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Saturday, January 16, 2021

UP : पंचायत चुनावों से पहले प्राइमरी स्‍कूलों तक बिजली पहुंचाने की कवायद

UP : पंचायत चुनावों से पहले प्राइमरी स्‍कूलों तक बिजली पहुंचाने की कवायद, गोरखपुर में सवा करोड़ की दरकार 


गोरखपुर : यूपी में ग्राम पंचायत चुनाव से पहले जिले के विभिन्न ब्लाकों के 772 प्राथमिक स्कूलों में बिजली निगम को कनेक्शन देना है। ये सभी स्कूल बिजली सुविधा सें वंचित है। शासन के निर्देश पर बिजली निगम ने सर्वे कराकर इन स्कूलों तक बिजली पहुचाने के लिए सवा करोड़ का इस्टीमेट बनाकर बीएसए को भेजा है। बजट की प्रत्याशा में बिजली निगम ने टेण्डर की प्रक्रिया भी पूरी कर दी है। अब काम शुरु करने के लिए निगम को सवा करोड़ मिलने का इंतजार है। एसई का कहना है कि शासन से जल्द ही बजट मुहैया हो जाएगा।


शासन ने दिसम्बर में बिजली निगम को पत्र भेजकर कहा था कि बिजली सुविधा से वंचित जिले के प्राथमिक स्कूलों का सर्वे कर पंचायत चुनाव से पहले खम्भा, तार व ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराए। इसके बाद ग्रामीण वितरण मण्डल द्वितीय के अभियंताओं व प्रशासन की टीम ने विभिन्न ब्लाकों के प्राथमिक स्कूलों का सर्वे की। इस दौरान 772 स्कूल बिजली सुविधा से वंचित मिले। रिपोर्ट मिलने के बाद वितरण मण्डल के एसई ने रिपोर्ट से शासन को अवगत कराया दिया। क्षेत्र के अवर अभियंताओं ने स्कूलों तक एचटी लाइन बनाने व ट्रांसफॉर्मर लगाने में होने वाले खर्च का आकलन कर इस्टीमेट तैयार किया। चिन्हित स्कूलों तक एचटी लाइन बनाने व ट्रांसफॉर्मर लगाने में 1.20 करोड़ खर्च का इस्टीमेट बना। ग्रामीण वितरण मण्डल के एसई ने बीएसए को टीसी भेजकर पैसा जल्द से जल्द जमा करने को कहा है। शासन से बजट अवमुक्त होते ही कार्यदायी फर्म काम शुरू कर देगी। यह काम पंचायत चुनाव से पहले पूरा होना है।


इन ब्लाकों के प्राथमिक स्कूलों में लगने हैं कनेक्शन
भटहट-36, चरगांवा-9, नगर क्षेत्र-15, पिपराइच-47, ब्रम्हपुर-70, खोराबार-13, सरदानगर-35, कैम्पियरगंज-38, जगंल कौड़िया-67, खजनी-29, पाली-33, पिपरौली-22, सहजनवा-51, बांसगांव-54, बड़हलगंज-55, गगहा-57, कौड़ीराम-48, बेलघाट-18, गोला- 46, ऊरुवा-31 स्कूल


शासन के निर्देश पर प्रशासन व बिजली निगम की टीम के सर्वे में जिले के विभिन्न ब्लाकों में 772 स्कूल बिना बिजली सुविधा के मिले। इन स्कूलों तक एचटी लाइन बनाकर, 25 केवीए ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली कनेक्शन पंचायत चुनाव से पहले दिया जाना है। इसमें करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने है। इसके लिए बीएसए को टीसी भेजी गई है। काम कराने के लिए टेण्डर प्रक्रिया भी फाइलन कर दी गई है। बजट मिलते ही काम शुरु करा दिया जाएगा। ई. राजीव चतुर्वेदी, एसई, ग्रामीण वितरण मण्डल प्रथम

Wednesday, January 13, 2021

गोरखपुर : जनपदीय वार्षिक अवकाश तालिका जारी, देखें

जनपदीय वार्षिक अवकाश तालिका जारी, देखें

Saturday, January 9, 2021

गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों में जल्द आएंगे टैबलेट, तैयारी शुरू

गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों में जल्द आएंगे टैबलेट, तैयारी शुरू


गोरखपुर। बेसिक शिक्षा परिषद के 2504 विद्यालयों को जल्द ही टैबलेट दिया जाएगा। इस संबंध में शासन ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इसमें विभाग से जिले में कार्यरत शिक्षकों की सूची को तलब किया गया है। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।


आने वाले दिनों में टैबलेट का इस्तेमाल न सिर्फ बच्चों की ई- लर्निंग, बल्कि शिक्षकों की बायोमीट्रिक प्रणाली से उपस्थिति दर्ज कराने में किया जाएगा। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) के निर्देश पर प्रथम चरण में परीक्षण  चल रहा है। इसके लिए लखनऊ के 15 विद्यालय पहले ही चयनित किए जा चुके हैं। धीरे-धीरे प्रदेश के अन्य जनपदों में भी परीक्षण कर इसका वितरण सुनिश्चित कराया जाएगा। 


