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Friday, April 9, 2021

पूर्व बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने आय से अधिक मामले में दर्ज किया केस

पूर्व बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने आय से अधिक मामले में दर्ज किया केस


🔴 समाजवादी सरकार में बड़ा था वासुदेव यादव का रुतबा

🔵 एक समय में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के बनाये गए थे निदेशक

🔴 दो दो विभागों के निदेशक बनाये जाने पर हाईकोर्ट ने भी उठाए गए थे सवाल

🔵 विजिलेंस ने भ्रष्टाचार से संपत्ति जुटाने के साक्ष्य एकत्र किये

🔴 आय से अधिक खर्च करने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद केस दर्ज

FIR Against Samajwadi Party MLC पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी में शामिल समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विवेचना शुरू की जा रही है।


बड़ा था वासुदेव यादव का रुतबा: वासुदेव यादव अखिलेश सरकार में बेहद रसूखदार थे। सपा सरकार में उनके प्रभाव का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग में निदेशक स्तर के अन्य अफसरों के रहते हुए भी उन्हेंं माध्यमिक शिक्षा के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक की कुर्सी भी सौंप दी गई थी। इतना ही नहीं, अखिलेश सरकार के सत्तारूढ़ होते ही उनके खिलाफ चल रहीं तमाम जांचें एक-एक कर खत्म कर दी गईं और उन्हेंं माध्यमिक शिक्षा निदेशक बनाया गया। इसके कुछ दिनों बाद तत्कालीन बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश चंद्र कनौजिया को हटाकर वासुदेव को इस कुर्सी पर भी बैठा दिया गया। 


उन्हेंं दो विभागों का निदेशक बनाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी सरकार से सवाल किया था और फिर उन्हेंं इनमें से एक पद से हटाने के लिए कहा था लेकिन वह दोनों कुॢसयों पर बने रहे। अखिलेश सरकार में उनकी पहुंच का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हेंं सेवा विस्तार देने के प्रस्ताव से असहमति जताने पर तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार को वर्ष 2014 में सरकार ने निलंबित कर दिया था। उनके इस निलंबन की वजह लैपटॉप वितरण में लापरवाही बताई गई थी। 


लखनऊ। प्रदेश के शिक्षा निदेशक रहे समाजवादी पार्टी से विधान परिषद के सदस्य वासुदेव यादव अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंस गए हैं। उनके खिलाफ सर्तकता विभाग ने गुरुवार को केस दर्ज कर लिया है। विजिलेंस की जांच में फंसे वासुदेव यादव शिक्षा निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल में भी बेहद चर्चित रहे थे।


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी में शामिल समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य वासुदेव यादव के खिलाफ विजिलेंस ने केस दर्ज कर लिया है। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विवेचना शुरू की जा रही है। इससे पहले खुली जांच में विजिलेंस की टीम ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से संपत्ति जुटाने के साक्ष्य एकत्र किए थे। अब शासन की अनुमति लेकर जांच एजेंसी ने अपने कदम को आगे बढ़ाते हुए केस दर्ज किया है।


समाजवादी पार्टी से एमएलसी व पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के विरुद्ध सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने बीते महीने जांच में आय से अधिक संपत्ति प्राप्त की थी। मिली है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजिलेंस विभाग की सिफारिश पर वासुदेव यादव के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने की अनुमति दे दी थी। प्रदेश में सूबे में भाजपा की सरकार के गठन के बाद पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार की कई शिकायतें सामने आई थीं। शासन ने 12 सितंबर 2017 को वासुदेव यादव की संपत्तियों की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने उनके विरुद्ध खुली जांच की, जिसमें एक सितंबर 1978 से 31 मार्च 2014 के बीच वासुदेव यादव की आय के साथ खर्च तथा अॢजत की गईं चल-अचल संपत्तियों की पड़ताल की।


विजिलेंस जांच में सामने आया कि इस अवधि के दौरान वासुदेव यादव की कुल आय करीब 89.42 लाख रुपये थी, जबकि उन्होंने 1.86 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अॢजत कीं। इस जांच में कुल आय से दो गुना से भी अधिक खर्च करने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद विजिलेंस ने उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। उनकी कई अन्य बेनामी संपत्तियों की जानकारियां भी सामने आई हैं। इसके शासन ने न्याय विभाग से विधिक सलाह लेने के बाद एमएलसी वासुदेव के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की अनुमति प्रदान की।

Monday, March 15, 2021

69000 के नवनियुक्त शिक्षकों के एरियर भुगतान में मनमानी का खेल

69000 के नवनियुक्त शिक्षकों के एरियर भुगतान में मनमानी का खेल


बिजनौर। नवनियुक्त शिक्षकों के एरियर भुगतान में मनमानी का खेल होना शुरू हो गया है। एरियर भुगतान को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अवैध वसूली के अड्डे साबित हो रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने नवनियुक्त शिक्षकों के एरियर भुगतान की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि मार्च में शिक्षकों के एरियर का भुगतान नहीं हुआ तो संगठन चुप नहीं बैठेगा।


जिले के परिषदीय प्राइमरी विद्यालय में अक्तूबर में 1000 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। ऑनलाइन नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरते जाने की बात कही गई थी। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में अनियमितता की शिकायतें आनी शुरू हो गईं। कभी शिक्षकों की सेवा पंजिका बनाने के नाम पर तो कभी शिक्षकों की विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट प्रमाणित करने नाम पर अवैध वसूली की बातें सामने आती रहीं। अब नवनियुक्त शिक्षकों के चार महीने की तनख्वाह का भुगतान एरियर के रूप में किया जाना है। शिक्षक आए दिन एरियर भुगतान के लिए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।


वहीं शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद जिन शिक्षकों की तनख्वाह का भुगतान होना शुरू हो गया है उनके एरियर भुगतान में भी मनमानी शुरू हो गई है। चार महीने बाद भी शिक्षकों के एरियर भुगतान के लिए बिल वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। शिक्षक संगठनों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से बीईओ कार्यालय पर हो रही मनमानी की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि मार्च में शिक्षकों के एरियर का भुगतान नहीं हुआ तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। अवैध वसूली में लिप्त कर्मचारियों को चिह्नित कर उनकी शिकायत शासन से की जाएगी। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार मीडिया प्रभारी चौधरी अंगजीत सिंह ने नवनियुक्त शिक्षकों के एरियर का भुगतान अविलंब कराने की मांग की है।


शिक्षकों के साथ किसी भी प्रकार की मनमानी नहीं करने दी जाएगी। मनमानी करने वाले कर्मचारियों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -महेश चंद, बीएसए


एक लिपिक हो चुका है निलंबित
विकास क्षेत्र हल्दौर के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर तैनात एक लिपिक शिक्षकों से अवैध वसूली व अनियमितता करने के मामले में निलंबित भी हो चुका है। लिपिक विनोद कुमार की ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इसका संज्ञान लेते हुए बीएसए ने लिपिक विनोद कुमार को निलंबित कर दिया था।

Saturday, February 6, 2021

आगरा जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में सात वर्ष में 12 अधिकारी, शिक्षक और लिपिक घूस लेते पकड़े गए


आगरा : तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते एआरपी रंगेहाथ गिरफ्तार, मुकदमा दर्ज


आगरा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दल ने शनिवार दोपहर को बरौली अहीर के नगला बिहारी स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। वह प्राथमिक विद्यालय झारपुरा की प्रधानाध्यापिका से अनुपस्थिति लगने पर निलंबन से बचाने के लिए रुपये मांग रहा था। प्रधानाध्यापिका की शिकायत पर टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ लिया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। 



आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग में गत सात वर्षों में 12 अधिकारी, शिक्षक व लिपिक घूस लेते विजिलेंस और एंटी करप्शन टीम की ओर से रंगे हाथ पकड़े गए। वर्ष 2014 से कोई वर्ष ऐसा नहीं गया, जिसमें शिक्षा विभाग से कोई पकड़ा न गया हो। इस सूची में शिक्षक भी हैं, जिनको विभाग की ओर से एवीआरसी और एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) की जिम्मेदारी मिली थी।


पहले पांच, फिर 3 हजार रुपये पर हुआ राजी
एंटी करप्शन टीम के मुताबिक, जितेंद्र कुमार बरौली अहीर ब्लाक के नगला बिहारी स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) भी हैं। नीरजा शर्मा ने जितेंद्र से संपर्क किया। आरोप है कि जितेंद्र कुमार ने निलंबन से बचाने के एवज में पांच हजार रुपये रिश्वत मांगी। बाद में वह तीन हजार रुपये लेकर रिपोर्ट उनके पक्ष में देने को तैयार हो गया।


शिक्षिका ने यूटा से संपर्क किया था
आगरा। यूटा के जिला संयोजक दिनेश चाहर ने बताया कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान व प्रदेश संयोजक विक्रांत पटेरिया के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। जितेंद्र शर्मा के पकड़े जाने के पीछे भी संगठन ने भूमिका निभाई। शिक्षिका ने जिलाध्यक्ष राज सोलंकी से संपर्क किया था, यूटा की टीम ने एंटी करप्शन से शिकायत करने का सुझाव दिया। कई और अधिकारी व कर्मचारी रडार पर हैं। संगठन के पदाधिकारी शनिवार को ताजगंज थाने भी पहुंचे।


ये रही पकड़े गए अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची



थाना ताजगंज के कृपा धाम अपार्टमेंट निवासी नीरजा शर्मा बरौली अहीर स्थित गांव झारपुरा के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका हैं। उन्होंने शुक्रवार को एंटी करप्शन में शिकायत की कि आठ जनवरी को तबीयत खराब होने के कारण वह 30 मिनट पहले प्राथमिक विद्यालय से चली आईं थीं। तभी खंड शिक्षा अधिकारी पहुंच गए। विद्यालय से अनुपस्थित पाकर स्पष्टीकरण मांगा। खंड शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार को स्पष्टीकरण देने के लिए कहा। 


एंटी करप्शन टीम के मुताबिक, जितेंद्र कुमार बरौली अहीर ब्लाक के नगला बिहारी स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक है। वह खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) भी हैं। नीरजा शर्मा ने जितेंद्र से संपर्क किया। 


उसने 18 जनवरी को उनके वाट्सएप नंबर पर स्पष्टीकरण मांगने से संबंधित रिपोर्ट भेजी। उनसे कहा कि वह निलंबित कर दी जाएगी। आरोप है कि जितेंद्र कुमार ने निलंबन से बचने के एवज में पांच हजार रुपये रिश्वत मांगी। उसने कई बार उन्हें फोन करके रकम देने के लिए कहा। वह तीन हजार रुपये लेकर रिपोर्ट उनके पक्ष में देने को तैयार हो गया।


टीम के पकड़ने पर खिड़की से कूदकर भागने लगा
एंटी करप्शन के निरीक्षक जसपाल पवार के मुताबिक, नीरजा शर्मा की शिकायत पर टीम बनाई गई। नीरजा शर्मा ने जितेंद्र कुमार को शनिवार को अपने फ्लैट पर बुलाया। उसके आने से एक घंटे पहले टीम पहुंच गई। उनके फ्लैट के दूसरे कमरे में बैठ गई। जितेंद्र कुमार फ्लैट पर दोपहर तीन बजे पहुंचा। बातचीत के बाद वह रकम लेकर जाने लगा। तभी एंटी करप्शन के निरीक्षक सूरज सिंह बाहर आ गए। 

उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया। उसे जैसे ही पता चला कि एंटी करप्शन की टीम है, वह भागने लगा। फ्लैट की खिड़की से भी कूदने का प्रयास किया। उसे किसी तरक काबू किया गया। फ्लैट से गाड़ी में लाने के दौरान भी हंगामा किया। इस पर लोगों की भीड़ भी लग गई। आरोपी से रिश्वत की रकम बरामद कर ली। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। रविवार को उसे मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।

सांसद की शिकायत पर गोंडा बीएसए के खिलाफ स्वेटर खरीद गड़बड़ी में भी जांच शुरू

सांसद की शिकायत पर गोंडा बीएसए के खिलाफ स्वेटर खरीद गड़बड़ी में भी जांच शुरू 
                                                                                         
गोंडा जिले में दो दिनों पहले स्थान्तरित शिक्षकों की रिलीविंग में धन उगाही के मामले में फंसे बीएसए के खिलाफ डीएम ने एक और जांच के आदेश दिए हैं। कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की शिकायत पर यह जांच शुरू की गई है।


आरोप है कि स्वेटर खरीदने में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। वर्तमान में बीएसए के धन उगाही मामले में तीन सदस्यीय कमेटी पहले ही जांच कर रही है। 


शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ डीएम मार्कण्डेय शाही का एक और एक्शन लिया है। बेसिक शिक्षा विभाग में स्वेटर खरीद में बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति द्वारा  गड़बड़ी  किए जाने की शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम गोंडा राकेश सिंह को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

Thursday, February 4, 2021

हाथरस : बीईओ पर लगा शिक्षक से ड्रेस वितरण पर धन माँगने और अश्लील हरकत करने का आरोप, डीएम से शिकायत

हाथरस : बीईओ पर लगा शिक्षक से ड्रेस वितरण पर धन माँगने और अश्लील हरकत करने का आरोप, डीएम से शिकायत


जिले में तैनात एक खंड शिक्षा अधिकारी पर शिक्षिका ने अश्लील हरकत करने और यूनिफॉर्म वितरण में कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत शिक्षिका ने अपने नाम को छिपाते हुए डीएम से की है। शिकायत की विभागीय जांच चल रही है। इस बीईओ से एक शिक्षक की मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया गया है।


शिकायत में शिक्षिका ने कहा है कि बीईओ ने एक शिक्षक को बिना किसी पद के और बिना संबद्घीकरण के बीआरसी पर लगा रखा है, जोकि शिक्षक-शिक्षिकाओं का उत्पीड़न करता है। शिक्षिका ने अपना नाम व पता छिपाते हुए आरोप लगाया है कि एक दिन उसी शिक्षक ने उसे बीआरसी पर यह कहकर बुलाया कि बीईओ उससे मिलना चाहते हैं।


वहां पहुंचकर शिक्षिका को पता चला कि बीआरसी पर यह शिक्षक और बीईओ बैठे थे। आरोप है कि शिक्षिका को देखकर बीईओ अश्लील हरकत करने लगे और यूनिफॉर्म के प्रति छात्र 140 रुपये मांगने लगे। इस पर शिक्षिका ने असमर्थता जताई। शिक्षिका का यह भी आरोप है कि रुपये न देने पर बीईओ ने शिक्षिका से अपने साथ एक दिन कहीं चलने को कहा। इस पूरे प्रकरण की शिकायत करते हुए संबंधित बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग शिक्षिका द्वारा की गई है।


डीएम के माध्यम से एक शिकायत प्राप्त हुई है। इस संबंध में पहले भी शिकायत मिली थी। अब इस शिकायत की जांच कराई जा रही है, ताकि सही बात सामने आ सके। नोटिस जारी कर संबंधित बीईओ से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। -मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।


साभार - अमर उजाला

Monday, February 1, 2021

CTET : सॉल्वर गिरोह के सदस्यों की बैंक खातों व संपत्ति की जांच शुरू, कई और सदस्य रडार पर

CTET : सॉल्वर गिरोह के सदस्यों की बैंक खातों व संपत्ति की जांच शुरू, कई और सदस्य रडार पर

CTET -2021 :  परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह के सरगना व साल्वर सहित 07 सदस्य गिरफ्तार।

CTET परीक्षा में सेंध : कौशांबी का शिक्षक मुहैया कराता था अभ्यर्थी, होगी विभागीय कार्रवाई

CTET परीक्षा में साल्वर गैंग का भंडाफोड़, दस गिरफ्तार


एसटीएफ की गिरफ्त में आए सॉल्वर गिरोह के सभी सदस्यों की संपत्ति की जांच शुरू हो गई है। उनके बैंक खातों की डीटेल्स निकाली जा रही है। इसके अलावा उनके करीबियों की संपत्ति को भी खंगाला जा रहा है। उनकी कॉल डीटेल्स में कई संदिग्ध लोगों के नंबर मिले हैं। उन्हें भी खंगाला जा रहा है। पुलिस को इस गोरखधंधे में कई लोगों के शामिल होने की आशंका है। जांच में जिनके नाम सामने आएंगे, उन्हें भी वांछित किया जाएगा।




एसटीएफ ने रविवार कोसीटेट की परीक्षा में साल्वर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए प्रयागराज से सरगना प्रशांत सिंह, धर्मेंद्र सिंह, शिवपूजन पटेल, मुनेश कुमार, आदित्य शाही, पूजा देवी और गोरखपुर से यतेंद्र कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। गिरोह ने केपी उच्च शिक्षा संस्थान झलवा और गोरखपुर के इंदिरा गांधी गर्ल्स डिग्री कालेज रामपुर में तीन मूल अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर को बिठाया था। आरोपियों से पूछताछ में एसटीएफ को तमाम अहम जानकारी मिली है। इसके आधार पर पुलिस ने उनके खातों की जांच शुरू कर दी है।

सभी की बैंक डीटेल्स निकाली गई हैं। पुलिस बैंक अधिकारियों से पता करेगी कि उनके या उनके करीबी लोगों के खाते में हाल में कितना ट्रांजैक्शन हुआ है। अन्य संपत्तियों पर भी पुलिस की नजर है। करीबी रिश्तेदार के नाम से खरीदी गई संपत्तियों को भी खंगाला जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उनके कॉल डीटेल्स में कई नंबर मिले हैं, जिनसे सीटेट की परीक्षा से पहले कुछ दिनों में बहुत बातें हुई हैं।

उन नंबरों की भी छानबीन चल रही है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि गिरोह ने न सिर्फ सीटेट परीक्षा बल्कि कई और परीक्षाओं में भी सेंध लगाई है। उसकी भी जांच की जा रही है। एएसपी एसटीएफ नीरज पांडेय ने बताया कि सभी की संपत्तियों की जांच होगी। कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गिरोह के अन्य लोगों की जांच हो रही है। सुबूत पाए जाने के बाद उन्हें भी वांछित किया जाएगा।

तीन छात्रों समेत पांच वांटेड, तलाश में दबिश
एसटीएफ ने रविवार को सॉल्वर गिरोह के सरगना प्रशांत सिंह समेत सात आरोपियों को पकड़ा था। इसमें तीन सॉल्वर भी शामिल थे। पुलिस ने उन तीन छात्रों को भी वांटेड कर दिया है, जिनकी जगह पर साल्वर बैठकर परीक्षा दे रहे थे। तीन छात्रों के अलावा कौशांबी के शिक्षक कमलेश कुमार और जाली आधार व अन्य दस्तावेज बनाने वाले रोहित को भी वांटेड किया गया है। सभी वांछितों की तलाश में दबिश दी जा रही है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।


प्रयागराज : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तरफ से रविवार को कराई गई केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने शिक्षक, इंजीनियर समेत दस आरोपितों की गिरफ्तारी की है। उनके पास से दो कार, बाइक, फर्जी आधार कार्ड, प्रवेश पत्र, चार लाख रुपये का चेक, चेक बुक व 13.50 हजार रुपये नगद मिले हैं। एक अध्यापक व छात्र की तलाश चल रही है।

एसटीएफ प्रयागराज को प्रयागराज और गोरखपुर में साल्वर बैठने की सूचना मिली थी। एएसपी एसटीएफ नीरज पांडेय ने गोरखपुर इकाई को इसकी जानकारी दी। केपी उच्च शिक्षा संस्थान में अभिषेक सिंह निवासी मऊ की जगह आदित्य शाही और बैरहना कीडगंज की इंद्रावती देवी के स्थान पर पूजा देवी परीक्षा दे रही थी। दोनों से पूछताछ के बाद गैंग के सरगना प्रशांत सिंह, धर्मेद्र सिंह व शिवपूजन पटेल व मुनेश को इलाहाबाद विवि की साइंस फैकल्टी कर्नलगंज से गिरफ्तार किया गया। गोरखपुर से यतेंद्र को पकड़ा गया। सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एएसपी का कहना है कि मूल अभ्यर्थी व साल्वर के फोटो कंप्यूटर से मि¨क्सग करके नकल कराते थे। लिखित परीक्षा पास कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी दो लाख रुपये में सौदा हुआ था। साल्वर को 50 हजार रुपये दिए गए थे।

मुरादाबाद में खिलेंद्र सिंह निवासी नजरपुर बैकना जिला बिजनौर के स्थान पर परीक्षा देने आया साल्वर पंकज कुमार निवासी हमीरपुर फरमोर, थाना शेखपुर पटना बिहार तथा मझोला क्षेत्र में राकेश कुमार यादव निवासी गांव सिघराही थाना लदनिया, जिला मधुबनी बिहार को पकड़ा। वह अमरोहा के मोहनपुर सुमराली गांव निवासी इरशाद के स्थान पर परीक्षा देने आया था। मैनपुरी में महेंद्र सिंह (आंबेडकर पार्क, फीरोजाबाद) नामक युवक राहुल वर्मा (इटावा रोड, बेवर) के स्थान पर परीक्षा देते पकड़ा गया।


■ इनकी हुई गिरफ्तारी

● प्रशांत सिंह (सरगना) निवासी चिरैया कोट, मऊ। वर्तमान पता-जनहित कुंज अपार्टमेंट जार्जटाउन-प्रयागराज। राजकीय इंटर कॉलेज अमरोहा में शिक्षक।

● धर्मेंद्र सिंह (सरगना) निवासी कुसुवा मनौरी, कौशांबी। वर्तमान पता- कैलाश अपार्टमेंट जार्जटाउन-प्रयागराज। प्राथमिक विद्यालय उसरी रायबरेली में शिक्षक।

● शिवपूजन पटेल (सॉल्वर) निवासी सुरुवा फतनपुर प्रतापगढ़। वर्तमान पता- ग्रींस अपार्टमेंट हरिद्वार। आरएसपीएल हरिद्वार में इंजीनियर।

● मुनेश कुमार चौहान (अभ्यर्थी) निवासी जबदा, अमरोहा। प्राइवेट स्कूल में अध्यापक।

● आदित्य शाही (सॉल्वर) निवासी खामपार, देवरिया।

● कुमारी पूजा देवी (सॉल्वर) निवासी सलेमपुर, चांदपुर फतेहपुर। प्राथमिक विद्यालय अमौली ¨बदकी फतेहपुर में अध्यापक।

● यतेंद्र कुमार सिंह (सॉल्वर) निवासी भुजौलीकला, विजयीपुर गोपालगंज बिहार। वर्तमान पता- आवास विकास कॉलोनी, झारखंडी गोरखपुर।

■ यह हैं फरार आरोपित

● कमलेश तिवारी निवासी सैयद सरावा, पूरामुफ्ती, कौशांबी। प्राथमिक स्कूल में अध्यापक।

● रोहित निवासी हालैंड हॉल हॉस्टल, कर्नलगंज-प्रयागराज। छात्र।

प्रयागराज : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) की लिखित परीक्षा में सेंध लगाने वाला एक संगठित गिरोह है। गैंग के हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका होती थी। स्पेशल टॉस्क फोर्स एसटीएफ को पूछताछ में पता चला है कि कौशांबी के पूरामुफ्ती, सैयद सरांवा गांव में रहने वाला कमलेश गैंग को कंडीडेट मुहैय्या कराता था।


वह एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए सरगना धर्मेद्र और प्रशांत को डेढ़ से दो लाख रुपये देता था। खुद अभ्यर्थी से कितना पैसा लेता था, यह उसकी गिरफ्तारी पर पता चल सकेगा। एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि कमलेश भी एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक है। इस कारण वह दूसरे शिक्षकों की मदद से अभ्यर्थियों तक पहुंचता रहा होगा। उसके पकड़े जाने के बाद कुछ और लोगों का नाम प्रकाश में आ सकता है। वहीं, हॉलैंड हॉल हॉस्टल में रहने वाला रोहित कंप्यूटर की मदद से मूल अभ्यर्थी और सॉल्वर की फोटो मि¨क्सग करके फर्जी एडमिट कार्ड और आधार कार्ड बनाने का काम करता था। एक अभ्यर्थी के लिए वह 20 हजार रुपये लेता था। रोहित के पकड़े जाने पर उसकी कारस्तानी और दूसरी जानकारी सामने आएगी। एसटीएफ का यह भी दावा है कि अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि वह पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं। फर्जीवाड़ा करके फ्लैट और प्लॉट खरीदने की तैयारी भी कर रहे थे।

सॉल्वरों को पहले मिल गया था पैसा :

गिरफ्तार सॉल्वर शिवपूजन ने पूछताछ में बताया कि उसे दूसरी पाली में दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देनी थी। उसे 50 हजार रुपये पहले ही मिल गए थे।  वहीं, अभ्यर्थी मुनेश ने बताया कि उसकी परीक्षा दूसरी पाली में थी। सॉल्वर उपलब्ध कराने के लिए उसने गिरोह के सरगना प्रशांत सिंह व धर्मेंद्र को पहले ही दो लाख रुपये दे चुका था। अभिषेक की जगह परीक्षा देते समय पकड़ा गया आदित्य शाही ही उसका पेपर हल करता, मगर पकड़ा गया। एसटीएफ अभ्यर्थी अभिषेक व इंद्रावती की भी तलाश कर रही है।


परीक्षा केंद्र पर छापेमारी, विवाहिता बनकर बैठी थी पेपर साल्व करने

परीक्षा केंद्र में छापेमारी के दौरान कुमारी पूजा को देख एसटीएफ की टीम हैरत में पड़ गई। पूजा की शादी नहीं हुई है, लेकिन वह पेपर सॉल्व करने के लिए विवाहिता बन गई थी। चूंकि मूल अभ्यर्थी इंद्रावती विवाहित महिला है, इसके चलते पूजा ने अपने मांग में सिंदूर भर रखा था। पूछताछ में अभियुक्ता ने इस तथ्य को उजागर किया।

शिक्षकों पर होगी विभागीय कार्रवाई

गैंग का सरगना प्रशांत सिंह इंटर कॉलेज और धर्मेंद्र प्राथमिक स्कूल में शिक्षक है। जबकि सॉल्वर पूजा देवी भी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका है। फरार कमलेश भी अध्यापक है। एएसपी एसटीएफ नीरज पांडेय ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि उन्हें नौकरी कैसे मिली थी। फिलहाल सभी पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इंजीनियर के संस्थान में भी एसटीएफ उसके पत्र भेजेगी।

Friday, January 8, 2021

गोंडा : भ्रष्टाचार की शिकायत पर BEO निलंबित, शिक्षक से रुपये मांगने का आरोप

गोंडा : भ्रष्टाचार की शिकायत पर BEO निलंबित, शिक्षक से रुपये मांगने का आरोप


गोंडा : भ्रष्टाचार के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। इन पर एक शिक्षक ने रुपये मांगने का आरोप लगाया था।


जांच में प्रथम दृष्टया दोषी मिलने पर कार्रवाई की गई है। इटियाथोक के प्राथमिक विद्यालय अहिरौलिया के सहायक अध्यापक सुशील कुमार अग्रहरि ने बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार को शिकायती पत्र भेजा था। जिसमें बीईओ ओम प्रकाश पाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक विनय मोहन वन ने उनके निलंबन की पुष्टि की है।


Sunday, January 3, 2021

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

विधायक की शिकायत पर बीएसए रामपुर के खिलाफ जांच के आदेश, बनी संयुक्त जांच कमेटी को 15 दिन में करनी होगी जांच

● संयुक्त शिक्षा निदेशक व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक बरेली की बनी संयुक्त जांच कमेटी

● मिलक विधायक ने की थी शिकायत शासन ने दिए जांच के आदेश

शासन ने विधायक की इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में शासन ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है जिसमें जेडी और एडी बरेली को शामिल किया गया 


रामपुर। विधायक राजबाला की शिकायत पर बीएसए ऐश्वर्य लक्ष्मी के खिलाफ जांच बैठा दी गई है। इसके लिए बरेली के (जेडी) संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं बरेली के ही (एडी) मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें शासन ने कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए हैं। मिलक विधायक राजबाला ने भी पिछले दिनों इसे लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। इसमें उन्होंने तमाम गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के निलंबन एवं बहाली में खेल किया जा रहा है।


शिक्षकों को बिना समुचित कारण के निलंबित कर दिया जाता है और फिर उन्हें बहाल कर सुविधाजनक विद्यालय में पद स्थापित कर दिया जाता है। शिक्षकों के संबद्धीकरण में भी गड़बड़ी की जा रही है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। महिला शिक्षिकाओं के सीसीएल के आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी की जाती है। उन्होंने मृतक आश्रितों की नियुक्ति समेत एडेड विद्यालयों में नियुक्ति को लेकर भी तमाम गंभीर आरोप लगाए हैं।


कमेटी को पंद्रह दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी। जेडी ने इस मामले में बीएसए को पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। साथ ही शिकायत के विभिन्न विंदुओं पर बिंदुवार रिपोर्ट तलब की है।


Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

Saturday, December 26, 2020

औरैया : घूस मांगते डीआइओएस का आडियो वायरल, मृतक आश्रित से मांग रहे थे रकम, डीआईओएस के साथ आरोपित क्लर्क भी निलंबित

कार्रवाई : घूस मांगते डीआइओएस का आडियो वायरल, निलंबित

▪️औरैया के डीआइओएस मृतक आश्रित से मांग रहे थे रकम

▪️आरोपित क्लर्क संतोष भी निलजित, पीड़ित को बेवजह दौड़ा रहे थे

लखनऊ : घूस मांगने का आडियो वायरल होने के बाद औरैया के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) हृदय नारायण त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया है। जांच में उन पर मृतक आश्रित कोटे से सहायक लिपिक पद पर |नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले सुशील कुमार यादव से घूस मांगे जाने का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया है।

डीआइओएस ने जांच अधिकारी व कानपुर के मंडलीय सहायक | शिक्षा निदेशक केके गुप्ता के समक्ष |स्वीकार किया कि बीती 22 दिसंबर को वायरल हुए ऑडियो में उनकी ही आवाज है। मामले में शामिल | डीआइओएस कार्यालय के क्लर्क संतोष बाबू को भी निलंबित कर | दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की ओर से डीआइओएस के निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए हैं। फिलहाल उन्हें माध्यमिक शिक्षा निदेशक के शिविर कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

दलीपपुर स्थित किसान विद्यापीठ इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक अमर सिंह की मृत्यु 28 फरवरी, 2017 को हो गई थी। पिता की मौत के बाद मृतक आश्रित के रूप में सहायक लिपिक पद पर सुशील कुमार यादव ने आवेदन किया, लेकिन उनकी नियुक्ति की फाइल बार बार अड़ंगा लगाया जा रहा था। डीआइओएस कार्यालय में तैनात क्लर्क संतोष बाबू पीड़ित से कभी 10 लाख, कभी सात लाख और कभी तीन लाख रुपये की डिमांड मोबाइल फोन पर कर रहा था। डीआइओएस भी पीड़ित सुशील कुमार यादव से रकम की मांग कर रहे थे।

कानपुर मंडल के जेडी माध्यमिक केके गुप्ता ने बताया कि जांच के बाद डीआइओएस हृदय नारायण को निलंबित कर दिया गया है। उनके स्थान पर डीआइओएस इटावा अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। लिपिक संतोष को भी निलंबित किया गया है।

Tuesday, December 22, 2020

रिश्वत लेते गिरफ्तार बीईओ को भेजा जेल, एंटी करप्शन टीम ने था पकड़ा


रिश्वत लेते गिरफ्तार बीईओ को भेजा जेल, एंटी करप्शन टीम ने था पकड़ा।


 शिक्षक से रिश्वत लेते गिरफ्तार प्रतापगढ़ के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुनील कुमार को विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ओम प्रकाश मिश्र ने बुधवार को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। सतर्कता अधिष्ठान, प्रयागराज की टीम ने उन्हें मंगलवार को गिरफ्तार किया था।

प्रतापगढ़ के मंगरौरा ब्लाक स्थित एक पूर्व माध्यमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक ने 18 दिसंबर, 2020 को पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, प्रयागराज से खंड शिक्षा अधिकारी के रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि नवंबर, 2019 से मई, 2020 तक का 2.20 लाख रुपये उनका एरियर भुगतान होना है। औपचारिकता पूरी करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी 20 हजार रुपये रिश्वत मांग रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने मंगलवार को खंड शिक्षा अधिकारी को प्राथमिक विद्यालय मदाफरपुर के पास रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को आरोपित बीईओ को गोरखपुर में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।


प्रतापगढ़ में BEO को विजिलेंस टीम ने 10 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ दबोचा।

घूसखोर बीईओ का विवादों से रहा है नाता, साल भर पहले भी गया था जेल

कोई भी हो काम, घूसखोर बीईओ ने तय कर रखे थे दाम


शिक्षक मुकेश कुमार दुबे ने इसकी शिकायत विजिलेंस प्रयागराज से की थी। इसके बाद विजिलेंस की टीम ने घेरेबंदी कर बीईओ सुशील कुमार कनौजिया को मंगरौरा बीआरसी कार्यालय से दबोच लिया। गिरफतार बीईओ कोंहड़ौर थाने लाया गया। जहां उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

प्रतापगढ़ के कोंहड़ौर थाने में नीली कोट पहने घूस लेने का आरोपित खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार कनौजिया।


प्रयागराज । यूपी के प्रतापगढ़ जिले में मंगलवार दोपहर शिक्षा विभाग के एक अधिकारी का घूस लेते रंगेहाथ पकड़े जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रयागराज विजलेंस की टीम खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार कनौजिया को 10 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। आरोपित खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कोंहड़ौर थाने में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

शिक्षक से एरियर के एवज में बीईओ ने मांगा था बीस हजार रुपये

मंगरौरा के बी ई ओ सुशील कुमार कनौजिया को मंगलवार को दिन में तीन बजे 10 हजार रुपये के साथ विजिलेंश की टीम ने मंगरौरा के बीआरसी कार्यालय से गिरफ्तार किया। आरोप है कि बीईओ ने ब्‍लॉक के चंदीपुर पूर्व माध्यामिक स्‍कूल के सहायक अध्यपक मुकेश कुमार दुबे से एरियर निकालने के एवज बीस हजार रुपये की मांग की थी।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

शिक्षक मुकेश कुमार दुबे ने इसकी शिकायत विजिलेंस प्रयागराज से की थी। इसके बाद विजिलेंस की टीम ने घेरेबंदी कर बीईओ सुशील कुमार कनौजिया को मंगरौरा बीआरसी कार्यालय से दबोच लिया। गिरफतार बीईओ कोंहड़ौर थाने लाया गया। जहां उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। सुशील कुमार मूल रूप से ग्राम रसिकापुर, थाना महराजगंज जिला जौनपुर का रहने वाला है। विजिलेंस टीम के मुताबिक गिरफतार खंड शिक्षा अधिकारी की गोपनीय जांच कराई तो यह पाया कि बीईओ सुशील कुमार की आम शोहरत ठीक नहीं है। उसकी आम शोहरत एक घूसखोर अफसर के रूप में है।


साल भर पहले भी गया था जेल 
रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा खंड शिक्षाधिकारी सुशील कुमार कनौजिया मई 2019 में हरदोई जिले में तैनाती के दौरान जेल गया था। वह मल्लावां ब्लाक में तैनात था | वहां 19 मई 2019 को बच्चों के नामांकन को लेकर बैठक चल रही थी | बैठक में उसका बिलग्राम के बीइओ से विवाद और मारपीट हो गई थी। इस मामले में वहां के बीएसए हेमंत राव ने सुशील कुमार के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।



Thursday, December 17, 2020

हरदोई : स्वेटर वितरण में धांधली, अब तक 18 हजार स्वेटर बदलवाए गए

हरदोई : स्वेटर वितरण में धांधली,  अब तक 18 हजार स्वेटर बदलवाए गए


बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से गरीब बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए मुफ्त स्वेटर वितरण की योजना पर भी भ्रष्टाचारी तंत्र ने ग्रहण लगा दिया है। सत्यापन के दौरान स्वेटरों की गुणवत्ता खराब निकल रही है। अब तक 18 हजार स्वेटर बदलवाए जा चुके हैं। भाजपा के सांसद व विधायकों ने भी इस पर नाराजगी जताई है।


हरदोई जिले के 19 विकास खंडों में 3500 से ज्यादा परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले साढ़े चार लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं को स्वेटर बांटे जा रहे हैं। एक स्वेटर के लिए सरकार ने 200 रुपये की धनराशि निर्धारित की है। टेंडर पाने के लिए एक निजी कंपनी ने 165 रुपये में स्वेटर देने का दावा किया। इस पर उससे चार लाख 59 हजार 39 स्वेटर खरीदने के लिए क्रय आदेश जारी कर दिया गया। वितरण के लिए आखिरी तारीख 30 नवंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन इस अवधि में शत प्रतिशत स्वेटर नहीं बंट सके।


बेसिक शिक्षा विभाग के प्रगति आंकड़ों के अनुसार 14 दिसंबर तक जिले भर में 65 फीसदी बच्चों को ही स्वेटर बंट पाए हैं। वहीं जहां बांटे गए हैं वहां स्वेटर की क्वालिटी व वजन मानक के अनुसार न होने के मामले भी उजागर होने लगे हैं। अब तक सरकारी आंकड़ों में ही टड़ियांवा विकास खंड में 10 हजार और सण्डीला ब्लॉक क्षेत्र में लगभग 8000 स्वेटर गुणवत्ताहीन निकल चुके हैं।


सवायजपुर के भाजपा विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह के प्रतिनिधि रजनीश त्रिपाठी का कहना है कि अधोमानक स्वेटर बांटने की शिकायतें मिली हैं। गुणवत्ताविहीन स्वेटर देना निंदनीय है। विधायक जी के साथ वह खुद स्कूलों में जाकर स्वत: निरीक्षण करेंगे। अभिभावकों से जानकारी लेंगे। खराब स्वेटर बदलवाएंगे। अनियमितता करने वालों के खिलाफ जांच व कार्रवाई कराएंगे। बीजेपी सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीब बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार स्वेटर मिलना चाहिए। गड़बड़ी को गंभीरता से लिया गया है। सरकारी की योजना में अनियमितता करने वालों को दंडित कराया जाएगा। बीएसए, जिलाधिकारी से वार्ता कर सुधार कराएंगे।


जिला समन्वयक अमित वर्मा का कहना है कि सभी चार लाख 59 हजार 39 स्वेटरों की आपूर्ति हो चुकी है। इन्हें ब्लाकों में भेजकर बंटवाया जा रहा है। टड़ियांवा व सण्डीला में सत्यापन आख्या आने पर गुणवत्ता खराब होने की जानकारी मिली थी। इस पर दोनों जगह खराब स्वेटर वापस कर उन्हें बदलवा दिया गया है।


जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमन्तराव का कहना है कि गुणवत्ताहीन स्वेटर निकलने पर आपूर्ति कर्ता फर्म को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। मानकों के अनुरूप न निकलने वाले स्वेटरों को वापस कराएंगे। भुगतान में कटौती की भी कार्रवाई की जाएगी।

Sunday, December 13, 2020

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार, कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई, यह है पूरा मामला

मृतक आश्रितों की नियुक्तियों में मनमानी में फंसेंगे कई जिम्मेदार

भ्रष्टाचार की शिकायत पर विजिलेंस कर रही है नियुक्तियों की जांच, जिम्मेदारों से की जा रही पूछताछ

पहले मरने वाले आश्रितों को बाद में दी नौकरी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी


आगरा : बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों की नियुक्ति में अधिकारी और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकता है। नियुक्तियों में मनमानी की शिकायत शासन में की गई थी। मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। दो साल से चल रही जांच ने अब तेजी पकड़ ली है। विजिलेंस द्वारा जिम्मेदार लोगों से पूछताछ की जा रही है।

शिक्षा विभाग में छह साल के दौरान दो दर्जन से ज्यादा नियुक्तियां हुई थीं। नियमानुसार ड्यूटी के दौरान विभाग के जिन कर्मचारियों या शिक्षकों की मृत्यु पहले हुई थी, उनके आश्रितों को पहले नौकरी मिलनी चाहिए थी। विभाग के जिम्मेदार लोगों ने ये नियुक्तियां वरीयता क्रम के अनुसार न देकर अपने हिसाब से दीं। जिन लोगों की मृत्यु बाद में हुई थी। उन्हें पहले नियुक्ति दे दी गई। वहीं जिन लोगों की पहले मृत्यु हुई थी। उनके आश्रितों को बाद में नियुक्ति दी, जो कि उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी। मृतक आश्रितों ने विभाग की इस मनमानी और अनियमितता की शिकायत शासन से की थी। शासन ने दो साल पहले विजिलेंस को मामले की जांच सौंपी ।

विजिलेंस ने जांच शुरू करते हुए नियुक्ति से संबंधित रिकार्ड तलब किया। उसे कई महीने तक यह रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। विजिलेंस से कहा गया कि फाइल नहीं मिल रही है। इसके बाद विजिलेंस ने शिक्षा विभाग के जिन कर्मचारियों के पास यह रिकार्ड था, उसे भी अपनी जांच में शामिल कर लिया। बताया जाता है कि विभाग के लोगों से पूछताछ के लिए विजिलेंस ने सवालों की पूरी सूची तैयार की है। इसी के आधार पर पूछताछ होगी।


बेसिक शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई अब हो सकती है, जल्द ही इसमें शासन की ओर आदेश निर्देश जारी हो सकते हैं। दरअसल पूरा मामला मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर है। इस मामले में दो साल पहले शासन को शिकायत मिली थी, जिसके बाद बिजलेंस जांच चल रही थी। ​बताया जा रहा है मृतक आश्रित के तहत नौकरी दिए जाने पर बड़े स्तर पर खेल हुआ, इसकी लिखित शिकायत शासन में की गयी थी। अब शासन ने नियुक्ति से जुड़ी सभी फाइलों को तलब किया है।


नियुक्ति में शमिल लोगों की भूमिका की जांच
​मृतक आश्रित कोटे के तहत हुई नियुक्तियों की भूमिका भी जांच की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों से पूछता भी चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विभाग के उच्च अधिकारियाों की माने तो कार्रवाई का दायरा बड़ा हो सकता है।


अभी तक करीब 28 नियुक्तियां की गयी, जिसमें इस तरह हुआ खेल
​बताया जा रहा है ​कि पिछले समय से लेकर अभी तक विभाग ने 28 सीटों पर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति की गयी है। इसमें नियम था कि जो आॅन ड्यूटी के दौरान कर्मचारी या शिक्षक मरा है तो उसके आश्रित को पहले नौकरी दी जानी चाहिए। लेकिन ऐसा न करके अधिकारियों ने खेल कर दिया और पहले आओ पहले पाओ के आधार पर नियुक्ति दे दी है। इस संबंध में आश्रितों के ​परिजनों ने लिखित शिकायत शासन में की थी। जिसके बाद अब सरकार एक्शन मे हैं।


शैक्षिक योग्यता का भी नहीं रखा ध्यान
मृतक आश्रित कोटे के तहत ​दी गयी नियुक्तियों में अधिकारियों ने ​शैक्षिक योग्यता का भी ध्यान नहीं रखा। शिकायत के बाद शासन ने दो साल पहले ही बिजलेंस को जांच सौपी थी अब एक फिर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो चुका है।

दस्तावेज सत्यापन के नाम पर मनमानी का खेल हुआ फेल, आखिर अनुदेशकों को वापस करने लगे सत्यापन की डीडी

दस्तावेज सत्यापन के नाम पर मनमानी का खेल हुआ फेल, आखिर अनुदेशकों को वापस करने लगे सत्यापन की डीडी


परिषदीय स्कूल
▪️दस्तावेज सत्यापन के लिए रुपये मांगने का आरोप
▪️एक हजार रुपये तक का डिमांड ड्राफ्ट बनवा रहे।


प्रयागराज : परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों से दस्तावेज सत्यापन के लिए लिया गया डिमांड ड्राफ्ट वापस होने लगा है । आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने 8 दिसंबर के अंक में अनुदेशकों से नियम विरुद्ध सत्यापन फीस लेने का समाचार प्रकाशित किया था। दबाव बढ़ने के बाद सत्यापन फीस के रूप में लिया गया डिमांड ड्राफ्ट वापस किया जाने लगा है। चाका ब्लॉक में सभी अनुदेशकों का डिमांड ड्राफ्ट वापस कर दिया गया है। 


अनुदेशकों से अलग-अलग विश्वविद्यालय और बोर्ड की सत्यापन फीस के रूप में 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक के डिमांड ड्राफ्ट जमा करवाए गए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद सभी अनुदेशकों को बुलाकर डीडी वापस कर दिया गया। उच्च प्राथमिक अनुदेशक कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष भोलानाथ पांडेय का कहना है कि सोरांव समेत अभी कुछ ब्लॉकों में अनुदेशकों को सत्यापन फीस वापस नहीं की गई है। 


सरकार ने अधिकारियों को अनुदेशकों के दस्तावेज सत्यापन के निर्देश दिए थे। इस मद में बजट जारी नहीं हुआ। खंड शिक्षाधिकारियों ने मनमाने तरीके से महज सात हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पाने वाले अनुदेशकों से ही फीस जमा करवाना शुरू कर दिया।माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों का सत्यापन बजट न होने के कारण नहीं हो सका है।

Thursday, December 10, 2020

रामपुर : नवनियुक्त शिक्षकों से मेडिकल के नाम पर वसूली, तीन कर्मी नपे

रामपुर : नवनियुक्त शिक्षकों से मेडिकल के नाम पर वसूली, तीन कर्मी नपे


रामपुर 
शिक्षकों का मेडिकल कराने के नाम पर एक-एक हजार रुपये वसूली किए जाने का मामलातूल पकड़ गया है। मेडिकल के नाम पर एक-एक हजार रुपये वसूले जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है। सीएमओ ने इस मामले में अपने स्टेनों को मेडिकल के काम से हटा दिया है,जबकि दो संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी है। इस प्रकरण की जांच बैठा दी गई है। साफ किया गया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


मुख्यमंत्री की मंशा भले ही भ्रष्टाचार मुक्त सरकारी नौकरी देनी की रही हो, लेकिन अफसरशाही सीएम की मंशा पर पानी फेर रहे हैं । हाल ही में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से शिक्षकों की भर्ती की प्त्रिरया की गई है। इसके तहत रामपुर में नौ सौ से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। काउंसलिंग के बाद उनको नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिए गए थे। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद अब उनको स्कूलों का आवंटन होना है। इससे पहले नियमानुसार उनका मेडिकल भी कराया गया था सोमवार को मेडिकल कराने की कार्रवाई शुर की गई थी। इस बीच तमाम शिक्षकों ने मेडिकल सर्टिफिकेट के नाम पर एक- एक हजार रुपये वसूले जाने का भी आरोप लगाया। हालांकि इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग विभाग शुरू में इन आरोपों को नाकारता रहा। 


विभागीय अफसरों व कर्मियों पर एक-एक हजार रुपये वसूले जाने का मामला अब गर्मा गया है। मामला गर्माने पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अमला स्त्रिरय हो गया है। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने इस मामले में सीडीओ व मुख्य चिकित्साधिकारी डा.सकोच कुमार शर्मा ने भी इस मामले की जांच के लिए तीन उप मुख्य चिकित्साधिकारियों की कमेटी बनाई है। जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। देर शाम सीएमओ ने इस मामले में संविदा पर तैनात दो कर्मियों संजय और अरुण की सेवा समाप्त कर दी है. जबकि उन्होंने अपने स्टेनों नीरज को मेडिकल के काम से हटा दिया।


कोर्ट कर्मियों के मेडिकल में भी हुई घपलेबाजी

रामपुर। मेडिकल के नाम पर अवैध वसूली करने का मामला दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ भी उठा चुका है। संघ की ओर से पिछले दिनों संघ के अध्यक्ष संदेश कुमार व सचिव कुलदीप कुमार ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि कोर्ट में आशुलिपिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियोंकी नियुक्ति की र्विरया चल रही है, इन पदों पर चयनित कर्मियों के मेडिकल कराने के नाम पर सीएमओ दफ्तरमें तैनात आशुलिपिक ने 1300 रुपये वसूले जा रहे हैं। मगर, कुछ दवाब डालने पर एक हजार रुपये वसूले गए हैं। चयनितकर्मियों ने इस तरह की शिकायत करते हुए सीएमओ की आशुलिपिक के खिलाफ कार्रवाई करने की।


आखिर किसकी शह पर हो रही वसूली

रामपुर। चयनित कर्मियों के मेडिकल के नाम पर आखिर किसकी शह पर वसूली हो रही है। यह सवाल बड़ा है क्योंकि पहले ही दिन कई शिक्षकों ने इस मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अफसरों से की,लेकिन अफसर उस वक्त आरोपों को नकारते रहे। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मामला तूल पकड़ लिया तो अब जांच कर कार्रवाई की बात कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि यह जांच सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगी या फिर इसमें कोई ठोस कार्रवाई भी होगी।


वसूली करने वालों पर होकार्रवाई

रामपुर। नवनियुक्त शिक्षकों से मेडिकल प्रमाणपत्र के नाम पर सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा घूस लेने पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने रोष जताया है। चेतावनी दी है कि अगर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ आंदोलन करेगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की बैठक में कहा गया कि अस्पताल के सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों द्वारा जिले में नवनियुक्त शिक्षकों से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है शिक्षकों से वसूली करते हुए कर्मचारी का वीडियो भी वायरल हुआ है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। जिला संयोजक रवेन्द्र गंगवार ने कहा कि अगर घूसखोरी में लिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही ना हुई तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ आंदोलन करेगा। अहसान खान, लालता प्रसाद,गौरव गंगवार, विनीत कुमार, राजीव कुमार, दिनेश कुमार, सोनी गुप्ता, बबीता जोशी, सुरेश गंगवार, नरेंद्र रहे।

मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाए।

"स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल के नाम पर एक-एक हजार वसूली की लिखित शिकायत नहीं मिली है,लेकिन सोशल मीडिया पर मिल रही शिकायतों के आधार पर सीडीओ व नगर मजिस्ट्रेट को जांच सौंप दी गई है।" -आन्जनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी


"मेडिकल के नाम पर शिक्षकों से वसूली की शिकायतें मिली हैं। इसके लिए एक जांच कमेटी बना दी गई है। प्रथम दृष्टया स्टेनों को मेडिकल के काम से हटा दिया गया है साथ ही दो संविदा कर्मियों की सेवा भी समाप्त कर दी गई है।जांच कमेटी रिपोर्ट देगी।" -डा.सुबोध कुमार शर्मा, सीएमओ

Friday, November 13, 2020

डीएलएड परीक्षा के दोनों पाली में आउट हुए थे पर्चे, गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, दो हजार में उपलब्ध कराते थे डीएलएड का पेपर

डीएलएड परीक्षा के दोनों पाली में आउट हुए थे पर्चे,  गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, दो हजार में उपलब्ध कराते थे डीएलएड का पेपर


इटावा : डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) -2018 के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में बुधवार को दोनों पाली के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। मामले में पुलिस ने सॉल्वर गैंग से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके खिलाफ कॉलेज के प्रधानाचार्य संजय शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराया है, वहीं तीन फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।


एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि बुधवार को प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बचन सिंह को डीआइओएस राजू राणा और सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व केंद्र व्यवस्थापक संजय शर्मा ने डीएलएड परीक्षा-2018 की द्वितीय पाली के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के आउट होने की जानकारी दी। कुछ अभ्यर्थियों के वाट्सएप पर भी प्रश्नपत्र उपलब्ध होने की बात बताई। 


इस पर प्रभारी निरीक्षक ने इटावा के फ्रेंड्स कालोनी थाना के श्यामनगर भरथना रोड निवासी शिवम यादव, जसवंतनगर के जनकपुर निवासी मनीष कुमार सिंह, बसरेहर के पत्तापुरा निवासी निखिल कुमार, मूल रूप से इटगांव व हाल पता फ्रेंड्स कालोनी थाना के शिवपुरीशाल पचावली निवासी प्रशांत कुमार सिंह और नई मंडी यदुवंश नगर निवासी सचिन कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित सचिन कुमार ने बताया कि दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति तय करके वाट्सएप पर पेपर उपलब्ध करा रहे थे।

Thursday, November 12, 2020

शामली : 50 हजार रुपये रिश्‍वत लेते रंगे हाथ पकड़ी गईं खंड शिक्षा अधिकारी, हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी

शामली : 50 हजार रुपये रिश्‍वत लेते रंगे हाथ पकड़ी गईं खंड शिक्षा अधिकारी, हिरासत में लेकर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी

शामली : यूनिफॉर्म के लिए रिश्वत लेते बीईओ गिरफ्तार


शामली । शामली में मेरठ से आई विजिलेंस की 10 सदस्य टीम ने 50 हज़ार रुपए की रिश्वत लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी कैराना को रंगे हाथों उनके आवास से हिरासत में लिया। खंडी शिक्षा अधिकारी से टीम ने सदर कोतवाली में पहुंचकर पांच घंटे तक पूछताछ की। टीम खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ विभिन्न संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।


इनकी थी शिकायत

कैराना क्षेत्र के गांव तितरवाड़ा निवासी सत्यपाल रुहेला के पास सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ड्रेस का कपड़ा देने का ठेका था। सत्यपाल रुहेला ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी राज लक्ष्मी द्वारा प्रति बच्चा सौ रुपये रिश्वत की बात कहीं जा रही थी। सत्यपाल रुहेला ने कुछ दिन पूर्व मेरठ की विजिलेंस टीम को मामले की शिकायत की थी। इस दौरान सत्यपाल रुहेला ने खंड शिक्षा अधिकारी से पैसे की लेन-देन की बात कर ली थी।


विजिलेंस टीम ने ऐसे बिछाया था जाल

बुधवार की सुबह करीब आठ बजे सत्यपाल के साथ मेरठ से आई तीन महिला समेत दस सदस्य टीम सदर कोतवाली क्षेत्र के काका नगर में पहुंची। सत्यपाल रुहेला ने खंड शिक्षा अधिकारी के घर के अंदर जाकर 2-2 हजार रुपये के 25 नोट कुल पचास हजार रुपये सौंपे। सत्यपाल के घर से बाहर निकलते ही टीम ने घर के अंदर जाकर खंड शिक्षा अधिकारी राज लक्ष्मी को रंगे हाथों पकड़कर हिरासत में ले लिया।


सुबह आठ बजे से ही सदर कोतवाली में सुबह आठ बजे से ही खंड शिक्षा अधिकारी से विजिलेंस टीम पूछताछ कर रही है। विजिलेंस की टीम द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी कैराना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।

इन्होंने कहा...

खंड शिक्षा अधिकारी को विजिलेंस टीम ने हिरासत में लिया है, यह मामला मेरे संज्ञान में नही है। यदि उन्होंने गलत किया होगा, तभी टीम ने उन्हें हिरासत में लिया है। - गीता वर्मा, जिला बेसिक अधिकारी शामली


मेरठ से आई टीम सुबह से खंड शिक्षा अधिकारी से पूछताछ कर रही है। अभी टीम कुछ नही बताया है। फिलहाल खंड शिक्षा अधिकारी से टीम पूछताछ कर रही है। - सत्यपाल सिंह, कोतवाली प्रभारी शामली  

Tuesday, October 20, 2020

रामपुर : बेसिक शिक्षा में घपलेबाजी, बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति

रामपुर : बेसिक शिक्षा में घपलेबाजी, बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति


रामपुर : बेसिक शिक्षा विभाग में सरकारी योजनाओं में भी घपलेबाजी की जा रही है। जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई कमेटी ने कई घपले पकड़े हैं। कमेटी ने बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज ने पिछले दिनों बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण किया था तब कई अनियमितताएं सामने आई थीं। उन्होंने व्यवस्था सुधारने के निर्देश देते हुए चेतावनी जारी की, लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ। 


मुख्य विकास अधिकारी ने दोबारा निरीक्षण किया तो फिर अनियमितताएं सामने आईं, इसके बाद जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बेसिक शिक्षा विभाग की विस्तृत जांच कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बना दी। इस कमेटी में अपर जिलाधिकारी प्रशासन जगदंबा प्रसाद गुप्ता, दो इंजीनियर व कोषाधिकारी भी शामिल किए गए। इंजीनियरों द्वारा स्कूलों में कराए गए निर्माण कार्यों की जांच की गई। जांच पड़ताल के दौरान कई अनियमितताएं पकड़ में आईं। 


सीडीओ ने बताया कि स्कूलों की चाहरदीवारी कराने के लिए एक करोड़ रुपये मिले थे, जो डीएम के संज्ञान में लाए बिना ही वापस कर दिए गए। एडीएम के मुताबिक कई शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया और फिर उन्हें सवेतन बहाल कर दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि फर्नीचर बनवाने में भी अनियमितता बरती गई। लोहा कम लगाया गया। ड्रेस के वितरण में भी आनाकानी की गई। 


उन्होंने बताया कि बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपर मुख्य सचिव को लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी और बाबू मनमानी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी केएल साश्वत के खिलाफ भी शासन को लिखा था, जिस पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

Monday, October 19, 2020

निशाने पर उच्च शिक्षा निदेशालय के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी

निशाने पर उच्च शिक्षा निदेशालय के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी

 
प्रयागराज : उच्च शिक्षा निदेशालय के कार्यो में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाने के लिए अधिकतर काम ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों व कर्मचारियों के निदेशालय आने पर रोक लगाकर ई-मेल के जरिए शिकायत-प्रार्थना पत्र भेजने का निर्देश है। अब उन अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची तैयार हो रही है, जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उनका ब्योरा शासन को भेजा जाएगा।


उच्च शिक्षा निदेशालय पर अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं। पटलों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर शासन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाने के लिए सिटीजन चार्टर कमेटी गठित की गई है। कमेटी को पेंशन, जीपीएफ सहित समस्त मामलों की फाइलें एक सप्ताह के अंदर निस्तारित करने का निर्देश दिया है। फाइल लंबित होने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी को उसका कारण लिखित रूप से बताना होगा। साथ ही उन अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है जो सालों से एक पटल पर जमे हैं और उनके खिलाफ शासन को शिकायत भेजी गई है। उनके कार्यो की गुप्त समीक्षा चल रही है। इसमें वो कहां कितने समय से काम कर रहे हैं? प्रतिदिन कितनी फाइलें निस्तारित करते हैं? कौन सी फाइल कितने दिनों तक रोकी गई? पटल का पर्वितन क्यों नहीं हुआ? आदि का ब्योरा एकत्र करके रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप हर काम पारदर्शी बनाने की दिशा में काम चल रहा है। आने वाले दिनों में कई बदलाव होंगे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

Sunday, September 20, 2020

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO और 2 शिक्षक सस्पेंड किए

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO समेत 2 शिक्षक सस्पेंड किए


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड किया.


आगरा. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने शनिवार को आगरा मंडल समीक्षा बैठक में बीईओ सहित तीन को सस्पेंड कर दिया. शनिवार को हुई इस मीटिंग में जनप्रतिनिधि और अन्य लोगों की शिकायत करने पर बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने इस मामले की जांच करने के आदेश दिए.


आगरा के सर्किट हाउस में हुई इस मीटिंग में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने आगरा मंडल के सभी जनपदों में यूनिफॉर्म वितरण और दूसरी योजनाओं की समीक्षा की. इस मीटिंग में लोगों की शिकायत करने पर खंड शिक्षाधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव और दो शिक्षकों को संस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की थी. अकोला ओमप्रकाश यादव पर बरौली अहीर का भी अतिरिक्त आभार था.


सतीश द्विवेदी ने कहा कि बरौली अहीर में तैनात दो शिक्षक उमेश यादव और प्रदीप यादव के खिलाफ भी लोगों ने शिकायत की. इन पर शिक्षकों के साथ अभद्रता करने और काम के लिए पैसे मांगने के आरोप थे. तीनों को तत्काल प्रभाव के साथ सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच की भी जाएगी.


इस समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने ऑपरेशन कायाकल्प को आगे बढ़ाने, रिटायर्ड शिक्षकों को समय पर जीपीएफ और पेंशन का भुगतान करने, फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच और यूनीफॉर्म-किताब वितरण को समय से पूरा करने के निर्देश दिए. इस मीटिंग में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखा अधिकारी, आगरा मंडल के एडी बेसिक और डाइट प्राचार्य भी मौजूद रहे.