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Monday, November 23, 2020

कमेटी की रिपोर्ट लागू करने के लिए सीएम को पत्र लिखेंगे शिक्षामित्र

कमेटी की रिपोर्ट लागू करने के लिए सीएम को पत्र लिखेंगे शिक्षामित्र


लखनऊ । प्रदेश के 1.60 लाख शिक्षामित्र 25 नवंबर को मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट लागू करने को मांग करेंगे।


उप्र. दूरस्थ शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने एक साल पहले अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी, लेकिन सरकार ने इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। 


शिक्षा मित्र सवा दो साल से मात्र 10 हजार रुपये के मानदेय पर काम कर रहे हैं, जबकि शिक्षा मित्रों से सहायक अध्यापकों के समान ही कार्य कराया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों की नीतियों के कारण शिक्षा मित्र तनाव में रहते हैं।

Wednesday, November 18, 2020

बेसिक शिक्षा विभाग की 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती में देरी के खिलाफ प्रदर्शन

बेसिक शिक्षा विभाग की 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती में देरी के खिलाफ प्रदर्शन


अंबेडकरनगर। उर्दू शिक्षकों की भर्ती में लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को पीस पार्टी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया। कहा गया कि 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती होनी थी, लेकिन शासन द्वारा जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। इससे उर्दू शिक्षक बनने की उम्मीद लगाए युवक-युवतियों को तगड़ा झटका लगा है। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू की गई, तो कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।


जिलाध्यक्ष अफजाल अंसारी ने कहा कि प्रदेश में 4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती होनी थी। युवाओं ने इसके लिए आवेदन भी किया। इसके बाद से भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। आरोप लगाते हुए कहा कि शासन जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया में विलंब कर रहा है। प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकार की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा ने सबका साथ, सबका विकास नारा दिया था, इसे अब भूल रही है।
अल्पसंख्यकों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनके हित की अनदेखी की जा रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मांग करते हुए कहा कि उर्दू शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को अविलंब शुरू किया जाए। 


वक्ताओं ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया न शुरू होने से बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक युवतियां को तगड़ा झटका लगा है। कहा कि वर्ष 2016 में इसे लेकर राष्ट्रीय आह्वान पर पीस पार्टी कार्यकर्ताओं ने 56 दिन का धरना दिया था।


उस समय भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक नहीं शुरू हो सकी। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया नहीं शुरू की गई, तो कलेक्ट्रेट के निकट अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। बाद में राज्यपाल को संबोधित शिकायतीपत्र नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इस दौरान हाजी वलीउल्लाह, गुलाम रसूल, मोहम्मद अख्तर, हाजी मुनीर, धर्मदेव, सरदार आलम आदि मौजूद रहे।

Wednesday, November 11, 2020

बिना पूर्व सूचना के परिषदीय स्कूलों में ARP के भ्रमण को लेकर विरोध, सपोर्टिव सुपरविजन की मांग

बिना पूर्व सूचना के परिषदीय स्कूलों में ARP के भ्रमण को लेकर विरोध, सपोर्टिव सुपरविजन की मांग 


प्रयागराज : स्कूलों में पठन पाठन को बेहतर बनाने के लिए एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को तमाम दिशा निर्देश दिए गए हैं। इनमें एक यह भी है कि वह स्कूलों का सपोर्टिव सुपरविजन करेंगे। एआरपी को हिदायत दी गई है कि वह बिना सूचना स्कूल न जाएं। जब भी जाएं तो विद्यालय में पहुंचकर अध्यापकों को सुझाव व सहयोग दें। पठन पाठन के तौर तरीकों पर चर्चा करें।


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक (पीएसपीएसए) के प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि कुछ जगहों से शिकायत मिल रही है कि एआरपी स्कूलों में बिना सूचना के पहुंच रहे हैं। सहयोग की जगह वे प्रशासनिक गतिविधि का हिस्सा बन रहे हैं जो कि गलत है। उनका काम प्रतिदिन दो स्कूल में जाकर शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए प्रयास करना है। 