बीएसए बीएन सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन और बच्चों तक उच्चीकृत शिक्षा पहुंचाने के नजरिए से शासन ने शिक्षकों को टैबलेट वितरित करने का मन बनाया है। शासन स्तर से शिक्षकों की दोबारा सूची मांगी गई है। उसे जल्द ही भेज दिया जाएगा।

Tuesday, December 29, 2020

गोरखपुर : अंतर्जनपदीय ट्रांसफर हेतु रिक्ति प्रदर्शित करने परन्तु पदोन्नति हेतु रिक्ति शून्य बताने पर प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर मार्गदर्शन हेतु बीएसए ने सचिव परिषद को लिखा पत्र, देखें

गोरखपुर : अंतर्जनपदीय ट्रांसफर हेतु रिक्ति प्रदर्शित करने परन्तु पदोन्नति हेतु रिक्ति शून्य बताने पर प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर मार्गदर्शन हेतु बीएसए ने सचिव परिषद को लिखा पत्र, देखें



Monday, December 7, 2020

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती


गोरखपुर।
बर्खास्त किए जा चुके फर्जी शिक्षकों की मुसीबतें अब और बढ़ने जा रही हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी करेगी। फरार चल रहे आरोपितों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी करेगी। पुलिस मुख्यालय लखनऊ ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है और एसएसपी से पूछा है कि कितने फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कितने गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कितनों की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। पुलिस मुख्यालय ने अपनी सख्त मंशा भी जाहिर की है। पुलिस अधिकारियों से कहा है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लें।


बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग के साथ ही समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूल-कॉलेजों में बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियां की गई हैं। शासन की सख्ती के बाद की गई जांच में फर्जी शिक्षकों की काली करतूतों का खुलासा हुआ है। शासन की मंशा के अनुरूप पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शासन की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई है। एसटीएफ ने अपनी जांच-पड़ताल में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों को पकड़ा है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। सूत्रों का कहना है कि अकेले गोरखपुर जिले में 78 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। इनके खिलाफ जांच-पड़ताल चल रही है।


अपर पुलिस महानिदेशक अपराध डॉ. केएस प्रताप कुमार की एक चिट्ठी ने गोरखपुर पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है। इस चिट्ठी ने शासन की मंशा भी जाहिर कर दी है कि फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने और करोड़ों रुपये डकार जाने वाले इन फर्जी शिक्षकों को सरकार बख्शने वाली नहीं है। पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस प्रमुखों को स्पट तौर पर निर्देश दिया है कि इस मामले को प्राथमिकता पर लें और यह रिपोर्ट तैयार कर भेजें कि कितने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया गया है। कितने की सेवा समाप्त की गई है। जिनकी सेवा समाप्त की गई उनमें से कितनों से वसूली की जा चुकी है। कितनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कितने फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस मुख्यालय ने यह भी पूछा है कि कितने की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। कितनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।


थानेदारों ने तेज की विवेचनाएं
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय से चिट्ठी आने के बाद एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने भी सख्ती दिखाई है। एसएसपी की सख्ती के बाद फर्जी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की थानेदारों और चौकी प्रभारियों ने विवेचनाएं तेज कर दी हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिन फर्जी शिक्षकों के खिलाफ अभियोग दर्ज है और जो फरार चल रहे हैं उन पर दबाव बनाने के लिए पुलिस उनके खिलाफ न्यायालय से कुर्की का आदेश लेगी।

Saturday, November 28, 2020

महराजगंज : शिक्षकों के जीपीएफ खातों से एक अरब की राशि डूबने का खतरा, गोरखपुर जनपद से अब तक नहीं हुआ ट्रांसफर

महराजगंज : शिक्षकों के जीपीएफ खातों से एक अरब की राशि डूबने का खतरा, गोरखपुर जनपद से अब तक नहीं हुआ ट्रांसफर


महराजगंज बेसिक शिक्षा विभाग के जीपीएफ खाते से शिक्षकों की कटौती के करीब एक अरब रुपये गायब हैं। इससे सेवानिवृत्ति की दहलीज पर पहुंचे शिक्षक परेशान हैं। पिछले साल रिटायर हुए कुछ शिक्षकों का अभी तक जीपीएफ का भुगतान नहीं हो पाया है।

गोरखपुर जिले से महराजगंज के अलग होने के समय महराजगंज के शिक्षकों के जीपीएफ का 12 करोड़ रुपया बेसिक शिक्षा विभाग को नहीं मिल पाया। वहीं पैसा अब ब्याज के साथ बढ़ कर करीब एक अरब हो गया है। जिले के बेसिक शिक्षा के जीपीएफ एकाउंट में पैसा ही नहीं है। इस वजह से शिक्षकों को अपनी कटौती से जमा धनराशि परही कर्ज नहीं मिल पा रहा है। 


