Monday, June 15, 2026
Thursday, June 4, 2026
अध्यापिका को CCL दिए जाने के मामले में मनमानेपन और मानसिक शोषण किए जाने तथा विभाग की छवि धूमिल करने पर कन्नौज के खण्ड शिक्षा अधिकारी निलंबित, देखें आदेश
Sunday, January 19, 2025
महिला प्रोफेसर बच्चे की देखभाल के लिए दो साल तक ले सकती हैं छुट्टी, यूजीसी रेग्यूलेशन 2025 शिक्षण संस्थान छुट्टी देने में नहीं कर सकेंगे आनाकानी
Thursday, May 14, 2020

पॉलीटेक्निक : महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश
शिक्षकों को फिर से मिलेगा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश।
लखनऊ : सरकारी व सहायता प्राप्त पॉलिटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत महिला शिक्षकों व कर्मचारियों को अब दोबारा प्रसूति व बाल्य देखभाल अवकाश मिलेगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। दरअसल तीन मई 2018 को आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा निर्धारित वेतनमान लागू किए जाने के कारण इन अवकाशों को रद कर दिया गया था, क्योंकि एआईसीटीई द्वारा इस तरह के अवकाश देने का कोई प्रावधान नहीं था। विरोध के चलते एआईसीटीई ने इसे राज्यों यह व्यवस्था दोबारा लागू करने की छूट दे दी। इसके बाद अब शासन ने इन अवकाशों को दोबारा मंजूरी दे दी है। प्रमुख सचिव एस राधा चौहान की ओर से बुधवार को यह आदेश जारी कर दिया गया। पालीटेक्निक संस्थाओं में पढ़ा रही महिला शिक्षकों व महिला कर्मचारियों को पूर्ण सेवाकाल में 180 दिनों का प्रसूति अवकाश मिलेगा। विशिष्ट परिस्थितियों में दो साल का बाल्य देखभाल अवकाश वह ले सकेंगी। एक साल में तीन बार से अधिक बाल्य देखभाल अवकाश नहीं मिलेगा। यह 15 दिन से कम के लिए नहीं दिया जाएगा। अगर किसी ने बच्चा गोद लिया है तो उसे दत्तक ग्रहण अवकाश 180 दिनों का दिया जाएगा।

Monday, April 29, 2019
Saturday, April 20, 2019
Thursday, February 21, 2019
Wednesday, February 20, 2019
Wednesday, January 16, 2019
Tuesday, April 17, 2018
Wednesday, January 24, 2018
Monday, January 15, 2018
Friday, November 3, 2017
Monday, April 24, 2017
Sunday, January 8, 2017
Friday, January 6, 2017
Wednesday, November 2, 2016

बिकती हैं माँ की छुट्टी, सीसीएल के नाम पर शिक्षिकाओं का हो रहा खुलेआम शोषण, प्रति माह के हिसाब से लिए जाते रुपये, नहीं दे रहा कोई ध्यान
केस एक
सुरसा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने दो माह पूर्व सीसीएल के लिए आवेदन दिया था। उसकी सहायिका पूर्व में चिकित्सीय अवकाश पर रही। प्रधानाध्यापिका ने सोंचा कि सहायिका आ जाएगी तो वह सीसीएल पर चली जाएगी लेकिन उसी बीच सहायिका ने जुगाड़ लगाकर सीसीएल करवा ली। प्रधानाध्यापिका का आवेदन पहले था, लेकिन उसे अवकाश नहीं मिल सका और वह रोती घूमती रही।
केस दो
बावन विकास खंड के एक विद्यालय की शिक्षिका ने सीसीएल के लिए आवेदन किया। तो उससे 17 हजार रुपये मांगे गए। साफ साफ कह दिया गया कि लेना हो तो लो नहीं तो आगे बढ़ो। अभी हाल में ही एक शिक्षिका से रुपये मांगे गए। सौदेबाजी होते होते आठ हजार में बात पक्की हो गई। इसी बीच शिक्षिका के परिवारी जन ने रुपये मांग रहे लिपिक का वीडियो बना लिया और मामला काफी तूल पकड़ा।
शिक्षिकाओं की बाल्य देखभाल अवकाश में खेल के दो मामले तो महज उदागरण मात्र हैं। आए दिन रोजाना ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की बातें तो बहुत हो रही हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान तो देना दूर की बात उल्टे शोषण हो रहा है। शिक्षिकाओं की बाल्य देखभाल अवकाश के नाम पर खुलेआम वसूली हो रही है। हालत तो यह हो गई है कि छुट्टी बिकती है, जो खरीदता उसे मिलती नहीं तो शिक्षिकाएं दर दर भटकती रहती हैं लेकिन कोई ध्यान देने वाल नहीं है।विद्यालयों में ड्यूटी के साथ ही शिक्षिकाएं अपनी जिम्मेदारी भी निभा सकें, कुछ इसी मंशा के साथ सीसीएल यानी कि चाइल्ड केयर लीव ( बाल्य देखभाल अवकाश ) की व्यवस्था बनाई गई थी। जिसमें दो भी शिक्षिका अपने सेवाकाल के दौरान दो बच्चों की देखभाल के लिए दो वर्ष तक की सीसीएल ले सकती है। शिक्षिकाओं को यह अवकाश तीन तीन माह के लिए दिया जाता है। वैसे सरकार की मंशा तो अच्छी थी लेकिन मनमानी का शिकार हो गई। पूर्व में खंड शिक्षा अधिकारी सीसीएल देते थे लेकिन शिकायत हुई कि ब्लाकों पर शोषण होता है तो बीएसए को अधिकार दे दिया गया तो और खेल बढ़ गया है और अब प्रति माह के हिसाब से रुपये मांगे जाते हैं। बीएसए कार्यालय में लंबित प्रकरण खेल की गवाही दे रहे हैं। जो व्यवस्था कर देता उसे अवकाश मिल जाता नहीं तो शिक्षिकाएं परेशान घूमती रहती हैं।
प्रति माह के हिसाब से लिए जाते रुपये नहीं दे रहा कोई ध्यानसीसीएल में किसी भी तरह के खेल की बात से साफ इन्कार कर रहे हैं। जो भी आता है, नियमानुसार सीसीएल दे दी जाती है। अगर कहीं से रुपये मांगने या फिर मनमानी की शिकायत आती है तो वह जांच कर कार्रवाई करेंगे।-मसीहुज्जमा सिद्दीकी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
Saturday, August 6, 2016
Wednesday, July 27, 2016

आगरा : बीएसए का अधिकार, बीईओ दे रहे स्वीकृति, बीईओ ने अधिकार छीनने के बाद भी दिया बाल्यकाल अवकाश
मातृत्व अवकाश और बाल्य देखभाल अवकाश देने का अधिकार भले ही शासन ने दोबारा बीएसए को दे दिया हो, लेकिन अभी भी खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) अपने स्तर से अवकाश स्वीकृत कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में बाल्य देखभाल और मातृत्व अवकाश प्रदान करने में गड़बड़ी होती है। इन गड़बड़ियों को रोकने और शिक्षकों को बीएसए कार्यालय के चक्कर न काटने पड़े, इसलिए अवकाश स्वीकृति का अधिकारी बीईओ को दिया था। बीईओ को अधिकार मिलने पर ब्लॉक पर भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ गईं। इसके बाद शासन ने 22 जून को फिर से बीएसए को अवकाश स्वीकृति के अधिकार मिल गए, लेकिन इसके बाद भी बाह की बीईओ पूनम चौधरी अवकाश स्वीकृत कर रही हैं। अधिकार छीनने के बाद भी बीईओ ने दो जुलाई को शिक्षिका भावना को 90 दिन का बाल्य देखभाल अवकाश दे दिया। ये एक मामला नहीं है, बल्कि कई ब्लॉक में अभी भी बीईओ अवकाश स्वीकृत कर रहे हैं। इस मामले पर बीएसए धर्मेद्र सक्सेना का कहना है कि सभी बीईओ को इस संबंध में अवगत करा दिया था। इसके बाद भी अगर किसी ने अवकाश स्वीकृत की तो उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। तैनाती में भी नहीं माने नियम बीईओ पूनम चौधरी द्वारा नियमों को दरकिनार करने की आदत है। अवकाश स्वीकृति हो या शिक्षक की ज्वाइनिंग। सब में नियम के विपरीत काम करती हैं। पिछले दिनों उन्होंने बिचपुरी के विद्यालय में शिक्षिका को बिना रिलीव व आदेश के ज्वाइनिंग करा दी। इतना ही नहीं उसका वेतन लगवाने के लिए लेखाधिकारी को पत्रवली भेज दी।






















