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Friday, July 3, 2020

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख

2010 के बाद चयनित सभी शिक्षकों की जांच हुई शुरू, स्थानीय स्तर पर शिक्षकों से ही मांगे जा रहे अभिलेख


प्रयागराज : प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद शासन स्तर पर प्रदेश के परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में 2010 के बाद चयनित शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों के माध्यम से सभी शिक्षकों से तीन दिन के भीतर जरूरी अभिलेख मांगे हैं।


अभिलेख देने के साथ शिक्षकों को अपनी ओर से एक शपथ पत्र भी देना होगा, जिसमें किसी प्रकार की गलती पर रिकवरी सहित वेतन की वसूली और एफआईआर कराने की बात कही गई है। जिला स्तर पर एडीम नजूल की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने तय किया कि यह पता लगाया जाएगा कि जिन अध्यापकों का नाम चयन सूची में थे, क्या वास्तव में वही शिक्षक वर्तमान समय में काम कर रहें या नहीं।


यह भी पता लगाने को कहा गया है कि जिन शिक्षकों का नाम चयन सूची में है, क्या उन्होंने उस पद के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करना होगा। दिव्यांगजनों के प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच की जाए। चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के साथ उनके पैन, आधार के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा की ओर से जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों को जारी पत्र में सभी शिक्षकों से शपथ पत्र भी मांगा गया है, जिसका प्रोफार्मा भी उसमें दिया गया है। 

Tuesday, June 30, 2020

बरेली :एक ही नाम और दस्तावेजों पर नौकरी करते मिले दो शिक्षक


बरेली :एक ही नाम और दस्तावेजों पर नौकरी करते मिले दो शिक्षक



 बरेली : परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो बरेली में भी सोमवार को एक बड़ा मामला पकड़ा गया। यहां भोजीपुरा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल में जो शिक्षक तैनात है। उसी के नाम, दस्तावेजों के सहारे मुजफ्फरनगर जिले में भी एक शिक्षक प्राइमरी स्कूल में नौकरी कर रहा है। बीएसए ने शिक्षक का वेतन रोकते हुए जांच बैठा दी है। 


लखनऊ स्थित राज्य परियोजना निदेशालय से 192 संदिग्ध शिक्षकों की सूची जारी कर जांच के लिए कहा गया है। इनमें बरेली के भी चार शिक्षकों के नाम शामिल हैं। बीएसए विनय कुमार ने बताया कि इसमें भोजीपुरा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल मुढ़िया चेतराम के प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार सक्सेना का नाम भी शामिल है। वह वर्ष 2005 से यहां कार्यरत है। 



जांच में पता चला कि उन्हीं के नाम, मार्कशीट, जन्म तिथि से लेकन पैनकार्ड पर दूसरा शिक्षक वर्ष 2011 से मुजफ्फरनगर के एक प्राइमरी स्कूल में तैनात है। दोनों शिक्षकों की जो मार्कशीट है, वह भी एक ही स्कूल और कॉलेज की है। सिर्फ घर का पता बदला हुआ है। शिक्षक से पूछताछ की तो उन्होंने खुद को सही बताया।

Monday, June 29, 2020

चंद्रमा यादव के स्कूल का दस्तावेज खंगाला जा रहा, 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में मोस्ट वांटेड है चंद्रमा

चंद्रमा यादव के स्कूल का दस्तावेज खंगाला जा रहा

69000 सहायक शिक्षक भर्ती में मोस्ट वांटेड है चंद्रमा यादव 

स्कूल के रिकॉर्ड को देखकर साक्ष्य एकत्र कर रही एसटीएफ



69000 शिक्षक भर्ती में वांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में लगी एसटीएफ उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाने में जुट गई है। उसके स्कूल के दस्तावेज भी खंगाल रही है। पता चला है कि सेटिंग से ही स्कूल में प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर लेता था और खेल करता था। जबकि प्रतियोगी परीक्षा कराने के जरूरी मानक स्कूल में नहीं हैं। टीपी नगर, धूमनगंज के चंद्रमा यादव का पंचम लाल आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। 


स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव पेपर आउट कराकर खेल करता था। इसका खुलासा खुद एसटीएफ ने टीईटी पेपर के दौरान किया था। उस वक्त 7 लोग पकड़े गए थे  जिनके पास से 180 मोबाइल 220 सिम कार्ड व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद हुआ था। चंद्रमा यादव की तलाश में लगी एसटीएफ ने छापेमारी की। उसके स्कूल में जाकर भी जांच की।


 पता चला कि कुछ ही कमरों का उसका स्कूल है। बाउंड्री वॉल भी पूरा पैक नहीं है। बावजूद इसके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर पंचम लाल आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रहा है। गोपनीय तरीके से जांच कर रही एसटीएफ पता लगा रही है कि कहीं इसमें विभागीय अधिकारियों की सेटिंग तो नहीं है। आखिर कैसे और किसकी सेटिंग से उसके स्कूल में सेंटर मिलता था। स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

Saturday, June 27, 2020

उच्च शिक्षा विभाग के हर शिक्षक की होगी जांच, सभी जिलों में गठित होगी समिति और उपसमिति

उच्च शिक्षा विभाग के हर शिक्षक की होगी जांच, सभी जिलों में गठित होगी समिति और उपसमिति।


लखनऊ : राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय और अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत हर शिक्षक की नियुक्ति की जांच होगी। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका, एस गर्ग ने शुक्रवार को जांच का शासनादेश जारी करते हुए सभी जिलाधिकारियों को एक जांच समिति और उप समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं उन्होंने सभी डीएम को जांच पूरी कराकर 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनेगी। इसमें अपर पुलिस अधीक्षक को सदस्य और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को सदस्य सचिव नामित किया जाएगा। समिति के पर्यवेक्षण में स्थलीय जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। समिति में डीएम द्वारा नामित जिले के राजकीय महाविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रवक्ता और संबंधित राज्य विवि के वित्त अधिकारी को सदस्य नामित किया जाएगा। अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों की जांच के लिए डीएम द्वारा नामित एसडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाएगी। समिति में जिले के राजकीय महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रवक्ता को सदस्य नामित किया जाएगा।





विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के लिए समिति गठित : प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण के दौरान राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए समिति गठित की है। चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित समिति में डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अशोक सिंघल, पति शाहूजी महाराज विवि कानपुर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित को सदस्य बनाया गया है। समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी।


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Friday, June 26, 2020

अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच

अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच।


राज्य मुख्यालय : शिक्षकों की नियुक्तियों में हुए घोटाले की नित नयी परत खुलने के साथ ही प्रदेश सरकार ने राज्य के अनुदानित मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की भी जांच करवाए जाने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार के विशेष सचिव जे.पी.सिंह ने इस बारे में उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा है।









इस पत्र में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के 16 जून को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रदेश में कार्यरत सभी स्तर के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की विधिवत जांच कराए जाने के बाबत एक सप्ताह में कार्ययोजना बना कर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत करवाने को कहा गया है। इसी क्रम में राज्य के अनुदानित अरबी-फारसी मदरसों के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच करवाए जाने के संबंध में एक कार्ययोजना बनाकर शासन को दो दिनों में अवगत करवाएं। उधर, परिषद के रजिस्ट्रार आर.पी.सिंह ने बताया कि यह कार्ययोजना शुक्रवार तक शासन को उपलब्ध करा दी जाएगी।

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Tuesday, June 23, 2020

फर्रुखाबाद : तीन जगह नौकरी कर रही वार्डन, दस्तावेज सत्यापन में अनुपस्थित रहने पर शुरू हुई जांच में खुलासा

फर्रुखाबाद : तीन जगह नौकरी कर रही वार्डन, दस्तावेज सत्यापन में अनुपस्थित रहने पर शुरू हुई जांच में खुलासा।



फर्रुखाबाद। अनामिका शुक्ला प्रकरण के खुलासे के बाद जिले के कमालगंज की वार्डन संध्या द्विवेदी के तीन जिलों में नौकरी का मामला सामने आया है। इसकी जांच शुरू कर हो गई है। राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद के आदेश पर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की वार्डन, शिक्षिकाओं व कर्मचारियों के अभिलेखों की जांच शुरू हुई है।





 इसमें कायमगंज की वार्डन निधि गुप्ता, शिक्षिका मंजू सिंह व कमालगंज की वार्डन संध्या द्विवेदी अपने अभिलेखों का सत्यापन कराने नहीं आई। बीएसए ने इनके अभिलेखों की फोटो कॉपी के आधार पर जांच शुरू करने में कमालगंज कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में वार्डन संध्या द्विवेदी के अलीगढ़ व फिरोजाबाद में शिक्षा विभाग में नौकरी करने की जानकारी मिली, लेकिन वह किस पद पर और इन जिलों में कहां पर कार्यरत है. यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। उधर, बीईओ ललित मोहन पाल को कायमगंज व विद्यालय की वार्डन निधि गुप्ता के पते पर नगला खरा मैनपुरी जांच करने भेजा। वहां दूसरी निधि गुप्ता मिलीं जो बढ़पुरब्लाक के प्राइमरी विद्यालय गंगा द्वारा अंग्रेजी माध्यम स्कूल में तैनात हैं।




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Monday, June 22, 2020

69000 भर्ती फर्जीवाड़ा : चंद्रमा की तलाश में अब करीबियों पर कसेगा शिकंजा

69000 भर्ती फर्जीवाड़ा : चंद्रमा की तलाश में अब करीबियों पर कसेगा शिकंजा 


की तलाश के साथ ही उसके करीबियों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) अब टीईटी-2019 परीक्षा का पेपर आउट कराने के मामले में पकड़े गए रेलकर्मी अमित यादव और संजय उर्फ उमेश, राजेंद्र यादव समेत अन्य लोगों से भी पूछताछ करेगी। कस्टडी रिमांड पर लिए गए शिक्षक भर्ती


फर्जीवाड़ा गिरोह के सरगना डॉ. केएल पटेल ने पूछताछ में इनके बारे में नई जानकारी दी थी। इसी आधार पर चंद्रमा की गिरफ्तारी पर जोर देते हुए उसके करीबियों पर शिकंजा कसने के लिए साक्ष्य संकलित किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अशोक नगर निवासी संजय उर्फ उमेश उर्फ राकेश सिंह उर्फ गुरुजी बहुत ही शातिर है। उसने ही चंद्रमा यादव के प्रीतम नगर स्थित पंचमलाल आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से टीईटी का पेपर आउट कराने के लिए प्लान बनाया था। चंद्रमा के साथ उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 


शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा में चंद्रमा यादव का नाम सामने आने के बाद उसे मोस्टवांटेड करार किया गया है, संजय समेत कई अन्य से उसके कनेक्शन की पड़ताल चल रही है। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि केएल पटेल अपने गिरोह से जुड़े लोगों से फोन पर बहुत कम बात करता था। मिलने के लिए वह चंद्रमा, ललित त्रिपाठी, मायापति जैसे अन्य लोगों को अपने फूलपुर स्थित स्कूल में बुलाता था। 


ऐसे में स्कूल प्रबंधक और गैंग के दूसरे सदस्यों के बारे जानकारी जुटाने के लिए पुराने मामले के अभियुक्तों से पूछताछ की जाएगी। वहीं, एसटीएफ की दो टीम फरार चल रहे चंद्रमा यादव, मायापति दुबे, दुर्गेश पटेल व संदीप पटेल की गिरफ्तारी के लिए संभावित जगह छापेमारी कर रही है।

