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Thursday, September 24, 2020

कब खुलेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल? जानिए क्या कहा, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने

कब खुलेंगे बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूल? बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने यह बतलाया।


गोरखपुर आए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी ने बेसिक शिक्षा, एडी बेसिक कार्यालय, डायट परिसर और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। दोपहर 12 बजे गोरखपुर पहुंचे श्री द्विवेदी ने सबसे पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यहां बिना सूचना परियोजना अधिकारी रंजना गुप्ता और लिपिक कामिनी सिंह अनुपस्थित मिलीं। दोनों के अनुपस्थित मिलने पर श्री द्विवेदी ने दोनों का एक-एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया।  


निरीक्षण के बाद डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए परिषदीय स्कूलों को खोलने का निर्णय हालात की समीक्षा के बाद होगा। केंद्र की गाइडलाइन का पालन होगा। प्रदेश में उच्च व माध्यमिक विद्यालयों के खुलने के बाद सबसे आखिरी में परिषदीय विद्यालयों को पठ्न-पाठन के लिए खोला जाएगा। 


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा. सतीश द्विवेदी बुधवार को भाजपा की बैठक में हिस्सा लेने महानगर पहुंचे थे। सर्किट हाउस में मौजूद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने दोपहर में अचानक विभागीय कार्यालयों का निरीक्षण करने का निर्णय लिया। इसको लेकर अफसरों में हड़कंप मच गया। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया। बीएसए बीएन सिंह मुकदमे की पैरवी के लिए इलाहाबाद गए हुए थे। यहां जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल से डा. द्विवेदी ने विभागीय काम-काज की जानकारी ली। उन्होंने हर पटल पर पहुंचकर कर्मचारियों से बात की। उन्होंने मिड डे मील और कायाकल्प समेत विभिन्न योजनाओं के बारे में पूछा। बीएसए कार्यालय की छत का निरीक्षण करते हुए उसकी जर्जर स्थिति देखते हुए उन्होंने इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा। बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय के सामने जलभराव को लेकर मंत्री ने कहा कि इसका शीघ्र समाधान कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित परियोजनाधिकारी रंजना गुप्ता व लिपिक कामिनी सिंह के अनुपस्थित मिलने पर उन्होंने उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया। 


निजी कालेजों में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाए
बेसिक शिक्षा मंत्री ने डॉयट का निरीक्षण करते हुए वरिष्ठ व हालिया नियुक्त प्रवक्ताओं से शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि डॉयट के अलावा निजी कालेजों में भी ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने डॉयट परिसर में कोविड-19 हेल्प डेस्क की सराहना की। मंत्री ने वहां अपना ऑक्सीजन लेवल भी चेक किया। 


कस्तूरबा विद्यालय खोराबार के भवन की मरम्मत कराई जाएगी

बेसिक शिक्षा मंत्री ने नार्मल परिसर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खोराबार के भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। निरीक्षण के दौरान छत से पानी टपक रहा था। कमरे में सीलन लगा था। उन्होंने इस संबंध में भवन की मरम्मत के बारे में पूछा। वार्डन नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए दो वर्ष पूर्व शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने की बात कही। निरीक्षण के दौरान सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रभारी प्राचार्य डॉयट व जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह भदौरिया, बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक विवेक जायसवाल व दीपक पटेल व सहायक वित्त लेखाधिकारी एसके श्रीवास्तव मौजूद थे। 

कस्तूरबा के हटाए गए शिक्षक मिले, लगाई न्याय की गुहार

हाल ही में कस्तूरबा से हटाई गईं उर्दू की शिक्षिकाएं और सामान्य विषयों के पुरुष शिक्षकों ने सतीश द्विवेदी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। शिक्षिकाओं का कहना था कि वे बीते सात साल से पढ़ा रही हैं। अब अचानक से उन्हें निकाल दिया गया। ऐसे सूरत में वह कहां जाएं। शिक्षकों की बात सुनकर शिक्षा मंत्री ने लखनऊ जाकर इस सम्बंध में बात कर कोई रास्ता निकालने का आश्वासन दिया।

Wednesday, September 16, 2020

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

समूह ख व समूह ग की प्रस्तावित नई सेवा नियमावली को निरस्त करने हेतु माo विधान परिषद सदस्य ने माoमुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

