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Wednesday, September 23, 2020

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

 
एसटीएफ ने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित करने की मुहिम तेज कर दी है। एसटीएफ को ऐसे 70 शिक्षकों के नाम पता चले हैं जिन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने का आरोप है। 


एसटीएफ ने सोमवार को इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एसटीएफ के चंगुल में आया एक फर्जी शिक्षक व उसका भाई अन्य फर्जी शिक्षकों की जानकारी हासिल कर उनसे वसूली कर रहा था। ये लोग मानव संपदा पोर्टल से फर्जी शिक्षकों की जानकारी जुटाते थे। एसटीएफ को इनके पास से 70 फर्जी शिक्षकों की सूची मिली है।


एसटीएफ इस सूची से उजागर हुए नामों की जानकारी जुटा रही है। जो नाम सामने आए हैं उनकी पड़ताल में बेसिक शिक्षा विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें ज्यादातर नाम पूर्वांचल के जिलों में तैनात शिक्षकों के हैं। एसटीएफ ने अब सामने आए नामों को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित लोगों के दस्तावेजों के सत्यापन को कहा है। आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 


तीन साल में 850 फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई
इससे पहले भी एसटीएफ फर्जी शिक्षकों के बारे में जानकारी जुटा कर बेसिक शिक्षा विभाग को देती रही है। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला बीते तीन साल से जारी है। इन तीन वर्षों में करीब 850 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

Friday, September 18, 2020

कानपुर : गुरुजी ने दी 78 बिंदुओं पर जानकारी, अब सत्यापन में फर्जीवाड़ा मिला तो जाएगी नौकरी

कानपुर : गुरुजी ने दी 78 बिंदुओं पर जानकारी, अब सत्यापन में फर्जीवाड़ा मिला तो जाएगी नौकरी।


बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन शीघ्र फर्जीवाड़ा मिलने पर होगी एफआइआर।

कानपुर :  फर्जी अंकतालिका समेत अन्य दस्तावेजों को लगाकर शिक्षक बनने के मामले में परिषदीय विद्यालयों के 5000 शिक्षकों से कुछ जानकारियां मांगी गईं थीं, जो कि 78 अलग-अलग बिंदुओं पर दी जानी थीं। अब उन जानकारियों का ब्योरा एकत्रित करने के साथ ही उनके सत्यापन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया जाएगा।

बीएसए डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि उक्त 78 बिंदुओं में, शिक्षकों के नाम, उनकी जन्मतिथि, अनुक्रमांक, स्थानांतरण की स्थिति, पिता का नाम, जन्मस्थान आदि अन्य बिंदु सुनिश्चित किए गए थे। उन्होंने बताया कि जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।


बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने फर्जी दस्तावजों के आधार पर शिक्षक बनने का मामला प्रकाश में आने के बाद उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच का आदेश दिया था। उधर, 2000 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की अंकतालिकाएं भी संबंधित विवि को प्रेषित की जा चुकी हैं। डीआइओएस सतीश तिवारी ने बताया कि यदि किसी शिक्षक के शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, September 8, 2020

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों की नियुक्ति में अनियमितता, चयन समिति पर गिरेगी गाज

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों की नियुक्ति में अनियमितता, चयन समिति पर गिरेगी गाज।

कार्रवाई : उप निदेशक स्तर के अधिकारी सहित छह से मांगा गया है जवाब, पशु चिकित्सा अधिकारी और एनजीओ के चार सदस्य शामिल।

वाराणसी : कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों के चयन में की गई अनियमितता के मामले में अब चयन समिति के सदस्यों पर गाज गिरेगी। इस मामले में सोमवार को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने छह लोगों को नोटिस जारी की है। इसमें उपनिदेशक स्तर के अधिकारी हैं। एक पशु चिकित्सा अधिकारी और एनजीओ के चार प्रतिनिधि शामिल हैं। सभी को अपना पक्ष रखने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है। उनका जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। संबंधित उचाधिकारियों को भी जानकारी दी गई है। एनजीओ को काली सूची में डालने की चेतावनी दी है।



कस्तूरबा आवासीय विद्यालय शिवपुर में 2008-09 के सत्र में वार्डन सह शिक्षिका के पद पर यादवेश कुमारी सिंह और अंशकालिक शिक्षक के पद पर रामचरित्र यादव की नियुक्ति हुई थी। अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद जब सभी नियुक्तियों की जांच हुई तोयहां भी जांच कराई गई। जांचसमिति ने पाया कि शिक्षिका कम वार्डेन का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। मगर चयन समिति ने यहां पर ओबीसी वर्ग की अभ्यर्थी यादवेश कुमारी सिंह का चयन किया, जो आरक्षण के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा रामचरित्र यादव की नियुक्ति में मेरिट की उपेक्षा की गई। उनसे अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थी को प्रतीक्षा सूची में रख दिया गया। इस मामले उपनिदेशक एनसीईआरटी विष्णु श्याम द्विवेदी को नोटिस जारी की गई है। वह उस समय चयन समिति के सदस्य सचिव थे। इसके अलावा सिंधोरा में कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नसीम अंसारी को नोटिस दी गई है। वह भी चयन समिति के सदस्य थे। एनजीओ के प्रतिनिधि के रूप में चयन समिति में शामिल जिला महिला समाख्या की विनीता, मुख्य कार्यकारी शिक्षा प्रचारिणी समिति, सीखड़ी गाजीपुर के आशुतोष राय को भी नोटिस जारी की गई है।

कस्तूरबा आवासीय विद्यालय, आराजीलाइन में भी नियुक्तियों की अनियमितता में चयन समिति के सदस्यों को नोटिस दी गई है। यहां सरिता आर्य नामक एक शिक्षिका नियुक्त की गई। चयन समिति ने उसका मेरिट 249.9 बताया, जबकि अभिलेखों से मेरिट 192.32 बन रही है। अंजनी राय नामक शिक्षिका की मेरिट 287.47 बताई गई, जबकि यह 214.52 है।


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Sunday, September 6, 2020

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

प्रदेश भर में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू, जांच हेतु एक माह का समय

 
लखनऊ : प्रदेश में मदरसा शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। सरकार ने जांच के लिए बोर्ड को एक माह का समय दिया है ।बोर्ड ने जिलों में जांच के लिए प्रभारी अफसर नियुक्त कर दिए हैं। साथ हीबोर्ड के एक-एक कर्मचारी को भी हर जिले में लगाया गया है | जिलों से शिक्षकों की मार्कशीट वअभिलेख मदरसा बोर्ड मंगाए गए हैं।


मार्कशीट व अभिलेख फर्जी मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने क्ताया कि यदि किसी अफसर ने जांच में लापरवाही बरती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, September 1, 2020

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

 

लखनऊ : विभिन्न कारणों से निलंबित किए गए परिषदीय शिक्षकों के खिलाफ जारी जांच को खंड शिक्षा अधिकारी दबाए बैठे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिनमें जांच रिपोर्ट लंबित है।


इससे जहां जांच की कार्यवाही के निस्तारण में विलंब हो रहा है, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग भी अनावश्यक रूप से शिक्षकों की सेवाओं से वंचित हो रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से हाल ही में की गई समीक्षा में 68 जिलों से प्राप्त सूचना में पाया गया कि प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के कुल 478 शिक्षक वर्तमान में निलंबित हैं।

समीक्षा से यह भी मालूम हुआ कि 269 शिक्षकों की जांच खंड शिक्षा अधिकारी दबाए हुए हैं।

Sunday, August 30, 2020

कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश

कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश।


जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है।



जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में कराए गए कार्यों की जांच अपने स्तर से कर ले। बाद में किसी प्रकार की शिकायत मिली तो रिपोर्ट लगाने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जनपद के 1165 परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना से ग्राम पंचायतों ने सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कराया था। इसमें ग्राम निधि के लाखों रुपये खर्च हुए। अब राज्य परियोजना निदेशक ने कायाकल्प के तहत हुए कार्यों के सत्यापन का फैसला लिया है। इसको लेकर निदेशक ने डीएम व बीएसए को पत्र भेजा है। जल्द ही स्कूलों में जांच होगी। जांच में जिन विद्यालयों की स्थिति खराब मिलेगी, उनकेप्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच से पूर्व बीएसए ने सभी शिक्षकों को अपने स्तर से एक बार स्कूल की स्थिति का मूल्यांकन का निर्देश दिया है। बीएसए ने बताया कि सभी स्कूलों की जांच 33 बिदुओं पर होगी जिसमें स्कूल में पेयजल, बालक व बालिका के लिए अलग-अलग क्रियाशील शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोईघर, क्लास रूम की फर्श पर टाइल, रंगाई-पोताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिग, वायरिग, विद्युत उपकरण, स्कूल में तैनात शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशकों की संख्या, छात्रों की उपस्थिति, लर्निंग आउटकम प्रशिक्षण की निगरानी, रेमेडियल क्लास का संचालन, यूनिफार्म, किताबों का वितरण आदि बिदु शामिल हैं।

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Wednesday, August 26, 2020

संत कबीरनगर : जांच टीम ने कब्जे में लिया कंपोजिट ग्रांट से खरीद के रिकार्ड, जांच उपरांत शासन को रिपोर्ट भेजने की कही बात

संत कबीरनगर : जांच टीम ने कब्जे में लिया कंपोजिट ग्रांट से खरीद के रिकार्ड, जांच उपरांत शासन को रिपोर्ट भेजने की कही बात।

संत कबीरनगर : राज्य परियोजना लखनऊ की टीम ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बेलहरकला और हैंसर ब्लाक में विभिन्न मदों से प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में हुए कार्यों की जांच की। जांच टीम ने चार दिन में जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है।



राज्य परियोजना से आए अवर अभियंता अनिल कुमार शुक्ल व अवर अभियंता मुरलीधर तिवारी ने मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे बेलहरकला ब्लाक के मेलानखुर्द, कैथवलिया व बभनी के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों पर जांच की। यहां कंपोजिट ग्रांट से करवाए गए कार्यों के अभिलेखों को देखने के साथ ही खरीद के रिकार्ड अपने कब्जे में लिया। इसके अलावा हैंसर ब्लाक के तीन विद्यालयों की भी जांच हुई। मौके पर प्रभारी डायट प्राचार्य राजेश कुमार, ओंकारनाथ मिश्र,जिला समन्वयक निर्माण एचएन त्रिपाठी के अलावा संबंधित विद्यालयों के प्राधानाध्यापक व शिक्षक मौजूद रहे। आज भी होगी जांच


-बेसिक शिक्षा व राज्य परियोजना की टीम ने दो दिनों में तीन ब्लाकों में जांच किया। बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार व गुरुवार को भी जांच जारी रहेगी।


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Monday, August 24, 2020

संदिग्ध शिक्षकों के केस में रिपोर्ट देने से कतरा रहे अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारियों ने उच्च शिक्षा निदेशालय को नहीं भेजी रिपोर्ट

 प्रयागराज : शासन की भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहिम को उनके अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। अधिकारी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का पहले खुलासा नहीं करते। अगर खुल जाता है तो गलत लोगों को बचाने के लिए अधिकारी भरसक प्रयास करते हैं। राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षकों के मामले में कुछ ऐसा ही चल रहा है। शासन के निर्देश पर हुई जांच में 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं। गड़बड़ी कहां और कैसे हुई? उसकी पड़ताल करके क्षेत्रीय अधिकारियों से 17 अगस्त को अंतिम रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, अधिकारियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी।


शासन ने राज्य विश्वविद्यालय व एडेड डिग्री कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। सारे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करके उसे ऑनलाइन किया जाएगा। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय से हर पहलु पर पड़ताल कराकर रिपोर्ट मांगी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने सारे क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी थी। जो अभी तक नहीं भेजी गई। निदेशक डॉ. वंदना का कहना है कि रिपोर्ट देने के लिए दोबारा पत्र भेजा गया है।

सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी शिक्षकों की जांच

सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी शिक्षकों की जांच

 
लखनऊ। प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की जांच माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्‍न विश्वविद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में अटकी हुई है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही जांच पूरी हो सकेगी।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जून को आयोजित बैठक में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के राजकीय और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेज की जांच के निर्देश दिए थे। तीनों विभागों ने जांच के लिए जिला स्तर पर अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। हर जिले में जांच समिति ने जिन शिक्षकों के दस्तावेजों को संदिग्ध माना है। उन्हें संबंधित शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय को सत्यापन के लिए भेजा है। हजारों की संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने देश के अन्य प्रदेशों के शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल को है। ऐसे में उनके दस्तावेज सत्यापन के लिए अन्य प्रदेशों में भेजे गए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि यूपी बोर्ड और प्रदेश के विश्वविद्यालय भी समय पर सत्यापन रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं। संदिग्ध दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट मिलने तक जांच पूरी नहीं हो सकती है। ऐसे में निर्धारित समय से एक महीना बाद 30 अगस्त तक भी जांच पूरी नहीं हो सकेगी।

Tuesday, August 18, 2020

नहीं भेजी रिपोर्ट, उच्च शिक्षा निदेशालय ने दोबारा भेजा पत्र, 27 शिक्षकों के संदिग्ध दस्तावेज की मांगी गई थी रिपोर्ट

नहीं भेजी रिपोर्ट,  उच्च शिक्षा निदेशालय ने दोबारा भेजा पत्र,  27 शिक्षकों के संदिग्ध दस्तावेज की मांगी गई थी रिपोर्ट

 
प्रयागराज : नियम विरुद्ध काम करने वालों के खिलाफ शासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसके तहत शासन ने राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। शुरुआती जांच में 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं, उनकी रिपोर्ट क्षेत्रीय अधिकारियों को सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय भेजनी थी। लेकिन क्षेत्रीय अधिकारियों ने रिपोर्ट नहीं भेजी। इस पर उच्च शिक्षा निदेशक ने दोबारा पत्र भेजकर शीघ्र से शीघ्र रिपोर्ट मांगी है।


बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है।


उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि शासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच करके रिपोर्ट मांगी थी। इसके तहत क्षेत्रीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, सोमवार तक रिपोर्ट नहीं मिली। इस पर दोबारा पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है।

Monday, August 17, 2020

आज आएगी संदिग्ध शिक्षकों की रिपोर्ट, जांच में राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों के दस्तावेज मिले थे संदिग्ध

आज आएगी संदिग्ध शिक्षकों की रिपोर्ट, जांच में राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों के दस्तावेज मिले थे संदिग्ध


 
 प्रयागराज : राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत जिन 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध हैं, उनकी रिपोर्ट सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय पहुंच जाएगी। क्षेत्रीय अधिकारी मामले की पड़ताल करके अपनी अंतिम रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे। इसमें जिनके दस्तावेज गड़बड़ मिलेंगे निदेशालय उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करके रिपोर्ट शासन को भेजेगा। 


शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं।


 इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय से हर पहलु पर पड़ताल कराकर रिपोर्ट मांगी थी।

Friday, August 14, 2020

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश

बुलंदशहर में वायरल मारपीट की घटना पर बेसिक शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख, घटना में शामिल BEO व शिक्षक को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच कराने का दिया निर्देश। 


नया अपडेट 👇

लखनऊ। बुलंदशहर के सिकंदरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, थपरावली के व्यायाम शिक्षक पंकज यादव को आपस में मारपीट के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

शुक्रवार को न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर मारपीट की ख़बरें चली थीं। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने इसका संज्ञान लेते हुए दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।



हफ्ते भर बाद पुराना वीडियो हुआ वायरल जिसमे 👇
BEO साहब के बिगड़े बोल, प्राइमरी का मास्टर से बोले रहो औकात में, आपत्ति जताने पर की हाथापाई, हो रहा वीडियो वायरल




दिनांक 11 अगस्त
सीसीटीवी फुटेज के बाद बीएसए साहब हुए बैकफुट 👇 
दर्ज एफआईआर को पुंजित करने का पत्र 


दिनांक 13 अगस्त
शिक्षक के पत्र के जरिये सीसीटीसी फुटेज को संज्ञान में लेने की मांग 👇

■ दिनांक : 7 अगस्त
घटना बाद कई बीईओ की शिकायत पर तुरन्त केवल शिक्षक को किया निलंबित 👇 

17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

17 अगस्त तक तैयार होगी राज्य विवि व एडेड डिग्री कालेज के संदिग्ध शिक्षकों की अंतिम रिपोर्ट

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत 27 शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी सामने आयी है। इन शिक्षकों के शैक्षिक अंक पत्र व प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर क्षेत्रीय अधिकारी मामले की गहन पड़ताल में जुटे हैं।


क्षेत्रीय. अधिकारियों को 17 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट निदेशालय को भेजनी है। निदेशालय रिपोर्ट की पड़ताल करके उसे शासन को भेजेगा। इसमें जिनके दस्तावेज गड़बड़ होंगे उन्हें निलंबित करके कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शासन ने शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। 


बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। इसमें सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि जिन शिक्षकों के दस्तावेजों में खामियां मिली हैं, उनकी जांच अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। क्षेत्रीय अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने पर शिक्षकों का पक्ष सुना जाएगा, फिर अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, August 13, 2020

केजीबीवी में अब तक मिले 56 फर्जी शिक्षक, 70 संदिग्ध, अब और शिकंजा कसने की तैयारी

केजीबीवी में अब तक 56 शिक्षक फर्जी, 70 संदिग्ध, अब और शिकंजा कसने की तैयारी।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों (केजीबीवी) में अब तक 56 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं लगभग 70 शिक्षकों को संदिग्ध की श्रेणी में रखते हुए प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। वहीं अब शासन ने लम्बे समय तक अनुपस्थित रहने वाले  और समय पर स्कूल न पहुंचने वाले शिक्षकों भी शिकंजा कसने के निर्देश दिए हैं।



महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने प्रेरणा पोर्टल पर मौजूद ब्यौरे के आकलन के बाद कहा है कि केजीबीवी में शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं तो उनकी संविदा खत्म कर दी जाए। ऐसे शिक्षकों की संविदा खत्म न करना बेसिक शिक्षा अधिकारियों की काम के प्रति लापरवाही सिद्ध होती है। वहीं उन्होंने स्कूल में समयबद्ध उपस्थित पर बल दिया है और कहा है कि यदि शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आएंगे तो इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिला समन्वयक जिम्मेदार होंगे।

महानिदेशक ने 16 जुलाई का डैशबोर्ड के आधार पर समीक्षा की है। 16 जुलाई को प्रदेश के 746 केजीबीवी में कार्यरत 9369 शिक्षकों व कर्मचारियों में से केवल 7377 उपस्थित थे। इसमें से 6353 कर्मचारी तयशुदा समय के बाद स्कूल पहुंचे और 881 स्कूल खत्म होने से पहले ही स्कूल से निकल गए। उन्होंने कहा कि ये स्थिति असंतोषजनक है। इसमें सुधार न होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


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Tuesday, August 11, 2020

टीईटी फेल को भी 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा करा दिया पास, एसटीएफ की जांच में सामने आई बात

टीईटी फेल वालों को भी 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा करा दिया पास, एसटीएफ की जांच में सामने आई बात

 
प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैस-वैसे चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। पता चला है कि नकल माफिया गिरोह ने ऐसे अभ्यर्थियों को भी परीक्षा पास करा दी, जो टीईटी तक में उत्तीर्ण नहीं हो सके। गिरोह के कब्जे से मिली डायरी में लिखे नाम वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है।


शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए नकल मफिया गिरोह सरगना केएल पटेल समेत अन्य के कब्जे से डायरी बरामद हुई थी। इसमें कई अभ्यर्थियों के नाम थे जो न सिर्फ शिक्षक भर्ती परीक्षा में पास हुए थे बल्कि उन्होंने अच्छे खासे नंबर भी हासिल किए थे। विवेचना के दौरान एसटीएफ ने इन अभ्यर्थियों की जांच पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इनमें ऐसे भी अभ्यर्थी शामिल थे, जिन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा में तो पासिंग नंबर आसानी से हासिल कर लिए लेकिन वह टीईटी तक पास नहीं कर पाए।



यह अभ्यर्थी नकल माफिया गिरोह के संपर्क में थे और गिरोह की मदद से ही उन्होंने परीक्षा पास की। हालांकि बेसिक जानकारी न होने के कारण वह टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि डायरी में एक महिला अभ्यर्थी का भी नाम था जो परीक्षा में उत्तीर्ण थी। लेकिन जब उससे पूछताछ की गई तो पता चला कि वह टीईटी में पास नहीं हो सकी।


तीन अभ्यर्थी भेजे जा चुके हैं जेल
शिक्षक भर्ती परीक्षा मामले में अब तक कुल 14 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें से तीन अभ्यर्थी भी हैं। दो अभ्यर्थी धर्मेंद्र पटेल व विनोद कुमार को सोरांव पुलिस ने जेल भेजा था जबकि बलवंत कुमार नाम के एक अभ्यर्थी को हाल ही में एसटीएफ ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सूत्रों की मानें तो गिरोह के संपर्क में रहने वाले कई अन्य अभ्यर्थी भी एसटीएफ के रडार पर हैं।

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप


प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच अब एसटीएफ कर रही है. एसटीएफ को जांच मिले हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन तेज-तर्रार बताई जाने वाली ये एजेंसी इन दो महीनों में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है. एक अभ्यर्थी को छोड़ दिया जाए तो एसटीएफ न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है और न ही जांच को जरा भी आगे बढ़ा सकी है. जांच एजेंसी एसटीएफ इस मामले में मोस्टवांटेड बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव पर तो पूरी तरह मेहरबान नजर आ रही है. न तो अभी तक उसकी गिरफ्तारी की गई है और न ही उस पर कानूनी शिकंजा कसा गया है.


शिक्षक भर्ती मामले में एसटीएफ की नाकामी सवालों के घेरे में है. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि एसटीएफ वाकई नाकाम है या फिर वह कुछ बड़े लोगों को बचाने के लिए जानबूझकर जांच और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाले हुए है. एसटीएफ के ढुलमुल रवैये के बाद अभ्यर्थी और छात्र संगठन अब इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच कराए जाने की मांग करने लगे हैं. बीजेपी नेता चंद्रमा यादव यूपी के एक कैबिनेट मंत्री का प्रतिनिधि रहा है और वो इससे पहले टीईटी परीक्षा का पेपर लीक कराने के आरोप में भी पांच महीनों तक जेल में रह चुका है. एसटीएफ ने बीजेपी नेता चंद्रमा को अब तक न तो भगोड़ा घोषित किया है और न ही उस पर इनाम जारी किया है.


गौरतलब है कि, यूपी के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पैसे लेकर पास कराने के आरोप में प्रयागराज पुलिस ने प्रतापगढ़ के अभ्यर्थी राहुल सिंह की शिकायत पर इसी साल चार जून को केस दर्ज जांच शुरू की थी. प्रयागराज पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड केएल पटेल और दो टॉपर्स समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इतना ही नहीं पुलिस ने यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के प्रतिनिधि रहे बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव को भी इस मामले में आरोपी बनाया था. प्रयागराज पुलिस ने ये सारी कार्रवाई चार दिन में कर ली थी. भर्ती घोटाले का मामला सियासी गलियारों में गूंजने के बाद यूपी सरकार ने 9 जून को जांच प्रयागराज पुलिस से वापस लेकर एसटीएफ को सौंप दी थी. इसके साथ ही हफ्ते भर में ही तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को हटाने पर भी खूब कोहराम मचा था.


बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव सूबे के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का प्रतिनिधि रह चुका है. उसकी गिनती प्रयागराज में बीजेपी के रसूखदार नेताओं में होती है. चंद्रमा यादव बीजेपी में महानगर उपाध्यक्ष के साथ ही किसान मोर्चे की प्रदेश कार्य समिति का सदस्य भी रह चुका है. वो एक इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है. अपने कॉलेज पंचमलाल आश्रम इंटर कालेज को वो रसूख का इस्तेमाल कर तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर बनवाता था और वहीं से पेपर लीक कराकर अपने गिरोह को देता था.



टीईटी पेपर लीक मामले में वो पांच महीने तक जेल में रह चुका है. वैसे एसटीएफ को जांच सौंपने और चंद्रमा को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर विपक्षी पार्टियां पहले ही सवाल उठा रही थीं. एसटीएफ ने दो महीने में इस मामले में सिर्फ एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा वो न तो किसी की गिरफ्तारी कर सकी है और न ही जांच में एक कदम भी आगे बढ़ सकी है. एसटीएफ की ये नाकामी सवालों के घेरे में है. आरोप लग रहा है कि सरकार को इस मामले का सनसनीखेज खुलासा रास नहीं आया, इसलिए उसने तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का तबादला किया और उसके बाद जांच को ठंडे बस्ते में डालने के लिए मामला एसटीएफ के सुपुर्द कर दिया.


प्रयागराज में आइसा के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश पासवान, सपा छात्र सभा से जुड़े अजय यादव सम्राट और एनएसयूआई के ऋषि यादव ने एसटीएफ पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच अब सीबीआई या फिर हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से कराए जाने की मांग की है.

