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Saturday, July 31, 2021

स्कूल, कालेज खोलने पर केंद्र जल्द लेगा फैसला, राज्यों के साथ चर्चा के बाद जारी हो सकती है गाइडलाइन

स्कूल, कालेज खोलने पर केंद्र जल्द लेगा फैसला, राज्यों के साथ चर्चा के बाद जारी हो सकती है गाइडलाइन


कोरोना संक्रमण में पहले के मुकाबले भारी कमी दर्ज होते ही स्कूल-कालेजों सहित दूसरे सभी शैक्षणिक संस्थानों को खोलने का सिलसिला फिर चल पड़ा है। मध्य प्रदेश, बिहार व हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों ने नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को अपनी सहूलियत के आधार पर खोल दिए हैं। हालांकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य अभी इसको लेकर असमंजस में हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र ने राज्यों के असमंजस को खत्म करने को लेकर रुचि दिखाई है। साथ ही संकेत दिया है कि राज्यों के साथ चर्चा करके जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा। जरूरत पड़ी तो स्टैंडर्ड गाइडलाइन भी जारी की जाएगी।


कुछ राज्य अभी कोई निर्णय नहीं ले पाए
शिक्षा मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों को खोलने पर यह दिलचस्पी उस समय दिखाई है, जब संक्रमण में कमी आने पर कई राज्यों ने अपने स्कूल खोल दिए हैं, जबकि कुछ राज्य अभी कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं। यह स्थिति तब है, जब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्कूल-कालेज खोलने और बंद करने का अधिकार दिया गया था। फिलहाल अभिभावकों और छात्रों की ओर से इस पर उठाए जा रहे सवालों को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों के साथ इस पर चर्चा करने का फैसला लिया है।


अगले हफ्ते राज्यों के साथ इस मसले पर हो सकती है चर्चा
सूत्रों के अनुसार, अगले हफ्ते राज्यों के साथ इस मसले पर चर्चा हो सकती है। इस चर्चा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं। शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने को लेकर सवाल इसलिए भी उठाए जा रहे हैं, क्योंकि कोरोना संक्रमण में कमी के बाद बाजार, माल, क्लब, सिनेमा आदि पहले जैसी सामान्य स्थिति में बहाल कर दिए गए हैं। ट्रेनों और बसों में भी सामान्य आवाजाही शुरू हो गई है। वैसे भी 12वीं का रिजल्ट आने के बाद से उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला शुरू होने वाला है। आने वाले दिनों में नीट जैसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा भी होने वाली है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखा गया तो समस्याएं और बढ़ सकती हैं।


वैक्सीनेशन की मांगी रिपोर्ट
शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के वैक्सीनेशन की भी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सीबीएसई और यूजीसी को भी निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब तक हुए वैक्सीनेशन की पूरी जानकारी जुटाएं और यह सुनिश्चित करें कि शिक्षण संस्थानों से जुड़े सभी कर्मचारी वैक्सीन की डोज लगवा लें। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के बाद मंत्रालय निर्णय लेने की स्थिति में होगा।

CBSE रिजल्ट 2021: परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए बोर्ड जारी करेगा दिशा-निर्देश

CBSE रिजल्ट 2021: परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए बोर्ड जारी करेगा दिशा-निर्देश


सीबीएसई के 12वीं के परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए जल्द ही सीबीएसई दिशा निर्देश जारी करेगा। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक डा.संयम भारद्वाज ने बताया कि जो छात्र अपने परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट हैं उनके लिए आवेदन प्रक्रिया सहित अन्य जानकारियां जल्द ही जारी की जाएंगी। उस निर्देश के अनुसार उनको आवेदन करना होगा।


ऐसे हुआ है मूल्यांकन
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डा.संयम भारद्वाज कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए परीक्षा रद्द होने के बाद बोर्ड ने वैकल्पिक मूल्यांकन नीति के आधार पर परिणामों की घोषणा की है।


 बोर्ड द्वारा गठित 13 सदस्यीय समिति के फैसले के मुताबिक 30 फीसदी अंक दसवीं बोर्ड परीक्षा के आधार पर, अगले 30 फीसदी अंक 11वीं कक्षा के और 40 फीसदी अंक 12वीं कक्षा के यूनिट, अर्द्धवार्षिक परीक्षा और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर दिए गए हैं। अंक नीति को सफलतापूर्वक और निश्चित समय सीमा में लागू करने के लिए, शिक्षकों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को महत्वपूर्ण माना गया था। इसलिए, स्कूलों की सुविधा के लिए और परिणामों के संकलन में उनकी सहायता करने व किसी भी त्रुटि से बचने के लिए सीबीएसई की आईटी टीम द्वारा एक व्यापक और सुविधा संपन्न प्रणाली विकसित की गई थी। भारद्वाज ने कहा कि लगभग एक लाख छात्र सीबीएसई के अलावा अन्य बोर्ड से थे।

बेसिक स्कूलों में अगस्त तक सभी विद्यार्थियों को मिल जाएंगी पाठ्य पुस्तकें

बेसिक स्कूलों में अगस्त तक सभी विद्यार्थियों को मिल जाएंगी पाठ्य पुस्तकें


लखनऊ । बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अगस्त महीने में पाठ्यपुस्तकें वितरित हो जाएंगी। परिषदीय स्कूलों के 1.85 लाख विद्यार्थियों को अब तक 65 प्रतिशत किताबें का वितरण हो गया है। हालांकि पाठ्यपुस्तक वितरण में टेंडर प्रक्रिया के चलते तीन महीने का विलंब हो गया है। 

बेसिक शिक्षा विभाग के पाठ्य पुस्तक अधिकारी श्याम किशोर तिवारी के अनुसार शैक्षिक सत्र 2021-22 में कक्षा 1 से 8 तक के 1 करोड़ 85 लाख से अधिक छात्रों को पुस्तकों का वितरण किया जाना है। 65 प्रतिशत कितबें प्रकाशित कराकर स्कूलों को भेज दी गई है। जबकि शेष 35 प्रतिशत किताबें अगस्त तक स्कूलों में पह्यंच जाएँगी. उन्होंने बताया कि में शिक्षण कार्य बंद होने के कारण शिक्षकों को विद्यार्थियों के घर तक पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने की जिम्मेदारी दी है।

Friday, July 30, 2021

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का परिणाम घोषित

यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का परिणाम घोषित


■   upmsp.edu.in,    upresults.nic.in पर करें चेक


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10वीं में 99.52 फीसदी और 12वीं में 97.88 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण यूपी बोर्ड ने बिना परीक्षा के पहली बार रिजल्ट निकाला है। इस साल राज्य में कक्षा 10वीं, 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 56,06,278 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें 29,96,031 कक्षा 10वीं के और 26,10,247 कक्षा 12वीं के विद्यार्थी थे। 





Up Board 10th-12th Result : यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट की तिथि की घोषणा हो गई है। यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट साथ-साथ एक ही दिन जारी किया जाएगा।  31 जुलाई, शनिवार को 3:30 बजे यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित किए जाएंगे।


नतीजों की घोषणा के बाद स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in और upmsp.edu.in पर भी चेक कर सकेंगे। इस साल राज्य में कक्षा 10वीं, 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 56,03,813 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 29,94,312 कक्षा 12वीं के छात्र हैं और 26,09,501 कक्षा 10वीं के छात्र हैं।


गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष 10वीं 12वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं आयोजित हो पाई। वहीं परीक्षार्थियों को स्क्रूटनी का विकल्प भी इस बार नहीं मिलेगा। बोर्ड परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए माध्यमिक बोर्ड की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की भी दी गई है। ये परीक्षार्थी परिणाम घोषित होने के बाद संबंधित विद्यालय के माध्यम से आवेदन करेंगे। हालात सामान्य पर इनकी परीक्षा कराई जाएगी।


UPMSP UP Board 10th 12th Result 2021: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का परिणाम आज घोषित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के अध्यक्ष व शिक्षा निदेशक विनय कुमार पाण्डेय की ओर से शुक्रवार को देर शाम इस संबंध में सूचना जारी की गई। सूचना के अनुसार दोपहर 3:30 बजे परीक्षा परिणाम जारी किए जाएंगे। 


इस साल कोरोना वायरस की वजह से परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया गया था। वहीं परीक्षार्थियों को स्क्रूटनी का विकल्प भी इस बार नहीं मिलेगा। इस साल राज्य में कक्षा 10वीं, 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 56,03,813 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 29,94,312 कक्षा 12वीं के छात्र हैं और 26,09,501 कक्षा 10वीं के छात्र हैं।


■  इस फॅार्मेूले से तैयार किया गया है रिजल्ट

● - इस वर्ष हाईस्कूल (10वीं) का रिजल्ट 9वीं के 50% अंकों, 10वीं की प्री बोर्ड लिखित परीक्षा के 50% अंकों और 30% के आंतरिक मूल्यांकन में मिले वास्तविक अंकों को जोड़कर तैयार किया जाएगा। 

● - 12वीं का रिजल्ट हाईस्कूल के कुल अंकों के औसत का 50%, 11वीं के 40% और 12वीं प्री बोर्ड के 10% को जोड़कर तैयार किया जाएगा। 10वीं में आंतरिक मूल्यांकन व 12वीं में प्रैक्टिकल के वास्तविक अंक जोड़े जाएंगे।

● इस साल परीक्षार्थियों की मेरिट सूची नहीं जारी होगी। किसी परीक्षार्थी को लिखित परीक्षा में न्यूनतम पासिंग मार्क नहीं मिल पाए हैं लेकिन आंतरिक मूल्यांकन या प्रैक्टिकल में पास है तो उसे बिना किसी अंक के प्रमोट कर दिया जाएगा।

CBSE कक्षा 12 का रिजल्ट जारी, बिना परीक्षा के 99 फीसद से ज्यादा रहा 12वीं का परिणाम

CBSE कक्षा 12 का रिजल्ट जारी, देखें

CBSE: बिना परीक्षा के 99 फीसद से ज्यादा रहा 12वीं का परिणाम


नई दिल्ली: बच्चों के भविष्य से जुड़े अभिभावकों का संशय दूर करने से लेकर अदालत को संतुष्ट करने के बाद आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शुक्रवार को 12वीं कक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। इस साल भी मेरिट सूची जारी नहीं की गई है। न तो विषयवार मेरिट सूची आएगी, न ही किसी छात्र का मेरिट सर्टिफिकेट जारी होगा। बोर्ड मार्कशीट और सर्टिफिकेट एक साथ जारी करेगा।

सीबीएसई के मुताबिक इस वर्ष 14.30 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें 12 लाख से अधिक छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। उत्तीर्ण प्रतिशत 99.37 रहा है। लड़कियों का पास फीसद लड़कों के मुकाबले 0.54 फीसद ज्यादा है। हालांकि यह पिछले वर्ष के 5.46 के मुकाबले कम है। 99.67 फीसद लड़कियां और 99.13 फीसद लड़के उत्तीर्ण हुए हैं, जबकि ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। 

65,184 छात्रों का परिणाम फिलहाल जारी नहीं हुआ है। इनका परिणाम पांच अगस्त को घोषित होगा। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक 1060 स्कूलों के पास संदर्भ साल (रेफरेंस ईयर) का डाटा नहीं था। ऐसे में इन स्कूलों के छात्रों के परिणाम में फिलहाल ‘रिजल्ट लेटर’ लिख कर आएगा। बोर्ड ने 30-30-40 फामरूले पर परीक्षा परिणाम जारी किया है। इसमें 12वीं के 40 फीसद अंक, 11वीं व 10वीं के 30-30 फीसद अंक जोड़े गए हैं।

● मेरिट नहीं हुई जारी, एक साथ मिलेंगे मार्कशीट और सर्टिफिकेट
● परिणाम से संतुष्ट नहीं होने पर दोबारा दे सकेंगे परीक्षा
● पांच फीसद से ज्यादा छात्रों के 95% से अधिक अंक

70,004 यानी 5.37 फीसद छात्रों के 95 फीसद या उससे अधिक अंक आए हैं। वहीं 1,50,152 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। यानी 11.51 फीसद छात्र ऐसे हैं जिनके 90-95 फीसद के बीच अंक आए हैं। 90 फीसद अंकों की संख्या पिछले वर्ष की तरह ही है।




केंद्र सरकार का फैसला, मेडिकल दाखिले में अब OBC को 27 व आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को 10 फीसद आरक्षण

केंद्र सरकार का फैसला, मेडिकल दाखिले में अब OBC को 27 व आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को 10 फीसद आरक्षण


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मेडिकल शिक्षा की सभी स्नातक और स्नातकोत्तर की सीटों पर नामांकन के लिए केंद्रीय कोटे में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की खातिर 27 फीसद आरक्षण लागू करने का फैसला किया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर तबके (ईडब्ल्यूएस) के लिए भी 10 फीसद सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह आरक्षण इसी शैक्षणिक सत्र से लागू हो जाएगा। 


चूंकि, आरक्षण का यह प्रविधान केंद्रीय कोटे की सीटों के लिए किया जा रहा है, इसीलिए इसका लाभ सिर्फ केंद्रीय सूची में शामिल ओबीसी को ही मिल सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर इस अहम फैसले की जानकारी दी और इसे अभूतपूर्व बताया। यह आरक्षण मेडिकल शिक्षा के सभी एमबीबीएस, एमडी, एमएस, डिप्लोमा, बीडीएस, एमडीएस कोर्स में मिलेगा।


यूं तो यह कवायद लंबे अरसे से चल रही थी, लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी चुनाव से पहले इस घोषणा का राजनीतिक महत्व भी है। अभी कुछ दिन पहले ही कैबिनेट के विस्तार के बाद मोदी मंत्रिमंडल में ओबीसी मंत्रियों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। उसके बाद इस फैसले को तुरुप का पत्ता माना जा रहा है।


एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में ओबीसी मंत्रियों व सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर मेडिकल पाठ्यक्रम में ओबीसी आरक्षण लागू करने का आग्रह किया था। फैसले के तत्काल बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने भी ट्वीट कर इसका स्वागत किया।


● पीएम ने 26 जुलाई को केंद्रीय कोटे में आरक्षण का प्रविधान करने का निर्देश दिया था। मंत्रलय ने बुधवार को इसे लागू करने का एलान कर दिया।

● दूसरे राज्यों में मौजूद अच्छे मेडिकल कालेजों तक प्रतिभाशाली छात्रों की पढ़ाई सुनिश्चित कराने के लिए 1986 में केंद्रीय कोटे की व्यवस्था की गई थी। सभी मेडिकल कालेजों में स्नातक सीटों का 15 और स्नातकोत्तर सीटों का 50} कोटे में रखा गया था।

● उप्र, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव से पहले फैसला राजनीतिक रूप से अहम

● सिर्फ केंद्रीय सूची में शामिल ओबीसी को ही मिल सकेगा लाभ

● इससे केंद्रीय कोटे में स्नातक की सीटों पर 1,500 और स्नातकोत्तर की सीटों पर 2,500 छात्रों को ओबीसी कोटे से नामांकन का लाभ मिलेगा

● इसी तरह आर्थिक रूप से कमजोर तबके के 550 छात्र स्नातक और 1,000 छात्र स्नातकोत्तर कोर्स में नामांकन करा सकेंगे

● वर्ष 2014 में जहां देश में एमबीबीएस की 54,348 सीटें थी। यह 56 फीसद बढ़ोतरी के साथ वर्ष 2020 में 84,649 हो गई हैं

● स्नातकोत्तर की सीटें वर्ष 2014 में 30,191 से बढ़कर 2020 में 54,275 हो गई हैं, जो 80 फीसद की बढ़ोतरी है

● सात वर्षो में 179 नए मेडिकल कालेज खोले गए

एडेड माध्यमिक विद्यालयों में तबादले पर निदेशालय ने लगाई मुहर, सैकड़ों शिक्षक तबादले से बाहर

माध्यमिक : मानक पूरा न करने पर सैकड़ों शिक्षक तबादले से बाहर

प्रयागराज : मनचाहा तबादला चाहने वाले प्रदेश के सैकड़ों अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तमाम प्रधानाचार्यो व शिक्षकों की इच्छा पूरी नहीं हो सकेगी। मानक पूरा न करने पर एक हजार से अधिक शिक्षकों व प्रधानाचार्यो के आवेदन छंटनी में बाहर हो गए हैं।

● एडेड माध्यमिक विद्यालयों में तबादले पर निदेशालय ने लगाई मुहर

● लखनऊ में तबादले को दिया जा रहा अंतिम रूप, स्थानांतरण जल्द

 जिला और मंडल स्तर पर स्क्रीनिंग और संस्तुति के बाद निदेशालय में आए आवेदनों को संस्तुति के साथ अंतिम रूप देने के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। शासन में विचार-विमर्श और रिक्तियों के अनुरूप दो-तीन दिन के भीतर तबादला सूची जारी किए जाने की तैयारी चल रही है।


प्रदेश में 4500 से अधिक अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। इनमें नियुक्त प्रधानाचार्यो एवं शिक्षकों का पहली बार आनलाइन तबादला किया जा रहा है। मनचाहे तबादले के लिए उन स्कूलों की प्रबंध समिति की संस्तुति जरूरी की गई थी, जहां से प्रधानाचार्य व शिक्षक तबादला चाह रहे थे। तबादले के लिए आनलाइन करीब सात हजार रजिस्ट्रेशन तो किए गए, लेकिन आवेदन करने वालों की संख्या महज दो हजार के करीब ही रही। 


आवेदन कम होने की वजह मनचाहे जिले में रिक्त पद न होना प्रमुख रहा। तबादले के लिए मिले आवेदन परीक्षण करने के बाद संस्तुति के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) से होकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय भेजे गए। इस बीच हजार से अधिक आवेदन तबादले के मानक पर खरे न उतरने पर बाहर कर दिए गए। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा डा.महेंद्र देव ने बताया कि तबादलों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

69000 शिक्षक भर्ती: चौथी काउंसलिंग कराने के लिए सौंपा ज्ञापन, एक हजार पद रिक्त

मांग : 69000 शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों के लिए जारी हो चौथी सूची

69000 शिक्षक भर्ती: चौथी काउंसलिंग कराने के लिए सौंपा ज्ञापन, एक हजार पद रिक्त


69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चौथी काउंसलिंग कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा परिषद के उप सचिव को ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों का कहना था कि तीसरे चरण की काउंसलिंग के पश्चात लगभग एक हजार पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों को भरने केलिए जल्द से जल्द चतुर्थ काउंसलिंग कराई जाए।

प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में तीन बार काउंसलिंग हो चुकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके बाद भी अभी लगभग एक हजार पद रिक्त हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा मंत्री लगातार कहते रहे हैं कि अंतिम पद भरने तक काउंसलिंग कराई जाएगी। अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा परिषद के उपसचिव को ज्ञापन देकर तत्काल चतुर्थ काउंसलिंग कराने की मांग की है।


69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चौथी काउंसलिंग कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा परिषद के उप सचिव को ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों का कहना था कि तीसरे चरण की काउंसलिंग के पश्चात लगभग एक हजार पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों को भरने केलिए जल्द से जल्द चतुर्थ काउंसलिंग कराई जाए।


प्राथमिक विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में तीन बार काउंसलिंग हो चुकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके बाद भी अभी लगभग एक हजार पद रिक्त हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा मंत्री लगातार कहते रहे हैं कि अंतिम पद भरने तक काउंसलिंग कराई जाएगी। अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा परिषद के उपसचिव को ज्ञापन देकर तत्काल चतुर्थ काउंसलिंग कराने की मांग की है।

सरकारी स्कूलों में भी होगी प्ले स्कूल जैसी पढ़ाई : पीएम नरेंद्र मोदी

सरकारी स्कूलों में भी होगी प्ले स्कूल जैसी पढ़ाई : पीएम नरेंद्र मोदी

नई शिक्षा नीति से जुड़ी 10 नई पहले लांच, देखिये कौन? 


नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नीति से जुड़ी 10 नई पहल लांच कीं। इनमें स्कूली बच्चों से जुड़ी पहल विद्या प्रवेश योजना भी है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में भी अब प्ले स्कूलों जैसी पढ़ाई होगी। यानी पहली कक्षा में प्रवेश से पहले बच्चों को तीन महीने का एक खास कोर्स कराया जाएगा। इसमें उन्हें हंसते-खेलते हुए पहली कक्षा से पहले जरूरी अक्षर और संख्या ज्ञान दिया जाएगा।


मोदी ने नीति को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटे लोगों का आभार जताया और कहा, ‘राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बड़े फैक्टरों में से एक है, जिसमें भारत के भाग्य को बदलने का सामथ्र्य है। यही वजह है कि इसे दबाव से मुक्त रखा गया है।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं की सोच के अनुरूप है। 21वीं सदी के युवाओं को एक्सपोजर चाहिए। वह शिक्षा के पुराने बंधनों और ¨पजरों से मुक्ती चाहता है।


 नीति उन्हें यह भरोसा दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके और उनके हौसलों के साथ है।’ प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एकेडमिक क्रेडिट आफ बैंक स्कीम की भी शुरुआत की। इसमें कोई भी छात्र कभी भी बीच में पढ़ाई छोड़ सकता है और फिर शुरू कर सकता है। प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों के लिए पहली से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सांकेतिक भाषा में करने की भी शुरुआत की।


■  पीएम मोदी ने ये कीं प्रमुख पहल

निष्ठा 2.0 : प्राइमरी के साथ माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को भी आधुनिक तरीके से पढ़ाई के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

सफल : सीबीएसई स्कूलों में तीसरी, पांचवीं और आठवीं में आकलन अब सीखने की क्षमता के आधार पर होगा। परीक्षा कांसेप्ट और थिंकिंग बेस होगी।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) फार आल : इसके तहत सभी स्टेज पर छात्रों को अब कम से कम चार घंटे का एआइ का कोर्स करना होगा।

उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण : उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी कोर्स भी शुरू होंगे। इसके तहत 150 संस्थानों ने अपने यहां विदेशी सेंटर खोले हैं।

नेशनल डिजिटल एजुकेशन आर्किटेक्चर : आनलाइन पढ़ाई के विकास के साथ इस बात पर भी जोर है कि इसमें जो भी कंटेंट हो वह बेहतर हो।

नेशनल एजुकेशन टेक्नोलाजी फोरम : इसके जरिये सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को तकनीक मदद मुहैया कराई जाएगी।

अभ्यर्थियों ने घेरा भाजपा कार्यालय, 69000 भर्ती में 22 हजार पद जोडने की मांग

अभ्यर्थियों ने घेरा भाजपा कार्यालय, 69000 भर्ती में 22 हजार पद जोडने की मांग



लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में 22 हजार पद जोड़ने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। बुधवार को बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने के बाद बृहस्पतिवार को नाराज अभ्यर्थियों ने भाजपा कार्यालय का घेराव किया। 




प्रदर्शनकारियों को कार्यालय के अंदर जाने से पुलिस ने रोका तो अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया। देर तक चली नारेबाजी के बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को बसों से ईंको गार्डन ले जाकर छोड़ दिया। मांग को लेकर अभ्यर्थी बीते डेढ़ माह से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को अलग-अलग गुट बनाकर काफी संख्या में अभ्यर्थी भाजपा कार्यालय के बाहर एकत्र हुए ओर नारेबाजी शुरू कर दी। 


हाथों में तख्तियां लेकर कई अभ्यर्थी कार्यालय के अंदर जाने की कोशिश करने लगे जिन्हें पुलिस ने रोका तो नोकझोंक शुरू हो गई। प्रदर्शनकारी काफी देर तक नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इस पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में लाद कर ईको गार्डन ले जाकर छोड़ दिया। 


अभ्यर्थियों का आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग की अनदेखी से भर्तियां नहीं हो पा रही हैं। प्रदर्शन में शामिल विवेक ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पहले हुई 68500 शिक्षक भर्ती में 22 हजार से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि इन्हीं 22 हजार पदों को शिक्षक भर्ती में जोड़ा जाए। इससे अभ्यर्थियों को उनका हक मिल सके।

CBSE RESULT : 31 जुलाई को आ सकता है सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट

CBSE RESULT : 31 जुलाई को आ सकता है सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट

स्कूलों के अनुसार 31 जुलाई को रिजल्ट आ सकता है। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज की तरफ से इसको लेकर स्कूलों को मेल भी भेजा गया है। स्कूलों के अनुसार इस मेल के अतिरिक्त रिजल्ट जारी होने की अन्य किसी तिथि की सूचना नहीं है।


सीबीएसई के कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 31 जुलाई को जारी हो सकता है। स्कूलों में बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक की तरफ से जो मेल आई है उससे तो यही स्थिति साफ होती है। वहीं परीक्षा परिणाम जारी करने के एक दिन पहले शाम को बोर्ड दोबारा सूचना भी दे सकता है। इस मेल के बाद स्कूल रिजल्ट जारी होने के इंतजार में हैं।

पिछले कुछ समय से सीबीएसई के रिजल्ट को लेकर काफी अफवाहें उड़ रही हैं। गुरुवार को भी सुबह से रिजल्ट जारी होने की सूचना वायरल हुई। हालांकि कई स्कूल प्रशासन ने उन सूचनाओं को अफवाह करार दिया। स्कूलों के अनुसार 31 जुलाई को रिजल्ट आ सकता है। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज की तरफ से इसको लेकर स्कूलों को मेल भी भेजा गया है। स्कूलों के अनुसार इस मेल के अतिरिक्त रिजल्ट जारी होने की अन्य किसी तिथि की सूचना नहीं है। स्कूलों के अुनसार सॉफ्टवेयर द्वारा तैयार किए जा रहे रिजल्ट की वजह से इसे जारी करने में देरी हो रही है।

अंक घटाया या बढ़ाया तो देना होगा जवाब
हाईस्कूल के छात्रों के अंकों का मॉडरेशन काफी पहले कर दिया गया था। लेकिन कुछ गड़बड़ियां सामने आने के बाद बोर्ड ने इसका दोबारा गत 25 जुलाई तक मॉडरेशन कराया। जिस वजह से रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया में देरी हुई। वहीं स्कूलो ने बताया कि इस दौरान बोर्ड की क्षेत्रीय अरोड़ा ने कुछ स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूलों द्वारा तैयार किए जा रहे रिजल्ट और उससे संबंधित प्रपत्रों को देखा।

वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या ऋचा खन्ना ने बताया कि मॉडरेशन के लिए बोर्ड ने रेंज सेट कर यह अधिकार दिया था कि उसके अनुसार अंक घटा व बढ़ा सकते थे। लेकिन इसके लिए रिमार्क देना भी अनिवार्य है। छात्र के अंक क्यों बढ़ा रहे और क्यों घटा रहे इससे संबंधित प्रपत्र सहित जवाब भी दिया गया। ताकि भविष्य में कोई चुनौती दे तो उसका प्रूफ तैयार रहे।

Thursday, July 29, 2021

महराजगंज : 31 मार्च 2021 की प्रामाणिक छात्र संख्या 30 जुलाई तक प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं कराने वाले विद्यालयों के जुलाई माह का वेतन अवरुद्ध करने के सम्बन्ध में बीएसए का निर्देश जारी

महराजगंज : 31 मार्च 2021 की प्रामाणिक छात्र-छात्राओं की संख्या 30 जुलाई तक प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड नहीं कराने वाले विद्यालयों के जुलाई माह का वेतन तत्काल प्रभाव से अवरुद्ध करने के सम्बन्ध में बीएसए का निर्देश जारी।




विद्यालय प्रांगण के बाहर ही मोहल्ला क्लास चलाने एवं शनिवार लॉकडाउन में उपस्थिति से मुक्त करने हेतु पू0मा0शि0 संघ का ज्ञापन

विद्यालय प्रांगण के बाहर ही मोहल्ला क्लास चलाने एवं शनिवार लॉकडाउन में उपस्थिति से मुक्त करने हेतु पू0मा0शि0 संघ का ज्ञापन



68500 शिक्षक भर्ती : MRC शिक्षकों को 2 साल बाद भी मनपसंद तैनाती नहीं, कोर्ट ने दोबारा जिला आवंटन करने के दिए थे निर्देश

68500 शिक्षक भर्ती  :MRC शिक्षकों को 2 साल बाद भी मनपसंद तैनाती नहीं, कोर्ट ने दोबारा जिला आवंटन करने के दिए थे निर्देश


प्रयागराज: परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित मेरीटोरियस रिजर्व कैटेगरी ( एमआरसी ) कि शिक्षकों को 2 साल बाद भी मनपसंद ले में तैनात ही नहीं मिल सकी है। 29 अगस्त 2019 को हाईकोर्ट ने 68500 शिक्षक भर्ती की जिला आवंटन की यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि यह आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है।


कोर्ट ने एमआरसी शिक्षकों को अपना प्रत्यावेदन देने और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को नए शैक्षिक सत्र 2020-21 से उनको दो बारा जिला आवंटन करने के निर्देश दिए थे। 2,000 से अधिक एमआरसी शिक्षकों ने प्रत्यावेदन भी दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ। कोर्ट में मुख्य पक्षकार बादल मलिक ने बताया कि उक्त आदेश का अनुपालन ना होने पर करीबन 1300 एमआरसी शिक्षकों ने अवमानना याचिका आए की। लेकिन अब तक जिला आवंटन नहीं हो सका है।


अब हार कर आदेश का अनुपालन कराने के लिए इन शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को अनुरोध पत्र भेजो अभियान चलाया है। चैन पाल चौधरी विवेक यादव गौरव कुंतल आलोक आर्य जाट सचिन यादव आशीष मलिक अनिमेष अशोक नवीन अफजाल सुरेंद्र अंकित साहू अरुण कुमार अंकित कुशवाहा पंकज यादव रजनीश मौर्य जयप्रकाश गौतम आसिफ सैफी अंकित मावी रोहित राणा सचिन आकांक्षा प्रेरणा वर्मा सपना नविता रश्मि पूजा आशा दीपक ईश्वर चंद आदि दोबारा जिला आवंटन के लिए सीएमओ अधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं।


क्यों दोबारा जिला आवंटन पर अड़े।

68500 भर्ती से सरकार ने नियम लागू कर दिया था कि इन शिक्षकों का दोबारा अंतर्जनपदीय तबादला नहीं होगा। काफी संख्या में शिक्षकों को उनके धर्म से सैकड़ों किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में नौकरी मिली है। भविष्य में अपने जिले में वापसी की उम्मीद थी नहीं। इसीलिए एमआरसी अभ्यर दोबारा जिला आवंटन की मांग कर रहे हैं ताकि अपने गृह जनपद या आसपास के जिले में पहुंच जाएं।

69000 में रखा ध्यान तो हमें किस बात की सजा


सरकार ने 9 जुलाई 2021 को साफ किया है कि 69000 शिक्षक भर्ती में एमआरसी अभ्यर्थियों को उनके गुणाकं, श्रेणी, जनपद व वरीयता के विकल्प के आधार पर सर्वप्रथम अनारक्षित श्रेणी के रिक्त पदों के सापेक्ष ऐसे जिला आवंटन किया गया। । 68500 में चयनित एमआरसी अभ्यर्थी बादल मलिक का कहना है कि जब 69000 भर्ती में एमआरसी का ध्यान रखा गया है तो हमनें क्या गलती की थी। 2 साल से 2000 से अधिक शिक्षक परेशान हैं।

अलर्ट मोड में रहा गोरखपुर का बेसिक शिक्षा विभाग, DGSE रहे विजय किरण आनंद बने नवागत जिलाधिकारी

