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Tuesday, June 30, 2020

गोरखपुर : 2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

2010 के बाद नियुक्त/अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आये शिक्षको के सभी अभिलेखों की स्वप्रमाणित छाया प्रति जमा करने के सम्बंध में

महराजगंज : विभिन्न विषयों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए चयनित नौ शिक्षक अभ्यर्थियों को 'एकडमिक रिसोर्स पर्सन' पद पर पदस्थापन हेतु आदेश जारी

महराजगंज : विभिन्न विषयों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए चयनित नौ शिक्षक अभ्यर्थियों को 'एकडमिक रिसोर्स पर्सन' पद पर पदस्थापन हेतु आदेश जारी।


वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड

वर्चुअल शिक्षा...ऑनलाइन क्लास, कोर्स लैपटॉप के लिए MHRD ने मांगा 63 हजार करोड़ का फंड


कोरोना के कारण पारंपरिक शिक्षा प्रभावित होने और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर को लेकर पहली बार शिक्षा बजट तैयार हो रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन क्लास, विशेष कोर्स तैयार करने और छात्रों को लैपटॉप, मोबाइल देने के लिए बित्त मंत्रालय से 63,206.4 करोड़ रुपये की मांग की है।


 इसके अलावा नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए 1,13,684.51 करोड़ रुपये का फंड मांगा है। कोबिड-19 के चलते शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदलने वाली है। बजट को लेकर वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत मंत्रालय के अधिकारियों कौ बैठक हुई। ऑनलाइन शिक्षा की योजनाओं के लिए बित्त आयोग से बजट की मांग की गई है। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने बैठक में प्रेजेंटेशन भी दी

69000 फर्जीवाड़ा : मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में कौशांबी में छापेमारी


UP Shikshak Bharti News : मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में कौशांबी में छापेमारी 


UP Shikshak Bharti News शातिर चंद्रमा मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। इस कारण उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। ...


प्रयागराज । सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा के मोस्टवांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने कौशांबी में छापेमारी की। पिपरी, करारी और पूरामुफ्ती समेत कई संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई, लेकिन चंद्रमा नहीं मिला। इस दौरान उसके कुछ रिश्तेदारों को पूछताछ के लिए उठाया गया है। इसके साथ ही एसटीएफ फरार अभियुक्तों के बैंक खाते समेत दूसरे दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।


कहा जा रहा है कि कुछ दिन पहले स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव लखनऊ गया था। इसके बाद वहां से लौटकर कौशांबी आया। इसकी जानकारी मिलने पर सोमवार को एसटीएफ की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की, पर सफलता नहीं मिल सकी। यह भी कहा जा रहा है कि शातिर चंद्रमा मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। इस कारण उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी हो रही है। अब मुखबिरों की मदद से ही फरार अभियुक्तों को पकडऩे की कवायद की जा रही है।


बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही पुलिस
एसटीएफ के अधिकारियों का यह भी कहना है कि फरारी के दौरान आरोपित खर्च चलाने के लिए या कहीं दूर भागने के लिए पैसे निकाल रहे होंगे। इसे देखते हुए उनके बैंक खातों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही दूसरे रिकार्ड भी खंगाले जा रहे हैं। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में सरगना डॉ. केएल पटेल समेत 12 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, लेकिन चंद्रमा यादव, मायापति दुबे, दुर्गेश पटेल व संदीप पटेल अभी फरार चल रहे हैं।

रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


रिजल्ट घोषित करने के साथ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया यूपी बोर्ड


वर्ष 2020 के हाईस्कूल और इंटर का रिजल्ट घोषित होने के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा कराने वाला यूपी बोर्ड अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया। प्रदेश में शिक्षा का विस्तार करने के उद्देश्य से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत माध्यमिक शिक्षा परिषद गठित किया गया था। बोर्ड ने 1923 में पहली बार परीक्षा कराई थी जिसमें हाईस्कूल के 5655 और इंटर के 89 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। 2020 की परीक्षा बोर्ड की 98वीं परीक्षा थी। 2022 में परीक्षा के 100 साल पूरे हो जाएंगे।


परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार ने 1972 में मेरठ, 1978 में वाराणसी, 1981 में बरेली, 1986 में इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) तथा 2017 में गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना की। छात्रसंख्या के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। 2020 की परीक्षा के लिए 56,07,118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। जितने छात्र 10वीं-12वीं की परीक्षा देते हैं उतनी दुनिया के 80-85 देशों की आबादी नहीं है।


हर दो दशक में ऐसे बढ़ी परीक्षार्थियों की संख्या
वर्ष         10वीं           12वीं ( छात्र-छात्राओं की संख्या)
1923      5655         89
1939      15545       5447
1959      155211     100970
1979      874438    516047
1999      2276571   1114301
2019      3192587   2603169



समय के साथ बदला काम का तरीका
समय के साथ बोर्ड ने अपने काम का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ सालों में बोर्ड ने तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर नकल पर रोक लगाई है। वहीं, परीक्षार्थियों को सहूलियत दी है। उदाहरण के तौर पर इस साल से स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को अंकपत्रों एवं प्रमाणपत्रों में संशोधन, द्वितीय प्रतिलिपि आदि घर बैठे मिल रही है। परीक्षा के लिए केंद्रों के आवंटन से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर वाली मार्क्सशीट तक ऐसे दर्जनों काम हैं जो बोर्ड ने तकनीक के माध्यम से बेहतर किए हैं।


प्रमुख बदलाव
2018 से बोर्ड परीक्षा केंद्रों का निर्धारण कम्प्यूटर के जरिए ऑनलाइन
2019 से सीसीटीवी के साथ वॉयस रिकॉर्डर की निगरानी में परीक्षा 
2020 में परीक्षा केंद्रों की वेबकास्टिंग कराने की शुरुआत की गई
2018-19 सत्र से मान्यता संबंधी कार्रवाई ऑनलाइन कराई गई
2017-18 से फर्जी पंजीकरण रोकने को बच्चों के आधार नंबर लिए गए
2019 में 39 विषयों की परीक्षा में दो की जगह एक पेपर देना पड़ा
2018-19 सत्र से कक्षा 9 से 12 तक में एनसीईआरटी कोर्स लागू किया गया

संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं

फर्रुखाबाद : संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं


 

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को 01 जुलाई 2020 से खोलने से पूर्व सेनेटाइज किए जाने एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने के सम्बन्ध में डीएम ने जारी किया आदेश

फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को 01 जुलाई 2020 से खोलने से पूर्व सेनेटाइज किए जाने एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने के सम्बन्ध में डीएम ने जारी किया आदेश।






फतेहपुर : मनरेगा से स्कूलों में कराएं जाए कार्य, डीएम ने आपरेशन कायाकल्प समेत कई बिंदुओं पर लिए अहम फैसले।

