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Tuesday, February 23, 2021

दिल्ली : ऑफलाइन परीक्षा के लिए बच्चों को बाध्य नहीं कर सकते स्कूल : शिक्षा निदेशालय


दिल्ली : ऑफलाइन परीक्षा के लिए बच्चों को बाध्य नहीं कर सकते स्कूल : शिक्षा निदेशालय


बच्चों के पास ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही विकल्प हैं।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के पास भी बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें की हैं।मौजूदा समय में बच्चों का स्कूल आना कतई उचित नहीं है। हाल ही में दिल्ली में दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के मामलों की भी पुष्टि हुई है।


नई दिल्ली  । राजधानी में कोरोना के मामले घटने के बाद दिल्ली सरकार द्वारा शैक्षिक गतिविधियों में थोड़ी ढील देने के बाद निजी स्कूलों ने ऑफलाइन परीक्षा के लिए विद्यालय आने के लिए बच्चों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इससे अभिभावक और बच्चे दोनों परेशान हैं। वहीं, गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी स्कूल बिना अभिभावकों की सहमति के बच्चों को ऑफलाइन परीक्षा के लिए जबरन नहीं बुला सकता।


फिलहाल बच्चों के पास ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही विकल्प हैं। लेकिन, इसके बावजूद भी स्कूल अभिभावकों की सहमति के बिना 9वीं और 11वीं कक्षा के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इसको लेकर अभिभावकों की ओर से दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) से भी शिकायतें की गई हैं। इस पर आयोग ने संबंधित स्कूल से जवाब भी मांगा है।


वहीं, इस मामले पर शिक्षा निदेशालय का कहना है कि स्कूल अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बना सकते हैं। ये कतई सहीं नहीं है। जब तक सरकार पूरी तरह से अनलॉक नहीं घोषित कर देती तब तक तो बच्चे का स्कूल आना पूरी तरह वैकल्पिक है। कोई भी स्कूल बच्चे को स्कूल बुलाने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकता है।


स्कूल बुलाने पर अगर कोई बच्चा बीमार हो गया तो फिर इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन को लेनी होगी। जिन अभिभावकों को स्कूल की तरफ से बच्चे को भेजने के लिए बाध्य किया जा रहा है वो शिक्षा निदेशालय को लिखित में शिकायत कर सकते हैं । निदेशालय इन स्कूलों पर कार्रवाई करेगा। वहीं, इस मामले पर दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम का कहना है कि बच्चों को आफलाइन परीक्षा के लिए जबरन स्कूल बुलाने से बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक चिंतित हैं। इसके लिए मेरे पास भी कई सारे बच्चों की शिकायतें आई हैं।


वहीं, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के पास भी बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें की हैं।मौजूदा समय में बच्चों का स्कूल आना कतई उचित नहीं है। हाल ही में दिल्ली में दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के मामलों की भी पुष्टि हुई है। ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए दिल्ली सरकार अतिशीघ्र निजी स्कूलों को आदेश जारी कर 9वीं और 11वीं के बच्चों की परीक्षाएं ऑनलाइन कराने का आदेश जारी करे, जिससे बच्चों और अभिभावकों को राहत मिल सके।

Monday, February 22, 2021

प्राइमरी स्कूल खुलने पर टीका लगाकर बच्चों का होगा स्कूलों में स्वागत, सजाए जाएंगे परिषदीय स्कूल

प्राइमरी स्कूल खुलने पर टीका लगाकर बच्चों का होगा स्कूलों में स्वागत, सजाए जाएंगे परिषदीय स्कूल


कोरोना काल में करीब एक साल बाद खुल रहे कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों को बच्चों के स्वागत के लिए सजाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूलों में गुब्बारों, झालरों और अन्य सजावटी सामान से सजाने और बच्चों के लिए शौचालय व पीने के पानी के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।


प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यालय एक मार्च से संचालित होंगे। कोरोना काल में एक साल बाद स्कूल आने वाले बच्चों को अच्छा माहौल देने के लिए स्कूलों को सजाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सजावट की तैयारियां शुरू की है।  बच्चों के स्वागत के लिए स्कूल की कक्षाओं व गेट को रंगीन गुब्बारों, फूलों व रंग बिरंगी झालरों से सजाया जाएगा।  टीका लगाकर बच्चों का स्कूल में स्वागत किया जाएगा।


स्कूलों में बच्चों के पीने के पानी के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था की जाएगी। जानकारों की मानें तो शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट से रनिंग वाटर की व्यवस्था करना होगी। इसके अलावा लड़कियों के लिए शौचालय की अलग व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता  ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्कूल भवनों व कक्षाओं की दीवारों को आकर्षक पेटिंग, स्लोगन  से सजाया गया है। स्कूलों को स्मार्ट क्लास व लाइब्रेरी से लैस किया गया है। अकेले लखनऊ के 1642 स्कूलों से करीब 100 स्कूल में स्मार्ट क्लास बनाए गए हैं।

Sunday, February 21, 2021

श्रमिकों के बच्चों के लिए सीबीएसई पैटर्न पर 18 अटल आवासीय विद्यालय बनवाएगी योगी सरकार

श्रमिकों के बच्चों के लिए सीबीएसई पैटर्न पर 18 अटल आवासीय विद्यालय बनवाएगी योगी सरकार 


श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण करने वाले श्रमिकों के उज्जवल भविष्य की पूरी व्यवस्था सरकार कर रही है। इनके बच्चों का पूरा खर्च भी श्रम विभाग वहन कर रहा है। सरकार के प्रयासों से मजदूरों के जीवन में बदलाव आएगा। श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अच्छी हो और उनका भविष्य उज्जवल हों, इसके लिए प्रदेश सरकार हर मण्डल में एक-एक अटल आवासीय विद्यालय बना रहा है, जहां पर बच्चों को पढ़ाई-लिखाई, रहने व खाने की व्यवस्था मुफ्त होगी। श्रमिक चाहें जहां भी काम करें, उन्हें अब अपने बच्चों की चिन्ता नही होगी।


