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Sunday, February 21, 2021

पदोन्नति न मिलने की हताशा में कार्यवाहक / प्रभारी प्रधानाध्यापक का पद छोड़ने लगे बेसिक शिक्षक

पदोन्नति न मिलने की हताशा में कार्यवाहक / प्रभारी प्रधानाध्यापक का पद छोड़ने लगे बेसिक शिक्षक



प्रयागराज : 12 साल से प्रमोशन न मिलने से हताश शिक्षकों ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापक पद से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय लक्षन का पूरा मेजा की कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका परमजीत कौर ने खंड शिक्षाधिकारी को पद से इस्तीफा भेजते हुए सहायक अध्यापिका के पद पर कार्य करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से वह इंचार्ज हेडमास्टर के पद से इस्तीफा दे रहीं हैं।


प्रयागराज में 9 फरवरी 2009 के बाद नियुक्त शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हुआ है। जिसके चलते सैकड़ों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के सहारे चल रहा है। अफसर वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी सौंप दे रहे हैं, भले ही उनकी इच्छा हो या नहीं। सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन करने के साथ ही स्कूल में सफाई से लेकर बच्चों के प्रवेश, शिक्षकों की उपस्थिति आदि खुद देखना पड़ता है।


बच्चों के खाते में मिड-डे-मील की कन्वर्जन कास्ट पहुंचाने से लेकर यूनिफॉर्म सिलाने और जूता, मोजा, बैग, किताबें बांटने का काम प्रधानाध्यापक का है। कार्यवाहक को प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से बड़ी संख्या में शिक्षक इस जिम्मेदारी को उठाना नहीं चाहते।


इनका कहना है

शिक्षक को दंड तो कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का मिलता है लेकिन वेतन या अन्य कोई लाभ उस पद का नहीं दिया जाता। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाचार्य को इंक्रीमेंट तक मिलता है। जो शिक्षक कार्यवाहक पद छोड़ने का निर्णय ले रहे हैं, वह स्वागत योग्य है। - देवेन्द्र श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ

Sunday, February 14, 2021

प्रमोशन न होने से नाराज हैं बेसिक शिक्षक, प्रमोशन नहीं होने पर प्रभारी पद छोड़ने की तैयारी

पडरौना : प्रमोशन न होने से नाराज हैं बेसिक शिक्षक, प्रमोशन नहीं होने पर प्रभारी पद छोड़ने की तैयारी

जिले में एक हजार से अधिक अध्यापक प्रभारी हेडमास्टर के तौर पर कर रहे हैं कार्य


पडरौना । जिले में एक हजार से अधिक अध्यापक प्रभारी हेडमास्टर के तौर पर कार्य कर रहे हैं। प्रमोशन के लिए ये शिक्षक कई बार आंदोलन कर चुके हैं। शुक्रवार की रात में 10 बजे तक शिक्षकों ने धरना दिया था। इन शिक्षकों ने प्रमोशन नहीं होने पर प्रभारी पद छोड़ने की बात कही है।

टेट मोर्चा से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि जिले में प्राथमिक और संविलयन समेत कुल 2464 विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में तैनात सहायक अध्यापकों की शिक्षा विभाग की तरफ से कई वर्षों से वरिष्ठता सूची जारी नहीं हुई है । विद्यालयों में रिक्त प्रधानाध्यापकों का कार्यभार वहां तैनात वरिष्ठ अध्यापकों को सौंप दिया जाता है। अंतर जनपदीय तबादला के चलते कई स्कूलों में कार्यरत प्रभारी हेडमास्टर का पद भी रिक्त हो गया है। 


शिक्षक नेताओं का कहना है कि अस्थाई व्यवस्था अल्पकाल के लिए तो ठीक है, लेकिन बिना प्रमोशन पाए ही शिक्षकों से अतिरिक्त कार्य लिया जाना उचित नहीं है। उन्होंने आंदोलन की चेतावनी भी दी।


इस संबंध में बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि शिक्षक संगठनों की मांग पर बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव से मार्ग दर्शन मांगा गया है । उनके तरफ से मिले निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

Thursday, February 11, 2021

हाथरस बीएसए पर शिक्षकों से अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप, विरोध में डीएम को सौंपा ज्ञापन

हाथरस बीएसए पर शिक्षकों से अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने डीएम को दिया ज्ञापन


हाथरस। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस को बीते दिनों ज्ञापन देते समय शिक्षकों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। इसे लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने डीएम को ज्ञापन दिया है।