सरकारी नौकरी में संविदा मामले में भाजपा एमएलसी ने लिखा मुख्यमंत्री योगी को पत्र

 
लखनऊ : समूह ‘ख’ और ‘ग’ की सरकारी नौकरियों में भर्ती के बाद पांच साल तक संविदा पर नियुक्ति के शासन के प्रस्ताव का विपक्षी दलों के बाद अब सत्तापक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी मुखर विरोध करना शुरू कर दिया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को रद करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर नवनियुक्त कर्मचारी पांच साल तक अधिकारियों के बंधुआ मजदूर हो जाएंगे।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की समूह ‘ख’ और ‘ग’ की नौकरियों में चयनित होने के बाद कर्मचारी शुरुआती पांच वर्षों तक संविदा पर नियुक्त रहेंगे। इन पांच वर्षो के दौरान प्रत्येक छमाही में उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन ‘मेजरेबल की परफार्मेंस इंडीकेटर्स’ के आधार पर किया जाएगा। नियमित होने के लिए कर्मचारी को मूल्यांकन में प्रत्येक वर्ष 60 फीसद अंक पाने होंगे। किन्हीं दो छमाही में 60 प्रतिशत से कम अंक पाने पर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। 


इसे लेकर भाजपा एमएलसी ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित सेवा नियमावली के लागू होने पर सरकारी सेवाओं में चयनित होने वाले नौजवानों का शोषण और कदाचार बढ़ेगा। एमएलसी ने कहा कि अधिकारी वर्ग नई सेवा नियमावली को तरह-तरह से कर्मचारियों का शोषण करने का औजार बना सकता है। इससे भ्रष्टाचार के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच आपसी मतभेद और दूरियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अत्यंत दोषपूर्ण, अन्याय और शोषण को बढ़ावा देने वाली है। इसके लागू होने से पार्टी और सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।



Monday, September 7, 2020

गोरखपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश


गोरखपुर। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 12 वर्षों से अध्यापन करने वाली जिले की 23 शिक्षिकाओं का मानदेय जल्द ही आधा हो जाएगा। शासन की नई नियमावली के तहत अब इन विद्यालयों में कंप्यूटर, आर्ट एंड क्रॉफ्ट और शारीरिक शिक्षा की शिक्षिकाओं से पूर्णकालिक के बजाय अंशकालिक शिक्षक के रूप में काम लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर शिक्षिकाओं को अंशकालिक शिक्षक के रूप में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले सप्ताह तक प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा, वहीं शिक्षिकाओं ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देश दीपक दूबे ने कहा कि पूर्णकालिक शिक्षकों के रूप में अध्यापन करने वाली शिक्षिकाओं को अब तक त्र 22 हजार का मानदेय मिल रहा था। मगर अब उन्हें अंशकालिक करने पर मानदेय त्र 9800 हो जाएगा। सरकार नियमों में अचानक बदलाव कर शिक्षिकाओं की परेशानी बढ़ा रही है। पहले ही नौ शिक्षकों और छह उर्दू की शिक्षिकाओं को नए नियमावली के तहत बाहर किया जा रहा है। दूसरी तरफ जो बच गए हैं, उनके मानदेय में कटौती की जा रही है। जो न्याय संगत नहीं हैं। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

शासन के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई शुरू की गई है। एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट शासन को मुहैया कराने की समय सीमा दी गई है। नियम के मुताबिक पूर्णकालिक शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में तब्दील किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, September 1, 2020

गोरखपुर : नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

नौकरी हथियाने के लिए एससी-एसटी बने गुप्ता जी, बर्खास्त

बीएसए गोरखपुर ने सोमवार को जिले के तीन शिक्षकों को फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने पर बर्खास्त कर दिया। इन शिक्षकों में से दो ने नौकरी हथियाने के लिए अपनी जाति ही बदल ली। दद्दन यादव नाम का व्यक्ति सिंह बन गया और संतोष गुप्ता संतोष कुमार बन गया। बर्खास्त किए गए सभी तीनों शिक्षकों से अब वेतन की रिकवरी होगी।

1996 में शिवबचन सिंह पुत्र भृगुनाथ सिंह की कैम्पियरगंज के प्राइमरी स्कूल में हेड शिक्षक के रूप में ज्वाइनिंग 15 जुलाई 1996 को हुई। ज्वाइनिंग लेटर में शिवबचन का पता व निवास प्रमाण पत्र रतसड़ बलिया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा के पास मई 2020 में शिक्षक के वेतन की जानकारी आई जिसमें 192 मामले ऐसे थे जिनमे एक ही पैन कार्ड पर अलग-अलग एंट्री कई जिले की फाइलों में मिली। इसके आधार पर शिवबचन को निलंबित कर दिया गया। बलिया के असली टीचर ने इसकी शिकायत की।

शिकायतकर्ता के अनुसार कैम्पियरगंज में 1996 से नौकरी करने वाले शिक्षक का असली नाम ददन यादव बताया गया। शिकायतकर्ता के आधार पर जांच हुई जिसमे सारी बातें सही मिलीं। मामला सही मिलने पर शिक्षक को बर्खास्त कर दिया गया।

गोरखपुर के ब्रह्मपुर स्थित प्राइमरी स्कूल में 6 फरवरी 2010 में संतोष कुमार पुत्र छठ्ठू प्रसाद ने बतौर शिक्षक ज्वाइन किया था। 2019 में इनके प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि संतोष की जाति गुप्ता है जबकि इनकी तैनाती अनुसूचित जाति के कोटे से हुई है। इसके बाद संतोष को निलंबित कर जांच शुरू कर दी गई। मामला सही पाए जाने पर संतोष को बर्खास्त कर दिया गया।

एसटीएफ की जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

वंदना पाण्डेय पुत्री नरेन्द्र पाण्डेय और पत्नी रमेश मिश्रा की तैनाती 2011 में सिद्धार्थनगर प्राइमरी स्कूल में हुई थी। अंतरजनपदीय तबादले में 2016 को जगंल कौड़िया के प्राइमरी स्कूल में वंदना की तैनाती हुई। एसटीएफ फील्ड यूनिट गोरखपुर के दिशा-निर्देश पर वंदना की प्रमाणपत्र की जांच शुरू हुई। जांच में पाया गया कि वंदना ने दूसरे के नाम की मार्कशीट बना पता छिपाते हुए नौकरी हासिल की है। मामले की पुष्टि होने पर वंदना को भी बर्खास्त कर दिया गया है।

अब तक की कार्रवाई

बर्खास्त हो चुके शिक्षक 61

निलंबित शिक्षक 34

बोले बीएसए

तीनों शिक्षक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर तीनों को बर्खास्त किया गया है। अब इनके खिलाफ एफआईआर कराकर वेतन की रिकवरी कराई जाएगी।

गोरखपुर : दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

दीक्षा एप से मानव संपदा पोर्टल को करना है लिंक शासन के आदेश के बाद शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

 गोरखपुर परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है जनपद में लगभग 30 फीसद शिक्षकों की उम्र
पचास से पचपन के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष है और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षमा खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। चार दिन पूर्व शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा एप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को अब प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दीक्षा एप से मानव संपदा से लिक करना अनिवार्य। इसके लिए एआरपी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे हैं। यदि किसी को समस्या आ रही है तो उसका निदान किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

Tuesday, August 11, 2020

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर में कार्यरत एक शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त कर दी गयी है। शिक्षिका ने कूटरचित दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे डायट देवरिया में विशिष्ट बीटीसी-2008 प्रशिक्षण में दाखिला लिया था। जांच के बाद डायट प्राचार्य ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में शिक्षिका पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।   

गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुरी, शहबाजपुर निवासी चित्रलेखा कुमारी ने जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान रामपुर कारखाना में वर्ष 2009 में दिव्यांग कोटे के तहत विशिष्ट बीटीसी में प्रवेश लिया था। इसी आधार पर परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी हासिल कर गोरखपुर जिले में कार्यरत थी। इसी बीच शासन के निर्देश पर दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रशिक्षण पाए सभी शिक्षकों को लखनऊ में सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के सामने बुलाया गया। इसके तहत डायट रामपुर कारखाना से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्र भी खंगाले गए। 

इसमें डायट रामपुर कारखाना में भी विकलांग प्रमाण-पत्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों को बुलाकर उन्हें लखनऊ जाने के लिए सूचित किया जाने लगा। इसी दौरान डायट की जांच में शिक्षिका चित्रलेखा के विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथियां अंकित मिलीं। एक तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि के पूर्व की अंकित थी। 


वहीं दूसरी तिथि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद की अंकित थी। मामला संदिग्ध लगा तो डायट प्राचार्य ने शिक्षिका को चार जून को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने को कहा। शिक्षिका उपस्थित नहीं हुईं तो दूसरी बार 15 जून को नोटिस दिया गया। इस बार भी शिक्षिका डायट नहीं पहुंची। तीसरी बार तीन जुलाई को फिर डायट से नोटिस भेजा गया। इस बार नोटिस रीसिव नहीं हुआ और पत्र वापस आ गया। 

इसके बाद डायट प्राचार्य ने विकलांग प्रमाण-पत्र को गोरखपुर सीएमओ कार्यालय को भेजकर सत्यापित कराया। इसमें प्रमाण-पत्र सही मिला, पर आवेदन की अंतिम तिथि के बाद 09.03.2009 को प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। विज्ञापन की शर्त के अनुसार सभी प्रमाण-पत्र अंतिम तिथि के पूर्व जारी होने चाहिए थे। डायट प्राचार्य ने इस आधार पर शिक्षिका का विशिष्ट बीटीसी-2008 के प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया है।


चित्रलेखा ने विशिष्ट बीटीसी के आवेदन में लगाया गए विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथि अंकित है। इसका सत्यापन सीएमओ गोरखपुर से कराया गया है। सीएमओ ने प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 09.03.2009 बताई है। इससे स्पष्ट है कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद विकलांग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। गड़बड़ी पाए जाने पर चित्रलेखा का प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया गया है।
राजेंद्र प्रसाद यादव, प्राचार्य, डायट

Tuesday, August 4, 2020

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

 
गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


क्या है किस माड्यूल की खासियत

आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए

Saturday, August 1, 2020

16 बार में एमडीएम के खाते से निकाल लिया 1.26 लाख रुपये, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दो महीने बाद हुई जानकारी, तहरीर दी




  • 16 बार में एमडीएम के खाते से 1.26 लाख की अवैध निकासी
  • महराजपुर के प्राथमिक विद्यालय बरेजी का मामला

खुखुंदू (देवरिया)। बैंक खातों को लेकर हर कोई सावधान हो जाए। आपकी जानकारी के बगैर भी बैंक सह खातेदार बना सकता है और इसके बाद खाते से आसानी से रुपये भी निकल जाएंगे। आपको जब तक इसकी खबर मिलेगी, तब तक खाते से रकम निकल गई होगी। ऐसा ही मामला खुखुंदू थानाक्षेत्र के महराजपुर के बरेजी के प्राथमिक विद्यालय का सामने आया है। यहां के एमडीएम खाते में सह खातेदार बनकर विद्यालय की पूर्व रसोइए ने 126020 रुपये दो माह पूर्व निकाल लिए। पासबुक प्रिंट कराने पर इस बात की जानकारी ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को हुई। इस मामले में थाने में तहरीर दी गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विकास खंड देवरिया सदर के समिलियन विद्यालय बरेजी का एमडीएम का खाता बड़ोदा यूपी बैंक सिविल लाइंस देवरिया में है। ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक का ज्वाइंट खाता है। बताया जा रहा है कि बिना इनके हस्ताक्षर के उस खाते से रुपये की निकासी नहीं होना चाहिए। हालांकि बिना इन दोनों जिम्मेदारों के हस्ताक्षर के ही खाते से 126020 रुपये निकल गए। यहां खास बात है कि मई में खाते से बारी-बारी कर 16 बार में यह रकम गांव और बतरौली के ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाली गई। हालांकि इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। कुछ दिन पूर्व बच्चों के खाते में एमडीएम का पैसा भेजने का मामला आने पर पासबुक को प्रिंट कराने के लिए बैंक में भेजा गया तो निकाली गई रकम की जानकारी हुई।
शाखा से इसकी जानकारी लेने पर गांव की एक महिला का नाम सामने आया। वह पूर्व में विद्यालय की रसोइया रही है। इसकी जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान अच्युतानन त्रिपाठी और प्रधानाध्यापक रीता मिश्रा ने उसके घर पहुंच रुपये वापसी की मांग की। उसने देने से इनकार कर दिया। ग्राम प्रधान ने इस मामले में थाने में तहरीर दी है। एसओ श्यामसुंदर तिवारी ने बताया कि तहरीर मिली है। प्रकरण की जांच की जाएगी।
सह खातेदार कैसे जुड़ गया :- इसे सिस्टम की लापरवाही कही जाए या फिर बैंक की मिलीभगत। आखिर एमडीएम खाते में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यायक सह खातेदार हैं तो उसमें तीसरा कोई और कैसे जुड़ गया। एमडीएम खाते में केवल सरकारी पैसा आता है। जिसे प्रधान और प्रधानाध्यापक ही चेक द्वारा निकाल सकते हैं। ऐसे में तीसरा सह खाताधारक कैसे बन गया और उसे चेक कहां से मिला।
बैंक से रुपये तीसरा कोई कैसे निकाल लिया। बिना चेक से एमडीएम खाते से भुगतान नहीं होता है। इस खाते में दो के अलावा तीसरा सह खातेदार कैसे जुड़ा। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि बैंक की मिलीभगत से यह सब हुआ है। जबकि रसोइया विद्यालय से 2018 में निकाली जा चुकी है।
-अच्युतानन त्रिपाठी, ग्राम प्रधान
जुलाई में विद्यालय खुलने पर एमडीएम का पैसा आया है कि नहीं चेक कराने के लिए बैंक में पासबुक भेजने पर रुपये निकासी का पता चला। सभी रुपये ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाला गया है। आखिर यह सब कैसे हो गया। सोच कर डर लग रहा है। इसमें सरासर बैंक की लापरवाही झलक रही है।
-रीता मिश्रा, प्रधानाध्यापक


