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Saturday, July 4, 2020

उन्नाव : दागी शिक्षकों से रिकवरी के लिए बैंक खाता होगा फ्रीज, बीएसए ने सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को लिखा पत्र

उन्नाव : दागी शिक्षकों से रिकवरी के लिए बैंक खाता होगा फ्रीज, बीएसए ने सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को लिखा पत्र।


उन्नाव : बेसिक शिक्षा विभाग में एक के बाद एक फर्जीवाड़ा खुल रहा है। लेपर्ड व फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रहे सात शिक्षकों पर अब तक एफआईआर दर्ज हो चुकी है। आरोपितों से नियुक्ति तिथि से लेकर अब तक विभाग द्वारा किए गए भुगतान की बिक्री होगी। नहीं आख्या के आधार पर शुक्रवार को बीएसए ने सहायक वित्त एवं जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। बैंक खाते में डेबिट पर रोक लगाने के लिए खाता फ्रीज किया जाएगा। परिषदीय स्कूलों में बीएड डिग्री धारक शिक्षकों की जांच कर रही आईआईटी व एसटीएफ की जांच में जिले से छह शिक्षक दागी मिले। अभिलेखों में हेराफेरी करके आरोपित जाली अंक प्रमाणपत्र बना सहायक शिक्षक बन गए। फजीवाड़ा पकड़े जाने के बाद इन सभी की गर्दन दबोची गई। एक शिक्षक की डिग्री को एसटीएफ ने जांच में फर्जी पाया। आरापित ने लखनऊ विवि से पढ़ाई की थी। फर्जी अंकपत्र पर नौकरी पा ली। जिस पर एफआईआर दर्ज कराई गई। एक जुलाई को मुख्यालय से मिली रिपोर्ट पर अपर मुख्य सचिव रणुका कुमार ने शिक्षकों से वित्तीय भुगतानों की रिकवरी करने का आदेश किया। बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि वेतन व अन्य वित्तीय भुगतानों की रिकवरी के लिए सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी एके मिश्रा को पत्र लिखा गया है। एडीएम वित्त को भी इस बाबत जानकारी दे दी गई है। बचत खाता फ्रीज कराने के लिए बैंक को पत्र लिखा जाएगा। नोटिस का जवाब नहीं तो संपत्ति की कुर्की : सोमवार तक आरोपितों को रिकवरी के लिए नोटिस जारी हो जाएगी। कोई जवाब न मिलने की सूरत में जिला प्रशासन की मदद से संपत्ति कुर्की होगी। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस शीघ्र ही कार्रवाई शुरू करेगी।






एसडीएम व तहसीलदार जांचेंगे शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र।

उन्नाव : बेसिक शिक्षा विभाग में दागी शिक्षकों की तलाश जिला स्तरीय कमेटी के साथ तहसीलवार तीन सदस्यीय टीम भी रहेगी । यह साल 2010 के बाद की नियुक्तियों की जांच होनी है। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के आदेश पर तहसील स्तर पर गणित हुई टीम में एसडीएम, तहसीलदार व ब्लाक के डीईओ खंड शिक्षा अधिकारी होंगे। अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद सरकार ने सहायक अध्यापक भर्तियों को लेकर गंभीरता दिखाई है। अपर मुख्य सचिव के आदेशानुसार शैक्षिक दस्तावेजों व नियुक्ति पत्रों की जांच का कार्य जिला मुख्यालय स्तर पर एसडीएम, अपर पुलिस अधीक्षक व बीएसएफ की संयुक्त निगरानी में होना है। इसमें शासन ने अब तहसील स्तर पर भी टीम बना दी है। इसमें एसडीएम, तहसीलदार व बीईओ होंगे। फर्जी नियुक्तियों को पकड़ने के लिए जाच के कई बिंदु भी निर्धारित किए गए है। वर्तमान में जो शिक्षक विद्यालय में पढ़ा रहे, वह वही है जिनके नाम का चयन हआ है। इसे प्रकाशित कट ऑफ मेरिट सूची से मिलाया जाएगा। कारागार में वेतन सूची से मिलान जाति-निवास प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाएगा। यही नहीं, ऐसे शिक्षकों की भी जाच होगी, उन्होंने नियुक्ति पत्र रजिस्टर्ड डाक के स्थान पर सीधे प्राप्त किए।


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कानपुर : 17 हजार शिक्षकों के दस्तावेजों की होगी जांच

17 हजार शिक्षकों के दस्तावेजों की होगी जांच

परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 12 हजार से अधिक शिक्षकों की तीन स्तरों पर जांच होगी इसमें अब शक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी शामिल कर लिया गया है। अंतिम सत्यापन आधार से होगा। पहले चरण की जांच प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है। उधर, माध्यमिक के करीब पांच हजार शिक्षकों की जांच के लिए भी दस्तावेज जुटाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रधानाचार्यों को शनिवार तक प्रत्येक शिक्षकों के पूरे दस्तावेज जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करने होंगे। एक के ही पत्राजात से कई स्थानों पर नौकरी, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि, आगरा और संपूर्णानन्द संस्कृत वैवि के फर्जी प्रमाणपत्रों से की जा रही नौकरी जैसे मामले सामने आने के बाद बड़े स्तर पर जांच का फैसला लिया गया है। अब नए सिरे से सभी परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की जानी है।

STF को आशंका, 20% तक फर्जी शिक्षक कर रहे है नौकरी

लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग में दो चार हजार नहीं बल्कि करीव 80 हजार से लेकर एक लाख शिक्षक तक फर्जी निकल सकते हैं। ऐसी आशंका एसटीएफ के अधिकार जता रहे हैं कि कुल शिक्षकों का 20% शिक्षक फर्जी दस्तावेजों पर ही नौकरी कर रहे हैं। एसटीएफ ने पड़ताल के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से उनकी वेबसाइट का लिंक व अन्य जानकारियां मांगी है। दरअसल दो साल पहले मथुरा में फर्जी शिक्षकों की भर्ती का मामला सामने आने के बाद एसटीएफ ने बड़े पैमाने पर शिक्षकों की जांच की थी। एसटीएफ सिर्फ अपनी जांच में 300 से ज्यादा फर्जी शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा चुकी है। एसटीएफ की तरफ से दो साल पहले ही शासन को एक रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें सिफारिश की गई थी कि शिक्षकों के पैन कार्ड के जरिए जांच करवाई जाए इस रिपोर्ट में ही एसटीएफ की तरफ से आशंका जताई गई थी कि प्रदेश में करीव वीस फीसदी शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाई है। एसटीएफ की दो साल पहले की रिपोर्ट को माने तो प्रदेश के करीव एक लाख शिक्षक जांच के दायरे में आ रहे हैं। दो साल पहले जव एसटीएफ ने फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसना शुरू किया था तो तमाम शिक्षकों ने अपने पैन कार्ड और दस्तावेजों को बदलना शुरू कर दिया था। जब शिक्षकों का डेटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा ऐप पर अपलोड किया जाने लगा तो यह गड़बड़ी पकड़ में आई। एसटीएफ के अधिकारियों की मानें तो इस जालसाजी में फर्जी शिक्षकों के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारी और वावू भी बड़े पैमाने पर शामिल हो सकते हैं। मथुरा में भी जब एसटीएफ ने वहां के तत्कालीन वीएसए पर शिकंजा कसना शुरू किया था तो एसटीएफ पर बड़े पैमाने से दबाव बनाया गया था। बाद में वीएसए के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई थी। 


चार लाख से ज्यादा शिक्षकों के दस्तावेजों की होनी है जांच : हालांकि एसटीएफ के लिए चार लाख शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कर पाना मुश्किल होगा। एसटीएफ ने फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग से उनकी वेबसाइट का लिंक मांगा है।


पैन बदलने वाले 3342 शिक्षकों के जांच के आदेश :  बेसिक स्कूलों में नौकरी मिलने के वाद पैन नंबर बदलने वाले 3342 शिक्षकों के जांच के आदेश दिए गए हैं। निदेशालय से गुरुवार को वीएसए को जारी आदेश में कहा गया है कि पैन वदलने वाले शिक्षकों के दस्तावेज की जांच करें। गड़वडी मिलने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। सबसे अधिक 746 शिक्षकों ने मऊ में पैन नंबर वदला है। गोंडा में 642, देवरिया में 381, गोरखपुर में 279,बदायूं में 459, वस्ती में 101 और संतकवीर नगर में 95 शिक्षकों ने पैन नंबर वदले हैं।

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर

माध्यमिक में भी नहीं फर्जी शिक्षकों की कमी, 2014 में खूब उठा था फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर


राज्य मुख्यालय : फर्जी शिक्षकों की भर्ती का शोर अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग तक ही सीमित है जबकि राजकीय इंटर और सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी बहुत बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं। एलटी ग्रेड में 2014 में हुई 6645 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया इसी फर्जीवाड़े के चलते ही पूरी नहीं हो पाई थी। हालांकि यहां जांच के आदेश हो चुके हैं लेकिन अभी इसमें तेजी नहीं आई है। 


सभी मंडलीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सहायताप्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के प्रमाणपत्र वे अपने पास रख लें। अभी ये प्रमाणपत्र स्कूल प्रबंधन के पास हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद सत्यापन की कार्रवाई शुरू होगी। वहीं राजकीय इंटर कॉलेजों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर मौजूद हैं। वहां से भी सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि माध्यमिक शिक्षा में फर्जी प्रमाणपत्रों का शोर पहले से ही है लेकिन इसके लिए कोई पुख्ता प्रयास नहीं किए गए। 



2014 में 6645 पदों पदों के लिए 27 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे क्योंकि उस समय मंडलवार आवेदन लिए जाते थे लेकिन भर्ती के बाद जैसे ही सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई उसमें फर्जी प्रमाणपत्र सामने आने लगे। ज्यादातर मंडलों में 60 से 65 फीसदी चयनितों के प्रमाणपत्र फर्जी निकले थे। इस भर्ती में 2 हजार के आासपास पद ही भर पाएं लेकिन 2016 में इस पर रोक लगा दी गई। इसके बाद ही एलटी ग्रेड भर्ती को लोक सेवा आयोग को देने का फैसला लिया गया।

31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश के बावजूद मेडिकल छात्रों को पढ़ाई व प्रैक्टिकल कराने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने किया जवाब तलब

मेडिकल छात्रों की उपस्थिति क्यों जरूरी? 

हाईकोर्ट ने कहा- कॉलेज बुलाकर पढ़ाई कराने की तर्कसंगत वजह बताए सरकार

मेडिकल कॉलेजों को खोलने के निर्णय को चुनौती


प्रयागराज। स्कूल-कॉलेजों तथा सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों को 31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश के बावजूद मेडिकल छात्रों को कक्षा में बुलाकर पढ़ाई व प्रैक्टिकल कराने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। 




CICSE: बोर्ड ने दसवीं-बारहवीं कक्षा की रद्द परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन योजना की घोषणा की


CICSE: बोर्ड ने दसवीं-बारहवीं कक्षा की रद्द परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन योजना की घोषणा की


काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेशन एग्जामिनेशन (CISCE) ने शुक्रवार को दसवीं और बारहवीं कक्षा की लंबित परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन योजना की घोषणा की। इन परीक्षाओं को कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगे लॉकडाउन के दौरान स्थगित कर दिया गया था। सीआईएससीई की योजना के अनुसार, उम्मीदवारों का मूल्यांकन तीन अंकों के सर्वश्रेष्ठ तीन मापदंडों, पर्सेंटेज सब्जेक्ट प्रॉजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल वर्क के आधार पर किया जाएगा। जिन विषयों के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित की गई है, उनमें से छात्रों को औसत तीन प्रतिशत अंक प्राप्त होंगे।


बोर्ड की शेष परीक्षाओं का आयोजन एक से लेकर 14 जुलाई के बीच होना था, लेकिन काउंसिल ने इन्हें रद्द कर दिया था। सीआईएससीई ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय को बताया था कि रद्द हुए परीक्षाओं के लिए जल्द ही मूल्यांकन योजन को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। अब बोर्ड तीन बिंदुओं के आधार पर ही विद्यार्थियों का रिजल्ट तैयार करेगा। बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों के बेस्ट तीन पेपरों के नंबरों के औसत, विषय का आंतरिक मूल्यांकन और पर्संटेज सब्जेक्ट इंटर्नल असेसमेंट के आधार पर विद्यार्थियों का रिजल्ट तैयार होगा। विषय परियोजना (सब्जेक्ट प्रोजेक्ट) श्रेणी का अर्थ अभ्यर्थियों द्वारा पेपरों के आंतरिक मूल्यांकन में प्राप्त कुल अंकों से है। जबकि, प्रतिशत विषय परियोजना (पर्सेंटेज सब्जेक्ट प्रोजेक्ट) का अर्थ आंतरिक मूल्यांकन में उम्मीदवार द्वारा प्राप्त अंकों के प्रतिशत से है। 

Friday, July 3, 2020

सुल्तानपुर : वेतन से कटने के बाद भी एनपीएस खातों में नहीं पहुंचे 15 करोड़

वेतन से कटने के बाद भी एनपीएस खातों में नहीं पहुंचे 15 करोड़


सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत जिले के लगभग 4200 शिक्षकों करीब 15 करोड़ रुपये वेतन से न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के रूप में कट गया है लेकिन अभी यह रुपया उनके खातों में नहीं भेजा गया है। यह राशि सात माह की बताई जा रही है। इसे लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत लगभग 4200 शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती होती है। इसमें शिक्षकों के मूल वेतन एवं महंगाई का 10 प्रतिशत पैसा काटा जाता है। जून 2019 से एनपीएस का पैसा प्रतिमाह शिक्षकों की वेतन से कट रहा है लेकिन उनके एनपीएस खातों में ऑनलाइन शो नहीं कर रहा है। इसे लेकर शिक्षकों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। उनका पैसा कहां अटका हुआ है, इसे लेकर शिक्षक असमंजस में हैं। 4200 शिक्षकों के औसतन पांच हजार रुपये के हिसाब से प्रतिमाह 2.10 करोड़ रुपये एनपीएस कटौती के रूप में काटे जा रहे हैं। सात माह का लगभग 15 करोड़ रुपये न्यू पेंशन स्कीम के तहत काटा गया है लेकिन उनके खातों में वह धनराशि नहीं पहुंची है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप पांडेय ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक संघ शुरू से ही एनपीएस कटौती का विरोध करता रहा है। एनपीएस का पैसा कहां अटका है, इसकी जांच होनी चाहिए और जब तक यह पैसा शो न हो तब तक कटौती बंद की जानी चाहिए।

10 प्रतिशत शिक्षक व 14 प्रतिशत सरकार का अंशदान एनपीएस में शिक्षकों के मूल वेतन एवं महंगाई का 10 प्रतिशत अंशदान जाता है जबकि सरकार को शिक्षक के मूल वेतन एवं महंगाई का 14 प्रतिशत अंशदान देना होता है। जून 2019 से अभी तक सरकार ने अपने अंशदान का बजट अलॉट नहीं किया है। इसकी वजह से शिक्षकों की एनपीएस कटौती भी वेबसाइट पर शो नहीं कर रही है।

जिले के लगभग 4200 शिक्षकों का कट रहा एनपीएस

National Pension एनपीएस कटौती का विरोध अंबा के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह गौरा ने कहा कि पुरानी पेंशन से सभी सरकारी कर्मचारियों को आच्छादित करना चाहिए। हम सभी शुरू से ही एनपीएस का विरोध कर रहे हैं। सरकार की हीलाहवाली की वजह से हम सभी की गाढ़ी कमाई का पैसा कहां है, यह पता नहीं लग पा रहा है।

बजट मिलते ही शो करेगा पैसा शिक्षकों की सैलरी से एनपीएस की जो कटौती प्रतिमाह हो रही है उसका पैसा एनएसडीएल खाते में भेजा जा रहा है। सरकार का अंशदान मिलते ही पैसा खातों में शो करने लगेगा। किसी भी

शिक्षक या कर्मचारी को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। -मिथिलेश सिंह, वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा

फतेहपुर : विद्यालयों को संवारने में गुरुजी खपाएंगे अपनी ऊर्जा, बेसिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर डीएम ने विद्यालयों को संसाधन युक्त करने के लिए तैयार की कार्ययोजना

फतेहपुर : विद्यालयों को संवारने में गुरुजी खपाएंगे अपनी ऊर्जा, बेसिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर डीएम ने विद्यालयों संसाधन युक्त करने के लिए तैयार की कार्ययोजना।

फतेहपुर : शासन के आदेश के बाद स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं अब विद्यालय को संवारने में ऊर्जा खपाएंगे। बेसिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर डीएम ने विद्यालयों को संसाधन युक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। जिले के 2650 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को ऑपरेशन कायाकल्प के तहत संवारा जाएगा।





 इसमें शौचालय, बाउंड्रीवाल, पेयजल, बिजली की व्यवस्था, भवन की मरम्मत जैसे 14 बिंदुओं पर काम होगा। बीएसए देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत किस विद्यालय में कौन सी कमी है। इसकी सूची डीएम के पास भेजी गई थी। जिसमें ब्लॉक प्रशासन के निर्देश पर ग्राम सभा में प्रधान और सचिव के द्वारा ग्राम निधि से काम कराया  जाएगा। काम शुरू कराने और काम में सहयोग के साथ निगरानी संबंधित विद्यालय का अध्यापक रखेगा। प्रधान और सचिव से अध्यापक तथा बीडीओ से बीएसएफ समन्वय स्थापित करके काम करवाएंगे।




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फतेहपुर : प्राथमिक शिक्षक संघ की डीएम से मांग, शिक्षिकाओं को उपस्थिति से दी जाए राहत

फतेहपुर : प्राथमिक शिक्षक संघ की डीएम से मांग, शिक्षिकाओं को उपस्थिति से दी जाए राहत।


प्राशिसं की डीएम से मांग


फतेहपुर : शिक्षकों को राहत दी जाए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री विजय कुमार त्रिपाठी ने गुरुवार को डीएम को एक पत्र दिया है। परिषदीय स्कूलों को खोले जाने के निर्णय पर मांग की है कि कोरोना संकट के चलते लोगों में भ्रम की स्थिति है। गैर जनपद से आने वाले अध्यापकों को लेकर गांवों में व्यवहार अच्छा नहीं है ।




 वह गांव प्रवेश नहीं दे रहे हैं। वहीं साधनों के अभाव में महिला शिक्षकों को स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कारण कि अभी तक प्राइवेट साधन नहीं चल रहे हैं। ऐसी तमाम समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए शिक्षकों को बंद स्कूलों में न भेजा जाए। महिला अध्यापकों को न बुलाकर तमाम विभागीय कार्य प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों के माध्यम से पूरे  कराएं जाए।


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बदायूं : बरेली निवासी प्रभारी प्रधानाध्यापिका कोरोना संक्रमित, स्कूल खुलने पर एक जुलाई को स्कूल एवं बीआरसी पहुंची थी अध्यापिका, मचा हड़कंप।

बदायूं : बरेली निवासी प्रभारी प्रधानाध्यापिका कोरोना संक्रमित, स्कूल खुलने पर एक जुलाई को स्कूल एवं बीआरसी पहुंची थी अध्यापिका, मचा हड़कंप।


बदायूं : बरेली निवासी इंचार्ज प्रधानाध्यापिका कोरोना संक्रमित हो गई। संक्रमित बरेली से आकर शिक्षण कार्य करती थीं। इंचार्ज प्रधानाध्यापक संक्रमित निकलने के बाद तमाम लोग दहशत में हैं। एक दिन पहले ही स्कूल से लेकर बीआरसी सेंटर तक संक्रमित शिक्षिका के संपर्क में रहे थे अब शिक्षिका संक्रमित निकल आई है और पूरा विभाग परेशान हैं। गुरुवार को सुबह से शाम तक शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा रहा है। शिक्षकों एवं उनके संपर्क वाले बरेली निवासी इंचार्ज प्रधानाध्यापक की बात ही करते रहे हैं।






पता चला है कि दातागंज तहसील, समरेर ब्लाक के एक गांव के प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं। वे एक जुलाई को स्कूल में आई थी, विद्यालय खोलने के बाद स्टाफ के साथ दिन भर रही। दोपहर बाद शिक्षिका बीआरसी केंद्र समरेर पहुंच गई। बीआरसी केंद्र पर शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ के संपर्क में रही थीं, शाम को घर चली गई। इसके बाद गुरुवार सुबह को बरेली में लैब से रिपोर्ट आई और शिक्षिका संक्रमित निकली तो बरेली और बदायूं दोनों जगह हड़कंप मचा। एसडीएम सहित तहसील प्रशासन और पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं हैं। बताया जा रहा है महिला अगर संक्रमित निकली होगी तो बरेली में निकली होगी। यहां से संक्रमित नहीं है नहीं बरेली से जानकारी दी गई है। अगर संक्रमित की जानकारी मिलती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।


परेशानी :  बरेली में रहने वाली शिक्षिका समरेर ब्लाक के स्कूल में तैनात, एक जुलाई को स्कूल खुलने पर पहुंची थी


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एटा : 117 फर्जी शिक्षकों से 50 करोड़ की होगी रिकवरी


फर्जी अभिलेखों से शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं पर शासन शिकंजा कस दिया है। एटा के 117 शिक्षकों से रिकवरी का आदेश शासन ने बीएसए को दिया है। यह राशि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। शासन ने निर्देश मिलने के बाद शिक्षा नरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि शासन विभाग ने आगणन प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगणन पूर्ण होने बाद ही फर्जी शिक्षकों को नोटिस भेजना शुरू कर जाएगा। एक सप्ताह में पैसा जमा करने के लिए कहा गया है। निर्धारित समय में पैसा जमा नहीं हुआ तो आरसी काट दी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग के लेखाकार से जिले के 117 फर्जी शिक्षक शिक्षकों के वेतन आदि की रिकवरी का आदेश मिला है। शिक्षकों से रिकवरी का आगणन पूर्ण होने पर उनको नोटिस जारी किया जाएगा। फर्जी शिक्षक शिक्षिकाओं को दो बार नोटिस जारी किया जाएगा। पैसा जमा होने पर उसके बाद आरसी जारी कराई जाएगी।

फीस जमा करने के दबाव पर अभिभावक नाराज, ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की मिल रही चेतावनी


लखनऊ। शहर के कई निजी स्कूल अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं फोन करके अभिभावकों को धमकाया जा रहा है कि फीस न दी गई तो बच्चे का नाम कट जाएगा। इसे लेकर अभिभावकों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे लगातार थोड़ी थोड़ी फीस जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद दबाव बनाया जा रहा है। राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईएससी से मान्यता प्राप्त करीब एक हजार निजी स्कूल चल रहे हैं। जुलाई से ही ज्यादातर स्कूलों ने अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है। गुरुवार को हजरतगंज के एक निजी स्कूल से अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए फोन किया गया और बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं। फीस न जमा कर पाने की स्थिति में स्कूल की ऑनलाइन क्लासेज से भी बच्चे को बाहर करने की चेतावनी दी गई। वहीं इस पूरे मामले में अभिभावक संगठन के अभिषेक खरे की मानें तो सक्षम अभिभावक लगातार फीस जमा कर रहे हैं। उसके बावजूद स्कूल लगातार दबाव बना रहे हैं। जिससे अभिभावक काफी परेशान हैं।

लोहिया विविः पूरी फीस लेने का किया विरोध

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने पूरी फीस न लिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कोरोना महामारी के चलते काफी अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वे पूरी फीस देने में असमर्थ हैं। इसलिए फीस किश्तों में ली जाए। विवि प्रशासन ने 25 जून को सूचना जारी करके छात्रों से 1 से 4 जुलाई के बीच फीस जमा करने को कहा। छात्रों ने 28 जून को इसका विरोध करते हुए कुलपति को ईमेल से मांग पत्र भेजकर फीस किश्तों में लेने. यूटिलिटी चार्ज को नए सत्र की फीस में समायोजित करने की मांग की थी। मगर उनके मांग पत्र पर कुलपति ने विचार नहीं किया और 6 से 20 जुलाई के ही जमा करने व उसके बाद विलम्ब शुल्क लेने के निर्देश जारी किए हैं।

कोरोना संक्रमण की इस स्थिति में निजी स्कूलों को शासन के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिए। अन्यथा विभागीय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ.मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख


प्रयागराज : प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद शासन स्तर पर प्रदेश के परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में 2010 के बाद चयनित शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से सभी शिक्षकों से तीन दिन के भीतर जरूरी अभिलेख मांगे हैं।


अभिलेख देने के साथ शिक्षकों को अपनी ओर से एक शपथ पत्र भी देना होगा, जिसमें किसी प्रकार की गलती पर रिकवरी सहित वेतन की वसूली और एफआईआर कराने की बात कही गई है। जिला स्तर पर एडीम नजूल की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने तय किया कि यह पता लगाया जाएगा कि जिन अध्यापकों का नाम चयन सूची में थे, क्या वास्तव में वही शिक्षक वर्तमान समय में काम कर रहें या नहीं।


यह भी पता लगाने को कहा गया है कि जिन शिक्षकों का नाम चयन सूची में है, क्या उन्होंने उस पद के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करना होगा। दिव्यांगजनों के प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच की जाए। चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के साथ उनके पैन, आधार के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा की ओर से जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों को जारी पत्र में सभी शिक्षकों से शपथ पत्र भी मांगा गया है, जिसका प्रोफार्मा भी उसमें दिया गया है। 

उच्च शिक्षा : छात्रों की प्रोन्नति फॉर्मूले पर मंथन, अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे


लखनऊ| प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने के मामले में गुरुवार को कोई शासनादेश जारी नहीं हो का।वार्षिक और सेमेस्टर प्रणाली वाले पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षाएं कराए बगैर अगली कक्षाओं और अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला बनाने पर मंथन जारी है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई बैठक में ही परीक्षाएं निरस्त करने का फैसला ले लिया गया था। परीक्षाओं के संबंध में गठित चार कुलपतियों की कमेटी ने परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने की सिफारिश की थी। बैठक में यह भी तय किया गया था कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइड लाइन देखने के बाद छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला तय किया जाएगा। कुलपतियों की कमेटी ने वार्षिक व सेमेस्टर प्रणाली के तहत होने वाली परीक्षाओं के संबंध में अपनी स्पष्ट राय दी है।

ये हो सकता है फॉर्मूला

सूत्रों के अनुसार आंतरिक मूल्यांकन और पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर पदोन्नति करने का फैसला लिया जा सकता है। हालांकि एक पेच यह भी है कि कुछ राज्य विवि में कई प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। ऐसे में एक प्रस्ताव यह भी है कि जिन प्रश्नपत्रों की परीक्षा हो चुकी है, उनका मूल्यांकन करा लिया जाए। फिर कोरोना को देखते हुए मूल्यांकन भी आसान नहीं है। खुद शिक्षक ही विरोध कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में केवल पिछली कक्षा या सेमेस्टर में प्राप्त अंकों के आधार पर ही अंक देकर अगली कक्षा या सेमेस्टर में प्रोन्नत करना होगा। अंतिम वर्ष के छात्रों को पिछले दो वर्षों की परीक्षा में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर अंक दिए जा सकते हैं।

NCERT : पांचवीं कक्षा तक जारी हुआ दूसरा एकेडमिक कैलेंडर

NCERT : पांचवीं कक्षा तक जारी हुआ दूसरा एकेडमिक कैलेंडर


नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री ने बृहस्पतिवार को पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए दूसरा वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी किया। आठ हफ्ते के कैलेंडर में पाठ्यक्रम को साप्ताहिक आधार पर बांटा गया। वैकल्पिक कैलेंडर संस्कृत, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में तैयार किया गया है। निशंक ने कहा कि कोरोना के कारण शिक्षण संस्थान बंद होने से मंत्रालय छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों को लगातार जारी रखने को प्रतिबद्ध है। 


आठ हफ्ते के कैलेंडर को इस प्रकार तैयार किया है, ताकि छात्रों को कंप्यूटर और मोबाइल के सामने कम से कम बैठना पड़े। जिन छात्रों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वह भी इसके जरिये पढ़ाई कर सकेंगे। इसमें ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है।

फर्जी डिग्री प्रकरण : फैजाबाद- वाराणसी से आई फर्जी सत्यापन रिपोर्ट, फर्जी डिग्री के बाद अब फर्जी सत्यापन रिपोर्ट


बरेली : एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के तार संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी, आगरा विवि और फैजाबाद विवि से जुड़े हुए हैं। ठगों का गैंग इतना मजबूत है कि इन विवि से विभाग को फर्जी सत्यापन रिपोर्ट तक भिजवा दी गई। जांच के बाद 45 शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई। अब भीचार शिक्षकों का सत्यापन नहीं हुआ है। सत्र 2015-16 में माध्यमिक शिक्षा के राजकीय स्कूलों में एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती हुई थी। बरेली में 252 पद भरे गए थे। वेतन जारी करने से पहले सत्यापन कराया गया। डा. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा, डा. राम मनोहर लोहिया यूनिवर्सिटी फैजाबाद और संपूर्णानंद संस्कृत विवि वाराणसी से जो सत्यापन रिपोर्ट आई वो भी संदिग्ध थी। पड़ताल में पता चला कि सत्यापन रिपोर्ट भी फर्जी है। एक-एक कर 45 शिक्षकों की फर्जी डिग्री पकड़ में आई। इनमें से दर्जन भर की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट में भी गड़बड़ी मिली थी। वहीं तीन शिक्षक ऐसे मिले जिन्होंने अमान्य बोर्ड की मार्कशीट लगाकर नौकरी पाई थी। इनमें 11 महिलाएं और 34 पुरुष शिक्षक थे। लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक आगरा विश्वविद्यालय और संपूर्णानंद विवि ने दो-दो शिक्षकों की सत्यापन रिपोर्ट नहीं भेजी है। डाक से आई सत्यापन रिपोर्ट पर भरोसा नहीं जेडी डा. प्रदीप कुमार ने बताया कि आगरा विवि और संपूर्णानंद संस्कृत विवि को कई रिमाइंडर दिए जा चुके हैं। अधिकारियों को सत्यापन रिपोर्ट लेने के लिए भेजा गया। विवि उन्हें रिपोर्ट देने में आनाकानी कर रहे हैं। डाक से आई सत्यापन रिपोर्ट पर हमारा भरोसा नहीं है। यह पहले भी फर्जी पाई गई है। 

फर्जी शिक्षकों पर शिकंजा

औरैया में केस दर्ज : फर्जी अभिलेख के जरिए बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे छह शिक्षकों के खिलाफ गुरुवार को केस दर्ज हुआ। 

कन्नौज में एक पैन पर तीन शिक्षक: बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही पैन कार्ड पर नौकरी करने वाले तीन शिक्षक पकड़े गए हैं। फर्जी शिक्षकों को मिले 4.38 लाख हरदोई बीएसए के निर्देश पर मानदेय का ब्योरा तलब किया गया। फर्जी अभिलेखों के सहारे कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में नौकरी पाने वाली मैनपुरी की फर्जी शिक्षिका अंजलि ने नौकरी के दौरान चार लाख 38 हजार 674 रुपये मानदेय पाए हैं। अंजली के मानदेय का खुलासा हिन्दुस्तान की खबर किया गया है। हिंदुस्तान ने गुरुवार के अंक में खबर प्रकाशित की थी।

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद

माध्यमिक व बेसिक के 75 प्रतिशत बच्चे से रहे दूर, गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा रही बेमकसद


गांवों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा साबित हो रही बेमकसद बेसिक में 25 प्रतिशत, माध्यमिक में 30 फीसद बच्चे ही ले रहे लाभ


फ़तेहपुर : कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के दौर में बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई गई कि छात्र छात्राओं की शिक्षा प्रभावित न हो सके।लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई का सच जमीनी हकीकत से दूर है। अभी तक नासिक में 75 प्रतिशत तो माध्यमिक में 70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऑनलाइन शिक्षा से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। 


खासकर ग्रामीणांचलों में स्थित विद्यालयों के बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा बेमकसद साबित हो रही है। इसका कारण है कि अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के पास न ही एडायड फोन हैं और जहां मोबाइल हैं भी वहां गांवों में नेटवर्किंग की समस्या है। 


ऐसे अव्यवस्थाएं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बच्चों का ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए व्हाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य ऐपों के माध्यम से ग्रुप बनाकरबच्चों को जोड़ा गया। विद्यालयों के कक्षाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई कि वह अपने कक्षा के सभी बच्चों को ग्रुप में जोड़ कर प्रतिदिन निर्धारित समय में शिक्षण सामग्री प्रेषित करेंगे और उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी देंगे। 

फतेहपुर : विद्यालयों में भेजी गई मिडडे मील की एक करोड़ 84 लाख धनराशि, बच्चों के खाते में जाएगी भेजी

फतेहपुर : विद्यालयों में भेजी गई एक करोड़ 84 लाख धनराशि, मिडडे मील की धनराशि बच्चों के खाते में जाएगी भेजी।

फतेहपुर। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को घरों में मध्याह्न भोजन योजना का लाभ देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूलों के खाते में एक करोड़ 83 लाख 92 हजार 720 रुपये की धनराशि भेज दी है। जिले के 2650 परिषदीय स्कूल, 122 एडेड स्कूलों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को दोपहर का भोजन देने का प्रावधान है। यह व्यवस्था 2004 से लागू है। वर्तमान समय में इन स्कूलों के दो लाख 38 हजार बच्चों को योजना का लाभ मिल रहा है। करोना संक्रमण के कारण तीन महीने से स्कूल बंद हैं, जिससे बच्चों को एमडीएम का लाभ नहीं मिल रहा है।




ऐसे में विभाग ने बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में लागत राशि के साथ कोटेदार के यहां से अनाज आवंटन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए स्कूलों में अभिभावकों के बैंक खाते और आधार संकलित करा गए हैं। शिक्षा विभाग ने मांग के अनुरूप स्कूलों को भोजन लागत राशि भी भेज दी है। डीसी एमडीएम आशीष दीक्षित ने बताया कि अभिभावकों के खातों में भेजने के लिए जिन स्कूलों में धनराशि कम पड़ती है, वह अलग से मांगपत्र भेज सकते हैं। जल्द ही अवशेष धनराशि खातों में भेज दी जाएगी।


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महराजगंज : ए०आर०पी० चयन हेतु प्रथम तीन चरण के पश्चात रिक्त रह गये पदों के सापेक्ष चयन हेतु आवेदन-पत्र आमंत्रित, विज्ञप्ति देखें

महराजगंज : ए०आर०पी० चयन हेतु प्रथम तीन चरण के पश्चात रिक्त रह गये पदों के सापेक्ष चयन हेतु परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं से आवेदन पत्र आमंत्रित, विज्ञप्ति देखें।

लखनऊ : बाबूगीरी में लगे शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश

लखनऊ : बाबूगीरी में लगे शिक्षकों पर होगी कार्रवाई, बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के दिए निर्देश।

सख्ती

लखनऊ : छात्रों को कक्षा में पढ़ाने के बजाए बीएसए कार्यालय व खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबूगीरी कर रहे शिक्षकों पर अब विभाग के तेवर सख्त हो गए हैं। बीएसए ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो पढ़ाने के बजाए विभाग की योजनाओं व अन्य कामों में लगे हुए हैं। साथ ही ऐसे शिक्षकों की सूची भी तैयार करने को कहा गया है जो तैनात किसी और स्कूल में हैं और पढ़ा कहीं और रहे हैं। जिले के कई शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विभिन्न योजनाओं में जुड़े हुए हैं या फिर कुछ और कार्य कर रहे हैं। महानिदेशक बेसिक शिक्षा की ओर से ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश बीएसए को दिए गए हैं। लखनऊ में तीन दर्जन से अधिक शिक्षक बाबूगिरी कर रहे या फिर तैनात किसी और स्कूल में है और पढ़ा किसी और स्कूल में रहे हैं। विभाग का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस पूरे मामले में बीएसए दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सूची आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




नगर क्षेत्र में पढ़ाई हो जाएगी ठप : नगर क्षेत्र में 50 से अधिक ऐसे स्कूल है। जहां पर पढ़ाने के लिए कोई नियमित शिक्षक तैनात नहीं है। शिक्षकों के रिटायर होने के बाद यह स्कूल खाली हो गए हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों ने अस्थाई तौर पर दूसरे स्कूल के शिक्षकों को शिक्षक रहित स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्रवाई के बाद जो शिक्षक एक साथ दो-दो स्कूलों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, वह उन स्कूलों में पढ़ाना छोड़ देंगे। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।


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फतेहपुर : ड्यूटी करने पहुंचे शिक्षकों को नहीं घुसने दिया गांव में, गैर जनपद के दर्जनों शिक्षकों को रोका, मकान मालिकों ने नहीं खोला ताला

फतेहपुर : ड्यूटी करने पहुंचे शिक्षकों को नहीं घुसने दिया गांव में, गैर जनपद के दर्जनों शिक्षकों को रोका, मकान मालिकों ने नहीं खोला ताला।


फतेहपुर : संवाद परिषदीय स्कूलों में आमद कराने की अनिवार्यता अब शिक्षकों के लिए मुसीबत बनती दिख रही है। गुरुवार से ड्यूटी के लिए अपने स्कूलों व किराए के मकानों में पहुंचे दर्जनों शिक्षकों के लिए नो एंट्री लगा दी गई है। गांव वालों व मकान मालिकों का तर्क है कि आप दूसरे जिलों से यात्रा करके आ रहे हो इसलिए बिना जांच व क्वारंटीन हुए आपको प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस स्थिति में शिक्षक हैरान व परेशान हैं। एक जुलाई से परिषदीय शिक्षक अपने स्कूलों में पहुंच रहे हैं। शिक्षक कार्य के बिना स्कूल जाने के निर्णय का विरोध किया जा रहा है लेकिन अगले आदेश तक स्कूल पहुंचने की मजबूरी दूसरे जिलों से आने वाले शिक्षकों के लिए आफत बन गई है। जान जोखिम में डालकर सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा जब शिक्षक अपने घरों में पहुंचे तो कई शिक्षकों के लिए मकान मालिकों ने ताला नहीं खोला। इसके चलते शिक्षक अपने परिचितों दोस्तों के घरों में पनाह पाने के लिए भटकते रहे।









मकान मालिकों के रवैये से थके शिक्षक जब स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पहुंचे तो अनेक शिक्षकों को गांव की सरहद पर ही रोक दिया गया। गांव वालों ने बाहर से आने वाले शिक्षकों को गांव के भीतर घुसने से मना कर दिया। तर्क दिया कि आप लोगों की वजह से गांव के लोग कोरोना के साए में आ सकते हैं। बल्ली व बांस लगाकर पहरेदारीः हथगाम क्षेत्र के अलौदीपुर गांव में गुरूवार को ऐसा नजारा सामने आया जिसने सभी को हतप्रभ कर दिया। शिक्षक अपने निजी वाहन से जब गांव की सीमा पर पहुंचे तो वहां बल्ली लगाकर रास्ता रोक दिया गया और उनसे वापस जाने को कहा गया। शिक्षकों ने काफी मिन्नतें की लेकिन गांव वालों पर असर नहीं हुआ।

पहले जांच व क्वारंटीन तब मिलेगा प्रवेश : कोरोना को लेकर इतनी अधिक सामाजिक जागरूकता हो गई है या फिर खौफ, जो भी हो लेकिन इतना तो तय है कि लोग अब इसके प्रति सचेत हो गए हैं। मकान  मालिकों व गांव के निवासियों का कहना है कि बाहर से आने वाले शिक्षकों की पहले स्क्रीनिंग की जाए और उन्हें 14 दिन क्वारंटीन कराया जाए तभी घर व स्कूल में दाखिल होने दिया जाएगा।



"हमारे शिक्षकों को काफी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। कई शिक्षकों को गांव के निवासी व मकान मालिक स्कूल व घरों में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। इस मामले से डीएम साहब को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया है। विजय त्रिपाठी, जिला मंत्री प्राशिसं


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फतेहपुर : अब ARP पदों को भरने के लिए तेज की गई कवायद, 08 जुलाई 2020 को GIC में कराई जाएगी परीक्षा

फतेहपुर : अब ARP पदों को भरने के लिए तेज की गई कवायद, 08 जुलाई 2020 को GIC में कराई जाएगी परीक्षा।

फतेहपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में एमपी के रिक्त पदों को भरने की विभाग ने कवायद तेज कर दी है। रिक्त पदों के लिए कुल 64 आवेदन प्राप्त किए गए। जिसमें विभिन्न कमियों के कारण पांच आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। अब 59 शिक्षक इन पदों के लिए परीक्षा देकर अपना भाग्य अजमाएंगे। डीसी अखिलेश सिंह ने बताया कि एमपी के 40 रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे गए थे। जिसमें कुल 64 आवेदन प्राप्त हुए। अधिकारियों द्वारा पांच आवेदनों में त्रुटियां पाए जाने पर रिजेक्ट किया गया है। अब परीक्षा के लिए 59 आवेदक पात्र हैं। बताया कि एमपी परीक्षा आठ जुलाई को राजकीय इंटर कॉलेज में सुबह 11 बजे से आयोजित होगी। विद्यालय के प्रधानाचार्य ही केन्द्र व्यवस्थापक रहेंगे। वहीं नोडल अधिकारी के रूप में डायट प्राचार्य रहेंगे। परीक्षा 11 बजे से साढे बारह बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के लिए आवेदकों को समय पर पहुंचना अनिवार्य होगा। साथ ही जरुरी प्रपत्र भी अपने साथ रखने होंगे।



रिक्त पद : आठ जुलाई को जीआईसी में कराई जाएगी परीक्षा, 40 पदों के सापेक्ष परीक्षा के लिए 59 आए आवेदन



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Thursday, July 2, 2020

गोरखपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के डिजिटलाइजेशन के जाल में फंसे कई फर्जी शिक्षक, मानव संपदा और पैन कार्ड ने पकड़वाए 18 फर्जी शिक्षक

मानव संपदा और पैन कार्ड ने पकड़वाए 18 फर्जी शिक्षक, ऐसे खुला इनका राज

परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत फर्जी शिक्षकों को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कराए जा रहे डिजिटलाइजेशन ने पकड़वाया है। मानव संपदा पोर्टल या पैन कार्ड का ब्योरा ऑनलाइन होते ही असली शिक्षकों की पकड़ में उनके दस्तावेज पर नौकरी कर रहे फर्जी शिक्षक आ गए। जिसके बाद उनकी शिकायतों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई।

जांच के बाद पिछले एक वर्ष में 12 फर्जी शिक्षक बर्खास्त किए गए है चुके हैं। वहीं छह निलंबित होने के साथ ही पांच और शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है। जुलाई तक इनपर बर्खास्तगी की कार्रवाई पूरी होगी।

वर्ष-2019 में एसटीएफ की छापेमारी केे बाद से बेसिक शिक्षा विभाग को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अधिक मात्रा में शिकायतें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। वहीं मानव संपदा पोर्टल और पैन कार्ड, आधार कार्ड को शिक्षकों के रिकार्ड में शामिल करने की शुरूआत हुई।

जैसे-जैसे शिक्षकों का ब्योरा अपडेट करने का सिलसिला शुरू हुआ। वैसे-वैसे कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो-दो जगह नौकरी हासिल करने वाले फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शिकायतें बढ़ने लगीं। आनन फानन में विभाग ने इनपर कार्रवाई की।

अब तक 51 बर्खास्त
जांच के बाद अबतक 51 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कराने के लिए साथ ही 37 शिक्षकों पर बीएसए की तहरीर पर राजघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं प्राथमिक जांच में संदिग्ध मिलने पर 30 शिक्षक निलंबित किए जा चुके हैं। इसकेे अलावा करीब 20 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने कहा कि फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच में मानव संपदा पोर्टल और पैन कार्ड ने गोरखपुर में कई शिक्षकों को पकड़वाया है। आईटीआर जमा करने के दौरान कई शिक्षकों को अपने पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल होने की जानकारी मिली। उन्होंने शिकायत की तो आरोपी पकड़े गए। ऐसे ही मानव संपदा पोर्टल ने भी दो जगह पर एक ही दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों का राजफाश किया है।

फतेहपुर : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलखों के आधार पर नियुक्त अध्यापकों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षिक अभिलखों के आधार पर नियुक्त अध्यापकों की सूचना निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।






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फतेहपुर : मानव सम्पदा पर विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों का सेवा विवरण ऑनलाइन अपलोड किए जाने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : मानव सम्पदा पर विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मियों का सेवा विवरण ऑनलाइन अपलोड किए जाने के सम्बन्ध में।






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विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी


विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी

विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी, जानें क्‍या हो रहा है बदलाव

केंद्र सरकार ने चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है।...


नई दिल्ली। कोरोना संकट की चुनौतियों के बीच कुछ नई उम्मीदें भी जगी है। इनमें ही उच्च शिक्षा के लिए हर साल विदेशों को होने वाला पलायन भी है। जिसे पिछले कई सालों से चाहकर भी सरकार नहीं रोक पा रही है, लेकिन कोरोना काल ने इसकी राह आसान की है। सरकार भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई है। इसके तहत चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है। साथ ही इसे लेकर नए-नए कोर्स शुरू करने से लेकर आकर्षक पैकेज तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। 


चालू शैक्षणिक सत्र में करीब एक लाख छात्रों को रोकने का लक्ष्य
मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश से हर साल करीब सात लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में जाते है। जहां पढ़ाई पर हर साल वह करीब एक लाख करोड़ खर्च करते है। वहीं पढ़ाई के बाद इनमें से ज्यादा छात्र वहीं जॉब भी हासिल कर लेते है। ऐसे में उनकी प्रतिभा का पूरा फायदा दूसरे देश को मिलता है। इसके चलते देश को प्रतिभा और पैसे दोनों ही मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ता है। कोरोना संकटकाल में मंत्रालय के भीतर इन छात्रों को रोकने की कवायद तब जोर पकड़ी, जब विदेशों में पढ़ाई की योजना बनाए बैठे छात्रों और उनके अभिभावकों ने मंत्रालय से संपर्क कर देश में ही बेहतर पाठ्यक्रम और मौके उपलब्ध कराने की मांग की। 


नए पैकेज को घोषित कर सकती है सरकार 
सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने इसके बाद तुंरत ही सकारात्मक रूख दिखाते हुए जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षा के आवेदन की समयसीमा को बढाया था। जिसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा छात्रों के नए आवेदन आए हैं। माना जा रहा है कि यह सारे ऐसे ही छात्र है, जो विदेशों के बजाय अब देश में पढ़ना चाहते है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में सरकार विदेशों में पढ़ाई के लिए कराए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द कराने वाले छात्रों को लेकर कुछ और नए पैकेज भी घोषित कर सकती है।

आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करेंगे शिक्षक, लेंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण भी

आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करेंगे शिक्षक, लेंगे ऑनलाइन प्रशिक्षण भी



प्रयागराज : बुधवार से बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय खुल गए। शिक्षक और कर्मचारी विद्यालय जाने लगे मगर बच्चे भी स्कूल नहीं आएंगे। ऐसे में शिक्षकों और व कर्मचारियों को आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित करने, दिव्यांग बच्चों का विवरण जुटाने समेत अन्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक कैचमेंट एरिया में जाकर छह से 14 आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिह्नित कर उनका विद्यालयों में पंजीकरण कराएंगे। 


समर्थ कार्यक्रम के तहत गांव, बस्तियों और मजरों में दिव्यांग बच्चों का विवरण इकट्ठा कर उनका मोबाइल एप्लीकेशन पर रजिस्ट्रेशन कराएंगे। मिशन प्रेरणा के तहत संचालित ई-पाठशाला के लिए शिक्षक प्रतिदिन कम से कम 10 अभिभावकों से मिलकर दीक्षा एप उनके मोबाइल में डाउनलोड कराएंगे। प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने कितने अभिभावकों को दीक्षा एप डाउनलोड कराया, इसका ब्योरा विभाग को नियमित देना होगा। मानव संपदा पोर्टल पर बचे शिक्षकों व कर्मियों का सेवा विवरण भी ऑनलाइन फीड कराने का काम करना होगा। शिक्षकों के ऑनलाइन प्रशिक्षण के भी कार्यक्रम होंगे।

यूपी बोर्ड के अंक सहप्रमाणपत्र पर हिंदी का बोलबाला, डिजिटल मार्कशीट जैसा ही होगा मूल अंक सहप्रमाणपत्र

यूपी बोर्ड के अंक सहप्रमाणपत्र पर हिंदी का बोलबाला, डिजिटल मार्कशीट जैसा ही होगा मूल अंक सहप्रमाणपत्र।

प्रयागराज : देश के हिंदी भाषी राज्य उत्तर प्रदेश के अहम शिक्षा संस्थान यूपी बोर्ड के अंक सह प्रमाणपत्र में अब हिंदी का बोलबाला है। डिजिटल अंकपत्र में अभ्यर्थी व उनके माता-पिता का नाम हिंदी में भी दर्ज किया गया है। इससे पहले अंग्रेजी में ही परीक्षार्थी आदि का नाम लिखा जाता था। बोर्ड ने यह कदम हाईकोर्ट के आदेश पर उठाया है। इसके लिए पिछले वर्ष कई बार अभ्यर्थी आदि के नामों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया चली। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा 2020 का परिणाम 27 जून को जारी हुआ। कोरोना की वजह से करीब 51 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का परिणाम वेबसाइट पर अपलोड तो हो गया लेकिन, अंक सह प्रमाणपत्र अब तक छप नहीं सके हैं। ऐसे में अगली कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए डिजिटल अंक पत्र देने का निर्णय हुआ। बुधवार से परीक्षार्थियों ने अपने कालेज के प्रधानाचार्य को मार्कशीट के लिए प्रार्थना पत्र दिया। प्रधानाचार्यों ने यूपी बोर्ड सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर वाली कॉपी को डाउनलोड कर उसका प्रिंट निकाला और उसे रिकॉर्ड से मिलाकर सत्यापित करके सौंपा है। यह मार्कशीट परीक्षार्थियों के लिए अस्थाई तौर पर मूल मार्कशीट की तरह ही काम करेगी। इतना ही नहीं डिजिटल मार्कशीट मूल अंकपत्र की तरह ही है। हाईस्कूल उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को कक्षा 11 और इंटर पास करने वालों को स्नातक में दाखिले के लिए यह मान्य होगी। 15 जुलाई से हाईस्कूल के अंक सही प्रमाणपत्र की हार्ड कॉपी मिलेगी और 30 जुलाई से इंटर की मिलेगी।








सभी 75 जिलों के अभिलेख अपलोड : यूपी बोर्ड की ओर से कहा गया कि देर शाम तक सभी 75 जिलों के हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थियों का डिजिटल अंकपत्र अपलोड हो गए हैं।


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गोरखपुर : कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में

गोरखपुर : कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट के उपभोग के सम्बन्ध में

गोरखपुर : 2010 एवं 2011 में नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

गोरखपुर : 2010 एवं 2011 में नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत खाद्यान्न छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत खाद्यान्न छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

गोरखपुर : मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत परिवर्तन लागत की धनराशि छात्रों को वितरित किये जाने के सम्बन्ध में

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक, समिति की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, आज मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय


कोरोना संक्रमण के चलते राज्य विश्वविद्यालयों में नहीं होंगी परीक्षाएं


लखनऊ। प्रदेश विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों को उनके पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के औसत अंक के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है। समिति की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति लेकर निर्णय किया जाएगा। 


कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं होगी। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गठित समिति ने स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम और द्वितीय वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक देकर प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को इस वर्ष केवल प्रोन्नत करने का सुझाव हैं, उनके प्रथम वर्ष के अंकों का निर्धारण अगले वर्ष द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मिले अंकों के औसत से किया जाए। 


समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन विषयों की अनुसार वास्तविक प्राप्तांक दिए परीक्षाएं लॉकडाउन से पहले हो गई थीं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं जाएं। समिति ने अन्य प्रदेशों में औसत अंक देकर विद्यार्थियों को का मूल्यांकन हो गया तो विद्यार्थियों पदोन्नति देने का उदाहरण भी प्रस्तुत को उस विषय में उनकी मेहनत के किया है।


48 लाख विद्यार्थियों पर होगा असर 
समिति ने पूर्व में शासन को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से करा पाना संभव नहीं है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा रहेगा। समिति ने दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर यूपी में भी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का फार्मूला भी दिया है। 


प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, 169 राजकीय महाविद्यालय, 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय, 6531 वित्तविहीन महाविद्यालयों में करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस मामले में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने समिति के अध्यक्ष प्रो. तनेजा से सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति के अनुसार प्रोन्नत करने का सुझाव मांगा था।


MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम

MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम


नई दिल्ली। सरकार ने सभी शिक्षण संस्थान को 31 जुलाई तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने अनलॉक-2 आदेश के तहत सभी राज्यों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनटीए सहित सभी अधीनस्थ विभागों को पत्र लिखा है। इसके तहत इस अवधि में ऑनलाइन क्लास होगी। इसके अलावा शोधकर्ता, शिक्षक व कर्मी घर से काम करेंगे। 



घर से काम करने वाले एडहॉक शिक्षकों और अन्य कर्मियों को ड्यूटी पर माना जाएगा। अमित खरे ने लिखा है कि संस्थान बंद रहने के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय ऑनलाइन क्लास लेते रहेंगे। अन्य गाइडलाइन पूर्ववत रहेंगी। नियम का पालन करते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा

ऑनलाइन कक्षा के चलते बच्चों के साथ न हो जाए यौन शोषण, NCERT ने बचने के लिए जारी की गाइडलाइन

ऑनलाइन क्लास के लिए गाइडलाइन जारी, बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एनसीईआरटी ने की पहल, कई उपयोगी सुझाव दिए।


 ऑनलाइन कक्षा के चलते बच्चों के साथ न हो जाए यौन शोषण, NCERT ने बचने के लिए जारी की गाइडलाइन


चाइल्ड पोर्न... सेक्सी चाइल्ड... टीन सेक्स वीडियो.... इन कीवर्ड की सर्च लॉकडाउन में 95 फीसदी बढ़ गई। लॉकडाउन के शुरुआती 11 दिनों में चाइल्ड इंडिया हेल्पलाइन पर 92 हजार से ज्यादा शिकायतें आईं। ऑनलाइन कक्षाओं और कम्पनियों के डबल डाटा ने बाल यौन शोषण को बढ़ा दिया है। इण्डिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फण्ड की रिपोर्ट के बाद एनसीईआरटी ने ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गाइडलाइन जारी की है। 


इसमें मजबूत पासवर्ड रखना, पासवर्ड बदलना, फोटो या वीडियो पूरी सुरक्षा के साथ सोशल मीडिया पर डालना, नेटवर्क सिक्योरिटी अच्छी करना और किसी भी तरह के खतरे के समय नेटवर्किंग साइट की सपोर्ट टीम को रिपेार्ट किया जा सकने सुझाव शामिल हैं। ओपन  सोर्स या लाइसेंस सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया गया है। कम्प्यूटर में एंटीवायरस डालने और ऑटो अपडेट का विकल्प भी रखें।


अपनी या किसी भी दोस्त की व्यक्तिगत जानकारी जैसे स्कूल, उम्र, फोन नंबर साझा न करने, पर्सनल डिवाइस जैसे पेन ड्राइव, हार्ड ड्राइव आदि पब्लिक कम्प्यूटर पर इस्तेमाल न करने, कुछ एक्सटेंशन वाली (.bat, .cmd, .exe, .pif ) वाली फाइलें न खोलते हुए उन्हें ब्लॉक कर दें। अपने एकाउंट से लॉगआउट करके ही उठें। 

साइबर बुलिंग से ऐसे बचें
यदि कोई साइबर बुलिंग कर रहा है तो उसे अनदेखा करें। किसी भी तरह का जवाब देने से बचे।

यदि कोई आपको अश्लील फोटो या ऐसा कुछ भेज रहा है तो उसे ब्लॉक करें और सोशल नेटवर्किंग साइट में इसे रिपोर्ट करें। यदि आपको लगता है कि साइबर बुलिंग हो रही है तो  स्क्रीन शॉट लें। इसका रिकार्ड रखें। अपने अभिभावकों व शिक्षकों को बताएं, उनकी मदद लें। सोशल मीडिया एकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग कड़ी करें। ऐसे किसी से भी बात न करें जिसे आप असल जिंदगी में न जानते हों। यदि कोई आपको परेशान करे तो 112 पर फोन करें

लखनऊ में भी बाल यौन शोषण वाले कंटेंट की है मांग
आईसीपीएफ का सर्वे 3 से 14 दिसम्बर 2019 में किया गया था लेकिन लॉकडाउन में अन्य स्रोतों व एआई के टूल्स के जरिए प्राप्त जानकारी को शामिल करते हुए बच्चों के प्रति यौन हिंसा के प्रति सावधान रहने की हिदायत दी है। पोर्नहब वेबसाइट के मुताबिक 24 से 26 मार्च के बीच भारत से इस वेबसाइट पर आने वालों में 95 फीसदी का उछाल आया।

वहीं आईसीपीएफ का सर्वे देश भर के 100 शहरों में 14,28,531 लोगों पर किया गया। आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के टूल्स के जरिए ऐसे लोगों को ट्रैक किया गया। फेसबुक, गूगल व इंस्टा से ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया। सर्वे के मुताबिक यूपी के लखनऊ व आगरा में भी सीएसएएम कंटेंट (चाइल्ड सेक्स एब्यूसिंग मैटिरियल ) की मांग बहुत ज्यादा है। सर्वे में सामने आया कि इस्तेमाल करने वालों में 90 फीसदी पुरुष हैं। चूंकि भारत सरकार ऐसे मामलों को लेकर गतिरोध पैदा करती है लिहाजा ज्यादातर लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क इस्तेमाल कर रहे हैं। 
 

फतेहपुर : हाटस्पॉट से आने वाले शिक्षकों से खतरा!, कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जनपदों से आ रहे शिक्षक

फतेहपुर : हाटस्पॉट से आने वाले शिक्षकों से खतरा!, कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जनपदों से आ रहे शिक्षक।

फतेहपुर : शासन के आदेश पर बुधवार से परिषदीय स्कूल सिर्फ शिक्षकों के लिए खुल गए। अधिकांश स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प का काम शुरू न होने से शिक्षक फुर्सत में बैठे रहे तो कुछ कागजी लिखापढ़ी में व्यस्त दिखे। इस बीच दूसरे जिलों के हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों की आमद से उनके साथी भयग्रस्त दिखे। सफर के लिए साधनों की खोज में भी मुश्किलों की बात सामने आई। परिषदीय स्कूलों के ताले खुलने के बाद अब हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों से आने वाले शिक्षकों को लेकर नया खतरा सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि जिले में सैकड़ों शिक्षक कानपुर, रायबरेली, उन्नाव में दूरस्थ जिलों के हैं। कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके घर उनके शहरों में हॉटस्पॉट वाले इलाकों में हैं। आवाजाही बंद होने के बावजूद सरकारी आदेश का पालन करने के लिए यह शिक्षक अपने घरों से तो निकल आए लेकिन अपने साथ कोरोना वायरस के खतरे को भी ला सकते हैं। लोगों ने कहा कि दूरदराज से यात्रा कर आने वाले शिक्षकों को तो पहले 14 दिन के लिए क्वारंटीन होना चाहिए इसके बाद दूसरे साथियों के बीच जाना चाहिए लेकिन विभागीय आदेश के चलते पहले दिन ही वह अपने साथियों यात्रा के दौरान दूसरे व्यक्तियों से घुल मिल गए।





चिंताजनक : कानपुर व लखनऊ समेत दूसरे जिलों से आ रहे हैं शिक्षक, दुधमुंहे बच्चों के साथ महिला शिक्षकों को हो रही परेशानी।


न तो सेनेटाइज नहीं कायाकल्प : जनपद के अधिकांश परिषदीय स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत इस समय काम नहीं हो रहा है। शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर ग्राम प्रधान ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। लखनऊ से आने वाली आईवीआरएस कॉल में इस बारे में बताया गया है। डीएम के आदेश के बावजूद सेनेटाइजेशन का कार्य भी नहीं हुआ है। जिसके चलते शिक्षक संक्रमण की शंका से घिरे हैं।


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मदरसा बोर्ड रिजल्ट : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र

मदरसा बोर्ड : वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने मारी बाजी, टॉपर छात्र-छात्राओं को मिलेंगे एक लाख रुपए, टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र।


रिजल्ट

लखनऊ  :: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वर्ष 2020 की वार्षिक परीक्षाओं में बालिकाओं ने बाजी मारी है। इन परीक्षाओं में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में बालिका परीक्षार्थियों की संख्या 55,457 है और पास होने वाली बालिकाओं का प्रतिशत 84.42 है। कल पास होने वाले बालक परीक्षार्थियों की संख्या-60175 है और पास हुए बालकों का प्रतिशत 79.86 रहा है। टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की धनराशि, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।





प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने लखनऊ में समाज कल्याण निदेशालय के सभागार में उ.प्र. मदरसा शिक्षा परिषद के शैक्षिक सत्र 2019 20 की वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार श्रेष्ठ शिक्षा और संसाधनों के साथ मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य है की मदरसा छात्रों को रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो, जिससे वे राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकें।

उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की वर्ष 2020 की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल एवं फाजिल की परीक्षा में उत्तीर्ण होने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त मेधावी छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये की राशि के चेक, टैबलेट, मेडल एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान राशि का व्यय अरबी-फारसी मदरसा विकास निधि से किया जाएगा। सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी के गणित एवं विज्ञान विषय में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 51,000 रुपये का चेक, एक टैबलेट, मॉडल एवं प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ की सेकंडरी (मुंशी-मौलवी) सीनियर सेकंडरी (आलिम), कामिल व फाजिल की वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षाएं इस वर्ष 25 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक प्रदेश के 552 परीक्षा केन्द्रों में हुई थीं।

प्रमुख बातें : परीक्षार्थियों में कुल 1,38,241 छात्र-छात्राएं संस्थागत तथा 44,017 छात्र-छात्राएं व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में सम्मिलित हुए। परीक्षा वर्ष में कुल सम्मिलित परीक्षार्थियों ( 1,82,259) में कुल 41,207 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। कुल 1,15,650 परीक्षार्थी उत्तीर्ण तथा कुल 25,402 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।

उत्तीर्ण परीक्षार्थियों का कुल प्रतिशत 81.99

टॉपर छात्र-छात्राओं को एक लाख रुपये मिलेंगे, प्रोत्साहन के लिए टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।


01 लाख 82 हजार 259 परीक्षार्थी मदरसा वार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हुए

97 हजार 348 छात्र तथा 84 हजार 911 छात्राएं शामिल हुए





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