फतेहपुर : रविवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऑपरेशन कायाकल्प समेत कई बिन्दुओं पर अहम फैसले लिए गए। डीएम ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन कायाकल्प में गंभीरता दिखाई जाए और निर्धारित समय में कार्य को पूरा किया जाए। मनरेगा के अन्तर्गत भी अनेक कार्य विद्यालयों में कराए जा सकते हैं। इसके अलावा पेयजल, वृक्षारोपण समेत अन्य बिन्दुओं पर भी मंथन किया गया। डीएम संजीव सिंह ने बैठक के दौरान कहा कि परिषदीय स्कूलों में मनरेगा के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग, बाउन्ड्री वाल, शौचालय व मिट्टी की पुराई जैसे कार्य कराए जा सकते हैं। प्रवासी मजदूरों कोशामिल करते हुए यह कार्य शीघ्र ही कराए जाएं। जिससे मानसून के दौरान स्कूलों में जलभराव की समस्या न हो तथा जल संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में अवैध कब्जे हैं उनकी शिकायत एंटी भू माफिया पोर्टल में की जाए। जिससे इनका संज्ञान लेकर परावर्तन की कार्रवाई कराई जा सके। कहा गया कि ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव के साथ समन्वय स्थापित कर पेयजल, रनिंग वाटर, शौचालय, फ्लोर टाइल्स, टाइलिंग इन टॉयलेट, हैंड वाशिंग यूनिट, इलेक्ट्रिक फिटिंग, इलेक्ट्रिक कनेक्शन, पेटिंग, रैम्प जैसे अनेक कार्य कराए जाएं। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि नवीन कामों में प्रत्येक कक्षा कक्ष में रैम्प होना अनिवार्य किया गया है। इसे देखते हुए स्कूलों में हर कमरे के सामने रैम्प निर्मित कराया जाए।


ठेकेदार का नाम नोट किया जाए :  अफसरों ने कहा कि जिन स्कूलों में हैंडपंप रिबोर किए गए हैं या होने वाले हैं, उसकी सूचना विद्यालय की पत्र व्यवहार पंजिका में ठेकेदार के नाम पता, मोबाइल नंबर व तिथि के साथ अंकित की जाए। जिससे रिबोर करने वाले ठेकेदार को कमी आने पर बुलाया जा सके।




फतेहपुर : परिषदीय विद्यालयों को कराया जाएगा सेनेटाइज, डीएम ने दिए निर्देश।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन स्थापित किए गए परिषदीय स्कूलों को सेनेटाइज कराया जाएगा। रविवार को डीएम की अध्यक्षता में हुई विभागीय अधिकारियों की बैठक के दौरान डीएम ने यह निर्देश दिए। स्कूलों को ब्लीचिंग पाउडर के घोलसे सेनेटाइज कराया जाएगा जिससे स्कूल परिसर सुरक्षित व स्वच्छ हो सकें।







 इससे पहले प्राथमिक शिक्षक संघ ने जिले के सभी प्राथमिक स्कूलों को सेनेटाइज कराने की मांग की थी। प्रवासी मजदूरों के जिले में आगमन के दौरान परिषदीय स्कूलों को क्वारंटीन सेण्टर के रूप में प्रयोग किए जाने से संघ अपने शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। शिक्षकों का कहना था कि चंकी अधिकांश स्थानों को सेनेटाइज कराया गया है इसलिए परिषदीय स्कूलों को भी सेनेटाइज कराया जाए। इन दिनों विभागीय कार्य से शिक्षकों को अपने स्कूल जाना पड़ता है। सेनेटाइजेशन न होने के कारण शिक्षकों में भय बना रहता है। शिक्षकों व संघ की मांग को देखते हुए जिला प्रशासन ने तय किया है कि जिन स्कूलों में क्वारंटीन सेण्टर बनाए गए थे उन्हें अनिवार्य रूप से सेनेटाइज कराया जाएगा। सेनेटाइज कराने के बाद ही शिक्षण कार्य कराया जाएगा।



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बरेली :एक ही नाम और दस्तावेजों पर नौकरी करते मिले दो शिक्षक


बरेली :एक ही नाम और दस्तावेजों पर नौकरी करते मिले दो शिक्षक



 बरेली : परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो बरेली में भी सोमवार को एक बड़ा मामला पकड़ा गया। यहां भोजीपुरा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल में जो शिक्षक तैनात है। उसी के नाम, दस्तावेजों के सहारे मुजफ्फरनगर जिले में भी एक शिक्षक प्राइमरी स्कूल में नौकरी कर रहा है। बीएसए ने शिक्षक का वेतन रोकते हुए जांच बैठा दी है। 


लखनऊ स्थित राज्य परियोजना निदेशालय से 192 संदिग्ध शिक्षकों की सूची जारी कर जांच के लिए कहा गया है। इनमें बरेली के भी चार शिक्षकों के नाम शामिल हैं। बीएसए विनय कुमार ने बताया कि इसमें भोजीपुरा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल मुढ़िया चेतराम के प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार सक्सेना का नाम भी शामिल है। वह वर्ष 2005 से यहां कार्यरत है। 



जांच में पता चला कि उन्हीं के नाम, मार्कशीट, जन्म तिथि से लेकन पैनकार्ड पर दूसरा शिक्षक वर्ष 2011 से मुजफ्फरनगर के एक प्राइमरी स्कूल में तैनात है। दोनों शिक्षकों की जो मार्कशीट है, वह भी एक ही स्कूल और कॉलेज की है। सिर्फ घर का पता बदला हुआ है। शिक्षक से पूछताछ की तो उन्होंने खुद को सही बताया।

यूपी बोर्ड : माया मिली न राम, NCERT के चक्कर मे हिंदी का काम तमाम, कम अंक आने से विद्यार्थियों के अंकों का प्रतिशत भी गिरा

यूपी बोर्ड : माया मिली न राम, NCERT के चक्कर मे हिंदी का काम तमाम, कम अंक आने से विद्यार्थियों के अंकों का प्रतिशत भी गिरा।

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की हिंदी की परीक्षा में सात लाख 97 हजार 826 परीक्षार्थियों के फेल होने के बाद एनसीईआरटी पैटर्न पर सवाल उठने लगे हैं। हिंदी में नंबर कम आने से विद्यार्थियों के संपूर्ण प्राप्तांक का प्रतिशत भी गिरा है। इसके पीछे नए पैटर्न में हिंदी के लिए एक प्रश्न पत्र बड़ी वजह माना रहा है। शिक्षकों का मानना है कि पहले तीन प्रश्नपत्रों होते थे। जिससे किसी में अगर परीक्षार्थी को कम अंक भी मिले तो दूसरे में इसकी भरपाई हो जाती थी। अब तो एक ही प्रश्न पत्र है, जिसमें गणित की तर्ज अंक दिए जाते हैं। यही परीक्षार्थियों के फेल होने का बड़ा कारण है। इलाहाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एसपी तिवारी का कहना है कि हिंदी को लेकर विज्ञान वर्ग के अधिकांश विद्यार्थी गंभीर नहीं रहते थे, इसके बावजूद पहले हाईस्कूल एवं इंटर दोनों में हिंदी में तीन प्रश्नपत्र होने के चलते परीक्षार्थी तीनों अलग अलग प्रश्नपत्रों में पासिंग मार्क लेकर उत्तीर्ण हो जाते थे। अब एनसीईआरटी पैटर्न लागू होने के बाद परीक्षार्थियों की हिंदी सहित दूसरे विषयों में एक ही प्रश्न पत्र की परीक्षा होती है। इस वजह से अब 70 नंबर के प्रश्न पत्र में परीक्षार्थियों को पास होना मुश्किल हो गया। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. इंदु सिंह का कहना है कि जब से हाईस्कूल, इंटर में हिंदी में एक प्रश्न पत्र की व्यवस्था लागू की गई है, परीक्षार्थियों को मिलने वाला अंक प्रतिशत कम हो गया। हिंदी में पहले दो प्रश्नपत्र हिंदी के शिक्षक पढ़ाते थे, जबकि तीसरा प्रश्नपत्र संस्कृत एवं व्याकरण का होता था, उसे संस्कृत के शिक्षक पढ़ाते थे ऐसे में बच्चों को पूरे विषय की जानकारी हो जाती थी। इससे बच्चों की हिंदी कमजोर हो रही है। हिंदी में अब पूछे जाने वाले सवाल एक-एक अंक के होते हैं, वह पूरी तरह से गणित के प्रश्न पत्र की तरह अंक देने वाले हैं। ऐसे में छात्रों की गलती पर उन्हें शून्य अंक मिलते हैं। इसी कारण से बच्चे फेल हो रहे हैं। उनका कहा है कि बदली व्यवस्था में बच्चों को सीबीएसई के बच्चों की तरह यूपी बोर्ड के बच्चों की हिंदी कमजोर होती जा रही है।





उदासीनता भी बड़ी वजह : चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज पूरबनारा के शिक्षक इंद्रदेव पांडेय का कहना है कि पूरे वर्ष हिंदी के प्रति छात्रों की उदासीनता और यूपी बोर्ड की ओर से एनसीईआरटी पैटर्न लागू करना छात्रों को हिंदी में फेल होने के लिए जिम्मेदार है। उनका कहना है कि अब बच्चों को हिंदी का एक ही शिक्षक पढ़ाता है। इस कारण से बच्चों का हिंदी ज्ञान मजबूत नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि इस बार का बोर्ड परीक्षा परिणाम स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठा रहा है। फेल होने वालों में हाईस्कूल में पांच लाख 27 हजार 866 परीक्षार्थी और इंटर में दो लाख 69 हजार 960 परीक्षार्थी शामिल हैं।


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उच्च शिक्षा : विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र, 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र

नहीं होंगी विवि की परीक्षाएं 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

7026 डिग्री कॉलेज हैं सरकारी और प्राइवेट मिलाकर

लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक की परीक्षाएं नहीं होंगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने परीक्षाएं न कराने की संस्तुति की है। करीब 48 लाख से अधिक विद्याíथयों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाएगा।


उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कमेटी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है। हालांकि औपचारिक घोषणा दो जुलाई को की जाएगी।




उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच परीक्षाएं कराना जोखिम भरा हो सकता है। मालूम हो कि मार्च में हुए लॉकडाउन के चलते कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं, कुछ में शुरू हुईं तो आधी परीक्षाएं हो पाईं। जुलाई में परीक्षाएं कराने के लिए परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए गए तो विरोध शुरू हो गया। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की रिपोर्ट को देखते हुए अब प्रोन्नति पिछली कक्षा में मिले अंक के आधार पर दी जाए या सभी विषयों में मिले अंक में से जिस विषय में ज्यादा अंक मिले हैं उसे आधार मानकर रिजल्ट तैयार किया जाए, इन सब पर मंथन किया जा रहा है।

’ उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित कमेटी ने की संस्तुति

’ प्रोन्नति के फार्मूले पर मंथन, दो जुलाई को होगी औपचारिक घोषणा

राज्य विवि, एक मुक्त विवि, एक डीम्ड विवि और 27 निजी विवि हैं प्रदेश में

डॉ. दिनेश शर्मा ’ जागरण आर्काइव

सभी संभावनाओं को टटोला जा रहा है। कमेटी की रिपोर्ट पर भी मंथन किया जा रहा है। दो जुलाई को इस पर अंतिम निर्णय लेकर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री




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Monday, June 29, 2020

हाथरस : एमडीएम योजनांतर्गत छात्र-छात्राओं को धनराशि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

हाथरस : एमडीएम योजनांतर्गत छात्र-छात्राओं को धनराशि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

1 जुलाई से विद्यालय खोलने के आदेश के संबंध में विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री/बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन लिखकर पुनर्विचार की मांग की गयी , देखें ज्ञापन

1 जुलाई से विद्यालय खोलने के आदेश के संबंध में विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री/बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन लिखकर पुनर्विचार की मांग की गयी, देखें ज्ञापन।



एक जुलाई से विद्यालय खोले जाने के विरोध में शिक्षक संघ


लखनऊ : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अखिल भारतीय शिक्षक संघ समेत अन्य ने एक जुट होकर सूबे समेत राजधानी में एक जुलाई से परिषदीय विद्यालय खोलकर शिक्षकों को बुलाने के आदेश के विरोध किया है।

संघ का कहना है कि कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा व मध्यप्रदेश में अगस्त तक विद्यालय बंद करने की घोषणा की गई है। वहीं, उप्र में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रीना त्रिपाठी ने कहा कि बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यह निर्णय गलत है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ अध्यक्ष सुशील पांडेय, प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन उत्तर प्रदेशीय अध्यक्ष विनय सिंह ने कहा कि कंटेमेंट जोन बढ़े हैं। वहीं, गोरखपुर, लखनऊ, आगरा और हाथरस में प्रकोप अपने चरम पर है। सभी शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक जुलाई से विद्यालय न खोलने और शिक्षकों के न बुलाने का आदेश जारी करने का आग्रह किया है।




पीलीभीत : कायाकल्प के तहत हुए कार्यों के निरीक्षण हेतु विद्यालय न खोले जाने व ग्राम प्रधानों द्वारा कार्य नहीं कराये जाने पर रोका गया अध्यापकों का वेतन


पीलीभीत : कायाकल्प के तहत हुए कार्यों के निरीक्षण हेतु विद्यालय न खोले जाने व ग्राम प्रधानों द्वारा कार्य नहीं कराये जाने पर रोका गया अध्यापकों का वेतन 



उच्च शिक्षा : जांच कमेटी के विरोध में उतरे शिक्षक, आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधीः लुआक्टा


लखनऊ।  प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों के भौतिक सत्यापन और उनके शैक्षणिक अभिलेखों की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षक इस आदेश को अपमानजनक मान रहे हैं। शिक्षक संगठन कानूनी लड़ाई लड़ने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। बहस का विषय बना है मुद्दा ः शासन ने सभी जिलों में जिलाधिकारी की तरफ से नामित अपर जिलाधिकारी (डीएम) को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। इसी तरह स्थलीय जांच के लिए जिलों में गठित होने वाली दो अलग-अलग उप समितियां में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को अध्यक्ष बनाया गया है। शासन के उच्च शिक्षा विभाग का यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त हो गई। विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर बने शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में यह विषय बहस का मुद्दा बना हुआ है। उनका कहना है कि इस आदेश से तो कुलपतियों की भी जांच एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी, क्योंकि कुलपति भी किसी न किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति, कोषाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष तक की जांच भी एसडीएम करेंगे। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जांच का यह आदेश पूरी तरह अनुचित है। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. विनीत वर्मा ने भी कहा कि इस मुद्दे पर शिक्षकों में काफी नाराजगी है। शिक्षकों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधी लुआक्टा :- लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि यह आदेश अपमानजनक होने के साथ-साथ संविधान विरोधी भी है। संविधान के अनुच्छेद 311 (डॉक्ट्रिन आफ प्लेजर) में में प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति की जांच उससे नीचे की रैंक वाला अफसर नहीं कर सकता है। जांच कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों का वेतनमान प्रोफेसरों से कम है। शासन ने अपना आदेश संशोधित नहीं किया तो संगठन कानूनी लड़ाई लड़ेगा। शिक्षकों को जांच से कोई इनकार नहीं है लेकिन जांच प्रक्रिया संविधान सम्मत होनी चाहिए।

प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


प्राइवेट से बेहतर सरकारी स्कूल, यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षाओं में सरकारी स्कूलों का रेकॉर्ड प्राइवेट से करीब 11% ज्यादा


लखनऊ: आमतौर पर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे हैं। पर इस बार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन प्राइवेट से बेहतर रहा है। प्राइवेट स्कूलों के 72.45 प्रतिशत बच्चे पास हुए, जबकि सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 83.70 रहा। यानी, प्राइवेट स्कूलों से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा।


शनिवार को यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया गया। इंटरमीडिएट में परीक्षा देने वालों में से 74.63 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। इनमें बालकों के पास होने का प्रतिशत 68.88 रहा, जबकि बालिकाओं का 81.96। वहीं, ये विद्यार्थी किस तरह के विद्यालयों में पढ़ते थे, इस नजरिये से देखें तो शासकीय (सरकारी) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा बेहतर रहा। 


यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों की तुलना में ऐडेड माध्यमिक स्कूलों का भी परफॉर्मेंस पास होने के मानकों पर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा रहा। प्रदेश में 785 शासकीय विद्यालय हैं, जिनमें से 84,523 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 70,744 विद्यार्थी पास हुए। इस तरह से यहां पर पास प्रतिशत 83.70 रहा। वहीं, 4077 ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में 7,43,604 विद्यार्थियों ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। इनमें से 5,82,433 पास हुए। यानी, पास प्रतिशत 78.33 रहा। वहीं, प्रदेश में चल रहे 12,482 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 15,92,903 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11,54,009 पास हुए। यानी, 72.45 प्रतिशत।


यही नहीं, प्रदेश में 111 प्राइवेट स्कूल ऐसे रहे, जिनमें पास होने का प्रतिशत 20 से भी कम रहा। जबकि केवल सात ही सरकारी स्कूल थे, जिनमें पास होने वालों का प्रतिशत 20 से कम रहा और ऐसे ही ऐडेड स्कूलों की संख्या 18 रही।


हाईस्कूल में प्राइवेट का परफॉर्मेंस तीन प्रतिशत ज्यादा
इंटरमीडिएट में जहां निजी स्कूलों से सरकारी स्कूल आगे निकले, वहीं हाईस्कूल की परीक्षाओं प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पास प्रतिशत सरकारी की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा रहा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से 82.08% विद्यार्थी पास हुए, जबकि प्राइवेट स्कूलों के 85.11% विद्यार्थी परीक्षा पास कर सके। ऐडेड स्कूलों का परफॉर्मेंस 79.77 प्रतिशत रहा।


नकल के लिए बदनाम जिलों की हालत रही पतली
नकल के लिए बदनाम रहे जिलों की हालत भी इस साल कुछ पतली ही रही। परिणाम में उनका वह दबदबा नहीं रहा, जैसा की बीते वर्षों में दिखता रहा है। जैसे अलीगढ़ की स्थिति इस कदर खराब हुई कि इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उसका स्थान 75वें पर है। यहां केवल 56.39 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके। हरदोई भी नकल के लिए खासा बदनाम रहा है, लेकिन इस साल परिणाम के तौर पर यह प्रदेश के जिलों में 43वें स्थान पर रहा है। बाराबंकी का स्थान 49वां, रायबरेली का 50वां और गोंडा का 52वां नंबर रहा है। देवरिया में केवल 61.14 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि बलिया में पास प्रतिशत 57.57 रहा।

बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?- अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल


बिजली, लाइब्रेरी, लैब की फीस क्यों मांग रहे निजी स्कूल ?

अभिभावकों की ओर से खड़े किए गए सवाल, राहत दिए जाने की उठाई मांग


शहर के निजी स्कूलों की फीस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। अभिभावकों की ओर से बिजली, लैब, लाइब्रेरी के नाम पर ली जाने वाली फीस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अभिभावक समिति का कहना है कि पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। आपात काल से गुजर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को राहत देने के बजाए निजी स्कूल प्रबंधक मनमानी फीस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं।


अभिभावक समिति के महासचिव गगन शर्मा ने फीस में राहत दिए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि निजी स्कूलों की शुरुआत समाज कल्याण के नाम पर की गई है। इसी कारण इन्हें सरकार से काफी छूट मिलती है। इसके बावजूद आपात काल की इस स्थिति में भी कई निजी स्कूल लाभ कमाने के लिए अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण पिछले तीन महीने से स्कूल बंद हैं। ऐसे में लाइब्रेरी, लैब जैसे शुल्क वसूलने का क्या मतलब? उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन को सिर्फ शासन के आदेशों का इंतजार करने के बजाए अपने स्तर पर अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

चंद्रमा यादव के स्कूल का दस्तावेज खंगाला जा रहा, 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में मोस्ट वांटेड है चंद्रमा

चंद्रमा यादव के स्कूल का दस्तावेज खंगाला जा रहा

69000 सहायक शिक्षक भर्ती में मोस्ट वांटेड है चंद्रमा यादव 

स्कूल के रिकॉर्ड को देखकर साक्ष्य एकत्र कर रही एसटीएफ



69000 शिक्षक भर्ती में वांटेड चंद्रमा यादव की तलाश में लगी एसटीएफ उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाने में जुट गई है। उसके स्कूल के दस्तावेज भी खंगाल रही है। पता चला है कि सेटिंग से ही स्कूल में प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर लेता था और खेल करता था। जबकि प्रतियोगी परीक्षा कराने के जरूरी मानक स्कूल में नहीं हैं। टीपी नगर, धूमनगंज के चंद्रमा यादव का पंचम लाल आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। 


स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव पेपर आउट कराकर खेल करता था। इसका खुलासा खुद एसटीएफ ने टीईटी पेपर के दौरान किया था। उस वक्त 7 लोग पकड़े गए थे  जिनके पास से 180 मोबाइल 220 सिम कार्ड व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद हुआ था। चंद्रमा यादव की तलाश में लगी एसटीएफ ने छापेमारी की। उसके स्कूल में जाकर भी जांच की।


 पता चला कि कुछ ही कमरों का उसका स्कूल है। बाउंड्री वॉल भी पूरा पैक नहीं है। बावजूद इसके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर पंचम लाल आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रहा है। गोपनीय तरीके से जांच कर रही एसटीएफ पता लगा रही है कि कहीं इसमें विभागीय अधिकारियों की सेटिंग तो नहीं है। आखिर कैसे और किसकी सेटिंग से उसके स्कूल में सेंटर मिलता था। स्कूल के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

वाराणसी: पांच शिक्षकों का बैंक खाता अन्य जनपदों में भी हुआ इस्तेमाल


वाराणसी:  पांच शिक्षकों का बैंक खाता अन्य जनपदों में भी हुआ इस्तेमाल


अनामिका शुक्ला प्रकरण के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में भी शिक्षकों की नियुक्तियों में ही बड़ी हेराफेरी पकड़ी गई है। अभिलेखों की जांच में प्रदेश में 192 मामले से ऐसे मिले हैं, जिसमें एक नाम और पैन नंबर की दो अलग-अलग एंट्री कई जिलों में दर्ज है, केवल खाता नंबर अलग है। इसमें वाराणसी जिले के भी पांच शिक्षक शामिल हैं।  


शनिवार को अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा ने ऐसे शिक्षकों की सूची बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी है। इसके बाद से बीएसए ने इन शिक्षकों को तलब किया है। इस वक्त देशभर में बेसिक शिक्षकों के वेतन संबंधी अभिलेखों की जांच हो रही है। वित्त नियंत्रक बेसिक प्रयागराज ने मई माह के वेतन भुगतान की रिपोर्ट 21 जून को सौंपी थी। इसमें सामने आया है कि 192 प्रकरण ऐसे हैं, जिसमें एक ही नाम व पैन नंबर की दो अलग-अलग एंट्री विभिन्न जिलों की फाइलों में हैं, लेकिन उनका खाता नंबर अलग है।


अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने इसे संदिग्ध व आपत्तिजनक करार दिया है। जिले में भी नियम के विरुद्ध पांच ऐसे शिक्षकों का मामला सामने आया है।  इन शिक्षकों का नाम, पैन नंबर, खाता नंबर एवं जन्मतिथि अन्य जनपदों में भी सामान पाए गए हैं। इनकी लिस्ट शासन ने बीएसए को भेजी है। बीएसए ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन अध्यापकों के सभी प्रमाण पत्रों, आधार, पैन, बैंक पासबुक, जाति, निवास समेत 29 जून को बीएसए कार्यालय उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दें।


इन शिक्षकों को हुई रिपोर्ट तलब
राकेश प्रसाद त्रिपाठी, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय साईपुर,  रामाश्रय यादव, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय खालिसपुर,  विजय कुमार, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय हीरापुर गंजारी,  महात्मा यादव, सहायक अध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुरेरी,  प्रवीण कुमार यादव, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय पिलखीनी,  रेखा सिंह, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय, इमिलिया।

एक प्रश्नपत्र लागू करने से हुआ नुकसान, NCERT पैटर्न के कारण यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणाम में आई गिरावट

एक प्रश्नपत्र लागू करने से हुआ नुकसान, NCERT पैटर्न के कारण यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणाम में आई गिरावट।

प्रयागराज : एनसीईआरटी पैटर्न अपनाए जाने के बाद से यूपी बोर्ड की लगातार तीन परीक्षाओं में इंटरमीडिएट के परिणाम में कमी देखी जा रही है। भले ही 2019 की परीक्षा की अपेक्षा अबकी बार परिणाम में चार फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन पूर्व में 2015 में 88.83 फीसदी परिणाम की अपेक्षा यह बहुत कम है।






इंटरमीडिएट में दो और तीन प्रश्नपत्रों के स्थान पर एकल प्रश्न पत्र की व्यवस्था लागू करने के बाद परीक्षा फल में गिरावट दर्ज की जा रही है। बोर्ड के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि बदलाव परीक्षाफल पर भारी पड़ा। यूपी बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो 2015 में इंटरमीडिएट का परिणाम 88.83 फीसदी, 2016 में 87.99 फीसदी, 2017 में 82.62 फीसदी था। 2018 की परीक्षा से यूपी बोर्ड की ओर से एनसीईआरटी पैटर्न अपनाया जाने लगा था, 2019 की परीक्षा में इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया। 2018 में रिजल्ट 72.43 फीसदी तो 2019 में यह गिरकर 70.06 फीसदी पहुंच गया। 2020 में रिजल्ट 74.63 फीसदी पहुंच गया। इस प्रकार बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट में भौतिकी, रसायन, गणित सहित मानविकी के विषयों नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र विषय में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाए जाने के बाद परिणाम में गिरावट दर्ज की गई। हाई स्कूल में पहले से ही कल प्रश्न पत्र की व्यवस्था लागू होने से परीक्षार्थियों ने यहां बदलाव को स्वीकार कर लिया। परिणाम पिछले वर्ष 80.07 फीसदी रहा।



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यूपी बोर्ड : स्क्रूटनी के लिए 22 जुलाई तक होंगे आवेदन

यूपी बोर्ड : स्क्रूटनी के लिए 22 जुलाई तक होंगे आवेदन।


प्रयागराज :  यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी के लिए यूपी बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर 22 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।





परीक्षार्थियों की ओर से ऑनलाइन आवेदन एवं बोर्ड कार्यालय में सीधे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यूपी बोर्ड प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव शिव प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक अपूर्ण एवं निर्धारित तिथि के बाद किसी भी स्थित में आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।




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Sunday, June 28, 2020

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट

■    यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आज, ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट


● पहले इसके लिए यूपी बोर्ड की वेबसाइट upresults.nic.in पर जाएं
● यहां 10वीं या 12वीं एग्जाम रिजल्ट पर क्लिक करें
● इसके बाद अपना रोल नंबर यहां इंटर करें
● फिर आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा
● रिजल्ट देखने के बाद स्क्रीन का प्रिंट अवश्य लें
● यूपी बोर्ड की वेबसाइट व अन्य जानकारी


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं का रिजल्ट  आज 27 जून घोषित होगा। स्टूडेंट अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर पाएंगे, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।

◆ बोर्ड का नाम : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद
◆ परीक्षा का नाम : कक्षा 10वीं/12वीं का बोर्ड एग्जाम
◆ आधिकारिक वेबसाइट : upmsp.nic.in
◆ रिजल्ट की वेबसाइट : upresults.nic.in

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा का परिणाम शनिवार को उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ में घोषित करेंगे। इसी के साथ परीक्षा में शामिल 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का इंतजार खत्म हो जाएगा। इस बार 10वीं-12वीं की परीक्षा एक साथ 18 फरवरी को शुरू हुई थी। 10वीं की परीक्षा 3 मार्च को इंटर की परीक्षा 6 मार्च को समाप्त हुई थी। की परीक्षा में हाईस्कूल के 3022607 और इंटर के 2584511 कुल 5607118 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से पांच लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने बीच में ही पेपर छोड़ दिया था। इससे पहले 2019 में 10वीं व 12वीं में 5795756 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इस लिहाज से 2020 की परीक्षा में 188638 परीक्षार्थियों की कमी हुई थी। परीक्षा के लिए 7784 केंद्र बनाए गए थे जो 2019 की तुलना में 570 कम था। इस बार 1 जुलाई 2019 को ही परीक्षा का टाइम टेबल घोषित कर दिया गया था।


लखनऊ/प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षा का परिणाम आज 27 जून को दोपहर 12:30 बजे यहां लोक भवन में जारी किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा यह परिणाम जारी करेंगे। परीक्षा में इस बार 51 लाख से अधिक 51 लाख से परीक्षा थीं शामिल हुए थे। परिणाम बोर्ड अधिक मात्रा ने दी है परीक्षा की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।


 इस बार इंटरमीडिएट में एक विषय में फेल होने वाले परीक्षार्थी को पहली बार कंपार्टमेंट में शामिल होने का मौका मिलेगा। बोर्ड की ओर से कोरोना संक्रमण के चलते पहली बार ही परीक्षार्थियों डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। डिजिटल हस्ताक्षर वाले प्रमाण पत्र, प्रवेश लेने से लेकर नौकरी तक में मान्य होंगे। 


लखवऊ । UP board result 2020 : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 का परिणाम 27 जून को एक साथ घोषित होगा। यूपी बोर्ड  हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट यूपी बोर्ड मुख्यालय पर शनिवार को दोपहर 12.30 बजे जारी होगा। इसकी सारी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह परिणाम दिल्ली में भी रफी मार्ग आइएनएस बिल्डिंग से भी उसी समय जारी होगा। स्टूडेंट्स रिजल्ट जारी होने के बाद यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in और upresults.nic.in पर देख सकेंगे।


यूपी बोर्ड ने इस वर्ष 10वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 3 मार्च 2020 के मध्य सफलता पूर्वक पूरी कराई थी, जबकि 12वीं की परीक्षा 18 फरवरी 2020 से 6 मार्च 2020 के बीच कराई गई थी।परीक्षा में 56 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिसमें हाईस्कूल के 30,22,607 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट के 25,84,511 परीक्षार्थी थे। इन परीक्षार्थियों के लिए प्रदेश भर में 7784 परीक्षा केंद्र बनाए गए। प्रत्येक परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इस बार बोर्ड परीक्षाओं की निगरानी के लिए प्रदेश भर में कुल 19 लाख कैमरे लगाए गए। इसके साथ ही इस परीक्षा के लिए 1.88 लाख कक्ष निरीक्षक नियुक्त किये गए। इन्हें परीक्षा केंद्र पर अपने पहचानपत्र और आधार कार्ड के साथ ड्यूटी करने को कहा गया था।


परीक्षा में पहले से ज्यादा बरती गई सख्ती : यूपी बोर्ड के अनुसार, इस बार परीक्षा में पहले से ज्यादा सख्ती बरती गई। सभी परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरा, वॉयस रिकॉर्डर, ब्रॉडबैंड, राउटर जैसी तकनीकों से लैस किया गया था। हर जिले में एक मॉनिटरिंग सेल बनाया गया था, जिसे लखनऊ में शिक्षा निदेशक के कार्यालय से जोड़ा गया था। पूरी परीक्षा स्पेशल टास्क फोर्स, जिलाधिकारी और पुलिस की देखरेख में संपन्न कराई गई।


रंगीन उत्तर पुस्तिकाओं का उपयोग : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार परीक्षा की कॉपियों को चार रंगों में बनवाई थी। ये कॉपियां नीला, पीला, हरा और गुलाबी रंग की थीं। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षा की कॉपियों में क्रमांक भी दर्ज किये गए थे। इसका उद्देश्य परीक्षा को नकलविहीन बनाना था। उत्तर पुस्तिकाओं में क्रमांक दर्ज होने से इन्हें बाहरी कॉपियों से बदला नहीं जा सका।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जुलाई में अब नहीं होगी विश्वविद्यालयों में कोई भी परीक्षा


कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जुलाई में अब नहीं होगी विश्वविद्यालयों में कोई भी परीक्षा


मानव संसाधन विकास मंत्रालय का साफ मानना है कि छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी।...


नई दिल्ली। कोरोना के देश भर में बढ़ते संक्रमण और जुलाई में इसके चरम पर पहुंचने को लेकर लगाए जा रहे अनुमानों को देखते हुए फिलहाल जुलाई में अब कोई भी परीक्षा नहीं होगी। सीबीएसई की बाकी बची परीक्षाओं को रद करने के ऐलान के बाद मंत्रालय ने जुलाई में प्रस्तावित अन्य परीक्षाओं को लेकर भी ऐसे ही संकेत दिए है। साथ ही इसे लेकर नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है।


परीक्षाओं को टालने या रद करने को लेकर सोमवार को बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक
इस बीच सोमवार को जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें इन्हें टालने या रद करने को लेकर निर्णय किया जाएगा।


विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के रद होने की संभावना
फिलहाल जुलाई में प्रस्तावित जिन परीक्षाओं को रद या स्थगित किया जा सकता है, उनमें विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के साथ नीट, जेईई मेंस आदि परीक्षाएं शामिल है। इनमें विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के फिलहाल रद करने की पूरी संभावना है। इन छात्रों को पिछले सेमेस्टर की परीक्षाओं और आंतरिक आंकलन के आधार पर अंक देकर प्रमोट किया जा सकता है।


यूजीसी को पहले ही समीक्षा के दिए जा चुके हैं निर्देश
मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पिछले दिनों ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से विश्वविद्यालयों को लेकर घोषित अपने परीक्षा प्लान और शैक्षणिक कैलेंडर की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दे दिए थे। जिसे लेकर यूजीसी ने भी एक कमेटी गठित की है। जो इसे लेकर सुझाव देगी। फिलहाल यूजीसी के मौजूदा प्लान के तहत विश्वविद्यालयों के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं एक से पंद्रह जुलाई के बीच प्रस्तावित है।


विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं अब नहीं होगी, नया शैक्षणिक सत्र अक्टूबर तक खिसकेगा
वहीं नया शैक्षणिक सत्र भी सितंबर से शुरू होना है, लेकिन सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं अब नहीं होगी। साथ ही शैक्षणिक सत्र भी अब अक्टूबर तक खिसकेगा। जिसका ऐलान भी सोमवार को हो सकता है। विश्वविद्यालयों के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पहले ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट करने का विकल्प दिया जा चुका है।


एचआरडी मंत्रालय ने कहा- छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी
इस सब के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय का साफ मानना है कि छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी। स्थिति सामान्य होने के बाद जरूरी परीक्षाओं को कराने का निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी सीबीएसई की बाकी बची परीक्षाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट के रूख को देखते हुए मंत्रालय भी उत्साहित है। जिसे मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से रद कर दिया था। वैसे भी जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को न कराने को लेकर छात्रों और अभिभावकों का भी भारी दबाव है।

UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


UP Board result : फर्स्ट डिवीजन वालों की संख्या बढ़ी, आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास


यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने वाले परीक्षार्थियों की संख्या इस बार और भी बढ़ गई है। जबकि द्वितीय और तृतीय श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या में कमी आई है। ससम्मान परीक्षा पास करने वाले परीक्षार्थियों में इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में मामूली कमी आई है।


3.41 प्रतिशत ससम्मान हुए पास
इस बार इंटर की परीक्षा के लिए पंजीकृत 25,86,339 परीक्षार्थियों में से 24,84,479 परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से 18,54,099 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। सफल होने वाले इन परीक्षार्थियों में से 63,193 यानी 3.41 प्रतिशत ससम्मान पास हुए हैं। ससम्मान पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 0.05 प्रतिशत की मामूली कमी हुई है। पिछले वर्ष 3.46 प्रतिशत परीक्षार्थी ससम्मान पास हुए थे।


33.91 प्रतिशत प्रथम श्रेणी में पास
इंटर में सफलता पाने वाले 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 6,28,734 परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की है। यह संख्या कुल परीक्षार्थियों का 33.91 प्रतिशत है। प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास करने वालों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 1.94 प्रतिशत बढ़ी है। 2019 में सफलता पाने वाले 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 5,26,896 यानी 31.97 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी के साथ परीक्षा पास की थी।


आधे से अधिक सेकेंड डिवीजन में पास
इंटर में पास हुए 18,54,099 परीक्षार्थियों में से 53.62 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सेकेंड डिवीजन मिला है। सेकेंड डिवीजन से पास होने वाले परीक्षार्थियों की कुल संख्या 9,94,161 है। गत वर्ष की तुलना में इस श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में मामूली यानी 0.03 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष परीक्षा में 16,47,919 परीक्षार्थियों में से 53.65 प्रतिशत को सेकेंड डिवीजन मिला था।


6.55 फीसदी को मिली तृतीय श्रेणी
इस वर्ष सिर्फ 6.55 प्रतिशत परीक्षार्थी ही तृतीय श्रेणी में सफल हुए हैं। इंटर में पास हुए 1854099 परीक्षार्थियों में से 121528 तृतीय श्रेणी में पास हुए हैं । तृतीय श्रेणी में पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 1.38 प्रतिशत कम हुई है। पिछले वर्ष 7.14 प्रतिशत परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी में पास हुए थे।


2.51 प्रतिशत ग्रेस मार्क्स से पास
इस वर्ष 46,483 परीक्षार्थी ऐसे हैं, जिन्हें ग्रेस मार्क देकर पास किया गया है। यह संख्या परीक्षा में शामिल कुल परीक्षार्थियों का 2.51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की तुलना में ग्रेस मार्क्स के साथ पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या कम हुई है। पिछले वर्ष 49,255 यानी 2.99 प्रतिशत परीक्षार्थी ग्रेस मार्क से पास हुए थे।

UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020: मातृभाषा हिंदी में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके आठ लाख मेधावी, सभी फेल


UP Board Result 2020परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। ...

प्रयागराज । प्यारी हिंदी, हमारी हिंदी का नारा विशेष दिवस पर खूब गूंजता है। मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव शायद नारों तक ही सिमट कर रह गया है, प्यारी हिंदी को हम सब वैसा प्यार नहीं करते जिसकी उसे दरकार है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर का परीक्षा परिणाम इसकी पुष्टि कर रहा है। दोनों परीक्षाओं के करीब आठ लाख परीक्षार्थी सिर्फ इसलिए फेल हो गए हैं, क्योंकि वे हिंदी विषय में उत्तीर्ण की बिंदी नहीं लगा सके हैं। बोर्ड की ओर से जारी हिंदी विषय का यह आंकड़ा शर्मसार करने वाला है, क्योंकि उत्तर प्रदेश हिंदी पट्टी का अहम व देश में आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य है।


यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर का विषयवार परिणाम जारी किया है। इंटर की हिंदी परीक्षा में 1,08,207 व सामान्य हिंदी में 1,61,753 सहित कुल 2,69,960 परीक्षार्थी अनिवार्य प्रश्नपत्र में उत्तीर्ण होने लायक अंक नहीं ला पाए। ऐसे ही हाईस्कूल की हिंदी परीक्षा में 5,27,680 व प्रारंभिक हिंदी में 186 सहित कुल 5,27,866 परीक्षार्थी फेल हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में कुल 7,97,826 परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण हैं। ये वे परीक्षार्थी हैं, जो हिम्मत जुटाकर परीक्षा में शामिल हुए थे। हैरत यह भी है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार हाईस्कूल में फेल होने वालों की संख्या बढ़ी है, जबकि इंटर के हिंदी विषय में फेल होने वालों का आंकड़ा तेजी से घटा है। वैसे भी इंटर के परीक्षार्थियों को हाईस्कूल की अपेक्षा अधिक परिपक्व माना जाता है। ज्ञात हो कि मातृभाषा में अनुत्तीर्ण होने वालों का इतना खराब परिणाम पहली बार नहीं आया है, बल्कि पिछले साल तो फेल होने वालों की तादाद दस लाख को पार गई थी।


दोनों परीक्षाओं में मातृभाषा हिंदी की परीक्षा देना अनिवार्य है और इसका असर पूरे परीक्षा परिणाम पर पर पड़ता है लेकिन, इस पर शिक्षक गंभीर हैं न परीक्षार्थी और न ही उनके अभिभावक, क्योंकि हर साल हिंदी में फेल होने वालों की तादाद लाखों में रहती है।


यही नहीं दोनों परीक्षाओं में 2,91,793 परीक्षार्थी शामिल होने तक का साहस नहीं जुटा सके। बोर्ड के अनुसार हाईस्कूल के हिंदी विषय में 1,43,246 व प्रारंभिक हिंदी में 1745 सहित कुल 1,43,306 और इंटर के हिंदी 56,092 व सामान्य हिंदी विषय में 92,395 सहित कुल 1,48,487 ने परीक्षा से ही किनारा कर लिया। इस तरह देखा जाए तो हाईस्कूल व इंटर परीक्षा से हिंदी में फेल व किनारा करने वालों की तादाद 10 लाख 89 हजार 619 है। 

प्राइवेट बेसिक स्कूलों की मान्यता में घपला, जांच मे दोषी पाए गए शिक्षा अधिकारियों को बचाने में जुटे है विभागीय अधिकारी

प्राइवेट बेसिक स्कूलों की मान्यता में घपला, जांच मे दोषी पाए गए शिक्षा अधिकारियों को बचाने में जुटे  है विभागीय अधिकारी

 

अयोध्या :  जिले के निजी जूनियर व प्राइमरी स्कूलों को नियमों को दरकिनार कर मान्यता देने के मामले में अब तक पटल निरीक्षक के निलंबन के आगे कार्रवाई नहीं बढ़ी है। साल 2018-19 और 2019-20 में हुए घोटाले में शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जगह एडी बेसिक और बीएसए के बीच दोषी बीईओ के नाम पता लगाने को लेकर खानापूरी ही चल रही है। इस मामले में हुई जांच में तत्कालीन बीएसए अमिता सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी और पटल लिपिक दोषी पाए गए थे। तीन सदस्यीय कमिटी ने 263 स्कूलों की जांच में 84 स्कूलों की मान्यता जारी करने में गंभीर वित्तीय और अन्य अनियमितताओं की बात कही थी।


डीएम एके झा के आदेश पर सितंबर-2019 में हुई जांच के बाद रिपोर्ट में तत्कालीन बीएसए, खंड शिक्षा अधिकारियों और लिपिक गया प्रसाद को निलंबित कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसके बाद 6 फरवरी 2020 को डीएम ने यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को भेजी दी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीजी (स्कूल शिक्षा) ने एडी बेसिक अयोध्या को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। हालांकि, अभी तक केवल लिपिक को ही सस्पेंड किया गया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि घोटाले में दोषी पाए गए बीईओ के नाम को लेकर अब लिखा-पढ़ी की जा रही है। बीएसए बीईओ का नाम एडी बेसिक को नही भेज पाएं है।


आरोपित अधिकारियों के नाम नहीं भेजे
एडी बेसिक अयोध्या रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि बीएसए से आरोपित बीईओ का नाम 6 फरवरी 2020 को मांगा गया है। 10 फरवरी को उन्होंने सभी बीईओ के नाम की सूची भेज दी लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-कौन से बीईओ आरोपित हैं। 19 मई को बीएसए दो रीमाइंडर भेजा गया है। बीएसए से रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपपत्र बना कर पत्रावली शिक्षा महानिदेशक को भेज दी जाएगी।



मेरे स्तर से कोई कार्रवाई बाकी नहीं
इस मामले में बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि मान्यता को लेकर जांच बाकी स्कूलों की तीन सदस्यीय कमिटी कर रही है, जिसकी रिपोर्ट नहीं आई है। जिन 84 स्कूलों की मान्यता देने में अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट आ चुकी है उस मेरे स्तर पर कोई कार्रवाई पेंडिंग नहीं है। दोषियों पर कार्रवाई करने का प्रकरण एडी बेसिक स्तर का मामला है। 

यूपी बोर्ड : पहली बार स्क्रूटनी के लिए मांगे ऑनलाइन आवेदन, 500 रुपए प्रति प्रश्नपत्र की दर से देनी होगी फीस

यूपी बोर्ड : पहली बार स्क्रूटनी के लिए मांगे ऑनलाइन आवेदन, 500 रुपए प्रति प्रश्नपत्र की दर से देनी होगी फीस।

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर के परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्र छात्र 22 जुलाई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकते हैं। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए बोर्ड ने पहली बार ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि स्क्रूटनी संबंधी आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।




 परीक्षार्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित फीस चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। ऑनलाइन भरे आवेदन का विवरण प्रिंट आउट के साथ स्क्रूटनी के लिए जमा मूल चालान पत्र को सत्यापन के लिए संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को निर्धारित तिथि 22 जुलाई तक भेजेंगे। स्क्रूटनी के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्न पत्र की दर से (लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए अलग-अलग) फीस देनी होगी।


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69000 शिक्षक भर्ती : आरोपी मायापति की तलाश में एसटीएफ ने भदोही में मारा छापा, मिला नहीं

69000 शिक्षक भर्ती : आरोपी मायापति की तलाश में एसटीएफ ने भदोही में मारा छापा, मिला नहीं।


69000 शिक्षक भर्ती : आरोपी मायापति की तलाश में एसटीएफ ने भदोही में मारा छापा, मिला नहीं।

प्रयागराज : 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में धांधली के मामले में वांछित मायापति दुबे की तलाश में शनिवार को एसटीएफ ने फिर से उसके भदोही स्थित घर पर स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की। पुलिस ने पड़ोसियों से भी जानकारी जुटाई। सबको चेतावनी दी गई है कि अगर किसी ने आरोपी को शरण दी तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। भदोही जिले का कोइरौना थानाक्षेत्र का रामपुर गांव निवासी मायापति दुबे का आलीशान मकान है। 69000 शिक्षक भर्ती में सोरांव पुलिस मायावती दुबे के एक भाई को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।








इस केस में वांछित मायावती की तलाश में एसटीएफ ने शनिवार को भदोही पुलिस की मदद ली। थाने से महिला पुलिस के साथ एसटीएफ रामपुर गांव पहुंची। वहां पर मायावती की पत्नी, उसका भाई और मां बाप मिले। सूत्रों की मानें तो परिजनों ने मायावती को फंसाने की बात कही और उसके बारे में कोई भी जानकारी से इनकार किया। एसटीएफ को ग्रामीणों से पता चला कि मायावती के पिता नौकरी छोड़कर वीआरएस ले चुके हैं। गांव में इनके दो तीन पत्ते चलते हैं। कोई विद्यालय भी बताया जा रहा है। इससे पूर्व भी एसटीएफ ने माया पति दुबे के घर और उसके ससुराल में छापेमारी की थी लेकिन वह पकड़ में नहीं आया था। स्थानीय पुलिस को भी सूचना दे दी गई है कि अगर कहीं मायावती के बारे में सुराग लगे तो एसटीएफ को शेयर करे। मायापति दुबे के खिलाफ कोर्ट खुलते ही वारंट लेकर एसटीएफ उस पर इनाम कराने वाली है।


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बीटीसी 2015 बैच का बैक पेपर देने वालों ने भी 69000 शिक्षक भर्ती की काउंसिलिंग में शामिल होने का मांगा मौका

BTC- 2015 बैच के बैक पेपर मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व बेसिक शिक्षा परिषद से मांगा जवाब।


प्रयागराज :  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में आवेदन करने वाले बीटीसी 2015 बैच के उन अभ्यर्थियों की याचिका पर राज्य सरकार व बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है, जो एक विषय में बैक पेपर के कारण आवेदन के समय परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं थे। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने संतराम मौर्य व अन्य की याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह को सुनकर दिया है। याचिका में मांग की गई है कि बैक पेपर का रिजल्ट आने के बाद याचियों को मूल परीक्षा परिणाम आने की तिथि से सफल मानते हुए काउंसिलिंग में शामिल होने का मौका दिया जाए। अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक 2015 बैच के बीटीसी अभ्यर्थी याचियों के चौथे सेमेस्टर का रिजल्ट 11 दिसंबर 2018 को जारी हुआ। इनमें से कुछ अभ्यर्थियों में एक विषय में अंक कम होने या असफल होने के कारण बैक पेपर भरा। कहा गया कि 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि 20 दिसंबर 2018 होने के कारण याचियों ने उस समय आवेदन कर दिया था। सात अगस्त 2019 को बैक पेपर का परिणाम आया और वे सफल हो गए। याचियों की मांग की है कि उनका इस आधार पर अभ्यर्थी निरस्त न किया जाए कि आवेदन की अंतिम तिथि को निर्धारित योग्यता नहीं रखते थे। बैक पेपर के परिणाम को मूल परिणाम का ही हिस्सा मानते हुए उन्हें 2015 बैच का ही सफल अभ्यर्थी मानते हुए काउंसिलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

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बीटीसी 2015 बैच का बैक पेपर देने वालों ने भी 69000 शिक्षक भर्ती की काउंसिलिंग में शामिल होने का मांगा मौका।


बीटीसी 2015 बैच का बैक पेपर देने वालों ने भी मांगा मौका।

प्रयागराज :  69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के लिए आवेदन करने वाले ऐसे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जो बीटीसी 2015 बैच के हैं और एक विषय में बैक पेपर आ जाने की वजह से आवेदन भरते समय परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं थे मांग की गई है कि बैक पेपर का रिजल्ट आने के बाद याचीगण को मूल परीक्षा परिणाम आने की तिथि से सफल मानते हुए काउंसलिंग में शामिल होने का मौका दिया जाए।





संतराम मौर्य और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने इस मामले में प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से नौ जुलाई तक जवाब मांगा है। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याचीगण 2015 बैच के बीटीसी अभ्यर्थी हैं। इसके चौथे सेमेस्टर का रिजल्ट 11 दिसंबर 2018 को जारी हुआ। इनमें से कुछ अभ्यर्थियों ने एक विषय में अंक कम होने या असफल होने के कारण बैक पेपर भरा। 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 दिसंबर 2018 थी। इसलिए याचीगण ने उस समय आवेदन कर दिया था। सात अगस्त 2019 को बैंक पेपर का परिणाम आया और वे सफल हो गए।


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नकल माफिया चंद्रमा के स्कूल पर होगी कार्रवाई, रिपोर्ट हो रही तैयार, टीईटी पेपर लीक कराने की कोशिश में भी हुआ था गिरफ्तार

नकल माफिया चंद्रमा के स्कूल पर होगी कार्रवाई, रिपोर्ट हो रही तैयार, टीईटी पेपर लीक कराने की कोशिश में भी हुआ था गिरफ्तार।


प्रयागराज : 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा मामले की जांच में जुटी एसटीएफ फरार चल रहे नकल माफिया चंद्रमा यादव के स्कूल पर भी कार्रवाई कर सकती है। टीईटी में धांधली की कोशिश के दौरान गिरफ्तार किए जाने पर चंद्रमा ने खुद बयान दिया था कि उसे अपने स्कूल से ही पेपर की फोटो खींचकर सॉल्वरों तक पहुंचाना था। अब 69 हजार शिक्षक भर्ती में वांछित होने के बाद एसटीएफ उसके स्कूल के बारे में भी जानकारी जुटाने में लगी है। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ चार जून को हुआ था जिसमें सरगना केएल पटेल समेत 11 लोग जेल भेजे जा चुके हैं। सरगना से पूछताछ में पता चला था कि वह टीईटी में धांधली की कोशिश करते गिरफ्तार हुए चंद्रमा यादव के भी लगातार संपर्क में था।







चंद्रमा धूमनगंज स्थित एक स्कूल का प्रबंधक है और कई राजनेताओं से भी उसके संबंध होने की बात सामने आई थी। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के भंडाफोड़ मामले की जांच में जुटी एसटीएफ को यह भी पता चला है कि चंद्रमा व सरगना केएल पटेल ने पूर्व में कई अन्य परीक्षाओं में भी धाधली की। पिछले साल रेलवे परीक्षाओं में भी उन्होंने सेंध लगाने की कोशिश की थी। चंद्रमा से पूछताछ में सामने आया था कि वह अपने ही स्कूल से टीईटी के पेपर की फोटो खींचकर व्हाट्सएप पर सॉल्वरों तक भेजने वाला था जिसके बाद उसे सॉल्व कॉपी मिलती और वह इसे अपने संटिंग वाले परीक्षार्थियों तक पहुंचाता। यही वजह है कि एसटीएफ चंद्रमा के स्कूल के बारे में भी जानकारी जुटाने में लग गई है। पता लगाया जा रहा है कि इससे पहले अन्य किन-किन परीक्षाओं के लिए इस स्कूल को केंद्र बनाया गया। क्या उन परीक्षाओं में भी किसी तरह की धांधली हुई। मामले में औपचारिक रूप से एसटीएफ अफसर कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं।

69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में भी एसटीएफ ने किया है वांछित

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