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Friday, December 31, 2021

यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 : अब 10 फरवरी तक तय होंगे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा केन्द्र

यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 : अब 10 फरवरी तक तय होंगे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा केन्द्र

यूपी बोर्ड 2021-22 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा केन्द्र के निर्धारण अब 10 फरवरी तक केन्द्र का निर्धारण होगा। अभी तक आखिरी तारीख 24 जनवरी थी। जिला समिति द्वारा ऑनलाइन निर्धारित परीक्षा केन्द्रों की त्रुटियां, विसंगति आदि के निराकरण के बाद केन्द्रों को दो फरवरी तक अपलोड करेंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग के शम्भु कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।


जल्द जारी होगी यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं परीक्षा की डेटशीट
यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की तारीखों का ऐलान बहुत जल्द हो सकता है। बताया जा रहा है कि डेटशीट को काफी हद तक अंतिम रूप दिया जा चुका है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा की तिथियों की घोषणा में देरी हो रही है। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्तर के स्कूलों के 2022 के कैलेंडर में बोर्ड परीक्षा के लिए 15 दिन निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा कुछ दिनों पहले उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया था कि विधानसभा चुनाव के बाद ही बोर्ड परीक्षाएं होंगी। प्री बोर्ड परीक्षाएं चुनाव के पहले करवाई जाएंगी।

माना जा रहा है कि यूपी बोर्ड की हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 24 अप्रैल के आसपास शुरू हो सकती हैं। योजना है कि 16 से 18 दिनों में 10वीं और 12वीं दोनों की परीक्षाएं करा ली जाएंगी। वहीं प्री बोर्ड की परीक्षाएं जनवरी में होंगी। 

यूपी बोर्ड में प्री बोर्ड परीक्षाएं पिछले सत्र से ही अनिवार्य की गई हैं। इससे पहले स्कूल अपने स्तर से इसे कराते थे। लेकिन इस बार हर लिखित परीक्षा व प्रायोगिक परीक्षा के नम्बर वेबसाइट पर अपलोड किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश बोर्ड की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा 2022 में 51,74,583 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर तक 10वीं के 27,83,742 और 12वीं के 23,91,841 कुल 51,74,583 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।


UPMSP UP Board 10th, 12th Exam 2022 : बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची 24 जनवरी तक जारी होगी

UPMSP UP Board 10th 12th Exam 2022: यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा के लिए केंद्रों की अंतिम सूची 24 जनवरी को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक को प्रधानाचार्यों से प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण कर उनका निस्तारण करते हुए केंद्रों की सूची बोर्ड की वेबसाइट पर सोमवार तक अपलोड करने को कहा गया है। यह सूची वेबसाइट पर नौ जनवरी को जारी कर 15 जनवरी तक छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों से आपत्ति ली जाएगी। राज्य स्तरीय समिति आपत्तियों का निस्तारण कर 24 जनवरी तक अंतिम सूची वेबसाइट पर जारी करेगी।

इसके साथ ही यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की तारीखों का ऐलान बहुत जल्द हो सकता है। बताया जा रहा है कि डेटशीट को काफी हद तक अंतिम रूप दिया जा चुका है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चलते यूपी बोर्ड परीक्षा की तिथियों की घोषणा में देरी हो रही है। उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्तर के स्कूलों के 2022 के कैलेंडर में बोर्ड परीक्षा के लिए 15 दिन निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा कुछ दिनों पहले उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया था कि विधानसभा चुनाव के बाद ही बोर्ड परीक्षाएं होंगी। प्री बोर्ड परीक्षाएं चुनाव के पहले करवाई जाएंगी।

उत्तर प्रदेश बोर्ड की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा 2022 में 51,74,583 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर तक 10वीं के 27,83,742 और 12वीं के 23,91,841 कुल 51,74,583 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।

मार्च 2022 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भर जाएंगे शिक्षकों के खाली पद, केंद्र सरकार ने तय किया लक्ष्य

मार्च 2022 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भर जाएंगे शिक्षकों के खाली पद, केंद्र सरकार ने तय किया लक्ष्य

संसद के शीतकालीन सत्र में भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को लेकर भी सवाल किए गए थे। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खाली पदों को भरने के लिए मिशन मोड में अभियान छेड़ने की जानकारी दी।

नई दिल्ली : केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए मिशन मोड़ में छेड़े गए अभियान को शिक्षा मंत्रालय ने और रफ्तार दी है। इसके तहत मार्च 2022 तक शिक्षकों के ज्यादातर खाली पदों को भरने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल इसे लेकर ज्यादातर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तेजी से काम शुरू हो गया है। भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए है। ऐसे में साफ है कि नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को भर दिया जाएगा।


खासबात यह है कि शिक्षा मंत्रालय के अंदर ही इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी एक टीम लगाई गई है। जो विश्वविद्यालयों की सप्ताहिक आधार पर प्रगति को जांच रही है। इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने सभी केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में आरक्षण श्रेणी के बैकलाग के खाली पड़े पदों को सितंबर 2022 तक हर हाल में भरने के भी निर्देश दिए है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर खाली पदों को भरने का यह अभियान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के निर्देश के बाद शुरू हुआ है। वैसे तो उन्होंने इन पदों को 30 नवंबर तक ही भरने के निर्देश दिए थे, लेकिन विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने की एक प्रक्रिया है। जिसके चलते इनमें थोड़ा समय लगा, लेकिन मंत्रालय के मुताबिक अब तेजी से यह आगे बढ़ी है।

खाली पड़े पदों का भरने में हो रही देरी एक बड़ा मुद्दा बना

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लंबे समय से खाली पड़े पदों का भरने में हो रही देरी एक बड़ा मुद्दा भी बना हुआ है। राजनीतिक दल इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहते है। संसद के शीतकालीन सत्र में भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को लेकर भी सवाल किए गए थे। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खाली पदों को भरने के लिए मिशन मोड में अभियान छेड़ने की जानकारी दी।

गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में करीब 50 केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इनमें अकेले शिक्षकों के ही 65 सौ से ज्यादा पद खाली है। इनमें प्रोफेसर के करीब 14 सौ पद, एसोसिऐट प्रोफेसर के 24 सौ पद, असिस्टेंट प्रोफेसर के करीब 24 सौ पद है। इसके साथ ही इंदिरा गांधी केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में भी शिक्षकों के करीब डेढ़ सौ पद खाली है।

Thursday, December 30, 2021

03 जनवरी 2022 को हो सकती है बड़ी घोषणाएं, सीएम योगी करेंगे आंगनबाड़ी कार्यकत्री / सहायिका सम्मेलन को संबोधित।

03 जनवरी 2022 को हो सकती है बड़ी घोषणाएं, सीएम योगी करेंगे आंगनबाड़ी कार्यकत्री / सहायिका सम्मेलन को संबोधित।


सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायधीश बोले - राज्य सरकारें तय करें कि हर स्कूल व कॉलेज में हों पुस्तकालय

सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायधीश बोले - राज्य सरकारें तय करें कि हर स्कूल व कॉलेज में हों पुस्तकालय


सरकार को इस मुद्दे में शामिल होकर समाधान पर जोर देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को गांव में भी पुस्तकालय की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और उनके लिए अनुदान की भी व्यवस्था हो।


भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करें कि हर स्कूल व कॉलेज में एक पुस्तकालय और खेल के मैदान की व्यवस्था हों। ताकि छात्रों का अच्छे से विकास हो सके। हैदराबाद पुस्तक मेला में पहुंचे सीजेआई रमना ने कहा कि पुस्तक पढ़ना एक अच्छी आदत है जिससे दिमाग विकसित होता है। वहीं खेलने से बच्चों में खेल के प्रति रूचि भी बढ़ती है। जहां कहीं भी स्कूल या कॉलेज खुल रहे हैं तो उसमें पुस्तकालय जरूर होना चाहिए, लेकिन इस नियम का कोई भी पालन नहीं कर रहा है। 


ठीक यहीं स्थिति खेल के मैदान को लेकर भी है। यह एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को इस मुद्दे में शामिल होकर समाधान पर जोर देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को गांव में भी पुस्तकालय की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और उनके लिए अनुदान की भी व्यवस्था हो। 


सीजेआई रमना ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी जब जेलों में बंद थे तो उन्होंने बहुत सारी किताबें पढ़ीं और लिखीं भी। पढ़ाई के कारण ही दुनिया भर के साहित्यकारों व लेखकों ने संघर्ष करके महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्होंने कहा कि मैं खुद मैक्सिम गोर्की का उपन्यास मदर कई बार पढ़ चुका हूं और बिना प्रभावित हुए नहीं रह सका।

Wednesday, December 29, 2021

शीतकालीन अवकाश में नहीं होगा शिक्षकों का प्रशिक्षण, राज्य परियोजना निदेशक द्वारा समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश

शीतकालीन अवकाश में नहीं होगा शिक्षकों का प्रशिक्षण, राज्य परियोजना निदेशक द्वारा समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देश



Covid 19 Effect: NCERT आगामी सत्र 2022-23 में पाठक्रम में करेगा कटौती, कोरोना के प्रभाव के कारण लिया फैसला

Covid 19 Effect: NCERT आगामी सत्र 2022-23 में  पाठक्रम में करेगा कटौती, कोरोना के प्रभाव के कारण लिया फैसला



Covid 19 Effect: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के आने में समय को देखते हुए एनसीईआरटी ने आगामी वर्ष से सभी कक्षाओं के किताबों और सिलेबस में कटौती करने का फैसला किया है।


देश के लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने आगामी सत्र 2022-23 से स्कूलों के सिलेबस और किताबों में कटौती का फैसला किया है। यह फैसला देश के शिक्षा क्षेत्र पर कोरोना महामारी के असर के कारण लिया है। महामारी के प्रकोप के कारण देश में स्कूल काफी समय तक बंद रहे थे, वहीं संक्रमण के मामलों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिलने लगी है। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे के बीच देश के विभिन्न राज्यों में केस बढ़ने शुरू हो गए हैं। कई स्कूलों में भी संक्रमण के बड़े मामले सामने आए हैं, इस कारण स्कूलों को बंद भी कर दिया गया है। 




28 दिसंबर तक भेजनी थी रिपोर्ट
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के आने में समय को देखते हुए एनसीईआरटी ने आगामी वर्ष से सभी कक्षाओं के किताबों और सिलेबस में कटौती करने का फैसला किया है। इसके लिए एनसीईआरटी के इंचार्ज श्रीधर श्रीवास्तव ने 15 दिसंबर 2021 को ही सभी विभागाध्यक्षों को विशेषज्ञों की समीक्षा लेने के आदेश जारी कर दिए थे। विभागाध्यक्षों को अपनी रिपोर्ट आज 28 दिसंबर 2021 तक भेजनी थी। जानकारी के मुताबिक निदेशक को भी अकादमिक सत्र 2022-23 के लिए किताबों को प्रस्तावित बदलाव के साथ प्रकाशन के लिए भेजने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। 



