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Tuesday, September 22, 2020

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच?

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, 
आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच? 

 
प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों का सत्र अप्रैल से शुरू होता है। विद्यार्थी स्कूल जाने लगते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मार्च से ही सभी विद्यालय बंद हैं। पाठन-पाठन जैसे-तैसे ऑनलाइन संचालित करने की कोशिश हो रही है। आधा सत्र बीत जाने के बाद भी विद्यालय खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति है।


बोले डीआइओएस, शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है

हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खोलने का निर्देश हो चुका है। इस मामले में राज्य अपने यहां की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि अभी शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है। समीक्षा के बाद जो आदेश आएगा उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उसमें भी बिना अभिभावक की अनुमति के कोई भी विद्यार्थी स्कूल नहीं आ सकेंगे।


स्‍कूल प्रबंधन का कहना है कि निर्देश मिलने पर खुलेंगे स्‍कूल

इस संबंध में स्कूलों का कहना है कि उनकी पूरी तैयारी है। जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार स्कूल खोले जाएंगे। संक्रमण से बचाव के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि 22 से 30 सितंबर तक कम्पार्टमेंट परीक्षा कराई जाएगी। इस बीच विद्यालय नहीं खुलेगा। उसके बाद यदि निर्देश मिलेगा तो बोर्ड की परीक्षा वाले बच्चों को बुलाया जाएगा। खासकर प्रायोगिक कक्षाओं के लिए। बाकी विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई करते रहेंगे।


इन स्‍कूलों की प्रधानाचार्यों का यह कहना है

श्री महाप्रभु पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य रविंद्र बिरदी ने भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं चलती रहेंगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाया जाएगा। केपी गर्ल्‍स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अमिता सक्सेना ने बताया कि निर्देश आने पर स्कूल खुलेंगे। कर्नलगंज इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में शिक्षक नियमित आ रहे हैं। शासन का जैसा निर्देश मिलेगा उसके अनुसार कक्षाएं चलाई जाएंगी।


आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच

शहर में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। इसे लेकर अभिभावक चिंतित हैं। वे अपने बच्चों को अभी स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई जैसे चल रही है, वही पर्याप्त है। मेंहदौरी कालोनी की कविता कहती हैं कि मेरा बेटा कक्षा 11वीं में पढ़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। अभी संक्रमण को देखते हुए हम बच्चे को स्कूल नहीं भेज सकते। घर में ही रहना सुरक्षित है। इसी प्रकार नैनी की रहने वाली सुषमा पांडेय बेटे की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। हालांकि वह उतनी प्रभावी नहीं है लेकिन कोरोना वायरस का खतरा भी नहीं मोल ले सकते। अभी घर में ही रहना ठीक है। जल्दबाजी कर के मुसीबत नहीं मोल लेंगे।

Monday, September 21, 2020

देश के तीन राज्यों में आज से स्कूल खुलेंगे, दिल्ली, यूपी, समेत कई राज्य अभी स्कूल खोलने को राजी नहीं

देश के तीन राज्यों में आज से स्कूल खुलेंगे,  दिल्ली, यूपी, समेत कई राज्य अभी स्कूल खोलने को राजी नहीं


केंद्र की इजाजत के बाद 21 सितंबर से 9वीं से 2 वीं तक के स्कूल खोलने को लेकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा ने सहमति दे दी है। पांच माह से भी अधिक समय के बाद सोमवार से इन प्रदेशों में आंशिक रूप से स्कूल खुलेंगे। 


हालांकि, कोरोना के प्रसार को देखते हुए कई राज्य स्कूल खोलने के लिए फिलहाल राजी नहीं है। दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल अभी स्कूल खोलने पर राजी नहीं हैं।

यह ध्यान रखना होगा

● सफाई और सामाजिक दूरी का पालन करना होगा।
● छात्र कॉपी, पेंसिल आदि शेयर नहीं कर पाएंगे।
● कक्षा में छह फीट की दूरी पर मार्किंग करनी होगी। 
● 50 फीसदी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ स्कूल आ सकेगा।
● बाहर खुले में भी पढ़ाई हो सकेगी।
● कक्षा, लेबोरेटरी और वॉशरूम सैनिटाइज करवाना होगा ।
● ऑक्सीजन लेवल जांचने के लिए ऑक्सीमीटर अनिवार्य है।
● शिक्षक और कर्मचारियों को फेस मास्क और सैनिटाइजर स्कूल से मिलेगा।

इनको नहीं मिलेगा प्रवेश

● क्वारंटाइन जोन से छात्र, शिक्षक या कर्मचारी स्कूल नहीं आ सकेंगे।
● बीमार छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा 



उत्तर प्रदेश : 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे स्कूल

उत्तर प्रदेश : 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे स्कूल

बंद रहेंगे माध्यमिक तक के स्कूल, आइटीआइ में कक्षाएं आज से

उत्तर प्रदेश में स्कूल 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में 50 फीसदी अध्यापक बुलाए जा सकेंगे। 


केन्द्रीय गाइडलाइन के मुताबिक कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल-कॉलेज 21 सितम्बर से खोले जाने थे। मगर राज्य सरकार ने फैसला किया है कि यूपी के हालात अभी ऐसे नहीं है कि स्कूल-कॉलेज खोले जाएं। प्रदेश में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूल खोलना सम्भव नहीं है। इसलिए यह फैसला लेना पड़ा है।


बंद रहेंगे माध्यमिक तक के स्कूल, आइटीआइ में कक्षाएं आज से

 
लखनऊ : यूपी के माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं सोमवार से नहीं लगेंगी। वह पहले की तरह अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही करेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सोमवार से व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू होगा। कौशल विकास केंद्रों में भी प्रशिक्षण शुरू होगा।

आइटीआइ में दो वर्षीय कोर्स के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की सुबह नौ बजे से और एक वर्षीय कोर्स की कक्षाएं सुबह 10 बजे से शुरू होंगी। वहीं दूसरी ओर दो वर्षीय कोर्स के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं एक अक्टूबर से शुरू होंगी। स्कूलों को खोलने का निर्णय 30 सितंबर के बाद स्थिति की समीक्षा के अनुसार लिया जाएगा। स्कूलों को तब तक अभिभावकों से सहमति पत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं कि आगे स्कूल खुलने की स्थिति में वह अपने बच्चों को भेजेंगे या नहीं।


विवि व डिग्री कॉलेजों में भी अभी ऑफलाइन पढ़ाई नहीं होगी। स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए कैंपस बंद रहेंगे। शोध छात्रों को अनुमति देने पर उच्च शिक्षा विभाग विचार कर रहा है।

इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलीटेक्निक भी नहीं खुलेंगे

इंजीनियरिंग कॉलेजों व पॉलीटेक्निक संस्थानों में भी अभी कक्षाएं शुरू नहीं की जाएंगी। सिर्फ ऑनलाइन क्लासेज ही चलेंगी। पॉलीटेक्निक संस्थानों में 25 सितंबर से परीक्षाएं शुरू होंगी, जिसकी तैयारियां की जा रही हैं।

Sunday, September 13, 2020

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की फीस माफ करने की बसपा प्रमुख मायावती ने उठाई मांग                 


बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने व्यापक जनहित में केन्द्र व राज्य सरकारों से अपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी तथा प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की स्कूल फीस माफ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन से संक्रमित देश में आर्थिक मंदी से भीषण बेरोजगारी एवं जीवन में अभूतपूर्व संकट झेल रहे करोड़ों लोगों के सामने बच्चों के फीस जमा करने की समस्या बेहद गंभीर है। जिसके कारण लोगों को कई जगह अब धरना-प्रदर्शन आदि के रूप में सामने आना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों को पुलिस के डण्डे खाने पड़ रहे हैं, जो अति-दु:खद है। 


मायावती ने शनिवार सुबह ट्विट किया-



उन्होंने कहा कि ऐसे 'एक्ट आफ गॉड' के समय में संवैधानिक मंशा के अनुरूप सरकार को कल्याणकारी राज्य होने की भूमिका खास तौर से काफी बढ़ जाती है। केन्द्र व राज्य सरकारेंअपने शाही खर्चे में कटौती करके सरकारी व प्राइवेट स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति करें अथार्त व्यापक जनहित में बच्चों की स्कूल फीस माफ करें।

Wednesday, September 9, 2020

स्कूल कैंटीन, परिसर के आसपास जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध

स्कूल कैंटीन, परिसर के आसपास जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध

 
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने स्कूल कैंटीन और इसके परिसर के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री और इसके विज्ञापन पर प्रतिबंध लगा दिया है। 


एफएसएसएआइ ने एक बयान जारी कर कहा कि इस सिलसिले में विभिन्न भागीदारों से मिली प्रतिक्रियाओं पर विचार-विमर्श करने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2020 को अधिसूचित कर दिया गया है। इस नियम को लागू करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाएगा।


 इस बीच एफएसएसएआइ ने कहा है कि वह राज्य खाद्य विभाग को निर्देश देगा कि वह स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित और संतुलित आहार का दिशा-निर्देश तैयार करे। नियम के अनुसार, स्कूली बच्चों को संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी या सोडियम मिले खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जा सकेंगे।

Monday, September 7, 2020

Whatsapp वायरल दावे की जाने सच्चाई : क्या वास्तव में 21 सितंबर से स्कूल खोले जाएंगे?

Whatsapp वायरल दावे की जाने सच्चाई : क्या वास्तव में 21 सितंबर से स्कूल खोले जाएंगे?  


दावा : एक #WhatsApp फॉरवर्ड मे शिक्षा मंत्री के हवाले से दावा किया जा रहा है कि 21 सितम्बर से चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोले जाएंगे।


#PIBFactCheck:शिक्षा मंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।#Unlock4Guidelines के अनुसार 9वी-12वी कक्षा के छात्र शिक्षकों से परामर्श के लिए स्कूल जा सकते है https://t.co/VxEAavN5Hb


Friday, September 4, 2020

देश के ज्यादातर राज्य सितंबर में स्कूल खोलने पर संशय में

देश के ज्यादातर राज्य सितंबर में स्कूल खोलने पर संशय में 


भारत में 9 और 12वीं के छात्रों को स्कूल खोले जाने का फैसला लिया गया है। ऐसे में कई राज्य स्कूल खोलने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर राज्य सितंबर में स्कूल खोलने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं।


Saturday, August 29, 2020

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प


लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प अब राज्य बित्त आयोग के बजट से किया जाएगा। परिषदीय स्कूलों में पानी, बिजली, फर्नीचर, शौचालय, चारदीयारी, कक्षा कक्ष निर्माण और रंग-रोगन आदि कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए थे। ग्राम पंचायतों को अपने बजट से यह काम करवाना था। 


प्रदेश के 80 हजार स्कूलों में यह काम शुरू भी हो गया था, लेकिन उसके बाद ग्राम प्रधान अपने लिए चुनावी वर्ष होने के कारण स्कूलों के कायाकल्प की जगह सामुदायिक भवन और सामुदायिक शौचालय बनवाने को प्राथमिकता देने लगे। कई ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने स्कूल परिसर में ही शौचालय व सामुदायिक भवन जनवाना शुरू कर दिया। बेसिक शिक्षा विभाग को आदेश जारी कर इस पर रोक लगवानी पड़ी। 


विभाग के अधिकारियों ने गांवों में स्कूलों के कायाकल्प का काम प्रभावित होने की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बताया कि अब राज्य वित्त आयोग और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड सहित अन्य मदों के बजट से स्कूलों का कायाकल्प कराया जाएगा।

Saturday, August 22, 2020

स्कूल परिसर में नहीं बनेंगे सामुदायिक शौचालय

स्कूल परिसर में नहीं बनेंगे सामुदायिक शौचालय

 
प्रयागराज : ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कई स्कूल परिसरों में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। इन शौचालयों का प्रयोग स्कूल के विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी ही कर सकेंगे। किसी भी हाल में बाहर का व्यक्ति इनका प्रयोग नहीं करेगा। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की तरफ से सभी जिलाधिकारियों और बेसिक शिक्षाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि कई जनपदों में विद्यालय परिसर में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की जानकारी मिली है। यह आपत्तिजनक है।


