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Thursday, October 29, 2020

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लिए न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। 


प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित है। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित समिति में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके. तनेजा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को सदस्य बनाया है। प्रत्येक संकाय के लिए पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी भी गठित की गई है। 

फतेहपुर : नीति आयोग के पांच करोड़ से होगा 54 विद्यालयों का कायाकल्प, जिलाधिकारी के प्रस्ताव को राज्य सरकार से मिली मंजूरी

फतेहपुर : नीति आयोग के पांच करोड़ से होगा 54 विद्यालयों का कायाकल्प, जिलाधिकारी के प्रस्ताव को राज्य सरकार से मिली मंजूरी।

फतेहपुर :  जिला प्रशासन नगर पालिका क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलकर शैक्षिक व्यवस्था की सीरत बदलने की तैयारी में है। सूबे के पिछड़े हुए जनपदों में तेजी विकास कर चैंपियन ऑफ चेंज का खिताब पा चुके फतेहपुर जनपद को नीति आयोग से पांच करोड़ की धनराशि मिलनी है। इसी रकम से जिलाधिकारी संजीव सिंह ने नगर पालिका क्षेत्र के समस्त 54 परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसे शासन ने मंजूरी दे दी है। टाइल्स लगी हुई फर्श, रनिंग वॉटर सप्लाई के साथ चमचमाते हुए शौचालय, हैंडवॉश की व्यवस्था, चारों ओर बाउंड्रीवाल, किचन, पेयजल की व्यवस्था, निःशक्त बच्चों के लिए रैंप और रेलिंग से लेकर ई-एजूकेशन के साथ हर वह सुविधा जो आपको बड़े बजट वाले प्राइवेट विद्यालयों में देखने को मिलेंगी, वह सारी सुविधाएं शहर क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में मिलेंगी। गरीब घर के बच्चों को स्कूल में वह सुविधाएं मिल सकें। जो सामान्य घर के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में मुहैया कराई जाती हैं। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों का बजट के अभाव में कायाकल्प नहीं हो पाता है।

इस कारण से नीति आयोग को शहर क्षेत्र के विद्यालयों का कायाकल्प कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव को प्रदेश शासन से स्वीकृति मिल गई है और राज्य सरकार से प्रस्ताव केंद्र सरकार में नीति आयोग को भेजा गया है।


ग्रामीण क्षेत्र आने वाले परिषदीय विद्यालयों में ग्राम पंचायतों के राज वित्त और चौदहवें वित्त से कायाकल्प हो जाता है।

नगर क्षेत्र के विद्यालयों में बजट के अभाव में काम नहीं हो पाता। इसलिए नीति आयोग के फंड से शहरी क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प कराए जाने का निर्णय लिया। इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा। संजीव सिंह, जिलाधिकारी

कानपुर विवि : बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के 20 हजार छात्र छात्राएं होंगे प्रमोट

कानपुर विवि : बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के 20 हजार छात्र छात्राएं होंगे प्रमोट

 
कानपुर : छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय परिसर व संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के छात्र छात्रएं इस वर्ष प्रमोट किए जाएंगे। इसके लिए महाविद्यालयों से छात्र छात्रओं के आंतरिक परीक्षा के अंक मंगाए जाएंगे। उन अंकों को जोड़कर विश्वविद्यालय से संबद्ध 260 से अधिक बीएड व एमएड कॉलेजों प्रथम वर्ष के करीब 22 हजार छात्र छात्रओं को प्रमोट किया जाएगा।


इन छात्र छात्रओं को प्रमोट करने के बाद इनका मूल्यांकन द्वितीय वर्ष की परीक्षा के आधार पर होगा। बीएड व एमएड द्वितीय व अंतिम वर्ष की परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर उन्हें औसत अंक देकर उनकी डिवीजन तय होगी। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता की अध्यक्षता में बुधवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कोरोना वायरस से बचाव के लिए हुए लॉक डाउन के कारण बीएड व एमएड प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं हो पाई थीं। पिछले सात माह से बीएड व एमएड प्रथम वर्ष के छात्र छात्रएं अगली कक्षा में जाने का इंतजार कर रहे थे।

कोविड ने बढ़ाई स्कूली बच्चों की स्मार्टफोन तक पहुंच, असर 2020 की रपट से हुआ खुलासा

कोविड ने बढ़ाई स्कूली बच्चों की स्मार्टफोन तक पहुंच, असर 2020 की रपट से हुआ खुलासा

 
लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण स्कूल बंद होने से ऑनलाइन शिक्षा के तकाजे से स्कूली बच्चों की पहुंच स्मार्टफोन तक बढ़ी है। यह तथ्य बुधवार को जारी हुई ऐनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) की वर्ष 2020 की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। सर्वेक्षित आयुवर्ग के बच्चों में 53.8 फीसद उन परिवारों के थे जिनके पास स्मार्टफोन है और ऐसे 54 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं।


इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए सितंबर के दौरान देश के 30 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों में फोन के जरिये सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में उप्र के 2096 गांवों के 5912 परिवारों और पांच से 16 वर्ष के 7882 बच्चे भी शामिल थे। रिपोर्ट में पाया गया कि वर्ष 2018 की तुलना में 2020 में बच्चों की स्मार्टफोन तक पहुंच बढ़ी है। वर्ष 2018 में सरकारी स्कूलों के 19.8 फीसद और निजी स्कूलों के 38.9 फीसद बच्चों की पहुंच स्मार्टफोन तक थी। वर्ष 2020 में सरकारी स्कूलों के 44.9 फीसद और निजी स्कूलों में पढऩे वाले 64.2 फीसद बच्चों की स्मार्टफोन तक पहुंच थी।


सर्वेक्षण अवधि के दौरान सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 61 फीसद बच्चों को वाट्सएप, 14 प्रतिशत को फोन कॉल के जरिये लर्निंग मैटीरियल मिला जबकि निजी स्कूलों के 83.6 प्रतिशत बच्चों को वाट्सएप और 6.4 प्रतिशत को फोन कॉल के जरिये शिक्षण सामग्री मुहैया करायी गई।

नहीं हो रही छात्रों की केवाईसी, अधर में छात्रों की छात्रवृति, पांच हजार शिक्षण संस्थानों ने नहीं कराया पंजीकरण

नहीं हो रही छात्रों की केवाईसी, अधर में छात्रों की छात्रवृति, पांच हजार शिक्षण संस्थानों ने नहीं कराया पंजीकरण।


बार-बार चेतावनी के बाद भी पांच हजार से अधिक शिक्षण संस्थानों ने नहीं कराया पंजीकरण।

प्रयागराज :  शिक्षण संस्थाओं की उपेक्षा से हजारों अल्पसंख्यक छात्र छात्राओं के छात्रवृत्ति से वंचित होने का खतरा बन गया है। मंडलायुक्त और सीडीओ की बैठकों में लगातार चेतावनी के बावजूद पांच हजार से अधिक संस्थानों ने अभी तक केवाईसी ही अपडेट नहीं की है। जबकि, इसके लिए मात्र तीन दिन बचे हैं।


केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक विभाग की प्री-मेट्रिक, पोस्ट मैट्रिक तथा मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति के लिए छात्र-छात्राओं की केवाईसी अपडेट कराना अनिवार्य है। इसके विपरीत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर जिले के 6768 संस्थान रजिस्टर्ड हैं। इनमें से मात्र 1382 संस्थाओं ने ही केवाईसी अपडेट कराई है। इस तरह से 5387 शिक्षण संस्थानों ने केवाईसी अपडेट नहीं की है और इन स्कूल-कालेज के हजारों विद्यार्थियों के सामने छात्रवृत्ति के साथ आगे की पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया है। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी शिव प्रकाश तिवारी ने बताया कि छात्रवृत्ति के लिए केवाईसी अपडेट करने की आखिरी तारीख 31 अक्तूबर है। इससे पहले ऑनलाइन केवाईसी अपडेट करने के साथ डाटा विकास भवन स्थित कार्यालय में भी जमा करना है।

मदरसा : पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत, अंकपत्र और प्रमाणपत्र में विरोधाभास।

मदरसा : पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत, अंकपत्र और प्रमाणपत्र में विरोधाभास।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों के नामों को लेकर विवाद की नौबत पैदा हो गई है। परिषद द्वारा संचालित मुंशी / मौलवी और आलिम के पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा के बाद जो अंकपत्र और प्रमाण पत्र जारी किये गये उन पर मुंशी, मौलवी, आलिम के बजाए सीनियर सेकेण्ड्री अंकित किया गया। इस बदलाव की वजह से परिषद की परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं के समक्ष कई दिक्कतें पैदा हो रही हैं।

इस बाबत मदरसा शिक्षकों के संगठन आल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महामंत्री वहीदुल्लाह खान ने परिषद के रजिस्ट्रार आर. पी. सिंह को एक पत्र भी लिखा है । पत्र में कहा गया है कि शासनादेश-विभागीय आदेश में स्पष्ट तौर पर माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा मुंशी, मौलवी को हाईस्कूल तथा आलिम के पाठ्यक्रम को इण्टर के बराबर दर्जा दिया गया है। 1995 के एक अन्य आदेश में कहीं भी सेकेण्ड्री या फिर सीनियर सेकेण्ड्री का जिक्र नहीं है । माध्यमिक शिक्षा का उक्त आदेश ही केंद्र अथवा राज्य सरकार के सभी विभागों, कालेजों और सभी राज्य या केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में उपलब्ध है।


पत्र में कहा गया है कि कार्मिक विभाग द्वारा सभी विभागों को सेवाओं के संबंध में प्रमाण-पत्र की समकक्षता के लिए मुंशी, मौलवी को हाईस्कूल और आलिम को इण्टर के समकक्ष मानने के आदेश जारी किये गये हैं। आदेश में उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परीक्षा या प्रमाण पत्र में सेकेण्ड्री या हायर सेकेण्ड्री का कोई उल्लेख नहीं है। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 30 जनवरी 2009 और केंद्रीय कार्मिक विभाग के 23 फरवरी 2010 में सीबीएसई/ आईसीएसई की सेकेण्ड्री, हायर सेकेण्ड्री की समकक्षता मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परीक्षा मुंशी, मौलवी तथा आलिम को ही दी गयी है।


अंक पत्र और प्रमाण पत्र में विरोधाभास 

उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा परीक्षाओं के नाम में बदलाव से परिषद द्वारा जारी वर्ष 2020 से पूर्व की परीक्षाओं के अंक पत्र और प्रमाण पत्र और वर्ष 2020 में जारी अंक पत्र व प्रमाण-पत्र में विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गयी है। संगठन की ओर से इस बारे में शासन की ओर से स्पष्ट संशोधन आदेश जारी किये जाने की मांग की गयी है। ताकि मुंशी, मौलवी और आलिम की परीक्षाओं के अंक पत्र और प्रमाण पत्र, सेकेण्ड्री और हायर सेकेण्ड्री के समतुल्य हर विभाग या प्रतिष्ठान में मान्य किए जाएं।

यूपी : बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने का सुझाव

यूपी :  बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने का सुझाव

 
लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स ने प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और प्राविधिक शिक्षा विभाग को एक मंच पर लाने का सुझाव दिया है। टास्क फोर्स ने स्नातक और स्नातकोत्तर में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने और एकेडमिक क्रेडिट बैंक की स्थापना का सुझाव दिया है।


बुधवार को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित टास्क फोर्स की बैठक में शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर आए सुझावों पर मंथन किया गया। बैठक में उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा को सहज, सरल, सर्वसुलभ एवं रोजगारपरक बनाने के लिए तैयार कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया।


 उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम निर्धारण, प्रवेश प्रक्रिया तथा एकेडमिक क्रेडिट बैंक की स्थापना, कौशल विकास को उद्योगों से जोड़ने, संबद्धता की व्यवस्था समाप्त कर महाविद्यालयों को स्वायत्तता देने और नैक का मूल्यांकन पर सुझाव दिए। डॉ. निशी पांडेय ने बहुभाषोय विवि को स्थापना के लिए तैयार मसौदे का प्रस्तुताकरण दिया। बैठक में राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. गिरीशचंद्र त्रिपाठी, प्राविधिक एवं व्यवसायिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव एस. राधा चौहान, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला उपस्थित थे।

बदलेगा परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने का तौर तरीका - स्कूल शिक्षा महानिदेशक

बदलेगा परिषदीय स्कूलों में पढ़ाने का तौर तरीका - स्कूल शिक्षा महानिदेशक

 
लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाने के तौर-तरीके में बदलाव देखने को मिलेगा। बच्चों को पढ़ाने के लिए पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पाठ्यपुस्तकों और हस्तपुस्तिकाओं का इस्तेमाल तो जारी रहेगा, लेकिन कक्षा एक से तीन तक के बच्चे भाषाई कौशल और गणितीय दक्षता सरलता और रुचिकर गतिविधियों के माध्यम से हासिल कर सकें, अब कक्षा शिक्षण में जोर इस पर होगा।


 इसके लिए स्कूलों और शिक्षकों को नई शिक्षण सामग्री भी मुहैया करायी जा रही है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि शिक्षण संग्रह में पढ़ाने की तकनीक में वृद्धि के लिए जरूरी गतिविधियों का इस्तेमाल बताया गया है।

Wednesday, October 28, 2020

फतेहपुर : कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री के माध्यम से "शिक्षण संबंधी परिणाम" की सम्प्राप्ति से सम्बन्धित ऑनलाइन प्रतियोगिता के सम्बन्ध में

फतेहपुर : कला, क्राफ्ट एवं पपेट्री के माध्यम से "शिक्षण संबंधी परिणाम" की सम्प्राप्ति से सम्बन्धित ऑनलाइन प्रतियोगिता के सम्बन्ध में।

फतेहपुर : चतुर्थ राज्य स्तरीय कहानी सुनाने की प्रतियोगिता के सम्बन्ध में

फतेहपुर : चतुर्थ राज्य स्तरीय कहानी सुनाने की प्रतियोगिता के सम्बन्ध में।

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

सॉल्वर गैंग से बन बैठे शिक्षा माफियाओं की संपत्तियों पर एसटीएफ की नजर, 69000 भर्ती फर्जीवाड़े में चल रही जांच

 
69000 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी सॉल्वर गैंग से नकल माफिया बन गए। फिर शिक्षा माफिया बंनकर स्कूल-कॉलेज खोल लिए। अपने ही कॉलेजों में परीक्षाओं का सेंटर कराकर फर्जीवाड़ा करने लगे। इस फर्जीवाड़ा गैंग से जुड़े आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा दर्जहोने के बाद अबएसटीएफ आरोपियों की अवैध संपत्तियों की जांच कर रही है। अब आरोपियों के ऐसे स्कूल कॉलेजों की सूची बना रही है जो अवैध कमाई से बनाए गए हैं। 


69000 सहायक शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने के मामले में अभ्यर्थी राहुल सिंह ने डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस केस की जांच कर रही एसटीएफ डॉ. केएल पटेल, स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव समेत 20 के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। 12 आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। 


अब इनकी अवैध कमाई को पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क करने की वाली है। इनकी अवैध संपत्तियों की जांचमें जुटी एसटीएफ को पता चला कि डॉ.केएल पटेल, ललित त्रिपाठी, चंद्रमा यादव और शिवदीप समेत अन्य कई आरोपियों ने अपने स्कूल-कॉलेज भी खोल लिए हैं। जांच चल रही है कि इन कॉलेजों को काली कमाई से तो नहीं बनाया गया है।

69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति न मिलने के विरोध में निकाला प्रोटेस्ट मार्च

69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति न मिलने के विरोध में निकाला प्रोटेस्ट मार्च


परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 69000 पदों के सापेक्ष 31277 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के विरोध में अभ्यर्थी लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को अभ्यर्थियों ने चंद्रशेखर आजाद पार्क में बैठक की।

उसके बाद वहां से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। उसके बाद वह प्रदेश सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए शिक्षा निदेशालय पहुंचे और उप सचिव या भूषण चतुर्वेदी को ज्ञापन । उनकी मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द नियुक्ति दी जाए। इस मौके पर दिनेश सिंह यादव, रवींद्र यादव, बढ्री प्रसाद शुक्ल, अभेंद्र, विकास मिश्र आदि मौजूद रहे।

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

 
प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड चंद्रमा यादव समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने मंगलवार शाम को सभी के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। एसटीएफ ने करीब एक हजार पन्ने की केस डायरी तैयार की है।


जून 2020 को इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था। पहले सोरांव पुलिस ने इसकी विवेचना शुरू की, लेकिन प्रकरण ने तूल पकड़ा तो विवेचना एसटीएफ को दे दी गई। गिरोह के सरगना पूर्व जिपं सदस्य डॉ. केएल पटेल, तीन अभ्यर्थी समेत 12 लोगों को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन सभी के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसी मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रमा को करीब 20 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। उसके कई और साथियों को भी पकड़कर जेल भेजा गया। 


चंद्रमा यादव पुत्र बर्फी लाल धूमनगंज थाना क्षेत्र के टीपी नगर गंगा बिहार कॉलोनी का रहने वाला है। वह टीपी नगर में पंचम लाल आश्रम इंटर कॉलेज का संचालन चंद्रमा यादव करता है। लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर उसके स्कूल में बनाया जाता है। ज्यादा पैसा कमाने के लालच में वह कुछ साल पहले ललित त्रिपाठी के जरिए गिरोह के सरगना डॉ. केएल पटेल और मायापति से मिला था। फिर गिरोह के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करने लगा। सोरांव में जब उसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया तो फरार हो गया था।


 एडिशनल एसपी एसटीएफ नीरज पांडेय का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद चंद्रमा यादव, भदोही के मायापति दुबे, प्रतापगढ़ के दुर्गेश पटेल व प्रयागराज के शिवदीप सिंह, सत्यम, शैलेष, संदीप पटेल, दुर्गेश सिंह और अर¨वद पटेल के खिलाफ भी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।

फतेहपुर : शहर के पास वाले स्कूलों में पढ़ा सकेंगे पुरुष शिक्षक, बेसिक शिक्षा विभाग में अगड़े-पिछड़े ब्लॉकों का मानक किया गया खत्म

फतेहपुर : शहर के पास वाले स्कूलों में पढ़ा सकेंगे पुरुष शिक्षक, बेसिक शिक्षा विभाग में अगड़े-पिछड़े ब्लॉकों का मानक किया गया खत्म।

फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग में अगड़े-पिछड़े ब्लॉकों का मानक खत्म हो गया है। इस बार शहर के करीब रहने वाले अगड़े ब्लाकों में महिला व विकलांगों के अलावा पुरुष शिक्षकों की भी नियुक्ति होगी। हालांकि रोस्टर के हिसाब से पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जिले के कुल तेरह ब्लॉकों में 1903 परिषद के प्राथमिक स्कूल हैं। इनको बेसिक शिक्षा विभाग ने अगड़े और पिछड़े दो श्रेणियों में बांट रखा है। नगर के करीब वाले अगड़े ब्लाकों में अभी तक निःशक्त और महिला शिक्षकों को ही पहली नियुक्ति मिलती थी। पुरुष शिक्षकों का सिर्फ नगर से दूर पिछड़े ब्लाकों में नियुक्ति दी जाती थी। ऐसे में पिछड़े आठ ब्लाकों के अधिकांश प्राथमिक स्कूल सहायक अध्यापकों से संतृप्त हो चुके हैं। अगड़े ब्लाकों के स्कूलों में अभी तक बड़ी संख्या में सहायक अध्यापकों के पद रिक्त हैं।


ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग ने नई नियुक्ति के मानक में परिवर्तन कर दिया है। अब पुरुष शिक्षकों की नियुक्ति का मानक किसी भी ब्लॉक के रिक्त स्कूल में कर दिया गया है। बीएसए ने रिक्तियों वाले 565 प्राथमिक स्कूलों की सूची आनलाइन अपलोड कर शासन को भेज दी है, जिसमें छात्र और शिक्षक संख्या अंकित है। छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की रिक्तियां तैयार कर शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। डायट में होने वाली दो दिनी काउंसलिंग में पहले दिन 29 अक्तूबर को निःशक्त महिला और फिर निःशक्त पुरुष अभ्यर्थियों को आनलाइन सूची में स्कूल चयन करने का मौका मिलेगा। इसके बाद मैरिट की वरिष्ठता क्रम से महिला शिक्षक स्कूल का चयन करेंगी। यह प्रक्रिया 30 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे तक चलेगी इसके बाद 350 पुरुष शिक्षकों को तय रोस्टर से स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। अगले दिन 31 अक्तूबर को सभी नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे।

▪️👉🏻 यह हैं पिछड़े ब्लाक:- धाता, ऐरायां, हथगाम, विजयीपुर, हसवा, असोथर, देवमई, अमौली। 

▪️👉🏻 यह हैं अगड़े ब्लाकः- खजुहा, मलवां, बहुआ, तेलियानी, भिटौरा।


तीस छात्र संख्या पर एक शिक्षक : बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार आरटीई के मानक से स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति होगी। स्कूलों में प्रति 30 छात्रों पर एक शिक्षक नियुक्त होगा। 31 छात्र संख्या होने पर दूसरे शिक्षक का पद सृजन हो जाएगा। इसी तरह से 60 छात्र संख्या तक दो शिक्षकों के पद होंगे और 61 छात्र संख्या होने पर तीसरा पद सृजित हो जाएगा। यही सिलसिला आगे भी चलता रहेगा।


फतेहपुर : नव नियुक्त शिक्षकों को ऑनलाइन आवंटित होंगे विद्यालय, मनचाहा विद्यालय पाने के जुगाड़ के रास्ते बन्द।

फतेहपुर : जिले में तैनाती पाने वाले 475 नवनियुक्त शिक्षकों की जुगाड़ से मनचाहा स्कूल पाने की तमन्ना धरी की धरी रह गई। इस बार ऑनलाइन प्रक्रिया से स्कूलों को आवंटन होने से जुगाड़ के सारे रास्ते बंद हो गए हैं।


शासन से बनाए गए साफ्टवेयर के जरिए ही शिक्षकों को स्कूल आवंटित होंगे। 29 अक्तूबर को सभी दिव्यांग महिला व पुरुषों के साथ दूसरी सभी महिला अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होगी। 30 अक्तूबर को शेष बचने वाले अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग प्रक्रिया में प्रतिभाग कराया जाएगा। वहीं पुरुष शिक्षकों को मनचाहा स्कूल चुनने का कोई आप्शन नहीं है। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत रोस्टरके अनुसार ही उन्हें स्कूल आवंटित होंगे। विभाग का दावा इस कार्रवाई से पूरी प्रक्रिया के पारदर्शी ढंग होगी। बीएसए शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रहेगी। इसमें में प्रशासनिक अधिकारियों की भी निगरानी रहेगी। काउंसिलिंग प्रक्रिया डायट परिसर में कराई जाएगी।

यूपी बोर्ड : स्क्रूटनी परिणाम घोषित, बोर्ड की वेबसाइट पर देखें परिणाम

यूपी बोर्ड : स्क्रूटनी परिणाम घोषित, बोर्ड की वेबसाइट पर देखें परिणाम।

प्रयागराज :  यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का स्क्रूटनी का परिणाम घोषित कर दिया गया है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल की ओर से जारी परिणाम में कहा गया है कि बोर्ड के पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, मेरठ, बरेली, वाराणसी एवं गोरखपुर को मिले कुल 32084 आवेदनों में से 5653 के परिणाम में स्क्रूटनी के बाद बदलाव किया गया है। हाईस्कूल में कुल 7813 आवेदनों में से 1298 के परिणाम में बदलाव किया गया है, जबकि इंटरमीडिएट में मिले कुल 24,271 आवेदनों में से 4355 के परिणाम में बदलाव हुआ है। 


संशोधित परिणाम यूपी बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर जारी कर दिया गया है। क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज के अपर सचिव शिव प्रकाश द्विवेदी की ओर से जारी परिणाम में हाईस्कूल में मिले 2335 आवेदनों में 268 एवं इंटरमीडिएट में मिले 7896 आवेदनों में 1105 परीक्षार्थियों के अंकों में परिवर्तन किया गया है।


तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

लखनऊ : नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम करने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति व यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक किया जाएगा। इसकी अध्यक्ष विभागीय अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग होंगी। वहीं हर संकाय के लिए भी सुपरवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है।


यह कमेटी प्रो. सुरेन्द्र दुबे द्वारा संस्तुत किए गए विषयों के पाठ्यक्रमों को नवम्बर 2020 तक पुर्नसंयोजित करेगी। अन्य विषयों के पाठ्यक्रम 15 जनवरी 2021 तक तैयार किए जाने हैं।


राज्य स्तरीय समिति में लखनऊ विवि की भौतिक विज्ञान की विभागाध्याक्ष प्रो. पूनम टण्डन, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के सांख्यिकी विभाग के प्रो हरेकृष्ण, मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बादलपुर के एसो. प्रोफेसर दिनेश चन्द्र शर्मा सदस्य होंगे। ये कमेटी पाठ्यक्रम समयबद्ध रूप से तैयार हो, इसके लिए प्रभावी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए भी कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटयां हर विषय का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन करेगी और उसकी मॉनिटरिंग करते हुए समयसीमा तक पाठ्यक्रम तैयार करवाएगी।

Tuesday, October 27, 2020

हाथरस : विद्यालयों में कायाकल्प पर सीडीओ महोदय की अध्यक्षता में आहूत बैठक दिनाँक 23 अक्टूबर 2020 का कार्यवृत्त जारी, देखें

हाथरस : विद्यालयों में कायाकल्प पर सीडीओ महोदय की अध्यक्षता में आहूत बैठक दिनाँक 23 अक्टूबर 2020 का कार्यवृत्त जारी, देखें







हाथरस : समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्र0अ0 का नोडल अधिकारी के रूप में KYC कराये जाने के सम्बन्ध में

हाथरस : समस्त परिषदीय विद्यालयों के प्र0अ0 का नोडल अधिकारी के रूप में KYC कराये जाने के सम्बन्ध में



हाथरस : पंचायत चुनाव बीएलओ के साथ सुपरवाइजर को भी मिली विद्यालय में उपस्थिति से छूट, आदेश देखें

हाथरस : पंचायत चुनाव बीएलओ के साथ सुपरवाइजर को भी मिली विद्यालय में उपस्थिति से छूट, आदेश देखें



शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर

शिक्षकों के मूल्यांकन में भारत छठवें पायदान पर, चीन शीर्ष पर 

 
लंदन। शिक्षकों के मूल्यांकन के मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शुमार हैं। 35 देशों के वैश्विक सर्वे में भारत छठवें पायदान पर है। चीन इस सूची में शीर्ष पर है।


इसके अलावा घाना, सिंगापुर, कनाडा और मलयेशिया भारत से ऊपर हैं। ब्रिटेन की वारके फाउंडेशन के पिछले सप्ताह जारी हु सर्वे के मुताबिक भारत में शिक्षकों को लेकर लोगों में अलग सम्मान है। उनसे जब भी शिक्षकों का जिक्र होता है तो उनके लिए अच्छे विचार ही आते हैं। शिक्षकों को मूल्यांकन करते वक्‍त ज्यादातर लोगों को लगता है कि शिक्षक सबसे भरोसेमंद, बुद्धिमान, बच्चों का ख्याल रखने वाले और प्रेरणास्नोत होते हैं।


वारके फाउंडेशन और ग्लोबल टीचर प्राइज के संस्थापक सनी वारके के मुताबिक रिपोर्ट साबित करती है कि शिक्षकों का सम्मान करना केवल एक महत्वपूर्ण नैतिक कर्तव्य नहीं है जो देश के बेहती शैक्षिक परिणामों के लिए जारूरी है। शैक्षिक परिणामों के लिए आवश्यक है।


कोरोना महामारी के दौर में दुनिया भर के स्कूल व विश्वविद्यालयों के करीब 1.5 बिलियन विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। मौजूदा दौर में सबसे जरूरी है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि दुनिया भर में लोगाें को अच्छे शिक्षक मिलें। यह रिपोर्ट 2018 में 35 देशों के ग्लोबल टीचर स्टेटस इंडेक्स के आंकड़ों पर आधारित है।

प्रयागराज : जांच के लिए 1477 शिक्षकों व कर्मियों की सूची दी जा सकती है एसटीएफ को, 10 नवम्बर तक एक और मौका

प्रयागराज : जांच के लिए 1477 शिक्षकों व कर्मियों की सूची दी जा सकती है एसटीएफ को, 10 नवम्बर तक एक और मौका। 

 
प्रयागराज : परिषदीय विद्यालयों में तैनात 1477 शिक्षक और कर्मचारी अब तक मानव संपदा पोर्टल पर अपने रिकार्ड अपलोड नहीं कराए हैं। इसलिए विभाग को इनके रिकार्ड पर संदेह है और जल्द ही इनकी सूची एसटीएफ को जांच के लिए दी जा सकती है। फिलहाल अर्भी इनका एक मौका दिया जाएगा कि यह अपने रिकार्ड मानव संपदा पोर्टल पर फीड करवा दें। 


दरअसल मानव संपदा पोर्टल पर शैक्षिक प्रमाणपत्र अपलोड करने के बाद कई फर्जी शिक्षक पकड़े गए। उसके बाद जो फर्जी है, वह प्रमाण पत्र अपलोड कराने से बच रहे हैं। प्रमाण अपलोड करने करने लेकर पिछले दिनों शिक्षा निदेशक बेसिक ने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। बताया कि प्रयागराज में कुल 1477 शिक्षकों व कर्मियों न विवरण अभी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि मांडा में 133, सैदाबाद में 137 व जिले के शहरी क्षेत्र में 132 लोगों ने पोर्टल पर विवरण नहीं अपलांड किया। एंसे में संदिग्ध मानते हुए जांच के लिए इनकी सूची एसटीएफ को दी जा सकती है। 


फिलहाल शिक्षकों व कर्मचारियों को अपना विवरण पोर्टल पर अपलोड करने के लिए दस नवंबर तक का समय दिया गया है। इससे पूर्व 28 अक्टूबर को 11 बज शिक्षा निदेशक ब्रेसिक की अध्यक्षता में ऑनलाइन समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी। खंड शिक्षाधिकारी नगर अर्जुन सिंह ने सभी कर्मियों व शिक्षकों को निर्देशित किया है कि जल्द से जल्द मानव संपदा पोर्टल पर विवरण अपलोड करें अन्यथा कार्रवाई की जद में आ जाएंगे।

Monday, October 26, 2020

राज्य स्तरीय राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा वर्ष 2020-21 के ऑनलाइन आवेदन के सम्बंध में सम्पूर्ण जानकारी ( कक्षा 10 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए)

राज्य स्तरीय राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा वर्ष 2020-21 के ऑनलाइन आवेदन के सम्बंध में सम्पूर्ण जानकारी ( कक्षा 10 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए)।

राष्ट्रीय प्रतिभा खोज के अंतर्गत छात्रवृत्ति को ऑनलाइन आवेदन आरंभ: 10 नवंबर तक किया जा सकता है आवेदन।


 
प्रयागराज : राष्ट्रीय प्रतिभा खोज राज्य स्तरीय परीक्षा 2020-21 व राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2021-22 के लिए आवेदन शुरू हो गया है। ऑनलाइन आवेदन 10 नवंबर तक चलेगा। जबकि प्रदेश के समस्त जिलों में 13 दिसंबर को परीक्षा आयोजित होगी। राष्ट्रीय प्रतिभा खोज राज्य स्तरीय परीक्षा 2020-21 के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल से 10वीं में पढ़ने वाले छात्र-छात्रएं आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते हुए एससी व एसटी वर्ग के अभ्यर्थी को 30 रुपये तथा अन्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 50 रुपये शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा।


आरक्षित श्रेणी में आने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के समय ही संबंधित प्रमाणपत्र भी अपलोड करना होगा। अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण का लाभ उन्हें ही मिलेगा, जिनके प्रमाण पत्र में नॉनक्रीमीलेयर का उल्लेख होगा। निदेशक मनोविज्ञानशाला ऊषा चंद्रा ने बताया कि डाक या अन्य किसी माध्यम से भेजे गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


वेबसाइट से मिलेगी जानकारी : राष्ट्रीय प्रतिभा खोज राज्य स्तरीय परीक्षा 2020-21 व राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2021-22 के लिए समस्त जानकारी वेबसाइट  http://entdata.in/ पर उपलब्ध है। इसमें ऑनलाइन आवेदन करने व परीक्षा के संबंध में सभी जानकारी उपलब्ध है।

ऑनलाइन आवेदन का लिंक :  http://www.entdata.in