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Monday, May 10, 2021

बदलाव : मैनेजमेंट कोटे के सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सुविधा

बदलाव : मैनेजमेंट कोटे के सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सुविधा

प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति और फीस भरपाई से संबंधित अपनी नियमावली में बदलाव कर दिया है। इस बदलाव की वजह से अब राज्य के शिक्षण संस्थानों में मैनेजमेंट कोटे से दाखिला लेने वाले सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी सुविधा नहीं मिल पाएगी। यह प्रावधान आगामी शैक्षिक सत्र से लागू माना जाएगा।


विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ ही सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को भी प्रवेश परीक्षा से इतर मैनेजमेंट कोटा या मौके पर रिक्त सीट पर शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति देता रहा है।

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2018 से अनुसूचित जाति के छात्रों को इस तरह के प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति नहीं देने का फैसला किया। केन्द्र का यह प्रावधान यूपी में भी लागू हुआ। मगर उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग यह कि विभाग सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को ऐसी छात्रवृत्ति देता रहा। एक ही विभाग में दो तरह की व्यवस्था होने की स्थिति में सरकार ने अब सामान्य श्रेणी के गरीब छात्रों को भी मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति नहीं देने के लिए नियमावली में बदलाव कर दिया है।


विभाग के संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी के मुताबिक सरकार ने विभाग की नियमावली में बदलाव को मंजूर कर दिया है। इसके मद्देनजर वित्तीय वर्ष 2021-22 में अब मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा।

Friday, May 7, 2021

शिक्षा की राह पर बिछी हर कदम 'वजीफे' की कालीन, जाने विस्तार से

शिक्षा की राह पर बिछी हर कदम  'वजीफे'  की कालीन,  जाने विस्तार से 


वाराणसी : एक व भी समय था जब बच्चों को पढ़ने के लिए एक से दूसरे गांव जाना पड़ता था। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्रों को अपना शहर छोड़ना पड़ता था आर्थिक तंगी के कारण तमाम होनहारों की पढ़ाई रुक जाती थी, मगर अब ऐसा नहीं है। शिक्षा की राह में शासन ने हर कदम छात्रवृत्ति ( वजीफा) रूपी कालीन बिछा रखी है, जिससे किसी होनहार की पढ़ाई का सपना पैसे के अभाव में टूट न सके। हर जन को शिक्षित करने के उद्देश्य से गांव-गांव प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय खुल गए हैं। 


कोई ऐसा शहर नहीं जहां उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय न हों। मेधावियों के लिए प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति सुविधा है। आर्थिक संसाधनों की कमी अब रोड़ा नहीं है। आरटीआइ बना सपनों का सेतु : राइट टू-एजेशन (शिक्षा का अधिकार) के तहत सरकारी विद्यालयों में 14 वर्ष तक के बच्चों की पढ़ाई मुफ्त है। निजी स्कूलों में 25 फीसद सीट एससी/एसटी व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आरक्षित है। कक्षा एक से आठ तक निश्शुल्क पढ़ने की सुविधा है। ड्रेस, किताब- कापी के लिए अभिभावकों को शासन से पांच हजार रुपये वार्षिक सहायता भी मिलती है।


विभाग कर रहा समाज का कल्याण : सूबे में कक्षा नौ से स्नातकोत्तर तक के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर
से छात्रवृत्ति मिली है। जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव ने बताया कि छात्रवृत्ति आवेदन के लिए जाति-धर्म का कोई बंधन नहीं है। कोई भी छात्र आवेदन कर सकता है। विभाग बजट के अनुसार छात्रवृत्ति जारी करता है। कोविड काल के कारण वर्ष 2020-21 के कई विद्यार्थियों को अब तक छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली है। हालांकि चरणबद्ध तरीके से विद्यार्थियों के खाते में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि स्थानांतरित हो रही है।


आवेदन ऑनलाइन : छात्रवृत्ति आवेदन ऑनलाइन भरा जा सकता है। सत्र 2021-22 का छात्रवृत्ति आवेदन जुलाई-अगस्त तक वेबसाइट पर अपलोड होने की संभावना है।

 
शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा

समाज कल्याण विभाग माध्यमिक विद्यालयों व विश्वविद्यालयों की पूरी फीस छात्रवृत्ति के रूप में विद्यार्थियों को देता है। अर्थात विद्यार्थी को एक | रुपये भी अपने पास से नहीं देना होता है।


राष्ट्रीय प्रतिभा खोज

मनोविज्ञानशाला प्रयागराज की | राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना भी है। इसके तहत प्रतिवर्ष राज्य स्तर पर राष्ट्रीय प्रतिभा खोज प्रतियोगिता कराई जाती है। राज्य की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने को छात्रवृत्ति दी जाती है।


राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल ( एनएसपी) | योजना मूलत: अल्पसंख्यकों के लिए है। प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट आधार पर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।


पीएचडी के लिए नेट सेट

मेधावी छात्रों को माध्यमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति संग शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा है। पीएचडी के लिए नेट, सेट फेलोशिप सहित कई | सुविधाएं उपलब्ध हैं।


ये विद्यार्थी होंगे पात्र
समाज कल्याण विभाग की पूर्व दशमोत्तर (कक्षा नौ-दस व दशमोत्तर छात्रवृत्ति लिए किसी भी वर्ग का छात्र आवेदन कर सकता | है। सामान्य, ओबीसी, अल्पसंख्यक | श्रेणी के माता-पिता, अभिभावक जिनकी आय सालाना दो लाख रुपये से अधिक न हो, आवेदन कर सकते है। इसी तरह से एससी / एसटी छात्रों के लिए माता-पिता या अभिभावक की सालाना आय दो लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।

Wednesday, May 5, 2021

UGC NET, JRF छात्रों को छात्रवृत्ति का इंतजार

UGC NET, JRF छात्रों को छात्रवृत्ति का इंतजार


दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को नेट, नॉन नेट, जेआरएफ सहित अन्य दी जाने वाली छात्रवृत्तियों का इंतजार है। डीयू में शोध कर रहे छात्र इस समय भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।


 डीयू में हिंदी विभाग में शोध कर रहे एक छात्र आदर्श ने बताया कि फरवरी से यूजीसी द्वारा मिलने वाली जूनियर रिसर्च फेलोशिप नहीं आ रही है। तीन महीना बीत चुका है ऐसे में कमरे का किराया और बाकी खर्च के लिए दिक्कत हो रही है। डीयू में अधिकांश छात्रों के लिए स्कॉलरशिप आर्थिक मदद का एक बड़ा जरिया है। 


आदर्श का कहना है कि मेरी छात्रवृत्ति लगभग 38500 रुपए आती है। इसमें शोध व कमरे किराया शामिल है। मुझे इंतजार है कि मेरी छात्रवृत्ति आए तो मैं कमरे का किराया चुकाऊं।


शोधार्थी आशीष कुमार का कहना है कि मुझे नॉन नेट फेलोशिप मिलती है लेकिन अभी नहीं मिली है। जनवरी से मुझे फेलोशिप का इंतजार है। यह आठ हजार की राशि होती है जिससे हम लोग किताब और जरूरी चीजें शोध के लिए लेते हैं। लेकिन चार महीने से नहीं मिल रही है। 


नेट फेलोशिप को लेकर भी छात्रों को भी निराशा है। कई छात्र यह मांग कर रहे हैं कि जो भी फेलोशिप दी जाती थी उसे दिया जाए क्योंकि इससे हमारी शिक्षा की जरूरतें जुड़ी हैं।

Saturday, April 24, 2021

NTSE : डेढ़ लाख छात्रों को है छात्रवृत्ति का इंतजार, दो साल से फंसा है रिजल्ट

NTSE : डेढ़ लाख छात्रों को है छात्रवृत्ति का इंतजार, दो साल से फंसा है रिजल्ट


दसवीं परीक्षा पास किये एक साल से अधिक हो गया। 11वीं से अब 12वीं में चले गये लेकिन अभी तक छात्रवृत्ति का रिजल्ट नहीं मिला। यह हाल नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन (एनटीएसई) छात्रवृत्ति का है। छात्रवृत्ति परीक्षा पिछले दो साल से हो रही है, लेकिन अभी तक छात्रों को रिजल्ट नहीं मिला है। इसमें 2019 का फाइनल रिजल्ट और 2020 का पीटी का रिजल्ट शामिल है। एससीईआरटी की मानें तो दोनों सत्र मिलाकर लगभग डेढ़ लाख छात्र शामिल हुए हैं। 


ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण के कारण एनटीएसई रिजल्ट जारी नहीं हो पा रहा है। 2019 का पीटी रिजल्ट निकलने के समय मार्च 2020 में लॉकडाउन लग गया। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान अप्रैल में ही पीटी का रिजल्ट जारी हुआ था। इसके बाद नवंबर 2020 में सेकेंड फेज की परीक्षा ली गयी। इसका रिजल्ट भी तक जारी नहीं हुआ है। वहीं 2020 की पीटी जनवरी 2021 में ली गयी। लेकिन अभी पीटी का ही रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। 


प्लस टू से लेकर पीएचडी तक मिलती छात्रवृत्ति
उच्च शिक्षा पाने के लिए छात्रवृत्ति परीक्षा ली जाती है। दसवीं के छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। चयनित छात्रों को 11वीं से छात्रवृत्ति मिलना शुरू होता है। यह छात्रवृत्ति पीएचडी तक मिलती है। स्नातक में इसमें हर महीने 12 सौ रुपये दिये जाते हैं। वहीं आगे पीजी और पीएचडी के लिए यूजीसी के नियम के अनुसार छात्रवृत्ति दी जाती है। 


गिरिवल दयाल (निदेशक, एससीईआरटी) ने कहा, पीटी का रिजल्ट तैयार हो गया है। भारत सरकार के पास एप्रूवल के लिए भेजा गया है। विधानसभा चुनाव के कारण इस बार जनवरी अंतिम सप्ताह में पीटी परीक्षा ली गयी थी। अभी रिजल्ट तैयार है। बस एप्रूवल मिलने के बाद जारी किया जायेगा। 


मई के दूसरे सप्ताह में सेकेंड फेज की परीक्षा 
एनसीएसई के सेकेंड फेज की परीक्षा मई के दूसरे सप्ताह में  होती है। इससे पहले नवंबर में फर्स्ट फेज की परीक्षा ली जाती है। फर्स्ट फेज में चयनित छात्र सेकेंड फेज की परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन इस बार फर्स्ट फेज नवंबर के बदले जनवरी में हुआ। वहीं कई राज्यों में फरवरी में परीक्षा ली गयी। अभी फर्स्ट फेज का रिजल्ट जाने में देरी होगी।

Saturday, March 27, 2021

बिना अंक के प्रमोट होने वाले छात्रों को भी मिलेगी छात्रवृत्ति, वर्ष 2019-20 के अंकों के अधार पर बनेगी मेरिट, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने नियमावली की शिथिल

बिना अंक के प्रमोट होने वाले छात्रों को भी मिलेगी छात्रवृत्ति, वर्ष 2019-20 के अंकों के अधार पर बनेगी मेरिट, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने नियमावली की शिथिल

लखनऊ : सरकार महामारी के कारण बिना परीक्षा व अंक मिले ही प्रमोट होने वाले छात्र-छात्राओं को भी अब दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ देगी। यह लाभ उन छात्रों को मिलेगा जो पिछले वर्ष छात्रवृत्ति पा चुके हैं और इस वर्ष उन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। इसके लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की नियमावली शिथिल कर दी है। अब वर्ष 2019- 20 की मेरिट के आधार पर छात्रों को योजना का लाभ दिया जाएगा।


 समाज कल्याण विभाग के बाद अब पिछड़ा वर्ग कल्याण ने भी दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में नवीनीकरण वाले छात्रों को राहत दे दी है। ऐसे छात्र जो परीक्षा दिए बिना अगली कक्षा में प्रमोट हुए हैं, उन्हें भी छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जाएगा। शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण को वर्ष 2019 20 में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाकर छात्रवृत्ति देने के निर्देश दिए हैं।

Tuesday, March 16, 2021

छात्रवृत्ति फॉर्म भरने वाले छात्रों को मिल सकती है बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग ने किया त्रुटि सुधार के लिए मौका देने का अनुरोध

छात्रवृत्ति फॉर्म भरने वाले छात्रों को मिल सकती है बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग ने किया त्रुटि सुधार के लिए मौका देने का अनुरोध

छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी सुविधा पाने के लिए किए गए आवेदनों में मामूली त्रुटियों की वजह से लम्बित आवेदनों से परेशान अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के लिए एक उम्मीद भरी खबर है। समाज कल्याण विभाग ने शासन को ऐसे छात्र-छात्राओं के आवेदनों की त्रुटियों को दूर कर उनके आवदेन स्वीकृत करने के लिए 22 मार्च तक जिला स्तरीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति को मोहलत देने का अनुरोध किया है।


अगर शासन से इस बारे में स्वीकृति मिल जाती है तो जिला स्तरीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति को डाटा लॉक करने की समय सीमा और मिल जाएगी तब लंबित आवेदनों से संबंधित छात्र-छात्राओं के आवेदनों की मामूली त्रुटियां दूर हो सकेंगी।

वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होने की वजह से सभी आवेदक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि आगामी 25 मार्च तक भेजे जाने की तैयारी है। समाज कल्याण निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति के कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यासायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत कुल 6, 09, 684 छात्र-छात्राओं के आवेदन सभी स्तरों के परीक्षण में सही पाए गए हैं जबकि कक्षा नौ और दस के अनुसूचित जाति के कुल 2, 80, 850 छात्र-छात्राओं के आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है।


आवेदन के साथ मांगी गई सभी जरूरी सूचनाएं और प्रमाण सही ढंग से न दिये जाने की वजह से कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के कुल 2, 53,012 अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के आवेदन फंस गये हैं जबकि कक्षा नौ और दस के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के खामियों की वजह से फंसे आवेदनों की संख्या 98,972 है। सामान्य वर्ग के कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यासायिक पाठ्यक्रमों 4,25, 422 छात्र-छात्राओं के आवेदन परीक्षण में सही पाये गए हैं जबकि 1,83,520 छात्र-छात्राओं के आवेदन त्रुटियों की वजह से फंस गये हैं। कक्षा नौ व दस की कक्षाओं के सामान्य वर्ग के 96, 752 छात्र-छात्राओं के आवेदन स्वीकृत हुए हैं और 25, 698 छात्र-छात्राओं के आवेदन लंबित हैं।

छात्रवृत्ति के आवेदन स्वीकृत न होने की वजह

-55 प्रतिशत से कम उपस्थिति
-आय प्रमाण पत्र संदिग्ध

-जाति का गलत अंकन
-उपस्थिति कम, प्राप्तांक कम
-आधार का सत्यापन नहीं
 

खामियों की वजह से निरस्त हुए आवेदन :

-नैक व एनबीए ग्रेडिंग न होने तथा प्रमाण पत्र सत्यापित न होने व अन्य खामियां
-एस.सी.पोस्ट मैट्रिक-81,882
-एस.सी.प्री मैट्रिक-5,748
-जनरल पोस्ट मैट्रिक-30,883
-जनरल प्री मैट्रिक-3, 578



छात्रवृत्ति योजना में 3.5 लाख छात्रों के आवेदन हुए निरस्त, जाति व आय प्रमाणपत्र, नैक और एनबीए ग्रेडिंग न होने पर किए गए योजना से बाहर


लखनऊ :  छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में करीब 3.5 लाख छात्रों के आवेदन पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। जाति व आय प्रमाणपत्र का मिलान न होने और नैक व एनबीए ग्रेडिंग न होने से इन्हें योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग के अधि मुताबिक, डाटा की जांच मंगलवार सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। इसलिए यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में सत्र 2020-21 में 56 लाख छात्रों ने आवेदन किया है।


ऑनलाइन आवेदन करने वाले प्रत्येक छात्र का डाटा एनआईसी अपने सॉफ्टवेयर से चेक करती है। सोमवार देर शाम तक 3.5 लाख छात्रों का डाटा निरस्त किय जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इसके मुख्य कारण पिछले साल का रिजल्ट अपलोड न करना, आय व जाति प्रमाणपत्र का संबंधित वेबसाइट से मिलान न हो पाना और पिछली कक्षा में न्यूनतम अंकों की अर्हता पूरी न कर पाना आदि हैं। इस साल से निजी विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों के लिए योजना का लाभ लेने के लिए नेशनल असिस्टमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रेडिंग जरूरी है। जिन विश्वविद्यालयों और संस्थानों के पास इनकी ग्रेडिंग नहीं है, उनके छात्रों को भी योजना के दायरे बाहर कर दिया गया है। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सामान्य व अनुसूचित जाति वर्ग के ही 1.70 लाख विद्यार्थियों का डाटा निरस्त हो चुका है। सभी वर्गों में यह संख्या 3.5 लाख को पार कर चुकी है।

Sunday, February 28, 2021

बदलाव:- अब आधार से लिंक बैंक खाते में ही भेजी जाएगी छात्रवृत्ति


लखनऊ : प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति में घपले व घोटाले रोकने के लिए अगले सत्र से अहम बदलाव करने जा रही है। छात्रों को अब आवेदन के समय बैंक खाते का विवरण नहीं देना होगा। आधार से लिंक बैंक खाते में ही छात्रवृत्ति भेजी जाएगी। यदि किसी छात्र के एक से अधिक बैंक खाते आधार से जुड़े हैं तो सबसे अंत में जुड़े बैंक खाते में छात्रवृत्ति भेजी जाएगी। छात्रवृत्ति के आवेदन से लेकर कक्षाओं में बायोमीट्रिक उपस्थिति तक सब कुछ आधार के जरिये दर्ज की जाएगी। प्रदेश में करीब 57 लाख से अधिक छात्रों को समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति देते हैं। योगी सरकार छात्रवृत्ति में होने वाले घोटालों पर पूरी तरह नियंत्रण लगाने के लिए नए शैक्षिक सत्र से कई बदलाव करने जा रही है। छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए अब आधार नंबर अनिवार्य किया गया है छात्रवृत्ति की वेबसाइट को आधार की वैबसाइट से जोड़ा जाएगा। यानी छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर आवेदन करने के लिए जैसे ही आधार नंबर भरेंगे, स्वतः ही आधार की वेबसाइट से उस नंबर की प्रमाणिकता की जांच हो जाएगी। आधार नंबर प्रमाणिक होने पर ही छात्र आवेदन पत्र भर सकेंगे।

वर्तमान में छात्रवृत्ति के आवेदन में छात्रों को बैंक खाता संख्या, शाखा का नाम व आइएफएस कोड आदि विवरण भरना होता है। इस कारण कई बार कॉलेज प्रबंधन छात्रवृत्ति में खेल कर जाते थे। सारा विवरण छात्र-छात्राओं का और एकाउंट नंबर मिलते-जुलते नाम वाले किसी दूसरे का दे देते थे।



UP Board Scholarship : 10वीं क्लास से ऊपर की कक्षाओं के एससी छात्र-छात्राओं को दो किस्तों में मिलेगी छात्रवृत्ति

UP Board Scholarship : 10वीं क्लास से ऊपर की कक्षाओं के एससी छात्र-छात्राओं को दो किस्तों में मिलेगी छात्रवृत्ति

प्रदेश में कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और अन्य व्यासायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को अब छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि दो किस्तों में मिलेगी। 

यह नयी व्यवस्था अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई वितरण पर आने वाले व्यय भार का केन्द्र और राज्य सरकार के बीच 40 और 60 प्रतिशत के अनुपात में हुए बंटवारे की वजह से लागू की जा रही है। इस छात्रवृत्ति योजना पर आने वाले कुल व्ययभार का 40 प्रतशित राज्यांश प्रदेश सरकार देगी और 60 प्रतिशत केन्द्रांश केन्द्र सरकार। समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र ने यह जानकारी दी है। 


उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति के कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और एमबीए, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, मेडिकल आदि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे ऐसे गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राएं जिन्होंने छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के लिए आवेदन किया हुआ है,जिला स्तरीय कमेटी से उनके आवेदन के सभी ब्यौरे का सत्यापन के बाद प्रत्येक छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की जो कुल राशि होगी उसका 40 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश के समाज कल्याण विभाग की ओर से उनके बैंक खातों में भेज दिया जाएगा। 

इसके बाद इस सारे ब्योरे को एनआईसी एपीआई के जरिये आनलाइन केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। केन्द्र सरकार इस ब्योरे के आधार पर जो राशि हस्तांतरित करेगी उसे फिर इन छात्र-छात्राओं के खातों में भेजा जाएगा। यह व्यवस्था सिर्फ इस साल लागू रहेगी, अगले साल से केन्द्र सरकार द्वारा खुद इन छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में अपने 60 प्रतिशत केन्द्रांश की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि भेज दी जाया करेगी। चालू शैक्षिक सत्र में ऐसे कुल 9 लाख 82 हजार 56 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है जिनमें से अब तक 3.5 लाख छात्र-छात्राओं के ब्यौरे का जिला कमेटी से सत्यापन हो चुका है।

Saturday, February 27, 2021

बी.एड- 2021 के छात्र-छात्राओं को मिलेगा छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ

बी.एड- 2021 के छात्र-छात्राओं को मिलेगा छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ

प्रदेश में बी.एड. के अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग, अल्पसंख्यक तथा पिछड़ा वर्ग के गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिये जाने के आदेश जारी हो गये हैं। बीएड और बीटीसी के छात्र-छात्राओं को पूर्व में दी गई छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि के मामलों की जांच के चलते बीएड की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि के वितरण पर रोक लगी हुई थी जबकि बीटीसी का सत्र कोरोना संकट की वजह से इस बार शून्य घोषित कर दिया गया है। गुरुवार को इस बार में समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव बी.एल.मीणा की ओर से एक आदेश जारी किया गया।


इस आदेश में कहा गया है कि वित्त विभाग के 5 नवम्बर 2020 के शासनादेश के जरिये बीएड / बीटीसी की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई भुगतान के सम्बंध में लगी रोक हटाए जाने के सम्बंध में निर्णय लिया गया है। इस शासनादेश में आगे कहा गया है कि एसोसिएशन आफ माइनारिटीज इंस्टीट्यूटशन प्रयागराज बनाम उ.प्र.राज्य व अन्य के मामले में हाईकोर्ट के 15 दिसम्बर 2020 को पारित आदेश के अनुपालन के क्रम में बीएड और बीटीसी व अन्य सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामलों की जांच जारी रहेगी।

इस जांच के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति, बीटीसी शिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी जांच के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा गठित समिति जांच करती रहेगी। इसी तरह बीएड व अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों की मान्यता से संबंधित प्रकरणों की जांच के लिए उच्च शिक्षा की जांच कमेटी द्वारा वर्तमान और आगामी वर्षों में की जाने वाली जांच जारी रहेगी।

मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा यह जांच आठ बिन्दुओं पर की जाएगी। बताते चलें कि पिछले शैक्षिक सत्र 2019-20 में समाज कल्याण विभाग द्वारा बीएड के 1 लाख 123 और सामान्य वर्ग के गरीब 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जबकि पिछड़ा वर्ग के करीब 80 हजार बीएड छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए थे।

Wednesday, February 17, 2021

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच

बीएड, बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की होगी जांच


लखनऊ : प्रदेश सरकार छात्रवृत्ति में होने वाले घपले को देखते हुए बीएड व बीटीसी सहित सभी पाठ्यक्रमों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की जांच कराने जा रही है। इसके लिए सरकार ने सभी जिलों में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच समिति को पांच मार्च तक अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशालय को देनी होगी। वहीं, समाज कल्याण निदेशालय को 10 मार्च तक सरकार को रिपोर्ट देनी है।


छात्रवृत्ति में होने वाले घपलों पर अंकुश लगाने के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई उच्चस्तरीय बैठक में जिला स्तर पर जांच समिति गठित करने का फैसला हुआ। इसी के तहत समाज कल्याण विभाग ने मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।

इसमें संबंधित उप जिलाधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी/जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी/जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। इस समिति को कॉलेजों व संस्थानों में आठ ¨बदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट देनी है।

इसमें पहले ¨बदु के तहत सॉफ्टवेयर के जरिये समान नाम, समान पिता का नाम और समान जन्मतिथि वाले मामलों की जांच करते हुए छात्रवृत्ति की धनराशि का दुरुपयोग रोकने और दूसरे जांच ¨बदु में दूसरे प्रदेशों के हाईस्कूल बोर्ड से पास छात्रों को अत्यधिक संख्या में प्रवेश कराके उनकी छात्रवृत्ति का दुरुपयोग रोकना है। तीसरे जांच ¨बदु में आवेदन पत्र में यूपी बोर्ड को चयनित करने के स्थान पर यूपी बोर्ड के हाईस्कूल रोल नंबर/अंक पत्र को कई बार प्रयोग करते हुए फार्म भरवाने के मामले और चौथे ¨बदु में स्वीकृत सीटों से अधिक संख्या में प्रवेश दिलाने व छात्रवृत्ति की धनराशि का गबन करने की जांच होगी।

पांचवें ¨बदु में पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेकर छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों द्वारा प्रथम वर्ष की परीक्षा में न बैठने तथा द्वितीय वर्ष में काफी संख्या में पढ़ाई छोड़ देने के मामले होंगे, जबकि छठे ¨बदु में संस्थानों में पाठ्यक्रम की मान्यता व स्वीकृत सीटों की संख्या आदि की जांच करनी है। सातवें ¨बदु में एनआइसी के समक्ष पोर्टल पर बैक एंड डाटा का भी सत्यापन किया जाएगा। फर्जी व संदिग्ध डाटा की जांच जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित दूसरी समिति करेगी। आठवें ¨बदु के तहत जांच समिति छात्रों की पात्रता के साथ माता-पिता की वास्तविक आय की भी जांच करेगी।

Tuesday, February 2, 2021

शासन का फैसला : स्पॉट सीट पर दाखिला लेने वाले सामान्य छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं, पुराने छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा होने तक मिलता रहेगा योजना का लाभ

शासन का फैसला : स्पॉट सीट पर दाखिला लेने वाले सामान्य छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं, पुराने छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा होने तक मिलता रहेगा योजना का लाभ


लखनऊ : निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मैनेजमेंट कोटा या स्पॉट सीट पर प्रवेश लेने वाले सामान्य वर्ग के छात्रों को न तो शुल्क की भरपाई होगी और न ही उन्हें छात्रवृत्ति मिलेगी। यह प्रावधान इस सत्र से लागू किया गया है। हालांकि, पुराने छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा होने तक योजना का लाभ मिलता रहेगा। इस संबंध में शासन ने एनआईसी को निर्देश जारी कर दिए हैं। 



शासन ने वर्ष 2019 में इस संबंध में जारी नियमावली में कहा था कि यह प्रावधान सत्र 2020- 21 से लागू होगा। इसके तहत निजी विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान में 'मैनेजमेंट कोटा या 'स्पॉट एडमिशन' सीट पर दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को शुल्क भरपाई नहीं की जाएगी। निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय या राज्यस्तरीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा से दाखिला लेने का प्रावधान है। इन प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से काउंसिलिंग के बिना सीधे प्रवेश (स्पॉट एडमिशन) लेने वाले छात्र मैनेजमेंट कोटे के अंतर्गत आएंगे।

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार, अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए यह व्यवस्था वर्ष 2018 19 से ही लागू है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए यह योजना चालू सत्र से लागू की गई है। सत्र 2020-21 में किसी भी पाठ्यक्रम में प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वालों पर यह नियम लागू होगा उस पाठ्यक्रम में पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों को इस सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा।

Wednesday, January 20, 2021

नैक ग्रेडिंग नहीं तो शुल्क प्रतिपूर्ति और वजीफा नहीं, निजी विश्वविद्यालयों में पहले वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों पर लागू होगा यह नियम

नैक ग्रेडिंग नहीं तो शुल्क प्रतिपूर्ति और वजीफा नहीं, निजी विश्वविद्यालयों में पहले वर्ष में दाखिला लेने वाले छात्रों पर लागू होगा यह नियम

जौहर विश्वविद्यालय समेत आधे से ज्यादा निजी विवि होंगे प्रभावित

लखनऊ : नैक या एनबीए से अभी तक ग्रेडिंग हासिल न कर पाने वाले निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लिए मायूस करने वाली खबर है। वर्ष 2020- 21 में किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिला ले चुके या उसके बाद दाखिला लेने वाले उनके छात्रों के लिए न तो वजीफा मिलेगा और न ही शुल्क की भरपाई होगी। इस दायरे में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समेत आधे से ज्यादा निजी विश्वविद्यालय आएंगे। इस बाबत एनआईसी के लिए जरूरी निर्देश जारी किए जा रहे हैं।


उत्तर प्रदेश में 27 निजी विश्वविद्यालय हैं। इसमें जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा, एमिटी मथुरा, सुभारती यूनिवर्सिटी मेरठ, तीर्थाकर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद, आईएफटीएम यूनिवर्सिटी मुरादाबाद और शोभित विश्वविद्यालय मेरठ के पास नैक (नेशनल असिस्मेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल) की ग्रेडिंग है। इन्हें 'ए' या 'बी' ग्रेडिंग प्राप्त है।  इसके अलावा आईआईएमटी यूनिवर्सिटी मेरठ, वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी अमरोहा, मोनाड यूनिवर्सिटी हापुड़ और जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर ने अभी तक नैक की ग्रेडिंग नहीं ली है।

शेष 17 निजी विश्वविद्यालयों ने समाज कल्याण निदेशालय के मांगने पर भी यह सूचना नहीं दी है। विश्वविद्यालयों के लिए ग्रेडिंग नैक ही देती है। छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नियमावली के अनुसार, नैक से 'बी' या उससे उच्च ग्रेडिंग पाने वाले विश्वविद्यालय के विद्यार्थी ही योजना का लाभ पाने के हकदार हैं। प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि इस साल उन विश्वविद्यालयों के सभी पाठ्यक्रमों के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों (फ्रेश छात्र) को योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा, जिन्हें नैक की ग्रेडिंग हासिल नहीं है। यानी, वर्ष 2020- 21 य उसके बाद किसी भी पाठ्यक्रम में नया दाखिला लेने वाले छात्रों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

एनबीए से ग्रेडिंग न पाने वाले तकनीकी संस्थान भी होंगे बाहर

इसी तरह से उन तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, जिन्होंने नियमानुसार एनबीए से ग्रेडिंग हासिल नहीं की है। इसे भी वर्ष 2020-21 से ही लागू किया जाएगा। यानी, पहले से पढ़ रहे छात्रों की छात्रवृत्ति एवं शुल्क भरपाई की सुविधा बंद नहीं होगी। एनबीए की ग्रेडिंग उन पाठ्यक्रमों के लिए जरूरी होती है, जिनकी मान्यता एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन) देती है।

Monday, January 18, 2021

छात्रवृत्ति को लेकर सरकार का नया आदेश, एक बार फिर होगा सत्यापन

छात्रवृत्ति को लेकर सरकार का नया आदेश, एक बार फिर होगा सत्यापन 


अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से प्राथमिक से लेकर उच्चतर शिक्षा तक छात्रवृत्ति के लिए भेजे गए डेटा को भारत सरकार ने वापस कर दिया है। सरकार ने सभी आंकड़ों का एक बार फिर सत्यापन करने का निर्देश दिया है। 


कई जिलों में अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जारी आंकड़ों में खामियों की शिकायत की गई थी। इसी को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार ने सभी प्रदेशों के सभी जिलों में एक बार फिर सत्यापन का निर्देश दिया है। इस क्रम में जिन संस्थाओं की केवाईसी अप्रूव की गई है उनके नोडल अधिकारी का सत्यापन कराया जाएगा। बिना छात्रावास वाले संस्थाओं ने अगर छात्रावास के लिए भी आवेदन किया है तो उसका आवेदन निरस्त करते हुए नियमानुसार कार्रवाई के लिए भी कहा गया है।


मदरसा मान्यता में उल्लेख है कि छात्रों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर शुल्क लिया जा रहा है तो यह गलत है। इसे निरस्त किया जाए। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शिव प्रकाश तिवारी ने बताया कि प्रयागराज में ऐसी शिकायत नहीं आई है। फिर भी केंद्र सरकार ने एक बार फिर डेटा का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। इसे पूरा कर पांच फरवरी तक भेजना होगा। 

Friday, January 15, 2021

UP Board Scholarship : कक्षा 10 से ऊपर की कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के खातों में इस तारीख से आएगी छात्रवृत्ति

UP Board Scholarship : कक्षा 10 से ऊपर की कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के खातों में इस तारीख से आएगी छात्रवृत्ति 

यूपी के समाज कल्याण विभाग की ओर से कक्षा 10 से ऊपर की कक्षाओं के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति व सामान्य वर्ग के गरीब व जरूरतमंद आवेदक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि मिलने का इंतजार जल्द ही खत्म होगा। विभाग ने 26 जनवरी से इन छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि भेजने की तैयारी कर ली है।


विभाग के सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र ने बताया कि 5 नवम्बर तक जिन छात्र-छात्राओं ने आवेदन किये थे और इनमें से जांच के बाद जिनके आवेदन सही पाए गए उनके बैंक खातों में 26 जनवरी से छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि भेजने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। 
वैसे इसकी औपचारिक शुरुआत 24 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार स्थित अवध शिल्पग्राम में होने वाले यूपी दिवस के उद्घाटन के अवसर पर प्रतीक स्वरूप तीन छात्र-छात्राओं को छात्रवृ़त्ति व फीस भरपाई के चेक प्रदान करके करेंगे।

 मुख्यमंत्री आईएएस, पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जरूरतमंद गरीब छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करने की योजना की शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम में इस पूरी योजना की कार्ययोजना पेश की जाएगी जिसके लिए शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग मिलकर तैयारी कर रहे हैं।

Thursday, January 14, 2021

प्रयागराज : नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति हेतु ऑनलाइन आवेदनों के सत्यापन के सम्बन्ध में

प्रयागराज : नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति हेतु ऑनलाइन आवेदनों के सत्यापन के सम्बन्ध में








 

21 जनवरी 2021 तक करें पूर्वदशम छात्रवृत्ति के लिए आवेदन

21 जनवरी 2021 तक करें पूर्वदशम छात्रवृत्ति के लिए आवेदन

लखनऊ :  राज्य सरकार ने पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना में 9वीं-10वीं कक्षाओं से संबंधित पाठ्यक्रमों का मास्टर डाटाबेस तैयार करने, सत्यापन व लाक करने और छात्रों को छात्रवृत्ति आवदेन से संबंधित विवरण के लिए संशोधित समय सारिणी जारी की है। समाज कल्याण विभाग द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जारी निर्देश के अनुसार छात्र एवं छात्राओं द्वारा ऑनलाइन आवेदन किए जाने के लिए 21 जनवरी तक का समय दिया गया है। 27 जनवरी तक विद्यालयों में हार्ड कॉपी जमा कर सकते हैं।

Wednesday, January 6, 2021

छात्रवृत्ति के लिए मेधावियों का आवेदन अब पांच फरवरी 2021 तक

छात्रवृत्ति के लिए मेधावियों का आवेदन अब पांच फरवरी 2021 तक

प्रयागराज : इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 उम्दा अंकों से उत्तीर्ण करने वाले मेधावी अब छात्रवृत्ति पाने के लिए पांच फरवरी तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बशर्ते, उनकी सालाना पारिवारिक आय आठ लाख रुपये अधिक न हो। इसके लिए उनका उच्च शिक्षण संस्थान में नियमित रूप से अध्ययनरत होना जरूरी होगा। 


यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बोर्ड की इंटर परीक्षा 2020 विज्ञान वर्ग में 334, वाणिज्य वर्ग में 313 व मानविकी वर्ग में 304 अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दे रहा है।

Saturday, January 2, 2021

समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीबों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में यूपी बोर्ड के छात्रों को वरीयता

समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीबों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में यूपी बोर्ड के छात्रों को वरीयता


लखनऊ : समाज कल्याण विभाग की ओर से गरीबों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में यूपी बोर्ड के छात्रों को वरीयता दी जाएगी। यानी उपलब्ध बजट में पहले यूपी बोर्ड के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी, इसके बाद सीबीएसई व आइएससी बोर्ड के छात्रों को योजना का लाभ मिलेगा। ऐसे छात्र-छात्रओं को पहले छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिनके माता-पिता निरक्षर हैं।


फर्जी शिक्षण संस्थान छात्रवृत्ति योजना का लाभ न ले पाएं, इसके लिए भी नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। केंद्र सरकार ने प्रदेश को छात्रवृत्ति के लिए नए दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। साथ ही फं¨डग पैटर्न भी बदल दिया है। अब केंद्र सरकार 60 फीसद बजट देगी, जबकि 40 फीसद प्रदेश सरकार को अपने पास से खर्च करना होगा। पहले छात्रवृत्ति योजना में प्रदेश सरकार का ज्यादा खर्च होता था। छात्रवृत्ति में घपला रोकने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से कई कदम उठाने जा रही है।

Friday, January 1, 2021

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में 50 फीसद अंकों की बाध्यता खत्म, आवेदन के नियम शिथिल अंतिम तिथि भी बढ़ी।

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में 50 फीसद अंकों की बाध्यता खत्म, आवेदन के नियम शिथिल अंतिम तिथि भी बढ़ी।


लखनऊ : कोरोना संक्रमण के कारण बाधित हुई पढ़ाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस बार अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में 50 फीसद अंकों की बाध्यता खत्म कर दी है। यानी 50 फीसद से कम अंक पाने वाले छात्र-छात्रओं को भी इस बार छात्रवृत्ति मिल सकेगी। अभी तक छात्रवृत्ति आवेदन के लिए 50 फीसद अंकों की बाध्यता जरूरी थी। वहीं, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 20 जनवरी कर दी गई है।


केंद्र सरकार अल्पसंख्यक गरीब छात्र-छात्रओं के लिए पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना संचालित करती है। अभी तक छात्रवृत्ति के नए आवेदन के साथ ही रिन्यूअल में भी 50 फीसद अंकों की बाध्यता थी, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कई बोर्ड व विश्वविद्यालयों ने बगैर परीक्षा कराए ही छात्र-छात्रओं को प्रोन्नत कर दिया है। इन छात्र-छात्रओं को नंबर नहीं दिए गए हैं। ऐसे में छात्रवृत्ति के आवेदन में अंकों की बाध्यता आड़े आ रही थी। इस समस्या को प्रदेश सरकार ने केंद्र के सामने रखा। केंद्र सरकार ने अब अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में अंकों की बाध्यता पूरी तरह खत्म कर दी है। यह नियम केवल इस साल के लिए ही है। पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति में इस नियम को लागू कर दिया गया है। साथ ही सरकार से अधिक से अधिक विद्यार्थियों के आवेदन पत्र भरवाने के लिए कहा है। केंद्र ने मेरिट-कम-मीन्स योजना के तहत पुराने छात्रों के रिन्यूअल के लिए तो 50 फीसद अंकों की बाध्यता खत्म कर दी है, लेकिन नए आवेदनों में 50 फीसद अंकों की बाध्यता लागू रहेगी। व्यावसायिक व तकनीकी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है।

Wednesday, December 30, 2020

UP : छात्रवृत्ति व फीस भरपाई पाने को आधार लिंक बायोमेट्रिक हाजिरी जरूरी

UP : छात्रवृत्ति व फीस भरपाई पाने को आधार लिंक बायोमेट्रिक हाजिरी जरूरी


अगले शैक्षिक सत्र से उत्तर प्रदेश में उन्हीं छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलेगा। अपने शिक्षण संस्थान में आधारलिंक बायोमेट्रिक हाजिरी लगाएंगे। यही नहीं छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ लेने के लिए आधार लिंक बैंक खाता भी अनिवार्य होगा। समाज कल्याण विभाग की नई गाइडलाइन में यह प्रावधान किए गए हैं। 


अब अनुसूचित जाति के  ऐसे छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सुविधा प्राथमिकता पर दी जाएगी जिनके माता-पिता दोनों या उनमें से एक अशिक्षित होंगे। ऐसे छात्र-छात्राएं भी प्राथमिकता पर यह सुविधा पाएंगे जो राज्य सरकार के परीक्षा बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा पास करेंगे या नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत जैसे स्थानीय निकायों द्वारा संचालित विद्यालयों में पढ़े होंगे।

इसके अलावा अब कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं के लिए अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं  को दी जाने वाली छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की योजना में व्यय होने वाले कुल बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार देगी और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार देगी। अभी तक करीब 90 प्रतिशत राज्य सरकार दे रही थी। चालू वित्तीय वर्ष के लिए कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई देने के लिए कुल 1977.25 करोड़ रूपये खर्च होंगे जिनमें से 60 प्रतिशत यानि 1186.35 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा यानि 790.90 करोड़ रूपये राज्य सरकार देगी।

 छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सुविधा पाने के लिए अब सिर्फ सामान्य  बैंक खाते से ही काम नहीं चलेगा बल्कि उस बैंक खाते को आधार लिंक भी होना चाहिए। केन्द्र सरकार अपने हिस्से के बजट से छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि सीधे इसी आधार लिंक बैंक खाते में भेजेगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र ने दी है। उन्होंने बताया कि अब इस पूरी योजना का सोशल आडिट यानि थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया जाएगा। शिक्षण संस्थाओं को हर छह महीने में स्वत: मूल्यांकन की रिपोर्ट देनी होगी।