एनसीईआरटी के इंचार्ज श्रीधर श्रीवास्तव ने बताया कि हम अभी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) को बनाने की प्रक्रिया में हैं। इस कारण एनसीएफ पर आधारित किताबों के आने कुछ समय लग सकता है। छात्रों की पढ़ाई को जल्द सुधार देने के लिए एनसीईआरटी को आगामी सत्र के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य करने की जरूरत है। 


कब आएंगी एनसीएफ पर आधारित नई किताबें?
सत्र 2022-23 से स्कूलों की किताबों के सिलेबस को कम करने का फैसला कोरोना महामारी के दौर में छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई और अन्य माध्यमों मे आने वाली समस्या को देखते हुए लिया गया है। फैसले का कारण संसद की पीएसी और नई शिक्षा नीति 2020 भी है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) पर आधारित नई किताबें एनसीईआरटी द्वारा साल सत्र 2023-24 से जारी की जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए छात्र एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट ले सकते हैं। 

नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी संस्कृत पढ़ाने की तैयारी

नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी संस्कृत पढ़ाने की तैयारी


प्रयागराज: नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी संस्कृत पढ़ाने की तैयारी है। उन्हें प्राथमिक स्तर पर गिनती, आसपास की वस्तुओं के नाम आदि संस्कृत में बताए जाएंगे जिससे वह इस भाषा के साथ समझ विकसित कर सकें। इसके लिए प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडी इन एजुकेशन में दिया जा रहा है। संस्थान की प्राचार्य / अपर शिक्षा निदेशक ललिता प्रदीप के निर्देशन में चल रहे शिविर में जिलेभर के 100 शिक्षकों को शामिल किया गया है।


मंगलवार को संस्कृत भाषा शैक्षिक उन्नयन एवं गुणवत्ता संवर्धन प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में लाल बहादुर शास्त्री इंटर कालेज कौशांबी के प्रधानाचार्य डा. संतोष मिश्र ने संस्कृत के श्रवण, भाषण, पठन व लेखन के विकास के क्रम को समझाया। उसे प्रभावी तरीके से विद्यार्थियों तक किस तरह पहुंचाएं इस पर भी चर्चा की गई। राज्य शिक्षा संस्थान के प्रवक्ता अमरनाथ पांडेय ने संस्कृत में वार्तालाप के तौर तरीके बताए । कहा कि विद्यार्थियों से उनके पास मौजूद वस्तुओं के बारे में संकेत के साथ संस्कृत में वार्ता करें। महत्वपूर्ण शब्दावलियों को उनके अर्थ के साथ साझा करने से छात्र छात्राओं की रुचि बढ़ेगी।


द्वितीय सत्र में इलाहाबाद डिग्री कालेज के शिक्षक डा. राजेंद्र त्रिपाठी ने संस्कृत में गद्य, पद्य एवं गीतों की छंदों मयी प्रस्तुति कर अध्यापकों को अध्यापन के गुर सिखाए। इविंग क्रिश्चियन कालेज के डा. अरुण मिश्र ने कारक एवं विभक्तियों का महत्व समझाते हुए प्रशिक्षण दिया।


कार्यक्रम संचालन स्मिता जायसवाल व सालिगराम त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में अशोक नाथ तिवारी, रमेश तिवारी, दरख्यां आब्दी, अमिता सिंह, डा. मीनाक्षी पाल, रणजीत, उपेंद्र नाथ सिंह, डा. रूपाली दिव्यम, डा. सरिता पांडेय, अंजना पांडेय ने सहयोग दिया।

97 हजार प्राथमिक शिक्षक की नई भर्ती की मांग को लेकर विधानभवन का घेराव, सरकार के खिलाफ आक्रोश

97 हजार प्राथमिक शिक्षक की नई भर्ती की मांग को लेकर विधानभवन का घेराव, सरकार के खिलाफ आक्रोश

पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को भेजा ईको गार्डन


लखनऊ। बेसिक शिक्षा में नए सिरे से 97 हजार शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर डीएलएड प्रशिक्षितों ने मंगलवार को विधानभवन और भाजपा दफ्तर का घेराव कर जमकर हंगामा किया।

प्रदर्शनकारियों के हुजूम ने बापू भवन चौराहा जाम कर कई घंटे तक नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को काबू करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। डीएलएड प्रशिक्षित काफी समय से बेसिक शिक्षा में 97 हजार शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं। सुनवाई न होने से नाराज अभ्यर्थी सुबह विधानभवन के गेट नंबर दो के सामने नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर बापू भवन चौराहे ले गए, लेकिन कई अभ्यर्थी भाजपा दफ्तर के सामने सड़क पर बैठ कर नारेबाजी करने लगे।

बापू भवन चौराहे पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी। कई घंटे तक हंगामे और नारेबाजी के बाद पुलिस ने सभी को बलपूर्वक बसों में लादना शुरू किया तो धक्कामुक्की और नोकझोंक शुरू हो गई। बाद में पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शन में भानु प्रताप शुक्ल, रजत, सुनील, आकाश द्विवेदी, अभिषेक तिवारी, पवन पांडेय और आदर्श पटेल समेत बड़ी संख्या में डीएलएड प्रशिक्षु रहे।
  

बेसिक शिक्षा विभाग में 97 हजार नई सहायक शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर मंगलवार को डीएलएड प्रशिक्षिकों ने विधान भवन का घेराव किया। बड़ी संख्या में  प्रशिक्षुक बाबू भवन से लेकर विधान भवन तक जमा है। प्रशिक्षित लंबे समय से बेसिक शिक्षा में 97 हजार पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने की मांग कर रहे है। 

 डीएलएड छात्र नेता भानु प्रताप शुक्ल ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग में नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर डीएलएड धारी प्रशिक्षित करीब तीन वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव है। आचार संहिता लागू होने में कुछ दिन ही बचे है। डीएलएड प्रशिक्षिकों में सरकार के खिलाफ आक्रोश है ।डीएलएड का प्रशिक्षण परीक्षा नियामक के द्वारा 2017 से प्रारम्भ किया गया । तब से बेसिक शिक्षा में किसी भी प्रकार की भर्ती नहीं आई।

69000 शिक्षक भर्ती : अब तीन जनवरी को सार्वजनिक होगी छह हजार अभ्यर्थियों की सूची, कार्यक्रम में आंशिक बदलाव

69000 शिक्षक भर्ती : अब तीन जनवरी को सार्वजनिक होगी छह हजार अभ्यर्थियों की सूची, कार्यक्रम में आंशिक बदलाव


🆕 Update
लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में नियुक्ति पाने के दावेदार लगभग छह हजार अभ्यर्थियों की सूची गुरुवार को सार्वजनिक नहीं हो सकी है। सचिव परिषद प्रताप सिंह बघेल का कहना है कि चयनित सूची तैयार की जा रही है, गुरुवार को अपरिहार्य कारणों से नहीं दे पा रहे हैं अब चयनित सूची तीन जनवरी को वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, संबंधित जिलों में अभिलेखों का परीक्षण चार व पांच जनवरी को होगा, इसमें मिले अर्ह अभ्यर्थियों को छह जनवरी को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों की 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में अधिकारियों व कार्मिकों की अनदेखी से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का अपेक्षित चयन नहीं हो सका था। आंदोलन करने वालों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने विसंगति से बाहर होने वाले अभ्यर्थियों को चयनित करने की समय सारिणी जारी की थी, परिषद के अधिकारी उसका भी तय समय में अनुपालन नहीं कर सके हैं।

इस वजह से काउंसलिंग की तारीख में बदलाव किया गया है, तीन से पांच के बजाए चार व पांच जनवरी को संबंधित जिलों में काउंसलिंग होगी। इसमें किस अभ्यर्थी को कौन जिला आवंटित हुआ है इसका भी उल्लेख रहेगा। इसी के आधार पर उनकी संबंधित जिलों में काउंसलिंग कराकर नियुक्तिपत्र दिए जाएंगे।


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69000 शिक्षक भर्ती : छह हजार अभ्यर्थियों की आज जारी होगी सूची

 लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में नियुक्ति पाने के दावेदार लगभग छह हजार अभ्यर्थियों की सूची गुरुवार को सार्वजनिक होगी। संबंधित जिलों में अभिलेखों का परीक्षण तीन से पांच जनवरी तक होगा इसमें मिले अर्ह अभ्यर्थियों को छह जनवरी को नियुक्तिपत्र वितरित किए जाएंगे।


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों की 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में अधिकारियों व कार्मिकों की अनदेखी से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का अपेक्षित चयन नहीं हो सका था। आंदोलन प्रदर्शन करने वालों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया था। जिसके बाद बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने विसंगति से बाहर होने वाले अभ्यर्थियों को चयनित करने की समय सारिणी जारी की थी, उसी के अनुसार गुरुवार को वेबसाइट पर सूची का प्रदर्शन होगा।

इसमें किस अभ्यर्थी को कौन जिला आवंटित हुआ है इसका भी उल्लेख रहेगा। इसी के आधार पर उनकी संबंधित जिलों में काउंसिलिंग कराकर नियुक्तिपत्र दिए जाएंगे



69000 शिक्षक भर्ती : अब 30 दिसंबर को जारी होगी OBC-SC अभ्यर्थियों की चयन सूची




69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण विसंगति दूर कर ओबीसी और एससी के करीब छह हजार अभ्यर्थियों की सूची अब 30 दिसंबर को जारी की जाएगी। सरकार की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के तहत 28 दिसंबर को अभ्यर्थियों की चयन सूची तैयार की जानी थी, लेकिन मंगलवार तक चयन सूची तैयार नहीं हो सकी है।



आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लगातार आंदोलन और प्रदर्शन कर ओबीसी और एससी के करीब 18 हजार पदों पर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। विभाग के एक अफसर के मुताबिक चाहे कुछ पद बढ़ाने पड़ जाएं, लेकिन विभाग ऐसी कोई चूक नहीं करना चाहता, जिससे मामला फिर न्यायालय में जाए या चुनाव के समय ओबीसी या दलित वर्ग के अभ्यर्थी आंदोलन करें।


एक प्रश्न पर अंक प्रदान कर सूची जारी करने की मांग
बेसिक के 69 हजार सहायक भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न पर उच्च न्यायालय द्वारा एक अंक प्रदान करने का निर्णय को लागू करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने मंगलवार को जनता दरबार में उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों ने उक्त एक प्रश्न को चुनौती थी। अभ्यर्थी अब एक अंक प्रदान कर विभाग द्वारा जारी जिलेवार गुणांक के अनुसार चयन प्रक्रिया में आ रहे अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग कर रहे हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में कृष्णा सिंह, विवेक त्रिपाठी, बृजनंदन मिश्र समेत कई शामिल रहे।

Tuesday, December 28, 2021

ओमिक्रोन पर यलो एलर्ट : दिल्ली में सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद, शेड्यूल के मुताबिक होंगे CBSE 10वीं और 12वीं के एग्जाम

Omicron पर yellow alert : दिल्ली में सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद, शेड्यूल के मुताबिक होंगे CBSE 10वीं और 12वीं के एग्जाम



दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी कर कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे। ये घोषणा दिल्ली सरकार द्वारा मंगलवार को ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार के मद्देनजर लगाए लगए कड़े प्रतिबंधों के बाद की गई है। शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में कहा, "डीडीएमए के आदेश का पालन करते हुए, सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, गैर-मान्यता प्राप्त, एनडीएमसी, एमसीडी और दिल्ली छावनी बोर्ड के स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे।" 


शेड्यूल के मुताबिक होंगी CBSE परीक्षाएं
हालांकि शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी नए सर्कुलर में CBSE परीक्षाओं को लेकर कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है। इसमें कहा गया है, "ऑनलाइन शिक्षण गतिविधियाँ, सीबीएसई रजिस्ट्रेशन और CBSE परीक्षाएं व संबंधित गतिविधियां जैसे कि प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट और असाइनमेंट आदि 11 वीं और 12 वीं कक्षा के लिए शेड्यूल के अनुसार आयोजित की जाएंगी।"


दिल्ली में येलो अलर्ट लागू
बता दें कि ये फैसले ऐसे समय में लिए गए हैं जब मंगलवार से दिल्ली में येलो अलर्ट के चलते कई सारे प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली में स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटरों समेत तमाम शिक्षण केंद्रों को बंद करने का फैसला लिया गया है। शादियों और अंतिम संस्कार जैसे कार्यक्रमों में भी 20 से ज्यादा लोगों को शामिल होने की परमिशन नहीं होगी। गैर-जरूरी सामान की दुकानें ऑड ईवन के नियम से खुलेंगी।

यूपी : अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत 1135 तदर्थ शिक्षक किए जाएंगे विनियमित

यूपी : अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत 1135 तदर्थ शिक्षक किए जाएंगे विनियमित


लखनऊ : प्रदेश के अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को 21 साल बाद विनियमित करने की तैयारी है। असल में, शासन ने एडेड कालेजों में कार्यरत वर्ष 2000 तक के शिक्षकों को विनियमित किया था लेकिन, 1135 शिक्षक विनियमितीकरण के नियमों में न आने से छूट गए थे। उनके लिए नियमावली में संशोधन करके विनियमित करने का रास्ता निकाला गया और प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, इस संबंध में जल्द आदेश जारी होने की उम्मीद है।



शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की ओर से शासन को भेजे प्रस्ताव में लिखा गया है कि 22 मार्च 2016 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा-छ को जोड़ा गया। बोर्ड के अधिनियम में नई धारा जोड़े जाने से अल्पकालिक रिक्ति के सापेक्ष प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक श्रेणी में सात अगस्त से 1993 से 25 जनवरी 1999 के मध्य नियुक्त तदर्थ शिक्षक और मौलिक रिक्ति के सापेक्ष पदोन्नति या फिर सीधी भर्ती सात अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 के मध्य नियुक्त तदर्थ अध्यापकों को विनियमित नहीं किया जा सकता था।


एडेड कालेजों में मौलिक रिक्ति के सापेक्ष 555 व अल्पकालिक शिक्षक के रूप में नियुक्त शिक्षकों की तादाद 580 सहित 1135 है, जो नियमावली की वजह से विनियमित नहीं हो सके हैं। कार्मिक विभाग ने 16 दिसंबर 2021 को तदर्थ नियुक्तियों की विनियमितीकरण नियमावली में संशोधन किया। इसमें कहा गया है कि उप्र लोकसेवा आयोग के बाहर के पदों पर तदर्थ रूप से नियुक्त व जो अपेक्षित अर्हताएं रखता हो ने तीन साल की सेवा पूरी कर ली हो को नियमित रूप से नियुक्त किया जा सकता है। ऐसे में अब 1135 शिक्षकों को नियमित किया जा सकेगा। उन्हें नियमित वेतन मिल रहा है इसलिए राजकोष पर अतिरिक्त व्ययभार भी नहीं पड़ेगा।

15-18 साल के बच्चों को दी जाएगी केवल Covaxin की खुराक, जानिए क्या होंगे नियम; देखें स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस

15-18 साल के बच्चों को दी जाएगी केवल Covaxin की खुराक, जानिए क्या होंगे नियम;  देखें स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइंस



देश में कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम का विस्तार हो रहा है और अब 15 से 18 साल के बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन दी जाएगी। इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को पंजीकरण और टीकाकरण अभियान पर दिशानिर्देशों जारी किए हैं। 


स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, 3 जनवरी से शुरू होने वाले 15-18 साल के किशोरों को टीकाकरण के लिए 2007 या उससे पहले का जन्म लिया होना अनिवार्य है। 


नए दिशानिर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम एक टेलीविजन संबोधन में, टीकाकरण अभियान के विस्तार के लिए सरकार के कदम की घोषणा के दो दिन बाद आए हैं। कई राज्यों में कोविड-19 मामले बढ़ रहे हैं, इसके अलावा वायरस के अत्यधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वैरिएंट का तेजी से प्रसार हुआ है।


वैक्सीन लेने के लिए पात्र 15 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए, वैक्सीन का विकल्प 'केवल कोवैक्सीन' होगा क्योंकि यह भारत में स्वीकृत एकमात्र वैक्सीन है जिसकी 15-18 वर्ष आयु वर्ग के लिए WHO की आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी है। ZyCoV-D नाम से एक दूसरा टीका भी राष्ट्रीय दवा नियामक द्वारा 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए अप्रूव है। इसे गुजरात स्थित Zydus Healthcare द्वारा बनाया गया है। ZyCoV-D को अभी तक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है।



ये हैं नई गाइडलाइंस

🔴 - 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण 3 जनवरी, 2022 से शुरू होगा। ऐसे लाभार्थियों के लिए, टीकाकरण का विकल्प केवल "कोवैक्सिन" होगा।

🔴 - उन स्वास्थ्य कर्मियों (HCWs) और फ्रंटलाइन वर्कर्स (FLWs) के लिए, जिन्हें दो खुराकें मिल चुकी हैं, तीसरी खुराक 10 जनवरी, 2022 से उपलब्ध होगी। 

🔴 - 60 साल या इससे ऊपर के गंभीर बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों को डॉक्टरों की सलाह के आधार पर दूसरे डोज के 9 महीने या 39 हफ्ते बाद ही तीसरा डोज या बूस्टर डोज लगेगा। 9 महीना या 39 हफ्ते टीके के दूसरी डोज लगने वाली तारीख से माना जाएगा।


Co-WIN की फीचर्स और प्रावधान:

🔴 - स्वास्थ्य कर्मियों (HCWs) और फ्रंटलाइन वर्कर्स (FLWs) और 60+ गंभीर बीमारी वाले नागरिक अपने मौजूदा Co-WIN अकाउंट के माध्यम से precaution dose यानी तीसरी खुराक के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। - ऐसे लाभार्थियों की पात्रता Co-WIN सिस्टम में दर्ज दूसरी खुराक लगवाने की तारीख पर आधारित होगी।

🔴 -  Co-WIN ऐसे लाभार्थियों को खुराक देय होने पर तीसरी खुराक लेने के लिए एक एसएमएस भेजेगा।

🔴 - वैक्सीनेशन के लिए अपॉइंटमेंट ऑनलाइन या ऑनसाइट बुक किए जा सकते हैं।


🔴 - Cowin प्लेटफॉर्म के प्रमुख डॉ आर एस शर्मा ने कहा, 'आधार और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों के अलावा बच्चे रजिस्‍ट्रेशन के लिए अपने 10वीं कक्षा के आईडी कार्ड का उपयोग कर सकते हैं।'

UPTET 2021: यूपीटीईटी में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को मिलेगी मुफ्त बस सुविधा, जानें कैसे उठाएं इसका लाभ?

UPTET 2021: यूपीटीईटी में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को मिलेगी मुफ्त बस सुविधा, जानें कैसे उठाएं इसका लाभ?




UPTET 2021: 28 नवंबर को परीक्षा के दिन ही पेपर लीक होने के कारण यूपीटीईटी को रद्द कर दिया गया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक महीने के भीतर ही परीक्षा को एक बार फिर से आयोजित करने के आदेश दिए थे।



उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा नवंबर में रद्द हुई उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) का नया शेड्यूल जारी किया जा चुका है। अब यूपी टीईटी का आयोजन 23 जनवरी 2022 को किया जाएगा। UPTET देश की सबसे बड़ी शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में से एक है। ऐसा अनुमान है कि इस साल तकरीबन 21 लाख अभ्यर्थी इस परीक्षा में हिस्सा लेंगे। 


इससे पहले 28 नवंबर को परीक्षा के दिन ही पेपर लीक होने के कारण यूपीटीईटी को रद्द कर दिया गया था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने और एक महीने के भीतर ही परीक्षा को एक बार फिर से पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के आदेश दिए थे। हालांकि, प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण इसमे अधिक देर लगी।


अभ्यर्थियों को मिलेगी मुफ्त बस यात्रा की सुविधा
UPTET में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को सरकार ने मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने का एलान किया है। जो भी छात्र उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार मुफ्त में उनके परीक्षा केंद्र तक जाने की व्यवस्था करेगी। परीक्षार्थी अपना प्रवेश पत्र दिखाकर बस की यात्रा कर सकेंगे। परीक्षार्थी इस बात का ध्यान रखें कि यह सुविधा केवल उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम की बसों के लिए है। 


परीक्षा का शेड्यूल
UPTET 2021 के लिए प्रवेश पत्र 12 जनवरी 2022 को जारी किया जाएगा। जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार यूपीटीईटी का आयोजन 23 जनवरी 2022 को किया जाएगा। परीक्षा का आयोजन दो पाली में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12.30 तक और दूसरी पाली का आयोजन दोपहर 2.30 से लेकर शाम 5 बजे तक किया जाएगा। परीक्षा सभी कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए आयोजित की जाएगी।

 
कब आएंगे परिणाम?
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार  उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2021) के परिणाम 25 फरवरी 2022 को जारी किए जाएंगे। परिणाम से पहले विभाग द्वारा 27 जनवरी 2022 को यूपीटीईटी की उत्तर कुंजी जारी की जाएगी। इस उत्तर कुंजी पर अभ्यर्थियों को 1 फरवरी 2022 तक आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया जाएगा। इसके बाद विभाग 23 फरवरी 2022 को अंतिम उत्तर कुंजी जारी की जाएगी। इसी अंतिम उत्तर कुंजी पर परिणाम आधारित होंगे। 

यूपीटीईटी परीक्षा
यूपीटीईटी परीक्षा हर साल आयोजित की जाती है। इसके माध्यम से यूपी सरकार के स्कूलों में प्राथमिक (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8) कक्षाओं को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों का चयन किया जाता है।

परीक्षा पे चर्चा 2022 : छात्रों और अभिभावकों को पीएम मोदी से संवाद करने का मिलेगा मौका, रजिस्ट्रेशन आज से शुरू

परीक्षा पे चर्चा 2022 : छात्रों और अभिभावकों को पीएम मोदी से संवाद करने का मिलेगा मौका, रजिस्ट्रेशन आज से शुरू



पिछले साल सत्र के दौरान विभिन्न छात्रों के सवालों के जवाब दिए गए थे। ऐसे में किसी खास विषय को पसंद नहीं करने पर पूछे गए सवालों में से एक का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि कुछ विषयों को पसंद न करना या कमजोर होना ठीक है।


परीक्षा पे चर्चा 2022: छात्रों और अभिभावकों को पीएम मोदी से संवाद करने का मिलेगा मौका, रजिस्ट्रेशन कल से शुरू'परीक्षा पे चर्चा 2022' का शेड्यूल निर्धारित हो गया है। इसके अनुसार, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कल से शुरू हो रही है।


नई दिल्ली : 'परीक्षा पे चर्चा 2022' का शेड्यूल निर्धारित हो गया है। इसके अनुसार इस प्रोगाम के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया एक दिन बाद यानी कि 28 दिसंबर, 2021 से शुरू होगा और 20 जनवरी, 2022 तक चलेगा। ऐसे में 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को सलाह दी जाती है कि, वे इस अवधि के दौरान आवेदन कर दें। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट https://www.mygov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। 


वहीं ‘परीक्षा पे चर्चा’ 2022 की तारीख और समय की घोषणा अभी नहीं की गई है। हालांकि, यह फरवरी के महीने में होने की उम्मीद है, क्योंकि कई राज्यों में बोर्ड परीक्षाएं मार्च 2022 में होने वाली हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यह प्रोगाम फरवरी माह में हो सकता है। वहीं इस प्रोगाम से संबंधित ज्यादा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट mygov.in पर विजिट कर सकते हैं।


बता दें, पिछले साल, देश में COVID 19 महामारी की चपेट में आने के कारण इस आयोजन को 7 अप्रैल, 2021 तक के लिए टाल दिया गया था। वहीं कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि, "अगर हम छात्रों पर दबाव कम करेंगे, तो उनका परीक्षा का डर भी कम होगा। माता-पिता को अपने बच्चे की क्षमता को समझना चाहिए और उनकी ताकत पर ध्यान देना चाहिए। माता-पिता को छात्रों के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाना चाहिए।



वहीं पिछले साल सत्र के दौरान विभिन्न छात्रों के सवालों के जवाब दिए गए थे। ऐसे में किसी खास विषय को पसंद नहीं करने पर पूछे गए सवालों में से एक का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि, "कुछ विषयों को पसंद न करना या कमजोर होना ठीक है, लेकिन उन्हें विफलता बिंदु न समझें। सफल लोग वे होते हैं, जो अपनी ताकत पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इसके अलावा, कठिन विषयों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए।" वहीं परीक्षा पे चर्चा 2022 पर अधिक अपडेट प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट का विजिट करते रहें।

UP: कड़ाके की ठंड के बीच 15 दिनों के लिए बंद होंगे प्राइमरी स्कूल, 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगी छुट्टी

UP: कड़ाके की ठंड के बीच 15 दिनों के लिए बंद होंगे प्राइमरी स्कूल,  31 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगी छुट्टी




यूपी के प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी, 2022 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। बेसिक शिक्षा विभाग के टाइम एंड मोशन स्टडी के आदेश के तहत पहली बार शीतकालीन अवकाश दिया जा रहा है। इससे पहले जिलाधिकारी के आदेशों के तहत विभिन्न जिलों में स्कूलों में छुट्टी की जाती रही हैं। यह आदेश कक्षा एक से आठ तक पर लागू होगा। यह अवकाश गर्मियों की छुट्टियों में कटौती करके दिए जा रहे हैं।




14 अगस्त 2020 को अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में लिखा था कि मिशन प्रेरणा के लक्ष्यों को प्राप्त किया जाना जरूरी है। शिक्षकों की ओर से कक्षा शिक्षण कार्यों व बच्चों के साथ सीखने व सिखाने में अधिक समय व्यतीत किया जाए। बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए विद्यालयों के खुलने व बंद होने और ग्रीष्म के साथ ही शीतकालीन अवकाश का प्रविधान किया था। एक अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह आठ से दो बजे तक व एक अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह नौ से तीन बजे तक स्कूल खोले जाएं। स्कूलों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन और 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा।



बच्चों को स्कूल बुलाने को लेकर अभिभावकों की अनुमति जरूरी
ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए स्कूल किसी भी छात्र को आने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पहले अभिभावकों से सहमति लेनी होगी। शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राओं के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। इसको लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश पर गाइडलाइन जारी की गई है। यूपी के सभी बोर्डों के स्कूलों पर यह गाइडलाइन लागू होगी।


 परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों व डीआईओएस को इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को विकल्प के तौर पर ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करानी होगी। यदि स्कूल में किसी को भी जुकाम, बुखार आदि के लक्षण दिखते हैं तो उसे चिकित्सीय सलाह के साथ उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोई भी आयोजन तब ही किया जाए जब उसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा सकता हो।



प्रार्थना सभा में भी नियम लागू हो
यदि स्कूल में प्रार्थना सभा कराई जा रही है या किसी तरह की खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधि हो रही है तो ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन कराया जाए। शिक्षकों व कर्मचारियों का टीकाकरण भी अनिवार्य रूप से कराया जाए। स्कूलों को रोज सेनेटाइज करना होगा। प्रवेश करते समय शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्र-छात्राओं की थर्मल स्कैनिंग की जाए। हैंडवॉश और हाथों को सेनेटाइज कराने की व्यवस्था गेट पर ही की जाए। स्कूल की छुट्टी के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाए। विद्यालय के अंदर भी कम से कम छह फीट की दूरी का पालन कराया जाए। स्कूली वाहनों को भी रोज सेनेटाइज कराया जाए। बसों आदि के अंदर भी शारीरिक दूरी तय की जाए।

Monday, December 27, 2021

29 दिसंबर को सीएम योगी द्वारा अनुदेशकों व रसोईयों का मानदेय बढ़ाने की हो सकती है घोषणा, जानें कितना मिल सकता है लाभ, देखें कार्यक्रम का सजीव प्रसारण प्रातः 10 बजे से इस लिंक पर

दिनांक : 29/12/2021 को पूर्वाह्न  10:00 बजे माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोईयों तथा अंशकालिक अनुदेशकों  से संवाद किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम का दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्राइमरी चैनल पर प्रातः 10:00 बजे से लाईव प्रसारण किया जाएगा तथा यू-ट्यूब पर  https://youtu.be/rbspKvrLl9g  (क्लिक करें) लिंक के माध्यम से देखा जा सकेगा।




29 दिसंबर को सीएम योगी द्वारा अनुदेशकों व रसोईयों का मानदेय बढ़ाने की हो सकती है घोषणा, जानें कितना मिल सकता है लाभ 

शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन होने के आसार


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 दिसम्बर को प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों व अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री के साथ रसोइयों व अंशकालिक अनुदेशकों का संवाद कार्यक्रम राजधानी के अटल बिहारी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर- केजीएमयू में आयोजित किया जा रहा है।


 अनुदेशकों का एक हजार रुपए और रसोइयों का 500 रुपए मानदेय बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। अभी अनुदेशकों को सात हजार रुपए और प्राइमरी स्कूल के रसोइयों को डेढ़ हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। केजीबीवी के हेड कुक का मानदेय 7971 और रसोइये का 5848 रुपए होता है। इनके मानदेय में 1000 रुपए की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव है।



राज्य सरकार ने अगस्त में मंजूर अनुपूरक बजट में मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था। प्रदेश के प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में 377520 रसोइए व केजीबीवी में 2030 रसोइए कार्यरत हैं।  वहीं जूनियर स्कूलों में 27555 अनुदेशक काम कर रहे हैं। 


इस आयोजन में लखनऊ से 500 रसोइए और 348 अंशकालिक अनुदेशक प्रतिभाग करेंगे। वहीं बाराबंकी से 180 अनुदेशक रहेंगे। कार्यक्रम के लिए इन्हें परिचय पत्र उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी खण्ड शिक्षा निदेशकों को सौंपी गई है। रसोइयों व अनुदेशकों के चयन में कोविड प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाएगा और इन्हें कार्यक्रम स्थल तक सुबह आठ बजे तक पहुंचाया जाएगा।


शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन होने के आसार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपूरक बजट पर चर्चा करते हुए शिक्षामित्रों का भी मानदेय बढ़ाने का उल्लेख किया था लेकिन बुधवार को प्रस्तावित समारोह में शिक्षामित्रों को बुलाया नहीं गया है, ऐसे में शिक्षामित्रों का अलग से सम्मेलन हो सकता है। यह भी चर्चा है कि जिस तरह से ग्राम प्रधानों के सम्मेलन में ब्लाक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान किया था वैसे ही शिक्षामित्रों का भी ऐलान हो सकता है।


🆕 update

दिनांक 29 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोइयों एवं अंशकालिक अनुदेशको से संवाद कार्यक्रम का लाइव प्रसारण BRC व विद्यालयों में दिखाए जाने की व्यवस्था किए जाने विषयक



दिनांक 29 दिसंबर को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोइयों एवं अंशकालिक अनुदेशको से संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग कराए जाने विषयक निर्देश जारी। देखें पूर्ण निर्देश


मुख्यमंत्री योगी, उत्तर प्रदेश से दिनांक 29.12. 2021 को बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत रसोईयों एवं अंशकालिक अनुदेशकों का संवाद कार्यक्रम अटल बिहारी बाजपेयी साइन्टिफिक कन्वेशन सेन्टर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ में प्रातः 10 बजे से 11 बजे के मध्य होना सुनिश्चित हुआ है। उक्त कार्यक्रम में लखनऊ व बाराबंकी जनपद से रसोईयों एवं अंशकालिक अनुदेशकों द्वारा प्रतिभाग करने के सम्बन्ध में निम्न विवरणानुसार अग्रेतर कार्यवाही किया जाना है।


69000 शिक्षक भर्ती में दोहरा रवैया : अधिकारियों की चूक मात्र विसंगति और अभ्यर्थियों की त्रुटि पर सेवा खत्म, समान गलती पर अधिकारियों व अभ्यर्थियों को अलग चश्मे से निहार रहा विभाग

69000 शिक्षक भर्ती में दोहरा रवैया : अधिकारियों की चूक मात्र विसंगति और अभ्यर्थियों की त्रुटि पर सेवा खत्म, समान गलती पर अधिकारियों व अभ्यर्थियों को अलग चश्मे से निहार रहा विभाग


बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के करीब छह हजार अभ्यर्थियों का चयन न हो पाने को विसंगति माना है। यह भी कहा कि अधिकारियों की चूक से ऐसा हुआ, विसंगति दूर की जा रही है। विभाग चयन सूची में गड़बड़ी करने वालों की जिम्मेदारी तय नहीं कर सका है। इसके उलट इसी भर्ती में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक व प्रशिक्षण परीक्षा के अंक वेबसाइट पर दर्ज करने में त्रुटि करने वाले अभ्यर्थियों की सेवा समाप्त की जा चुकी है।


बेसिक शिक्षा विभाग सहायक अध्यापक भर्ती में समान गलती पर अधिकारियों व अभ्यर्थियों को अलग चश्मे से निहार रहा है। फिरोजाबाद जिले में अंकित यादव का स्नातक परीक्षा का प्राप्तांक 2237 रहा, जबकि 2297 दर्ज हो गया। रायबरेली के जनमेजय शुक्ल ने बीटीसी थ्योरी का प्राप्तांक 1214 की जगह 1412 दर्ज कर दिया, प्रयागराज के आशुतोष श्रीवास्तव ने बीएड थ्योरी के कालम में प्रैक्टिकल व प्रैक्टिकल के कालम में थ्योरी के अंक दर्ज कर दिए। आजमगढ़ के आशीष त्रिपाठी ने इंटरमीडिएट का प्राप्तांक 335 की जगह 355 दर्ज किया, सीतापुर की शिवांगी का हाईस्कूल में प्राप्तांक 462 रहा लेकिन, भर्ती की वेबसाइट पर 477 दर्ज हो गया, ऐसे ही फरुखाबाद की ज्योति अवस्थी का स्नातक में प्राप्तांक 1017 था और चूकवश 1071 दर्ज हो गया था।


इन अभ्यर्थियों ने भर्ती की लिखित परीक्षा में शानदार अंक हासिल किए थे और एकेडमिक रिकार्ड भी बेहतर होने से उन्हें 70 प्रतिशत से अधिक गुणांक मिला, शिक्षक पद पर चयनित होकर विद्यालय भी पा गए लेकिन, भर्ती की वेबसाइट पर अंक दर्ज करने की उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है, सभी को शिक्षक पद से हटा दिया गया है। कुछ चयनित करीब तीन माह का वेतन तक पा चुके थे उन्हें भी त्रुटि होने पर बाहर कर दिया गया। शिक्षक बनने के बाद मामूली त्रुटि से बाहर होने वालों में सीतापुर की बबली पाल, गोरखपुर की कुमुद श्री, प्रतापगढ़ के सतवंत पटेल, महोबा की स्वाति सिंह, रायबरेली की गायत्री यादव, सीतापुर की रुचि शुक्ला, सुलतानपुर के सौरभ पांडेय सहित करीब 250 से 300 अभ्यर्थी हैं।


बेसिक शिक्षा परिषद के जिन अफसर व कार्मिकों ने लगभग छह हजार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को चयन सूची में जगह नहीं दी, उनकी जिम्मेदारी तक विभाग तय नहीं कर सका है। ये हाल तब है जब राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में चयन सूची को गड़बड़ माना और छह माह से अभ्यर्थी आंदोलन प्रदर्शन करके सरकार की किरकिरी करा रहे थे।


मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर विभाग को स्वीकार करना पड़ा कि गड़बड़ी हुई थी और विसंगति दूर कर रहे हैं। उधर, बेसिक शिक्षा मंत्री का कहना है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हाईस्कूल और इंटर पास कर चुके इन छात्रों को मिलेगा एक लाख का इनाम, जानें कितने लोगों को होगा फायदा

हाईस्कूल और इंटर पास कर चुके इन छात्रों को मिलेगा एक लाख का इनाम, जानें कितने लोगों को होगा फायदा 

हाईस्कूल व इंटर 2020 के मेधावियों को मिलेगा टैबलेट व पुरस्कार में मोटी धनराशि


लखनऊ : प्रदेश सरकार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट 2020 के मेधावियों को टैबलेट व पुरस्कार की धनराशि देने जा रही है। हर जिले में सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षकों को कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।


सरकार हर वर्ष सभी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के टाप 10 मेधावियों को राज्य स्तर व जिला स्तर पर सम्मानित करती रही है। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष 2020 में इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो सका था। साथ ही 2021 में 10वीं और 12वीं में छात्र-छात्रओं को प्रोन्नत किया गया था और मेरिट सूची भी जारी नहीं हुई थी, ऐसे में अब 2020 के मेधावियों को सम्मानित करने की तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं।


शिक्षा विभाग राज्य स्तरीय मेधावी छात्र-छात्रओं को एक लाख रुपये और जिला स्तर के मेधावियों को 21 हजार रुपये देगा। साथ ही उन्हें टैबलेट भी दिए जाएंगे। विभाग ने इसके लिए 3.88 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं और टैबलेट भी डीआइओएस को भेजे जा रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसके लिए मंडलवार नोडल अफसरों की नियुक्ति कर दी है। सभी जिलों को पुरस्कृत करने वाले छात्र-छात्रओं की सूची सोमवार तक शिक्षा निदेशालय को भेजनी है। इसमें पीसी यादव को मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।



हाईस्कूल व इंटरमीडिएट 2020 के मेधावी विद्यार्थियों को इस वर्ष टैबलेट व पुरस्कार की धनराशि दी जाएगी। सम्मान समारोह जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में निदेशक विनय कुमार पाण्डेय ने आदेश जारी कर दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों केा कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।


 राज्य स्तरीय मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपए और जिला स्तर के मेधावियों को 21 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा टैबलेट भी दिए जाएंगे। इसके लिए 3.88 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं और टैबलेट भी डीआईओएस को भेजे गए हैं। 



इसके लिए मंडलवार नोडल अफसर नियुक्त किए गए हैं। सभी जिलों को पुरस्कृत करने वाले विद्यार्थियों की सूची सोमवार तक निदेशालय को भेजनी है। इसके लिए उप निदेशक विकास श्रीवास्तव मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़ की, पीसी यादव को मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, आरके तिवारी को आगरा, बस्ती, कानपुर, राजकुमार को अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर, प्रतिमा सिंह को आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर और विनोद कुमार को प्रयागराज, झांसी व चित्रकूट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार हर वर्ष सभी बोर्डों के दसवीं व इंटरमीडिएट के टॉप 10 विद्यार्थियों को राज्य स्तर व जिला स्तर पर सम्मानित करती है। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो सका था।

Sunday, December 26, 2021

पुस्तकालयों में अब धूल नहीं फांकेगी PhD थीसिस, शोधगंगा पोर्टल पर देख सकते हैं ऑनलाइन

पुस्तकालयों में अब धूल नहीं फांकेगी PhD थीसिस, शोधगंगा पोर्टल पर देख सकते हैं ऑनलाइन



नई दिल्ली। अभी कुछ अरसा पहले तक पीएचडी थीसिस विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में धूल फांका करती थी लेकिन अब यह लोगों के ज्ञान का स्रोत बन रही हैं।


एक बार पीएचडी मंजूर हो जाने के बाद किसी को पता नहीं होता था कि किस पीएचडी में क्या लिखा है। शोध कैसा है। लेकिन अब यूजीसी के प्रयासों से शोधगंगा पोर्टल पर 3.32 लाख पीएचडी थीसिस उपलब्ध हैं। कोई भी शोधकर्ता या पढ़ने का शौकीन इन्हें ऑनलाइन निशुल्क पढ़ सकता है। भविष्य में होने वाली हर पीएचडी को अब इस पर अपलोड करना अनिवार्य भी कर दिया है।


यूजीसी ने कुछ समय पूर्व सभी विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं के लिए थीसिस को शोधगंगा वेबसाइट पर डालना अनिवार्य कर दिया था। दरअसल, यूजीसी ने एक वर्चुअल इनफार्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क की स्थापना की है जिसकी वेबसाइट शोधगंगा है। इस पर अब तक 3,32,242 पीएचडी थीसिस अपलोड हो चुकी हैं। ये पीएचडी विज्ञान से लेकर, सामाजिक विषयों एवं भाषाओं पर भी हैं। पीएचडी अंग्रेजी, हिन्दी समेत अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में हैं। 

पढ़ने को नहीं तैयार विधायक जी, विशेष रूप से तैयार पाठयक्रम में एक भी MLA एडमिशन लेने को नहीं तैयार

पढ़ने को नहीं तैयार विधायक जी, विशेष रूप से तैयार पाठ्यक्रम में एक भी MLA एडमिशन लेने को नहीं तैयार

यूनिवर्सिटी ने विधानसभा के साथ मिलकर इन कोर्स को तैयार किया है, जिससे उन विधायकों को मदद मिल सके जो स्कूली शिक्षा के बाद आगे पढ़ाई नहीं कर पाए।



मध्य प्रदेश में भोज ओपन यूनिवर्सिटी ने विधायकों को ध्यान में रखते हुए कुछ ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स तैयार किए हैं लेकिन किसी भी विधायक ने इसमें दाखिला नहीं लिया है। यूनिवर्सिटी ने उन्हें एक और मौका देते हुए इन कोर्स में एडमिशन लेने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी कहा है कि वे विधायकों से फिर से इन कोर्स में दाखिला लेने का अनुरोध करेंगे। भोज ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार किए ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में रामचरित मानस और भगवद्‌गीता से जुड़े पाठ्यक्रम हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एलएस सोलंकी ने इस बाबत कहा कि अभी के लिए एडमिशन की तारीख बढ़ा दी गई है और आगे विधायकों की रुचि के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। दरअसल, यूनिवर्सिटी ने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को पत्र लिखकर कहा था कि ये कोर्स खास तौर पर विधायकों के लिए हैं, लेकिन किसी भी विधायक ने इस कोर्स में दिलचस्पी नहीं दिखाई।


यूनिवर्सिटी द्वारा कोर्स के बारे में बताए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायकों से कहा था कि इस कोर्स के ग्रेजुएशन के साथ-साथ रामचरित मानस और भगवद्‌गीता के ज्ञान की बारीकियों को भी समझना आसान होगा। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के अनुरोध के बावजूद एक भी विधायक ने एडमिशन नहीं लिया। मध्य प्रदेश विधानसभा में ग्रेजुएशन न करने वाले विधायकों की संख्या 75 है।


यूनिवर्सिटी ने विधानसभा के साथ मिलकर इन कोर्स को तैयार किया है, जिससे उन विधायकों को मदद मिल सके जो स्कूली शिक्षा के बाद आगे पढ़ाई नहीं कर पाए। इस कोर्स के जरिए उनका ग्रेजुएशन भी हो जाएगा। यूनिवर्सिटी ने दर्शनशास्त्र के लिए रामचरितमानस और प्रबंधन के बारे जानकारी के लिए भगवद्‌गीता के अलावा कौटिल्य के अर्थशास्त्र से महत्वपूर्ण प्रसंगों से निकालकर इन पाठ्यक्रमों को विधायकों के लिए तैयार किया है। साथ ही यूनिवर्सिटी ने विधायकों को बीए, बीएससी या बीकॉम के कोर्स के साथ रामचरितमानस में डिप्लोमा का ऑफर दिया है। इसके अलावा, भोज ओपन यूनिवर्सिटी ने विधायकों को पाठ्यक्रम सामग्री भेजने के साथ-साथ ऑनलाइन औरऑफलाइन क्लासेज शुरू करने का इंतजाम भी किया है।

नई भर्ती में डीएलएड प्रशिक्षितों ने मांगे और पद, भर्ती के लिए 17 हजार पद को बताया अपर्याप्त

नई भर्ती में डीएलएड प्रशिक्षितों ने मांगे और पद, भर्ती के लिए 17 हजार पद को बताया अपर्याप्त


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक बनने की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षितों के लिए राहत भरी खबर तो आई, लेकिन इसमें पर्याप्त पद नहीं हैं। कम पद होने से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षित निराश और नाराज हैं। 