कस्तूरबा फर्जीवाड़ा : अनामिका, रीना और सरिता में उलझी पुलिस

कस्तूरबा फर्जीवाड़ा : अनामिका, रीना और सरिता में उलझी पुलिस 


प्रयागराज। अनामिका शुक्ला के नाम पर सोरांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका की लोकेशन कानपुर में मिली है। जिसके बाद कर्नलगंज थाने की एक टीम उसकी तलाश में जुट गई है। जल्द ही वह कानपुर के लिए रवाना होगी।


प्रयागराज : कथित शिक्षिका अनामिका शुक्ला प्रकरण की जांच कर रही कर्नलगंज पुलिस अब अनामिका, रीना और सरिता को लेकर उलझ गई है। सोरांव के गोहरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में आखिर किस नाम की महिला बतौर शिक्षिका नौकरी कर रही थी। इसको लेकर अब पेच फंस गया है।


पहले रीना और अब सरिता का नाम सामने आने से पुलिस की विवेचना की दिशा भी बदल जा रही है। अनामिका के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) भी अब तक नहीं आ सकी है और दूसरे कागजातों को भी तस्दीक नहीं किया जा सका है। माना जा रहा है कि सीडीआर मिलने और मोबाइल कंपनी को दिए गए दस्तावेज से अनामिका व रीना को लेकर उलझी गुत्थी सुलझ सकती है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका। 


उधर, अलीगढ़ पुलिस की गिरफ्त में आई बबली यादव ने अपने बयान में कहा है कि प्रयागराज स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अनामिका के नाम से उसकी ननद सरिता यादव नौकरी करती थी। उसके बयान की कॉपी भी मंगाने की तैयारी चल रही है, ताकि विवचेना में शामिल किया जा सके। कुछ दिन पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा ने थाना कर्नलगंज में एफआइआर दर्ज कराई थी। 


उनका आरोप है कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अनामिका शुक्ला ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी प्राप्त की। इस मामले की जांच चल ही रही थी कि अलीगढ़ पुलिस ने कानपुर देहात की रहने वाली बबली यादव को गिरफ्तार किया। बबली ने पूछताछ में बताया कि ननद सरिता प्रयागराज में नौकरी करती थी। इंस्पेक्टर कर्नलगंज अरुण त्यागी का कहना है सभी ¨बदुओं पर जांच की जा रही है।



17 शिक्षिकाओं-कर्मियों ने नहीं जमा किए दस्तावेज

जासं,प्रयागराज : जिले के सभी 20 ब्लॉकों के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) की 225 शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने सत्यापन के लिए अपने दस्तावेज (डॉक्यूमेंट) शनिवार तक जमा कर दिए। लेकिन 17 शिक्षिकाओं और कर्मियों ने दस्तावेज नहीं जमा किए। दस्तावेज जमा करने के लिए सोमवार को इन्हें अंतिम अवसर दिया गया है। सोरांव के गोहरी कस्तूरबा विद्यालय में विज्ञान विषय की कथित शिक्षिका अनामिका शुक्ला के फर्जी दस्तावेज का मामला सामने आने के बाद 16 जून से सभी शिक्षिकाओं और कर्मियों के मूल प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने जांच कमेटी को 19 जून तक जांच पूरा करने का निर्देश दिया था। लेकिन शुक्रवार तक 18 ब्लॉकों के विद्यालयों की शिक्षिकाओं और कर्मचारियों ने ही दस्तावेज जमा किए थे।

शिक्षक भर्ती : डायरी में मिले चयनितों के नाम में 16 आरक्षित वर्ग के, होगी पूछताछ


शिक्षक भर्ती : डायरी में मिले चयनितों के नाम में 16 आरक्षित वर्ग के, होगी पूछताछ


69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के भंडाफोड़ मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। पता चला है कि गिरोह के सदस्यों के पास से बरामद डायरी में जिन 17 चयनितों के नाम मिले हैं । उनमें से 16 आरक्षित वर्ग के हैं। इनमें से छह अभ्यर्थी तो दो परिवारों से ही हैं।


कहा जा रहा है कि एसटीएफ इन अभ्यर्थियों से भी पूछताछ कर सकती है जिनकी जानकारी जुटाई जा रही है। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के सरगना केएल पटेल समेत 11 सदस्य जेल भेजे जा चुके हैं। सोरांव पुलिस से मामला स्थानांतरित होने के बाद एसटीएफ जांच में जुटी है।


गिरोह के सदस्यों के पास से एक डायरी बरामद हुई थी जिनमें कुछ अभ्यर्थियों के नाम, रोलनंबर व परीक्षा के प्राप्तांक लिखे हुए थे। इस डायरी के संबंध में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पता चला है कि डायरी में जिन अभ्यर्थियों के नाम मिले हैं उनमें से 17 चयनित हैं। इनमें से 16 अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग के हैं जबकि एक अभ्यर्थी सामान्य वर्ग से संबंधित है। 


एक और खास बात यह है कि इनमें से छह अभ्यर्थी दो परिवारों से संबंधित हैं। दोनों परिवारों में प्रत्येक से एक महिला व दो पुरुष अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए हैं जो एक ही पिता की संतान हैं। इनमें से एक परिवार से ताल्लुक रखने वाले अभ्यर्थियों के प्राप्तांक क्रमश: 127, 127 व 126 और दूसरे परिवार से संबंधित अभ्यर्थियों के प्राप्तांक 128, 132 व 131 हैं।


इस लिस्ट में शामिल 10 नाम ऐसे हैं जिनके प्राप्तांक 140 से ज्यादा दर्शाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में जुटी एसटीएफ इन सभी अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है और इनसे पूछताछ भी कर सकती है। फिलहाल इस मामले में एसटीएफ अफसर कुछ भी बताने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि विवेचना प्रचलित है। 

