DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label विद्यालय. Show all posts
Showing posts with label विद्यालय. Show all posts

Tuesday, August 18, 2026

राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

सीजेपी के दौरे के एलान के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो व वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है। यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस एलान के बाद आया है, जिसमें उसने राज्य के जर्जर स्कूलों में जाने की बात कही थी। हाल ही में राज्य के कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के भारी संकट को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किए थे।


सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वे जयपुर, अजमेर, जोधपुर समेत कई जिलों में खराब हालत वाले सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने जारी आदेश में कहा, यह कदम बच्चों की सुरक्षा, निजता और गरिमा की रक्षा के लिए उठाया गया है।

नए नियमों के मुताबिक, बिना प्रिंसिपल की अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं, दूसरी ओर इस आदेश के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, सरकार अपनी कमियों और टूटी छतों को सुधारने के बजाय उन्हें दुनिया की नजरों से छिपाना चाहती है। कांग्रेस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर यह आदेश जल्द वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी इसके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करेगी। 

Monday, August 17, 2026

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य


प्रयागराज । संस्कृत विद्यालयों में पठन-पाठन की स्थिति खस्ताहाल है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्कृत विद्यालय के छात्रों का भविष्य अधर में है। प्रदेश में 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं। इनमें शिक्षकों के 2549 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 940 शिक्षक ही तैनात हैं। प्रधानाचार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। 657 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 170 प्रधानाचार्य ही कार्यरत हैं।


शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ की छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। प्रांतीय संस्कृत विद्यालय कल्याण समिति के प्रदेश महामंत्री आनंद उपाध्याय का कहना है कि संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों के साथ ही संसाधनों का अभाव है। कुछ विद्यालय संविदा शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं।


प्रबंधकों को भर्ती का अधिकार, आदेश का इंतजार : शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की कमी को देखते हुए शासन ने हाल में संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके तहत माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के बजाय विद्यालयों के प्रबंधकों के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। एडी माध्यमिक कामता राम पाल का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रबंधकों को ही करनी है, चयन आयोग इनकी नियुक्ति नहीं करेगा।

पढ़ाई प्रभावित, परंपरा पर भी असर
संस्कृत केवल एक विषय नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष और शास्त्रीय ज्ञान की प्रमुख भाषा है। विद्यालयों में नियमित पढ़ाई न होने से विद्यार्थियों की रुचि भी कम हो रही है। एक महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यव्रत मिश्र के मुताबिक माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षा कमजोर होने का असर आगे चलकर उच्च शिक्षा और संस्कृत के विद्वानों की नई पीढ़ी पर भी पड़ सकता है।

2011 के बाद भर्ती प्रक्रिया भी सवालों में
शिक्षा निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 में मंडलीय समिति के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इसमें अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन और बस्ती मंडल में नियुक्तियां हुईं। आजमगढ़ मंडल में मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

शासन के आदेश पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। - प्रताप सिंह बघेल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा


Tuesday, August 11, 2026

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे


लखनऊ। प्रदेश को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। नए सत्र 2026-27 से यहां प्रवेश व पढ़ाई भी शुरू होगी। शासन ने यहां प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, कनिष्ठ लिपिक आदि के 1810 पदों का सृजन भी कर दिया है। इन स्वीकृत पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा।


प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत 68 राजकीय इंटर कॉलेज (बालक-बालिका) तथा 58 राजकीय हाईस्कूल कुल 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों का निर्माण व हस्तांतरण किया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 68, प्रधानाध्यापक के 58, प्रवक्ता के 680, सहायक अध्यापक (एलटी) के 819 तथा कनिष्ठ सहायक के 185 नियमित पदों का सृजन किया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भरे जाएंगे। जबकि शेष 50 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इन विद्यालयों में छठवीं व नवीं क्लास में 80-80 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

इन राजकीय इंटर कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, कंप्यूटर, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, भौतिक विज्ञान, रसायन व जीव विज्ञान की पढ़ाई होगी। नए व हस्तांतरित विद्यालयों में से प्रतापगढ़ में एक, बलरामपुर में सात, बाराबंकी में तीन, सुल्तानपुर में चार, अयोध्या में दो, सीतापुर, रायबरेली व लखनऊ में एक-एक समेत आदि जिलों के विद्यालय शामिल हैं। 

Thursday, August 6, 2026

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं


प्रयागराजः पीएम श्री योजना के तहत देशभर के 14500 से अधिक सरकारी स्कूलों को माडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रति स्कूल दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। प्रयागराज में इस योजना के तहत 43 स्कूल चयनित हैं, लेकिन सुविधाओं के बावजूद इन स्कूलों में छात्र संख्या में कमी देखी जा रही है।


सत्र 2025-26 में कुल 11773 पंजीयन हुए थे, जबकि सत्र 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर 10417 रह गया है। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षा, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, पर्यावरण अनुकूल उपायों के तहत सोलर पैनल, एलईडी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका भी विकसित की जा रही हैं। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद छात्र संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है। पीएम श्री पीएस पट्टीनाथ राय में पिछले सत्र में 202 छात्रों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस बार केवल 127 नामांकन हुए। पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उपरदहा में 425 विद्यार्थियों के सापेक्ष सिर्फ 233 पंजीयन हुए हैं। धनुपुर विकासखंड के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल यासीनपुर में 398 के सापेक्ष 317 और जारौन में 271 के सापेक्ष 220 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।

चाका के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उबारी में 400 के सापेक्ष 378 और बहरिया के पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय महपुरा में 154 के सापेक्ष 128 नए नामांकन हुए हैं। बहादुरपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रितैया में पिछले सत्र में 365 छात्रों का पंजीकरण था, जो इस बार 336 पर सीमित रह गया। पीएमश्री पीएस रामपुर में भी पंजीयन का आंकड़ा पिछले सत्र को पार नहीं कर पाया है। सिर्फ 133 नए नामांकन हुए हैं। यही हाल पीएमश्री कंपोजिट स्कूल सराय लहुरी का है, यहां 207 पंजीयन हुआ। जो पिछले सत्र की तुलना में 50 कम है। 

पीएमश्री कंपोजिट स्कूल भगवतपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल जनका, पीएमश्री प्राथमिक विद्यालय बालिका सिरसा, पीएमश्री पीएस छतवा जैसे अन्य स्कूलों में भी छात्र संख्या पिछले सत्र के आंकड़े को नहीं पार कर सकी है। बीएसए अनिल कुमार का कहना है कि सितंबर तक विद्यार्थियों का पंजीयन जारी रहेगा। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं। कुछ स्कूलों ने पिछले सत्र के आंकड़े को पार कर लिया है, जिनमें पीएम श्री पीएस सोरांव प्रथम, पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रमईपुर, और पीएम श्री कंपोजिट स्कूल निकदलपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल तातारगंज जैसे विद्यालय शामिल हैं।

Tuesday, August 4, 2026

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन विद्युत लाइन क्यों?

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन लाइन क्यों? 

पॉवर कॉर्पोरेशन के एमडी को बनाया पक्षकार, स्कूल सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और एसओपी पर मांगी प्रगति रिपोर्ट, स्कूलों की सुरक्षा व आसपास ट्रैफिक जाम पर भी अदालत सख्त


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देकर अगली सुनवाई तक इस संबंध में उनका जवाब पेश करें।


न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि कई मामलों में हाईटेंशन लाइनें स्कूल परिसरों पर गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ी। इस संबंध में हुए अध्ययन और अखबार में प्रकाशित खबरों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय बताते हुए विस्तृत परीक्षण की जरूरत बताई। 


सुनवाई के दौरान डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ ने स्कूलों में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती पर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सात स्कूलों की व्यवस्था अच्छी, पांच की औसत और पांच की खराब पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा।

अदालत को यह भी बताया गया कि स्कूलों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। अगली सुनवाई में कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्योरा दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

नाबालिगों की सुरक्षा पर अदालत गंभीर
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। कोर्ट को बताया गया कि परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पुलिस सत्यापन में 2370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 के खिलाफ मिशन भरोसा के तहत प्रतिकूल रिपोर्ट दर्ज मिली है। अदालत ने कहा कि यह नाबालिग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर विषय है। बार के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, स्कूल वैन में महिला चालकों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस सुझाव पर सरकार आवश्यक विचार करेगी।

Sunday, July 26, 2026

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


 लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

Sunday, July 12, 2026

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक, परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी "माई हेल्थ वर्ल्ड" किताबें

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक,  परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी  "माई हेल्थ वर्ल्ड"  किताबें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय, केजीबीवी व मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों को अब मुख्य पढ़ाई के साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव व स्क्रीन टाइम के संतुलित प्रयोग की भी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से माई हेल्थ वर्ल्ड नाम से एक किताब तैयार की गई है। हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध यह किताब प्रदेश के विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई गई है।


इस किताब में छात्रों को संतुलित व पौष्टिक आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियों, योग व खेलकूद के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित व बेहतर प्रयोग, पर्याप्त नींद लेने के फायदे के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इसके बेहतर प्रयोग के निर्देश दिए हैं। अध्ययन सामग्री https://eatrightindia.gov.in/ पर भी उपलब्ध हैं। विद्यालयों में बैगलेस डे का आयोजन किया जाए।

Saturday, July 11, 2026

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

आधार सीडिंग, आरटीई, प्रबंध पोर्टल व खर्च में स्थिति बेहतर

लखनऊ। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई डी) में प्रदेश की शैक्षिक व्यवस्था में अपेक्षाकृत हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। प्रदेश में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था बेहतर हुई है तो विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

किंतु ओवरऑल यूपी की ग्रेडिंग काफी नीचे है। यूपी का लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी में सत्र 2024-25 में 81 नंबर था जो पिछले सत्र में भी 81 रहा है। वहीं एक्सेस में 2024-25 में 53 नंबर था जो अब 54 हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फैसिलिटी में 73 से बढ़कर 77, इक्विटी में 231 की जगह 231, गर्वनेंस प्रोसेस में 69 की जगह 71 नंबर मिले हैं। इसी तरह शिक्षण-प्रशिक्षण में 62 से बढ़कर 66 नंबर मिले हैं। ओवरआल 1000 में से यूपी को 580 नंबर मिले हैं। प्रदेश में हाल में शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। 




40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं,  101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत, शिक्षा मंत्रालय की पीजीआईडी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

स्कूलों में बच्चों के रुकने के समय में हुआ सुधार

एक से दूसरे क्लास में जाने की स्थिति भी हुई है बेहतर

लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के सीखने के स्तर व आधारभूत सुविधाओं का आकलन करते हुए परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई डी) 2025-26 जारी की गई है। इसमें जहां प्रदेश की स्कूली शिक्षा में कुछ स्तर पर सुधार देखने को मिला है तो कुछ जगह पर अभी भी हम राष्ट्रीय स्तर से पीछे हैं, इनमें सुधार की जरूरत है।


रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों में बच्चों के रुकने का समय राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तो कम है। लेकिन प्रदेश के ही पिछले साल के आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्राइमरी में जहां ठहराव दर 86.9 फीसदी थी, वह 2025-26 में 86 हो गई है। वहीं उच्च प्राथमिक में गत वर्ष ठहराव दर 70.4 फीसदी था, वह बढ़कर 72 फीसदी हो गई है। 9वीं-10वीं में 49.6 फीसदी से बढ़कर 55 व 11वीं-12वीं में 42.8 से बढ़कर 45 फीसदी हो गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह अभी पीछे है। इसमें सुधार के लिए अभी और काम करना पड़ेगा।

एक से दूसरे क्लास में बच्चों के जाने की दर में भी पिछले साल की अपेक्षा स्थिति बेहतर हुई है। प्राइमरी से अपर प्राइमरी में बच्चों के जाने की दर पिछले सत्र में 91 फीसदी थी जो 2025-26 में 92.2 फीसदी हुई है। अपर प्राइमरी से सेकेंडरी में छात्रों के जाने की दर 78.1 से बढ़कर 78.7 फीसदी हुई है। सेकेंडरी से उच्च स्तर पर जाने की दर 76.6 फीसदी से बढ़कर 79.2 फीसदी हुई है। 


स्कूलों में कंप्यूटर व बिजली कनेक्शन की जरूरत : बेसिक से माध्यमिक तक के सरकारी व निजी स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी है। वहीं 40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। वहीं 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी हैं। पिछले सत्र में 262358 स्कूल थे और इनकी संख्या बढ़कर 265278 हो गई है।

निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 3397 स्कूल बढ़े हैं। एक साल में स्कूलों की संख्या 2913 बढ़ी है। जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के 69 स्कूल कम हुए हैं।

Sunday, July 5, 2026

सोलर से जगमग होंगे राजकीय माध्यमिक विद्यालय व कार्यालय, कार्यालयों में 25 और विद्यालयों में 5 किलोवाट के लगेंगे पैनल

सोलर से जगमग होंगे राजकीय माध्यमिक विद्यालय व कार्यालय, कार्यालयों में 25 और विद्यालयों में 5 किलोवाट के लगेंगे पैनल


लखनऊ। प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों और उनके सभी भवनों व कार्यालयों में सोलर पैनल लगेंगे। इससे जहां बिजली के बिल की बचत होगी वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने इसके लिए। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व डीआईओएस को निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में 2884 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक व उप शिक्षा निदेशक के 36, डीआईओएस के 75 व दो संस्कृत विद्यालय हैं। समग्र शिक्षा की ओर से स्वीकृत 1070 राजकीय विद्यालयों की तुलना में अब तक 947 में ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगे हैं। 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने योजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने अभियान चलाकर सभी 1414 शेष राजकीय माध्यमक विद्यालयों में प्राथमिकता पर सोलर पैनल लगवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि सभी कार्यालयों में 25 व माध्यमिक विद्यालयों में पांच किलोवाट के सोलर पैनल स्थापित कराए जाएं। इसके लिए केंद्र सरकार के निर्धारित माध्यम से प्राप्त करते हुए कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि पहले से जिन विद्यालयों में सोलर पैनल लगे हैं, वे क्रियाशील हैं या नहीं, इसकी भी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। 

Friday, July 3, 2026

उत्तर प्रदेश को मिले 35 नए माध्यमिक विद्यालय, 55 करोड़ रुपये से बेसिक व माध्यमिक विद्यालय किए जाएंगे अपग्रेड

उत्तर प्रदेश को मिले 35 नए माध्यमिक विद्यालय, 55 करोड़ रुपये से बेसिक व माध्यमिक विद्यालय किए जाएंगे अपग्रेड

31 जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड करने की सहमति 

गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर और ललितपुर में आसान होगी पढ़ाई की राह

लखनऊ। प्रदेश में किशोरों को माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के अवसर और बढ़ेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के क्रम में प्रदेश के 31 बेसिक के विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर और चार हाईस्कूल को इंटर कॉलेज के रूप में अपग्रेड करने को मंजूरी दी है। इस तरह प्रदेश को 35 नए माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। इसके लिए 55 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।


प्रदेश में एक ही परिसर में कक्षा एक से इंटर तक की पढ़ाई की सुविधा देने की कवायद चल रही है। इसके लिए हर जिले में दो-दो सीएम मॉडल व अभ्युदय मॉडल कंपोजिट विद्यालयों का तेजी से निर्माण चल रहा है। साथ ही केंद्र सरकार के सहयोग से पहले से चल रहे विद्यालयों को भी अपग्रेड करके इस लक्ष्य को बढ़ाया जा रहा है। ताकि एक बार यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई पूरी करके निकले। इससे ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। 


इसी क्रम में हाल ही में हुई शिक्षा मंत्रालय की प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड (पीएबी) में प्रदेश के 31 जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड करने की सहमति दी गई है। इस पर 46.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, चार हाईस्कूल स्तर के कॉलेजों को इंटर कॉलेज के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इस पर 8.84 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट से इन स्तर की पढ़ाई के लिए आवश्यक क्लासरूम आदि का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद यहां पर विद्यार्थियों का प्रवेश शुरू होगा। इसमें ज्यादातर पिछड़े जिलों के विद्यालयों को अपग्रेड करने की सहमति दी गई है।


इन जिलों के विद्यालय शामिल

चित्रकूट के दो, गाजियाबाद व ललितपुर के एक-एक राजकीय हाईस्कूल अब इंटर में अपग्रेड होंगे। यहां 11वीं व 12वीं की भी पढ़ाई शुरू हो सकेगी। वहीं, सीतापुर, संभल, मिर्जापुर, चित्रकूट व हरदोई के एक-एक, श्रावस्ती, गोंडा, बरेली, बुलंदशहर, सोनभद्र, पीलीभीत व बांदा के दो-दो, झांसी के चार, ललितपुर के आठ जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक विद्यालय व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इससे यहां 9वीं व 10वीं की भी पढ़ाई शुरू हो सकेगी।

Tuesday, June 30, 2026

वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

लखनऊ। बच्चों को साइबर फ्राड, धोखाधड़ी के साथ बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी देने के लिए बैंकों ने स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल के तहत बैंकों की सभी शाखाओं को एक-एक स्कूल गोद लेना है। फिर विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षर बनाया जाएगा। अभी तक 160 स्कूलों को बैंकों ने गोद लिया है। प्रदेश में कुल बैंक शाखाओं की संख्या करीब 21000 है।


साइबर और बैंक फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए बैंकों ने अब स्कूलों का रुख किया है। भारतीय बैंक संघ ने 'स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम' शुरू किया है, जिसके तहत देशभर की हर बैंक शाखा एक-एक स्कूल को अंगीकृत करेगी। उत्तर प्रदेश में भी इस पहल को तेजी से लागू किया जा रहा है, ताकि बचपन से ही बच्चों को वित्तीय साक्षर और डिजिटल बैंकिंग के प्रति जागरूक बनाया जा सके। 

Monday, June 22, 2026

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

आसपास की दुकानों पर गुटखा तंबाकू की बिक्री बंद कराने के लिए उठाने होंगे कदम

प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चलाया जाना है। सभी परिसर तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य है। 


इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक स्कूल परिसर में तंबाकू, गुटखा खाने, बीड़ी, सिगरेट के प्रयोग पर रोक रहेगी। इन सब चीजों के पाउच भी यदि परिसर में मिल गए तो शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रधानाचार्यों से जवाब तलब होगा। परिसर में यदि कहीं पर पूर्व में पान गुटखा की पीक के निशान हों तो उन्हें तत्काल प्रभाव से हटवाने का दायित्व भी प्रधानाध्यापकों या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों पर है। 

ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने पर अधिकारियों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करके वास्तविक स्थिति देखेगी। स्कूलों में हर छह महीने में कम से कम एक तंबाकू नियंत्रण गतिविधि कराई जाएगी। इन गतिविधियों की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त करते हुए उनके नाम, मोबाइल नंबर और तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगवाया जाएगा।  सभी शिक्षण संस्थाओं में मुख्य द्वार के पास बोर्ड या वाल पेंटिंग कराई जाए, जिसमें तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का उल्लेख हो।

