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Friday, July 3, 2026

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

02 जुलाई 2026
हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
 



हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

23 जून 2026
हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

प्रशासन ने आरोपों को नकारा
बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

20 जून 2026
हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जानिए पूरा मामला 
गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

Saturday, June 20, 2026

लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम

लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम


प्रयागराज : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आवश्यक डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) / बीटीसी प्रशिक्षण के साथ कहीं और रेगुलर पढ़ाई या कोई नौकरी नहीं की जा सकती, लेकिन छह जिलों में ऐसा किए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे अभ्यर्थियों को प्रदान किया गया डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने शिकायत की जांच कराने के बाद निरस्त कर दिया है।


डीएलएड प्रशिक्षण दो वर्षीय रेगुलर पढ़ाई का डिप्लोमा कार्यक्रम है। इसमें अभ्यर्थियों की निर्धारित प्रशिक्षण संस्थान (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट/निजी प्रशिक्षण संस्थान) में नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। इसके विपरीत कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी कार्यालयों में किसी न किसी पद पर सेवा देते हुए डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूर्ण हो जाने के कई वर्ष बाद कुछ अभ्यर्थियों के विरुद्ध पीएनपी कार्यालय में अलग-अलग शिकायतें की गईं, जिसकी तत्कालीन पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच कराई। इसमें एक प्रकरण एटा जिले का है। 


एटा के अभ्यर्थी ने लेखपाल के पद पर कार्यरत रहते हुए वर्ष 2014 बैच में बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी तरह वर्ष 2013 के बैच में बीटीसी प्रशिक्षण के समय गाजीपुर के एक अभ्यर्थी अनुदेशक के रूप में कार्यरत रहे। इसके अतिरिक्त चंदौली के अभ्यर्थी ने बीटीसी प्रशिक्षण बैच 2015 के दौरान चिकित्सा विभाग में डाटा आपरेटर के पद पर ड्यूटी की, जबकि कौशांबी के अभ्यर्थी ने पंचायत सहायक के रूप में कार्यरत रहने के दौरान डीएलएड प्रशिक्षण बैच-2022 पूरा किया। मेरठ और कासगंज में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। शिकायत सही मिलने पर पीएनपी ने इनके प्रमाणपत्र निरस्त कर सूचना संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को भेजी है।

Tuesday, June 16, 2026

फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

दो साल में दो निजी विवि पर हुई कार्रवाई, 

15 जून 2026
लखनऊ। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने व आर्थिक शोषण आदि से बचाने के लिए यहां की सुविधाओं की जांच की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत अब तक दो विवि में कमियां मिलने पर कार्रवाई की गई है। वर्तमान सत्र में मंडलायुक्त व डीएम की अध्यक्षता वाली 11 कमेटियों को जिलों में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश उच्च शिक्षा परिषद ने दिया है।

प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। पिछले साल जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद में निर्धारित सीट से ज्यादा प्रवेश लेने और फर्जी डिग्री मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। इस विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त की गई है। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। मोनाड यूनिवर्सिटी, हापुड़ में फर्जी डिग्री-मार्क्सशीट मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भी इसकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। बाराबंकी में एक निजी विश्वविद्यालय में हुए बवाल के बाद प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों की भवन, भूमि, सुविधा, गुणवत्ता, डिग्री आदि से जुड़ी जांच कराने का निर्णय लिया गया।

उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले महीने प्रदेश में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में 11 समितियों का गठन किया है। इनको संबंधित मंडल के निजी विश्वविद्यालयों की जांच करने का दायित्व दिया गया है। इसमें संबंधित जिले के डीएम द्वारा नामित उप जिलाधिकारी, राज्य विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी व कुलसचिव, संबंधित मंडल के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आदि शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने इन कमेटियों को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। 


यह प्रमुख चीजें जांचनी होंगी : जमीन, बिल्डिंग, साइट प्लान रिकॉर्ड के साथ, स्पांसर बॉडी, संस्थापक व पैटर्न, चांसलर, प्रो. चांसलर, वाइस चांसलर, प्रो. वीसी, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, स्टेच्यूटरी बॉडी, इसकी बैठकें, ऑडिट फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बैंक एकाउंट स्टेटमेंट, एफडी, खरीद, एसेट स्टॉक वेरीफिकेशन, लाइब्रेरी में हुई खरीद, लाइब्रेरी बजट, यूनिवर्सिटी कैलेंडर परीक्षा व पढ़ाई, एसएसएस-एनसीसी गतिविधि, वार्षिक रिपोर्ट, यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, बीसीआई आदि संस्थाओं के एप्रूवल, एडमिशन पॉलिसी, एक्रीडिटेशन, रैंकिंग, स्टूडेंट ग्रिवांस आदि से जुड़ी चीजें जांचनी हैं।




निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच

निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रमों और नकल रोकने के उपायों की होगी पडताल

खेल मैदान, खेल सुविधाएं, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन होगा


7 जून 2026
 लखनऊप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समितियां विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। जांच उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कामन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और समाप्ति, परीक्षा कार्यक्रम और अवकाश की तिथियों का मिलान किया जाएगा। यह भी जांचा जाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर छात्रों और कर्मचारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं।

परिषद की ओर से गठित समितियां निजी विश्वविद्यालयों की वार्षिक और गतिविधि रिपोर्ट की भी समीक्षा करेंगी। वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों की स्थापना, छात्र नामांकन और उनके कार्यक्रमों की भी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मैदान, खेल सुविधाएं, आडिटोरियम, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनकी गतिविधियों में भागीदारी कितनी है। परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा होगी। सीसीटीवी निगरानी, शोध में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन साफ्टवेयर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश तिथियों और परीक्षा कार्यक्रमों को भी राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परखा जाएगा। समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाणपत्रों के प्रारूप, सुरक्षा फीचर और नामकरण की भी जांच करेंगी। राज्य सरकार को भेजे जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन, छात्र संख्या, वित्तीय विवरण और अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सभी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजी गई है या नहीं।




प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?

27 मई 2026
लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी।  यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।

नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।

कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा। 


24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया 
विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।


नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।


Wednesday, June 3, 2026

छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

छात्रों के गुस्से के आगे झुकी सरकार, CBSE चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM टेंडर की जांच के लिए समिति गठित

12वीं के नतीजों के 21 दिन बाद कार्रवाई, ओएसएम टेंडर की जांच के लिए राधा चौहान की अध्यक्षता में समिति गठित, एक माह में देगी रिपोर्ट

02 जून 2026
नई दिल्ली। 12वीं कक्षा के मूल्यांकन में मचे हाहाकार और निविदा आवंटन में अनियमितताओं को लेकर विद्यार्थियों में भारी गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के चेयरमैन राहुल सिंह व सचिव हिमांशु गुप्ता को हटा दिया। साथ ही, ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रक्रिया के लिए टेंडर जारी करने में गड़बड़ियों की जांच के लिए उच्चस्तरीय एक-सदस्यीय समिति का गठन किया है। क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष व आईएएस अधिकारी राधा चौहान की अध्यक्षता वाली इस समिति को एक महीने में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अफसर और केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह राहुल सिंह की जगह लेंगे, जिन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। सीबीएसई के सचिव पद से हटाए गए हिमांशु गुप्ता की जगह यहभीजिम्मेदारी अब वरिष्ठ अधिकारी वरुण भारद्वाज को सौंपी गई है।

कैबिनेट सचिवालय की ओर से गठित जांच समिति मुख्य रूप से तीन गंभीर पहलुओं पर गौर करेगी। जांच की जाएगी कि क्या विशिष्ट तकनीकी प्रमाणन और टर्नओवर की शर्तों को सिर्फ खास कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर कमजोर किया गया? यह भी देखा जाएगा कि दागी कंपनी को तरजीह क्यों मिली।

 टेंडर के मूल नियमों में बदलाव कर पहले से विवादित या काली सूची में डाले जाने योग्य कंपनी को इतना संवेदनशील काम किन अफसरों की मिलीभगत से दिया गया। समिति यह भी जांच करेगी कि इस डिजिटल सिस्टम का पहले कोई पायलट टेस्ट किया गया था या इसे पूर्व परीक्षण के बिना ही लागू कर दिया गया। साथ ही, इसे इतनी जल्दबाजी में क्यों लागू किया गया।

गंभीर आरोप... ओएसएम का ठेका हैदराबाद की कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक को देने के लिए सीबीएसई ने नियमों और शर्तों में फेरबदल किए। यह कंपनी पहले ग्लोबारेना के नाम से काम करती थी। 2019 में तेलंगाना बोर्ड के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।


जांच के बाद होगी आपराधिक कार्रवाई
समिति की अध्यक्ष राधा चौहान को जांच में पूरी स्वायत्तता दी गई है। वह जांच के लिए जरूरत पड़ने पर किसी भी अन्य सरकारी विभाग से सक्षम अधिकारियों की सेवाएं भी ले सकती हैं। समिति की रिपोर्ट के आधार पर घोटाले में संलिप्त अधिकारियों और निजी वेंडर पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के बाद परीक्षा कराने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

सार्थक ने संसदीय समिति के समक्ष दी प्रस्तुति
12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत (17) ने मंगलवार को संसदीय समिति के सामने पेश होकर ओएसएम से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं पर प्रस्तुति दी। उसने समिति को अपनी पड़ताल के बारे में सात पन्नों में प्रक्रिया की खामियां बताईं। झारखंड निवासी सार्थक ने बोर्ड की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक में सीबीएसई अधिकारियों से कहा, आपसे अच्छा रिसर्च का काम तो इस छात्र ने किया है।




CBSE ने माना-ऑनलाइन मार्किंग पोर्टल में हुई चूक, खामियां करेंगे दूर, बोर्ड ने पहले दावों को किया था खारिज, अब कहा-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ले रहे आईआईटी और साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मदद

31 मई 2026
नई दिल्ली। लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के मानसिक उत्पीड़न के बाद आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल में चूक स्वीकार कर ली है। ओएसएम पोर्टल दो बार हैक होने के बाद सीबीएसई ने रविवार को कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में सामने आई खामियों को ठीक कर लिया गया है। विशेषज्ञ इसमें आ रही अन्य समस्याएं दूर करने के प्रयासों में जुटे हैं।

बोर्ड ने खामियों के दावों को पहले खारिज कर दिया था। बोर्ड के रुख में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब 12वीं के दो छात्रों ने सीबीएसई क्लाउड स्टोरेज मैनेजमेंट पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। 12वीं की परीक्षा की कॉपियों की ऑनलाइन मार्किंग में गड़बड़ियों पर लगातार विवाद बना हुआ है। 

सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, हम ऑनमार्क पोर्टल में खामियों की गहन निगरानी कर रहे हैं। इन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए पिछले कुछ दिनों में सरकार के विभिन्न विभागों के साथ आईआईटी से साइबर सुरक्षा पेशेवरों की विशेषज्ञ टीम को तैनात किया गया है, ताकि प्रणाली को और दुरुस्त किया जा सके। 

सार्वजनिक डोमेन में तकनीकी चूक की खबरें आने के तुरंत बाद सरकार और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों ने मिलकर इस काम को शुरू कर दिया, जिसके बाद अब खतरे को पूरी तरह टाल दिया गया है। हालांकि, अन्य शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

एथिकल हैकर का जताया आभार
सीबीएसई ने सतर्क नागरिकों और हैकर का आभार जताया, जिन्होंने ऐसी खामियों की ओर ध्यान दिलाया। अधिकारियों ने बताया कि वे इनमें से कई साइबर विशेषज्ञों के साथ सीधे संपर्क में हैं और उनकी मदद ले रहे हैं। बोर्ड ने कहा, कोई भी जानकारी देने के लिए लोगों से हमारी सुरक्षा टीम से संपर्क करने का अनुरोध है। किसी भी तकनीकी इनपुट या सुरक्षा संबंधी जानकारी को साझा करने के लिए secy-cbse@nic.in पर मेल करने को कहा गया है।


सवाल दर सवाल : स्कैनिंग से ऑन स्क्रीन मार्किंग तक

🔴 एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने 25-26 मई को दावा कि ओएसएम पर तकनीकी खामियों का पता लगाकर उसने साइबर सुरक्षा एजेंसी सर्ट-इन को जानकारी भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

🔴 निसर्ग ने मास्टर पासवर्ड मिलने का दावा भी किया...कहा, वह कॉपियों के नंबर तक बदल सकता है। हालांकि, सीबीएसई ने कहा-जिस पोर्टल के हैक का दावा है, वह सिर्फ परीक्षण व समीक्षा के लिए बनाई सैंपल साइट थी।

🔴 पुनर्मूल्यांकन भुगतान में भी पोर्टल में गड़बड़ियां आईं। एचडीएफसी पेमेंट गेटवे में तकनीकी सेंधमारी हुई। इससे 50 छात्र प्रभावित हुए।

🔴 छात्र सार्थक सिद्धांत ने उत्तर पुस्तिकाएं साझा कर सवाल उठाया-क्या इन कॉपियों को वास्तव में उच्च क्वालिटी के स्कैनर से स्कैन किया है। कॉपियों में परछाईं व मुड़े पन्ने क्यों दिख रहे हैं। स्कैनर से स्कैन किए गए दस्तावेज में ऐसा नहीं होता।

Wednesday, April 8, 2026

अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश

अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश

 निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी होगी जांच

वेबसाइट पर अपलोड संबद्ध 29,208 स्कूलों की सूची से होगी अमान्य की पहचान


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी - बोर्ड) ने परिषद से संबद्ध 29,208 - विद्यालयों की सूची upmsp.edu.in पर अपलोड कर अमान्य विद्यालयों की पहचान सुगम कर दी है। इसके साथ ही बोर्ड के - सचिव भगवती सिंह ने सभी - डीआइओएस, बीएसए व बीईओ को - पत्र लिखकर अमान्य विद्यालयों के विरुद्ध 18 अप्रैल तक सघन - अभियान चलाकर उनके विरुद्ध - कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ - ही कहा है कि जांच के दौरान निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी जांच कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। इस कार्रवाई की रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


यूपी बोर्ड से संबद्ध प्रदेश भर में संचालित विद्यालयों में 10,295 हाईस्कूल स्तर (कक्षा नौ-10) के हैं, जबकि 18,913 विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर तक (कक्षा नौ से = 12) के हैं। इसके अलावा संचालित अन्य विद्यालय अमान्य माने जाएंगे।

बोर्ड सचिव ने कहा है कि परिषद की विनियमावली तथा शिक्षा का - अधिकार अधिनियम के तहत बिना मान्यता प्राप्त किए विद्यालय की स्थापना या संचालन पूर्णतया प्रतिबंधित है। संचालन पर इनके विरुद्ध भारी अर्थदंड व विधिक कार्यवाही का प्रविधान है। उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम अधिनियम 2002 के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालय में कार्यरत शिक्षक का निजी कोचिंग संस्थान में सेवाएं देना वर्जित है।

हाई कोर्ट ने भी एक याचिका पर आदेश दिए हैं कि प्रदेश भर में संचालित अमान्य संस्थानों को चिह्नित किया जाए। मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शासन के नौ जून 2025 के निर्देश पर सभी जिलों में डीआइओएस की अध्यक्षता में समिति गठित है। समिति के माध्यम से अभियान चलाकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए बोर्ड ने एक प्रारूप भी जारी किया है। इसमें जनपदवार संचालित अमान्य विद्यालयों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई, निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की संख्या व उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण 30 अप्रैल तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

Tuesday, February 3, 2026

फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश

फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश



फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि ऐसे सभी असिस्टेंट टीचरों के मामलों की पूरे राज्य में व्यापक जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने इस संबंध में राज्य सरकार को मैंडमस जारी किया है।


हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि यह जांच संभव हो तो छह महीने के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल अवैध नियुक्तियों को रद्द करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे शिक्षकों से अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी भी की जाए। इसके साथ ही फर्जी नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार द्वारा कई सर्कुलर और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समय पर और प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। यह निष्क्रियता न सिर्फ धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करती है। कोर्ट ने कहा कि इससे छात्रों के हितों को गंभीर नुकसान होता है, जो न्यायालय के लिए सर्वोपरि है।

Monday, January 12, 2026

फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

 राज्यमंत्री असीम अरुण ने दिए निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत कुछ कोर्स कोऑर्डिनेटरों द्वारा फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त किए जाने के प्रकरण पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए विभाग में आउटसोर्सिंग से जुड़े मामलों में स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।


शासनादेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के जरिये की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह निर्धारित नियमों, मानकों और प्रक्रिया के अनुरूप हों। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त सभी कर्मियों के शैक्षिक और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी कराया जाएगा। उन्होंने वर्तमान में विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के दस्तावेजों की भी अगले तीन महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि विभाग में किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी नियुक्तियां पारदर्शी और नियमों के अनुसार होंगी। ब्यूरो

Sunday, November 30, 2025

यूपी में निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षको की शैक्षिक अर्हता की जांच होगी, बिना अर्हता ही शिक्षक रखने की शिकायत पर एनसीटीई की ओर से दिए गए जांच के आदेश

यूपी में निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षको की शैक्षिक अर्हता की जांच होगी, बिना अर्हता ही शिक्षक रखने की शिकायत पर एनसीटीई की ओर से दिए गए जांच के आदेश


75 जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक निजी स्कूलों की शुरू करेंगे पड़ताल


लखनऊ। यूपी में सभी निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की जांच कराई जाएगी। मानक विपरीत बिना अर्हता के शिक्षकों से पढ़ाई पर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नाराजगी जताई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग अब सभी जिलों में इन विद्यालयों के शिक्षकों की जांच कर रिपोर्ट देगा।


एनसीटीई को इस मामले में झांसी के रहने वाले राहुल जैन की ओर से साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई है, जिसमें कई निजी स्कूलों में शिक्षक बिना डीएलएड, बीएड, सीटीईटी, टीईटी पास किए बिना ही निजी स्कूलों में पढ़ाई करा रहे हैं।

एनसीटीई के अनिवार्य मानकों का पालन न किए जाने से तमाम निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसेमें अबसभी जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक निजी स्कूलों के शिक्षकों की अर्हता का ब्योरा खंगालेंगे। मानकों के विपरीत मिलने पर शिक्षक बाहर किए जाएंगे। प्रबंधतंत्र सेजवाब-तलब होगा।


मुख्य सचिव तक पहुंची मामले की शिकायत

निजी स्कूलों में बिना अर्हता शिक्षक रखने का मामला मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा तक पहुंचा है। एनसीटीई के पत्र के बाद शिक्षा विभाग ने जिलों में इसकी जांच कराने का निर्णय लिया। अब शासन की सख्ती के बाद जिलों में जांच शुरू होगी।

Sunday, November 23, 2025

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन

मदरसा शिक्षक को अनियमित वेतन - पेंशन देने के मामले में शासन की बड़ी कार्रवाई, ज्वाइंट डायरेक्टर समेत चार का निलंबन 

लखनऊ: आजमगढ़ के तत्कालीन मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान को विदेश में रहने के दौरान नियम विरुद्ध वेतन, पेंशन व अन्य देयों का भुगतान किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। शासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेष नाथ पांडेय, आजमगढ़ के तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक अधिकारी साहित्य निकष सिंह, प्रभात कुमार व लालमन को निलंबित किया है। वर्तमान में साहित्य निकष सिंह गाजियाबाद, प्रभात कुमार अमेठी और लालमन बरेली में तैनात हैं।


मदरसा दारूल उलूम अहिले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उजूम, आजमगढ़ के तत्कालीन शिक्षक शमशुल हुदा खान ने 19 दिसंबर, 2013 को स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता का परित्याग कर ब्रिटिश नागरिकता ली थी। इसके बाद भी शमशुल मदरसा प्रबंधक प्रधानाचार्य व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से 31 जुलाई, 2017 तक अनियमित रूप से वेतन लेता रहा। अनियिमत तरीके से उसके चिकित्सा अवकाश स्वीकृत किए गए। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सेवानिवृत्ति लाभ जीपीएफ व पेंशन प्रदान कर दी गई। 

इस मामले की जांच संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण ने कराई थी। मामले में एडीएम प्रशासन आजमगढ़ ने 29 जनवरी, 2022 को खान को अनियमित वेतन के रूप में दिए गए 16.59 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी किया था। इसके विरोध में शमशुल हुदा खान ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने एडीएम प्रशासन आजमगढ़ के रिकवरी आदेश को निरस्त कर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने तथा समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश पर तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसमें आजमगढ़ के अपर जिलाधिकारी व अपर पुलिस अधीक्षक और मंडलीय उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण शामिल थे। समिति ने शमशुल खान को दी गई अनियमित पेंशन व वेतन की धनराशि की रिकवरी किए जाने की संस्तुति की थी। साथ ही मामले में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही तथा खान के मदरसा शिक्षक रहते हुए आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, श्रीलंका व खाड़ी देशों के अलावा दो-तीन बार पाकिस्तान की यात्रा किए जाने की जांच एजेंसी से पड़ताल कराए जाने की सिफारिश भी की गई थी। एटीएस की वाराणसी इकाई ने भी शमशुल की विदेश यात्राओं को लेकर जांच की थी।



मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से होगी जांच, शासन ने दिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश


लखनऊ। प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की उपस्थिति की गहनता से जांच होगी। अनुदानित मदरसों में प्रबंधन से हर माह उपस्थिति प्रमाणपत्र लेने के बाद ही शिक्षकों का वेतन जारी होगा। ब्रिटेन में जा बसे संदिग्ध मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा का मामला सामने आने पर शासन ने चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में 561 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। इनमें कुल 231806 छात्र पंजीकृत हैं। अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कुल संख्या क्रमशः 9889 और 8367 है। हाल ही में एटीएस की जांच में मदरसा शिक्षक शमशुल के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं।

वह 2007 से वह ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए प्रति वर्ष वेतन वृद्धि की गई। इतना ही नहीं 1 अगस्त 2017 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान करते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।

एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारी फंस गए हैं। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ऐसी स्थिति दुबारा उत्पन्न न होने देने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। एक-एक शिक्षक की हाजिरी सत्यापित होगी, उसके बाद ही भुगतान होगा।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसों का औचक मुआयना करके भी देखेंगे कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे नियमित मदरसों में आ भी रहे हैं या नहीं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि शिक्षकों की उपस्थिति चेक करने के नियम पहले से भी थे, अब इन निर्देशों पर कड़ाई से अमल करना है। ताकि, शमशुल जैसे मामले सामने नहीं आ सके।

Monday, November 10, 2025

योग्यता और सुविधाओं के मानक पर खरे नहीं उतरे अनुदानित मदरसे, मदरसा नियमावली-2016 के मानकों पर शुरू हुई थी जांच

योग्यता और सुविधाओं के मानक पर खरे नहीं उतरे अनुदानित मदरसे, मदरसा नियमावली-2016 के मानकों पर शुरू हुई थी जांच

प्रधानाचार्य सहित कई शिक्षकों की अपूर्ण मिली शैक्षिक योग्यता, 35 से ज्यादा अनुदानित मदरसों को नोटिस, 


लखनऊ। मदरसा नियमावली-2016 के मानकों पर कई अनुदानित मदरसे खरे नहीं उतरे हैं। जांच में कई जिलों के मदरसों में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की योग्यता अपूर्ण पाई गई है। मदरसा बोर्ड ने ऐसे 35 से ज्यादा मदरसों को नोटिस जारी किया है। प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें आधारभूत सुविधाओं, छात्र-शिक्षक अनुपात, भवन, शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों की योग्यता की जांच आदि के लिए एक दिसंबर 2023 को जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।


जिलों से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मदरसा बोर्ड ने मानक पूरा न करने वाले मदरसों और शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू की है। बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने देवरिया, आजमगढ़, मिर्जापुर, गाजीपुर आदि जिलों के 35 से ज्यादा मदरसों को नोटिस भेज कर उन्हें दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने के आदेश दिए गए हैं। 


यहां मिलीं गड़बड़ियां 
गाजीपुर के मदरसा चश्मये रहमत ओरियंटल कॉलेज के प्रधानाचार्य व सात शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता अपूर्ण पाई गई। ऐसे ही मदरसा बुखारिया फरीदिया फखनपुर में 3 शिक्षक, दारुल उलूम कादरिया दाएरा शाह अहमद के प्रधानाचार्य व एक शिक्षक, मदरसा दारुल उलम अहले सुन्नत गौसिया मस्तान बाग बारा के प्रधानाचार्य व 3 शिक्षक और मदरसा जामिया करीमिया करीमपुरा के प्रधानाचार्य, छह शिक्षक व एक लिपिक की शैक्षिक योग्यता अपूर्ण पाई गई है। मिर्जापुर के मदरसा गौसिया इस्लामिया बेगपुर में शिक्षक-छात्र अनुपात मानक के विपरीत मिले। साथ ही मदरसे के प्रधानाचार्य, 4 शिक्षक व एक लिपिक शैक्षिक रूप से अयोग्य पाए गए हैं।


शिक्षक संगठनों ने जांच व कार्रवाई पर उठाए सवाल
ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महासचिव वहीदउल्लाह खान सईदी ने रजिस्ट्रार को पत्र भेज कर मदरसा नियमावली-2016 के मानक से कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जितने भी मदरसों को पत्र भेज कर शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता को अपूर्ण बताया गया है उनमें से ज्यादातर शिक्षकों की नियुक्ति नियमावली-1987 के मानकों पर हुई है। लिहाजा उनकी शैक्षिक योग्यता की जांच तत्कालीन नियमावली से की जाए। 

मदरसा बोर्ड के पूर्व सदस्य हाजी दीवान साहेब जमां ने कहा कि सभी अनुदानित मदरसे मान्यता एवं सेवा नियमावली-1987 के मानकों पर हैं। वर्ष 2015 के बाद कोई भी मदरसा अनुदान सूची पर नहीं लिया गया है। ऐसे में नियमावली 2016 के अनुसार जांच अन्याय है।


 जांच में कई मदरसों में अलग-अलग कमियां पाई गई हैं। परीक्षण के बाद ही स्पष्ट संख्या पता चलेगी। जांच रिपोर्ट के हिसाब से मदरसों को नोटिस भेजकर उनको अपना पक्ष रखने के लिए तय तिथि पर बोर्ड कार्यालय में बुलाया गया था। फिलहाल उच्च न्यायालय से संबंधित केस की अधिकता से सभी मदरसों की सुनवाई की तय तिथि को निरस्त कर दिया गया है। – अंजना सिरोही, रजिस्ट्रार, मदरसा बोर्ड


Wednesday, September 24, 2025

सभी निजी विश्वविद्यालयों और कालेजों में मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की होगी जांच, 15 दिन में शासन को देनी होगी जांच रिपोर्ट, मुख्यमंत्री योगी ने दिया निर्देश

प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की कुंडली खंगालने उतरे अधिकारी, शिक्षण संस्थानों में मची खलबली

एक सप्ताह में जांच की देंगे रिपोर्ट,  उच्च शिक्षा विभाग करेगा कार्रवाई

लखनऊ। प्रदेश भर के निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में चल रहे कोर्स, उनकी मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की सच्चाई जानने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। जिलों में अपर नगर मजिस्ट्रेट, सहायक पुलिस आयुक्त व एक वरिष्ठ शिक्षक वाली तीन सदस्यीय कमेटियों ने संस्थानों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है, जिससे शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है। टीमों को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आठ सितंबर को जारी आदेश में सभी मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया था कि प्रशासनिक अधिकारियों व शिक्षकों की कमेटी जिलों में निजी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों की हकीकत जानेगी। सिर्फ लखनऊ में ही 25 अलग-अलग टीमें विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में जांच करने के साथ ही उनसे शपथ पत्र भी ले रही हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने इन कमेटियों को अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह में देने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से विभाग को भेजी जाएगी। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई हुई तो कई कॉलेजों की मान्यता फंसेगी। शायद यही वजह है कि निजी शिक्षण संस्थान अपने यहां कागजात दुरुस्त करने में भी जुट गए हैं।


जांच के मुख्य बिंदु

संस्थान का नाम, कोर्स का नाम, किस नियामक निकाय से मान्यता ली, मान्यता का प्रमाण पत्र, सीट की मान्यता है, कोर्स में वर्तमान में कितने छात्र नामांकित हैं। जांच टीम इन सभी की प्रमाणित प्रति भी लेगी। साथ ही संस्थान में केवल मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम ही चलाए जा रहे हैं, किसी छात्र का बिना मान्यता वाले कोर्स में दाखिला नहीं लिया गया है, इसका शपथ पत्र भी लेंगे।

इनकी भी लेंगे जानकारी

विवि या कॉलेज में चलाया जा रहा पाठ्यक्रम, किस नियामक संस्था से ली मान्यता, किस विवि से संबद्धता, पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीट, ईडब्ल्यूएस सीट, कुल सीटों की संख्या, प्रवेशित छात्रों की संख्या, विवि द्वारा दी गई संबद्धता पत्र की स्थिति, बिना मान्यता कोई कोर्स तो नहीं चल रहा, यदि हां तो पाठ्यक्रम का नाम, गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वालों की छात्रों की संख्या।




सभी निजी विश्वविद्यालयों और कालेजों में मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की होगी जांच, 15 दिन में शासन को देनी होगी जांच रिपोर्ट, मुख्यमंत्री योगी ने दिया निर्देश 

छात्रों के साथ खिलवाड़ नहीं

बिना मान्यता के कोर्स संचालित करने व अवैध दाखिलों की शिकायत का मुख्यमंत्री योगी ने लिया संज्ञान

प्रत्येक जिले में गठित की गई विशेष जांच समिति, डीएम करेंगे अध्यक्षता

मंडलायुक्त करेंगे निगरानी की सघन जांच, अनियमितता मिलने पर होगी कठोर कार्रवाई


लखनऊः प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की सघन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में विशेष जांच समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। उच्च शैक्षणिक संस्थानों की सघन जांच की प्रक्रिया की निगरानी मंडलायुक्त को सौंपी गई है। जांच प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत देते हुए 15 दिन में जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। 


शैक्षणिक संस्थानों में किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ है कि अब कोई भी संस्थान बिना मान्यता के कोर्स संचालित कर छात्रों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकेगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी होंगे। समिति संबंधित संस्थानों से शपथ पत्र लेगी, जिसमें यह साफ साफ लिखा होगा कि वे केवल मान्यताप्राप्त कोर्स ही संचालित कर रहे हैं। सभी संचालित पाठ्यक्रमों की सूची, सीटों की संख्या देनी होगी। 


साथ ही, संबंधित नियामक संस्थाओं जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई), बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ), डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीइसी), डेंटल काउंसिल आफ इंडिया (डीसीआइ), इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी), मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ), नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई), फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआइ) की मान्यता का स्पष्ट विवरण भी देना होगा। 


सभी जिलाधिकारियों को जांच पूरी कर 15 दिन में शासन को रिपोर्ट भेजनी होगी। यदि किसी संस्था में अवैध प्रवेश या बिना मान्यता के कोर्स संचालित पाए जाएंगे तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संस्थान को छात्रों से लिया गया पूरा शुल्क ब्याज सहित लौटाना अनिवार्य होगा।


मुख्यमंत्री से मिले थे एबीवीपी के पदाधिकारीः लंबे समय से फर्जी मान्यता और अवैध प्रवेश की शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले दिनों बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप विश्वविद्यालय में बिना मान्यता के विधि पाठ्यक्रम चलाए जाने का मामला सामने आया था। छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा किए गए लाठी चार्ज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कई कार्यकर्ता घायल हुए थे। इस संबंध में रविवार को एबीवीपी के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिले भी थे। माना जा रहा है कि एबीवीपी पदाधिकारियों द्वारा निजी शैक्षणिक संस्थानों में की जा रही अनियमितताओं की जानकारी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। 

योगी के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा के अपर सचिव डा. दिनेश सिंह ने विश्वविद्यालय पर धोखाधड़ी का मुकदमा कराया था। प्रशासन ने विश्वविद्यालय के कब्जे सरकारी जमीन से हटा दिए थे। अब तक छह लोग इस मामले में गिरफ्तार किए गए हैं।




वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी रहेंगे जांच समिति में

शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी जांच समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी होंगे। समिति संबंधित संस्थानों की मान्यता की जांच करेगी।


47 निजी विवि में हैं 2.80 लाख से अधिक छात्र

प्रदेश में 47 निजी विश्वविद्यालय व 7400 निजी महाविद्यालय संचालित हैं। सिर्फ निजी विवि में ही 2.80 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कुछ संस्थानों के खिलाफ मान्यता, फर्जी अंकतालिका और अव्यवस्था की शिकायतें आती रही है। हाल ही में हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी अंकतालिका का मामला सामने आया था, जिसकी जांच जारी है। वहीं बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप विश्वविद्यालय में विधि कोर्स की मान्यता को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच टीम गठित की थी लेकिन परिषद की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है।


उच्च शिक्षा मंत्री बोले, पोर्टल से जुड़ेंगे निजी विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपना रही है। जांच के साथ अब एक नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है। यह पोर्टल समर्थ पोर्टल की तरह होगा और प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

Tuesday, September 23, 2025

558 मदरसों के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब, कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत

558 मदरसों के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब, कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत



प्रयागराज/लखनऊ। इलाहाबाद । हाईकोर्ट ने प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की खंडपीठ ने वाराणसी के टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश और दो अन्य की याचिका पर दिया है।


बाराबंकी निवासी मोहम्मद तलहा अंसारी ने मदरसों में पढ़ाई और अन्य अनियमितता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। इसके बाद आयोग के आदेश पर अनुदानित मदरसों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी थी।

याची के अधिवक्ता प्रशांत शुक्ला ने दलील दी कि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अनुसार आयोग किसी भी ऐसे मामले की जांच नहीं करा सकता जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन की कथित घटना को एक साल से ज्यादा बीत चुका हो। शिकायत में किसी विशिष्ट तारीख का उल्लेख नहीं है जिससे यह पता चल सके कि शिकायत कब की गई थी। आयोग का जांच आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

खंडपीठ ने मानवाधिकार आयोग और मोहम्मद तलहा अंसारी को नोटिस जारी किया है। आदेश दिया है कि सभी प्रतिवादी चार हफ्तों में जवाबी हलफनामा दाखिल करें। याची उसके बाद चार हफ्तों में जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगले आदेश तक आयोग और प्रदेश सरकार के 23 अप्रैल 2025 के आदेश का प्रभाव-संचालन रुका रहेगा।



कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत

याची दीवान साहेब जमां ने बताया कि कोर्ट के आदेश से सबसे बड़ी राहत कामिल और फाजिल प्रमाणपत्रों से नियुक्त शिक्षकों को मिली है। केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन शिक्षकों के वेतन भुगतान को वित्तीय भ्रष्टाचार माना था। क्योंकि, इन डिग्रियों को सर्वोच्च न्यायालय ने असांविधानिक घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय पांच नवंबर 2024 से प्रभावी है लेकिन शिकायत में सभी 558 अनुदानित मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इसके लिए आयोग ने ईओडब्ल्यू जांच के आदेश दिए थे।

Wednesday, August 6, 2025

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बाद हरकत में आया बेसिक शिक्षा विभाग, स्कूलों के जर्जर भवनों के विरुद्ध अभियान तेज

मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी के बाद हरकत में आया बेसिक शिक्षा विभाग,  स्कूलों के जर्जर भवनों के विरुद्ध अभियान तेज

किसी भवन के गिरने की सूचना पर संबंधित अफसर पर कार्रवाई की जाएगी

बच्चों की सुरक्षा पर दिया गया ध्यान


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के जर्जर भवनों का चिह्नांकन, सत्यापन, मूल्यांकन और ध्वस्तीकरण का अभियान तेज कर दिया है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए विभाग ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि वे जर्जर ढांचों को लेकर 'सुरक्षा, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई पर ध्यान केन्द्रित करें।

इस संबंध में शासन ने भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि किसी जर्जर भवन के गिरने या किसी प्रकार की दुर्घटना की सूचना मिलती है, तो संबंधित अधिकारी को सीधे उत्तरदायी मानते हुए उसके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। 
विभिन्न जिलों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जर्जर भवनों की स्थिति को देखते हुए प्रत्येक जिले में जर्जर ढाँचों का तत्काल चिह्नांकन कर तकनीकी समिति को सत्यापन एवं मूल्यांकन के लिए सूची सौंपी जाएगी। यह कार्य समयबद्धता के साथ सुनिश्चित कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। पूर्व में चिह्नित ढांचों के भी आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी

बेसिक शिक्षा विभाग की निर्माण युनिट के विशेषज्ञ श्यामकिशोर तिवारी के अनुसारकई विद्यालय परिसरों में अब भी ऐसे ढांचे मौजूद हैं जो अत्यंत जर्जर हो चुके हैं। शासन के निर्देश का पालन करते हुए जर्जर ढांचे चिह्नित किए जाएं वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छतों की सफाई, जल निकासी के निर्देश

विद्यालय भवनों की छतों पर जलजमाव, पत्तों और कचरे के कारण सीलन की समस्या उत्पन्न होती है, जिससे भवन क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में पंचायत के माध्यम से छतों की नियमित साफ सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।



नए सिरे से सर्वे कर सरकार जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों की करेगी पहचान

 लखनऊ: जर्जर स्कूल भवनों के कायाकल्प के बारे में महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बताया कि बरसात के बाद संबंधित विद्यालयों की मरम्मत और नए सिरे से निर्माण के कार्य को तेजी से शुरू किया जाएगा ताकि सभी कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरे हो जाएं। नए सिरे से सर्वे कर और भी जर्जर स्कूल भवनों की पहचान की जा रही है ताकि कोई जीर्ण-शीर्ण भवन छूट न जाए। 


जिन भवनों को तकनीकी समिति द्वारा जर्जर घोषित कर दिया जाता है उसमें किसी भी तरह की शैक्षणिक गतिविधि नहीं हो सकती। बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक कक्ष, पंचायत भवन, ग्राम सचिवालय जैसे सुरक्षित स्थानों पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। पिछले पांच वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग ने 8,128 विद्यालयों की मरम्मत और पुनर्निर्माण  कराया है।
 

बाढ़ से प्रति वर्ष ढह जाते हैं आठ से 10 स्कूल

प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों में प्रति वर्ष आठ से 10 स्कूल ढह जाते हैं। इस बार भी बलिया जिले के कई विद्यालयों को नुकसान पहुंचा है। बारिश के मौसम में छतों पर पानी भरने, पत्ते जमने और जलनिकासी की कमी से भवनों में सीलन व क्षरण की समस्या बढ़ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर व ग्राम पंचायतों को स्कूलों में नियमित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। जो भवन पूरी तरह से अनुपयोगी हैं, उन्हें 'निष्प्रयोज्य' घोषित कर सील करने के निर्देश दिए गए हैं।


बारिश ने रोकी स्कूलों के सर्वे की प्रक्रिया

प्रदेश में हो रही लगातार बारिश ने परिषदीय स्कूलों के पुनर्गठन की योजना पर रोक लगा दी है। कई जिलों में विद्यालयों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे खंड शिक्षा अधिकारी तय समय पर विद्यालयों का भौतिक सत्यापन नहीं करा पा रहे हैं। स्कूलों के विलय और विलग होने की प्रक्रिया इस वजह से बाधित हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में 10,684 परिषदीय विद्यालयों का अन्य विद्यालयों में विलय किया है।





जिलाधिकारी व बीएसए जाकर देखें स्कूलों के हालात,  सीएम योगी ने कहा,  स्कूलों में न हो जर्जर भवन और गंदगी, बुनियादी सुविधाओं को करें पूरा


लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय स्कूलों के भवनों और सुविधाओं की बदहाली पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती करते हुए सभी डीएम और बीएसए को स्कूलों के भवनों का भौतिक सत्यापन कर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने दोनों अधिकारियों को मौके पर जाकर स्कूलों के हालात देखने को भी कहा है।


राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल का भवन गिरने से हुई बच्चों की मौत के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों को स्कूलों की सुरक्षा व सुविधाओं का ऑडिट करने का निर्देश दिया था। इसके मद्देनजर स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चलाया था। मुख्यमंत्री ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक में डीएम और बीएसए को मौके पर जाकर स्कूलों के हालात देखने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की स्थिति की सघन समीक्षा कराने के साथ ही विद्यालयों के जर्जर भवनों को तत्काल दुरुस्त कराने, सफाई और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

Thursday, July 17, 2025

न जांच कमेटी बनाई गई न कार्रवाई की, संतकबीरनगर बीएसए कार्यालय में अनियमितता में एडी बेसिक की निष्क्रियता पर हाईकोर्ट नाराज

न जांच कमेटी बनाई गई न कार्रवाई की, संतकबीरनगर बीएसए कार्यालय में अनियमितता में एडी बेसिक की निष्क्रियता पर हाईकोर्ट नाराज

कोर्ट ने कहा- आदेश को हो पालन अन्यथा 25 अगस्त को हाजिर हों अपर मुख्य सचिव


प्रयागराजइलाहाबाद हाई कोर्ट ने संत कबीरनगर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली एवं अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मृदुल आनंद के खिलाफ नियुक्ति में धांधली के मामले की जांच के लिए कमेटी गठन में विलंब पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने नंदू प्रसाद की याचिका की सुनवाई की। कोर्ट की नाराजगी इस बात पर है कि 25 मई 2023 के निर्देश का पालन अब तक नहीं हुआ। अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) को सुनवाई की अगली तिथि 25 अगस्त को उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।


नंदू प्रसाद व मालती गुप्ता की नियुक्ति को लेकर विवाद है। कोर्ट के रिकार्ड मंगाने पर पता चला था कि मैनेजर रिटर्न में नंदू प्रसाद और अनीस अहमद खान के नाम के बीच बिना क्रमांक मालती गुप्ता का नाम है। इस पर तत्कालीन बीएसए मृदुल आनंद के हस्ताक्षर हैं। नियुक्ति में घपला की आशंका पर कमेटी गठन का आदेश हुआ था। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के समय संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। कहा था कि बस्ती मंडल का कोई अधिकारी कमेटी में न रखा जाय। कमेटी जांच रिपोर्ट पेश करे। जरूरी हो तो विजिलेंस जांच कराए। इस आदेश को सरकार को भेजा ही नहीं गया, न तो कमेटी बनाई गई न कार्रवाई की गई।


बेसिक शिक्षा निदेशक पिछले दो साल तक आदेश पर निष्क्रिय बने रहे। दो साल बाद केस की सुनवाई के समय जब कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के बारे में पूछा तो सरकारी वकील ने आदेश पालन के लिए एक महीने का समय मांगा। जानकारी दी कि 14 जुलाई 2025 को अपर मुख्य सचिव (बेसिक) को पत्र लिखा गया है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बेसिक शिक्षा निदेशक से आदेश का अनुपालन कराने में हुई देरी पर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।


Saturday, June 21, 2025

कोचिंग के दावों और स्कूलों की खामियों की के साथ डमी स्कूलों के उभार की जांच होगी, कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता की वजह खोजी जाएगी

कोचिंग के दावों और स्कूलों की खामियों की के साथ डमी स्कूलों के उभार की जांच होगी, कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता की वजह खोजी जाएगी

समिति में आईआईटी समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि


नई दिल्ली । नीट-जेईई समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग संस्थानों पर छात्रों की बढ़ती निर्भरता, प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता की जांच के लिए शिक्षा मंत्रालय ने नौ सदस्यीय समिति बनाई है। यह कोचिंग संस्थानों के दावों और स्कूलों की खामियों की भी समीक्षा करेगी।

उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता वाली समिति कोचिंग सेंटरों पर छात्रों की निर्भरता घटाने के उपाय सुझाएगी। अफसरों ने कहा, यह देखने में आया है कि कोचिंग संस्थानों और 'डमी स्कूलों' का चलन कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के नाम पर कोचिंग उद्योग मोटी रकम वसूल रहे हैं।


शिक्षा प्रणाली की खामियों की जांच होगी: शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नवगठित समिति मौजूदा स्कूल शिक्षा प्रणाली में मौजूद उन खामियों की जांच करेगी, जिनके कारण छात्र कोचिंग जाने पर मजबूर हो जाते हैं। समिति गौर करेगी कि किस तरह रटने की प्रवृत्ति हावी है और आलोचनात्मक सोच, तार्किक विवेक, विश्लेषणात्मक क्षमता और नवाचार पर बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है।


समिति में निजी स्कूल के प्रतिनिधि भी

समिति में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी अध्यक्ष और सदस्यों में सीबीएसई अध्यक्ष, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा विभागों के संयुक्त सचिव, आईआईटी मद्रास, एनआईटी त्रिची, आईआईटी कानपुर, एनसीईआरटी प्रतिनिधि, केवि, नवोदय, निजी स्कूल से एक-एक प्रिंसिपल शामिल हैं।


डमी स्कूलों का गणित

इंजीनियरिंग मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में छात्र 'डमी' स्कूलों में दाखिला लेना पसंद करते हैं, ताकि वे केवल प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित कर सकें। वे कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते और सीधे बोर्ड परीक्षा में शामिल हो जाते हैं। राज्य में आरक्षण का लाभ उठाने के लिए भी अभ्यर्थी 'डमी' स्कूल चुनते हैं। उदाहरण के लिए, जो अभ्यर्थी दिल्ली में स्कूली शिक्षा पूरी करते हैं, वे मेडिकल कॉलेजों में दिल्ली कोटे के लिए पात्र हो जाते हैं, इससे उन्हें राजधानी के 'डमी' स्कूलों में दाखिले के लिए प्रोत्साहन मिलता है। अफसर ने कहा, ऐसे डमी स्कूलों के उभरने के कारणों की जांच की जाएगी।

Monday, June 2, 2025

खरीदारी में नियमों के उल्लंघन पर कौशांबी के बीएसए पर 89 लाख की गड़बड़ी का आरोप, शासन के निर्देश पर महानिदेशक ने डीएम से मांगी जांच रिपोर्ट

ब्लैक लिस्टेड फर्म से लिए गए थे पुराने कंप्यूटर, प्रकरण में जांच शुरू होते ही बीएसए कौशाम्बी कार्यालय में मचा हड़कंप

89 लाख से अधिक की खरीदारी में अनियमितता के आरोप का मामला


मंझनपुर। बीएसए पर विभिन्न मदों में 89 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी में अनियमितता के आरोप की जांच शुरू होते ही विभाग में खलबली मच गई है। इसी बीच एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, बीएसए कार्यालय के लिए खरीदे गए कंप्यूटर ब्लैक लिस्टेड फर्म से लिए गए थे। ये मामला बीएसए के गले की फांस बन सकता है।

वर्ष 2023-24 में बीएसए कार्यालय की ओर से लगभग 89 लाख रुपये से अधिक रुपये की खरीदारी की गई थी। 22 प्रकार की खरीदारी हुई थी। खरीदारी में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरने का आरोप लगा है। 

चायल के मनौरी निवासी धर्मेंद्र कुमार पुत्र रामकैलाश ने मुख्यमंत्री कार्यालय को हलफनामा भेजकर शिकायत की थी। इसके बाद महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने डीएम से पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। 


खरीदारी में एक तथ्य सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बीएसए कार्यालय के लिए पुराने कम्प्यूटर की खरीदारी की गई। बीएसए कार्यालय से पहले इन कम्प्यूटरों की सप्लाई जिला अस्पताल में होनी थी, लेकिन जिला अस्पताल की कमेटी ने कम्प्यूटरों की जांच रिपोर्ट एनआईसी से मांगी थी। एनआईसी की जांच में कम्प्यूटर खरे नहीं उतरे थे। इसके बाद फर्म को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। इसके बावजूद बीएसए ने इन पुराने कम्प्यूटरों की महंगे दामों पर खरीद करवाई। वह भी डीएम से बिना अनुमति के। कम्प्यूटर के अलावा स्कैनर, आलमारी की खरीदारी में भी अनियमितता का आरोप है। इतना ही नहीं भवन की मरम्मत में भी धांधली का इल्जाम शिकायत कर्ता ने लगाया है।


एडीएम, ट्रेजरी ऑफिसर को मिली है जांच

बीएसए कार्यालय द्वारा की गई खरीदारी के मामले में जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद से डीएम की निगाह तिरछी हो गई है। डीएम मधुसूदन हुल्गी ने शनिवार को मामले की जांच की जिम्मेदारी एडीएम और ट्रेजरी आफिसर को सौंपी है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट दें।


बीएसए कार्यालय का बर्खास्त डीसी है धर्मेंद्र

बीएसए कमलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार विभाग का जिला समन्वयक एमडीएम रह चुका है। शासन व विभाग के विपरीत कार्य करने के आरोप में धर्मेंद्र कुमार को बर्खास्त किया जा चुका है। यही कारण है कि वह मेरी छवि धूमिल करने के लिए मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है। जल्द ही पूर्व डीसी के खिलाफ वह कार्रवाई कराएंगे।




खरीदारी में नियमों के उल्लंघन पर कौशांबी के बीएसए पर 89 लाख की गड़बड़ी का आरोप, शासन के निर्देश पर महानिदेशक ने डीएम से मांगी जांच रिपोर्ट


कौशांबी में बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय में 89 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। मोहम्मदपुर मनौरी निवासी धर्मेंद्र कुमार ने इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रमुख सचिव और स्कूल शिक्षा महानिदेशक को हलफनामे के साथ शिकायती पत्र भेजा है। शिकायत के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच के निर्देश दिए हैं।


22 मदों में नियमों की अनदेखी का आरोप

शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में विभागीय कार्यालय द्वारा 22 अलग-अलग मदों में खरीद की गई। इन मदों में एसी, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, बैटरी सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक व कार्यालय उपकरण शामिल हैं। धर्मेंद्र का आरोप है कि इन सभी खरीदों में तय मानकों और वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ है।


डीएम से मांगी गई रिपोर्ट

शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। महानिदेशक ने जिलाधिकारी कौशाम्बी से पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। वहीं, इस बीच बीएसए कार्यालय में सभी दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है।


बीएसए ने आरोपों को बताया निराधार

बेसिक शिक्षा अधिकारी कमलेंद्रु कुशवाहा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार पूर्व में कार्यालय में समन्वयक पद पर कार्यरत थे। उन पर पहले से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते जिलाधिकारी ने 25 जनवरी को उनकी सेवा समाप्त कर दी थी।

बीएसए कुशवाहा का कहना है कि धर्मेंद्र अब निजी रंजिश के चलते झूठे आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने कहा कहा, “सभी खरीद नियमों के तहत हुई हैं, रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी हैं, जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी”



खरीदारी में अनियमितता की शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी। यदि अनियमितता मिली तो कारवाई कराएंगे। – मधुसुदन हुलगी, जिलाधिकारी

Sunday, June 1, 2025

मुरादाबाद के BEO विभागीय जांच में पाए गए लैंगिक उत्पीड़न के दोषी, जानिए पूरा मामला

मुरादाबाद के BEO विभागीय जांच में पाए गए लैंगिक उत्पीड़न के दोषी, जानिए पूरा मामला


मुरादाबाद के खंड शिक्षा अधिकारी वेगीश सिंह लैंगिक उत्पीड़न के आरोपों में फंस गए हैं। 2 शिक्षिकाओं की ओर से शासन स्तर पर की गई शिकायत के बाद शिक्षा निदेशक ने 3 सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में एबीएसए वेगीश को लैंगिक उत्पीड़न का दोषी माना है। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद अपर शिक्षा निदेशक बेसिक कामता राम पाल ने ABSA वेगीश की 3 वेतन वृद्धि रोक दी हैं। सरकारी लोक सेवक के लिए निर्धारित आचरण से निम्न स्तर का आचरण करने की वजह से उन्हें मिसकंडक्ट भी दी गई है।

अपने आदेश में अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल ने कहा है- आपका आचरण एवं कार्यशैली दूषित है। इसलिए आपके तीन वेतन वृद्धियों पर अस्थाई रूप से रोक लगाई जा रही है। इसके अलावा निम्न स्तर के आचरण के लिए आपको अवचार का दंड भी दिया जा रहा है।



दरअसल पूरा मामला एबीएसए वेगीश सिंह के पूर्व तैनाती वाले ब्लॉक ठाकुरद्वारा से जुड़ा है। जहां की 2 शिक्षिकाओं ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिक्षिकाओं का आरोप था कि एबीएसए ने बार-बार महिला टीचर्स की CCL और मेडिकल लीव रिजेक्ट करते रहे ताकि उन पर प्रेशर बनाया जा सके और वो अपने इरादे पूरे कर सकें। एक शिक्षिका ने अपनी शिकायत में कहा था कि एबीएसए ने उन्हें अपने रूम पर आकर अकेले में मिलने के लिए प्रेशर बनाया। इंकार करने पर सीसीएल रिजेक्ट कर दीं। शिक्षिकाओं ने एबीएसए के साथ अपनी व्हाट्सएप चैट को भी शिकायत के साथ अटैच किया था।


मामला 2024 का है। ठाकुरद्वारा ब्लॉक के शेरपुर पट्‌टी स्कूल की सहायक अध्यापिका मेधा सिंह वर्मा ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाई थी। मेधा वर्मा का कहना था कि एबीएसए वेगीश सिंह ने बार-बार उनकी चाइल्ड केयर लीव और मेडिकल लीव के आवेदन पोर्टल पर रिजेक्ट कर दिए। जबकि उन्हें अपनी दो साल की बीमार बच्ची की देखभाल के लिए सीसीएल की सख्त जरूरत थी। मेधा का आरोप है कि बार-बार लीव आवेदन रिजेक्ट करने की वजह पूछने पर एबीएसए ने उनसे कहा कि मुरादाबाद में अकेले आवास पर आकर मिलो, उसके बाद लीव के बारे में विचार करेंगे। मेधा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने एबीएसए की बात मानने से इंकार कर दिया तो उन्होंने खुन्नस निकालने के लिए उन्हें गैरहाजिरी में सस्पेंड भी करा दिया।


दूसरा मामला भी 2024 में ठाकुरद्वारा ब्लॉक का ही है। ठाकुरद्वारा ब्लॉक में उन दिनों वेगीश सिंह एबीएसए थे। ठाकुरद्वारा ब्लॉक के बथुआखेड़ा स्कूल की इंचार्ज टीचर सीमा गहलोत ने भी एबीएसए पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि वो सिंगल पैरेंट हैं। इसके बावजूद उनकी इकलौती 2 साल की बेटी की देखभाल के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें सीसीएल नहीं मिली। क्योंकि एबीएसए वेगीश की ओर से उन्हें बार-बार रिजेक्ट कर दिया गया। इस तरह प्रेशर बनाकर वो अपने गल इरादों को पूरा करना चाहते थे।


महिला शिक्षकाओं के सेक्सुल हैरेसमेंट को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग बदनाम रहा है। कभी छुटि्टयों का प्रेशर तो कभी प्रलोभन देकर विभागीय अधिकारियों द्वारा महिला टीचर्स के साथ मनमानी और बदसलूकी की शिकायतों की भरमार रही है।

Wednesday, May 28, 2025

निजी विश्वविद्यालयों में नहीं चलेगी मानकों की अनदेखी, निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने गठित की पांच विशेष कमेटियां

निजी विश्वविद्यालयों में नहीं चलेगी मानकों की अनदेखी, निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने गठित की पांच विशेष कमेटियां

खामियां मिलने पर विश्वविद्यालय के खिलाफ होगी कार्रवाई

47 निजी विश्वविद्यालयों में हैं 2.66 लाख विद्यार्थी


 लखनऊः प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की लगातार बढ़ रही संख्या और उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों के हितों के दृष्टिगत उच्च शिक्षा विभाग ने इन विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए पांच विशेष कमेटियां गठित की हैं। हर कमेटी में पांच सदस्य हैं। इन कमेटियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। कमेटियां निजी विश्वविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगी। रिपोर्ट में खामियां मिलने पर संबंधित विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में मान्यता रद करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।


प्रदेश में इस समय कुल 47 निजी विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 2.66 लाख विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से कई विश्वविद्यालय बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ पर शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाएं और नियामक मानकों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। इसी को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल के निर्देश पर गठित की गईं यह निगरानी कमेटियां सभी निजी विश्वविद्यालयों में जाकर देखेंगी कि वहां शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है, फैकल्टी योग्य है या नहीं, छात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।


कमेटियां यह भी देखेंगी कि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा उप्र निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 का पालन किया जा रहा है या नहीं। इस अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए न्यूनतम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन अनिवार्य है। साथ ही विश्वविद्यालय संचालकों को पांच करोड़ रुपये की एफडी भी जमा करनी होती है, जिसका ब्याज ही वे उपयोग में ला सकते हैं। कमेटियां जिन बिंदुओं पर निगरानी करेगी, उनमें शैक्षणिक गतिविधियां, नियमित कक्षाएं, कोर्स की पूर्णता, फैकल्टी की नियुक्ति, छात्र शिकायत निवारण प्रणाली, फीस संरचना और बुनियादी ढांचे की स्थिति प्रमुख हैं।


इस साल के अंत तक हो जाएंगे 50 निजी विश्वविद्यालय

प्रदेश में इस वर्ष के अंत तक तीन और निजी विश्वविद्यालय खुलने की संभावना है, जिससे इनकी संख्या 47 से बढ़कर 50 तक पहुंच जाएगी। प्रदेश में सबसे ज्यादा 18 निजी विश्वविद्यालय मेरठ मंडल में हैं। आगरा मंडल में आठ निजी विश्वविद्यालय हैं।


यदि किसी निजी विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया या नियमों का उल्लंघन हुआ, तो विभाग कठोर कार्रवाई करेगा। छात्रों या उनके अभिभावक की शिकायतों की कमेटियां जांच करेंगी। –डा. दिनेश कुमार राजपूत, अपर सचिव, उच्च शिक्षा परिषद


Tuesday, May 6, 2025

माध्यमिक शिक्षा में समर कैम्प के दौरान आयोजित गतिविधियों / क्रियाकलापों के प्रभावी क्रियान्वयन की जांच एवं सहयोग हेतु स्थलीय शैक्षिक पर्यवेक्षण हेतु मण्डलवार टीम गठित

माध्यमिक स्कूलों में 21 मई से समर कैंप का आदेश, परियोजना निदेशालय ने निरीक्षण को बनाई मंडलवार टीमशिक्षक नाराज


लखनऊ। बेसिक के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी राजकीय इंटर कॉलेजों में 21 मई से 10 जून तक समर कैंप के आयोजन के निर्देश दिए हैं। इस दौरान विभिन्न गतिविधियां होंगी। विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, इस आदेश से शिक्षक नाराज हैं। शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

राज्य परियोजना निदेशालय ने समर कैंप के दौरान होने वाली गतिविधियों की जांच व सहयोग के लिए मंडलवार टीम भी तैनात कर दी है। अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकांत पांडेय ने टीम के सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे 12 जून तक आवंटित मंडल में कम से कम दस (छह इंटर कॉलेज, चार हाईस्कूल व एक पीएमश्री) राजकीय विद्यालय का अनिवार्य रूप से शैक्षिक पर्यवेक्षण कर रिपोर्ट राज्य परियोजना कार्यालय को दें। ताकि इसके अनुसार कैंप की आवश्यक तैयारी व सुधार किया जा सके। 



बता दें, माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई से 30 जून तक गर्मी की छुट्टियां होती हैं। शिक्षकों ने आदेश को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी में कैंप का आयोजन करना संभव नहीं है। राजकीय शिक्षक संघ ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा को पत्र भेजकर कहा है कि इस समय पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में राजकीय विद्यालयों में समर कैंप आयोजित करना किसी भी दशा में संभव नहीं है। छात्र व शिक्षक घर वापस लौटने के बाद बीमार पड़ रहे हैं।


बिना जरूरी सुविधाओं के समर कैंप का आदेश गलत

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय व महामंत्री छाया शुक्ला ने कहा है कि समर कैंप के आयोजन की रूपरेखा अधिकारियों ने एसी कमरों में बैठकर बनाई है। हालत यह है कि बुंदेलखंड में कई विद्यालयों में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। शिक्षक व छात्र घर से पीने का पानी लाते हैं। ऐसे में बिना आवश्यक सुविधाओं के समर कैंप के आयोजन की बात बेमानी है। उन्होंने गर्मी की छुट्टियों में काम करने पर शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति ईएल देने की भी मांग की है।



माध्यमिक शिक्षा में समर कैम्प के दौरान आयोजित गतिविधियों / क्रियाकलापों के प्रभावी क्रियान्वयन की जांच एवं सहयोग हेतु स्थलीय शैक्षिक पर्यवेक्षण हेतु मण्डलवार टीम गठित


समग्र शिक्षा (मा०) द्वारा प्रदेश के समस्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दिनांक 21 मई, 2025 से 10 जून, 2025 तक समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। समर कैम्प के दौरान विद्यालयों द्वारा आयोजित की जा रही गतिविधियों / क्रियाकलापों के प्रभावी क्रियान्वयन की जांच एवं सहयोग हेतु स्थलीय शैक्षिक पर्यवेक्षण हेतु समग्र शिक्षा (माध्यमिक) की प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग टीम के सदस्यों को मण्डल वार निम्न लिखित जनपद आवंटित किये जाते है


Tuesday, March 18, 2025

प्रदेश के 1,41000 स्कूलों में सुरक्षा उपायों का मुआयना कराने की उ0प्र0 सरकार ने बनाई योजना

प्रदेश के 1,41000 स्कूलों में सुरक्षा उपायों का मुआयना कराने की उ0प्र0 सरकार ने बनाई योजना


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में प्रदेश के 1,41000 स्कूलों की सुरक्षा का मुआयना कराने के मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने अविनाश मेहरोत्रा के केस में दिए दिशा निर्देशों के तहत इसकी योजना बना ली है और जल्द इसका विज्ञापन जारी किया जाएगा। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने कहा कि इस कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। 


कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च को नियत की है। इससे पहले हुई सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देशों को 14 साल से लागू न किए जाने पर सख्त रुख अपनाया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने, सुप्रीम कोर्ट के अविनाश मेहरोत्रा के मामले में दिए गए सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देशों को लागू करने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की और से वर्ष 2020 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया।