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Wednesday, April 22, 2026

दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

05 साल पूर्व बच्चे के जन्म के दो साल बाद दूसरा अवकाश नहीं मिला


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं हो सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 



याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिए याची की दूसरे मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरानयाची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है। इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राज्य की ओर सेवित्तीय हैंडबुक के नियम 153 (1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष जरूरी हैं।




दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा, सरकार की वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं

लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहली मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक (वित्तीय नियम संग्रह) के प्रविधान मातृत्व लाभकानून के ऊपर नहीं हो सकते हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिये याची की दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 एक लाभकारी कानून है और इसके प्रविधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।

अदालत ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है और यह किसी भी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रविधानों से ऊपर है। ऐसे में यदि दोनों में कोई विरोधाभास हो तो अधिनियम के प्रविधान ही प्रभावी होंगे। कोर्ट ने पाया कि याची की पहली संतान 2021 में हुई थी और इसके बाद उन्होंने 2022 में दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया। अदालत ने इस आदेश को रद करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को छह अप्रैल 2026 से दो अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।

Tuesday, September 9, 2025

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश अस्वीकार करने के बीएसए बिजनौर के आदेश को स्थापित विधि सिद्धांत के विपरीत होने के कारण रद्द कर दिया है। साथ ही उन्हें निर्धारित कानूनी प्रावधान के तहत मातृत्व अवकाश पर चार सप्ताह में नए सिरे से आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अंशुल दत्त की याचिका पर अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी व बीएसए बिजनौर के वकील को सुनने के बाद याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।


 बीएसए ने यह कहते हुए याची के मातृत्व अवकाश की अर्जी निरस्त कर दी कि याची के दो जीवित बच्चे हैं इसलिए तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता। अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी के मुताबिक याची सहायक अध्यापिका है।

Friday, May 30, 2025

बीएसए ने मांगी माफी... शिक्षिका को मिला दूसरा मातृत्व अवकाश, याचिका निस्तारित, निदेशक बेसिक शिक्षा ने सभी बीएसए को स्पष्ट सुसंगत आदेश पारित करने का दिया निर्देश

बीएसए ने मांगी माफी... शिक्षिका को मिला दूसरा मातृत्व अवकाश, याचिका निस्तारित, निदेशक बेसिक शिक्षा ने सभी बीएसए को स्पष्ट सुसंगत आदेश पारित करने का दिया निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद के बीएसए की ओर से बिना शर्त माफी मांगने, अपनी गलती सुधारने और भविष्य में अदालत के आदेशों का पालन करने का वचन देने के बाद मातृत्व अवकाश से संबंधित याचिका निस्तारित कर दी।

अधिकारियों ने एक हलफनामा दायर कर अदालत को बताया कि याची किरण देवी का दूसरा मातृत्व अवकाश स्वीकृत कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा निदेशक, लखनऊ ने अदालत को सूचित किया कि बीएसए को न केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, बल्कि सभी बीएसए को एक परिपत्र भी जारी किया गया है।

सभी को कानूनी प्रावधानों, सरकारी आदेशों, विभागीय नियमों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट और सुसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है। इस हलफनामे के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने किरण देवी की याचिका पर दिया।

अदालत के निर्देश पर प्रताप सिंह बघेल (निदेशक बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश), सुरेंद्र प्रसाद तिवारी (सचिव बेसिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज) और गौतम प्रसाद (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद) कोर्ट में उपस्थित हुए। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश ने हाजिरी माफी की अर्जी दी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।



हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं दिया दूसरा मातृत्व अवकाश, प्रमुख सचिव, निदेशक, सचिव व बीएसए तलब

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद की शिक्षिका को मातृत्व अवकाश नहीं देने पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, आदेश का पालन न करने पर कोर्ट ने फर्रुखाबाद के बीएसए, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा विभाग, शिक्षा निदेशक (बेसिक), बेसिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ व उप्र बेसिक शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के सचिव को तलब किया है। कहा है कि 28 मई को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण दें।

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने किरन देवी की याचिका पर दिया। याची के दूसरे मातृत्व अवकाश को बीएसए ने 'अनुमान्य नहीं' लिखकर बिना किसी विशिष्ट कारण के अस्वीकार कर दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 29 अप्रैल 2025 को बीएसए के आदेश को रद्द कर दिया था। साथ ही मामले को संबंधित प्रतिवादी को वापस भेज दिया था, ताकि वह कानून के अनुसार एक नया आदेश पारित करे। 

इसके बाद भी बीएसए ने उस आदेश का पालन नहीं किया। इसके खिलाफ याची ने दूसरी याचिका दाखिल की। याची अधिवक्ता मानवानंद चौरसिया ने दलील दी कि अधिकारी ने दूसरा मातृत्व अवकाश 180 दिन का न देकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। वहीं, प्रतिवादियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवादित आदेश जल्दबाजी में पारित हो गया है। कोर्ट ने मातृत्व अवकाश न देने पर कड़ी नाराजगी जता बीएसए सहित अन्य अधिकारियों को तलब किया है। रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।


महिला कर्मचारी कभी भी ले सकती है दूसरा मातृत्व अवकाश

याची अधिवक्ता मानवानंद चौरसिया ने बताया कि प्रदेश व केंद्र की नौकरियों में कोई भी महिला कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान दो बार मातृत्व अवकाश 180-180 दिन कभी भी ले सकती हैं। राज्य के पहले के शासनादेश में दूसरा मातृत्व अवकाश दो साल के बाद ही लेने का प्रावधान था। लेकिन, वर्तमान में कोर्ट के आदेश पर राज्य ने अपने शासनादेश में संशोधन कर दिया है।

कोर्ट ऑर्डर 👇 

Sunday, April 13, 2025

तीसरी बार मातृत्व अवकाश पर विचार करे बेसिक शिक्षा विभाग : हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

तीसरी बार मातृत्व अवकाश पर विचार करे बेसिक शिक्षा विभाग : हाईकोर्ट

सहायक अध्यापिका ने याचिका में बताया कि एक बच्चे का हो चुका है निधन



प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग को सहायक अध्यापिका को तीसरी बार मातृत्व अवकाश मांगने की अर्जी पर विचार करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने की।

प्रयागराज निवासी याची रोली पांडेय सोनबरसा स्थित विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। तीसरी बार गर्भवती होने पर उन्होंने 180 दिनों के वेतन सहित मातृत्व अवकाश की मांग की, जिसे विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मातृत्व अवकाश सेवाकाल में केवल दो बार दिया जा सकता है।

इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची की दलील थी कि बेशक उन्हें दो बार मातृत्व अवकाश दिया गया। लेकिन पैदा हुए बेटे का निधन हो चुका है। अब केवल 13 साल की एक बेटी है, लिहाजा याची मातृत्व अवकाश पाने की हकदार है।


कोर्ट ऑर्डर अपडेटेड 👇 


Saturday, September 7, 2024

जुड़वा बच्चों के बाद अगले बच्चे हेतु मातृत्व अवकाश का आवेदन खारिज करने पर बीएसए कासगंज हाईकोर्ट में तलब, देखें कोर्ट ऑर्डर

जुड़वा बच्चों के बाद अगले बच्चे हेतु मातृत्व अवकाश का आवेदन खारिज करने पर बीएसए कासगंज हाईकोर्ट में तलब, देखें कोर्ट ऑर्डर

Wednesday, August 28, 2024

एक और फैसला : दो वर्ष की मैटरनिटी लीव की अनिवार्यता गलत – हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

एक और फैसला : दो वर्ष की मैटरनिटी लीव की अनिवार्यता गलत – हाईकोर्ट
 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव के लिए दो वर्ष गैप की अनिवार्यता को आधार बनाकर छुट्टी देने से इनकार करने के बीएसए रामपुर के आदेश को रद्द कर दिया है। 

कोर्ट ने आदेश रद्द करते हुए याची को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस अवधि का वेतन देने का भी निर्देश दिया है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने कुशल राणा की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। याचिका में बीएसए रामपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी।


Wednesday, May 31, 2023

महिलाओं को शिक्षा के अधिकार और मां बनने के अधिकार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता –हाईकोर्ट

महिलाओं को शिक्षा के अधिकार और मां बनने के अधिकार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता –हाईकोर्ट


नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा है कि महिलाओं को शिक्षा के अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता यानी मां बनने के अधिकार में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने दो वर्षीय मास्टर ऑफ एजुकेशन (एमईडी) की पढ़ाई कर रही महिला को राहत देते हुए यह टिप्पणी की।


 इसके साथ ही, न्यायालय ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता महिला को एमईडी पाठ्यक्रम की कक्षा में उपस्थिति में छूट देने के लिए मातृत्व अवकाश का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।


जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने विश्वविद्यालय के प्रबंधन के 28 फरवरी, 2023 के आदेश को रद्द करते हुए, याचिकाकर्ता महिल को 59 दिन की मातृत्व अवकाश का लाभ देने को कहा है। इस आदेश के जरिए कक्षा में कम उपस्थिति को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के डीन ने महिला को मातृत्व अवकाश का लाभ देने से इनकार कर दिया था। 


न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि नागरिकों को शिक्षा के अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा मातृत्व अवकाश का लाभ दिए जाने से इनकार के बाद महिला ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। महिला की ओर से अधिवक्ता भवांशू शर्मा ने यूजीसी को स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई करने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश के लिए समुचित नीति का आदेश देने की मांग की थी।



संविधान ने एक की परिकल्पना की है, जहां नागरिक अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं और के समाज के साथ-साथ राज्य भी उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति की अनुमति देगा। - हाईकोर्ट, (फैसले में की टिप्पणी)


59 दिन की छुट्टी का आदेश

उच्च न्यायालय ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता महिला को 59 दिन मातृत्व अवकाश का लाभ दे। साथ ही कहा है कि यदि 59 दिन की मातृत्व अवकाश के लाभ देने के बाद कक्षा में उनकी उपस्थिति 80 फीसदी पूरी होती है तो उन्हें परीक्षा में शामिल होने दिया जाए।


पढ़ो या बच्चे पैदा करो, बाध्य नहीं कर सकते

दिल्ली हाईकोर्ट ने एमएड की छात्रा को मातृत्व अवकाश का लाभ देने के साथ ही परीक्षा में भी बैठने की अनुमति देने का आदेश दिया


नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं को पढ़ने या बच्चे पैदा करने में से कोई एक विकल्प चुनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस अहम टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने एमएड की एक छात्रा को मातृत्व अवकाश का लाभ देने और आवश्यक उपस्थिति पूरी होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश भी दिया। 


जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने हाल ही में एमएड छात्रा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ने एक समतावादी समाज की परिकल्पना की है, जिसमें नागरिक अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। समाज के साथ-साथ राज्य भी उन्हें इसकी अनुमति देता है। कोर्ट ने आगे कहा कि सांविधानिक व्यवस्था के मुताबिक किसी को शिक्षा के अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार के बीच किसी एक का चयन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।


मातृत्व अवकाश का लाभ देने से इन्कार : कक्षा में आवश्यक रूप से उपस्थिति मानक पूरा करने को आधार बनाकर प्रबंधन ने याचिकाकर्ता को मातृत्व अवकाश का लाभ देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


यूनिवर्सिटी प्रबंधन का फैसला रद्द

हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन का फरवरी, 2023 का फैसला रद्द करते हुए कहा कि वह याचिकाकर्ता को 59 दिन के मातृत्व अवकाश का लाभ देने पर पुनर्विचार करे। साथ ही, निर्देश दिया कि अगर इसके बाद कक्षा में आवश्यक 80 प्रतिशत उपस्थिति का मानक पूरा होता है तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।


यह है मामला
महिला याचिकाकर्ता ने दिसंबर, 2021 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में दो साल के एमएड  कोर्स के लिए दाखिला लिया था। उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए यूनिवर्सिटी डीन और कुलपति के पास आवेदन किया था। इसे 28 फरवरी को खारिज कर दिया गया।

Thursday, June 23, 2022

UG व PG छात्राओं को इसी सत्र से मिलेगा मातृत्व अवकाश

UG व PG छात्राओं को इसी सत्र से मिलेगा मातृत्व अवकाश

यूजीसी के पत्र पर राज्य विवि ने लिया निर्णय



प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जु भैया विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में अभी तक मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) केवल शिक्षिकाओं को ही मिलती थी। अब स्नातक (यूजी) और परास्नातक (पीजी) की छात्राओं को भी यह अवकाश मिल सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसके लिए विश्वविद्यालय को पत्र लिखा है। यह सुविधा इसी सत्र से दी जाएगी।


अभी तक पीएचडी और एमफिल जैसे कोर्स में छात्राओं को मातृत्व अवकाश दिया जाता था। नई गाइड लाइन के अनुसार अगर यूजी और पीजी में कोई शादीशुदा छात्रा गर्भवती है तो उसे भी पीएचडी और एमफिल की तरह मैटरनिटी लीव या चाइल्ड केयर लीव दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में 240 दिन की छुट्टी मिल सकेगी।


मातृत्व अवकाश में छात्राओं को हाजिरी, परीक्षा सहित सभी शैक्षणिक कार्यों से छूट रहेगी। राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में यूजी और पीजी में शादी के बाद कई महिलाएं अपनी पढ़ाई पूरी करती हैं। पढ़ाई और परीक्षा के दौरान मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव की सुविधा नहीं मिलती थी। इसकी वजह से उनके सामने पढ़ाई बीच में छोड़ने की मजबूरी रहती थी। विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देश से वे मातृत्व अवकाश के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी कर सकेंगी।


स्नातक और परास्नातक में शादीशुदा छात्राएं भी अध्ययन करती हैं। कॉलेजों में ग्रामीण क्षेत्र से अधिक छात्राएं होती हैं। इनके सामने शादी के बाद पढ़ाई पूरी करने की चुनौती रहती है। विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देश से वे मातृत्व अवकाश के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी।
-दीप्ति मिश्रा, उपकुलसचिव, राज्य विवि

Thursday, June 16, 2022

यूपी : मदरसा शिक्षिकाओं को भी मिल सकेगा मातृत्व अवकाश, मदरसा बोर्ड ने बैठक में लिया फैसला

यूपी : मदरसा शिक्षिकाओं को भी मिल सकेगा मातृत्व अवकाश, मदरसा बोर्ड ने बैठक में लिया फैसला

डॉ. इफ्तिखार ने बताया कि बैठक में केजी की तर्ज पर प्री प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए 25 राज्यानुदानित मदरसों को चिह्नित कर जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।


प्रदेश में मदरसा शिक्षिकाओं को भी अब मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में संपन्न हुई बोर्ड की बैठक में अनुदानित व गैर अनुदानित मान्यता प्राप्त मदरसों की शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश का लाभ दिलाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा राज्य से अनुदानित मदरसों में मातृत्व अवकाश एवं बाल्य देखभाल आदि अवकाश का लाभ दिए जाने के लिए शासन स्तर से आदेश निर्गत कराने के लिए मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार को अधिकृत किया गया।

डॉ. इफ्तिखार ने बताया कि बैठक में केजी की तर्ज पर प्री प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए 25 राज्यानुदानित मदरसों को चिह्नित कर जल्द ही शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि विनियमावली 2016 में स्थानांतरण की व्यवस्था न होने की वजह से आ रही कठिनाइयों को देखते हुए विनियमावली में संशोधन होने तक स्थानांतरण के लिए कार्यकारी आदेश शासन स्तर से निर्गत कराने का निर्णय लिया गया है। 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुरोध पर मदरसों में शिक्षा ले रहे छात्र छात्राओं का सर्वे कराने का भी बोर्ड की बैठक में लिया गया। बैठक में मदरसा बोर्ड के सदस्य कमर अली, तनवरी रिजवी, डा. इमरान अहमद, असद हुसैन, वित्त एवं लेखाधिकारी अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय आशीष्ज्ञ आनंद, बोर्ड के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह मौजूद रहे।

Saturday, December 18, 2021

हाईकोर्ट : छात्राओं को भी मातृत्व अवकाश जैसे लाभ का अधिकार, जानें पूरा मामला

हाईकोर्ट : छात्राओं को भी मातृत्व अवकाश जैसे लाभ का अधिकार, जानें पूरा मामला


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि विभिन्न संवैधानिक न्यायालयों द्वारा तय किए गए कानून के तहत बच्चे को जन्म देना महिला का मौलिक अधिकार है। किसी भी महिला को उसके इस ‌अधिकार और मातृत्व सुविधा देने से वंचित नहीं किया जा सकता है।


 कोर्ट ने एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा अंडर ग्रेजुएट छात्राओं को मातृत्व लाभ देने के लिए नियम नहीं बनाने की निंदा करते हुए विश्वविद्यालय को इस संबंध में नियम बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें छात्राओं के बच्चे को जन्म देने के पूर्व व जन्म देने के बाद सहयोग करने व अन्य मातृत्व लाभ शामिल हों। साथ ही छात्राओं को परीक्षा पास करने के लिए अतिरिक्त अवसर व समयावधि बढ़ाने के नियम हों। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को चार माह में निर्णय लेने के लिए कहा है।


एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय से संबद्ध कानपुर के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉ‌लाजी की बीटेक छात्रा सौम्या तिवारी की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट ने याची को बीटेक के द्वितीय व तृतीय सेमेस्टर के दो प्रश्नपत्रों में सम्मलित होने के लिए अतिरिक्त अवसर देने का निर्देश दिया है। 


कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्राओं को मातृत्व लाभ देने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके आधार पर अंडर ग्रेजुएट छात्रा को मातृत्व लाभ दिया जाए। 


इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रा को इस आधार पर मातृत्व संबंधी लाभ देने से इनकार नहीं कर सकता है कि उसने ऐसा कोई नियम, परिनियम नहीं बनाया है। ऐसा करना छात्रा के मौलिक अधिकार का हनन करना होगा। विश्वविद्यालय इस संबंध में नियम बनाने के लिए कानूनन बाध्य है।


विश्चवविद्यालय अनुदान आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर यूजीसी ने सकुर्लर जारी कर देश के सभी विश्चविद्यालयों को छात्राओं को भी मातृत्व संबंधी लाभ दिए जाने को लेकर नियम बनाने के लिए कहा है जबकि एआईसीटीई के अधिवक्ता का कहना था कि उनकी ओर से इस संबंध में नियम बनाने के लिए कोई रोक नहीं है। 


विश्वविद्यालयों के पास खुद के नियम व परिनियम बनाने की शक्ति है जिसका प्रयोग कर वे नियम बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि एआईसीटीई सहित अन्य तमाम रेग्युलेटरी बॉडी पीजी छात्राओं को ही मातृत्व संबंधी लाभ देने के नियम बनाने तक सीमित हैं। अंडर ग्रेजुएट छात्राओं के लिए नियम न बनाना अनुच्छेद 14 और 15(3) का उल्लंघन है।


यह है मामला

याची सौम्या तिवारी ने कानपुर के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉ‌लाजी कानपुर में वर्ष 2013-14 के सत्र में बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उसने सभी सेमेस्टर सफलतापूर्वक पास किए लेकिन तीसरे सेमेस्टर के इंजीनियनिरिंग मैथमैटिक्स के द्वितीय प्रश्नपत्र व ‌द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में गर्भवती होने व बच्चे को जन्म देने के बाद की रिकवरी के कारण शामिल नहीं हो सकी। इससे उसका कोर्स पूरा नहीं हुआ। उसने विश्वविद्यालय से अतिरिक्त अवसर देने की मांग की जिसे नामंजूर कर दिया गया।

Wednesday, December 15, 2021

उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत महिला छात्रों को मातृत्व अवकाश / बाल्य देखभाल अवकाश देने के लिए नियम बनाने की तैयारी, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिखा पत्र

उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत महिला छात्रों को मातृत्व अवकाश / बाल्य देखभाल अवकाश देने के लिए नियम बनाने की तैयारी



निर्देश
-यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिखा पत्र

-कहा-हाजिरी में छूट, परीक्षा प्रपत्र जमा कराने की तिथि में विस्तार पर विचार करें



नई दिल्ली। 
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहीं महिला छात्रों को मातृत्व अवकाश और हाजिरी में राहत देने के लिए उचित नियम व मानदंड तैयार करने का निर्देश दिया है।


कुलपतियों को लिखे पत्र में यूजीसी ने कहा कि यूजीसी (एमफिल और पीएचडी की डिग्री देने के लिए न्यूनतम मानक एवं प्रक्रिया) विनियम-2016 में एक प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि महिला उम्मीदवार को एमफिल और पीएचडी की पूरी अवधि में एक बार मातृत्व अवकाश या बच्चे की देखभाल के लिए 240 दिन का अवकाश दिया जा सकता है।


आयोग ने कहा, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से अनुरोध है कि वे अपने संस्थानों और संबद्ध कॉलेजों में महिला छात्रों को मातृत्व अवकाश देने के संबंध में उचित नियम एवं मानदंड तैयार करें। वे हाजिरी में छूट, परीक्षा प्रपत्र जमा कराने की तिथि में विस्तार सहित अन्य आवश्यक समझी जाने वाली सुविधाएं मुहैया कराने पर फैसला लें।

Friday, January 29, 2021

हाथरस : चिकित्सीय अवकाश स्वीकृति एवं मातृत्व/सीसीएल पश्चात जॉइनिंग सम्बन्धी नवीन निर्देश जारी

हाथरस : चिकित्सीय अवकाश स्वीकृति एवं मातृत्व/सीसीएल पश्चात जॉइनिंग सम्बन्धी नवीन निर्देश जारी


Thursday, May 14, 2020

पॉलीटेक्निक : महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश

पॉलीटेक्निक : महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश।


शिक्षकों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश।

लखनऊ : सरकारी व सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को अब दोबारा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश मिलेगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। दरअसल तीन मई 2018 को आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा निर्धारित वेतनमान लागू किए जाने के कारण इन अवकाशों को रद कर दिया गया था, क्योंकि एआईसीटीई द्वारा इस तरह के अवकाश देने का कोई प्रावधान नहीं था। विरोध के चलते एआईसीटीई ने इसे राज्यों यह व्यवस्था दोबारा लागू करने की छूट दे दी। इसके बाद अब शासन ने इन अवकाशों को दोबारा मंजूरी दे दी है। प्रमुख सचिव एस राधा चौहान की ओर से बुधवार को यह आदेश जारी कर दिया गया। पालीटेक्निक संस्थाओं में पढ़ा रही महिला शिक्षकों व महिला कर्मचारियों को पूर्ण सेवाकाल में 180 दिनों का प्रसूति अवकाश मिलेगा। विशिष्ट परिस्थितियों में दो साल का बाल्य देखभाल अवकाश वह ले सकेंगी। एक साल में तीन बार से अधिक बाल्य देखभाल अवकाश नहीं मिलेगा। यह 15 दिन से कम के लिए नहीं दिया जाएगा। अगर किसी ने बच्चा गोद लिया है तो उसे दत्तक ग्रहण अवकाश 180 दिनों का दिया जाएगा।






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Sunday, November 3, 2019

प्रतापगढ़ : मातृत्व अवकाश, चाइल्ड केयर लीव में अब नहीं होगा खेल, शिक्षिकाओं को अब ऑनलाइन ही मिलेगा अवकाश, ऑफलाइन छुट्टी नहीं होगी मान्य

प्रतापगढ़ : मातृत्व अवकाश, चाइल्ड केयर लीव में अब नहीं होगा खेल, शिक्षिकाओं को अब ऑनलाइन ही मिलेगा अवकाश, ऑफलाइन छुट्टी नहीं होगी मान्य।





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Sunday, May 5, 2019

फतेहपुर : हर महिला कर्मी को मिलेगा बाल्यपाल प्रसूति अवकाश, बीएसए ने कहा- शासनादेश आया संज्ञान में, आदेश मिलने पर लाभार्थियों को दिया जाएगा लाभ

फतेहपुर : हर महिला कर्मी को मिलेगा बाल्यपाल प्रसूति अवकाश, बीएसए ने कहा- शासनादेश आया संज्ञान में, आदेश मिलने पर लाभार्थियों को दिया जाएगा लाभ।


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Monday, April 29, 2019

हाथरस : परिषदीय शिक्षक - शिक्षिकाओं के अवकाश सम्बन्धी आवेदन निर्धारित प्रारूप पर प्रेषित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, प्रारूप सह आदेश देखें

हाथरस : परिषदीय शिक्षक - शिक्षिकाओं के अवकाश सम्बन्धी आवेदन निर्धारित प्रारूप पर प्रेषित किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, प्रारूप सह आदेश देखें






Wednesday, January 2, 2019

फतेहपुर : मातृत्व अवकाश तथा जीपीएफ सम्बन्धी प्रेषित पत्रावलियों में अग्रसारण तिथि अंकन करने के सम्बन्ध में आदेश

कककक

Thursday, February 22, 2018

झाँसी : पू0मा0 विद्यालयों में कार्यरत महिला अनुदेशकों को प्रसूति अवकाश दिए जाने हेतु आवेदन प्र0अ0 व बीईओ की संस्तुति के साथ प्रस्तुत किये जाने सम्बन्धी बीएसए का आदेश, देखें

झाँसी : पू0मा0 विद्यालयों में कार्यरत महिला अनुदेशकों को प्रसूति अवकाश दिए जाने हेतु आवेदन प्र0अ0 व बीईओ की संस्तुति के साथ प्रस्तुत किये जाने सम्बन्धी बीएसए का आदेश, देखें

Sunday, January 21, 2018

मेरठ : राज्य परियोजना निदेशक SSA ने जारी किए थे आदेश, कस्तूरबा में कार्यरत महिला कर्मियों को मिलेगा सवेतन मातृत्व अवकाश,

मेरठ समेत प्रदेश के सभी जिलों के करीब 750 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को भी अब सवेतन मातृत्व अवकाश मिलेगा। इसके लिए राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान लखनऊ ने आदेश जारी कर दिए हैं।

बेसिक विभाग के सूत्रों के अनुसार, शिक्षा परियोजना परिषद की कार्यकारिणी समिति की बैठक 21 दिसंबर-17 को लखनऊ में हुई थी। बैठक में मेरठ समेत प्रदेश में संचालित करीब 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत महिला कर्मियों, महिला वार्डन, शिक्षिकाओं व कर्मचारियों को पहले दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश के लिए हरी झंडी दी गई थी। समिति ने अनुबंध अवधि के दौरान तीन माह का मातृत्व अवकाश सवेतन स्वीकृति किए जाने का निर्णय लिया था।

समिति की स्वीकृति होने के उपरांत राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान डा. वेदपति मिश्र ने मेरठ समेत सूबे के सभी बीएसए को इस बारे में 18 जनवरी को महिला कर्मियों को तीन माह का सवेतन मातृत्व अवकाश स्वीकृत करने के आदेश दिए हैं। डीएम व प्राचार्य डायट को भी इस आदेश की प्रति भेजी गई है

Wednesday, January 3, 2018

पीलीभीत : अनुदेशिका को मिला मानदेय सहित 90 दिवस का मातृत्व अवकाश, आदेश देखें

अनुदेशिका को मिला मानदेय सहित 90 दिवस का मातृत्व अवकाश, आदेश देखें