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Friday, June 5, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक महासंघ करेगा आंदोलन, गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करने का ऐलान

लखनऊ : टीईटी की अनिवार्य के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ आंदोलन करने जा रहा है। गुरुवार को हुई महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षक अब शिक्षण कार्य के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षिक कार्य का दायित्व स्वीकार नहीं करेंगे। इसके साथ जुलाई में जनप्रतिनिधि जवाब दो अभियान भी चलाया जाएगा। वहीं यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी जुलाई से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।


महासंघ की बैठक में वक्ताओं ने देश व प्रदेश के सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस लड़ाई को किसी एक संगठन का मुद्दा न मानकर शिक्षक समाज के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई समझें और एक मंच पर आकर संयुक्त संघर्ष करें।

 बताया गया कि महासंघ द्वारा पांच जुलाई से 20 जुलाई के मध्य प्रदेश भर में 'जनप्रतिनिधि जवाब दो' अभियान चलाया जाएगा। इसमें सांसदों, विधायकों को ज्ञापन सौंपकर संसद और विधानमंडल में आवश्यक विधायी संशोधन के लिए बिल लाने की मांग की जाएगी। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तो सितंबर में लखनऊ में लाखों शिक्षकों की सहभागिता के साथ विशाल महाआंदोलन किया जाएगा। 

बैठक में महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय, अटेवा व एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, विशेष शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनुज शुक्ला आदि उपस्थित रहे। 

वहीं यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि संगठन की प्रदेश कार्यसमिति ने जुलाई में बड़ा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है।

Friday, May 22, 2026

भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का प्रदेशव्यापी विरोध और सुदूर ब्लॉक में तैनाती ने बढ़ाया आक्रोश

भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का प्रदेशव्यापी विरोध और सुदूर ब्लॉक में तैनाती ने बढ़ाया आक्रोश


लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के बीच शिक्षकों से जनगणना कार्य कराए जाने को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेशभर के शिक्षक संघों से जुड़े शिक्षकों ने शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए जनगणना से जुड़े फील्ड कार्य को मौसम सामान्य होने तक स्थगित करने की अपील की है। वहीं शिक्षकों की दूरस्थ क्षेत्रों और दूसरे ब्लॉकों में ड्यूटी लगाए जाने से नाराजगी और बढ़ गई है।


शिक्षक संघों का कहना है कि जब प्रशासन स्वयं लोगों से दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की अपील कर रहा है, तब शिक्षकों और शिक्षिकाओं को चिलचिलाती धूप में घर-घर सर्वे और मकान गणना के लिए भेजना पूरी तरह अमानवीय है। उनका आरोप है कि कई जिलों में शिक्षकों को उनके कार्यस्थल से दूर दूसरे ब्लॉकों में जबरन ड्यूटी दी जा रही है, जिससे उन्हें घंटों यात्रा करनी पड़ रही है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं।


प्रयागराज समेत कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि शिक्षकों को  दूरस्थ क्षेत्रों तक जनगणना कार्य के लिए भेजा जा रहा है। शिक्षक संघों ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे न केवल शिक्षकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।


संघों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों, दिव्यांग कर्मचारियों और गर्भवती शिक्षिकाओं तक की ड्यूटी लगा दी गई है। ऐसे में जनगणना कार्य अब प्रशासनिक व्यवस्था से ज्यादा “दबाव आधारित अभियान” बनता जा रहा है।


प्रदेशभर के शिक्षक संघों ने मांग की है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए जनगणना 2027 के प्रथम चरण की फील्ड गतिविधियों को तत्काल रोका जाए या कम से कम मौसम सामान्य होने तक स्थगित किया जाए। साथ ही ड्यूटी स्थानीय स्तर पर ही लगाई जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक रूप से दूसरे ब्लॉकों और लंबी दूरी के क्षेत्रों में न भेजा जाए।


शिक्षक संघों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने जल्द मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, उन्हें हर प्रशासनिक अभियान में “सर्वसुलभ फील्ड कर्मचारी” की तरह इस्तेमाल करना अब बंद होना चाहिए।

Wednesday, May 6, 2026

तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें, निजी फोन से जनगणना को राजी नहीं शिक्षक, विरोध करते हुए जनगणना रजिस्ट्रार को लिख रहे पत्र

तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें, निजी फोन से जनगणना को राजी नहीं शिक्षक, विरोध  करते हुए जनगणना रजिस्ट्रार को लिख रहे पत्र


लखनऊ। जनगणना में निजी मोबाइल प्रयोग करने के निर्देशों का शिक्षकों एवं शिक्षक संगठनों की ओर से भारी विरोध शुरू हो गया है। जनगणना की ट्रेनिंग में शिक्षकों व अन्य कर्मियों को जनगणना के दायित्वों को पूरा करने के लिए आधुनिक फीचर वाले मोबाइल के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं।


बड़ी संख्या में शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों ने राज्य जनगणना अधिकारी से लेकर भारत के जनगणना रजिस्ट्रार को इसके लिए कड़ा विरोध पत्र भेजा है। पत्रों में किसी ने लिखा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो आज भी की-पैड वाला साधारण मोबाइल प्रयोग करते हैं। किसी ने लिखा कि कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पास स्मार्टफोन तो है लेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से 4जीबी से कम रैम वाला मोबाइल का उपयोग करते हैं। सफाई में यह भी लिखा गया है कि ऐसा करना कोई पिछड़ापन नहीं यह उनकी निजी जीवन शैली है। फिर कैसे किसी को विशेष मोबाइल खरीदने के लिए बाध्य किया जा सकता है।


तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें
शिक्षक आशीष सिंह की मानें तो स्थिति और मुश्किल तब हो जाती है, जब एचएलओ ऐप की तकनीकी शर्तें सामने आती हैं। जैसे एंडरॉयड 12 या उससे ऊपर और कम से कम 4 जीबी रैम आईफोन यूजर्स के लिए भी कम से कम आईओएस 15.0 होना चाहिए। ऐसे में जिनके पास ऐसा फोन नहीं है, उन्हें मजबूरी में नया फोन खरीदना पड़ेगा, वरना वे कार्य नहीं कर पाएंगे। प्रशिक्षण के समय बहुत अध्यापक इसी परेशानी में दिखे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक और तकनीकी बोझ डालती है।


एचएलओ का हो रहा कड़ा विरोध 
एचएलओ ऐप के जरिए " बीवाईओडी यानि 'ब्रिंग योर ओन डिवाइस' मॉडल लागू किया गया है अर्थात अपना फोन लाओ और उसी से सरकारी काम करो लेकिन इसके लिए न तो कोई स्मार्टफोन दिया जा रहा है और न ही कोई तकनीकी सहायता। 
वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि डिजिटल जनगणना का जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह कर्मचारियों के निजी संसाधनों पर टिका हुआ है।

Tuesday, April 14, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के संयोजन में दर्ज कराया विरोध

14 अप्रैल 2026
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए मशाल जलाई। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।


राजधानी लखनऊ में बीएन सिंह की प्रतिमा के पास से शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। नो टीईटी बिफोर आरटीई की तख्तियां लिए शिक्षकों ने 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए टीईटी अनिवार्यता के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 25 साल की लंबी सेवा करने के बाद अब वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके रोजगार पर लटकी तलवार को हटाया जाए। जिलों में भी शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में मशाल जलाई।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय व विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों पर अव्यवहारिक नियम थोप रही है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। टीईटी की अनिवार्यता, पेंशन समाप्त करना, निजीकरण और सेवा शर्तों में लगातार हो रहे बदलाव जैसे मुद्दे आज पूरे शिक्षक व कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सरकार टेट अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करे। पुरानी पेंशन बहाल कर शिक्षकों व कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करे। जुलूस में अनिल यादव, दिलीप चौहान, हरिशंकर राठौर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह आदि शामिल थे।



टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक निकालेंगे मशाल जुलूस

13 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी जैसी नई शर्तें थोपना अनुचित है।

 मुख्य विधिक प्रभारी विवेकानन्द ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता हटाने के लिए न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संतोष तिवारी ने आंदोलन को निर्णायक बताया।

 इसके अलावा कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान, शालिनी मिश्रा तथा ओपी त्रिपाठी समेत कई शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की। 



टीईटी अनिवार्यता के विरोध हेतु 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालयों में मशाल जुलूस के लिए किया जा रहा शिक्षकों से व्यापक जनसंपर्क

10 अप्रैल 2026
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी। 

महासंघ के सभी घटक संगठनों द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर जनसंपर्क किया जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय व समन्वयक विजय कुमार बंधु ने बताया कि विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आंदोलन को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा व न्यायपूर्ण व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानकर समर्थन दिया है। 

आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की कि जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर अधिकतम संख्या में सहभागिता सुनिश्चित करें। 



टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद

6 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है। 

शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।



टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


 महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


 उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

Tuesday, April 7, 2026

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

लखनऊ। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की बहाली पर सरकार को अल्टीमेटम दिया। 20 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा बहाली न होने पर शिक्षक सड़क पर उतरेंगे और कलमबंद हड़ताल करेंगे। माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के आह्वाहन पर प्रदेशभर के शिक्षक ईको गार्डन धरना स्थल पर सुबह से एकत्रित होने लगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री आवास से शिक्षक प्रतिनिधियों का बुलावा आया।

इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि 20 से 25 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा की धारा 21,18 और 12 को बहाल करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में शामिल किया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक शिक्षकों का उत्पीड़न करते हैं। यह बंद होना चाहिए। यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को 25 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इनमें एडेड माध्यमिक विद्यालयों की राजकीयकरण की मांग की गई है। 



सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक

06 अप्रैल 2026
लखनऊः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सेवा सुरक्षा और स्कूलों के राजकीयकरण की मांग को लेकर सोमवार को अपनी ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय रैली में वे अपनी मांगों को लेकर मुखर होंगे।


संघ के नेताओं ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं। प्रदेश में इस समय 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 67 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। संघ का आरोप है कि सेवा सुरक्षा खत्म होने के कारण प्रबंधकों का दबाव बढ़ गया है।

संगठन के नेताओं का कहना है कि इसी के चलते प्रदेश में अब तक करीब 180 शिक्षकों को निलंबित और 120 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। उनकी यह भी मांग है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रविधान शामिल किए जाएं, ताकि भविष्य में शिक्षकों के साथ मनमानी न हो सके।

Sunday, April 5, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

05 अप्रैल 2026
नई दिल्ली: देशभर के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। टीचर फेडरेशन आफ इंडिया (टीएफआइ) के नेतृत्व में आयोजित रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए। रैली में टीएफआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह फैसला देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को खत्म करने के लिए कानून बनाया जाए और पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।

रैली में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षकों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।

हालांकि, हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।


शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले के शिक्षकों से भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ सैकड़ों शिक्षकों ने शनिवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन भारतीय शिक्षक संघ के तत्वाधान में किया गया। भारतीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त किया जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीआई 2009 अधिनियम लागू होने से पहले कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके खिलाफ बीते छह महीने से अधिक समय के दौरान शिक्षकों ने कई सांसद व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व अन्यों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर शिक्षकों के समर्थन में कानून बनाने की मांग की। इस संबंध में भारतीय शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को शनिवार को पत्र भी लिखा।

उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षक प्रभावित : उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आए शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट का फैसला व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की उम्र अब 50 से 55 साल के बीच है और जिन्होंने 30-35 साल तक सेवा दी है। उनसे दोबारा इस तरह की परीक्षा देने की अपेक्षा करना गलत है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी या जज से 20-30 साल बाद फिर से परीक्षा या शारीरिक परीक्षण नहीं लिया जाता, वैसे ही शिक्षकों के साथ भी ऐसा नहीं होना चाहिए।


टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। राजधानी के रामलीला मैदान में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 13 से अधिक राज्यों से पहुंचे हजारों शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा। इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

प्रदर्शन करने आए शिक्षक "टीईटी अनिवार्यता वापस लो", "शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो" और "शिक्षक बचाओ, शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारी शिक्षका सुनीता सिंह ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी पास करने का आदेश देना अनुचित है। ऐसा आदेश शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।

सुबह से ही रामलीला मैदान के आसपास शिक्षकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। देशभर से आए शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों की आवाज है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में गरजे

प्रयागराज। आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित देशव्यापी प्रदर्शन में प्रयागराज से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य

अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के साथ मंच साझा किया और कहा कि लाखों शिक्षकों के सामने संकट आया है। इस संकट से लड़ने का काम टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ही करेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद कुमार पांडेय आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया।



यूपी के शिक्षकों ने दिल्ली में विरोध कर दिखाई ताकत

लखनऊ। देशभर के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी से भी बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे और केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को कानून बनाकर रोकने की मांग की।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक रामलीला मैदान पहुंचे। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 के पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। तमाम शिक्षक रिटायर होने की कगार पर हैं और अब वह टीईटी पास करें तो उनकी नौकरी बचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, जिससे देश भर के 20 लाख और यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के जीविकोपार्जन पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि शिक्षक इसके विरोध में लगातार आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों की रैली में सांसद जगदंबिका पाल भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के साथ हैं।




टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग

03 अप्रैल 2026
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।

इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए। 



टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली

11 मार्च 2026
लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।


टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।

इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।

Thursday, April 2, 2026

पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

पुरानी पेंशन समाप्त करने के विरोध में मनाया काला दिवस, शिक्षकों-कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध

01 अप्रैल 2026
लखनऊ। ऑल टीचर्स एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के आह्वान पर बुधवार को पूरे प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, डिग्री व विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर कर काला दिवस मनाया। साथ ही सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की।

राजधानी में अटेवा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु व प्रदेश महामंत्री नीरजपति त्रिपाठी के नेतृत्व में शिक्षकों-कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध दर्ज कराया। विजय बन्धु ने कहा कि आज ही के दिन प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त होने के कारण लाखों शिक्षकों व कर्मचारी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।

उन्होंने कहा कि एक दिन के सांसद व विधायक को ओपीएस मिल रही है। 30 से 40 साल सेवा करने वाले को नई पेंशन। यह न्यायपूर्ण व्यवस्था नहीं है। प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।



NPS के विरोध में एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे शिक्षक-कर्मचारी

28 मार्च 2026
लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में 1 अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में पारा स्थित डॉ. रामाशीष स्मृति भवन में आयोजित बैठक में इसकी रणनीति बनाई गई। 


उन्होंने एनपीएस को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह पेंशन नहीं, बल्कि शेयर बाजार पर आधारित असुरक्षित व्यवस्था है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव से कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। 

उन्होंने बताया कि एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिल रही है, जिससे महंगाई में जीवनयापन कठिन है। इसलिए शिक्षक-कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग करेंगे।

 बैठक में प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष विक्रमादित्य मौर्य, विजय कुमार, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार वर्मा, रजत प्रकाश, राकेश कुमार, अशोक कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। ब्यूरो

Thursday, March 26, 2026

विभागीय लापरवाही से चयन वेतनमान की लड़ाई भूख हड़ताल तक आई, छह माह बाद भी नहीं लगा चयन वेतनमान

विभागीय लापरवाही से चयन वेतनमान की लड़ाई भूख हड़ताल तक आई, छह माह बाद भी नहीं लगा चयन वेतनमान

एक अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे शिक्षक


लखनऊ।   बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षकों का चयनित वेतनमान छह माह बीत जाने के बाद भी नहीं लगा है। जिससे शिक्षकों में आक्रोश है और सामूहिक भूख हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों की 10 वर्ष की सेवा के उपरांत चयन वेतनमान का लाभ दिया जाना है। जबकि निर्धारित तिथि के 6 माह बीत जाने के बाद भी चयन वेतनमान के लिए शिक्षक भटकने को विवश हैं। हालांकि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अधिकांश शिक्षकों का चयन स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी स्तर से रुचि नहीं ली जा रही है। कई शिक्षक संगठनों ने ज्ञापन देकर आंदोलन की चेतावनी दी है।


लखनऊ के शिक्षक हरिशंकर राठौर ने बताया कि मेरा चयन वेतनमान अक्टूबर 2025 में लगना था जिसके लिए ब्लॉक से लेकर जिले तक कई बार आग्रह किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सहयोग करते हुए 19 जनवरी को मेरा चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी किया। आशा थी कि जनवरी में चयन वेतनमान लग जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद तीन बार वित्त एवं लेखा अधिकारी से निवेदन किया लेकिन सिर्फ आश्वासन ही प्राप्त हुआ। राठौर ने कहा कि यदि मार्च माह में मेरा कई जिलों में चयन वेतनमान पर अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।  चयन वेतनमान नहीं लगा तो चयन वेतनमान लंबित होने से दुखी होकर 1 अप्रैल से कार्यालय जिलाधिकारी पर भूख हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जिले में सैकड़ों शिक्षकों का चयन वेतनमान सितंबर माह से आज तक लंबित है। विभिन्न विकासखंडों से एक दर्जन से अधिक प्रकरणों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश निर्गत होने के बाद भी भुगतान नहीं हो पाया है। शिक्षकों का कहना है कि वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय द्वारा तकनीकी आपत्तियों के आधार पर प्रकरणों को रोका जा रहा है।


