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Monday, September 21, 2020

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

 
लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के ओबीसी अभ्यर्थियों ने 67 हजार 887 चयनित अभ्यर्थियों में से 31 हजार 361 को नियुक्ति देने के सरकार के निर्णय को राष्ट्रीय ओबीसी आयोग को अवमानना बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने भर्ती पर स्थगन आदेश दे रखा है, उसके बाद सरकार नियुक्ति कैसे कर सकती है।


 अभ्यर्थियों ने आगामी दिनों में लखनऊ में आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, विभाग का दावा है कि आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है, नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत ही दी जा रही है। आरक्षण एवं एमआरसी लीगल टीम के प्रवक्ता विजय यादव का कहना है कि ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति ने 7 जुलाई को भर्ती पर रोक लगाई थी। 


आयोग ने स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होने के बाद भी आयोग की ओर से मामले में निर्णय देने तक भर्ती पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग के आदेश के तहत अभी तक सरकार इस 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की वर्ग बार शैक्षिक गुणांक सहित मूल चयन सूची उपलब्ध नहीं कराई है।

Saturday, September 12, 2020

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान

हाथरस : जूनियर शिक्षक संघ ने बीएसए को दिया कानूनी नोटिस, बीएसए दफ्तर के बहिष्कार का एलान


उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने अधिवक्ता के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है। इसमें बीएसए पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। बीएसए दफ्तर का बहिष्कार करने की बात भी शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने पत्र में कही है।


जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामवीर सिंह एवं महामंत्री अनिल कुमार ने सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रमेशचंद्र शर्मा के माध्यम से बीएसए को नोटिस दिया है, जिसमें मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि शिक्षक संघ के किसी भी प्रत्यावेदन का संज्ञान नहीं लिया जा रहा। नोटिस में अन्य आरोप भी लगाए हैं। संघ के पदाधिकारियों ने अध्यापकों को जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने एवं शिक्षक संघ के प्रति अनुचित व्यवहार करने के कारण कार्यालय का बहिष्कार करने की भी बात कही है।


 नोटिस के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सिविल कोर्ट के नोटिस का निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर जूनियर संगठन ने मेरे नोटिस का कोई तर्क संगत जवाब नहीं दिया तो इनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई होगी। -मनोज कुमार मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।

Tuesday, September 8, 2020

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार

यूपी शिक्षा सेवा अधिकरण के मुख्यालय से नीचे कुछ नहीं स्वीकार, प्रयागराज हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की हुंकार




प्रयागराज : शिक्षा सेवा अधिकरण के मुद्दे पर सोमवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई। बैठक में सबने एक स्वर में कहा कि शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में बनना ही कानून व संविधान सम्मत है। इससे कम कुछ स्वीकार नहीं किया जाएगा।


एसोसिशन के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार गैरकानूनी निर्णय लेकर प्रयागराज की गरिमा से खिलवाड़ कर रही है, जिसे किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जा सकता। वादे के अनुरूप शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में स्थापित किया जाय, क्योंकि यहीं हाईकोर्ट की प्रधान पीठ है। अगर हमारी मांग की अनदेखी की गई तो सरकार को उसकी गंभीर कीमत चुकानी पड़ेगी, क्योंकि वकील अपने अधिकार व सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। वहीं, मंगलवार को लोक संपत्ति क्षतिपूर्ति दावा अधिकरण के मुद्दे पर शहर के सभासदों की बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष जमील अहमद आजमी ने की।

Sunday, September 6, 2020

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने पर फिर उपजा रोष

 
प्रयागराज : उप्र जूनियर लायर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय व कानून के खिलाफ जाकर शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने की कड़ी निंदा की है। सरकार को नौकरशाही के इशारे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना करने का दोषी करार दिया है।


एसोसिएशन की बैठक की अध्यक्षता मिथिलेश कुमार तिवारी ने की। संचालन सचिव जीपी सिंह ने किया। एसोसिएशन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के केस में स्पष्ट रूप से निर्णय दिया है कि अधिकरण वहीं गठित हो जहां हाईकोर्ट हो। उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम में स्पष्ट लिखा गया है कि उप्र का हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट है। लखनऊ में इसकी खंडपीठ है। 


इलाहाबाद हाईकोर्ट का मुख्यालय प्रयागराज में होने के नाते किसी भी अधिकरण का मुख्यालय भी प्रयागराज में ही होना चाहिए, क्योंकि प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रधान पीठ स्थित है। हर अधिकरण पर हाईकोर्ट का क्षेत्रधिकार व नियंत्रण होता है। ऐसे में अधिकरण का मुख्यालय प्रयागराज में न बनाकर लखनऊ में बनाना कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नौकरशाही के दबाव में आकर कानून व सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं के विपरीत, शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है।


मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र : इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरनाथ त्रिपाठी ने शिक्षा सेवा अधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाने के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री को ई-मेल से पत्र भेजकर विरोध किया है और कहा है कि कैबिनेट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के मद्रास बार एसोसिएशन केस, यूपी अमल्गमेशन आर्डर के तहत नसीरुद्दीन केस के फैसले व उप्र राज्य पुनर्गठन अधिनियम के उपबंधों का खुला उल्लंघन है। 


त्रिपाठी ने प्रदेश के महाधिवक्ता एवं विधायी कार्य देखने वाले अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा है कि सही कानूनी सलाह न देने के कारण सरकार गलत फैसले ले रही है और सुप्रीम कोर्ट में जीतने वाले मुकदमे हारती जा रही है। त्रिपाठी ने प्रयागराज में ही शिक्षा सेवा अधिकरण स्थापित करने की मांग की है और कहा है कि मुख्यमंत्री नेताओं व नौकरशाही के दबाव में फैसले न लेकर कानूनी दायित्व निभाए।


शिक्षा प्राधिकरण का मुख्यालय लखनऊ में बनाए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। सरकार के इस फैसले से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर प्रयागराज की गरिमा एवं पहचान से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।


सुभाष चौराहा पर एकत्रित कार्यकर्ता घेरा बनाकर बैठ गए थे। उनका कहना कि जिले का नाम बदलने के साथ सरकार इसकी सूरत और पहचान बदलने की साजिश कर रही है। यहां से सभी मुख्यालय हटाए जा रहे हैं। सरकार यह निर्णय प्रयागराज वालों के साथ धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाहाबाद की उपेक्षा मंत्रियों को भारी पड़ेगी। आंदोलन की अगुवाई कर रही ऋचा सिंह ने मंत्रियों तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सवाल उठाया।

Wednesday, September 2, 2020

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध

अनलॉक गाइडलाइन्स के विपरीत स्कूलों में बुलाया जा रहा पूरा स्टाफ, किया विरोध


अधिकारियों में तालमेल नहीं और शिक्षक हो रहे कोरोना काल में  परेशान

प्रयागराज। मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के आदेश में विरोधाभास पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से ब्लॉक-4 की गाइड लाइन में स्कूल-कॉलेज एवं शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। 


21 सितंबर से स्कूलों में 50 फीसदी टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टॉफ को ऑनलाइन शिक्षा एवं परामर्श के लिए बुलाया जा सकता है। यह आदेश मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। जबकि, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के निर्देश पर जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही सभी शिक्षकों को विद्यालय बुलाया जा रहा है।


लखनऊ : अनलॉक 4 की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्र सरकार ने 21 सितंबर के बाद 50 फीसदी स्टाफ को ही स्कूल बुलाने की अनुमति दी है। इसके बावजूद प्रदेश में बिना रोस्टर सभी शिक्षकों को रोज बुलाया जा रहा है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस पर नाराजगी जताते हुए रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। संगठन के प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र के अनुसार 30 सितंबर तक स्कूल, कॉलेज समेत सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के निर्देश हैं। ऐसे में शिक्षकों समेत सभी कर्मचारियों को बुलाने से संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

Saturday, August 8, 2020

आक्रोश : B.Ed परीक्षा का विरोध, छात्रों ने जलाया प्रवेश पत्र

आक्रोश : B.Ed परीक्षा का विरोध, छात्रों ने जलाया प्रवेश पत्र।

कोरोना महामारी के बीच प्रदेशभर में रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने विरोध में छात्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। छात्रसंघ के सामने सैकड़ों छात्र उपस्थित होकर प्रवेश पत्र जलाकर विरोध दर्ज किया। वहीं, बिना परीक्षा प्रोन्नत किए जाने की मांग को लेकर छात्रों का क्रमिक अनशन जारी रहा। अनशन स्थल पर पहुंचकर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एमएलसी रामवृक्ष यादव ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी युवा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना चाहती है यह गंभीर विषय है। अगर सरकार ने इस पर अपना रवैया नहीं बदला इसका अर्थ होता है उसे करोड़ों युवाओं की चिंता नहीं है।



आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ सरकार पर भारी पड़ेगा। जनतांत्रिक मूल्यों को छोड़कर तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाया तो यह आंदोलन जन सैलाब में परिवर्तित हो जाएगा। इस अवसर पर राजेश शर्मा, राघवेन्द्र यादव, छात्रनेता अजय यादव सम्राट, शैलेश पासवान, अविनाश विद्यार्थी, रोहित सावन, मो. सलमान, नवनीत यादव, आयुष प्रियदर्शी, शक्ति रिजवान, सचिन पहलवान, जितेन्द्र धनराज, राहुल पटेल, कुंवर विकास, सुनील पटेल, विकास यादव, सलमान आदि मौजूद रहे।


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Friday, August 7, 2020

CBSE कंपार्टमेंट परीक्षा रद कराने को शुरू हुई ट्विटर मुहिम, अभिभावक और शिक्षाविद भी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के पक्ष में नहीं

CBSE कंपार्टमेंट परीक्षा रद कराने को शुरू हुई ट्विटर मुहिम, अभिभावक और शिक्षाविद भी कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के पक्ष में नहीं

 
प्रयागराज : सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के नतीजे 13 और 15 जुलाई को घोषित किए गए। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कंपार्टमेंट परीक्षा भी देनी है, क्योंकि वे पास होने के लिए जरूरी अंक नहीं हासिल कर सके। अब ढेरों ऐसे विद्यार्थी हैं जिनकी मांग है कि कंपार्टमेंट परीक्षा इस बार न कराई जाए। इसके लिए उन्होंने ट्विटर पर मुहिम भी शुरू कर दी है।



विद्यार्थियों का कहना है कि जब परीक्षा चल रही थी तब कोरोना संक्रमण के चलते कुछ विषयों की परीक्षा रद करनी पड़ी। उन विषयों में अन्य विषयों के आधार पर नंबर दे दिए गए। उसके बाद परीक्षा परिणाम भी घोषित हो गए। अब कंपार्टमेंट परीक्षा कराने पर बोर्ड अड़ा है, जबकि कोरोना संक्रमण लगातार फैल रहा है। अभी परीक्षा कराने से विद्यार्थी संक्रमण की जद में आ सकते हैं। दूसरी तरफ कंपार्टमेंट परीक्षा और उनके नतीजों के घोषित होने में विलंब के कारण छात्र-छात्रएं किसी अन्य जगह दाखिला नहीं ले पा रहे हैं।

Wednesday, July 29, 2020

कोरोना संक्रमण की स्थिति में बीएड की प्रवेश परीक्षा आयोजन पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

कोरोना संक्रमण की स्थिति में  बीएड की प्रवेश परीक्षा पर अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

 
कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस हालात में 9 अगस्त को प्रस्तावित बीएड प्रवेश परीक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश पत्र जारी करने के बाद अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। 


अभ्यर्थी शक्ति राजभर ने सोशल मीडिया पर अपना प्रवेश पत्रसाझा किया है। वह कहते हैं कि उन्होंने प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ के परीक्षा केन्द्रों पर पेपर देने का विकल्प भरा था। उन्हें 250 किमी दूर बलरामपुर में एमएलके पीजी कॉलेज में परीक्षा केन्द्र आवंटित किया गया है। 


प्रयागराज के बृजेश सिंह लिखते हैं कि उन्होंने प्रयागराज में परीक्षा केन्द्र का विकल्प भरा था। केन्द्र इटावा में दिया गया है। कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात में परीक्षा देने जाने का मतलब जान जोखिम में डालना है। प्रति आजाद लखनऊ विश्वविद्यालय को अपनी आपत्ति टैग करते हुए सोशल मीडिया में लिखा है कि कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। विवि प्रशासन को व्यवहारिक सोच के साथ इस परीक्षा पर फैसला लेना चाहिए। अंकित गौर लिखते हैं कि इन हालात में अभ्यर्थी न तो परीक्षा केन्द्र तक पहुंचेंगे.


