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Friday, May 7, 2021

यूपी पंचायत चुनाव : मृतक शिक्षकों की सूची को सत्यापित करेंगे डीएम, तरीके पर संगठनों ने जताई आपत्ति

यूपी पंचायत चुनाव : मृतक शिक्षकों की सूची को सत्यापित करेंगे डीएम, तरीके पर संगठनों ने जताई आपत्ति


पंचायत चुनाव में संक्रमित होकर मृत हुए 706 शिक्षकों की सूची जिलाधिकारी सत्यापित करेंगे। इन शिक्षकों की ड्यूटी पंचायत चुनाव में लगी थी और कोविड के कारण इनकी मौत हुई, इन बिन्दुओं पर जिलाधिकारियों को अपनी रिपोर्ट देनी है। शिक्षकों ने इस पर आपत्ति उठाई है। उनका कहना है कि इस सूची में चौथे चरण और मतगणना में संक्रमित होकर मृत हुए शिक्षकों की संख्या नहीं है।
 

शिक्षक संघों का कहना है कि कई शिक्षकों की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगाई गई थी। प्रशिक्षण के समय ही ये संक्रमित हो गए और ड्यूटी नहीं कर पाए, वे बाद में मृत हो गए। उनको भी इस सूची में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वे संक्रमित पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण में हुए हैं। इसे भी शासन को स्पष्ट करना चाहिए। वहीं 706 शिक्षकों की सूची 29 अप्रैल की है, जिसमें चौथे चरण के बाद संक्रमित होकर मृत हो गए शिक्षकों के नाम नहीं है।


यह सूची उप्र शिक्षक महासंघ ने 29 अप्रैल को राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी थी। इसमें 706 शिक्षकों के नाम, स्कूल के नाम और ब्लॉक-जिला था। इस सूची को भी अब विभाग सत्यापित करवा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में 135 शिक्षकों की मृत्यु पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था। इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ ने दावा किया कि 706 शिक्षकों की अब तक मृत्यु हो चुकी है।

Thursday, March 18, 2021

54 अशासकीय विद्यालयों में हुई नियुक्ति की जांच, कुशीनगर के विद्यालयों में हुई हैं नियुक्तियां

54 अशासकीय विद्यालयों में हुई नियुक्ति की जांच, कुशीनगर के विद्यालयों में हुई हैं नियुक्तियां


गोरखपुर। कुशीनगर के 54 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में नियमों को ताक पर रखकर हुई नियुक्तियों समेत अन्य शिकायतों की जांच एडी बेसिक गोरखपुर मंडल डॉ. सत्यप्रकाश त्रिपाठी की ओर की जाएगी।


वर्ष 2019 में हुई इन नियुक्तियों में प्रबंधकों की ओर से धांधली की शिकायत शासन से हुई थी। शिकायतों का संज्ञान लेकर शासन ने मामले की पूरी जांच रिपोर्ट 15 दिनों में तलब की है। आदेश के बाद से प्रबंधकों और शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। 


एडी बेसिक की ओर से विद्यालयों में गैर कानूनी तरीके से हुई नियुक्ति, खाद्यान्न और एमडीएम के समुचित उपयोग, प्रबंध समिति के वैधता के साथ, छात्रों की उपस्थिति की भी जांच की जाएगी। इसके पूर्व प्रदेश के सभी एडेड जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष- 2019 में प्रबंधकों द्वारा गैर कानूनी रूप से की गई शिक्षकों की नियुक्तियों की जांच की गई थी यह जांच भी शासन स्तर से एडी बेसिक को सौंपी गई थी। 


आईजीआरएस पोर्टल पर मुख्यमंत्री से शिकायत करने पर इस जांच की जरूरत हुई है। शिकायत करने वाले का आरोप था कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष 2019 में प्रबंधकों द्वारा कई अध्यापकों की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।


अपर शिक्षा निदेशक, प्रयागराज की ओर से विद्यालयों के जांच करने का आदेश मिला है। जिले के 54 विद्यालयों की जांच कर 15 दिनों में शासन को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। -डॉ.सत्य प्रकाश त्रिपाठी, एडी बेसिक, गोरखपुर मंडल

Sunday, March 14, 2021

69,000 भर्ती में चयन के बाद की तिथि का जाति व निवास प्रमाणपत्र लगाने पर शिक्षक संदेह के घेरे में, मांगा गया जवाब

69,000 भर्ती में चयन के बाद की तिथि का जाति व निवास प्रमाणपत्र लगाने पर शिक्षक संदेह के घेरे में, मांगा गया जवाब


सुल्तानपुर। 69,000 शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए नौ शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। शिक्षकों ने चयन के बाद आयोजित काउंसिलिंग प्रक्रिया में निर्धारित तिथि के बाद का जाति प्रमाणपत्र व निवास प्रमाणपत्र लगाया था। बीएसए ने शिक्षकों से जवाब मांगा है।


69,000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चयनित नौ शिक्षकों ने काउंसिलिंग के समय निर्धारित तिथि के बाद का जाति व निवास प्रमाण पत्र लगा दिया था। उस समय चयन के आधार पर शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित कर दिया गया था।


बाद में कागजातों के परीक्षण में इसका खुलासा हुआ, जबकि निर्देश में स्पष्ट लिखा हुआ था कि 28 मई 2020 के पूर्व का निर्गत हुआ प्रमाणपत्र ही लगाया जाना है। बीएसए दीवान सिंह यादव ने संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर 15 मार्च को प्रकरण में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।


बीएसए ने कहा है कि इसके पूर्व भी छह मार्च को संबंधित प्रकरण में शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का निर्देश जारी किया गया था लेकिन नौ शिक्षक निर्धारित तिथि को साक्ष्य सहित उपस्थित नहीं हुए। सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं होने पर बीएसए ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए 15 मार्च को शाम चार बजे साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।


उन्होंने कहा है कि निर्धारित तिथि पर सुनवाई के लिए उपस्थित न होने पर यह माना जाएगा कि प्रकरण के संदर्भ में संबंधित शिक्षक को कुछ नहीं कहना है। इसके बाद शासनादेश के मुताबिक विभागीय कार्रवाई कर दी जाएगी।


पिता के स्थान पर पति के नाम का लगाया प्रमाणपत्र
कुछ नवनियुक्त शिक्षिकाओं ने जाति प्रमाणपत्र में पिता के स्थान पर पति के नाम से निर्गत सर्टिफिकेट लगाया है। जबकि महिला अभ्यर्थियों को जाति प्रमाणपत्र पिता के नाम से निर्गत हुआ प्रस्तुत किया जाना था। इस मामले में भी कुछ शिक्षिकाओं को नोटिस जारी की गई है।

Saturday, March 6, 2021

बेसिक शिक्षा परिषद में विजिलेंस के जरिये जांच की तैयारी में यूपी सरकार, जानिए कार्रवाई को लेकर क्या बन रहा प्लान

बेसिक शिक्षा परिषद का पूरा स्टाफ होगा सतर्कता जांच के दायरे में, जांच में सहयोग न करने पर सचिव को भी कारण बताओ नोटिस जारी

बेसिक शिक्षा परिषद में विजिलेंस के जरिये जांच की तैयारी में यूपी सरकार, जानिए कार्रवाई को लेकर क्या बन रहा प्लान


लखनऊ : लगभग नौ वर्षों तक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव रहे संजय सिन्हा और उनके कार्यालय के स्टाफ की विजिलेंस जांच के बहाने प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग में एक और बड़े ‘आपरेशन’ को अंजाम देने जा रही है। प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे फर्जी शिक्षकों का फंडाफोड़ होने के बाद अब तबादलों, मृतक आश्रित कोटे में हुई नियुक्तियों, नियम विरुद्ध प्रोन्नतियों और बर्खास्त शिक्षकों की बहाली का मामला खुलने वाला है। इस बार जांच की कमान एसटीएफ के बजाए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के हाथ में होगी। 


निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं के पद से शुक्रवार को निलंबित किए गए संजय सिन्हा पर विजिलेंस जांच का शिकंजा तब कसने जा रहा है जब वह सेवानिवृत्ति के करीब हैं। इसी तरह पूर्व में निदेशक माध्यमिक शिक्षा के पद पर रहे संजय मोहन को अपने सेवाकाल के अंतिम दिनों में जेल तक जाना पड़ गया था। उस समय वह टीईटी घोटाले में फंसे थे। अपने विभाग खासकर बेसिक शिक्षा परिषद में संजय सिन्हा का रुतबा तब भी बरकरार था, जब वहां से हटा दिए गए थे। 


उनके विरुद्ध शिकायतों की जांच कर रहे महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को कदम-कदम पर बाधाओं का सामना करना पड़ा। परिषद के कर्मचारियों के असहयोग के कारण पत्रावलियां ही नहीं मिल पाती थीं। अंतत: एक साल से भी ज्यादा समय में उनकी जांच पूरी हो पाई, जिसमें प्रारंभिक तौर पर कई गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई। 


सचिव से ले आते थे तबादला आदेश 
एक समय ऐसा था जब जिलों में शिक्षकों के तबादले सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के आदेश से हुआ करते थे। शिक्षक परिषद के सचिव से आदेश कराकर लाते थे और बीएसए उसी आदेश का हवाला देते हुए एक स्कूल से दूसरे स्कूल में तबादला कर देते थे। बड़ी संख्या में ऐसे तबादले मध्य सत्र में किए गए हैं। अब विजिलेंस की जांच ऐसे तबादलों के बदले वसूली के आरोपों पर केंद्रित होगी।


इसी तरह शासन की अनुमति के बगैर मृतक आश्रित कोटे में की गई नियुक्तियों, बीएसए द्वारा बर्खास्त शिक्षकों की बहाली के आदेशों और पद रिक्त न होते हुए भी दी गई प्रोन्नतियों से संबंधित सभी मामले जांच के दायरे में होंगे। जांच का यह दायरा प्रदेश के दर्जन भर से ज्यादा जिलों तक बढ़ने की संभावना है। इससे पहले एसटीएफ की जांच में फर्जी शिक्षकों के पकड़े जाने के बाद विभाग ने जब मानव संपदा पोर्टल पर सूचनाएं अपलोड करानी शुरू की तो बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों के कार्यरत होने का मामला सामने आया था।


संजय सिन्हा के साथ ही बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव कार्यालय के सभी पटल सहायकों के विरुद्ध भी सतर्कता जांच कराई जाएगी। बेसिक शिक्षा परिषद के वर्तमान सचिव प्रताप सिंह बघेल को जांच में सहयोग न करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

Thursday, February 25, 2021

आजमगढ़ : जांच के लिए नहीं पहुंचे शिक्षक, दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वालों की हो रही जांच

आजमगढ़ : जांच के लिए नहीं पहुंचे शिक्षक, दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वालों की हो रही जांच


आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षकों की हुई भर्ती में दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने
 वालों की जांच हो रही है। मेडिकल बोर्ड ने अनुपस्थित दिव्यांग शिक्षकों को सूची जारी कर दी है। इसमें जिले के 15 दिव्यांग शिक्षक हैं।


शीर्ष कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम रविंद्र कुमार शर्मा व अन्य की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए तीन फरवरी, 2016 को आदेश दिया कि अभ्यर्थियों की जांच मेडिकल बोर्ड गठित कर कराई जाए। शासन ने इसके अनुपालन में 13 मई, 2016 को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। यह काम करीब पांच साल बाद पूरा हुआ। जनपद के 15 शिक्षक वर्ष 2016 से 2019 तक कभी भी मेडिकल बोर्ड के कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए। मेडिकल बोर्ड ने उक्त शिक्षकों की सूची जारी कर दी है। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जनपद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक व प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात दिव्यांग अभ्यर्थी का अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बता दें कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, विशेष चयन 2008 तथा सामान्य चयन 2008 में चयनित शिक्षकों की जांच हो रही है।

मेडिकल बोर्ड के समक्ष आज तक यह शिक्षक नहीं हुए उपस्थित
आजमगढ़। परिषदीय विद्यालयों में तैनात दिव्यांग शिक्षक जो वर्ष 2016 से 2019 के बीच आज तक उपस्थित न होने वाले शिक्षकों की सूची मेडिकल बोर्ड ने जारी कर दी है। कुल 204 शिक्षकों की सूची में 15 नाम आजमगढ़ जनपद में तैनात हुए शिक्षकों की है। इसमें 14 शिक्षक विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण वर्ष 2007 के और एक वर्ष 2008 का है।


विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, विशेष चयन 2008 तथा सामान्य चयन 2008 में चयनित दिव्यांग शिक्षकों की जांच चल रही है। मेडिकल बोर्ड द्वारा गठित टीम के समक्ष जिले के कई शिक्षक अनुपस्थित चल रहे हैं उक्त शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा। अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।

Wednesday, February 17, 2021

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच


लखनऊ : प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति में होने वाले घपले को देखते हुए बीएड व बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की जांच कराने जा रही है। इसके लिए सरकार ने सभी जिलों में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच समिति को पांच मार्च तक अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशालय को देनी होगी। वहीं, समाज कल्याण निदेशालय को 10 मार्च तक सरकार को रिपोर्ट देनी है।


छात्रवृत्ति में होने वाले घपलों पर अंकुश लगाने के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई उच्चस्तरीय बैठक में जिला स्तर पर जांच समिति गठित करने का फैसला हुआ। इसी के तहत समाज कल्याण विभाग ने मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।

इसमें संबंधित उप जिलाधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी/जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। इस समिति को कॉलेजों व संस्थानों में आठ ¨बदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट देनी है।

इसमें पहले ¨बदु के तहत सॉफ्टवेयर के जरिये समान नाम, समान पिता का नाम और समान जन्मतिथि वाले मामलों की जांच करते हुए छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग रोकने और दूसरे जांच ¨बदु में दूसरे प्रदेशों के हाईस्कूल बोर्ड से पास छात्रों को अत्यधिक संख्या में प्रवेश कराके उनकी छात्रवृत्ति का दुरुपयोग रोकना है। तीसरे जांच ¨बदु में आवेदन पत्र में यूपी बोर्ड को चयनित करने के स्थान पर यूपी बोर्ड के हाईस्कूल रोल नंबर/अंक पत्र को कई बार प्रयोग करते हुए फार्म भरवाने के मामले और चौथे ¨बदु में स्वीकृत सीटों से अधिक संख्या में प्रवेश दिलाने व छात्रवृत्ति की धनराशि का गबन करने की जांच होगी।

पांचवें ¨बदु में पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेकर छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों द्वारा प्रथम वर्ष की परीक्षा में न बैठने तथा द्वितीय वर्ष में काफी संख्या में पढ़ाई छोड़ देने के मामले होंगे, जबकि छठे ¨बदु में संस्थानों में पाठ्यक्रम की मान्यता व स्वीकृत सीटों की संख्या आदि की जांच करनी है। सातवें ¨बदु में एनआइसी के समक्ष पोर्टल पर बैक एंड डाटा का भी सत्यापन किया जाएगा। फर्जी व संदिग्ध डाटा की जांच जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित दूसरी समिति करेगी। आठवें ¨बदु के तहत जांच समिति छात्रों की पात्रता के साथ माता-पिता की वास्तविक आय की भी जांच करेगी।

Monday, February 8, 2021

छात्रों को दिये गए मिड डे मील खाद्य सुरक्षा भत्ते की होगी जांच

महराजगंज : छात्रों को दिये गए मिड डे मील खाद्य सुरक्षा भत्ते की होगी जांच


महराजगंज : कोरोना महामारी के दौरान परिषदीय विद्यालय में पंजीकृत आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को दिए जाने वाले खाद्य सुरक्षा भत्ता का शासन के निर्देश पर सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए बीएसए ओम प्रकाश यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग के 17 अफसरों की ड्यूटी लगाया है। डायट प्राचार्य व बीएसए खुद भी सत्यापन करेंगे। यह अफसर आवंटित ब्लाक में छात्रों के घर पहुंचेंगे।


परिजनों से इस बात का सत्यापन करेंगे कि खाद्य सुरक्षा भत्ता के लिए उनके घर के परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को खाद्यान्न व धनराशि मिली है कि नहीं। सत्यापन रिपोर्ट बीएसए को सौंपी जाएगी। जिस विद्यालय से एमडीएम का खाद्यान्न व कन्वर्जन कास्ट की धनराशि वितरित नहीं की गई है वहां के प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए बीएसए सभी प्रधानाध्यापकों को आगाह भी कर चुके हैं। सभी बीईओ को भी पत्र लिख इस संबंध में समीक्षा कर विद्यालय स्तर से उपभोग प्रमाण पत्र प्राप्त करने का भी निर्देश दिया है।

कोरोना काल में पिछले साल 24 से परिषदीय के मार्च से परिषदीय विद्यालय बच्चों के लिए बंद है। इस दौरान विद्यालय में बच्चों को दिए जाने वाले एमडीएम के खाद्यान्न का बच्चों में वितरण कराने का शासन ने निर्देश दिया था कन्वर्जन कास्ट की धनराशि छात्रों या उनके अभिभावकों के खाते में भेजने का आदेश जारी हुआ था। सभी विद्यालय पर खाद्यान्न वितरण के लिए प्राधिकार पत्र भी विभाग की तरफ से मुहैया कराया गया था।


दस छात्रों के परिजनों से करेंगे सुरक्षा भत्ता का सत्यापन

बीएसए ने बताया कि खाद्य सुरक्षा भत्ता के सत्यापन के लिए डायट प्राचार्य रविन्द्र सिंह,  बीएसए ओम प्रकाश यादव के अलावा सभी बीईओ, सभी जिला समन्वयक, परियोजना अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दस फरवरी तक रिपोर्ट देनी है। यह सभी अफसर अपने आवंटित ब्लाक में दस-दस छात्रों के परिजनों से सम्पर्क करेंगे।


शासन के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा भत्ता का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए अफसरों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। सत्यापन में यह पता लगाया जाएगा कि खाद्य सुरक्षा भत्ता छात्रों तक पहुंचा है कि नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -ओम प्रकाश यादव, बीएसए

Tuesday, January 26, 2021

फिर उठा 69000 भर्ती परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा : एसपी क्राइम को जांच का आदेश

फिर उठा 69000 भर्ती परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा :   एसपी क्राइम को जांच का आदेश


जिला न्यायालय ने प्राथमिक विद्यालय में 69000 सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती से संबंधित प्रकरण में पर्चा लीक होने व परीक्षा की प्रक्रिया में अनियमितता किए जाने के संबंध में मुकदमा दर्ज किए जाने की अर्जी पर सुनवाई के बाद एसपी क्राइम को जांच कर 10 फरवरी तक आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।


यह आदेश स्पेशल सीजीएम प्रज्ञा सिंह ने वादी के अधिवक्ता मनीष खन्ना एवं संदीप मिश्रा को सुन कर दिया है। प्रकरण कर्नलगंज थाने का है। वादी आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की ओर से न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 156 (3 ) के तहत अर्जी प्रस्तुत कर राजू पटेल आदि के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट से संबंधित मुकदमा दर्ज करने की याचना की गई है । 


अर्जी में कहा गया है कि प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के पदों पर भर्ती से संबंधित प्रकरण में परीक्षा की प्रक्रिया में अनियमितता हुई थी। जिसका परिणाम आने पर और साफ हो गया था । वादी ने 28 मई 2020 को कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज करने की अर्जी दी थी। मुकदमा दर्ज न होने पर 10 जून 2020 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।


अर्जी में कहा गया है कि छह जनवरी 2019 को परीक्षा विभिन्न जनपदों में आयोजित की गई थी। परीक्षा सही ढंग से संचालित नहीं की गई। परीक्षा होने के पूर्व ही पर्चा लीक हो गया था और सोशल मीडिया में प्रचारित हो गया था। परीक्षा में कई प्रकार की गड़बड़ी की गई थी।


जिसके संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। कोर्ट से प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिए जाने की याचना की गई। न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के बाद अपने आदेश में  कहा है कि इस मामले में एसपी क्राइम से जांच कराया जाना आवश्यक है। 


69 हजार शिक्षक भर्ती : कोर्ट ने एसपी क्राइम से परीक्षा गड़बड़ी की मांगी जांच रिपोर्ट, 10 फरवरी तक पेश करने का आदेश

69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कतिपय गंभीर अनियमितताओं के मद्देनज़र आईजी सिविल डिफेंस अमिताभ ठाकुर के प्रार्थनापत्र पर स्पेशल सीजेएम प्रज्ञा सिंह ने एसपी क्राइम प्रयागराज को जांच कर 10 फरवरी तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। स्पेशल सीजेएम प्रज्ञा सिंह ने यह आदेश संदीप मिश्र एडवोकेट के तर्कों को सुनकर दिया। बहस के दौरान कहा गया कि इस मामले में एसपी क्राइम, प्रयागराज से जांच कराना विधिसम्मत है। उसके बाद ही प्रार्थी के प्रार्थनापत्र पर आदेश दिया जाएगा। अदालत ने एसपी क्राइम प्रयागराज को अमिताभ ठाकुर के प्रार्थनापत्र पर जांच कर अपनी आख्या 10 को प्रस्तुत करने के आदेश दिया।

प्रार्थना पत्र में अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया है कि उन्हें कई लोगों द्वारा 69000 शिक्षक भर्ती की परीक्षा के पेपर लीक होने तथा परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने के संबंध में शिकायत एवं साक्ष्य भेजे गए हैं। इन साक्ष्यों के अनुसार जहां परीक्षा 06 जनवरी 2019 को 11 बजे शुरू होनी थी, वहीँ उस दिन एक व्यक्ति के मोबाइल पर 09.57 बजे तथा दूसरे के मोबाइल पर 10.27 बजे ही व्हाट्सएप से पेपर आ गए थे। इसी प्रकार एक अख़बार में परीक्षा के समय ही दिन में 12 बजे पेपर लीक होने के साक्ष्य रख दिए गए थे। साथ ही उन्होंने परीक्षा में अनियमितता के भी कई तथ्य प्रस्तुत किए थे। इस संबंध में थाना कर्नलगंज ने विलंब के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। बाद में अमिताभ ठाकुर ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत एक प्रार्थनापत्र 10 जून 2020 को कोर्ट में दिया था जिस पर सुनवाई के बाद आदेश हुआ।

Sunday, January 3, 2021

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

● संयुक्त शिक्षा निदेशक व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक बरेली की बनी संयुक्त जांच कमेटी

● मिलक विधायक ने की थी शिकायत शासन ने दिए जांच के आदेश

शासन ने विधायक की इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में शासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है जिसमें जेडी और एडी बरेली को शामिल किया गया 


रामपुर। विधायक राजबाला की शिकायत पर बीएसए ऐश्वर्य लक्ष्मी के खिलाफ जांच बैठा दी गई है। इसके लिए बरेली के (जेडी) संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं बरेली के ही (एडी) मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें शासन ने कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। मिलक विधायक राजबाला ने भी पिछले दिनों इसे लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसमें उन्होंने तमाम गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के निलंबन एवं बहाली में खेल किया जा रहा है।


शिक्षकों को बिना समुचित कारण के निलंबित कर दिया जाता है और फिर उन्हें बहाल कर सुविधाजनक विद्यालय में पद स्थापित कर दिया जाता है। शिक्षकों के संबद्धीकरण में भी गड़बड़ी की जा रही है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। महिला शिक्षिकाओं के सीसीएल के आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी की जाती है। उन्होंने मृतक आश्रितों की नियुक्ति समेत एडेड विद्यालयों में नियुक्ति को लेकर भी तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं।


कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। जेडी ने इस मामले में बीएसए को पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। साथ ही शिकायत के विभिन्न विंदुओं पर बिंदुवार रिपोर्ट तलब की है।


Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

Saturday, December 19, 2020

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को वितरित स्वेटर की गुणवत्ता और इनके अंडरसाइज होने की जांच शुरू हो गई है । इसकी दोहरी जांच कराई जा रही है। जिला स्तर पर टास्क फोर्स जांच कर रही है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर भी इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद के आदेश के बाद शुक्रवार को बीएसए दिनेश कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी जांच के काम में लगा दिया है।


प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को घटिया स्वेटर वितरित करने का मामला संज्ञान में आया था। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इस मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। महानिदेशक ने जिलेवार टास्क फोर्स बनाई थी। जो जांच कर रही है । अब उन्होंने 17 दिसंबर को आदेश जारी कर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी इसकी जांच कराने का निर्देश दिया है। स्वेटर की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयक स्वयं करेंगे। इन अधिकारियों को प्रत्येक ब्लाक के 10 विद्यालयों में जाकर जांच करनी होगी। एक विद्यालय के न्यूनतम 5 छात्र तथा 5 छात्राओं के अभिभावकों से संपर्क करना होगा। रिपोर्ट में उन्हें विकासखंड का नाम, विद्यालय का नाम, नामांकित छात्र का नाम व कक्षा, अभिभावक का नाम व मोबाइल नंबर तथा अभिभावक का फीडबैक देना ह होगा। अभिभावक से पूछना होगा कि बच्चों को स्वेटर मिला है अथवा नहीं। स्वेटर की साइज ठीक है या नहीं। गुणवत्ता संतोषजनक है अथवा नहीं। यह सारी रिपोर्ट 24 दिसंबर 2020 तक हर हाल में महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजनी होगी।


बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने स्कूलों में स्वेटर की जांच के लिए रूट चार्ट जारी कर दिया है। सभी ब्लॉकों के साथ नगर क्षेत्र के 10- 10 स्कूलों की जांच के लिए रूट चार्ट बनाया गया है। किन-किन स्कूलों में जांच करनी है। इसकी सूची भी उन्होंने जारी कर दी है।

Sunday, December 13, 2020

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार, कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई, यह है पूरा मामला

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार

भ्रष्टाचार की शिकायत पर विजिलेंस कर रही है नियुक्तियों की जांच, जिम्मेदारों से की जा रही पूछताछ

पहले मरने वाले आश्रितों को बाद में दी नौकरी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी


आगरा : बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों की नियुक्ति में अधिकारी और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकता है। नियुक्तियों में मनमानी की शिकायत शासन में की गई थी। मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। दो साल से चल रही जांच ने अब तेजी पकड़ ली है। विजिलेंस द्वारा जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जा रही है।

शिक्षा विभाग में छह साल के दौरान दो दर्जन से ज्यादा नियुक्तियां हुई थीं। नियमानुसार ड्यूटी के दौरान विभाग के जिन कर्मचारियों या शिक्षकों की मृत्यु पहले हुई थी, उनके आश्रितों को पहले नौकरी मिलनी चाहिए थी। विभाग के जिम्मेदार लोगों ने ये नियुक्तियां वरीयता क्रम के अनुसार न देकर अपने हिसाब से दीं। जिन लोगों की मृत्यु बाद में हुई थी। उन्हें पहले नियुक्ति दे दी गई। वहीं जिन लोगों की पहले मृत्यु हुई थी। उनके आश्रितों को बाद में नियुक्ति दी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी। मृतक आश्रितों ने विभाग की इस मनमानी और अनियमितता की शिकायत शासन से की थी। शासन ने दो साल पहले विजिलेंस को मामले की जांच सौंपी ।

विजिलेंस ने जांच शुरू करते हुए नियुक्ति से संबंधित रिकार्ड तलब किया। उसे कई महीने तक यह रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। विजिलेंस से कहा गया कि फाइल नहीं मिल रही है। इसके बाद विजिलेंस ने शिक्षा विभाग के जिन कर्मचारियों के पास यह रिकार्ड था, उसे भी अपनी जांच में शामिल कर लिया। बताया जाता है कि विभाग के लोगों से पूछताछ के लिए विजिलेंस ने सवालों की पूरी सूची तैयार की है। इसी के आधार पर पूछताछ होगी।


बेसिक शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई अब हो सकती है, जल्द ही इसमें शासन की ओर आदेश निर्देश जारी हो सकते हैं। दरअसल पूरा मामला मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में दो साल पहले शासन को शिकायत मिली थी, जिसके बाद बिजलेंस जांच चल रही थी। ​बताया जा रहा है मृतक आश्रित के तहत नौकरी दिए जाने पर बड़े स्तर पर खेल हुआ, इसकी लिखित शिकायत शासन में की गयी थी। अब शासन ने नियुक्ति से जुड़ी सभी फाइलों को तलब किया है।


नियुक्ति में शमिल लोगों की भूमिका की जांच
​मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई नियुक्तियों की भूमिका भी जांच की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों से पूछता भी चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विभाग के उच्च अधिकारियाों की माने तो कार्रवाई का दायरा बड़ा हो सकता है।


अभी तक करीब 28 नियुक्तियां की गयी, जिसमें इस तरह हुआ खेल
​बताया जा रहा है ​कि पिछले समय से लेकर अभी तक विभाग ने 28 सीटों पर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति की गयी है। इसमें नियम था कि जो आॅन ड्यूटी के दौरान कर्मचारी या शिक्षक मरा है तो उसके आश्रित को पहले नौकरी दी जानी चाहिए। लेकिन ऐसा न करके अधिकारियों ने खेल कर दिया और पहले आओ पहले पाओ के आधार पर नियुक्ति दे दी है। इस संबंध में आश्रितों के ​परिजनों ने लिखित शिकायत शासन में की थी। जिसके बाद अब सरकार एक्शन मे हैं।


शैक्षिक योग्यता का भी नहीं रखा ध्यान
मृतक आश्रित कोटे के तहत ​दी गयी नियुक्तियों में अधिकारियों ने ​शैक्षिक योग्यता का भी ध्यान नहीं रखा। शिकायत के बाद शासन ने दो साल पहले ही बिजलेंस को जांच सौपी थी अब एक फिर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है।

Monday, December 7, 2020

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती

पुलिस मुख्यालय ने पूछा, कितने फर्जी शिक्षक पकड़े? शासन की मंशा पर होगी सख्ती


गोरखपुर।
बर्खास्त किए जा चुके फर्जी शिक्षकों की मुसीबतें अब और बढ़ने जा रही हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी करेगी। फरार चल रहे आरोपितों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी करेगी। पुलिस मुख्यालय लखनऊ ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया है और एसएसपी से पूछा है कि कितने फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कितने गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कितनों की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। पुलिस मुख्यालय ने अपनी सख्त मंशा भी जाहिर की है। पुलिस अधिकारियों से कहा है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लें।


बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा विभाग के साथ ही समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्कूल-कॉलेजों में बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियां की गई हैं। शासन की सख्ती के बाद की गई जांच में फर्जी शिक्षकों की काली करतूतों का खुलासा हुआ है। शासन की मंशा के अनुरूप पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। शासन की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई है। एसटीएफ ने अपनी जांच-पड़ताल में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों को पकड़ा है और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। सूत्रों का कहना है कि अकेले गोरखपुर जिले में 78 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। इनके खिलाफ जांच-पड़ताल चल रही है।


अपर पुलिस महानिदेशक अपराध डॉ. केएस प्रताप कुमार की एक चिट्ठी ने गोरखपुर पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है। इस चिट्ठी ने शासन की मंशा भी जाहिर कर दी है कि फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने और करोड़ों रुपये डकार जाने वाले इन फर्जी शिक्षकों को सरकार बख्शने वाली नहीं है। पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस प्रमुखों को स्पट तौर पर निर्देश दिया है कि इस मामले को प्राथमिकता पर लें और यह रिपोर्ट तैयार कर भेजें कि कितने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया गया है। कितने की सेवा समाप्त की गई है। जिनकी सेवा समाप्त की गई उनमें से कितनों से वसूली की जा चुकी है। कितनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कितने फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस मुख्यालय ने यह भी पूछा है कि कितने की सम्पत्तियां कुर्क की गई हैं। कितनों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।


थानेदारों ने तेज की विवेचनाएं
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय से चिट्ठी आने के बाद एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने भी सख्ती दिखाई है। एसएसपी की सख्ती के बाद फर्जी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की थानेदारों और चौकी प्रभारियों ने विवेचनाएं तेज कर दी हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिन फर्जी शिक्षकों के खिलाफ अभियोग दर्ज है और जो फरार चल रहे हैं उन पर दबाव बनाने के लिए पुलिस उनके खिलाफ न्यायालय से कुर्की का आदेश लेगी।

Tuesday, November 17, 2020

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

Saturday, November 14, 2020

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच

अब मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की होगी जांच


वाराणसी : प्राथमिक से लगायत विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कराए जा रहे हैं ताकि शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवापुस्तिकाएं आनलाइन की जा सके।


सेवापुस्तिका आनलाइन होने से माध्यमिक व उच्च शिक्षा के शिक्षकों व कर्मचारियों को अवकाश के लिए आनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिल जाएगी। इसके लिए शिक्षकों व कर्मचारियों को दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना होगा। दूसरी ओर मानव संपदा पोर्टल से संदिग्ध अभिलेखों की जांच भी हो रही है।


पोर्टल के माध्यम से बेसिक शिक्षा में कई शिक्षकों के अभिलेख संदिग्ध मिले हैं। ऐसे शिक्षकों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। इसे देखते हुए अब माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों की जांच पोर्टल से शुरू कर दी गई है। वहीं, दूसरी ओर शासन ने सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से पोर्टल पर विवरण अपलोड करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गत दिनों महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से फार्म भी भरवाए गए थे।

Thursday, November 12, 2020

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें

फर्जी शिक्षकों के मामले में अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें



फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स अब सूबे की और अनामिकाओं की तलाश के लिए राज्य सरकार के मानव संपदा पोर्टल को भी खंगाल रही है। सीतापुर से पांच नवंबर को गिरफ्तार फर्जी प्रधानाध्यापक देवरिया निवासी ऋषिकेश मणि त्रिपाठी से मिली जानकारियों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षकों की तलाश की जा रही है। ऋषिकेश सीतापुर में बजरंग भूषण के नाम से नौकरी कर रहा था। अनामिका प्रकरण की ही तर्ज पर आरोपित ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता ने भी सीतापुर में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। 


गोरखपुर में तैनात शिक्षिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए स्नेहलता ने यह नौकरी हासिल की थी और पति के पकड़े जाने के बाद से वह फरार है। एसटीएफ ने स्नेहलता की तलाश के लिए दो टीमों को लगाया है। एसटीएफ के एएसपी सत्यसेन यादव ने बताया कि गोरखपुर में तैनात सहायक अध्यापिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों पर सूबे में तीन और स्वाती तिवारी सहायक अध्यापिका की नौकरी कर रही थीं। इनमें बराबंकी व देवरिया में तैनात दो फर्जी शिक्षिकाओं को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ऋषिकेश की पत्नी का असली नाम स्नेहलता तिवारी है। ऋषिकेश से पूछताछ में सामने आया था कि उसने ही अपनी पत्नी की नौकरी फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगवाई थी। 


ऋषिकेश ने बताया कि उसके पिता राममणि त्रिपाठी देवरिया के अशोक इंटर कॉलेज में लेक्चरर थे और उन्होंने ने ही बजरंग भूषण व स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता फर्जी नाम से सीतापुर के हरिहरपुर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी कर रही थी। उसकी तलाश कराई जा रही है। एएसपी ने बताया कि आगरा के दयालबाग एजूकेशन इंस्टीट्यूटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बजरंग भूषण की शिकायत पर इस प्रकरण की जांच शुरू की गई थी। 


एसटीएफ को फर्जी शिक्षकों से जुड़ी कई और शिकायतें मिली हैं। मानव संपदा पोर्टल के जरिए उनकी भी जांच की जा रही है। स्वाती तिवारी के दस्तावेजों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षिकाओं की नियुक्ति की भी आशंका है। दूसरे के दस्तावेजों पर नाम-पता बदलकर नौकरी कर रहे कई और फर्जी शिक्षक एसटीएफ के निशाने पर हैं। ध्यान रहे, पूर्व में अनामिका नाम की शिक्षिका के दस्तावेजों के जरिए इसी नाम पर कई फर्जी शिक्षिकाओं के नौकरी हासिल करने का मामला पकड़ा गया था।

Wednesday, October 28, 2020

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

 
69000 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी सॉल्वर गैंग से नकल माफिया बन गए। फिर शिक्षा माफिया बंनकर स्कूल-कॉलेज खोल लिए। अपने ही कॉलेजों में परीक्षाओं का सेंटर कराकर फर्जीवाड़ा करने लगे। इस फर्जीवाड़ा गैंग से जुड़े आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा दर्जहोने के बाद अबएसटीएफ आरोपियों की अवैध संपत्तियों की जांच कर रही है। अब आरोपियों के ऐसे स्कूल कॉलेजों की सूची बना रही है जो अवैध कमाई से बनाए गए हैं। 


69000 सहायक शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मामले में अभ्यर्थी राहुल सिंह ने डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस केस की जांच कर रही एसटीएफ डॉ. केएल पटेल, स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव समेत 20 के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। 12 आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। 


अब इनकी अवैध कमाई को पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क करने की वाली है। इनकी अवैध संपत्तियों की जांचमें जुटी एसटीएफ को पता चला कि डॉ.केएल पटेल, ललित त्रिपाठी, चंद्रमा यादव और शिवदीप समेत अन्य कई आरोपियों ने अपने स्कूल-कॉलेज भी खोल लिए हैं। जांच चल रही है कि इन कॉलेजों को काली कमाई से तो नहीं बनाया गया है।

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

 
प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने मंगलवार शाम को सभी के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। एसटीएफ ने करीब एक हजार पन्ने की केस डायरी तैयार की है।


जून 2020 को इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। पहले सोरांव पुलिस ने इसकी विवेचना शुरू की, लेकिन प्रकरण ने तूल पकड़ा तो विवेचना एसटीएफ को दे दी गई। गिरोह के सरगना पूर्व जिपं सदस्य डॉ. केएल पटेल, तीन अभ्यर्थी समेत 12 लोगों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन सभी के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसी मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रमा को करीब 20 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। उसके कई और साथियों को भी पकड़कर जेल भेजा गया। 


चंद्रमा यादव पुत्र बर्फी लाल धूमनगंज थाना क्षेत्र के टीपी नगर गंगा बिहार कॉलोनी का रहने वाला है। वह टीपी नगर में पंचम लाल आश्रम इंटर कॉलेज का संचालन चंद्रमा यादव करता है। लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर उसके स्कूल में बनाया जाता है। ज्यादा पैसा कमाने के लालच में वह कुछ साल पहले ललित त्रिपाठी के जरिए गिरोह के सरगना डॉ. केएल पटेल और मायापति से मिला था। फिर गिरोह के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने लगा। सोरांव में जब उसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया तो फरार हो गया था।


 एडिशनल एसपी एसटीएफ नीरज पांडेय का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद चंद्रमा यादव, भदोही के मायापति दुबे, प्रतापगढ़ के दुर्गेश पटेल व प्रयागराज के शिवदीप सिंह, सत्यम, शैलेष, संदीप पटेल, दुर्गेश सिंह और अर¨वद पटेल के खिलाफ भी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।

Friday, October 23, 2020

दावा : 69000 शिक्षक भर्ती में सिर्फ 03 ने किया फर्जीवाड़ा!, STF ने अपनी विवेचना की पूरी

दावा : 69000 शिक्षक भर्ती में सिर्फ 03 ने किया फर्जीवाड़ा!, STF ने अपनी विवेचना की पूरी

 
69000 सहायक शिक्षक भर्ती की जांच कर रही एसटीएफ ने अपनी विवेचना पूरी कर ली है। इस फर्जीवाड़े में 20 आरोपी बनाए गए हैं। लेकिन जिस सहायक शिक्षक भर्ती के टॉपर अभ्यर्थियों की सूची पर सवाल उठे थे, उनमें से किसी का भी नाम एसटीएफ ने अपनी जांच में उजागर नहीं किया। इस पूरे प्रकरण में सिर्फ तीन अभ्यर्थी जेल भेजे गए जिनके नाम सोरांव पुलिस ने उजागर किया था। 

मई 2020 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का परिणाम निकला तो अभ्यर्थियों ने धांधली का आरोप लगाया। 5 जून 2020 को राहुल सिंह नाम के अभ्यर्थी ने डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत अन्य के खिलाफ सोरांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया था कि उसने परीक्षा पास करने के लिए 6 लाख रुपया दिया था। पुलिस ने इस प्रकरण में कार्रवाई करते हुए एक बड़े गैंग का खुलासा किया। 


सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी धर्मेंद्र पटेल और बलवंत पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पकड़े गए दोनों अभ्यर्थी 69000 शिक्षक भर्ती में 120 से ज्यादा अंक पाए थे। इस खुलासे के बाद इस प्रकरण की जांच एसटीएफ को दे दी गई। एसटीएफ ने सोरांव पुलिस की विवेचना को आगे बढ़ाया।


इसी क्रम में वांछित डॉ. चंद्रमा यादव समेत अन्य की गिरफ्तारी की। इसके अलावा संतोष पटेल नामक एक और अभ्यर्थी पकड़ा गया जिसने पास होने के लिए मोटी रकम खर्च की थी।  संतोष को भी 120 से ज्यादा अंक था। लेकिन इसके अलावा इस भर्ती से जुड़े किसी भी अभ्यर्थी का नाम एसटीएफ की जांच में सामने नहीं आया। जबकि खुलासे के वक़्त पुलिस ने दावा किया था कि दर्जनों अभ्यर्थियों की सेटिंग करके नंबर बढ़ाया गया।

Sunday, October 11, 2020

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की विधिवत् जाँच कराये जाने के संबंध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत समस्त शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रमाण पत्रों की विधिवत् जाँच कराये जाने के संबंध में।