बच्चों व शिक्षकों से बात करने जिससे यदि अध्यापन में तकनीकी दोष हो तो उसे दूर किया जा सके। प्रत्येक एआरपी यदि सूचना देकर आएंगे तो विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को भी बुलाया जा सकेगा। स्कूल में अभिभावक रहेंगे तो ही उनके अध्यापन संबंधी फीडबैक मिलेगा। बिना सूचना दिए आने पर अभिभावकों से कोई बात नहीं हो पाती है।


उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया है कि बिना सूचना दिए आने वाले एआरपी को स्कूल में स्थान न दें। ऐसे लोगों की शिकायत भी विभाग के उच्चाधिकारियों से की जाएगी। समन्वयक डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि एआरपी के नियुक्ति का उद्देश्य है कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरे। अध्यापक भी जिम्मेदारी से बच्चों को पढ़ाएं।

Friday, November 6, 2020

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होने पर शिक्षक करेंगे धरना प्रदर्शन, लटकी प्रक्रिया को लेकर अब धैर्य देने लगा जवाब

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होने पर शिक्षक करेंगे धरना प्रदर्शन, लटकी प्रक्रिया को लेकर अब धैर्य  देने लगा जवाब



सीतापुर। लटकी अंतर्जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर अब शिक्षकों का धैर्य जवाब देने लगा है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि 8 नवंबर तक अगर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है तो लखनऊ में धरना प्रदर्शन किया जाएगा।


शिक्षकों का कहना है अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का विज्ञापन निकलने के बाद यूपी सरकार ने शीघ्र ही स्थानांतरण करने की बात कही थी। लेकिन बीच सत्र का हवाला देकर स्थानांतरण प्रक्रिया को रोक दिया गया था। सरकार का कहना था कि बीच सत्र में स्थानांतरण होने से शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। सत्र समाप्त हो जाने के उपरांत भी प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई। 


कोविड-19 के चलते समस्त स्थानांतरण प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी गई थी। शिक्षकों ने ट्वीट अभियान चलाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। इस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के स्थानांतरण करने की घोषणा कर दी। तब से लेकर आज तक तीन बार कार्यक्रम सूची का प्रकाशन हो चुका है। शिक्षक राजीव गौड़ ने कहा यदि 8 नवंबर तक सूची का प्रकाशन नहीं किया गया तो शिक्षक लखनऊ निशातगंज में धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। शिक्षक दुर्गेश, विक्रम, अभय, संतोष आदि ने शिक्षकों ने स्थानांतरण की मांग की है।

Wednesday, October 28, 2020

69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति न मिलने के विरोध में निकाला प्रोटेस्ट मार्च

69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति न मिलने के विरोध में निकाला प्रोटेस्ट मार्च


परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 69000 पदों के सापेक्ष 31277 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के विरोध में अभ्यर्थी लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को अभ्यर्थियों ने चंद्रशेखर आजाद पार्क में बैठक की।

उसके बाद वहां से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। उसके बाद वह प्रदेश सरकार के विरोध में नारेबाजी करते हुए शिक्षा निदेशालय पहुंचे और उप सचिव या भूषण चतुर्वेदी को ज्ञापन । उनकी मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द नियुक्ति दी जाए। इस मौके पर दिनेश सिंह यादव, रवींद्र यादव, बढ्री प्रसाद शुक्ल, अभेंद्र, विकास मिश्र आदि मौजूद रहे।

Thursday, October 22, 2020

69000 भर्ती आवेदन में त्रुटि संशोधन की मांग को लेकर तीसरे दिन धरना, झाड़ू लगा कर की गांधीगिरी

69000 भर्ती आवेदन में त्रुटि संशोधन की मांग को लेकर तीसरे दिन धरना, झाड़ू लगा कर की गांधीगिरी


स्कूली शिक्षा महानिदेशक से आश्वासन मिलने के बाद भी संतुष्ट नहीं अभ्यर्थी
 
प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के आवेदन में त्रुटि संशोधन की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर धरना दिया। अपनी मांगों के समर्थन में अभ्यर्थियों ने परिसर में झाड़ू लगाकर गांधीगिरि भी की।


हालांकि उनसे मिलने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। वाराणसी से धरने में पहुंची एक अभ्यर्थी शालिनी पांडेय फूट-फूटकर रोने लगी। 31277 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल शालिनी ने वाराणसी में काउंसिलिंग करा ली है लेकिन प्राप्तांक के कॉलम में 825 की जगह 835 लिखा होने के कारण उसे नियुक्ति पत्र देने से मना कर दिया गया है।


अभ्यर्थियों का कहना है कि महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने मंगलवार को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से लखनऊ में मुलाकात की थी लेकिन त्रुटि संशोधन को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो रही। दूसरी ओर शासन ने 31277 की लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश भी बुधवार को दे दिया है। ऐसे में मामूली त्रुटि के कारण हाई मेरिट वाले सैकड़ों अभ्यर्थी बाहर हो रहे हैं। पुलिस की चेतावनी के कारण अभ्यर्थियों ने प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक धरना देने का निर्णय लिया है।

Sunday, October 18, 2020

69000 शिक्षक भर्ती विरोध : वार्ता के बाद भूख हड़ताल खत्म

69000 शिक्षक भर्ती विरोध : वार्ता के बाद भूख हड़ताल खत्म

 
प्रयागराज : 69000 शिक्षक भर्ती के विरोध में प्रतियोगियों की भूख हड़ताल दूसरे दिन खत्म हो गई है। अनशनकारी अमर बहादुर गौतम से बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने फोन कर वार्ता की। उन्होंने त्रुटि संशोधन करने की मांग को पूरा करने और अन्य मुद्दों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया। जिसके बाद शिक्षक संघ के सचिव प्रेम सागर व इंसाफ मंच के संयोजक डा आरपी गौतम ने जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराया।


69000 शिक्षक भर्ती एक साथ पूरी करने, भर्ती में आरक्षण का पालन करने, फार्म में हुई मानवीय त्रुटि सुधार का मौका देने व भ्रष्टाचार में लिप्त सभी दोषियों को दंडित करने के लिए सीबीआइ जांच कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुक्रवार को परिषद मुख्यालय के सामने शुरू हुई थी। अमर बहादुर गौतम ने कहा कि भर्ती के अन्य सवालों पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। यहां अनिल कुमार, रामनिवास गौतम, इनौस के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य, न्याय मोर्चा के सह संयोजक सुमित गौतम, अनिल यादव आदि थे।

Thursday, October 15, 2020

अलीगढ़ : स्कूल में अपने बच्चे साथ लाने पर शिक्षिकाओं को सुनाई खरी-खोटी, संघ ने किया विरोध- सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों पर हो कार्यवाही

अलीगढ़ : स्कूल में अपने बच्चे साथ लाने पर शिक्षिकाओं को सुनाई खरी-खोटी, संघ ने किया विरोध- सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों पर हो कार्यवाही


अलीगढ़। एक तरफ गुरुजनों का सम्मान करने की नसीहत दी जाती है। वहीं, डायट के प्रवक्ताओं ने शिक्षकों को खरी-खो सुनाकर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई है। दरअसल, प्रवक्ताओं की खरी-खोटी शिक्षकों को इसलिए सुननी पड़ी. क्योंकि वह विद्यालय में अपने बच्चे साथ ले आई थीं। शिकायत पर इन प्रवक्ताओं से अब उप शिक्षा निदेशक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व डायट प्राचार्य डॉ. आईपीएस सोलंकी ने स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि किसी को भी इस तरह के व्यवहार को अनुमति नहीं है।


सोमवार को विकासखंड लोधा के कई विद्यालयों का निरीक्षण डायट के प्रवक्ता करने गए थे। विद्यालय पहुंचते ही प्रवक्ताओं ने शिक्षिकाओं को बच्चे साथ लाने पर खरी-खोटी सुनाई। शिक्षिकाओं ने कहा, उनके घर पर बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। बच्चे छोटे हैं, उन्हें अकेला घर पर नहीं छोड़ सकती। उधर, घटना की जानकारी लगते ही शिक्षक संघ मैदान में कूद गया। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री मुकेश कुमार सिंह व उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने मामले की शिकायत उप शिक्षा निदेशक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ब डायट प्राचार्य से की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं
की गई तो संगठन अग्रिम कदम उठाने को मजबूर होगा।

Saturday, October 10, 2020

संविदा समाप्ति के विरोध में कस्तूरबा गांधी की शिक्षिकाओं का प्रदर्शन

संविदा समाप्ति के विरोध में कस्तूरबा गांधी की शिक्षिकाओं का प्रदर्शन


संविदा समाप्त किए जाने को लेकर आंदोलनरत कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के शिक्षक- शिक्षिकाओं ने रविवार को भी हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस ने इन शिक्षिकाओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डेन भेज दिया।


शिक्षिकाओं ने बताया कि एक शासनादेश के जरिए 2006 से सेवारत संविदा शिक्षक व शिक्षाकाओं की संविदा समाप्त की जा रही है। महामारी के दौर ने संविदा समाप्त करने से शिक्षक सड़क पर आ जाएंगे।

 
संविदा समाप्ति के विरोध में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की शिक्षिकाओं ने शुक्रवार को भी हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने शिक्षिकाओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डेन भेज दिया। 


यहां भी शिक्षिकाओं ने अपना विरोध जारी रखा। प्रदर्शन के दौरान कई जिलों से आई शिक्षक शामिल रही। शिक्षिकाओं ने बताया कि उन्होंने इन विद्यालयों की शुरुआत की है। घर-घर जाकर लड़कियों को अपने भरोसे पर पढ़ने के लिए विद्यालयों में जाए। अब एक शासनादेश के जरिए 2006 से सेवारत संविदा शिक्षक व शिक्षाकाओं की संविदा समाप्त की जा रही है। शिक्षिका आशा ने बताया कि महामारी के दौर ने संविदा समाप्त करने से शिक्षक सड़क पर आ जाएंगे।

Sunday, September 27, 2020

ओबीसी अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव किया, पिछड़ा वर्ग आयोग की रोक के बावजूद भर्ती की कोशिश पर उपजा आक्रोश

ओबीसी अभ्यर्थियों ने शिक्षा निदेशालय का घेराव किया, पिछड़ा वर्ग आयोग की रोक के बावजूद भर्ती की कोशिश पर आक्रोश


ओबीसी एससी अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा निदेशालय के बाहर किया जबरदस्त प्रदर्शन, पुलिस प्रशासन को छकाया


लखनऊ।   69000 शिक्षकों की भर्ती में अनिमियता का आरोप लगाते हुए ओबीसी, एससी व एसटी के अभ्यर्थियों ने शनिवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने जोरदार नारेबाजी की तथा शिक्षा निदेशालय के पास रोड जाम करने का प्रयास किया। उनकी संख्या ज्यादा देख प्रशासन ने इन्हें ईको गार्डेन धरना स्थल खदेड़ा। 


अभ्यर्थियों ने कहा कि वह अब तभी वापस जाएंगे जब मुख्यमंत्री उन्हें न्याय का आश्वासन देंगे। उनका कहना था कि भर्ती में ओबीसी व एसी के छात्रों के साथ नाइंसाफी की गयी है। अभ्यर्थियों ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में घोर अनियमितायें की हैं। 


भर्ती प्रक्रिया पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 2020 में में ही रोक लगा दी थी। फिर किस आधार पर भर्ती की जा रही है। आयोग ने ओबीसी के साथ नाइंसाफी की जानकारी पर ही रोक लगायी थी। अभ्यर्थियों ने कहा कि जब सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ है तो शिक्षक भर्ती की मूल चयन सूची, शैक्षिक गुणांक सहित वर्गवार इसकी सूची क्यों नहीं जारी की जा रही है। क्यों नहीं आयोग को इसकी पूरी सूचना दी जा रही है।


 एमआरसी की आड़ में ओबीसी व एससी का आरक्षण छीना जा रहा है। इसे अभ्यर्थी बर्दास्त नहीं करेंगे। कोर्ट व आयोग में मूल चयन सूची उपलब्ध करायी जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं होगी, मुख्यमंत्री से न्याय का आश्वासन नही मिलेगा तब तक वह नहीं जाएंगे। उनका धरना अनवरत जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का कहना था कि आयोग का फैसला आने के बाद हो भर्ती की जाए। सरकार जल्दबाजी क्यों कर रही है? 


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक मांग नहीं मानी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हंगामे के बाद बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल तथा संयुक्त निदेशक गणेश कुमार अभ्यर्थियों से मिलने धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अभ्यर्थियों ने अधिकारियों से लिखित आश्वासन मांगा। लेकिन अधिकारियों ने लिखित आश्वासन देने में असमर्थता जताई।

Monday, September 21, 2020

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

 
लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के ओबीसी अभ्यर्थियों ने 67 हजार 887 चयनित अभ्यर्थियों में से 31 हजार 361 को नियुक्ति देने के सरकार के निर्णय को राष्ट्रीय ओबीसी आयोग को अवमानना बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने भर्ती पर स्थगन आदेश दे रखा है, उसके बाद सरकार नियुक्ति कैसे कर सकती है।


 अभ्यर्थियों ने आगामी दिनों में लखनऊ में आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, विभाग का दावा है कि आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है, नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत ही दी जा रही है। आरक्षण एवं एमआरसी लीगल टीम के प्रवक्ता विजय यादव का कहना है कि ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति ने 7 जुलाई को भर्ती पर रोक लगाई थी। 


आयोग ने स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होने के बाद भी आयोग की ओर से मामले में निर्णय देने तक भर्ती पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग के आदेश के तहत अभी तक सरकार इस 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की वर्ग बार शैक्षिक गुणांक सहित मूल चयन सूची उपलब्ध नहीं कराई है।

Saturday, September 12, 2020

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान


उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने अधिवक्ता के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है। इसमें बीएसए पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। बीएसए दफ्तर का बहिष्कार करने की बात भी शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने पत्र में कही है।


जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामवीर सिंह एवं महामंत्री अनिल कुमार ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रमेशचंद्र शर्मा के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है, जिसमें मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शिक्षक संघ के किसी भी प्रत्यावेदन का संज्ञान नहीं लिया जा रहा। नोटिस में अन्य आरोप भी लगाए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने अध्यापकों को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं शिक्षक संघ के प्रति अनुचित व्यवहार करने के कारण कार्यालय का बहिष्कार करने की भी बात कही है।


 नोटिस के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सिविल कोर्ट के नोटिस का निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर जूनियर संगठन ने मेरे नोटिस का कोई तर्क संगत जवाब नहीं दिया तो इनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी। -मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।

Tuesday, September 8, 2020

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार




प्रयागराज : शिक्षा सेवा अधिकरण के मुद्दे पर सोमवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई। बैठक में सबने एक स्वर में कहा कि शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में बनना ही कानून व संविधान सम्मत है। इससे कम कुछ स्वीकार नहीं किया जाएगा।


एसोसिशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार गैरकानूनी निर्णय लेकर प्रयागराज की गरिमा से खिलवाड़ कर रही है, जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वादे के अनुरूप शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में स्थापित किया जाय, क्योंकि यहीं हाईकोर्ट की प्रधान पीठ है। अगर हमारी मांग की अनदेखी की गई तो सरकार को उसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी, क्योंकि वकील अपने अधिकार व सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। वहीं, मंगलवार को लोक संपत्ति क्षतिपूर्ति दावा अधिकरण के मुद्दे पर शहर के सभासदों की बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष जमील अहमद आजमी ने की।

Sunday, September 6, 2020

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

 
प्रयागराज : उप्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय व कानून के खिलाफ जाकर शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने की कड़ी निंदा की है। सरकार को नौकरशाही के इशारे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना करने का दोषी करार दिया है।


एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार तिवारी ने की। संचालन सचिव जीपी सिंह ने किया। एसोसिएशन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के केस में स्पष्ट रूप से निर्णय दिया है कि अधिकरण वहीं गठित हो जहां हाईकोर्ट हो। उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम में स्पष्ट लिखा गया है कि उप्र का हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट है। लखनऊ में इसकी खंडपीठ है। 


इलाहाबाद हाईकोर्ट का मुख्यालय प्रयागराज में होने के नाते किसी भी अधिकरण का मुख्यालय भी प्रयागराज में ही होना चाहिए, क्योंकि प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ स्थित है। हर अधिकरण पर हाईकोर्ट का क्षेत्रधिकार व नियंत्रण होता है। ऐसे में अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में न बनाकर लखनऊ में बनाना कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नौकरशाही के दबाव में आकर कानून व सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के विपरीत, शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है।


मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र : इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरनाथ त्रिपाठी ने शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री को ई-मेल से पत्र भेजकर विरोध किया है और कहा है कि कैबिनेट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के मद्रास बार एसोसिएशन केस, यूपी अमल्गमेशन आर्डर के तहत नसीरुद्दीन केस के फैसले व उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम के उपबंधों का खुला उल्लंघन है। 


त्रिपाठी ने प्रदेश के महाधिवक्ता एवं विधायी कार्य देखने वाले अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा है कि सही कानूनी सलाह न देने के कारण सरकार गलत फैसले ले रही है और सुप्रीम कोर्ट में जीतने वाले मुकदमे हारती जा रही है। त्रिपाठी ने प्रयागराज में ही शिक्षा सेवा अधिकरण स्थापित करने की मांग की है और कहा है कि मुख्यमंत्री नेताओं व नौकरशाही के दबाव में फैसले न लेकर कानूनी दायित्व निभाए।


शिक्षा प्राधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। सरकार के इस फैसले से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर प्रयागराज की गरिमा एवं पहचान से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।


सुभाष चौराहा पर एकत्रित कार्यकर्ता घेरा बनाकर बैठ गए थे। उनका कहना कि जिले का नाम बदलने के साथ सरकार इसकी सूरत और पहचान बदलने की साजिश कर रही है। यहां से सभी मुख्यालय हटाए जा रहे हैं। सरकार यह निर्णय प्रयागराज वालों के साथ धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाहाबाद की उपेक्षा मंत्रियों को भारी पड़ेगी। आंदोलन की अगुवाई कर रही ऋचा सिंह ने मंत्रियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सवाल उठाया।

Wednesday, September 2, 2020

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध


अधिकारियों में तालमेल नहीं और शिक्षक हो रहे कोरोना काल में  परेशान

प्रयागराज। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश में विरोधाभास पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से ब्लॉक-4 की गाइड लाइन में स्कूल-कॉलेज एवं शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। 


21 सितंबर से स्कूलों में 50 फीसदी टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टॉफ को ऑनलाइन शिक्षा एवं परामर्श के लिए बुलाया जा सकता है। यह आदेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। जबकि, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के निर्देश पर जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही सभी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है।


लखनऊ : अनलॉक 4 की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्र सरकार ने 21 सितंबर के बाद 50 फीसदी स्टाफ को ही स्कूल बुलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद प्रदेश में बिना रोस्टर सभी शिक्षकों को रोज बुलाया जा रहा है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस पर नाराजगी जताते हुए रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार 30 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश हैं। ऐसे में शिक्षकों समेत सभी कर्मचारियों को बुलाने से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

Saturday, August 8, 2020

आक्रोश : B.Ed परीक्षा का विरोध, छात्रों ने जलाया प्रवेश पत्र

आक्रोश : B.Ed परीक्षा का विरोध, छात्रों ने जलाया प्रवेश पत्र।

कोरोना महामारी के बीच प्रदेशभर में रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने विरोध में छात्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। छात्रसंघ के सामने सैकड़ों छात्र उपस्थित होकर प्रवेश पत्र जलाकर विरोध दर्ज किया। वहीं, बिना परीक्षा प्रोन्नत किए जाने की मांग को लेकर छात्रों का क्रमिक अनशन जारी रहा। अनशन स्थल पर पहुंचकर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एमएलसी रामवृक्ष यादव ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी युवा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना चाहती है यह गंभीर विषय है। अगर सरकार ने इस पर अपना रवैया नहीं बदला इसका अर्थ होता है उसे करोड़ों युवाओं की चिंता नहीं है।



आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ सरकार पर भारी पड़ेगा। जनतांत्रिक मूल्यों को छोड़कर तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया तो यह आंदोलन जन सैलाब में परिवर्तित हो जाएगा। इस अवसर पर राजेश शर्मा, राघवेन्द्र यादव, छात्रनेता अजय यादव सम्राट, शैलेश पासवान, अविनाश विद्यार्थी, रोहित सावन, मो. सलमान, नवनीत यादव, आयुष प्रियदर्शी, शक्ति रिजवान, सचिन पहलवान, जितेन्द्र धनराज, राहुल पटेल, कुंवर विकास, सुनील पटेल, विकास यादव, सलमान आदि मौजूद रहे।


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Friday, August 7, 2020

CBSE कंपार्टमेंट परीक्षा रद कराने को शुरू हुई ट्विटर मुहिम, अभिभावक और शिक्षाविद भी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के पक्ष में नहीं

CBSE कंपार्टमेंट परीक्षा रद कराने को शुरू हुई ट्विटर मुहिम, अभिभावक और शिक्षाविद भी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के पक्ष में नहीं

 
प्रयागराज : सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के नतीजे 13 और 15 जुलाई को घोषित किए गए। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट परीक्षा भी देनी है, क्योंकि वे पास होने के लिए जरूरी अंक नहीं हासिल कर सके। अब ढेरों ऐसे विद्यार्थी हैं जिनकी मांग है कि कंपार्टमेंट परीक्षा इस बार न कराई जाए। इसके लिए उन्होंने ट्विटर पर मुहिम भी शुरू कर दी है।



विद्यार्थियों का कहना है कि जब परीक्षा चल रही थी तब कोरोना संक्रमण के चलते कुछ विषयों की परीक्षा रद करनी पड़ी। उन विषयों में अन्य विषयों के आधार पर नंबर दे दिए गए। उसके बाद परीक्षा परिणाम भी घोषित हो गए। अब कंपार्टमेंट परीक्षा कराने पर बोर्ड अड़ा है, जबकि कोरोना संक्रमण लगातार फैल रहा है। अभी परीक्षा कराने से विद्यार्थी संक्रमण की जद में आ सकते हैं। दूसरी तरफ कंपार्टमेंट परीक्षा और उनके नतीजों के घोषित होने में विलंब के कारण छात्र-छात्रएं किसी अन्य जगह दाखिला नहीं ले पा रहे हैं।

Wednesday, July 29, 2020

कोरोना संक्रमण की स्थिति में बीएड की प्रवेश परीक्षा आयोजन पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

कोरोना संक्रमण की स्थिति में  बीएड की प्रवेश परीक्षा पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

 
कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस हालात में 9 अगस्त को प्रस्तावित बीएड प्रवेश परीक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश पत्र जारी करने के बाद अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। 


अभ्यर्थी शक्ति राजभर ने सोशल मीडिया पर अपना प्रवेश पत्रसाझा किया है। वह कहते हैं कि उन्होंने प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ के परीक्षा केन्द्रों पर पेपर देने का विकल्प भरा था। उन्हें 250 किमी दूर बलरामपुर में एमएलके पीजी कॉलेज में परीक्षा केन्द्र आवंटित किया गया है। 


प्रयागराज के बृजेश सिंह लिखते हैं कि उन्होंने प्रयागराज में परीक्षा केन्द्र का विकल्प भरा था। केन्द्र इटावा में दिया गया है। कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात में परीक्षा देने जाने का मतलब जान जोखिम में डालना है। प्रति आजाद लखनऊ विश्वविद्यालय को अपनी आपत्ति टैग करते हुए सोशल मीडिया में लिखा है कि कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। विवि प्रशासन को व्यवहारिक सोच के साथ इस परीक्षा पर फैसला लेना चाहिए। अंकित गौर लिखते हैं कि इन हालात में अभ्यर्थी न तो परीक्षा केन्द्र तक पहुंचेंगे.


तैयारियों पर वीडियो जारी किया 
बीएड प्रवेश परीक्षा करा रहे लविवि की ओर से तैयारियों को लेकर एक वीडियो जारी किया गया है। इसमें, राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेई का कहना है कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता के आधार पर केन्द्र आवंटित करने के बाद भी बहुत अधिक संख्या में अभ्यर्थी बच गए हैं। उनको अन्य शहरों में भेजा गया है। दावा है कि अभ्यर्थियों की सुविधा प्राथमिकता रही है। | से अपील है कि वह निश्चित होकर केन्द्रों पर जाकर परीक्षा दें। और न ही परीक्षा दे पाएंगे। 


अभ्यर्थी रानू कुमार ने लिखा है कि परीक्षा केन्द्रों पर भीड़भाड़ के माहौल में अगर सिर्फ एक सैनिटाइजर की बोतल और मास्क काफी होता तो देश में इस बीमारी को लेकर इतनी खतरा न बढ़ता।

Friday, July 17, 2020

69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने फॉर्म में संशोधन की मांग की

69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने फॉर्म में संशोधन की मांग की

 
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के फॉर्म में गलती करने वाले अभ्यर्थियों ने गुरुवार को बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर प्रदर्शन कर त्रुटि संशोधन की अनुमति मांगी। रोहित तिवारी मिर्जापुर, प्रयागराज से राहुल तिवारी, अमर बहादुर, तुषार, आशुतोष एवं ललितपुर से निशा परवीन आदि कार्यालय पहुंची थीं लेकिन सचिव से मुलाकात नहीं हो सकी। 


सचिव से 18 जुलाई को मिलने का आश्वासन लेकर गए। वहीं दूसरी ओर माध्यमिक विद्यालयों में बैकलॉग पदों को भरने, लंबित साक्षात्कार शुरू करने, चयनित अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित करने, टीजीटी जीव विज्ञान की परीक्षा आयोजित कराने की मांग को लेकर छात्रों ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड पर प्रदर्शन किया।

Thursday, July 16, 2020

सूबे के 25 हजार मदरसा शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय


सूबे के 25 हजार मदरसा  शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय



 रामपुर: केंद्र सरकार ने मदरसों की हालत सुधारने के लिए मदरसा आधुनिकीकरण योजना चलाई है। इसके तहत दीनी तालीम के साथ ही दुनियाबी तालीम भी दी जाती है। इसी के लिए हिदी, अंग्रेजी, गणित और साइंस पढ़ाने के लिए शिक्षक लगाए गए हैं। प्रदेशभर में 25500 शिक्षक हैं। स्नातक शिक्षकों को आठ हजार रुपये मानदेय मिलता है। इसमें दो हजार प्रदेश सरकार और छह हजार केंद्र सरकार देती है। परास्नातक शिक्षकों को 15 हजार मानदेय मिलता है। इसमें 12 हजार केंद्र सरकार और तीन हजार प्रदेश सरकार देती है। प्रदेश सरकार अपने हिस्से का मानदेय तो दे रही है। लेकिन, केंद्र सरकार ने 50 माह से मानदेय नहीं दिया है। इससे मदरसा शिक्षकों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।



संयुक्त मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक समूह उत्तर प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष शहजादे अली अंसारी कहते हैं कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 8584 आच्छादित मदरसों में कार्यरत 25500 शिक्षक हैं। जिनमें जनपद रामपुर के 98 आच्छादित मदरसों में 32 स्नातक शिक्षक तथा 231 परास्नातक शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह यहां कुल 263 शिक्षक हैं। पिछले 50 माह से केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रांश की धनराशि नहीं दी है, जबकि प्रदेश सरकार अपनी ओर से राज्यांश निरंतर दे रही है।ऐसी स्थिति में शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इस संबंध में कई आला अफसरों और मंत्रियों को भी अवगत कराया। लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिल सका है।