प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष बैजनाथ सिंह का कहना है कि गोरखपुर से बकाया जीपीएफ धनराशि नहीं आई तो शिक्षकों के भविष्य निधि की धनराशि के डूबने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

Thursday, November 26, 2020

अनुदेशकों के नवीनीकरण मामले में गोरखपुर के डीएम व BSA को अवमानना का नोटिस

अनुदेशकों के नवीनीकरण मामले में गोरखपुर के डीएम व BSA को अवमानना का नोटिस


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी गोरखपुर के विजयेन्द्र पांडियन और BSA को अबमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनको अदालत के आदेश का पालन करने के लिए एक और अवसर देते हुए कहा कि यदि एक माह में आदेश का पालन कर हलफनामा नहीं देते हैं तो उनको तलब कर अवमानना का आरोप निर्मित किया जाएगा। 


कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया अवमानना का केस बनता है। यह आदेश न्यायमूर्ति वी के बिड़ला ने अनुदेशक प्रभु शंकर व छह अन्य की अवमानना याचिका पर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने डीएम व बीएसए को याचीगण को अनुदेशक पद पर कार्य करने देने तथा मानदेय देने का निर्देश दिया था। याचियों का कहना है कि अंशकालिक अनुदेशक  पर आठ साल कार्य करने के बाद यह कहते हुए नवीनीकरण करने से इंकार कर दिया गया कि स्कूल में 100 से कम बच्चे होने के कारण जरूरत नहीं है। कोर्ट ने निर्धारित मानदेय से कम भुगतान करने को चपरासी के न्यूनतम बेतन से कम भुगतान को शोषण माना था और सरकार से जवाब मांगा है। याचिका लंबित हैं।

Monday, November 16, 2020

गोरखपुर के 86 शिक्षामित्रों को देना होगा इस्तीफा, जानिए क्या है बड़ी वजह

गोरखपुर के 86 शिक्षामित्रों को देना होगा इस्तीफा, जानिए क्या है बड़ी वजह

◾सार◾
◾नवनियुक्त शिक्षकों के रूप में दोबारा मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज कराना होगा सर्विस रिकार्ड

◾बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों का ब्यौरा जल्द जल्द पोर्टल पर अपलोड करने का दिया निर्देश

◾विस्तार◾
परिषदीय विद्यालयों में हुई 31277 शिक्षकों की भर्ती के तहत नियुक्ति हासिल करने वाले 86 शिक्षकों को अपना ब्यौरा दोबारा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना होगा। पोर्टल पर डाटा अपडेट होने की सुविधा न होने की वजह से पहले सभी शिक्षामित्रों को इस्तीफा की जानकारी अपडेट करनी होगी। इसके बाद इनके ब्यौरा को पोर्टल से हटाकर सहायक अध्यापक के रूप में अपडेट किया जाएगा। इसे लेकर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा सचिव का आदेश गोरखपुर के बीएसए दफ्तर पहुंच गया है।

आदेश के मुताबिक जिले में नियुक्ति हासिल करने वाले 517 शिक्षकों का ब्यौरा प्राथमिकता के आधार पर मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों का ब्यौरा अपलोड होने में आने वाली परेशानी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को राहत दी है।

इस्तीफा देने वाले शिक्षकों को इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही संबंधित ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी से सत्यापित भी कराना होगा। तत्पश्चात इन शिक्षकों को ईएचआरएमएस कोड आवंटित करते हुए मानव संपदा पोर्टल पर पुरानी प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण कराना होगा।

बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि शिक्षामित्रों से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड होने में परेशानी आ रही थी। क्योकिं इन शिक्षकों ने शिक्षामित्र के रूप में पूर्व में ही पंजीकरण कराया है। अब इनसे इस्तीफा लेकर पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर पुरानी जानकारी को हटाया जाएगा। उसके बाद इनके सहायक अध्यापक के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

Sunday, October 25, 2020

गोरखपुर : 248 शिक्षकों के रिकॉर्ड की जांच एसटीएफ से कराने की तैयारी, तय समय तक जानकारी न देने वाले शिक्षकों को माना जाएगा संदिग्ध

248 शिक्षकों के रिकॉर्ड की जांच एसटीएफ से कराने की तैयारी, तय समय तक जानकारी न देने वाले शिक्षकों को माना जाएगा संदिग्ध 

मानव संपदा पोर्टल पर सर्विस रिकार्ड की जानकारी अपलोड करने से आनाकानी करने वाले 248 शिक्षकों की जांच एसटीएफ करेगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को चिंहित कर लिया है। साथ ही आखिरी बार 10 नवंबर तक रिकार्ड अपलोड करने का अल्टीमेटम दिया है।

तय समय तक जानकारी न देने वाले शिक्षकों को संदिग्ध माना जाएगा। साथ ही उनकी सूची बनाकर एसटीएफ को जांच के लिए भेजी जाएगी। शासन स्तर से इसे लेकर जारी आदेश गोरखपुर के बेसिक शिक्षा विभाग में भी पहुंच गया है।