Sunday, June 21, 2020

अनामिका फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड पुष्पेन्द्र भी निकला फर्जी शिक्षक


शिक्षक फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड पुष्पेन्द्र भी निकला फर्जी शिक्षक

सुशील कुमार कौशल के अभिलेखों से कर रहा था नौकरी 


मैनपुरी । पूरे प्रदेश में चर्चित अनामिका शुक्ला फर्जी शिक्षका मामला। इस मामले में फर्जीवाड़ा करने वाला मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र भी फर्जी शिक्षक निकला है। जो कुरावली में तैनात शिक्षक सुशील कुमार कौशल के अभिलेखों से जनपद फर्रुखावाद में नौकरी कर रहा है। इसकी पुष्टि कुरावली के शिक्षक की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हुई है। 


सुशील कुमार कौशल ने शनिवार को बीएसए कार्यालय में उपस्थित होकर अपने सभी अभिलेख दिखाए। तब इस बात का खुलासा हो सका। बताते चलें कि जालसाज पुष्पेंद्र थाना भोगांव क्षेत्र के गांव नगला खरा का रहने वाला है। जिसने बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर सुशील कुमार कौशल के नाम से नौकरी हासिल की। वर्तमान में उसकी तैनाती जिला फर्रुखाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय में हैं। 


छह दिन पहले जब पुष्पेंद्र उर्फ राज एसटीएफ की हिरासत में आया तब उसने अपना नाम पुष्पेंद्र उर्फ सुशील कुमार कौशल बताया था। पुष्पेंद्र के सुशील कुमार कौशल नाम से नौकरी करने की जानकारी ने कुरावली विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात कानपुर निवासी सुशील कुमार कौशल की दिक्कतें बढ़ा दीं। 


सुशील कुमार कौशल की जांच पिछले पांच दिनों से चल रही थी। इस दौरान न केवल विभागीय जांच की गई। बल्कि एसटीएफ ने भी सुशील कुमार कौशल से पूछताछ की। यहां तक कि बीएसए विजय प्रताप सिंह के निर्देश पर सुशील के सभी अभिलेखों की ऑनलाइन जांच कराई गई। यही नहीं एक टीम को फिरोजाबाद भेजा गया। जहां सुशील कुमार कौशल वर्तमान में अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। दूसरी टीम को कानपुर भी भेजा गया। जहां सुशील का स्थायी पता है। सभी जगह सुशील कुमार कौशल के दस्तावेज सही होने की पुष्टि हुई।


 शनिवार को सुशील कुमार कौशल अपने मूल अभिलेखों के साथ बीएसए कार्यालय में उपस्थित हुए। उनसे यहां बीएसए और उनकी टीम ने पूछताछ भी की। बीएसए ने बताया कि कुरावली में तैनात सुशील कुमार कौशल के अभिलेख सही पाए गए हैं। आरोपी ने इनके नाम से फर्जीवाड़ा कर जनपद फर्रुखावाद में नौकरी हासिल की है।

कासगंज में कस्तूरबा की फर्जी वार्डन और शिक्षिका पर मुकदमा


कासगंज में कस्तूरबा की फर्जी वार्डन और शिक्षिका पर मुकदमा


अनामिका शुक्ला के नाम पर फर्जी नियुक्ति के बाद कस्तूबा विद्यालयों में दो और फर्जी नियुक्तियों के मामले मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। जांच में परत दर परत विभागीय लापरवाही उजागर हो रही है। बीएसए की ओर से मैनपुरी की महिला शिक्षिका लक्ष्मी के नाम से फर्जी नौकरी करने वाली शिक्षिका और फर्जी बीएड डिग्री से वार्डन पद पर नियुक्ति पाने वाली शिक्षिका के खिलाफ सोरों और अमांपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने को रिपोर्ट भेजी गई है। पुलिस ने देर शाम दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इस प्रकार अब तक दो फर्जी टीचरों व एक वार्डन पर मकदमा दर्ज हो चुका है। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।


बीएसए अंजली अग्रवाल ले बताया कि अनामिका शुक्ला के नाम पर फर्जी नियुक्ति का मामले में जांच रही है। उसी दौरान मैनपुरी की लक्ष्मी के नाम पर फर्जी रूप से महिला नियुक्ति पाकर नौकरी पाने का मामला सामने आया है। यह मामला तत्कालीन बीएसए गीता वर्मा के समय वर्ष 2016 का है। फर्जी नौकरी करने वाली शिक्षिका लॉकडाउन होने के बाद से ही गायब है। बीएसए ने बताया कि उसके खिलाफ अमांपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने के लिए रिपोर्ट भेजी दी गई है। बीएसए के मुताबिक कस्तूरबा आवासीय विद्यालय फरीदपुर में ही एक वार्डन की नियुक्ति हुई थी। एसआईटी की जांच में उसकी बीएड की डिग्री फर्जी पाये जाने के बाद वार्डन चित्रा शर्मा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए सोरों कोतवाली में तहरीर भेजी गई थी।


जांच समिति से हटाये गये डीसी बालिका शिक्षा :कासगंज। कस्तूबा आवासीय विद्यालय की जांच समिति में सदस्य डीसी(जिला समन्वयक) बालिका शिक्षा गौरव सक्सैना पर ही एक फाइल को लेकर तत्कालीन डीसी बालिका शिक्षा जीएस राजपूत ने मौखिक आरोप लगा दिया। इसके बाद बीएसए ने तत्काल जांच समिति से गौरव सक्सैना को हटाते हुए उनकी जगह हाल ही में ज्वाइन करने वाले डीसी महेश कुमार सिंह को जांच समिति में सदस्य बतौर रखा है।


बीएसए अंजली अग्रवाल ले बताया कि, जांच में घेरे में आए तत्कालीन जिला समान्वयक जीएस राजपूत ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि अनामिका शुक्ला की नियुक्त आवेदन फाइल में अनामिका का फोटो लगा हुआ था। उसकी फाइल गौरव सक्सैना को चार्ज में दी गई हैं। ऐसे में सदस्य पर ही सवाल उठने पर बीएएस ने जांच को निष्पक्ष रखने के लिए सदस्य गौरव सक्सैना को जांच से अलग कर दिया।


लक्ष्मी के नाम पर नियुक्ति की भी जांच शुरू :कस्तूरबा विद्यालयों से संबंधित जांच करने वाली समिति ने मैनपुरी की लक्ष्मी के नाम पर फर्जी नियुक्ति प्रकरण में भी शनिवार से जांच शुरू हो गई। बीएसए ने बताया कि इस प्रकरण में दो सदस्यीय जांच समिति जांच कर रही है। इसमें जांच समिति संबंधित लोगों को नोटिस देकर जांच की कार्यवाही आगे बढ़ा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्यक्रम की जाएगी।

69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार : अब STF करेगी अभ्यर्थियों की बातचीत के वायरल आडियो की जांच


69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार : अब STF करेगी अभ्यर्थियों की बातचीत के वायरल आडियो की जांच


शिक्षक भर्ती में सेटिंग का एक अन्य वीडियो भी हुआ था वायरल


प्रयागराज। शिक्षक भर्ती परीक्षा में रुपये लेकर पास कराने की बातचीत संबंधी वीडियो मिलने के बाद एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी है। वैसे यह परीक्षा में सेटिंग चलने के आरोपों से संबंधित इकलौता वीडियो नहीं। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद एक और ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हआ था। इसमें एक व्यक्ति किसी चयनित अभ्यर्थी से बात करते हुए सुनाई पड़ रहा था। 


खास बात यह है कि 140 नंबर पाकर सफल हुआ अभ्यर्थी बातचीत में जुगाड़ से परीक्षा पास करने की बात भी कबूलता सुनाई पड़ता है। दूसरे व्यक्ति ने जब उससे यह पूछा कि उसने परीक्षा पास करने के लिए कितने रुपये दिए, तो वह यह कहता सुनाई देता है कि इस बारे में चाचा ही बता पाएंगे। हालांकि वह चाचा का नाम नहीं बताता। अभ्यर्थी यह भी कहता सुनाई पड़ता है कि परीक्षा में उसकी बहन भी सफल हुई है।


69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार खंगाल रही एसटीएफ अब वायरल आडियो की भी जांच करेगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने एसटीएफ के महानिदेशक को अनुरोध पत्र भेजा है।...


प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार खंगाल रही एसटीएफ अब वायरल आडियो की भी जांच करेगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने एसटीएफ के महानिदेशक को अनुरोध पत्र भेजा है। वायरल आडियो संदेश में दो कथित अभ्यर्थी परीक्षा पास कराने के लिए लेन-देन की चर्चा कर रहे हैं, इसकी फोरेंसिक जांच चल रही है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।


सोशल मीडिया पर फरवरी 2020 में एक आडियो संदेश खूब वायरल हुआ। इसमें दो लोग परीक्षा पास कराने के लेन-देन पर चर्चा कर रहे थे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इसका संज्ञान लिया और 11 मार्च को सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उप्र को आदेश दिया कि इस आडियो की फोरेंसिक जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। सचिव परीक्षा नियामक ने 12 मार्च को आडियो संदेश की सीडी फोरेंसिक जांच के लिए निदेशक राजकीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला महानगर लखनऊ भेजी।


कोरोना संक्रमण बढऩे से इस मामले की जांच रिपोर्ट परीक्षा संस्था को कई माह बीतने पर भी नहीं मिली। 11 मई को सचिव परीक्षा नियामक ने ईमेल पर पत्र भेजकर जांच आख्या मांगी, फिर भी कोई जवाब नहीं आया। सचिव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा से जांच रिपोर्ट दिलाने का अनुरोध किया, डीजी को भी इसमें सफलता नहीं मिली, तब राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान प्रयागराज के प्रोफेसर राकेश कुमार श्रीवास्तव को जांच आख्या लेने भेजा, वह भी खाली हाथ लौट आए। सचिव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को इससे अवगत कराया।


डीजी के निर्देश पर सचिव परीक्षा नियामक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने स्पेशल टास्क फोर्स के महानिरीक्षक को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले के साथ वायरल आडियो संदेश की भी एसटीएफ जांच करके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कराए। असल में फोरेंसिक लैब पुलिस महकमे के अधीन है, उसे जांच रिपोर्ट जल्द मिल जाएगी। सचिव ने एसटीएफ को सारे रिकॉर्ड भेज दिए हैं।

Saturday, June 20, 2020

हाथरस : वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच के क्रम में अध्यापकों की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

हाथरस : वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच के क्रम में अध्यापकों की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

कासगंज : फर्जीवाड़े में विभागीय जांच में बालिका शिक्षा के तत्कालीन डीसी दोषी, सौंपी रिपोर्ट

कासगंज : फर्जीवाड़े में विभागीय जांच में बालिका शिक्षा के तत्कालीन डीसी दोषी, सौंपी रिपोर्ट

तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने कहा आवेदन पर फोटो का मिलान ठीक से नहीं हुआ, दस्तावेज भी सही नहीं


अनामिका शुक्ला प्रकरण के फर्जीवाड़े की जांच से मामले में नया मोड़ आया है। इस पूरे प्रकरण में बालिका शिक्षा के तत्कालीन डीसी (जिला समन्वयक) प्रथम दृष्टया पूरी तरह लापरवाह पाए गए हैं। उन्हें दोषी मानते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट बीएसए को सौंप दी है। बीएसए अब राज्य परियोजना कार्यालय और जिलाधिकारी को जांच आख्या सहित पत्रावली भेजेंगी।


फर्जीवाड़े के दायरे में आई सुप्रिया जेल में है। मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र उर्फ राज से पूछताछ की तैयारी हो रही है। इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच पूरी की है। बीएसए ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई। जिसमें कासगंज के खंड शिक्षाधिकारी राजेंद्र सिंह बोरा, गंजडुंडवारा के खंडशिक्षाधिकारी श्रीकांत पटेल और बालिका शिक्षा के मौजूदा डीसी गौरव सक्सेना को शामिल किया गया।


तीन सदस्यीय जांच टीम ने बिंदुवार जांच की। इसमें प्रथम दृष्टया बालिका शिक्षा के तत्कालीन डीसी जीएस राजपूत को दोषी पाया गया है। जांच कमेटी ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि तत्कालीन डीसी ने आवेदन पर फोटो का मिलान ठीक से नहीं किया और उसके मूल दस्तावेजों के अलावा पहचानपत्रों की सही से जांच नहीं की।

इसी लापरवाही के कारण इस फर्जीवाड़े को जन्म मिला। बीएसए ने इस जांच आख्या का अवलोकन करने के बाद पत्रावली तैयार की है। नोटशीट सहित पूरी पत्रावली अब राज्य परियोजना कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय भेजी जा रही है।


मिल चुकी है रिपोर्ट
तीन सदस्यीय टीम ने इस फर्जीवाड़े के प्रकरण की रिपोर्ट सौंप दी है। प्रथम दृष्टया बालिका शिक्षा के तत्कालीन डीसी दोषी पाए गए हैं। फाइल परियोजना कार्यालय भेजी जा रही है- अंजली अग्रवाल, बीएसए


जितना काम दिया, मैंने किया
शिक्षिका की नियुक्ति को लेकर जांच कमेटी ने निर्णय लिया। मेरा कहीं कोई हस्तक्षेप नहीं था। सत्यापन भी मैंने नहीं कराए। जितना भी काम अधिकारियों ने दिया, मैंने किया। -जीएस राजपूत , तत्कालीन डीसी, बालिका शिक्षा

फर्रुखाबाद की दीप्ति के अभिलेखों से मैनपुरी में दो ने पाई नौकरी


फर्रुखाबाद की दीप्ति के अभिलेखों से मैनपुरी में दो ने पाई नौकरी


कायमगंज की दीप्ति के अभिलेखों से दो ने पाई नौकरी
कायमगंज (फर्रुखाबाद)। कासगंज में अनामिका के बाद अब मैनपुरी में कायमगंज की दीप्ति के दस्तावेजों से दो युवतियां नौकरी करते पाई गईं हैं। इनके तार भी कहीं न कहीं मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र से जुड़े है। बेवर के खंड शिक्षा अधिकारी असली दीप्ति के परिजनों से पूछताछ कर चुके हैं। दीप्ति कौशांबी ढहैया के राजकीय कालेज में सहायक अध्यापिका है।


अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद मैनपुरी के करहल बा विद्यालय में तैनात दीप्ति व बेवर के जमौरा प्राथमिक विद्यालय में तैनात अनुदेशिका दीप्ति की जांच शुरू हुई तो नया भंडाभोड़ हुआ। दोनों का पता कायमगंज नगर के मोहल्ला बगिया सोहनलाल निवासी दीप्ति पुत्री सुरेश चंद लिखा था। दोनों युवतियां कायमगंज की दीप्ति के दस्तावेजों पर नौकरी कर रहीं थीं।


बेवर के खंड शिक्षा अधिकारी जांच को आए तो परिजनों ने बताया असली दीप्ति की तीन साल पहले हरदोई जनपद के हरपालपुर में शादी हो चुकी है और उनके पति आर्मी में हैं। इस समय वह कौशांबी के मिश्रपुर ढहैया के राजकीय विद्यालय में सहायक अध्यापिका हैं।


दीप्ति के भाई अंबुज ने बताया उनकी बहन के असली दस्तावेज यहां रखे थे। शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी यहां आये थे। उन्हें फोटोकॉपी उपलब्ध कराकर लिखित में दे दिया है। उनकी बहन से लखनऊ एसटीएफ ने भी दस्तावेज मंगाए थे। वहां भी भेज दिए गए हैं।


मैनपुरी में उनकी बहन के नाम से नौकरी करने वाली युवतियों को वे नहीं जानते। उन्होंने बताया दीप्ति ने सिटी गर्ल्स कॉलेज से इंटर व कायमगंज के एसडी कालेज से बीए किया था। बीएड करने के बाद हरदोई जनपद के एक बा विद्यालय में नौकरी की थी। इसके बाद कौशांबी में उनकी नौकरी लग गई। इसके बाद उनकी शादी हो गई।


कहीं हरदोई से तो नहीं निकाले गए दीप्ति के दस्तावेज
कायमगंज। प्रदेश भर में अनामिका की डिग्री पर बा विद्यालयों में नौकरी दिलाने वाले मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र के तार हरदोई से भी जुड़े रहे हैं। पिछले दिनों लखनऊ एसटीएफ ने पुष्पेंद्र उर्फ राज उर्फ सुशील कौशल के साथ हरदोई में शिक्षा विभाग में तैनात लिपिक रामनाथ व जौनपुर के समन्वयक आनंद को गिरफ्तार किया था। फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने में मास्टरमाइंड के साथ यह दोनों भी शामिल बताए गए थे।


कायमगंज की दीप्ति ने भी एक वर्ष तक हरदोई के बा विद्यालय में नौकरी की है। इससे जाहिर है, कहीं न कहीं मैनपुरी में दीप्ति के नाम से नौकरी दिलाने में इसी गैंग का हाथ है। जब दीप्ति ने बा विद्यालय से नौकरी छोड़ दी तो इन लोगों ने असली दीप्ति की डिग्री की फोटोकॉपी हासिल कर ली और मैनपुरी में दो युवतियों को नौकरी दिला दी।


इससे साफ है मैनपुरी में दीप्ति नाम से नौकरी करने वाली युवतियां मास्टरमाइंड से जुड़ी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मैनपुरी में फर्जी दीप्ति के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस दीप्ति नाम की दोनों युवतियों की तलाश कर रही है।

अनामिका शुक्‍ला प्रकरण के बाद मऊ में फर्जी ममता राय, एफआइआर के आदेश पर आरोपित शिक्षिका फरार


अनामिका शुक्‍ला प्रकरण के बाद मऊ में फर्जी ममता राय, एफआइआर के आदेश पर आरोपित शिक्षिका फरार


पूरे प्रदेश में चर्चित अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद मऊ में अब फर्जी ममता राय नामक शिक्षिका का मामला पकड़ में आया है।...


मऊ  ।   पूरे प्रदेश में चर्चित अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद मऊ जिले में अब फर्जी ममता राय नामक शिक्षिका का मामला पकड़ में आया है। ममता राय के नाम पर अन्य कई शिक्षिकाओं के नौकरी करने की शिकायत सामने आते ही विभाग द्वारा कराई गई जांच में रंभा पांडेय नामक एक महिला पकड़ में आई। जांच शुरू होने के बाद से आरोपित महिला फरार हो गई है। उसके मायके से उसके फर्जी नाम की पुष्टि हुई है।


जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि उसकी सेवा समाप्त करते हुए उसके विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने का आदेश दे दिया गया है। वह वर्ष 2000 में महाराजगंज जिले से ट्रांसफर लेकर आई थी। बेसिक शिक्षा विभाग को शिकायत मिली कि जनपद में ममता राय नामक किसी महिला के अभिलेख पर एक फर्जी शिक्षिका नौकरी कर रही है। शिकायत मिलते ही जांच शुरू हो गई। जांच में पता चला कि रतनपुरा ब्लाक के मुबारकपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में ममता राय नामक शिक्षिका का असली नाम रंभा पांडेय है, वह ममता के नाम के अभिलेखों के आधार पर फर्जी तरीके से नौकरी कर रही है। विभाग द्वारा जांच शुरू होने की खबर मिलते ही कथित ममता राय यानी रंभा पांडेय फरार हो गई।


महाराजगंज जनपद से स्थानांतरण पत्र लेकर आई थी

मालूम हुआ कि वह मूल रूप से बलिया जनपद के पांडेयपुर ताखा गांव की निवासी है। वर्ष 2000 में वह महाराजगंज जनपद से स्थानांतरण पत्र लेकर आई थी। किंतु आश्चर्यजनक यह कि उसके सर्विस बुक में पहली प्रविष्टि वर्ष 2011 में दर्ज की गई है। रंभा के गांव के प्रधान द्वारा उसके नाम-पता की पुष्टि होने पर रंभा को विभाग द्वारा नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए शुक्रवार की तिथि निर्धारित थी किंतु वह उपस्थित नहीं हुई। जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि उसकी सेवा समाप्त कर दी गई है। उसके विरुद्ध हलधरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जिस ममता राय के नाम पर वह नौकरी कर रही थी, अभिलेखों में उसका नाम व पता बाछाबार बलिया अंकित है। उसका पता लगाया जा रहा है। संभावना है कि इस महिला के अभिलेख पर और भी लोग नौकरी कर रही हों।

69000 : अभ्यर्थी दे रहे सुराग, STF को फोन के जरिये दी जा रहीं जानकारी

69000 : अभ्यर्थी दे रहे सुराग, STF को फोन के जरिये दी जा रहीं जानकारी


प्रयागराज। सर हम बलिया से बोल रहे हैं। आप एसटीएफ से हैं। सर जी एक जानकारी देनी है। मेरे गांव का एक लड़का टॉपरों की सूची में है। सर हाईस्कूल, इंटर में उसका नंबर बहुत कम था। वह टॉप नहीं कर सकता। सर उसने प्रयागराज में एक छात्रनेता के मदद से टॉप किया है। आप इसकी जांच कराइए। गांव में चर्चा है कई लाख रुपए खर्च किया है। 


बलिया समेत प्रदेशभर से 69000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी एसटीएफ को कॉल करके ऐसे ही सुराग दे रहे हैं। एसटीएफ के पास पिछले एक हफ्ते में 100 से ज्यादा फोन कॉल आ चुकी हैं। एसटीएफ प्रभारी और सीओ को कॉल करके प्रतियोगी छात्र बता रहे हैं कि कौन-कौन इस रैकेट से जुड़ा हुआ है।


 प्रतियोगी छात्रों ने एसटीएफ को इस बात की भी जानकारी दी है कि द्वितीय श्रेणी में पास करने वाले लड़के कैसे सहायक शिक्षक भर्ती में टॉप कर गए। उन्होंने न तो कोई कोचिंग की थी और न ही तैयारी करने दिल्ली गए थे।


 इसके अलावा यह भी बताया है कि प्रयागराज में चंद्रमा यादव और डॉ कृष्ण लाल पटेल गैंग से जुड़कर कैसे अभ्यर्थियों ने टॉप किया है। एसटीएफ सूत्रों की मानें तो इस तरह की मिल रही जानकारी के बाद हर चीज की छानबीन की जा रही है।

69000 शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा और नकल कराने के मुख्य आरोपी डॉ. कृष्ण लाल पटेल को रिमांड पर लेकर की गई पूछताछ

69000 शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा और नकल कराने के मुख्य आरोपी डॉ. कृष्ण लाल पटेल को रिमांड पर लेकर की गई पूछताछ