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Monday, July 27, 2020

अब गाड़ियों से निशुल्क पहुंचाई जाएंगी किताबें, जनपद गोरखपुर को 22 लाख रुपये जारी

अब गाड़ियों से निशुल्क पहुंचाई जाएंगी किताबें

परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं निशुल्क किताबें मुहैया कराई जा रही हैं। कोरोना काल में किताबें अभिभावकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की थी। अब शासन स्तर से तय कर दिया गया है कि किताबें गाड़ियों से पहुंचाई जाएंगी। इसके लिए 22 लाख रुपये जारी किए गए हैं। जिले के तीन हजार विद्यालयों में परिषदीय विद्यालय पढ़ने वाले 3,63,000 विद्यार्थियों को किताबों का वितरण किया जाना है। पुरानी व्यवस्था में किताबें जिले से बीआरसी और वहां से संकुल पर पहुंचाई जाती थी। यहां से शिक्षक किताबें अपने अपने स्कूल पर ले जाते थे। इसके लिए शिक्षकों को कोई वाहन भत्ता नहीं मिलता था। इसकी वजह से कई बार किताबें स्कूल पर समय से नहीं पहुंच पाती थीं या शिक्षकों को किताबें अपने वाहनों से ले जानी पड़ती थीं। अब व्यवस्था में शासन ने बदलाव किया है। बीएसए ने कहा कि किताबों को बच्चों तक पहुंचाना प्राथमिकता है। शासन ने परिवहन व्यय बजट जारी कर दिया है।

Wednesday, July 8, 2020

गोरखपुर : वित्त व लेखाधिकारी को नोटिस, होगी कार्रवाई

वित्त व लेखाधिकारी को नोटिस, होगी कार्रवाई



जिले में 278 शिक्षकों के पैनकार्ड का ब्योरा गलत होने का मामला इसे लेकर सख्त हुआ बेसिक शिक्षा विभाग एवं लेखा विभाग की लापरवाही से जनपद के 278 शिक्षकों के पैनकार्ड की ब्योरा गलत होने के मामले में वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक को मंगलवार को नोटिस जारी कर दिया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने न सिर्फ नोटिस का जवाब तीन दिनों के अंदर मांगा है बल्कि मामले की जांच कर दोषी के इस मामले में वित्त एवं लेखाधिकारी को नोटिस दे दिया विरुद्ध कार्रवाई करने का भी निर्देश गया है। इतने बड़े दिया है। पैन कार्ड में ब्योरा गलत अंकित होने की सूचना मुख्यालय को विभाग पैमाने पर हुई त्रुटि कैसे हुई इसकी जांच कराई जा रही द्वारा दे दी गई है। शिक्षकों को सत्यापन है, जो भी दोषी होगा के दौरान किसी प्रकार की समस्या न हो इसे लेकर फोटो युक्त नोटरी की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर साधारण स्पष्टीकरण के साथ समस्त साक्ष्य, नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज खंड शिक्षाधिकारी उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।। भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए रहा है। इस कड़ी में सभी बेसिक ज शिक्षा अधिकारियों से उनके यहां ती स स् कार्यरत शिक्षकों के पैनकार्ड का ब्योरा या विभाग को उपलब्ध कराना होगा। एक्सेल शीट व पीडीएफ में मांगा गया इसके बाद उनके पैन कार्ड संशोधित हो जाएगा। था बेसिक शिक्षा विभाग ने एक्सेल के शीट पर पैन कार्ड का ब्योरा मुहैया ज बता दें कि अनामिका शुक्ला कराया, लेकिन टाइपिंग में गलती की के प्रकरण के बाद से शासन के निर्देश वजह से 278 शिक्षकों के पैनकार्ड का पर शिक्षकों का सत्यापन कराया जा ब्योरा गलत हो गया।