जिले में 248 शिक्षकों ने अभी तक पोर्टल पर विवरण अपलोड नहीं कराया है। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के नौकरी से संबंधित विवरण को मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। विभाग के मुताबिक पोर्टल पर विवरण अपलोड होने के बाद विभाग में फर्जी शिक्षकों की पहचान हो सकेगी।

पोर्टल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व कर्मचारियों का विवरण अपलोड किया जाना है। पोर्टल पर विवरण अपलोड करने के लिए विभाग ने कई बार समय बढ़ाया। इसके बावजूद विवरण अपलोड करने को लेकर शिक्षक लापरवाही बरतते रहे। अब शासन ने इनसे सख्ती से निपटने का फैसला किया है।

7500 शिक्षक तो तीन हजार शिक्षामित्र हैं कार्यरत

जिले में परिषदीय विद्यालयों में 7500 शिक्षक, तीन हजार शिक्षामित्र व साढ़े पांच सौ अनुदेशक हैं। इसके अलावा 250-300 कर्मचारी हैं। जिले में 97 प्रतिशत शिक्षकों व कर्मचारियों का विवरण अपलोड हो चुका है। 248 का विवरण पोर्टल पर आना बाकी है। अब बेसिक शिक्षा परिषद ने इसको भलेकर दस नवम्बर की आखिरी समय सीमा तय की है।

बीएसए बीएन सिंह ने कहा कि जिले में 97 प्रतिशत शिक्षकों व कर्मचारियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड हो चुका है। 248 शिक्षकों ने अब तक विवरण क्यों नहीं दर्ज कराया है इसकी खंड शिक्षाधिकारियों से ब्लॉकवार जानकारी मांगी गई है। अगले कुछ दिनों में शत-प्रतिशत विवरण अपलोड करा लिया जाएगा।

Tuesday, October 13, 2020

69000 स0अ0 भर्ती प्रक्रिया के अन्तर्गत 31277 पदों के सापेक्ष उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति हेतु जनपद गोरखपुर के काउन्सलिंग हेतु प्रपत्र व निर्देश जारी, देखें

69000 स0अ0 भर्ती प्रक्रिया के अन्तर्गत 31277 पदों के सापेक्ष उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति हेतु जनपद गोरखपुर के काउन्सलिंग हेतु प्रपत्र व निर्देश जारी, देखें

गोरखपुर : ARP के रिक्त पदों पर आवेदन आमंत्रित, विज्ञप्ति देखें

गोरखपुर : ARP के रिक्त पदों पर आवेदन आमंत्रित, विज्ञप्ति देखें

Tuesday, October 6, 2020

पूर्वांचल में फर्जी शिक्षकों की बड़़ी तादात, फर्जी मिला दस्तावेज, 100 फर्जी शिक्षकों का खुला राज