 इसकी रोकथाम के लिए नामित नोडल का नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित होना आवश्यक है। परिसर के भीतर तंबाकू उपयोग का कोई सबूत नहीं होना चाहिए। परिसर में तंबाकू के नुकसान बताने वाले पोस्टर लगवाने के साथ संस्थान की आचार संहिता का उल्लेख किया जाए। शिक्षण संस्थान की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' का चिह्नीकरण आवश्यक है। इस 100 गज के दायरे में यदि तंबाकू आदि की बिक्री वाली दुकानें हों तो उन्हें हटवाना होगा या फिर दुकानों पर ऐसे पदार्थ की बिक्री बंद करानी होगी। 

संस्थान के नोडल अपने स्तर पर नियमों के उल्लंघन पर सांकेतिक जुर्माना या सुधारात्मक संदेश देने वाली कोई कार्रवाई कर सकते हैं। इस संबंध में डीआइओएस संतोष कुमार राय का कहना है कि यह सब विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मन मस्तिष्क को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष में शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान से जुडे राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।

Monday, June 15, 2026

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala


दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।


नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।


महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।

एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।

पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।

याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।

Saturday, June 6, 2026

परिषदीय स्कूल खुलते ही पढ़ाई पर फोकस, किताब और अखबार पढ़ने पर रहेगा जोर, अपर मुख्य सचिव ने की सभी एडी बेसिक और बीएसए के साथ नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा

परिषदीय स्कूल खुलते ही पढ़ाई पर फोकस, किताब और अखबार पढ़ने पर रहेगा जोर, अपर मुख्य सचिव ने की सभी एडी बेसिक और बीएसए के साथ नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा 


लखनऊः गर्मी की छुट्टियों के बाद परिषदीय विद्यालय खुलते ही पढ़ाई, बच्चों की उपस्थिति और सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें और समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, साथ ही उनमें स्वतंत्र लेखन की आदत विकसित करने पर भी जोर रहेगा। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा की।


निर्देश दिए कि विद्यालय खुलने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं ताकि पहले दिन से बच्चों को बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सके। आरटीई के तहत लंबित प्रवेश पूरे करने, स्कूल चलो अभियान को गति देने और सभी पात्र बच्चों का नामांकन व शत-प्रतिशत ट्रांजीशन सुनिश्चित करने को कहा गया। 

शिक्षकों के कौशल विकास, अंतरजनपदीय तबादलों की पारदर्शी प्रक्रिया, समग्र शिक्षा अभियान के लंबित कार्यों, स्कूल ग्रांट, पाठ्यपुस्तकों और अन्य भुगतान जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए गए। निपुण भारत मिशन को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। 

आपरेशन कायाकल्प के 19 मानक पूरे करने और छात्राओं और दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के विषय में बताया गया कि अब तक सात साक्षरता परीक्षाओं में 13.82 लाख असाक्षरों ने भाग लिया, जिनमें 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है।

Friday, May 29, 2026

प्रदेश के जिन 80 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं वहां बनेंगे नए आवासीय बालिका स्कूल

प्रदेश के जिन 80 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं वहां बनेंगे नए आवासीय बालिका स्कूल

प्रदेश में बनाए जाएंगे 80 आवासीय बालिका विद्यालय, 586 करोड़ रुपये निर्माण पर खर्च किए जाएंगे

200 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी, 3 एकड़ में बनेगा एक आवासीय बालिका विद्यालय

समग्र शिक्षा की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया


लखनऊ। यूपी में 80 आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण किया जाएगा। यहां कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की पढ़ाई छात्राओं को कराई जाएगी। ऐसे ब्लॉक जहां पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) नहीं हैं, वहां पर इनका निर्माण किया जाएगा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।


कानपुर नगर व औरैया में एक भी केजीबीवी नहीं हैं। ऐसे में यहां पर सभी ब्लॉक में आवासीय बालिका विद्यालय का निर्माण होगा। वहीं कानपुर देहात में नौ, फिरोजाबाद में सात, बागपत में चार व इटावा में करीब तीन आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण किया जाएगा। बाकी अन्य ऐसे ब्लॉक जहां केजीबीवी नहीं है, वहां पर आवासीय बालिका विद्यालय बनाया जाएगा।

परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन

परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन


लखनऊ। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए परिषदीय विद्यालयों का मूल्यांकन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) करेगी। विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर एससीईआरटी की टीम मूल्यांकन करेगी।

परिषदीय विद्यालयों की निपुण आकलन में स्थित काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह की स्थिति ठीक रही। इसको और बेहतर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एससीईआरटी से मूल्यांकन कराने की कार्य योजना तैयारी की है।

निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई के सुधार के लिए प्रयास किया जाएगा। एससीईआरटी की टीम छोटे-छोटे क्षेत्रों में बंटे विद्यालयों का मूल्यांकन कर कमियों की जानकारी करेगी। सुधार के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी देगी।

मूल्यांकन के समय कक्षावार रिपोर्ट को वरीयता दी जाएगी ताकि इसी के आधार पर रेमेडियल कक्षाओं को संचालित कर पठन-पाठन में सुधार किया जा सके। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि परख और निपुण मूल्यांकन में विद्यालयों की स्थिति बेहतर थी। अब एससीईआरटी के मूल्यांकन में विद्यालयों की गुणवत्ता को परखा जाएगा। 




गुणवत्ता सुधार के लिए परिषदीय स्कूलों का होगा क्षेत्रवार मूल्यांकन

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता और बेहतर बनाकर प्रदेश को राष्ट्रीय रैंकिंग में भी और बेहतर स्थान दिलाया जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इसके लिए विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट (क्षेत्र) में बांटकर वहां का मूल्यांकन कराएगा।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की निपुण मूल्यांकन में तो स्थिति काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह में स्थिति ठीक रही है। किंतु कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी नई रणनीति पर काम करेंगे। 



कक्षावार मूल्यांकन को मिलेगी तरजीह

विभाग का प्रयास है कि निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई में सुधार किया जाए। इसके लिए एससीईआरटी की ओर से विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटकर वहां की पढ़ाई की गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। इसमें ओवरऑल के साथ-साथ कक्षावार मूल्यांकन को वरीयता दी जाएगी। ताकि इसी के अनुरूप रेमेडियल क्लास या अतिरिक्त सुधार किया जा सके।


विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटने से काफी बारीक स्तर की जानकारी मिल सकेगी। अभी जिला स्तर पर ही सुधार की कवायद चलती है। जबकि जिलों में भी स्कूलों के बीच में पढ़ाई के स्तर में काफी अंतर होता है। नई कवायद से न सिर्फ सुधार की प्रक्रिया आसान होगी। बल्कि परख जैसे राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन की तैयारी भी बेहतर हो सकेगी। - डॉ. पवन सचान, संयुक्त निदेशक, एससीईआरटी

Thursday, May 28, 2026

स्वच्छ गरिमा विद्यालय से बेटियों के सम्मान को नई ताकत, 75 मॉडल स्कूलों से शुरु हुआ बदलाव, जुलाई तक सभी विद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान

स्वच्छ गरिमा विद्यालय से बेटियों के सम्मान को नई ताकत, 75 मॉडल स्कूलों से शुरु हुआ बदलाव, जुलाई तक सभी विद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस आज

लखनऊ। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की बेटियों की शिक्षा और सम्मान से जुड़ी एक बड़ी पहल को नई रफ्तार मिली है। राज्य सरकार अब प्रदेश के 7004 सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को 'स्वच्छ गरिमा विद्यालय' के रूप में विकसित करेगी। समग्र शिक्षा और यूनिसेफ के सहयोग से चल रही यह पहल स्कूलों को माहवारी स्वच्छता के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