श्रम मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों एवं अनाथ बच्चों को बेहतर तथा निःशुल्क शिक्षा, आवास एवं भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक मण्डल में अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना कर रही है। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को नवोदय विद्यालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा तथा यहां पर इन बच्चों को सीबीएसई पैटर्न की शिक्षा दी जाएगी। 


इन विद्यालयों में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 1000 बच्चों के लिए प्रत्येक विद्यालय में रहने, खाने एवं पढ़ाई तथा खेलकूद की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक की निःशुक्ल आवासीय शिक्षा प्रदान की जाएगी। इन विद्यालयों का निर्माण 12 से 15 एकड भूमि पर कराया जायेगा, तथा इस विद्यालयों का संचालन श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा।

Saturday, February 20, 2021

परिषदीय स्कूलों में इस साल पूरी हो जाएंगी बुनियादी सुविधाएं, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

परिषदीय स्कूलों में इस साल पूरी हो जाएंगी बुनियादी सुविधाएं, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्रदेश के सभी परिषदीय स्कूलों में इस साल कक्षा कक्ष, पुस्तकालय, शौचालय, चार दीवारी, विद्युतीकरण सहित 14 सूत्री आधारभूत सुविधाएं मुहैया करा दी जाएंगी। वे शुक्रवार को बापू भवन स्थित अपने दफ्तर में यू- ट्यूब लाइव सत्र में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के कायाकल्प के लिए सरकार ने 19 पैरामीटर तय किए हैं, 14 पैरामीटर पर इस साल काम हो जाएगा। शेष पर मार्च 2022 तक कार्य पूरा हो जाएगा। अब तक 50,000 से अधिक विद्यालयों का कायाकल्प किया जा चुका है। एक लाख स्कूलों में कार्य प्रगति पर है। प्रत्येक विद्यालय में एनसीईआरटी की 500- 1000 पुस्तकों से युक्त पुस्तकालय स्थापित किए गए है।

Monday, February 15, 2021

यूपी : निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की तैयारी शुरू

RTE अंतर्गत प्रवेश के लिए 25 फरवरी तक स्कूलों की मैपिंग का काम होगा पूरा


यूपी : निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की तैयारी शुरू, 25 फरवरी के बाद अभिभावकों को करना होगा यह काम 


निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की तैयारी शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मैपिंग का काम शुरू कर दिया है। मैपिंग का काम 25 फरवरी तक पूरा किया जाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में मैपिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा एक में 25 फीसदी सीटें गरीब व अलाभित समूह के लिए आरक्षित होती हैं। नया सत्र अप्रैल से शुरू होना है। लिहाजा स्कूलों की मैपिंग के बाद वेबसाइट पर स्कूलवार आरक्षित सीटों का ब्यौरा जारी कर दिया जाएगा।

अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है और इसके बाद लॉटरी निकाल कर स्कूलों का आवंटन किया जाता है। छात्र-छात्राओं की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार करती है और एकमुश्त पांच हजार रुपये यूनिफार्म व किताबों के लिए दिए जाते हैं। 


निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश की तैयारी शुरू हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मैपिंग का काम शुरू कर दिया है। मैपिंग का काम 25 फरवरी तक पूरा किया जाना है। 
ग्रामीण क्षेत्रों में मैपिंग पर खास ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा एक में 25 फीसदी सीटें गरीब व अलाभित समूह के लिए आरक्षित होती हैं। नया सत्र अप्रैल से शुरू होना है। लिहाजा स्कूलों की मैपिंग के बाद वेबसाइट पर स्कूलवार आरक्षित सीटों का ब्यौरा जारी कर दिया जाएगा।

अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है और इसके बाद लॉटरी निकाल कर स्कूलों का आवंटन किया जाता है। छात्र-छात्राओं की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार करती है और एकमुश्त पांच हजार रुपये यूनिफार्म व किताबों के लिए दिए जाते हैं।

Friday, February 12, 2021

अंतरजनपदीय स्थानांतरण : विद्यालय आवंटन का काम शुरू नहीं हो सका, सर्वर पर विद्यालयों की सूची अपलोड नहीं होने के कारण शिक्षक करते रहे इंतजार

अंतरजनपदीय स्थानांतरण : विद्यालय आवंटन का काम शुरू नहीं हो सका, सर्वर पर विद्यालयों की सूची अपलोड नहीं होने के कारण शिक्षक करते रहे इंतजार


प्रयागराज। अंतरजनपदीय स्थानांतरण में जिले को मिले 17 दिव्यांग शिक्षकों से शाम को विकल्प लेने के बाद अंततः विद्यालय आवंटित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वर पर विद्यालयों की सूची अपलोड नहीं होने के कारण शिक्षक दिनभर इंतजार करते रहे। 


बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में बृहस्पतिवार को भी विद्यालय आवंटन का काम शुरू नहीं हो सका। प्रयागराज में शाम पांच बजे सूची उपलब्ध हो जाने के बाद विद्यालय आवंटन के लिए विकल्प भरने का काम शुरू हुआ और रात नौ बजे तक 17 दिव्यांग महिला एवं पुरुष शिक्षकों को विद्यालय आवंटन का पत्र जारी कर दिया गया। 


इससे पहले 10 फरवरी को दिन भर इंतजार करने के बाद विद्यालयों की सूची अपलोड नहीं होने से विद्यालय आवंटन नहीं हो सका, इसी प्रकार 11 फरवरी को दिनभर के इंतजार के बाद अंततः कामयाबी मिली और 17 शिक्षकों को विद्यालय आवंटित करके प्रक्रिया शुरू कर दी गई.

Thursday, February 11, 2021

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण : सर्वर पर अब तक नहीं अपलोड हो सकी विद्यालयों की सूची, बढ़ता जा रहा इंतजार

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण : सर्वर पर अब तक नहीं अपलोड हो सकी विद्यालयों की सूची, बढ़ता जा रहा इंतजार


प्रयागराज। अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बाद जिले को मिले 610 शिक्षकों का विद्यालय आवंटन का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को तय कार्यक्रम पर विभाग की ओर से सर्वर पर विद्यालयों की सूची अपलोड नहीं होने से विद्यालय आवंटन का काम नहीं शुरू हो सका। दूसरे जिले से संगम नगरी में आए शिक्षक, शिक्षिकाएं तैयारी के साथ जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पहुंचे। 


विद्यालय की सूची अपलोड नहीं होने पर बीएसए की ओर से नया कार्यक्रम जारी किया गया है। अब विद्यालय आवंटन का काम बृहस्पतिवार को मौनी अमावस्या के अवकाश के दिन किया जाएगा।


विद्यालय आवंटन का नया कार्यक्रम
11 फरवरी को नौ से 10 बजे के बीच महिला दिव्यांग एवं पुरुष दिव्यांग सहायक अध्यापक विकल्प भरेंगे। 11 फरवरी को ही 10 से दो बजे के बीच महिला सहायक अध्यापिकाएं प्राथमिक विद्यालय भारांक 19 तक, दो से पांच बजे के बीच महिला सहायक अध्यापिकाएं प्राथमिक विद्यालय भारांक 18 से 10 तक आवंटन के लिए विकल्प भरेंगी। 12 फरवरी को नौ से दो बजे के बीच महिला सहायक अध्यापिकाएं प्राथमिक विद्यालय भारांक नौ से सात तक, दो से 4.30 बजे के बीच सभी पुरुष अध्यापक प्राथमिक विद्यालय और 4.30 से पांच बजे के बीच विकल्प भरेंगे.

Wednesday, February 10, 2021

अंतर्जनपदीय : रिक्त विद्यालय और पदों की सूची न आने के कारण आज विद्यालय आवंटन में संशय

अंतर्जनपदीय :  रिक्त विद्यालय और पदों की सूची न आने के कारण आज विद्यालय आवंटन में संशय


आगरा: बेसिक शिक्षा परिषद की अंतर जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया का लाभ पाकर जिले में आने वाले परिषदीय शिक्षकों को विद्यालय आवंटन के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। 10 फरवरी को शुरू होने वाली प्रक्रिया के लिए शासन स्तर से रिक्त विद्यालय और पदों की सूची न आने के कारण इसे कराने पर फैसला मंगलवार को नहीं हो सका।


जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) राजीव कुमार यादव ने बताया कि शासन ने 10 से 12 फरवरी के बीच काउंसिलिंग कराकर विद्यालय आवंटित करने के निर्देश दिए हैं। तैयारी पूरी है, लेकिन रिक्त पदों की संख्या और सूची का इंतजार है। संभवतः बुधवार को इसके आने की संभावना है। देरी के कारण विभाग में नोटिस चस्पा कर दिया गया है। इधर शिक्षकों को विद्यालय आवंटन में देरी होने से विद्यालयों के शिक्षण संबंधी कार्य रुक जाएंगे। कक्षा छह से आठवीं तक की कक्षाएं तो विद्यालयों में शुरू भी हो रही हैं। इनके बाद प्राथमिक विद्यालय भी खुलेंगे।

आज से खुल रहे जूनियर हाईस्कूल, सहमति पत्र के साथ 50 प्रतिशत विद्यार्थी जाएंगे बुलाये

आज से खुल रहे जूनियर हाईस्कूल, सहमति पत्र के साथ 50 प्रतिशत विद्यार्थी जाएंगे बुलाये


प्रयागराज : कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आज से खुल रहे हैं। कोविड-19 से बचाव संबंधी दिशा निर्देशों का भी पालन सभी के लिए अनिवार्य रहेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से सभी स्कूलों के प्रबंधक व प्रधानाचार्यो को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।



जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों को अभिभावकों का सहमतिपत्र भी लाना होगा। प्रत्येक कक्षा में सिर्फ 50 प्रतिशत विद्यार्थी बुलाए जाएंगे। कक्षा छह के विद्यार्थी सोमवार और गुरुवार को, कक्षा सात के विद्यार्थी मंगलवार व शुक्रवार को, कक्षा आठ के विद्यार्थी बुधवार व शनिवार को स्कूल जाएंगे। 

कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं एक मार्च से शुरू होंगी। स्कूलों के संचालन पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी की ओर से टास्कफोर्स का भी गठन किया गया है। यह टीम प्रेरणा एप के माध्यम से भी स्कूलों की व्यवस्था देखेगी। निरीक्षण में यह भी देखा जाएगा कि विद्यार्थियों के प्रयोग के लिए जो सुविधाएं दी गई हैं वह हैं या नहीं।

विद्यालय में शौचालय, पीने के लिए पानी, रसोईघर, भोजन बनाने वाले, परोसने वाले बर्तन, परिसर की साफ सफाई आदि दुरुस्त है या नहीं। यह टास्कफोर्स जिला और विकासखंड स्तर पर काम करेगी। जिला स्तर पर टास्क फोर्स की अध्यक्षता डीएम करेंगे।

इसमें मुख्य विकास अधिकारी, सीएमओ, डीआइओएस, डीपीओ, बीएसए, जिला पूर्ति अधिकारी, सभी उप चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी शामिल रहेंगे। विकासखंड स्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता एसडीएम करेंगे।


सभी स्कूलों को किया जाना है सैनिटाइज

विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचने से पूर्व सभी स्कूलों को सैनिटाइज किया जाना है। विद्यालय परिसर की सफाई के साथ कक्षा कक्ष, रसोई, शौचालय को भी विसंक्रमित कराना है।


छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के मूड में नहीं अभिभावक

प्रदेश सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल 10 फरवरी और कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल एक मार्च से खोलने के निर्देश दिए हैं। सरकारी सिस्टम इसे लागू करने में जोरशोर से लगा है लेकिन निजी अंग्रेजी स्कूलों के अभिभावक अभी बच्चों को भेजने के मूड में नहीं है। स्कूलों ने सहमति पत्र के साथ 6 से 8 तक के बच्चों को भेजने को कहा है, लेकिन अधिकांश अभिभावक सहमति देने को तैयार नहीं।



