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Tuesday, November 17, 2020

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

Saturday, November 14, 2020

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच


वाराणसी : प्राथमिक से लगायत विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कराए जा रहे हैं ताकि शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवापुस्तिकाएं आनलाइन की जा सके।


सेवापुस्तिका आनलाइन होने से माध्यमिक व उच्च शिक्षा के शिक्षकों व कर्मचारियों को अवकाश के लिए आनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिल जाएगी। इसके लिए शिक्षकों व कर्मचारियों को दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना होगा। दूसरी ओर मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की जांच भी हो रही है।


पोर्टल के माध्यम से बेसिक शिक्षा में कई शिक्षकों के अभिलेख संदिग्ध मिले हैं। ऐसे शिक्षकों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। इसे देखते हुए अब माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों की जांच पोर्टल से शुरू कर दी गई है। वहीं, दूसरी ओर शासन ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से पोर्टल पर विवरण अपलोड करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गत दिनों महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से फार्म भी भरवाए गए थे।

Thursday, November 12, 2020

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें



फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स अब सूबे की और अनामिकाओं की तलाश के लिए राज्य सरकार के मानव संपदा पोर्टल को भी खंगाल रही है। सीतापुर से पांच नवंबर को गिरफ्तार फर्जी प्रधानाध्यापक देवरिया निवासी ऋषिकेश मणि त्रिपाठी से मिली जानकारियों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षकों की तलाश की जा रही है। ऋषिकेश सीतापुर में बजरंग भूषण के नाम से नौकरी कर रहा था। अनामिका प्रकरण की ही तर्ज पर आरोपित ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता ने भी सीतापुर में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। 


गोरखपुर में तैनात शिक्षिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए स्नेहलता ने यह नौकरी हासिल की थी और पति के पकड़े जाने के बाद से वह फरार है। एसटीएफ ने स्नेहलता की तलाश के लिए दो टीमों को लगाया है। एसटीएफ के एएसपी सत्यसेन यादव ने बताया कि गोरखपुर में तैनात सहायक अध्यापिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों पर सूबे में तीन और स्वाती तिवारी सहायक अध्यापिका की नौकरी कर रही थीं। इनमें बराबंकी व देवरिया में तैनात दो फर्जी शिक्षिकाओं को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ऋषिकेश की पत्नी का असली नाम स्नेहलता तिवारी है। ऋषिकेश से पूछताछ में सामने आया था कि उसने ही अपनी पत्नी की नौकरी फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगवाई थी। 


ऋषिकेश ने बताया कि उसके पिता राममणि त्रिपाठी देवरिया के अशोक इंटर कॉलेज में लेक्चरर थे और उन्होंने ने ही बजरंग भूषण व स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता फर्जी नाम से सीतापुर के हरिहरपुर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी कर रही थी। उसकी तलाश कराई जा रही है। एएसपी ने बताया कि आगरा के दयालबाग एजूकेशन इंस्टीट्यूटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बजरंग भूषण की शिकायत पर इस प्रकरण की जांच शुरू की गई थी। 


एसटीएफ को फर्जी शिक्षकों से जुड़ी कई और शिकायतें मिली हैं। मानव संपदा पोर्टल के जरिए उनकी भी जांच की जा रही है। स्वाती तिवारी के दस्तावेजों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षिकाओं की नियुक्ति की भी आशंका है। दूसरे के दस्तावेजों पर नाम-पता बदलकर नौकरी कर रहे कई और फर्जी शिक्षक एसटीएफ के निशाने पर हैं। ध्यान रहे, पूर्व में अनामिका नाम की शिक्षिका के दस्तावेजों के जरिए इसी नाम पर कई फर्जी शिक्षिकाओं के नौकरी हासिल करने का मामला पकड़ा गया था।

Wednesday, October 28, 2020

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

 
69000 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी सॉल्वर गैंग से नकल माफिया बन गए। फिर शिक्षा माफिया बंनकर स्कूल-कॉलेज खोल लिए। अपने ही कॉलेजों में परीक्षाओं का सेंटर कराकर फर्जीवाड़ा करने लगे। इस फर्जीवाड़ा गैंग से जुड़े आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा दर्जहोने के बाद अबएसटीएफ आरोपियों की अवैध संपत्तियों की जांच कर रही है। अब आरोपियों के ऐसे स्कूल कॉलेजों की सूची बना रही है जो अवैध कमाई से बनाए गए हैं। 


69000 सहायक शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मामले में अभ्यर्थी राहुल सिंह ने डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस केस की जांच कर रही एसटीएफ डॉ. केएल पटेल, स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव समेत 20 के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। 12 आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। 


अब इनकी अवैध कमाई को पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क करने की वाली है। इनकी अवैध संपत्तियों की जांचमें जुटी एसटीएफ को पता चला कि डॉ.केएल पटेल, ललित त्रिपाठी, चंद्रमा यादव और शिवदीप समेत अन्य कई आरोपियों ने अपने स्कूल-कॉलेज भी खोल लिए हैं। जांच चल रही है कि इन कॉलेजों को काली कमाई से तो नहीं बनाया गया है।

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

 
प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने मंगलवार शाम को सभी के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। एसटीएफ ने करीब एक हजार पन्ने की केस डायरी तैयार की है।


जून 2020 को इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। पहले सोरांव पुलिस ने इसकी विवेचना शुरू की, लेकिन प्रकरण ने तूल पकड़ा तो विवेचना एसटीएफ को दे दी गई। गिरोह के सरगना पूर्व जिपं सदस्य डॉ. केएल पटेल, तीन अभ्यर्थी समेत 12 लोगों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन सभी के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसी मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रमा को करीब 20 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। उसके कई और साथियों को भी पकड़कर जेल भेजा गया। 


चंद्रमा यादव पुत्र बर्फी लाल धूमनगंज थाना क्षेत्र के टीपी नगर गंगा बिहार कॉलोनी का रहने वाला है। वह टीपी नगर में पंचम लाल आश्रम इंटर कॉलेज का संचालन चंद्रमा यादव करता है। लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर उसके स्कूल में बनाया जाता है। ज्यादा पैसा कमाने के लालच में वह कुछ साल पहले ललित त्रिपाठी के जरिए गिरोह के सरगना डॉ. केएल पटेल और मायापति से मिला था। फिर गिरोह के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने लगा। सोरांव में जब उसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया तो फरार हो गया था।


 एडिशनल एसपी एसटीएफ नीरज पांडेय का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद चंद्रमा यादव, भदोही के मायापति दुबे, प्रतापगढ़ के दुर्गेश पटेल व प्रयागराज के शिवदीप सिंह, सत्यम, शैलेष, संदीप पटेल, दुर्गेश सिंह और अर¨वद पटेल के खिलाफ भी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।

Friday, October 23, 2020

दावा : 69000 शिक्षक भर्ती में सिर्फ 03 ने किया फर्जीवाड़ा!, STF ने अपनी विवेचना की पूरी

दावा : 69000 शिक्षक भर्ती में सिर्फ 03 ने किया फर्जीवाड़ा!, STF ने अपनी विवेचना की पूरी

 
69000 सहायक शिक्षक भर्ती की जांच कर रही एसटीएफ ने अपनी विवेचना पूरी कर ली है। इस फर्जीवाड़े में 20 आरोपी बनाए गए हैं। लेकिन जिस सहायक शिक्षक भर्ती के टॉपर अभ्यर्थियों की सूची पर सवाल उठे थे, उनमें से किसी का भी नाम एसटीएफ ने अपनी जांच में उजागर नहीं किया। इस पूरे प्रकरण में सिर्फ तीन अभ्यर्थी जेल भेजे गए जिनके नाम सोरांव पुलिस ने उजागर किया था। 

मई 2020 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का परिणाम निकला तो अभ्यर्थियों ने धांधली का आरोप लगाया। 5 जून 2020 को राहुल सिंह नाम के अभ्यर्थी ने डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत अन्य के खिलाफ सोरांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया था कि उसने परीक्षा पास करने के लिए 6 लाख रुपया दिया था। पुलिस ने इस प्रकरण में कार्रवाई करते हुए एक बड़े गैंग का खुलासा किया। 


सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी धर्मेंद्र पटेल और बलवंत पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पकड़े गए दोनों अभ्यर्थी 69000 शिक्षक भर्ती में 120 से ज्यादा अंक पाए थे। इस खुलासे के बाद इस प्रकरण की जांच एसटीएफ को दे दी गई। एसटीएफ ने सोरांव पुलिस की विवेचना को आगे बढ़ाया।


इसी क्रम में वांछित डॉ. चंद्रमा यादव समेत अन्य की गिरफ्तारी की। इसके अलावा संतोष पटेल नामक एक और अभ्यर्थी पकड़ा गया जिसने पास होने के लिए मोटी रकम खर्च की थी।  संतोष को भी 120 से ज्यादा अंक था। लेकिन इसके अलावा इस भर्ती से जुड़े किसी भी अभ्यर्थी का नाम एसटीएफ की जांच में सामने नहीं आया। जबकि खुलासे के वक़्त पुलिस ने दावा किया था कि दर्जनों अभ्यर्थियों की सेटिंग करके नंबर बढ़ाया गया।

Sunday, October 11, 2020

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की विधिवत् जाँच कराये जाने के संबंध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की विधिवत् जाँच कराये जाने के संबंध में।


Thursday, October 1, 2020

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की जांच कराए जाने के संबंध में

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्रों की जांच कराए जाने के संबंध में



Wednesday, September 23, 2020

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

 
एसटीएफ ने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित करने की मुहिम तेज कर दी है। एसटीएफ को ऐसे 70 शिक्षकों के नाम पता चले हैं जिन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने का आरोप है। 


एसटीएफ ने सोमवार को इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एसटीएफ के चंगुल में आया एक फर्जी शिक्षक व उसका भाई अन्य फर्जी शिक्षकों की जानकारी हासिल कर उनसे वसूली कर रहा था। ये लोग मानव संपदा पोर्टल से फर्जी शिक्षकों की जानकारी जुटाते थे। एसटीएफ को इनके पास से 70 फर्जी शिक्षकों की सूची मिली है।


एसटीएफ इस सूची से उजागर हुए नामों की जानकारी जुटा रही है। जो नाम सामने आए हैं उनकी पड़ताल में बेसिक शिक्षा विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें ज्यादातर नाम पूर्वांचल के जिलों में तैनात शिक्षकों के हैं। एसटीएफ ने अब सामने आए नामों को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित लोगों के दस्तावेजों के सत्यापन को कहा है। आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 


तीन साल में 850 फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई
इससे पहले भी एसटीएफ फर्जी शिक्षकों के बारे में जानकारी जुटा कर बेसिक शिक्षा विभाग को देती रही है। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला बीते तीन साल से जारी है। इन तीन वर्षों में करीब 850 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

Friday, September 18, 2020

कानपुर : गुरुजी ने दी 78 बिंदुओं पर जानकारी, अब सत्यापन में फर्जीवाड़ा मिला तो जाएगी नौकरी

कानपुर : गुरुजी ने दी 78 बिंदुओं पर जानकारी, अब सत्यापन में फर्जीवाड़ा मिला तो जाएगी नौकरी।


बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन शीघ्र फर्जीवाड़ा मिलने पर होगी एफआइआर।

कानपुर :  फर्जी अंकतालिका समेत अन्य दस्तावेजों को लगाकर शिक्षक बनने के मामले में परिषदीय विद्यालयों के 5000 शिक्षकों से कुछ जानकारियां मांगी गईं थीं, जो कि 78 अलग-अलग बिंदुओं पर दी जानी थीं। अब उन जानकारियों का ब्योरा एकत्रित करने के साथ ही उनके सत्यापन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया जाएगा।

बीएसए डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि उक्त 78 बिंदुओं में, शिक्षकों के नाम, उनकी जन्मतिथि, अनुक्रमांक, स्थानांतरण की स्थिति, पिता का नाम, जन्मस्थान आदि अन्य बिंदु सुनिश्चित किए गए थे। उन्होंने बताया कि जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।


बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने फर्जी दस्तावजों के आधार पर शिक्षक बनने का मामला प्रकाश में आने के बाद उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच का आदेश दिया था। उधर, 2000 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की अंकतालिकाएं भी संबंधित विवि को प्रेषित की जा चुकी हैं। डीआइओएस सतीश तिवारी ने बताया कि यदि किसी शिक्षक के शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, September 8, 2020

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों की नियुक्ति में अनियमितता, चयन समिति पर गिरेगी गाज

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों की नियुक्ति में अनियमितता, चयन समिति पर गिरेगी गाज।

कार्रवाई : उप निदेशक स्तर के अधिकारी सहित छह से मांगा गया है जवाब, पशु चिकित्सा अधिकारी और एनजीओ के चार सदस्य शामिल।

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों के चयन में की गई अनियमितता के मामले में अब चयन समिति के सदस्यों पर गाज गिरेगी। इस मामले में सोमवार को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने छह लोगों को नोटिस जारी की है। इसमें उपनिदेशक स्तर के अधिकारी हैं। एक पशु चिकित्सा अधिकारी और एनजीओ के चार प्रतिनिधि शामिल हैं। सभी को अपना पक्ष रखने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। उनका जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। संबंधित उचाधिकारियों को भी जानकारी दी गई है। एनजीओ को काली सूची में डालने की चेतावनी दी है।



कस्तूरबा आवासीय विद्यालय शिवपुर में 2008-09 के सत्र में वार्डन सह शिक्षिका के पद पर यादवेश कुमारी सिंह और अंशकालिक शिक्षक के पद पर रामचरित्र यादव की नियुक्ति हुई थी। अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद जब सभी नियुक्तियों की जांच हुई तोयहां भी जांच कराई गई। जांचसमिति ने पाया कि शिक्षिका कम वार्डेन का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। मगर चयन समिति ने यहां पर ओबीसी वर्ग की अभ्यर्थी यादवेश कुमारी सिंह का चयन किया, जो आरक्षण के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा रामचरित्र यादव की नियुक्ति में मेरिट की उपेक्षा की गई। उनसे अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थी को प्रतीक्षा सूची में रख दिया गया। इस मामले उपनिदेशक एनसीईआरटी विष्णु श्याम द्विवेदी को नोटिस जारी की गई है। वह उस समय चयन समिति के सदस्य सचिव थे। इसके अलावा सिंधोरा में कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नसीम अंसारी को नोटिस दी गई है। वह भी चयन समिति के सदस्य थे। एनजीओ के प्रतिनिधि के रूप में चयन समिति में शामिल जिला महिला समाख्या की विनीता, मुख्य कार्यकारी शिक्षा प्रचारिणी समिति, सीखड़ी गाजीपुर के आशुतोष राय को भी नोटिस जारी की गई है।

कस्तूरबा आवासीय विद्यालय, आराजीलाइन में भी नियुक्तियों की अनियमितता में चयन समिति के सदस्यों को नोटिस दी गई है। यहां सरिता आर्य नामक एक शिक्षिका नियुक्त की गई। चयन समिति ने उसका मेरिट 249.9 बताया, जबकि अभिलेखों से मेरिट 192.32 बन रही है। अंजनी राय नामक शिक्षिका की मेरिट 287.47 बताई गई, जबकि यह 214.52 है।


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Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, September 1, 2020

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

 

लखनऊ : विभिन्न कारणों से निलंबित किए गए परिषदीय शिक्षकों के खिलाफ जारी जांच को खंड शिक्षा अधिकारी दबाए बैठे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिनमें जांच रिपोर्ट लंबित है।


इससे जहां जांच की कार्यवाही के निस्तारण में विलंब हो रहा है, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग भी अनावश्यक रूप से शिक्षकों की सेवाओं से वंचित हो रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से हाल ही में की गई समीक्षा में 68 जिलों से प्राप्त सूचना में पाया गया कि प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के कुल 478 शिक्षक वर्तमान में निलंबित हैं।

समीक्षा से यह भी मालूम हुआ कि 269 शिक्षकों की जांच खंड शिक्षा अधिकारी दबाए हुए हैं।

Sunday, August 30, 2020

कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश

कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश।


जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है।



जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में कराए गए कार्यों की जांच अपने स्तर से कर ले। बाद में किसी प्रकार की शिकायत मिली तो रिपोर्ट लगाने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जनपद के 1165 परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना से ग्राम पंचायतों ने सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कराया था। इसमें ग्राम निधि के लाखों रुपये खर्च हुए। अब राज्य परियोजना निदेशक ने कायाकल्प के तहत हुए कार्यों के सत्यापन का फैसला लिया है। इसको लेकर निदेशक ने डीएम व बीएसए को पत्र भेजा है। जल्द ही स्कूलों में जांच होगी। जांच में जिन विद्यालयों की स्थिति खराब मिलेगी, उनकेप्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच से पूर्व बीएसए ने सभी शिक्षकों को अपने स्तर से एक बार स्कूल की स्थिति का मूल्यांकन का निर्देश दिया है। बीएसए ने बताया कि सभी स्कूलों की जांच 33 बिदुओं पर होगी जिसमें स्कूल में पेयजल, बालक व बालिका के लिए अलग-अलग क्रियाशील शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोईघर, क्लास रूम की फर्श पर टाइल, रंगाई-पोताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिग, वायरिग, विद्युत उपकरण, स्कूल में तैनात शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशकों की संख्या, छात्रों की उपस्थिति, लर्निंग आउटकम प्रशिक्षण की निगरानी, रेमेडियल क्लास का संचालन, यूनिफार्म, किताबों का वितरण आदि बिदु शामिल हैं।

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Wednesday, August 26, 2020

संत कबीरनगर : जांच टीम ने कब्जे में लिया कंपोजिट ग्रांट से खरीद के रिकार्ड, जांच उपरांत शासन को रिपोर्ट भेजने की कही बात

संत कबीरनगर : जांच टीम ने कब्जे में लिया कंपोजिट ग्रांट से खरीद के रिकार्ड, जांच उपरांत शासन को रिपोर्ट भेजने की कही बात।

संत कबीरनगर : राज्य परियोजना लखनऊ की टीम ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बेलहरकला और हैंसर ब्लाक में विभिन्न मदों से प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में हुए कार्यों की जांच की। जांच टीम ने चार दिन में जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है।



राज्य परियोजना से आए अवर अभियंता अनिल कुमार शुक्ल व अवर अभियंता मुरलीधर तिवारी ने मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे बेलहरकला ब्लाक के मेलानखुर्द, कैथवलिया व बभनी के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों पर जांच की। यहां कंपोजिट ग्रांट से करवाए गए कार्यों के अभिलेखों को देखने के साथ ही खरीद के रिकार्ड अपने कब्जे में लिया। इसके अलावा हैंसर ब्लाक के तीन विद्यालयों की भी जांच हुई। मौके पर प्रभारी डायट प्राचार्य राजेश कुमार, ओंकारनाथ मिश्र,जिला समन्वयक निर्माण एचएन त्रिपाठी के अलावा संबंधित विद्यालयों के प्राधानाध्यापक व शिक्षक मौजूद रहे। आज भी होगी जांच


-बेसिक शिक्षा व राज्य परियोजना की टीम ने दो दिनों में तीन ब्लाकों में जांच किया। बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार व गुरुवार को भी जांच जारी रहेगी।


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Monday, August 24, 2020

संदिग्ध शिक्षकों के केस में रिपोर्ट देने से कतरा रहे अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारियों ने उच्च शिक्षा निदेशालय को नहीं भेजी रिपोर्ट

 प्रयागराज : शासन की भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहिम को उनके अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। अधिकारी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का पहले खुलासा नहीं करते। अगर खुल जाता है तो गलत लोगों को बचाने के लिए अधिकारी भरसक प्रयास करते हैं। राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षकों के मामले में कुछ ऐसा ही चल रहा है। शासन के निर्देश पर हुई जांच में 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं। गड़बड़ी कहां और कैसे हुई? उसकी पड़ताल करके क्षेत्रीय अधिकारियों से 17 अगस्त को अंतिम रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, अधिकारियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी।


शासन ने राज्य विश्वविद्यालय व एडेड डिग्री कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। सारे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करके उसे ऑनलाइन किया जाएगा। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय से हर पहलु पर पड़ताल कराकर रिपोर्ट मांगी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने सारे क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी थी। जो अभी तक नहीं भेजी गई। निदेशक डॉ. वंदना का कहना है कि रिपोर्ट देने के लिए दोबारा पत्र भेजा गया है।

सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी शिक्षकों की जांच

सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी शिक्षकों की जांच

 
लखनऊ। प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की जांच माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्‍न विश्वविद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी हुई है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही जांच पूरी हो सकेगी।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जून को आयोजित बैठक में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के राजकीय और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज की जांच के निर्देश दिए थे। तीनों विभागों ने जांच के लिए जिला स्तर पर अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। हर जिले में जांच समिति ने जिन शिक्षकों के दस्तावेजों को संदिग्ध माना है। उन्हें संबंधित शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय को सत्यापन के लिए भेजा है। हजारों की संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने देश के अन्य प्रदेशों के शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल को है। ऐसे में उनके दस्तावेज सत्यापन के लिए अन्य प्रदेशों में भेजे गए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि यूपी बोर्ड और प्रदेश के विश्वविद्यालय भी समय पर सत्यापन रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। संदिग्ध दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट मिलने तक जांच पूरी नहीं हो सकती है। ऐसे में निर्धारित समय से एक महीना बाद 30 अगस्त तक भी जांच पूरी नहीं हो सकेगी।

Tuesday, August 18, 2020

नहीं भेजी रिपोर्ट, उच्च शिक्षा निदेशालय ने दोबारा भेजा पत्र, 27 शिक्षकों के संदिग्ध दस्तावेज की मांगी गई थी रिपोर्ट

नहीं भेजी रिपोर्ट,  उच्च शिक्षा निदेशालय ने दोबारा भेजा पत्र,  27 शिक्षकों के संदिग्ध दस्तावेज की मांगी गई थी रिपोर्ट

 
प्रयागराज : नियम विरुद्ध काम करने वालों के खिलाफ शासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसके तहत शासन ने राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। शुरुआती जांच में 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं, उनकी रिपोर्ट क्षेत्रीय अधिकारियों को सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय भेजनी थी। लेकिन क्षेत्रीय अधिकारियों ने रिपोर्ट नहीं भेजी। इस पर उच्च शिक्षा निदेशक ने दोबारा पत्र भेजकर शीघ्र से शीघ्र रिपोर्ट मांगी है।


बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है।


उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि शासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच करके रिपोर्ट मांगी थी। इसके तहत क्षेत्रीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, सोमवार तक रिपोर्ट नहीं मिली। इस पर दोबारा पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है।

Monday, August 17, 2020

आज आएगी संदिग्ध शिक्षकों की रिपोर्ट, जांच में राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों के दस्तावेज मिले थे संदिग्ध

आज आएगी संदिग्ध शिक्षकों की रिपोर्ट, जांच में राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों के दस्तावेज मिले थे संदिग्ध


 
 प्रयागराज : राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत जिन 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं, उनकी रिपोर्ट सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय पहुंच जाएगी। क्षेत्रीय अधिकारी मामले की पड़ताल करके अपनी अंतिम रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे। इसमें जिनके दस्तावेज गड़बड़ मिलेंगे निदेशालय उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करके रिपोर्ट शासन को भेजेगा। 


शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं।


 इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय से हर पहलु पर पड़ताल कराकर रिपोर्ट मांगी थी।

Friday, August 14, 2020

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇

लखनऊ। बुलंदशहर के सिकंदरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, थपरावली के व्यायाम शिक्षक पंकज यादव को आपस में मारपीट के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार को न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर मारपीट की ख़बरें चली थीं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसका संज्ञान लेते हुए दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