण गृह से शिक्षक सम्बद्ध, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

फर्रुखाबाद : रोक के बाद भी तीन शिक्षकों को बीएसए ने सम्प्रेक्षण गृह से किया सम्बद्ध, जिले में सम्बद्ध हैं 56 शिक्षक, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

फर्रुखाबाद :  बीएसए ने दूरदराज के ब्लाकों में तैनात तीन शिक्षकों को राजकीय संप्रेक्षण गृह में संबद्ध किया है। उनको विद्यालय से कार्यमुक्त करने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया है। ये स्थिति तब है जब शासन से शिक्षकों के संबद्धीकरण पर रोक है। जिले में 56 शिक्षक संबद्ध हैं, इनको रिलीव कर किसी भी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र अभी तक बीईओ ने नहीं दिया। जिले में पहले से 56 शिक्षक मूल विद्यालय से दूसरे स्कूल या बीएसए कार्यालय से संबद्ध हैं।




इनका संबद्धीकरण समाप्त कर मूल विद्यालय में भेजने का आदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने दिया था। उन्होंने बीएसए से शिक्षकों को मूल विद्यालय के लिए रिलीव करने और किसी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र मांगा था। संबद्ध शिक्षकों को मूल विद्यालय रिलीव नहीं किया गया है। बीएसए ने 14 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय खजुरिया शमसाबाद के सहायक अध्यापक अभयकांत, प्राथमिक विद्यालय कायमगंज के अध्यापक अनुराग सोमवंशी व प्राथमिक विद्यालय धनी नासा के सहायक अध्यापक विजय प्रताप को राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा फतेहगढ़ में संबद्ध कर दिया है। इनको किशोर अपचारियों को ऑनलाइन शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी है।


 बीएसए लालजी यादव ने बताया कि किशोर अपचारियों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा के अधीक्षक ने पत्र भेजा था। उन्होंने चार शिक्षकों के नाम दिए थे, तीन शिक्षकों को ही संबद्ध किया गया है। अधीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि पिछले सत्र में यही शिक्षक तैनात थे, इस कारण इन्हीं को संबद्ध करने के लिए बीएसए को पत्र भेजा था।




Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, September 3, 2020

रिटायरमेंट की उम्र में स्मार्टफोन चलाना सीख रहे गुरुजी

रिटायरमेंट की उम्र में स्मार्टफोन चलाना सीख रहे गुरुजी

 

केस वन: केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज में भूगोल के प्रवक्ता बृजलाल 31 मार्च को 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे। अम्बेडकरनगर के बृजलाल अब तक की-पैड वाला साधारण फोन इस्तेमाल करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उन्होंने जून में स्मार्ट मोबाइल खरीदकर क्लास के बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनवाया। चूंकि खुद बहुत अच्छे से न तो स्मार्टफोन चला पाते हैं और न फोटो खींच पाते हैं इसलिए रोज स्कूल खुलने से आधा घंटा पहले पहुंच जाते हैं। अध्यापक कक्ष में बैठकर उस दिन पढ़ाने वाले विषय को कॉपी पर लिखते हैं और फिर साथी शिक्षकों से अनुरोध करके नोट्स व्हाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट करा देते हैं।


केस टू: गोपाल विद्यालय इंटर कॉलेज कोरांव के शिक्षक आजाद बहादुर सिंह की भी यही स्थिति है। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने लॉकडाउन के बाद 18 अप्रैल को स्मार्टफोन खरीदा और अब अपने साथी शिक्षकों और परिवार के सदस्यों की मदद से ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं।

इसे शिक्षकों के पढ़ाने का जज्बा कहें या विभाग के दबाव का असर लेकिन एक सच यह भी है कि रिटायरमेंट की उम्र में पहुंच चुके कई शिक्षक अब स्मार्टफोन चलाना सीख रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को यू-ट्यूब, व्हाट्सएप आदि माध्यमों से बच्चों को पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसकी निगरानी प्रधानाचार्य से लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक और यूपी बोर्ड के सचिव तक कर रहे हैं। ऐसे में कई शिक्षक एंड्रायड फोन खरीदकर उसे सीखने की मशक्कत करते नजर आ रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर वशिष्ठ सेवा संघ इंटर कॉलेज महेवा नहवाई मांडा के शिशिर श्रीवास्तव को ही लें। 31 मार्च को रिटायर होने जा रहे शिशिर ने 11 अप्रैल को स्मार्ट फोन खरीदा है। मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज कौंधियारा के शिक्षक रामदेव भी 31 मार्च को रिटायर होंगे। उन्होंने भी 22 अप्रैल को स्मार्टफोन खरीदा है। इसी स्कूल के संतोष शुक्ला 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने 21 अप्रैल को स्मार्टफ़ोन खरीदकर ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया है।

इनका कहना है

कोरोना ने स्कूली शिक्षा के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी की है। इससे निपटने के लिए पूरा विभाग गंभीरता से प्रयास कर रहा है। निश्चित रूप से शिक्षकों ने अभूतपूर्व सहयोग दिया है। कई शिक्षक रिटायर होने वाले हैं लेकिन इसके बावजूद स्मार्टफोन सीखकर पढ़ाई करा रहे हैं। आरएन विश्वकर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक

Wednesday, September 2, 2020

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध


अधिकारियों में तालमेल नहीं और शिक्षक हो रहे कोरोना काल में  परेशान

प्रयागराज। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश में विरोधाभास पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से ब्लॉक-4 की गाइड लाइन में स्कूल-कॉलेज एवं शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। 


21 सितंबर से स्कूलों में 50 फीसदी टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टॉफ को ऑनलाइन शिक्षा एवं परामर्श के लिए बुलाया जा सकता है। यह आदेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। जबकि, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के निर्देश पर जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही सभी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है।


लखनऊ : अनलॉक 4 की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्र सरकार ने 21 सितंबर के बाद 50 फीसदी स्टाफ को ही स्कूल बुलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद प्रदेश में बिना रोस्टर सभी शिक्षकों को रोज बुलाया जा रहा है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस पर नाराजगी जताते हुए रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार 30 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश हैं। ऐसे में शिक्षकों समेत सभी कर्मचारियों को बुलाने से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे

प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी, कई नामचीन स्कूल भी छटनी में आगे। 


यूपी में लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छोटे स्कूल तो छोड़ दें शहर के कई नामचीन स्कूल तक इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा  प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।


राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न होने का कारण बताकर शिक्षकों की छंटनी शुरू कर दी है। कई छोटे स्कूलों ने तो अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया है। अब बड़े और नामचीन स्कूलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।


गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।


प्री-प्राइमरी और प्राइमरी में हाल ज्यादा खराब
राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है। इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। कई बंद भी हो चुके हैं। जो स्कूल ऑनलाइन क्लासेज चला भी रहे हैं वहां, बच्चों की संख्या कम होने के कारण वेतन तक कम कर दिया गया है।


अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।

Saturday, August 29, 2020

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग


किसी के घर में राशन का संकट, कोई नहीं जमा कर पा रहा बच्चों की फीस

कोरोना काल में वेतन देने का सरकारी कोशिश बेअसर, नौकरी पर संकट भी


प्रयागराज। सरकारी दावे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं। खासकर वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक तो भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। अपने ही बच्चों की फीस जमा कर पाने में असमर्थ शिक्षकों के घर में अकसर राशन का संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे में साथी शिक्षक एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।


नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची। शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।

Friday, August 28, 2020

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में।





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Friday, August 14, 2020

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇

लखनऊ। बुलंदशहर के सिकंदरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, थपरावली के व्यायाम शिक्षक पंकज यादव को आपस में मारपीट के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार को न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर मारपीट की ख़बरें चली थीं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसका संज्ञान लेते हुए दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇 

उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर, आधा दर्जन शिक्षकों की बहाली को लेकर नहीं गम्भीर महकमा

उन्नाव : निलंबित शिक्षकों की बहाली भूल गए अफसर।


लापरवाही में निलंबित किए गए शिक्षकों की बहाली को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। महीनों बाद भी जिले के निलंबित आधा दर्जन शिक्षकों की अब तक बहाली नहीं हो सकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र देकर जांच आख्या के आधार पर न तो कार्रवाई हुई और न ही बहाली। बहाली में हो रहे विलंब से स्कूलों की पठन पाठन व्यवस्था प्रभावित है। साथ ही शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।




पूर्व बीएसए बीके शर्मा ने साल 2019 में स्कूलों के निरीक्षण में लापरवाह मिले दर्जनों शिक्षकों को निलंबित किया था। इसके अलावा प्रभारी बीएसए राकेश कुमार, सीडीओ व वर्तमान बीएसए प्रदीप पांडेय ने कई निलंबन किए। कुछ समय पहले कई शिक्षक बहाल हुए पर अभी कई की बहाली लटकी है, जबकि नियमानुसार तीन महीने के भीतर इनकी बहाली हो जानी चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि निलंबित शिक्षक को 15 दिन के भीतर आरोप पत्र देकर उसका पक्ष लिया जाए। इसके बाद जांच आख्या के आधार पर उस पर अनुशासात्मक कारवाई हो या फिर उसकी बहाली की जाए। इसके बाद भी नियम कायदों को ताक पर रखकर तमाम शिक्षकों को कई महीनों बाद भी बहाल नहीं किया गया है।




इस मामले में बीएसए प्रदीप पांडेय का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आख्या मिल रही है, उसी आधार पर शिक्षकों को बहाल किया जा रहा है। अभी इन शिक्षकों की आख्या नहीं आई है, इसलिए बहाली या कार्रवाई नहीं की गई है। आख्या मांगी गई है जल्द आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी। किसी शिक्षकों को आसपास का स्कूल नहीं दिया जाएगा। जो जहां है वहीं रहेगा।




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Wednesday, August 5, 2020

प्रतापगढ़ : आठ माह में बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए दिव्यांग अध्यापक, मेडिकल बोर्ड की जांच से बचने के लिए किया खेल, विभाग में हड़कंप

प्रतापगढ़ : आठ माह में बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए दिव्यांग अध्यापक, मेडिकल बोर्ड की जांच से बचने के लिए किया खेल, विभाग में हड़कंप, पहले जिले में थे 1170 और अब नई संख्या छिपा रहा विभाग।

प्रतापगढ़ :  बेसिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग बनकर नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों की जांच मेडिकल बोर्ड से होने का विभाग में पत्र आते ही लगभग आधे दिव्यांग शिक्षक सामान्य कोटे में चयन होने का दावा कर रहे हैं। बीबीसी से आई रिपोर्ट में खुलासा होने से विभागीय अधिकारी दंग हैं। हालत यह है कि विभाग ने बीईओ पर शिकंजा कसते हुए नियुक्ति पत्र मांग लिया है। इससे जिलेभर में हड़कंप मचा है। बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों शिक्षकों के मूल अभिलेखों को मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसमें सभी शैक्षिक प्रमाणपत्रों को भी अपलोड करने को कहा गया है। इस बीच जिलेभर में शिक्षकों के अभिलेखों की जांच के लिए अभियान चलाया गया।




इनमें दिव्यांग शिक्षकों की सूचना अलग से मांग कर मेडिकल बोर्ड से विकलांगता की जांच कराने को कहा गया। बेसिक शिक्षा विभाग के पास शासन का पत्र आते ही खंड शिक्षा अधिकारियों से ऐसे अध्यापकों की सूची मांग ली गई। शिक्षक नेताओं ने खेल करते हुए अपने चहेते दिव्यांग शिक्षकों को बचाने के लिए उनकी नियुक्ति को सामान्य कोटे में दिखा दिया। आलम यह है कि आठ माह पहले विभाग की गणना में जहां 1170 दिव्यांग शिक्षक थे, वहीं इन दिनों इनकी संख्या आधी हो गई है। हालांकि विभाग यह कहकर बचाव कर रहा है कि अभी बीईओ ने रिपोर्ट ही नहीं दी है। विभाग ने अब सभी शिक्षकों से नियुक्ति पत्र मांग लिया है।

तबादले, प्रमोशन में दिखाते हैं दिव्यांग प्रमाणपत्र ::  बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसे भी दिव्यांग शिक्षक हैं, जो तबादला और प्रमोशन लेने में दिव्यांग प्रमाणपत्र दिखाते हैं। वह दिव्यांग भत्ता लेने से कतराते हैं। विभाग में लगभग 300 दिव्यांग शिक्षक हैं, जो भत्ते का लाभ उठा रहे हैं।

जो शिक्षक होशियारी दिखा रहे हैं, वह बच नहीं पाएंगे। मानव संपदा पोर्टल पर भी नियुक्ति पत्र अपलोड करना होगा। विभाग ने भी नियुक्ति पत्र तलब किया है। अगर कोई गलत सूचना देता है तो उसकी नौकरी भी जा सकती है। अभी दिव्यांग शिक्षकों की वास्तविक संख्या नहीं आई है। अशोक कुमार सिंह बीएसए।


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आजमगढ़ : पैनकार्ड फर्जीवाड़े में दो शिक्षकों की सेवा समाप्त, एसआईटी की जांच में 28 शिक्षक हुए थे चिन्हित, पांच शिक्षकों की 27 जुलाई को हो चुकी है बर्खास्तगी

आजमगढ़ : पैनकार्ड फर्जीवाड़े में दो शिक्षकों की सेवा समाप्त, एसआईटी की जांच में 28 शिक्षक हुए थे चिन्हित, पांच शिक्षकों की 27 जुलाई को हो चुकी है बर्खास्तगी।


आजमगढ़ :  एक पैन कार्ड का इस्तेमाल अलग-अलग जनपदों । में दो-दो शिक्षकों द्वारा अलग अलग खाता नंबरों के साथ प्रयोग किए जाने का प्रकरण सामने आया था। एसआईटी व एसटीएफ की जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसमें जिले के ऐसे 28 शिक्षक चिन्हित हुए थे। जिसमें पांच शिक्षकों के फर्जी होने की पुष्टि होने पर पहले ही बर्खास्तगी हो चुकी है वहीं दो और फर्जी शिक्षक चिन्हित होने पर प्रभारी बीएसए ने मंगलवार को नियुक्ति तिथि से इनकी सेवा समाप्त कर दी और खंड शिक्षाधिकारियों को रिकवरी का आदेश भी जारी कर दिया।


बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति में लगातार फर्जीवाड़ा सामने आ रहे है। बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जीवाड़े की जांच सरकार एसआईटी व एसटीएफ से करा रही है। इसी जांच के दौरान आईआईटी व एसटीएफ ने वेतन भुगतान के फाइलों की जांच के दौरान एक नया फर्जीवाड़ा पकड़ा। जिसमें एक ही पैन कार्ड पर दो शिक्षकों द्वारा अगल-अलग जनपदों व खाता नंबरों पर वेतन आहरित कोरोना पकड़ा गया। पूरे प्रदेश में ऐसे 192 शिक्षक चिन्हित हुए थे जिसमें 28 शिक्षक जिले के भी शामिल थे। एसआईटी ने बकायदा सूची तैयार कर बेसिक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराया और फिर निदेशालय से सूचना जिलों को उपलब्ध करा दी गई। जिले के 28 शिक्षक इस फर्जीवाड़े में चिन्हित हुए थे। जिन्हें बेसिक शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर सत्यापन के लिए बुलाया था। 28 में से कुल सात शिक्षकों ने अपना सत्यापन नहीं कराया।

इन्हें दो बार अलग-अलग तिथियों में नोटिस भेजी गई। अंतिम नोटिस 17 जुलाई को भेजी गई थी। जिसमें सात दिनों के अंदर मूल अभिलेखों के साथ कार्यालय पहुंच कर सत्यापन का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी इन सात शिक्षकों ने सत्यापन नहीं कराया। जिस पर बीएसए ने 27 जुलाई को इन पांच शिक्षकों की नियुक्ति तिथि से सेवा समाप्त करने का आदेश निर्गत करने के साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को रिकवरी का आदेश भी जारी कर दिया।

शेष बचे दो अन्य शिक्षकों पर मंगलवार को प्रभारी बीएसए ने कार्रवाई किया और दोनों की नियुक्ति तिथि से सेवा समाप्त करते हुए रिकवरी का आदेश निर्देश किया। सेवा समाप्त किए गए शिक्षकों में जय शिव प्रताप चंद हरैया ब्लाक के प्रावि शानूपुर पर तैनात थे और सर्विस बुक में अपना पता सल्लाहपुर देवरिया बताया था। वहीं दूसरे बस्ती शिक्षक अनिल कुमार अतरौलिया ब्लाक के प्रावि सिकरौरा पर तैनात थे।




पूर्व में इन शिक्षकों पर हुई है कार्रवाई

आजमगढ़ : प्रभारी बीएसए अमरनाथ राय ने बताया कि प्रावि शोधनपट्टी बिलरियागंज पर तैनात रेखा पुत्री अवधेश कुमार सिंह निवासी सिविल लाइंस आजमगढ़, प्रावि भीलमपुर महराजगंज पर तैनात राजेश कुमार पुत्र राम दुलारे निवासी ग्राम मैलानी पोस्ट खलीलाबाद जिला संत कबीर नगर, प्रावि धनसिंहपुर कोयलसा पर तैनात आवेश कुमार पुत्र सतीश चंद्र वर्मा निवासी चांदमारी, इमिलिया जिला मऊ, प्रावि सीही सठियांव पर तैनात नेहा शुक्ला पुत्री ब्रह्मानंद शुक्ला निवासी ग्राम इमली पोस्ट रामपुर जिला गोरखपुर व प्रावि पिचरी अतरौलिया पर तैनात बांके बिहारी पुत्र किशोर प्रसाद निवासी सलेमपुर, सलेमपुर देवरिया ने अपना सत्यापन नहीं कराया। ऐसी स्थिति में इन सभी को नियुक्ति तिथि से 27 जुलाई को ही बर्खास्त कर दिया गया है।

फर्जी डॉक्यूमेंट पर पाई थी परिवार की नौकरी, बर्खास्त

आजमगढ़ : जूनियर हाई स्कूल मुबारकपुर बालक पर 2018 में पुष्पा देवी पत्नी मन्नू कुमार निवासी कोपागंज जिला मऊ की बतौर परिचर मृतक आश्रित पद पर तैनाती हुई थी। पुष्पा के डॉक्युमेंटों का भी सत्यापन कराया गया तो वह फर्जी पाया गया। जिस पर प्रभारी बीएसए ने मंगलवार को पुष्पा देवी की नियुक्ति भी नियुक्ति तिथि से समाप्त करते हुए रिकवरी का आदेश जारी किया है। पुष्पा देवी के कई डॉक्यूमेंट सत्यापन में फेल पाए गए है।


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