साल 2022 से 75 स्कूलों में शुरू, अब पूरे प्रदेश तक पहुंचा अभियान

इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक राजकीय विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाया गया। यहां बालिकाओं के लिए स्वच्छ शौचालय, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, पैड निस्तारण सुविधा और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए गए। इन स्कूलों में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

अप्रैल 2026 में 150 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया है। ये शिक्षक अगले तीन महीनों में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र में इसका व्यापक क्रियान्वयन शुरू होगा।

समग्र शिक्षा के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने बताया कि यह पहल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Wednesday, May 27, 2026

यूपी के स्कूलों में पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए चलेगा विशेष अभियान, 'रीडिंग आवर, समाचार-पत्र पठन व डीईएआर अभियान को मिलेगा बढ़ावा

यूपी के स्कूलों में पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए चलेगा विशेष अभियान, 'रीडिंग आवर, समाचार-पत्र पठन व डीईएआर अभियान को मिलेगा बढ़ावा

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्कूलों में समाचार पत्र पढ़ने पर दिया जोर

 लखनऊप्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 से विशेष अभियान तेज करने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों की भाषा क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करना है। इसके लिए सभी स्कूलों में 'रीडिंग आवर', 'समाचार-पत्र पठन' और 'ड्राप एवरीथिंग एंड रीड (डीईएआर) अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास पर काम कर रही है। नियमित पढ़ाई से बच्चों की भाषा और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होगी। स्कूल खुलने के बाद स्कूलों में लेखन प्रतियोगिता, पुस्तक समीक्षा और समाचार आधारित लेखन गतिविधियां भी कराई जाएंगी, ताकि छात्र-छात्राओं की अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत हो सके। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डायट प्राचार्यों, एडी बेसिक, बीएसए और बीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभियान को गंभीरता से लागू कराया जाए। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान समाचार वाचन भी कराया जाएगा और बच्चों को नियमित पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 


सरकार ने प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। तय संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को 'चैंपियन रीडर आफ द इयर' का पुरस्कार दिया जाएगा। विद्यार्थियों को कहानी लेखन, समीक्षा लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा ताकि उनकी सोच, विश्लेषण क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो सके।

Sunday, May 17, 2026

प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

प्रदेश की 90 स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर होंगी पुरस्कृत, विकसित भारत बिल्डथॉन अंतर्गत 25 मई को पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा

विकसित भारत बिल्डथॉन में युवाओं के विचार चयनित, एक राष्ट्रीय व चार राज्य स्तर पर भी चुने गए


लखनऊ। प्रदेश की १० स्कूली टीमें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होंगी। इनका चयन शिक्षा मंत्रालय की ओर से कराए गए विकसित भारत बिल्डथॉन की त्रिस्तरीय प्रतियोगिता के बाद किया गया है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य देश भर के स्कूली छात्रों में रचनात्मकता, समस्या समाधान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर चयनित टीमों को नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा।


योजना के तहत अटल इनोवेशन मिशन की ओर से कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने इस प्रतियोगिता का परिणाम जारी किया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से जारी सूची के अनुसार जिला स्तर पर 85 नवाचार व प्रोटोटाइप चयनित हुए हैं।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी संबंधित बीएसए व डीआईओएस को बताया है कि 25 मई को इसका पुरस्कार वितरण समारोह दिल्ली में होगा। इसमें जिला व राज्य स्तरीय विजेताओं की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। यह टीमें कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़ेंगी। राष्ट्रीय स्तर की विजेता टीम संबंधित शिक्षक के साथ समारोह में शामिल होगी। उन्होंने टीम से संबंधित जानकारी जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। 

Saturday, May 16, 2026

प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में

प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में कक्षा 11 और 12 के पंजीकृत छात्र-छात्राओं का पाठ्यक्रम पूर्ण कराने के सम्बन्ध में