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Monday, February 15, 2021

छह माह में जनपद का एक ब्लाक बनेगा प्रेरक ब्लाक, इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन

छह माह में जनपद का एक ब्लाक बनेगा प्रेरक ब्लाक, इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन

प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की दक्षता बढ़ाने के लिए योगी सरकार का प्रेरक मिशन 6 महीने में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर को बदल देगा। प्रदेश के सभी जिलों में पहले एक प्ररेक विद्यालय बनाया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे जनपद के विद्यालयों को प्ररेक विद्यालय के रूप में तैयार किया जाएगा। यही नहीं, सरकार की ओर से निर्धारित तीसरी संस्था प्ररेक विद्यालयों के बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। संस्था की जांच में खरा उतरने के बाद उसे प्ररेक विद्यालय व जनपद का खिताब दिया जाएगा। इसके अलावा यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्ररेक शिक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश की योगी सरकार प्रतिबद्धता से काम कर रही है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों की भाषा व गणित में दक्षता बढ़ाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान की शुरूआत की गई है। बच्चों को आधारभूत लर्निंग कौशल बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है।


अपर मुख्य सचिव की ओर से इसे लेकर दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए है। कक्षा एक से तीन तक छात्रों की दक्षता की पहचान 14 बिन्दुओं पर की जाएगी जबकि कक्षा 4 व 5 के छात्रों की दक्षता की पहचान 16 बिन्दुओं पर होगी। इन बिन्दुओं के हिसाब से शिक्षकों को छात्रों को तैयार करना होगा। शिक्षक के प्ररेक विद्यालय घोषित करने के बाद तीसरी संस्था बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। 

छह महीने में ब्लाक को बनाना होगा प्रेरक ब्लाक
जनपद के परिषदीय स्कूलों में इस योजना को ब्लाक स्तर पर चलाया जाएगा। बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार के मुताबिक पहले ब्लाक के एक विद्यालय को प्ररेक विद्यालय के रूप में डेवलप किया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे ब्लाक के विद्यालय प्ररेक विद्यालय के रूप में डेवलप होंगे। एक ब्लाक पूरा होने के बाद दूसरे ब्लाक में इस योजना को शुरू किया जाएगा। प्ररेक ब्लाक बनाने के लिए शिक्षकों को 6 महीने का समय दिया जाएगा। असल में कोराना काल के दौरान करीब 11 महीने तक बच्चों के स्कूल बंद रहे हैं।

प्रदेश के कक्षा एक से पांच तक के परिषदीय विद्यालय एक मार्च से पुन: खुल रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान प्राथमिक विद्यालयों वह बच्चें जो नियमित रूप से इंटरनेट के जरिए पढ़ाई नहीं कर पाए। उनकी दक्षता को बढ़ाने के लिए इस प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान का चलाया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की ओर से जारी निर्देशों में शिक्षकों को कुछ निर्धारित बिंदुओं पर छात्रों का कौशल जांचना होगा। साथ ही उनको इन्हीं बिन्दुओं के आधार पर छात्रों में लर्निंग कौशल बढ़ाना होगा।

इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन
कक्षा 1- छात्र निर्धारित सूची में से 5 शब्द सही से पहचान लेते हैं।
कक्षा 2- छात्र अनुच्छेद को 20 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ लेते हैं व अनुच्छेद को 30 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ लेते हैं।
छात्र छोटे अनुच्छेद को पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।
कक्षा 5- छात्र गणित के बड़े अनुच्छेद को पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं। निर्धारित सूची में से 5 संख्यायें सही से पहचान लेते हैं।
कक्षा 2-  छात्र जोड एवं घटाना (एक अंकीय) के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते है।
कक्षा 3- जोड़ एवं घटाना (हासिल के साथ) के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं। गुणा के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।
कक्षा 5- छात्र भाग के 15 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।

Monday, February 1, 2021

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा।


नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की छिड़ी मुहिम में अब सभी का जोर शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती देने पर है। फिलहाल इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्धारित मानकों के साथ अब समय की भी एक रेखा खींच दी है।


वर्ष 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अब नैक के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके तहत उन्हें नैक के कुल स्कोर में से आधे से ज्यादा स्कोर हासिल करना होगा। यूजीसी ने यह पहल ऐसे समय की है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की मुहिम तेजी से चल रही है। 


वैसे भी नीति के अमल के अगुवा उच्च शिक्षण संस्थान ही बने हुए है। ऐसे में यूजीसी का पूरा फोकस नीति के अमल के साथ गुणवत्ता के मोर्चे पर भी संस्थानों की मजबूती देने को लेकर है। यही वजह है कि यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से शैक्षणिक गुणवत्ता को समय रहते दुरुस्त करने को कहा है। साथ ही नैक रैकिंग के मानकों के आधार पर अपने परखने को कहा है।

Thursday, January 14, 2021

विषयवार शिक्षकों की तैयार होगी कुंडली, पढ़ाई की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा मूल्यांकन

विषयवार शिक्षकों की तैयार होगी कुंडली, पढ़ाई की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा मूल्यांकन


वाराणसी। आम तौर पर स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम का ही मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन अब उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की सफलता का भी मूल्यांकन कराया जाएगा। पिछले तीन साल में किस शिक्षक के पढ़ाए छात्रों ने बोर्ड परीक्षा में संबंधित विषय में कितने प्रतिशत सफलता अर्जित की है, अब इसकी सूची नए सिरे से तैयार कराई जा रही है। नई व्यवस्था के मुताबिक 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले शिक्षकों की सूची शासन को भेजी जाएगी।



जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत यूपी बोर्ड के करीब 400 विद्यालय हैं। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के करीब सवा दो लाख छात्र- छात्रा पढ़ाई करते हैं। इसमें करीब एक लाख परीक्षार्थी हाईस्कूल, इंटर में हर साल परीक्षा देते हैं। पिछले तीन सालों से बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्रा सफल भी हो रहे हैं। 


जब परिणाम जारी होता है तो विद्यालयों की ओर से अपने वहां परिणाम शत प्रतिशत होने का दावा भी किया जाता है। यहीं नहीं शिक्षा विभाग में भी इसकी जानकारी दी जाती है। अब इन दावों की हकीकत का पता लगाने के लिए ही बोर्ड ने अपने स्तर से जांच कराने का निर्णय लिया है। इसमें विषय के शिक्षकों की भी कुंडली तैयार कराई जा रही है । विषयवार शिक्षकों के परीक्षा परिणाम के बारे में जो जानकारी मांगी गई है।


शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ ही शिक्षकों को जिम्मेदारियों का सजगता पूर्वक निर्वहन कराने की दिशा में पहली बार इस तरह की पहल की गई है इससे शिक्षकों की विषय के प्रति रूचि तो बढ़ेगी ही,सबसे अधिक लाभ छात्रों को मिलेगा। - डॉ. विजय प्रकाश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

Tuesday, December 29, 2020

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर


विश्वविद्यालयों और कालेजों की तरह देश भर के सभी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर और उनकी गुणवत्ता भी एक जैसी हो, तो कैसा होगा। फिलहाल यह सवाल अभी तो दूर की कौड़ी लाने जैसा है, लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तेजी से लागू करने की मुहिम से जुड़े शिक्षाविदों और अब सरकार का जो रुख है, उनमें यह राह आसान होते दिखाई दे रही है। हालांकि इसके लिए नीति में अलग-अलग कई कदमों को उठाए जाने का प्रस्ताव है, लेकिन इसके अमल के दौरान एक ऐसा सुझाव भी आया है, जो नीति में नहीं है, लेकिन सभी को पसंद आ रहा है। इसमें यूजीसी तर्ज पर देश भर के स्कूलों की गुणवत्ता और स्टैंडर्ड को एक जैसा बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आयोग बनाने का सुझाव है।


खास बात यह है कि नीति के अमल की शुरुआती चर्चा में इस सुझाव को गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षाविद इसे लेकर एकजुट हो रहे हैं, उसमें अब सरकार के स्तर पर भी इसे लेकर विमर्श शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर राज्यों की भी राय ली जा रही है। साथ ही इसे लेकर जल्द कोई फैसला ले सकती है। हालांकि इस पूरी मुहिम के साथ खड़े शिक्षाविदों के मुताबिक इसके अमल में कोई दिक्कत नहीं है। वैसे भी इस आयोग के गठन का उद्देश्य राज्य के विषयों और अधिकारों में कोई हस्तक्षेप करने का भी नहीं है। यह सिर्फ स्कूलों की गुणवत्ता और उसका देश भर के समान स्टैंडर्ड बना रहे, इसे लेकर काम करेगा। स्कूलों के संचालन का पूरा अधिकार पहले की तरह राज्यों के पास ही होगा।

यह ठीक यूजीसी की तरह ही काम करेगा। इसका संचालन राज्यों की ओर से किया जाता है, लेकिन उसके स्टैंडर्ड यानी शिक्षकों की योग्यता, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन कैसा होगा इसके नियम यूजीसी तय करता है। इसी तरह से पढ़ाई का स्तर भी वह निर्धारित करता है।

Thursday, December 24, 2020

सिसोदिया से बहस को हमारे बीएसए ही काफी, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री, जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के दिए संकेत

सिसोदिया से बहस को हमारे बीएसए ही काफी,  बोले बेसिक शिक्षा मंत्री, जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के दिए संकेत



'हम दिल्‍ली के उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नता मनीष सिसौदिया से अपने प्रदेश के किसी भी जिले के ब्रेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से खुली बहस कराएंगे। दिल्ली में तो कुल 2500 विद्यालय हैं। हमारे यहां ता एक जिले में हीं 2500 विद्यालय हैं। सिसोदिया के साथ बहस के लिए हमारे बीएसए ही काफी हैं।' यह बातें प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवदी ने बुधवार को  कही। 


उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में अटल जन्मोत्सव सप्ताह के तहत आयोजित “लोकतांत्रिक मूल्य और भारतीय राजनीति' विषयक राष्ट्रीय संगांष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि सिसोदिया क्‍या बहस करेंगे ? उनको बहस के लिए तो किसी भी जिले का बीएसए ही काफी है। महानगर (दिल्ली) में तो केवल 2500 विद्यालय हैं, यहां 160 लाख विद्यालय हैं। 


सिसोदिया को लखनऊ में रोके जाने के आरोप को भी उन्होंने खारिज कर दिया। बोले-बंधड़क कोई मंत्री आता है और सवाल करता है। चुनौती देता है, आलोचना करता है फिर बिना किसी ब्राधा वापस भी चला जाता है, इससे अधिक कैसी आजादी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में शिक्षकों के जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के संकेत दिए। मनीष सिसौदिया ने प्रदेश सरकार के मंत्री एवं प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह को शिक्षा की स्थिति और दिल्‍ली के केजरीवाल मॉडल बनाम योगी के उत्तर प्रदेश मॉडल पर बहस की चुनौती दी थी।

Thursday, December 10, 2020

दो साल में कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देंगे बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल : सीएम योगी

दो साल में कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देंगे बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल : सीएम योगी


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा परिषद के सभी प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प करने की समयसीमा निर्धारित कर दी है। ये स्कूल अगले दो वर्ष में यानी 2022 तक कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने लगेंगे।


गौरतलब है कि प्रदेश में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.59 लाख प्राइमरी स्कूलों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके 14 मानक तय किए गए हैं। पहले चरण में सभी स्कूलों में 10 मानकों पर काम किया जाएगा। शेष चार मानकों को पूरा करने के लिए विभाग ने मार्च 2022 तक का लक्ष्य रखा है।
प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 2021-22 से परिषदीय विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है। प्रदेश में 16 हजार स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया गया है। इन स्कूलोें में नियुक्त शिक्षकों को स्पोकन इंग्लिश का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। स्कूलों में पुस्तकालय, रीडिंग कॉर्नर, प्रोजेक्टर आदि की व्यवस्था कराई जा रही है।


परिषद के स्कूलों में अगले साल लगभग 50 हजार सहायक अध्यापकों को भर्ती करने की तैयारी है। इनकी भर्ती के बाद स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहेगी बल्कि एक लाख 20 हजार से ज्यादा शिक्षामित्र अतिरिक्त उपलब्ध रहेंगे। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि स्कूलों में जो जरूरी माहौल है, कायाकल्प ऑपरेशन के जरिए उसे देने का प्रयास कर रहे हैं।

Friday, November 20, 2020

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी


उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को परखने के लिए आने वाले दिनों में अब क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) और टाइम्स जैसी रैकिंग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। देश में इसी तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों के विश्वस्तरीय रैकिंग की एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था बनेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके आकलन का फामरूला भारतीय शिक्षा पद्धति के मापदंडों के अनुरूप होगा। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक रैकिंग के लिए क्यूएस और टाइम्स जैसी दो ही एजेंसियां हैं। दोनों ही बिटिश मूल की हैं।


क्यूएस और टाइम्स जैसी रैकिंग करने वाली एजेंसियों पर ‘धारणा’ के आधार पर भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का आकलन करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कोई और नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रलय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से लगाए गए थे। यही वजह थी कि 2020 की टाइम्स रैकिंग में आइआइटी बांबे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे देश के सात प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने विरोध स्वरूप इस रैकिंग में शामिल होने से इन्कार कर दिया।



जेएनयू में चार वर्ष का होगा स्नातक पाठ्यक्रम!

नई दिल्ली : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्नातक पाठयक्रम की समयावधि चार वर्ष करने पर बढ़ रहा है। गुरुवार को विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए कमेटी गठित करने व स्नातकोत्तर की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराने पर मंथन हुआ।

Saturday, October 3, 2020

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की गुणवत्ता जांचेगी अंतर विभागीय समिति

आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की गुणवत्ता जांचेगी अंतर विभागीय समिति

 
 लखनऊ : सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति व उसकी गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अंतर विभागीय समिति गठित करने जा रही है। समिति पोषाहार वितरण का कैलेंडर तय करेगी। साथ ही योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया (एसओपी) का भी निर्धारण करेगी। उच्चस्तरीय समिति में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व सचिव नामित किए जाएंगे।


सरकार ने पहली बार सभी 75 जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण का काम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंप दिया है। पहले यह काम टेंडर के जरिए दिया जाता था। इसमें बड़े-बड़े पंजीरी सिंडीकेट आ जाते थे। अब स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को यह काम दिया गया है। पूरे प्रदेश में पोषाहार उत्पादन व वितरण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में दो वर्ष का समय लग सकता है। तब तक आंगनबाड़ी केंद्रों की लाभार्थियों को कच्चा राशन दिया जाएगा।


बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकास खंड स्तर पर पुष्टाहार उत्पादन की अवस्थापना विकास होने तक महिला स्वयं सहायता समूहों को मुख्य सामग्री गेहूं व चावल आदि भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से तथा प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन के जरिये देसी घी व मिल्क पाउडर उपलब्ध कराया जाएगा। दाल की खरीद महिलाएं स्थानीय स्तर पर करेंगी। इसके बाद निर्धारित मात्र में वजन व पैकेजिंग भी करेंगी। सरकार ने इन सब पर नजर रखने को उच्चस्तरीय अंतर विभागीय समिति गठित करने का निर्णय लिया।

Thursday, December 12, 2019

एटा : तहसीलदार, बीडीओ, बीईओ करेंगे स्वेटर गुणवत्ता की जांच, डीएम ने गठित की जांच समिति

एटा : तहसीलदार, बीडीओ, बीईओ करेंगे स्वेटर गुणवत्ता की जांच, डीएम ने गठित की जांच समिति।





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Wednesday, December 11, 2019

कानपुर देहात : नवाचार : शैक्षिक गुणवत्ता को संचालित किए जाएंगे ऑनलाइन कोर्स, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का परिणाम सही न मिलने पर विभाग का नया प्रयोग

कानपुर देहात : नवाचार : शैक्षिक गुणवत्ता को संचालित किए जाएंगे ऑनलाइन कोर्स, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का परिणाम सही न मिलने पर विभाग का नया प्रयोग।





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Wednesday, October 23, 2019

परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का परिणाम सुधारेंगे एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, हर ब्लॉक में छह रिसोर्स पर्सन की होगी भर्ती, लिखित परीक्षा व साक्षात्कार से होगा चयन

परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का परिणाम सुधारेंगे एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, हर ब्लॉक में छह रिसोर्स पर्सन की होगी भर्ती, लिखित परीक्षा व साक्षात्कार से होगा चयन।


4400 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की होगी भर्ती

  • October 23, 2019
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने में सहयोग देने और उसकी निगरानी के लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में अब छह एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) तैनात किये जाएंगे। इनमें से पांच का चयन जिला स्तर पर लिखित परीक्षा, माइक्रो टीचिंग व साक्षात्कार के आधार पर होगा जबकि एक सदस्य डायट मेंटर होगा। इस हिसाब से प्रदेश के 821 ब्लॉक के लिए कुल 4105 और 59 नगर संसाधन केंद्रों के लिए 295 अतिरिक्त एकेडमिक रिसोर्स पर्सन का चयन किया जाएगा। एआरपी का चयन प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के उन शिक्षकों में से किया जाएगा जिन्हें पढ़ाने का पांच साल का अनुभव हो और रिटायरमेंट में 10 वर्ष बाकी हों। विद्यालयों के सहयोग और निगरानी के लिए एआरपी को प्रति माह 2500 रुपये और डायट मेंटर को 1000 रुपये मोबिलिटी/वाहन भत्ता दिया जाएगा।

एआरपी के लिए अलग से पदों का सृजन नहीं किया जाएगा बल्कि पूर्व में ब्लॉक स्तर पर सृजित सह-समन्वयकों के पदों को ही इसमें समाहित किया जाएगा। वहीं अभी तक न्याय पंचायत रिसोर्स सेंटर के समन्वयकों और ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर तैनात सह-समन्वयकों की भूमिका निभाने वाले प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए वापस भेजा जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने मंगलवार को इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है। सभी ब्लॉक के लिए चयनित एकेडमिक रिसोर्स पर्सन को मिलाकर जिला स्तर पर एकेडमिक रिसोर्स ग्रुप गठित किया जाएगा जो बच्चों के लर्निंग आउटकम को सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों की सहयोगात्मक निगरानी करेंगे। हर ब्लॉक के लिए छह कुल छह एआरपी में से पांच विषय विशेषज्ञ शिक्षक होंगे जबकि एक डायट मेंटर सदस्य होगा।
विषय विशेषज्ञ सामाजिक अध्ययन, अंग्रेजी, हंिदूी, गणित और विज्ञान विषयों के लिए चुने जाएंगे जिनके लिए अलग-अलग शैक्षिक योग्यता निर्धारित की गई है। एआरपी के चयन के लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की जाएगी। लिखित परीक्षा के लिए 60 अंक, माइक्रो टीचिंग के लिए 30 अंक और साक्षात्कार के लिए 10 अंक तय किये गए हैं। लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही माइक्रो टीचिंग के लिए क्वालिफाई करेंगे। वहीं माइक्रो टीचिंग में 60 फीसद या अधिक अंक पाने वाले साक्षात्कार के लिए अर्ह होंगे। साक्षात्कार में 60 फीसद या अधिक अंक पाने वाले ही अंतिम चयन के पात्र होंगे। तीनों के कुल योग को जोड़ने के बाद जिन अभ्यर्थियों के नंबर 60 प्रतिशत से अधिक होंगे, एआरपी के चयन के लिए उनक मेरिट लिस्ट बनायी जाएगी। एआरपी का कार्यकाल एक वर्ष होगा। प्रत्येक वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम तीन साल तक उनका चयन किया जा सकेगा।
परिषदीय स्कूलों में गुणवत्ता बढ़ाने में देंगे सहयोग और करेंगे निगरानी पांच साल की सेवा वाले शिक्षक हो सकेंगे चयन प्रक्रिया में शामिल









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Tuesday, September 3, 2019

फतेहपुर : तीन सौ रुपए में चाहिए "यूनीफॉर्म की गुणवत्ता", शुरू हुआ कमीशनखोरी का खेल, विक्रेताओं को सेट करके न्याय पंचायतवार वितरण का ठेका