Tuesday, July 7, 2020

गोरखपुर : बेसिक शिक्षा के लेखा विभाग का हाल पैन कार्ड का नंबर गलत अंकित कर बना दिया फर्जी शिक्षक

बीएसए ऑफिस की लापरवाही से 278 शिक्षकों को परेशानी

पैन कार्ड का ब्यौरा टाइपिंग में त्रुटि की वजह से गलत हो गया है। इस संबंध में लेखा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है। गलती कहां हुई इसकी जांच कर कार्रवाई होगी। ये कोई फर्जी शिक्षक नहीं हैं, इनके पैन कार्ड का सत्यापन कराया जाएगा। शिक्षकों से भी सत्यापन में सहयोग करने की अपेक्षा है। - बीएन सिंह, बीएसए

गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से 278 शिक्षकों के पैन कार्ड की डिटेल गलत अंकित हो गई। विभागीय लापरवाही की वजह से अब इन शिक्षकों को परेशानी हो रही है। अब बेवजह उन्हें सत्यापन के लिए बीआरसी का चक्कर लगाना होगा। गड़बड़ी मिलने के बाद बीएसए ने लेखा विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। बेसिक शिक्षा विभाग के शुक्ला प्रकरण सामने आने के बाद से शासन के निर्देश पर शिक्षकों का अधिकारियों ने इस संबंध में जो सत्यापन कराया जा रहा है। इस सूची उपलब्ध कराई है, उसमें कड़ी में सभी बेसिक शिक्षा टाइपिंग त्रुटि की वजह से 278 अधिकारियों से उनके यहां कार्यरत शिक्षकों के पैन कार्ड की डिटेल शिक्षकों के पैन कार्ड की डिटेल गलत हो गई। इनके नाम, पिता का नाम, पैन कार्ड नंबर और जन्मतिथि में व्यापक गलतियां हैं। 

Thursday, July 2, 2020

गोरखपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के डिजिटलाइजेशन के जाल में फंसे कई फर्जी शिक्षक, मानव संपदा और पैन कार्ड ने पकड़वाए 18 फर्जी शिक्षक

मानव संपदा और पैन कार्ड ने पकड़वाए 18 फर्जी शिक्षक, ऐसे खुला इनका राज

परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत फर्जी शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कराए जा रहे डिजिटलाइजेशन ने पकड़वाया है। मानव संपदा पोर्टल या पैन कार्ड का ब्योरा ऑनलाइन होते ही असली शिक्षकों की पकड़ में उनके दस्तावेज पर नौकरी कर रहे फर्जी शिक्षक आ गए। जिसके बाद उनकी शिकायतों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई।

जांच के बाद पिछले एक वर्ष में 12 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किए गए है चुके हैं। वहीं छह निलंबित होने के साथ ही पांच और शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है। जुलाई तक इनपर बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी होगी।

वर्ष-2019 में एसटीएफ की छापेमारी केे बाद से बेसिक शिक्षा विभाग को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अधिक मात्रा में शिकायतें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। वहीं मानव संपदा पोर्टल और पैन कार्ड, आधार कार्ड को शिक्षकों के रिकार्ड में शामिल करने की शुरूआत हुई।

जैसे-जैसे शिक्षकों का ब्योरा अपडेट करने का सिलसिला शुरू हुआ। वैसे-वैसे कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो-दो जगह नौकरी हासिल करने वाले फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें बढ़ने लगीं। आनन फानन में विभाग ने इनपर कार्रवाई की।

अब तक 51 बर्खास्त
जांच के बाद अबतक 51 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कराने के लिए साथ ही 37 शिक्षकों पर बीएसए की तहरीर पर राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं प्राथमिक जांच में संदिग्ध मिलने पर 30 शिक्षक निलंबित किए जा चुके हैं। इसकेे अलावा करीब 20 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने कहा कि फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच में मानव संपदा पोर्टल और पैन कार्ड ने गोरखपुर में कई शिक्षकों को पकड़वाया है। आईटीआर जमा करने के दौरान कई शिक्षकों को अपने पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल होने की जानकारी मिली। उन्होंने शिकायत की तो आरोपी पकड़े गए। ऐसे ही मानव संपदा पोर्टल ने भी दो जगह पर एक ही दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों का राजफाश किया है।

गोरखपुर : कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में

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गोरखपुर : 2010 एवं 2011 में नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

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गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत खाद्यान्न छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

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गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

गोरखपुर : 25 फर्जी शिक्षकों ने हजम किया सात करोड़ का वेतन, अब ऐसे की जाएगी रिकवरी

  • बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से वेतन रिकवरी का ब्योरा किया जा रहा तैयार

  • अगले सप्ताह तक इसे राजस्व विभाग को भेजे जाने की तैयारी
  • कूटरचित दस्तावेजों के सहारे परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हासिल करने वाले फर्जी शिक्षकों के खिलाफ वेतन रिकवरी की कार्रवाई बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू कर दी है। अब तक 25 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की फाइल तैयार की जा रही है।

    फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल कर इन शिक्षकों ने दशकों में सात करोड़ आठ लाख 29907 रुपये का वेतन भुगतान लिया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक खासकर जंगल कौड़िया ब्लॉक के तीन शिक्षकों पर सर्वाधिक 72-77 लाख रुपये की सर्वाधिक रिकवरी बनेगी।

    वर्ष-2019 में एसटीएफ की छापेमारी के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अधिक मात्रा में शिकायतें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। जांच के बाद अब तक 51 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कराने के लिए साथ ही 37 शिक्षकों पर बीएसए के तहरीर पर राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है।

    वहीं प्राथमिक जांच में संदिग्ध मिलने पर 30 शिक्षक निलंबित किए जा चुके हैं। इसके अलावा करीब 20 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है। नियम के मुताबिक फर्जी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद ही विभाग की ओर से वेतन रिकवरी की फाइल तैयार की जाती है।

    पिछले वर्ष मुकदमा दर्ज होने के बाद से विभाग की ओर से फाइल मार्च में ही तैयार कर ली जानी थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से इसमें देरी हुई। अब विभाग 25 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की फाइल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिसके बाद इसे राजस्व विभाग को भेज दिया जाएगा।

    पहले चरण में 12 फर्जी शिक्षकों की भेजी जाएगी फाइल
    पहले चरण में 12 फर्जी शिक्षकों से वेतन रिकवरी के रूप में 3,64,90,025 रुपये की रिकवरी की फाइल भेजी जाएगी। दूसरे चरण में 13 शिक्षकों के 3,43,39,882 रुपये की रिकवरी भेजी जाएगी।

    सर्वाधिक वेतन लेने वाले शिक्षक
    जंगल कौड़िया ब्लॉक पर तैनात रहे फर्जी शिक्षक जयप्रकाश मिश्रा पर 77,17,784 रुपये, रामप्रसाद पर 74,17,982 और राकेश सिंह पर 72,23,022 रुपये की सर्वाधिक रिकवरी बनती है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने कहा कि फर्जी शिक्षकों से वेतन रिकवरी की प्रगति शासन स्तर से तलब की गई है। फाइल तैयार कराई जा रही है। जल्द ही इसे रिकवरी के लिए आगे भेजने के साथ ही इसकी सूचना शासन को भेजी जाएगी। बाकि बचे फर्जी शिक्षकों के वेतन रिकवरी की फाइल भी जुलाई में तैयार कराई जाएगी।

Tuesday, June 30, 2020

गोरखपुर : 2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

Thursday, June 25, 2020

गोरखपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर नहीं भर पा रहे हैं अपना सही विवरण, ऑनलाइन जानकारियां बार-बार बदल रहे शिक्षक

मानव सम्पदा पोर्टल पर नहीं भर पा रहे हैं अपना सही विवरण, ऑनलाइन जानकारियां बार-बार बदल रहे शिक्षक

गोरखपुर के तीन हजार से ज्यादा परिषदीय स्कूलों में काम करने वाले 7900 शिक्षक मानव संपदा पोर्टल पर अपना सही विवरण नहीं भर पा रहे हैं। इसकी वजह से परिषदीय शिक्षकों का ऑनलाइन विवरण तैयार नहीं हो पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मानव सम्पदा पोर्टल का निर्माण किया गया है। जिसमें विद्यालयों का विवरण उपलब्ध रहता है। अनामिका शुक्ला प्रकरण एवं अन्य फर्जी शिक्षकों के मामले सामने आने के बाद विभाग ने मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों के ऑनलाइन विवरण को भरवाने में गंभीरता दिखानी शुरू कर दी है। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो ऑनलाइन विवरण को सही से भर हीनहीं पा रहे है। विभाग की ओर से ऐसे 680 शिक्षकों की सूची जारी की गई है। जिन्होंने ऑनलाइन विवरण नहीं भरा है, या गलत भरा है। बार बार जानकारी अपडेट कर रहे शिक्षक शासन से कई बार निर्देश मिलने के बाद भी मानव सम्पदा पोर्टल पर डिटेल नहीं भरी जा सकी है। सबसे बड़ी दिक्कत ये आरही है कि शिक्षक एक ही जानकारी को भरने के बाद कई-कई बार से उसे अपडेट कर रहे हैं। इस वजह से शैक्षिक योग्यता नहीं भरनेवालों पर नजरः मानव सम्पदा पोर्टल में परिषदीय शिक्षकों को अपना सम्पूर्ण विवरण देना फाइनल विवरण अपलोड नहीं हो पा रहा होता है। जिसमें घर, नाम, पता, नियुक्ति वर्ष, नियुक्ति स्कूल, कार्यरत स्कूल का नाम, पद, परिवार के सदस्यों के साथ ही शैक्षणिक विवरण भी देना होता है। बेसिक शिक्षा विभाग लगातार मानव सम्पदा पोर्टल पर नजर रखे हुये हैं। जिसमें 100 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं। जिन्होंने अभी तक अपनी शैक्षिक योग्यता और एकेडमिक प्रमाण पत्र और अंकपत्रों का ब्योरा नहीं भरा है। है। बड़ी संख्या में जब शिक्षक जानकारी बार-बार अपडेट करने से नहीं माने तो विभाग ने शिक्षकों के नामवार लिस्ट जारी कर निर्देश दिया कि एक ही जानकारी को बार-बार अपडेट करने से काफी दिक्कतें आती हैं। इसलिए मानव सम्पदा पोर्टल पर जानाकरी अपलोड करने में सावधानी बरते। जो जानकारी भर दी है उसे बार बार बदले नहीं।



सूची जारी मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों का विवरण भरना अनिवार्य है। निरंतर मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों को निर्देशित किया जा रहा है कि सभी शिक्षकों को भरना होता है विवरण जिले में कार्य हैं जल्द से जल्द अपना विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर अपडेट करें। इसमें किसी प्रकार 7900 परिषदीय स्कूल की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 


जटिल प्रक्रिया बड़ी समस्या
मानव सम्पदा पोर्टल पर विवरण भरने की प्रक्रिया को परिषदीय शिक्षक बेहद जटिल मान रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जटिल प्रक्रिया की वजह से ही विवरण भरने में देरी हो रही है। कई चरणों में विवरण भरना है। इसलिए तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है


Wednesday, June 24, 2020

गोरखपुर फर्जी शिक्षक : कूटरचित दस्तावेजों से हासिल की थी नौकरी, तीन बर्खास्त, अब तक 51 शिक्षकों पर कार्रवाई, 30 निलंबित

फर्जी शिक्षक: कूटरचित दस्तावेजों से हासिल की थी नौकरी, तीन बर्खास्त
    
उरूवा, बड़हलगंज और गोला ब्लॉक के विद्यालयों में थी तैनाती

कूटरचित दस्तावेजों के सहारे परिषदीय विद्यालयों में नौकरी हासिल करने वाले तीन और फर्जी शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया है। इनकी तैनाती उरूवा, बड़हलगंज और गोला ब्लॉक के विद्यालयों में थी।

गोला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय, रानीपुर में सहायक अध्यापक पद पर तैनात रविंद्र कुमार गुप्ता के खिलाफ मिली शिकायत की जांच में उनका वर्ष 2011 का टीईटी का अंकपत्र फर्जी मिला।
बड़हलगंज के प्राथमिक विद्यालय खजुरी पांडेय में तैनात सहायक अध्यापक नीरज कुमार पांडेय और उरूवा ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय टिकरी बुजुर्ग में कार्यरत सुनील कुमार सिंह के खिलाफ दूसरे के प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान आरोप पुष्ट पाए गए। जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है।
अब तक 51 शिक्षकों पर कार्रवाई, 30 निलंबित