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Wednesday, July 15, 2026

त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्कार, कहा- कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं जाता, कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया

त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्कार, कहा- कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं जाता, कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया

15 जुलाई 2026
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की गई सीबीएसई की त्रिभाषा नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने सीबीएसई की त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए कहा कि कोई भाषा सीखना बेकार नहीं जाता।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन की दलीलें सुनने के बाद केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया। नई याचिकाएं अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि त्रिभाषा नीति को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किया जा रहा है। कई अभिभावकों व स्कूलों ने किताबों की कमी, शिक्षकों की अनुपलब्धता व अचानक लागू किए गए नियमों को लेकर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि सीबीएसई के परिपत्र शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुरूप नहीं हैं और छात्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था के बिना भाषाएं थोपी जा रही हैं।


22 भाषाओं में से केवल तीन भाषाओं की पुस्तकें ही उपलब्ध
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने एक जुलाई तक सभी भाषाओं की किताबें उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक 22 भाषाओं में से केवल तीन भाषाओं की पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे शिक्षकों और अन्य संसाधनों की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उनके अनुसार, अब अंग्रेजी को भी गैर-भारतीय भाषा की श्रेणी में माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि जो छात्र अब तक अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें अचानक तमिल जैसी नई भारतीय भाषा पढ़ने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में आवश्यक शिक्षक और आधारभूत ढांचा कहां से आएगा, यह बड़ा सवाल है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर रही है और वे निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सीबीएसई की तैयारियों पर रिपोर्ट मांगी थी।

कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया
सीबीएसई ने 15 मई को जारी परिपत्र में कहा था कि एक जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति लागू होगी। इसके तहत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप लागू की जा रही है। बोर्ड के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो वह उसे दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुन सकेगा।

जब तक तीसरी भाषा की नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक कक्षा 9 के छात्र संबंधित भाषा की कक्षा 6 की 2026-27 संस्करण की पुस्तकें पढ़ेंगे। साथ ही, छात्रों पर अतिरिक्त दबाव से बचने के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।




तीसरी भाषा में लिखने-पढ़ने से अधिक अंक बोलने-सुनने पर मिलेंगे, तय किए 9वीं में तीसरी भाषा के मूल्यांकन के मानक, वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई तीसरी भाषा की अध्ययन सामग्री

4 जुलाई 2026
सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौ की तीसरी भाषा (आर-3) के मूल्यांकन के मानक तय कर दिए । विद्यार्थियों को तीसरी भाषा में लखने-पढ़ने के बजाय बोलने नौर सुनने में सर्वाधिक अंक चलेंगे। नई व्यवस्था के तहत भाषा को पढ़ने व लिखने के बजाय सुनने बोलने की क्षमता विकसित करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों के ाचार्यों को नए मूल्यांकन ढांचे को लागू करने के निर्देश दिए हैं। तीसरी भाषा के लिए तैयार अध्ययन सामग्री एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।

बोर्ड ने 'ओरल-फर्स्ट पेडागाजी' मौखिक-प्रथम शिक्षण पद्धति) को नपनाते हुए 100 अंकों के स्कूल नाधारित मूल्यांकन में सर्वाधिक ० अंक लिसनिंग और स्पीकिंग स्कल्स के लिए निर्धारित किए । इसके मुकाबले रीडिंग के नए 20, रचनात्मक लेखन के लिए 15, पाठ्यपुस्तक आधारित लेखन के लिए 10 और प्रोजेक्ट वर्क के लिए 15 अंक तय किए गए हैं। सीबीएसई के अनुसार यह पाठ्यक्रम एनसीईआरटी ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों में भाषा को पहले सुनकर समझने और बोलने का आत्मविश्वास विकसित करना है ताकि वे स्वाभाविक रूप से भाषा का प्रयोग कर सकें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया स्कूल स्तर पर ही संचालित होगी।

नई व्यवस्था में सुनने और बोलने का मूल्यांकन परीक्षा के बजाय पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विभिन्न कक्षा गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षकों को निर्धारित सूची में से किसी भी आठ गतिविधियों का मूल्यांकन करना होगा और प्रत्येक गतिविधि के लिए पांच अंक निर्धारित होंगे।

इस प्रकार कुल 40 अंक सुनने और बोलने के होंगे। इन गतिविधियों में सुनकर प्रश्नों के उत्तर देना, चित्र या घटना का वर्णन करना, समूह चर्चा, स्वयं एवं परिवार का परिचय देना, रोल प्ले, वाद-विवाद, दैनिक जीवन से जुड़े संवाद और अन्य मौखिक गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड ने स्कूलों को छात्रों की रुचि के अनुसार गतिविधियों का चयन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।

रीडिंग स्किल के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें अध्ययन सामग्री से लगभग 100-100 शब्दों के दो पठित गद्यांश दिए जाएंगे, जिन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न, सही-गलत, रिक्त स्थान पूर्ति और अति लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। रचनात्मक लेखन (क्रिएटिव राइटिंग) के लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें 30-40 शब्दों का अनौपचारिक निमंत्रण या संदेश, चित्र वर्णन, 100 शब्दों तक की सरल कहानी और दैनिक जीवन की परिस्थितियों पर आधारित संवाद लेखन शामिल होगा। इसके अतिरिक्त पाठ्य सामग्री पर आधारित लेखन कौशल के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए जिनमें लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। हैं,

बोर्ड ने 15 अंकों का प्रोजेक्ट वर्क भी अनिवार्य किया है। इसके लिए स्थानीय रीति-रिवाज, त्योहार, लोक कला, तकनीकी नवाचार, स्थानीय साहित्यकार या क्षेत्रीय संस्कृति जैसे विषय सुझाए गए हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोजेक्ट का मूल्यांकन उसकी सजावट के आधार पर नहीं, बल्कि छात्र की मौलिकता, शोध, समझ और विषयवस्तु की गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। प्रोजेक्ट के साथ पांच अंकों का मौखिक परीक्षण (वाइवा) भी होगा।




सातवीं से नौवीं तक तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी परीक्षा, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी CBSE ने बताया कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू होगी


नई दिल्लीः राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों में चल रही तमाम उलझनों पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को विराम लगा दिया। बोर्ड ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर साफ किया है कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू की जाएगी। कक्षा नौवीं और 10वीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उन्हें तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।

बोर्ड के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना बहुभाषी बनाना है। इसी कारण मौजूदा बैचों को राहत दी गई है, नई व्यवस्था को पूरी तरह वर्तमान कक्षा छह से लागू किया जाएगा।

इन छात्रों को मिलेगी छूटः दिव्यांग छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो छात्र चुने गए भाषा संयोजन को जारी रख सकेगा।


सीबीएसई: किस कक्षा के लिए क्या है नियम

कक्षा 10: इस बैच के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न उसकी बोर्ड परीक्षा होगी।

कक्षा नौः इस बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले वर्ष कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा से होगा।

कक्षा सात व आठः इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा। 

कक्षा छहः यही पहला बैच होगा, जिस पर तीन-भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा (आर-3) की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

उदाहरण से समझें: यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं, जैसे हिंदी और संस्कृत, या हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है। यदि छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा, जैसे हिंदी और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा ही लेनी होगी, ताकि तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहें।

