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Monday, July 13, 2026

10 साल में नहीं बढ़ी ₹4 की फल मद, बढ़ती महंगाई के बीच स्कूलों में पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल

10 साल में नहीं बढ़ी ₹4 की फल मद, बढ़ती महंगाई के बीच स्कूलों में पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को सप्ताह में एक दिन ताजा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रति छात्र ₹4 की अनुमानित लागत निर्धारित की गई थी। शासनादेश में स्पष्ट किया गया था कि प्रत्येक सोमवार को विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल मॉर्निंग स्नैक के रूप में वितरित किए जाएंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त पोषण मिल सके। 


दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्ष 2016 से लेकर आज तक फल वितरण के लिए निर्धारित इस ₹4 प्रति छात्र की राशि में किसी संशोधन का उल्लेख नहीं मिलता। जबकि इसी अवधि में फलों सहित लगभग सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान बाजार दरों में ₹4 में गुणवत्तापूर्ण मौसमी फल उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो गया है।

वर्ष 2016 में शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना था और इसके लिए राज्य सरकार ने अलग से बजटीय प्रावधान भी किया था।  अब दस वर्ष बाद सवाल यह उठ रहा है कि जब महंगाई लगातार बढ़ी है, तब फल वितरण की प्रति छात्र लागत का पुनर्निर्धारण क्यों नहीं हुआ। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का मूल उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराना है, तो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप फल मद की राशि की समीक्षा और संशोधन किया जाना समय की आवश्यकता है।

Monday, June 29, 2026

यूपी के मिड डे मील रसोइयों ने की मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग

यूपी के मिड डे मील रसोइयों ने की मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग

दो हजार रुपये मानदेय... वो भी सिर्फ 10 महीने


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयो के रसोइयों ने मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग की है क्योंकि उन्हें केवल 10 महीने मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। सेवा शर्तें तय न होने के कारण अवकाश व कैशलेस इलाज आदि में दिक्कत होती है।


प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में दो-दो यानी लगभग 2.50 लाख रसोइये तैनात हैं। परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार करने वाली रसोइयों की अब तक कोई सेवा शर्तें तय नहीं की गई हैं। इसकी वजह से अपने मानदेय भुगतान से लेकर अवकाश, सेवानिवृत्ति व अन्य सुविधाओं को लेकर इन्हें हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 हालत यह है कि शासनादेश के बावजूद कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी इन्हें सही से लाभ नहीं मिल पा रहा जबकि आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश या बाल्य देखभाल अवकाश जैसी कोई भी सुविधाएं इन्हें नहीं मिलती है। 

Friday, March 20, 2026

संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग

संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग


संसदीय समिति ने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की है। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से इसके लिए मदद बढ़ाने का आग्रह किया।

स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत सुबह का नाश्ता मिले।

नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को भी दोपहर का भोजन मिले।

केंद्र-राज्य सरकारें पोषण योजना में अपना अंशदान बढ़ाएँ।


नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय से जुडी संसदीय समिति ने देश भर के स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत दिए जाने वाले दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की भी सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार को इसके लिए राज्यों को मदद देनी चाहिए।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि नाश्ता जो दिन का पहला आधार होता है, वह विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पढ़ाई के दौरान एकाग्रता के लिए आवश्यक उर्जा और स्मरण शक्ति में सुधार करता है।


समिति की सिफारिश
समिति ने सिफारिश की है कि ऐसे स्कूल जो सुबह की पाली में चलते है, उनमें बच्चों को हल्का नाश्ता देने की व्यवस्था तुरंत शुरू की जाए। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपने-अपने अंशदान में वृद्धि करें। समिति ने इसके साथ ही स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को भी दोपहर का भोजन मुहैया कराने की सिफारिश की है।

समिति का मानना है कि छात्रों की यह उम्र किशोरावस्था की होती है। ऐसे में उन्हें उस उम्र में पर्याप्त पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है। मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। समिति का कहना है कि यह ठीक वैसे ही जैसे बाल्टी भरने से पहले नल को बंद कर दिया जाए।

Wednesday, February 25, 2026

राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को किया रद्द

राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही, हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को किया रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिड-डे मील घोटाले के आरोपी एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया। कहा, राज्यपाल की अनुमति के बिना किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बागपत के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से 11.14 लाख की रिकवरी के आदेश को रद्द कर दिया।


मामला बागपत के सर्वोदय मंदिर इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से जुड़ा है। उन पर आरोप था कि कोरोनाकाल (2019-2022) के दौरान उन्होंने मिड-डे मील योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ते और खाद्यान्न में करीब 11 लाख रुपये का गबन किया। विभाग ने एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनकी पेंशन से इस राशि की वसूली का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रधानाचार्य 2021 में सेवानिवत्त हो चुके हैं।

सिविल सेवा नियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत सेवानिवृत्त के बाद किसी भी कार्रवाई के लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी है। विभाग ने सरकार के एक विशेष सचिव के पत्र को ही मंजूरी मान लिया और बिना कोई नई चार्जशीट दिए पुरानी रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी शुरू कर दी। कोर्ट ने वसूली आदेश को रद्द कर कहा कि पिछली आंतरिक जांच केवल एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट थी। उसे पूर्ण अनुशासनात्मक जांच नहीं माना जा सकता।

Friday, November 28, 2025

MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

बलरामपुर : 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में डीसी समेत पांच गिरफ्तार

डीसी बर्खास्त, पकड़े गए लोगों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और दो प्रधान शामिल

बलरामपुर। 11 करोड़ के एमडीएम घोटाले में पुलिस ने जिला समन्वयक (डीसी) फिरोज अहमद खान समेत पांच लोगों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। घोटाले की पुष्टि होने पर डीसी को सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला की तहरीर पर 44 के खिलाफ बुधवार को नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी।

घोटाले के मास्टर माइंड जिला समन्वयक फिरोज अहमद के साथ प्रधानाध्यापक अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अध्यापक मलिक मुन्नवर के अलावा दो ग्राम प्रधान नसीम अहमद और अहमदुल कादरी को भी गिरफ्तार किया गया है। 

प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। एसपी विकास कुमार ने बताया कि मामले में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। धन निकासी, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल जारी है। आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 

राशि का विद्यालयवार आवंटन नहीं

पुलिस की पूछताछ में फिरोज ने बताया कि आईवीआरएस पोर्टल से प्राप्त छात्र संख्या के आधार पर बनाई गई एक्सेल शीट में हेराफेरी की जाती थी। जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित कुल राशि को बिना बदले, विद्यालयवार आवंटन में भी गोलमाल किया जाता था।



MDM में 11 करोड़ के घोटाले में 45 पर केस दर्ज, स्कूल व मदरसों संग मिलकर DC ने डकारा बजट, स्कूल व मदरसा के आठ प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों पर भी कार्रवाई

45 लोग नामजद, जिसमें डीसी भी, बलरामपुर में छह वर्ष से हो रही थी धांधली


बलरामपुर : मध्यान्ह भोजन योजना में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एमडीएम सेल से पांच-छह वर्षों के भीतर कनवर्जन कास्ट में कूटरचित दस्तावेजों के सहारे 11 करोड़ रुपये से अधिक का गबन कर लिया गया। इसमें 17 वर्षों से एमडीएम सेल के जिला समन्वयक पद पर जमे फिरोज अहमद खान, तीन मदरसों और पांच परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व चार ग्राम प्रधानों की संलिप्तता उजागर हुई है। 


गबन की पुष्टि होने पर बीएसए शुभम शुक्ला की तहरीर पर 45 नामजद व अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। नौनिहालों के निवाले पर डाका डालने के खेल में अभी कई और चेहरे सामने आ सकते हैं। इसमें कई सफेदपोश भी हैं। नामजद डीसी समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।

बीएसए ने नगर कोतवाली में दी गई तहरीर में कहा कि विभिन्न विद्यालयों द्वारा शिकायतें की जा रही थीं कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान द्वारा पर्याप्त कन्वर्जन कास्ट का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायत पर वित्त एवं लेखाधिकारी के साथ एमडीएम कन्वर्जन कास्ट पत्रावली का परीक्षण किया गया। डीसी ने ई-मेल के माध्यम से प्रिंटेड पेमेंट

एडवाइस (पीपीए) उपलब्ध कराए, तो उसमें गड़बड़ी का संदेह हुआ। जांच में पाया गया कि डीसी ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए थे, वे कूटरचित थे। वास्तविक रूप से भेजी धनराशि को कम करके दिखाया गया था, फिरोज अहमद वर्ष 2008 से कार्यरत हैं और पांच से छह वर्षों के अंतराल में गबन में सहभागी विद्यालयों में शिक्षारत छात्रों की संख्या के प्रतिकूल बहुत अधिक धनराशि आवंटित कर प्रधान, प्रधानाध्यापक व समिति के अध्यक्ष के साथ मिलकर गबन कर लिया। नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम सेल के डीसी फिरोज अहमद खान समेत 44 अन्य लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है।


एमडीएम की शिकायत विभिन्न पत्रावलियों का सत्यापन किया गया। जिसमें लगभग 11 करोड़ रुपये के सरकारी बजट गबन का मामला सामने आने पर डीसी समेत 45 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
- शुभम शुक्ला, बीएसए, बलरामपुर

डीसीम समेत 45 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच हो रही है। दर्जनों लोगों के नाम सामने आ रहे है। आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
- विकास कुमार, एसपी, बलरामपुर

Sunday, October 26, 2025

नवंबर से गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू देने की तैयारी, परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मिलेगा मोटे अनाज से बना खाना

नवंबर से गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू देने की तैयारी, परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मिलेगा मोटे अनाज से बना खाना

बेहतर होगी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता


लखनऊ। सूबे के  परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब दो लाख विद्यार्थियों के खान-पान व स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ठंड से बचाव के लिए उन्हें दोपहर के खाने में मोटे आजान जैसे ज्वार व बाजरा से निर्मित भोजन दिया जाएगा। इसके अलावा गुड़ व मूंगफली की चिक्की, रामदाना से बना लड्डू भी दिया जाएगा। यह व्यवस्था नवंबर से शुरू होगी।


सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते हुए मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत हुई है। इसके तहत प्रत्येक दिवस पर मिलने वाले भोजन में नवंबर से बदलाव किया जाएगा। खासकर नियमित खाने में मोटे अनाज से निर्मित पौष्टिक आहार की मात्रा को बढ़ाया जाएगा। ताकि, ठंड में बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य रह सके और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ सके।


बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को गेहूं की रोटी, सोयाबीन की सब्जी, चना व अरहर की दाल, मौसमी सब्जियां और फल दिए जाते हैं लेकिन, ठंड की वजह से अब उन्हें गुड़, मूंगफली, जौ, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलिया व फाइबर प्रोटीन युक्त खाना दिया जाएगा।

Monday, September 16, 2024

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली

आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील रसोईया को सम्मानजनक मानदेय के लिए संगठनों ने बनाई रणनीति, मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली 


लखनऊ। आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सम्मानजनक मानदेय देने, 5000 पेंशन व ग्रेच्युटी, रसोइयों को न्यूनतम वेतन देने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रेच्युटी देने के हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने करने की मांग की गई है।


मांग को लेकर 26 नवंबर को रैली निकाली जाएगी। श्रम विभाग के हॉल में आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मियों की यूनियनों की रविवार को हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय लिया गया। 


एटक की उषा शर्मा ने कहा कि सरकार का तर्क है कि आंगनबाड़ी, आशा, रसोइया, शिक्षामित्र और रोजगार सेवक जैसी स्कीम वर्करों को सम्मानजनक मानदेय देने के लिए संसाधन नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कॉरपोरेट घरानों की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाए तो सम्मानजनक मानदेय व पेंशन दी जा सकती है। संवाद

Monday, September 4, 2023

फोर्टीफाइड चावल से अधिकतम पौष्टिक लाभ के लिए रसोईया अपनाये ये तरीके

फोर्टीफाइड चावल से अधिकतम पौष्टिक लाभ के लिए रसोईया अपनाये ये तरीके


01
पानी से फोर्टीफाइड चावल को धोना है 2-3 बार, 
तभी होता है चावल भिगोने को तैयार।

02
जिस पानी में भिगोया हो चावल उसे कभी फेंको नहीं.
उसी पानी में पकाओ चावल, पौष्टिकता रहेगी बरकरार तभी।

03
पानी की मात्रा उतनी ही लो जिसमें चावल अच्छे से पक जाए. ढक्कन बंद करके पकाओ इसे, इसके सेवन से बच्चों की सेहत बन जाए।


अब स्कूलों में बच्चों को मिलेगा सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर फोर्टीफाइड चावल


Thursday, August 17, 2023

पढ़ाना टीचर की ड्यूटी का हिस्सा, 'मिड-डे मील' लागू करना नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की केंद्र की पुनर्विचार याचिका

पढ़ाना टीचर की ड्यूटी का हिस्सा, 'मिड-डे मील' लागू करना नहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की केंद्र की पुनर्विचार याचिका


बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जिसमें 'मिड-डे मील' योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षकों को नहीं दी जा सकती है। इसमें शिक्षा अधिकार कानून में शिक्षकों को दूसरी ड्यूटी देने का प्रावधान नहीं दिया गया है। पहली से आठवीं के स्टूडेंट्स के लिए केंद्र ने 1995 में योजना शुरू की थी।
 

मुंबई : 'मिड-डे मील' योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शिक्षकों को नहीं दी जा सकती है। यह मत व्यक्त करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज़ कर दी। हाई कोर्ट ने 27 फरवरी, 2014 एक आदेश में कहा था कि 'मिड-डे मील' के तहत दिए जाने वाले भोजन को टेस्ट करने व उसका रिकॉर्ड रखने का काम शिक्षकों को न दिया जाए। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि हाई कोर्ट अपने इस आदेश पर दोबारा विचार करे।

हम अपील कोर्ट नहीं: बेंच

जस्टिस एस़ बी़ शुक्रे व जस्टिस राजेश पाटील की बेंच के सामने केंद्र की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान बेंच ने कहा कि यदि एक बार हाई कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला है कि 'मिड-डे मील' का कार्यान्वयन शिक्षकों की ड्यूटी का हिस्सा नहीं है, तो हम इस पर पुनर्विचार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हम अपील कोर्ट नहीं हैं। वैसे भी, हमारे सामने संतोषजनक कारण नहीं है, जिसके आधार पर पुराने आदेश पर पुनर्विचार किया जा सके। इसीलिए केंद्र सरकार की याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। 'मिड-डे मील' योजना लागू करने के लिए राज्य सरकार की ओर से नियम तैयार किए गए हैं, जिसके खिलाफ महिला बचत गुट ने भी कोर्ट में याचिका दायर की है।


'शिक्षा अधिकार कानून में शिक्षकों को दूसरी ड्यूटी देने का प्रावधान नहीं'पहली से आठवीं के स्टूडेंट्स के लिए केंद्र ने 1995 में 'मिड-डे मील' योजना शुरू की थी। राज्य सरकार ने इस योजना के अमल को लेकर जून, 2009 और फरवरी, 2011 में निर्णय लिया था। सरकार के निर्णय के मुताबिक तय शर्तों को पूरा करने के बाद महिला बचत गट को 'मिड-डे मील' का ठेका दिया जाता है। इस योजना में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि 25 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी की है। 22 जुलाई, 2013 में केंद्र सरकार ने योजना को लेकर नए सिरे से नियमावली जारी की। इस नियम के तहत छात्रों को भोजन देने से पहले शिक्षक उसे जांचे और उसका रिकॉर्ड रखें।


साल 2014 में हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 'मिड-डे मील' की योजना से जुड़ा काम शिक्षकों का न दिया जाए। इसके लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए, जो 'मिड-डे मील' के किचन व स्वच्छता से जुड़े पहलू को देखेंगे। शिक्षा अधिकार कानून की धारा 27 के तहत शिक्षकों को शैक्षणिक कार्य के अलावा कोई दूसरा काम नहीं दिया जा सकता है।

Thursday, April 27, 2023

मध्यान्ह भोजन में मिलेंगे मोटे अनाज के व्यंजन, मिड डे मील के लिए 62 हजार टन बाजरे की मांग की

मध्यान्ह भोजन में मिलेंगे मोटे अनाज के व्यंजन, मिड डे मील के लिए 62 हजार टन बाजरे की मांग की



लखनऊ। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में परोसे जाने वाले मध्यान्ह भोजन में बच्चे जल्द ही पौष्टिकता से भरपूर श्री अन्न यानी मोटे अनाज से बने व्यंजनों का भी लुत्फ उठा सकेंगे। राज्य सरकार मिड डे मील के मैन्यू में श्रीअन्न को शामिल करने जा रही है। बच्चे श्रीअन्न से बने भोज्य पदार्थों को आसानी से स्वीकार कर सकें इसके लिए उसे बच्चों की अभिरुचि के अनुसार स्वादिष्ट 
बनाकर परोसा जाएगा।


श्री अन्न को जल्द से जल्द मिड डे मील में शामिल करने के लिए सरकार ने फिलहाल 62 हजार टन बाजरे की मांग की है। बताया जाता है कि मिड,डे मील के लिए एफसीआई के गोदामों से अनाजों की आपूर्ति होती है। और एफसीआई की भंडारण वाली सूची में मोटे अनाजों का उल्लेख नहीं है। लिहाजा आपूर्ति के लिए एफसीआई की सूची में इन्हें शामिल कराने और वहीं से आपूर्ति कराने के लिए राज्य सकार की ओर से केन्द्र सरकार को अनुरोध पत्र भी भेजा गया है।


 प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में मोटे अनाजों का उत्पादन काफी कम है। ऐसे में प्रदेश के 87, 984 प्राथमिक विद्यालयों एवं 55,083 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के करीब सवा दो करोड़ बच्चों के लिए इतने अधिक मात्रा में मोटे अनाजों की व्यवस्था काफी कठिन माना जा रहा है।


दो करोड़ से अधिक बच्चों को दिया जाता है मिड डे मील

प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के 1.83 करोड़ बच्चे तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 39 लाख बच्चों को प्रत्येक कार्यदिवस में अलग-अलग मेन्यू के अनुसार परोसा जाता है मिड डे मील। यह योजना प्रदेश के 87, 984 प्राथमिक विद्यालयों एवं 55,083 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चलाया जा रहा है।

Monday, April 24, 2023

प्रेरणा निरीक्षण एप के जरिये DM और SDM के नेतृत्व में टास्क फोर्स, जाचेंगे मिड डे मील की हकीकत

प्रेरणा निरीक्षण एप के जरिये DM और SDM के नेतृत्व में टास्क फोर्स, जाचेंगे मिड डे मील की हकीकत


प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद शासन की तरफ से इसकी जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को दी गई है। शासन की ओर से जिला स्तर पर जिलाधिकारी और विकास खंड स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाकर मिड डे मील की हकीकत जानने का निर्देश दिया गया है।


परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील बांटने में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार सामने आती रही है। इन समस्याओं को देखते हुए जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टास्क टीम का गठन करने और प्रेरणा इंस्पेक्शन एप के जरिये माह में पांच विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे और हकीकत जानेगे। 


जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स में जिलाधिकारी, मुख्य अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य / सचिव, जिला पूर्ति अधिकारी, सभी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, जिला समाज कल्याण अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स में उप जिलाधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सहायक विकास अधिकारी, नायब तहसीलदार, उपजिलाधिकारी द्वारा नामित अन्य विकास अधिकारी और पूर्ति निरीक्षक को शामिल किया गया है। 


इन अधिकारियों को प्रेरणा एप के माध्यम से माह में कम से कम पांच विद्यालयों का निरीक्षण करके मिड डे मील की वास्तविकता और गुणवत्ता की जांच करनी होगी। साथ ही तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता प्रत्येक माह टास्क फोर्स की बैठक खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा आयोजित की जाएगी।

Monday, February 27, 2023

MDM कन्वर्जन कास्ट में इजाफे का केंद्र का आदेश, पांच माह से उत्तर प्रदेश में अमल नहीं

MDM कन्वर्जन कास्ट में इजाफे का केंद्र का आदेश, पांच माह से उत्तर प्रदेश में अमल नहीं


■ अक्टूबर 2022 में शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया आदेश

■ अब तक बेसिक शिक्षा विभाग ने नहीं लागू की बढ़ी हुई दरें


शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भले ही अक्टूबर 2022 में मिड डे मील की परिवर्तन लागत की दरों में इजाफा किया हो लेकिन अब तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया जा सका। शिक्षक मिड डे मील प्राधिकरण के निदेशक के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।


अप्रैल 2020 में इजाफे के बाद मिड डे मील की कन्वर्जन कास्ट में अब तक प्रदेश में इजाफा नहीं किया गया। अप्रैल 2020 में प्राथमिक स्तर पर 4.97 रूपए एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.45 रूपए मंजूर किए गए थे। बढ़ती मंहगाई के मद्देनजर फिर से कन्वर्जन कास्ट बढ़ाने की मांग की जा रही थी। 


अक्टूबर 2022 में शिक्षा मंत्रालय ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण यानी मिड डे मील योजना के अन्तर्गत परिवर्तन लागत की दरों में इजाफा करते हुए प्राथमिक स्तर पर 5.45 रूपए एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 8.17 रूपए देने का फैसला किया था। संशोधित दरें एक अक्टूबर 2022 से प्रभावी होनी थी।


और पैदा हो गई संशय की स्थिति

अक्टूबर 2022 का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अनेक परिषदीय प्रधानाध्यापकों ने इसके आधार पर एक अक्टूबर 2022 से बढ़ी हुई दरों पर कन्वर्जन कास्ट का भुगतान करना शुरू कर दिया। जब यह जानकारी विभाग को हुई तो उसने स्पष्ट किया कि अभी प्राधिकरण द्वारा बढ़ी हुई दरें लागू करने का आदेश नहीं आया है। आदेश आने तक पूर्ववर्ती दरों पर ही भुगतान किया जाएगा। जो हेडमास्टर पहले ही बढ़ी हुई दरों पर भुगतान कर चुके थे, उन्हें रिकवरी चुकाने की नौबत आ गई है।


एमडीएम पर मंहगाई की मार से बढ़ी परेशानी

हेडमास्टर कहते हैं कि दूध 60 रुपये प्रति लीटर एवं तेल मसालों, फल व सब्जियों के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। पहले की दरों पर एमडीएम तैयार कराना आज के वक्त में घाटे का सौदा साबित हो रहा है। समझ नहीं आ रहा कैसे बजट बनाएं?

Thursday, February 16, 2023

आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को फिर से मिलेगा गर्मागर्म खाना

आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को फिर से मिलेगा गर्मागर्म खाना


लखनऊ : आंगनबाड़ी केंद्रों के तीन से छह वर्ष तक बच्चों को एक बार फिर सरकार गर्मागर्म खाना परोसने जा रही है। अभी तक पके हुए भोजन के बजाए कच्चा राशन इन्हें मिलता था। शहरों के आंगनबाड़ी केंद्रों में जिला स्तर पर चयनित एनजीओ खाना बनाकर बांटेंगे, जबकि गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पास के प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील बनाने वाले रसोइए ही इसे बनाएंगे। ग्रामीण इलाकों के ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र जिनके आस-पास प्राथमिक विद्यालय नहीं हैं वहां हाट कुक्ड फूड तैयार करने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिकाओं को सौंप दी गई है।


मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने मंगलवार को हाट कुक्ड फूड योजना का प्रस्तुतीकरण देखा । उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना जरूरी है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए शीघ्र औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। इससे आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के नामांकन और उपस्थिति दोनों में सुधार होगा। मुख्य सचिव ने कहा कि खाना तैयार करने के लिए लकड़ी से जलने वाले चूल्हे का इस्तेमाल न किया जाए, केवल रसोई गैस पर ही खाना बनाया जाए।

Tuesday, January 24, 2023

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मोटे अनाज, मंशा डिमांड बढ़ाने की

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मोटे अनाज, मंशा डिमांड बढ़ाने की

योगी सरकार की मंशा: हर आम एवं खास की थाल तक पहुंचे मोटे अनाज


Uttar Pradesh: बच्चे अपने इन परंपरागत अनाजों एवं इनकी खूबियों के बाबत जानें, इसके लिए मिलेट्स को प्राइमरी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। वास्तव में सरकार की मंशा अलग अलग प्रयासों से समग्र रूप में मिलेट्स की डिमांड बढ़ाने की है। और, बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए उत्पाद के रूप में गुणवत्तापूर्ण माल की भी जरूरत होगी।


लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय मिलेट ईयर-2023 में मोटे अनाज (बाजरा, ज्वार, सावां, कोदो, रागी आदि) किसी न किसी रूप में हर आम एवं खास की थाली का हिस्सा बनें, यह यूपी सरकार की मंशा है। इसके लिए मिलेट्स द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ये उत्पाद नाश्ते, लंच, ब्रंच या डिनर के लिए स्पेसिफिक हंगर (किसी खास तरह के खाद्य पदार्थ की मांग) बनें। इसके लिए प्रसंस्कृत उत्पादों को स्थानीय लोगों की उम्र एवं स्वाद के पसंद के अनुरूप होना होगा। 

बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगे मिलेट्स, मंशा डिमांड बढ़ाने की

बच्चे अपने इन परंपरागत अनाजों एवं इनकी खूबियों के बाबत जानें, इसके लिए मिलेट्स को प्राइमरी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। वास्तव में सरकार की मंशा अलग अलग प्रयासों से समग्र रूप में मिलेट्स की डिमांड बढ़ाने की है। और, बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए उत्पाद के रूप में गुणवत्तापूर्ण माल की भी जरूरत होगी। इसके लिए एफपीओ (फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) के जरिए रकबा एवं उत्पादन बढ़ाने का भी काम होगा। साथ ही ये बीज का भी उत्पादन करेंगे। प्रगतिशील किसानों को प्रदर्शन के लिए बीज के निःशुल्क और खेती के इच्छुक किसानों को केंद्र एवं प्रदेश सरकार की संस्थाएं राष्ट्रीय बीज निगम, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम आदि के जरिए अनुदानित बीज दिया जाएगा। 

जी-20 के मेहमानों की थाल की शोभा बढ़ाएंगे मिलेट्स के लजीज पकवान

उत्तर प्रदेश में फरवरी 2023 से लेकर अगस्त के अंत के दौरान जी-20 की करीब दर्जन भर बैठकें होनी है। इसमें से आधा दर्जन बैठकें महादेव की काशी, तीन ताजनगरी आगरा, बाकी लखनऊ एवं ग्रेटर नोएडा में होंगी। इनमें आने वाले मेहमानों को भी मिलेट्स के लजीज व्यंजन परोसे जाएंगे। यह एक तरह से इनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग भी होगी। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि इन अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी हो। इसी तरह हर विभाग में समय समय पर होने वाले राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मिलेटस के उत्पाद की ब्रांडिंग करेंगे। यह नाश्ते, भोजन के रूप में हो सकता है। गिफ्ट हैंपर के रूप में भी।


मोटे अनाज को लोकप्रिय बनाने की अन्य योजनाएं

– मिड-डे मील, बाल पुष्टाहार, पीडीएस कार्यक्रम में मिलेट्स के विभिन्न उत्पाद सम्मिलित होंगे।

– स्वयं सहायता समूहों को मिलेट्स के उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

-एनआरएलएम द्वारा चयनित आंगनबाड़ी एवं पोषित आहार में मिलेट्स भी शामिल होंगे



स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल होगी मोटे अनाज की जानकारी

आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को दिए जाएंगे मोटे अनाज से बने पुष्टाहार

उचित मूल्य की दुकानों पर भी बांटा जाएगा मोटा अनाज


लखनऊ। प्रदेश में मोटे अनाज के उत्पादन व उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संबंधित जानकारी को बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को भी मोटे अनाज से बने पुष्टाहार दिए जाएंगे।


दरअसल, राज्य सरकार ने हर स्तर पर मोटे अनाज (मिलेट्स) के तहत ज्वार, बाजरा, सांवा, कोदो, काकुन, रागी, कुटकी, चेना, कुट्टू और चौलाई के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाई है मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की पहल पर बनाई गई योजना में अधिकांश विभागों की भूमिका भी तय की गई है।


योजना के तहत मोटे अनाज की विभिन्न फसलों, उनके उत्पाद और पोषण के महत्व को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। खाद्य एवं रसद विभाग को मोटे अनाज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने और उसके भंडारण की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उचित मूल्य की दुकानों पर वितरित होने वाले राशन में मोटे अनाज को करने की योजना है।


विकास खंड और गांवों में खोले जाएंगे स्टोर

ग्राम्य विकास विभाग विकास खंड और गांवों में अन्य सार्वजनिक स्थलों पर मोटे अनाज के आउटलेट और दुकानें स्थापित करेगा। महिला स्वयं सहायता समूह के जरिये भी मोटे अनाज के उत्पाद तैयार कराए जाएंगे। इस समूह की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तैयार किए जा रहे पुष्टाहार भी मोटे अनाज से बनाए जाएंगे।


बीज निगम उपलब्ध कराएगा प्रमाणिक बीज

मोटे अनाज के बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बीज विकास निगम को सौंपी गई है। खेतों में फील्ड डे का आयोजन किया जाएगा। कृषक उत्पादन संगठनों के जरिये मोटे अनाज के बीज उत्पादन के लिए सीड मनी उपलब्ध कराई जाएगी। मिलेट्स प्रसंस्करण की स्थापना के लिए कृषि विश्वविद्यालय को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।


किसानों के प्रशिक्षण टूल तैयार किए जाएंगे रहमान खेड़ा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान के जरिये मोटे अनाज की उन्नत खेती और किसानों के प्रशिक्षण के लिए टूल तैयार किए जाएंगे। कृषक उत्पादन संगठनों के सदस्यों का प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। कृषि विवि मोटे अनाज की उन्नत खेती का प्रदर्शन कर कृषकों को प्रशिक्षित करेंगे। बीज का उत्पादन करेंगे।


मोटे अनाज की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होगी

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग मोटे अनाज की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करेगा। कृषि विपणन विभाग मोटे अनाज के उत्पादों के आउटलेट और स्टोर स्थापित करेगा। वहीं, मंडियों में विक्रय स्थल का आवंटन किया जाएगा।

प्रमुख उत्पादक क्षेत्र : मोटे अनाज में यहां ज्वार और बाजरा की पैदावार होती है। बाजरा आगरा, बदायूं, अलीगढ़, फिरोजाबाद, संभल, हाथरस, एटा, मथुरा, कासगंज और इटावा की फसल है। वहीं, ज्वार बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर, कौशांबी, रायबरेली, जालौन, सोनभद्र और जौनपुर की प्रमुख फसल है।


स्कूलों में बंटेगा मोटे अनाज से बना मिड-डे मील, सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ परोसे जाएंगे


लखनऊ। प्रदेश में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग कराएगी। सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में मोटे अनाज से बनने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाएगा। सभी होटल और रेस्तरां के मेन्यू में भी मोटे अनाज के खाद्य पदार्थ को शामिल कराया जाएगा। सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में भी मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ ही परोसे जाएंगे।


प्रदेश में मोटे अनाज के उत्पादन एवं उपयोग पर शनिवार को लोक भवन में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में मोटे अनाज के रूप में ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो, काकुन, रागी, कुटकी, चना, कुट्टू, चौलाई की पैदावार होती है। मोटे अनाज की खेती में सिंचाई के लिए पानी की कम जरूरत होती है। इसके लिए खाली पड़े असिंचित क्षेत्र को भी चिह्नित किया जाए।


उन्होंने सामान्य बीज एवं निःशुल्क बीज मिनी किट वितरित करने के निर्देश दिए।   साथ ही शेफ प्रतियोगिता आयोजित करने का भी सुझाव दिया। उधर, जी-20 से संबंधित सभी आयोजनों व ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिलेट्स की ब्रांडिंग व मार्केटिंग कराई जाएगी। आगरा, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा में होने वाली बैठकों में आने वाले विदेशी मेहमानों को मोटे अनाज से बने व्यंजन परोसने की तैयारी है। सचिवालय स्थित कैंटीन व आकांक्षा मसाला मठरी केंद्र को मिलेट्स उत्पाद एवं उससे तैयार होने वाले पकवान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

Thursday, January 12, 2023

बच्चों को मशरूम और गेहूं की पौष्टिकता वाली प्रजातियों से बना भोजन मिलेगा, बिल एण्ड मेलिंडा गेट फाउण्डेशन की पहल

बच्चों को मशरूम और गेहूं की पौष्टिकता वाली प्रजातियों से बना भोजन मिलेगा, बिल एण्ड मेलिंडा गेट फाउण्डेशन की पहल


लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को मशरूम और गेहूं की पौष्टिकता वाली प्रजातियों से बना भोजन मिलेगा। इस बारे में बिल एण्ड मेलिंडा गेट फाउण्डेशन ने पहल की है। राज्य के ़कृषक उत्पादक संगठनों के साथ मिलकर यह फाउण्डेशन मशरूम और गेहूं की पौष्टिकता वाली प्रजातियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करवाएगा। उन्हें मुफ्त बीज व उत्पादन तकनीक मुहैया करवाएगा।


इसके साथ ही आपूर्तिकर्ता एजेसिंयों से करार करवा कर किसानों को बाजार भी उपलब्ध करवाएगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि बहुत जल्द मिड डे मील योजना में मोटे अनाज से पके भोजन भी बच्चों को परोसे जाएंगे। 


आगामी 19 से 21 जनवरी के दरम्यान कृषि मंत्री शाही के नेतृत्व में कृषि विभाग का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मण्डल इसी सिलसिले में बंगलुरु भी जा रहा है। इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार एवं बीएमजीएफ यानि बिल एंड मेलिंडा गेट फाउंडेशन के बीच नॉलेज पार्टनरशिप के तहत बीते दिनों विभिन्न पहलों की समीक्षा के लिए बैठक हुई।

Tuesday, December 27, 2022

मिड-डे-मील और बाल पुष्टाहार में बांटें मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ : मुख्य सचिव

मिड-डे-मील और बाल पुष्टाहार में बांटें मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ : मुख्य सचिव



लखनऊ। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि मिड-डे-मील और बाल पुष्टाहार में मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ बांटे जाएं। समेकित बाल विकास एवं पुष्टाहार, आश्रम पद्धति विद्यालय आदि में मोटे अनाज सम्मिलित किए जाएं। वह योजना भवन में बाजरा उत्पादन के संबंध में सोमवार को हुई बैठक में वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष की तैयारियों पर चर्चा कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि प्रदेश में ज्वार, बाजरा, सावां, कोदो, काकुन, कुटकी, चना, कुट्टू और चौलाई की फसलों को बढ़ाने के लिए रोड शो, होर्डिंग्स, वॉल पेंटिंग से लोगों को जागरूक करें। इसके लिए सभी जिलों में सामान्य बीज एवं बीज की निशुल्क मिनी किट दी
जाए। कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के सदस्यों को प्रशिक्षण देकर मोटे अनाजों का वर्गीकरण करें। मुख्य सचिव ने कहा कि दूसरे चरण में मोटे अनाजों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भी शामिल करें।

Tuesday, December 13, 2022

आखिर दो साल बाद केंद्र सरकार ने बढ़ाई थी कनवर्जन कास्ट, परिषदीय विद्यालयों को अभी भी पत्र जारी होने का है इन्तजार

आखिर दो साल बाद केंद्र सरकार ने बढ़ाई थी कनवर्जन कास्ट, परिषदीय विद्यालयों को अभी भी पत्र जारी होने का है इन्तजार


एमडीएम योजना में कनवर्जन कास्ट पर दो वर्ष बाद केंद्र सरकार ने मुहर लगाई। एक अप्रैल 2020 को कनवर्जन कास्ट की रकम निर्धारित की गई थी। उसके बाद से इस पर विचार नहीं किया गया। महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्राइमरी के स्कूलों में पढ़ने वाले प्रति बच्चा कनवर्जन कास्ट में 35 पैसे और मिडिल स्कूल के बच्चों के लिए 82 पैसे की बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया। इस पर अक्तूबर माह में मुहर लगाई गई।


जबकि एक अप्रैल 2020 को जारी कनवर्जन कास्ट की दर प्राइमरी में प्रति बच्चा 4.91 और मिडिल में 7.35 रुपये घोषित की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा जो बढ़ी हुई जो दर हुई, वह प्राइमरी में प्रति बच्चा 5.45 और मिडिल में 8.17 रुपये बताई गई थी।



लेकिन दो माह बीतने के बाद अभी तक परिषदीय विद्यालयों को कनवर्जन कास्ट बढ़ोत्तरी का कोई नया आदेश नहीं दिया गया है।  आदेश नहीं आने और नई दर से भुगतान करने पर हेडमास्टरों की परेशानी बढ़ गई है। फिलहाल विभागीय अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हैं,  दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी बीएसए कार्यालय में एमडीएम प्राधिकरण की ओर कोई पत्र नहीं आया है। 

Monday, December 12, 2022

खाद्य सुरक्षा भत्ता वितरण में ढिलाई पर कार्रवाई की चेतावनी

खाद्य सुरक्षा भत्ता वितरण में ढिलाई पर कार्रवाई की चेतावनी



लखनऊ। पिछले दो सालों में जिन अधिकारियों की वजह से खाद्य सुरक्षा भत्ता अभिभावकों को नहीं मिल सका है, उन पर कार्रवाई की जा सकती है। सभी अभिभावकों को भत्ता न दिए जाने की मिल रही शिकायतों पर ढिलाई बरतने वाले जिम्मेदारों को कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सत्र 2020-21 व 2021-22 का खाद्य सुरक्षा भत्ता अभी भी कई अभिभावकों को नहीं मिल सका है।




ब्लॉक स्तर पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद द्वारा की गई समीक्षा में ये सामने आया कि कुछ जगह कोटेदार के माध्यम से खाद्यान्न व कन्वर्जन कास्ट की राशि अभी तक छात्र- छात्राओं के अभिभावकों के खातों में अब तक नहीं भेजी गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा है कि संबंधित अधिकारी तत्काल वितरण कराकर पोर्टल पर उपभोग प्रमाणपत्र अपलोड कराना सुनिश्चित करें।


साथ ही सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि विद्यालयों में अनुश्रवण कर मध्याह्न भोजन का वितरण कराना सुनिश्चित करें। ऐसे विद्यालय जिनमें गैर सरकारी संगठन द्वारा मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, उन विद्यालयों में खाद्यान्न व कन्वर्जन कास्ट उपलब्ध नहीं रहती है। इन विद्यालयों के संबंध में ब्लॉक टास्क फोर्स को जानकारी दी जाए।

Thursday, December 1, 2022

MDM रसोईया मानदेय में खेल : कौशांबी जिले के मिड-डे-मील जिला समन्वयक समेत सात की संविदा समाप्त, FIR दर्ज, 6 BEO के खिलाफ कार्यवाही हेतु संस्तुति

MDM रसोईया मानदेय में खेल : कौशांबी जिले के  मिड-डे-मील जिला समन्वयक समेत सात की संविदा समाप्त, FIR दर्ज, 6 BEO के खिलाफ कार्यवाही हेतु संस्तुति 

लाखो रुपए गबन के आरोप में 5 शिक्षा कर्मचारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के निर्देश

छह खण्ड शिक्षा अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने के लिए महानिदेशक को भेजा पत्र

लाखो रुपए के शिक्षा विभाग में गबन के आरोप में सात संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त


कौशाम्बी : जिले के विभिन्न विकास खण्ड के विद्यालयों में रसोइयां के रूप कार्यरत न होने के बावजूद सुनियोजित तरीके से स्वयं तथा अपने सगे सम्बन्धियों जान पहचान के व्यक्तियों के खाते में प्रथमद्ष्ट्या लाखो रुपए मानदेय के प्रेषण करके शासकीय धनराशि के व्यपहरण का मामला प्रकाश में आया है।


मामले की जांच जिलाधिकारी ने कराई थी जॉंच में दोषी पाये गये पंकज कुमार, जिला समन्वयक-एम0डी0एम0 विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 पटल प्रभारी सिराथू सम्प्रति कम्प्यूटर ऑपरेटर विकास खण्ड सरसवां राजकुमार चौरसिया, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 पटल प्रभारी-मूरतगंज सम्प्रति कम्प्यूटर ऑपरेटर विकास खण्ड-कड़ा मो0 नाशिद, अनुदेशक उच्च प्राथमिक विद्यालय पिण्डरा/एम0डी0एम0 पटल प्रभारी विकास खण्ड मंझनपुर नीरज जायसवाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर एम0डी0एम0 के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश जिला अधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को दिये है।


 उपरोक्त पॉंचोें कर्मचारियों एवं 02 अन्य कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रदीप सिंह, सरसवां एवं आलेप कुमार, सिराथू कुल 07 संविदा कर्मचारियों की सेवायें तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कौशाम्बी को दिये गये


पर्यवेक्षणीय कार्यों में शिथिलता बरतने के लिए दोषी बताये गये खण्ड शिक्षाधिकारियों राजेश कुमार, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सिराथू सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी जनपद चित्रकूट जवाहर लाल यादव, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सिराथू सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी मुख्यालय कौशाम्बी चन्द्रमोहन सिंह, खण्ड शिक्षाधिकारी मंझनपुर श्रीमती किरन पाण्डेय, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी मूरतगंज सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी कड़ा मुकेश नारायण मिश्र तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी मूरतगंज सम्प्रति निलम्बित खण्ड शिक्षाधिकारी सम्बद्ध जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंझनपुर मिथिलेश कुमार, तत्कालीन खण्ड शिक्षाधिकारी सरसवां सम्प्रति खण्ड शिक्षाधिकारी जनपद चित्रकूट के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने के लिए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, उत्तर प्रदेश लखनऊ को जिलाधिकारी द्वारा रिपोर्ट प्रेषित की गयी है



कौशांबी : मिड-डे-मील योजना में एक बड़े फर्जीबाड़े का खुलासा हुआ है। बीएसए कार्यालय में तैनात एमडीएम के जिला समन्वयक समेत सात कर्मचारी फर्जी रसोइयां बन खुद व रिश्तेदारों के खाते में मानदेय का 7.42 लाख रुपया भेजकर खा गए। जांच में खुलासा होने के बाद डीएम सुजीत कुमार ने सातों कर्मचारियों की संविदा समाप्त करने के साथ ही पांच के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। इसके अलावा पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने वाले छह खंड शिक्षाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा को संस्तुति कर दी गई। एकमुश्त इतनी बड़ी कार्रवाई से बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली है।


पिछले दिनों रसोइयों को मानदेय मुहैया कराने के लिए शासन से बजट आवंटित हुआ तो बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। खंड शिक्षाधिकारी सिराथू सुरेंद्र पटेल ने हाजिरी सत्यापन कराने के लिए रसोइयों की सूची व्हाट्सएप ग्रुप पर डालकर स्कूलों के प्रधानाचार्यों से जानकारी मांगी। इस दौरान कुछ विद्यालयों से जानकारी मिली कि सूची में दर्ज रसोइयां उनके यहां नियुक्ति ही नहीं हैं।


बीएसए की जांच में हुआ खुलासा

एबीएसए ने इसकी जानकारी बीएसए प्रकाश सिंह को दी। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आया तो उन्होंने बीएसए के साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी विनय प्रजापति की दो सदस्यीय टीम गठित कर प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया। अफसरों ने अभिलेखों को खंगाला तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।


बीएसए ने बताया कि वर्ष 2019 से 22 के बीच 45 फर्जी रसोइयों के नाम से कार्यालय में तैनात जिला समन्वयक एमडीएम पंकज जायसवाल समेत पांच कर्मचारी अपने व अपने रिश्तेदारों के खाते में मानदेय भेज रहे थे।


अब तक इन लोगों ने 7.42 लाख रुपये की धनराशि का गबन किया है। इस कार्यालय में दो अन्य कर्मचारी भी सहयोग करते थे। इसके अलावा संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों ने भी पर्यवेक्षण में लापरवाही की। 


जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बुधवार को सभी सातों कर्मचारियों की संविदा समाप्त करते हुए जिन पांच कर्मचारियों के खाते में धनराशि जा रही थी उनके खिलाफ एफआईआर कराने का निर्देश दिया। इंस्पेक्टर विनोद सिंह ने बताया कि देर रात सभी पांचों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।


इनकी हुई संविदा समाप्त

पंकज कुमार जायसवाल-जिला समन्वयक एमडीएम

विनय कुमार गुप्ता, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर/एमडीएम पटल प्रभारी सिराथू (वर्तमान तैनाती कम्प्यूटर ऑपरेटर सरसवां ब्लॉक)

राजकुमार चौरसिया, तत्कालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर/एमडीएम पटल प्रभारी मूरतगंज (वर्तनाम तैनाती कम्प्यूटर ऑपरेटर कड़ा ब्लॉक)

मो. नाशिद, अनुदेशक उच्च प्राथमिक विद्यालय पिंडरा/एमडीएमपटल प्रभारी मंझनपुर ब्लॉक

नीरज जायसवाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर-एमडीएम

प्रदीप सिंह, कम्प्यूटर ऑपरेटर सरसवां

आलेप कुमार कंप्यूटर आपरेटर सिराथू

इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया पत्र

राजेश कुमार, तत्कालीन एबीएस सिराथू (वर्तमान तैनाती एबीएसए जनपद चित्रकूट)

जवाहर लाल यादव, तत्कालीन एबीएसए सिराथू (वर्तमान तैनाती एबीएसए मुख्यालय कौशाम्बी)

चंद्रमोहन सिंह, एबीएसए मंझनपुर

किरन पांडेय, तत्कालीन एबीएसए मूरतगंज (वर्तमान तैनाती एबीएसए कड़ा)

मुकेश नारायण मिश्र, तत्कालीन एबीएसए मूरतगंज (वर्तमान निलम्बित एबीएसए सम्बद्ध डायट मंझनपुर)

मिथिलेश कुमार, तत्कालीन एबीएसए सरसवां (वर्तमान तैनाती एबीएसए जनपद चित्रकूट)


फर्जी रसोइयों के नाम पर मानदेय आहरित करने के आरोप में सात कर्मचारियों की संविदा समाप्त करने के साथ ही एमडीएम समन्वयक समेत पांच के खिलाफ एफआई दर्ज करा दी गई है। साथ ही पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने वाले छह खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए महानिदेशक को संस्तुति की गई है।
सुजीत कुमार, जिलाधिकारी कौशांबी

Thursday, September 15, 2022

MDM : रसोइयों के लिए दो हजार की दर से मानदेय और एक माह की परिवर्तन लागत भी जारी

MDM : रसोइयों के लिए दो हजार की दर से मानदेय और एक माह की परिवर्तन लागत भी जारी


प्रयागराज। कक्षा एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन पकाने वाले लगभग 3.84 लाख रसोइयों के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार दो हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ी दर से अप्रैल का मानदेय जारी कर दिया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा और निदेशक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण विजय किरन आनंद की ओर से 13 सितंबर को सभी जिलों के डीएम को मानदेय का 74.83 करोड़ रुपये बजट जारी किया गया है।


साथ में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर बनने वाले मिड-डे-मील की एक महीने की परिवर्तन लागत भी भेजी गई है। परिवर्तन लागत के रूप में 155.91 करोड़ रुपये भेजे गए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने 28 अप्रैल को रसोइयों का मानदेय 1.5 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया था। लेकिन पांच महीने बीतने के बावजूद बजट जारी नहीं हो सका था।