बीतों दिनों जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार मिश्र जिलाधिकारी के साथ बैठक में थे। वहीं पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने पहुंच गए। जिस पर बीएसए ने उन्हें डांट लगा दी। इसको लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ नाराजगी जता रहा है। महासंघ ने बीएसए के द्वारा अपनी शब्दावली पर खेद प्रकट किए जाने की मांग की गई है। जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष रविकांत मिश्रा, मंडलीय उपाध्यक्ष हरीश कुमार शर्मा, संजय कुमार शर्मा, डॉ. संजय गौतम, आशुतोष अग्निहोत्री, विमल शर्मा, मनोज शर्मा, राहुल देव, अजय शर्मा, अजीत राणा, हरिओम सिंह, रामगोपाल, प्रदीप पचौरी, गोपाल शर्मा, देवेंद्र सिंह, चंद्र प्रकाश शर्मा आदि शामिल थे।


मामले को लेकर बीएसए मनोज कुमार मिश्र का कहना है कि अभद्र भाषा का आरोप गलत है। जिलाधिकारी महोदय की मीटिंग में था, वहां पर जाकर इन्होंने ज्ञापन देना चाहा था, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। ज्ञापन देना था तो पूर्व में सूचना देते या फिर हमारे में ऑफिस में आकर ज्ञापन देते। इसी को लेकर फटकार लगाई थी, लेकिन भाषा अभद्र नहीं थी।

Wednesday, January 20, 2021

69000 : दिव्यांग अभ्यर्थी सामूहिक मुंडन के जरिये आज दर्ज कराएंगे अपना विरोध

69000 : दिव्यांग अभ्यर्थी सामूहिक मुंडन के जरिये आज दर्ज कराएंगे अपना विरोध।



प्रयागराज। 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण की विसंगति के खिलाफ 14 दिसंबर 2020 से लगातार धरने पर बैठे दिव्यांगों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। 

अब दिव्यांग अभ्यर्थी बुधवार को सामूहिक मुंडन करवाएंगे। धरने पर बैठने वालों में उपेन्द्र मिश्रा, धनराज यादव, प्रदीप, राघवेंद्र, कौशल शामिल रहे।

Monday, January 18, 2021

वार्षिक मूल्यांकन के तुगलकी फरमान के विरोध में बेसिक शिक्षक लामबंद

वार्षिक मूल्यांकन के तुगलकी फरमान के विरोध में बेसिक शिक्षक लामबंद


बाराबंकी। उत्तर प्रदेश सरकार के ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरण आनंद द्वारा जारी शिक्षकों के वार्षिक मूल्यांकन के आदेश को लेकर शिक्षकों में आक्रोश और रोष व्याप्त हो गया है। सूबे के लाखों शिक्षकों में इस आदेश को लेकर जहां तरह-तरह की चर्चाएं हैं तो वहीं इस आदेश को लेकर के लोगों में इस कदर आक्रोश है लोगों ने इस आदेश के खिलाफ माननीय न्यायालय at शरण लेने का भी मन बना लिया है। 

स्कूली शिक्षा मह्मननिदेशक विजय किरण आनंद के आदेश के अनुसार शिक्षकों की वार्षिक मूल्यांकन आख्या ऑनलाइन भरी जानी है जिसमें शिक्षकों द्वारा अपना स्वयं का मूल्यांकन करना है और प्रतिवेदक अधिकारी ध्खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा मूल्यांकन किया जाना है और उनके अंक निर्धारित कियें गए है लेकिन महानिदेशक के आदेश के कुछ बिंदुओं को लेकर शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। 


प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता ने शिक्षकों को बैठक आयोजित करके बताया की आपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत जारी आदेश के मुताबिक विद्यालय में मूल भूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था जिसको लेकर शासन द्वारा भी आदेश जारी करते हुए जिला अधिकारी ,मुख्य विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी को आदेश पारित किया गया कि ग्राम निधि के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान और सचिव के द्वारा स्कूलों को 14 मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त किया जाए इसके लिए बकायदा फंड की व्यवस्था भी शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई गई थी। 

एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्कूलों के बंद होने के बावजूद  ज्यादातर ग्रामो में ग्राम प्रधान पंचायत सचिव की लापरबाही की बजह से स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं पूरी नहीं हो पाई, लेकिन महानिदेशक के ताजा आदेश के अनुसार ग्राम प्रधान द्वारा कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी शिक्षकों को जिम्मेदारी तय कर दी गई जिसके लिए ना तो उनको कोई फंड की व्यवस्था की गई ना थी न ही इसको पूरा कराने को लेकर उनको कोई आदेश शासन द्वारा दिया गया। 


डीजी के इस आदेश की बजह से शिक्षकों का कहना है कि करे कोई भरे कोई अर्थात मूलभूत सुधार की जिम्मेदारी के लिए जिनको जिम्मेदारी दी गई थी उनके द्वारा काम न किए जाने को लेकर के उन पर तो कोई कार्यवाही नहीं की गईं लेकिन स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं दिए जाने के नाम पर स्कूल के शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करके उनकी गोपनीय आख्या में कम अंक देकर कार्यवाही का मन बना लिया है। जबकि यह नियम विरुद्ध हैं। 