वहीं, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच या अंग्रेजी और जर्मन चुनी हुई हैं, उन्हें भी राहत दी गई है। वर्तमान में सातवीं, आठवीं और नौवीं के ऐसे छात्र अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रख सकेंगे, लेकिन उनके साथ एक भारतीय भाषा भी जोड़नी होगी।




सीबीएसई : 10वीं तक नहीं बदलनी होगी विदेशी भाषा, तीन भाषाओं वाली नीति में विद्यार्थियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में तीन भाषाओं वाली नीति (त्रि-भाषा फॉर्मूला) को लेकर भ्रम को दूर किया है, जिससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ने वाले जिन विद्यार्थियों ने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, उन्हें मौजूदा भाषाएं बदलने की जरूरत नहीं है। ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक अपनी चुनी भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।


सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई भाषा नीति के तहत कम के कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता को आगामी सत्र से केवल कक्षा 6 से लागू किया जाएगा। इसे कक्षा 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं थोपा जाएगा। सीबीएसई ने मई में जारी सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड के इस नियम के खिलाफ विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। 


पहले अनिवार्य की थीं तीन भाषाएं
बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर में कहा था कि जब तक तीसरी भाषा की नई पुस्तकें नहीं आ जाती हैं, तब तक कक्षा 9 के विद्यार्थी चुनी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे। अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से त्रि-भाषा नीति लागू करने और कक्षा 9 के लिए गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।

Wednesday, July 8, 2026

अटल विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा अब CBSE कराएगा

अटल विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा अब CBSE कराएगा

अनुश्रवण समिति ने प्रस्ताव को दी मंजूरी,
अटल स्कूल यूपी के सभी 18 मंडल मुख्यालयों में हैं


लखनऊ। अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश परीक्षाएं भी अब सीबीएसई कराएगा। नए सत्र (2027-28) से यह व्यवस्था लागू की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति ने इस संबंध में प्राप्त एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।


समिति ने अटल आवासीय विद्यालय में कंपोजिट स्किल एवं इनोवेशन की स्थापना को भी हरी झंडी प्रदान कर दी है। इससे अटल विद्यालयों के छात्रों को भी ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन स्पेस एक्सप्लोरेशन जैसी आधुनिक तकनीक की शिक्षा दी जाएगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि सरकार ने प्रदेश के सभी 18 मंडलीय मुख्यालयों में अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की है। 

अनुश्रवण समिति ने प्रत्येक अटल आवासीय विद्यालय में कम्पोजिट स्किल, इनोवेशन की स्थापना का निर्णय किया है ताकि इन लैबों में ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन तथा अन्य अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जा सके।

Monday, June 22, 2026

सीबीएसई ने 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के नतीजे घोषित किए, पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के नतीजे जारी

सीबीएसई ने 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के नतीजे घोषित किए, पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के नतीजे जारी

डिजीलॉकर पर चेक करें अंक

21 जून 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12वीं की उत्तर-पुस्तिकाओं की दोबारा जांच (पुनर्मूल्यांकन) और सत्यापन के नतीजे जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने रविवार को पहले चरण में 87 फीसदी से अधिक आवेदनों के परिणाम घोषित किए गए हैं। शेष आवेदनों के नतीजे भी जल्द जारी कर दिए जाएंगे। छात्र अपने डिजीलॉकर से नई मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे।

बोर्ड ने कहा कि प्रत्येक आवेदन की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उत्तर-पुस्तिकाओं की सावधानीपूर्वक और पारदर्शी तरीके से जांच की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के तकनीकी विशेषज्ञों ने भी सहयोग दिया। जिससे कि अनधिकृत हस्तक्षेप को रोका जा सके। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन विद्यार्थियों के सत्यापन परिणाम में नो-चेंज दर्शाया गया है, उन्हें इच्छा होने पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में उत्तर पुस्तिका निरीक्षण का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अलग से समय-सारिणी जारी की जाएगी।

छात्रों को अफवाहों से दूर रहने की सलाह
बोर्ड ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर प्रसारित अस्पष्ट सूचनाओं और अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। बोर्ड ने कहा कि सभी आधिकारिक जानकारी केवल उसके अधिकृत माध्यमों से ही जारी की जाएगी। किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए छात्र संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों अथवा सीबीएसई हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते है।

ओएसएम प्रणाली को लेकर हुआ विवाद
सीबीएसई ने 12वीं के नतीजे 13 मई को घोषित किए थे। इसके बाद 19 से 25 मई तक मूल्यांकित उत्तर-पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई गई थी, जबकि 2 से 7 जून के बीच सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इस बार उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बोर्ड ने ओएसएम प्रणाली का उपयोग किया था। इसको लेकर बहुत विवाद हुआ, छात्रों ने नंबर कम आने की शिकायतें कीं। वहीं, उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की आवेदन प्रकिया में भी छात्रों ने आवेदन नहीं होने की शिकायतें की थीं।




CBSE 12वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन आवेदन अब सात जून तक

5 जून 2026
नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि एक दिन बढ़ाकर सात जून कर दी है। पहले यह समयसीमा छह जून आधी रात तक निर्धारित थी। 

बोर्ड ने यह निर्णय उन छात्रों की शिकायतों के बाद लिया है, जिन्होंने परिणाम उपरांत सेवाओं (पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल पर उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैन कापी देखने और सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने में तकनीकी दिक्कतों की बात कही थी। यह पोर्टल दो जून से शुरू किया गया था। सीबीएसई ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें अतिरिक्त समय और सुविधा प्रदान करने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला किया गया है। बोर्ड ने छात्रों से संशोधित कार्यक्रम के अनुसार आवेदन करने का आग्रह किया है।

बोर्ड ने मंगलवार को उन छात्रों के लिए आनलाइन सुविधा शुरू की थी जो उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं हैं। इसके तहत छात्र स्कैन कापी में पृष्ठ गायब होने, पूरक उत्तरपुस्तिका संलग्न न होने, नक्शे या ग्राफ के अभाव, धुंधले पन्नों, गलत उत्तरपुस्तिका अपलोड होने या किसी अन्य प्रश्नपत्र सेट के आधार पर मूल्यांकन जैसी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।



सीबीएसई का पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन हेतु पोर्टल तय समय पर नहीं शुरू हो सका, छात्रों और अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

1 जून 2026
नई दिल्ली। उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए एक जून से शुरू होने वाला केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पोर्टल सोमवार को तय समय पर शुरू नहीं हो सका। इससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है।

सुबह से था इंतजारः हजारों छात्र और अभिभावक सुबह से ही पोर्टल खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन देर शाम तक वेबसाइट का लिंक एक्टिव नहीं हो सका। कॉपियों की स्क्रूटनी और वेरिफिकेशन के लिए महीनों से इंतजार कर रहे लाखों छात्र-छात्राएं लगातार वेबसाइट को रिफ्रेश करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