राजधानी में पूर्व में एक शिक्षक द्वारा आत्मदाह करने की घटना हो चुकी है। ये स्थितियां अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है जो की अति निंदनीय है। - सुशील कुमार पांडे, अध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

Monday, March 16, 2026

टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के विरोध में चलाए जा रहे अभियान में काफी शिक्षक जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए महासंघ ने पाती लिखने के अभियान को एक सप्ताह बढ़ाने का निर्णय लिया है।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि आरटीई एक्ट 2009 तथा एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए चलाए जा रहे शिक्षक की पाती अभियान में शिक्षकों की व्यापक सहभागिता हुई है। एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, नेता प्रतिपक्ष व मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ई-मेल से अपनी मांगों को भेजा है।

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा दे। ताकि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान शिक्षक समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ विषय है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी हरिशंकर राठौर ने बताया कि शिक्षक की पाती अभियान 9 से 15 मार्च तक घोषित था। शिक्षकों के उत्साह को देखते हुए अभियान को 16 मार्च से अगले एक सप्ताह तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की सेवा सम्मान को देखते हुए महासंघ में अब तक 23 संगठन जुड़कर संघर्ष कर रहे हैं। 




तीन लाख शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में लिखी पाती

लखनऊ। देश भर में 8वीं कक्षा तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से पाती लिखने का अभियान जारी है। इसके तहत तीन दिन में सवा तीन लाख से ज्यादा शिक्षकों ने टीईटी से राहत देने के लिए राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखा है। 

महासंघ ने कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके साथ यह अन्यायपूर्ण निर्णय है। इससे उनको राहत दी जानी चाहिए। पूर्व में शिक्षा मंत्री ने इसके लिए सकारात्मक पहल की बात कही थी लेकिन आज तक केंद्र सरकार द्वारा इस पर कुछ नहीं किया गया। इससे देश भर के शिक्षकों में नाराजगी है। यदि जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो शिक्षक अपने आंदोलन को तेज करेंगे। 



टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों ने लिखी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को पाती

प्राथमिक शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के खिलाफ अभियान शुरू किया। शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और अन्य को ई-मेल और पोस्टकार्ड भेजकर टीईटी को समाप्त करने की मांग की है।


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्य के खिलाफ सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शिक्षक पाती लिखने का अभियान शुरू किया। इसके तहत शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाई जा रही है।अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के करीब 1,07000 शिक्षकों ने पत्र भेजकर टेट से राहत देने की अपील की। महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम 15 मार्च तक अनवरत चलेगा।

आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पूर्व में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मिला था और उन्होंने इस बारे में सकारात्मक आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल केंद्र द्वारा नहीं किया गया है। इससे प्रदेश के एक लाख 86हजार शिक्षक उदास एवं हताश है। उन्होंने बताया कि एनसीटीई के गलत फैसले पूरे देश से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। 


टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती

लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से एक सप्ताह तक प्रदेश व देश के शिक्षक पाती लिखने का अभियान चलाएंगे। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाएंगे।

महासंघ ने कहा कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। बता दें कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के लिए एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने महासंघ का गठन किया है।


जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 20 संगठन

तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा।

नौ मार्च से ‘शिक्षक की पाती’ अभियान से होगी शुरुआत


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।

आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।

तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।

महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।






टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 23 शिक्षक संगठनों की 3 मई को लखनऊ कूच की तैयारी

लखनऊ । शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क से सदन तक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। इसके लिए लखनऊ में संयुक्त मोर्चा के सभी शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ बनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संगठन सम्मिलित है।

ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय के आह्वान पर हुई सभी शिक्षक संगठनों की बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, जूनियर शिक्षक संघ, विशिष्ट BTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश BTC शिक्षक संघ, TSCT सहित 23 शिक्षक संगठन सम्मिलित है और सभी संगठनों ने सर्वसहमति से TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का ऐलान किया है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने एकजुट संघर्ष को शिक्षकों की सेवा शर्तों व सम्मान की लड़ाई बताया साथ ही उन्होंने कहा कि कोई नियम आदेश आने के बाद लागू होता है न कि पूर्व से। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक एकतरफा बताया वही अटेवा प्रमुख विजय कुमार बंधु ने टीईटी अनिवार्यता को सरकार की तानाशाही बताकर गरीबों की शिक्षा पर कुठाराघात करार देते हुए निजीकरण को बढ़ावा करार दिया।

प्राथमिक शिक्षक संघ मीडिया प्रभारी हरि शंकर राठौर ने जानकारी दी कि टीईटी आंदोलन कों चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया जिसमें 3 मई को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ के ईको गॉर्डन में ऐतिहासिक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद शाम को शिक्षक विधानसभा की ओर कूच करेंगे। इससे पहले दिनांक 9 मार्च से 15 मार्च तक शिक्षकों की पाती अभियान चलेगा व 13 अप्रैल कों सभी जिला मुख्यालयों पर सायं 4 बजे से विरोध प्रदर्शन कर मशाल जुलुस निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम प्रधानमंत्री भारत सरकार कों ज्ञापन भेजा जायेगा।



टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में तीन मई को लखनऊ में रैली करेंगे शिक्षक, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ तेज करेगा आंदोलन


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए शिक्षकों का आंदोलन तेज हो रहा है। इसके तहत गठित अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने तीन मई को राजधानी लखनऊ में रैली व विधानसभा तक मार्च करने की घोषणा की है।


महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा । कि इसके तहत पहले चरण में नौ से 15 मार्च के बीच शिक्षक की पाती लिखने का कार्यक्रम होगा। इसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष को ई मेल, पोस्टकार्ड से टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में पत्र लिखेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालेंगे।

तब भी मांगे नहीं मानी गई तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में एकत्र होकर रैली करेंगे। साथ ही विधानसभा तक मार्च भी करेंगे। महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि फिर भी इसका समाधान नहीं हुआ तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का शिक्षक घेराव करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक बैठक फिर से राजधानी में सभी संगठनों की होगी।


धर्मेंद्र प्रधान के बयान से नाराजगी

शिक्षक-कर्मचारी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कहा कि पहले आप मेरी सरकार बनाओ, फिर हम टीईटी की अनिवार्यता पर विचार करेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय एवं विजय कुमार बंधु ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान सौदेबाजी है।


महासंघ के समर्थन में आए कई संघ

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के समर्थन में कई और शिक्षक संगठन आए हैं। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि टीईटी की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने पत्र लिखकर समर्थन दिया है।

Sunday, March 1, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज हो रहा है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसमें 15 दिनों तक लगातार प्रदेश भर में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह कार्यक्रम पांच से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में होगा।


प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने सभी जिलाध्यक्ष व महामंत्री के साथ शनिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से राहत देने की मांग उठाएंगे। बैठक में वीपी बघेल, संजय सिंह, भानुप्रताप सिंह, आशुतोष वर्मा, ओमजी पोरवाल, केके शर्मा, जया शर्मा, अखिलेश सिंह गुंजन, देवकुमार मिश्रा आदि उपस्थित थे। 

Friday, February 27, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे  शिक्षक, केंद्र सरकार से मामले में स्पष्ट रुख की मांग, आंदोलन की चेतावनी भी दी 


लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ व उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने का जमकर विरोध किया। जिलों में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा।


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ गया है। इससे देश भर के शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में जिलों में बीएसए कार्यालय पर एकत्र होकर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी। उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे। उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी। इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव भाग लेंगे। बैठक में दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि घोषित की जाएगी।

पीएम को भेजे ज्ञापन में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इस मामले में संसद में अध्यादेश लाकर राहत दे। 



23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे यूपी के शिक्षक 




टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ यूपी के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय 

23 फरवरी 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआइ) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही। 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है। 

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही। वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा, संघर्ष अब और तेज होगा। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक 'शिक्षकों की पाती' नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।


टीईटी अनिवार्यता का विरोध तेज, सरकार के रुख से खुश नहीं है प्रदेशभर के शिक्षक, X पर #JusticeForTeachers ग्लोबल ट्रेंडिंग में टॉप पर

23 फरवरी 2026
प्रयागराज : टीईटी की अनिवार्यता पर प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट न होने से नाराज परिषदीय शिक्षकों ने रविवार दोपहर दो से चार बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया। जस्टिस फॉर टीचर्स हैशटैग से चलाया गया अभियान एक समय पूरी दुनिया में टॉप ट्रेंड कर रहा था। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज से भी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई।

शिक्षकों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनकी जब नियुक्ति हुई तब आवश्यक सारी अर्हताएं पूरी करते थे। नियुक्ति के सालों बाद कोई नियम लागू करने के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विरोध अभियान के क्रम में सभी शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे और जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के सभी शिक्षक महारैली करके भारत सरकार को ज्ञापन देंगे।





टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आज सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे शिक्षक

22 फरवरी 2026
लखनऊ। देश-प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन तेज करेंगे, ताकि इस मामले में दबाव बनाकर जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम लिया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक की ओर से 22 फरवरी को दोपहर में सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 23 फरवरी से शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 


टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के कई शिक्षकों संगठन आए एक साथ, मार्च के अंत में दिल्ली में रैली करेंगे 

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए शिक्षक संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार प्रदेश के कई शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले आंदोलन करने के लिए तैयार हुए हैं। इसका कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने तय किया कि 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए वे सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

बैठक में तय किया गया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। यहां डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में महारैली की जाएगी।

बैठक में टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, उप्र महिला शिक्षक संघ की डॉ. सुलोचना मौर्य, संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, अनंत कुमार, पंकज अवस्थी, प्रीति सिंह, ज्योति सिंह आदि उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी अपनी सहमति दी है।


Tuesday, January 13, 2026

मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक, प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक,  प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में मनमाने समायोजन के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विभिन्न जिलों के शिक्षकों की ओर से प्रयागराज और लखनऊ बेंच में दाखिल याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है। कुछ जिलों में शिक्षामित्रों को भी शिक्षक मानते हुए समायोजन कर दिया गया, जिससे शिक्षकों में आक्रोश है।

पिछले साल जून में पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे। उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी। दिसंबर अंत में तीसरे चरण के समायोजन में भी शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दाखिल याचिका में पिछली सुनवाई के बाद सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को फिर होनी है।

सचिव ने मंडलीय अफसरों से मांगी रिपोर्ट: बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों से समायोजन की रिपोर्ट तलब की है।

एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल कर बैठे अफसर
प्रयागराज। पहले चरण के समायोजन में की गई गलती सुधारने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने और बड़ी गलती कर दी है। जून 2025 में समायोजन के दौरान बड़ी संख्या में स्कूल एकल हो गए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं हुईं तो अफसरों ने समायोजन रद्द करते हुए शिक्षकों को वापस मूल विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कुछ याचिकाएं कर दीं। मामला बिगड़ता देखकर अफसरों ने तीसरे चरण के समायोजन के आदेश जारी कर दिए। आरोप है है कि तीसरे चरण में नियम दरकिनार करते हुए अलग-अलग जिलों में बीएस ने मनमाने आदेश जारी कर दिए।



नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

यू-डायस पोर्टल पर 31 दिसम्बर को ही स्थानान्तरित पर अभी तक सूची जारी नहीं हुई

● शिक्षकों से विकल्प लिए बगैर कर दिया मनमाना स्थानान्तरण 
● जिलों में बीएसए की मनमानी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

03 जनवरी 2026
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के समायोजन में अफसरों पर मनमानी के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अफसरों ने मनमानी की सीमा पार कर दी है। यू-डायस पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हुए समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक को ही देखा गया। जहां जिस बेसिक शिक्षा अधिकारी को जो समझ में आया, तबादला आदेश जारी कर दिया। आक्रोशित शिक्षक हाईकोर्ट खुलने पर समायोजन आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

जिन जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमेठी, मथुरा, रायबरेली, बदायूं, हरदोई, देवरिया, हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, बागपत और पीलीभीत आदि शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमरोहा, हापुड़, वाराणसी, चित्रकूट, बरेली, रामपुर, आगरा, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, कुशीनगर, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, फतेहपुर और सीतापुर आदि शामिल हैं।

शिक्षक नेता निर्भय सिंह का कहना है कि कई जिलों जैसे बाराबंकी, लखनऊ आदि में यू-डायस पोर्टल पर शिक्षकों को 31 दिसम्बर को ही स्कूल से स्थानान्तरित कर दिया गया है। अभी तक सूची जारी नहीं हुई कि किसे किस स्कूल भेजा गया है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं।

प्रयागराज में समायोजन में मनमानी का आरोप
आरोप है कि संदीप कुमार तिवारी का समायोजन मेजा के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया से उच्च प्राथमिक विद्यालय महुलीकलां में हुआ जो कि 40 किलोमीटर दूर है जबकि दो किमी दूर बगल का स्कूल एकल था। संदीप कुमार जुलाई-अगस्त 2025 में समायोजन के दौरान प्रधानाध्यापक बिसाहिजन खुर्द से नेवढ़िया गए थे। आरोप है कि स्वेच्छा से समायोजन लेने के छह महीने के अंदर दोबारा जबरदस्ती समायोजन कर दिया गया। उनसे वरिष्ठ दो शिक्षक हैं जिनका समायोजन नहीं हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय शृंग्वेरपुर से हिंदी की अकेली शिक्षक सुनीता चौरसिया का समायोजन मादूपुर कर दिया गया। जबकि उनके स्कूल में एक विषय में दो शिक्षिकाएं हैं, उनमें से किसी का समायोजन नहीं हुआ। कई स्कूल ऐसे हैं जिसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ को छोड़कर अन्य शिक्षकों का समायोजन हो गया है।

प्राइमरी हेड को जूनियर में किया समायोजित
जौनपुर और कासगंज समेत कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया है। जबकि इसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सैकड़ों शिक्षकों ने प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में समायोजन या पदोन्नति में टीईटी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर रखी है।




समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

30 दिसम्बर 2025
लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


कहां कैसे हो रहे तबादले?

शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


बड़े अफसरों ने साधा मौन
इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


क्या है असल वजह?
इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।

Wednesday, December 31, 2025

शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हुए विरोधाभासी आदेशों पर जताई गंभीर आपत्ति

शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हुए विरोधाभासी आदेशों पर जताई गंभीर आपत्ति 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हो रहे विरोधाभासी आदेशों पर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश को भेजे ज्ञापन में कहा है कि शासन द्वारा 29 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है, किंतु इसके बावजूद कुछ जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा शिक्षकों को अवकाश अवधि में प्रतिदिन विद्यालय में उपस्थित रहने के आदेश दिए जा रहे हैं। 

संघ का कहना है कि जब विद्यार्थियों के लिए विद्यालय बंद हैं तो शिक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति का कोई औचित्य नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसे आदेश यह दर्शाते हैं कि जनपदीय अधिकारी शासन के स्पष्ट निर्देशों का मनमाने ढंग से उल्लंघन कर रहे हैं और विभागीय नियंत्रण कमजोर हो चुका है। संघ ने इसे शिक्षक समाज के मानसिक उत्पीड़न की संज्ञा देते हुए कहा है कि बार-बार इस प्रकार के आदेश जारी होना शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों के विपरीत है। 

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने मांग की है कि सभी जनपदों में शीत अवकाश का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए और शिक्षकों को अन्य विभागों की तरह 31 दिसंबर का अवकाश भी प्रदान किया जाए, ताकि कड़ाके की ठंड में उन्हें राहत मिल सके। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आदेशों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित नहीं कराया गया तो शिक्षक समाज में असंतोष और बढ़ेगा।



Friday, December 12, 2025

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर शिक्षकों ने अध्यादेश लाकर टीईटी अनिवार्यता से मांगी छूट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर शिक्षकों ने अध्यादेश लाकर टीईटी अनिवार्यता से मांगी छूट

शिक्षकों ने दिल्ली में जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन एआईपीटीएफ के बैनर तले आंदोलन में जुटे 3 लाख शिक्षक

लखनऊ । टीईटी अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को यूपी समेत देश भर के तीन लाख से अधिक शिक्षकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। देश भर के शिक्षक संगठनों के संयुक्त मंच अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (एआईपीटीएफ) के बैनर तले हुए इस आन्दोलन ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।


संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन, पीएम श्री विद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय में शिक्षकों द्वारा सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। पिछले कई वर्षों से नवीन तकनीकी से प्रशिक्षण के फलस्वरुप शिक्षक बच्चों को स्मार्ट क्लास से अत्याधुनिक शिक्षा, विभिन्न शैक्षिक कौशल सिखा रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक तनावग्रस्त व गंभीर पीड़ा से गुजर रहे हैं।

 लंबे कुशल शिक्षक अनुभव व विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त उत्तर प्रदेश सहित बिहार पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक आदि प्रदेशों से 12 सौ, 15 सौ किलोमीटर यात्रा कर देशभर के शिक्षक टीईटी अनिवार्यता से छूट के लिए दिल्ली में एकत्र हुए हैं, जिनका सम्मान करते हुए सरकार को तत्काल इस पर ठोस कदम उठाना चाहिए, जिससे उत्तर प्रदेश के 2 लाख शिक्षकों सहित पूरे देश में 20 लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा हो सके।






टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में आज शिक्षकों का प्रदर्शन

11 दिसम्बर 2025
लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ यूपी समेत देश भर के लाखों शिक्षक 11 दिसम्बर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों की मांग है कि उनके सेवाभाव का सम्मान करते हुए उन्हें टीईटी अनिवार्यता से छूट दी जाए।

शिक्षकों के इस आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे शिक्षक संगठनों का संयुक्त मंच अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से शिक्षक आज रात बस ट्रेन व अन्य निजी साधनों से दिल्ली कूच करेंगे। 



टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ 11 दिसम्बर को दिल्ली में धरने के लिए शिक्षकों का पहुंचना शुरू

10 दिसंबर 2025
लखनऊ। 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य करने को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। इसके लिए 11 दिसंबर को अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने का ऐलान किया गया है। धरने के लिए शिक्षक पदाधिकारी दिल्ली पहुंचने लगे हैं। 

काफी शिक्षक बुधवार को भी जाएंगे। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि धरने के लिए सभी प्रदेश के पदाधिकारी दिल्ली पहुंच चुके हैं। शिक्षकों की भी विभिन्न जिलों से रवानगी शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि संसद में मंगलवार को भी प्रमोद तिवारी समेत कई सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया। यह सही समय है जब शिक्षक अपनी एकजुटता का परिचय दें। शिक्षकों पर थोपे जा रहे आदेशों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। 



टीईटी मामले पर अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ 11 दिसंबर को जंतर मंतर पर देगा धरना

10 नवंबर 2025
लखनऊ। देशभर के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ अलग-अलग शिक्षक संगठन अपने स्तर से विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस आदेश को वापस लेने और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए 11 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।


सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीईटी अनिवार्य करने के आदेश को वापस लेने के लिए पीएम व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा गया।  30 नवंबर तक देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, जिसकी प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजी जाएंगी। लेकिन अब तक शिक्षक हित में कोई पहल नहीं हुई। ऐसे में संगठन ने 11 दिसंबर को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

इसमें देश भर के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि व शिक्षक शामिल होंगे। यदि इसके बाद भी केंद्र सरकार हमारी मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो संघ फरवरी 2026 में रामलीला मैदान से संसद तक मार्च निकालेंगे। 

Tuesday, December 2, 2025

टीईटी के विरोध में शिक्षक सांसदों को देंगे ज्ञापन, संसद सत्र के बाद होगी TFI की दिल्ली में रैली

टीईटी के विरोध में शिक्षक सांसदों को देंगे ज्ञापन, संसद सत्र के बाद होगी TFI की दिल्ली में रैली

लखनऊ। बेसिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद दस राज्यों के संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने दिल्ली में रैली ही करने का निर्णय लिया है। इसके लिए संसद सत्र के बाद फिर से अनुमति ली जाएगी। इस बीच 5 से 7 दिसंबर तक शिक्षक क्षेत्रीय सांसदों को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन देंगे।

टीएफआई व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की सोमवार को हुई अलग-अलग बैठकों में दिल्ली पुलिस द्वारा पांच दिसंबर की रैली की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद की रणनीति तय की गई। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सभी राज्यों के शिक्षक संगठन दिल्ली में सीमित संख्या में नहीं, बल्कि शिक्षकों की बड़ी रैली ही करेंगे।

रैली की तिथि दिल्ली पुलिस की अनुमति के बाद घोषित की जाएगी। उन्होंने बताया कि बैठक में तय हुआ कि सांसदों को दिए जाने वाले ज्ञापनों में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसको लागू न करने की मांग की जाएगी। सांसदों से संसद में इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया जाएगा ताकि लाखों शिक्षकों का हित सुरक्षित हो सके। 

बता दें, संगठन ने पहले 21 नवंबर और फिर दिल्ली पुलिस के कहने पर 5 दिसंबर को रामलीला मैदान में रैली की घोषणा की थी। पर, हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 5 दिसंबर की रैली की अनुमति निरस्त कर दी है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है। 







टीईटी अनिवार्यता के विरोध में पांच दिसंबर को दिल्ली में होने वाली रैली की अनुमति निरस्त

दिल्ली पुलिस ने टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया को भेजी सूचना

30 नवंबर 2025
लखनऊ। दस प्रदेशों के शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की पांच दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली की अनुमति को दिल्ली पुलिस ने निरस्त कर दिया है। अब सोमवार को शिक्षक संगठन ऑनलाइन बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

देशभर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद यूपी समेत दस राज्यों ने टीएफआई का गठन किया था। साथ ही टीईटी अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए पांच दिसंबर को दिल्ली में रैली करने की घोषणा की थी। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने हाल ही में कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पांच दिसंबर को रैली की अनुमति निरस्त कर दिया है।

माना जा रहा है कि शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है। शायद इसी वजह से रैली की अनुमति निरस्त कर दी गई है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। हमारा प्रयास है कि देश भर के प्रभावित शिक्षकों को इससे राहत दिलाई जाए। इसके लिए सभी मिलकर रैली के लिए आगे की भी कोई तिथि या निर्णय ले सकते हैं।



टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 5 दिसंबर को दिल्ली कूच को शिक्षक तैयार

10 नवंबर 2025
रविवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की कार्यसमिति की बैठक में संघ के अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि पांच दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली महारैली में पूरे देश से दो लाख शिक्षक शामिल होंगे, जिनमें से एक लाख शिक्षक उत्तर प्रदेश से पहुंचेंगे। सभी राज्यों में रैली की तैयारी जोरों पर है और अब तक 14 राज्यों के संगठन इससे जुड़ चुके हैं।  

अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संगठन न्यायालय में लड़ाई लड़ने के साथ ही टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए इस महारैली के माध्यम से केंद्र सरकार तथा एनसीईटी से भी मांग करेगा। उन्होंने कहा कि इसी दौरान संसद सत्र भी चल रहा होगा, यह शिक्षकों के लिए अपनी ताकत का एहसास कराने का सही समय होगा। एकजुटता से शिक्षक महारैली में शामिल हों। 

महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि रैली में जाने के लिए ब्लॉकवार शिक्षकों की संख्या निर्धारित कर दी गई है। शिक्षकों को ले जाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। महारैली में संगठन में शामिल देश के 14 राज्यों से भी दो लाख से अधिक शिक्षक दिल्ली पहुंचेंगे। 





टीईटी अनिवार्यता पर TFI की महारैली अब 5 दिसंबर को, दिल्ली प्रशासन द्वारा 21 नवंबर की अनुमति रद्द करने के बाद नई तिथि का ऐलान  


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षण सेवा में बने रहने व पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने नवंबर-दिसंबर में दिल्ली कूच का एलान किया है। लेकिन नवंबर अंत में होने वाले एक बड़े कार्यक्रम से अब इसकी संभावना नहीं है। यही वजह है कि नौ राज्यों के शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने अब पांच दिसंबर को दिल्ली कूच का एलान किया है।

टीएफआई ने पिछले दिनों दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में बैठक कर 21 नवंबर को महारैली की घोषणा की थी। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नवंबर के अंत में सिख समाज ने एक राष्ट्रीय आयोजन किया है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो रहे हैं। इससे दिल्ली प्रशासन ने नवंबर में रैली की अनुमति निरस्त कर दी है। इसे देखते हुए हमने पांच दिसंबर को महारैली करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली रैली के लिए संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। महारैली के माध्यम से हम 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इससे मुक्त रखने की मांग करेंगे ताकि देश भर के लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके।


शिक्षक संघर्ष मोर्चा भी कर रहा तैयारी

अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा भी 24 नवंबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। मोर्चा पदाधिकारियों के अनुसार इसमें यूपी से दो लाख से अधिक शिक्षक जाएंगे। इसके लिए सभी संघटक संगठनों को अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। मोर्चा ने टीईटी लागू होने से पहले शिक्षकों पर इसे थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं।

सभी प्रस्तावित कार्यक्रम

🔴 अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का 24 नवंबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन
🔴 अटेवा का 25 नवंबर को दिल्ली कूच मामले को लेकर पुरानी पेंशन व टीईटी का विरोध
🔴 अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ का जंतर मंतर पर धरना 11 दिसंबर को



टीईटी को लेकर देशभर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली में करेंगे महारैली, नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों ने चुने टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी

दिल्ली की बैठक में यूपी के डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा बने टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष

कहा, 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता न्याय के खिलाफ


लखनऊ। देशभर के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी गई है। इसके विरोध में देशभर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली करेंगे। इसके माध्यम से 27 जुलाई 2011 से पहले के नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने की मांग करेंगे।


यह निर्णय नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों द्वारा टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की शनिवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में पहले संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश के डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष, झारखंड के राम मूर्ति ठाकुर महासचिव, संजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिवशंकर पांडेय कोषाध्यक्ष व देवेंद्र श्रीवास्तव संयुक्त महासचिव चुने गए। 

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। पूरे देश का शिक्षक इसके खिलाफ हैं इसलिए 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने के लिए देश भर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली में महारैली कर केंद्र सरकार को ज्ञापन देंगे। महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने कहा कि कोई भी कानून बनने की तिथि से लागू होता है किंतु शिक्षकों पर पूर्व से लागू करके लाखों शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।


ये पदाधिकारी भी चुने गए
उपाध्यक्ष पद पर अनूप केसरी, केदार जैन, मुनीष मिश्रा, विनोद यादव, राधेरमण त्रिपाठी, राजेश धर दुबे, मेघराज भाटी, बालेंद्र चौधरी, दीपक शर्मा, वंदना सक्सेना चुने गए। सचिव पद पर संजीव शर्मा, यशपाल सिंह, वेदप्रकाश मिश्रा, अनुज कुमार, त्रिवेंद्र कुमार, राजेश लिटौरिया, देवेश कुमार, आशुतोष त्रिपाठी, अर्चना तिवारी, कल्पना रजौरिया चुने गए। अरुणेंद्र वर्मा व अजय सिंह राष्ट्रीय सचिव बने।




टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन के लिए साथ आए नौ राज्यों के शिक्षक, बनाया नया संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) 

दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में तय होगी रैली की तिथि, पदाधिकारियों का चुनाव भी होगा


लखनऊ। देशभर के लाखों स्कूली शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए यूपी समेत नौ राज्यों के शिक्षक संगठन एक साथ आए हैं। उन्होंने आंदोलन के लिए नए संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) का गठन किया है। इसके माध्यम से आगे का आंदोलन संचालित किया जाएगा।


टीईटी मामले में आंदोलन के लिए उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान के शिक्षक संगठन एक साथ एक मंच पर आए हैं। इसी क्रम में टीएफआई की पहली बैठक 25 नवंबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में होगी। इसमें दिल्ली रैली के लिए तिथि तय की जाएगी। साथ ही इसमें संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव भी होगा।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर के संयोजन में टीएफआई का गठन हुआ है। 25 अक्टूबर की बैठक में फेडरेशन के अन्य पदाधिकारियों का चुनाव होगा। फिर नई कमेटी टीईटी के विरुद्ध दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि की घोषणा करेगी। 

उन्होंने कहा कि आरटीई लागू होने के पहले राज्य सरकारों व एनसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक नियुक्त किया गया है। अब 20-25 साल पहले नियुक्त शिक्षक को वर्तमान में नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता अर्जित करने को विवश करना कैसा न्याय है। जब तक यह निर्णय वापस नहीं होता इसके विरुद्ध व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा।