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Thursday, April 17, 2025

विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर 11 हजार करोड़ का निवेश, ऑपरेशन कायाकल्प से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा

विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर 11 हजार करोड़ का निवेश, ऑपरेशन कायाकल्प से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदलने का दावा 

मिल रही विद्युतीकरण, ब्लैकबोर्ड, टॉयलेट, पेयजल आपूर्ति बाउंड्रीवाल की सुविधा


लखनऊ। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मूलभूत शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में ऑपरेशन कायाकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर 2018 में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किया यह अभियान अब अपना सकारात्मक रूप दिखा रहा है। 19 आधारभूत सुविधाओं व पैरामीटर पर हो रहे काम से प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।


अब तक विभिन्न विभागों के साथ मिलकर मूलभूत सुविधाओं पर 11 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार 18 पैरामीटर में 80 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। साफ पेयजल आपूर्ति, शौचालय, ब्लैकबोर्ड व विद्युतीकरण जैसे 9 पैमानों पर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है। 

वहीं स्कूल फर्नीचर की आपूर्ति मेंb2018 में 19 प्रतिशत के मुकाबले अब तक 65 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया है। ब्वॉयज व गर्ल्स टॉयलेट, मल्टी हैंड वॉशिंग यूनिट, ब्लैक-ग्रीन व व्हाइट बोर्ड, स्कूल परिसर की पुताई, रैंप व रेलिंग निर्माण तथा परिसर के विद्युतीकरण के लक्ष्य को 100 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। 

टाइल्स युक्त शौचालय निर्माण में 2018 में 21 प्रतिशत की अपेक्षा मार्च 2025 तक 91 प्रतिशत कार्यों को पूरा किया गया है। विद्यालयों में गेट युक्त बाउंड्रीवॉल व रसोईघर नवीनीकरण में क्रमशः 98 व 94 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया जा चुका है।

Sunday, July 7, 2024

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल

सरकारी टैबलेट की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, अफसरों के फरमान पर बेसिक शिक्षकों में गुस्से का माहौल


परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों को विभाग की ओर से टैबलेट मुहैया कराए गए हैं ताकि उनके आने-जाने के समय पर राज्य स्तर तक निगरानी रखी जा सके। इस महीने से ऑनलाइन सेल्फी के साथ उपस्थिति प्रक्रिया लागू कर दी गई।


सूबे के ज्यादातर स्कूलों में हालांकि अभी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। जिन स्कूलों में शुरू हुई है वहां से टैबलेट हैंग होने और ऑन  न होने की बहुत शिकायतें सामने आ रही हैं। इसको लेकर शिक्षकों में रोष का माहौल है। उन्होंने विभाग पर परेशान करने का आरोप लगाया है।

शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से दिया गया टैबलेट बहुत ही घटिया गुणवत्ता का एवं 4 जी पर आधारित है। सेल्फी के लिए 2 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा, 3 जीबी रैम और 32 जीबी रोम दी गई है। इसमें जरूरी एप के अलावा ऑनलाइन कार्यों के लिए विभाग की ओर से 24 से भी अधिक एप डाउनलोड कराए गए हैं। 


शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी खामी के चलते उपस्थिति के लिए प्रेरणा पोर्टल ज्यादातर खुलता ही नहीं। यदि खुलता भी है तो फोटो अपलोड  करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों से इस समस्या के बारे में बताने पर वे शिक्षकों पर अपने मोबाइल से फोटो अपलोड करने का दबाव बना रहे हैं।

Wednesday, June 22, 2022

शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल

शिक्षकों की कमी से बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल



सीतापुर। प्राइमरी शिक्षा को पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिश हो रही है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी रोड़ा बनी हुई है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार जिले में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुसार करीब 9107 शिक्षकों की कमी है। इससे प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों विद्यालयों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।


निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में 30 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक तय किया गया है। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। अगर इस मानक के अनुसार शिक्षकों की विद्यालय में पोस्टिंग देखी जाए तो काफी कम है। 30 अप्रैल 2022 की छात्र संख्या के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के प्राथमिक विद्यालयों में चार लाख 10 हजार 839 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 797 प्रधानाध्यापक व 12867 शिक्षकों की जरूरत है।


इस समय 496 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 5753 शिक्षक पढ़ाई करा रहे है। इस तरह 298 प्रधानाध्यापक व 7114 सहायक अध्यापकों की कमी है। कक्षा छह से आठ तक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो एक लाख 53 हजार 765 नौनिहाल अध्ययनरत है। इनके लिए 800 प्रधानाध्यापक व 4767 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। इस समय 184 प्रधानाध्यापक कार्यरत है। 2774 सहायक अध्यापक नौनिहालों का भविष्य संवार रहे है।इस तरह 653 प्रधानाध्यापकों की कमी बनी हुई है। 1993 शिक्षकों की अतिरिक्त रूप से जरूरत पड़ रही है। 



मानक के अनुसार विद्यालयों में शिक्षक न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग मौजूद शिक्षकों से ही काम चला रहा है। इससे विद्यालय तो खुल रहे है, लेकिन जरूरत के मुताबिक शिक्षक न होने से उनको गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।नगर क्षेत्र में शिक्षकों की बड़ी कमीबेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पोस्टिंग ग्रामीण व नगर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से की जाती है। सीतापुर में 19 विकासखंड व चार नगर क्षेत्र (सीतापुर, बिसवां, मिश्रिख व खैराबाद) शामिल है। प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक के आठ व सहायक अध्यापक के 194 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। जिसमें इस समय 18 प्रधानाध्यापक व 21 सहायक अध्यापक ही कार्यरत है। इस तरह 10 प्रधानाध्यापक व 173 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।


उच्च प्राथमिक विद्यालयों की बात की जाए तो प्रधानाध्यापक के छह व सहायक अध्यापक के 37 पदों की जरूरत है। मौजूदा समय में यहां पर एक भी प्रधानाध्यापक नहीं है। महज आठ सहायक अध्यापकों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। इस तरह छह प्रधानाध्यापक व 29 सहायक अध्यापकों की कमी बनी हुई है।एक शिक्षक के पास कई विद्यालयों की जिम्मेदारीग्रामीण से लेकर नगर क्षेत्र में प्रधानाध्यापक पद पर कई वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई है। इसकी वजह से अधिकांश विद्यालयों में इंचार्ज के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।


 नगर क्षेत्र में तो एक शिक्षक के पास दो से तीन विद्यालयों का प्रभार है। विभाग की मजबूरी है कि वह ग्रामीण इलाके के शिक्षकों को नगर क्षेत्र में तैनाती नहीं दे सकते है। इससे दिन प्रतिदिन नगर क्षेत्र की स्थिति खराब ही होती जा रही है।



शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसकी सूचना शासन को भेजी गई है। मौजूदा शिक्षकों से बेहतर तरीके से पढ़ाई करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
अजीत कुमार, बीएसए

Saturday, February 19, 2022

अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को करना होगा पूरा, राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल SA) इस पर नजर रखेगी

अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को करना होगा पूरा, राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल SA) इस पर नजर रखेगी



नई दिल्ली : अब प्रत्येक स्कूल को स्कूली शिक्षा के एक मानक को पूरा करना होगा। सभी राज्यों में गठित होने वाली स्टेट स्कूल स्टैंड‌र्ड्स अथारिटी (ट्रिपल एसए) इस पर नजर रखेगी। साथ ही स्कूलों की हर साल राज्य और जिला स्तरीय रैंकिंग भी तैयार करेगी। माना जा रहा है कि इस नई पहल से स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी और स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।


शिक्षा मंत्रालय ने राज्‍यों को दिया टास्‍क

अभी तक इस तरह की रैंकिंग सिर्फ उच्च शिक्षण संस्थानों में ही तैयार की जाती है, जिनमें ज्यादातर विश्वविद्यालय और कालेज शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रिपल एसए के गठन का टास्क दे दिया है। इसके तहत सभी राज्यों को इस साल के अंत तक इसका गठन करना है। मंत्रालय की योजना वर्ष 2023 से इसे देश के सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से लागू करना है।


कोविड के चलते हुई देरी

खास बात यह है कि इस अथारिटी के दायरे में राज्यों के शिक्षा बोर्ड के जुड़े निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूल शामिल होंगे। मंत्रालय के मुताबिक, इस पर वैसे तो काम काफी पहले ही शुरू हो जाना था, लेकिन कोविड के चलते इसके अमल में देरी हुई है। फिलहाल राज्यों में यह अथारिटी एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करेगी। हालांकि राज्यों में स्थित केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय इसके दायरे में शामिल नहीं होंगे।


ये हैं मापदंड

शिक्षा मंत्रालय ने इसके अमल की तैयारियों के साथ स्कूलों के स्टैंडर्ड के लिए प्रारंभिक तौर पर जो मापदंड तय किए हैं, उनमें सुरक्षा, मूलभूल ढांचा, सभी विषयों के कक्षावार शिक्षकों की संख्या, वित्तीय स्थिति, इनोवेशन व प्रैक्टिस क्लास रूम की संख्या, बच्चों के सीखने की क्षमता में सुधार की स्थिति और प्रशासनिक क्षमता आदि को शामिल किया है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर फोकस

इन सभी जानकारियों को स्कूलों की ओर से ट्रिपल एसए की ओर से तैयार होने वाले डिजिटल प्लेटफार्म पर हर साल अपलोड करना होगा। गौरतलब है कि देशभर में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को एक जैसा बनाने और स्कूलों का एक स्टैंडर्ड कायम रखने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई सिफारिशों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्रालय का इस समय फोकस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल पर है।

Wednesday, December 22, 2021

राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा

राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी  - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा


पांच हजार डिग्री। सभी फर्जी। केस चला हाई कोर्ट में। क्या हम जिम्मेदार नहीं हैं। अब प्रण लीजिए एक भी डिग्री फर्जी नहीं होनी चाहिए। सालों से डिग्री नहीं दे रहे हैं। नैक से लेकर एनआईआरएफ से पीछे हट रहे हैं। समीक्षा बैठक में जो बातें सामने आयी। उसके बाद मुझे लगा कि ऐसे विश्वविद्यालय क्यों चलने चाहिए। यह बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में कहीं। उन्होंने दीक्षांत भाषण से अलग हटते हुए कहा कि पारदर्शिता से काम करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।



कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सालों से लाखों डिग्रियां लंबित थी। विश्वविद्यालयों की समीक्षा में सवाल पूछा सालों से डिग्रियां लंबित क्यों पड़ी हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद आदेश किया कि डिग्री लेने के लिए एक पैसा नहीं लेना है। अब विश्वविद्यालय डिग्री बांट रहे हैं। एकाउंट मैटेंन नहीं करते थे। जब कहा गया तो अब मेटेंन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सालों में 300 फाइल देखकर थक गयी हूं। अनियमिता है नियम के विरूद्ध काम हुए हैं। शिक्षकों की पदोन्नति में करने में किसी को भी दे दो। 


राज्यपाल ने कहा कि मैंने तय किया है कि ऐसी अनियमित काम की फाइल मेरे पास आएगी और मैं जब पता करूंगी तो आपको सजा होगी। लास्ट में जो साइन करता है उसकी जिम्मेदारी है। क्यों फाइल नहीं देखी। यह जिम्मेदारी सिर्फ वीसी की नहीं है। सभी शिक्षक, कर्मचारियों की है। नियुक्ति में पारदर्शिता की व्यवस्था की है, जो होनहार हैं उनको नौकरी मिलेगी।


नैक से डर, एनआईआरएफ को आवेदन तक नहीं
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय से कॉलेज हजार संबंधित हैं, लेकिन एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है। क्यों? क्या विश्वविद्यालय की कोई जिम्मेदारी नहीं है। नैक में जाने से हिचकिचाहट होती है। क्योंकि काम नहीं कर रहे हैं। हौसला होना चाहिए कि मेरे विश्वविद्यालय की ए डबल प्लस क्यों ना आए। इतने बड़े भवन हैं आपके पास। क्या नहीं है आप बताएं। आज भी पांच भवनों का लोकार्पण किया है। क्या बिल्डिंग से रैंकिंग होगा या क्वालिटी से होगा। क्वालिटी से लिए आपके प्रयास क्या हैं।



30 साल से कर रहे हैं काम, विश्वविद्यालय से नहीं शिक्षकों को लगाव

कुलाधिपति ने कहा कि कई-कई शिक्षक ऐसे है। जिनका जन्म ही विश्वविद्यालय में हुआ। यानि कि उन्होंने अपनी पहली सर्विस ही विश्वविद्यालय से शुरू की। उसके बाद से 30-30 साल हो गए हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि आपका विश्वविद्यालय के साथ कुछ लगाव हुआ हो और जब तक लगाव नहीं होगा। तब तक विश्वविद्यालय में कोई बदलाव नहीं आएगा। सिर्फ लेक्चर लेना और घर चले जाना आपका काम नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाना सीखें। पढ़ाई में आईटी का प्रयोग करें।

Saturday, December 18, 2021

बेसिक शिक्षा में तय होगा परिणाम से परिवर्तन का सफर, सीखने और सीखाने की गति को भी निखारेगी यह व्यवस्था। जानिए विस्तार से

देश का पहला निपुण भारत निगरानी केंद्र गोरखपुर में

बेसिक शिक्षा में तय होगा परिणाम से परिवर्तन का सफर, सीखने और सीखाने की गति को भी निखारेगी यह व्यवस्था। जानिए विस्तार से


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा 5 जुलाई को लागू निपुण भारत योजना (नेशनल इनीशिएटिव फॉर प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरेसी) समेत बेसिक शिक्षा विभाग की सभी कक्षाओं के अनुपालन एवं उसके लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विकास भवन में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को देश के इस पहले अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का लोकार्पण करेंगे। इसकी कार्य प्रणाली को भी परखेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग में इसकी मदद से परिणाम से परिवर्तन का सफर तय करने में आसानी होगी। सीखने और सीखाने की गति को भी यह निगरानी व्यवस्था निखारेगी।

डीएम विजय किरण आनंद की नवाचार एवं आधुनिकीकरण की सोच की उपज यह कंट्रोल रूम तकरीबन 88 लाख रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह कंट्रोल रूम देश के इस तरह का पहला प्रयोग है जिससे गोरखपुर मण्डल के सभी परिषदीय विद्यालयों एवं कस्तुरबा गांधी विद्यालयों की निगरानी एवं जरूरी सहयोग मिलेगा। ताकि उन विद्यालय के शिक्षक अपने छात्रों की शिक्षण संबंधी समस्याओं का समाधान कर सके। स्वयं भी समस्याओं का त्वरित निदान प्राप्त कर सके। इस मायने में यह कंट्रोल रूम अत्याधुनिक कॉल सेंटर के रूप में भी सेवाएं प्रदान करेगा।


भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू  की गई निपुण (नेशनल इनोशिएटिव फार प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरसी) भारत योजना के तहत देश का पहला निपुण भारत निगरानी कर (मानीटरिंग सेंटर) गोरखपुर में स्थापित किया जा रहा है। विकास भवन में बनाए जा रहे इस केंद्र से बेसिक शिक्षा में बड़ा बदलाव आएग। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे की नियमित रूप से वास्तविक समय में निगरानी हो सकेगी। बच्चे ने कितना सोखा, उसके सीखने की प्रगति कैसी है रोज स्कूल आता है या नहीं, स्कूल में मध्याहन भोजन की स्थिति क्या है कितने बच्चे स्कूल छोड़ दे रहे। है आदि बिन्दुओं पर भी समय से छटा उपलब्ध हो सकेगा और उसके आधार पर सुधार किया जाएगा। लक्ष्य है कि 2026-27 तक हर बच्चा तीसरी कक्षा के अंत तक पढ़ने लिखने एवं अंकगणित सीखने की क्षमता विकसित सके। 88 लाख रुपये की लागत से स्थापित किए जा रहे इस केंद्र का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को करेंगे। मुख्यमंत्री यहाँ निगरानी केंद्र को कार्यप्रणाली पर केंद्रित चार मिनट का वीडियो भी देखेंगे।



जिलाधिकारी विजय किरन आनंद की पहल पर विकास भवन में इस अत्याधुनिक की स्थापना हो रहा है। मुख्य विकास अधिकारी  इंद्रजीत सिंह को इसके संचालन की जिम्मेदारी दे गई है। इस केंद्र में एक नियंत्रण कक्ष को भी स्थापना की गई। है। इसमें 16 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन  (एआरपी) एवं शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। केंद्र में 16 कंप्यूटर लगाए गए हैं। इसे काल सेंटर के रूप में भी विकसित किया गया है।


केंद्र में हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा होगी। यहां एक बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। नियंत्रण कक्ष सुबह नौ से शाम पांच बजे तक संचालित होगा जिले में 2493 परिषदीय विद्यालयों में 600 स्मार्ट क्लास हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिलाधिकारी ने शुक्रवार की शाम केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी इंजीत सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र प्रताप सिंह, विजय जायसवाल आदि उपस्थित रहे।


निपुण भारत योजना के तहत विकास भवन में निपुण भारत निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है। गोरखपुर पहला जिला है, जहां ऐसा केंद्र स्थापित किया गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कितना सीख पा रहे हैं, इसकी रियल टाइम निगरानी हो सकेगी। यह केंद्र बेसिक शिक्षा में बड़े बदलाव लेकर आएगा
विजय किरन आनंद जिलाधिकारी


● ऐसे होगी निगरानी

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट के शिक्षकों द्वारा हर महीने प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे। इन्हें स्कूलों पर भेजा जाएगा। बच्चों को इसे हल करने को दिया जाएगा और उसके बाद स्कूल के शिक्षक ओएमआर शीट पर बच्चों द्वारा दिए गए उत्तर भरेंगे।
एक ओएमआर शीट पर आठ बच्चों के उत्तर भरे जा क्षमता को बढ़ाया जाएगा। सभी स्कूली की जियो सकते हैं।
सरल एप के जरिए ओएमआर शीट स्कैन किया जाएगा। 


स्कैन करने पर यह ओएमआर आनलाइन निगरानी केंद्र पर आ जाएंगे। यहां बच्चों के सीखने की प्रगति का अध्ययन किया जाएगा और जहां कमिया होगी वहा एआरपी को भेजकर बच्चों की सीखने की टैगिंग भी होगी, जिसके जरिए उनकी निगरानी हो सकेंगी।

इसके अलावा मिशन प्रेरणा, आपरेशन कायाकला, मध्याहन भोजन योजना, समावेशी शिक्षा समेत विद्यालय स्तर पर संचालित सभी योजनाओं की निगरानी भी हो सकेगी।

Sunday, November 28, 2021

यूपी : डिग्री कॉलेजों पर कसेगा जांच का शिकंजा, गुणवत्ता की जांच के लिए अफसरों को सौंपा गया हर माह का लक्ष्य

यूपी  :   डिग्री कॉलेजों पर कसेगा जांच का शिकंजा,  गुणवत्ता की जांच के लिए अफसरों को सौंपा गया हर माह का लक्ष्य


योगी सरकार ने प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों पर शिकंजा कसते हुए शिक्षा की गुणवत्ता की जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए शासन के विशेष सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक से लेकर राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तक को हर माह महाविद्यालयों के निरीक्षण का लक्ष्य दिया गया है। इसकी रिपोर्ट महीने की पांचवीं तारीख तक अनिवार्य रूप से शासन को भेजनी होगी।


प्रदेश में 164 राजकीय और 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से इन महाविद्यालयों में पठन-पाठन की मौजूदा स्थिति में सुधार होगा। इससे जरूरी सुधारों के लिए प्रबंध तंत्र पर भी दबाव बनेगा।


उच्च शिक्षा विभाग के सचिव शमीम अहमद खान की ओर से जारी आदेश में शासन के विशेष सचिव को हर महीने दो, संयुक्त सचिव को तीन, निदेशक उच्च शिक्षा को पांच, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा को 15, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को 25-25, राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पांच-पांच और उप कुलसचिवों, सहायक कुलसचिवों को 15-15 महाविद्यालयों का निरीक्षण करना होगा।



हर माह पांच तारीख को देनी होगी रिपोर्ट

क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा अपनी निरीक्षण रिपोर्ट निदेशक उच्च शिक्षा को मुहैया कराएंगे निदेशक उच्च शिक्षा परीक्षण के बाद रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। इसी तरह सहायक कुलसचिव और उप कुलसचिव अपनी रिपोर्ट संबंधित कुलसचिव को देंगे। कुलसचिव परीक्षण के बाद रिपोर्ट शासन भेजेंगे। विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों के कुलसचिव रिपोर्ट सचिव उच्च शिक्षा को सौंपेंगे।


शिक्षा नीति क्रियान्वयन की स्थिति की परख होगी

यह कवायद महाविद्यालयों में उपलब्ध पाठ्यक्रमों, प्रवेश की स्थिति, कक्षाओं के संचालन, शैक्षिक स्टाफ की उपलब्धता और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए शुरू की गई है।

Monday, September 13, 2021

इलाहाबाद विश्वविद्यालय : सरकार की रैंकिंग में पूरब का ऑक्सफोर्ड लगातार तीसरी बार फिसड्डी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय : सरकार की रैंकिंग में पूरब का ऑक्सफोर्ड लगातार तीसरी बार फिसड्डी


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की 2021 की संस्थागत रैकिंग जारी कर दी। पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रैंकिंग में इस बार भी सुधार नहीं हुआ। रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय  लगातार तीसरी बार देशभर के शीर्ष 200 उच्च शैक्षिक संस्थानों की सूची से बाहर है। एमएनएनआईटी की रैंकिंग में सुधार हुआ है। 


यह संस्थान देश के शीर्ष 100 उच्च शैक्षिक संस्थानों में 88वें स्थान पर है जबकि पिछले साल की रैंकिग में यह पांच पायदान नीचे 93वें स्थान पर था। देश के टॉप-200 उच्च शैक्षिक संस्थानों में ट्रिपलआईटी का नाम नहीं है। गत वर्ष की तुलना में इसकी रैंकिंग में सुधार आया है। 


प्रो. संगीता श्रीवास्तव ( कुलपति, इविवि) ने कहा , 'पिछले कुछ महीनों से विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। इनका असर भले ही इस वर्ष की रैंकिंग पर नहीं दिख रहा हो पर आगे जरूर दिखेगा क्योंकि किसी भी संस्थान की एनआईआरएफ रैंकिंग लंबे समय के प्रयासों का नतीजा होती है।'


बेहतरी की उम्मीदों को झटका
शिक्षा मंत्रालय (पूर्व में एचआरडी मंत्रालय) ने वर्ष 2016 से रैंकिंग की व्यवस्था लागू की। उस वर्ष इविवि को देशभर के विश्वविद्यालयों में 68वां स्थान मिला था। 2017 में 27 पायदान की गिरावट के साथ इविवि 95वें स्थान पर चला गया था। 2018 की रैंकिंग में देश के शीर्ष-100 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गया था। 2018 में इविवि को 144वां स्थान मिला था। 


वर्ष 2019 में स्थिति और ज्यादा खराब हुई और इविवि देशभर के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची से भी बाहर हो गया। शोध कार्यों और खास तौर से  विज्ञान संकाय के शिक्षकों को विभिन्न मंत्रालयों और शोध संस्थानों से मिले रिसर्च प्रोजेक्ट को देखते हुए इविवि के शिक्षक इस बार रैंकिंग में बेहतरी की उम्मीद लगाए हुए थे पर गुरुवार को उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। 125 वर्ष से भी पुराना इविवि लगातार तीसरी बार देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में स्थान बना पाने में नाकाम रहा।

Thursday, September 9, 2021

NIRF Ranking 2021 : शिक्षा मंत्री ने जारी की NIRF रैंकिंग, जानिए देश के बेस्ट शैक्षणिक संस्थानों के बारे में

NIRF Ranking 2021  : शिक्षा मंत्री ने जारी की NIRF रैंकिंग, जानिए देश के बेस्ट शैक्षणिक संस्थानों के बारे में

जानिए : ये हैं देश की टॉप 10 यूनिवर्सिटी


NIRF Rankings 2021 Live Updates : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को वर्ष 2021 की एनआईआरएफ रैंकिंग (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) जारी कर दी। इस वर्ष भी ओवरऑल कैटेगरी में आईआईटी मद्रास को देश का बेस्ट शैक्षणिक संस्थान चुना गया है। वहीं आईआईएससी बेंगलुरु दूसरे और आईआईटी बॉम्बे तीसरे स्थान पर हैं। बेस्ट यूनिवर्सिटी कैटेगरी में आईआईएससी बेंगलुरु पहले, जेएनयू दूसरे और बीएचयू तीसरे पायदान पर हैं। इस वर्ष रैंकिंग फ्रेमवर्क में टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट्स की कैटेगरी भी शामिल की गई है। इस कैटेगरी में इस वर्ष आईआईएससी बेंगलुरु पहले, आईआईटी मद्रास दूसरे और आईआईटी बॉम्बे तीसेर स्थान पर रहे।


■  ओवरऑल कैटेगरी में देश के बेस्ट 10 संस्थान
1. आईआईटी मद्रास
2. आईआईएससी, बेंगलुरु
3. आईआईटी, बॉम्बे
4. आईआईटी दिल्ली
5. आईआईटी कानपुर
6. आईआईटी खड़गपुर
7. आईआईटी रुड़की
8. आईआईटी गुवाहाटी
8. जेएनयू, दिल्ली
9. आईआईटी रुड़की
10. बीएचयू, वाराणसी


■  यूनिवर्सिटी कैटेगरी में रैंकिंग 2021
1. आईआईएससी, बेंगलुरु
2. जेएनयू, दिल्ली
3. बीएचयू, वाराणसी
4. कलकत्ता यूनिवर्सिटी,  प. बंगाल
5. अमृता विश्व विद्यापीठ, कोयंबटूर, तमिलनाडु
6. जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
7. मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, मणिपाल, कर्नाटक
8. जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता
9. यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद, हैदराबाद
10. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश


■ टॉप 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों की लिस्ट: 
1. आईआईटी मद्रास
2. आईआईटी दिल्ली-2
3. आईआईटी बॉम्बे -3
4. आईआईटी कानपुर
5. आईआईटी खड़गपुर
6. आईआईटी रुड़की
7. आईआईटी गुवाहाटी
8. आईआईटी हैदराबाद
9. एनआईटी तिरुचापल्ली
10. एनआईटी सुरथकल 


■ देश के टॉप 5 मेडिकल कॉलेज
1. एम्स दिल्ली
2. पीजीआईएमईआर (चंडीगढ़) 
3. क्रिश्चिन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर (बेंगलुरु) 
4. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस- बेंगलुरु
5. संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ


■ देश के टॉप 5 मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
1. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
2. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बेंगलोर
3. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), कलकत्ता
4. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), कोझीकोड
5. आईआईटी, दिल्ली


■ देश के टॉप 10 कॉलेज 
1. मिरांडा हाउस, दिल्ली
2. लेडी श्री राम कॉलेज ऑफ वुमेन, दिल्ली
3. लोयोला कॉलेज, चेन्नई
4. सेंट जेवियर कॉलेज, कोलकाता
5. रामकृष्ण मिशन विद्यामंदिर, हावड़ा
6. पीएसजीआर कृष्णम्मल कॉलेज फॉर वूमेन, कोयंबटूर
7. प्रेसिडेंसी कॉलेज, चेन्नई
8. सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली
9. हिंदू कॉलेज, दिल्ली
10 श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली


■ देश के बेस्ट फॉर्मेसी कॉलेज
1    जामिया हमदर्द, दिल्ली
2.  पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़
3. बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी
4. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, मोहाली
5. इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई

Thursday, July 1, 2021

बेसिक शिक्षा विभाग : शैक्षिक गुणवत्ता के साथ आपरेशन कायाकल्प पर जोर, प्रधानाध्यापकों के साथ हर महीने बैठक करेंगे बीईओ

बेसिक शिक्षा विभाग :  शैक्षिक गुणवत्ता के साथ आपरेशन कायाकल्प पर जोर, प्रधानाध्यापकों के साथ हर महीने बैठक करेंगे बीईओ


नए शैक्षिक सत्र में बेसिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक गुणवत्ता के साथ आपरेशन कायाकल्प और समावेशी शिक्षा पर जोर देने की कवायद शुरू कर दी है। मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के डाटा अपडेशन पर भी फोकस होगा।

 खंड शिक्षा अधिकारियों को इसके लिए हर महीने के चौथे शनिवार को ब्लाक के सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर विभाग के कार्यक्रमों और गतिविधियों की मासिक समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। समीक्षा का आधार गतिविधियों से संबंधित पोर्टल के डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़े होंगे। बैठक में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी।


बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि बच्चों के शैक्षिक मूल्यांकन के आधार पर कक्षाओं में प्रेरणा तालिका को अपडेट किया जा रहा है कि नहीं। शैक्षिक गतिविधियों के संचालन मेें समृद्ध और आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका का इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं। ई-पाठशाला के जरिये बच्चों की पढ़ाई की प्रगति भी समीक्षा का विषय होगी।

 प्रधानाध्यापक और शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से शैक्षिक सामग्री नियमित रूप से साझा कर रहे हैं या नहीं, इस पर भी चर्चा होगी। आपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों को सुविधाओं से लैस करने पर सरकार खास जोर दे रही है। हाल ही में चुने गए प्रधानों के साथ समन्वय करके आपरेशन कायाकल्प को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। 

शारदा अभियान के तहत स्कूली शिक्षा के दायरे से छूटे बच्चों की पहचान और नामांकन तथा समर्थ कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांग छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे की स्थिति की भी समीक्षा होगी। मानव संपदा पोर्टल पर सभी शिक्षकों की सेवा पुस्तिका को अपडेट करने और शिक्षकों के अवकाश आवेदनों की आनलाइन स्वीकृति की भी समीक्षा होगी।

Tuesday, June 8, 2021

परिषदीय स्कूलों को लेवल वन में लाएंगे, PGI इंडेक्स में बढ़त से उत्साहित बेसिक शिक्षा मंत्री का दावा


परिषदीय स्कूलों को लेवल वन में लाएंगे, PGI इंडेक्स में बढ़त से उत्साहित बेसिक शिक्षा मंत्री का दावा


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि आगामी वर्षों में परिषदीय स्कूलों को भारत सरकार की परर्फोमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स रैंकिंग में लेवल वन (ग्रेड 1 प्लस प्लस) में लेकर आएंगे।


उन्होंने कहा कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और मूलभूत सुविधाओं में विकास के लिए लागू योजनाओं का परिणाम है कि 2017 18 में यूपी के परिषदीय स्कूल 603 अंकों के साथ ग्रेड-5 पर थे, जबकि 2019-20 में 804 अंकों के साथ ग्रेड-1 में आ गए हैं। यूपी ने सीखने की क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं, अनुसूचित जाति एवं सामान्य वर्ग के बच्चों के शैक्षिक स्तर और प्रशासनिक कार्य में अच्छी प्रगति हासिल की है।

Saturday, March 20, 2021

स्कूलों की बदलती तस्वीर से रूबरू होंगे अभिभावक, परिषदीय स्कूलों की ब्रांडिंग होगी

स्कूलों की बदलती तस्वीर से रूबरू होंगे अभिभावक, परिषदीय स्कूलों की ब्रांडिंग होगी


वाराणसी। सरकारी स्कूलों के बदलते परिवेश और विभाग की योजनाओं से लोगों को रूबरू कराने के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों की ब्रांडिंग होगी। इसके लिए एलईडी वैन, नुक्कड़, नाटक, होर्डिंग्स, प्रश्नोत्तरी, मीना मंच आदि का आयोजन किया जाएगा। बालिका शिक्षा और बेटियों की पढ़ाई को इसमें प्रमुखता दी जाएगी।


 तीन चरणों में मीना अभियान सभी जिलों में चलाया जाएगा। इसका पूरा खाका सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों व जिलाधिकारी को भी भेजा जाएगा। दरअसल, अभिभावक बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने से कतराते हैं, विभाग ने इस स्थिति को बदलने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। जिससे लोग बेसिक स्कूलों की ओर आकर्षित हों।



 बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि आम आदमी तक सरकारी विद्यालयों की बदलती तस्वीर व योजनाएं पहुंचाने के लिए मीना अभियान शुरू करने की तैयारी है। इसके जरिए जिले के ज्यादा से ज्यादा बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिया के लिए आकर्षित किया जाएगा।

Thursday, March 4, 2021

प्रिंट रिच सामग्री व पोस्टर से शिक्षित किए जाएगें परिषदीय स्कूलों के बच्चे

प्रिंट रिच सामग्री व पोस्टर से शिक्षित किए जाएगें परिषदीय स्कूलों के बच्चे


परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग प्रिंट रिंच पोस्टर की मदद लेगा। कवायद सफल हो, इसके लिए कक्षा एक, दो व तीन के बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्कूलों को हिंदी के 20 व गणित के 17 पोस्टर भेज दिए गए हैं। जिन्हें शिक्षक स्कूलों की दीवार पर चस्पा कर बच्चों को विषयवस्तु की जानकारी देकर उनकी शैक्षिक अभिरुचि बढ़ाने की कोशिश करेंगे।


शिक्षण कार्य शुरू होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों की शैक्षिक अभिरुचि बढ़ाने की कोशिश मेें जुटा है। कवायद सफल हो इसके लिए स्कूलों में प्रिंट रिंच पोस्टर से बच्चों को आकर्षित किया जाएगा। शासन का निर्देश मिलने के बाद  कक्षा एक, दो व तीन की कक्षा से जुड़े शैक्षिक सामग्री का पोस्टर तैयार कर बीईओ के माध्यम से स्कूलों में भेजा है।


स्कूलों को आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद प्रत्येक स्कूल को हिंदी विषय के 20 व गणित विषय के 17 शैक्षिक सामग्री समेत 102 पोस्टर दीवारों पर चस्पा करवाना होगा। जिसकी मदद से प्रतिदिन शिक्षक बच्चों को हिंदी व गणित पढ़ाएंगे। इससे बच्चों का मन पढ़ाई में लगेगा।


 प्रिंट रिच पोस्टर से बच्चों को पढ़ने व समझने में आसानी होगी। बच्चों को अन्य विषयों में गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए जल्द ही और पोस्टर तैयार किए जाएंगे। दीवारों पर ज्ञान वर्धक सामग्री चस्पा होने से स्कूल लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बन रहे हैं।

Monday, February 15, 2021

छह माह में जनपद का एक ब्लाक बनेगा प्रेरक ब्लाक, इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन

छह माह में जनपद का एक ब्लाक बनेगा प्रेरक ब्लाक, इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन

प्राथमिक विद्यालय के छात्रों की दक्षता बढ़ाने के लिए योगी सरकार का प्रेरक मिशन 6 महीने में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर को बदल देगा। प्रदेश के सभी जिलों में पहले एक प्ररेक विद्यालय बनाया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे जनपद के विद्यालयों को प्ररेक विद्यालय के रूप में तैयार किया जाएगा। यही नहीं, सरकार की ओर से निर्धारित तीसरी संस्था प्ररेक विद्यालयों के बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। संस्था की जांच में खरा उतरने के बाद उसे प्ररेक विद्यालय व जनपद का खिताब दिया जाएगा। इसके अलावा यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्ररेक शिक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश की योगी सरकार प्रतिबद्धता से काम कर रही है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों की भाषा व गणित में दक्षता बढ़ाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान की शुरूआत की गई है। बच्चों को आधारभूत लर्निंग कौशल बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है।


अपर मुख्य सचिव की ओर से इसे लेकर दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए है। कक्षा एक से तीन तक छात्रों की दक्षता की पहचान 14 बिन्दुओं पर की जाएगी जबकि कक्षा 4 व 5 के छात्रों की दक्षता की पहचान 16 बिन्दुओं पर होगी। इन बिन्दुओं के हिसाब से शिक्षकों को छात्रों को तैयार करना होगा। शिक्षक के प्ररेक विद्यालय घोषित करने के बाद तीसरी संस्था बच्चों की दक्षता की जांच करेगी। 

छह महीने में ब्लाक को बनाना होगा प्रेरक ब्लाक
जनपद के परिषदीय स्कूलों में इस योजना को ब्लाक स्तर पर चलाया जाएगा। बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार के मुताबिक पहले ब्लाक के एक विद्यालय को प्ररेक विद्यालय के रूप में डेवलप किया जाएगा। इसी तर्ज पर पूरे ब्लाक के विद्यालय प्ररेक विद्यालय के रूप में डेवलप होंगे। एक ब्लाक पूरा होने के बाद दूसरे ब्लाक में इस योजना को शुरू किया जाएगा। प्ररेक ब्लाक बनाने के लिए शिक्षकों को 6 महीने का समय दिया जाएगा। असल में कोराना काल के दौरान करीब 11 महीने तक बच्चों के स्कूल बंद रहे हैं।

प्रदेश के कक्षा एक से पांच तक के परिषदीय विद्यालय एक मार्च से पुन: खुल रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान प्राथमिक विद्यालयों वह बच्चें जो नियमित रूप से इंटरनेट के जरिए पढ़ाई नहीं कर पाए। उनकी दक्षता को बढ़ाने के लिए इस प्रेरणा ज्ञानोत्सव अभियान का चलाया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की ओर से जारी निर्देशों में शिक्षकों को कुछ निर्धारित बिंदुओं पर छात्रों का कौशल जांचना होगा। साथ ही उनको इन्हीं बिन्दुओं के आधार पर छात्रों में लर्निंग कौशल बढ़ाना होगा।

इन बिन्दुओं पर होगा मूल्यांकन
कक्षा 1- छात्र निर्धारित सूची में से 5 शब्द सही से पहचान लेते हैं।
कक्षा 2- छात्र अनुच्छेद को 20 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ लेते हैं व अनुच्छेद को 30 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ लेते हैं।
छात्र छोटे अनुच्छेद को पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।
कक्षा 5- छात्र गणित के बड़े अनुच्छेद को पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं। निर्धारित सूची में से 5 संख्यायें सही से पहचान लेते हैं।
कक्षा 2-  छात्र जोड एवं घटाना (एक अंकीय) के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते है।
कक्षा 3- जोड़ एवं घटाना (हासिल के साथ) के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं। गुणा के 75 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।
कक्षा 5- छात्र भाग के 15 प्रतिशत प्रश्नों को सही हल कर पाते हैं।

Monday, February 1, 2021

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा।


नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की छिड़ी मुहिम में अब सभी का जोर शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती देने पर है। फिलहाल इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्धारित मानकों के साथ अब समय की भी एक रेखा खींच दी है।


वर्ष 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अब नैक के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके तहत उन्हें नैक के कुल स्कोर में से आधे से ज्यादा स्कोर हासिल करना होगा। यूजीसी ने यह पहल ऐसे समय की है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की मुहिम तेजी से चल रही है। 


वैसे भी नीति के अमल के अगुवा उच्च शिक्षण संस्थान ही बने हुए है। ऐसे में यूजीसी का पूरा फोकस नीति के अमल के साथ गुणवत्ता के मोर्चे पर भी संस्थानों की मजबूती देने को लेकर है। यही वजह है कि यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से शैक्षणिक गुणवत्ता को समय रहते दुरुस्त करने को कहा है। साथ ही नैक रैकिंग के मानकों के आधार पर अपने परखने को कहा है।

Thursday, January 14, 2021

विषयवार शिक्षकों की तैयार होगी कुंडली, पढ़ाई की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा मूल्यांकन

विषयवार शिक्षकों की तैयार होगी कुंडली, पढ़ाई की गुणवत्ता पता लगाने के लिए होगा मूल्यांकन


वाराणसी। आम तौर पर स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम का ही मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन अब उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की सफलता का भी मूल्यांकन कराया जाएगा। पिछले तीन साल में किस शिक्षक के पढ़ाए छात्रों ने बोर्ड परीक्षा में संबंधित विषय में कितने प्रतिशत सफलता अर्जित की है, अब इसकी सूची नए सिरे से तैयार कराई जा रही है। नई व्यवस्था के मुताबिक 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले शिक्षकों की सूची शासन को भेजी जाएगी।



जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत यूपी बोर्ड के करीब 400 विद्यालय हैं। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के करीब सवा दो लाख छात्र- छात्रा पढ़ाई करते हैं। इसमें करीब एक लाख परीक्षार्थी हाईस्कूल, इंटर में हर साल परीक्षा देते हैं। पिछले तीन सालों से बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्रा सफल भी हो रहे हैं। 


जब परिणाम जारी होता है तो विद्यालयों की ओर से अपने वहां परिणाम शत प्रतिशत होने का दावा भी किया जाता है। यहीं नहीं शिक्षा विभाग में भी इसकी जानकारी दी जाती है। अब इन दावों की हकीकत का पता लगाने के लिए ही बोर्ड ने अपने स्तर से जांच कराने का निर्णय लिया है। इसमें विषय के शिक्षकों की भी कुंडली तैयार कराई जा रही है । विषयवार शिक्षकों के परीक्षा परिणाम के बारे में जो जानकारी मांगी गई है।


शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ ही शिक्षकों को जिम्मेदारियों का सजगता पूर्वक निर्वहन कराने की दिशा में पहली बार इस तरह की पहल की गई है इससे शिक्षकों की विषय के प्रति रूचि तो बढ़ेगी ही,सबसे अधिक लाभ छात्रों को मिलेगा। - डॉ. विजय प्रकाश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

Tuesday, December 29, 2020

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर


विश्वविद्यालयों और कालेजों की तरह देश भर के सभी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर और उनकी गुणवत्ता भी एक जैसी हो, तो कैसा होगा। फिलहाल यह सवाल अभी तो दूर की कौड़ी लाने जैसा है, लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तेजी से लागू करने की मुहिम से जुड़े शिक्षाविदों और अब सरकार का जो रुख है, उनमें यह राह आसान होते दिखाई दे रही है। हालांकि इसके लिए नीति में अलग-अलग कई कदमों को उठाए जाने का प्रस्ताव है, लेकिन इसके अमल के दौरान एक ऐसा सुझाव भी आया है, जो नीति में नहीं है, लेकिन सभी को पसंद आ रहा है। इसमें यूजीसी तर्ज पर देश भर के स्कूलों की गुणवत्ता और स्टैंडर्ड को एक जैसा बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आयोग बनाने का सुझाव है।


खास बात यह है कि नीति के अमल की शुरुआती चर्चा में इस सुझाव को गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षाविद इसे लेकर एकजुट हो रहे हैं, उसमें अब सरकार के स्तर पर भी इसे लेकर विमर्श शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर राज्यों की भी राय ली जा रही है। साथ ही इसे लेकर जल्द कोई फैसला ले सकती है। हालांकि इस पूरी मुहिम के साथ खड़े शिक्षाविदों के मुताबिक इसके अमल में कोई दिक्कत नहीं है। वैसे भी इस आयोग के गठन का उद्देश्य राज्य के विषयों और अधिकारों में कोई हस्तक्षेप करने का भी नहीं है। यह सिर्फ स्कूलों की गुणवत्ता और उसका देश भर के समान स्टैंडर्ड बना रहे, इसे लेकर काम करेगा। स्कूलों के संचालन का पूरा अधिकार पहले की तरह राज्यों के पास ही होगा।

यह ठीक यूजीसी की तरह ही काम करेगा। इसका संचालन राज्यों की ओर से किया जाता है, लेकिन उसके स्टैंडर्ड यानी शिक्षकों की योग्यता, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन कैसा होगा इसके नियम यूजीसी तय करता है। इसी तरह से पढ़ाई का स्तर भी वह निर्धारित करता है।

Thursday, December 24, 2020

सिसोदिया से बहस को हमारे बीएसए ही काफी, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री, जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के दिए संकेत

सिसोदिया से बहस को हमारे बीएसए ही काफी,  बोले बेसिक शिक्षा मंत्री, जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के दिए संकेत



'हम दिल्‍ली के उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नता मनीष सिसौदिया से अपने प्रदेश के किसी भी जिले के ब्रेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से खुली बहस कराएंगे। दिल्ली में तो कुल 2500 विद्यालय हैं। हमारे यहां ता एक जिले में हीं 2500 विद्यालय हैं। सिसोदिया के साथ बहस के लिए हमारे बीएसए ही काफी हैं।' यह बातें प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवदी ने बुधवार को  कही। 


उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में अटल जन्मोत्सव सप्ताह के तहत आयोजित “लोकतांत्रिक मूल्य और भारतीय राजनीति' विषयक राष्ट्रीय संगांष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि सिसोदिया क्‍या बहस करेंगे ? उनको बहस के लिए तो किसी भी जिले का बीएसए ही काफी है। महानगर (दिल्ली) में तो केवल 2500 विद्यालय हैं, यहां 160 लाख विद्यालय हैं। 


सिसोदिया को लखनऊ में रोके जाने के आरोप को भी उन्होंने खारिज कर दिया। बोले-बंधड़क कोई मंत्री आता है और सवाल करता है। चुनौती देता है, आलोचना करता है फिर बिना किसी ब्राधा वापस भी चला जाता है, इससे अधिक कैसी आजादी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में शिक्षकों के जनपदीय तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के संकेत दिए। मनीष सिसौदिया ने प्रदेश सरकार के मंत्री एवं प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह को शिक्षा की स्थिति और दिल्‍ली के केजरीवाल मॉडल बनाम योगी के उत्तर प्रदेश मॉडल पर बहस की चुनौती दी थी।

Thursday, December 10, 2020

दो साल में कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देंगे बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल : सीएम योगी

दो साल में कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देंगे बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल : सीएम योगी


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा परिषद के सभी प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प करने की समयसीमा निर्धारित कर दी है। ये स्कूल अगले दो वर्ष में यानी 2022 तक कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने लगेंगे।


गौरतलब है कि प्रदेश में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.59 लाख प्राइमरी स्कूलों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके 14 मानक तय किए गए हैं। पहले चरण में सभी स्कूलों में 10 मानकों पर काम किया जाएगा। शेष चार मानकों को पूरा करने के लिए विभाग ने मार्च 2022 तक का लक्ष्य रखा है।
प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 2021-22 से परिषदीय विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने जा रही है। प्रदेश में 16 हजार स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम किया गया है। इन स्कूलोें में नियुक्त शिक्षकों को स्पोकन इंग्लिश का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। स्कूलों में पुस्तकालय, रीडिंग कॉर्नर, प्रोजेक्टर आदि की व्यवस्था कराई जा रही है।


परिषद के स्कूलों में अगले साल लगभग 50 हजार सहायक अध्यापकों को भर्ती करने की तैयारी है। इनकी भर्ती के बाद स्कूलों में शिक्षकों की कमी नहीं रहेगी बल्कि एक लाख 20 हजार से ज्यादा शिक्षामित्र अतिरिक्त उपलब्ध रहेंगे। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि स्कूलों में जो जरूरी माहौल है, कायाकल्प ऑपरेशन के जरिए उसे देने का प्रयास कर रहे हैं।

Friday, November 20, 2020

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी।


उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को परखने के लिए आने वाले दिनों में अब क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) और टाइम्स जैसी रैकिंग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। देश में इसी तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों के विश्वस्तरीय रैकिंग की एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था बनेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके आकलन का फामरूला भारतीय शिक्षा पद्धति के मापदंडों के अनुरूप होगा। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक रैकिंग के लिए क्यूएस और टाइम्स जैसी दो ही एजेंसियां हैं। दोनों ही बिटिश मूल की हैं।


क्यूएस और टाइम्स जैसी रैकिंग करने वाली एजेंसियों पर ‘धारणा’ के आधार पर भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का आकलन करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कोई और नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रलय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से लगाए गए थे। यही वजह थी कि 2020 की टाइम्स रैकिंग में आइआइटी बांबे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे देश के सात प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने विरोध स्वरूप इस रैकिंग में शामिल होने से इन्कार कर दिया।



जेएनयू में चार वर्ष का होगा स्नातक पाठ्यक्रम!

नई दिल्ली : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्नातक पाठयक्रम की समयावधि चार वर्ष करने पर बढ़ रहा है। गुरुवार को विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए कमेटी गठित करने व स्नातकोत्तर की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराने पर मंथन हुआ।