गुस्से में छात्र और अभिभावक : इसके चलते छात्र, अभिभावक दोनों गुस्से में हैं। उन्हें डर है कि कहीं एक और डेट का इंतजार न करना पड़े। सीबीएसई ने दोपहर दो बजे एक्स पर जानकारी दी कि पोर्टल को जल्द शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी शाम 8:30 बजे तक पोर्टल शुरू नहीं हो सका। इससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक्स यूजर योगेश ने लिखा कि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गए हैं, बोर्ड को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। एक अन्य यूजर ललित ने लिखा कि बोर्ड स्थिति संभालने में सक्षम नहीं है तो छात्रों को अतिरिक्त अंक देने पर विचार करना चाहिए। देर शाम तक पोर्टल शुरू होने का कोई नया समय घोषित नहीं किया गया था। 

दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
सीबीएसई परीक्षा विवाद मामले में शिक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू की। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीओईएमपीटी को ठेका देने के मामले में रिपोर्ट तलब की गई है। टेंडर प्रक्रिया का विवरण भी जुटाया गया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।




CBSE : 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन व पुनर्मूल्यांकन अब एक जून से

30 मई 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रकिया अब तीन दिन की देरी से एक जून से शुरू होगी। पहले यह 29 मई से होनी थी। थी। वहीं, अगले साल से बोर्ड परीक्षा के अंकों के साथ स्कैन आंसरशीट (उत्तर पुस्तिकाएं) भी डिजिलॉकर में उपलब्ध करवाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व डिजिटलीकरण की दिशा में यह फैसला किया गया है। फिलहाल प्राथमिकता, पुनर्मूल्यांकन वाली सभी कॉपियों को दोबारा जांच कर नतीजा जारी करना है, ताकि विद्यार्थी आगे स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकें। देशभर के विश्वविद्यालयों समेत इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होना है और नतीजे में देरी से शैक्षणिक सत्र शुरू होने में देरी हो सकती है। 


ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में हाईकोर्ट ने केंद्र राज्य सरकार और सीबीएसई से मांगा जवाब 

लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार, सीबीएसई, परीक्षा नियंत्रक और उत्तर प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। यह प्रणाली 2025-26 की बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुरू की गई है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक अधिवक्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर शुक्रवार को यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किया गया है। इससे देशभर के लाखों छात्रों के मूल्यांकन में प्रणालीगत संस्थागत विफलता हुई है। 



CBSE : 12वीं में चार लाख से अधिक आए पुनर्मूल्यांकन आवेदन, 11 लाख से अधिक स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गईं, पोर्टल दोबारा खोलने पर हो सकता है विचार

27 मई 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के चलते पुनर्मूल्यांकन के लिए रिकॉर्ड चार लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। सीबीएसई के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में पुनर्मूल्यांकन के आवेदन आए हैं।

मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे - तक 4,04,319 विद्यार्थी आवेदन कर चुके थे, जबकि गिनती अभी जारी है। वहीं, हजारों विद्यार्थियों को आंसर-शीट मिल ही नहीं पाई, इस कारण वे फिर से मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि 11,31,961 स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गई हैं। इसमें से अभी तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं दी जा चुकी हैं। 

अधिकारी भी मानते हैं कि 12वीं के नतीजे आने के 14 दिन बीतने के बाद अभी तक विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों की दिक्कतों को देखते हुए सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए विंडो फिर खोलने पर विचार कर सकता है। यदि विंडो खुलती है, तो चार लाख का आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं मिलने से आवेदन से वंचित रह गए विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक स्कैन कॉपी नहीं मिलेगी, तब तक कैसे पता चलेगा कि उन्हें कम नंबर क्यों मिले हैं? 




सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों को लौटाएगा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में ली गई अतिरिक्त राशि, अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

कम नहीं हो रहीं समस्याएं : पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां

24 मई 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा कि 12वीं के नतीजे के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से जिन विद्यार्थियों से अधिक शुल्क वसूला गया, उन्हें अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन के दौरान बच्चों व अभिभावकों की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों पर सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

सीबीएसई ने रविवार को बताया कि 21-22 मई को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करते समय तकनीकी समस्याओं के चलते कुछ मामलों में अधिक राशि वसूली गई, जबकि कुछ में कम शुल्क लिया गया। जिन मामलों में अधिक भुगतान लिया गया, उनमें अतिरिक्त राशि उसी भुगतान माध्यम में वापस की जाएगी, जिससे शुल्क जमा किया गया था। जिन मामलों में कम शुल्क लिया गया है, उनमें जरूरी होने पर विद्यार्थियों को शेष राशि जमा करने के बारे में अलग से सूचित किया जाएगा।

 बोर्ड ने यह भी बताया कि ऐसे सभी मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे में गड़बड़ी और प्रक्रिया के दौरान सामने आई अन्य तकनीकी खामियों पर संज्ञान लिया था। 


अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

सीबीएसई ने 12वीं की उत्तर पुस्तिका की स्कैन प्रति हासिल करने के लिए आवेदन की तिथि एक दिन और बढ़ा दी है। अब 25 मई को रात 11:59 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

डिजिटल मूल्यांकन का आकलन जारी डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध व विद्यार्थियों की बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा मंत्रालय 12वीं के नतीजों पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है। सीबीएसई को इसमें प्रशासनिक निगरानी भी मुहैया करा रहा है। इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के बाद सामने आईं विसंगतियों और पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है।

दाखिले में दिक्कत न आए प्रशासनिक निगरानी का मकसद सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बाधाओं के कारण कॉलेज में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को असुविधा न हो।




CBSE उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी लेने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि हुई 24 मई

23 मई 2026
नई दिल्लीः सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेने की अंतिम तारीख एक दिन के लिए और बढ़ा दी है। पहले अंतिम तिथि 23 मई थी, लेकिन अब विद्यार्थी 24 मई तक इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। वेबसाइट पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

बोर्ड ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण कई विद्यार्थियों को आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। इस कारण वे समय पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है। वहीं, विद्यार्थियों का दावा है कि वेबसाइट हैक हो गई थी, जिस कारण फीस के मूल्य में बदलाव देखने को मिल रहा था।

सीबीएसई के अनुसार, वेबसाइट पर बढ़े लोड के साथ कुछ तकनीकी हस्तक्षेप के प्रयासों के कारण भी सिस्टम पर असर पड़ा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया बाधित हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अब सभी प्रभावित विद्यार्थी अतिरिक्त एक दिन के भीतर आवेदन कर सकते हैं। स्कैन कापी प्राप्त करने के बाद छात्रों को आगे की प्रक्रिया यानी वेरिफिकेशन आफ इश्यूज आब्जर्व्ह और रि-इवैल्यूएशन के लिए भी दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, ताकि वे अपनी उत्तरपुस्तिका को ठीक से देखकर निर्णय ले सकें। बोर्ड ने कहा कि अन्य सभी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।




ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

कभी वेबसाइट पर ब्लैंक पेज दिखने तो कभी कैप्चा कोड नहीं आने की भी शिकायत

20 मई 2026
नई दिल्लीः सीबीएसई की ओर से 12 वीं में कापियों की जांच के लिए आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से परिणाम में उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद अब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कापी हासिल करने के
 लिए खोले गए पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों से विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि वे न तो पोर्टल पर लागिन कर पा रहे हैं और न ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो रही है।


मंगलवार को सीबीएसई ने पोस्ट रिजल्ट (परिणाम के बाद) सुविधा शुरू की है। इसमें विद्यार्थी अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेकर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन पोर्टल खुलते ही इंटरनेट मीडिया पर शिकायतों की संख्या बढ़‌ने लगी है।


विद्यार्थियों का कहना है कि कभी वेबसाइट ब्लैंक पेज दिखा रही है, कभी कैप्चा कोड नहीं आ रहा। कई मामलों में भुगतान कटने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हो रहा है। एक छात्र ने बताया कि कई बार कोशिश के बाद भी वह पंजीकरण नहीं कर पाया, क्योंकि बार-बार वेब साइट हैंग हो रही है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी छात्रों ने स्क्रीनशाट साझा करते हुए बोर्ड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। एक छात्र ने कहा कि कि रुपये कट गए पर वेरिफिकेशन फेल हो गया। सिस्टम अपग्रेड नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था ही फेल है। हालांकि, इस मामले में सीबीएसई ने किसी बड़ी तकनीकी विफलता से इन्कार किया है।

बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सुबह कुछ छात्रों के फोन आए थे, जो लागिन नहीं कर पा रहे थे। वैसे इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। उनके अनुसार कई बार पुराना सेव पेज खुल जाता है, जिसे कंप्यूटर रीस्टार्ट करने से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को कुछ देर बाद दोबारा से लागिन करने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे इस बार स्कैन कापी और री-इवैल्यूएशन की फीस भी कम की गई है। स्कैन कापी शुल्क 700 से 100 रुपये, री-इवैल्यूएशन फीस 500 से 100 रुपये और प्रति प्रश्न जांच शुल्क 100 से 25 रुपये किया गया है।

Wednesday, June 3, 2026

छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

12वीं के नतीजों के 21 दिन बाद कार्रवाई, ओएसएम टेंडर की जांच के लिए राधा चौहान की अध्यक्षता में समिति गठित, एक माह में देगी रिपोर्ट

02 जून 2026
नई दिल्ली। 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में मचे हाहाकार और निविदा आवंटन में अनियमितताओं को लेकर विद्यार्थियों में भारी गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के चेयरमैन राहुल सिंह व सचिव हिमांशु गुप्ता को हटा दिया। साथ ही, ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रक्रिया के लिए टेंडर जारी करने में गड़बड़ियों की जांच के लिए उच्चस्तरीय एक-सदस्यीय समिति का गठन किया है। क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष व आईएएस अधिकारी राधा चौहान की अध्यक्षता वाली इस समिति को एक महीने में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अफसर और केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह राहुल सिंह की जगह लेंगे, जिन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। सीबीएसई के सचिव पद से हटाए गए हिमांशु गुप्ता की जगह यहभीजिम्मेदारी अब वरिष्ठ अधिकारी वरुण भारद्वाज को सौंपी गई है।

कैबिनेट सचिवालय की ओर से गठित जांच समिति मुख्य रूप से तीन गंभीर पहलुओं पर गौर करेगी। जांच की जाएगी कि क्या विशिष्ट तकनीकी प्रमाणन और टर्नओवर की शर्तों को सिर्फ खास कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर कमजोर किया गया? यह भी देखा जाएगा कि दागी कंपनी को तरजीह क्यों मिली।

 टेंडर के मूल नियमों में बदलाव कर पहले से विवादित या काली सूची में डाले जाने योग्य कंपनी को इतना संवेदनशील काम किन अफसरों की मिलीभगत से दिया गया। समिति यह भी जांच करेगी कि इस डिजिटल सिस्टम का पहले कोई पायलट टेस्ट किया गया था या इसे पूर्व परीक्षण के बिना ही लागू कर दिया गया। साथ ही, इसे इतनी जल्दबाजी में क्यों लागू किया गया।

गंभीर आरोप... ओएसएम का ठेका हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक को देने के लिए सीबीएसई ने नियमों और शर्तों में फेरबदल किए। यह कंपनी पहले ग्लोबारेना के नाम से काम करती थी। 2019 में तेलंगाना बोर्ड के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।


जांच के बाद होगी आपराधिक कार्रवाई
समिति की अध्यक्ष राधा चौहान को जांच में पूरी स्वायत्तता दी गई है। वह जांच के लिए जरूरत पड़ने पर किसी भी अन्य सरकारी विभाग से सक्षम अधिकारियों की सेवाएं भी ले सकती हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर घोटाले में संलिप्त अधिकारियों और निजी वेंडर पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के बाद परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

सार्थक ने संसदीय समिति के समक्ष दी प्रस्तुति
12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत (17) ने मंगलवार को संसदीय समिति के सामने पेश होकर ओएसएम से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं पर प्रस्तुति दी। उसने समिति को अपनी पड़ताल के बारे में सात पन्नों में प्रक्रिया की खामियां बताईं। झारखंड निवासी सार्थक ने बोर्ड की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक में सीबीएसई अधिकारियों से कहा, आपसे अच्छा रिसर्च का काम तो इस छात्र ने किया है।




CBSE ने माना-ऑनलाइन मार्किंग पोर्टल में हुई चूक, खामियां करेंगे दूर, बोर्ड ने पहले दावों को किया था खारिज, अब कहा-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ले रहे आईआईटी और साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मदद

31 मई 2026
नई दिल्ली। लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के मानसिक उत्पीड़न के बाद आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल में चूक स्वीकार कर ली है। ओएसएम पोर्टल दो बार हैक होने के बाद सीबीएसई ने रविवार को कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में सामने आई खामियों को ठीक कर लिया गया है। विशेषज्ञ इसमें आ रही अन्य समस्याएं दूर करने के प्रयासों में जुटे हैं।

बोर्ड ने खामियों के दावों को पहले खारिज कर दिया था। बोर्ड के रुख में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब 12वीं के दो छात्रों ने सीबीएसई क्लाउड स्टोरेज मैनेजमेंट पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। 12वीं की परीक्षा की कॉपियों की ऑनलाइन मार्किंग में गड़बड़ियों पर लगातार विवाद बना हुआ है। 

सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, हम ऑनमार्क पोर्टल में खामियों की गहन निगरानी कर रहे हैं। इन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए पिछले कुछ दिनों में सरकार के विभिन्न विभागों के साथ आईआईटी से साइबर सुरक्षा पेशेवरों की विशेषज्ञ टीम को तैनात किया गया है, ताकि प्रणाली को और दुरुस्त किया जा सके। 

सार्वजनिक डोमेन में तकनीकी चूक की खबरें आने के तुरंत बाद सरकार और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों ने मिलकर इस काम को शुरू कर दिया, जिसके बाद अब खतरे को पूरी तरह टाल दिया गया है। हालांकि, अन्य शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

एथिकल हैकर का जताया आभार
सीबीएसई ने सतर्क नागरिकों और हैकर का आभार जताया, जिन्होंने ऐसी खामियों की ओर ध्यान दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि वे इनमें से कई साइबर विशेषज्ञों के साथ सीधे संपर्क में हैं और उनकी मदद ले रहे हैं। बोर्ड ने कहा, कोई भी जानकारी देने के लिए लोगों से हमारी सुरक्षा टीम से संपर्क करने का अनुरोध है। किसी भी तकनीकी इनपुट या सुरक्षा संबंधी जानकारी को साझा करने के लिए secy-cbse@nic.in पर मेल करने को कहा गया है।


सवाल दर सवाल : स्कैनिंग से ऑन स्क्रीन मार्किंग तक

🔴 एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने 25-26 मई को दावा कि ओएसएम पर तकनीकी खामियों का पता लगाकर उसने साइबर सुरक्षा एजेंसी सर्ट-इन को जानकारी भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

🔴 निसर्ग ने मास्टर पासवर्ड मिलने का दावा भी किया...कहा, वह कॉपियों के नंबर तक बदल सकता है। हालांकि, सीबीएसई ने कहा-जिस पोर्टल के हैक का दावा है, वह सिर्फ परीक्षण व समीक्षा के लिए बनाई सैंपल साइट थी।

🔴 पुनर्मूल्यांकन भुगतान में भी पोर्टल में गड़बड़ियां आईं। एचडीएफसी पेमेंट गेटवे में तकनीकी सेंधमारी हुई। इससे 50 छात्र प्रभावित हुए।

🔴 छात्र सार्थक सिद्धांत ने उत्तर पुस्तिकाएं साझा कर सवाल उठाया-क्या इन कॉपियों को वास्तव में उच्च क्वालिटी के स्कैनर से स्कैन किया है। कॉपियों में परछाईं व मुड़े पन्ने क्यों दिख रहे हैं। स्कैनर से स्कैन किए गए दस्तावेज में ऐसा नहीं होता।

Tuesday, June 2, 2026

सीएम योगी ने सभी बोर्ड के टॉप टेन मेधावियों को किया सम्मानित, सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान

सीएम योगी ने सभी बोर्ड के टॉप टेन मेधावियों को किया सम्मानित, सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान 

सोशल मीडिया पर अफवाहें, अखबार पढ़ें: योगी

02 जून 2026
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी छात्र-छात्राओं से अपने अभिभावकों पर स्मार्टफोन के लिए अनावश्यक दबाव न डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का प्रयोग सही दिशा में कीजिए। डिजिटल लाइब्रेरी से जुड़िए, अपने पाठ्यक्रम से जुड़िए। समाचार पत्रों को नियमित पढ़ें, अपडेट रहें। टीवी पर न्यूज देखिए, अन्य व्यर्थ कार्यक्रम न देखें।

सीएम ने सोमवार को लोक भवन में यूपी बोर्ड व संस्कृत शिक्षा परिषद के टॉप टेन, सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के सर्वोच्च दस कुल 223 राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, टैबलेट, मेडल व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। 

छात्रों को संबोधित करते हुए सीएम ने छात्रों से सोशल मीडिया से दूरी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकतम 10-15 मिनट तक ही सोशल मीडिया पर रहें। सोशल मीडिया पर ज्यादातर कंटेंट अफवाहों और झूठ पर आधारित होते हैं। किसी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में कोई आपसे आपके फॉलोअर्स की संख्या नहीं पूछेगा। कार्यक्रम में सीएम ने मेधावियों के साथ उनके अभिभावक व विद्यालय के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया।

छूटे हुए विद्यालयों तक पहुंचेगा अखबार

मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षा के मेधावी छात्रों को सही जानकारी के लिए नियमित रूप से अखबार पढ़ने की सलाह दी। इसके बाद प्रदेश के विद्यालयों में अखबार पढ़ने के अभियान को और गति मिलने की उम्मीद है। 

बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने छात्रों का स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी। उन्हें पुस्तकों और समाचार पत्रों के अध्ययन के प्रति प्रेरित करने के उ‌द्देश्य से विद्यालयों में अखबार पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विद्यालयों में अखबार पढ़ने का समय भी निर्धारित किया गया है। साथ ही समाचारों से संबंधित विभिन्न शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सभी अटल आवासीय विद्यालयों और कौशल विकास केंद्रों में भी अखबार पठन-पाठन को अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विद्या को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रखा। हम ऐसी विद्या दें जो जीवन के हर क्षेत्र में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे। चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा दे और समाज व राष्ट्र को आगे बढ़ाए। दुनिया मैं भारत का सम्मान इसलिए था क्योंकि हमारे पास ज्ञान की सबसे बड़ी धरोहर थी। यह मेधावी सम्मान उसी कड़ी का हिस्सा है।

जहां भी अच्छा ज्ञान मिले, लेने के लिए तैयार रहें
सीएम ने कहा कि इस राज्य स्तरीय परिणाम में कुल 223 विद्यार्थी हैं। इसमें छात्र 85, छात्राएं 138 हैं। छात्राएं मेरिट सूची में ज्यादा और छात्र कम आए हैं। हाईस्कूल में 115 में से 34 छात्र व 81 छात्राएं हैं। इंटर में 9 छात्र व 14 छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि छात्राएं ज्यादा मेहनत कर लेती हैं। ज्यादा अंक पाने का सामर्थ्य रखती हैं। उन्होंने मेरिट से छात्रों की संख्या कम होने पर तंज कसा कि लगता है अब लड़के झाडू-पोछा ज्यादा करने लगे हैं। सीएम ने कहा लड़के छात्राओं से प्रेरणा लें और अच्छे नंबर लाएं।

छात्रों को परेशान करने के लिए न बनाएं पेपर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि छात्रों का पसीना छुड़ाने के लिए परीक्षा के पेपर न बनाएं। छात्रों को परेशान न करें। उन्होंने कहा कि प्रश्न ऐसा हो कि छात्र थोड़े प्रयास से उसे हल कर सकें। सीएम ने कहा कि नौ साल पहले बोर्ड परीक्षा में नकल होती थी। शिक्षक भर्ती नहीं होती थी। विद्यालय भी वैसे ही थे। छात्रों को पता था कि अंत में ठेका ही होना है तो मेहनत क्यों करें।

बच्चों के मित्र बनकर रहें : गुलाब देवी
माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि अभिभावक बच्चों के मित्र बनकर रहेंगे तो बच्चा सही रुप से आगे बढ़ेगा। आज माता-पिता को फुर्सत ही नहीं रहती है बच्चों के लिए। शिक्षकों की भी समाज में एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि यह छात्रों का अंतिम पड़ाव नहीं, जीवन की शुरुआत है। जीवन में हमेशा चुनौती होगी, इसलिए समय को पकड़े रहिए तभी चुनौती से पार पाएंगे। 




सीएम आज लोकभवन में सभी बोर्ड्स के मेधावियों का करेंगे सम्मान, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये, टैबलेट व मेडल देकर करेंगे सम्मानित

01 जून 2026
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लोकभवन में सुबह 11 बजे से आयोजित कार्यक्रम में यूपी बोर्ड और संस्कृत शिक्षा परिषद के टॉप 10, सीबीएसई और आईसीएसई के सर्वोच्च 10-10 समेत कुल 223 राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये, एक-एक टैबलेट, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित करेंगे।

सीएम समारोह में 11 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेंगे। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग भी सभी 75 जिलों में जिले के टॉप 10 मेधावियों को सम्मानित करेगा। जिलों में सीएम के लोकभवन में होने वाले कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।


जल्द ही मदरसा बोर्ड के मेधावी भी होंगे सम्मानित
 योगी सरकार वर्ष 2026 की मदरसा बोर्ड परीक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करेगी। जून के पहले सप्ताह में लखनऊ में विशेष कार्यक्रम होगा। मुंशी/मौलवी (सेकंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को बुलाया जाएगा। दोनों वर्गों के शीर्ष तीन छात्र-छात्राओं को टैबलेट दिया जाएगा। 




एक जून को सीएम 223 बोर्ड मेधावियों को करेंगे सम्मानित, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये टैबलेट, प्रशस्ति पत्र देंगे

जिला स्तर पर होने वाले आयोजन में मेधावियों को 21-21 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे

27 मई 2026
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक जून को लोकभवन में हाईस्कूल व इंटर के विभिन्न बोर्ड के राज्य स्तरीय मेधावियों को सम्मानित करेंगे। राज्य स्तर पर प्रथम 10 मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, एक-एक टैबलेट, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। जिला स्तरीय सम्मान समारोह में जिले के प्रथम 10 मेधावियों को 21–21 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी निर्देश के अनुसार राज्य स्तर पर यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीआईएसई व सीबीएसई के हाईस्कूल व इंटर के कुल 223 मेधावियों को सीएम लोकभवन में सम्मानित करेंगे। जिला स्तर पर कुल 1459 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय आयोजन में मेधावियों के साथ उनके एक-एक अभिभावक भी शामिल हो सकेंगे।

 उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला मुख्यालय पर करने के लिए व्यवस्था की जाए। डीआईओएस एक जून को होने वाले आयोजन में मंत्री या जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में आयोजन सुनिश्चित कराएं। निदेशक ने कहा है कि मेधावियों को दी जाने वाली धनराशि कोषागार से उनके खातों में हस्तांतरित कराई जाएगी। 

Sunday, May 17, 2026

CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी

CBSE : नौवीं में त्रिभाषा अनिवार्य पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, स्कूलों में एक जुलाई से लागू हो जाएगा बदलाव, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी


15 मई 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में अब कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 के अनुरूप यह बड़ा बदलाव किया गया है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू हो जाएगी। हालांकि, तीसरी भाषा के लिए बोर्ड परीक्षा नहीं कराई जाएगी।

बोर्ड ने 15 मई को जारी परिपत्र में कहा है कि एक जुलाई से कक्षा नौ में तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। स्कूल सीबीएसई की विषय सूची में शामिल किसी भी भाषा को चुन सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों। विदेशी भाषा को केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ाया जा सकेगा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (आर-3) के लिए दसवीं में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्यविद्यार्थियों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम करना और भाषा सीखने को अधिक सहज बनाना है। सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा के संबंध में जानकारी दें।



छठवीं में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक तय करें स्कूल – सीबीएसई, ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

06 मई 2026
नई दिल्लीः सीबीएसई ने छठवीं में तीसरी भाषा (आर 3) लागू करने को लेकर सभी संबद्ध स्कूलों को प्रक्रिया तेज करने को कहा है। बोर्ड का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य होगी और सभी स्कूलों को 31 मई तक ओसिस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा का चयन करके अपलोड या संशोधित करना होगा। नई व्यवस्था एक जुलाई से शुरू करनी होगी।

सीबीएसई के अनुसार, कई स्कूलों ने तीसरी भाषा का विकल्प पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, कुछ स्कूल अब भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। वहीं, कुछ ने नीति के अनुरूप विकल्प नहीं चुने हैं। सीबीएसई ने कहा है, निर्धारित समय सीमा तक जानकारी अपडेट नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो सकती है।


ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

आर 1 (पहली भाषा) : यह वह मुख्य भाषा होती है, जिसे स्कूल चुनता है। यह भाषा सीबीएसई की सूची में शामिल होती है, जैसे हिंदी या कोई क्षेत्रीय भाषा। आमतौर पर छात्रों की पढ़ाई की शुरुआत इसी भाषा से होती है।

आर 2 (दूसरी भाषा) : दूसरी भाषा आर 1 से अलग होती है। यह भी एक मानक भाषा होती है, जिसे स्कूल पढ़ाता है जैसे अंग्रेजी या कोई दूसरी भारतीय भाषा।

आर 3 (तीसरी भाषा) : तीसरी भाषा आर 1 और आर 2 दोनों से अलग होती है। इसमें छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा का चुनाव कर सकते हैं। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।




छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू

04 अप्रैल 2026
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

 सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

Thursday, May 14, 2026

सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी

सीबीएसई: 12वीं का परिणाम 3.19 फीसदी गिरा, बेटियों ने फिर मारी बाजी 

88.86 फीसदी लड़कियां हुईं पास, 82.13 फीसदी रहा लड़कों का नतीजा


🔴 देखें अपना रिजल्ट 👇
CBSE 12th Class Result OUT


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं कक्षा के नतीजों में 85.20 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.19 फीसदी कम है। बेटियों का प्रदर्शन इस बार भी शानदार रहा है। 88.86 फीसदी बेटियां पास हुईं, तो लड़कों का नतीजा 82.13 फीसदी ही रहा। बेटियां लड़कों से फीसदी आगे रहीं। ट्रांसजेंडर का परिणाम सौ फीसदी रहा। इस बार भी बोर्ड ने टॉपरों की  सूची जारी नहीं की। 


इस बार बोर्ड ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को अपनाया है। इस साल 17,80,365 परीक्षार्थी पंजीकृत थे और 17,68,968 ने परीक्षा दी थी। इनमें से 15,07,109 विद्यार्थी पास हुए। बीते साल 14,96,307 उत्तीर्ण हुए थे। 1,63,800 विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट मिली है। बीते साल यह संख्या 1,29,095 थी। कंपार्टमेंट या विषय में प्रदर्शन सुधारने के इच्छुक विद्यार्थी 15 जुलाई को सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।


त्रिवेंद्रम रीजन अव्वल प्रयागराज सबसे नीचे

देशभर के 22 रीजन में से त्रिवेंद्रम 95.62% परिणाम के साथ शीर्ष पर है, जबकि प्रयागराज 72.43% के साथ सबसे नीचे रहा। दस रीजन का परिणाम औसत पास फीसदी से भी कम है। दिल्ली रीजन का पास प्रतिशत भी कम रहा। इस साल दिल्ली रीजन से 91.97 फीसदी छात्र सफल हुए, जो पिछले साल 95.18 रहा था। 90 एवं 95 फीसदी अंक पाने वालों विद्यार्थियों की संख्या भी कम हुई है। 90% से अधिक अंक पाने वालों की संख्या 94,028 है, जबकि 17,113 ने 95 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं। कुल 92 विषयों में 49,676 ने सौ में सौ अंक हासिल किए है।

Thursday, April 30, 2026

सीबीएसई का पढ़ाई के साथ परवरिश पर जोर, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी, करें डाउनलोड

सीबीएसई का पढ़ाई के साथ परवरिश पर जोर, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी, करें डाउनलोड




नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने बुधवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी किया। इसका मकसद स्कूलों में पढ़ाई और घर पर माता-पिता की परवरिश के बीच व्यवस्थित जुड़ाव को मजबूत करना और छात्रों की सर्वांगीण भलाई को बढ़ावा देना है। बुधवार को यूट्यूब पर सीबीएसई के आधिकारिक चैनल पर लाइव कार्यक्रम के दौरान यह कैलेंडर जारी किया गया। इसमें बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, काउंसलर, अभिभावक शामिल हुए।


बोर्ड ने एक बयान में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षिक सत्र 2025-26 से यह पहल शुरू की गई थी। अभिभावकों-शिक्षकों से मिले फीडबैक के आधार पर इसे अब और विस्तार दिया गया है। नए संस्करण में जुड़ाव की बेहतर रणनीतियां, शिक्षकों के नेतृत्व वाली गतिविधियां और छात्रों के भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास में मदद के लिए विशेष मनोवैज्ञानिक-सामाजिक पहलें शामिल की गई हैं।

छात्रों को समान अवसर देना उद्देश्य बोर्ड ने बताया कि कैलेंडर में कुछ नए घटक जोड़े गए हैं। इनमें समावेश पर विशेष अनुभाग शामिल है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग तरह के छात्रों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देना है।

'पैरेंटिग वर्कशॉप' अनुभाग को विकासोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ और मजबूत किया गया है। इससे स्कूलों को छात्रों की उम्र और संदर्भ के अनुसार उपयुक्त जुड़ाव कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी। कैलेंडर घर में माता-पिता और बच्चों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने, घर और स्कूल के बीच साझेदारी मजबूत करने और माता-पिता के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वे अपने बच्चे के विकास की यात्रा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकें।

Saturday, April 25, 2026

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

Friday, April 24, 2026

सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट

सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट 

नई दिल्लीः सीबीएसई ने 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। इसमें विभिन्न विषयों की परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेंगी। इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने - का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे।

बोर्ड द्वारा इस वर्ष से लागू किए गए इस सिस्टम में दूसरी परीक्षा देना पूरी तरह से वैकल्पिक रखा गया है। यानी जो छात्र मुख्य परीक्षा में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे दूसरी बोर्ड परीक्षा देकर अपने अंकों को बेहतर कर सकते हैं। अधिकांश परीक्षाएं सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक होंगी, जबकि कुछ विषयों की परीक्षाएं दोपहर साढ़े बारह बजे तक ही समाप्त हो जाएंगी। बोर्ड ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे अपने एडमिट कार्ड के साथ समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।



Thursday, April 16, 2026

CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट

CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट 


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा के परिणाम आज, 15 अप्रैल को नतीजे जारी हो चुके हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं।


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। यह परिणाम आज शाम 4 बजे जारी हुए हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 93.70 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। बीते वर्ष से कुल पास प्रतिशत 0.04 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।


जरूरी आंकड़े
10वीं में कुल पास छात्र- 23,16,008
बीते वर्ष कुल पास छात्र- 22,21,636
कुल पास प्रतिशत- 93.70%

सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 2.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 55,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। लड़कियों ने इस बार भी रिजल्ट में बाजी मारी और कुल 94.99 प्रतिशत लड़कियां पास हुईं। वहीं 92.69 प्रतिशत लड़के पास हुए।


इस साल भी नहीं जारी हुई टॉपर्स लिस्ट
हालांकि, बोर्ड ने इस वर्ष भी मेरिट सूची नहीं जारी की है। बोर्ड 0.1 प्रतिशत छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र जारी करेगा, ये वो छात्र होंगे जिन्होंने विषयों में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

मेरिट प्रमाण पत्र संबंधित छात्र के डिजिलाकर में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, परीक्षार्थियों को मार्कशीट भी उनके डिजिलाकर खातों में उपलब्ध कराई गई है।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि बोर्ड जल्द ही छात्रों को उनके स्कूल के माध्यम से उत्तीर्ण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। वहीं, इस वर्ष कंपार्टमेंट लाने वाले विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी।



रिजल्ट देखने एवं डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं।

इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर रिजल्ट एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।

लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना लॉगिन डिटेल डालें।
लॉगिन डिटेल डालने के बाद सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।

चाहें तो रिजल्ट का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।

Wednesday, April 1, 2026

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

 

कैसे चेक करें रिजल्ट?

सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


कितने नंबर वाला होगा पास?
CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

Tuesday, February 17, 2026

CBSE: दसवीं के छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य, दूसरी परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा

CBSE: दसवीं के छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य, दूसरी परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा

दसवीं में दो बोर्ड परीक्षाओं पर बोर्ड ने स्पष्ट की नीति

नई दिल्ली । सीबीएसई ने साफ किया है कि दसवीं में दूसरी बोर्ड परीक्षा में छात्रों को तभी मौका मिलेगा, जब उन्होंने पहली बार परीक्षा अनिवार्य रूप से दी हो। बोर्ड ने साफ किया कि दूसरी बोर्ड परीक्षा में सिर्फ प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिलेगा।


सीबीएसई ने दसवीं में इस बार दो बोर्ड परीक्षाओं की नीति को लेकर यह स्पष्टीकरण दिया है। दरअसल, हाल में बोर्ड को कई आवेदन मिले, जिनमें छात्रों ने कई कारणों से पहली परीक्षा में नहीं बैठ पाने की बात कहते हुए दूसरी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि दूसरी बार में सिर्फ तीन विषयों की परीक्षा दे सकेंगे। छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा में से कोई तीन विषय चुन सकेंगे। 

उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र पहली बोर्ड परीक्षा में तीन या उससे अधिक विषयों की परीक्षा नहीं देता है तो उसे दूसरी परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। ऐसे छात्र 'एसेंशियल रिपीट' श्रेणी में रखे जाएंगे। उन्हें अगले साल मुख्य बोर्ड परीक्षा में ही बैठ सकेंगे।

Wednesday, December 31, 2025

सीबीएसई 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से होंगी, डेटशीट जारी

CBSE बोर्ड परीक्षा की तारीख बदली, 3 मार्च को होने वाली 10वीं की परीक्षा 11 मार्च और 12वीं की  परीक्षा 10 अप्रैल को होगी

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तीन मार्च को होने वाली परीक्षा की तारीख बदल दी है। 3 मार्च को 10वीं की परीक्षा 11 मार्च और 12वीं की  परीक्षा 10 अप्रैल को होगी। सीबीएसई की शेष परीक्षा पहले की घोषित तिथियों के अनुसार ही होगी। यह बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया है।

10वीं की तीन मार्च को तिब्बती, जर्मन, नेशनल कैडेट कोर, बोडो, तंगखुल, जापानी, भूटिया, स्पेनिश, कश्मीरी, मिजो, ऐलिमेंट्स ऑफ बुक कीपिंग एंड अकाउंटेंसी की परीक्षा होनी थी। अब यह 11 मार्च को होगी। 12वीं की तीन मार्च को लीगल स्टडीज की परीक्षा होनी थी, जो अब 10 अप्रैल को होगी। 






सीबीएसई 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से होंगी, डेटशीट जारी

10वीं में दो बार होंगी परीक्षा, सर्वोत्तम स्कोर को माना जाएगा अंतिम


नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने गुरुवार को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की आधिकारिक डेटशीट जारी कर दी है। बोर्ड के अनुसार 10वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 10 मार्च 2026 तक चलेंगी, जबकि 12वीं की परीक्षाएं भी 17 फरवरी से शुरू होकर नौ अप्रैल 2026 तक चलेंगी। बोर्ड परीक्षाओं का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 तक होगा।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डा. संयम भारद्वाज ने कहा कि परीक्षा और कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि विद्यार्थियों को मुख्य वैकल्पिक विषयों की परीक्षाओं के बीच तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अब विद्यार्थियों को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से सीबीएसई ने घोषणा की है कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा वर्ष में दो बार कराई जाएगी। इसमें विद्यार्थी चाहें तो फरवरी सत्र की परीक्षा देने के बाद मई में दोबारा परीक्षा देकर अपने अंक सुधार सकते हैं। बोर्ड सर्वोत्तम स्कोर को ही अंतिम मानेगा।


CBSE: कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए डेट शीट जारी 
















Saturday, December 20, 2025

CBSE की पहल, संबद्ध स्कूल बनेंगे NIOS परीक्षा केंद्र, ओपन स्कूलिंग में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं परीक्षाएं अपने शहर ही नहीं, बल्कि घर के पास दे सकेंगे

CBSE की पहल, संबद्ध स्कूल बनेंगे NIOS परीक्षा केंद्र, ओपन स्कूलिंग में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं परीक्षाएं अपने शहर ही नहीं, बल्कि घर के पास दे सकेंगे

केंद्रों की दूरी से नामांकन और परीक्षा में उपस्थिति कम

घर के पास केंद्र, लड़कियों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद

लखनऊ । शिक्षा के अधिकार को आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग तक पहुंचाने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बड़ी मानवीय पहल की है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ - ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं 10वीं, 12वीं, व्यावसायिक और अन्य परीक्षाएं अपने शहर ही नहीं, बल्कि घर के पास दे सकेंगे। उन्हें दूसरे शहर या राज्य की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। सीबीएसई ने इस संबंध में - देशभर के अपने संबद्ध स्कूलों को - सर्कुलर जारी किया है।  प्रधानाचार्यों से अपील की है कि वे अपने स्कूल को एनआइओएस की परीक्षाओं के लिए केंद्र के रूप में पंजीकृत कराएं। इससे देशभर के लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।


एनआइओएस में 10वीं व 12वीं के साथ कंप्यूटर, हेल्थ केयर, इलेक्ट्रिशियन, ब्यूटी कल्चर, एआइ जैसे तमाम कोर्स में प्रवेश लिए जाते हैं। इसके देशभर में 7400 से अधिक स्टडी सेंटर भी हैं। सत्र 2025 में 10वीं परीक्षा में 1.06 लाख नामांकन के सापेक्ष 89 हजार 847 परीक्षार्थी ही शामिल हुए। इनमें 56 हजार 350 (62.72) ने सफलता हासिल की। 12वीं में 1.66 लाख बच्चों का नामांकन था, इनमें से 1.46 लाख ने परीक्षा दी। 94 हजार 457 (72.62) सफल रहे। 


एनआइओएस उन लाखों बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा में लाने में मदद करता है, जिनकी पढ़ाई गरीबी, पारिवारिक जिम्मेदारी, बीमारी या कामकाज के कारण छूट गई। कई जिलों में एक या दो ही परीक्षा केंद्र होते थे, जिससे छात्रों को 30 से 70 किलोमीटर तक दूरी तय करनी पड़ती थी।


कई बार दूसरे शहर भी जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए यात्रा, भोजन और ठहराव का खर्च पढ़ाई से महंगा साबित होता था। काफी छात्र फार्म भरने के बाद परीक्षा देने नहीं पहुंचते। इससे लड़कियों की भागीदारी पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। दिव्यांग छात्रों के लिए भी लंबी दूरी तय करना, परिवहन और सहायक की व्यवस्था करना मुश्किल है। सीबीएसई से संबद्ध स्कूल परीक्षा केंद्र बनेंगे तो बच्चे घर के पास ही परीक्षा दे सकेंगे, जिससे उपस्थिति बढ़ने की उम्मीद है।

Wednesday, December 10, 2025

CBSE स्कूलों की भरमार से टूटी UP बोर्ड के विद्यालयों की कमर, सैकड़ों स्कूलों में एक भी छात्र का नहीं पंजीकरण, 481 विद्यालयों की मान्यता खतरे में

CBSE स्कूलों की भरमार से टूटी UP बोर्ड के विद्यालयों की कमर, सैकड़ों स्कूलों में एक भी छात्र का नहीं पंजीकरण, 481 विद्यालयों की मान्यता खतरे में


समस्या सिर्फ स्कूलों की नहीं, शिक्षा के संतुलन की भी...

सीबीएसई विद्यालयों ने ग्रामीण इलाकों तक मजबूत पकड़ बना ली है। आधुनिक सुविधाएं और अंग्रेजी शिक्षा का आकर्षण अभिभावकों को खींच रहा है।

शिक्षकों की कमी, कक्षाओं का नियमित न चलना और कमजोर निगरानी के कारण सरकारी व हिंदी मीडियम स्कूलों की साख प्रभावित हुई है।

आगे की पढ़ाई और रोजगार में अंग्रेजी का महत्व बढ़ने से माता-पिता बच्चों का प्रवेश सीबीएसई विद्यालयों में ही करा रहे हैं।

फीस छूट, वैन सुविधा, टेस्ट सीरीज और नियमित मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं अभिभावकों को आकर्षित कर रही हैं।

दो वर्ष से लगातार शून्य पंजीकरण वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। –भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद


प्रयागराज। प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों की बेतहाशा बढ़ोतरी ने यूपी बोर्ड के विद्यालयों की कमर तोड़ दी है। नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्थिति इतनी विकट हो गई है कि प्रदेश के लगभग हर जनपद में यूपी बोर्ड के ऐसे विद्यालय मिले हैं जहां हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में एक भी छात्र का पंजीकरण नहीं हुआ। परिणामस्वरूप प्रदेश के 481 से अधिक इंटरमीडिएट स्तर के माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता रद्द होने की कगार पर है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से ऐसे स्कूलों का ब्योरा मांगा है जहां पिछले दो वर्षों से छात्र संख्या शून्य बनी हुई है। प्राथमिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

प्रदेश में हाईस्कूल स्तर के कुल 29,534 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। इनमें प्रयागराज के 12, गाजीपुर के 16, एटा के 14, फिरोजाबाद के 10, बलिया के छह, कानपुर नगर व आगरा के चार-चार, मथुरा व बरेली के पांच-पांच सहित 219 विद्यालय ऐसे पाए गए हैं जहां वर्तमान सत्र में एक भी छात्र ने बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण नहीं कराया है।

इंटरमीडिएट स्तर के मान्यता प्राप्त 25,190 स्कूलों में से गाजीपुर के 49, प्रयागराज के 21, कानपुर नगर के 18, मऊ के 19, अंबेडकरनगर व गोरखपुर के 11-11, एटा व अलीगढ़ के 16-16 सहित कुल 481 विद्यालयों में एक भी विद्यार्थी का पंजीकरण नहीं हुआ है। प्रदेश भर में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूलों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।