प्रयागराज | वरिष्ठ संवाददाता


69000 शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा और नकल कराने के मुख्य आरोपी डॉ. कृष्ण लाल पटेल को शिवकुटी पुलिस ने शुक्रवार को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। सूचना मिलने पर एसटीएफ भी थाने पहुंच गई और सहायक शिक्षक भर्ती की भी जानकारी एकत्र की। आठ घंटे तक उससे पूछताछ की गई। उसके बयान के आधार पर एसटीएफ आगे की कार्रवाई में जुट गई है।


गौरतलब है कि लखनऊ एसटीएफ ने फरवरी 2019 में रेलवे भर्ती बोर्ड में नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ ने शिवकुटी थाना क्षेत्र से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि नकल कराने वाला मुख्य आरोपी पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ कृष्ण लाल पटेल है। शिवकुटी पुलिस ने इस मुकदमे उसे वांटेड कर दिया। एक साल से पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। सहायक शिक्षक भर्ती में जब सोरांव पुलिस ने फर्जीवाड़ा के आरोपी में डॉ. केएल पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेजा तो शिवकुटी पुलिस ने उसे अपने मुकदमे में पूछताछ के लिए कोर्ट से रिमांड पर लिया। शुक्रवार को 8 घंटे के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड मिला था। इस दौरान डॉ पटेल के अधिवक्ता भी थाने में मौजूद रहे। इस केस की विवेचक शिवकुटी थाने के दरोगा शिवचरण ने बताया कि आरोपी के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं दूसरी ओर डॉ. पटेल से एसटीएफ ने सहायक शिक्षक भर्ती में जानकारी एकत्र की।

उच्च शिक्षा संस्थानों में भी जांचे जाएंगे दस्तावेज, स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए बन रहा पोर्टल

उच्च शिक्षा संस्थानों में भी दस्तावेज जांचे जाएंगे


राज्य मुख्यालय : बेसिक शिक्षा में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों पर शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्त शिक्षकों के भी शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी होने की संभावना है।





उच्च शिक्षा विभाग के अधीन प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के अलावा सभी राजकीय महाविद्यालय और सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय आते हैं। इस कारण जांच में इन तीन श्रेणी के संस्थानों को शामिल करने पर विचार चल रहा है। सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर अभी जांच टीम के गठन पर विचार चल रहा है। संभव है कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर और राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के स्तर पर जांच टीम का गठन किया जाए।



स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए बन रहा पोर्टल

शासन ने राज्य विश्वविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ा रहे शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए अलग पोर्टल बनाने का आदेश दिया है। इस पोर्टल पर स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों व महाविद्यालयों के शिक्षकों के अलावा कर्मचारियों का भी ब्योरा होगा।



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Friday, June 19, 2020

गोरखपुर : फर्जी शिक्षकों पर मेहरबान हैं खंड शिक्षाधिकारी, पांच माह से नहीं दे रहे जांच रिपोर्ट


गोरखपुर : फर्जी शिक्षकों पर मेहरबान हैं खंड शिक्षाधिकारी, पांच माह से नहीं दे रहे जांच रिपोर्ट


निलंबित शिक्षकों की रिपोर्ट न देकर उन्‍हें राहत देने का काम किया जा रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी पांच माह से जांच रिपोर्ट देने में आनाकानी कर रहे हैं। ...


गोरखपुर । जनपद में नाम बदलकर व कूट रचित प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले 33 निलंबित शिक्षकों की जांच पिछले पांच माह से लटकी हुई है। निलंबित शिक्षकों की जांच संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को सौंपी गई है, लेकिन उनके द्वारा जांच में शिथिलता दिखाने से न तो जांच पूरी हो रही है और न ही मामला पुष्ट होने के बाद शिक्षकों पर कार्रवाई आगे बढ़ रही है। 


जांच रिपोर्ट अब तक न देने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों पर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। कुछ का कहना है कि निलंबित शिक्षकों की रिपोर्ट न देकर उन्‍हें राहत देने का काम किया जा रहा है। बहरहाल, अब खंड शिक्षा अधिकारियों पर ही निर्भर है कि वह कितने दिन तक निलंबित शिक्षकों पर मेहरबान रहेंगे। जिले में इस मामले में अब तक 48 शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं।


विभाग की सक्रियता पर नहीं, शिकायत के आधार पर अब तक हुई कार्रवाई
जिले में फर्जी शिक्षकों के मामलों पर नजर डालें तो अभी तक जितनी भी कार्रवाई हुई हैं वह सभी शिकायतों के आधार पर हुई। अभी भी 22 शिक्षक विभाग के रडार पर हैं, जिन पर जांच की कार्रवाई गतिमान है। कस्तूरबा की विज्ञान शिक्षिका अनामिका प्रकरण के भंडाफोड़ के बाद प्रदेश सरकार ने सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्र के सत्यापन का आदेश दिया है। ऐसे में जांच के बाद फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की लंबी फेहरिस्त सामने आ सकती है।


इन ब्लाकों के हैं निलंबित शिक्षक
बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले जिन 33 शिक्षकों के विरुद्ध् निलंबन की कार्रवाई की है उनमें ब्रह्मपुर, बड़हलगंज, बेलघाट, कौड़ीराम, पिपरौली,  खजनी,  भटहट, पाली, सरदारनगर,  चरगांवा, गगहा,  जंगल कौड़ियां, गोला तथा सहजनवां विकास खंड के अंतर्गत स्थित प्राइमरी स्‍कूल के शिक्षक शामिल हैं।


जांच रिपोर्ट में विलंब के कारण नहीं हो पा रही बर्खास्‍तगी
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेन्‍द्र नारायण सिंह का कहना है कि निलंबित शिक्षकों की जांच संबंधित ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारियों को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में विलंब होने के कारण इनकी बर्खास्तगी नहीं हो पा रही है। खंड शिक्षाधिकारियों को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।