फतेहपुर : तीन सौ रुपए में चाहिए "यूनीफॉर्म की गुणवत्ता", शुरू हुआ कमीशनखोरी का खेल, विक्रेताओं को सेट करके न्याय पंचायतवार वितरण का ठेका।





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Thursday, August 1, 2019

महराजगंज : प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकालय अनुदान एवं स्पोर्ट्स अनुदान के अन्तर्गत क्रय की गई सामग्री की उपलब्धता एवं गुणवत्ता के सत्यापन के सम्बन्ध में डीएम ने दिया निर्देश

महराजगंज : प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकालय अनुदान एवं स्पोर्ट्स अनुदान के अन्तर्गत क्रय की गई सामग्री की उपलब्धता एवं गुणवत्ता के सत्यापन के सम्बन्ध में डीएम ने दिया निर्देश।

Tuesday, July 30, 2019

नैक मूल्यांकन से घबरा रहे यूपी के उच्च शिक्षण संस्थान, अब तक सिर्फ 8 फीसदी विवि व डिग्री कॉलेजों ने ही कराया उक्त मूल्यांकन


नैक मूल्यांकन से घबरा रहे यूपी के उच्च शिक्षण संस्थान, अब तक सिर्फ 8 फीसदी विवि व डिग्री कॉलेजों ने ही कराया उक्त मूल्यांकन।   



Monday, July 22, 2019

फतेहपुर : विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण यूनीफॉर्म वितरण एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन के सम्बन्ध में

फतेहपुर : विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण यूनीफॉर्म वितरण एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन के सम्बन्ध में।





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Monday, July 8, 2019

स्कूल में मोबाइल पर बिजी दिखे तो होगी कार्यवाही, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री का आदेश



स्कूल में मोबाइल पर बिजी दिखे तो होगी कार्यवाही, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री का आदेश।  




Friday, June 28, 2019

परिषदीय स्कूलों में सत्र 2019-20 को मनाया जाएगा शैक्षिक गुणवत्ता वर्ष के रूप में, पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के बाद गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा अब मुख्य लक्ष्य



परिषदीय स्कूलों में सत्र 2019-20 को मनाया जाएगा शैक्षिक गुणवत्ता वर्ष के रूप में, पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के बाद गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा अब मुख्य लक्ष्य। 







Wednesday, June 19, 2019

उच्च शिक्षा : यूपी के महाविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता परखेगी तीसरी आँख,  कक्षाओं में लगेंगे सीसीटीवी और वॉइस रिकॉर्डर, निदेशालय की टीम करेगी औचक निरीक्षण



उच्च 
शिक्षा : यूपी के महाविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता परखेगी तीसरी आँख,  कक्षाओं में लगेंगे सीसीटीवी और वॉइस रिकॉर्डर, निदेशालय की टीम करेगी औचक निरीक्षण। 




Monday, June 10, 2019

फर्जी मार्कशीट व डिग्री पर कसें नकेल : राज्यपाल नाईक,  कुलपति सम्मेलन में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की छवि सुधारने पर जोर दिया, 83 दिन में होंगे सभी विवि के दीक्षांत समारोह, हर विद्यालय की दीक्षांत समारोह की तारीख तय


फर्जी मार्कशीट व डिग्री पर कसें नकेल : राज्यपाल नाईक,  कुलपति सम्मेलन में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की छवि सुधारने पर जोर दिया, सुधार के लिए कई कमेटियों का गठन। 


83 दिन में होंगे सभी विवि के दीक्षांत समारोह, हर विद्यालय की दीक्षांत समारोह की तारीख तय। 





Sunday, May 26, 2019

मोदी सरकार करेगी पांच लाख शिक्षकों की भर्ती, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बनाया 100 दिन के काम का एजेंडा, डिजिटल बोर्ड, नई शिक्षा नीति और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान बनाना भी एजेंडे में शामिल


मोदी सरकार करेगी पांच लाख शिक्षकों की भर्ती, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बनाया 100 दिन के काम का एजेंडा, डिजिटल बोर्ड, नई शिक्षा नीति और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान बनाना भी एजेंडे में शामिल।