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Saturday, November 21, 2020

हर परिषदीय विद्यालय को टैबलेट व इंटनेट कनेक्टिविटी देने का वादा, बोले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री

हर परिषदीय विद्यालय को टैबलेट व इंटनेट कनेक्टिविटी देने का वादा, बोले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री 


एक वेबिनार में  गाजीपुर की हर्षिता ने पूछा- इंटरनेट की सुविधा न होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही। लखनऊ के एक स्लम में वंचित तबके के बच्चों के साथ मौजूद युवा दुर्गेश त्रिपाठी ने भी सवाल पूछा। सतीश चंद्र द्विवेदी ने इस मुद्दे पर बात रखने के लिए उसे शाबाशी दी। 


उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी 1.5 लाख से अधिक वाट्सएप ग्रुप बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को आनलाइन शिक्षा सुलभ कराने के लिए काम कर रहा है। शुरुआत में हम लोगों ने इसकी दिक्कत महसूस की थी, इसीलिए दूरदर्शन की मदद से बच्चों की शिक्षा का प्रबंध किया है । 


आने वाले दिनों में हर विद्यालय को एक टैबलेट दिया जाएगा, इंटरनेट कनेक्शन से जोड़ा जाएगा। पंचायत भवन को फाइबर आप्टिकल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि पूरे स्कूलों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा

स्कूलों की फीस माफी के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को कितना हो रहा नुकसान, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा जवाब

स्कूलों की फीस माफी के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब


प्रयागराज। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को रहे नुकसान तथा कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नत करने सहित कई मांगों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से जवाब मांगा है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्राइवेट स्कूल लॉकडाउन की अवधि की फीस अभिभावकों से न बसूलें।


मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोबिंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। - याचिका की अगली सुनवाई चार दिसंबर को होगी। संस्था ने याचिका में एक शोध का हवाला देते हुए कहा है कि ऑनलाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक और मानसिक नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर रही है।


ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को कितना हो रहा नुकसान, हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक से मांगा जवाब

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को रहे नुकसान तथा कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नत करने सहित कई मांगों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से जवाब मांगा है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्राइवेट स्कूल लॉकडाउन की अवधि की फीस अभिभावकों से न वसूलें। 


मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका की अगली सुनवाई चार दिसंबर को होगी। संस्था ने याचिका में एक शोध का हवाला देते हुए कहा है कि ऑनलाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक और मानसिक नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर रही है। संस्था का कहना है कि वह एक ट्रस्ट है, जो बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, विकास व कल्याण के लिए काम करता है।


संस्था का कहना है कि जब लॉकडाउन में स्कूल बंद थे तो प्राइवेट स्कूलों को फीस नहीं लेनी चाहिए और स्कूलों की फीस व अध्यापकों के वेतन को रेगुलेट किया जाए। साथ ही बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। याचिका पर राज्य सरकार के अधिवक्ता राजीव सिंह ने प्रतिवाद किया।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा आठ तक के बच्चों को परीक्षा के बगैर प्रोन्नत करने और लॉकडाउन के दौरान गैर वित्त पोषित प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस मांगने पर रोक लगाने की मांग में दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने मेरठ की संस्था मासूम बचपन फाउंडेशन की याचिका पर दिया है।


कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। याचिका पर राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता राजीव सिंह ने प्रतिवाद किया। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, विकास व कल्याण के कार्य कर रही संस्था का कहना है कि जब लाकडाउन में स्कूल बंद थे तो प्राइवेट स्कूलों को फीस नहीं लेनी चाहिए। स्कूलों की फीस व अध्यापकों का वेतन रेगुलेट किया जाए। साथ ही कक्षा आठ तक के बच्चों को बिना परीक्षा लिए अगली कक्षा में प्रोन्नति दी जाए।


याची का यह भी कहना है कि आन लाइन कक्षा से मासूम छात्रों को शारीरिक व मानसिक नुकसान हो रहा है। उनकी क्षमता पर असर पड़ रहा है। इसके लिए शोध का भी हवाला दिया गया।

Sunday, November 15, 2020

दिवाली बीती, कई राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी, यूपी में कक्षा 9 से 12 खुले - कक्षा 1 से 8 पर अभी कोई निर्णय नहीं

दिवाली बीती, कई राज्यों में स्कूल खोलने की तैयारी, यूपी में कक्षा 9 से 12 खुले - कक्षा 1 से 8 पर अभी कोई निर्णय नहीं।


कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण सात महीने से भी ज्यादा समय से स्कूल बंद हैं. सरकार की अनलॉक प्रक्र‍िया के दौरान 15 अक्टूबर से कई राज्यों में स्कूल खुल गए हैं. इसके लिए सरकार के निर्देश के अनुसार राज्यों ने अपने राज्य में अलग अलग एसओपी तैयार की है. वहीं दीवाली के बाद भी कई राज्य स्कूल खोल रहे हैं. 


यूपी-बिहार, झारखंड आदि राज्यों ने स्कूल खोल दिए हैं। लेकिन अभी 9 से 12 तक के लिए ही ओपन हुए हैं। कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों को खोलने की SOP तैयार हो रही है। फिलहाल शासन स्तर पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।


लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी स्कूल बंद हैं. महाराष्ट्र सरकार ने भी दिवाली के बाद स्कूल खोलने का फैसला लिया है. सूबे के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस संबंध में कहा है कि हम सभी एहतियाती कदम उठाते हुए दिवाली के बाद स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार कर रहे हैं. इसके लिए राज्य सरकार ने स्कूलों के लिए एसओपी तैयार की है. इसके अनुसार स्कूलों में शिफ्ट के हिसाब से पढ़ाई होगी.


अगर राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्य में नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अगले आदेश तक स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है. सरकार ने कहा है कि वो पेरेंट्स, स्टूडेंट्स, स्कूल और डॉक्टरों आदि से राय लेकर ही अपनी एसओपी तैयार करने के बाद स्कूल खोलेंगे.


असम में दो नवंबर से केवल कक्षा 6 वीं से 12 वीं तक के छात्रों को स्कूल आने की अनुमति दी गई थी. साथ ही राज्य ने स्कूलों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की. असम में स्कूलों के लिए ऑड इवन की व्यवस्था लागू की गई है. यहां कक्षा 6, 8 और 12 के छात्र सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को स्कूल में आएंगे, जबकि अन्य तीन दिन कक्षा 7, 9 और 11 के छात्र आएंगे.


आंध्र प्रदेश में दो नवंबर से स्कूल चरणबद्ध तरीके से फिर से खोले गए. कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए दिन-प्रतिदिन के कार्यक्रम से लेकर मिड डे मील में भी बदलाव किया गया है. यहां सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुपालन में एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी सावधानी बरत रहे हैं. आंध्र प्रदेश में कक्षाएं सुबह 9:15 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक लगने का प्रावधान किया गया. प्रत्येक कक्षा में सोशल डिस्टेंस का पालन के साथ कक्षाओं में केवल 16 छात्र बैठने की व्यवस्था है. इसे देखते हुए शैक्षणिक वर्ष को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है. अधिकारियों ने कहा कि आंध्र प्रदेश में कक्षा 9 और 10 के छात्र सोमवार से वैकल्पिक दिनों में स्कूल जाना शुरू कर सकते हैं.


अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु में 16 नवंबर यानी दिवाली के बाद से स्कूल खुल जाएंगे. अरुणाचल प्रदेश में जहां 10वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए दिवाली के बाद स्कूल खुलेंगे. वहीं, तमिलनाडु में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए क्लास चलाने का निर्णय सरकार की ओर से किया गया है. इन दोनों राज्यों में स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए मास्क लगाना जरूरी है.


गोवा में 10वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल 21 नवंबर से खुल जाएंगे. सभी स्कूलों को कोरोना गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है. राज्य सरकार इस संबंध में जल्द ही गाइडलाइंस जारी करेगी. वहीं हरियाणा में भी 16 नवंबर से राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी खुल जाएंगे. इन राज्यों में राज्य सरकार ने स्कूलों के लिए एसओपी तैयार की है.


पश्चिम बंगाल सरकार ने फिलहाल स्कूल न खोलने का फैसला किया है. ममता सरकार ने कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 नवंबर तक राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है. यदि 30 नवंबर के बाद हालात सामान्य होंगे तो कोविड मामलों की समीक्षा के बाद सरकार 1 दिसंबर से स्कूल खोल सकती है.


हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2 नवंबर से कक्षा 9 से 12 वीं के छात्रों के लिए नियमित आधार पर स्कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया गया था. मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ये निर्णय लिया गया है. स्कूल जाने के इच्छुक छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी, हालांकि, उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी. इसके अलावा, राज्य के कॉलेज गृह मंत्रालय के एसओपी और गाइडलाइन का पालन करते हुए खुलेंगे. जो कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए फ‍िर से बंद कर द‍िए गए हैं.

Monday, November 9, 2020

इंग्लिश मीडियम परिषदीय स्कूल में तैनाती के लिए हाईकोर्ट पहुंचे बेसिक शिक्षक

इंग्लिश मीडियम परिषदीय स्कूल में तैनाती के लिए हाईकोर्ट पहुंचे बेसिक शिक्षक 


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जिले में सवा साल से तैनाती के लिए भटक रहीं प्रतिभा सिंह और 43 अन्य शिक्षकों ने शासनादेश के अनुरूप अंग्रेजी स्कूलों में तैनाती की गुहारलगाई है। मामले की अगली सुनवाई नौ नवंबर को होनी है। चयनत शिक्षकों का तर्क है कि 29 मई को शासन ने अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में तैनाती पर रोक हटा ली थी। लेकिन इसके पांच महीने बाद भी प्रयागराज में तैनाती नहीं की गई है। 


जिले में सत्र 2019-20 में 110 प्राथमिक 24 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए 25 मार्च 2019 तक आवेदन लिए गए थे। साक्षात्कार हुआ। 31 अगस्त और 1 सितंबर 2019 को चयनित शिक्षकों से स्कूलों के विकल्प भराए गए। लेकिन इसके बाद तैनाती नहीं की गई। चयनित शिक्षकों ने कई बार बीएसए और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से वार्ता की तो हर बार अफसरों ने एक-दूसरे पर टाल दिया। सवा साल बाद भी तैनाती नहीं होने सेदुःखी शिक्षकों ने कोर्ट में याचिका कर दी।इससे पहले रामनाथपुरके ग्राम प्रधान और अन्य 5 प्रधान भी अपने गांव में इंग्लिश मीडियम स्कूल बनने के बावजूदशिक्षकों की नियुक्ति न होने को लेकर याचिकाएं कर चुके हैं।

Friday, October 23, 2020

स्कूलों में कम पहुंच रहे थे छात्र तो जल्द हो गई दशहरा की छुट्टी

स्कूलों में कम पहुंच रहे थे छात्र तो जल्द हो गई दशहरा की छुट्टी

 
लखनऊ : सात महीने बाद राजधानी में खुले स्कूल तीन दिन बाद बंद होने लगे हैं। विद्यार्थियों की कम संख्या के चलते अभी से दशहरा की छुट्टी होने लगी है।


कुछ स्कूल दशहरा के बाद खुलेंगे तो कई ने दो नवंबर से खोलने का निर्णय लिया है। 19 अक्तूबर से हाईस्कूल व इंटर के लगभग सभी सरकारी स्कूल खुल गए।

वहीं, कई निजी स्कूल अभिभावकों की सहमति के बाद खुले। हालांकि, इसके तीन दिन बाद से स्कूल बंद होने भी शुरू हो गए। स्कूल प्रशासन की मानें तो त्यौहार की वजह से छात्रों की संख्या कम रही।


अब जब स्कूल खुलेंगे तो छात्रों की संख्या में इजाफा होगा। 19 से खोले गए स्कूलों में से अधिकतर केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों के मुख्य विषय और प्रैक्टिकल के लिए खोले गए थे। त्यौहार बाद ये स्कूल बाकी कक्षाओं के लिए भी खोले जाएंगे।


दो नवंबर से खुलेंगे केवी स्कूल
केंद्रीय विद्यालयों में 21 अक्तूबर से ही दशहरा का अवकाश घोषित हो गया, वहीं अब स्कूल दो नवंबर से खुलेंगे। खास बात है कि सबसे बड़ी छात्र संख्या वाले केवी गोमतीनगर और अलीगंज में महज तीन से चार प्रतिशत अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति दी थी। ऐसे में एक कक्षा में दो से चार छात्र ही बैठे। केवी प्रशासन के अनुसार दशहरे की छुट्टियों बाद ज्यादा संख्या में छात्र आएंगे। 


बाल विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य आरके पांडेय ने बताया कि उनके यहां कक्षा 9 से 12 में जितने अभिभावकों ने सहमति दी थी, उसके सापेक्ष भी छात्र नहीं पहुंचे। चार से दस छात्र ही स्कूल आए। कक्षा में एक या दो छात्र ही बैठे थे। उन्होंने बताया कि त्यौहार की वजह से छात्रों ने घर पर रहना सही समझा। गुरुवार से यहां दशहरा का अवकाश घोषित हो गया है। अब स्कूल दो नवंबर से खुलेगा। जयपुरिया स्कूल, गोमतीनगर में भी सात छात्र ही पहुंचे। ऐसे में यहां भी अवकाश घोषित कर दिया गया। सेंट जोसेफ स्कूल की सभी शाखाओं में शुक्रवार से छुट्टी हो गई है। एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि दशहरा बाद कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को बुलाया गया है।


सीएमएस में भी आज से अवकाश
सिटी मोंटेसरी स्कूल ने भी शुक्रवार से दशहरा अवकाश की घोषणा कर दी है। यहां केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों को बुलाया गया था। लखनऊ पब्लिक स्कूल में 10वीं, 12वीं के छात्रों को ही बुलाया गया, आरएलबी की सभी आठ शाखाओं में कक्षा 12 के छात्रों को ही प्रैक्टिकल के लिए बुलाया गया। सेंट फ्रांसिस और कैथेड्रल में भी केवल बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर छात्रों को बुलाया। इससे बहुत कम उपस्थिति रही। किसी कक्षा में तीन तो किसी में चार से पांच छात्र ही उपस्थित रहे। इन स्कूलों में दशहरा अवकाश घोषित कर दिया गया है। दशहरा और ईद-ए-मिलाद के अवकाश के चलते अधिकतर स्कूलों ने नए सिरे से दो नवंबर से विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। अवध कॉलेजिएट, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी, जीडी गोयनका, पायनियर मोंटेसरी, स्प्रिंग डेल समेत कई स्कूलों ने पहले से दो नवंबर से खोलने का निर्णय लिया था।

Tuesday, October 20, 2020

शर्तों के साथ खुल गए क्लास 9 से 12 तक के स्कूल, दो पालियों में चली कक्षाएं school reopening in uttar pradesh

शर्तों के साथ खुल गए क्लास 9 से 12 तक के स्कूल, दो पालियों में चली कक्षाएं

 
यूपी में सोमवार सुबह कक्षा 9 से लेकर 12 तक के छात्र के लिए स्कूल खुल गए हैं। राजधानी लखनऊ , कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, आगरा समेत सभी जिलों में सात महीने बाद सुबह स्कूलों के सामने चहल -पहल दिखी। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद छात्रों को अंदर के जाने की अनुमति दी गई।


लखनऊ में करीब 1020 स्कूल सोमवार सुबह खुल गए है। सदर स्थित लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज के गेट पर सुबह छात्रों को थर्मल स्क्रीनिंग के प्रवेश दिया जा रहा था। लंबे समय के बाद स्कूल आने बाद छात्र खुश थे। इसी तरह राजधानी के अन्य स्कूल में कोरोना गाइड लाइन का पालन कर छात्रों का स्कूल प्रवेश कराया जा रहा था।


जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि राजकीय स्कूलों के 51 प्रिंसिपल को इन स्कूलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा, जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 106 अन्य अधिकारियों की निरीक्षण के लिए लगाया गया है। डीआईओएस ने बताया कि  मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर सभी सीएचसी और पीएचसी को अलर्ट पर रखने को कहा गया है । इसके अलावा, सभी एसडीएम और तहसीलदार को अपने क्षेत्रों के स्कूलों के निरीक्षण को कहा गया है। 

शर्तों के साथ खुले स्कूल

शर्तों के साथ हापुड़ जिले के स्कूल सोमवार सुबह से खुल गए हैं। स्कूलों में कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं चल रही हैं। कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है। स्टूडेंट्स को परीक्षा कक्षों में दूर-दूर बैठाया गया है। 

डीआईओएस निशा अस्थाना ने बताया कि कोविड 19 की गाइडलाइन का पालन कराते हुए स्कूल खुल गए हैं। कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं स्कूलों में चल रही हैं। वह खुद और नोडल अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं। कोरोना वायरस को लेकर स्कूलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी स्कूलों के कक्षों में स्टूडेंट्स को दूर-दूर बैठाया गया है। स्टूडेंट्स को कोई परेशानी नहीं हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 