अभिभावक कोरोना का टीका लगे बगैर बच्चों को स्कूल भेजने में रिस्क मान रहे हैं। इतना ही नहीं कक्षा 10 व 12 के बच्चों की प्री बोर्ड और 9 व 11 की वार्षिक परीक्षा तक अभिभावक ऑफलाइन दिलाने को राजी नहीं हैं। इस मसले पर हिन्दुस्तान ने शहर के प्रमुख स्कूलों के प्रधानाचार्यों और अभिभावकों से बात की। पेश है प्रतिक्रिया:

इनका कहना है

फिलहाल 6 से 8 तक की कक्षाएं शुरू करने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। कक्षा 9 व 11 के बच्चों के ऑफलाइन एग्जाम के लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है लेकिन वे रुचि नहीं ले रहे। 12वीं और 10वीं की प्री बोर्ड ऑनलाइन करानी पड़ी। - सिस्टर ज्योति, प्रिंसिपल सेंट मेरीज कान्वेंट

सरकार के आदेश के क्रम में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की कक्षाएं शुरू करने के लिए अभिभावकों से सहमति मांग रहे हैं लेकिन कोई तैयार नहीं है। यहां तक कि कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को ऑफलाइन एग्जाम दिलाने को राजी नहीं हैं। इसलिए जब तक सहमति नहीं मिलती, हमारी ऑनलाइन कक्षाएं पूर्ववत चलती रहेंगी। - सुष्मिता कानूनगो, प्रिंसिपल महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर

हमने आज ही 6 से 8 तक के छात्र छात्राओं के अभिभावकों को अपनी सहमति देने के लिए मैसेज किया है। अभिभावकों के राजी होने पर ही बच्चों को बुलाया जाएगा। - जया सिंह, प्रिंसिपल, डीपी पब्लिक स्कूल

अभी प्रतिदिन कोरोना के मरीज मिल रहे हैं। जनसामान्य का टीकाकरण भी नहीं हुआ है। इस स्थिति में बच्चों के लिए विद्यालय खोलना कहीं से भी उचित नहीं है। - भारतेंद्र त्रिपाठी, अभिभावक (पुत्र दीप त्रिपाठी कक्षा 9 सेंट जान्स एकेडमी करछना)

विद्यालय खोलने का निर्णय मेरी दृष्टि से उचित नहीं है। जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, यह रिस्क लेना समझ से परे है। स्कूलों में गाइडलाइन का पालन भी संभव नहीं हो पाएगा। - मधुलिका श्रीवास्तव (पुत्री महक श्रीवास्तव कक्षा 8 पतंजलि ऋषिकुल)

स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए स्कूलों में पढ़ाई लिखाई शुरू होनी चाहिए। घर पर पढ़ाई उस तरह से नहीं हो पा रही है। -सुनीत पांडेय (पुत्री संस्कृति पांडेय कक्षा 7 सेंट एंथोनी स्कूल)

अंतर्जनपदीय स्थानांतरित शिक्षकों का स्कूल आवंटन आज से

अंतर्जनपदीय स्थानांतरित शिक्षकों का स्कूल आवंटन आज से


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के उन प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों का स्कूल आवंटन बुधवार से शुरू होगा, जिनका अंतर जिला तबादला हुआ है। यह प्रक्रिया 12 फरवरी तक चलेगी। इन शिक्षकों को आनलाइन स्कूल आवंटन के निर्देश बीती 30 जनवरी को जारी किए जा चुके हैं। 21,695 शिक्षकों का एक से दूसरे जिले में तबादला किया गया है।


अंतर जिला तबादला सूची 31 दिसंबर को हुई थी जारी

परिषद के शिक्षकों की अंतर जिला तबादला सूची 31 दिसंबर को जारी हुई थी। परिषद सचिव ने एक माह के लंबे इंतजार के बाद शिक्षकों को एक व दो फरवरी को कार्यमुक्त करने और चार व पांच फरवरी को जिलों में कार्यभार ग्रहण करने का आदेश दिया था। कई बीएसए ने परिषद सचिव प्रताप सिंह से समय बढ़ाने का अनुरोध किया, जिस पर समय सारिणी में बदलाव किया गया था।

स्कूल तो खुलेंगे आज से .... पर सहमति पत्र पर तकरार जारी, स्कूलों द्वारा जिम्मेदारी न लेने से अभिभावक खफा

स्कूल तो खुलेंगे आज से .... पर सहमति पत्र पर तकरार जारी, स्कूलों द्वारा जिम्मेदारी न लेने से अभिभावक खफा।


प्रयागराज। शासन के आदेश के बाद छठी से आठवीं तक के स्कूल बुधवार से खुल रहे हैं। बच्चों को स्कूल आने के लिए अभिभावकों से सहमति पत्र लेकर आना होगा। स्कूलों के प्रबंधन जहां लगभग साल भर बाद बच्चों के आने से खुश हैं तो उनके बीच इस बात को लेकर डर कायम है कि कहीं एक बच्चा भी संक्रमित हुआ तो क्या होगा। अभिभावक भी स्कूल की ओर से भेजे गए सहमति पत्र में लिखी बातों से सहमत नहीं हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब सारी जिम्मेदारी हमारी ही है तो स्कूल एवं प्रशासन क्या करेगा। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर असमंजस में हैं।


जिले में बेसिक शिक्षा के स्कूल तो खोले जा रहे हैं, परंतु सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड के निजी स्कूल अभी तक बच्चों के बारे में अभिभावकों के साथ बैठक करने के बाद ही कोई निर्णय लेने की बात कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि ऑनलाइन क्लास चलाकर कोर्स पूरा कर लिया गया है। अब बच्चों को स्कूल बुलाकर 10 दिन की रिवीजन क्लास चलाकर उनकी परीक्षा की तैयारी कराई जानी है। बीबीएस इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या रजनी शर्मा का कहना है कि यदि अभिभावक तैयार हुए तो छोटे बच्चों के लिए कक्षा का संचालन होगा। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या सुष्मिता कानूनगो का कहना है कि अभिभावकों की सहमति के बाद ही बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा।

Tuesday, February 9, 2021

सरकारी विद्यालयों में एक कक्षा सप्ताह में दो बार चलेगी वहीं निजी विद्यालय रोजाना, 2500 रुपये में कैसे पूरी होंगी परिषदीय स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल पालन की व्यवस्थाएं?

सरकारी विद्यालयों में एक कक्षा सप्ताह में दो बार चलेगी वहीं निजी विद्यालय रोजाना।

2500 रुपये में कैसे पूरी होंगी परिषदीय स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल पालन की व्यवस्थाएं?



सरकारी विद्यालयों में जहां जूनियर की एक कक्षा सप्ताह में दो बार ऑफलाइन चलेगी तो वहीं निजी विद्यालय कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं रोजाना चलाएंगे।


कक्षाओं के संचालन को लेकर अभी स्कूल असमंजस में हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जो इस हफ्ते तैयारी करेंगे और अगले हफ्ते से कक्षाएं शुरू करेंगे। वहीं, परिषदीय विद्यालयों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने को लेकर व्यवस्थाएं जुटाने पर सवाल उठने लगे हैं।
करीब 11 महीने बाद दस फरवरी से छह से आठ तक की कक्षाएं दोबारा ऑफलाइन शुरू होंगी। 


शासन की तरफ से जारी एसओपी के अनुसार एक कक्षा की पढ़ाई हफ्ते में दो बार होगी। इसका शेड्यूल तैयार किया गया है। मसलन सोमवार और बृहस्पतिवार को कक्षा छह, मंगलवार व शुक्रवार को कक्षा सात और बुधवार व शनिवार को कक्षा आठ की पढ़ाई ऑफलाइन होगी।


इस पर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में क्लासरूम कम होते हैं। वे एक से पांच और छह से आठ तक की कक्षाएं एक ही दिन चलाएंगे तो बच्चों को एकसाथ बैठाना पड़ेगा जबकि निजी विद्यालयों में हर कक्षा के लिए अलग क्लासरूम होता है।
आधी क्षमता के साथ हम रोजाना कक्षाएं चला सकते हैं। 


बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि बेसिक और माध्यमिक दोनों विभाग द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी। स्कूल व परिसर में पर्याप्त सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कक्षाएं चलाई जाएंगी।


कई स्कूल इस हफ्ते नहीं शुरू करेंगे कक्षाएं
पॉयनियर मोंटेसरी इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या शर्मिला सिंह, कानपुर रोड स्थित जयपुरिया स्कूल की प्रधानाचार्या पूनम गौतम, दी मिलेनियम स्कूल की प्रधानाचार्या मंजुला गोस्वामी ने बताया कि वे बाकी स्कूलों के माहौल को देखने के बाद अगले हफ्ते 15 फरवरी से ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करेंगे। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि इस हफ्ते जूनियर कक्षाएं नहीं शुरू करेंगे। अभिभावकों से बातचीत कर तैयारियां पूरी करनी हैं। सीपी सिंह फाउंडेशन के लखनऊ पब्लिक स्कूल 17 से कक्षाएं शुरू करेंगे।


2500 रुपये में कैसे होंगी व्यवस्थाएं पूरी
बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने सैनिटाइजेशन, साफ-सफाई, थर्मल स्कैनर आदि के लिए कंपोजिट ग्रांट से 10 प्रतिशत राशि खर्च करने की अनुमति दी है। लेकिन इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि ज्यादातर विद्यालयों को 25 हजार रुपये की ग्रांट मिलती है। उसमें से 10 प्रतिशत राशि यानी ढाई हजार रुपये में सैनिटाइज करने, थर्मल स्कैनर खरीदने, परिसर व शौचालय की साफ-सफाई करने, पीने का पानी व मास्क की व्यवस्था कैसे की जा सकती है।

Monday, February 8, 2021

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में होगा पुरातन छात्र परिषद का गठन

प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में होगा पुरातन छात्र परिषद का गठन

बेसिक शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी, बोले-विद्यालयों का संचालन, पढ़ाई व विकास आसान होगा


गोरखपुर। यूपी के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पुरातन छात्र परिषद का गठन होगा। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। बेसिक शिक्षामंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों से पढ़कर निकलने वाले अब आईएएस, आईपीएस, उद्योगपति, डॉक्टर बन गए हैं।

इन सबको एक प्लेटफार्म पर लाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक व शिक्षकों की रहेगी। पुरातन छात्र परिषद की मदद से विद्यालयों को चमकाया जाएगा। शैक्षिक गुणवत्ता और बेहतर बनाई जाएगी।


यूपी में करीब डेढ़ लाख प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। गोरखपुर में 2500 विद्यालय हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है। अब पुरातन छात्र परिषद का गठन करके स्कूलों को और बेहतर बनाने की योजना है। इस सिलसिले में गत शनिवार को गोरखपुर आए बेसिक शिक्षामंत्री डॉ सतीश द्विवेदी ने विस्तार से जानकारी दी। बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि विद्यालयों को गोद लेने का विकल्प दिया गया है। इसका बड़ा फायदा मिला है। गोरखपुर में गैलेंट इस्पात लिमिटेड और रोटरी क्लब ने स्कूलों को गोद लिया है। इन स्कूलों का कायाकल्प हो चुका है । सरकार की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आएं और सरकारी स्कूलों को गोद लेकर व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहयोग करें। इसी क्रम में ही पुरातन छात्र परिषद का गठन किया जा रहा है। जल्द सर्कुलर जारी कर दिया जाएगा।

यूपी के तमाम आईएएस, आईपीएस, डीआईओएस, बीएसए सहित अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूलों में हुई है। तमाम राजनेता हैं, जो सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकले हैं इन सबको पुरातन छात्र परिषद का हिस्सा बनाया जाएगा इससे प्राथमिक विद्यालयों के संचालन, श्रावस्ती माना जाता है। श्रावस्ती में विकास व शैक्षिक गुणवत्ता को और बेसिक शिक्षामंत्री ने कहा कि दिल्ली के स्कूलों से यूपी की तुलना ठीक नहीं है। यूपी का सबसे छोटा जिला भी 1500 से ज्यादा प्राथमिक बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।   दिल्ली में सबसे कम सरकारी विद्यालय हैं।


जो करेगा दान उसकी लगेगी नेम प्लेट

बदलते वक्त के साथ हर विद्यालय में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लास की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने ऐसे लोगों या संस्थाओं की तलाश करने को कहा है जो स्मार्ट क्लास के लिए आर्थिक मदद या सामान जैसे जनरेटर, इनवर्टर, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर आदि दे सकें। बेसिक शिक्षा परिषद ने यह भी कहा है कि जो लोग इसमें सहयोग करेंगे उनकी नेम प्लेट क्लास के बाहर लगाई जाएगी।

यूपी : 9वीं से 12वीं तक के विद्यालय कल से पूरी क्षमता से खुलेंगे

यूपी : कोविड प्रोटोकॉल संग नवोदय, सैनिक व आश्रम पद्दति सहित सभी आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई कल से


लखनऊ: प्रदेश सरकार ने कक्षा नौ से बारह तक के आवासीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय सहित सभी शिक्षा बोर्ड  के स्कूलों में नौ फरवरी, 2021 से पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी है।

यूपी : 9वीं से 12वीं तक के विद्यालय कल से पूरी क्षमता से खुलेंगे

लखनऊ। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को खांसी, झुकाम, बुखार या कोरोना के अन्य लक्षण दिखते ही उनकी जांच और उपचार की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार ने 9 फरवरी से यूपी बोर्ड सहित सभी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 का पूर्ण रूप से संचालन करने की अनुमति दी है। वहीं कक्षा 1 से आठ तक के सभी विद्यालयों में 50 फीसदी छात्र ही एक साथ हर रोज बुलाए जा सकेंगे।


विद्यालय प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त मात्रा में मास्क उपलब्ध कराने के साथ कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए गाइडलाइन का भी पालन किया जाएगा।

बैठते समय छात्र-छात्राओं के बीच न्यूनतम 6 फिट की दूरी रहे। विद्यालय के गेट खुले रखे जाएं, ताकि एक जगह भीड़ न हो। अभिभावकों और विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग किया जाए। डिजिटल थर्मामीटर, सेनिटाइजर और साबुन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। परिवहन व्यवस्था प्रारंभ किए जाने से पहले सेनिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए। नोटिस बोर्ड पर कोविड नियमों का पालन के बाबत सूचना दी जाए।

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि 9 फरवरी से प्रदेश में सभी शिक्षा बोर्डों से संबद्ध कक्षा 9 से 12 तक के विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय एवं अन्य आवासीय विद्यालयों में पठन पाठन शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विद्यालय खोलने से पहले परिसर को पूरी तरह से सेनेटाइज़ किया जाएगा। विद्यालयों में सैनिटाइजर, हैंडवाश, थर्मल स्कैनिंग एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। यदि किसी विद्यार्थी, शिक्षक और कार्मिक को खांसी जुकाम या बुखार के लक्षण हो तो उन्हें आईसोलेट करते हुए उपचार की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रावास में यदि कोई विद्यार्थी कोराना से संक्रमित हो जाता है तो उनके उपचार की व्यवस्था कर छात्रावास में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा विद्यालय के अन्य कर्मचारियों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा।


उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण की वजह से माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययन एवं अध्यापन का काम भौतिक रूप से प्रभावित रहा है। छात्र हित, शैक्षणिक सत्र को नियमित करने और वार्षिक परीक्षाओं को देखते हुए पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है।


उन्होंने बताया कि इस संबंध मे निर्देश दिया गया है कि स्कूल खोलने से पहले उन्हें पूरी तरह से सैनिटाइज किया जाए। सैनिटाइजर, हैंडवाश, थर्मल स्कैनिंग और प्राथमिक इलाज की व्यवस्था की जाए। यदि किसी विद्यार्थी, शिक्षक या अन्य कार्मिक को खांसी-जुकाम या बुखार के लक्षण हों तो उन्हें आइसोलेट करते हुए इलाज की व्यवस्था कराई जाए। छात्रवास में यदि कोई विद्यार्थी कोराना से संक्रमित हो जाता है तो उसका इलाज कराते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी प्रोटोकॉल का अक्षरश: पालन कराया जाए।


उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और विद्यालय के अन्य कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य होगा। विद्यालय प्रबंधन को अतिरिक्त मात्र में मास्क रखने के साथ-साथ कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का पूरा पालन करना होगा। - डॉ. दिनेश शर्मा

मां-बाप के मन में कई सवाल..🤔, सरकारी स्कूलों में कैसे होगा सैनिटाइजेशन?

10 फरवरी से खुल रहे यूपी में 6 से 8वीं तक के स्कूल, हर विद्यार्थी के बीच छह फुट की दूरी के मानक का कैसे होगा स्कूलों में पालन? 

मां-बाप के मन में कई सवाल..🤔, सरकारी स्कूलों में कैसे होगा सैनिटाइजेशन?


UP Schools Reopening date: उत्तर प्रदेश में शासन के निर्देश के बाद 10 फरवरी से कक्षा 6 से 8वीं तक के स्कूल खोलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए प्रोटोकॉल और गाइडलाइन तय की गई है।
    

■ पैरेंट्स के मन में स्कूल खुलने को लेकर अभी भी कई सवाल
■ कक्षा एक से आठ तक के विद्यालयों के खोले जाने की एसओपी जारी
■ हर विद्यार्थी के बीच छह फुट की दूरी के मानक का पालन
बच्चों की सुरक्षा को लेकर पैरेंट्स में डर


लखनऊ : यूपी में 10 फरवरी से 6 से 8वीं तक के स्कूल कैसे खुलेंगे, क्या नियम कायदे होंगे, कब कौन सी क्लास चलेंगी... ये गाइडलाइंस सरकार ने शनिवार को जारी कर दीं। लेकिन इसके बाद भी कई सवाल हैं जो अभिभावकों के मन में हैं।


कानपुर रोड निवासी राजेश पांडेय कहते हैं मेरी बेटी की परीक्षा ऑनलाइन चल रही है। स्कूल खुलने का मेसेज आ गया है। लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि बचे हुए एग्जाम ऑनलाइन होंगे या ऑफलाइन।

जानकीपुरम निवासी रश्मि का कहना है कि स्कूल अपनी तरफ से वाहन की सुविधा देंगे या नहीं, अभी यह भी तय नहीं। क्लास 6 से 8 तक के बच्चे छोटे होते हैं, उन्हें स्कूल भेजना कितना सुरक्षित होगा यह डर भी सता रहा है।


सरकारी स्कूलों में कैसे होगा सैनिटाइजेशन?

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि निजी स्कूल तो सुरक्षा मानकों का पालन कर लेंगे, लेकिन परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे गरीब तबके के होते हैं। सैनिटाइजेशन, मास्क, सैनिटाइजर और पल्स ऑक्सिमीटर के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं का इंतजाम सरकार करे।


विद्यालय में आई कंपोजिट ग्रांट का 10 फीसदी सफाई, मास्क और सैनिटाइजर में लगाया जाएगा। हमारे यहां जगह की कमी नहीं है तो सोशल डिस्टेंटिंग का पालन कराया जा सकेगा। वहीं, चिकित्सा सुविधा के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एएनएम और आशा बहुओं से संपर्क करेंगे। -दिनेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी

गाइडलाइंस का पालन होगा

अनएडेड प्राइवेट स्कूल असोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल का कहना है हमारी तैयारियां चल रही हैं। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। गाइडलाइंस का पालन किया जाएगा। अभिभावकों की सुविधा के लिए कई स्कूलों ने स्कूल वाहन की भी व्यवस्था की है। फिलहाल फीस बढ़ाने के बारे में कुछ तय नहीं किया गया है।


पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग के लिए 9 से 12 और 6 से 8 तक के बच्चों की टाइमिंग में बदलाव किया है। जीडी गोयनका के चेयरमैन सर्वेश गोयल का कहना है कि हमारे यहां स्कूल 10 फरवरी से नहीं खुलेंगे। हम ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था के बाद ही स्कूल खोलेंगे।

Saturday, February 6, 2021

महराजगंज : विद्यालय खुलने के पूर्व तैयारी के सम्बन्ध में बीएसए का दिशानिर्देश जारी

महराजगंज : विद्यालय खुलने के पूर्व तैयारी के सम्बन्ध में बीएसए का दिशानिर्देश जारी।



बेसिक स्कूलों में दान से बनेंगी स्मार्ट कक्षाएं, विभाग और विद्यालय खुद ही करेंगे दानदाताओं की तलाश

बेसिक स्कूलों में दान से बनेंगी स्मार्ट कक्षाएं, विभाग और विद्यालय खुद ही करेंगे दानदाताओं की तलाश


सहारनपुर। जिले के सभी परिषदीय विद्यालय में स्मार्ट क्लास बनाने की योजना है। लेकिन इसके लिए सरकार एक रुपये भी खर्च नहीं करेगी बल्कि विभाग और विद्यालय प्रबंधन खुद ऐसे दानदाता की तलाश करेंगे जो इन क्लासों को बनाने में आर्थिक मदद कर सकें। खास बात यह है कि ऐसे स्मार्ट क्लासों के बाहर उन दान दाताओं के नाम की प्लेट लगाई जाएगी।


नए सत्र अप्रैल 2021 से परिषदीय विद्यालयों में एनसीईआरटी किताबें बदलने जा रही है। इनके हर अध्याय पर अलग बार कोड डाला गया है। इस बार कोड को दिशा एप के जरिए स्केन कर पूरे अध्याय को स्मार्ट फोन, लैपटॉप आदि पर ऑनलाइन पढ़ा जा सकता है। चूंकि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। शिक्षकों के लिए स्मार्ट फोन से पूरी क्लास को ऑनलाइन पढ़ाना संभव नहीं है। 


ऐसे में हर विद्यालय में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लास की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए बेसिक शिक्षा ने ऐसे लोगों या संस्थाओं की तलाश करने को कहा है जो स्मार्ट क्लास के लिए आर्थिक मदद या फिर सामान जैसे जनरेटर, इनवर्टर, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर आदि दे सकें। बेसिक शिक्षा परिषद ने यह भी कहा है कि जो लोग इसमें सहयोग करेंगे उनके नाम की प्लेट क्लास के बाहर लगाई जाएगी।

जिले में 1332 स्मार्ट क्लास की जरूरत
जनपद में वर्तमान में 1438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से 116 विद्यालयों में दो साल से स्मार्ट क्लास चल रही हैं, जो खनन के पैसे से जिला प्रशासन द्वारा बनवाई गई हैं। इस प्रकार वर्तमान में 1332 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें स्मार्ट क्लास की जरूरत है।



प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में स्मार्ट क्लास बनाई जानी हैं। जनपद में कोई भी व्यक्ति, संस्था, एनजीओ या संगठन स्मार्ट क्लास के लिए पैसा या सामान दान कर सकता है। इच्छुक व्यक्ति कार्यालय में उनसे संपर्क कर सकता है। स्मार्ट क्लास बनने के बाद निश्चित रूप से शिक्षा के स्तर में सुधार आएगा। - रमेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

रिहायशी स्कूलों का नामकरण बदल कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल रखने का निर्णय

रिहायशी स्कूलों का नामकरण बदल कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल रखने का निर्णय 



नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी को समावेशी एवं गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने देश के 383 रिहायशी स्कूल एवं 680 हॉस्टल का नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल रखने का निर्णय लिया है। ये सभी विद्यालय शिक्षा मंत्रालय की समग्र शिक्षा योजना के तहत वित्तपोषित हैं।

मंत्रालय के इस फैसले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने कम आबादी वाले इलाकों, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जहां स्कूल खोलना मुश्किल है और विशेष देखभाल की जरूरत वाले शहरी बच्चों के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थिक सहायता प्रदान की है, ताकि वे रिहायशी स्कूल एवं हॉस्टल खोल सकें। सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए यह निर्णय लिया है कि इन रिहायशी स्कूलों एवं हॉस्टलों का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस रेजिडेंशियल स्कूल रखा जाएगा।


उन्होंने बताया कि देशभर में कुल 383 स्कूल और 680 हॉस्टल का नाम बदला जाएगा। ये सभी संस्थान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए बनाए गए नियमों का पालन करेंगे। साथ ही उनके जैसी गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए प्रयासरत होंगे। निशंक ने कहा कि नेताजी का नाम न सिर्फ छात्रों, बल्कि शिक्षकों, कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन को भी गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा। इन सभी स्कूलों में नियमित पाठ्यक्रम के संचालन के अलावा विशिष्ट कौशल और आत्मरक्षा आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


नई दिल्ली: आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में केंद्र सरकार ने उनके नाम पर देश के एक हजार से ज्यादा आवासीय स्कूलों और छात्रवासों के नामकरण का फैसला लिया है। यह स्कूल आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों और सुदूर क्षेत्रों में स्थित हैं। फिलहाल इन स्कूलों का संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय के समग्र शिक्षा अभियान के तहत किया जाता है। इससे पहले भी शिक्षा मंत्रलय ने देश के पांच विश्वविद्यालयों में उनके नाम पर पीठ स्थापित करने का फैसला लिया है। 


शिक्षा मंत्रलय ने यह फैसला तब लिया है, जब नेताजी के 125वें जन्मदिन को सरकार ने साल भर मनाने का फैसला लिया है। साथ ही इसे लेकर प्रधानमंत्री की अगुआई में एक उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की है। इसके साथ सभी मंत्रलयों को उनके सम्मान में कुछ नया करने के लिए भी कहा है। ऐसे में शिक्षा मंत्रलय ने आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए बनाए गए स्कूलों को नाम उनके नेताजी के नाम पर करने का निर्णय लिया है।

School Re-open : स्कूल तो तैयार, अभिभावक अभी कर रहे इन्कार

School Re-open : स्कूल तो  तैयार, अभिभावक अभी कर रहे इन्कार


लखनऊ : 10 फरवरी से कक्षा छह से आठ और पहली मार्च से कक्षा एक से पांच तक के सभी स्कूल खुल जाएंगे। स्कूल खुलने की घोषणा के बाद से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक फील गुड की स्थिति में हैं। वहीं, निजी स्कूल भी उत्साहित हैं। दूसरी ओर अभिभावकों ने शासन के इस आदेश पर असहमति जताई है। उनका कहना है कि जब तक सबको वैक्सीन नहीं लगती, तब तक वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।


हम इस आदेश के सख्त खिलाफ हैं। हम अपने बच्चों को तब तक स्कूल नहीं भेजेंगे जब तक सबको वैक्सीन नहीं लग जाती। बच्चों की इम्युनिटी कम होती है, ऐसे में माता पिता होने के नाते हम उनकी सुरक्षा को लेकर रिस्क नहीं लेंगे। स्कूल अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी न लेकर अभिभावकों से लिखित सहमति पत्र मांग रहे हैं। यह किस हद तक जायज है। - भूपेंद्र सिंह सिकरवार, पदाधिकारी, आदर्श अभिभावक संघ


सरकार की ओर से लिया गया निर्णय स्वागत योग्य है। हालांकि, निजी स्कूल एसोसिएशन संक्रमण के कम होते खतरे को ध्यान में रखकर पिछले कई दिनों से स्कूल खोले जाने की मांग कर रहा था। सरकार ने इसका पूरा संज्ञान लिया। निजी स्कूल संक्रमण को लेकर जारी प्रोटोकाल के तहत पूरी तरह तैयार है। - अनिल अग्रवाल, स्टेट प्रेसिडेंट, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन


सभी स्कूलों को सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देश का अक्षरस: पालन करना होगा। निजी स्कूल हो या सरकारी सभी को संक्रमण को लेकर जारी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखकर संचालन करना होगा। - डा. मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक


शिक्षकों के लिए स्कूल नियमित खुले रहे। बच्चों के बिना उन्हें स्कूल में अच्छा नहीं लग रहा था। शासन के आदेश पर स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था दुरुस्त किए जाने को लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों व शिक्षकों को निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षक समय पर स्कूल पहुंचे और बच्चों को संक्रमण को लेकर बनाई गई एसओपी के तहत एहतियात के साथ शिक्षा मुहैया कराएं। - दिनेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी

Friday, February 5, 2021

किराए में चलने वाले और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज

किराए में चलने वाले  और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज 


लखनऊ : किराए के एक कमरे, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या वाले परिषदीय स्कूलों की सूरत बदलने जा रही है। इन स्कूलों को अधिक कमरों व जगह वाले स्कूलों में मर्ज किया जाएगा, जहां बच्चों को डिजिटल क्लास सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राजधानी में करीब 1200 से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिसमें करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें महज आधा दर्जन स्कूल, एक कमरे वाले, किराए के भवन, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या की स्थिति में जैसे-तैसे चल रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। ऐसे हालात को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि जिन स्कूलों के पास अधिक स्थान है, वहां एक कमरे वाले स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। 


बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश मिले हैं। ज्यादा स्थान वाले स्कूलों में मर्ज करने का प्रस्ताव परिषद को भेजा जाएगा।