शिक्षक धीरेंद्र प्रताप सिंह और सुजीत कुमार शर्मा ने बैठक में बताया को इस आदेश के दो बिंदुओं पर आपत्ति है। जिसमें आपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत कार्य पूर्ण ना छोने का जिम्मेदार अध्यापक को बनाया जाना जबकि ग्राम प्रधानों द्वारा मुख्यतः उन्हीं विद्यालयों में कार्य कराए गए हैं जहां पर पोलिंग बूथ हैं।विद्यालयों में आने बाली कम्पोजिट ग्रांट 14 पैरामीटर का काम कराने के लिए नाकापी है लेकिन उसको खर्च करने के निर्देश अलग है इस मद में खर्च नही कर सकते है। इसके लिए शिक्षक स्वयं के वेतन से हो कार्य कराएँ। 


ब्लाक अध्यक्ष बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा की यह बात सर्जवरिदित है कि सभी विद्यालयों में छात्र संख्या एक समान नहीं है किसी विद्यालय में 600 है तो किसी में 30 है, तो विभाग किस आधार पर किसी अध्यापक का आकलन कैसे कर सकता है कि उसने ई- लर्निंग पाठशाला में कितनी संख्या में अभिभावकों को जोड़ा है जहां पर छात्र संख्या कम है वहाँ कम ही संख्या में सदस्य जोड़े जा सकते है।सभी जगह पर अभिभावकों की सामाजिक आर्थिक स्थिति एक समान नहीं है कहीं कहीं पर अभिभावक के पास स्मार्टफेन नहीं मिलेगा , अगर मिलेगा भी तो मोबाइल में डाटा नहीं मिलेगा। 

प्रदीप मिश्रा का कहना है को ई ग्रुप में जोड़ी गई संख्या के आधार पर अध्यापक का आकलन करना हास्यास्पद है, इस आदेश का सन्देश स्पष्ट है कि अगर अभिभावक के पास स्मार्टफेन नहीं है तो अध्यापक अक्षम है। बैठक में शिक्षकों ने इस आदेश के विरोध में अपने विचार रखे और लामबंद होकर आगे की रणनीति तय करते हुए माननीय न्यायालय की शरण में जाने की बात कही। 


विवेक कुमार गुप्ता ने बताया की इस आदेश को लेकर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय ने शिक्षा मंत्री सतीश द्विबेदी के समक्ष पत्र देकर अपना विरोध दर्ज कराया है यदि आदेश वापस नहीं लिया जाता है तो शिक्षक हित में आगे को रणनीति तय करते हुए माननीय न्यायालय की शरण में जाया जाएगा। इस मौके पर धीरेंद्र प्रताप सिंह, विमला सिंह, रजनीश शुक्ला, पछाली, अलोक, अनीता, इमामुद्दीन अंसारी, श्रद्धा मणि, रीता राना, भावना मिश्रा, रुद्रकांत, शेरबहादुर, सुजीत शर्मा, प्रभाकांत व सत्य प्रकाश आदि उपस्थित रहे।

Wednesday, January 13, 2021

रामपुर : गर्मी में विद्यालय खोलने पर शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति

रामपुर : गर्मी में विद्यालय खोलने पर शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति


रामपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघने भीषण गर्मी में परिषदीयविद्यालय खोलने पर आपत्ति जताई है। बेसिक शिक्षा परिषद परिषद सचिव को ज्ञापन भेजकर समन्वय परिवर्तन पर पुनर्विचार करने की मांग की है।


सोमवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को ज्ञापन भेजा।ज्ञापन में कहा गया कि 6 जनवरी को जारी वर्ष 2021 की अवकाश तालिका में ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 मई से 15 जून तक रखा गया हैं। 16 जून से 30 जून तक गर्मी अपनी चरम सीमा पर होती हैं। यह समय शिक्षण के लिये कतई उपयुक्त नहीं हैं।इसलिए ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 जून से 30 जून तक किया जाना उचित रहेगा।


ज्ञापन में ग्रीष्मकालीन समयावधि पर भी आपत्ति की गयी हैं। दोपहर एक बजे के बाद पढ़ाई तो दूर कमरों में बैठना मुश्किल ही हो जाता है। ऐसी स्थिति में विद्यालय का समय पूर्ववतसुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक रखना उचित होगा। ज्ञापन देने में जिला अध्यक्ष कैलाश बाबू पटेल और जिला मन्त्री आनन्द प्रकाश गुप्ता रहे।

Monday, January 11, 2021

69000 भर्ती में आरक्षण के मामले को लेकर ठंड में खुले आसमान के नीचे डटे दिव्यांग अभ्यर्थी

69000 भर्ती में दिव्यांग आरक्षण के मामले को लेकर  ठंड में खुले आसमान के नीचे डटे दिव्यांग अभ्यर्थी


सूबे के परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक की 69 हजार पदों की भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थियों को चार प्रतिशत आरक्षण न मिलने के विरोध में प्रदर्शन जारी है।