तैयारियों पर वीडियो जारी किया 
बीएड प्रवेश परीक्षा करा रहे लविवि की ओर से तैयारियों को लेकर एक वीडियो जारी किया गया है। इसमें, राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेई का कहना है कि प्रथम, द्वितीय और तृतीय वरीयता के आधार पर केन्द्र आवंटित करने के बाद भी बहुत अधिक संख्या में अभ्यर्थी बच गए हैं। उनको अन्य शहरों में भेजा गया है। दावा है कि अभ्यर्थियों की सुविधा प्राथमिकता रही है। | से अपील है कि वह निश्चित होकर केन्द्रों पर जाकर परीक्षा दें। और न ही परीक्षा दे पाएंगे। 


अभ्यर्थी रानू कुमार ने लिखा है कि परीक्षा केन्द्रों पर भीड़भाड़ के माहौल में अगर सिर्फ एक सैनिटाइजर की बोतल और मास्क काफी होता तो देश में इस बीमारी को लेकर इतनी खतरा न बढ़ता।

Friday, July 17, 2020

69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने फॉर्म में संशोधन की मांग की

69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने फॉर्म में संशोधन की मांग की

 
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के फॉर्म में गलती करने वाले अभ्यर्थियों ने गुरुवार को बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर प्रदर्शन कर त्रुटि संशोधन की अनुमति मांगी। रोहित तिवारी मिर्जापुर, प्रयागराज से राहुल तिवारी, अमर बहादुर, तुषार, आशुतोष एवं ललितपुर से निशा परवीन आदि कार्यालय पहुंची थीं लेकिन सचिव से मुलाकात नहीं हो सकी। 


सचिव से 18 जुलाई को मिलने का आश्वासन लेकर गए। वहीं दूसरी ओर माध्यमिक विद्यालयों में बैकलॉग पदों को भरने, लंबित साक्षात्कार शुरू करने, चयनित अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित करने, टीजीटी जीव विज्ञान की परीक्षा आयोजित कराने की मांग को लेकर छात्रों ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड पर प्रदर्शन किया।

Thursday, July 16, 2020

सूबे के 25 हजार मदरसा शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय


सूबे के 25 हजार मदरसा  शिक्षकों को 50 माह से नहीं मिला मानदेय



 रामपुर: केंद्र सरकार ने मदरसों की हालत सुधारने के लिए मदरसा आधुनिकीकरण योजना चलाई है। इसके तहत दीनी तालीम के साथ ही दुनियाबी तालीम भी दी जाती है। इसी के लिए हिदी, अंग्रेजी, गणित और साइंस पढ़ाने के लिए शिक्षक लगाए गए हैं। प्रदेशभर में 25500 शिक्षक हैं। स्नातक शिक्षकों को आठ हजार रुपये मानदेय मिलता है। इसमें दो हजार प्रदेश सरकार और छह हजार केंद्र सरकार देती है। परास्नातक शिक्षकों को 15 हजार मानदेय मिलता है। इसमें 12 हजार केंद्र सरकार और तीन हजार प्रदेश सरकार देती है। प्रदेश सरकार अपने हिस्से का मानदेय तो दे रही है। लेकिन, केंद्र सरकार ने 50 माह से मानदेय नहीं दिया है। इससे मदरसा शिक्षकों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।



संयुक्त मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक समूह उत्तर प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष शहजादे अली अंसारी कहते हैं कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 8584 आच्छादित मदरसों में कार्यरत 25500 शिक्षक हैं। जिनमें जनपद रामपुर के 98 आच्छादित मदरसों में 32 स्नातक शिक्षक तथा 231 परास्नातक शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह यहां कुल 263 शिक्षक हैं। पिछले 50 माह से केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रांश की धनराशि नहीं दी है, जबकि प्रदेश सरकार अपनी ओर से राज्यांश निरंतर दे रही है।ऐसी स्थिति में शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इस संबंध में कई आला अफसरों और मंत्रियों को भी अवगत कराया। लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिल सका है।

Tuesday, July 14, 2020

फतेहपुर : धन वापसी के लिए विद्यालयों को लिखा जाए पत्र, प्राथमिक शिक्षक संघ ने लेखाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

फतेहपुर : धन वापसी के लिए विद्यालयों को लिखा जाए पत्र, प्राथमिक शिक्षक संघ ने लेखाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, बीईओ द्वारा मीटिंग बुलाने का किया विरोध।

फतेहपुर : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के खातों से धन वापसी को लेकर मची अफरातफरी के बीच प्राथमिक शिक्षक संघ भी इसमें कूद गया है। संगठन के जिला मंत्री विजय त्रिपाठी ने सोमवार को वित्त एवं लेखाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें मांग की है कि अब तक उपयोग में न लाए गए धन की वापसी शासन के निर्देश पर होनी है। इस संबंध में अभी तक विद्यालयों के जिम्मेदार प्रधानाध्यापकों के पास कोई निर्देश नहीं पहुंचा है। ऐसी स्थिति में अध्यापकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसलिए संगठनकी मांग है कि सभी प्रधानाध्यापकों को विभाग की ओर से एक पत्र जारी किया जाए, जिससे कि पत्र के आधार पर वह शासन की मंशा का अनुपालन कर सकें और रिकार्ड के रूप में पत्र रख सकें। अन्यथा की स्थिति में संबंधित अध्यापक पर कार्रवाई होगी जो उचित नहीं है।






बीईओ द्वारा मीटिंग बुलाए जाने का विरोध :: प्राथमिक शिक्षक संघ ने खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा कोरोना संकट के बीच मीटिंग बुलाए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। जिला मंत्री विजय त्रिपाठी ने बीएसए को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें कहा है कि जिले के शिक्षक वाट्सएप ग्रुप पर साझा किए जा रहे निर्देशों का पालन कर रहे हैं। मांगी जा रही सूचनाएं दे रहे हैं,शासन और विभाग की मंशा पर काम हो रहा है। ऐसे में कई खंड शिक्षा अधिकारियों ने बीजेपी में मीटिंग बुलाई है। जो बढ़ते हुए कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए उचित नहीं है।


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Tuesday, July 7, 2020

69,000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी किया पोस्टर

69,000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी किया पोस्टर


प्रयागराज। 69,000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार के खिलाफन्याय मोर्चा से जुड़े छात्रों ने गांधी प्रतिमा बालसन चौराहा पर सोमवार को पोस्टर जारी किया। पोस्टर के माध्यम से भर्ती परीक्षा रद्द करो, भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच कराओ, भ्रष्टाचार में लिप्त दोषियों को गिरफ्तार करो, बहुत हो रहा भ्रष्टाचार -चुप क्यों बैठे चौकीदार, भर्ती नहीं भ्रष्टाचार है, तानाशाही सरकार है, यूपी की बड़ी महामारी-परीक्षा से पहले आंसर की जारी, भ्रष्टाचार नहीं रोजगार चाहिए, एक करोड़ का हिसाब चाहिए आदि नारों से सवाल उठाए गए।


मोर्चा के सह संयोजक सुमित गौतम, शैलेश पासवान, प्रदीप ओबामा, सूर्य प्रताप, अजीत, सुरेश, राहुल, शिवकुमार आशीष पटेल आदि ने पोस्टर प्रदेश के सभी जिलों में लगाने की बात कही।

Sunday, July 5, 2020

खण्ड शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही पर शिक्षकों का वेतन रोकने के आदेश पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने की आपत्ति

लखनऊ। 04 जुलाई : मानव सम्पदा पोर्टल पर सेवा विवरण व शैक्षिक अभिलेखों का 15 जुलाई तक अवलोकन कर डाटा सत्यापित न करने पर शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध करने के फरमान पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उ0प्र0 ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र के माध्यम से न केवल मानव सम्पदा पोर्टल पर डाटा अपलोड की जमीनी हकीकत से अवगत कराया, बल्कि खण्ड शिक्षा अधिकारियों की लपरवाही पर शिक्षकों का वेतन अवरुद्ध करने को अन्याय बताया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उ0प्र0 (प्राथमिक संवर्ग) के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद तिवारी व प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह ने पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि मानव संपदा पोर्टल पर सेवा संबंधी विवरण अपलोड किए जाने हेतु विभागीय आदेशोपरान्त शिक्षकों द्वारा 2-3 बार मानव सम्पदा फार्म खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा किया जा चुका है। शिक्षकों की सेवा पुस्तिका व व्यक्तिगत पत्रावली भी खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही होती है, किन्तु खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की लापरवाही के कारण प्रदेश के अधिकांश जनपदों में 40% से अधिक डाटा अपलोड नहीं हो पाया है। उन्होंने मांग की कि अध्यापकों का सेवा विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर पूर्ण रूपेण अपलोड कर दिए जाने संबंधी प्रमाणपत्र खण्ड शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किये जाने के पश्चात कम से कम 10 दिन का समय शिक्षकों/कार्मिकों को अपना डाटा चेक करने हेतु दिया जाना चाहिए।
अधिकांश जनपदों में मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों को प्रति सेवा वर्ष मिलने वाले एक दिन के उपार्जित अवकाश का अंकन नहीं किया जा रहा है। अतः इस सम्बन्ध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देशित करने की मांग भी महासंघ ने की।




पत्र में उल्लेखित समस्याओं की महत्ता के दृष्टिगत उन्हें त्वरित निस्तारण कराने व शिक्षकों के सेवा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड किए जाने के कार्य को शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण कराने का की मांग महासंघ ने की जिससे शिक्षक समय से अपने सेवा विवरण चेक कर डाटा का सत्यापन कर सकें। कतिपय जनपदों में कायाकल्प के तहत कार्य न होने पर शिक्षकों को दोषी ठहराकर कार्रवाई करने को महासंघ ने अनुचित व अन्यायपूर्ण बताया है। महासंघ के माँगपत्र की  प्रदेशीय संयुक्त महामंत्री शिवशंकर सिंह, अयोध्या मण्डल महामंत्री पवन शंकर दीक्षित, जिलाध्यक्ष सीतापुर महेश मिश्रा व प्रदेश मीडिया प्रकोष्ठ सदस्य बृजेश श्रीवास्तव आदि पदाधिकारियों ने सराहना की है।

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Thursday, June 25, 2020

आगरा : स्कूलों में आकर डाटा फीड करने का शिक्षकों ने किया विरोध, शिक्षकों ने कहा- फीडिंग का कार्य विभाग का

आगरा : स्कूलों में आकर डाटा फीड करने का शिक्षकों ने किया विरोध, शिक्षकों ने कहा- फीडिंग का कार्य विभाग का।


स्कूलों में आकर डाटा फीडिंग काम का विरोध


आगरा : स्कूलों में डाटा फीडिंग कर कंप्यूटर ऑपरेटर की जगह काम करने का शिक्षक विरोध कर रहे हैं। शासन का एक जुलाई से परिषदीय विद्यालय खोलने का आदेश आ चुका है। शिक्षकों का कहना है कि उनसे सिर्फ शिक्षक का ही कार्य लिया जाए, अन्य कार्य नहीं।








शिक्षकों से एमडीएम की लिस्ट और सीडी बनवाकर विभिन्न बैंकों में भेजना, मानव संपदा पोर्टल के लिए अपनी ही सर्विस बुक को सही कराने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पास जाकर फीडिंग कराना नियम विरुद्ध है। शिक्षक अपनी सर्विस बुक को सही कैसे कर सकता है, जबकि सर्विस बुक फीडिंग का कार्य विभाग का है। शिक्षकों का कहना है कि ये सभी कार्य शिक्षा के नहीं हैं, इन कार्यों के लिए विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की गई है। इसलिए सभी कार्य कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा कराए जाएं। प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राठौर, राजीव वर्मा, केशव दीक्षित, ब्रजेश दीक्षित आदि ने विरोध जताया है।



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Tuesday, June 16, 2020

69000 सहायक अध्यापक भर्ती : फॉर्म में संशोधन के लिए अभ्यर्थियों ने मांगा मौका

69000 सहायक अध्यापक भर्ती : फॉर्म में संशोधन के लिए अभ्यर्थियों ने मांगा मौका


प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के फॉर्म में पूर्णांक प्राप्तांक समेत अन्य गलतियां करने वाले अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।


 अभ्यर्थियों का कहना है कि सर्वर की खराबी, कैफे वाले की कम जानकारी और स्वयं की मानवीय त्रुटि के कारण पूर्णांक, प्राप्तांक, रोल नंबर व कैटेगरी आदि में गलती हो गई। अब इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है। 

Sunday, June 14, 2020

69000 : परीक्षा में धांधली की जांच से असंतुष्ट परीक्षार्थी खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा

69000 : परीक्षा में धांधली की जांच से असंतुष्ट परीक्षार्थी खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा


प्रयागराज। 69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में धांधली की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परीक्षा वाले दिन प्रयागराज के अलावा लखनऊ, कानपुर एवं मुरादाबाद से भी सॉल्वर गिरोह पकड़ा गया था, जांच सिर्फ प्रयागराज प्रयागराज तक ही सीमित है। एसटीएफ ने अभी तक इन तीन जिलों को जांच में शामिल नहीं किया है, इससे असंतुष्ट परीक्षार्थी अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। 


छह जनवरी 2019 को में ही जबकि कानपुर समेत तीन शहरों में भी पकड़ी थी गड़बड़ी सहायक भर्ती परीक्षा के दौरान दूसरे की जगह परीक्षा देने में 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। प्रयागराज में भी नकल कराने वाला पूरा गिरोह पकड़ा गया था। गिरोह के इन लोगों के तार कौशाम्बी, प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही, बिहार के आरा जिले से जुड़े मिले थे, जबकि परीक्षार्थियों को झांसी, नैनी, करेली सहित दूसरे परीक्षा केंद्रों से पकड़ा गया था। 


वहीं इसी दिन दूसरी ओर लखनऊ में नकल कराने में एक प्रधानाचार्य, पांच कक्ष निरीक्षकों तथा दो परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया था। मिर्जापुर के एक स्कूल में परीक्षार्थी सॉल्व कॉपी के साथ पकड़ी गई थी। आजमगढ़ में दूसरे की जगह परीक्षा देते इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ एक-एक अभ्यर्थी को पकड़ा गया था। आगरा में राजस्थान के अलवर से आए सॉल्वर को पुलिस ने पकड़ा था। 


परीक्षा के बाद से आंदोलन चला रहे आइसा के सुनील मौर्या का कहना है कि मुरादाबाद और मेरठ में सबसे अधिक गड़बड़ी हुई थी, एसटीएफ को वहां जांच पर फोकस करके जालसाजों को पकड़ना चाहिए। सरकार की जांच से असंतुष्ट परीक्षार्थी जल्द ही नकल के मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। 

Thursday, December 5, 2019

फतेहपुर : ऐप के विरोध में जारी है शिक्षकों का असहयोग आंदोलन, सैकड़ों शिक्षकों ने छोड़े सूचनाओं वाले व्हाट्सअप ग्रुप

फतेहपुर : ऐप के विरोध में जारी है शिक्षकों का असहयोग आंदोलन, सैकड़ों शिक्षकों ने छोड़े सूचनाओं वाले व्हाट्सअप ग्रुप।





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Tuesday, November 5, 2019

बेसिक शिक्षा विभाग : एआरपी चयन के खिलाफ शिक्षक लामबंद, एप से हाजरी का मामला पड़ा ठंडा

बेसिक शिक्षा विभाग : एआरपी चयन के खिलाफ शिक्षक लामबंद, एप से हाजरी का मामला पड़ा ठंडा।





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Monday, November 4, 2019

फतेहपुर : शिक्षकों के बहिष्कार से एआरपी पद का चयन फंसा, जनपद में 70 एआरपी पदों पर होना है चयन, चयन समिति की अध्यक्ष सीडीओ बोलीं- नवम्बर में पूरी होगी चयन प्रक्रिया

फतेहपुर : शिक्षकों के बहिष्कार से एआरपी पद का चयन फंसा, जनपद में 70 एआरपी पदों पर होना है चयन, चयन समिति की अध्यक्ष सीडीओ बोलीं- नवम्बर में पूरी होगी चयन प्रक्रिया।


जागरण संवाददाता, फतेहपुर: बेसिक शिक्षा में किए जा रहे समय-समय पर बदलाव के चलते शिक्षक-शिक्षिकाओं और शासन-प्रशासन के बीच बार बार तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। 5 सितंबर से लागू हुए प्रेरणा एप के विरोध के बाद नए पद एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) की चयन प्रक्रिया को लेकर बवंडर शुरू हो गया है। एक ओर चयन समिति की अध्यक्ष सीडीओ ने बीएसए के संग बैठक करके नवंबर माह में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं।

शासन ने सहायक ब्लॉक समन्वयकों के पद खत्म कर देने के बाद नया पद एआरपी सृजित किया है। जिले के 13 ब्लॉकों में इसकी चयन प्रक्रिया की जानी है। चयन समिति में सीडीओ को अध्यक्ष वहीं बीएसए को सचिव का दायित्व दिया गया है। चयन के लिए 100 अंकों की परीक्षा में 60 अंक लिखित, 30 अंक पूर्व के शैक्षिक कार्यों का आकलन और 10 अंक के साक्षात्कार की नई प्रक्रिया खासी परेशानी में डालने वाली है। ऐसे में तमाम कार्यरत एबीआरसी का पत्ता पहले ही साफ हो जाएगा। जिले के 70 एबीआरसी में ब्लाक स्तरीय नेता ही इस पद में हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह और महामंत्री विजय त्रिपाठी कहते हैं कि सामूहिक बैठक में निर्णय लिया गया है कि एआरपी के लिए कोई भी शिक्षक-शिक्षिका आवेदन नहीं करेंगे। इस सर्वसम्मति के निर्णय के इतर जो भी काम करेगा उसका संगठन से कोई नाता नहीं होगा। ऐसे शिक्षक और शिक्षिका का ब्लाक एवं जिला स्तर पर बहिष्कार कर दिया जाएगा।








फतेहपुर : परिषदीय शिक्षक संगठनों ने प्रेरणा एप और एआरपी चयन का किया विरोध, संगठन प्रतिनिधियों ने कहा- एआरपी चयन के लिए कोई शिक्षक नहीं करेगा आवेदन।

एआरपी पद के लिए आवेदन करने पर होगा बहिष्कार
04 Nov 2019
प्राथमिक शिक्षा से जुड़े संघों ने अकादमिक रिसोर्स पर्सन की चयन प्रक्रिया के मामले में एकजुटता दिखाते हुए इस पद के लिए किसी भी सदस्य द्वारा आवेदन न किए जाने का फैसला किया है। रविवार को विभिन्न संघों की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि जो शिक्षक इस पद के लिए आवेदन करेगा, उसका सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा एवं उसे सदस्य नहीं बनाया जाएगा।
कलेक्ट्रेट स्थित भीमराव पार्क में आयोजित बैठक में संघों के नेताओं ने एका दिखाते हुए एक सुर से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में एआरपी पद के लिए आवेदन करना संभव नहीं है। प्राथमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, पूमा शिक्षक संघ एवं विशिष्ट बीटीसी संघ ने एक मत होकर निर्णय किया कि इन संघों को कोई भी सदस्य आवेदन नहीं करेगा। जो शिक्षक आवेदन करेगा, उसका सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा तथा संघ की सदस्यता भी नहीं दी जाएगी। संघीय निर्वाचन प्रक्रिया से भी उसे दूर रखा जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि मनोनयन द्वारा चयन किया जाता है तो भी वर्तमान एबीआरसीसी एवं कोई भी शिक्षक इस पद पर कार्य नहीं करेंगे। हिन्दुस्तान ने पहले ही इस संभावना की खबर ‘एआरपी पर प्रेरणा का साया' प्रकाशित की थी। इस अवसर पर आरएसएम के मांडलिक मंत्री सुरेश सिंह, प्राशिसं के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह, मंत्री विजय त्रिपाठी, आरएसएम के जिलाध्यक्ष अदीप सिंह, जूनियर शिक्षक संघ के अध्यक्ष रमेश सिंह, दिग्विजय सिंह, अनुराग मिश्र, शैलेन्द्र भदौरिया, ब्रजेश सिंह, लाल देवेन्द्र प्रताप सिंह दर्जनों शिक्षक नेता एवं सदस्य मौजूद रहे।
व्यावहारिकता पर भी दिया जाए बल: शिक्षक संघों का मानना है कि विभाग सिर्फ नियम थोपने पर आमादा है। जबकि कोई नया नियम लागू करने से पहले वस्तुस्थिति का आंकलन कर ग्राउन्ड जीरो से रिपोर्ट लेनी चाहिए। दूर दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षकों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसका भी ध्यान रखना चाहिए।










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Friday, September 20, 2019

फतेहपुर : शिक्षकों का विरोध बढ़ा तो ठप हुई एप डाउनलोडिंग, आंदोलित अध्यापक अपनी हठ पर अड़े, बीएसए ने क्रियान्वयन के लिए जारी किया आदेश

फतेहपुर : शिक्षकों का विरोध बढ़ा तो ठप हुई एप डाउनलोडिंग, आंदोलित अध्यापक अपनी हठ पर अड़े, बीएसए ने क्रियान्वयन के लिए जारी किया आदेश।





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