फर्जी दस्तावेज मिलाः१०० फर्जी शिक्षकों का खुला राज
06 Oct 2020

पूवाÈचल में फर्जी शिक्षकों की बड़़ी तादात है। सहजनवा इलाके के हरदी गांव का रहने वाला फर्जी शिक्षक यदुनन्दन यादव ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर शिक्षक बन गया‚ फिर पत्नी और भाई को भी मास्टर की नौकरी थमा दिया। फर्जी शिक्षक के जरिये गोरखपुर और बस्ती मंड़ल के विभिन्न जिले में ७० फर्जी शिक्षकों का दस्तावेज एसटीएफ के हाथ लग गई है। पूवाÈचल के अन्य जिले में नौकरी करने वाले तीस और फर्जी शिक्षकों का दस्तावेज मिलने के बाद नौकरी करने वाले फर्जी शिक्षक स्कू ल से पलायन हो गए हैं। फर्जी कागजता पर नौकरी करने वाले शिक्षक अपने मूल जिले की बजाए दूर के जिले में सरकारी विद्यालयों में नौकरी नहीं कर रहे है। ॥ सहजनवा थाने के हरदी निवासी शिक्षक यदुनन्दन यादव सिंघला रेजीडें़सी थाना कोतवाली बाराबंकी जिले में प्रमोद कुमार सिंह के नाम का फर्जी कागजात के बदौलत नौकरी करता था। फर्जीवाडा की जानकारी मिलने पर एसटीएफ गोरखपुर और लखनऊ की संयुक्त टीम ने यदुनन्दन को दबोच लिया। पकड़े़ जाने के बाद खुलासा हुआ की वह मानव संपदा पोर्टल की वेबसाइड़ का दुरु पयोग करके बहुतेरे लोगों को शिक्षक की नौकरी दिलायी है। जालसाजी से ही उसने पत्नी श्रीलता यादव को भी फर्जी कागजात तैयार कर अर्चना पांडे़य के नाम से उच्च प्राथमिक विद्यालय गदिया जनपद बाराबंकी में शिक्षक बनवा दिया। इसके बाद उसने भाई सत्यपाल यादव निवासी हरदी सहजनवां को भी बारांबकी जिले में शिक्षक की नौकरी दिलायी थी । जांच के दौरान यह बात सामने आयी कि मानव संपदा उत्तर प्रदेश पोर्टल से पब्लिक विन्ड़ों में दी गयी सूची के आधार पर वह जानकारी करता था। जिन फर्जी शिक्षकों से संपर्क नहीं होता था तो उस गांव के प्रधान के जरिये फर्जी शिक्षक तक पहंुचता था। वह फर्जी शिक्षकों से पैसा वसूलने के लिए दूसरा हथकांड़ा अपनाया था। वह अध्यापकों का हाईस्कूल‚ इंटरमीडि़एट ‚स्नातक और बी एड़ आदि दस्तावेजों का खुद अध्यन करने के बाद फर्जी दस्तावेज के जरिये नौकरी हथियाने वालों को खोज निकालता था और फिर पैसे का डि़मांड़ करता था। उसके पकड़े़ जाने के बाद बहुतेरे फर्जी शिक्षकों का दस्तावेज पुलिस को आसानी से मिल गया है। ॥ जालसाज ने बड़़हलगंज जिले के खोरी पट्टी प्राथमिक विद्यालय में आशीष कुमार सिंह के नाम का फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाला प्रमोद कुमार यादव को खोज निकाला और फिर फर्जी शिक्षक का हवाला देकर पैसा का डि़मांड़ किया था। तभी सविलांस के जरिये टीम ने उसे पकड़़ लिया। जालसाज के गाड़़ी में मिले फर्जी दस्तावेजों से बहुतेरे फर्जी शिक्षकों का राज खुल गया। इसी आधार पर छानबीन में पता चला कि गोरखपुर जिले के फर्जी शिक्षक दस‚ देवरिया चालीस‚ सिद्वार्थनगर दस‚ जौनपुर दस समेत ७० शिक्षकों की कुंड़ली एसटीएफ के हाथ लगी है। इसके आलावा बलिया‚ अयोध्याय समेत कई जिले में दूसरे के नाम पर शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। ॥ फर्जी शिक्षकों का मिला दस्तावेज॥ गोरखपुर १२॥ देवरिया ४०॥ सिद्वार्थनगर १०॥ जौनपुर १०॥ कुशीनगर ८॥ एसटीएफ गोरखपुर प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह का कहना है कि सहजनवा का रहने वाला फर्जी शिक्षक यदुनन्दन यादव और उसका भाई सत्यपाल यादव समेत तीन की गिरफ्तारी के बाद शिक्षक की नौकरी करने वाले बड़े़ गैंग का पता चल गया है। उन्होनेे कहा कि जिलेवार टीम काम कर रही हैं। बहुत जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। ॥ सत्यप्रकाश सिंह एसटीएफ प्रभारी‚गोरखपुर॥ फर्जी कागजात तैयार कर पत्नी और भाई को भी बना दिया मास्टर साहब॥ भाभी और देवर की खुली कुंड़ली‚ फिर बहुतेरे फर्जी शिक्षक जा सकते हैं सलाखों के पीछे॥ सहजनवा का रहने वाला है फर्जी कागजात तैयार करने वाला सरगना॥ 

Sunday, October 4, 2020

75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय

75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय

 
गोरखपुर : कोरोना के बीच 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने के निर्देश के बाद भले ही स्कूल प्रबंधन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन अभिभावक अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कराने के लिए कराए गए सर्वे में महज 25 फीसद अभिभावक ही अपने बच्चों को भेजने के पक्ष में हैं। इन अभिभावकों ने लिखित अनुमति भी विद्यालय के प्रधानाचार्यो को दे दी है। सर्वे में 75 फीसद अभिभावक कोरोना के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ मना कर दिया है।


प्रदेश सरकार ने इसके पहले 21 सितंबर से स्कूल खोलने का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में सरकार ने वापस ले लिया। इसी दौरान निदेशक माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर डीआइओएस ने जनपद के माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल खोले जाने को लेकर सर्वे शुरू कराया। लगभग दस दिनों तक चले सर्वे में जिले के सभी 485 माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले दो लाख 45 हजार 384 बच्चों के अभिभावकों से लिखित और मौखिक राय ली गई। इनमें से 61 हजार 524 अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रधानाचार्यों को लिखित रूप में अनुमति दे दी, जबकि अन्य ने स्कूल भेजने से साफतौर से इन्कार कर दिया है। इस दौरान विभाग ने जनपद में कोरोना को लेकर एक लाख 45 हजार 286 (69.20 फीसद) अभिभावकों को जागरूक भी किया।

436 स्कूलों ने पूरी की तैयारी

कोरोना के मद्देनजर स्कूल खोलने को लेकर जिले के 436 माध्यमिक विद्यालयों ने स्वच्छता बनाए रखने व संक्रमण से सतत बचाव की तैयारी पूर्ण कर ली है। स्कूलों में सैनिटाइजेशन व अन्य कार्य किए जा चुके हैं। फिजिकल डिस्टेंसिंग के बीच एक कक्षा में बीस छात्रों को बैठाने की व्यवस्था की गई है।

’>>माध्यमिक विद्यालयों के सर्वे में सामने आई अभिभावकों की राय

’>>सिर्फ 25 फीसद अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की दी लिखित अनुमति

कोरोना संक्रमण के कारण अभी छोटे बच्चों के स्कूल बंद हैं, लेकिन वहां साफ-सफाई और दीवारों पर बच्चों को आकर्षित करने वाले संदेश व चित्र बनाए जाने की कवायद जारी है। शनिवार को अहलदादपुर स्थित प्राइमरी स्कूल की दीवार पर कार्टून उकेरता कलाकार ’ पंकज श्रीवास्तव

सर्वे के लिए ब्लाकवार सक्रिय प्रधानाचार्यों को नोडल अधिकारी बनाया गया था। उन्हीं के नेतृत्व में सर्वे कराया गया। इस दौरान कुछ शिक्षकों ने बच्चों के घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया तो कुछ ने दूरभाष के जरिये अनुमति ली। सर्वे में एकत्र सूचना के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा को भेज दिया गया है। ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, भदौरिया, डीआइओएस

Thursday, September 24, 2020

कब खुलेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल? जानिए क्या कहा, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने

कब खुलेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल? बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने यह बतलाया।


गोरखपुर आए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी ने बेसिक शिक्षा, एडी बेसिक कार्यालय, डायट परिसर और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। दोपहर 12 बजे गोरखपुर पहुंचे श्री द्विवेदी ने सबसे पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यहां बिना सूचना परियोजना अधिकारी रंजना गुप्ता और लिपिक कामिनी सिंह अनुपस्थित मिलीं। दोनों के अनुपस्थित मिलने पर श्री द्विवेदी ने दोनों का एक-एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया।  


निरीक्षण के बाद डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए परिषदीय स्कूलों को खोलने का निर्णय हालात की समीक्षा के बाद होगा। केंद्र की गाइडलाइन का पालन होगा। प्रदेश में उच्च व माध्यमिक विद्यालयों के खुलने के बाद सबसे आखिरी में परिषदीय विद्यालयों को पठ्न-पाठन के लिए खोला जाएगा। 


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा. सतीश द्विवेदी बुधवार को भाजपा की बैठक में हिस्सा लेने महानगर पहुंचे थे। सर्किट हाउस में मौजूद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने दोपहर में अचानक विभागीय कार्यालयों का निरीक्षण करने का निर्णय लिया। इसको लेकर अफसरों में हड़कंप मच गया। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया। बीएसए बीएन सिंह मुकदमे की पैरवी के लिए इलाहाबाद गए हुए थे। यहां जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल से डा. द्विवेदी ने विभागीय काम-काज की जानकारी ली। उन्होंने हर पटल पर पहुंचकर कर्मचारियों से बात की। उन्होंने मिड डे मील और कायाकल्प समेत विभिन्न योजनाओं के बारे में पूछा। बीएसए कार्यालय की छत का निरीक्षण करते हुए उसकी जर्जर स्थिति देखते हुए उन्होंने इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा। बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय के सामने जलभराव को लेकर मंत्री ने कहा कि इसका शीघ्र समाधान कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित परियोजनाधिकारी रंजना गुप्ता व लिपिक कामिनी सिंह के अनुपस्थित मिलने पर उन्होंने उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया। 


निजी कालेजों में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाए
बेसिक शिक्षा मंत्री ने डॉयट का निरीक्षण करते हुए वरिष्ठ व हालिया नियुक्त प्रवक्ताओं से शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि डॉयट के अलावा निजी कालेजों में भी ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने डॉयट परिसर में कोविड-19 हेल्प डेस्क की सराहना की। मंत्री ने वहां अपना ऑक्सीजन लेवल भी चेक किया। 


कस्तूरबा विद्यालय खोराबार के भवन की मरम्मत कराई जाएगी

बेसिक शिक्षा मंत्री ने नार्मल परिसर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खोराबार के भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। निरीक्षण के दौरान छत से पानी टपक रहा था। कमरे में सीलन लगा था। उन्होंने इस संबंध में भवन की मरम्मत के बारे में पूछा। वार्डन नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए दो वर्ष पूर्व शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने की बात कही। निरीक्षण के दौरान सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रभारी प्राचार्य डॉयट व जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह भदौरिया, बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल व सहायक वित्त लेखाधिकारी एसके श्रीवास्तव मौजूद थे। 

कस्तूरबा के हटाए गए शिक्षक मिले, लगाई न्याय की गुहार

हाल ही में कस्तूरबा से हटाई गईं उर्दू की शिक्षिकाएं और सामान्य विषयों के पुरुष शिक्षकों ने सतीश द्विवेदी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। शिक्षिकाओं का कहना था कि वे बीते सात साल से पढ़ा रही हैं। अब अचानक से उन्हें निकाल दिया गया। ऐसे सूरत में वह कहां जाएं। शिक्षकों की बात सुनकर शिक्षा मंत्री ने लखनऊ जाकर इस सम्बंध में बात कर कोई रास्ता निकालने का आश्वासन दिया।

Wednesday, September 16, 2020

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

समूह ख व समूह ग की प्रस्तावित नई सेवा नियमावली को निरस्त करने हेतु माo विधान परिषद सदस्य ने माoमुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

 
लखनऊ : समूह ‘ख’ और ‘ग’ की सरकारी नौकरियों में भर्ती के बाद पांच साल तक संविदा पर नियुक्ति के शासन के प्रस्ताव का विपक्षी दलों के बाद अब सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी मुखर विरोध करना शुरू कर दिया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को रद करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर नवनियुक्त कर्मचारी पांच साल तक अधिकारियों के बंधुआ मजदूर हो जाएंगे।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की समूह ‘ख’ और ‘ग’ की नौकरियों में चयनित होने के बाद कर्मचारी शुरुआती पांच वर्षों तक संविदा पर नियुक्त रहेंगे। इन पांच वर्षो के दौरान प्रत्येक छमाही में उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन ‘मेजरेबल की परफार्मेंस इंडीकेटर्स’ के आधार पर किया जाएगा। नियमित होने के लिए कर्मचारी को मूल्यांकन में प्रत्येक वर्ष 60 फीसद अंक पाने होंगे। किन्हीं दो छमाही में 60 प्रतिशत से कम अंक पाने पर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। 


इसे लेकर भाजपा एमएलसी ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर सरकारी सेवाओं में चयनित होने वाले नौजवानों का शोषण और कदाचार बढ़ेगा। एमएलसी ने कहा कि अधिकारी वर्ग नई सेवा नियमावली को तरह-तरह से कर्मचारियों का शोषण करने का औजार बना सकता है। इससे भ्रष्टाचार के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच आपसी मतभेद और दूरियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अत्यंत दोषपूर्ण, अन्याय और शोषण को बढ़ावा देने वाली है। इसके लागू होने से पार्टी और सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।



Monday, September 7, 2020

गोरखपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश


गोरखपुर। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 12 वर्षों से अध्यापन करने वाली जिले की 23 शिक्षिकाओं का मानदेय जल्द ही आधा हो जाएगा। शासन की नई नियमावली के तहत अब इन विद्यालयों में कंप्यूटर, आर्ट एंड क्रॉफ्ट और शारीरिक शिक्षा की शिक्षिकाओं से पूर्णकालिक के बजाय अंशकालिक शिक्षक के रूप में काम लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर शिक्षिकाओं को अंशकालिक शिक्षक के रूप में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले सप्ताह तक प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा, वहीं शिक्षिकाओं ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देश दीपक दूबे ने कहा कि पूर्णकालिक शिक्षकों के रूप में अध्यापन करने वाली शिक्षिकाओं को अब तक त्र 22 हजार का मानदेय मिल रहा था। मगर अब उन्हें अंशकालिक करने पर मानदेय त्र 9800 हो जाएगा। सरकार नियमों में अचानक बदलाव कर शिक्षिकाओं की परेशानी बढ़ा रही है। पहले ही नौ शिक्षकों और छह उर्दू की शिक्षिकाओं को नए नियमावली के तहत बाहर किया जा रहा है। दूसरी तरफ जो बच गए हैं, उनके मानदेय में कटौती की जा रही है। जो न्याय संगत नहीं हैं। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

शासन के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई शुरू की गई है। एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट शासन को मुहैया कराने की समय सीमा दी गई है। नियम के मुताबिक पूर्णकालिक शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में तब्दील किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, September 1, 2020

गोरखपुर : नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

बीएसए गोरखपुर ने सोमवार को जिले के तीन शिक्षकों को फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने पर बर्खास्त कर दिया। इन शिक्षकों में से दो ने नौकरी हथियाने के लिए अपनी जाति ही बदल ली। दद्दन यादव नाम का व्यक्ति सिंह बन गया और संतोष गुप्ता संतोष कुमार बन गया। बर्खास्त किए गए सभी तीनों शिक्षकों से अब वेतन की रिकवरी होगी।

1996 में शिवबचन सिंह पुत्र भृगुनाथ सिंह की कैम्पियरगंज के प्राइमरी स्कूल में हेड शिक्षक के रूप में ज्वाइनिंग 15 जुलाई 1996 को हुई। ज्वाइनिंग लेटर में शिवबचन का पता व निवास प्रमाण पत्र रतसड़ बलिया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा के पास मई 2020 में शिक्षक के वेतन की जानकारी आई जिसमें 192 मामले ऐसे थे जिनमे एक ही पैन कार्ड पर अलग-अलग एंट्री कई जिले की फाइलों में मिली। इसके आधार पर शिवबचन को निलंबित कर दिया गया। बलिया के असली टीचर ने इसकी शिकायत की।

शिकायतकर्ता के अनुसार कैम्पियरगंज में 1996 से नौकरी करने वाले शिक्षक का असली नाम ददन यादव बताया गया। शिकायतकर्ता के आधार पर जांच हुई जिसमे सारी बातें सही मिलीं। मामला सही मिलने पर शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया।