अलर्ट मोड में रहा गोरखपुर का बेसिक शिक्षा विभाग,  DGSE रहे विजय किरण आनंद बने नवागत जिलाधिकारी


गोरखपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के मुखिया रहे व जनपद के नवागत जिलाधिकारी विजय किरण आनंद के बुधवार को कार्यभार ग्रहण करने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक सतर्क हो गए। शिक्षक समय से पहले स्कूल पहुंच गए। कर्मचारी पटल का लंबित कार्य निपटाते नजर आए।


आज सीडीओ कल डीएम करेंगे विभागीय कार्यों की समीक्षा: बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा का सिलसिला गुरुवार से शुरू हो रहा है। पहले दिन सीडीओ इंद्रजीत सिंह जिला समन्वयकों की मौजूदगी में विभागीय कार्यों की समीक्षा करेंगे वहीं दूसरे दिन शुक्रवार को डीएम विजय किरण आनंद विभागीय कार्यों का जायजा लेंगे। इसको लेकर बीएसए आरके सिंह ने मातहतों के साथ बैठक की।

69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिक शिक्षा मंत्री का आवास, 22 हजार पद जोड़ने की मांग

69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिक शिक्षा मंत्री का आवास, 22 हजार पद जोड़ने की मांग


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षक भर्ती में 22 हजार पद जोड़ने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने बुधवार को डॉलीवाग में बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया। अचानक पहुंचे अभ्यर्थियों के प्रदर्शन से परिसर में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने लगभग दो घंटे तक प्रदर्शनकारियों को मानने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में बैठाना शुरू किया तो कुछ रोने लगे। पुलिस नें सभी को हिरासत में लेकर इको गार्डन पहुंचाया दिया।


 गौरतलब हैं कि शिक्षक भर्ती में 22 हजार पद और बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी मुख्यमंत्री आवास, विधान भवन, शिक्षा निदेशालय से लेकर ईको गार्डन तक बीते डेढ़ माह से प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार सवेरे अचानक बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के सरकारी आवास पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आवास परिसर से बाहर कर गेट बंद कर किया। तब वे सड़क पर बैठ कर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने दो दिन में वार्ता कराने का आश्वासन देकर समझाने का प्रयास किया। पर, बे मंत्री से मुलाकात कराने पर अड़ गए। इसके बाद पुलिस ने सभी को हटाना शुरू किया तो अफरातफरी मच गई। 


पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। फिर ईको गार्डन पहुंचा दिया। प्रदर्शनकारियों में शामिल विवेक ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पहले हुए 68,500 शिक्षक भर्ती में 22 हजार से अधिक सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि इन्हीं 22 हजार पदों को 69 हजार शिक्षक भर्ती में जोड़ दिया जाए। इससे जरूरतमंद अभ्यर्थियों को उनका हक और रोजगार मिल जाएगा।

यूपी : परिषदीय शिक्षक दंपत्तियों का स्थानांतरण / तैनाती एक ही ब्लॉक में किये जाने को लेकर विधायक ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र।

यूपी : परिषदीय शिक्षक दंपत्तियों का स्थानांतरण / तैनाती एक ही ब्लॉक में किये जाने को लेकर विधायक ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र।


 


Wednesday, July 28, 2021

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों लिए जेम पोर्टल से खरीदा जाएगा स्मार्ट फोन

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों लिए जेम पोर्टल से खरीदा जाएगा स्मार्ट फोन


लखनऊ। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देने के लिए राज्य पोषण मिशन से हो रही स्मार्टफोन की खरीद टेंडर में हुए विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने इसकी खरीद जेम पोर्टल से करने का निर्णय लिया है। सरकार ने 9,444 रुपये की दर से 1 लाख 23 हजार 398 मोबाइल फोन खरीद के लिए 116,48 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति भी प्रदान कर दी है।

दरअसल, अनुपूरक पोषाहार के वितरण में अनाज की खपत का सही आकलन करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पोषण ट्रैकर एप का इस्तेमाल करने के आदेश दिए थे। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन दिए जाने थे ।


तकनीकी बिड से बाहर हुई एक मोबाइल कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया पर आपत्ति जता दी थी। इस मामले की शिकायत पीएमओ और मुख्यमंत्री कार्यालय से भी की थी। महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री स्वाति सिंह ने भी प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया रोकने और नए सिरे से टेंडर निकालने को कहा था, लेकिन विभाग ने उनके आदेश को दरकिनार करते हुए वित्तीय बिड भी खोल दी थी। 

वहीं, मोबाइल कंपनी ने इस मामले में कोर्ट की शरण ले ली थी। मामला इतना उलझ गया है कि उस टेंडर से अब मोबाइल फोन की खरीद जल्दी संभव नहीं थी। इसलिए अब सरकार ने मोबाइल फोन जेम पोर्टल से खरीदने का निर्णय किया है। बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने इसके आदेश भी सोमवार को जारी कर दिए। 

शिक्षकों को नियुक्ति पत्र तो मिला अब विद्यालय आवंटन का इंतजार, अंतर्जनपदीय शिक्षकों को भी विद्यालय आवंटन का इंतजार

शिक्षकों को नियुक्ति पत्र तो मिला अब विद्यालय आवंटन का इंतजार, अंतर्जनपदीय शिक्षकों को भी विद्यालय आवंटन का इंतजार


69000 शिक्षक भर्ती के तहत चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अब विद्यालय में कार्यभार संभालने का इंतजार है। प्रदेश भर के छह हजार से ज्यादा शिक्षकों को 23 जुलाई को नियुक्ति पत्र मिल चुका है, लेकिन अब वह विद्यालय आवंटित होने का इंतजार कर रहे हैं। 

विद्यालय आवंटन के पहले नवनियुक्त शिक्षकों को मेडिकल जांच क राकर प्रमाण पत्र विभाग में जमा करना था। अंतर जनपदीय स्थानांतरण के तहत डिमोशन लेकर आए शिक्षक व पारस्परिक स्थानांतरण के तहत आये शिक्षकों भी अब तब विद्यालय आवंटन का इंतजार है।

अब सेना में भी भर्ती हो सकेंगे मदरसा छात्र, केंद्र सरकार व अन्य राज्यों की भर्तियों में भी कर सकेंगे आवेदन

अब सेना में भी भर्ती हो सकेंगे मदरसा छात्र,  केंद्र सरकार व अन्य राज्यों की भर्तियों में भी कर सकेंगे आवेदन


उप्र मदरसा शिक्षा परिषद से पढ़ाई करने वाले छात्र अब सेना सहित विभिन्न सेवाओं में भर्ती हो सकेंगे। साथ ही वे अब विदेश में भी उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला पा सकेंगे। यह इसलिए संभव होगा, क्योंकि यूपी मदरसा बोर्ड अब भारतीय विद्यालय शिक्षा बोर्ड मंडल (कोब्से) में पंजीकरण कराने जा रहा है। इसमें पंजीकरण न होने के कारण अभी तक मदरसा बोर्ड के छात्र सेना के साथ ही केंद्र व अन्य राज्य सरकारों की नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे। 

पंजीकरण के बाद मदरसा बोर्ड को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधानिकता मिल जाएगी। मदरसा बोर्ड के छात्रों का दायरा भी बढ़ जाएगा और वे किसी भी क्षेत्र में अपना भविष्य संवार सकेंगे।


कोब्से भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र संगठन है। राज्यों के स्कूल शिक्षा बोर्ड इससे संबद्ध हैं। कोब्से को भारत सरकार द्वारा वर्ष 1979 से रजिस्टर्ड संगठन के रूप में मान्यता दी गई है। यह हर प्रदेश के अधिकृत शिक्षा बोर्ड को अपने यहां पंजीकृत करता है। 

कोब्से में पंजीकरण होने से मदरसा बोर्ड के छात्र-छात्रओं को केंद्र व अन्य राज्य सरकारों की नौकरियों के आवेदन में आसानी होगी। विधान मंडल से पारित उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद विधेयक 2004 के अधीन मदरसा बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में हुआ था। प्रदेश सरकार ने अशासकीय अरबी और फारसी मान्यता प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 बनाई। इससे प्रदेश में मदरसों का संचालन एवं प्रबंधन होता है।

यह मिलेगा लाभ

● केंद्र सरकार व अन्य राज्यों की भर्तियों में कर सकेंगे आवेदन

● सेना व पैरा मिलिट्री फोर्स की भर्ती में भी खुलेगी राह

● मदरसा बोर्ड की मार्कशीट व सर्टिफिकेट का सत्यापन होगा आसान

● बोर्ड को आल इंडिया स्तर की मिल जाएगी वैद्यता

● खाड़ी देशों में भी पढ़ाई के लिए खुल जाएंगे रास्ते

डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर चुके प्रशिक्षित प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे

डीएलएड प्रशिक्षण पूरा कर चुके प्रशिक्षित प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे


प्रदेश के सरकारी एवं निजी डीएलएड कॉलेजों से डीएलएड 2017 बैच का प्रशिक्षण 2019 में पूूूूरा कर चुके प्रशिक्षुओं को अभी तक सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से प्रमाण पत्र नहीं मिला है। डीएलएड प्रशिक्षितों का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा करने के दो वर्ष बीत जाने के बाद सरकार नई शिक्षक भर्ती के नाम पर चुप्पी साधे है, इस बारे में सरकार का रवैया निराशाजनक है।


डीएलएड प्रशिक्षित रोजगार के लिए जब निजी विद्यालयों अथवा दूसरे राज्यों में प्रयास करते हैं तो उन्हें अंकपत्र के साथ प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। प्रशिक्षितों का कहना है कि डीएलएड का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी परीक्षा नियामक प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहा। निजी डीएलएड कॉलेज वसूली के चक्कर में अंकपत्र भी नहीं दे रहे। डीएलएड 2017 के प्रशिक्षितों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी से 15 दिन के भीतर प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है। मांग करने वालो में पंकज मिश्रा, राहुल यादव,विनय प्रताप, आशीर्वाद, वसीम आदि रहे।


डीएलएड 2018 बैच की डिग्री जारी, 2017 वाले कर रहे इंतजार

 प्रयागराज : दो वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम डीएलएड के 2017 बैच के करीब 2.15 लाख प्रशिक्षित अभ्यर्थी अंकपत्र (मार्कशीट) लेने के बाद डेढ़ साल से प्रमाण पत्र (डिग्री) मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनका प्रशिक्षण वर्ष 2019 में पूरा हो चुका है, लेकिन उन्हें प्रमाण पत्र अब तक नहीं मिला है। इसके विपरीत उनके बाद के बैच 2018 के अभ्यर्थियों को अंकपत्र और प्रमाण पत्र जारी हो चुका है। इन प्रशिक्षितों ने प्रमाण पत्र जल्द दिए जाने की मांग परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) सचिव से की है।

