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Sunday, September 20, 2026

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?


लखनऊः उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 28 सितंबर से सभी जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने शिक्षामित्रों के प्रति सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। साथ ही यह असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के स्थानांतरण आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।


विभागीय टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया। अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के बावजूद शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ाई गई है। संघ की मांग है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को नई शिक्षक भर्ती में पूर्व की भर्तियों की तरह 25 अंक का भारांक या वरीयता दी जाए।

Tuesday, April 7, 2026

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

20 दिनों में सेवा सुरक्षा बहाल न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे माध्यमिक शिक्षक

लखनऊ। राजधानी के ईको गार्डन धरना स्थल पर सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की बहाली पर सरकार को अल्टीमेटम दिया। 20 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा बहाली न होने पर शिक्षक सड़क पर उतरेंगे और कलमबंद हड़ताल करेंगे। माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के आह्वाहन पर प्रदेशभर के शिक्षक ईको गार्डन धरना स्थल पर सुबह से एकत्रित होने लगे। दोपहर बाद मुख्यमंत्री आवास से शिक्षक प्रतिनिधियों का बुलावा आया।

इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारियों ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि 20 से 25 दिन के अंदर सेवा सुरक्षा की धारा 21,18 और 12 को बहाल करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में शामिल किया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक शिक्षकों का उत्पीड़न करते हैं। यह बंद होना चाहिए। यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को 25 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इनमें एडेड माध्यमिक विद्यालयों की राजकीयकरण की मांग की गई है। 



सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर माध्यमिक शिक्षकों की रैली आज, लखनऊ के ईको गार्डन में जुटेंगे हजारों शिक्षक

06 अप्रैल 2026
लखनऊः अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक सेवा सुरक्षा और स्कूलों के राजकीयकरण की मांग को लेकर सोमवार को अपनी ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय रैली में वे अपनी मांगों को लेकर मुखर होंगे।


संघ के नेताओं ने प्रदेश भर के शिक्षकों से अपील की है कि वे यहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं। प्रदेश में इस समय 4512 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें करीब 67 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों की मुख्य मांग है कि उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। संघ का आरोप है कि सेवा सुरक्षा खत्म होने के कारण प्रबंधकों का दबाव बढ़ गया है।

संगठन के नेताओं का कहना है कि इसी के चलते प्रदेश में अब तक करीब 180 शिक्षकों को निलंबित और 120 शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। उनकी यह भी मांग है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम में सेवा सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट प्रविधान शामिल किए जाएं, ताकि भविष्य में शिक्षकों के साथ मनमानी न हो सके।

Sunday, April 5, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर दिखाया दम, केंद्र सरकार से पुराने कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न लेने के साथ कानून बनाने की मांग की

05 अप्रैल 2026
नई दिल्ली: देशभर के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। टीचर फेडरेशन आफ इंडिया (टीएफआइ) के नेतृत्व में आयोजित रैली में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए। रैली में टीएफआइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि यह फैसला देशभर के करीब 20 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को खत्म करने के लिए कानून बनाया जाए और पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।

रैली में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षकों का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। दरअसल, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी अनिवार्य किया गया था।

हालांकि, हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी दो वर्षों के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की।


शिक्षकों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पहले के शिक्षकों से भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ सैकड़ों शिक्षकों ने शनिवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन भारतीय शिक्षक संघ के तत्वाधान में किया गया। भारतीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त किया जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीआई 2009 अधिनियम लागू होने से पहले कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके खिलाफ बीते छह महीने से अधिक समय के दौरान शिक्षकों ने कई सांसद व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व अन्यों से मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर शिक्षकों के समर्थन में कानून बनाने की मांग की। इस संबंध में भारतीय शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को शनिवार को पत्र भी लिखा।

उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षक प्रभावित : उत्तर प्रदेश के कई शहरों से आए शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट का फैसला व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक लाख 87 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षकों ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की उम्र अब 50 से 55 साल के बीच है और जिन्होंने 30-35 साल तक सेवा दी है। उनसे दोबारा इस तरह की परीक्षा देने की अपेक्षा करना गलत है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी या जज से 20-30 साल बाद फिर से परीक्षा या शारीरिक परीक्षण नहीं लिया जाता, वैसे ही शिक्षकों के साथ भी ऐसा नहीं होना चाहिए।


टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

नई दिल्ली। राजधानी के रामलीला मैदान में शनिवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 13 से अधिक राज्यों से पहुंचे हजारों शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा। इस बड़े प्रदर्शन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर पुराने शिक्षकों को राहत देने की मांग की।

प्रदर्शन करने आए शिक्षक "टीईटी अनिवार्यता वापस लो", "शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो" और "शिक्षक बचाओ, शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारी शिक्षका सुनीता सिंह ने बताया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक टीईटी पास करने का आदेश देना अनुचित है। ऐसा आदेश शिक्षकों के अनुभव और मेहनत का अपमान है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह आंदोलन उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।

सुबह से ही रामलीला मैदान के आसपास शिक्षकों की भारी भीड़ जुटने लगी थी, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े। देशभर से आए शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के शिक्षकों की आवाज है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में गरजे

प्रयागराज। आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ रामलीला मैदान नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित देशव्यापी प्रदर्शन में प्रयागराज से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य

अतिथि सांसद जगदंबिका पाल के साथ मंच साझा किया और कहा कि लाखों शिक्षकों के सामने संकट आया है। इस संकट से लड़ने का काम टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ही करेगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के विनोद कुमार पांडेय आदि ने प्रदर्शन में भाग लिया।



यूपी के शिक्षकों ने दिल्ली में विरोध कर दिखाई ताकत

लखनऊ। देशभर के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध-प्रदर्शन किया। यूपी से भी बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे और केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को कानून बनाकर रोकने की मांग की।

टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक रामलीला मैदान पहुंचे। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2011 के पूर्व भर्ती हुए शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया जाना उचित नहीं है। तमाम शिक्षक रिटायर होने की कगार पर हैं और अब वह टीईटी पास करें तो उनकी नौकरी बचे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार कानून बनाकर रोके, जिससे देश भर के 20 लाख और यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों के जीविकोपार्जन पर संकट न आए। उन्होंने कहा कि शिक्षक इसके विरोध में लगातार आंदोलन करते रहेंगे। शिक्षकों की रैली में सांसद जगदंबिका पाल भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि वह शिक्षकों के साथ हैं।




टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे देश भर के शिक्षक, केंद्र सरकार से राहत के लिए कानून बनाने की करेंगे मांग

03 अप्रैल 2026
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता किए जाने के विरोध में चार अप्रैल को दिल्ली में देशभर के शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले रामलीला मैदान में देशभर से लाखों शिक्षक एकजुट होकर अपनी ताकत का एहसास कराएंगे।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी करने की अनिवार्यता अन्यायपूर्ण है। जब यूपी में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया है तो उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर इसकी अनिवार्यता लागू करने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। प्रदेश से एक लाख से अधिक शिक्षक रामलीला मैदान दिल्ली में पहुंच रहे हैं।

इस क्रम में गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव समेत कई जिलों के शिक्षक आज बृहस्पतिवार को ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने निर्णय को पूर्व के प्रभाव से लागू करना, सही नहीं है। इससे देश भर के लाखों शिक्षकों की जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार इससे राहत देने के लिए कानून बनाए। 



टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की महारैली

11 मार्च 2026
लखनऊ। देश भर के बेसिक शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों की दिल्ली के रामलीला मैदान में चार अप्रैल को महारैली होगी। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) ने मंगलवार को दिल्ली में बैठक कर इसकी घोषणा की।


टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई वार्ता में उन्होंने आश्वासन दिया था कि सभी शिक्षकों के सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए कानून बनाया जाएगा। किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे देश भर के शिक्षकों में काफी नाराजगी है।

इसके लिए वे चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में दिल्ली में महारैली की जाएगी। बैठक में राममूर्ति ठाकुर, संजय सिंह, योगेश त्यागी, शिवशंकर पांडेय, विपिन प्रकाश शर्मा, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, केदार जैन, मनीष मिश्रा, वेद प्रकाश मिश्रा, रविंद्र राठौर, कल्पना राजौरिया आदि उपस्थित थे।

Wednesday, March 18, 2026

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

18 मार्च 2026
प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के मामले में 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस एजी मसीह की बेंच में होगी। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर सरकार से याची लाभका प्रस्ताव सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि पीड़ित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर याची लाभ' की मांग कर रहे हैं। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती सूची को रद कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था, जिसमें आरक्षण नियमावली के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। 

अब प्रकरण पिछले 18 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पैरवी न होने के कारण मामला लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि सरकार 19 मार्च की सुनवाई में 'याची लाभ' का प्रस्ताव प्रस्तुत करती है, तो यह विवाद समाप्त हो सकता है।



69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा निदेशालय

10 मार्च 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय घेर लिया। बेसिक शिक्षा निदेशक से मिले आश्वासन के बाद भी असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने धरना जारी रखा। बाद में पुलिस ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डेन पहुंचाया।


आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग की। अभ्यर्थियों की तरफ से धनंजय गुप्ता ने कहा कि सरकार खुद ही जाकर नई डेट ले आती है। ऐसे में उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। धरने में राज बहादुर, हसीन, अनूप गुप्ता, बृजेश सिंह, श्यामलता सिंह शामिल थे। वहीं, पिछडा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक में अभ्यर्थियों ने फिर से याची लाभ देने की मांग उठाई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के साथ ही 29334 गणित-विज्ञान भर्ती के अभ्यर्थी भी सोमवार को धरना देने पहुंचे।

इसलिए आक्रोश : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

Friday, February 27, 2026

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रदर्शन कर दिखाई ताकत और प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे  शिक्षक, केंद्र सरकार से मामले में स्पष्ट रुख की मांग, आंदोलन की चेतावनी भी दी 


लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ व उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन कर टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य करने का जमकर विरोध किया। जिलों में शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा।


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने से पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ गया है। इससे देश भर के शिक्षक आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में जिलों में बीएसए कार्यालय पर एकत्र होकर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ हुंकार भरी। उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि अध्यादेश लाकर शिक्षकों को राहत दे। उन्होंने बताया कि 7 मार्च को दिल्ली में टीएफआई की बैठक होगी। इसमें सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष व महासचिव भाग लेंगे। बैठक में दिल्ली में होने वाली रैली की तिथि घोषित की जाएगी।

पीएम को भेजे ज्ञापन में आरटीई लागू होने की तिथि से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग की गई है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्रालय जल्द से जल्द इस मामले में संसद में अध्यादेश लाकर राहत दे। 



23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे यूपी के शिक्षक 




टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ यूपी के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय 

23 फरवरी 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। राजधानी में रविवार को हुई बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (जेटीएफआइ) का गठन किया और शिक्षक हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

बैठक में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि टीईटी के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए हर मोर्चे पर संघर्ष जारी रखने की बात कही। 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी कर नौकरी प्राप्त की है, ऐसे में अब उन्हें टीईटी के बिना अपात्र बताना पूरी तरह गलत है। 

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी ने सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहने की बात कही। वहीं बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि महासंघ शिक्षकों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देगा, संघर्ष अब और तेज होगा। 

बैठक में निर्णय लिया गया कि नौ मार्च से 15 मार्च तक 'शिक्षकों की पाती' नाम से ईमेल और पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा।


टीईटी अनिवार्यता का विरोध तेज, सरकार के रुख से खुश नहीं है प्रदेशभर के शिक्षक, X पर #JusticeForTeachers ग्लोबल ट्रेंडिंग में टॉप पर

23 फरवरी 2026
प्रयागराज : टीईटी की अनिवार्यता पर प्रदेश सरकार का रुख स्पष्ट न होने से नाराज परिषदीय शिक्षकों ने रविवार दोपहर दो से चार बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया। जस्टिस फॉर टीचर्स हैशटैग से चलाया गया अभियान एक समय पूरी दुनिया में टॉप ट्रेंड कर रहा था। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले देशभर के सरकारी शिक्षकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रयागराज से भी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ के सदस्यों ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताई।

शिक्षकों का कहना है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता उचित नहीं है। उनकी जब नियुक्ति हुई तब आवश्यक सारी अर्हताएं पूरी करते थे। नियुक्ति के सालों बाद कोई नियम लागू करने के कारण हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। विरोध अभियान के क्रम में सभी शिक्षक 23 से 25 फरवरी तक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को एक से चार बजे तक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना देंगे और जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के सभी शिक्षक महारैली करके भारत सरकार को ज्ञापन देंगे।





टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आज सोशल मीडिया पर अभियान चलाएंगे शिक्षक

22 फरवरी 2026
लखनऊ। देश-प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर शिक्षक एक बार फिर से आंदोलन तेज करेंगे, ताकि इस मामले में दबाव बनाकर जल्द से जल्द सकारात्मक परिणाम लिया जा सके। इसके लिए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक की ओर से 22 फरवरी को दोपहर में सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 23 फरवरी से शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 


टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में प्रदेश के कई शिक्षकों संगठन आए एक साथ, मार्च के अंत में दिल्ली में रैली करेंगे 

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए शिक्षक संगठन फिर आंदोलन की राह पर हैं। इस बार प्रदेश के कई शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले आंदोलन करने के लिए तैयार हुए हैं। इसका कार्यक्रम जारी कर दिया गया है।

रिसालदार पार्क स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने तय किया कि 27 जुलाई 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से राहत देने के लिए वे सभी मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

बैठक में तय किया गया कि 22 फरवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक सोशल मीडिया एक्स पर अभियान चलाया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। 26 फरवरी को बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। यहां डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में महारैली की जाएगी।

बैठक में टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, उप्र महिला शिक्षक संघ की डॉ. सुलोचना मौर्य, संजय सिंह, शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, अनंत कुमार, पंकज अवस्थी, प्रीति सिंह, ज्योति सिंह आदि उपस्थित हुए। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने भी अपनी सहमति दी है।


Tuesday, September 30, 2025

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा


मुजफ्फरनगर । भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के शैक्षिक प्रकोष्ठ ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शुक्रवार को एक बड़ा मोर्चा खोलते हुए यहां ऐतिहासिक शिक्षक महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंच से ऐलान किया कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे और किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने दी जाएगी।


नारायण ग्रैंड रिसॉर्ट पर आयोजित इस महापंचायत में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने शिक्षकों को एकजुट होकर संगठित संघर्ष का आशन किया। इस मौके पर पूर्वांची चेयरमैन व बीकेयू महासचिव जहीर फारूकी ने टीईटी लागू करने के फैसले को गलत ठहराया।


 भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर, 2025 के आदेश और एनसीटीई की 29 मई, 2017 की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करना अव्यवहारिक है। उन्होंने 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से मुक्त रखने की मांग की।


महापंचायत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया कि टीईटी के मुद्दे पर शिक्षक समुदाय के हित में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए। इसी मंच से राकेश टिकैत ने रविंद्र सिंह को भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया।


महापंचायत की अध्यक्षता गुर्जर खिलारी सिंह ने की, जबकि मंच संचालन अनु चौधरी, मेराज खालिद रिजवी, डॉ. संजीव कुमार वर्मा और विनेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। जिला अध्यक्ष रामरतन बालियान ने सभी अध्यापकों को टीईटी से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया।


मंच पर प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री ज्योति चौधरी, महासचिव मनीष गोयल, कार्यालय प्रमुख विनेश कुमार के अलावा सहारनपुर मंडल अध्यक्ष रोहित जटराणा, मेरठ जिला अध्यक्ष कवीन्द्र तोमर, शामली जिला अध्यक्ष प्रमेन्द्र तोमर, बागपत जिला अध्यक्ष हरेन्द्र तोमर, बुलन्दशहर जिला अध्यक्ष शक्ति प्रताप सिंह, अमरोहा जिला अध्यक्ष राकेश चहल, हापुड़ जिला अध्यक्ष अशु सिद्धू और सम्भल जिला अध्यक्ष रुकमेश चहल मौजूद रहे।


 मुजफ्फरनगर से कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित तोमर के नेतृत्व में नरेंद्र गोस्वामी, विवेक कुमार, क्षितिज नेगी, रविंद्र कोठारी, कैलाश चंद, सपना सिंह सहित हजारों शिक्षक अपने-अपने ब्लॉक से पहुंचे। मोहित बालियान, जसराज सिंह, शिवम शर्मा, सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, बालकिशोर, तुषार गोयल, सील विश्नोई, संजय राठी, नीरज कुमार, रणवीर सिंह, रामकुमार, अमित कुमार त्यागी, सुशील कुमार, सुमन सैनी, रितु त्यागी, पूजा शर्मा, रितु रतु वालियां, वालियां, गौरव गौरव कुमार, कु ओमपाल सिंह, पूनम पवार, इरफान अहमद, खुशनुद अहमद, मुस्तफा अहमद, प्रियंका त्यागी, शिखा शर्मा, मधु वर्मा, रश्मि पवार, वंदना शर्मा, निशु, अरुण कुमार, राजेश कुमार, चरण सिंह, अरविंद कुमार, उपासना सिंह सहित हजारों अध्यापक-अध्यापिकाएं महापंचायत में शामिल हुए। विभिन्न जनपदों से आए शिक्षकों ने टीईटी के खिलाफ एकजुटता दिखाई और अधिकारों की आवाज बनकर इतिहास रच दिया

Wednesday, August 20, 2025

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम के आवास पर किया प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज हैं पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम के आवास पर किया प्रदर्शन,  सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज हैं पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी


लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थी 'केशव चाचा न्याय करो' के नारे लगा रहे थे। ये अभ्यर्थी पिछड़े वर्ग के थे और सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न होने के चलते नाराज थे।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों की पुलिस बल से नोकझोक भी हुई। अभ्यर्थियों ने बताया कि हाई कोर्ट का जो फैसला आया था सरकार ने उसे जानबूझ कर लटका दिया। इससे यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सरकार के पास पर्याप्त समय था वह चाहती तो हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले का पालन करके सबके साथ न्याय कर सकती थी।


प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब परिणाम आया तो इसमें आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट के डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में निर्णय दिया और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का आदेश दिया। पहले भी इस संबंध में अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की थी जिसमें मौर्य ने अन्याय न होने देने की बात कही थी।




69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिक शिक्षा मंत्री का आवास, 
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पैरवी करने की मांग, अपर मुख्य सचिव से मिले, फिर भी नहीं बन पाई बात


लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पैरवी नहीं की जा रही है। पुलिस अभ्यर्थियों को बलपूर्वक ईको गार्डेन ले गई। दोपहर बाद इनकी अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार से वार्ता हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला।


अभ्यर्थियों ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती में अनियमितता के कारण आरक्षित वर्ग के काफी अभ्यर्थी नौकरी पाने से वंचित हैं। इस मामले की लंबी सुनवाई हाईकोर्ट में हुई और फैसला उनके पक्ष में आया लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण उसका पालन नहीं हुआ और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी पक्ष रखने से पीछे हट रही है।


हमारी मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी करे और जल्द इस मामले का निस्तारण कराए। सुप्रीम कोर्ट में अब तक 20 से अधिक तारीख लगी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल व धनंजय गुप्ता ने बताया कि उनकी मंत्री से मुलाकात नहीं हुई। पुलिस उन्हें जबर्दस्ती उठाकर ईको गार्डेन ले गई।


वहीं पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप व प्रदेश संरक्षक भास्कर सिंह ने बताया कि 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित थी। किंतु अब यह केस अनलिस्टेड में चला गया है। अब यह नहीं पता है कि इसकी अगली सुनवाई कब होगी।

Sunday, July 20, 2025

सीएम योगी से नहीं मिल पा रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों में मायूसी, 27 मई से 19 जून तक ईको गार्डन में दिया था धरना

सीएम योगी से नहीं मिल पा रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों में मायूसी, 27 मई से 19 जून तक ईको गार्डन में दिया था धरना


20 जुलाई 2025
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से मुलाकात न कराए जाने को लेकर उनमें मायूसी है। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगों को रखने के लिए 27 मई से 19 जून तक ईको गार्डन में धरना दिया था।

19 जून को मुख्यमंत्री के ओएसडी एनकेएस चौहान ने मुख्यमंत्री से वार्ता का आश्वासन देकर धरना खत्म कराया था। मगर एक महीने बीतने के बाद भी सीएम से मुलाकात समय न मिलने से शिक्षामित्र निराश हैं। 

शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह ने बताया कि टीईटी पास शिक्षामित्र सहायक अध्यापक पद पर समायोजन और सम्मानजनक मानदेय देने की मांग कर रहे हैं। 



आश्वासन पर टीईटी पास शिक्षामित्रों का धरना स्थगित

20 जून 2025
लखनऊ। टीईटी पास शिक्षामित्रों ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के ओएसडी से आश्वासन मिलने के बाद धरना स्थगित कर दिया। शिक्षामित्र स्थायीकरण करने, विभागीय टेट करवाने, सम्मानजनक मानदेय और समान सुविधाएं और महिलाओं का अंतरजनपदीय स्थानांतरण शेड्यूल आदि की मांग को लेकर बीते 24 दिन से ईको गार्डेन में धरना दे रहे थे। 



टीईटी पास शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से नहीं हुई मुलाकात, धरना जारी रखेंगे
18 जून 2025
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की आस में बीते 22 दिन से ईको गार्डेन में धरना दे रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों की मंगलवार को भी मुख्यमंत्री से मुलाकात नही हो पाई। प्रशासन के अधिकारियों ने सीएम से मुलाकात कराने का आश्वासन देकर सीएम आवास बुलाया था। सीएम से मुलाकात न होने के बाद शिक्षामित्रों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। 

शिक्षक/शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले टीईटी पास शिक्षामित्र 27 मई से ईको गार्डेन में धरना दे रहे हैं। शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की लगातार मांग को देखते हुए प्रशासन के अधिकारियों ने मंगलवार को मुलाकात कराने का आश्वासन देकर सीएम आवास बुलाया था।

 संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने बताया कि सीएम आवास पहुंचने के बाद अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के बाहर होने की वजह से मुलाकात नही हो सकेगी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के ओएसडी से जनता दरबार की तरह मुलाकात कराई और ज्ञापन दिलवाया। 


सीएम योगी से मिलने के लिए टीईटी पास शिक्षामित्रों ने भोजन त्यागकर किया प्रदर्शन

14 जून 2025
लखनऊ। टीईटी पास शिक्षामित्रों ने शनिवार को एक दिन का भोजन त्याग कर प्रदर्शन किया। शिक्षामित्र स्थायी किए जाने की मांग के लिए 19 दिन से भीषण गर्मी में ईको गार्डन में धरना दे रहे हैं। शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले टीईटी पास शिक्षामित्र 27 मई से धरना दे रहे हैं। लेकिन, मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे नाराज 11 शिक्षामित्रों ने एक दिन का भोजन त्याग कर सीएम से मुलाकात की मांग की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह ने सीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि 10 हजार रुपये मानदेय में परिवार पालना मुश्किल हो रहा है। 



मुख्यमंत्री से मुलाकात करने की मांग पर अड़े टीईटी पास शिक्षामित्र

13 जून 2025
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की आस लगाए टीईटी पास शिक्षामित्रों ने बृहस्पतिवार को भी भीषण गर्मी में धरना जारी रखा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात होने तक उनका धरना जारी रहेगा।

शिक्षक/शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले टीईटी पास शिक्षामित्र बीती 27 मई से ईको गार्डेन में धरना देकर स्थायी करने की मांग कर रहे हैं। मांगों पर कोई सुनवाई न होने पर शिक्षा मित्र मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग पर अड़ गए हैं। 

समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने बताया कि 10 हजार रुपये महीना मानदेय दिया जाता है। इसमें परिवार का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। शासन स्तर पर कोई सुनवाई नही हो रही है। अब मुख्यमंत्री से ही न्याय ही आस बची है। उन्होंने कहा कि हम लोग मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनके सामने अपनी समस्या रखना चाहते हैं।



शिक्षामित्रों ने सीएम योगी को पोस्टकार्ड भेज लगाई न्याय की गुहार, स्थायी करने की मांग को लेकर 16 दिन से गर्मी में शिक्षामित्र दे रहे हैं धरना 

12 जून 2025
लखनऊ। स्थायी करने की मांग को लेकर बीते 16 दिन से धरना दे रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम लिखे पोस्ट कार्ड लहराकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को पोस्ट कार्ड भेज कर मुलाकात का समय मांगा और न्याय की गुहार लगाई।

 इस दौरान सीएम को डाक के जरिये करीब 80 पोस्टकार्ड भेजे गए। शिक्षक/शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले टीईटी पास शिक्षा मित्र बीती 27 मई से भीषण गर्मी में ईको गार्डेन में धरना दे रहे हैं। मांगों पर सुनवाई न होने पर शिक्षा मित्रों ने पोस्ट कार्ड पर मुख्यमंत्री के नाम संदेश लिख कर प्रदर्शन किया।

समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री को 80 पोस्ट कार्ड भेजे गए हैं, जिसमें उनसे मुलाकात का समय देने और समस्या को दूर करने की गुहार लगाई गई है। उन्होंने सीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि 10 हजार रुपये मानदेय में परिवार का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इतना कम मानदेय भी साल में सिर्फ 11 महीना ही दिया जाता है। 




आज से लखनऊ में जुटेंगे टीईटी पास शिक्षामित्र, 15 दिनों से धरना दे रहे शिक्षामित्रों ने शासन की उदासीनता के चलते आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय

11 जून 2025
लखनऊ। स्थायी किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को ईको गार्डेन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से टीईटी पास शिक्षामित्रों का हुजूम जुटेगा। बीते 15 दिनों से धरना दे रहे शिक्षामित्रों ने शासन की उदासीनता के चलते आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। 

उन्होंने शिक्षामित्रों से धरने में शामिल होने का आह्वान किया है। शिक्षक/शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले 27 मई से टीईटी पास शिक्षामित्र ईको गार्डेन में धरना दे रहे हैं। समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने कहा कि तपती धूप में धरना देने के बावजूद शासन शिक्षामित्रों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 



शिक्षामित्रों ने केक काटकर मनाया सीएम योगी का बर्थडे, मांगा स्थायी करने का रिटर्न गिफ्ट 

05 जून 2025
लखनऊ। स्थायी करने की मांग के लिए ईको गार्डन में धरने के दसवें दिन बृहस्पतिवार को टीईटी पास शिक्षामित्रों ने सीएम योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन मनाया। शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह की अगुवाई में शिक्षामित्रों ने सीएम योगी के जन्मदिन पर केक काटा और लड्डू बांटा। साथ ही पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। 

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सीएम हमारे अभिभावक हैं। ईको गार्डन में शिक्षामित्र दस दिन से धरना दे रहे हैं। ऐसे में सीएम को चाहिए कि वे हमारे त्याग को देखकर हम लोगों के जीवन में हरियाली भरने का काम करें। धरने में प्रदेश महामंत्री अनुज कुमार त्रिपाठी, संगठन मंत्री विकास शर्मा, सचिव उबैद अहमद सिद्दीकी, प्रवक्ता मनोज कुमार द्विवेदी, मीडिया प्रभारी नेमचंद्र वर्मा आदि शामिल हुए। 




मांग पूरी होने की उम्मीद लिए टीईटी पास शिक्षामित्रों ने किया सुंदरकांड का पाठ
 
04 जून 2025
लखनऊ। स्थायी करने की मांग के लिए आठ दिनों से धरना दे रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों ने मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ कर प्रदर्शन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह हनुमान जी बिगड़े काम बनाते हैं उसी तरह सीएम शिक्षामित्रों का काम बनाएंगे।

 शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने कहा कि आठ दिन से इस भीषण गर्मी में शिक्षामित्र मुख्यमंत्री से मिलने की आस लगाए हैं। संगठन मंत्री विकास शर्मा एवं महामंत्री अनुज त्रिपाठी ने कहा कि हनुमान जी की तरह सीएम योगी हमारे कष्टों को दूर करें।



स्थायी किए जाने के लिए सात दिनों से धरना दे रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों ने सोमवार को हाथों में रोटी लेकर प्रदर्शन किया

3 जून 2025
लखनऊ। स्थायी किए जाने के लिए सात दिनों से धरना दे रहे टीईटी पास शिक्षामित्रों ने सोमवार को हाथों में रोटी लेकर प्रदर्शन किया। अपने बच्चों के साथ ईको गार्डन पहुंचे शिक्षामित्रों ने कहा कि बेहद कम मानदेय में परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है।

शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने कहा कि 10 हजार रुपये मानदेय में परिवार की रोटी चला पाना मुश्किल हो रहा है। इतना कम मानदेय साल में सिर्फ 11 महीना ही दिया जाता है। 

उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा तो कुशल श्रमिकों का पारिश्रमिक है। उन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश की तरह यूपी के टीईटी पास शिक्षामित्रों को भी नियमित करने की मांग की। प्रदेश संगठन मंत्री विकास शर्मा ने कहा कि जिन शिक्षामित्रों ने टीईटी नहीं पास की है, उन्हें टीईटी की योग्यता को पूर्ण कराते हुए स्थायी करने की व्यवस्था की जाए।




टीईटी पास शिक्षामित्र आज हाथ में रोटी लेकर करेंगे प्रदर्शन

2 जून 2025
लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास शिक्षामित्रों का धरना प्रदर्शन छह दिनों से ईको गार्डन में जारी है। अब दो जून को शिक्षामित्र हाथ में रोटी लेकर प्रदर्शन करेंगे। शिक्षक शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले शिक्षामित्रों ने रविवार को मानव श्रृंखला बनाकर अपनी आवाज बुलंद की। 

प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह ने बताया कि टीईटी पास शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार शिक्षक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मानदेय बढ़ाने की मांग की। मानव श्रृंखला में लखनऊ, अमेठी, चंदौली, गोरखपुर, शाहजहांपुर, जालौन, उन्नाव, वाराणसी, बलरामपुर, सहारनपुर के शिक्षामित्र शामिल रहे। 





सुनवाई न होने से नाराज टेट पास शिक्षामित्रों ने झाडू लगाकर जताया विरोध, नियमित करने की मांग को लेकर  धरना पांचवें दिन भी रहा जारी

01 जून 2025
लखनऊ। टीईटी पास शिक्षामित्रों ने शनिवार को धरना स्थल पर झाडू लगाकर प्रदर्शन किया। नियमित करने की मांग के लिए ये शिक्षामित्र पांच दिन से ईको गार्डन में धरना दे रहे हैं। सुनवाई न होने से नाराज शिक्षामित्रों ने सफाई अभियान चलाकर विरोध जताया। 

शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में टीईटी और सीटीईटी पास शिक्षामित्रों को नियमित करते हुए सहायक अध्यापक बना दिया गया, लेकिन प्रदेश में एनसीटीई के मानकों को पूरा करने के बावजूद करीब 50000 प्रशिक्षित शिक्षक आंदोलन के लिए मजबूर हैं। 

उन्होंने बताया कि टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण करने के बावजूद प्रदेश में शिक्षामित्रों को 333 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से महीने में मात्र 10 हजार रुपये ही मानदेय मिलता है। ये मानदेय सिर्फ 11 महीने ही दिया जाता है। उन्होंने शिक्षामित्रों को स्थायी करने की मांग की। 



स्थायी करने की मांग के लिए टीईटी पास शिक्षामित्रों का धरना जारी

29 मई 2025
लखनऊ। टीईटी पास शिक्षामित्रों ने स्थायी करने की मांग की है। मांग को लेकर ईको गार्डन में उनका धरना दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। उन्होंने सीएम से योग्य शिक्षामित्रों को स्थायी करने की मांग की। 

शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने बताया कि प्रदेश में करीब 50000 शिक्षामित्र टीईटी व सीटीईटी पास है जो एनसीटीई के शिक्षक बनने की योग्यता के मानकों को पूरा करते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में टीईटी और सीटीईटी पास करने वालों को नियमित करते हुए सहायक अध्यापक बना दिया गया है। लेकिन, यूपी में शिक्षामित्रों को 333 रुपये रोजाना के हिसाब से महीने में मात्र 10 हजार रुपये ही मानदेय दिया जा रहा है। 

इतने कम मानदेय में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक मानदेय बढ़ाया जाए। 



स्थायी करने के लिए टीईटी पास शिक्षामित्रों ने दिया धरना

28 मई 2025
लखनऊ। टीईटी पास शिक्षामित्रों ने मंगलवार को ईको गार्डन में धरना देकर स्थायी करने की मांग की। शिक्षक-शिक्षामित्र उत्थान समिति के बैनर तले जुटे शिक्षामित्रों की अगुवाई कर रहे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुडडू सिंह ने कहा कि प्रदेश में करीब 1.46 लाख शिक्षा मित्र तैनात हैं। इनमें से 50 हजार टीईटी व सीटीईटी पास हैं। 


उन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों की तर्ज पर इन शिक्षा मित्रों को योग्यता और अनुभव के आधार पर नियमित करने की मांग की। 

कहा, मांगे पूरी होने तक शिक्षामित्रों को 12 प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों के समान चिकित्सकीय अवकाश, 14 सीएल और अन्य अवकाश देने की भी मांग की। 



प्रदर्शन में फूटा प्रदेश के शिक्षामित्रों का दर्द, 'मजदूर से भी कम वेतन, नौतपा में तपने को मजबूर', महज 10 हजार रु. मानदेय, लेकिन स्थायी नियुक्ति नहीं


लखनऊ । सीटीईटी (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) पास शिक्षामित्रों ने हंगामा किया। इको गार्डन में धरने पर बैठे शिक्षामित्रों ने कहा- सालों से महज 10 हजार के मानदेय पर नौकरी कर रहे हैं। एनसीटी की गाइडलाइन के तहत सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती पाने की योग्यता रखते है। इसके बाद भी सरकार सहायक अध्यापक पद पर परमानेंट तैनाती नहीं दे रही है।

इको गार्डन में धरने की अगुवाई कर रहे प्रदेश अध्यक्ष गुड्डू सिंह ने बताया- करीब 25 सालों से हम शिक्षामित्र विभाग के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौतपा में तपते हैं। स्कूलों के विकास में शिक्षकों से कम हम शिक्षामित्रों का योगदान नहीं है। जहां शिक्षक मना करते हैं वहां शिक्षामित्र जाते हैं

सिंह ने कहा, जहां शिक्षक काम करने से मना करते हैं। वहां शिक्षामित्र बखूबी काम करता है। बावजूद इसके आज प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा शिक्षक टीईटी - सीटीईटी क्वालीफाई करने के बावजूद सहायक अध्यापक की तैनाती पाने को तरस रहे हैं।


भाजपा सरकार के आठ साल बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई

गुड्डू सिंह ने कहा- साल 2017 से प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद हमें उम्मीद थी कि अब हमारी सुनवाई होगी। पर सरकार बने हुए 8 साल हो गए पर अब तक हमें सिर्फ भरोसा मिला। उन्होंने कहा- किसी से हमारी पीड़ा को समझा तक नहीं। कई सालों तक अफसरों ने टाइम पास किया, कोई कार्रवाई नहीं की। बेसिक शिक्षा मंत्री से भी हम मिले पर हमें न्याय नहीं मिला। अब सिर्फ मुख्यमंत्री से ही हमें उम्मीद है।

Monday, May 26, 2025

10 वर्षों से मानदेय वृद्धि नहीं होने से एमडीएम समन्वयक और कंप्यूटर ऑपरेटर नाराज, 26 मई को धरना प्रदर्शन की तैयारी

10 वर्षों से मानदेय वृद्धि नहीं होने से एमडीएम समन्वयक और कंप्यूटर ऑपरेटर नाराज, 26 मई को धरना प्रदर्शन की तैयारी 


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) समन्वयक व कंप्यूटर ऑपरेटरों का पिछले 10 वर्षों से मानदेय नहीं बढ़ा है। इससे इनमें नाराजगी है। अपनी मांगों को लेकर समन्वयक व ऑपरेटर 26 मई को प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन करेंगे। 


प्रदेश स्तरीय संगठन मध्यान्ह भोजन समन्वयक, कंप्यूटर ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने बताया कि एमबीए व एमसीए जैसी उच्च डिग्रीधारी समन्वयक व ऑपरेटर जिलाधिकारी व मंडलायुक्त स्तर पर योजना का संचालन कर रहे हैं, फिर भी उन्हें 10 वर्षों से वेतनवृद्धि नहीं मिली है। 


संघ का दावा है कि यदि 2012 के दस प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के प्रस्ताव को लागू रखा गया होता तो समन्वयकों को लगभग 75 हजार और ऑपरेटरों को 38 हजार मासिक मानदेय मिलना चाहिए था। 

Wednesday, May 14, 2025

सामान्य तबादले शुरू करने के लिए परिषदीय शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

सामान्य तबादले शुरू करने के लिए परिषदीय शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों ने मंगलवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय पर सामान्य तबादले शुरू की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने कहा कि वे कई साल से इसके लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन विभाग इस पर न तो कोई निर्णय ले रहा है न ही कोई सूचना दे रहा है। इससे शिक्षकों के बीच नाराजगी बढ़ रही है।


विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों की महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा से मुलाकात हुई। इसमें शिक्षकों ने वरिष्ठता आधारित तबादला नीति जारी करने और इसी मई-जून में गर्मी की छुट्टियों में सामान्य तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।


महानिदेशक ने इस पर सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया। महानिदेशक से मिलने वालों में राजीव गौड़, तीर्थमणि त्रिपाठी, हंसराज सिंह, अंशु सिंह, धर्मेन्द्र, ज्ञान प्रकाश, योगेन्द्र सिंह, हरेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र सिसोदिया, राहुल पुरोहित आदि शामिल थे।

Tuesday, April 22, 2025

सेवा सुरक्षा बहाली के लिए प्रदेश भर से आए माध्यमिक शिक्षकों ने भरी हुंकार, ईको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

सेवा सुरक्षा बहाली के लिए प्रदेश भर से आए माध्यमिक शिक्षकों ने भरी हुंकार,  ईको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर किया प्रदर्शन।


लखनऊ। सेवा सुरक्षा की बहाली के लिए सोमवार को शिक्षको ने अपनी आवाज बुलंद की। प्रदेशभर से ईको गार्डन में एकत्र हुए शिक्षको ने शिक्षक सेवा सुरक्षा की धारा 12, 18 एवं 21 को नए आयोग में जोड़ने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 12, 18 एवं 21 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 से निरसित (खारिज) कर दिया गया है।


इन तीनों धाराओं के उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में न होने से प्रदेशभर के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब से तीनों धाराएं समाप्त की गई है, प्रदेश में शिक्षकों का निलंबन और बर्खास्तगी का सिलसिला शुरू हो गया है। शिक्षक सेवा सुरक्षा के अभाव में भयभीत हैं।


प्रदेश संरक्षक डॉ. हरिप्रकाश यादव तथा प्रदेश प्रवक्ता श्रवण कुमार कुशवाहा ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 निरसित होने के कारण सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति बीते डेढ़ वर्ष से बंद है और इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 प्रभावी है। इस मौके पर दीपक सिंह पुंडीर, प्रदेश मंत्री प्रमोद कुमार पाठक, पंकज सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रमोद पाल, सुधाकर ज्ञानार्थी आदि ने संबोधित किया।

Thursday, December 19, 2024

माध्यमिक शिक्षकों ने घेरा निदेशालय, दिनभर चले प्रदर्शन में सेवा सुरक्षा के साथ पदोन्नति व पेंशन की उठाई मांग

माध्यमिक शिक्षकों ने घेरा निदेशालय, दिनभर चले प्रदर्शन में सेवा सुरक्षा के साथ पदोन्नति व पेंशन की उठाई मांग


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षकों ने बुधवार को पार्क रोड स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के शिविर कार्यालय का घेराव किया। दिनभर चले प्रदर्शन के बाद, शाम चार बजे शिक्षकों ने सचिवालय के घेराव के नियत से कदम बढ़ाया तो पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। इस दौरान शिक्षकों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई।


सभी शिक्षक पहले तो निदेशालय के सामने शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। जैसे ही माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने सचिवालय की ओर कदम बढ़ाने के लिए शिक्षकों से कहा वैसे ही पुलिस भी सतर्क हो गई। 


इस बारे में प्रादेशिक उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 21 हमारे पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने समाप्त नही होने दी थी। हम भी सेवा सुरक्षा संबंधी धारा बहाल कराएंगे।


उन्होंने कहा हमारी मांग है कि शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी धारा 12, प्रधानाचार्यों की तदर्थ पदोन्नति संबंधी धारा 18, तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण निःशुल्क चिकित्सा सुविधा सरकार की ओर से दी जाए। 


शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि एक वर्ष बीतने के बाद भी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा संबंधी धारा 21 को बहाल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा अब इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो अत एकमात्र संघर्ष का ही रास्ता है।

Tuesday, December 10, 2024

नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव, रिक्त रह गए 27,713 पदों पर भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुकी है हरी झंडी

नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव, रिक्त रह गए 27,713 पदों पर भर्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुकी है हरी झंडी

हाईकोर्ट का आदेश, दो माह में पूरी करनी है 68,500 में से शेष रह गए पदों पर भर्ती 


प्रयागराज। परिषदीय विद्यालयों में नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए डीएलएड अभ्यर्थियों ने सोमवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव किया। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दो माह में नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी अभ्यर्थियों को राहत मिल चुकी है। आयोग ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।


मामला परिषदीय विद्यालयों में 68,500 शिक्षक भर्ती का है, जिसमें 27,713 पद खाली रह गए थे। अभ्यर्थी चाहते थे कि कटऑफ गिराकर रिक्त पदों को भरा जाए लेकिन हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 27,713 पदों पर नई भर्ती की जाए।


कटऑफ गिराकर रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर कुछ अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट भी गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उनकी याचिका खारिज हो गई। अभ्यर्थी चाहते हैं कि रिक्त पदों पर नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती शीघ्र शुरू की जाए।


इस मसले पर डीएलएड छात्रों ने सोमवार को शिक्षा सेवा चयन आयोग का घेराव करते हुए ज्ञापन सौंपा और पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की आयोग के सचिव से वार्ता भी हुई। डीएलएड संघ के अध्यक्ष रजत सिंह का कहना है कि छह वर्षों से ज्यादा समय से प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन नहीं आया है और पद रिक्त होने के बावजूद बेरोजगार अभ्यर्थी नौकरी के लिए भटक रहे हैं।


रजत ने बताया कि वार्ता के दौरान आयोग के सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी कि नई शिक्षक भर्ती के लिए विभागों और बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र भेज दिया गया है। आयोग भी प्रयासरत है कि नई शिक्षक भर्ती जल्द शुरू की जाए। जल्द ही संबंधित विभागों के साथ बैठक कर इस पर निर्णय लिया जाएगा। आयोग के घेराव के दौरान तेज प्रताप यादव, नीरज सिंह, धर्मवीर मौर्या, अजीत यादव, रोहित तिवारी, आकाश शुक्ला, शिवम सिंह आदि मौजूद रहे।

Wednesday, October 23, 2024

मांगे न मानी गईं तो माध्यमिक शिक्षक दो दिसंबर से पूरे प्रदेश में शुरू करेंगे जेल भरो आंदोलन

मांगे न मानी गईं तो माध्यमिक शिक्षक दो दिसंबर से पूरे प्रदेश में शुरू करेंगे जेल भरो आंदोलन

19 सूत्री मांगों के समर्थन में शिक्षक संघ का निदेशालय पर चेतावनी धरना

पुरानी पेंशन और तदर्थ शिक्षकों की बहाली पर जल्द निर्णय लेने की मांग

शिक्षकों पर अत्याचार व कार्यालयों में भ्रष्टाचार बंद करने की मांग


लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) ने 19 सूत्री मांगों को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर चेतावनी धरना- प्रदर्शन किया। नाराज शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली, तदर्थ शिक्षकों की बहाली, धारा 18 को नए शिक्षा आयोग में शामिल करने आदि की मांगें उठाईं। अध्यक्षता कर रहे प्रदेश अध्यक्ष चेत नारायण सिंह ने कहा कि शिक्षकों की मांगें नहीं मानी गईं तो दो दिसंबर से पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे।


पुरानी पेंशन पर सरकार की नीयत ठीक नहीं लग रही है। तदर्थ शिक्षक नवंबर 2023 से वेतन के लिए भटक रहे हैं। पूरे प्रदेश में सेवा सुरक्षा को खंडित करने की कोशिश हो रही है। प्रबंधकों द्वारा शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। प्रदेश संरक्षक व एमएलसी राज बहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि सरकार हठ छोड़कर संगठन से वार्ता करे। समस्याओं का समाधान निकल जाएगा, अन्यथा आंदोलन का विकल्प खुला है।


 प्रदेश महामंत्री अनिरुद्ध त्रिपाठी ने भदोही में प्रधानाचार्य की निर्मम हत्या की निंदा की। प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के निलंबन की बाढ़ आ गई है। इसे रोकने के लिए सरकार तुरंत प्रभावी कार्रवाई करे। एडेड स्कूलों में एनओसी विहीन ट्रांसफर की नीति लाई जाए। एनओसी के नाम पर रिश्वतखोरी बंद हो और शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा भत्ता का लाभ मिले।


शिक्षकों ने धरने के बाद अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) अजय कुमार द्विवेदी को ज्ञापन देकर इसे सरकार को भेजने की मांग की। धरने को लवकुश मिश्रा, मार्कंडेय सिंह, संजय द्विवेदी, महेश चंद्र शर्मा, मेजर देवेंद्र सिंह, जगदीश चंद्र व्यास, नरसिंह बहादुर सिंह, रामानंद द्विवेदी, सोमदेव सिंह, सुलेखा जैन, विनोद मिश्रा, अजय प्रताप सिंह आदि ने संबोधित किया।

Wednesday, October 16, 2024

एजुकेटर भर्ती रद्द करने और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन

एजुकेटर भर्ती रद्द करने और शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन


लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शासकीय कर्मचारी का दर्जा और एजुकेटर भर्ती को रद्द करने की मांग की। प्रदेश भर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता ईको गार्डेन में जुटीं, जहां आंगनबाड़ी अधिकार संयुक्त मोर्चा के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग थी कि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, और तब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 18,000 रुपये व सहायिकाओं को 9,000 रुपये प्रति माह मानदेय सुनिश्चित किया जाए।


प्रदर्शन की अध्यक्षता मोर्चा की संयोजक सरिता सिंह और सह संयोजक प्रभावती देवी ने की। उन्होंने आक्रामक स्वर में एजुकेटर भर्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर एजुकेटर की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पहले से ही बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। 

सरिता सिंह ने कहा, "सरकार की नीतियों में यह विरोधाभास स्पष्ट है कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, तो अलग से एजुकेटर की भर्ती क्यों की जा रही है?" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह भर्ती रद्द नहीं की गई, तो कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन और अधिक उग्र हो सकता है। 


सरकार पर दबाव बढ़ा
वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एजुकेटर की नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को कमजोर करने की साजिश है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी हालत में इस भर्ती को स्वीकार नहीं करेंगी, और अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आगे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए तैयार हैं। 

प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने "एजुकेटर भर्ती बंद करो", "हम भी शिक्षक हैं, हमें हमारा हक दो" जैसे नारे लगाए, और जोर दिया कि शासकीय कर्मचारी का दर्जा उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का सबसे उचित समाधान है।

Thursday, October 10, 2024

आकांक्षी जनपदों से अपने गृह जनपद में ट्रांसफर को लेकर मुखर हुए परिषदीय शिक्षक, बहराइच-श्रावस्ती में धरना प्रर्दशन के बाद उम्मीदों का उभार

आकांक्षी जनपदों से अपने गृह जनपद में ट्रांसफर को लेकर मुखर हुए परिषदीय शिक्षक, बहराइच-श्रावस्ती में धरना प्रर्दशन के बाद उम्मीदों का उभार 


आकांक्षी जनपदों से अपने गृह जनपद में ट्रांसफर को लेकर मुखर हुए परिषदीय शिक्षकों की उक्त समस्यायों को लेकर हाल में बहराइच के बाद श्रावस्ती में हुए धरना प्रदर्शन की मांग और इसके लिए गठित नए संगठन की आहट को देखते हुए आने वाले समय में यह मुद्दा जोर पकड़ने की उम्मीद है


आकांक्षी जिलों में कार्यरत परिषदीय शिक्षकों ने अपने गृह जनपद में स्थानांतरण की मांग को लेकर हाल ही में श्रावस्ती और बहराइच में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। इन शिक्षकों का कहना है कि वह अपने मूल जिले से 300 से 800 किमी की दूरी पर तैनात हैं, जिससे उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। 


विशेष रूप से, परिवार में चिकित्सा जरूरतों के समय उपस्थित न हो पाने के कारण कई शिक्षक गंभीर मानसिक तनाव और बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। ऐसे में, शिक्षकों का कहना है कि इस दूरी के चलते वे अपने परिवार के साथ महत्वपूर्ण क्षणों में शामिल नहीं हो पाते, जो कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।


शीतकालीन अवकाश में स्थानांतरण की मांग

शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार बैचवार स्थानांतरण की योजना तैयार करे, जिसमें वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों का गृह जनपद में ट्रांसफर किया जाए। इस प्रक्रिया को शीतकालीन अवकाश के दौरान तेजी से पूरा किया जाए, ताकि छात्रहित में कार्यमुक्ति और कार्यभार ग्रहण जल्द हो सके। 


धरने के बाद एक नए संगठन की बढ़ी सक्रियता

बहराइच और श्रावस्ती में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह मुद्दा जोर पकड़ रहा है, और इसके लिए नए संगठन की सक्रियता भी देखी जा रही है। आने वाले समय में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेने की संभावना है, जिससे आकांक्षी जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक गृह जनपद में स्थानांतरण की मांग करेंगे।

सरकार से आग्रह किया गया है कि शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण प्रक्रिया को लागू किया जाए, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहकर शिक्षा की गुणवत्ता में अपना योगदान दे सकें।

Friday, September 27, 2024

पुरानी पेंशन के लिए सड़क पर उतरे देश भर में शिक्षक-कर्मचारी, NPS-UPS को बताया धोखा, आक्रोश मार्च में दिखी संगठनों की एकजुटता

पुरानी पेंशन के लिए सड़क पर उतरे देश भर में शिक्षक-कर्मचारी, NPS-UPS को बताया कर्मचारियों के साथ धोखा, आक्रोश मार्च में दिखी संगठनों की एकजुटता 


लखनऊ। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के आह्वान पर बृहस्पतिवार को शिक्षकों और कर्मचारियों ने देशभर में आक्रोश मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।


संगठनों एनपीएस-यूपीएस वापस लेने और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की। मार्च में रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम समेत कई विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। जिला मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शन में कर्मचारियों व शिक्षकों ने एनपीएस और यूपीएस को धोखा बताते हुए जमकर नारेबाजी की। मार्च में महिला कर्मचारी अपने परिवार के साथ शामिल हुई।


लखनऊ में एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में हजरतगंज स्थित बीएन सिंह की प्रतिमा से शहीद स्मारक तक आक्रोश मार्च निकाला गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न संगठनों के नेता, शिक्षक और कर्मचारियों ने भाग लिया। विजय ने कहा कि सरकार ने एनपीएस लाकर कर्मचारियों-शिक्षकों को धोखा किया है। यूपीएस तो कर्मचारियों के साथ महाधोखा है। इसलिए सरकार पुरानी पेंशन बहाल करे।

Saturday, September 14, 2024

26 सितम्बर को NPS/UPS के विरोध में जिला मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च निकालेगा अटेवा, सभी संगठनो से सहायता और सहयोग की अपील

26 सितम्बर 2024 को NPS/UPS के विरोध में जिला मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च निकालेगा अटेवा, सभी संगठनो से सहायता और सहयोग की अपील 


Wednesday, September 11, 2024

69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने फिर घेरा डिप्टी सीएम केशव का घर

69 हजार शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने फिर घेरा डिप्टी सीएम केशव का घर

11 सितम्बर 2024
लखनऊ। सुप्रीमकोर्ट के 69 हजार शिक्षक भर्ती की नई चयन सूची पर रोक के अंतरिम आदेश के बाद मंगलवार को आरक्षित अभ्यर्थियों ने मंगलवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के फैसले का सरकार द्वारा पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जतायी। धरने पर बैठे करीब 30 अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की।

डिप्टी सीएम के आवास पर न होने से अभ्यर्थियों की भेंट नहीं हो सकी। करीब तीन घंटे बाद आवास पर ज्ञापन देकर चले गए। धरने का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि सरकार मामले को जानबूझ कर लटका रही है। 

हाईकोर्ट का फैसला आने के बावजूद सरकार ने नई चयन सूची नहीं जारी की। मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण पर सरकार से जवाब मांगा है। सरकार कुछ ऐसा जवाब दाखिल करे, जिससे सभी का हित हो। हम आरक्षित वर्ग को न्याय मिल सके।



69000 शिक्षक भर्ती : सीएम योगी से नहीं हो सकी आंदोलनरत अभ्यर्थियों की मुलाकात 

अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकीं निगाहें

8 सितम्बर 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश के अनुपालन के लिए आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात प्रस्तावित थी। किंतु कतिपय कारणों से यह मुलाकात नहीं हो सकी। अब आरक्षित व अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों व चयनितों की निगाहें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं।


अभ्यर्थियों का नेतृत्व करने वाले अमरेंद्र पटेल ने कहा कि पिछले दिनों मुलाकात में मंत्री ओपी राजभर और जिला प्रशासन ने शनिवार को सीएम से उनकी मुलाकात कराने की बात कही थी, लेकिन इस संबंध में उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। इस वजह से उनकी सीएम से मुलाकात नहीं हो पाई।


दूसरी तरफ अब दोनों वर्ग के अभ्यर्थियों की निगाहें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। चयनित शिक्षकों व अनारक्षित वर्ग की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सोमवार को सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी। वहीं आरक्षित वर्ग पहले ही मामले में कैविएट दाखिल कर चुका है। बता दें कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद उसे लागू करने के लिए लगातार आंदोलन व मंत्रियों के आवास का घेराव कर रहे हैं। 



69000 शिक्षक भर्ती: धरने पर बैठे अभ्यर्थियों की आज सीएम योगी से गोरखपुर में होगी मुलाकात, मंत्री संजय निषाद के आवास का किया घेराव

07 सितम्बर 2024
इलाहाबाद हाईकोर्ट डबल बेंच का आदेश लागू करने के लिए आंदोलन कर रहे 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रयास रंग ला रहा है। कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर व जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए अभ्यर्थियों से प्रतिनिधिमंडल का नाम भी मांगा गया है। वहीं शुक्रवार को अभ्यर्थियों ने मंत्री संजय निषाद के आवास का घेराव किया।

अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि आंदोलनरत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार देर शाम गोरखपुर में मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय से आंदोलन कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से पांच नाम मांगे गए थे, जो भेज दिए गए हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर हम अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराएंगे, ताकि प्रभावित सभी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

वहीं दूसरी तरफ आंदोलन के क्रम में अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आवास का घेराव किया। यहां बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थी प्रदर्शन करते हुए हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले का पालन करने व नियुक्ति दिए जाने की मांग कर रहे थे। मंत्री के लखनऊ में न होने के कारण अभ्यर्थियों की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं पुलिस उन्हें बस से ईको गार्डन ले गई। बता दें कि इससे पहले अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास का घेराव किया था।


69000 शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों को सीएम से वार्ता का मिला आश्वासन, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने घेरा मंत्री राजभर का आवास

06 सितम्बर 2024
लखनऊ। हाईकोर्ट डबल बेंच के आदेश के पालन के लिए लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थी हाईकोर्ट के फैसले का पालन करने व नियुक्ति देने की मांग कर रहे थे।

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की। उन्होंने अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनीं और ज्ञापन लिया। राजभर ने आश्वासन दिया कि वे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सात सितंबर को करवाएंगे। इस मामले का समाधान जल्द ही किया जाएगा। सीएम से मिलने के लिए उन्होंने पांच अभ्यर्थियों के नाम भी मांगे।


धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा अभ्यर्थी चार साल से सड़कों पर भटक रहे हैं। अब कोर्ट का फैसला आया है तो इसका पालन नहीं हो रहा है। कोर्ट ने भर्ती की मूल चयन सूची रद्द कर सरकार को तीन महीने में आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नई सूची जारी करने का आदेश दिया है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई काम शुरू नहीं किया है। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है।



बारिश में भी डटे रहे 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी, नियुक्ति के लिए घेरा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का आवास

05 सितम्बर 2024
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश का अनुपालन कराने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का आवास घेरा। सुबह लगभग 11 बजे बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थी यहां धरने पर बैठ गए और नियुक्ति दिए जाने की मांग की। वहीं दोपहर में हुई भारी बरसात के बीच भी वे डटे रहे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद ही लौटे।

अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि हम ओबीसी और एससी वर्ग के नेताओं व मंत्रियों के आवास का घेराव इसलिए भी कर रहे हैं कि वे मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात कर इस मामले का समाधान कराएं। हम सभी अभ्यर्थी पिछले चार साल से भटक रहे हैं। अब कोर्ट के फैसले का पालन किया जाना चाहिए, किंतु विभागीय अधिकारी इसमें भी हीलाहवाली कर रहे हैं।


हाईकोर्ट ने पुरानी चयन रद्द करते हुए सरकार को तीन महीने के अंदर आरक्षण नियमों का पालन करते हुए नई सूची जारी करने का आदेश दिया है। किंतु सरकार ने अभी तक कोई काम शुरू नहीं किया है। 


जल्द अभ्यर्थियों की सीएम से कराएंगे मुलाकात 
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर बात की। इसमें उन्होंने सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। अभ्यर्थियों का ज्ञापन लेते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में जल्द ही वह मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात करेंगे। साथ ही अभ्यर्थियों की भी मुलाकात कराएंगे। प्रतिनिधिमंडल में अमरेन्द्र पटेल, वीरेन्द्र, विजय, अर्चना, विक्रम शामिल थे।


आरक्षण घोटाले के पीड़ित अभ्यर्थियों की नई चयन सूची जारी करे सरकार

लखनऊ। 69000 शिक्षक घोटाला के खिलाफ इंकलाबी नौजवान सभा ने बुधवार को मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरक्षण घोटाले के पीड़ित अभ्यर्थियों की नई चयन सूची जारी करने की सरकार से मांग की। जिलाधिकारी के जरिये राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित कर मामले में दखल देने की अपील की। 

परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सह सचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार आरक्षण घोटाला के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने के बजाय नई चयन सूची की मांग कर र रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है लेकिन अभी तक आरक्षण घोटाले के एक भी दोषी को सजा नहीं दी गई। वहीं, नीरज कनौजिया ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती को आजादी के बाद का सबसे बड़ा शिक्षक भर्ती घोटाला बताया। 



कैबिनेट मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का जोरदार हंगामा

मंत्री को सौंपा ज्ञापन न्याय पाने तक संघर्ष जारी रखने का एलान

04 सितम्बर 2024
लखनऊ- 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन यूपी की राजधानी लखनऊ में जारी है. आज 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी ने कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।

मंत्री आशीष पटेल के आवास पर शिक्षक अभ्यर्थी बैठे है. प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नियुक्ति देने की मांग.आशीष और अनुप्रिया पटेल के आवास का घेराव किया.पुरानी सूची बनाने वाले अधिकारियों को हटाने की मांग है. मंत्री के आवास पर प्रदर्शन के दौरान महिला अभ्यर्थी बेहोश भी हो गई.


बता दें कि कल भी शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन करते हुए उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था. कल भी प्रर्दशन करने वाले अभ्यर्थीयों का कहना था कि वो नियुक्ति मांगने के लिए आए हुए है. वह यह प्रदर्शन नई सूची बनाकर तत्काल नियुक्ति की मांग करने के लिए कर रहे है.प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थीयों का कहना है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा.


69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा मंत्री आशीष पटेल का आवास

अभ्यर्थियों ने कहा- जल्द नियुक्ति दी जाए, दागी अधिकारी हटाए जाएं


लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मंगलवार को अपना दल (एस) पार्टी कार्यालय व मंत्री आशीष पटेल के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थी हाईकोर्ट लखनऊ डबल बेंच के फैसले का पालन किए जाने के लिए मंत्री के घर के सामने धरने पर बैठे। कड़ी धूप होने से कुछ अभ्यर्थियों की तबीयत भी खराब हुई। इन्हें अस्पताल भेजा गया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट का जो निर्णय आया है, सरकार उसे जल्द लागू करे और न्याय देते हुए नियुक्ति का रास्ता साफ करे। अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि दागी अधिकारियों को तत्काल हटाकर नए अधिकारी नियुक्त करें। ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूरी की जा सके। 

अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि भर्ती में बड़े स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया गया। लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद 13 अगस्त को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया है।