गोरखपुर के ब्रह्मपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में 6 फरवरी 2010 में संतोष कुमार पुत्र छठ्ठू प्रसाद ने बतौर शिक्षक ज्वाइन किया था। 2019 में इनके प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि संतोष की जाति गुप्ता है जबकि इनकी तैनाती अनुसूचित जाति के कोटे से हुई है। इसके बाद संतोष को निलंबित कर जांच शुरू कर दी गई। मामला सही पाए जाने पर संतोष को बर्खास्त कर दिया गया।

एसटीएफ की जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

वंदना पाण्डेय पुत्री नरेन्द्र पाण्डेय और पत्नी रमेश मिश्रा की तैनाती 2011 में सिद्धार्थनगर प्राइमरी स्कूल में हुई थी। अंतरजनपदीय तबादले में 2016 को जगंल कौड़िया के प्राइमरी स्कूल में वंदना की तैनाती हुई। एसटीएफ फील्ड यूनिट गोरखपुर के दिशा-निर्देश पर वंदना की प्रमाणपत्र की जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि वंदना ने दूसरे के नाम की मार्कशीट बना पता छिपाते हुए नौकरी हासिल की है। मामले की पुष्टि होने पर वंदना को भी बर्खास्त कर दिया गया है।

अब तक की कार्रवाई

बर्खास्त हो चुके शिक्षक 61

निलंबित शिक्षक 34

बोले बीएसए

तीनों शिक्षक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर तीनों को बर्खास्त किया गया है। अब इनके खिलाफ एफआईआर कराकर वेतन की रिकवरी कराई जाएगी।

गोरखपुर : दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

 गोरखपुर परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है जनपद में लगभग 30 फीसद शिक्षकों की उम्र
पचास से पचपन के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष है और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षमा खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। चार दिन पूर्व शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा एप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को अब प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दीक्षा एप से मानव संपदा से लिक करना अनिवार्य। इसके लिए एआरपी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे हैं। यदि किसी को समस्या आ रही है तो उसका निदान किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, August 11, 2020

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर में कार्यरत एक शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त कर दी गयी है। शिक्षिका ने कूटरचित दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे डायट देवरिया में विशिष्ट बीटीसी-2008 प्रशिक्षण में दाखिला लिया था। जांच के बाद डायट प्राचार्य ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में शिक्षिका पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।   

गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुरी, शहबाजपुर निवासी चित्रलेखा कुमारी ने जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान रामपुर कारखाना में वर्ष 2009 में दिव्यांग कोटे के तहत विशिष्ट बीटीसी में प्रवेश लिया था। इसी आधार पर परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी हासिल कर गोरखपुर जिले में कार्यरत थी। इसी बीच शासन के निर्देश पर दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रशिक्षण पाए सभी शिक्षकों को लखनऊ में सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के सामने बुलाया गया। इसके तहत डायट रामपुर कारखाना से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्र भी खंगाले गए। 

इसमें डायट रामपुर कारखाना में भी विकलांग प्रमाण-पत्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों को बुलाकर उन्हें लखनऊ जाने के लिए सूचित किया जाने लगा। इसी दौरान डायट की जांच में शिक्षिका चित्रलेखा के विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथियां अंकित मिलीं। एक तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि के पूर्व की अंकित थी। 


वहीं दूसरी तिथि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद की अंकित थी। मामला संदिग्ध लगा तो डायट प्राचार्य ने शिक्षिका को चार जून को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने को कहा। शिक्षिका उपस्थित नहीं हुईं तो दूसरी बार 15 जून को नोटिस दिया गया। इस बार भी शिक्षिका डायट नहीं पहुंची। तीसरी बार तीन जुलाई को फिर डायट से नोटिस भेजा गया। इस बार नोटिस रीसिव नहीं हुआ और पत्र वापस आ गया। 

इसके बाद डायट प्राचार्य ने विकलांग प्रमाण-पत्र को गोरखपुर सीएमओ कार्यालय को भेजकर सत्यापित कराया। इसमें प्रमाण-पत्र सही मिला, पर आवेदन की अंतिम तिथि के बाद 09.03.2009 को प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। विज्ञापन की शर्त के अनुसार सभी प्रमाण-पत्र अंतिम तिथि के पूर्व जारी होने चाहिए थे। डायट प्राचार्य ने इस आधार पर शिक्षिका का विशिष्ट बीटीसी-2008 के प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया है।


चित्रलेखा ने विशिष्ट बीटीसी के आवेदन में लगाया गए विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथि अंकित है। इसका सत्यापन सीएमओ गोरखपुर से कराया गया है। सीएमओ ने प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 09.03.2009 बताई है। इससे स्पष्ट है कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद विकलांग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। गड़बड़ी पाए जाने पर चित्रलेखा का प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया गया है।
राजेंद्र प्रसाद यादव, प्राचार्य, डायट

Tuesday, August 4, 2020

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

 
गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


क्या है किस माड्यूल की खासियत

आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए