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Friday, July 3, 2026

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

02 जुलाई 2026
हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
 



हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

23 जून 2026
हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

प्रशासन ने आरोपों को नकारा
बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

20 जून 2026
हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जानिए पूरा मामला 
गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

Thursday, June 25, 2026

RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

औरैया के दो पूर्व व वर्तमान बीएसए पर लगाया जुर्माना, वेतन से जुर्माना राशि काटने का आदेश


लखनऊ। राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी और भ्रामक सूचना देने के मामले में तीन बीएसए पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई औरैया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक प्रकरण में की है।


आयोग में कुलदीप कुमार चतुर्वेदी की शिकायत पर सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता ने 24 जून 2022 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया कार्यालय में सूचना के लिए आवेदन दिया था। आयोग के अनुसार निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। करीब एक वर्ष की देरी के बाद 26 जुलाई 2023 को सूचना दी गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी का अधिकारियों ने कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कई अवसर दिए, लेकिन अधिकारियों की ओर से उचित जवाब नहीं मिला।


सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत

आयोग ने यह भी माना कि सूचना देने से इनकार करने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) का अनुचित आधार लिया गया। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने अपने आदेश में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत है। आयोग ने तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस राजपूत, तत्कालीन बीएसए अनिल कुमार और वर्तमान बीएसए संजीव कुमार पर संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह राशि तीनों अधिकारियों के वेतन से समान रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

Sunday, June 21, 2026

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

इसी मामले में निलंबित बीएसए शालिनी 16 जून को दिल्ली से हुई थी गिरफ्तार

21 जून 2026

गोरखपुर : शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में वांछित चल रहे देवरिया बीएसए कार्यालय के निलंबित लिपिक संजीव सिंह ने शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हाजिर होने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी पर एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साथ ही उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। 


शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में नामजद आरोपित संजीव सिंह देवरिया जिले के रामनाथ कालोनी का रहने वाला है। 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद से वह फरार चल रहा था। मामला 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर प्रताड़ित करने, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने तथा मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा था कि लगातार प्रताड़ना से आहत होकर कृष्ण मोहन सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप यह भी था कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।


 पुलिस को उनकी जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपित देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ने 16 जून को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में आरोपित बनाए गए देवरिया, गौरीबाजार के अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि फरार चल रहे लिपिक संजीव सिंह के सरेंडर के बाद अब मामले के सभी आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।



शिक्षक कृष्ण मोहन की आत्महत्या मामले में अभियुक्त हैं निलंबित बीएसए शालिनी

गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की taiyaari

नामजद आरोपी लिपिक संजीव सिंह के घर चस्पा हो चुका है नोटिस, अब कुर्की की तैयारी

जांच के दौरान भ्रष्टाचार का मामला आने पर पूर्व प्रधानाध्यक को भेजा जा चुका है जेल

19 जून 2026

गोरखपुर । गुलरिहा इलाके में बर्खास्त शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में नामजद आरोपी व 25 हजार की इनामी देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी शालिनी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बुधवार को गोरखपुर पहुंची। पूछताछ के बाद बीएसए को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, मामले में नामजद फरार आरोपी निलंबित लिपिक संजीव सिंह के घर की कुर्की की तैयारी शुरू कर दी गई है।

शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभकुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।

जांच के दौरान एक रिटायर प्रधानाध्यक अनिरुद्ध का नाम आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद से शालिनी व लिपिक संजीव फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें जेल भेजा गया।

गुलरिहा थाने में दर्ज केस मैं आरोपी निलंबित बीएसए को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। लिपिक की तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस जारी हो चुका है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। - निमिष पाटील, एसपी सिटी



शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

16 जून 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

27 अप्रैल 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


अपडेट 19 मार्च 2026
निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

16 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

यह है मामला
कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

09 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

Sunday, March 15, 2026

पांच बीएसए और 4 बीईओ सहित यूपी के 9 शिक्षाधिकारी होंगे सम्मानित, इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए हुए चयनित

पांच बीएसए और 4 बीईओ सहित यूपी के 9 शिक्षाधिकारी होंगे सम्मानित, इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए हुए चयनित


लखनऊ। प्रदेश के नौ शिक्षा अधिकारी को उनके इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसमें सीतापुर के बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह समेत नौ शिक्षा अधिकारी शामिल हैं।

अन्य अधिकारियों में कौशांबी के बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा, सोनभद्र के बीएसए मुकुल आनंद पांडेय व कन्नौज के बीएसए संदीप कुमार शामिल हैं। 

इसके साथ ही गौतमबुद्धनगर के बीईओ मोहम्मद राशिद, रामपुर की बीईओ बबीता सिंह, हरदोई के बीईओ डॉ. ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, प्रयागराज के बीईओ क्षमा शंकर पांडेय व वाराणसी के बीईओ संजय कुमार यादव भी शामिल हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा) दिल्ली के प्रस्ताव के क्रम में शासन ने 2023-24 व 2025-26 के लिए संबंधित अधिकारियों को एनओसी की अनुमति दी है। उन्होंने इसकी जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों को दी है।


Monday, November 3, 2025

सवा दो करोड़ रिश्वत मांगने में फंसे गोंडा के बीएसए, भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने केस दर्ज करने का दिया आदेश, फर्नीचर सप्लाई में कमीशन मांगने का आरोप

सवा दो करोड़ रिश्वत मांगने में फंसे गोंडा के बीएसए, भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने केस दर्ज करने का दिया आदेश, फर्नीचर सप्लाई में कमीशन मांगने का आरोप


गोंडा। फर्नीचर आपूर्ति के ठेके में 2.25 करोड़ की रिश्वत मांगने और 30 लाख रुपये एडवांस लेने के आरोप में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अतुल कुमार तिवारी व दो जिला समन्वयक फंस गए हैं। कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

मोतीगंज क्षेत्र के किनकी गांव निवासी मनोज पांडेय नीमन सीटिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एमडी हैं। उन्होंने गोरखपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में अपील की है कि उनकी कंपनी गोंडा के 564 उच्च प्राथमिक और संकुल विद्यालयों के लिए फर्नीचर सप्लाई के टेंडर में एल-1 (सबसे कम दर देने वाली फर्म) घोषित की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसए अतुल कुमार तिवारी, जिला समन्वयक (जेम) प्रेमशंकर मिश्र और जिला समन्वयक (सिविल) विद्याभूषण मिश्र ने 15% कमीशन के रूप में 2.25 करोड़ की मांग की।


चार जनवरी 2025 को बीएसए ने अपने राजकीय हाउसिंग कॉलोनी स्थित आवास पर बुलाकर उनसे 30 लाख रुपये (22 लाख बीएसए को और चार-चार लाख दोनों समन्वयकों को) लिए। बाद में शेष रकम न देने पर फर्म को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

मनोज ने अदालत में व्हाट्सएप चैट व अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जब दिए गए रुपये वापस मांगे तो प्रेमशंकर मिश्र ने एक लाख रुपये लौटा दिए, लेकिन बीएसए और डीसी सिविल ने मना कर दिया।

अदालत में बीएसए व समन्वयक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज लगाए। अनुभव प्रमाणपत्र में दर्शाई गई राशि 5.91 करोड़ के बजाय 9.86 लाख थी। इसी तरह कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में टर्नओवर 19.54 करोड़ दिखाया। असल टर्नओवर 14.54 करोड़ रहा। इन अनियमितता के कारण फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया।

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विपिन कुमार तृतीय ने माना कि आवेदक के आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।

अदालत ने 31 अक्तूबर 2025 को आदेश पारित करते हुए कोतवाली नगर गोंडा के प्रभारी निरीक्षक को तीनों अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। 


फर्नीचर आपूर्ति के लिए कंपनी ने जो दस्तावेज लगाए थे, वे फर्जी थे। इसलिए टेंडर निरस्त किया था। पेशबंदी में कंपनी के एमडी भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट गए हैं। - अतुल तिवारी, बीएसए-गोंडा

Tuesday, September 30, 2025

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया?

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया? 

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत एटा निवासी ने दाखिल की है याचिका, नियुक्ति के बाद भी मिल रहा 2550 रुपये मानदेय


बड़ी संख्या में अनुकंपा के आधार पर कई आश्रितों की निश्चित मानदेय पर नियुक्तियां की गई हैं। यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक की मृत्यु के उपरांत उसके आश्रितों की भर्ती नियमावली-1974 की अवहेलना है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर की गई नियुक्ति को नियमित करने में कथित मनमानी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एटा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को तलब कर उनसे पूछा है कि किस प्रावधान के तहत अनुकंपा नियुक्ति निश्चित वेतन पर की जा रही है।


याची की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित करने में क्या कानूनी अड़चन आ रही है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने आशीष कुमार की याचिका पर दिया है। आशीष कुमार सिंह ने चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति को नियमित करने और 15 सितंबर 2007की प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सभी परिणामी लाभ दिए जाने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।


अधिवक्ता ने दलील दी कि बीएसए ने याची के समान मामले में दिनेश कुमार नाम के एक व्यक्ति का मर्जी के अनुसार उसकी सेवाओं को प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित कर दिया है। सभी परिणामी लाभ दिए। वहीं, याची को उसके वैध हक से वंचित किया जा रहा है। याची को करीब 18 साल बाद भी केवल 2550 रुपये के अल्प निश्चित वेतन पर जीवनयापन करने के लिए छोड़ दिया गया है।


हाईकोर्ट ने बीएसए को 15 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार अनुपालन व प्रतिवादी वकील को इस आदेश को तत्काल बीएसए को प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

Wednesday, September 17, 2025

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब, जानिए! विस्तार से, क्या है पूरा मामला?

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब


हरदोई: बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारियों की बातचीत के वायरल हुए ऑडियो बीएसए के लिए मुसीबत बन गए हैं। मामले को शासन नें संज्ञान में लेते हुए उच्चस्तरीय जाँच कराई जा रही है, जिसमें बीएसए को शिक्षा निदेशक नें वायरल ऑडियो के सम्बन्ध में अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। 

अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल नें बीएसए हरदोई को पत्र जारी करते हुए बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी सीमा गौतम द्वारा एक शिक्षक से रिश्वत के पैसे मांगने का ऑडियो, व बीएसए के लिए बीईओ अनिल झा द्वारा सीमा गौतम से रुपये की मांग करने का दूसरा ऑडियो सामने आया है, जिसकी जाँच डीएम हरदोई के निर्देश पर सीडीओ हरदोई से कराई गई है। जाँच के बाद बीएसए की मुसीबत और बढ़ गई है, उन्हें 18 सितंबर को दोपहर 01 बजे शिक्षा निदेशक के प्रयागराज स्थित कार्यालय में तलब किया गया है।


क्या है पूरा मामला, जानिए! विस्तार से

हरदोई।  जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही साजिशों के ऑडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ माह पहले वायरल हुए एक ऑडियों की जांच के बाद एक खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन में की गई।

इसके बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी ने भी ऑडियो वायरल कर दिया। इस ऑडियो में कथित तौर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम पर एक लाख रुपये की मांग दूसरे खंड शिक्षा अधिकारी कर रहे हैं। हालांकि बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी ने इसका खंडन किया है।

सुरसा में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर सीमा गौतम की तैनाती थीं। लगभग तीन माह पहले कथित रूप से एक ऑडियो वायरल हुआ। दावा है कि सुरसा के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात मुनिंद्र कुमार के निलंबन के कई माह बाद भी न तो जांच पूरी की गई और न ही आरोप पत्र दिया गया। आरोप था कि सीमा गौतम ने दस हजार रुपये लिए थे।

काम न होने पर यही रुपये वापस मांगे जाने का ऑडियो होने का दावा था। मामला डीएम तक पहुंचा, तो उन्होंने जांच कराई। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने अगस्त में 13 खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया। सीमा गौतम को सुरसा से हटाकर जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। बीएसए का दावा है कि तीन दिन पहले सीमा गौतम के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

दूसरी ओर बृहस्पतिवार शाम से एक ऑडियो वायरल हो गया। सीमा गौतम का दावा है कि ऑडियो में उनकी और हरियावां के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार झा के बीच बातचीत है। सीमा गौतम का दावा है कि अनिल झा बीएसए के नाम पर उनसे एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यह मांग कंपोजिट ग्रांट से मिले बजट को लेकर की जा रही है। उनका दावा यह भी है कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से कंपोजिट ग्रांट के बजट से एक-एक लाख रुपये की वसूली अनिल कुमार झा ने बीएसए के लिए की है।


किसने क्या कहा

ऑडियो पुराना लग रहा है। इसमें कहीं भी रुपये की मांग नहीं की गई है। मेरा नाम या पदनाम इसमें कहीं नहीं आया है। किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी से कोई वसूली नहीं की गई है।-विजय प्रताप सिंह, बीएसए 

-जिलाधिकारी महोदय ने प्रत्येक विकास खंड में एक कंपोजिट विद्यालय को मॉडल विद्यालय बनाने के लिए कहा था। इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के रूप में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से बात की थी। इसी क्रम में सुरसा की तत्कालीन बीईओ सीमा गौतम से भी बात हुई थी। रुपये मांगे जाने की बात बिल्कुल गलत है।-अनिल कुमार झा, खंड शिक्षा अधिकारी, हरियावां

बीएसए ने सभी बीईओ मुख्यालय के माध्यम से प्रति ब्लॉक एक लाख रुपये की मांग की थी। जिन्होंने नहीं दिया बारी-बारी से उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मेरे खिलाफ भी शासन को पत्र लिखा गया है। कई और साजिश कर आईजीआरएस पर भी मेरी शिकायतें कराई गईं। एडिटेड ऑडियो भी वायरल कराए गए। -सीमा गौतम, खंड शिक्षा अधिकारी, (मुख्यालय से संबद्ध)

Saturday, September 13, 2025

एक ही गलती पर एक को माफी, दूसरे को सजा क्यों? हाईकोर्ट ने बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए हाजिर होने का दिया निर्देश

एक ही गलती पर एक को माफी, दूसरे को सजा क्यों? हाईकोर्ट ने बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए हाजिर होने का दिया निर्देश


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो शिक्षकों के खिलाफ एक ही गलती की शिकायत पर एक को निलंबित करने और दूसरे को माफ करने के बीएसए इटावा के निर्णय पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि बीएसए का रवैया उनकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग है। साथ ही अगली सुनवाई पर बीएसए इटावा को व्यक्तिगत रूपसे हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने इटावा के प्रबल प्रताप सिंह की याचिका पर उसके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है।


एडवोकेट अग्निहोत्री त्रिपाठी का कहना था कि याची और ज्योति राव के खिलाफ सहयोगियों से दुर्व्यवहार करने की शिकायत की गई थी, जिस पर बीएसएने याची को निलंबित कर दिया। उसके खिलाफ जांच शुरू करते हुए आरोप पत्र दे दिया गया जबकि ज्योति राव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बीएसए का यह आदेश भेदभावपूर्ण है क्योंकि याची ने जो स्पष्टीकरण दिया उसे बीएसए ने स्वीकार नहीं किया


जबकि उसी मामले में ज्योति राव का स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया और उसके खिलाफ समस्त कार्यवाही समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि दोनों अध्यापकों ने स्पष्टीकरण दिया था लेकिन बिना कोई कारण बताए मनमाने तरीके से याची के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक करार दे दिया गया।

Friday, August 15, 2025

आय से अधिक संपत्ति में सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व बीएसए पर मुकदमा

आय से अधिक संपत्ति में सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व बीएसए पर मुकदमा
 

वाराणसी । उप्र सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी इकाई ने वाराणसी के पूर्व बीएसए जय सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया है। उनके पास एक करोड़ 21 लाख 61 हजार 921 रुपये की संपत्ति अधिक मिली है।


शासन की ओर से तीन जून 2022 को जांच के लिए निर्देश मिला था। इस क्रम में पूर्व बीएसए जय सिंह के खिलाफ उप्र सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी इकाई ने जांच शुरू की। फतेहपुर जिले के बसंत खेड़ा निवासी जय सिंह के खिलाफ खुली जांच में पाया गया कि वह लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपनी आय के सभी ज्ञात एवं वैध श्रोतों से कुल 1 करोड़ 05 लाख 61 हजार 334.5 रुपये अर्जित की।


जबकि इस अवधि में इनकी ओर से कुल 2 करोड़ 27 लाख 23 हजार 256 रुपये खर्च किया गया। इस प्रकार जय सिंह अपनी आय के सापेक्ष 1 करोड़ 21 लाख 61 हजार 921 रुपये अधिक खर्च किया। जय सिंह वाराणसी में 2019 में बीएसए थे। इस समय सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

Saturday, August 2, 2025

रिंकू सिंह के बीएसए बनने में लगा ब्रेक, शैक्षिक योग्यता के चलते फाइल अटकी


रिंकू सिंह के बीएसए बनने में लगा ब्रेक, शैक्षिक योग्यता के चलते फाइल अटकी

01 अगस्त 2025
क्रिकेटर रिंकू सिंह को एक महीने में दूसरा झटका लगा है। पहले बीएसए बनने के लिए चल रही प्रक्रिया रुक गई। अब चुनाव आयोग ने उन्हें मतदाता जागरूकता अभियान से हटा दिया है। चुनाव आयोग ने उन्हें मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचन सहभागिता कार्यक्रम का आईकन नामित किया था। समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज से सगाई के कारण चुनाव आयोग ने शुक्रवार को उन्हें अपने कार्यक्रम से अलग करने का फैसला किया। हालांकि बीएसए बनाने के लिए फाइल रोके जाने के पीछे रिंकू सिंह की शैक्षिक योग्यता को कारण बताया गया था। पिछले दिनों रिंकू सिंह की फाइल सीएम योगी के सामने रखी गई थी। उसके बाद फाइल रोक दी गई है।


दरअसल खेलों के लिए सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन को प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। विगत आठ सालों में एक तरफ ग्रामीण स्तर तक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है तो दूसरी तरफ पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानजनक पुरस्कार राशि देने के साथ उन्हें सरकारी नौकरी की सुविधा दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों के माध्यम से देश-प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने के मामले में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना हुई है।

इसी क्रम में एक माह पहले पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने 11 खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में नौकरी ऑफर किया था। इसमें रिंकू सिंह को बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर जॉइनिंग करने की स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद रिंकू सिंह से तमाम दस्तावेज मांगे गए थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि रिंकू सिंह की फाइल मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई थी, पर शैक्षिक योग्यता न होने से रोक दी गई है।

बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल का कहना है कि रिंकू सिंह से उनकी शैक्षिक योग्यता के डॉक्यूमेंट प्रस्तुत करने के लिए पत्र भेजा गया था। इसके बाद पूरी फाइल मुख्यमंत्री को संस्तुति के लिए भेजी गई थी। लेकिन शैक्षिक योग्यता की कमी के चलते फाइल रोक दी गई। उनका कहना है कि अभी उनके नौकरी की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। आगे जो भी निर्देश होंगे, उससे अवगत कराया जाएगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार बीएसए पद पर तैनाती के लिए अभ्यर्थी को पोस्ट ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। रिंकू सिंह केवल आठवीं पास है। यदि इस पद पर नियुक्ति मिल भी जाती तो उन्हें सात साल के अंदर पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करनी पड़ती। पर उनकी मौजूदा शैक्षिक योग्यता और सरकार द्वारा तय समय अवधि की सीमा में योग्यता पूरी करना संभव नहीं दिखता है। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को फिलहाल रोक दी गई है।




क्रिकेटर रिंकू सिंह के बीएसए बनने की राह में नियमावली का रोड़ा, तैनाती का अभी अंतिम फैसला नहीं
 
27 जून 2025
क्रिकेटर रिंकू सिंह के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) बनने की राह में अभी कई मुश्किलें हैं, जिसे दूर करना उनके लिए आसान नहीं होगा। बीएसए की नियमावली उनकी प्रस्तावित नौकरी की राह में सबसे बड़ी अड़चन बन सकती है। क्योंकि बीएसए की नियमावली के अनुसार इस पद के लिए पोस्ट ग्रेजुएट होना अनिवार्य है जबकि क्रिकेटर ने अभी हाईस्कूल भी पास नहीं किया है। 


शैक्षिक अर्हता पूरी करने के लिए सात वर्षों की शिथिलता का प्रावधान है, जिसका लाभ लेने के बाद भी रिंकू सिंह इस पद के लिए जरूरी शैक्षिक अर्हता पूरी नहीं कर सकेंगे क्योंकि वर्तमान समय के हिसाब से भी अगर गणना की जाए तो पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने में उन्हें कम से कम आठ वर्ष लगेंगे जो शिथिलता वाली अवधि से अधिक है।

जानकारों का कहना है कि प्रदेश के अन्तराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दिए जाने की नीति के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जिन सात खिलाड़ियों को श्रेणी-2 के अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति करने की संस्तुति की है। उसमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रिंकू सिंह का नाम तो प्रमुखता से है लेकिन उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात करने के प्रस्ताव पर विभाग में उच्च स्तर पर अभी कोई अन्तिम निर्णय नहीं हो सका है। ऐसे में मशहूर क्रिकेटर रिंकू सिंह की नियुक्ति वाले विभाग में बदलाव किए जाने की भी सम्भावना व्यक्त की जा रही है।


सात खिलाड़ियों को बनाया जाना है राजपत्रित अधिकारी

बुधवार को क्रिकेटर रिंकू सिंह समेत सात खिलाड़ियों को यूपी अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता भर्ती नियमावली-2022 के नियम-7 के तहत श्रेणी-2 के राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति किए जाने संबंधी पत्रों के वायरल होने के बाद इस पर चर्चा का माहौल गरम है। पत्र के अनुसार क्रिकेटर रिंकू सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाए जाने के साथ छह अन्य खिलाड़ियों को भी राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति किए जाने की जानकारी दी गई थी।



Cricketer Rinku Singh: क्रिकेटर रिंकू सिंह सीधी भर्ती से बनेंगे BSA, कई अन्य खिलाड़ी भी पाएंगे नियुक्ति

25 जून 2025
लखनऊ। टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी बनेंगे। खेल विभाग की अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती के तहत उन्हें इस पद पर तैनाती दी जाएगी। इसके लिए विभाग ने आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही रिंकू सिंह को पत्र भेजकर इससे जुड़ी आवश्यक औपचारिकता पूरी करने को कहा है। 


क्रिकेटर रिंकू सिंह भारतीय टी-20 टीम के सदस्य हैं। मूल रूप से अलीगढ़ निवासी रिंकू सिंह की हाल ही में समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज के साथ सगाई हुई है। जल्द ही उनकी शादी की तिथि भी तय की जाएगी। पिछले दिनों मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती के खाली पदों को भरने के लिए चयन समिति की बैठक हुई। इसमें खाली पदों के सापेक्ष सात खिलाड़ियों व एथलीट को विभिन्न विभागों में नियुक्त करने की संस्तुति की गई। इसमें रिंकू सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग में बीएसए, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार को गृह विभाग में पुलिस उप अधीक्षक, हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल को गृह विभाग में पुलिस उपाधीक्षक पद पर नियुक्ति की संस्तुति की गई। 


इसी क्रम में पैरा एथलीट अजीत सिंह को पंचायती राज विभाग में जिला पंचायती राय अधिकारी, पैरा एथलीट सिमरन को पंचायती राज विभाग में जिला पंचायती राज अधिकारी, पैरा एथलीट प्रीति पाल को ग्रामीण विकास विभाग में खंड विकास अधिकारी, एथलीट किरन बालियान को वन विभाग में क्षेत्रीय वन अधिकारी के रूप में तैनाती की संस्तुति दी गई। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि इन आवेदकों से उनकी शैक्षिक अर्हता से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। 


Wednesday, July 16, 2025

आगरा बीएसए का खेल, पहले निलंबन, दो दिन में ही बहाल और लीजिए मनचाहा स्कूल

आगरा बीएसए का खेल, पहले निलंबन, दो दिन में ही बहाल और लीजिए मनचाहा स्कूल


नियमावली का उल्लंघन


बेसिक शिक्षा विभाग की अपील नियमावली 1999 क्या कहती है

निलंबन के बाद जांच पूरी होने तक शिक्षकों को बीआरसी या अन्य विद्यालय से अटैच करना चाहिए, न कि तुरंत बहाली हो।

स्कूल बंद होने के दौरान जांच नहीं हो सकती, और बीईओ बिना बीएसए के अनुमोदन के आरोप पत्र तैयार नहीं कर सकता।

निलंबन से पहले और बाद में साक्ष्यों के आधार पर पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

मनचाही तैनाती देने को पहले निलंबन कर देते है फिर पास वाले एचआरए ब्लाकों में तैनात किया जाता है।

को जिले के भीतर तबादलों पर शासन की रोक के बावजूद, निलंबन बहाली की आड़ में शिक्षकों लाभ पहुंचाया जा रहा है।



आगराः मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ चाहते हैं कि सरकारी स्कूलों में बेहतरीन पढ़ाई हो इसलिए शिक्षकों के बहुत सीमित स्थानांतरण कर रहे हैं। यहां जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) जितेंद्र कुमार गोंड ने उनकी मंशा को तार-तार कर दिया। स्थानांतरण का ऐसा रास्ता तलाशा कि सांप भी मरे और लाठी भी न टूटे। शिक्षकों को मनचाही तैनाती देने के लिए पहले निलंबन किया, फिर दो से आठ दिन बाद बहाली। इसके साथ ही कर दी मुराद पूरी यानि मनचाहे नजदीकी शहरी स्थान पर तैनाती। इसमें शिक्षकों का एक लाभ और दिया गया उन्हें नान-एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) ब्लाक से मुक्ति प्रदान कर दी।

जिले के बाह, जगनेर, पिनाहट और फतेहाबाद ब्लाक ऐसे हैं जहां शहर के शिक्षक नहीं जाना चाहते परंतु वहां स्कूलों की स्थिति देखते हुए सरकार स्थानांतरण नहीं कर रही। ऐसे में नया रास्ता खोज लिया गया। बीएसए को वाह के जूनियर हाईस्कूल सुसार कंपोजिट के प्रभारी और स्कूल न आने वाले प्रधानाध्यापक बुद्धि प्रकाश को मनचाही तैनाती देनी थी। ऐसे में उन्हें अनुपस्थिति, मिड-डे मील में लापरवाही, कंपोजिट ग्रांट के दुरुपयोग और पदीय दायित्वों की अनदेखी के आरोप में तीन जून 2025 को निलंवित किया गया। सिर्फ दो दिन में न जाने कैसे जांच पूरी हो गई और 5 जून 2025 को उन्हें नान-एचआरए ब्लाक वाह से एचआरए ब्लाक बरौली अहोर के जूनियर हाईस्कूल बुढ़ेरा में बहाल कर दिया। यहां उनको मनचाहा स्कूल मिला और वेतन बढ़ गया।


जगनेर राजस्थान सीमा का मुश्किल रास्ते वाला ब्लाक है। यहां गढ़ी करीमपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक रजनी देवी अक्सर स्कूल नहीं पहुंचती थीं। ऐसे में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़, अनुपस्थिति और मिड-डे मील न बनवाने जैसे आरोपों में ही तीन जून को ही निलंबित किया गया। इनके लिए 15 जून 2025 की सुबह रोशनी भरी हुई। उन्हें बहाली के साथ नान-एचआरए ब्लाक जगनेर से एचआरए ब्लाक खंदैली के नगला महाराम में तैनाती मिल गई। खंदौली वह ब्लाक है, जहां तैनाती के लिए शिक्षक डेढ़ लाख रुपये तक की रिश्वत देने को तैयार रहते हैं।

याह के प्राथमिक विद्यालय रानीपुरा के प्रभारी प्रधानाध्यापक अमित पाल को 17 मई 2024 को निलंवित किया गया। उन्हें जगनेर के धनसेरा भोजपुर में बहाल किया गया। इसके अलावा चार अन्य शिक्षकों में अनीता बघेल, राजेश कुमार और मंजीत सिंह को 20-22 जून 2024 के बीच मुश्किल वाले विद्यालयों से निलंबित किया गया। बीएसए ने सिर्फ छह दिन बाद 28 जून 2024 तक सवेतन बहाल कर दिया। कुछ को एचआरए ब्लाकों में तैनाती दी गई, जो नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, मामला जोर पकड़ने लगा तो तीन जुलाई 2024 को कुछ बहालियां निरस्त की गईं, लेकिन तब तक शिक्षकों को नियम-विरुद्ध तैनाती का लाभ मिल चुका था।


बीएसए की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

बीएसए जितेंद्र कुमार गोड की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 28 जून 2024 को दो मामलों में निलंबित शिक्षकों को ब्लाक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) में अटैच किया गया और स्कूल बंद होने के दौरान जांच की गई। सवाल उठता है कि बंद स्कूलों में जांच और आरोप पत्र कैसे तैयार किए गए? ब्लाक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने बीएसए के अनुमोदन के बिना कार्रवाई की, जो नियमों के खिलाफ है। बाह के सहायक अध्यापक अजय कुमार ने बीएसए से बुद्धि प्रकाश की तैनाती पर आपत्ति उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) ऐश्वर्या लक्ष्मी ने अब शिकायत मिलने के बाद बीएसए से जवाब तलब किया है


भाजपा ही बोली, वीएसए ने चार करोड़ रुपये वसूले
भाजपा महानगर के पूर्व महामंत्री डा. यादवेंद्र शर्मा ने बीएसए जितेंद्र कुमार गौड़ पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बीएसए के खिलाफ शिकायत पर जांच की मांग की है। बताया कि बीएसए ने अपने निजी सहायक अभिलाष के साथ मिलकर निलंबन और बहाली कर 100-115 शिक्षकों से चार-चार लाख रुपये लिए है। आरोप है कि बीएसए ने शासनादेशों और उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना कर, लखनऊ के एनआइसी में तैनात कंप्यूटर आपरेटर की मदद से पोर्टल पर छेड़छाड़ की और शिक्षकों का मनचाहे स्कूलों में तबादला किया।


मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार है, निलंबन-बहाली की प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन है। पोर्टल के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी की गई है। - जितेंद्र कुमार गोंड, वीएसए

बीएसए की ओर से किए गए निलंबन बहाली का मामला गंभीर है, इसकी शिकायतें मुझे मिली है। बीएसए से जवाब मांगा जा रहा है। उन्होंने अभी तक दिया नहीं है। ऐश्वर्या लक्ष्मी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक


Wednesday, July 9, 2025

एटा बीएसए कारण बताएं कि केस चलाकर क्यों न उन्हें दंडित किया जाए : हाईकोर्ट, जानिए क्यों?

एटा बीएसए कारण बताएं कि केस चलाकर क्यों न उन्हें दंडित किया जाए : हाईकोर्ट, जानिए क्यों? 


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा के बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) दिनेश कुमार पर अवमानना मामले में आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर कारण बताएं कि जानबूझकर न्यायालय के तीन नवंबर 2017 के आदेश का उल्लंघन करने के लिए उन पर अवमानना के तहत मुकदमा क्यों न चलाया जाए और दंडित क्यों न किया जाए। 


साथ ही उन्हें 29 जुलाई को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने रमेश चंद्र पचौरी की अवमानना अर्जी पर दिया है। 


एटा के याची रमेश चंद्र पचौरी 30 जून 1980 को उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में जूनियर क्लर्क के पद पर नियुक्त हुए थे। वहीं, 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त हो गए। - ब्याज सहित अवकाश नकदीकरण की मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। 


कोर्ट ने तीन नवंबर 2027 के आदेश से याचिका स्वीकार कर ली। इसके बाद भी उन्हें अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं दिया गया। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। 

Monday, July 7, 2025

अनुदानित प्रबंधकीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और लिपिक पद पर नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में पूर्व बीएसए समेत 18 पर मुकदमा दर्ज

अनुदानित प्रबंधकीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और लिपिक पद पर नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में पूर्व बीएसए समेत 18 पर मुकदमा दर्ज

अभी सुल्तानपुर डायट में तैनात हैं हरिकेश यादव, स्कूलों में फर्जी नियुक्तियां के आरोप में हुई कार्रवाई


वाराणसी । अनुदानित प्रबंधकीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और लिपिक पद पर नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में वाराणसी के तत्कालीन बीएसए हरिकेश यादव, चार खंड शिक्षाधिकारियों समेत 18 लोगों पर सतर्कता अधिष्ठान में नामजद केस दर्ज किया गया है।


आरोपियों में सात विद्यालय प्रबंधक और प्रधानाध्यापक भी शामिल हैं। मामला 2015-16 और 2016-17 शैक्षणिक सत्र का है। हरिकेश यादव वर्तमान में सुल्तानपुर जिले के डायट में तैनात हैं। शासन से सतर्कता अनुभाग को साल 2021 में जांच संबंधी पत्र दिया गया था। इसमें बीएसए और सात विद्यालयों के प्रबंधकों आदि पर प्रधानाध्यापक, अध्यापक एवं लिपिक की नियुक्ति में अनियमितता बरतने, राजकीय धन के अपव्यय और गबन के जांच के आदेश मिले थे।

 जांच में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप सत्य पाए जाने के बाद उप्र सतर्कता अधिष्ठान, वाराणसी इकाई ने मुकदमा दर्ज किया है। शिक्षा सत्र 2015-16 और 2016-17 में नियुक्ति में तत्कालीन बीएसए हरिकेश यादव ने चयन प्रक्रिया के नियमों का पालन नहीं किया।

Sunday, June 29, 2025

बेसिक शिक्षा में तैनाती के लिए भटक रहे तबादला पाए अधिकारी, पिछले दिनों निवर्तन पर आए ढाई दर्जन अधिकारी

बेसिक शिक्षा में तैनाती के लिए भटक रहे तबादला पाए अधिकारी, पिछले दिनों निवर्तन पर आए ढाई दर्जन अधिकारी

28 जून 2025
लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में यूं तो तबादला सत्र शून्य कर दिया गया है, लेकिन काफी संख्या में यहां अधिकारी तबादला होकर आए हैं। सत्र शून्य होने की वजह से उनकी जॉइनिंग तो हो गई है, लेकिन उनको काम नहीं मिल रहा है। इसमें सबसे ज्यादा परेशान वो हैं, जो जून में ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनकी सेवानिवृत्तिक देयक भी न फंस जाए।

बेसिक शिक्षा विभाग में तबादलों की पूरी सूची बनकर तैयार थी, लेकिन आखिरी समय में स्कूल चलो अभियान, शिक्षकों की चल रही तबादला प्रक्रिया आदि का हवाला देते हुए तबादला सत्र शून्य घोषित कर दिया गया। वहीं पदोन्नति पाने वाले आधा दर्जन बीएसए, डीआईओएस बन गए हैं। वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग से भी काफी अधिकारी बेसिक शिक्षा विभाग के निवर्तन (विभाग में वापस) भेज दिए गए हैं।

इस तरह विभाग में 20 बीएसए समेत कुल 31 शिक्षा अधिकारी आए हैं। वहीं तबादला सत्र शून्य होने की वजह से किसी तरह इनकी विभाग में जॉइनिंग तो हो गई, लेकिन उनकी किसी पद पर तैनाती व काम आवंटित नहीं हो पा रहा है। विभाग के अनुसार इससे जुड़ी फाइल स्वीकृति के लिए शासन में भेजी गई है। जबकि विभाग में वापस आए अधिकारियों में कुछ जून में और कुछ जुलाई में भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। 

सबसे ज्यादा परेशान यह लोग हैं कि उनका जून का वेतन कहां से निकलेगा? उनका ड्यूज, बीमा राशि कहां से भेजी जाएगी? इस पर कोई विभागीय अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है। 



अब सीएम योगी के परामर्श से होंगे बेसिक शिक्षा विभाग के तबादले, तैयार तबादला सूची से संतुष्ट न होने पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ने स्थानांतरण को नहीं दी थी मंजूरी

17 जून 2025
लखनऊः बेसिक शिक्षा विभाग में तबादलों पर रोक लगा दी गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों की तैयार तबादला सूची से संतुष्ट न होने पर रविवार देर रात बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने किसी भी अधिकारी के स्थानांतरण को मंजूरी नहीं दी। 

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपनी तबादला सूची रविवार देर रात जारी कर दी। सात जिलों में बीएसए पद पर कार्यरत अधिकारियों को प्रोन्नत के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक बनाया गया है जबकि आठ जिलों में प्रोन्नत पाए बीएसए को माध्यमिक शिक्षा से बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया गया है।



बीएसए और अन्य शिक्षाधिकारियों के ट्रांसफर पर रोक के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग को खाली पदों पर करनी होगी तैनाती

16 जून 2025
लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने भले ही बीएसए व अन्य शिक्षाधिकारियों के तबादले अगले आदेश तक न करने का निर्णय लिया हो, लेकिन इसकी राह आसान नहीं होगी। छह से अधिक बेसिक शिक्षा अधिकारी पदोन्नत होकर डीआईओएस बन गए हैं। वहीं कई शिक्षाधिकारी माध्यमिक से बेसिक शिक्षा विभाग में निवर्तन पर भी भेजे गए हैं। ऐसे में विभाग को खाली पदों पर तैनाती करनी ही पड़ेगी। 

शासन ने प्रदेश में सभी विभागों को अपने यहां सामान्य रूप से तबादला करने के लिए 15 जून की तिथि निर्धारित की गई थी। किंतु विभाग ने रविवार देर रात शिक्षकों की चल रही तबादला प्रक्रिया, स्कूल चलो अभियान आदि को देखते हुए बीएसए सहित सभी विभागीय अधिकारियों के तबादले अगले आदेश तक नहीं करने की बात कही। 

हालांकि विभाग की ओर से तबादलों को लेकर सभी आवश्यक तैयारी व सूची पूरी की जा चुकी थी। उच्च स्तर से अचानक हुए इस निर्णय को लेकर सोमवार को दिनभर विभाग में चर्चा रही। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि इस निर्णय का अनुपालन करना आसान नहीं होगा। क्योंकि आधा दर्जन से अधिक जिलों के बीएसए डीआईओएस बन गए हैं। उनके कार्यभार संभालने के बाद यह पद खाली हो जाएंगे। 



बेसिक शिक्षा मंत्री ने BSA समेत अन्य विभागीय अधिकारियों के ट्रांसफर पर लगाई रोक, सीएम योगी से मिलने के बाद लिया निर्णय, जानिए क्यों?
15 जून 2025

यूपी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सहित सभी विभागीय अधिकारियों के ट्रांसफर पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह निर्णय बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।


आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह निर्णय 'स्कूल चलो अभियान' और अन्य विभागीय कार्यक्रमों के प्रभावी और लक्ष्य आधारित संचालन के उद्देश्य से लिया गया है। निर्देश में यह स्पष्ट किया गया है कि जब तक आगे कोई आदेश न आए, विभागीय अधिकारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि वर्तमान समय में हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बच्चों का भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता है। विभागीय स्थिरता बनाए रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।

Tuesday, June 3, 2025

स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक, बीएसए ललितपुर का आदेश

स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक, बीएसए ललितपुर का आदेश 


ललितपुर।  जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बड़ा कदम उठाते हुए पत्रकारों के स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगा दी है। अब कोई भी मीडियाकर्मी सीधे स्कूल में घुसकर न वीडियो बना सकेगा, न तस्वीरें खींच सकेगा, और न ही अचानक पहुँचकर ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ कर पाएगा।

शिक्षा अधिकारी रणवीर सिंह के ताज़ा आदेश में कहा गया है कि कुछ पत्रकार बिना सूचना स्कूलों में पहुंचते हैं, स्टाफ पर दबाव बनाते हैं और माहौल बिगाड़ते हैं। इससे पढ़ाई में खलल पड़ता है और बच्चों का ध्यान भी बंटता है।

अब साफ निर्देश है—बिना पहचान और पूर्व अनुमति के कोई भी पत्रकार स्कूल परिसर में नहीं घुसेगा। पहले भी ऐसा आदेश आ चुका था, लेकिन अब दोबारा और सख्ती से लागू किया गया है।

आम भाषा में कहें तो, अब “हम मीडिया से हैं” बोलकर स्कूलों में घुसने का पास खत्म। जो भी पत्रकार स्कूल में रिपोर्टिंग करना चाहते हैं, उन्हें पहले जिला स्तर से अनुमति लेनी होगी—वरना गेट पर ही रोक दिया जाएगा।


बीएसए ललितपुर कार्यालय का आदेश देखें…

Saturday, May 31, 2025

स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक, बीएसए ललितपुर का आदेश

स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक, बीएसए ललितपुर का आदेश 


ललितपुर।  जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बड़ा कदम उठाते हुए पत्रकारों के स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश पर रोक लगा दी है। अब कोई भी मीडियाकर्मी सीधे स्कूल में घुसकर न वीडियो बना सकेगा, न तस्वीरें खींच सकेगा, और न ही अचानक पहुँचकर ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ कर पाएगा।

शिक्षा अधिकारी रणवीर सिंह के ताज़ा आदेश में कहा गया है कि कुछ पत्रकार बिना सूचना स्कूलों में पहुंचते हैं, स्टाफ पर दबाव बनाते हैं और माहौल बिगाड़ते हैं। इससे पढ़ाई में खलल पड़ता है और बच्चों का ध्यान भी बंटता है।

अब साफ निर्देश है—बिना पहचान और पूर्व अनुमति के कोई भी पत्रकार स्कूल परिसर में नहीं घुसेगा। पहले भी ऐसा आदेश आ चुका था, लेकिन अब दोबारा और सख्ती से लागू किया गया है।

आम भाषा में कहें तो, अब “हम मीडिया से हैं” बोलकर स्कूलों में घुसने का पास खत्म। जो भी पत्रकार स्कूल में रिपोर्टिंग करना चाहते हैं, उन्हें पहले जिला स्तर से अनुमति लेनी होगी—वरना गेट पर ही रोक दिया जाएगा।


बीएसए ललितपुर कार्यालय का आदेश देखें…

Thursday, March 20, 2025

Aligarh GPF fraud case : अलीगढ़ में 10 वर्षों तक होता रहा GPF में घोटाला, 11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त अधिकारी समेत 61 पर मुकदमा दर्ज

Aligarh GPF fraud case : अलीगढ़ में 10 वर्षों तक होता रहा GPF में घोटाला,  11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त अधिकारी समेत 61 पर मुकदमा दर्ज


शिक्षा विभाग में 2003 से 2013 तक शिक्षकों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों में पांच करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। अपर मुख्य सचिव बेसिक की जांच के बाद मंगलवार को बीएसए डॉ. राकेश कुमार सिंह ने उस अवधि में अलीगढ़ में तैनात रहे 11 बीएसए, 30 बीईओ, 10 वित्त अधिकारी समेत 61 अधिकारियों व कर्मचारियों के पद नाम से बन्नादेवी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।


जिले में वर्ष 2003 से 2013 तक 520 शिक्षकों के डमी खाते खोले गए। इसके बाद उनमें चार करोड़ 92 लाख 39 हजार 749 रुपये का लेनदेन किया गया। जबकि शिक्षक न तो आवेदन करते थे न ही बीएसए कार्यालय आते थे। कुछ मामलों में जब शिक्षक के खाते में पैसे आ जाते तब कार्यालय का कर्मचारी उनके पास जाकर गलती से उनके खाते में पैसा आ गया कहकर वापस करने को कहता। इसके बाद शिक्षक बैंक से पैसे निकालकर कर्मचारी को दे देते थे। कुछ डमी खातों में से आरोपी पैसे निकाल कर उसका उपयोग करते रहे।


इस तरह सामने आया था मामला :

यह घोटाला 2020 में तब सामने आया जब टप्पल के शिक्षक जगदीश प्रसाद के खाते 35 बार में 34 लाख रुपये भेजे गए। इसके बाद जिला स्तर पर जांच शुरू हुई। जांच में अधिकारियों और पटल लिपिकों की संलिप्तता पाई गई। जांच में आख्या ऋण नहीं घटाने, लेजर पृष्ठ गायब, ऋण की प्रविष्टि नहीं होने, रजिस्टर में चेक नंबर अंकित नहीं होने, चेक की एंट्री नहीं होने, रजिस्टर में निरस्त चेक का जिक्र नहीं होने, भुगतान की गई धनराशि व चेक अंकित नहीं होना सामने आया। मामले में दो बाबू निलंबित कर दिए गए।


जिला स्तर पर जांच के बाद शासन स्तर से मामले में जांच हुई। जीपीएफ प्रकरण में 4 फरवरी 2025 को अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा उप्र शासन लखनऊ की अध्यक्षता में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से समीक्षा की गई, जिसमें शासन स्तर से कराई गई। विशेष सम्परीक्षा आख्या के आधार पर घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।


इसी क्रम में मंगलवार को थाना बन्नादेवी में 2003 से 2013 तक बीएसए कार्यालय में तैनात रहे बीएसए, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा, समस्त खंड शिक्षा अधिकारी, जीपीएफ पटल सहायक कर्मचारी, परिषदीय शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों द्वारा जीपीएफ कार्य के लिए संबद्ध कर्मचारी, जीपीएफ भुगतान चेक देने वाले पटल सहायक, संबंधित लाभार्थी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।


वर्ष 2003 से 2013 तक तैनात रहे बीईओ

इस दौरान जिले में तैनात रहे बीईओ अब अलग-अलग जनपदों में तैनात हैं। अलीगढ़ में तैनात रहे बीईओ हरिशंकर सिंह एटा, मोहम्मद अजहरे आलम मुरादाबाद, बुद्धसेन सिंह बुलंदशहर, कैलाश चंद्र पांडेय पीलीभीत (निलंबित) मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) बरेली में संबद्ध, अमित सक्सेना एटा, उदित कुमार बागपत, सर्वेश कुमार गाजियाबाद, छोटेलाल हरदोई, ओम प्रकाश यादव बुलंदशहर, अमित कुमार गुप्ता बुलंदशहर, चंद्रभूषण प्रसाद नोएडा, सुनील कुमार मिर्जापुर, वंदना सैनी मुरादाबाद, माजुद्दीन अंसारी मैनपुरी (निलंबित) डायट गौतमबुद्धनगर से संबद्ध, जयपाल आगरा, अनिल कुमार बुलंदशहर, अखिलेश यादव हाथरस, गिरिराज सिंह हाथरस, हेमलता एटा, आलोक प्रताप श्रीवास्तव हाथरस, वीरेंद्र सिंह इटावा, अखिलेश प्रताप सिंह हाथरस, दीप्ति एटा, गोपाल त्यागी बुलंदशहर, सर्वेश सिंह कन्नौज (निलंबित) मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर में संबद्ध, अरुण कुमार अमरोहा, राकेश यादव प्रयागराज, संजय भारती मुजफ्फरनगर, तारकेश्वर पांडेय अयोध्या, केएल वर्मा उन्नाव में तैनात हैं।


ये रहे बीएसए तैनात

दिनेश सिंह, पुष्पा सिंह, मोहम्मद अल्ताफ अंसारी, मनोज कुमार, डॉ. मुकेश कुमार, एमपी वर्मा, महेंद्र प्रताप सिंह, एसपी यादव, संजय शुक्ला, धीरेंद्र कुमार यादव, डाॅ. लक्ष्मीकांत पांडेय।


अधिकारी मुकदमा दर्ज कराकर जांच पर जांच बिठाकर अपना दामन साफ करने का प्रयास कर रहे हैं। जूनियर शिक्षक संघ इस घोटाले को शुरू से उठाता रहा है। संघ तब तक मुद्दा उठाता रहेगा जब तक सभी शिक्षकों को उनका पूरा जीपीएफ नहीं मिल जाता है। - डॉ. प्रशांत शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ



Monday, March 17, 2025

आजमगढ़ में तत्कालीन BSA समेत क्लर्क, शिक्षक सहित 9 पर मुकदमा दर्ज, पांच शिक्षिकाओं की फर्जी नियुक्ति का आरोप

फर्जी शिक्षक नियुक्ति घोटाले पर एफआईआर दर्ज होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, शिक्षा निदेशालय ने अन्य जिलों में भी जांच की शुरू


इस घोटाले के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. मामला सामने आते ही शिक्षा निदेशालय ने अन्य जिलों में भी इसी तरह की फर्जी नियुक्तियों की जांच शुरू कर दी है. इस घोटाले के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अन्य जिलों में भी इसी तरह की फर्जी नियुक्तियां हुई होंगी और यदि गहन जांच की जाए, तो इस तरह के कई और मामले सामने आ सकते हैं. 


 इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के बीएसए को अपने-अपने यहां नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, विभागीय स्तर पर एक टीम गठित की गई है, जो इस तरह की नियुक्तियों से जुड़े कागजातों की गहराई से पड़ताल कर रही है. 


अधिकारियों की भूमिका पर सवाल, कार्रवाई की तैयारी 
जांच में यह साफ हो चुका है कि यह घोटाला अकेले विद्यालय स्तर पर नहीं हुआ, बल्कि इसमें शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत रही. यह घोटाला इतना बड़ा था कि बिना बीएसए कार्यालय और उच्च अधिकारियों की अनुमति के इसे अंजाम नहीं दिया जा सकता था. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधक पर ही कार्रवाई करेगा, या फिर इसमें शामिल बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसेगा? 


पुलिस द्वारा अब इन आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है. संभावना जताई जा रही है कि आगे और भी बड़े नाम इस घोटाले में सामने आ सकते हैं. इसके अलावा, सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कब और कैसे दस्तावेजों में हेरफेर किया गया.




आजमगढ़ में तत्कालीन BSA समेत क्लर्क, शिक्षक सहित 9 पर मुकदमा दर्ज, पांच शिक्षिकाओं की फर्जी नियुक्ति का आरोप 


आजमगढ़ जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव पाठक ने जिले के पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार मिश्रा पटल सहायक तत्समय, पटल सहायक डिस्पैच, जय किशन गुप्ता प्रबंधक, सहित 5 शिक्षिकाओं पर एफआईआर दर्ज हुई है। 

इस मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मंडल ने मामले की जांच कराई। जांच में यह बातें सामने आई की पांचो शिक्षिकाओं की नियुक्ति में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियमावली 1975 के प्रावधानों का पालन न करके प्रबंधक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आपसी साठ गांठ करके फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर यह नियुक्ति की गई।


कोविड संक्रमण के समय दिखाया गया साक्षात्कार

इस मामले में जांच में अभी बातें सामने आई की पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमरेश कुमार के फर्जी हस्ताक्षर से अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके साथ ही लॉकडाउन के समय साक्षात्कार दर्शाया गया। इसके साथ ही अनियमित रूप से नियुक्त तीन शिक्षकों को वेतन भुगतान रोकने का आदेश किसी भी स्तर से न किए जाने के कारण इन्हें राजकोष से भुगतान किया जाता रहा। इसके साथ ही बार-बार विद्यालय प्रबंधन को बुलाए जाने पर भी उपस्थित नहीं होने के मामले में यह शिकायत दर्ज कराई गई।

इस मामले में मनोज कुमार मिश्रा जोगी तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी थे जांच रिपोर्ट में आरोपित पाए गए जिसके आधार पर नौ आरोपियों के विरुद्ध यह मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिले के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक और एडी बेसिक रहे मनोज कुमार मिश्रा पर जिले में तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे थे। 


100000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ था एडी बेसिक कार्यालय में तैनात बाबू

आजमगढ़ जिले में तैनात रहे एडी बेसिक मनोज कुमार मिश्रा के कार्यालय में तैनात अस्सिटेंट क्लर्क मनोज श्रीवास्तव 19 फरवरी 2024 को ₹100000 की रिश्वत लेते जिले की एंट्री करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया था।

एंटी करप्शन की पूछताछ टीम में आरोपी क्लर्क मनोज श्रीवास्तव ने बताया था कि इस पैसे को एडी बेसिक मनोज कुमार मिश्रा तक पहुंचाना था। इस मामले में भी एडी बेसिक मनोज कुमार मिश्रा पर मुकदमा दर्ज हुआ था।


Tuesday, February 18, 2025

प्रधानाध्यापक पद का वेतन मांगने संबंधी प्रकरण से जुड़े प्रत्यावेदनों को नीतिविषयक एवं नियमावली में कोई प्राविधान न होने के कारण निरस्त करते हुए बीएसए अयोध्या ने किया निस्तारित, देखें

प्रधानाध्यापक पद का वेतन मांगने संबंधी प्रकरण से जुड़े प्रत्यावेदनों को नीतिविषयक एवं नियमावली में कोई प्राविधान न होने के कारण निरस्त करते हुए बीएसए अयोध्या ने किया निस्तारित, देखें