बेसिक शिक्षा परिषद कार्यातय पर अभ्यर्थी उेंद्र कुमार मिश्र, धनराज यादव, शरद अग्रहरि व मनोज भारद्वाज चार दिन से भूख हड़ताल कर रहे हैं। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद उनका हौसला बुलंद है। अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने का जज्बा कायम है, यही कारण है कि ठंड के बीच दिन-रात अभ्यर्थी खुले आसमान के नीचे डटे हैं। 


बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में चार प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से 2760 सीटें दिव्यांग कोटे से भरी जानी चाहिए।

69000 भर्ती में त्रुटि के चलते वंचित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी इच्छा-मृत्यु

69000 भर्ती में त्रुटि के चलते वंचित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी इच्छा-मृत्यु


राजधानी में करीब 35 दिनों से बेसिक शिक्षा निदेशालय में धरना दे रहे अभ्यर्थियों के सब्र का बांध टूट गया है। कहीं सुनवाई न होने पर अभ्यर्थियों ने रविवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।



सीतापुर से आई बबली पाल ने कहा कि हमें मजबूर होकर राष्ट्रपति को पत्र लिखना पड़ा है। हम लोग मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। 


अभ्यर्थियों ने कहा कि हमारे मूल अभिलेख देखकर हमें नियुक्ति दी जाए। हमारी नियुक्ति वैध है और सभी की काउंसिलिंग भी हो चुकी है। राष्ट्रपति को पत्र लिखने वालों में सौरभ राय, आशुतोष, ममता, रमन, संदीप व कुमुदश्री भी शामिल हैं।

Saturday, January 9, 2021

69000 भर्ती में दिव्यांग आरक्षण के मामले को लेकर विरोध कर रहे अभ्यर्थियों से मिलकर महानिदेशक सुनेंगे उनकी बात

69000 भर्ती में दिव्यांग आरक्षण के मामले को लेकर विरोध कर रहे अभ्यर्थियों से मिलकर महानिदेशक सुनेंगे उनकी बात

69000 भर्ती : आरक्षण की विसंगतियों को लेकर धरने के बाद दिव्यांगों ने अब शुरू की भूख हड़ताल


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय इन दिनों आंदोलन स्थली बना है। प्रदेश भर के दिव्यांग शिक्षक भर्ती में नियमानुसार आरक्षण की देने की मांग को लेकर 26 दिन से धरना दे रहे थे, अफसरों की अनसुनी पर उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दिया है। कहना है कि हक मिलने के बाद ही वे यहां से हटेंगे। 

69000 शिक्षक भर्ती में ये दिव्यांग अभ्यार्थी 90/97 कटआफ पास है। संविधान द्वारा पारित आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के तहत दिव्यांगों को चार प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, आरोप है कि यह आरक्षण अधिकारियों की लापरवाही के तहत नहीं दिया। इसके विरोध में वे 14 दिसंबर 2020 से धरना दे रहे हैं। सुनवाई न होने पर उन्होंने अब भूख हड़ताल शुरू कर दी है। परिषद ने मांग पत्र महानिदेशक को भेजा है और अब तक उसका निस्तारण नहीं हुआ है।


उधर 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की विसंगति पर 14 दिसंबर से लगातार बेसिक शिक्षा परिषद पर धरने पर बैठे अभ्यर्थियों की बावत पूछे जाने पर विजय किरन आनंद ने कहा कि वह शनिवार को इन अभ्यर्थियों से मिलकर उनकी मांग सीधे सुनेंगे।


चार अभ्यर्थियों की भूख हड़ताल और उसमें एक के बीमार होने की खबर पर उन्होंने कहा कि वह अनावश्यक इस ठंड में अपने को परेशानी में डाल रहे हैं, उनकी मांग पर नियम संगत विचार हो रहा है। उन्होंने दिव्यांग अभ्यर्थियों की ओर से श्रवण ह्रास एवं दृष्टिहीन अभ्यर्थियों के आरक्षण को शारीरिक रूप से अक्षम दिव्यांगों को देने की मांग को नियम विरूद्घ बताया।

Thursday, January 7, 2021

त्रुटि सुधार के लिए 69000 भर्ती अभ्यर्थियों ने भीख मांग कर जताया विरोध

त्रुटि सुधार के लिए 69000 भर्ती अभ्यर्थियों ने भीख मांग कर जताया विरोध।


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित रहने वाले अभ्यर्थियों ने बुधवार शाम निशातगंज स्थित एससीईआरटी गेट के सामने भीख मांग कर विरोध जताया। अभ्यर्थियों ने बताया कि आवेदन के दौरान हुई त्रुटियों में सुधार करने का अवसर देने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर वे 7 दिसंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि छह दिनों से अनशन पर हैं। मगर उनकी कोई सुन नहीं रहा है।



 अभ्यर्थी बबली पाल, सौरभ, रुचि, आशुतोष, हिमांशु वर्मा, संदीप ने बताया कि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय प्राप्तांक अधिक व पूर्णाक आदि त्रुटियां हो गईं थी। इसके आधार पर उनकी नियुक्ति को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। जबकि बे सब भर्ती परीक्षा पास कर आए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जाता है, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

Sunday, January 3, 2021

69000 भर्ती मामले में पांच माह बाद भी नहीं सुलझा प्रश्नों के उत्तर का विवाद, विवादित प्रश्नों पर निर्णय की मांग को लेकर प्रदर्शन

69000 भर्ती : विवादित प्रश्नों पर निर्णय की मांग को लेकर प्रदर्शन

पांच माह बाद भी नहीं सुलझा प्रश्नों के उत्तर का विवाद


प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों की 69,000 शिक्षक भर्ती में प्रश्नों के जवाब का विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतियोगियों ने शनिवार को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय का घेराव किया। उनकी मांग है कि जब तक विवाद का निस्तारण न हो, भर्ती के रिक्त पद न भरे जाएं। कोर्ट ने दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया था, लेकिन अब इसको भी पांच माह बीत चुके हैं।


शिक्षक भर्ती की अंतिम उत्तरकुंजी में तीन से चार प्रश्न ऐसे हैं, जिनके दो से अधिक उत्तर हैं। विवादित प्रश्नों को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने तीन जून, 2020 को भर्ती प्रक्रिया पर रोक भी लगा दी थी, जबकि दो जजों की पीठ ने भर्ती पर लगी रोक को हटा लिया था। प्रकरण शीर्ष कोर्ट पहुंचा, वहां से उत्तरकुंजी से संबंधित सभी याचिकाओं को टैग कर जुलाई, 2020 में दो जजों की पीठ को विवादित प्रश्नों की जांच कर दो माह में उत्तरकुंजी के मामले निस्तारण करने का निर्देश दिया गया। इस पर अब तक कोई फैसला नहीं आया है, जबकि शिक्षक भर्ती अंतिम दौर में है। प्रतियोगियों ने ऐसे में निर्णय आने के बाद ही तीसरी काउंसिलिंग कराने की मांग की है। इसे लेकर शनिवार को अभिषेक श्रीवास्तव के नेतृत्व में परीक्षा संस्था का घेराव हुआ और सचिव को ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें अमित यादव, अखिलेश, नवीन यादव, विवेक द्विवेदी, अनीता व कृष्णा सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।


प्रयागराज। 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में जारी उत्तर कुंजी में बिवादित तीन से चार प्रश्नों पर निर्णय नहीं होने से परेशान शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों शनिवार को सचिव परीक्षा नियामक कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का आरोप था कि हजारों की संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा नियामक प्राधिकारी की गलती की सजा भुगत रहे हैं। 




 अभ्यर्थियों का कहना था कि उत्तर कुंजी में विवादित प्रश्नों पर निर्णय नहीं होने से वह लगातार कोर्ट, बेसिक शिक्षा परिषद एवं सरकार का चक्कर लगा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों का कहना था कि बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से दो बार भर्ती प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद भी आठ से 10 हजार सीटें खाली हैं। मांग की कि सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी विवादित प्रश्नों पर निर्णय लेकर तीसरी काउंसलिंग करवा खाली पदों को भरें।

सिद्धार्थनगर : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होने से गुस्साए शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, उठाया सवाल- जब 54 हजार का ऐलान तो तबादले 21 हजार क्यों?

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होने से गुस्साए शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, उठाया सवाल- जब 54 हजार का ऐलान तो तबादले 21 हजार क्यों?


सिद्धार्थनगर। अंतरजनपदीय स्थानांतरण नहीं होने से नाराज शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर एडीएम सीताराम गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्थानांतरण के लिए संशोधित सूची जारी करने की मांग को। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करने के दौरान अंतरजनपदीय स्थानांतरण के इच्छुक शिक्षकों ने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली के अनुसार पिछड़े जिले से महिलाओं के लिए दो वर्ष और पुरुषों के लिए पांच वर्ष को सेवा जरूरी है। जबकि अंतरजनपदीय स्थानांतरण के दौरान इस नियम को अनदेखी की गई, जिससे गिने-चुने शिक्षकों को ही इसका लाभ मिला।


 शेष अन्य शिक्षक जो कि अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किए थे और पात्र भी थे इससे वंचित रह गए। कई शिक्षक इस जिले में पांच से 10 वर्ष तक कार्य कर चुके हैं, उनका स्थानांतरण नहीं करके अन्याय किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से 54 हजार शिक्षकों का अंतरजनपदीय स्थानांतरण की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के मंशा के विपरीत कार्य करते हुए सिर्फ 21694 शिक्षकों का ही स्थानांतरण किया गया। 


प्रदर्शन में मौजूद गीता निरंजन, बबीता, रीता, मीनाक्षी, दुर्गेश, ज्योति, डिंपल, कल्पना, रेनू सिंह का कहना था कि स्थानांतरण नहीं होने से हम सभी बेहद निराश एवं हताश हैं। इस दौरान भूमिका, पारुल, राखी तोमर, प्रतिभा, अनीता, कामिनी, कौशल्या, स्नेहलता, अर्चना चौधरी, शीला, पूनम आदि मौजूद रहां। स्थानांतरण के आकांक्षी शिक्षकों ने डीएम को दिए पत्र में कहा है कि अगर हम लोगों को लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तो जिले के सभी ब्लॉक, तहसील एयं बीएसए कार्यालय पर सोमवार से धरना प्रदर्शन करेंगे। जो स्थानांतरण की संशोधित सूचो जारी होने तक चलेगा।

Thursday, December 31, 2020

69000 भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में किया अर्धनग्न प्रदर्शन

69000 भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में  किया अर्धनग्न प्रदर्शन


परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर दिव्यांग अभ्यर्थियों का प्रदर्शन बुधवार को 17वें दिन बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर जारी रहा। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए ये दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अर्धनग्न प्रदर्शन किया। 


अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना 2018 में जारी की थी लेकिन इस भर्ती में केवल 3 फीसदी आरक्षण दिया गया है। उच्च गुणांक वाले दिव्यांग अभ्यर्थी जिन्होंने सामान्य श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों के समतुल्य या उनसे अधिक गुणांक अर्जित किया है उन्हें भी दिव्यांग श्रेणी में ही चयनित माना गया है, जो गलत है। 


दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की बची हुई सीटों को चलन क्रिया बाधित अभ्यर्थियों से भरने की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में बृजेश कुमार मौर्य, महावीर सिंह, अमरजीत सिंह, मनोज भारद्वाज, मुद्रिका यादव, उपेन्द्र मिश्रा आदि रहे। गुरुवार को कैंडल मार्च निकालेंगे।

Wednesday, December 30, 2020

साल के आखिरी दिन कैंडल मार्च की तैयारी, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर धरना जारी

साल के आखिरी दिन कैंडल मार्च की तैयारी, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर धरना जारी


69000 सहायक अध्यापक भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिए जाने के खिलाफ बेसिक शिक्षा परिषद पर दिव्यांगों का धरना लगातार 16 वें दिन भी जारी रहा। दिव्यांग अभ्यर्थियों की मांग है कि 2016 के आरपीडब्ल्यूडी ऐक्ट के अनुसार उन्हें शिक्षक भर्ती में चार फीसदी आरक्षण दिया जाए।


दिव्यांग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर को पत्थर गिरजाघर से सुभाष चौराहा सिविल लाइंस तक कैंडल मार्च निकालेंगे।


 अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन दे चुके हैं। उन्होंने दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनकी मांग पूरी करने का आश्वासन दिया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को समर्थन करने बालों में राष्ट्रीय दिव्यांग मोर्चा के लवलेश सिंह, सामाजिक एकता परिषद के ओम प्रकाश शुक्ल एवं श्रीनारायण यादव शामिल रहे।

Tuesday, December 29, 2020

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान


पुरानी पेंशन के स्थान पर शुरू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी और चिंता का सबब बन गई है। वेतन से उनका अंशदान तो कट रहा है। मगर सरकार का अंशदान नहीं जमा हो रहा है। पिछले 13 महीने से यह स्थिति बनी हुई। इसका कारण बजट की कमी बताया जा रहा है। सरकार के रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है।


जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। 


शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान नहीं जमा कर रही है। शिक्षकों के मुताबिक हर शिक्षक का सरकार पर एक-एक लाख रुपये बकाया है। उनके अनुसार अकेले बनारस में चार अरब रुपए का अंशदान चाहिए। एनपीएस के नियम के मुताबिक जबतक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी।

भविष्य में होगा नुकसान

एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

हर महीने चाहिए 25 करोड़

एक अनुमान के मुताबिक वाराणसी में जितने शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए प्रति महीने 25 करोड़ रुपए चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।

माध्यमिक विद्यालयों में भी यही समस्या

प्राथमिक के साथ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहां सोलह महीने से अंशदान न जमा होने की शिकायत है। पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने इस मुद्दे पर बात की थी। डीआईओएस ने भी बजट न होने की समस्या बताई थी।


'इस वित्तीय वर्ष में एनपीएस में अंशदान जमा करने के लिए बजट नहीं आया। इस बारे में शासन और शिक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा। एनपीएस में सरकारी अंशदान जमा जाएगा।' - अनूप मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा)


'सरकार शिक्षकों का बकाया एनपीएस नहीं देगी तो शिक्षक आंदोलन कर सकते हैं। एनपीएस की अपनी कटौती रोकवाने के लिए न्यायालय की शरण में जा सकते हैं। नई पेंशन योजना शिक्षकों को नुकसान पहुंचा रही है।' - शशांक कुमार पांडेय, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग

अयोध्या : परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा स्थगित, शासनादेश के विरुद्ध बताते हुए शिक्षक संघ द्वारा परीक्षा के औचित्य पर उठाया गया था सवाल

अयोध्या : परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा स्थगित, शासनादेश के विरुद्ध बताते हुए शिक्षक संघ द्वारा परीक्षा के औचित्य पर उठाया गया था सवाल


● जिलाधिकारी के निर्णय के बाद परीक्षा स्थगित

● परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा के औचित्य पर उठाया सवाल

● प्राथमिक शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी से की मुलाकात

● शासनादेश का अनुपालन कराए जाने की डीएम से मांग


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय ऑडिटर नीलमणि त्रिपाठी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी से मिलकर 30 दिसंबर को आयोजित की जाने वाली परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा के औचित्य पर सवाल उठाया है। फिलहाल जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेकर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। संघ ने इस सम्बंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है।


जिलाध्यक्ष श्री त्रिपाठी ने बताया कि आधारशिला ध्यानाकर्षण एवं शिक्षण संग्रह मॉड्यूल पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित किए जाने का मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया है। प्रतियोगिता ऐच्छिक होती है बाध्यकारी नहीं। बावजूद इसके जनपद में परिषदीय शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों की परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो कि शासनादेश के सर्वथा विपरीत है। 


उन्होंने बताया कि शासनादेश में यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी अपने स्तर पर किसी तरह की परीक्षा का आयोजन नहीं करा सकते। श्री त्रिपाठी ने कहा कि चयनित होकर आए योग्य शिक्षकों की परीक्षा कराया जाना समाज में शिक्षकों की छवि धूमिल करने वाला निर्णय है। जिसे निरस्त किया जाना चाहिए। जिला मंत्री अजीत सिंह ने कहा कि परिषदीय शिक्षकों का सेंटर प्राइवेट कॉलेजों में भेजकर परीक्षा कराया जाना अपमानजनक व निंदनीय है। प्रतिनिधिमंडल में जिला कोषाध्यक्ष वीरेंद्र भारती मौजूद रहे।

Tuesday, December 22, 2020

69000 शिक्षक भर्ती : 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे दो प्रदर्शनकारियों की हालत बिगड़ी


69000 शिक्षक भर्ती : 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे दो प्रदर्शनकारियों की हालत बिगड़ी

लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने को मांग कर रहे दो प्रदर्शनकारियों की तबीयत बुधवार को बिगड़ गई। 
एससीईआरटी कार्यालय पर 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, उनके पास खाने पीने तक के पैसे नहीं बचे हैं। कई साथी ठंड और बुखार से पीड़ित हैं। इनमें काफी अभ्यर्थी अपने बच्चों के साथ शामिल हैं। 

प्रदर्शन में उन अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन में प्राप्तांक अधिक भर दिए हैं। वे सुधार कर नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।


69000 भर्ती में नियुक्ति पत्र के लिए प्रदर्शन और जाम : पुलिस ने भांजी लाठी तो कई को लगी चोट


परिषदीय विद्यालयों के 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित रहने वाले अभ्यर्थियों ने सोमवार को निशातगंज स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एबं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी ) कार्यालय के पास प्रदर्शन कर रोड जाम कर दी। प्रदर्शकारी सुबह से शाम तक डटे रहे।


शाम को एक साथ निकलकर निशातगंज पुल पर जाम लगाने का प्रयास किया। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया। इसमें कई अभ्यर्थियों को चोटें भी आईं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान एक युवती की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। शाम में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्रदर्शनकारियों में जम्मू- कश्मीर से बीएड की डिग्री प्राप्त करने वाले और ज्यादा प्रातांक भरने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं।

Saturday, December 19, 2020

69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित अभ्यर्थियों ने निदेशालय घेरा, नियुक्ति पत्र मिलने तक आंदोलन का एलान

69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित अभ्यर्थियों ने निदेशालय घेरा, नियुक्ति पत्र मिलने तक आंदोलन का एलान


69000 शिक्षक भर्ती से वंचित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी, त्रुटि सुधार का मौका न मिलने तक आंदोलन


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित अभ्यर्थियों का प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। पुलिस ने उनको एससीईआरटी परिसर से हटाकर राजकीय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में भेज दिया। अभ्यर्थी प्राप्तांक ज्यादा भरने और मेल-फीमेल जैसी गड़बड़ियों को सुधारने की मांग कर रहे थे। अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक त्रुटि में सुधार का मौका नहीं मिलेगा और नियुक्ति पत्र जारी नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयोंमें 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रियासे वंचित रहे अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को एक बार फिर निशातगंज स्थित निदेशालय का घेराव किया। पिछले तीन दिनों से अभ्यर्थियों को एससीईआरटी से दूर रखा गया था।पुलिस कर्मियों ने उन्हें हटाने के लिए काफी मशक्कत की, पर वह नहीं मानें।


देर शाम पुलिस ने उन्हें इको गार्डन छोड़ दिया।अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें जान बूझकर भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है। कई अभ्यर्थियों के प्राप्तांक तो कई के जेडर के कॉलम में गलत लिख गया है। इसका तुरंत सुधार हो सकता है। सभी भर्ती परीक्षा पास हैंऔर मेरिट में हैं। वहीं, कई अभ्यर्थी प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिनकी बीएड की डिग्री जम्मू-कश्मीर की होने से बाहर है। अभ्यर्थियों ने बताया कि नियुक्ति पत्र मिलने तक वे आंदोलन करते रहेंगे।

Wednesday, December 16, 2020

SCERT निदेशालय के घेराव करने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास को 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा, मिला यह आश्वासन

SCERT निदेशालय के घेराव करने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास को 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा, मिला यह आश्वासन

69 हजार भर्ती में अभ्यर्थी के चयन के मामले में अंतिम फैसला शासन स्तर से - बेसिक शिक्षा मंत्री


प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में आवेदन करने वाले किसी अभ्यर्थी का चयन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के स्तर से निरस्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी बीएसए ने ऐसा कोई आदेश कर दिया है तो उसे निरस्त कर दिया जाएगा। इस मामले में अंतिम फैसला शासन स्तर से ही लिया जाएगा।

 यह बातें उन्होंने लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर धरना दे रहे अभ्यर्थियों से ही कहीं। उन्होंने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में आवेदन करते समय मूल प्रमाणपत्र से ज्यादा अंक भरने के मामले में संबंधित जिलों के बीएसए से रिपोर्ट मांगी है। इस प्रकरण में शासन स्तर पर एक-एक केस पर विचार करते हुए फैसला लिया जाएगा।

लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की काउंसिलिंग से वंचित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को निशातगंज स्थित एससीईआरटी निदेशालय का घेराव किया। अभ्यर्थी काफी देर तक प्रदर्शन करते रहे, मगर किसी अधिकारी ने बात नहीं सुनी। इस दौरान बेसिक शिक्षा निदेशालय व डायट कार्यालय पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। दोपहर तीन बजे चार घंटे बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को बस में भरकर ईको गार्डेन भेज दिया।


अभ्यर्थियों ने बताया कि विभाग ने उन लोगों को काउंसिलिंग में शामिल नहीं किया, जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन के समय अन्य अभ्यर्थियों की अपेक्षा ज्यादा अंक भर थे। न्यायालय ने सभी अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग में शामिल करने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि हमारे जैसे करीब छह सौ से सात सौ अभ्यर्थी हैं, जिन्हें मौका नहीं दिया जा रहा है। इतना ही नहीं 12 दिसंबर को अभ्यर्थन भी निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे में विभाग ऑनलाइन सुधार का मौका न देकर अभ्यर्थियों का भविष्य खराब करने पर उतारु है।


कुछ अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर पहुंच गए। यहां बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने उनसे मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शन अभ्यर्थियों को समझाते हुए कहा कि बीएसएस स्तर पर किसी का अभ्यर्थन निरस्त नहीं है। सभी मामलों को शासन स्तर पर देखा जा रहा है। जिन अभ्यर्थियों के मामले में कोई बड़ी कमी होगी, उन्हें सूचित कर दिया जाएगा।



लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की काउंसिलिंग से वंचित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को एससीईआरटी निदेशालय का घेराव किया। अभ्यर्थी काफी देर प्रदर्शन करते रहे, मगर किसी अधिकारी ने बात नहीं सुनी। चार घंटे बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को बस में भरकर ईको गार्डेन भेज दिया। अभ्यर्थियों ने बताया कि विभाग ने उन लोगों को काउंसिलिंग में शामिल नहीं किया, जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन के समय अन्य अभ्यर्थियों की अपेक्षा ज्यादा अंक भर थे।

Friday, December 4, 2020

अहम सवाल -बिना टैबलेट कैसे चेक होंगे अवकाश आवेदन? हेडमास्टरों का विरोध शुरू

अहम सवाल -बिना टैबलेट कैसे चेक होंगे अवकाश आवेदन?  हेडमास्टरों का विरोध शुरू



लखनऊ। अवकाश के नियमों के स्पष्टीकरण के बाद हेडमास्टरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापकों को अभी तक टैबलेट नहीं दिए गए हैं। ऐसे में वे रोज कहां देखेंगे कि किसी शिक्षक ने आवेदन किया है या नहीं? आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। सरकार ने शिक्षकों के चार आकस्मिक अवकाश को मंजूर नामंजूर करने की जिम्मेदारी हेडमास्टरों को सौंपी है। विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष तिवारी का कहना है कि प्रधानाध्यापकों के पास एंड्रायड फोन या लैपटॉप नहीं है।