सुलतानपुर में खुल गए माध्यमिक विद्यालय

सोमवार को जिले के माध्यमिक स्कूल खुल गए।  कोविड-19 महामारी संक्रमण के कारण नए शिक्षा सत्र अप्रैल महीने से स्कूलों एवं विद्यालयों में शिक्षण कार्य बंद था। शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए सोमवार से सोशल डिस्टेंसिंग के तहत विद्यालयों में कक्षा नौ से लेकर 12 तक की विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरु हो गई। प्रथम पाली में सुबह 8.50 बजे से कक्षा नौ व 10 और द्वितीय पाली में अपराह्न 2.50 बजे से कक्षा 11 व 12 के विद्यार्थियों स्कूल बुलाया गया है।

डीआईओएस जयप्रकाश यादव ने बताया कि से 30 प्रतिशत अभिभावकों ने अपने बच्चों को विद्यालयों में पढ़ाने के लिए भेजने पर सहमति पत्र प्रदान की है।  विद्यालयों में नामांकित कक्षावार विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से एक दिन में 50 फीसदी ही बच्चों को पढ़ने के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रथम पाली में सुबह नौ बजे से तथा द्वितीय पाली में अपराह्न तीन बजे से पढ़ाई होगी।  सोमवार को नगर के शैम्फोर्ड फ्यूचरस्टिक स्कूल में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग के बाद मास्क के साथ बच्चों का प्रवेश कराया गया। प्रधानाचार्य डॉ. अजय तिवारी ने बताया कि शासन की गाइडलाइन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

गोंडा : स्कूल कालेजों से हटा कोरोना का ताला

सरकार की गाइड लाइन के बाद करीब सात माह बाद स्कूल और कालेजों पर जड़ा कोरोना का ताला सोमवार को हट गया। पहले दिन पहुंचे बच्चों को अधिकतर स्कूलों में कोविड गाईड लाईन के तहत प्रवेश दिया गया। यहां के अधिकतर स्कूलों में सुबह पहुंचे छात्र छात्राओं को सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद प्रवेश दिया गया। क्लास में भी दैहिक दूरी का अनुपालन कराया जा रहा है। पहले दिन खुले स्कूलों में शिक्षकों और स्टाफ को भी नियमों के तहत जांच से गुजरना पड़ा। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक कहीं नियमों की अनदेखी की सूचना नहीं है। 


स्थानीय सेंट जेवियर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल पंतनगर  में प्रातः काल बच्चों का प्रवेश होने पर बच्चों को सैनिटाइज करने के साथ-साथ उनका थर्मल स्क्रीनिंग की गई। तत्पश्चात विद्यालय में प्रवेश दिया गया। प्रधानाचार्य रामागिरी विद्यासागर ने बताया  शासनादेश के बाद प्रथम दिन इस सत्र का विद्यालय खोला गया है। जिसमें समस्त प्रकार की सावधानियां को ध्यान में रखते हुए हुए कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को  बुलाया गया है। उनके अभिभावक के स्वीकृति पत्र  के साथ विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है। जनता इंटर कालेज खरगूपुर, देवीबख्श इंटर कालेज बेलसर में नियमों के तहत प्रवेश दिया गया। डीआईओएस अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि निगरानी दल बनाएं गए हैं और निरीक्षण कराया जा रहा है।

दो पालियों में  कक्षाएं 

- दो पालियों में स्कूल चलेंगे। पहली पाली में कक्षा 9 व 10 और दूसरी पाली में कक्षा 11 व 12 के बच्चे बुलाए जाएंगे। 

- विद्यालय खुलने पर प्रतिदिन प्रत्येक पाली के उपरांत कक्ष का सैनिटाइजेशन कराना होगा। 

- बच्चों के आने पर ट्रेम्परेचर परीक्षण के बाद सैनिटाइजेशन कराना होगा। मास्क लगाना अति आवश्यक है। 

- प्रत्येक विद्यालय में जिला प्रशासन के इन्टीग्रेटेड कंट्रोल रूम का नंबर डिस्प्ले करना होगा। 

- यदि किसी विद्यालय में विद्यार्थी, शिक्षक अथवा किसी कर्मचारी को खासी, जुकाम या बुखार है तो उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल रूम में देनी होगी। 

- कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए विद्यालयों में एक कमेटी का गठन की जाएगी। 

- ऑनलाइन कक्षाएं यथावत चलती रहेंगी उन्हें बंद नहीं किया जाएगा।

- दो शिफ्टों में 50-50 फीसद बच्चों को बुलाकर कक्षाएं संचालित की जाएंगी। 

- लंच के समय बच्चे जब मास्क उतारें तो छह फीट की दूरी उनके बीच आवश्यक है। खाने-पीने की कोई सामग्री बच्चे आपस में शेयर न करें। 

एक तिहाई अभिभावकों ने ही दी स्कूल भेजने की सहमति, कोरोना का भय अभी भी हावी

एक तिहाई अभिभावकों ने ही दी स्कूल भेजने की सहमति, कोरोना का भय अभी भी हावी



लखनऊ : यूपी में 28,474 स्कूलों में कक्षा नौ से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने वाले कुल 1.02 करोड़ विद्यार्थियों में से 34.68 लाख विद्यार्थियों के अभिभावकों ने ही उन्हें स्कूल भेजने की लिखित सहमति दी है। कोरोना संक्रमण को लेकर अभी भी ज्यादा अभिभावक डरे हुए हैं। उन्हें भय है कि स्कूल भेजने पर उनका बच्चा कहीं कोरोना की चपेट में न आ जाए।



यही कारण है कि सिर्फ 33.70 फीसद विद्यार्थियों के अभिभावक ही उन्हें स्कूल भेजने को राजी हुए। सोमवार को पहले दिन स्कूलों में आए विद्यार्थियों को कोरोना से बचाव का पाठ पढ़ाया गया। उन्हें कोरोना प्रोटोकॉल का किस तरह पालन करना है, इसकी जानकारी दी गई।

Sunday, October 18, 2020

माध्यमिक : सात महीने बाद आज से खुलेंगे 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल, प्राइवेट स्कूलों ने लिया ये फैसला

बच्चों के लिए आज से खुलेंगे माध्यमिक स्तर स्कूल, बिना मास्क नहीं मिलेगा प्रवेश, ज्यादातर अभिभावकों ने नहीं दी अब तक सहमति

माध्यमिक : सात महीने बाद आज से खुलेंगे 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल, प्राइवेट स्कूलों ने लिया ये फैसला।।


कोरोना संक्रमण काल में सात माह बाद प्रदेश में आज से कक्षा 9 से 12वीं तक के स्कूल खोले जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राजकीय विद्यालयों में संक्रमण रोकने के पुख्ता इंतजाम का दावा किया है। वहीं सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों को बच्चों को कोरोना से बचाने की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।


हालांकि, अधिकतर बड़े निजी स्कूल कोरोना को देखते हुए पहले 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को ही बुलाएंगे। 9वीं, 11वीं के छात्रों को दशहरे के बाद बुलाया जाएगा। वहीं, यूपी बोर्ड व सीबीएसई के सरकारी स्कूलों ने सोमवार से 9 से 12 तक के उन सभी छात्रों को बुलाने का निर्णय लिया है, जिनके अभिभावकों की सहमति मिल गई है।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सोमवार से कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों का संचालन दो पालियों में किया जाएगा। कक्षा 9 एवं 10 के लिए पहली पाली सुबह 8.50 से 11. 50 बजे और 11 एवं 12 के लिए दूसरी पाली दोपहर 12.20 से 3.20 बजे तक संचालित होगी।


उन्होंने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षकों व स्कूल प्रबंधन को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी संचालन प्रक्रिया के मानकों (एसओपी) के अनुसार ही स्कूलों का संचालन के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। मास्क, साबुन व सैनिटाइजर की भी व्यवस्था करनी होगी। 


नहीं मिल रही अभिभावकों की सहमति 
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों में अभिभावकों से लिखित सहमति नहीं मिल रही है। इसके बिना विद्यार्थी को पठन-पाठन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। विभाग को उम्मीद है कि एक बार स्कूल खुलने के बाद अभिभावक रुझान देखकर अनुमति देने लगेंगे।


आज से नहीं खुल रहे कई स्कूल
जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि उनका स्कूल दो नवंबर से खुलेगा। इससे पहले अभिभावकों के साथ वर्चुअल बैठक भी होगी। अवध कॉलेजिएट, पायनियर मोंटेसरी, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी, लामार्ट गर्ल्स, लामार्ट बॉयज समेत कई स्कूल अगले महीने खोलने का विचार कर रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल ने भी बताया कि उनके संगठन के बैनर तले भी काफी स्कूल अगले महीने से खुलेंगे।

 
प्रयागराज : 19 अक्टूबर से सभी शैक्षिक बोर्ड के विद्यालय खुल रहे हैं। स्कूलों में बिना मास्क प्रवेश नहीं दिया जाएगा। विद्यालयों में बच्चों के पास यदि मास्क नहीं होगा तो उन्हें मास्क देने की भी तैयारी है। कक्षा नौ से 12वीं तक के ही विद्यार्थी स्कूलों आएंगे। सभी की ऑनलाइन कक्षाएं पूर्व की तरह चलती रहेंगी।


रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडेय ने बताया गया कि दो पालियों में 50 फीसद विद्यार्थी ही बुलाएं जाएंगे। सर्वार्य इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि अभिभावकों से सहमति ली जा रही है। सीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. टीपी पाठक ने बताया कि कक्षाएं शुरू करने और कोरोना से बचने के लिए सभी उपाय किए हैं।


नहीं दिए सहमतिपत्र
डीपी पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापक जया सिंह ने बताया कि अभिभावकों अनुमति नहीं दी। शिवचरण दास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लालचंद्र पाठक ने बताया कि स्कूल खोलने की तैयारी है लेकिन अभी सहमतिपत्र नहीं भेजे हैं।


तैयारियों का लिया जायजा
तैयारियों का जायजा लेने के लिए डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पहुंचे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों की भी कक्षाएं नियमित रूप से चलें। इसी क्रम में जीजीआइसी कटरा का निरीक्षण डीआइओएस प्रथम राम नारायण विश्वकर्मा व डीआइओएस द्वितीय देवी सहाय तिवारी ने किया।


सम और विषम अनुक्रमांक के अनुसार बुलाएं जाएंगे विद्यार्थी
केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में 11वीं और 12वीं की कक्षाएं सुबह आठ बजे से 11 बजे तक चलेंगी। कक्षा नौ और 10 की कक्षाएं 11 बजे से दो बजे तक चलेंगी। सम अनुक्रमांक वाले विद्यार्थी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बुलाए जाएंगे जब कि विषम अनुक्रमांक वाले विद्यार्थी मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को बुलाए जाएंगे

Wednesday, October 14, 2020

फतेहपुर : परिषदीय एवं कस्तूरबा विद्यालयों में विद्यालय विकास योजना के निर्माण के संबंध में।

फतेहपुर : परिषदीय एवं कस्तूरबा विद्यालयों में विद्यालय विकास योजना के निर्माण के संबंध में।  


Monday, October 12, 2020

लंबे समय से बंद पड़े विद्यालयों को खोलना अब है तो जरूरी, लेकिन संसाधनों का अभाव बढ़ा सकता है स्कूलों की मुश्किलें

लंबे समय से बंद पड़े विद्यालयों को खोलना अब है तो जरूरी, लेकिन संसाधनों का अभाव बढ़ा सकता है स्कूलों की मुश्किलें

 
सच कहा जाए तो अब इसके सिवा कोई और चारा नहीं है कि कोरोना संक्रमण काल के बीच ही माध्यमिक स्तर के विद्यालयों को खोला जाए। यही वजह है कि सरकार ने कक्षा नौ से बारह तक के छात्रों के लिए 19 अक्टूबर से कक्षाएं शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए प्रोटोकाल का निर्धारण भी कर दिया गया है जो कागजों पर तो संतोषजनक लगता है लेकिन यदि सरकारी और निजी विद्यालयों की स्थिति देखें तो इसका पालन करा पाना बड़ी चुनौती होगी। विशेष तौर से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है क्योंकि सत्र को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें भी कक्षाएं शुरू करनी ही पड़ेंगी। 


सरकार ने विद्यालयों में अधिकांश काम आनलाइन करने पर ही जोर दिया है। यहां तक कि एडमिशन और पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग भी आनलाइन ही होगी। यदि विद्यालय इसके लिए संसाधन बना सकेंगे तो निश्चित तौर पर उनके लिए यह नया अनुभव भी होगा। हालांकि माध्यमिक शिक्षा विभाग छात्रों के लिए तीस फीसद पाठ्यक्रम पहले ही कम कर चुका है, फिर भी शिक्षण कार्य को नए सिरे से नियोजित करना पड़ेगा।


छात्र संख्या को आधार बनाएं तो माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध विद्यालयों को कक्षाएं प्रारंभ करने में शुरुआती तौर पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में निजी, सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों की कुल संख्या लगभग 27 हजार है और हर साल हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में ही लगभग साठ लाख छात्र बैठते हैं। इनमें व्यक्तिगत छात्र भी शामिल हैं और उन्हें हटा दें तो भी इतना बड़ी संख्या के छात्रों के लिए कक्षाएं शुरू कराना आसान न होगा।


 सीबीएसई और सीआइएससी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए यह उतनी परेशानी की बात नहीं होगी क्योंकि एक तो अधिकांश विद्यालय नगरीय क्षेत्र में हैं और दूसरे उनके पास संसाधन भी तुलनात्मक रूप से अधिक हैं। राहत की बात यही है कि सरकार ने नियमों को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के अनुकूल रखने पर जोर दिया है ताकि लोग नई व्यवस्था से बहुत असहज न महसूस करें।

Sunday, October 11, 2020

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डो के कक्षा 9 से 12 के विद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः प्रारम्भ किए जाने के संबंध में आदेश जारी

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में संचालित समस्त शिक्षा बोर्डो के कक्षा 9 से 12 के विद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः प्रारम्भ किए जाने के संबंध में आदेश जारी


स्कूलों में नहीं हो सकेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, देखें क्या है गाइडलाइंस में महत्वपूर्ण बातें

स्कूलों में नहीं हो सकेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, देखें क्या है गाइडलाइंस में महत्वपूर्ण बातें

यूपी के स्कूल 19 से खुलेंगे, लेकिन इन बातों का रखना होगा ध्यान

 
लखनऊ : माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई 19 अक्टूबर से काफी सर्तकता के साथ शुरू होगी। विद्यार्थी, शिक्षक व अभिभावकों के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। अभी स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम व उत्सव मनाने आदि पर रोक रहेगी।


मार्निंग असेंबली भी यथासंभव कक्षा में ही होगी। अगर क्लास टीचर खेल मैदान या हाल में इसे आयोजित करेगा तो शारीरिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन होगा। अभी पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग ऑनलाइन ही होगी। नई कक्षाओं में दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सिर्फ अभिभावक स्कूल आएंगे। ऑनलाइन एडमिशन पर जोर दिया जाएगा। स्कूल में पूर्णकालिक डॉक्टर, नर्स और काउंसलर की व्यवस्था होगी।


विद्यार्थी को पुस्तकालय, खेल के मैदान या स्कूल परिसर के अन्य भाग में मास्क लगाकर शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर ही बैठ सकेंगे। खेलकूद, संगीत-नृत्य व अन्य कला की गतिविधियों को सुरक्षा के मापदंड के साथ छोटे-छोटे समूहों में कर सकेंगे।


शिक्षक विद्यार्थियों को नियमित होमवर्क दिए जाने पर जोर नहीं देंगे बल्कि उन्हें सीखने और उनकी जिज्ञासा को शांत करने पर जोर देंगे। माध्यमिक स्कूलों में 30 फीसद कोर्स पहले ही घटा दिया गया है। ऐसे में पाठ्यक्रम को तीन घटकों में बांटा जाएगा। पहला कक्षा पाठ जिसमें आवश्यक विषय होंगे जिन्हें समझना मुश्किल होगा। दूसरा स्व- शिक्षण पाठ होगा जिसमें ऐसे विषय जो विद्यार्थी घर में पढ़ सकता है। तीसरा पाठ्यक्रम व अधिगम परिणामों का मुख्य हिस्सा नहीं है, इसे इस वर्ष छोड़ा जा सकता है। इसी के अनुरूप विद्यालय शैक्षिक कैलेंडर तैयार कर टाइम टेबल बनाएंगे। खेल के लिए विद्यार्थी बाहर नहीं जा सकते।

गाइडलाइन में यह भी खास

■ क्लास में विद्यार्थियों को तनाव कम करने के लिए योग कराया जाएगा।

■ अगर महामारी के कारण विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पा रहे तो टीचर घर पर संपर्क कर सकते हैं।

■ कक्षाओं के इंटरवल का समय अलग-अलग होगा।

■ विद्यार्थियों का कोर्स समय पर पूरा हो इसके लिए टीचर किसी न किसी माध्यम से उससे या अभिभावक से सप्ताह में दो बार संपर्क करेंगे।

■ शिक्षक विद्यार्थियों को जो प्रोजेक्ट वर्क देंगे उसे वह माता-पिता के सहयोग से पूरा कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर वह घर के बजट का चार्ट बना सकते हैं।

■ ऐसे स्कूल जहां आनलाइन पढ़ाई के लिए आंशिक सुविधाएं हैं वहां टीचर एक प्रश्नोत्तरी तैयार कर सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों के प्रयोग से उनका फीडबैक ले सकता है।

■ जिन स्कूलों में आनलाइन पढ़ाई के लिए बिल्कुल संसाधन नहीं हैं वह टेलीफोन से वार्ता कर विद्यार्थी को घर पर वर्कशीट दे सकते हैं।

■ स्कूल में कोरोना प्रोटोकाल का पालन हो रहा है इसकी जांच के लिए शिक्षक व अच्छे विद्यार्थियों का संयुक्त दल तैयार होगा।

Friday, October 9, 2020

यूपी के 1000 राजकीय बालिका स्कूलों में जल्द लगेगी सेनिटरी पैड वेंडिंग मशीन

यूपी के 1000 राजकीय बालिका स्कूलों में जल्द लगेगी सेनिटरी पैड वेंडिंग मशीन

 
2020-21 शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के एक हजार राजकीय बालिका हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेजों में सेनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इंसीनरेटर लगाए जाएंगे। लड़कियों के स्वास्थ्य, हाईजीन एवं साफ-सफाई के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कुल तीन करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। प्रत्येक विद्यालय में 30 हजार रुपये की लागत से पैड वेंडिंग और कचरे के निस्तारण के लिए इंसीनरेटर मशीन लगाई जाएगी। विशेषज्ञों की मानें तो 11 से 18 वर्ष की किशोरी अगर महावारी के दौरान साफ़ सफाई का ध्यान रखती है तो वह कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं और होने वाले संक्रमण से बच सकती है। 


इससे स्कूलों में बालिकाओं के पढ़ाई छोड़ने की संख्या में भी कमी होने की उम्मीद है। महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अधीन इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेस की ओर से यूपी के सभी 75 जिलों में 2018-19 में किए गए अध्ययन के अनुसार 11 से 14 साल उम्र की 5.13 लाख छात्राओं ने स्कूली शिक्षा सिर्फ इसलिए छोड़ दी क्योंकि वहां समुचित साफ-सफाई और माहवारी संबंधित सुविधाएं नहीं थीं। नेशनल हेल्थ मिशन में भी 10 से 19 वर्ष की बालिकाओं में माहवारी संबंधित साफ-सफाई को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।


इनका कहना है
स्कूली शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद, समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत एक हजार स्कूलों में सेनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इंसीनरेटर स्थापित करने के लिए तीन करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। प्रत्येक स्कूल को 30 हजार रुपये मिलेंगे


प्रयागराज में इन स्कूलों में लगेगी मशीन
जिले में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हंडिया, जसरा, मुंगारी रामपुर, नारीबारी, सिविल लाइंस, ओल्ड कटरा, फाफामऊ, शंकरगढ़, फूलपुर, राजकीय बालिका हाईस्कूल गोहरी, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेरी मांडा, पिपरांव समेत 23 विद्यालयों में मशीन लगेगी।

Thursday, October 8, 2020

निजी स्कूल जवाबदेही से रहे बच, बच्चों में कोरोना संक्रमण होने पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं

निजी स्कूल जवाबदेही से रहे बच, बच्चों में कोरोना संक्रमण होने पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं

 
कोरोना काल में स्कूल खोलने के मुद्दे पर अभिभावकों में भी एक राय नहीं बन सकी है। निजी स्कूलों के छात्रों के 40 प्रतिशत अभिभावकों में इसकी सहमति बनती दिख रही है।


वहीं, सरकारी स्कूलों के छात्रों के महज 15 फीसदी अभिभावक ही सहमति देते दिख रहे हैं। उधर, अब कई स्कूल 15 अक्तूबर के बजाय दो नवंबर से खोले जाने को लेकर तैयारी कर रहे हैं।

 
राजधानी में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर शुरुआती रुझान मिलने लगे हैं। स्कूलों ने व्हाट्सएप मैसेज, गूगल फॉर्म, एप आदि से अभिभावकों से स्कूल खोले जाने को लेकर सहमति मांगी है।

अब धीरे-धीरे अभिभावकों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। फिलहाल निजी स्कूल खोले जाने को लेकर अभिभावकों में ज्यादा सहमति दिख रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के अभिभावक अभी सोच विचार कर रहे हैं।


अनुमान के मुताबिक निजी स्कूल खोलने को लेकर 40 फीसदी अभिभावक तैयार दिख रहे हैं। सरकारी स्कूलों को लेकर यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक ही है।


निजी स्कूलों को लेकर स्थिति
सेंट जोसेफ स्कूल के निदेशक अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनकी चार ब्रांच में स्कूल खोलने की सहमति को लेकर अभिभावकों का आंकड़ा 50 प्रतिशत पार कर गया है। 13 अक्तूबर तक सहमति पत्र मंगवाया है। उस दिन सहमति की गणना होगी। अवध कॉलेजिएट के प्रबंधक सर्वजीत सिंह ने बताया कि स्कूल खोले जाने को लेकर अभिभावक काफी सकारात्मक दिख रहे हैं। 30 प्रतिशत से ज्यादा राजी हैं। यह आंकड़ा 50 प्रतिशत को भी पार कर जाएगा। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्य रिचा खन्ना ने बताया कि स्कूल खोले जाने को लेकर 35 प्रतिशत अभिभावकों ने सहमति दे दी है। रोजाना अभिभावकों के सहमति पत्र आ रहे हैं। साथ ही यह प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है।


सरकारी स्कूलों को लेकर रुझान
अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहेब लाल मिश्रा ने बताया कि अभिभावकों की सहमति महज 15 से 20 प्रतिशत के बीच है। इससे ज्यादा रुझान देखने को नहीं मिले। जीजीआईसी सरोसा भरोसा की प्रवक्ता डॉ वंदना तिवारी ने बताया कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के अभिभावकों को कोरोना व अन्य मुद्दों को लेकर जागरूकता की कमी है। बहुत कम अभिभावक स्कूल खोले जाने को लेकर राजी हैं। धीरे-धीरे स्कूल खुले और व्यवस्थाएं अच्छी होगी तो अभिभावकों के विचार में बदलाव आएगा। राजकीय जुबली इंटर कॉलेज, राजकीय हुसैनाबाद इंटर कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में भी अभिभावकों की सहमति 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। स्कूलों ने कहा कि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि सहमति पत्र पर अभिभावक जवाब दे रहे हैं या छात्र।


कई स्कूल दशहरा बाद खुलने की तैयारी में
कई स्कूल दशहरा के बाद खुलने की तैयारी में हैं। इस महीने अभिभावकों को तैयार करने के बाद दो नवंबर से स्कूल खोलेंगे। पायनियर मांटेसरी इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य शर्मिला सिंह ने बताया कि उनके यहां पर परीक्षाएं होनी हैं। इसके बाद दशहरा अवकाश हो जाएगा। ऐसे में दशहरा की छुट्टियों के बाद ही स्कूल खोलने का मन बनाया गया है। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या रिचा खन्ना ने बताया कि उनका स्कूल भी दशहरा अवकाश के बाद दो नवंबर से खोला जाएगा। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल ने भी दो नवंबर से स्कूल खोले जाने का फैसला लिया है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि अभिभावकों के साथ बैठक करने के बाद दो नवंबर से स्कूल खोला जाएगा।


राजधानी लखनऊ में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है। जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से जवाब-तलब जरूर किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उधर, बजट की कमी सरकारी स्कूलों को खोले जाने में बाधा बन रही है।


जारी शासनादेश के अनुसार, स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। उनकी सहमति पर ही छात्रों को बुलाया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने एक कॉमन सहमति पत्र तैयार किया है। इस पर यह शर्त लिखी है कि यदि बच्चा संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी।


स्कूलों ने अपने सहमति पत्र पर यही शर्त रखी है और अभिभावकों को हस्ताक्षर करने के लिए भेज रहे हैं। इस पर शिक्षा विभाग ने ऐतराज जताया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। पढ़ाई के दौरान यदि कोई छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल से जवाब-तलब किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।

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लखनऊ : अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खुलेंगे, शर्तो के साथ 11 व 12 वीं क्लास को मिली अनुमति।


● शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक में फैसला

● प्रोटोकॉल के पालन व अभिभावकों की अनुमति से ही स्कूल में प्रवेश

● अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खुलेंगे


लखनऊ : स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में कोरोना संक्रमण पर फंसा पेंच

 
स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में कोरोना संक्रमण पर फंसा पेंच
राजधानी में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है।


जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी।


वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से जवाब-तलब जरूर किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उधर, बजट की कमी सरकारी स्कूलों को खोले जाने में बाधा बन रही है।


जारी शासनादेश के अनुसार, स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। उनकी सहमति पर ही छात्रों को बुलाया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने एक कॉमन सहमति पत्र तैयार किया है।


इस पर यह शर्त लिखी है कि यदि बच्चा संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। स्कूलों ने अपने सहमति पत्र पर यही शर्त रखी है और अभिभावकों को हस्ताक्षर करने के लिए भेज रहे हैं।
इस पर शिक्षा विभाग ने ऐतराज है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है।


पढ़ाई के दौरान यदि कोई छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल से जवाब-तलब किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। यह पता लगाया जाएगा कि कहीं स्कूल में तो संक्रमण नहीं फैला है।
साथ ही स्कूल में वायरस की रोकथाम के लिए की गई व्यवस्था जांची जाएगी। स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सुरक्षित रखें। इसमें कोताही पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।


स्कूल संगठन अभी भी शर्त पर अड़ा
शिक्षा विभाग के द्वारा रुख साफ किए जाने के बावजूद निजी स्कूल संगठन शर्त पर अड़ा है। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिलाधिकारी की बैठक में सारे नियम साफ कर दिए गए हैं। क्या करना है क्या नहीं करना है, इसके दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई स्कूल कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते करने में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन पालन के बावजूद कार्रवाई की जाएगी तो गलत होगा। बताया कि स्कूलों ने एसओपी में साफ निर्देश दिया है कि अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उनकी जरा सी भी तबीयत खराब हो तो दवाई देकर स्कूल न भेजें। जब पूरी तरह से स्वस्थ और संतुष्ट हो जाएं तभी स्कूल भेजें। छात्र यदि पॉजिटिव होता है तो किस आधार पर शिक्षा विभाग यह आरोप लगा सकता है कि संक्रमण स्कूल ने ही फैलाया होगा। इस तरह का आरोप निराधार होगा। अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने संगठन द्वारा बनाई गई एसओपी और सहमति पत्र शासन और जिलाधिकारी के सामने रखा है। इस पर कोई विवाद नहीं है।


सरकारी स्कूलों में बजट ने लगाया अड़ंगा
स्कूल खोले जाने को लेकर सरकारी स्कूलों में अलग समस्या हो गई है। वे कोविड प्रोटोकॉल का पालन में आ रहे खर्चे को लेकर परेशान हैं। स्कूल यह खर्चा उठाने को तैयार नहीं है। वे सरकार से इसके लिए ग्रांट की मांग कर रहे हैं। जिले में 51 राजकीय और 101 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। समय-समय पर कक्षाओं व परिसर का सैनिटाइजेशन, छात्रों व स्टाफ के लिए हर वक्त सैनिटाइजर उपलब्ध रखना, अतिरिक्त थर्मल स्कैनर व ऑक्सीमीटर खरीदना और मास्क उपलब्ध कराना आदि का खर्च स्कूल प्रशासन वहन करने को तैयार नहीं। जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल में व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन का होगा। इसे आधार बनाकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि अभी परिस्थितियां अच्छी नहीं है। स्कूल नहीं खोला जाना चाहिए। छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रत्येक स्कूल में रोजाना 800 से 1000 रुपये का होने वाला खर्चा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि संगठन सरकार से इसके लिए अतिरिक्त ग्रांट की मांग करती है।


अभिभावक के बजाय बच्चे भेज रहे सहमति पत्र
कई निजी स्कूल अभिभावकों से सहमति गूगल फॉर्म पर मांग रही हैं। गूगल फॉर्म पर अभिभावकों को हां और न में जवाब देना है। यहां तक कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जो सर्वे कराया जा रहा है वह भी गूगल फॉर्म पर ही है। विद्यालय खुलने पर अभिभावकों को लिखित में सहमति पत्र छात्र के हाथ भिजवाना पड़ेगा। इसमें कई स्कूलों में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। कई स्कूल प्रशासन ने बताया कि छात्र खुद ही गूगल फॉर्म पर स्कूल आने के लिए न का विकल्प भर कर भेज दे रहे हैं। अभिभावकों से बातचीत पर गड़बड़ी की पोल खुलने लगी है। स्कूल प्रशासन अब अभिभावकों के साथ मीटिंग कर सहमति लेंगे।


राजधानी में बच्चों के अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खोले जाएंगे। यह फैसला जिला प्रशासन ने बुधवार को स्कूल प्रबंधकों व अभिभावक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद लिया है। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने साफ किया कि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। उन्होंने इसे प्राथमिकता देने को कहा।


 डीएम ने बताया कि प्रथम चरण में कक्षा 10 व 12, द्वितीय चरण में कक्षा 9 व 11 और तृतीय चरण में फीड बैक आने के बाद छोटे बच्चों के स्कूल खोलने पर निर्णय लिया जायेगा। डीएम ने कहा कि हर स्कूल में एक मेडिकल रूम बनाया जाए। इसमें दो बेड हो। चिकित्सीय सुविधा के साथ जानकारी रखने वाला व्यक्ति उपस्थित रहे।


 LUCKNOW: प्रशासन की हरी झंडी मिलने के साथ ही 15 अक्टूबर से राजधानी में स्कूल खोलने को लेकर बना असमंजस समाप्त हो गया। बुधवार को स्कूल प्रबंधकों और शिक्षा विभाग की बैठक के बाद प्रशासन ने शर्तो के साथ अनुमति प्रदान कर दी। फिलहाल नौ से बारह तक की कक्षाओं को ही कड़ी शतरें के साथ ही चलाने की अनुमति दी गई है। पहले चरण में कक्षा 11 और 12 तथा द्वितीय चरण में कक्षा नौ और 10 के विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों को चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।


कोरोना के चलते बीते कई महीनों से स्कूल बंद हैं और बच्चे ऑनलाइन क्लास के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल खोलने की घोषणा के बाद भी राजधानी में कई स्कूल असमंजस में थे। बच्चों की सुरक्षा को फिक्रमंद स्कूल प्रबंधक स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। बुधवार को डीएम के साथ विद्यालय प्रबंधकों एवं अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों की बैठक में शतरे के साथ स्कूल खुलने पर सहमति बनी। स्कूलों के सुरक्षा इंतजामों से संतुष्ट होकर डीएम ने हरी झंडी दिखा दी।


बच्चों की सुरक्षा अहम

डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय खोलकर बच्चों को बुलाए जाने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल से संबंधित जो गाइडलाइन शासन द्वारा जारी की गई है उसका पूरी तरह से पालन कराया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम है। सभी राजकीय, एडेड और निजी माध्यमिक विद्यालयों को शासन की गाइडलाइन जारी कर दी गई है। विद्यालयों के कक्ष, जहां बच्चे बैठेंगे वहां उसका रोजाना सैनिटाइज करना होगा। बिना मास्क के किसी भी बच्चे को विद्यालय के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।


बच्चों को स्कूल भेजने की पक्ष में नहीं हैं अभिभावक
कई अभिभावक संगठनों की ओर से अभी स्कूल न शुरू किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। इन संगठनों की मांग है कि जब तक वैक्सीन न आ जाए, बच्चों के जीवन को खतरे में न डाला जाए।

अभी स्थितियां अच्छी नहीं है। बच्चों की जान को जोखिम में डालना ठीक नहीं होगा। फिलहाल, स्कूल न खोले जाएं।
राकेश सिंह, अध्यक्ष, लखनऊ अभिभावक विचार परिषद

निजी स्कूल प्रबंधन सिर्फ अपना लाभ देख रहे हैं। उन्हें बच्चों की चिंता नहीं है। अभिभावकों पर सहमति देने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है।               
प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष, अभिभावक कल्याण संघ

इन प्रबंधनों ने स्कूल खोलने से किया इनकार  
एलपीएस : निदेशिका रश्मि पाठक ने बताया कि उन्होंने अभिभावकों से सहमति मांगी थी। बहुमत में अभिभावकों ने असहमति जताई है। इस वजह से ही फिलहाल स्कूल न शुरू करने का फैसला लिया है।

जीडी गोयनका : चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि मौजूदा संक्रमण के मामलों को देखते हुए अभी स्कूल नहीं शुरू करने का निर्णय लिया है। 

स्कूल शुरू करने के पक्ष में प्रबंधनों का तर्क
15 अक्तूबर से स्कूल शुरू करने पर निजी स्कूलों के संगठनों का कहना है कि परीक्षा शुरू होने जा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पर शासन के निर्देशों के हिसाब से ही स्कूल शुरू किए जाएंगे।

सैनिटाइजेशन से लेकर थर्मल स्कैनिंग तक की व्यवस्था है। शासन के निर्देश का पालन करते हुए ही स्कूल शुरू किए जाएंगे। लेकिन, प्रबंधन जिम्मेदारी नहीं लेगा।
अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

बच्चों की सुरक्षा के लिये सभी सावधानियां बरती जा रही हैं। ऐसे में स्कूल शुरू करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
आनंद द्विवेदी, अध्यक्ष, स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन

Wednesday, October 7, 2020

15 अक्तूबर से स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं ज्यादातर अभिभावक

15 अक्तूबर से स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं ज्यादातर अभिभावक

 
शहर के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधनों की आपत्ति के बाद अब अभिभावकों की ओर से भी स्कूल न शुरू किए जाने की आवाज उठने लगी है। अभिभावकों के एक संगठन लखनऊ अभिवावक विचार परिषद ने आपत्ति जताई है। 


संगठन का कहना है कि कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रही है। इसकी वैक्सीन अभी तक नहीं आई है। इन हालातों में बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं होगा। संगठन के राकेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश का शिक्षा विभाग , निजी स्कूल संचालक और प्रदेश के मुख्यमंत्री कोरोना महामारी से बच्चे के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने के लिये तैयार नहीं है तो ‌‌वह अपने बच्चे के जीवन को संकट में नहीं डालेंगे। 

संगठन ने मांग उठाई है कि कोरोना संक्रमण में इलाज के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 15 अक्तूबर से स्कूल खोलने का निर्णय वापस लिया जाए। साथ ही, शिक्षा सत्र 2020-21 को शून्य घोषित किया जाए।


एडेड स्कूलों की ओर से भी आपत्ति : राजधानी के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधनों की ओर से भी आपत्तियां जताई गई हैं। स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि सैनिटाइजेशन, मास्क जैसी व्यवस्थाओं के लिए स्कूलों में कोई बजट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रबंधन अपने सीमित संस्थानों से यहां सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है। उन्होंने सैनिटाइजेशन समेत अन्य व्यवस्थाएं किए जाने के बाद ही स्कूल शुरू करने की मांग उठाई गई है।

Tuesday, October 6, 2020

School Reopening : दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु… इन राज्‍यों में 15 अक्‍टूबर से नहीं खुलेंगे स्‍कूल, केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बावजूद कई राज्‍य स्‍कूल खोलने को तैयार नहीं

School Reopening : दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, तमिलनाडु… इन राज्‍यों में 15 अक्‍टूबर से नहीं खुलेंगे स्‍कूल

केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बावजूद कई राज्‍य स्‍कूल खोलने को तैयार नहीं हैं। 15 अक्‍टूबर के बाद स्‍कूल खोलने का फैसला कुछ ही राज्‍य सरकारों ने लिया है।
    

रीओपनिंग के तहत केंद्र सरकार ने 15 अक्‍टूबर से सभी स्‍कूल खोलने की अनुमति दे दी है। इसके बावजूद, राज्‍य अभी हिचक रहे हैं। कोरोना वारयस महामारी के प्रकोप को देखते हुए पैरेंट्स भी बच्‍चों को फिलहाल बाहर नहीं भेजना चाहते। पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश, बिहार, उत्‍तराखंड जैसे राज्‍यों में स्‍कूल खुल जाएंगे। चूंकि सरकार ऑनलाइन मोड से पढ़ाई को प्राथमिकता दे रही है, कई राज्‍य इस वजह से भी रिस्‍क लेने से बच रहे हैं। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने स्‍कूलों के लिए स्‍टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। मगर स्‍कूल कब से खोले जाएं, वह तारीख राज्‍य सरकारें तय करेंगी।


इन राज्‍यों में 31 अक्‍टूबर तक स्‍कूल बंद

राजधानी दिल्‍ली के सभी स्‍कूल 31 अक्‍टूबर तक बंद रहेंगे। इसके अलावा महाराष्‍ट्र, छत्‍तीसगढ़, असम, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश ने भी तब तक स्‍कूल बंद रखने का फैसला किया है। इनमें से कई राज्‍यों में कोरोना संक्रमण की दर अब भी चिंताजनक है, इसलिए स्‍कूल खोलकर वह बेवजह मुसीबत नहीं मोल लेना चाहते। कई राज्‍यों ने पैरेंट्स और स्‍कूलों से फीडबैक भी लिया, जिसमें यही निकला कि स्‍कूल फिलहाल बंद रखे जाने चाहिए।


यहां 31 के बाद भी स्‍कूल खुलना मुश्किल

पश्चिम बंगाल सरकार ने साफ किया है कि वह 14 नवंबर से पहले स्‍कूल खोलने पर कोई फैसला नहीं करेगी। मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 14 नवंबर को काली पूजा के बाद स्‍कूल खोलने पर विचार होगा। राज्‍य में 16 मार्च से ही स्‍कूल बंद हैं। इसके अलावा, दिल्‍ली में भी नवंबर में स्‍कूल खुलेंगे या नहीं, यह कोविड की स्थिति पर निर्भर करेगा। यहां पैरेंट्स की राय एकतरफा है कि स्‍कूल नहीं खुलने चाहिए।


इन राज्‍यों में खुल गए या खुलने वाले हैं स्‍कूल

केंद्र ने पहली बार अनलॉक-4 के तहत 21 सितंबर से कक्षा 9 से 12 तक के स्‍कूल खोलने की छूट दी थी। इसके बाद रीओपनिंग की गाइडलाइंस में 15 अक्‍टूबर से सभी तरह के स्‍कूल खोलने की अनुमति दे दी गई। 21 सितंबर से पंजाब, हरियाणा, जम्‍मू-कश्‍मीर, मेघालय जैसे गिने-चुने राज्‍यों में ही क्‍लासेज शुरू हुईं। जबकि 15 अक्‍टूबर से कई राज्‍य स्‍कूल खोलने की तैयारी में हैं। इनमें बिहार, उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश जैसे राज्‍य शामिल हैं।


शिक्षा मंत्रालय ने जारी कर दी हैं गाइडलाइंस

शिक्षा मंत्रालय ने स्‍कूल और हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस (HEIs) खोलने से जुड़ी गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। राज्‍य इसी के आधार पर अपनी गाइडलाइंस बनाएंगे। राज्‍य सरकारें स्‍कूल/कोचिंग मैनेजमेंट से बातचीत के बाद इन शर्तों को ध्‍यान में रखते हुए फैसला कर सकती हैं:

● ऑनलाइन/डिस्‍टेंस लर्निंग को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाएगा।
● अगर स्‍टूडेंट्स ऑनलाइन क्‍लास अटेंड करना चाहते हैं तो उन्‍हें इसकी इजाजत दी जाए।
● स्‍टूडेंट्स केवल पैरेंट्स की लिखित अनुमति के बाद ही स्‍कूल/कोचिंग आ सकते हैं। उनपर अटेंडेंस का कोई दबाव न डाला जाए।
● स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा के लिए शिक्षा विभाग की SOP के आधार पर राज्‍य अपनी SOP तैयार करेंगे।
● जो भी स्‍कूल खुलेंगे, उन्‍हें अनिवार्य रूप से राज्‍य के शिक्षा विभागों की SOPs का पालन करना होगा।


कॉलेज और हायर एजुकेशन के इंस्टिट्यूट कब खुलेंगे, इसपर फैसला उच्‍च शिक्षा विभाग करेगा। इसके लिए गृह मंत्रालय से भी बात की जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस इस प्रकार हैं:

ऑनलाइन/डिस्‍टेंस लर्निंग को प्राथमिकता और बढ़ावा।

फिलहाल केवल रिसर्च स्‍कॉलर्स (Ph.D) और पीजी के वो स्‍टूडेंट्स जिन्‍हे लैब में काम करना पड़ता है, उनके लिए ही संस्‍थान खुलेंगे। इसमें भी केंद्र से सहायता पाने वाले संस्‍थानों में, उसका हेड तय करेगा कि लैब वर्क की जरूरत है या नहीं। राज्‍यों की यूनिवर्सिटीज या प्राइवेट यूनिवर्सिटीज अपने यहां की स्‍थानीय गाइडलाइंस के हिसाब से खुल सकती हैं।

Sunday, October 4, 2020

75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय

75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय

 
गोरखपुर : कोरोना के बीच 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने के निर्देश के बाद भले ही स्कूल प्रबंधन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन अभिभावक अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कराने के लिए कराए गए सर्वे में महज 25 फीसद अभिभावक ही अपने बच्चों को भेजने के पक्ष में हैं। इन अभिभावकों ने लिखित अनुमति भी विद्यालय के प्रधानाचार्यो को दे दी है। सर्वे में 75 फीसद अभिभावक कोरोना के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ मना कर दिया है।


