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Monday, October 31, 2022

दारुल उलूम के मदरसे न मान्यता लेंगे न मदद

दारुल उलूम के मदरसे न मान्यता लेंगे न मदद

ये फैसले लिए गए

■ दारुल उलूम और इससे संबद्ध सभी मदरसे देश के किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं लेंगे

■ राज्य सरकार द्वारा कराए गए मदरसा सर्वे को सही ठहराया

■ मदरसों का दीनी पाठ्यक्रम नहीं बदलने का फैसला

■ कक्षा पांच तक स्कूली शिक्षा मदरसों में ही देने का निर्णय



सहारनपुर । देवबंद स्थित दारुल उलूम में रविवार को आयोजित राब्ता - ए मदारिस के सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि मदरसे किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं लेंगे, न ही उन्हें सरकारी मदद चाहिए। मदरसे अपना पाठ्यक्रम भी नहीं बदलेंगे, मगर बुनियादी तौर पर कक्षा पांच तक स्कूली शिक्षा मदरसों में देंगे। इस दौरान मदरसों की दिशा और दशा पर नौ सूत्री मांग पत्र भी रखा गया


सम्मेलन में देशभर के दारुल उलूम से संबद्ध तीन हजार मदरसा संचालकों ने भाग लिया। इस दौरान दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा, दारुल उलूम से संबद्ध मदरसा अपना पाठ्यक्रम नहीं बदलेंगे। हालांकि, बुनियादी तौर पर मदरसों की पढ़ाई में बुनियादी शिक्षा को भी शामिल किया जाएगा।

550 शिक्षकों को 16 वर्ष से वेतन का इंतजार, नियुक्ति गलत बताकर अध्यापकों को नहीं कर रहे भुगतान

550 शिक्षकों को 16 वर्ष से वेतन का इंतजार, नियुक्ति गलत बताकर अध्यापकों को नहीं कर रहे भुगतान

2006 दिसंबर में अनुदान सूची पर आए स्कूलों का हाल


प्रयागराज । प्रदेश के सैकड़ों सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के लगभग 550 शिक्षकों को 16 साल से वेतन मिलने का इंतजार है। प्रदेश सरकार ने दो दिसंबर 2006 को एक हजार स्कूलों को अनुदान सूची पर लिया था। मार्च 2007 तक वेतन भुगतान की कार्यवाही की गई लेकिन लगभग 550 शिक्षक, 250 लिपिकों और परिचारकों को वेतन भुगतान करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि उनकी नियुक्ति नियमावली के विपरीत है।


इनमें तकरीबन 350 शिक्षक ऐसे हैं जो 2006 में स्थायी मान्यता मिलने से पूर्व से नियुक्त हैं। विभाग का तर्क है कि इनकी चयन प्रक्रिया पूरी नहीं है, जबकि इनकी नियुक्ति सृजित पद पर प्रबंध समिति के प्रस्ताव पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने मान्य की है। बीपीएड, डीपीएड व सीपीएड प्रशिक्षण योग्यता वाले लगभग 50 और शिक्षा विशारद, बाम्बे आर्ट, पत्राचार बीएड आदि योग्यताधारी तकरीबन 150 शिक्षकों को भी वेतन नहीं मिल रहा है। विभाग का कहना है कि सेवा नियमावली में ये प्रशिक्षण मान्य नहीं है। 


यह मामला हाईकोर्ट भी गया जहां डिवीजन बेंच ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। उसके बाद यह प्रकरण विधान परिषद की आश्वासन समिति व विलंब समिति के पास गया। इन समितियों ने भी वेतन भुगतान का निर्णय दिया लेकिन इसके बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने वेतन भुगतान के लिए पहल नहीं की। 



30 प्रतिशत शिक्षक बगैर वेतन हो गए सेवानिवृत्त

वेतन का इंतजार कर रहे लगभग 550 शिक्षकों में से 30 प्रतिशत के  करीब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दर्जनों | कर्मचारी भी सेवा पूरी कर चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पिछले दो साल से सूचनाएं मांगी जा रही है लेकिन भुगतान नहीं हो रहा।


सभी का चयन प्रक्रिया पूरी करते हुए किया गया था। अनुदान सूची पर लेने के बाद नियमित वेतन भुगतान होना चाहिए। अफसरों की लापरवाही से सैकड़ों शिक्षकों को 16 साल से वेतन नहीं मिल सका है। - नन्द लाल त्रिपाठी, मंडलीय मंत्री, उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ

प्रशिक्षण : नहीं सुधर रहे हालात, कहीं रैनबसेरा में शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रेनिंग तो कहीं नेटवर्क गायब, अधिकतर खंड शिक्षा आधिकारी प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने में रहे फिसड्डी

प्रशिक्षण : नहीं सुधर रहे हालात, कहीं रैनबसेरा में शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रेनिंग तो कहीं नेटवर्क गायब, अधिकतर खंड शिक्षा आधिकारी प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने में रहे फिसड्डी


प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के शिक्षकों को पढ़ाने की नई-नई तकनीक सिखाने के लिए राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) प्रयागराज की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लेकिन पिछले दिनों दिया गया आनलाइन प्रशिक्षण अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया। आनलाइन प्रशिक्षण कहीं रैन बसेरा में चल रहा है तो कहीं नेटवर्क नहीं है। अधिकतर खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) ने प्रशिक्षण का संसाधन उपलब्ध नहीं करवाया है। इसलिए इसकी रिपोर्ट सीमैट निदेशक ने बेसिक शिक्षा के महानिदेशक को भेज दी है।


कोविड काल से आनलाइन होने लगा शिक्षकों का प्रशिक्षण

कोरोना काल से शिक्षकों का प्रशिक्षण आनलाइन होने लगा था, वह अभी चल रहा है। आनलाइन प्रशिक्षण के लिए सभी ब्लाक में कंप्यूटर, जनरेटर, वेब कैमरा, कालर माइक, ब्राडबैंड कनेक्शन आदि के लिए बीईओ को धनराशि दी गई थी। लेकिन अधिकतर ब्लाकों में बीईओ ने यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। चूंकि शिक्षकों को प्रशिक्षण लेना था इसलिए वह मोबाइल से आनलाइन ज़ुड़ रहे थे। सीतापुर के एक ब्लॉक में इतनी खामियां कि प्रशिक्षण निरस्त तक करने की सिफारिश की गई।



फीडबैक लिया तो मिली प्रशिक्षण में तमाम खामियां

पिछले हफ्ते प्रदेश के 75 जिलों के 725 ब्लाकों में 2,79,830 शिक्षक आनलाइन प्रशिक्षण ले रहे थे। सीमैट के निदेशक दिनेश सिंह ने आनलाइन प्रशिक्षण का फीडबैक लिया तो तमाम कमियां मिली। उन्होंने बताया कि अमेठी के संग्रामपुर ब्लाक में रैनबसेरा में आनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने से आगरा के खेरागढ़ ब्लाक के शिक्षक जुड़े ही नहीं। अलीगढ़ नगर क्षेत्र के शिक्षक वेब कैमरे के बजाय मोबाइल का प्रयोग कर रहे थे। वहां पर कालर माइक की व्यवस्था बीईओ ने नहीं करवाई थी।


ऐसे ही बिजनौर के जलीलपुर में ब्लूटूथ और कालर माइक की व्यवस्था नहीं थी। बहराइच के पयागरपुर में बैनर और चार्ट नहीं लगाया गया था। बलिया के सभी ब्लाकों में नेटवर्क की समस्या थी। गाजीपुर के करंडा में प्रशिक्षण की मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई और कासिमाबाद में बैठने की भी व्यवस्था नहीं थी। गाजियाबाद के लोनी में प्रतिभागियों का प्री टेस्ट नहीं कराया गया और मुरादनगर के प्रशिक्षण कक्ष में रोशनी की व्यवस्था नहीं थी।


गोरखपुर के भटहट में जनरेटर की व्यवस्था नहीं थी। लखनऊ के गोसाईगंज में ब्राडबैंड नहीं था और हाट स्पाट का प्रयोग किया जा रहा था। यहां पर प्रशिक्षण बीआरसी में न कराकर टीडीएल कालेज में करवाया जा रहा था। प्रयागराज के शंकरगढ़ में जेनरेटर होने के बावजूद नहीं चलाया गया। ऐसे ही लगभग सभी केंद्रों पर अव्यवस्था थी। बीईओ का अपेक्षित सहयोग न मिलने से प्रशिक्षण अव्यवस्थित है। यह रिपोर्ट 27 अक्टूबर को भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का संसाधन उपलब्ध न कराने वाले बीईओ के खिलाफ कार्रवाई होगी। 


ब्लॉक स्तर पर अनुश्रवण के दौरान पायी गयी कमियों का विस्तृत विवरण निम्नवत

सरकारी शिक्षकों के खाली पदों का ब्योरा तलब, लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी भर्ती की तैयारी, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में बड़ी संख्या में रिक्त पद

सरकारी शिक्षकों के खाली पदों का ब्योरा तलब, लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी भर्ती की तैयारी, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में बड़ी संख्या में रिक्त पद


उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पद 

■ बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 51 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त

■ राजकीय विद्यालयों में 7471 शिक्षकों के पद रिक्त, प्रवक्ता संवर्ग में 2215 और सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग में 5256 पद


योगी सरकार का दावा 

⚫ 01 लाख 64 हजार से अधिक शिक्षकों को दी तैनाती

⚫ 15 वर्षों में पूर्ववर्ती सरकारों ने माध्यमिक में 33 हजार शिक्षक भर्ती की


लखनऊ । सरकार लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों की 'भर्ती कर सकती है। शासन ने रिक्त पदों का ब्योरा तलब किया है। योगी सरकार अपने पिछले कार्यकाल में बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 1.20 लाख से अधिक सहायक अध्यापकों की भर्ती कर चुकी है। वहीं माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में 44 हजार से अधिक अध्यापकों को तैनाती दी है। 


विभागीय सूत्रों के मुताबिक फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग में 51 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं और राजकीय विद्यालयों में 7471 शिक्षकों के पद खाली हैं। वहीं प्रवक्ता के 2215 और सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग में 5256 पद खाली हैं। न्हीं पदों पर भर्तियां करने की तैयारी है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में शिक्षकों के खाली पदों पर नियुक्ति के आदेश दिए थे। अब तक प्रदेश में 1 लाख 64 हजार से अधिक अध्यापकों को तैनाती दी गई है। पिछले पांच वर्षों में अकेले सिर्फ माध्यमिक विद्यालयों में 44 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की है जबकि वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2017 के बीच पूर्ववर्ती सरकारों ने माध्यमिक विद्यालयों में 33 हजार शिक्षकों की 'भर्ती की थी। सरकारी व एडेड स्कूलों में 33 हजार से अधिक सहायक अध्यापकों, 6 हजार से अधिक प्रवक्ता और 800 से अधिक प्रधानाचार्यों की नियुक्ति की है।


पारदर्शी हुई भर्ती प्रक्रियाः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को शिक्षक भर्ती में लिखित परीक्षा को अनिवार्य किया। छात्र संख्या के मानक के आधार पर अध्यापकों को विद्यालय में तैनाती की व्यवस्था लगातार की जा रही है। सरकार ने पांच वर्षों में 1270 डायट प्रवक्ता, 34 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, 45 वरिष्ठ प्रवक्ता और 309 खंड शिक्षा अधिकारी तैनात किए हैं।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के पदोन्नत शिक्षकों की होगी ऑनलाइन तैनाती, शासन ने दी मंजूरी

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के पदोन्नत शिक्षकों की होगी ऑनलाइन तैनाती, शासन ने दी मंजूरी


लखनऊ। के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के पदोन्नत शिक्षकों, प्रधानाचार्यों की ऑनलाइन तैनाती होगी। शासन ने तैनाती प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही विभाग इसका कार्यक्रम जारी करेगा।


शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कहा है कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पदोन्नति पाने वाले प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता की मानव संपदा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की जाए। 


अपर माध्यमिक शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता ने बताया कि कार्यवाही चल रही है। जैसे ही तैयारी पूरी हागी, कार्यक्रम जारी कर दिया जाएगा। पदोन्नति पाकर तैनाती का जून से इंतजार कर रहे शिक्षकों में 143 महिलाएं व 239 पुरुष हैं।

बीएड की पूल काउंसलिंग सात नवंबर से, एक लाख सीटें भरने की योजना, सवा लाख से ज्यादा सीट्स अभी भी खाली

बीएड की पूल काउंसलिंग सात नवंबर से, एक लाख सीटें भरने की योजना, सवा लाख से ज्यादा सीट्स अभी भी खाली


बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय बीएड की पूल काउंसलिंग सात नवंबर से करवाने जा रहा है। इसकी तैयारियां चल रही हैं। प्रदेशभर के बीएड कॉलेजों में खाली सीटों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। करीब सवा लाख सीटें कॉलेजों में अभी खाली हैं, जिसमें एक लाख सीटें इस काउंसलिंग के जरिए भरने की योजना है।


विश्वविद्यालय की ओर से चार चरणों में बीएड की काउंसलिंग करवाई गई। पहले चरण की काउंसलिंग में लगभग 30 हजार विद्यार्थियों ने अभिलेख अपलोड किए। इसी तरह चार चरण की काउंसलिंग तक आंकड़ा एक लाख 17 लाख विद्यार्थियों का पहुंचा, जिन्हें कॉलेजों में सीटें आवंटित की गई हैं। कॉलेजों में सीटों की संख्या करीब ढाई लाख है। ऐसे में सवा लाख सीटों से अधिक खाली हैं।



बीएड की पूल काउंसिलिंग सात नवम्बर से, अभ्यर्थी बदल सकेंगे अपना कॉलेज

रुहेलखंड विश्वविद्यालय को पूल में एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद



बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय अब सात नवंबर से बीएड की पूल काउंसिलिंग कराने की तैयारी में जुट गया है। इसके जरिये विद्यार्थी कॉलेज की च्वॉइस बदल सकेंगे। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इसमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। आखिर में डायरेक्ट काउंसिलिंग होगी। इससे विद्यार्थी कॉलेजों में सीधे दाखिला ले सकेंगे। इसके लिए 560 रुपये शुल्क जमा करना होगा।


इस समय बीएड काउंसिलिंग का चौथा चरण चल रहा है, लेकिन काउंसिलिंग में करीब एक लाख विद्यार्थी ही शामिल हो पाए हैं। सात नवंबर से पूल काउंसिलिंग शुरू होगी, जो एक सप्ताह चलेगी। विश्वविद्यालय का तर्क है कि पिछले साल लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से बीएड की काउंसिलिंग कराई गई थी। शुरुआती चरण में काउंसिलिंग की रफ्तार धीमी रही, लेकिन पूल काउंसलिंग में काफी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। डायरेक्ट काउंसिलिंग का रिकॉर्ड भी एक लाख से अधिक का रहा था।


पूल काउंसलिंग सात नवम्बर से

पूल काउंसिलिंग सात नवंबर से होगी। इसमें विद्यार्थी कॉलेज च्वॉइस भी बदल सकते हैं। उम्मीद है कि विद्यार्थी इसमें बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। - प्रो. पीबी सिंह, राज्य समन्वयक, बीएड प्रवेश परीक्षा, रुहेलखंड विश्वविद्यालय

Sunday, October 30, 2022

बोर्ड परीक्षा में 21 तरह के दिव्यांगों को सहूलियत देगा यूपी बोर्ड

बोर्ड परीक्षा में 21 तरह के दिव्यांगों को सहूलियत देगा यूपी बोर्ड

परीक्षा में लेखक उपलब्ध कराने के साथ दिया जाएगा अतिरिक्त समय भी

दिव्यांगों की श्रेणी स्पष्ट करने को विद्यालयों में दिखाई गई आडियो वीडियो फिल्म


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) वर्ष 2023 की बोर्ड परीक्षा में तीन नहीं, बल्कि 21 तरह के दिव्यांगों को सहूलियत देगा। इसमें परीक्षार्थी को लेखक दिए जाने के साथ अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा, ताकि दिव्यांग भी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकें। दिव्यांगों को चिह्नित करने का कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया है।


दिव्यांगों को चिह्नित करने के लिए यूपी बोर्ड ने 15.56 मिनट की वीडियो फिल्म तैयार कर विद्यालयों को भेजी थी। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल के निर्देश पर प्रधानाचार्यों ने विद्यालयों में यह फिल्म विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को दिखाई, ताकि दिव्यांग बच्चों को भी सामान्य बच्चों की तरह शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। फिल्म में 21 तरह के दिव्यांग बच्चों की विशेषताओं को दिखाया और बताया गया है। फिल्म में बताया गया है कि दिव्यांग बच्चों के सम्मान के साथ जीने के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण कड़ी है। परिषद का मानना है कि दिव्यांगों  के जीवन निर्माण में शिक्षा मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। ऐसे जरूरतमंदों को लाभ प्रदान करने के लिए सरकार ने कुछ अक्षमताओं को मान्यता दी है।


दिव्यांगों की श्रेणी 

1 दृष्टिबाधित, 2. कम दृष्टि, 3. कुष्ठ रोग से ठीक हुए बच्चे, 4. श्रवण दोष, 5. लोको मोटर (एक जगह से दूसरी जगह जाने में कठिनाई), 6. बौनापन, 7. बौद्धिक अक्षमता, 8. मानसिक बीमारी या विकार, 9. आत्म केंद्रित स्पेक्ट्रम विकार यानी न्यूरोलाजिकल व विकासात्मक विकार, 10. सेरेब्रल पाल्सी, 11. मस्कुलर डिस्ट्राफी (मांसपेशी की कमजोरी), 12. पुरानी न्यूरोलाजिकल स्थितियां, 13. विशिष्ट सीखने की अक्षमता, 14. मल्टीपल स्क्लोरोसिस, 15. भाषण और भाषा विकलांगता, 16. थैलेसीमिया (रक्त विकार), 17. हीमोफीलिया, 18. सिकल सेल रोग (रक्त विकारों का समूह ), 19 बधिर सहित बहु दिव्यांगता, 20. एसिड अटैक पीड़ित, 21. परकिंसन रोग।


दिव्यांगों की श्रेणी के बारे में आडियो-वीडियो फिल्म में विस्तार से जानकारी दी गई है। बोर्ड परीक्षा फार्म भरे जाने के पूर्व फिल्म को विद्यालयों में दिखाया गया। अब तक चलने में अक्षम, दृष्टिबाधित एवं मूक बधिर को लेखक दिए जाने के साथ अतिरिक्त समय दिया जाता था, लेकिन वर्ष 2023 की बोर्ड परीक्षा में 21 तरह के दिव्यांगों को लेखक की सुविधा के साथ 30 मिनट अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा। -दिव्यकांत शुक्ल, सचिव यूपी बोर्ड ।

विद्यालयों में बाबुओं के पद खाली, नियुक्ति में मनमानी की छूट नहीं तो प्रबंधकों ने खींचा हाथ

विद्यालयों में बाबुओं के पद खाली, नियुक्ति में मनमानी की छूट नहीं तो प्रबंधकों ने खींचा हाथ


 भर्ती को तैयार नहीं स्कूल प्रबंधक

● प्रदेश के अन्य जिलों में भी लिपिक भर्ती की यही स्थिति



सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में बाबुओं की भर्ती में मनमानी पर रोक लगी तो प्रबंधकों ने पद खाली होने के बावजूद नियुक्ति से मुंह फेर लिया। प्रयागराज में ही 76 ब्वॉयज कॉलेजों में लिपिकों की सीधी भर्ती के 82 पद खाली हैं लेकिन प्रबंधकों ने मात्र 20 पर भर्ती की अनुमति मांगी है। बचे हुए 62 पदों पर नियुक्ति में प्रबंधक रुचि नहीं ले रहे। कई स्कूलों में दो-दो पद खाली हैं लेकिन एक पर भी नियुक्ति की अनुमति नहीं मांगी गई है। 


यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी बनी हुई है। शिक्षा निदेशालय को 1621 रिक्त पदों की सूचना मिली थी लेकिन जो हालात हैं इसमें पांच सौ पद भी भरना मुश्किल लग रहा है।




ऐसा इसलिए है क्योंकि नियुक्ति प्रक्रिया से प्रबंधकों को होने वाली लाखों रुपये की कमाई की गुंजाइश खत्म हो गई है। कुछ प्रबंधकों ने रिश्तेदारों की नियुक्ति का भरोसा दिलाया था लेकिन मनमानी नहीं कर पा रहे तो कुछ प्रबंधकों को लगता है कि भविष्य में नियमों में ढील मिलने पर मनमाफिक भर्ती कर लेंगे।


पहले प्रबंध समिति जिला विद्यालय निरीक्षकों के जरिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक से अनुमति लेकर बाबुओं के रिक्त पदों पर मनमानी नियुक्ति कर लेती थी। इसमें लाखों रुपये लेनदेन के आरोप लगते थे। इसके चलते सरकार ने 25 नवंबर 2021 को इंटरमीडिएट एक्ट 1921 में संशोधन करते हुए चयन प्रक्रिया का नये सिरे से निर्धारण कर दिया। 


नई नियमावली के अनुसार संबंधित विद्यालय के प्रबंधक की अध्यक्षता में चयन समिति गठित करने का प्रावधान है। इसमें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा में 50 एवं अधिक पर्सेंटाइल प्राप्त करने वाले 18 से 40 आयु के अभ्यर्थियों से ही आवेदन लिया जाएगा। एक पद के सापेक्ष पीईटी मेरिट के आधार पर दस अभ्यर्थियों को बुलाया जाएगा। शासन की ओर से संशोधित समय सारिणी के अनुसार 16 जनवरी तक बाबुओं की चयन प्रक्रिया पूरी होनी है।


जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक बालक विद्यालयों में लिपिकों के 82 पद खाली हैं। इसके सापेक्ष 20 पदों पर नियुक्ति की अनुमति मांगी गई है। पीएन सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयागराज

Saturday, October 29, 2022

22 वर्षों से क्यों नहीं भरा प्रधानाचार्य का पद❓ जिम्मेदारों पर कार्रवाई करके बताए सरकार, हाईकोर्ट ने कामचलाऊ व्यवस्था पर की कठोर टिप्पणी

22 वर्षों से क्यों नहीं भरा प्रधानाचार्य का पद❓ जिम्मेदारों पर कार्रवाई करके बताए सरकार, हाईकोर्ट ने कामचलाऊ व्यवस्था पर की कठोर टिप्पणी

 

प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के एक स्कूल में 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद खाली रहने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद क्यों खाली है। कोर्ट ने कहा, इस मामले में पूर्व में दाखिल याचिका में स्पष्ट आदेश दिया गया था। वहीं इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक ने हलफनामा दाखिल कर कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसके बावजूद यह पद खाली है।



कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव से गोरखपुर मंडल में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खाली पदों का विवरण हलफनामे पर मांगते हुए गोरखपुर के वर्तमान डीआईओएस ज्ञानेंद्र कुमार सिंह धुरिया और इसके पहले डीआईओएस रहे प्रदीप कुमार मिश्रा और सतीश के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा है।


यह जानकारी अपर मुख्य सचिव को 18 नवंबर को अगली सुनवाई पर हलफनामे के जरिए मुहैया करानी है। कोर्ट अगर इस हलफनामे पर संतुष्ट नहीं होती तो 19 नवंबर को अपर मुख्य सचिव को कोर्ट के समक्ष पेश होना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने गोरखपुर स्थित श्री गांधी इंटर कॉलेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


मामले में याची की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी ने कहा, कॉलेज में 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। इस बारे में स्कूल प्रशासन की ओर से कई बार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश को सूचित किया गया लेकिन, कोई कार्यवाही नहीं की गई। याची ने पहले भी याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को भरे जाने के लिए कार्यवाही की जा रही है। इसके बावजूद पद अब तक खाली है।


इससे स्कूल सही तरीके से अपना कार्य नहीं कर पा रहा है और याची को दोबारा याचिका दाखिल करनी पड़ी। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की ओर से दिए गए हलफनामे को देखते हुए तीखी नाराजगी जताते कहा कि शिक्षा समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा हुआ मुद्दा है।


लिहाजा शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बनाए जाने की जरूरत है, जिससे कि समाज लाभान्वित हो सके। कोर्ट ने मामले में अपर मुख्य सचिव और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए कुल चार मामलों में जानकारी देने को कहा है। 

निजी बैंक खातों में भेजी गई थी खेल किट की धनराशि, जांच में हुआ खुलासा, रकम हस्तांतरण के बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंची किट, जानिए किस जनपद का मामला

निजी बैंक खातों में भेजी गई थी खेल किट की धनराशि, जांच में हुआ खुलासा, रकम हस्तांतरण के बाद भी स्कूलों में नहीं पहुंची किट, जानिए किस जनपद का मामला



झांसी। पूर्व बीएसए वेदराम के खिलाफ खेल किट घोटाले की चल रही जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि पूर्व बीएसए ने सांठगांठ करके स्कूलों से खेल किट के नाम पर जारी रकम एक निजी खाते में जमा करा दी। बाद में यह पूरी रकम निकाल ली गई। इसी तरह कई स्कूलों के बैंक खाते में पैसा जमा कर देने के बावजूद भी उन तक खेल किट नहीं पहुंची। इन विद्यालयों ने भी पूर्व बीएसए के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं।


गत सत्र में परिषदीय स्कूलों में खेल किट खरीद का आदेश परिषद द्वारा जारी किया गया था। जिसमें प्राथमिक विद्यालय में खेल किट खरीद के लिए 5000 रुपये की धनराशि और उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय में खेल किट के लिए 10,000 रुपये की धनराशि भेजी गई थी। गरौठा विधायक जवाहर सिंह राजपूत की शिकायत पर खेल किट घोटाले की जांच शुरू हुई है। पूर्व बीएसए वेदराम पर आरोप हैं कि उन्होंने बदायूं की फर्जी फर्म से खेल किट खरीदने के लिए शिक्षकों पर दबाव बनवाया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खेल किट की खरीद के लिए धनराशि तो हस्तांतरित की थी, लेकिन कई स्कूल तक खेल किट पहुंचाई भी नहीं गई है।


जिन स्कूलों में खेल किट पहुंची है वह भी उस सूची के अनुसार नहीं है जो कि परिषद द्वारा जारी की गई थी। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि खेल किट की खरीद की धनराशि फर्म के नाम वाले बैंक खाते में हस्तांतरित न करवा कर निजी बैंक खाते में हस्तांतरित कराई गई थी। इसके अलावा इस मामले में एक खंड शिक्षा अधिकारी और एक लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। अपर जिलाधिकारी न्यायिक श्यामलता आनंद के मुताबिक मामले की पड़ताल की जा रही है, सभी पक्षों के बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। जल्द ही जांच पूरी हो जाएगी।

CTET 2022: आज से शुरू होगी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, ctet.nic.in पर करें अप्लाई

CTET 2022:  आज से शुरू होगी केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, ctet.nic.in पर करें अप्लाई


CTET 2022: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कल 31 अक्टूबर 2022 से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) दिसंबर 2022 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करेगा। सोमवार यानी 31 अक्टूबर को सीटीईटी के लिए रजिस्ट्रेशन सीटीईटी की वेबसाइट ctet.nic.in पर शुरू होगी। जो भी अभ्यर्थी 16वें सत्र की सीटीईटी में भाग लेना चाहते वे कल से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।


सीबीएसई की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, सीटीईटी 2022 के लिए आवेदन की लास्ट डेट 24 नवंबर 2022 रहेगी। वहीं अभ्यर्थी 25 नवंबर 2022 तक आवेदन शुल्क जमा करा सकेंगे।

सीटीईटी 2022 का अयोजन सीबीटी मोड से  दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के मध्य होगा। सीटीईटी परीक्षा की सही तिथि सीबीएसई की ओर से जारी होने वाली सीटीईटी एडमिट कार्ड पर मिलेगी।


सीटीईटी के लिए आवेदन शुल्क :
सीटीईटी में आवेदन करने वाले सामान्य, ओबीसी अभ्यर्थियों को पेपर-1 या पेपर-2 के लिए 1000 रुपए जमा कराने होंगे। वहीं दोनों पेपर के लिए 1200 रुपए जमा कराने होंगे। इसी प्रकार से एससी, एसटी व दिव्यांगों के लिए एक पेपर के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपए और दोनों पेपर के लिए 600 रुपए निर्धारित किए गए हैं।


सीटीईटी 2022 का विस्तृत बुलेटिन नोटिफिकेशन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जारी किया जाएगा। इस नोटिफिकेशन में अभ्यर्थियों को सीटीईटी का पाठ्यक्रम, भाषा, आवेदन योग्यता, परीक्षा शुल्क और परीक्षा शहरों आदि के बारे में सूचना दी जाएगी।




CTET 2022 : नई पात्रता मापदंडों के साथ आयोजित होगी परीक्षा, आवेदन से पहले रखें इन जरुरी बातों का ध्यान


CTET Exam 2022: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा सीटेट परीक्षा का आयोजन दिसंबर जनवरी माह में किया जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 31 अक्टूबर से शुरू की जाएगी तथा 24 नवंबर तक चलेगी. शिक्षक बनने की चाह रखने वाले देशभर के लाखों अभ्यर्थी इस बार सीटेट परीक्षा में शामिल होंगे। लिहाज़ा सीटीईटी परीक्षा के आवेदन से पहले अभ्यर्थीयो को कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है ताकि बाद में किसी भी समस्या का सामना ना करना पड़े। यहाँ हम CTET परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले ध्यान में रखने वाली ज़रूरी बातों के बारें में चर्चा करेंगें।



इस बार सीटीईटी परीक्षा में हुये है ये बड़े बदलाव


CBSE द्वारा इस बार CTET परीक्षा के पात्रता मापदंडो में कुछ बड़े बदलाव किए गए है। जैसा कि आप जानते है पहले सीटीईटी परीक्षा के लिए केवल वे अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकते थें, जिन्होंने अपना टीचिंग ट्रेनिंग कोर्स पूरा कर लिया हो। परंतु अब इन नियमो में बदलाव कर दिए गए है, जिसके अनुसार अब टीचर ट्रेनिंग कोर्स में प्रवेश लेने वाला कोई भी अभ्यर्थी सीटीईटी परीक्षा में शामिल हो सकता है, चाहें वो प्रथम वर्ष/ समेस्टर के छात्रा हो।


इस नए पात्रता मापदंड के सम्बंध में CBSE द्वारा विस्तृत नोटिस अधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर किया गया है।


आवेदन से पहले रखें इन बातों का ध्यान-

शिक्षक बनने के लिए देश के लाखों अभ्यर्थी सीटीईटी परीक्षा के लिए आवेदन करेंगें, परंतु परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थीयो को कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है जिसकी जानकारी नीचे दी गई है-


1. Language Selection (भाषा चयन)- सीटीईटी परीक्षा के लिए आवेदन करते समय अभ्यर्थी अक्षर भाषा चयन करने में गलती कर देते है। सीटीईटी परीक्षा में दो पेपर आयोजित किए जाते है और दोनो पेपर में आपको अपनी भाषा 1 तथा भाषा 2 का चुनाव करना होता है। इसीलिए आवेदन करने से पहले ही यह सुनिश्चत कर लेवें की आपको भाषा 1 तथा भाषा 2 में आपको क्या चुनना है।


2. Documents verification(दस्तावेज): परीक्षा के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थी को CBSE द्वारा जारी नोटिफ़िकेशन के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज को तैयार रखना चाहिए। 


3. Exam Center Choice Filling (परीक्षा केंद्र का चुनाव): सीबीएसई द्वारा सीटेट परीक्षा का आयोजन ऑनलाइन सीबीटी मोड में किया जाएगा लिहाजा परीक्षा अलग-अलग दिन कई शिफ्ट में आयोजित होगी, परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित किए जाएंगे। ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वह सीटेट परीक्षा के आवेदन के लिए अंतिम तिथि का इंतजार ना करें।


4 Link AdharCard with Mobile Number: सीटीईटी परीक्षा में आवेदन से पहले अभ्यर्थी को अपना मोबाइल नम्बर आधार कार्ड से लिंक करालेना चाहिए।

प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (UPCRAM) केंद्र की स्थापना

प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (UPCRAM) केंद्र की स्थापना


लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने और विश्व स्तरीय उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (उपक्रम) केंद्र की स्थापना की गई है।


 लखनऊ विश्वविद्यालय(लवि) में स्थापित किए गए इस प्रदेश स्तरीय केंद्र उपक्रम का महानिदेशक प्रो. प्नम टंडन को बनाया गया है। प्रो. टंडन लवि की ड्रीन स्टूडेंट वेलफेयर भी हैं। प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा डा. सुधीर एम. बोबड़े की ओर से उपक्रम केंद्र की 10 सदस्यीय कमेटी के गठन के आदेश जारी किए गए हैं।


 प्रो. टंडन के अलावा पीजीआइ लखनऊ के प्रो. आर हर्ष वर्धन को एक्रीडिटेशन का प्रमुख, लवि के प्रो. सत्येंद्र पाल सिंह को एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनेशनल) केजीएमयू के प्रो. आरके गर्ग को एसोसिएट डाक्टर (रिसर्च एंड इनोवेशन), लवि की प्रो. संगीता साहू को एसोसिएट डायरेक्टर (परसेप्शन), दीन दयाल उपाध्याय डा. अंकिता राज राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के प्रतिनिधि के रूप में और अभिज्ञान मिश्रा को सेक्टोरियल असिस्टेंट बनाया गया है।

पिछले हफ्ते ही इस केंद्र की स्थापना का राज्यपाल महोदया द्वारा उद्घाटन किया गया था।

बी एलर्ट ❗ मान्य नहीं है आनलाइन पीएचडी, न लें विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से पेश PhD कोर्सेस में दाखिला

बी एलर्ट ❗ मान्य नहीं है आनलाइन पीएचडी, न लें विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से पेश PhD कोर्सेस में दाखिला


नई दिल्‍ली: कोरोना संकट के बाद आनलाइन पढ़ाई कराने वाली कंपनियों की बाढ़ सी आई हुई है। नए -नए आनलाइन कोर्स छात्रों को आफर किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो सारे नियमों को ताक पर रखते हुए विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर आनलाइन पीएचडी कोर्स भी आफर करना शुरू कर दिया है। 


हालांकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऐसे मामलों के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों को सतर्क किया है और कहा कि आनलाइन पीएचडी मान्य नहीं है। इसलिए इस तरह के प्रस्तावों को गंभीरता से न लें और न ही भूलकर इनमें दाखिला लें।


शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के इस तरह के फर्जीवाड़े को लेकर यूजीसी के साथ- साथ एआइसीटीई ( आल इंडिया काउंसिल आफ टेक्नीकल एजुकेशन) ने भी छात्रों को अलर्ट किया है। उच्च शिक्षा से जुड़े इन नियामकों की ओर से शिक्षा से जुड़ी निजी कंपनियों के फर्जीवाड़े को लेकर इस साल में दूसरी बार ऐसा अलर्ट जारी किया गया है। शिक्षा से जुड़ी इन निजी कंपनियों की ओर देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कालेजों से संबद्धता लेकर आनलाइन कोर्स में दाखिले का प्रस्ताव दिया जा रहा था। यूजीसी ने उस समय भी साफ किया था कि कोई भी विश्वविद्यालय या कालेज से संबद्धता लेकर आनलाइन कोर्स नहीं संचालित हो सकते है।

Friday, October 28, 2022

राहत : विशेष शिक्षक बनने के लिए बीएड स्पेशल एजुकेशन की डिग्री अनिवार्य नहीं

राहत : विशेष शिक्षक बनने के लिए बीएड स्पेशल एजुकेशन की डिग्री अनिवार्य नहीं


नई दिल्ली। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने कहा है कि विशेष शिक्षक बनने के लिए बीएड स्पेशल एजुकेशन की डिग्री अनिवार्य नहीं है। सामान्य बीएड के साथ-साथ स्पेशल एजुकेशन में दो साल का डिप्लोमा या पीजी प्रोफेशनल डिप्लोमा धारक भी विशेष शिक्षक के योग्य हैं।


कैट के इस फैसले से दिल्ली समेत अन्य राज्यों में भी योग्य विशेष शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, क्योंकि स्पेशल एजुकेशन में बीएड डिग्री धारक योग्य प्रतिभागियों की कमी की वजह से भर्ती अधूरी रह जाती है। कैट के सदस्य आरएन सिंह और तरुण श्रीधर की पीठ ने विशेष शिक्षक नियुक्त करने की मांग को लेकर एक दृष्टिहीन युवक की याचिका पर यह फैसला पारित किया है। डीएसएसएसबी ने बीएड स्पेशल एजुकेशन की डिग्री न होने के कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया था।


अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड का आदेश रद्दः पीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के उस आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें बीएड (स्पेशल एजुकेशन) की डिग्री नहीं होने के चलते एक प्रतिभागी को विशेष शिक्षक की नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। पीठ ने कहा, विशेष शिक्षक बनने के लिए बीएड, सामान्य बीएड के साथ दो साल का डिप्लोमा, स्पेशल एजूकेशन में पीजी प्रोफेशनल डिप्लोमा में डिग्री या फिर मान्यता प्राप्त कोई अन्य डिग्री भी मान्य है।


भर्ती परीक्षा पास की है तो विशेष शिक्षक नियुक्त करें


नई दिल्ली। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने याचिकाकर्ता ठाकुर की उम्मीदवारी रद्द करने के डीएसएसएसबी के फरवरी, 2019 के आदेश रद्द कर दिया है । साथ, डीएसएसएसबी को आदेश दिया है। कि यदि याचिकाकर्ता भर्ती परीक्षा में पास हुआ है तो उसे विशेष शिक्षक नियुक्त किया जाए। इसके लिए पीठ ने डीएसएसएसबी को 8 सप्ताह का वक्त दिया है।


केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने कहा कि जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है तो इसमें याचिकाकर्ता के पास सामान्य शिक्षा में बीएड के साथ-साथ स्पेशल एजूकेशन में पीजी प्रोफेशनल डिप्लोमा की डिग्री भी है। ऐसे में याचिकाकर्ता विशेष शिक्षक बनने के लिए योग्य है। पीठ ने चंद्रकांत ठाकुर की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल द्वारा दाखिल याचिका पर यह फैसला दिया है। अग्रवाल ने याचिका में डीएसएसएसबी द्वारा 28 फरवरी, 2019 को जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी । 



यह है मामला

डीएसएसएसबी ने दिसंबर, 2017 में दिल्ली सरकार द्वारा संचालिक स्कूलों में मूक बधिर, दृष्टिहीन और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए शिक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन दिया था। इसमें याचिकाकर्ता चंद्रकांत ठाकुर ने भी आवेदन किया था। लेकिन फरवरी, 2019 में डीएसएसएसबी ने बीएड स्पेशल एजूकेशन की डिग्री नहीं होने के चलते चंद्रकांत ठाकुर को अयोग्य घोषित कर दिया था।


बोर्ड का आदेश रद्द

पीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के उस आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें बीएड (स्पेशल एजुकेशन) की डिग्री नहीं होने के चलते एक प्रतिभागी को विशेष शिक्षक की नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। पीठ ने कहा, विशेष शिक्षक बनने के लिए बीएड, सामान्य बीएड के साथ दो साल का डिप्लोमा या फिर मान्यता प्राप्त कोई अन्य डिग्री भी मान्य है।

बीएड काउंसिलिंग के चौथे चरण के लिए सीट अलॉटमेंट आज

बीएड काउंसिलिंग के चौथे चरण के लिए सीट अलॉटमेंट आज

लगभग 35 हजार विद्यार्थियों ने चौथे चरण के लिए अपलोड कराए अभिलेख


बरेली। बीएड काउंसिलिंग के चौथे चरण में लगभग 35 हजार विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। शुक्रवार  को सीटों का अलॉटमेंट होगा। उसके एक सप्ताह तक रुहेलखंड विश्वविद्यालय खाली और भरी सीटों का रिकॉर्ड तैयार करेगा। इसी के मुताबिक विद्यार्थियों को सात नवंबर से शुरू होने जा रही पूल काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाएगा।



रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से बीएड की काउंसिलिंग का पहला चरण 30 सितंबर से शुरू हुआ था। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक विद्यार्थियों ने अधिक रुचि नहीं दिखाई। यही कारण रहा कि लगभग 1.10 लाख ही विद्यार्थी काउंसलिंग में शामिल हो पाए जबकि चार लाख की रैंक तक के विद्यार्थियों को बुलाया गया था। विश्वविद्यालय इसके कारण तलाश रहा है। 


अब चौथा चरण भी पूरा होने के बाद पूल काउंसलिंग की तैयारी है जिसके जरिए खाली सीटों को भरने की कोशिश की जाएगी। राज्य समन्वयक प्रो. पीबी सिंह का कहना है कि शुक्रवार को सीटों का अलॉटमेंट होगा और उसके बाद सभी सीटों की स्थिति एजेंसी बताएगी। खाली सीटों के लिए पूल काउंसलिंग होगी। 

पीएम श्री स्कूल : 17 राज्यों ने भरी हामी, करीब 2.72 लाख स्कूल मापदंडों के तहत शॉर्टलिस्टेड

पीएम श्री स्कूल : 17 राज्यों ने भरी हामी, करीब 2.72 लाख स्कूल मापदंडों के तहत शॉर्टलिस्टेड 



नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, असम, गुजरात, कर्नाटक समेत 17 राज्यों ने पीएम श्री स्कूल ( पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया ) योजना में शामिल होने को लिखित हामी भर दी है। 



केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से हर ब्लॉक से दो सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल का दर्जा देने की चयन प्रक्रिया के लिए छह बिंदुओं का 153 अंकों का मापदंड तैयार किया है।


 फिलहाल करीब 2.72 लाख स्कूल इन मापदंडों के तहत शार्टलिस्टिड किये गए हैं। दूर-दराज, ग्रामीण, पिछड़े इलाकों के स्कूली छात्रों को भी महानगरों के बड़े निजी स्कूलों की तर्ज पर इन पीएम श्री स्कूलों में सुविधाएं मिलेंगी। 


खास बात यह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर आधारित अनिवार्य पाठ्यक्रम, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, अच्छे ट्रेनिंग प्राप्त शिक्षक, लर्निंग आउटक्रम, वोकेशनल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप की सुविधा मिलेगी।

परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र का आधा साल बीता, तिमाही परीक्षा का पता नहीं

परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र का आधा साल बीता, तिमाही परीक्षा का पता नहीं


लखनऊ । परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र शुरू हुए सात माह बीत गए लेकिन त्रैमासिक परीक्षा का अंतिम कार्यक्रम अभी तक जारी नहीं हुआ है।



परीक्षा सितम्बर में प्रस्तावित थी। अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षा का कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। 


परिषदीय स्कूलों के बच्चे व शिक्षक परीक्षा के इंतजार में हैं।  शिक्षक त्रैमासिक परीक्षा का पाठ्यक्रम पूरा करा चुके हैं। पूर्व में प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के शिक्षकों को त्रैमासिक परीक्षाएं सितम्बर में कराने के लिए कहा गया था। विभाग के जिम्मेदारों को कुछ पता नहीं है। त्रैमासिक परीक्षा न होने से छमाही परीक्षा पर भी संकट गहरा गया है। 

लाखों हैं बेरोजगार और शिक्षक साथी खोज रही यूपी सरकार, 63 हजार से अधिक बेसिक शिक्षकों के पद अभी भी हैं खाली

लाखों हैं बेरोजगार और शिक्षक साथी खोज रही यूपी सरकार,  63 हजार से अधिक बेसिक शिक्षकों के पद अभी भी हैं खाली


प्रयागराज । ऐसे समय में जबकि लाखों प्रशिक्षित बेरोजगार नौकरी के लिए सड़क की ठोकरें खा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सरकार शिक्षक साथी के रूप में सेवानिवृत्त हो चुके स्वयंसेवी लोगों को खोज रही है। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में पिछली बार लगभग चार साल पहले पांच दिसंबर 2018 को 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए शासनादेश जारी हुआ था। उसके बाद से बेरोजगार अभ्यर्थी लगातार शिक्षक भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे हैं।


विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने सहायक अध्यापकों के 16 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की घोषणा की थी लेकिन भर्ती शुरू नहीं हो सकी। इस सत्र में अभियान चलाकर कक्षा एक से आठ तक में बच्चों का दाखिला कराया गया है। इस बार 1.50 लाख से अधिक परिषदीय स्कूलों में तकरीबन दो करोड़ बच्चों का प्रवेश हुआ लेकिन शिक्षक भर्ती की कोई चर्चा नहीं है, जबकि सरकार ने स्वयं विधानसभा में स्वीकार किया है कि ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्कूलों में 51,112 और नगर क्षेत्र के स्कूलों में 12,149 पद खाली हैं।


शिक्षक साथी के चयन के लिए विज्ञापन की तैयारी

परिषदीय स्कूलों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में शिक्षक साथी के चयन के लिए जिले में जल्द विज्ञापन जारी होगा। सीडीओ की अध्यक्षता में चयन समिति का गठन हो चुका है। प्रमुख सचिव दीपक कुमार की ओर से 28 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार 28 अक्तूबर तक शिक्षक साथियों का चयन होना था लेकिन त्योहार के कारण देरी हो गई। शिक्षक साथी के रूप में ऐसे लोगों का चयन होगा जिसे परिषदीय स्कूल में कम से कम पांच साल शिक्षण का अनुभव हो।

तकनीक के भंवर में फंसा लखनऊ मण्डल के परिषदीय स्कूलों के बच्चों का का परिणाम, छात्रों से लेकर अभिभावक तक कर रहे इंतजार

तकनीक के भंवर में फंसा लखनऊ मण्डल के परिषदीय स्कूलों के बच्चों का का परिणाम, छात्रों से लेकर अभिभावक तक कर रहे इंतजार


लखनऊ । बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित स्कूलों में बच्चों के ज्ञान का परीक्षण करने के लिए निपुण की ओएमआर आधारित परीक्षा हुई थी। परीक्षा के बाद अभी तक तकनीकी दिक्कत बनी हुई है। इसकी वजह से जिले में कितने बच्चे निपुण हैं, इसका परीक्षण नहीं हो पाया है। बच्चों से लेकर उनके अभिभावक, शिक्षक और स्कूल सभी इसका इंतजार कर रहे हैं।


18 अक्टूबर को प्रदेश भर में बेसिक शिक्षा की ओर से निपुण की परीक्षा हुई। इस परीक्षा के माध्यम से यह देखा जा रहा है कि कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों में गणितीय ज्ञान, भाषा का ज्ञान कितना है। लखनऊ में हुई इस परीक्षा में कक्षा एक से पांचवीं तक के 65,930 बच्चों ने परीक्षा दी थी। जबकि छठी से आठवीं तक 21 हजार से अधिक बच्चों की परीक्षा हुई थी।


इसमें एक से तीसरी कक्षा के बच्चों की परीक्षा भी ओएमआर आधारित हुई थी। बच्चे ओएमआर नहीं भर पाए थे, इसकी वजह से शिक्षकों ने ओएमआर भरवा कर इनकी परीक्षा कराई थी। बेसिक शिक्षा के अधिकारियों ने परीक्षा के बाद सरल एप पर सभी ओएमआर को अपलोड करने के लिए कहा था।


सरल एप के माध्यम से ही रिजल्ट घोषित किया जाना था, लेकिन अभी तक इसका रिजल्ट नहीं जारी हो पाया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी अरुण कुमार का कहना है कि तकनीकी एरर की वजह से सरल एप पर सभी ओएमआर अभी अपलोड नहीं हो पाए हैं। ओएमआर अपलोड होने के बाद रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।


निपुण के परिणाम पर बच्चों का भविष्य : निपुण अभियान के तहत बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अंदर कौशल की जांच करना है। इसमें कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के लिए गणित, भाषा, सामान्य कौशल में एक सीमा निर्धारित की गई है। जिसमें यह देखना है कि उक्त कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों में उतनी जानकारी है या नहीं। निर्धारित मानक पर 70 फीसद से अधिक अंक पाने वाले बच्चे सफल माने जाएंगे। शेष बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए फिर से परीक्षा कराई जाएगी।

Thursday, October 27, 2022

बीटेक के विद्यार्थियों को अब हिंदी में मिलेंगी पुस्तकें, नए सत्र में AICTE से अनुवादित पुस्तकें उपलब्ध करा रहा AKTU

बीटेक के विद्यार्थियों को अब हिंदी में मिलेंगी पुस्तकें

नए सत्र में AICTE से अनुवादित पुस्तकें उपलब्ध करा रहा AKTU 

15 नवंबर से बीटेक प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी




नई शिक्षा नीति के तहत बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को इस सत्र से तकनीकी विषय को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी पढ़ने का मौका मिलेगा। डा. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) और संबद्ध तकनीकी कालेजों में विद्यार्थियों को तकनीकी विषयों की हिंदी में लिखी पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। एआइसीटीई की ओर से तैयार कराई गई हिंदी माध्यम की पुस्तकों को एकेटीयू मंगा रहा है । एकेटीयू पुस्तकें हिंदी में लिखने के लिए अपने शिक्षकों को दो लाख रुपये की ग्रांट भी दे रहा है।


नई शिक्षा नीति के तहत बीटेक की पढ़ाई अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी होगी। इसके लिए सभी कालेजों के शिक्षकों से अपेक्षा की गई है। कि सत्र शुरू होने पर वे कक्षा में छात्रों को पढ़ाते समय तकनीकी शब्दावली भले ही अंग्रेजी में बताएं, लेकिन विषय हिंदी में समझाएंगे। बीटेक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी प्रश्नपत्र दिए जाएंगे। वे किसी भी भाषा में उत्तर लिख सकेंगे।


एकेटीयू के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने बताया कि 15 नवंबर से बीटेक की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी है। इस सत्र से बीटेक की पढ़ाई अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी कराई जाएगी। इसमें टर्म अंग्रेजी में ही होंगे, लेकिन पढ़ाने और समझाने का तरीका हिंदी में होगा । एआइसीटीई और मप्र तकनीकी संस्थान से हिंदी माध्यम में तैयार की गई पुस्तकों को छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा। 


एआइसीटीई ने हिंदी में तकनीकी विषयों की पुस्तक लिखने और अनुवाद के लिए एकेटीयू, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी दी है। 


कुलपति का कहना है कि हिंदी में बीटेक की पढ़ाई का मतलब यह नहीं है कि विद्यार्थियों की अंग्रेजी या तकनीकी ज्ञान कमजोर होगा। हिंदी में जो पुस्तकें तैयार हो रहीं हैं, उसमें टर्म अंग्रेजी में है। विषय को समझाने की प्रक्रिया हिंदी में है। इससे हिंदी माध्यम के विद्यार्थी तकनीकी विषय को आसानी से समझ लेंगे।

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशें विवादों में फंसी रह गईं। इसका नतीजा है कि लाखों बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के मानकों के अनुरूप शिक्षा नहीं मिल पा रही। कहीं अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किए गए परिषदीय स्कूलों में अंग्रेजी भाषा के योग्य शिक्षक नहीं मिले तो कहीं शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हो पा रही।



बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी माध्यम से संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों को तीन साल बाद भी योग्य शिक्षक नहीं मिल सके हैं। प्रदेशभर के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में योग्य शिक्षकों की तैनाती के लिए मार्च 2019 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन प्रयागराज, लखनऊ, मथुरा, फतेहपुर व बदायूं आदि 13 जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हुई और उसके बाद मध्य सत्र में तैनाती पर रोक लगा दी गई। उसके बाद कोरोना के कारण सबकुछ ठप रहा। इस मसले पर कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी की जो लंबित हैं।


प्रयागराज के अंग्रेजी माध्यम परिषदीय विद्यालयों में 500 से अधिक शिक्षकों के चयन के लिए 25 मार्च 2019 तक आवेदन लिए गए थे। 16 मई को लिखित परीक्षा हुई। 26 जून से एक जुलाई तक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ। 31 अगस्त और एक सितंबर 2019 को विद्यालय के विकल्प भरवाए गए। लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।



कई साल से प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति नहीं

परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पिछले चार सालों से फंसी है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में हर साल प्रदेश सरकार प्रधानाध्यापकों की तैनाती का प्रस्ताव रखती है लेकिन उस पर अमल नहीं हो पा रहा। 


इन स्कूलों में पदोन्नति के आधार पर प्रधानाध्यापकों की तैनाती की जाती है लेकिन पांच साल पहले कुछ शिक्षकों ने प्रमोशन में टीईटी अनिवार्य करने को लेकर याचिका कर दी थी। उस विवाद को लेकर जारी आदेश पर आज तक निबटारा नहीं हो सका है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 44378 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 75 प्रतिशत या 30 हजार से अधिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापक नहीं है। प्रमोशन न होने से प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, शिक्षकों की नई भर्ती में भी अड़चन आ रही है।


कस्तूरबा विद्यालयों में संगत-असंगत विषय का विवाद

प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भी शिक्षकों की नियुक्ति फंसी हुई है। संगत-असंगत विषय को आधार बनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने 14 जुलाई 2020 को सैकड़ों संविदा शिक्षकों को बाहर करने का आदेश जारी किया था। अफसरों का तर्क था कि कस्तूरबा विद्यालयों में एक विषय की एक से अधिक शिक्षिकाएं होने के साथ ही जो विषय नहीं है उसके टीचर नियुक्त कर लिए गए थे।


 इस आदेश के खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 21 दिसंबर 2021 को 14 जुलाई 2020 के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ अफसरों ने स्पेशल अपील की जो 18 अप्रैल को खारिज हो गई। अब इसके खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। इसके चलते अकेले प्रयागराज में 56 शिक्षिकाओं की नियुक्ति सवा साल से नहीं हो पा रही।

यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्र बनने वाले विद्यालयों की छात्राओं को मिलेगी स्वकेंद्र की सुविधा, जानिए कौन से विद्यालय बन सकेंगे केन्द्र

परीक्षा केंद्र बनने वाले विद्यालयों की छात्राओं को मिलेगी स्वकेंद्र की सुविधा, जानिए कौन से विद्यालय बन सकेंगे केन्द्र 


लखनऊ : यूपी बोर्ड की वर्ष 2023 की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षाओं में शामिल होने जा रहीं शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की संस्थागत व व्यक्तिगत छात्राओं का विद्यालय यदि परीक्षा केंद्र बनेगा तो उन्हें स्वकेंद्र परीक्षा की सुविधा मिलेगी। वहीं जिन छात्राओं व दिव्यांग परीक्षार्थियों को स्वकेंद्र की सुविधा नहीं मिलेगी, उनका परीक्षा केंद्र पांच किलोमीटर की परिधि में आवंटित किया जाएगा। इसी तरह छात्रों का परीक्षा केंद्र उनके विद्यालय से यथासंभव पांच से दस किमी. की परिधि में होगा। यदि दस किमी. में विद्यालय नहीं है तो छात्र का विद्यालय से 15 किमी. की परिधि में स्थित नजदीकी विद्यालय में परीक्षा केंद्र होगा।


इसके अलावा 40 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता वाले छात्र, छात्राओं को भी यदि उनका विद्यालय केंद्र होगा तो परीक्षण के बाद स्वकेंद्र परीक्षा की अनुमति मिलेगी। अन्यथा ऐसे दिव्यांग छात्र, छात्राओं को नजदीकी परीक्षा केंद्र में समायोजित किया जाएगा।परीक्षा केंद्र निर्धारण से जुड़े उक्त निर्देश शासन ने यूपी बोर्ड की परीक्षा 2023 के लिए केंद्र निर्धारण प्रक्रिया की नीति जारी कर दिए हैं। नीति में परीक्षा केंद्र के चयन से लेकर निर्धारण व आवंटन तक की प्रक्रिया घोषित की गई है। इसके तहत केंद्रों का निर्धारण ऑनलाइन व्यवस्था से किया जाएगा।


 इसके लिए राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों व वित्तविहीन विद्यालयों की अलग-अलग मेरिट तैयार की जाएगी। निर्देशों के तहत विषम भौगोलिक परिस्थिति व विद्यालय की अनुपलब्धता को देखते हुए हाईस्कूल के परीक्षार्थियों को कम दूरी वाले निकटस्थ केंद्र पर व इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों को दूर का निकटस्थ परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाएगा।


ऐसे विद्यालय ही बनेंगे केंद्र


🔴 परीक्षा केंद्र बनने वाले विद्यालय में प्रवेश द्वार से लेकर प्रत्येक शिक्षण कक्ष, स्ट्रांग रूम आदि में वायस रिकार्डर युक्त सीसीटीवी कैमरा व 30 दिन की रिकार्डिंग क्षमता वाला डीवीआर जरूरी होगा। साथ ही वेबकास्टिंग से मॉनीटरिंग के लिए राऊटर डिववाइस व हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन अनिवार्य होगा।

🔴 केंद्र पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए दो डबल लॉक अलमारी व उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा के लिए दो लोहे की डबल लॉक अलमारियों सहित स्ट्रॉग रूम की उपयुक्त व्यवस्था अनिवार्य होगी।

🔴 केंद्र के चारों ओर सुरक्षित चहारदीवारी व मुख्य प्रवेश द्वार पर लोहे के गेट की व्यवस्था जरूरी होगी।

🔴 राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को छोड़कर बाकी केंद्र बनने वाले विद्यालय तक जाने वाले मार्ग की चौड़ाई दस फीट से कम न हो। ताकि वहां आसानी से पहुंचा जा सके।

🔴 मान्यता पत्र जारी के बाद जिस विद्यालय के परीक्षार्थी कम से कम दो वैध परिषदीय परीक्षाओं में शामिल हो चुके हों, वे ही विद्यालय केंद्र बन सकेंगे। राजकीय विद्यालयों को इस शर्त से छूट रहेगी।

🔴 विद्यालय में स्थाई विद्युत व्यवस्था हो। साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जेनरेटर व इनवर्टर हो।

🔴 एक ही प्रबंधक द्वारा संचालित एक से अधिक विद्यालयों के छात्र/छात्राओं का परीक्षा केंद्र उसी प्रबंधक के अधीन संचालित अन्य विद्यालय में आवंटित नहीं होगा।


ऐसे होगी केंद्र व्यवस्थापक व कक्ष निरीक्षकों की तैनाती


🔵 जिन विद्यालयों की छात्राओं को स्वकेंद्र सुविधा मिलेगी, वहां केंद्र व्यवस्थापक के साथ 50 फीसदी बाहरी स्टाफ ड्यूटी करेगा।

🔵 प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर अनिवार्य रूप से एक बाह्य केंद्र व्यवस्थापक की नियुक्ति होगी जो जो किसी राजकीय या अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय का वरिष्ठ व अनुभवी शिक्षक होगा।

🔵 जिन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र निर्धारित किया जाए उनमें विद्यालय के प्रधानाचार्य यदि डिबार नहीं किए गए हैं तो वे केंद्र व्यवस्थापक के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। वहीं जो प्रधानाचार्य डिबार हैं, वहां राजकीय या अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक को केंद्र व्यवस्थापक व बाह्य केंद्र व्यवस्थापक भी नियुक्त किया जाएगा।

🔵 किसी भी दशा में केंद्र में परीक्षाएं खुले में नहीं होंगी। साथ ही एक ही प्रबंधतंत्र के अधीन निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर उसी प्रबंधतंत्र द्वारा संचालित अन्य विद्यालयों के शिक्षकों की कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी नहीं लगेगी।


परीक्षा केंद्र निर्धारण की टाइम लाइन


🟣 क्रेंद्र निर्धारण के लिए विद्यालयों की अवस्थापना व संसाधन की सूचना यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर 22 अक्तूबर तक अपलोड करनी होगी।

🟣 विद्यालयों के बीच दूरी संबंधी जियो लोकेशन की सूचना विद्यालय प्रांगण से मोबाइल एप पर 28 अक्तूबर तक अपलोड की जाएगी।

🟣 जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति द्वारा भौतिक सत्यापन 18 नवंबर तक कराया जाएगा। वहीं समित की सत्यापन की आख्या 25 नवंबर तक वेबसाइट पर अपलोड होगी।

🟣 ऑनलाइन विधि से चयनित परीक्षा केंद्रों की सूची जिला समिति के अवलोकनार्थ वेबसाइट पर 8 दिसंबर तक अपलोड होगी।

🟣 छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाचार्य व प्रबंधकों से आपत्तियां 14 दिसंबर तक मांगी जाएंगी। वहीं आपत्तियों का निस्तारण करके आख्या, संस्तुति 20 दिसंबर तक जिला समिति ऑनलाइन अग्रसारित करेगी।

🟣 परीक्षा केंद्रों को लेकर यदि दोबारा किसी को आपत्ति है तो वह 31 दिसंबर तक परिषद की ई मेल पर आपत्ति भेज सकेगा।

🟣 आपत्तियों के बाद परीक्षार्थियों के आवंटन संग परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची 7 जनवरी को परिषद की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।

🟣 प्रबंधतंत्र व प्रधानाचार्य के बीच विवाद वाले स्कूल नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र



प्रदेश में यूपी बोर्ड के जिन वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधतंत्र व प्रधानाचार्य के बीच विवाद होगा, उस विद्यालय को वर्ष 2023 में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। यहीं नहीं जिन अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों में प्रबंधकीय विवाद है और वहां नियमानुसार प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त नहीं है, उन्हें भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।


बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के प्रधानाचार्य केंद्र निर्धारण के लिए जरूरी सूचनाएं समय से अपलोड नहीं करेंगे और गलत सूचनाएं देंगे, उनके विद्यालय को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। साथ ही ऐसे प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही प्रबंधतंत्र को भी उत्तरदायी माना जाएगा। नकल, पर्चा आउट, हंगामे की घटनाओं में लिप्त रहे या डिबार विद्यालय केंद्र नहीं बनेंगे। 


वित्तविहीन जिन विद्यालयों के परिसर में प्रबंधक, प्रधानाचार्य आवास या छात्रावास हैं, उन्हें भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। किसी विद्यालय के प्रवेश द्वार, शिक्षण कक्ष आदि के ऊपर से कोई हाईटेंशन बिजली लाइन गई है तो उन्हें भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। एक पाली में एक पाली में 125 से कम धारण क्षमता वाले निजी विद्यालय भी परीक्षा केंद्र नहीं बनेंगे।


इन पर भी होगा प्रतिबंध


🟤 वर्ष 2022 की परीक्षा में जिन वित्तविहीन विद्यालयों में पंजीकृत परीक्षार्थियों के सापेक्ष पूरी बोर्ड परीक्षा में गैर हाजिर रहने वाले परीक्षार्थियों का कुल प्रतिशत 30 प्रतिशत या अधिक रहा है, वह केंद्र नहीं बनेंगे।

🟤 जिन वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के कुल पंजीकृत परीक्षार्थियों की संख्या 80 से कम होगी, उन्हें भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।


जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगी जिला समिति

परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए जिले स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति होगी। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक/ पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिले के दो वरिष्ठ प्रधानाचार्य व संबंधित सब डिवीजन के उप जिलाधिकारी सदस्य होंगे। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक सदस्य सचिव होंगे।

Wednesday, October 26, 2022

यूनिवर्सिटी पाठ्यक्रम में अनिवार्य होगा साइबर क्राइम का विषय

यूनिवर्सिटी पाठ्यक्रम में अनिवार्य होगा साइबर क्राइम का विषय

UG और PG में साइबर सुरक्षा की पढ़ाई अनिवार्य, ऐसा होगा पाठ्यक्रम


नई दिल्ली। देश के सभी  शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई अनिवार्य होगी । 


स्नातक प्रोग्राम में साइबर सिक्योरिटी का बेसिक और मिड लेवल का कोर्स पढ़ाया जाएगा, जिसमें चार क्रेडिट होंगे। स्नातकोत्तर प्रोग्राम में मिड लेवल और एडवांस लेवल की पढ़ाई करनी होगी, जिसके चार क्रेडिट होंगे। 


इसका मकसद, डिजिटल शिक्षा के दौर में छात्रों को साइबर ठगी के प्रति सावधान करना और तकनीकी ज्ञान देना और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना है । इसमें साइबर सुरक्षा के लीगल, सामाजिक, आर्थिक पहलु से भी अवगत करवाया जाएगा।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि छात्रों को साइबर ठगी के प्रति सावधान करना और तकनीकी ज्ञान देना मकसद है। सूचना प्रौद्योगिकी में आई क्रांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों की बढ़ती मांग को देखते हुए साइबर सुरक्षा की सख्त महसूस की जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रही बढ़ोतरी ने बेहद जटिल सवाल खड़े किए हैं। 



ऐसा होगा पाठ्यक्रम

यूजी प्रोग्राम में लैक्चर, ट्यूटोरियल, प्रैक्टिकल प्रैक्टिस के आधार पर चार क्रेडिट मिलेंगे। इसमें साइबर सुरक्षा की सामान्य जानकारी, साइबर क्राइम और साइबर लॉ, सोशल मीडिया और सुरक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल पैमेंट, साइबर सुरक्षा में डिजिटल उपकरण और तकनीक आदि के बारे में पढ़ाया जाएगा। वहीं, स्नातकोत्तर प्रोग्राम में साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट, डाटा प्राइवेसी और डाटा सिक्योरिटी, साइबर लॉ, साइबर क्राइम आदि के बारे में पढ़ाया जाएगा।

Tuesday, October 25, 2022

छात्राओं की सुरक्षा को UGC के नए नियम, 14 नवम्बर तक मांगे सुझाव

छात्राओं की सुरक्षा को UGC के नए नियम, 14 नवम्बर तक मांगे सुझाव


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी)ने उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए दिशा निर्देश बनाए हैं साथ ही 14 नवंबर तक सुझाव भी मांगे हैं।



यूजीसी के सचिव प्रो. राजनीश जैन द्वारा जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के समय पुस्तिका दी जाए जिसमें व्यवहार और आचरण को लेकर नियम और जानकारी लिखी हो। इसके साथ ही छात्रों की मनोवैज्ञानिक एवं भावनात्मक चिंताओं को ध्यान में रखते हुए परिसर में काउंसलिंग सेवा भी होनी चाहिए।


इसके अलावा महिलाओं के लिये स्वच्छता एवं साफ सफाई सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाए। सुरक्षित परिवहन, कालेज आने जाने वाले रास्तों पर प्रकाश की उचित व्यवस्था एवं फीडर बसों की सुविधा हो और महिला सुरक्षा गार्ड भी रखे जाएं। संस्थान के परिसरों में सड़कों, पुस्तकालयों, गलियारा, खेल के मैदान, पार्क, प्रयोगशालाओं, पार्किग क्षेत्रों आदि में सीसीटीवी का प्रबंध होना चाहिए।


यूजीजी का साफ कहना है कि महिला कर्मियों या फिर युवतियों को सही माहौल देने के लिए आंतरिक शिकायत समिति गठित की जानी चाहिए । यह समिति शिकायत निस्तारण एवं रोकथाम के लिये काम करेगी और छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों से जुड़ी यौन उत्पीड़न की सभी शिकायतों पर विचार करेगी।

Monday, October 24, 2022

CBSE स्कूलों में प्रैक्टिकल 1 जनवरी से

CBSE स्कूलों में प्रैक्टिकल 1 जनवरी से


लखनऊ। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के स्कूलों में एक जनवरी से प्रैक्टिकल परीक्षाएं होंगी। प्रोजेक्ट जमा करने व आंतरिक मूल्यांकन भी इसी तारीख से शुरू होंगे। जल्द ही बोर्ड की तरफ से विस्तृत शिड्यूल जारी किया जाएगा। कोरोना की वजह से पिछली बार दो भागों में कराए गए प्रेक्टिकल इस बार वार्षिक ही होंगे।


प्रैक्टिकल में दो परीक्षक रहेंगे, एक बाहरी और एक स्कूल का। स्कूल परीक्षक को बाहरी परीक्षक के समक्ष छात्रों से प्रश्न पूछने होंगे। इस बात का ध्यान रखना होगा कि बैच में 20 से ज्यादा छात्र न हों। एक समय में एक बैच आधे छात्रों से प्रेक्टिकल और बाकी का वाइवा होगा। छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर कई सेशन होंगे।

यूपी बोर्ड अपनी निगरानी में छपवाएगा हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की किताबें

यूपी बोर्ड अपनी निगरानी में छपवाएगा हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की किताबें


यूपी बोर्ड से जुड़े 28 हजार से अधिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक बच्चों तक अधिकृत और त्रुटिहीन किताबें पहुंचाने के मकसद से बोर्ड अब हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की किताबें अपनी निगरानी में छपवाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार तैयार हो रहीं किताबों के प्रकाशन की जिम्मेदारी बोर्ड लेगा। अब तक इन तीन विषयों का पाठ्यक्रम तो बोर्ड निर्धारित करता है लेकिन किताबों के प्रकाशन पर बोर्ड का नियंत्रण नहीं है।


यानि कोई भी प्रकाशक इन्हें छाप सकता है। इसका सबसे अधिक नुकसान होता है कि कई बार प्रकाशक गलत तथ्य भी छाप देते हैं। जैसे कभी हिन्दी गद्य साहित्य के शलाका पुरुष आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जन्मतिथि गलत छप जाती है तो कभी किसी लेखक की फोटो के स्थान पर किसी दूसरे की फोटो छाप देते हैं। इसको लेकर विवाद भी होते रहते हैं।


इस प्रकार की गलतियों से बचने के लिए बोर्ड ने प्रकाशन की स्वयं निगरानी का निर्णय लिया है। हिन्दी, संस्कृत व उर्दू की किताबों का प्रकाशन या तो टेंडर देकर या फिर राजकीय मुद्रणालय से कराया जा सकता है। इस संबंध में बोर्ड की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।


किताबों के अनुमोदन के लिए हुई कार्यशाला

प्रयागराज। तीनों विषयों की पुस्तकों के अनुमोदन के लिए छह से आठ अक्तूबर तक बोर्ड मुख्यालय में कार्यशाला हुई थी। किताबों की विषयवस्तु में तो कोई खास बदलाव नहीं किया गया है बल्कि अभ्यास के प्रश्नों और अभ्यास सामग्री में परिवर्तन किया गया है।

Sunday, October 23, 2022

पुरानी पेंशन के लिए शिक्षक बने शिक्षामित्र पहुंचे कोर्ट, उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह में यूपी सरकार से मांगा जवाब

पुरानी पेंशन के लिए शिक्षक बने शिक्षामित्र पहुंचे कोर्ट, उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह में यूपी सरकार से मांगा जवाब


प्रयागराज । शिक्षामित्र से शिक्षक बने अध्यापकों ने पुरानी पेंशन के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार का पक्ष सुने बिना आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने बहस की।


प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2000 में शिक्षा मित्र योजना शुरू की थी। इसके तहत विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में करीब पौने दो लाख युवाओं की तैनाती की गई। इनमें से हजारों शिक्षामित्र विभिन्न भर्तियों के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक बन गए। जो शिक्षामित्र अप्रैल 2005 से पहले नियुक्त हुए और वर्तमान में शिक्षक हैं। उन्होंने पुरानी पेंशन का दावा करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 


गुरुचरण, ललितमोहन सिंह सहित आठ लोगों ने याचिका दाखिल कर शिक्षामित्र अवधि को शामिल मानकर पुरानी पेंशन दिए जाने की मांग की है। इनका कहना है कि जिन शिक्षामित्रों की नियुक्ति 2005 से पहले हुई है और अब वह अध्यापक बन गए हैं। उन्हें पुरानी पेंशन मिलनी चाहिए।


एक अप्रैल 2005 से पहले तदर्थ नियुक्त सेवाकर्मियों की सेवा पुरानी पेंशन के लिए जोड़ने का आदेश कई न्यायालयों की ओर से पारित किया जा चुका है। 



देवबंद का विश्वविख्यात मदरसा दारुल उलूम मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं

देवबंद का विश्वविख्यात मदरसा दारुल उलूम मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं


सहारनपुर : देवबंद का विश्वविख्यात मदरसा दारुल उलूम मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं है। यह गैर सहायता प्राप्त मदरसा है, जो सोसाइटी एक्ट में पंजीकृत है। उत्तर प्रदेश में सर्वे के दौरान करीब 7500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं। टीम अपनी रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक जिलाधिकारियों को देंगी। जिलाधिकारी रिपोर्ट 15 नवंबर तक शासन को उपलब्ध कराएंगे। 


वहीं, पूरे प्रदेश में मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त कुल 16,513 मदरसे हैं। सर्वाधिक 550 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मुरादाबाद में मिले हैं। शासन के निर्देश पर 10 सितंबर से 20 अक्टूबर तक मदरसों का सर्वे किया गया। देवबंद का दारुल उलूम भी मदरसा बोर्ड से पंजीकृत नहीं है। इसका पंजीकरण सोयाइटी एक्ट के तहत हुआ है। 


डीएम अखिलेश सिंह ने बताया कि अल्पसंख्यक विभाग की सर्वे टीम द्वारा निर्धारित प्रारूप पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें मदरसों का पाठयक्रम, स्थापना वर्ष, संस्थापक, संचालित करने वाली संस्था, छात्रों की संख्या, मदरसे को सरकारी मदद व शिक्षकों की संख्या आदि पर बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की गई है। 


डीएम ने कहा कि दारुल उलूम मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं है लेकिन इसे अवैध नहीं कहा जा सकता। जो मदरसे सरकार से सहायता प्राप्त हैं, उनका अल्पसंख्यक विभाग में पंजीकरण होता है। जो मदरसे सरकार से मदद नहीं ले रहे उनको अवैध नहीं कह सकते, जब तक कि यह पुष्टि न हो जाए कि उनको प्राप्त मदद का स्रोत उचित नहीं है। इन्हें गैर मान्यता प्राप्त या गैर सहायता प्राप्त मदरसा कहा जाएगा।

बदायूं में बेसिक शिक्षा विभाग की अनोखी पहल, पत्नियां होगी शराबी शिक्षकों की सह खातेदार, देखें आदेश

बदायूं में बेसिक शिक्षा विभाग की अनोखी पहल, पत्नियां होगी शराबी शिक्षकों की सह खातेदार, देखें आदेश 

शराब में वेतन उड़ा रहे शिक्षक की पत्नियां बनेंगी सहखातेदार

आधा दर्जन महिलाओं की शिकायत पर बदायूं के बीएसए ने लिया निर्णय

प्रत्येक वित्तीय लेनदेन पर दोनों के मोबाइल फोन में आएगा संदेश


बदायूं : पति शराब के आदी हैं। वेतन कब आया, कब खर्च हो गया, इसकी जानकारी नहीं हो पाती। वह पूरा वेतन शराब में खर्च कर देते हैं, परिवार चलाना कठिन हो रहा है। छह शिक्षकों की पत्नियों ने कई बार ऐसी शिकायत की तो बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने समाधान का रास्ता निकाल लिया। उन्होंने ऐसे सभी शिक्षकों के बैंक खाते में पत्नियों को सहखातेदार बनाने का फैसला ले लिया। इसके लिए स्टेट बैंक के रीजनल मैनेजर से भी बात कर ली गई है।

शुक्रवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने बताया कि शराब के लती शिक्षकों को कई बार समझाने का प्रयास किया मगर सुधार नहीं  हुआ। उनकी जिम्मेदारी है कि परिवार का जीवन-यापन करें, इसके बावजूद पूरा वेतन लत पूरी  करने में खर्च कर रहे हैं। विभाग ने तय किया कि ऐसे शिक्षकों के वेतन खाते में पत्नियों को सहखातेदार बनाया जाएगा।

इसके लिए दोनों पक्षों को एक आवेदन भरना होगा। उसमें शिक्षक को लिखना होगा कि वेतन आने पर पहले पत्नी धनराशि निकालेगी। इसके साथ ही प्रत्येक वित्तीय लेनदेन पर दोनों के मोबाइल फोन में संदेश आएगा। इसके माध्यम से महिलाओं को पता रहेगा कि खाते में कितनी धनराशि है, कितनी निकाली जा रही । उन्होंने बताया कि यदि किसी अन्य महिला को अपने शिक्षक पति से ऐसी शिकायत हो तो विभाग को जानकारी दे सकती हैं।



बदायूं : परिषदीय विद्यालयों के कई शिक्षक अपनी पूरी तनख्वाह शराब में उड़ा दे रहे हैं। कई शिक्षकों की पत्नियों ने विभाग में शिकायत की तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने शिक्षकों के बैंक खाते के साथ उनकी पत्नियों को सह खातेदार बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने बैंक के रीजनल मैनजर से भी बात कर ली है। खाते में तनख्वाह आने पर सबसे पहले शिक्षकों की पत्नियों के पास सूचना पहुंचेगी।


पीड़‍ित महिलाएं कर सकती हैं शिकायत

शुक्रवार शाम बीएसए ने कार्यालय में खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर शराबी शिक्षकों पर अंकुश लगाने के लिए यह निर्णय लिया। अब तक चार-पांच शराबी शिक्षकों की पत्नियां विभाग में शिकायज दर्ज करा चुकी हैं। बीएसए ने बताया कि शिक्षक परिवार की अगर कोई और महिला पति के शराब पीने से परेशान है तो वह विभाग में इसकी शिकायत कर सकती है, उसके खिलाफ भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।


Saturday, October 22, 2022

31 अक्टूबर को आयोजित होगा Head Teacher Youtube Live, जुड़े एक क्लिक में

31 अक्टूबर को आयोजित होगा Head Teacher Youtube Live, जुड़े एक क्लिक में


निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने हेतु "विद्यालय नेतृत्व विकास कार्यक्रम" SLDP के अंतर्गत राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा Head Teacher Youtube Live का आयोजन दिनांक 31 अक्टूबर 2022 (सोमवार) को 12 PM से 1 PM तक किया जा रहा है। विस्तृत एजेंडा बिंदु संलग्न पत्र में उल्लिखित है।



🔴  मीटिंग लिंक