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Tuesday, May 19, 2026

प्रदेश सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय तो बढ़ाया, लेकिन बकाया देने को तैयार नहीं, एरियर रिव्यू पिटिशन से नाराजगी

प्रदेश सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय तो बढ़ाया, लेकिन बकाया देने को तैयार नहीं, एरियर रिव्यू पिटिशन से नाराजगी 
 

प्रयागराज। प्रदेश सरकार ने परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय तो प्रतिमाह 17 हजार रुपये कर दिया है लेकिन उनके लाखों रुपये का भुगतान करने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने चार फरवरी को अनुदेशकों के मानदेय में एक अप्रैल से वृद्धि करते हुए 2017-18 से बकाया का भुगतान छह महीने में करने का आदेश दिया था। प्रदेश में 2013 से कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्यअनुभव शिक्षा के पद पर कार्यरत 24717 अनुदेशकों में से प्रत्येक को नौ-नौ लाख रुपये से अधिक का बकाया भुगतान होना था।


शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि पहले राज्य सरकार भुगतान करेगी और बाद में केंद्र सरकार से अपने हिस्से की धनराशि प्राप्त करेगी। हालांकि राज्य सरकार ने भुगतान करने की बजाय नौ मार्च 2026 को पुनर्विचार याचिका, सात मई को स्थगन प्रार्थना पत्र तथा 12 मई को संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इनमें मुख्य रूप से बकाया भुगतान में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया गया है। वर्तमान में ये सभी प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

आरटीई के तहत अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति जुलाई 2013 में सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय एवं 11 माह की सेवा शर्तों पर की गई थी। 2016 में मानदेय बढ़ाकर 8470 रुपये किया गया। 2017 में शासन ने 17 हजार रुपये मानदेय निर्धारित किया था लेकिन दिसंबर 2017 में पुनर्विचार के नाम पर पुनः 8470 रुपये ही भुगतान किया जाने लगा और 17 हजार मानदेय नहीं मिल सका। इसके खिलाफ अनुदेशकों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और चार फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था।

मार्च 2017 से 17 हजार रुपये के हिसाब से एरियर पाना हमारा हक है और यह हमें मिलना ही चाहिए। इसके लिए हम राज्य सरकार से भी अनुरोध करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे। -भोलानाथ पांडेय, याचिकाकर्ता

Thursday, May 7, 2026

नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट

नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट

देखें हाईकोर्ट ऑर्डर 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या में कमी के लिए केवल अंशकालिक अनुदेशकों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। अगर किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम हो जाती है तो इसके लिए सभी सभी शिक्षकों को जिम्मेदार माना जा सकता है, सिर्फ अनुदेशकों को नहीं। ऐसे में छात्रों की संख्या में कमी के आधार पर अंशकालिक अनुदेशकों की सेवा का नवीनीकरण न करना मनमाना और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने कानपुर देहात निवासी मनोज कुमार व 57 अन्य की याचिका पर दिया है। 

यह मामला विभिन्न जिलों में कार्यरत उन अंशकालिक अनुदेशकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कला, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए की गई थी।

वर्ष 2013 के शासनादेश के तहत नियुक्त इन अनुदेशकों की सेवाओं को विभाग ने इस आधार पर समाप्त कर दिया था कि संबंधित विद्यालयों में छात्र संख्या 100 के निर्धारित मानक से कम हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि 31 जनवरी 2013 के मूल शासनादेश में नवीनीकरण के लिए छात्र संख्या की कोई अनिवार्य शर्त नहीं जोड़ी गई और संतोषजनक सेवा के बावजूद अनुदेशकों हटाना गलत है। 


हाईकोर्ट ऑर्डर 👇 


Wednesday, April 8, 2026

शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में

शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में 

1.43 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों को मिली राहत

सरकार पर आएगा 1475 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार

8 अप्रैल 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को अब 18 हजार रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुहर लगा दी गई। इस निर्णय को एक अप्रैल से लागू किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय एक मई को शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। 


अभी तक शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को नौ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा था। इस तरह दोनों के मानदेय में 8,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि करने का निर्णय हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर और इस वर्ष 20 फरवरी को विधान सभा में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में दिया जाता रहा है। मानदेय बढ़ने के बाद इस पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय आएगा, जिसे प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अलावा 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका मानदेय पूरी तरह राज्य सरकार देती है। इनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार भी राज्य सरकार उठाएगी।



शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव पर आज लगेगी कैबिनेट की मुहर

07 अप्रैल 2026
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में सुबह 10:30 बजे कैबिनेट की बैठक होगी। इसमें करीब एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों को स्वीकृति मिल सकती है। 

सबसे अहम प्रस्ताव बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत 1.43 लाख शिक्षामित्रों और 25 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने से संबंधित है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाएगा और अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार किया जायेगा। वर्ष 2017 के बाद अब इनका मानदेय बढ़ने जा रहा है। इन्हें एक अप्रैल से बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान की थी।



शिक्षामित्रों को 18 और अनुदेशकों को 17 हजार इसी महीने से : सीएम योगी, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी होगी उपलब्ध 

05 अप्रैल 2026
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय इसी महीने से दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने ये घोषणा वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से स्कूल चलो अभियान के शुभारंभ के मौके पर की। उन्होंने कहा, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।


1.68 लाख शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय

लखनऊः सरकार द्वारा बढ़ाए गए मानदेय का लाभ प्रदेश के 1.68 लाख से अधिक शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों को मिलेगा। बढ़ाए गए मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार हर वर्ष 1480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। दोनों को हर शैक्षिक सत्र में 11 माह के लिए मानदेय का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ने पर 1,262.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा। वहीं 24,781 अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उनके मानदेय की राशि बढ़ने पर 218.07 करोड़ रुपये 1,480 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त खर्च करेगी सरकार सरक बढे मानदेय पर अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा।

Tuesday, February 17, 2026

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। हाल ही में इनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हुई है। 


एक अप्रैल से पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा निशुल्क उपलब्ध होगी। सीएम ने कहा रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया। युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।


शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकारः उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। शिक्षक चाहे बेसिक के हों, माध्यमिक या उच्च शिक्षा केइसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, रसोइयों को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। एक अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा।

Sunday, February 8, 2026

यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी

यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी


प्रयागराज। यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों में एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र 2026-27 से लगभग 60 हजार अनुदेशक रखे जाएंगे। बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को कम से कम दो कोर्स पढ़ाना होगा। इसके लिए प्रत्येक स्कूल को अपने संसाधनों से दो-दो अनुदेशक रखने होंगे। बोर्ड के विशेषज्ञ स्कूलों में रखे जाने वाले अनुदेशकों की अर्हता तय करेंगे। अनुदेशकों की अर्हता के संबंध में जल्द ही स्कूलों को निर्देश भेजे जाएंगे।


पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग से तैयार इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी जरूरतों, उद्योग जगत की अपेक्षाओं व विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखते हुए व्यवहारिक, कौशल-आधारित एवं रोजगारोन्मुखी विषयवस्तु को शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह कदम विद्यालयी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।


108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे

व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों हेतु एक साथ 108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इन कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, मीडिया और ऑटो सर्विस टेक्निशियन जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है।

स्कूल भौगोलिक आधार पर करेंगे विषयों का चयन

प्रत्येक स्कूल को अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम से कम दो विषयों का चयन करना होगा। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को स्थानीय उद्योगों से जोड़ना है, जैसे भदोही में कालीन उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण। संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 10 दिनों की अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान भी रखा गया है।


Thursday, February 5, 2026

उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार

उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार


लखनऊ । उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों तक सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग से जुड़े प्रत्येक कार्मिक को अपने परिवार के सभी सदस्यों का विवरण फैमिली आईडी पोर्टल पर दर्ज कराना होगा।



प्रदेश भर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और अन्य कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। फैमिली आईडी में पति, पत्नी और बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों का नाम और आधार नंबर दर्ज किया जाएगा। पंजीकरण के दौरान मुख्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा, जिस पर ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी बीईओ और विद्यालय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय से फैमिली आईडी बनवाकर उसकी प्रति विभाग को उपलब्ध कराएं। फैमिली आईडी तैयार होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों का वेतन निर्गत किया जाएगा। इसी कारण फरवरी माह का वेतन फैमिली आईडी पूर्ण होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी डाटाबेस में कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्पष्ट और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा फैमिली आईडी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जा रही है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कार्मिकों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा करना होगा, ताकि वेतन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

Wednesday, January 7, 2026

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान



शिक्षामित्रों को जल्द मिलेगा कैशलेस इलाजः बेसिक शिक्षामंत्री

लखनऊ । बेसिक शिक्षामंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षामित्र संघ का प्रान्तीय सम्मेलन में कहा कि सरकार जल्द शिक्षामित्रों को कैशलेस इलाज और बढ़ा हुआ मानदेय देगी। शिक्षामंत्री ने शिक्षामित्रों की लंबित मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के विश्वसरैया सभागार में आयोजित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रान्तीय सम्मेलन में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। सभी ने प्रदेश सरकार के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को कैसलेस चिकित्सा में शामिल करने एवं शिक्षामित्र को मूल विद्यालय वापसी की कार्रवाई शुरू किये जाने पर शिक्षामंत्री का स्वागत कर मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद ज्ञापित किया।



शिक्षामित्रों की मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती

लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके घर के पास, मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी। राजधानी में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है और शीघ्र ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

राज्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी सभी आवश्यक मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपील की कि शिक्षामित्र नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षामित्र किसी भी तरह से समस्या नहीं, बल्कि वे बेसिक शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षामित्रों की मांगों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है और उचित समय पर इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा में एडेड और वित्तविहीन विद्यालयों के सभी शिक्षकों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसी कारण इसमें कुछ समय लग रहा है।

सम्मेलन में एमएलसी व विधायक श्रीचंद्र शर्मा, वीरेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह राजपूत, उमेश द्विवेदी, हरिओम वर्मा, अवनीश सिंह, मानवेंद्र सिंह सहित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला, महामंत्री सुशील कुमार, संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह तथा अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे। 


सरकार विरोधी छवि सुधारनी होगी

शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षामित्रों को अपनी सरकार विरोधी छवि सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षामित्रों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर सहयोग करेगी। एमएलसी मानवेंद्र सिंह ने शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में उनका नुकसान नहीं होने देगी। वहीं, एमएलसी अवनीश सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करें, उनके अधिकारों की लड़ाई जनप्रतिनिधि पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।


Saturday, December 20, 2025

विधान परिषद में मिला आश्वासन - शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय वृद्धि पर निर्णय जल्द, कैशलेस इलाज का भी आदेश जल्द होगा जारी

विधान परिषद में मिला आश्वासन - शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय वृद्धि पर निर्णय जल्द, कैशलेस इलाज का भी आदेश जल्द होगा जारी 



कैशलेस इलाज का आदेश जल्द जारी होगाः केशव

परिषद में नेता सदन ने सपा सदस्य के सवाल का दिया जवाब

लखनऊविधान परिषद में शुक्रवार को सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि बीते 5 सितम्बर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने की जो घोषणा की गई थी, उसका शासनादेश अतिशीघ्र जारी किया जाएगा।

सरकार की ओर से नेता सदन केशव मौर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की जाने वाली घोषणा का मतलब ही होता है कि उस घोषणा को लागू किया जाएगा। केशव सपा के डा. मानसिंह यादव द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। सपा सदस्य ने पूछा था कि वित्तविहीन शिक्षकों को किसी प्रकार की सुविधा दिए जाने का निर्णय लिया गया है या नहीं। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि कैशलेस इलाज दिए जाने की घोषणा के तीन माह बीतने के बाद भी अब तक इस बारे में शासनादेश तक जारी नहीं किया गया है।




शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय वृद्धि पर निर्णय जल्द

परिषद में प्रश्न प्रहर में बोले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने विधान परिषद में शुक्रवार को एक प्रश्न के जवाब में कहा कि शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि पर जल्द ही सरकार निर्णय लेगी। इस निर्णय से यथासमय सदन को भी अवगत कराएंगे। यह मुद्दा सपा के आशुतोष सिन्हा ने प्रश्न प्रहर में उठाया था। उन्होंने कहा कि इस ने कहा कि किसी कमेटी का कोई गठन नहीं किया गया है। संबंध में क्या कोई कमेटी का गठन किया गया है। इस पर संदीप सिंह

प्रश्न प्रहर में ही डॉ. मान सिंह यादव ने वित्तविहीन शिक्षकों को सुविधाओं का मामला उठाया। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्हें कैशलेस इलाज के लिए 89 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट दिया गया है। जल्द ही इस सुविधा के लिए शासनादेश भी जारी कर दिया जाएगा।

शिक्षक दल के ध्रुव त्रिपाठी ने संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को जीपीएफ भुगतान में आ रही दिक्कतों को सामने रखा। इस पर नेता सदन उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि छह माह के अंदर नवसृजित जिलों में आ रही समस्याओं को दूर कर दिया जाएगा। सपा के लाल बिहारी यादव ने निजी शिक्षा बोर्ड के प्रचार-प्रसार में अधिकारियों के लगने का मुद्दा उठाया। इस पर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जांच कराएंगे।

Thursday, November 20, 2025

शिक्षामित्रों के मानदेय बढोतरी व स्थानांतरण की मांग को लेकर अपर मुख्य सचिव से मिले प्रतिनिधि, कैशलेस चिकित्सा देने का शासनादेश जारी हो, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को भी मिले चिकित्सा सुविधा

शिक्षामित्रों के मानदेय बढोतरी व स्थानांतरण की मांग को लेकर अपर मुख्य सचिव से मिले प्रतिनिधि, कैशलेस चिकित्सा देने का शासनादेश जारी हो, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को भी मिले चिकित्सा सुविधा


लखनऊशिक्षामित्रों ने मानदेय बढ़ाने और स्थानांतरण प्रक्रिया लागू कराने की मांग तेज कर दी है। बुधवार को भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक व एमएलसी श्रीचंद शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। प्रदेश महामंत्री सुशील यादव ने बताया कि बेहद कम मानदेय के कारण कई शिक्षामित्र गंभीर बीमारियों का इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं। इसके अलावा तीन जनवरी 2025 को जारी स्थानांतरण आदेश अभी तक लागू नहीं हुआ है, जिससे कई शिक्षामित्र 80-90 किलोमीटर दूर स्कूलों में जाने को मजबूर हैं।

कई महिला शिक्षामित्र भी अपने ससुराल के पास तैनाती चाहती हैं। प्रतिनिधियों ने शिक्षामित्र स्थानांतरण नीति को जल्द लागू करने, शिक्षक दिवस पर घोषित कैशलेस चिकित्सा योजना का शासनादेश जारी करने, मृत शिक्षामित्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और एक आश्रित को समायोजन का अवसर देने की भी मांग उठाई।

अपर मुख्य सचिव ने सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। मुलाकात के दौरान अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह और वाराणसी शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष अजय सिंह भी मौजूद रहे।



प्रतिनिधिमंडल में शामिल शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुशील यादव ने भी समस्याएं बताईं। कहा, महंगाई को देखते हुए शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया जाए। 3 जनवरी 2025 को शिक्षामित्रों के तबादले के शासनादेश का क्रियान्वयन भी नहीं हुआ है। इससे हजारों शिक्षामित्र घर से 80-90 किमी दूर शिक्षण कार्य करने को मजबूर हैं। उन्होंने कैशलेस चिकित्सा देने का शासनादेश जारी कर परिवार के सदस्यों को भी समायोजित करने की मांग की गई। इसके बाद पदाधिकारियों ने विशेष सचिव अवधेश तिवारी व महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से मिलकर अनुदेशकों की समस्याओं पर चर्चा की।

Monday, September 8, 2025

प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्र अनुदेशक देख रहे राहत की राह, मानदेय में बढ़ोतरी कर लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बढ़ेंगे कदम

प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्र अनुदेशक देख रहे राहत की राह, मानदेय में बढ़ोतरी कर लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बढ़ेंगे कदम 


 लखनऊः प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की उम्मीद बढ़ गई है। इनका मानदेय बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वस्त किया कि रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश सरकार सकारात्मक फैसला लेगी। अब कमेटी की रिपोर्ट का सभी उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।

 प्रदेश में इस समय 1,43,450 शिक्षामित्र और 25,223 अनुदेशक कार्यरत हैं। शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये और अनुदेशकों को 9,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। इनमें से करीब 60 हजार शिक्षामित्र टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण कर चुके हैं। इन शिक्षामित्रों को उम्मीद है कि उनकी योग्यता और मेहनत को देखते हुए सरकार मानदेय बढ़ाने का बड़ा निर्णय करेगी। 

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के बेसिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी की अनिवार्यता कर दी है। इस आदेश से बगैर टीईटी वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। वे अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। वहीं, टीईटी पास शिक्षामित्रों को भरोसा है कि योग्यता आधारित नीति के तहत उन्हें वरीयता और बेहतर मानदेय मिलेगा। सभी का मानना है कि सरकार कमेटी की रिपोर्ट के बाद जल्द ही ठोस निर्णय लेगी। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता भी सुदृढ़ होगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सरकार मानदेय में बढ़ोतरी कर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।



शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का बड़ा ऐलान, शिक्षामित्र और अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय


शिक्षक दिवस के मौके पर सीएम योगी ने बड़ा ऐलान किया है। दिवाली से पहले सीएम योगी ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को तोहफा दिया है। सीएम योगी ने ऐलान करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया जाएगा।


शिक्षक दिवस के मौके पर सीएम योगी ने बड़ा ऐलान किया है। दिवाली से पहले सीएम योगी ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को तोहफा दिया है। सीएम योगी ने ऐलान करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया जाएगा। 

प्रदेश में शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसमें बेसिक माध्यमिक वित्त विभिन्न अशासकीय विद्यालयों के करीब 9 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके अलावा शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइयों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। 

वहीं एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है जो शिक्षामित्र और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के बारे में जल्द ही अपनी संस्तुति देगी, उसी आधार पर सरकार मानदेय की घोषणा करेगी।

Saturday, September 6, 2025

नौ लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और उनके परिवारीजन को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा, सीएम योगी ने की शिक्षक दिवस पर बड़ी घोषणा

नौ लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और उनके परिवारीजन को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा,  सीएम योगी ने की शिक्षक दिवस पर बड़ी घोषणा

81 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार, 10 शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, योगी ने कहा समिति का गठन कर चुके

शिक्षकों के साथ रसोइयों को भी कैशलेस इलाज का लाभ, प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आदेश


लखनऊशिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के नौ लाख से अधिक शिक्षकों और उनके परिवारीजन को कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने की घोषणा की है। इनमें बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षकों के साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइयां भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने शिक्षा अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने पर विचार के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट आते ही कार्य के अनुरूप मानदेय देने का प्रयास किया जाएगा।


लोक भवन सभागार में शुक्रवार को आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा के 66 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों सहित कुल 81 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए। 10 शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने स्वयं सम्मानित किया, जबकि अन्य को शिक्षा मंत्रियों ने पुरस्कृत किया। पुरस्कार स्वरूप शिक्षकों को 25 हजार रुपये का चेक, सरस्वती प्रतिमा और शाल प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग स्कूलों के विलय और बाल वाटिका के बारे में दुष्प्रचार कर रहे थे, लेकिन कई प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने मेहनत और नवाचार से सरकारी विद्यालयों को कान्वेंट या पब्लिक स्कूल को टक्कर देने लायक बना दिया है। उन्होंने सुलतानपुर, वाराणसी और अन्य जिलों के उदाहरण भी दिए।

उन्होंने बताया कि आपरेशन कायाकल्प के तहत प्रदेश के 1.36 लाख विद्यालयों को 19 बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया है। वहीं प्रोजेक्ट अलंकार के जरिये अब तक 2100 विद्यालयों को नए भवन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में 5000 से अधिक बाल वाटिकाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक बच्चों ने शिक्षा की शुरुआत कर दी है। इन्हें मुख्यमंत्री पोषण मिशन और आंगनबाड़ी केंद्रों से भी जोड़ा जा रहा है। बच्चों को पौष्टिक व स्वादिस्ट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उनमें सीखने की रुचि बढ़े। उन्होंने कहा कि अब सीसीटीवी निगरानी में परीक्षाएं कराई जाती हैं और 56 लाख विद्यार्थियों के परिणाम एक महीने के भीतर घोषित किए जाते हैं।


आज यूपी बोर्ड का विद्यार्थी किसी भी बोर्ड से कमतर नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था। अब बड़े सुधार हुए हैं, लेकिन कुछ लोग नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपनी तुलना किसी नौकरशाह या नेता से न करें और शिक्षा सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। समारोह को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह व माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी संबोधित किया। अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक का भी दायित्व संभाल रहे मुख्य सचिव दीपक कुमार और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

Saturday, July 12, 2025

समर कैंप कराने वाले शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मानदेय का है इंतजार

समर कैंप कराने वाले शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मानदेय का है इंतजार


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में नवाचार करते हुए इस साल 21 मई से 15 जून तक पहली बार समर कैंप का आयोजन किया गया। इसके आयोजन की जिम्मेदारी विद्यालयों में तैनात रहे 1.42 लाख शिक्षामित्रों व 25 हजार अनुदेशकों को दी गई थी। इसके लिए 6000 रुपये मानदेय तय किया गया था, लेकिन अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया है। इसके लिए वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। 


उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश मंत्री कौशल कुमार ने कहा कि इसके लिए उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार से मिलकर जल्द मानदेय जारी करने की मांग की है। 


उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को यूं ही 11 महीने का मानेदय दिया जाता है। हमने गर्मी में भी विभाग के निर्देश पर इसीलिए काम किया कि समय से मानदेय मिल जाएगा। लेकिन, अभी तक उनका मानदेय नहीं मिला है। 

Wednesday, May 21, 2025

शिक्षामित्रों ने भी समर कैंप को लेकर खोला मोर्चा, ग्रीष्मावकाश के बजाय जुलाई में आयोजन की मांग

शिक्षामित्रों ने भी समर कैंप को लेकर खोला मोर्चा, ग्रीष्मावकाश के बजाय जुलाई में आयोजन की मांग 

 
20 मई 2025
लखनऊ । परिषदीय स्कूलों में शुरू समर कैम्प को लेकर अब शिक्षामित्रों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने स्कूल शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजकर समर कैम्प का आयोजन ग्रीष्मावकाश के दौरान न करके जुलाई में कराने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला ने स्कूल शिक्षा महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा है कि शिक्षामित्रों को वर्ष में एक साथ अधिक दिन के लिए ग्रीष्म कालीन अवकाश ही मिलता है, इसमें महिला बहनों को अपने ससुराल / मायके में बच्चों के पास जाना होता है जो कि एक जटिल समस्या है।

साथ ही पुरुष साथियों को भी इसी अवकाश में अपना पारिवारिक कार्य करना रहता है। चूंकि समर कैम्प का संचालन इसी अवकाश अवधि में होना है। इसमें संशोधन किया जाना नितान्त आवश्यक है। भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों अथवा शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए समर कैम्प का संचालन जुलाई में कराया जाना सुनिश्चित किया जाए, जिससे पूरे मनोयोग से समर कैम्प का संचालन हो सके। यह भी कहा है कि कि जिन चयनित विद्यालयों में समर कैम्प का संचालन होना है, विद्यालय की व्यवस्था अथवा रखरखाव के लिए प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक की उपस्थिति संचालन अवधि में होना सुनिश्चित किया जाए। संचालन प्रक्रिया में जो शिक्षा मित्र भाई-बहन स्वेच्छा से संचालन करना चाहते हैं, उन्हीं को लगाया जाए। साथ ही शिक्षामित्रों की समस्याओं पर भी विचार करके उनकी ड्यूटी लगायी जाए।



अब समर कैंप के विरोध में उतरे शिक्षामित्र और अनुदेशक, आयोजन को बताया अव्यावहारिक, स्थगित करने की मांग, मुख्य संगठनों ने मुद्दे पर साधी चुप्पी

बच्चों के साथ ही शिक्षामित्र अनुदेशकों के स्वास्थ्य की  चिंता की मांग

17 मई 2025
लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व सेल्फ फाइनेंस माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप को लेकर मिली राहत के बाद अब बेसिक विद्यालयों में समर कैंप के आयोजन का विरोध बढ़ गया है। गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप आयोजन करने का शिक्षामित्रों व अनुदेशकों ने विरोध किया है।

विभिन्न शिक्षक व शिक्षामित्र संगठनों ने भीषण गर्मी व सुविधाओं के अभाव में समर कैंप का आयोजन को अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के साथ भी खिलवाड़ है। 21 मई से प्रस्तावित समर कैंप में शिक्षामित्रों-अनुदेशकों की ही ड्यूटी लगाना, उनके साथ सौतेला व्यवहार है।


जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मनोज मौर्य ने कहा कि पहले से ही गर्मी की वजह से बहुत कम बच्चे स्कूल आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली बहुत कम आती है। वहीं विद्यालयों में संसाधन भी नहीं हैं। हर जूनियर विद्यालय में अनुदेशक भी नहीं हैं। शिक्षक शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश सचिव उबैद अहमद सिद्दीकी ने शिक्षामित्रों को ही समर कैंप के आयोजन में लगाने का विरोध किया है।

आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के राम सागर ने कहा कि विभाग यह बताए कि क्या शिक्षामित्र-अनुदेशकों को लू नहीं लगती है। उनके स्वास्थ्य के लिए कौन जिम्मेदार होगा। बता दें कि परिषदीय विद्यालयों में 21 मई से 15 जून के बीच विद्यालयों में समर कैंप का आयोजन किया जाएगा। विभाग ने इसके लिए शिक्षामित्र अनुदेशकों को ही तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्हें इस अवधि के लिए 6000 रुपये मानदेय व 2000 रुपये स्टेशनरी खर्च के लिए विद्यालय को दिए जाएंगे।


मुख्य संगठनों ने शिक्षामित्रों के मुद्दे पर साधी चुप्पी

शिक्षामित्रों के हक-हुकूक आदि की मांग उठाने व उनका नेतृत्व करने वाले प्रदेश में दो मुख्य संगठन हैं। इसमें उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ व उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ है। किंतु इन दोनों संगठनों ने सिर्फ शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के भरोसे ही समर कैंप के आयोजन को लेकर कोई बयान तक नहीं जारी किया। उनकी लड़ाई लड़ना तो दूर की बात है।

Thursday, March 27, 2025

लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम में स्कूल भी चयनित और लैब भी निर्मित, लेकिन पढ़ाने के लिए नहीं हो सका तकनीकी अनुदेशको का चयन

लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम में स्कूल भी चयनित और लैब भी निर्मित, लेकिन पढ़ाने के लिए नहीं हो सका तकनीकी अनुदेशको का चयन

■ दो चरणों में 43250 रुपये से विद्यालयों में स्थापित हुई प्रयोगशाला

■ सितंबर से अब तक नहीं हो सका विषय विशेषज्ञों का चयन

प्रयागराज। कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के कौशल विकास के लिए करोड़ों रुपयों से प्रदेश  के हजारों उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में प्रयोगशाला तो स्थापित कर ली गई है लेकिन इन बच्चों को सिखाने के लिए  तकनीकी अनुदेशकों का चयन अब तक नहीं हो सका है। 


महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने पिछले वर्ष नौ सितंबर को ही तकनीकी अनुदेशकों के चयन के आदेश दिए थे लेकिन छह महीने बाद भी चयन नहीं हो सका है। प्रदेश सरकार ने इन स्कूलों में प्रयोगशाला उपकरण खरीदने के लिए दो चरणों में 14,480 और 28,770 कुल 43,250 रुपये दिया है। उपकरणों की खरीद भी हो चुकी है। 


जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को तकनीकी अनुदेशकों का चयन जेम पोर्टल के माध्यम से करना है लेकिन छह महीने में भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जानकारों की मानें तो यह स्थिति केवल प्रयागराज में ही नहीं बल्कि प्रदेश के दो-चार जिलों को छोड़ दें तो अधिकांश जिलों में अनुदेशक चयन नहीं हो सका है। प्रदेश में 1772 स्कूल इस कार्यक्रम के तहत चुने गए हैं। 


2402 अनुदेशकों का होना है चयनः प्रदेशभर के 886 विकासखंडों में कुल 2402 तकनीकी अनुदेशकों का चयन होना है। इनमें इंजीनियरिंग और वर्कशॉप ट्रेड, एनर्जी एंड इन्वायमेंट ट्रेड, एग्रीकल्चर, नर्सरी एंड गार्डनिंग और होम एंड हेल्थ ट्रेड शामिल है। अनुदेशकों को 10450 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

Tuesday, February 4, 2025

बजट में शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने की घोषणा की मांग

बजट में शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने की घोषणा की मांग


लखनऊ। प्रदेश में जल्द ही नए वित्तीय वर्ष का बजट पास किया जाएगा। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से नए वित्तीय वर्ष के बजट में शिक्षामित्रों व अनुदेशको के मानदेय वृद्धि की घोषणा करने की मांग की है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की प्राथमिक विद्यालयों मे 1.32 लाख शिक्षामित्र व जूनियर विद्यालयों मे तैनात 27 हजार अनुदेशकों की हालत कम मानदेय के कारण बहुत ही खराब हो चुकी है। कम मानदेय की वजह से वे अपने बच्चों की पढ़ाई व माता-पिता का उचित इलाज भी नहीं करा पा रहे है। मानदेय बढ़ाने के लिए पिछले साल मंत्री व उच्च अधिकारियों के साथ कई बार बैठक भी हुई किंतु अभी तक कोई नतीजा सामने नहीं आया।

उन्होंने कहा कि जहां स्थाई शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए 8वां पे कमीशन का एलान हो चुका है। वहीं उनके ही बराबर काम करने वाले उसी विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय में कई साल से एक रुपये भी नहीं हो रही है। प्रदेश सरकार मानदेय बढ़ाने की घोषणा करे, ताकि दोनों वर्ग समानता से जीवन जी सके। 

Monday, January 6, 2025

आउटसोर्स कर्मचारियों को शोषण से मिलेगी निजात, 20 हजार होगा न्यूनतम वेतन, जल्द जारी होगी नियमावली


न्यूनतम मजदूरी की दर से या उससे कम वेतन पाने वाले संवर्गों के कार्मियों के मानदेय में होगी बढ़ोत्तरी 

आउटसोर्स कर्मचारियों को शोषण से मिलेगी निजात,  20 हजार तक होगा न्यूनतम वेतन, जल्द जारी होगी नियमावली


शिक्षामित्रों समेत आठ लाख कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा, योगी सरकार जल्द कैबिनेट में लाने जा रही प्रस्ताव

प्रस्ताव को वित्त विभाग दे चुका है मंजूरीइन कर्मियों को होगा लाभ

🔴 05 लाख आउटसोर्स कर्मचारी
🔴 25 हजार 223 अनुदेशक
🔴 1.20 लाख संविदाकर्मी
🔴 03 हजार दैनिक वेतनभोगी
🔴 01 लाख 43 हजार 450 शिक्षामित्र

17 से 20 हजार रुपये तक मानदेय होने की संभावना, अभी 09 से 10 हजार रुपये मिलते हैं


लखनऊ। योगी सरकार शिक्षामित्रों और अनुदेशकों समेत प्रदेश के लगभग आठ लाख कार्मिकों के वेतन और मानदेय में भारी भरकम बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूनतम मजदूरी की दर से या उससे कम वेतन पाने वाले संवर्गों के कार्मियों को एक समान 17,000 से 20,000 रुपये प्रतिमाह देने के निर्देश दिए हैं ताकि ऐसे सभी कर्मी जो इस श्रेणी में हैं, वे अपने परिवार का भरण-पोषण ठीक से कर सकें।


इसके लिए तैयार प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे जल्द कैबिनेट से पास कराने की तैयारी है। राज्य सरकार ने अलग- अलग विभागों में तैनात संविदाकर्मियों से लेकर आउटसोर्सिंग एजेन्सियों के माध्यम से तैनात कर्मियों व दैनिक वेतन भोगियों को केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में तय की गई न्यूनतम मजदूरी की राशि के बराबर वेतन या मानदेय देने का निर्णय किया था। इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। 


वहां से इस प्रस्ताव में कुछ और संवर्गों को भी इसका लाभ देने के उद्देश्य से उन्हें भी जोड़ने के निर्देश दिए गए। इसमें शिक्षामित्र और अनुदेशक भी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि वर्तमान में श्रम विभाग के न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत जो न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, वह उपयुक्त नहीं है लिहाजा इसमें वृद्धि करने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।


प्रस्ताव को वित्त विभाग दे चुका है मंजूरी

■ शिक्षामित्रों को तबादले की सुविधा के ऐलान के बाद राज्य सरकार देने जा रही एक और बड़ी सौगात

■ मुख्यमंत्री ने मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी जोड़ने के दिए निर्देश


लाखों कर्मियों का मानदेय अभी काफी कम

वर्तमान में शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये और अनुदेशकों को 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। अकुशल श्रमिक को 10,701 रुपये, अर्धकुशल को 11,772 रुपये प्रतिमाह तथा कुशल को 13, 186 रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। हाल ही में राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय वापसी व अंतर्जनपदीय स्थानांतरण की सुविधा देने का शासनादेश जारी कर उन्हें बड़ी राहत दी है।


इन कर्मियों को लाभ

05 लाख आउटसोर्स कर्मचारी
25 हजार 223 अनुदेशक
1.20 लाख संविदाकर्मी
03 हजार दैनिक वेतनभोगी
01 लाख 43 हजार 450 शिक्षामित्र

Monday, September 23, 2024

तदर्थ शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों पर लेंगे सकारात्मक निर्णय, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर की बैठक

तदर्थ शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों पर लेंगे सकारात्मक निर्णय,  डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर की बैठक 


लखनऊ। विधान परिषद सभापति के निर्देश पर बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की समस्याओं पर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की अध्यक्षता में शनिवार शाम को बैठक हुई। इसमें तदर्थ शिक्षकों के वेतन, तैनाती व शिक्षामित्रों के मानदेय मामले में सकारात्मक निर्णय लेने पर सहमति बनी।

बैठक में शिक्षक विधायक राज बहादुर सिंह चंदेल व स्नातक विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड कॉलेजों) के तदर्थ शिक्षकों के संबंध में 9 नवंबर 2023 के आदेश को वापस लेने की बात कही। कहा कि इससे सरकार पर अलग से वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

ऐसे में इस मुद्दे पर एक माह के अंदर निर्णय लेने की सहमति बनी। बैठक में 22 मार्च 2016 के आदेश के तहत विनियमित हुए शिक्षकों को पेंशन नहीं देने का मुद्दा उठाया। शिक्षक विधायक ने कहा कि इस पर तदर्थ, अर्हकारी सेवाएं जोड़ने के लिए कहा गया पर नहीं किया गया। उप मुख्यमंत्री ने इसका कारण पूछा। इस पर भी एक महीने में निर्णय देने पर सहमति बनी।

बैठक में शिक्षक नेताओं ने वर्ष 1981 से 2020 तक 40000 शिक्षकों-कर्मचारियों की विजिलेंस (सतर्कता) जांच का मुद्दा उठाया। इस पर कहा गया कि जिसकी शिकायत होती है, उसे बुलाकर पूछा जाए। अनावश्यक सभी शिक्षक कर्मचारियों को परेशान न किया जाए। एमएलसी ने बताया कि राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग में सेवा सुरक्षा, दंड प्रक्रिया, निलंबन, अनुमोदन की नियमावली नहीं बनी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यह नियमावली बन रही है।

बैठक में परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का हर साल महंगाई के अनुसार मानदेय बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया। काफी चर्चा के बाद इसके लिए फॉर्मूला तैयार करने व निर्णय लेने पर सहमति बनी। बैठक में शिक्षक विधायक श्रीचंद शर्मा, ध्रुव कुमार त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।



तदर्थ शिक्षकों व शिक्षा मित्रों पर लेंगे सकारात्मक निर्णय

विधान परिषद सभापति के निर्देश पर बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की समस्याओं पर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या की अध्यक्षता में शनिवार को बैठक हुई। इसमें तदर्थ शिक्षकों के वेतन, तैनाती व शिक्षा मित्रों के मानदेय मामले में सकारात्मक निर्णय लेने पर सहमति बनी।

बैठक में शिक्षक विधायक राज बहादुर सिंह चंदेल व स्नातक विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय (एडेड कॉलेजों) के तदर्थ शिक्षकों के संबंध में 9 नवम्बर 2023 के आदेश को वापस लेने की बात कही। क्योंकि उसके बाद वेतन देने के लिए न्यायालय द्वारा निर्णय दिये जा रहें हैं किंतु विभाग इस पर कोई आदेश नही दे रहा है। उप मुख्यमंत्री ने पूछा कि ऐसे कितने लोग हैं। शिक्षक विधायक ने कहा कि लगभग 1200 लोग ही बचे है। इससे सरकार पर अलग से वित्तीय भार अलग से नहीं पड़ेगा। इस पर एक माह के अंदर निर्णय लेने की सहमत बनी ।

बैठक में 22 मार्च 2016 के आदेश के तहत विनियमित हुए शिक्षकों को पेंशन नहीं देने का मुद्दा उठाया। शिक्षक विधायक ने कहा कि इस पर तदर्थ, अर्हकारी सेवाएं जोड़ने के लिए कहा गया पर नहीं किया गया। उप मुख्यमंत्री ने इसका कारण पूंछा। इस पर भी एक महीने में निर्णय देने पर सहमत बनी।

बैठक में शिक्षक नेताओं ने वर्ष 1981 से 2020 तक 40000 शिक्षकों- कर्मचारियों की बिजलेंस (सर्तकता) जांच का मुद्दा उठाया। इस पर कहा गया कि जिसकी शिकायत होती है, उसे बुलाकर पूंछा जाए। अनावश्यक सभी शिक्षक - कर्मचारियों को न परेशान किया जाए। यह भी मांग की गई कि इस संबंध में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) इस संबंध में पत्र भी जारी करें।

 एमएलसी ने बताया कि राज्य शिक्षा सेवा चयन आयोग में सेवा सुरक्षा, दंड प्रक्रिया, निलंबन, अनुमोदन की नियमावली नहीं बनी। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यह नियमावली बन रही है उसमे चयन बोर्ड नियमावली-1998 की धारा 12,18 व 21 जोड़ने पर सहमत बनी।

Saturday, August 10, 2024

अनुदेशकों की दस सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही का निर्णय, कार्यवृत्त जारी होते ही धरना समाप्त

अनुदेशकों की दस सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही का निर्णय, कार्यवृत्त जारी होते ही धरना समाप्त 




10 अगस्त 2024
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों की दस सूत्री मांगों पर बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के साथ हुई वार्ता का कार्यवृत्त (मिनट्स) शुक्रवार शाम को जारी कर दिया गया। इसमें उनके मानदेय वृद्धि, नवीनीकरण, महिला अनुदेशकों के तबादले पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। 


इसके बाद अनुदेशकों ने सोमवार से चल रहा धरना समाप्त कर दिया।  प्रदेशभर से आए अनुदेशक अपनी दस सूत्रीय मांगों के समर्थन में शुक्रवार को भी भारी बारिश के बीच दिन भर बेसिक शिक्षा निदेशालय पर डटे रहे। इस बीच जारी कार्यवृत्त में कहा गया कि नियमितीकरण का मामला नीतिगत है, इस पर विचार कर निर्णय लिया जाएगा।  मानदेय वृद्धि व समान कार्य के लिए समान वेतन देने पर भी विचार-विमर्श के बाद निर्णय की बात कही गई। 


परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि नवीनीकरण में आ रही दिक्कतों को लेकर स्वतः नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया है। वहीं न्यायालय में चल रहे मामलों को वापस लेने के मामले में विधिक राय लेकर व आयुष्मान योजना का लाभ दिए जाने पर भी सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में एक महीने में आदेश-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया है। 





धरने पर बैठे अनुदेशकों की शासन से वार्ता रही सकारात्मक, लिखित कार्यवृत्त जारी होने तक धरना रहेगा जारी


08 अगस्त 2024
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा  निदेशालय पर बुधवार को दूसरे दिन भी धरना जारी रखा। शाम को उनकी विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एमकेएस सुंदरम से सकारात्मक वार्ता हुई। 


हालांकि उन्होंने वार्ता का लिखित कार्यवृत्त जारी होने तक धरना न स्थगित करने की बात कही। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रमुख सचिव ने आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने, ईपीएफ, जिले में तबादले, सीसीएल देने, बच्चों की संख्या की बाध्यता समाप्त करने जैसे कई मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। 


प्रमुख सचिव से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में राम कुमार निगम, राम सिंह, तारकेश्वर शाही, प्राची मिश्रा व स्मृति मिश्रा शामिल थीं। बता दें, अनुदेशक सोमवार से धरने पर बैठे हैं। 


नियमितीकरण व समान वेतन के लिए परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों ने घेरा निदेशालय, बेसिक शिक्षा निदेशालय पर शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना

07 अगस्त 2024
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों ने नई शिक्षा नीति के अनुसार अपने नियमितीकरण और नियमितीकरण होने तक 12 माह का समान कार्य के लिए समान वेतन मांगा है। अनुदेशकों ने इनके साथ ही लंबित मांग के समाधान के लिए मंगलवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।


सुबह काफी संख्या में अनुदेशक निदेशालय पहुंचे और विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वहां धरने पर बैठ गए। इसकी सूचना पर पहुंचे पुलिस के अधिकारियों ने उनकी महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा से मुलाकात का प्रस्ताव दिया, लेकिन अनुदेशकों ने इसे ठुकरा दिया। 


परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि महानिदेशक से कई बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन उसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला। ऐसे में अब वह प्रमुख सचिव या मुख्य सचिव से ही वार्ता करेंगे। उन्होंने कहा कि वह तब तक धरने पर बैठेंगे जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है। 


अनुदेशकों के धरने में संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, महासचिव आरके निगम, पंकज यादव, आरके वर्मा, राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कृतार्थ सिंह, शिक्षामित्र अनुदेशक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक तारकेश्वर शाही, मनोज राय आदि शामिल हुए और अपने संगठनों का समर्थन दिया। 

Wednesday, July 31, 2024

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षामित्रों और रसोइयों आदि के मानदेय बढ़ाने की मांग पर सरकार का जवाब - मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षामित्रों और रसोइयों आदि के मानदेय बढ़ाने की मांग पर सरकार का जवाब - मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

यूपी : शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से करने पर हंगामा, सरकार ने दिया जवाब- मानदेय बढ़ाने पर नहीं हो रहा है विचार

सीएम योगी बोले: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, सहायिका की आय पर फोकस, बेसिक शिक्षा मंत्री बोले- नहीं बढ़ेगा रसोइयों का मानदेय

मदरसा शिक्षकों का समायोजन करने पर सरकार नहीं कर रही विचार

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने और मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया

Shikshamitras in UP: विधानसभा में मंगलवार को शिक्षामित्रों के मानदेय का मुद्दा उठा। इन्हीं बातों के बीच शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से करने पर हंगामा हो गया। 
 

सपा सदस्य समरपाल सिंह विधानसभा में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने को लेकर पूछे गए सवाल के दौरान एक मंत्री के घर का किस्सा सुनाने लगे। उन्होंने कहा कि एक मंत्री के घर पर गया तो नौकर कुत्ते को सहला रहा था। मैंने पूछा कि इस पर कितना खर्च आता है तो उसने 20 हजार रुपये महीना बताया। सरकार शिक्षामित्रों को केवल 10 हजार रुपये दे रही है। इससे उनका भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। 


इसके जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सपा सदस्य ने शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं से की, जिसकी मैं निंदा करता हूं। इनकी सरकार में शिक्षा मित्रों को महज 3500 रुपये मिलते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें शिक्षक नहीं माना तो शिक्षामित्रों के रूप में समायोजित किया गया। हमने मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया। फिलहाल मानदेय बढ़ाने पर कोई विचार नहीं हो रहा है।


मदरसा शिक्षकों का समायोजन करने पर सरकार नहीं कर रही विचार
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार 21 हजार मदरसा शिक्षकों को समायोजित करने पर विचार नहीं कर रही है। ऐसी कोई भी योजना प्रस्तावित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में जब मदरसा आधुनिकीकरण योजना बंद हुई थी, तब आपने चिंता नहीं की। अल्पसंख्यकों के वोट तो चाहिए, लेकिन क्या उनके लिए कोई विश्वविद्यालय खोला था। उन्होंने सदन को बताया कि यह योजना वर्ष 2021-22 तक ही अनुमोदित थी। केंद्र सरकार ने जब अपना 60 फीसद अंश देना बंद कर दिया तो बजट के अभाव में राज्य सरकार को भी योजना को बंद करना पड़ा।


सपा ने उठाया शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मामला
 विधान परिषद में मंगलवार को कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत सपा सदस्यों ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने और मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बेसिक के शिक्षकों से पढ़ाई से इतर दर्जनों काम लिए जाते हैं। उनकी डिजिटल अटेंडेंस भी लेने का आदेश दिया गया है। इसे समाप्त करना जरूरी है। विभाग में कई एप लागू हैं जिनसे काफी कमीशन आता है। उन्होंने शिक्षकों को 15 सीएल, 15 हाफ सीएल, 30 ईएल, राज्य कर्मचारी का दर्जा व मेडिकल सुविधा देने की मांग की।

आशुतोष ने कहा कि शिक्षामित्र 10 हजार और अनुदेशक 9000 रुपये में अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे। सपा एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव ने कहा कि शिक्षामित्र अयोग्य हैं तो उनसे काम क्यों लिया जा रहा है। उन्हें समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। 69000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी, एससी-एसटी के हक पर डाका डाला गया है। 

नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने मदरसा शिक्षकों की खराब स्थिति, तदर्थ शिक्षकों को बर्खास्त करने, माध्यमिक में मान्यता एक सेक्शन की और प्रवेश 900 छात्रों का, चार विषय में फेल छात्रों को यूपी बोर्ड में ग्रेस देकर पास करने का मुद्दा उठाया। शिक्षा के गिरते स्तर पर उनके सवाल पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा।




 
सीएम योगी बोले: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, सहायिका की आय पर फोकस, बेसिक शिक्षा मंत्री बोले- नहीं बढ़ेगा रसोइयों का मानदेय

लखनऊ । सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइयों और सहायिका की अन्य आय को बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सपा सदस्य राजेंद्र प्रसाद चौधरी द्वारा इस बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में इससे पहले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि इनका मानदेय बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं हो रहा है। वर्तमान में दिया जाने वाला भुगतान मानदेय आधारित है और न्यूनतम मजदूरी भुगतान के नियमों के दायरे में नहीं आता है।

योगी ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा सरकार थी। तब रसोइयों का मानदेय 500 रुपए से भी कम था। आपने दूसरा अन्याय ये किया कि जिनके बच्चे नहीं पढ़ेंगे, उनको सेवा से हटा दिया जाएगा। उनके चयन में भी भेदभाव करते थे। हमारी सरकार ने 2022 में उनके मानदेय को न्यूनतम 2 हजार रुपए किया। इन सभी ने कोरोना काल में अपनी सेवाओं के माध्यम से शासन की योजनाओं को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में अभिनंदनीय काम किया है। 

हमने इनके मानदेय में वृद्धि भी की है और इन्हें टैबलेट से आच्छादित करने के साथ साथ अतिरिक्त आय का प्रावधान भी किया है। हमने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सचिवालय का निर्माण किया है। इसका उद्देश्य ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गांव को ही स्वावलंबी बनाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार किया जा सके। वहां पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में पंचायत सहायक रखा गया है। बीसी सखी रखी गई है, जो गांव के अंदर बैंकिंग लेनदेन का कार्य करती है।


हमने 6 महीने के लिए उन्हें एक निश्चित मानदेय के साथ जोड़ा, लेकिन जब बैंक से उनका कमीशन बन गया तो वह अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। सुल्तानपुर की एक बीसी सखी अब तक 15.50 लाख रुपए से अधिक का कमीशन प्राप्त कर चुकी है। पंचायत सहायक को भी हम 6 हजार रुपए प्रतिमाह देते हैं। साथ ही जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और अन्य सभी योजनाओं को जिनकी वह ऑनलाइन सर्विस उपलब्ध करा रहा है, उससे भी अतिरिक्त आय हो रही है।

वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने स्त्रोत से ही देगा मानदेय
प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को प्रोत्साहन मानदेय दिए जाने के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार इन शिक्षकों को मानदेय प्रबंध तंत्र को अपने स्त्रोत से ही देना होगा।विधान परिषद में एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल व राज बहादुर चंदेल ने संयुक्त रूप से यह मामला उठाया। 

उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षकों के लिए 2017 के बाद से सरकार ने कोई अतिरिक्त आर्थिक सहायता नहीं की है। जबकि पूर्व में 200 करोड़ दिया गया था। आज यहां के शिक्षक बंधुवा मजदूरों की तरह जीवनयापन कर रहे हैं। कोविड काल में इनको राहत पैकेज देने की मांग की गई लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ।

2019 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने इनको 15 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान करने की घोषणा की थी लेकिन यह आज तक लागू नहीं हुआ। वहीं एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली बनाने व समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। 

इस पर माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि अंशकालिक शिक्षकों को प्रबंध तंत्र अपने स्त्रोत से भुगतान करेगा। इनको मानदेय देने या मानदेय वृद्धि की सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरी तरफ एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन की पारश्रमिक सीबीएसई बोर्ड के अनुरूप करने की मांग की।

Tuesday, May 14, 2024

चुनाव ड्यूटी में लगे अनुदेशकों को हादसा होने पर मिलेंगे सभी लाभ, चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति की साफ

चुनाव ड्यूटी में लगे अनुदेशकों को हादसा होने पर मिलेंगे सभी लाभ, चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति की साफ

मतदान के दिन वीडियोग्राफी की मिली है जिम्मेदारी


लखनऊ। चुनाव ड्यूटी में लगे परिषदीय विद्यालयों के अनुदेशकों को हादसा होने पर दूसरे सरकारी कार्मिकों की तरह ही सभी लाभ मिलेंगे। चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इन अनुदेशकों को तमाम स्थानों पर मतदान के दिन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जिम्मेदारी मिली है। इस काम के लिए अनुदेशकों को कैमरे भी मुहैया कराए गए हैं। उन्हें ईवीएम सील होने तक वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी का काम करना है।


 इनके ड्यूटी आदेश में लिखा है कि इस काम के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भत्ता, यात्रा भत्ता और मानदेय देय नहीं मिलेगा। जबकि चुनाव ड्यूटी में लगाए जा रहे शिक्षकों को प्रोत्साहन भत्ता दिया जा रहा है। इसलिए यह अनुदेशक भी उन सभी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जो अन्य कार्मिकों को मिलती हैं।


इस संबंध में आयोग से संपर्क करने पर बताया गया है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों की बूथ पर कैमरों के साथ ड्यूटी लगाई गई है। ये कैमरे जिला पंचायत से खरीदे गए हैं और ये कर्मचारी अनुदेशक व रोजगार सेवक आदि हैं। इनको पैक्ड लंच दिया जाएगा। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों को नियमानुसार एक्सग्रेसिया का लाभ और अन्य सरकारी कर्मचारी के रूप में मिलने वाले विभिन्न लाभ दिए जाएंगे।



चुनाव ड्यूटी के लिए मानदेय भी दिया जाए

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है कि कई जिलों में अनुदेशकों की चुनाव ड्यूटी बिना मानदेय के लगा दी गई है। इतना ही नहीं, पी-2 के बजाय पी-3 में ड्यूटी लगी है। उन्होंने मानदेय देने की मांग की है।