प्रतापगढ़ : प्राइमरी स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचा खंड शिक्षाधिकारी निकला फर्जी, ग्रामीणों ने जम कर की धुनाई

प्रतापगढ़ : प्राइमरी स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचा खंड शिक्षाधिकारी निकला फर्जी, हुई पिटाई।

ग्रामीण फर्जी बीईओ से परिचय पत्र मांगने लगे तो वह सकपका गया। इतने में ग्रामीणों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस उसे पकड़कर थाने ले गई।

प्रयागराज :: पडोसी जनपद प्रतापगढ़ में एक प्राथमिक स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचे खंड शिक्षाधिकारी ही फर्जी निकले। जब यह राज खुला तो शिक्षिका ने ग्रामीणों को बुला लिया। इसके बाद खंड शिक्षाधिकारी ग्रामीणों ने जमकर धुनाई कर दी। इसके बाद आरोपित को पुलिस के हवाले कर दिया। शिक्षिका ने मामले में संग्रामगढ़ पुलिस को तहरीर दी है।




 यह था मामला

संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के चुभकी गांव निवासी सुशीला यादव अपने ही गांव के प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापिका पद पर तैनात है। उनके विद्यालय में तीन दिन पहले एक युवक पहुंचा और खुद को खंड शिक्षाधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ शिकायत हुई है, उसी की जांच करने आए हैं। अगर दस हजार रुपये दे देंगी तो सब कुछ मैनेज कर लिया जाएगा।  बातचीत के दौरान सुशीला को शक हो गया कि जो युवक खुद को खंड शिक्षाधिकारी बता रहा है, वह जालसाज है। क्योंकि उनके यहां के खंड शिक्षाधिकारी मोहम्मद रिजवान हैं। यह पूछने पर वह कहने लगा कि मैंने जल्द ही चार्ज लिया है। बातचीत करने के बाद शिक्षिका का फोन नंबर लेकर वह युवक स्कूल से चला गया। उसी दिन से वह युवक सुशीला देवी को फोन करके पैसा देने का दबाव बनाने लगा।




घूस की रकम लेने पहुंचे फर्जी खंड शिक्षाधिकारी की ग्रामीणों ने की पिटाई

आजिज आकर शिक्षिका सुशीला देवी ने उसे सोमवार को पैसा देने के लिए स्कूल बुलाया। यही नहीं उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी ग्रामीणों को भी दे दी। सोमवार को सुबह स्कूल खुलते ही करीब साढ़े नौ बजे वह जालसाज युवक पैसा लेने के लिए पहुंच गया। इतने में स्कूल पर नजर गड़ाए ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे घेर लिया। ग्रामीण उससे परिचय पत्र मांगने लगे तो वह सकपका गया। इतने में ग्रामीणों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस युवक को पकड़कर थाने ले गई।


पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

थाने में पूछताछ में पकड़े गए जालसाज ने अपना नाम राजेंद्र कुमार यादव पुत्र छेदीलाल यादव भिटारी गांव का निवासी बताया। शिक्षिका सुशीला देवी की तहरीर पर पुलिस ने राजेंद्र यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया। संग्रामगढ़ एसओ आशुतोष तिवारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करके राजेंद्र यादव को गिरफ्तार कर  लिया गया है।


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Sunday, August 9, 2020

शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया मामले में बोर्ड व विश्वविद्यालयों की आख्या का इंतजार

शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया मामले में बोर्ड व विश्वविद्यालयों की आख्या का इंतजार

 
प्रयागराज : शासन की तरफ से सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को अध्यापकों ने अपने अंकपत्र व प्रमाणपत्र जैसे सभी अभिलेख उपलब्ध भी करा दिए हैं। इनका मूल प्रमाणपत्रों से मिलान भी किया जा चुका है। सभी शैक्षिक अभिलेखों को संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालयों को भेजा जा चुका है। विभाग को उनकी आख्या का इंतजार है। उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि सभी विद्यालयों के अध्यापकों ने 25 जुलाई तक अपने शैक्षिक अभिलेख कार्यालय को उपलब्ध करा दिए हैं। उनका मूल प्रमाण पत्रों से मिलान भी किया जा चुका है। प्रथम दृष्टया सभी ठीक पाए गए, लेकिन इसकी पुष्टि संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय ही करेंगे। सभी बोर्डो व विश्वविद्यालयों को अभिलेख पंजीकृत डाक से भेजे जा चुके हैं अब उनकी आख्या का इंतजार है।


इसी क्रम में कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यालयों में तैनात ऐसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति 2010 के बाद हुई है, उनके भी प्रपत्र जांचे जाने हैं। एडीआइओएस प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि अध्यापकों ने खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालयों को अपने प्रपत्र भेज दिए हैं। उनका कम्प्यूटराइज्ड डाटा तैयार किया जा रहा है। जनपद में कुल 3137 विद्यालय हैं। अध्यापकों का डाटा कम्प्यूटर पर आने के बाद जिलास्तरीय कमेटी उसकी जांच करेगी।


शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच होनी है जिले में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने ही कराए उपलब्ध जैसा कि जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने बताया।

 

 

Friday, August 7, 2020

लखनऊ : लेक्चरर ने कहा पहले PM और CM के दस्तावेजों की कराएं जांच, फिर मेरे, विभाग ने जांच न कराने पर रोका वेतन

लखनऊ : लेक्चरर ने कहा पहले PM और CM के दस्तावेजों की कराएं जांच, फिर मेरे, विभाग ने जांच न कराने पर रोका वेतन


 
शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन का शिक्षक पहले से विरोध कर रहे हैं लेकिन गुरुवार को एक अनूठा मामला सामने आया। कैंट स्थित हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में रसायन विषय के प्रवक्ता राम निवास ने प्राचार्य को पत्र लिख कर कहा है कि पहले प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच की जाए। उसके बाद ही वह अपने दस्तावेजों की जांच कराएंगे।  प्राचार्य ने डी आई ओएस को पूरे मामले की जानकारी दी है। इसके बाद डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने शिक्षक का वेतन रोके जाने का आदेश जारी किया है। 


दस्तावेजों की जांच में रखी बेढब शर्तः डीआईओएस डॉ मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि शासन के आदेश पर सभी राजकीय और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है। कैंट स्थित हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज के रसायन विषय के प्रवक्ता राम निवास ने दस्तावेज जमा करने से इंकार कर दिया। प्रवक्ता का पीएम और सीएम के सम्बन्ध में दिया गया बयान नियमों के विपरीत है और आचरण नियमावली का उल्लंघन है।

Thursday, August 6, 2020

उन्नाव : बीआरसी से सर्विस बुक खोने के मामले ने पकड़ा तूल, बीईओ की तीन सदस्यीय टीम से जांच कराएंगे बीएसए

उन्नाव : बीआरसी से सर्विस बुक खोने के मामले ने पकड़ा तूल, बीईओ की तीन सदस्यीय टीम से जांच कराएंगे बीएसए।

उन्नाव :  बीआरसी (ब्लॉक संसाधन केंद्र) में सर्विस बुक न होने से शिक्षक का नाम राज्य पुरस्कार के लिए न भेजे जाने के मामले ने तूल पकड़ा है। बीएसए अब बीईओ की तीन सदस्यीय टीम गठित कर इसकी जांच कराएंगे। इसमें जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।





बेसिक स्कूलों में अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को हर साल राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। साल 2020-21 में जिले के पांच शिक्षकों में नवाबगंज ब्लॉक से सोहरामऊ अंग्रेजी स्कूल की शिक्षिका स्नेहिल पांडेय, नानाटीकुर उच्च प्राथमिक स्कूल के शिक्षक विनय त्रिपाठी, बिछिया की शिक्षिका रश्मि पांडेय, सिकंदपरपुर सरोसी ब्लॉक से ज्योति नगर क्षेत्र से सुनील गुप्ता ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें चार शिक्षकों के नाम तो बीएसए ने भेज दिए थे। जबकि सहायक शिक्षक विनय त्रिपाठी की फाइल में बीईओ (खंड शिक्षाधिकारी) ने बीआरसी पर सर्विस बुक न होने की रिपोर्ट लगाकर बीएसए को फाइल भेजी थी। जिससे उनका आवेदन निरस्त हो गया था। शिक्षक ने बीईओ पर आरोप लगाया था कि उनकी सर्विस बुक वहीं से गायब करा दी गई है। उन्होंने कभी सर्विस बुक ली ही नहीं। उन्होंने बीएसए के साथ डीएम को भी प्रार्थना पत्र देकर इसकी जांच कराने की मांग की थी। जबकि बीईओ का कहना था कि उन्होंने खुद सर्विस बुक बीआरसी से ली है। इसकी हकीकत जानने के लिए अब मामले की जांच होगी। बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि मामले की सच्चाई जानने के लिए इसकी जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।


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