2017 बैच के अभ्यर्थी राहुल यादव, पंकज मिश्र व विनय प्रताप ने बताया कि उनके बैच का प्रशिक्षण पूरा हुए दो साल हो रहे हैं। प्रशिक्षित लगातार सरकार से नई शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी नई भर्ती नहीं निकली है। इसे लेकर आशीर्वाद व वसीम आदि सहित अन्य प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने सचिव परीक्षा नियामक को मंगलवार को ज्ञापन दिया।

उरई : शिक्षक से रिश्वत लेते वित्त एवं लेखा (बेसिक) के बाबू को एंटी करप्शन ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार

उरई : शिक्षक से रिश्वत लेते वित्त एवं लेखा (बेसिक) के बाबू को एंटी करप्शन ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार


उरई : बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिपिक को एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। उसने एक शिक्षक के बकाया वेतन भुगतान के बदले रिश्वत मांगी थी। पीड़ित की शिकायत पर जाल बिछाकर आरोपित को धर लिया गया। कोतवाली में आरोपित से पूछताछ की जा रही है।


कुठौंद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भदेख में सहायक अध्यापक ओम जी राना का फरवरी व मार्च का वेतन रुका है। उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय को प्रार्थनापत्र देकर बकाया वेतन भुगतान मांगा था, लेकिन कार्यालय से उनकी फाइल आगे नही बढ़ रही थी। उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लिपिक विनय कुमार से फाइल कंपलीट कर वेतन दिलवाने की मांग की तो उसने 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी। रुपये न देने पर परेशान किया जा रहा था। इस पर उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन की झांसी इकाई में शिकायत की। इसके बाद टीम ने शिक्षक को लिपिक विनय के पास भेजा। विनय ने जैसे ही केमिकल लगाकर भेजे गए 10 हजार रुपये लिए तो टीम ने कार्यालय में ही उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद बीएसए कार्यालय में सनसनी फैल गई। आरोपित को कोतवाली लाया गया।

दस्तावेजों की पड़ताल के लिए टीम दोबारा बीएसए कार्यालय पहुंची और वित्त एवं लेखाधिकारी से भी पूछताछ की। एंटी करप्शन सेल झांसी यूनिट के इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र ने बताया कि पीड़ित शिक्षक की शिकायत पर आरोपित विनय कुमार को पकड़ा गया है। मुकदमा दर्ज कराकर आरोपित को कोतवाली पुलिस के सिपुर्द किया गया है।


उरई : वेतन समायोजन के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले बाबू विनय कुमार के खिलाफ एंटी करप्शन की टीम ने करीब चार घंटे कवायद की। सब कुछ तय होने के बाद उसे पकड़ा गया। रकम हाथ में थी लिहाजा अपने सफाई में कहने के लिए उसके बाद कुछ नहीं था। अपराधी की तरह गाड़ी में डालने के बाद उसे कोतवाली लाया गया।

एंटी करप्शन की टीम में प्रभारी निरीक्षक प्रेम चंद्र समेत कुल नौ सदस्य थे, लेकिन सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़े जाने के लिए सरकारी गवाह भी जरूरी थे। लिहाजा नियमानुसार एंटी करप्शन की टीम ने डीएम कार्यालय में ऑपरेशन भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी दी। जिसके बाद कर्मचारी कलेक्ट्रेट के टीम में शामिल किए गए। इस तरह कुल 11 सदस्यीय टीम दबिश लेने के लिए बीएस कार्यालय पहुंची। इससे पहले ओम जी राना बाबू के पास पहुंचे। उन्होंने दस हजार रुपये बाबू के दिए।

 नोटों में विशेष केमिकल लगा हुआ था। जिससे बाबू को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा सके। अपने लालच के चलते विनय कुमार वर्मा खुद फंस गया। उसे पकड़ने वाली टीम में एंटी करप्शन यूनिट के प्रभारी निरीक्षक प्रेम कुमार , निरीक्षक सुरेंद्र सिंह, अमरीश कुमार यादव, उप निरीक्षक मोहम्मद इसरार, मुख्य आरक्षी क्रांति कुमार पांडेय, राजबहादुर सिंह, सूर्येंद्र प्रताप सिंह, इरशाद खान, निरंजन सिंह आदि शामिल थे। गिरफ्तार बाबू को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जा सकता है। वहीं शिकायतकर्ता के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं।

पैरवी करने वाले भी जुटे : रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार बाबू की उरई में भी अच्छी जान पहचान है, लिहाजा उसकी पैरवी के लिए कोतवाली में तमाम लोग आए, लेकिन बचाव कोई रास्ता नहीं होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।


उरई : कुठौंद में भदेख गांव के प्रथामिक विद्यालय में तैनात ओमजी राना महोबा से स्थानांतरित होकर आए थे, लेकिन दो माह का वेतन उनका लटका हुआ था। रिश्वत नहीं दे पाने की वजह से वेतन नहीं बनाया जा रहा था। उसने एंटी करप्शन यूनिट में सीधे शिकायत नहीं की बल्कि संगठन में बताया। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय कुमार पटेल ने बताया कि संगठन द्वारा पूरे प्रदेश में जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। ओमजी राना ने पहले संगठन के लीगल सेल में शिकायत की। संगठन के प्रयास से 183वां भ्रष्ट कर्मचारी गिरफ्तार कराया गया है। जनपद जालौन समेत बुंदेलखंड के 15 रिश्वतखोर कर्मचारी व अधिकारी अभी रडार पर हैं।

सप्ताह में तीन दिन आता था कार्यालय
 उरई : दस हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए बाबू के खिलाफ शिकायतों की फेहरिस्त बेहद लंबी है। हालांकि एंटी करप्शन सेल में सिर्फ एक शिक्षक ने ही शिकायत की। जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। रिश्वत के रुपयों के अलावा वेतन समायोजन से संबंधित पत्रवलीं एंटी करप्शन की टीम ने साक्ष्य के तौर पर सील कीं हैं।

बीएसएस कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी शाखा में तैनात बाबू विनय कुमार वर्मा एक साल पहले ही उरई में संबद्ध हुआ था। जिसे वेतन संबंधी कार्य सौपें गए थे। झांसी के मंडलीय कार्यालय में भी वह संबद्ध है। इसलिये सप्ताह में तीन दिन ही वह उरई आता था। आरोप है कि दूसरे जनपद से ट्रांसफर होकर आये दर्जनों शिक्षकों से उसने वेतन समायोजन करने में घूस ली। 

शिक्षक ओमजी राणा ने उत्पीड़न की पराकाष्ठा होने के बाद एंटी करप्शन यूनिट में शिकायत करने का मन बनाया गया। अब विनय कुमार सलाखों के पीछे कई और पीड़ित अब शिकायत के लिए आगे आ सकते हैं। एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक अमरीश कुमार यादव के अनुसार विनय कुमार द्वारा पैसे लेकर वेतन के समायोजन करने से संबंधित पत्रवलियां कब्जे में लेकर सील कर दी गईं हैं। जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।

भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी विद्यालय

भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी विद्यालय


शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि वह सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए तेजी से काम कर रहा है। भारतनेट कार्यक्रम के तहत यह मुहिम शुरू की गई है जिसमें वर्ष 2023 तक सभी गांवों को फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी स्कूल, अब तक 1.19 लाख स्कूल जुड़ेआनलाइन शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम बनाने की मुहिम, देश में करीब 10 लाख सरकारी स्कूल


नई दिल्ली । आनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने सहित सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लास रूम में तब्दील करने की मुहिम के बीच केंद्र सरकार ने देश भर के सभी सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से लैस करने का फैसला किया है। अब तक 1.19 लाख सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ दिया गया है। बाकी सभी स्कूलों को भी उस गांव तक फाइबर नेटवर्क पहुंचते ही जोड़ दिया जाएगा।


स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने की यह मुहिम इसलिए भी तेज हुई है, क्योंकि इसके जरिये विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों को दूसरे स्कूलों से आनलाइन जोड़ा जा सकेगा। स्कूली छात्रों को इससे फायदा होगा। इसके साथ ही स्मार्ट क्लास रूम के जरिये छात्र देश-दुनिया के बेहतरीन शिक्षकों के वीडियो देख सकेंगे और ऐसे पाठों को पढ़ सकेंगे, जिन्हें समझने के लिए उन्हें ट्यूशन या कोचिंग की मदद लेनी पड़ती है जो ग्रामीण और दूर दराज के क्षेत्रों में आसानी से नहीं मिल पाती है।


मौजूदा समय में देश में कुल 15 लाख स्कूल हैं। इनमें से करीब 10 लाख सरकारी स्कूल हैं जो अभी तक इंटरनेट की सुविधा से वंचित थे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह हाईटेक सुविधाओं से लैस करने पर जोर दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में संसद को दी गई एक जानकारी में बताया कि वह सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए तेजी से काम कर रहा है। भारतनेट कार्यक्रम के तहत यह मुहिम शुरू की गई है जिसमें वर्ष 2023 तक सभी गांवों को फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


उप्र के 4042, झारखंड के 10891 तथा बिहार के 1492 स्कूलों में पहुंचा इंटरनेट

फिलहाल मंत्रालय ने, जो गांव फाइबर कनेक्टिविटी से जुड़ गए हैं, वहां के सरकारी स्कूलों को इंटरनेट सुविधा से लैस करने का काम शुरू किया है। साथ ही आगे भी जैसे-जैसे गांवों में यह लाइन पहुंचेगी, वहां के सरकारी दफ्तरों से लेकर स्कूलों को भी इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस मुहिम के तहत 1.19 लाख स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है। इनमें उत्तर प्रदेश के 4042 स्कूल, झारखंड के 10891, गुजरात के 23434, बिहार के 1492, बंगाल के 8055, दिल्ली के 2440 तथा मध्य प्रदेश के 3792 स्कूल शामिल हैं।

Tuesday, July 27, 2021

यूपी : उप मुख्यमंत्री ने कहा, अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी होगा बोर्ड परीक्षा परिणाम

यूपी : उप मुख्यमंत्री ने कहा, अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी होगा बोर्ड परीक्षा परिणाम

प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा विभाग की हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 29.94 हजार से अधिक और इंटरमीडिएट में 26.10 हजार से अधिक परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा के उत्तीर्ण किया जाना है।


माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड-2021 का परिणाम अब अगस्त के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नए पैटर्न पर परिणाम जारी करने से पहले मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए समय मांगा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा विभाग की हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 29.94 हजार से अधिक और इंटरमीडिएट में 26.10 हजार से अधिक परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा के उत्तीर्ण किया जाना है।

बोर्ड ने 10वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों को कक्षा 9वीं के 50 प्रतिशत और कक्षा 10वीं की प्री-बोर्ड के 50 प्रतिशत अंक देकर उत्तीर्ण करने की गाइडलाइन तैयार की है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को कक्षा 10वीं के 50 प्रतिशत, कक्षा 11वीं के 40 और कक्षा-12वीं प्री-बोर्ड के 10 प्रतिशत अंक देकर उत्तीर्ण करने की गाइडलाइन के आधार पर परिणाम लगभग तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस वर्ष मेरिट जारी नहीं की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि पहली बार बिना परीक्षा के बोर्ड परिणाम जारी किया जाना है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार तैयार परिणाम पर मुख्यमंत्री से विचार विमर्श के लिए समय मांगा गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से विचार विमर्श होने के तीन दिन बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह तक परिणाम जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम एक साथ जारी किया जाएगा।

खाकी वर्दी छोड़कर चाक- डस्टर पकड़ रहे हैं युवा

69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में 154 शिक्षकों की हुई है नियुक्ति जिनमें 40 अभ्यर्थी थे सिपाही

खाकी वर्दी छोड़कर चाक- डस्टर पकड़ रहे हैं युवा 



लखीमपुर खीरी
वर्दी का रौब छोड़कर युवा अब शिक्षक बनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं सुकून की नौकरी करने के लिए पुलिस की नौकरी छोड़कर शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की है। बेसिक शिक्षा विभाग में हाल ही में हुई 69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में जिले में जो नियुक्तियां हुई हैं उनमें सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है। जो पहले से पुलिस विभाग में आरक्षी के पद पर कार्यरत रहे हैं । नियुक्ति पत्र लेने के बाद अब ज्वाइनिंग के लिए पुरानी नौकरी छोड़ रहे हैं । ज्वाइन करने के लिए विभाग को प्रार्थनापत्र देकर समय मांगा है।


बेसिक शिक्षा विभाग में दो दिन पहले 154 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में जिले को 177 शिक्षक मिले थे। इसमें से 17 अनुपस्थित रहे । चार के आवेदन निरस्त हुए। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। दो के आवेदन में दिए गए अंकों पर शक होने के कारण उनको रोका गया है जबकि 154 को विभाग ने नियुक्तिपत्र दिए हैं। शिक्षक पद पर चयनित होने के बाद नियुक्तिपत्र प्राप्त करने वालों में से 40 ज्यादा ऐसे युवा हैं जो पहले से पुलिस में आरक्षी के पद कार्यरत थे। अब शिक्षक भर्ती में चयन होने पर वह वर्दी का रौब छोड़कर शिक्षक बनने जा रहे हैं ।


अगर शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य न कराया जाए तो यह सम्मान का पेशा है। यही वजह है कि हम लोगों की फील्ड में इंजीनियर, पुलिस कर्मी, एमबीए वाले युवा भी आ रहे हैं। पर जब शिक्षक से पढ़ाने के सिवा अन्य काम कराते हैं तो तकलीफ होती है । राहुल वाजपेयी, मीडिया प्रभारी प्राथमिक शिक्षक संघ

B.Ed. Entrance Exam : जारी हुए बीएड प्रवेश परीक्षा हेतु नए प्रवेश पत्र, 06 अगस्त को है परीक्षा

B.Ed. Entrance Exam : जारी हुए बीएड प्रवेश परीक्षा हेतु नए प्रवेश पत्र, 06 अगस्त को है परीक्षा




लखनऊ विश्वविद्यालय ने छह अगस्त को होने वाली संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) सोमवार को वेबसाइट https://www.lkouniv.ac.in/ पर अपलोड कर दिए। अभ्यर्थी अपनी पंजीकरण संख्या के माध्यम से नवीन प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लिया है, वे उसी प्रवेश पत्र के साथ भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। 


राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेयी ने बताया कि पहले बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 30 जुलाई को होनी थी। उसी के अनुसार प्रवेश पत्र भी जारी किए गए थे। अब शासन के आदेश पर तिथि बदलकर छह अगस्त कर दी गई है। इसलिए संशोधित तिथि के प्रवेश वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।

 प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में कोई दिक्कत आ रही हो तो अभ्यर्थी को ई-मेल helplineupbed2021@gmail.com पर अपना नाम, पिता और माता का नाम, अभ्यर्थी की जन्मतिथि, पंजीकृत मोबाइल नंबर, पंजीकृत ईमेल व हाईस्कूल परीक्षा पास करने का वर्ष भेजना होगा। उन्होंने बताया कि परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9 से 12 बजे और दूसरी पाली में दो से शाम पांच बजे तक होगी। इस बार बीएड प्रवेश परीक्षा में 5,91,305 परीक्षार्थी शामिल होने के लिए पंजीकृत हैं।


27 अगस्त को जारी होंगे नतीजे : तय कार्यक्रम के अनुसार संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के नतीजे जारी करने की तिथि 27 अगस्त होगी। दाखिले के लिए आनलाइन काउंसिलिंग एक सितंबर से शुरू होगी। इसके अलावा नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत छह सितंबर से होगी।

माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल अनोखा, ऑनलाइन तबादला पर रिलीव करने पर रोक

माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल अनोखा, ऑनलाइन तबादला पर रिलीव करने पर रोक


■  राजकीय माध्यमिक कालेजों के शिक्षक आकांक्षी जिलों में फंसे
■  2019 में भी नहीं हो सका था, आफलाइन हो रहे स्थानांतरण


लखनऊ : माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल निराला है। प्रक्रिया आनलाइन है लेकिन, स्थानांतरण आफलाइन भी हो रहे हैं। कई राजकीय शिक्षकों ने आनलाइन आवेदन करके तबादले की शर्तें पूरी की, संबंधित जिलों के लिए उनका आदेश भी हो गया लेकिन, रिलीव नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी तैनाती आकांक्षी जिले में है। इन्हीं जिलों से जिन शिक्षकों का आफलाइन आदेश हुआ है उन्हें कार्यमुक्त किया जा रहा है।


राजकीय माध्यमिक कालेजों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों का आनलाइन आवेदन लेकर तबादले किए गए हैं। शासन ने पारदर्शिता के लिए तकनीक का सहारा लिया लेकिन, आवेदन के समय से ही खामियां सामने आई। कई जिला विद्यालय निरीक्षकों ने शिकायत की कि उनके जिले के स्कूलों में शिक्षक के रिक्त पद वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं है। चुनिंदा जिलों के कालेजों में रिक्त पद विभाग कई साल से रोक रहा है, बाद में इन्हीं कालेजों के लिए आफलाइन आदेश जारी करके तैनाती दी जा रही है। फतेहपुर, बलरामपुर, श्रवस्ती, बहराइच, सोनभद्र, चंदौली, सिद्धार्थनगर व चित्रकूट से करीब 100 से अधिक शिक्षकों का अन्य जिलों के लिए स्थानांतरण आदेश हुआ, लेकिन रिलीव नहीं किया गया।

कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने की मांग, बेसिक शिक्षा मंत्री को निजी स्कूलों ने दिया प्रस्ताव

कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने की मांग, बेसिक शिक्षा मंत्री को निजी स्कूलों ने दिया प्रस्ताव


लखनऊ। निजी स्कूलों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विबेदी को 16 अगस्त से कक्षा एक से आठ तक के छात्रों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने का प्रस्ताव दिया।


इससे पहले संगठन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को दो बार कक्षा 09 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने का भी प्रस्ताव दे चुका है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने का भी समय मांगा। 

संगठन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने अपने सुझाव में स्कूल खोलने को कहा है। इसको शुरुआत प्राइमरी के बच्चों से करने को कहा है। उन्होंने बताया कि डब्लूएचओ और आईसीएमआर भी यही सुझाब दे चुका है, इसलिए कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बताया स्कूल खोलने के लिए एसओपी बही होंगी जो पहले के प्रस्ताव में दी गई थीं। चार घंटे कौ एक शिफ्ट की पढ़ाई होगी। न लंच होगा न असेंबली। उन्होंने बताया कि पिछले साल से सबक लेते हुए स्कूलों को जल्द खोल देना चाहिए।

29 जुलाई को शिक्षा नीति पर पीएम मोदी करेंगे राष्ट्र को संबोधित

29 जुलाई को शिक्षा नीति पर पीएम मोदी करेंगे राष्ट्र को संबोधित

PM on NEP : आज शाम 4.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर देश को संबोधित

PM on NEP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 29 जुलाई 2021 की शाम 4.30 बजे देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर देश को संबोधित करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान द्वारा साझा किये गये अपडेट के अनुसार एनईपी के एक वर्ष पूरा होने पर सुधारों को लेकर संबोधित करेंगे।

नई दिल्ली । PM on NEP: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल, 29 जुलाई 2021 की शाम 4.30 बजे देश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 पर देश को संबोधित करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान द्वारा संबोधन से एक दिन पहले आज, 28 जुलाई को साझा किये गये अपडेट के अनुसार प्रधानमंत्री एनईपी 2020 के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर इसके अंतर्गत किये जा रहे सुधारों को लेकर संबोधित करेंगे। साथ ही, पीएम मोदी एनईपी 2020 के अंतर्गत निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कई अभियानों की भी शुरूआत करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षा नीति निर्माताओं, शिक्षकों और छात्रों को भी संबोधित करेंगे।

शिक्षा मंत्री ने पहले भी दी थी जानकारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एनईपी (National Education Policy, NEP) लागू होने का एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात की पुष्टि की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपने ट्वीट हैंडल पर इस बात की जानकारी देते हुए लिखा कि, आगामी 29 जुलाई, 2021 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एनईपी लागू होने का एक साल पूरा होने पर पीएम मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी संबोधन के दौरान एनईपी 2020 को लागू करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों पर जानकारी शेयर कर सकते हैं। इसके अलावा वह नए शैक्षणिक सत्र के लिए पाइपलाइन में परियोजनाओं पर भी कुछ डिटेल्स दे सकते हैं। वहीं इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभालते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि उनका ध्यान नए एनईपी के उद्देश्यों को तयसमयसीमा लागू करना होगा।

पिछले साल केंद्र सरकार ने पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में NEP को मंजूरी दी थी। NEP 2020 ने 1986 में तैयार की गई शिक्षा नीति पूरी तरह से बदल दिया और कुछ नए और नए सुधार किए हैं। वहीं एनईपी का उद्देश्य भारत को एक ज्ञान महाशक्ति के रूप में बनाने पर ध्यान देना है। इसके साथ स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार लाना है। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जेईई एडवांस परीक्षा तिथि की घोषणा कर दी है। इसके मुताबिक परीक्षा का आयोजन 3 अक्टूबर को होगा। पहले यह परीक्षा 3 जुलाई को होने वाली थी, लेकिन देश में कोरोना स्थिति को देखते हुए परीक्षा को स्थगित कर दिया गया था।


नई दिल्ली: देश को आत्मनिर्भर बनाने की सोच के साथ पेश की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को 29 जुलाई को एक वर्ष पूरा हो रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह नीति के अमल को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। साथ ही शिक्षा नीति के आगे के रोडमैप को भी दिशा देंगे। शिक्षा नीति को कैबिनेट ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पीएम के संबोधन की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने सोमवार को पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा में दी। उन्होंने बताया कि नीति से जुड़े प्रत्येक ¨बदु के अमल की जो समय सीमा तय की गई थी, फिलहाल उसी के अनुरूप काम चल रहा है। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस सरकार के लिए काफी अहम है, क्योंकि यह एक लंबी प्रक्रिया और आम लोगों से जुड़ाव के बाद सामने आई है। इसे तैयार करने में लाखों लोगों ने अपने सुझाव दिए थे। नीति को लेकर इससे पहले भी पीएम मोदी अलग-अलग मंचों से इसकी सोच को सामने ला चुके हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक में कई बड़े बदलाव की सिफारिशें की गई हैं। इनमें स्कूलों की नई संरचना बनाई गई है, जिसमें अब प्री-प्राइमरी को भी शामिल गया है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया कमीशन बनाने की सिफारिश की गई है।

छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का नवंबर में आकलन करेगा NCERT

छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का नवंबर में आकलन करेगा NCERT


प्रधान ने कहा एनसीईआरटी कक्षा-तीन पांच आठ और 10 के छात्रों की सीखने की उपलब्धि का आकलन करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करता है। कक्षा-तीन पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण 13 नवंबर 2017 को हुआ था।


नई दिल्ली :  सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का आकलन करने के लिए एनसीईआरटी इस साल नवंबर में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण करेगा। कक्षा तीन, पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण इससे पहले 2017 में और कक्षा 10 के लिए 2018 में किया गया था। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने दी।

आनलाइन क्लास में बढ़ोतरी को देखते हुए परखी जाएगी शिक्षा की गुणवत्ता

उनसे पूछा गया था कि हाल के दिनों में आनलाइन क्लास में बढ़ोतरी को देखते हुए क्या स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए कोई अध्ययन या सर्वेक्षण किया गया है? इसके जवाब में प्रधान ने कहा, एनसीईआरटी कक्षा-तीन, पांच, आठ और 10 के छात्रों की सीखने की उपलब्धि का आकलन करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करता है। कक्षा-तीन, पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण 13 नवंबर, 2017 को हुआ था। सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 701 जिलों में हुए इस सर्वेक्षण में 1.10 लाख स्कूलों के 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था।


धर्मेद्र प्रधान ने लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षा आयोग का गठन करेगी। शिक्षा मंत्रालय इसके लिए विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया में है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद जैसे स्वायत्त निकायों के स्थान पर उच्च शिक्षा आयोग की परिकल्पना की गई है।

आइआइटी मद्रास का नाम बदलने का प्रस्ताव नहीं

धर्मेंद्र प्रधान ने आइआइटी मद्रास का नाम बदलने के किसी प्रस्ताव से इन्कार किया है। लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने इस सिलसिले में बयान दिया। उन्होंने कहा, आइआइटी मद्रास के नाम में संशोधन के किसी प्रस्ताव पर सरकार द्वारा विचार नहीं किया जा रहा है।

HECI : शिक्षा मंत्रालय तैयार कर रहा है भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए विधेयक – शिक्षा मंत्री

HECI : शिक्षा मंत्रालय तैयार कर रहा है भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए विधेयक – शिक्षा मंत्री


HECI केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) की स्थापना के लिए विधेयक को तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज 26 जुलाई 2021 को लोक सभा में दी गयी।

एनईपी 2020 में उच्च शिक्षा के लिए एचईसीआई को एकमात्र अब्रेला बॉडी बनाने का प्रावधान।


नई दिल्ली : HECI: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) की स्थापना के लिए विधेयक को तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज, 26 जुलाई 2021 को लोक सभा में दी गयी। शिक्षा मंत्री ने संसद के निचले सदन को सूचित करते हुए कहा, “शिक्षा मंत्रालय द्वारा केंद्रीय कैबिनेट की अनुमति के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की घोषणा पिछले वर्ष 29 जुलाई 2020 को की थी। एनईपी में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है जो कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चार अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्यों - विनियमन, मान्यता, वित्त पोषण, और अकादमिक मानक सेटिंग के लिए शीर्ष निकाय के तौर पर कार्य करेगा।”


आनंद प्रधान ने लोक सभी में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा के अंतर्गत परिकल्पित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के चारों कार्यों के अनुरूप ही शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी स्थापना के लिए विधेयक का निर्माण किया जा रहा है।


बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार वर्तमान में उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वायत्त शिक्षा निकायों, जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के स्थान पर अब भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) ही कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में चिकित्सा और कानूनी शिक्षा को छोड़कर, उच्च शिक्षा के लिए एचईसीआई को एकमात्र अब्रेला बॉडी के तौर पर स्थापित करने की सिफारिश की गयी है।

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी 

◆ 10वीं और 12वीं के 56 लाख बच्चों को रिजल्ट का है इंतजार
◆ सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक परिणाम घोषित करने को कहा
◆ इंटर के बच्चों का रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं


प्रयागराज : सीआईएससीई की 10वीं व 12वीं का परिणाम घोषित होने के साथ ही यूपी बोर्ड के 56 लाख से अधिक विद्यार्थियों की उत्सुकता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी बोर्ड को 31जुलाई तक 12वीं का परिणाम जारी करने का आदेश दिया है।

कोर्ट से निर्धारित तिथि में मात्र पांच दिन बचे हैं, लेकिन यूपी बोर्ड अब तक परिणाम जारी करने की तिथि तक नहीं बता सका है। स्थिति यह है कि अब तक इंटर के छात्र छात्राओं के रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जा सके हैं। जबकि हाईस्कूल के रोल नंबर 10 जुलाई को ही अपलोड हो गए थे। बोर्ड का कहना है कि 10वीं और 12वीं के रोल नंबर पहले ही स्कूलों को भेज दिए थे लेकिन इस साल बच्चों की सहूलियत के लिए वेबसाइट पर भी अपलोड कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार परिणाम को लेकर शासन स्तर पर फैसला नहीं हो पा रहा है। बोर्ड ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के निर्देश पर जुलाई के पहले सप्ताह में ही परिणाम तैयार कर लिया था। लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण परिणाम जारी करने की तिथि तय नहीं हो पा रही है। चर्चा है कि इस देरी के पीछे एक कारण कागजी औपचारिकता पूरी न होना भी है।

29,94,312
परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं।

26,10,316
छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट

कब क्या हुआ

◆ 29 मई : हाईस्कूल की परीक्षा परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं निरस्त करने का निर्णय
◆ 3 जून : इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द करने पर लगी मुहर
◆ 20 जून : शासन ने जारी किया परिणाम तैयार करने का फॉर्मूला

परिणाम में क्या फंसा है पेच

कोरोना महामारी के कारण यूपी बोर्ड के 100 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि बिना परीक्षा परिणाम घोषित होगा। बोर्ड के अधिनियम में बिना परीक्षा परिणाम जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। हर साल 10वीं-12वीं की परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण से लेकर हर छोटे-बड़े काम के लिए बकायदा शासनादेश जारी होते हैं। इस साल शासन ने बिना परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्णय तो ले लिया लेकिन उसके लिए कोई आदेश जारी नहीं किया। ऐसे में बोर्ड अफसरों को डर भी सता रहा है कि कहीं परिणाम जारी होने के बाद कोई विवाद हाईकोर्ट पहुंचता है और कोर्ट ये पूछता है कि किस आधार या शासनादेश पर परिणाम तैयार किया गया तो क्या जवाब देंगे।

CISCE : परीक्षा परिणाम में मिलीं गड़बड़ियां, बोर्ड कराएगा सत्यापन, स्कूलों को भेजा पत्र

सीआईएससीई : परीक्षा परिणाम में मिलीं गड़बड़ियां, बोर्ड कराएगा सत्यापन, स्कूलों को भेजा पत्र 

सीआईएससीई के कक्षा 10 व 12 के परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियां मिली हैं। अधिकांश स्कूलों ने इंग्लिश लिटरेचर और जियोग्राफी में विद्यार्थियों को बहुत कम अंक देने की शिकायत की है।


सीआईएससीई के कक्षा 10 व 12 के परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियां मिली हैं। अधिकांश स्कूलों ने इंग्लिश लिटरेचर और जियोग्राफी में विद्यार्थियों को बहुत कम अंक देने की शिकायत की है। बोर्ड ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि अंकों का सत्यापन कराएगा। इस संबंध में बोर्ड के उप सचिव हेनरी सोलर ने सभी स्कूलों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाी की जाएगी। 

स्कूलों के मुताबिक विद्यार्थियों को इंग्लिश लिटरेचर व जियोग्राफी में काफी कम अंक मिले हैं। इन्हीं विद्यार्थियों को अन्य विषयों में 90 फीसदी से ज्यादा अंक मिले हैं। जबकि इन दोनों विषयों में हमेशा से अच्छे अंक मिलते रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि उन्होंने जितने अंक भेजे थे और जितने औसत अंक की अपेक्षा थी, उससे काफी कम अंक बोर्ड ने दिए हैं।   

कम अंक को मिले ज्यादा अंक और ज्यादा को मिले कम
बोर्ड ने नई मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत जो परीक्षा परिणाम जारी किया है, वह कई स्तरों पर चौंकाने वाला है। स्कूलों के अनुसार जिन विद्यार्थियों को 80 से 85 प्रतिशत अंक मिलने थे, उन्हें 90 से 95 प्रतिशत अंक मिले और जिन्हें 90 से ज्यादा मिलने थे, वे 80 प्रतिशत में ही सिमट कर रह गए।

सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज के एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि वे पहले से कह रहे थे कि विद्यार्थियों को केवल बोर्ड परीक्षा के आधार पर ही अंक दिया जाए। यहां विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार नहीं सॉफ्टवेयर के अनुसार अंक मिले हैं। मेधावी छात्रों में इससे निराशा है। विद्यार्थियों को सिर्फ उत्तीर्ण होने का सर्टिफिकेट देना चाहिए था।

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव, शासन के निर्देश पर बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजा गया पत्र

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव, शासन के निर्देश पर बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजा गया पत्र
 

प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों को पठन-पाठन के लिए भौतिक रूप से खोले जाने के बारे में एक बार फिर से अभिभावकों की राय मांगी गई है। शासन के 23 जुलाई के पत्र के बाद यूपी बोर्ड के अपर सचिव अशोक कुमार गुप्ता की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र भेजा गया है।


पत्र में उत्तर प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों को पठन-पाठन के लिए भौतिक रूप से खोले जाने के संबंध में अभिभावकों की मौजूदा राय जानने को कहा गया है। बोर्ड के अपर सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के संबंध में छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से उनकी सहमति के संबंध में सूचना बोर्ड की ओर से भेेजे गए प्रारूप पर बोर्ड की ई-मेल आईडी  upmsp@rediffmail.com पर 27 जुलाई दोपहर दो बजे तक  हर हाल में साफ्ट एवं हार्ड कॉपी के रूप में उपलब्ध करा दें।

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव


Monday, July 26, 2021

रिपोर्ट में दावा : कोरोना काल में 55 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों के वेतन में हुई कटौती


रिपोर्ट में दावा : 55 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों के वेतन में हुई कटौती, 54 फीसदी के पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं

55 फीसदी से अधिक विद्यालयों ने इस शैक्षणिक वर्ष में नए प्रवेशों की संख्या में बड़ी कमी की बात कही है।


कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए बए पाबंदियों की वजह से देश भर के अधिकांश निजी स्कूलों के रेवन्यू में 20-50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जिसकी वजह से कुछ विद्यालयों ने शिक्षकों में कटौती करना शुरू कर दिया है। यह दावा भारत में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा पर काम करने वाले एनजीओ सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (सीएसएफ) की रिपोर्ट में किया गया है।  आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। बता दें कि यह रिपोर्ट 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,100 से अधिक अभिभावकों, स्कूल प्रशासक और शिक्षक के बातचीत के आधार पर किए गए अध्ययन पर आधारित है।


55 फीसदी स्कूलों में नए प्रवेशों की संख्या में आई कमी

रिपोर्ट के मुताबिक 55 फीसदी से अधिक विद्यालयों ने इस शैक्षणिक वर्ष में नए प्रवेशों की संख्या में बड़ी कमी की बात कही है। वहीं 77 फीसदी स्कूलों ने कहा कि वे कोविड-19 के दौरान स्कूल के लिए ऋण लेने में रुचि नहीं रखते हैं, और केवल तीन फीसदी ने ही सफलतापूर्वक ऋण लिया है, जबकि पांच फीसदी अभी भी अपने लोन के प्रोसेस होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


55 फीसदी शिक्षकों के वेतन में की गई कटौती
निजी स्कूलों के तकरीबन 55 फीसदी शिक्षकों के वेतन में लॉकडाउन के दौरान कटौती की गई है। वहीं कम फीस वाले विद्यालयों द्वारा करीब 65 फीसदी शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई थी। 37 फीसदी शिक्षकों का वेतन ज्यादा फीस वाले विद्यालयों ने रोक दिया है। उच्च शुल्क वाले स्कूलों द्वारा रोक दिया गया। तकरीबन 54 फीसदी शिक्षकों के पास आय का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है, 30 प्रतिशत ने अपने वेतन को निजी ट्यूशन और कोचिंग के साथ पूरक किया।


50 फीसदी ने ही किया फीस का भुगतान
रिपोर्ट में कहा गया है कि 70 फीसदी अभिभावकों ने स्कूल फीस समान होने की बात कही है। हालांकि केवल 50 फीसदी अभिभावकों ने ही फीस का भगुतान किया है। 20 फीसदी माता-पिता ने प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे पर खर्च में वृद्धि की सूचना दी और 15 फीसदी ने शिक्षा खर्च में वृद्धि की सूचना दी है। 78 फीसदी अभिभावकों ने बताया कि वे अपने बच्चे की शिक्षा का खर्च उसी स्कूल में जारी रखने में सक्षम होंगे।

कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास ने भर्ती में जोड़ी नई शर्त, निजी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग

कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास ने भर्ती में जोड़ी नई शर्त,  निजी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग


■  बदलाव

● किसी भी विषय के हो शिक्षक कम्प्यूटर का ज्ञान जरूरी

● ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में सवा साल से पढ़ाई-लिखाई ऑनलाइन चल रही है। इस बदलाव ने शिक्षकों की अनिवार्य न्यूनतम योग्यता में भी परिवर्तन कर दिया है। अब स्कूल वाले टेक्नोलॉजी फ्रेंडली शिक्षकों को लेना पसंद कर रहे हैं ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लग रही कक्षा में परेशानी न हो।


सरकारी स्कूलों में होने वाली शिक्षकों की भर्ती के कायदे कानून बदलने में तो समय लगेगा लेकिन निजी स्कूलों ने बदलाव लागू कर दिया है शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन में बकायदा ऑनलाइन क्लास लेने में सहज अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे जा रहे हैं।


पिछले महीने रेड ईगल आर्मी प्री प्राइमरी स्कूल ओल्ड कैंट तेलियरगंज ने शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए जो विज्ञापन निकाला उसमें कम्प्यूटर का आधारभूत ज्ञान (ट्रिपलसी) टेक्नोलॉजी फ्रेंडली व ऑनलाइन क्लास लेने में सहज होना अनिवार्य शर्त के रूप में रखा था। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। स्कूल संचालकों का यह मानना है कि ऑनलाइन शिक्षा भविष्य में और सुदृढ़ होगी।


निश्चित रूप से लॉकडाउन के कारण शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम होना अनिवार्य है। सबसे बड़ी चुनौती सामने कोई बच्चा न होने के बावजूद पढ़ाना है। हम शिक्षकों को नियुक्त करने के बाद तीन दिन की ट्रेनिंग देते हैं। शिक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय और भाषा पर पकड़ और क्लास में अनुशासन बनाए रखना है।
-फादर थॉमस कुमार, प्रिंसिपल सेंट जोसेफ

चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाये जाने की संभावना, चार साल से नहीं हुई है वृद्धि

चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाये जाने की संभावना, चार साल से नहीं हुई है वृद्धि


यूपी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ा सकती है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सरकार को 1.46 लाख शिक्षा मित्रों को दिए जा रहे मानदेय, सरकार पर वित्तीय भारत समेत पूरा ब्यौरा दे दिया है। करीब चार साल से शिक्षा मित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। वर्तमान में उन्हें 10 हजार रुपये मानदेय मिलता है। सूत्रों के मुताबिक मानदेय में दो से चार हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2017 के लोक कल्याण संकल्प पत्र में शिक्षा मित्रों की समस्या को तीन माह में न्यायिक तरीकों से सुलझाने का आश्वासन दिया था। जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 1.36 लाख शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द कर उन्हें पुन: शिक्षा मित्र बनाना पड़ा। 


हालांकि शिक्षा मित्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने उनका मानदेय 3,500 से बढ़ाकर 10,000 रुपये महीने किया था। सरकार ने उनकी मांगों व समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।


जानकारों के मुताबिक चुनाव को देखते हुए शिक्षा मित्रों की नाराजगी दूर करने के लिए सरकार व संगठन की बैठक में उनका मानदेय बढ़ाने पर फैसला हुआ है। इसके लिए सरकार ने कई जानकारियां मांगी थीं, जिसे बेसिक शिक्षा विभाग ने सौंप दिया है। संगठन की अगस्त में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में इस पर फैसला हो सकता है।

‘शासन से शिक्षा मित्रों की संख्या व उन्हें दिए जा रहे मानदेय का ब्योरा मांगा गया था। पूरा ब्योरा भेज दिया गया है।’
 - विजय किरन आनंद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा

सिर्फ 10.1 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का पढ़ाई के लिए करते हैं उपयोग

सिर्फ 10.1 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का पढ़ाई के लिए करते हैं उपयोग

एनसीपीसीआर के अध्ययन का दावा, 59.2 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का चैटिंग के लिए करते हैं इस्तेमाल


राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की तरफ से कराए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अध्ययन में कहा गया है कि 59.2 फीसद बच्चे अपने स्मार्टफोन पर मैसेजिंग एप का उपयोग करते हैं, जबकि सिर्फ 10.1 प्रतिशत ही स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा वाले उपकरणों का इस्तेमाल आनलाइन पढ़ाई या सीखने के लिए करते हैं।


मोबाइल फोन व इंटरनेट सेवा वाली दूसरी डिवाइस के इस्तेमाल का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में किए गए अध्ययन में पता चला कि सभी आयुवर्ग (8-18 साल) के 30.2 फीसद बच्चों व किशोरों के पास अपना स्मार्टफोन है। 13 साल से ज्यादा उम्र के किशोरों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल की प्रवृत्ति काफी तेज हुई है। अध्ययन के अनुसार, ‘इससे पता चलता है कि 12-13 साल से ज्यादा उम्र के किशोरों के अभिभावक उन्हें लैपटाप या डेस्कटाप दिलाने के बजाय स्मार्टफोन उपलब्ध कराना ज्यादा बेहतर समझते हैं।’

देशभर में हुए इस अध्ययन में पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण व पूवरेत्तर क्षेत्र की 15 लोकेशन को चुना गया। हर क्षेत्र में करीब एक हजार लोगों की प्रतिक्रियाएं ली गईं, जिनमें स्कूली छात्र, अभिभावक व शिक्षक शामिल रहे। अध्ययन में पता चला कि 72.70 फीसद शिक्षकों को स्मार्टफोन के इस्तेमाल का अनुभव नहीं था। 54.1 फीसद ने कहा कि कक्षा में स्मार्टफोन के इस्तेमाल से परेशानी पैदा होती है।

तबादला : विजय किरण आनंद बने गोरखपुर के डीएम, अनामिका को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का मिला प्रभार

तबादला : विजय किरण आनंद बने गोरखपुर के डीएम, अनामिका को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का मिला प्रभार


शासन ने गोरखपुर के डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के स्थान पर महानिदेशक  स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को गोरखपुर के डीएम के पद पर तैनाती दी है। 

विजय किरण आनंद को बेसिक शिक्षा में प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती, स्कूलों में बदलाव के लिए ‘कायाकल्य योजना’ व शिक्षा विभाग के कार्मिकों को बाबूराज से सहूलियत देने के लिए मानव संपदा पोर्टल के सफल क्रियान्वयन करने से प्रसिद्धि मिली है। उन्हें मुख्यमंत्री के गृह जिले की कमान सौंपी गई है।

सचिव बेसिक शिक्षा अनामिका सिंह को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।