प्रदेश सरकार ने इसके पहले 21 सितंबर से स्कूल खोलने का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में सरकार ने वापस ले लिया। इसी दौरान निदेशक माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर डीआइओएस ने जनपद के माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल खोले जाने को लेकर सर्वे शुरू कराया। लगभग दस दिनों तक चले सर्वे में जिले के सभी 485 माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले दो लाख 45 हजार 384 बच्चों के अभिभावकों से लिखित और मौखिक राय ली गई। इनमें से 61 हजार 524 अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रधानाचार्यों को लिखित रूप में अनुमति दे दी, जबकि अन्य ने स्कूल भेजने से साफतौर से इन्कार कर दिया है। इस दौरान विभाग ने जनपद में कोरोना को लेकर एक लाख 45 हजार 286 (69.20 फीसद) अभिभावकों को जागरूक भी किया।

436 स्कूलों ने पूरी की तैयारी

कोरोना के मद्देनजर स्कूल खोलने को लेकर जिले के 436 माध्यमिक विद्यालयों ने स्वच्छता बनाए रखने व संक्रमण से सतत बचाव की तैयारी पूर्ण कर ली है। स्कूलों में सैनिटाइजेशन व अन्य कार्य किए जा चुके हैं। फिजिकल डिस्टेंसिंग के बीच एक कक्षा में बीस छात्रों को बैठाने की व्यवस्था की गई है।

’>>माध्यमिक विद्यालयों के सर्वे में सामने आई अभिभावकों की राय

’>>सिर्फ 25 फीसद अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की दी लिखित अनुमति

कोरोना संक्रमण के कारण अभी छोटे बच्चों के स्कूल बंद हैं, लेकिन वहां साफ-सफाई और दीवारों पर बच्चों को आकर्षित करने वाले संदेश व चित्र बनाए जाने की कवायद जारी है। शनिवार को अहलदादपुर स्थित प्राइमरी स्कूल की दीवार पर कार्टून उकेरता कलाकार ’ पंकज श्रीवास्तव

सर्वे के लिए ब्लाकवार सक्रिय प्रधानाचार्यों को नोडल अधिकारी बनाया गया था। उन्हीं के नेतृत्व में सर्वे कराया गया। इस दौरान कुछ शिक्षकों ने बच्चों के घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया तो कुछ ने दूरभाष के जरिये अनुमति ली। सर्वे में एकत्र सूचना के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा को भेज दिया गया है। ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, भदौरिया, डीआइओएस

Saturday, October 3, 2020

पंद्रह अक्टूबर के बाद चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे स्कूल और कॉलेज, तय समय पर होंगी परीक्षाएं

पंद्रह अक्टूबर के बाद चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे स्कूल और कॉलेज, तय समय पर होंगी परीक्षाएं। 

 
नई दिल्ली: केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के साथ ही अब 15 अक्टूबर के बाद स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाएंगे। सबसे पहले दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्रओं को बुलाया जाएगा, क्योंकि इनकी बोर्ड परीक्षाओं में अब कुछ ही महीने बचे है। कोरोना संकट के चलते मार्च से ही स्कूल बंद हैं।


हालांकि, स्कूलों के बंद रहने के बाद भी इन बच्चों की आनलाइन पढ़ाई जारी थी, लेकिन स्कूलों का मानना है कि बच्चों को कक्षाओं में सामने बिठाकर पढ़ाए बगैर बेहतर रिजल्ट नहीं मिल सकता है। फिलहाल स्कूलों को खोलने को लेकर केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय जैसे देश के बड़े सरकारी स्कूल संगठनों ने तैयारी शुरू कर दी है। अनलॉक-4 के दिशा-निर्देशों के बाद इन संगठनों ने 21 सितंबर से बच्चों को स्कूल बुलाने की योजना बनाई थी। लेकिनर अभिभावकों की असहमति के चलते योजना परवान नहीं चढ़ी। स्कूलों को पंद्रह अक्टूबर के बाद खोलने की जिस तरह से तैयारी है, उसमें गाइडलाइन को पहले ही जारी करना होगा। जो जानकारी सामने आई है, उसके तहत क्लास में 12 बच्चों को बैठाया जाएगा।


■ खास बातें

● कोरोना संकट के चलते मार्च से बंद हैं स्कूल

● अभिभावक की अनुमति पर ही बुलाए जाएंगे बच्चे

● बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की

● हफ्ते में दो से तीन दिन ही बुलाए जाएंगे हर कक्षा के बच्चे

● बच्चों के लिए मास्क और सैनिटाइजर जरूरी


तय समय पर आयोजित की जाएंगी बोर्ड परीक्षाएं
स्कूल खोलने के साथ ही सीबीएसई के साथ मिलकर शिक्षा मंत्रलय बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में भी जुट गया है। फिलहाल जो योजना है, उसके तहत दसवीं और बारहवीं की सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं हर साल की तरह अगले साल फरवरी और मार्च में होगी। हालांकि इससे पहले प्री-बोर्ड की पहली परीक्षाएं इस साल दिसंबर में ही कराई जाएंगी। योजना पर काम कर रहे अधिकारियों की मानें तो अगला शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो, इसके लिए परीक्षाएं समय पर ही कराई जाएंगी।

प्रयागराज : जिले में 31 अक्टूबर तक नहीं खोले जाएंगे स्कूल

प्रयागराज : जिले में 31 अक्टूबर तक नहीं खोले जाएंगे स्कूल

 
कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जिलेभर के स्कूल 31 अक्तूबर तक बंद रहेंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम संगम सभागार में हुई बैठक में स्कूल पूरी तरह से बंद रखने पर सहमति बनी। कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों के मार्गदर्शन लेने के लिए भी स्कूल नहीं खुलेंगे। अनलॉक-5 की गाइडलाइन को लेकर हुई बैठक में प्रधानाचार्यों ने बताया कि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं है। सेंट जोसेफ कॉलेज के प्रिंसिपल फादर थॉमस कुमार ने बताया कि उन्होंने 324 अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने के संबंध फीडबैक लिया जिसमें महज 7 अभिभावकों ने अपनी सहमति दी है।


साफ है कि अभिभावक अभी बच्चों को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। डीएम ने कहा कि 15 अक्तूबर तक वैसे ही केंद्र सरकार ने बंद रखने को कहा है। उसके बाद दशहरा की छुटि्टयां हो जाएंगी। इसलिए फिलहाल इस महीने स्कूल खोलने का कोई औचित्य नहीं है। अक्तूबर अंत में एक बार फिर प्रधानाचार्यों के साथ बैठक होगी जिसमें नवंबर में स्कूल खोलने पर चर्चा होगी। बैठक में डीआईओएस आरएन विश्वकर्मा और बीएसए संजय कुमार कुशवाहा समेत 70-80 प्रधानाचार्य मौजूद रहे।

राज्य में स्कूल-कॉलेज खोलने का निर्णय 10 अक्तूबर के बाद

राज्य में स्कूल-कॉलेज खोलने का निर्णय 10 अक्तूबर के बाद ही होगा। 

 
प्रदेश में कंटेनमेंट जोन के बाहर स्थित हाई स्कूलों, इंटर कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों को खोलने का निर्णय 10 अक्तूबर के बाद किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि 10 अक्तूबर को कोरोना संक्रमण और शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि 10 अक्तूबर को समीक्षा के बाद स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर खोलने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा की जाएगी। उसके बाद ही इन्हें खोलने के संबंध में कोई फैसला किया जाएगा।


15 के बाद खोले जा सकते हैं कंटेनमेंट जोन के बाहर के स्कूल व कोचिंग सेंटर
सूचना विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि भारत सरकार की ओर से जारी अनलॉक-5 की गाइडलाइन के तहत कंटेनमेंट जोन के बाहर स्कूल और कोचिंग संस्थान 15 अक्तूबर के बाद खोले जा सकेंगे। जिला प्रशासन की ओर से कोरोना संक्रमण की स्थिति का आकलन और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन से बातचीत के बाद ही इन्हें खोलने का निर्णय किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था जारी रहेगी। जिन स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, वहां यदि विद्यार्थी व्यक्तिगत रूप से कक्षाओं में उपस्थित होने के बजाय ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होना चाहेंगे तो उन्हें अनुमति दी जाएगी। शिक्षण संस्थान माता-पिता या अभिभावक की सहमति के बिना विद्यार्थियों की उपस्थिति को अनिवार्य नहीं कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों व उच्च शिक्षा संस्थानों को खोलने के समय का निर्धारण केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सहमति एवं वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए किया जाएगा।