प्रशिक्षितों ने बेसिक शिक्षा में रिक्त पदों का विवरण देकर पद बढ़ाने की मांग उठाई। कहा, आंदोलन करेंगे। प्रशिक्षित पंकज मिश्र का कहना है कि डीएलएड प्रशिक्षितों की संख्या पांच लाख से ज्यादा है। बीएड व शिक्षामित्रों को जोड़ दे तो संख्या दो गुना बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में नए भर्ती विज्ञापन में सिर्फ 17000 सहायक अध्यापकों की भर्ती का आदेश पर्याप्त नहीं है।



बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाए जाने की मांग


प्रदेश सरकार की ओर बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 17 हजार नए पदों पर भर्ती करने की घोषणा की है। अभ्यर्थियों पदों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की है। पंकज मिश्र का कहन है कि डीएलएड के करीब 5 लाख प्रशिक्षित हैं और बीएड, शिक्षामित्रों आदि को शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा 15.17 लाख के करीब होगा। सरकार ने 69000 प्रकरण के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर 51112 पद रिक्त होने की बात स्वीकार की थी।



पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष तकरीबन 10 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे में तकरीबन 90 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। वहीं, रोजगार के मुद्दे पर पत्थर गिरजाघर चौराहे के पास 116 दिनों से आंदोलन कर रहे प्रतियोगी छात्रों ने मांग की है कि सरकार प्राथमिक विद्यालयों में सभी रिक्त पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर। इस मौके पर मदन, शिबलू, सुनील यादव, करन सिंह परिहार, गीतांजलि यादव, मीनाक्षी मिश्रा, राहुल यादव, अश्विनी कुमार आदि मौजूद रहे।

सीएम योगी ने वितरित किए टैबलेट व स्मार्टफोन, तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल बताया, अगले एक सप्ताह में सभी पात्र लाभार्थियों को टैबलेट व स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे

सीएम योगी ने वितरित किए टैबलेट व स्मार्टफोन, तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल बताया

अगले एक सप्ताह में सभी कमिश्नरी मुख्यालय पर कार्यक्रम आयोजित कर सभी पात्र लाभार्थियों को टैबलेट व स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे


पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर को ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर प्रदेश में स्नातक, स्नातकोत्तर, मेडिकल, इंजीनियरिंग और कौशल विकास प्रशिक्षण से जुड़े विद्यार्थियों को मुफ्त टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण की योजना का आगाज किया गया।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ के इकाना स्टेडियम में प्रतीकात्मक रूप से कुछ छात्रों को टैबलेट और स्मार्टफोन दिया। इसके बाद स्टेडियम में मौजूद 60 हजार विद्यार्थियों में टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ओलंपिक खेलों में रजत पदक जीतने वाली मणिपुर की मीराबाई चानू को 1.50 करोड़ और उनके कोच विजय शर्मा को 10 लाख की सम्मान राशि देकर सम्मानित किया।



इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि यह हमारे विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया का सपना साकार किया जा रहा है। यह पीएम मोदी के सक्षम नेतृत्व में ही संभव हो पाया है कि कोरोना की महामारी ने जहां बड़े विकसित और ताकतवर देशों को असहाय कर दिया। हमारे देश ने कोरोना का मुकाबला पूरी बहादुरी से किया। मोदी जी के नेतृत्व में सबके साथ व सबके विकास का सपना साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने इस दौरान विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अटलजी की प्रेरणा हमेशा मार्गदर्शक की भूमिका में रहेगी। 


युवाओं के भविष्य से खेलने वालों की सही जगह है जेल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों की सही जगह जेल है। उन्होंने पिछली सरकारों पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमारी सरकार की नीयत साफ है। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को टैबलेट व स्मार्ट फोन के साथ फ्री डिजिटल एक्सेस भी देगी ताकि लाभार्थी इसके जरिये कंटेंट ले सकें और उसे शेयर भी कर सकें।


उन्होंने कहा कि अगले एक सप्ताह में सभी कमिश्नरी मुख्यालय पर कार्यक्रम आयोजित कर सभी पात्र लाभार्थियों को टैबलेट व स्मार्ट फोन बांटे जाएंगे। पिछले साढ़े चार साल में शिक्षा के स्तर में बेहतरी का दावा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों से सख्ती से निपटेगी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वालों और फर्जी नियुक्ति पत्र देने वालों को उनकी सरकार ने जहां जेल का रास्ता दिखाया है, वहीं शिक्षा के स्तर को बेहतर करने के साथ नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।


किसी का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 के पहले नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद का बोलबाला था। सरकारी विभागों में भर्ती की वैकेंसी निकलने के साथ ही एक ही खानदान के चाचा, भतीजा, मामा समेत पूरा परिवार हाथ में थैला लेकर वसूली के लिए निकल पड़ता था। लेकिन अब पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से सरकारी भर्तियां हो रही हैं।


उन्होंने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो काम भी दमदार दिखता है। एक समय नौकरी की तलाश में बाहर जाने वाले यूपी के युवकों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। लेकिन अब यूपी के प्रति देश दुनिया का नजरिया बदला है। 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी की दर 18 फीसदी थी, जो अब घटकर साढे 4 प्रतिशत तक आ गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल के दौरान विकास और कानून व्यवस्था के मामले में प्रदेश ने बेहतर काम किया है। गरीबों की जमीनों पर जबरन कब्जा करने वालों और व्यापारियों से वसूली करने वाले माफिया और आपराधिक तत्वों की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चल रहा है। माफिया के संरक्षकों को इससे तकलीफ हो रही है। औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर मंत्री आशुतोष टंडन, रमापति शास्त्री, डॉ. महेन्द्र सिंह, सतीश द्विवेदी, स्वाति सिंह, धर्मवीर प्रजापति, अजीत पाल सिंह तथा महापौर संयुक्ता भटिया भी मौजूद थीं।


अटल व मालवीय को दी श्रद्धांजलि
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर टैबलेट व स्मार्ट फोन वितरण योजना का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने दोनों महापुरूषों को श्रद्धांजलि भी दी। उन्होंने कहा कि अटल जी कहते थे कि सिद्धांतविहीन राजनीति मौत का फंदा होती है।

 अटल जी ने भारतीय राजनीति को छह दशक तक जिस शुचिता व पारदर्शिता के साथ एक नई दिशा देने का कार्य किया था, वह देशवासियों व प्रत्येक जनप्रतिनिधि के लिए प्रेरणदायी बना रहेगा। पंडित मदन मोहन मालवीय ने भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। दोनों विभूतियों का जीवन युवकों को प्रेरित करता है।


टायर्ड व रिटायर्ड लोगों पर भरोसा न करें युवा
उन्होने कहा कि प्रदेश की युवा शक्ति में असीम संभावनाएं है क्योंकि भारत सबसे युवा देश है। यूपी में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोरोना में वैक्सीन का विरोध करने वाले और गुमराह करने वाले युवा नहीं हैं। यह सब टायर्ड हैं और रिटायर्ड लोग हैं। इन पर भरोसा न करना।


अत्याचार से मुक्ति दिलाने वाले राम व कृष्ण भी युवा थे मुख्यमंत्री ने युवाओं को राम और कृष्ण से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि रावण व कंस के अत्याचार से मुक्ति दिलाने वाले ये दोनों भी युवा थे। उन्होंने सरदार भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस, आदि शंकराचार्य, संत ज्ञानेश्वर, स्वामी विवेकानंद, गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप जैसे तमाम महापुरूषों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने भी युवा काल में ही समाज को नई दिशा दी थी। युवाओं को इनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना होगा।


60026 युवाओं को दिया गया टैबलेट व फोन
मुफ्त टैबलेट और स्मार्ट फोन वितरण का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से 26 युवक-युवतियों को मंच पर बुलाकर टैबलेट दिया। जबकि स्टेडियम में बैठे 250 कॉलेजों से आए 60 हजार से विद्यार्थियों को टैबलेट और स्मार्ट फोन शिक्षकों द्वारा बंटवाया गया।

कोविड के बढ़ते मामलों के चलते प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डों के विद्यालयों में भौतिक पठन-पाठन प्रारंभ किए जाने के संबंध में (SOP) दिशा निर्देश जारी।

ओमिक्रोन वैरिएंट के खतरे को देखते हुए यूपी के स्कूलों में सतर्कता बढ़ी, जारी की गई नई गाइडलाइन


कोविड के बढ़ते मामलों के चलते प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डों के विद्यालयों में भौतिक पठन-पाठन प्रारंभ किए जाने के संबंध में (SOP) दिशा निर्देश जारी।

अभिभावकों की सहमति से ही स्कूल जाएंगे विद्यार्थी, ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे के बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग की गाइडलाइन जारी


कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन के बढ़ते मामलों को देखते हुए शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने रविवार को स्कूल खोलने की गाइडलाइन नए सिरे से जारी की है।


विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों को उनके अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही विद्यालय जाए। ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जाएं। छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग स्कूलों का रोजाना सैनिटाइज जरूरी है। खांसी, जुकाम, बुखार की दशा में स्कूल न बुलाएं व विद्यार्थियों को स्कूल आने के लिए बाध्य न किया जाए।


कोविड-19 के मद्देनजर शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को इस बाबत पत्र जारी किया है।

ओमिक्रॉन के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सभी माध्यमिक विद्यालयों को खोलने से पूर्व उन्हें सैनिटाइज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं और यह प्रक्रिया प्रतिदिन नियमित रूप से सुनिश्चित की जानी है। साथ ही विद्यार्थियों को उनके अभिभावकों की लिखित सहमति के बाद ही विद्यालय बुलाया जाए। 

कोविड-19 के मद्देनजर शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को इस बाबत पत्र जारी किया है। विद्यालयों में हैंडवॉश, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

साथ ही विद्यार्थियों को पंक्तिबद्ध करते हुए और विद्यालय के अंदर भी कम से कम छह फीट की शारीरिक दूरी का पालन किया जाए। विद्यालय में अगर एक से अधिक प्रवेश द्वार हों तो उनका उपयोग सुनिश्चित किया जाए। स्कूली वाहनों को दिन में कम से कम दो बार सैनिटाइज किया जाए। साथ ही सभी शिक्षक, विद्यार्थी एवं अन्य कर्मचारी अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें।


प्रयागराज। ओमिक्रॉन का खतरा देख सभी माध्यमिक स्कूल खोलने से पूर्व उन्हें सेनेटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं और यह प्रक्रिया रोज नियमित करनी होगी। विद्यार्थियों को बुलाने के लिए उनके अभिभावकों की फिर लिखित सहमति लेने के बाद ही बुलाया जाए।

कोविड-19 के मद्देनजर शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और डीआईओएस को इस बाबत पत्र जारी किया है।


Saturday, December 25, 2021

यूपी : युवाओं को फ्री स्मार्ट फोन व टैबलेट का आज मिलेगा उपहार, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे वितरण की शुरुआत

यूपी :  युवाओं को फ्री स्मार्ट फोन व टैबलेट का आज मिलेगा उपहार, सीएम योगी लखनऊ में करेंगे वितरण की शुरुआत


युवाओं के डिजिटल सशक्तीकरण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को उन्हें मुफ्त टैबलेट और स्मार्ट फोन वितरण योजना का शुभारंभ करेंगे। विधानसभा चुनाव में युवाओं को साधने के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार का यह बड़ा दांव है जिसका आगाज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर भव्य समारोह के रूप में होगा। राजधानी लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में होने वाले वितरण समारोह में प्रदेश के सभी जिलों से आये एक लाख छात्र-छात्राओं को सरकार की यह सौगात भेंट की जाएगी।



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मौके पर डिजि शक्ति पोर्टल और डिजि शक्ति अध्ययन ऐप भी लांच करेंगे। युवाओं को दिये जाने वाले सभी स्मार्ट फोन और टैबलेट में डिजि शक्ति अध्ययन ऐप इंस्टाल है जिसके माध्यम से उन्हें शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। शासन की ओर से बूट लोगो और वाल पेपर के माध्यम से रोजगारपरक योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। इसके लिए सरकार आइटी कंपनी इंफोसिस से अनुबंध करने जा रही है। इंफोसिस के शिक्षा और रोजगार से जुड़े 3900 प्रोग्राम युवाओं को निश्शुल्क उपलब्ध होंगे।



मुफ्त टैबलेट और स्मार्ट फोन वितरण योजना के शनिवार को पहले चरण में राजधानी लखनऊ में होने वाले समारोह में अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे प्रदेश भर के युवाओं को स्मार्ट फोन और टैबलेट बांटे जाएंगे। इसके बाद जिलों में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन कर वितरण किया जाएगा।


अभ्युदय योजना के तहत टैबलेट वितरण का शुभारंभ भी आज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभ्युदय योजना के तहत पंजीकृत छात्र-छात्राओं को टैबलेट वितरण का भी शनिवार को शुभारंभ करेंगे। योगी सरकार ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निश्शुल्क कोचिंग देने के लिए अभ्युदय योजना शुरू की है।

Friday, December 24, 2021

जनपद गोरखपुर के परिषदीय प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक/ कम्पोजिट विद्यालयों/ गैरसरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत अध्यापक/ अध्यापिकाओं की सेवाकाल में मृत्यु के पश्चात माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद/ खण्ड पीठ लखनऊ में मृत्यु उपादान के सम्बन्ध में योजित याचिकाओं में पारित आदेश की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

जनपद गोरखपुर के परिषदीय प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक/ कम्पोजिट विद्यालयों/ गैरसरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत अध्यापक/ अध्यापिकाओं की सेवाकाल में मृत्यु के पश्चात माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद/ खण्ड पीठ लखनऊ में मृत्यु उपादान के सम्बन्ध में योजित याचिकाओं में पारित आदेश की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

यूपी : मुफ्त स्मार्टफोन-टैबलेट से नि:शुल्क पढ़ाई भी, इंफोसिस के स्प्रिंग बोर्ड प्लेटफार्म और फ्लैश मैसेजिंग एप डिजिशक्ति अध्ययन के जरिए होगी नई पहल

यूपी : मुफ्त स्मार्टफोन-टैबलेट से नि:शुल्क पढ़ाई भी, इंफोसिस के स्प्रिंग बोर्ड प्लेटफार्म और फ्लैश मैसेजिंग एप डिजिशक्ति अध्ययन के जरिए होगी नई पहल



लखनऊ : प्रदेश के लाखों युवा छात्र योगी सरकार से मुफ्त में स्मार्टफोन-टैबलेट तो पाएंगे ही, इनके जरिये निश्शुल्क पढ़ाई भी कर सकेंगे। इसके लिए उप्र सरकार और बहुराष्ट्रीय कंपनी इंफोसिस के बीच जल्द अनुबंध होगा। स्मार्टफोन-टैबलेट वितरण अभियान में इंफोसिस तकनीकी इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर उप्र सरकार को सहयोग करेगी। योगी सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस 25 दिसंबर को राजधानी लखनऊ से स्मार्टफोन व टैबलेट वितरण अभियान शुरू करने जा रही है।


इंफोसिस के स्प्रिंग बोर्ड प्लेटफार्म पर 3900 कोर्स व प्रोग्राम मौजूद हैं। इस शिक्षण सामग्री को विषयवार छात्रों के टैबलेट व स्मार्टफोन में आनलाइन मुहैया कराया जाएगा।


इसके अलावा एक फ्लैश मैसेजिंग एप डिजिशक्ति अध्ययन भी तैयार कराया जा रहा है जिसमें शिक्षा से जुड़े सरकार के सभी विभाग अध्ययन सामग्री तैयार करेंगे। इसे फ्लैश मैसेजिंग एप के माध्यम से छात्र-छात्रओं को उपलब्ध कराया जाएगा।


जिलों में स्मार्टफोन व टैबलेट वितरण के लिए भंडारण स्थलों को चिन्हित किया जा रहा है। डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय कमेटी स्मार्टफोन व टैबलेट बंटवाने का काम कराएगी।

अपर शिक्षा निदेशक और DIOS पर चलेगा अवमानना का केस, एरियर भुगतान पर लापरवाही पर हाईकोर्ट ने आरोप तय करने का दिया निर्देश

अपर शिक्षा निदेशक और DIOS पर चलेगा अवमानना का केस, एरियर भुगतान पर लापरवाही पर हाईकोर्ट ने आरोप तय करने का दिया निर्देश


कर्मचारी के एरिया का भुगतान न करना अपर शिक्षा निदेशक और जौनपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को भारी पड़ा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि तय करते हुए उन्हें हलफनामा दाखिल करने को कहा है।


जौनपुर में तैनात कर्मचारी सेराज की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की एकल पीठ ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। कोर्ट ने अपने फरवरी 2019 में दिए आदेश में कर्मचारी को ब्याज के साथ एरियर भुगतान का आदेश दिया था। जबकि आदेश का अनुपालन करने के लिए एक महीने का समय दिया गया था।


याची के अधिवक्ता एसबी सिंह ने कहा कि याची को मजबूरन अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपर शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव को समय दिया लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट में अपर शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव और जौनपुर के डीआईओएस राजकुमार पंडित मौजूद रहे।


सरकारी अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सरकार के 25 नवंबर 2021 के आदेश के तहत विभाग में वित्तीय भुगतान के लिए एक कमेटी गठित है। याची सेराज के एरियर का भुगतान भी कमेटी के जरिए किया जाएगा लेकिन कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता के तर्कों को नहीं माना और इसे अपनी अवमानना मानते हुए अगली तिथि पर आरोप तय करने का निर्णय लिया है।

मांग : 69000 शिक्षक भर्ती का संशोधित हो रिजल्ट, तीन माह में निर्णय न लिए जाने से खफा अभ्यर्थी फिर बैठे धरने पर

मांग : 69000 शिक्षक भर्ती का संशोधित हो रिजल्ट, तीन माह में निर्णय न लिए जाने से खफा अभ्यर्थी फिर बैठे धरने पर


प्रयागराज। 69,000 शिक्षक भर्ती परीक्षा की संशोधित उत्तर कुंजी जारी करने की मांग को लेकर दूसरे बृहस्पतिवार को भी सैकड़ों अभ्यर्थी डटे रहे। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी नारेबाजी करते रहे। अभ्यर्थियों ने कहा कि अब आश्वासन नहीं संशोधित परिणाम जारी करने के बाद ही हटेंगे। दोपहर में सचिव और अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से बात की और आश्वासन दिया कि शुक्रवार को मीटिंग हैं। पूरी उम्मीद है कि इस पर उचित निर्णय लिया जाएगा।


69 हजार शिक्षक भर्ती की उत्तरकुंजी में एक प्रश्न का उत्तर गलत था। एक नंबर से चयन से वंचित रह  गए अभ्यर्थी मामले को लेकर कोर्ट में चले गए। कोर्ट के आदेश के तीन माह बाद भी संशोधित परिणाम जारी नहीं किया। लगभग एक पखवारा पूर्व नए सचिव के आने के बाद अभ्यर्थियों ने पीएनपी पर प्रदर्शन कर अपनी मांग रखी। सचिव ने 15 दिन का समय मांगा था। समय सीमा खत्म होने के बाद एक बार फिर से अभ्यर्थी धरने पर बैठ गए हैं।

रायबरेली : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर पदों पर नियुक्ति हेतु आवेदन विज्ञप्ति जारी।

रायबरेली : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर पदों पर नियुक्ति हेतु आवेदन विज्ञप्ति जारी।


ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बढ़ा फर्जीवाड़ा, सतर्कता के लिए शिक्षा मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी Ministry of Education advisory for Ed-tech companies offering online education

ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर बढ़ा फर्जीवाड़ा, सतर्कता के लिए शिक्षा मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी
Ministry of Education advisory for Ed-tech companies offering online education


🔵 फर्जीवाड़ा कर रही किसी कंपनी का नाम नहीं किया सार्वजनिक
🔵 पढ़ाई की सामग्री के लिए सरकारी प्लेटफार्म से जुड़ने की सलाह


नई दिल्ली: कोरोना काल में शुरू हुई आनलाइन पढ़ाई के बाद आनलाइन प्लेटफार्म पर कोचिंग, ट्यूशन सहित शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी ऐसी निजी कंपनियों की बाढ़ आई हुई है, जिनकी गुणवत्ता खराब है। इतना ही नहीं, मौका देखकर ये कंपनियां लोगों के साथ ठगी भी कर रही हैं। यानी कंपनियां सेवाएं देते समय जो वादे करती हैं, उन्हें पूरा नहीं कर रही हैं। साथ ही तकनीकी जागरूकता के अभाव में ग्राहकों के बैंक खाते की जानकारी लेकर उनके साथ ठगी भी कर रही हैं। सरकार ने अभिभावकों और छात्रों की ओर से बड़े पैमाने पर आ रही ऐसी शिकायतों को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी आनलाइन कंपनियों को लेकर सतर्क किया है।


शिक्षा मंत्रलय ने इस संबंध में गुरुवार को एक एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें बताया गया है कि उन्हें ऐसे किसी आनलाइन प्लेटफार्म से जुड़ने से पहले क्या करना चाहिए। सबसे पहले जांच पड़ताल के बाद ही शिक्षा से जुड़े किसी आनलाइन पोर्टल से जुड़ने की सलाह दी गई है। बैंक खाते आदि की जानकारी साझा न करने और उसे आटो डेबिट मोड में न देने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि किसी तरह का संदेह होने पर तुरंत उसकी वेबसाइट पर सुझावों के साथ उसे दर्ज कराएं, ताकि दूसरे छात्र भी ऐसी किसी धोखाधड़ी से बच सकें। 


हालांकि, सरकार की तरफ से ऐसी कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं की गई है, जिस पर फर्जीवाड़ा कर रही कंपनियों के नाम हों। अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों को पढ़ाई से जुड़ी किसी भी सामग्री या वीडियो क्लास के लिए शिक्षा मंत्रलय से दीक्षा, स्वयं, ओ-लैब आदि प्लेटफार्म पर मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही सामग्री को ही अपनाने की सलाह दी है।

ओमिक्रोन के खतरे के बीच क्या यूपी में स्कूल होंगे बंद? जानिए बेसिक शिक्षा मंत्री का जवाब

ओमिक्रोन के खतरे के बीच क्या यूपी में स्कूल होंगे बंद? जानिए बेसिक शिक्षा मंत्री का जवाब



यूपी के बेसिक शिक्षा मं‍त्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ओमिक्रोन की दहशत के बीच स्‍कूलों को बंद करने का अभी कोई प्रस्‍ताव नहीं है.


यूपी के बेसिक शिक्षा मं‍त्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ओमिक्रोन की दहशत के बीच स्‍कूलों को बंद करने का अभी कोई प्रस्‍ताव नहीं है. उन्‍होंने कहा कि सवा सौ करोड़ की आबादी में 120 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है. उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ की आबादी में 18 करोड़ का टीकाकरण हो चुका है. उत्‍तर प्रदेश में च‍िंता का कोई विषय नहीं हैं. यूपी में बाहर से आने वाले कुछ यात्रियों में संक्रमण पाया गया है. सरकार पूरी तरह से स‍तर्क है. किसी तरह की कोई गंभीर समस्‍या की संभावना नहीं है. स्‍कूलों को बंद करने को लेकर अभिभावकों के मन में संशय के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि अभी ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं है.



गोरखपुर के सिविल लाइन्‍स में गुरुवार को उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के 42वें प्रांतीय अधिवेशन में बतौर मुख्‍य अतिथि यूपी के बेसिक शिक्षा राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी पहुंचे. यहां पर उन्‍होंने शिक्षकों की समस्‍याओं को सुना और इसके साथ ही नई शिक्षा नीति को लागू करने को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का धन्‍यवाद देते हुए नई शिक्षा नीति को लागू करने में शिक्षकों की भूमिका पर भी चर्चा की. उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद शिक्षा परिषद शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अनवरत प्रयास करता है. इस अधिवेशन में माध्‍यमिक के प्रधानाचार्य जुटते हैं.


डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कही ये बात

डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा, 'माध्‍यमिक शिक्षा के क्षेत्र में जो चुनौतियां होती हैं, उसके निवारण के लिए सरकार के समक्ष समस्‍याओं को अवगत कराते हैं. सरकार तक उनके विचारों को पहुंचाने के लिए यहां पर सम्मिलित होने आया हूं. स्‍वयं शिक्षक होने के नाते भी यहां पर आता हूं. ये संगठन चुनावी वर्ष में गतिशील बना रहे. इसके लिए भी यहां आकर अच्‍छा लगा. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी नए भारत और यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ नए और उत्‍तम उत्तर प्रदेश का निर्माण करना चाहते हैं, निश्चित तौर पर इस तरह के कार्यक्रम उसमें सहायक साबित होंगे.'

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित अभ्यर्थियों की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान, इन विकल्पों पर हो रहा विचार

69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति सुधारें : आंदोलनरत अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद सीएम योगी का निर्देश 

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित अभ्यर्थियों की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान, इन विकल्पों पर हो रहा विचार


 लखनऊ : प्राथमिक विद्यालयों की 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मुराद पूरी होने को हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार शाम अपने आवास पर प्रभावित अभ्यर्थियों से मिले और उन्हें आश्वस्त किया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समस्या का त्वरित व न्यायसंगत समाधान करने का निर्देश दिया है, उन्हें जल्द ही अवगत कराया जाएगा।

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के आरक्षित वर्ग अभ्यर्थी छह माह से राजधानी में आंदोलन प्रदर्शन कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट लागू कराने की मांग कर रहे हैं।

आयोग ने 29 अप्रैल को जारी अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस भर्ती में आरक्षण देने में विसंगति है। अभ्यर्थियों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को 18 हजार, 598 सीटों में से मात्र 2637 सीटें ही दी गई है, इसी प्रकार एससी वर्ग को इस भर्ती में 21 प्रतिशत के बजाए 16.6 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। आरक्षित वर्ग की सीट पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को चयनित किया गया है, जो पूरी तरह से गलत है।

इन विकल्पों पर अमल संभव

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षित अभ्यर्थियों के चयन में हुई गड़बड़ियों को दूर करने के लिए कुछ अभ्यर्थियों को और नियुक्ति दी जा सकती है। ’नई शिक्षक भर्ती का इंतजार हो रहा है। राजस्व परिषद के अध्यक्ष मुकुल सिंघल की अध्यक्षता में कमेटी भी बनी लेकिन, अब तक भर्ती का एलान नहीं हो सका है।’69 हजार शिक्षक भर्ती के वे अभ्यर्थी जो लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण हैं लगातार मांग कर रहे हैं कि 68 हजार 500 शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों पर उन्हें नियुक्ति दी जाए , अब उनकी भी मांग पूरी कर सकती है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि शुक्रवार को ही बड़ा एलान हो सकता है। सरकार नई भर्ती के बजाए उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर सकती है।



यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुरुवार को 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण की विसंगति को लेकर आंदोलनरत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इसका संज्ञान लेते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को समस्या के त्वरित और न्यायसंगत समाधान के लिए निर्देश दिए है।


69 हजार शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थी लम्बे समय से संघर्षरत हैं और डेढ़ साल से आंदोलनरत हैं। इनका आरोप है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित 18598 सीटों में से 5844 सीटें सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को दे दी गई हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी सरकार को इस मामले में पत्र भेजा है। ये अभ्यर्थी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल कर अपनी बात कहते आ रहे हैं।

सरकार कई बार अपना पक्ष रख चुकी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर रही है। सरकार ने पिछले सत्र में विधानपरिषद में अपना जवाब दिया कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 18,598 पदों के सापेक्ष 31,228 अभ्यर्थियों की निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से भर्ती हुई है। इसमें तय आरक्षण से अधिक ओबीसी और एससी अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। पिछड़ा वर्ग के 12,630 अभ्यर्थी अनारक्षित श्रेणी में अपनी दक्षता के आधार पर चयनित हुए।


भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंचे 69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी

69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी गुरुवार की सुबह भाजपा के राज्य मुख्यालय जा पहुंचे। कार्यालय का गेट खुला होने के चलते वे सीधे अंदर प्रवेश कर गए और उन्होंने वहां प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही काफी संख्या में पुलिस बल वहां पहुंच गया। उन्हें वहां से हटने को कहा गया लेकिन वे नहीं मानें तब पुलिस को उन्हें हटाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। जैसे-तैसे उन्हें भाजपा कार्यालय से बाहर ले जाया गया।

Thursday, December 23, 2021

कस्तूरबा विद्यालय के कार्मिकों की नियुक्ति एवं मानदेय भुगतान सम्बन्धी अनियमितता में प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाए जाने पर तत्कालीन बीएसए बलिया के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित

कस्तूरबा विद्यालय के कार्मिकों की नियुक्ति एवं मानदेय भुगतान सम्बन्धी अनियमितता में प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाए जाने पर तत्कालीन बीएसए बलिया के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित



 

CCL अवकाश स्वीकृति में मनमानी एवं निरीक्षण के नाम पर शिक्षक/शिक्षिकाओं का आर्थिक/मानसिक उत्पीड़न के आरोप में बीएसए गौतमबुद्धनगर के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित

CCL अवकाश स्वीकृति में मनमानी एवं निरीक्षण के नाम पर शिक्षक/शिक्षिकाओं का आर्थिक/मानसिक उत्पीड़न के आरोप में बीएसए गौतमबुद्धनगर के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित


 

कड़ा फैसला : 2022 की यूपी बोर्ड परीक्षा से 163 स्कूल डिबार

कड़ा फैसला : 2022 की यूपी बोर्ड परीक्षा से 163 स्कूल डिबार



प्रयागराज । यूपी बोर्ड ने 2022 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए डिबार स्कूलों की सूची जारी कर दी है। चूंकि पिछले साल कोरोना के कारण बोर्ड परीक्षाएं नहीं हो सकी थीं इसलिए अधिकांश स्कूल पूर्व के वर्षों में आयोजित परीक्षा के दौरान अनियमितता बरतने वाले ही हैं। 


बोर्ड ने 2021 की बोर्ड परीक्षा के लिए 23 जनवरी को 312 डिबार स्कूलों की सूची जारी की थी। इस साल 163 स्कूलों को डिबार की सूची में शामिल किया गया है। ये स्कूल 2022 की परीक्षा के लिए केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। सर्वाधिक 32 स्कूल अलीगढ़, 16 बलिया और 14 प्रयागराज के हैं। मार्च अंत में प्रस्तावित 10वीं-12वीं की परीक्षा के लिए 24 जनवरी तक केंद्रों का निर्धारण होना है। वर्तमान में जिलों से सूचना मांगी जा रही है।

डिग्री शिक्षकों को स्थाई करने पर शासन ने निदेशालय से फिर मांगी रिपोर्ट

डिग्री शिक्षकों को स्थाई करने पर शासन ने निदेशालय से फिर मांगी रिपोर्ट



लखनऊ : प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ा रहे 3920 शिक्षकों के विनियमितीकरण को लेकर चल रही कवायद अब तक बेनजीता है। शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय की रिपोर्ट को अस्पष्ट और अपूर्ण बताते हुए फिर से रिपोर्ट मांगी है।


शासन स्तर पर हुई बैठकों के बाद यह कवायद शुरू हुई थी। चुनाव आचार संहिता लागू होने की तिथि नजदीक आते जाने से संबंधित शिक्षकों की बेचैनी बढ़ गई है। इससे पहले शासन ने अनुदानित महाविद्यालय-विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ के 27 जुलाई 2021 के पत्र पर उच्च शिक्षा निदेशालय से बिंदुवार रिपोर्ट मांगी थी। निदेशालय ने 28 अक्तूबर को अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। 


शासन ने 10 दिसंबर 2021 को निदेशालय को दोबारा पत्र भेजकर कहा कि उसकी रिपोर्ट अस्पष्ट एवं अपूर्ण है। प्रदेश के 303 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में 3920 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनके विनियमतीकरण पर प्रतिमाह 28.95 करोड़ रुपये व्यय भार आएगा। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के विनियमितीकरण का क्या आधार है तथा किन नियमों व पात्रता के तहत इनके विनियमितीकरण के संबंध में कार्यवाही की जानी है। यह पत्र उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव श्रवण कुमार सिंह की तरफ से निदेशक उच्च शिक्षा को भेजा गया है।


अभी महाविद्यालय स्तर से हो रहा भुगतान

प्रदेश के 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में से 303 में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित हैं। यूजीसी के मानकों के अनुसार 3920 शिक्षक नियुक्त हैं जो संबद्धता देने वाले विवि से अनुमोदित भी हैं। इनके वेतन का भुगतान महाविद्यालय करते हैं। अनुदानित महाविद्यालय-विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. अरुणेश ने कहा कि 2006 में राज्य सरकार ने सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित योजना के तहत कार्यरत बीएड के संविदा शिक्षकों को अनुदान पर लेते हुए उनका विनियमितीकरण किया था। इसी आधार पर 3920 शिक्षकों को विनियमित किया जा सकता है।