किसी भी विद्यालय परिसर में सिर्फ विद्यार्थियों, शिक्षकों और वहां के कर्मचारियों के लिए शौचालय का निर्माण कराया जा सकता है। पूरे गांव के प्रयोग के लिए बनने वाले सामुदायिक शौचालयों से विद्यार्थियों व शिक्षकों को असुविधा होगी। विद्यालय बंद होने के बाद गांव के लोग भी उसका प्रयोग नहीं कर सकेंगे। अत: किसी भी हाल में परिषदीय विद्यालय परिसर में उपलब्ध जमीन का प्रयोग सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए न किया जाए। इस संबंध में बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुशवाहा ने बताया कि जिलाधिकारी की तरफ से नगर आयुक्त, जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र जारी कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि शासन के आदेश का अनुपालन करते हुए किसी भी हालत में परिषदीय विद्यालयों में सार्वजनिक शौचालय न बनवाए जाएं।

Thursday, August 20, 2020

कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षकों को होम आइसोलेशसन की दशा में विद्यालय 15 दिन बन्द करने की मांग

कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षकों को होम आइसोलेशसन की दशा में विद्यालय 15 दिन बन्द करने की  मांग


लखनऊ।  प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने किसी भी शिक्षक व शिक्षिका के कोरोना संक्रामित पाए जाने के बाद विद्यालय 15 दिनों तक बंद किए जाने की मांग की है। गुरूवार को चिनहट ब्लॉक के गडरियन का पुरवा विद्यालय में शिक्षिका कोरोना पाजिटिव पाई गई है।


 एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने विद्यालय को 15 दिन के लिए बन्द करने की मांग की है। एसोसिएशन के मुताबिक पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक व कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव आने के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश चन्द्र द्विवेदी ने महानिदेशक को पत्र लिखा था। इसमें किसी स्कूल में कोई कोरोना पॉजिटिव जाता है और स्कूल के अन्य शिक्षकों को होम आइसोलेशन में भेजने के निर्देश दिए गए थे। इस आइसोलेशन की अवधि को वर्क फ्रॉम होम मानना जाएगा। 



इससे पहले माल व मोहनलालगंज ब्लाक में भी शिक्षक कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। इसके बाद भी खंड शिक्षा अधिकारी उन विद्यालयों के शिक्षकों को काम पर बुला रहे हैं। एसोसिएशन ने स्कूल को 72 घंटे नहीं बल्की 15 दिन बंद करने की मांग की और साथ ही पूरे स्कूल को सैनिटाइज करने की मांग की है।

परिषदीय स्कूलों में हर महीने करानी होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां, सृजनात्मकता जगाने की कवायद

परिषदीय स्कूलों में हर महीने करानी होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां, सृजनात्मकता जगाने की कवायद

 
प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों में छात्र छात्रओं को स्तरीय शिक्षा देने के साथ ही उनकी सृजनात्मकता जगाने की भी कवायद चल रही है। इसके लिए अब नियमित रूप से प्रत्येक माह साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। विद्यालय में अनिवार्य रूप से वाद विवाद प्रतियोगिता, कविता पाठ, भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन, कहानी लेखन, अंत्याक्षरी, समूह गान, देशगान, मूक अभिनय, सम सामयिक विषयों पर चर्चा भी करानी होगी।


जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की तरफ से खंड शिक्षाधिकारियों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि बच्चों के लिए स्कूलों में पोस्टर प्रतियोगिता, चार्ट बनाने की प्रतियोगिता, मॉडल बनाने, रंगोली तैयार करने, ग्रीटिंग कार्ड बनाने, मिट्टी के खिलौने, वाल हैं¨गग, कागज के लिफाफे बनाने आदि का भी अभ्यास कराया जाए। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता विकसित होगी। उन्हें प्रेरित करें कि स्कूल से बचे समय में वे स्वयं ऐसी गतिविधियों में शामिल होकर कौशल विकास करें। हालांकि इन दिनों कक्षाएं ऑनलाइन चल रही हैं इसलिए सृजनात्मक क्षमता बढ़ाने की गतिविधियों को भी ऑनलाइन माध्यम में शामिल करने को कहा गया है। इन सब के साथ ही प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय विकसित करने के भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।


कहा गया है कि बच्चों को पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया जाए। शिक्षक पुस्तकालय में चार्ट आदि भी लगाएं जिसमें बताया जाए कि वहां रखी किताबों का प्रयोग किस तरह करना है। इसी क्रम में बच्चों द्वारा सृजित साहित्य जैसे कहानी, कविताओं आदि को अनिवार्य रूप से पुस्तकालय में रखने की व्यवस्था की जाए।

Tuesday, August 11, 2020

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता, बीएसए ने अंतिम अवसर देते हुए जारी की चेतावनी

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता।

मान्यता प्राप्त जिन विद्यालयों ने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी। इन विद्यालयों को अब अंतिम अवसर देते हुए शीघ्र ही प्रपत्र अपलोड करने की बेसिक शिक्षा विभाग ने चेतावनी दे दी है। अन्यथा उन पर मान्यता प्रत्याहरण कार्रवाई की जाएगी। जिले में ऐसे करीब आधा सैकड़ा विद्यालय हैं जिन्होंने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं।



बीएसए शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीएसए, डीआईओएस, समाज कल्याण विभाग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन संचालित परिषदीय शासकीय सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों को कई बार डाटा कैप्चर फार्मेट भरने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। इसके बाद भी इस कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। अभी भी जिले 50 विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने यह विवरण अपलोड नहीं किया है। अंतिम चेतावनी जारी करते हुए इन विद्यालयों से कहा गया है कि शीघ्र ही डीसीएफ भर दें। अन्यथा की स्थिति में उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।





इसके लिए विद्यालयों से बीआरसी से संपर्क करके यह प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के लिए कहा गया है। बीएसए ने साफ कहा है कि कई बार कहने के बाद भी यह कार्य नहीं किया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और कार्रवाई की जाएगी।


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कोरोना के चलते स्कूल खोलने के लिए सरकार की ओर से नहीं तय की गई कोई समयसीमा

कोरोना के चलते स्कूल खोलने के लिए सरकार की ओर से नहीं तय की गई कोई समयसीमा



नई दिल्ली । कोरोना संकट के चलते देश के अधिकतर स्कूल बंद हैं। स्कूल खोलने के लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। समाचार एजेंसी एएनआइ के सरकारी सूत्रों के अनुसार स्कूलों के खोले जाने का फैसला कोरोना की स्थिति पर ही निर्भर करेगा। अभी तक केवल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने ही स्कूल खोलने का इरादा जताया है।


देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। इसके चलते सरकार अभी स्कूलों के खोले जाने पर निर्णय नहीं ले पा रही है। कोरोना और लॉकडाउन के चलते देश के अधिकतर राज्यों के स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। 


देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले

भारत में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के (COVID-19)मामलों के बीच देश में संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या 15 लाख को पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार 10 राज्यों से 80 फीसद मामले सामने आ रहे हैं। इसके द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में  62,064 मामले सामने आए हैं 1,007 लोगों की मौत हो गई है। वहीं इस दौरान  4,77,023 सैंपल टेस्ट हुए। लगातार चौथे दिन कोरोना के 60 हजार से ज्यादा मामले सामने आ गए हैं।

Monday, August 10, 2020

प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान

प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान 


प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर इन दोनों कार्यों से संबंधित अनुमति ऑनलाइन देने कौ तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने बित्त वर्ष 2020- 21 में प्रदेश को जीएसडीपी का दो प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेने की मंजूरी दी है। इसमें से एक प्रतिशत ऋण के लिए कई सुधारों को लागू करने की शर्त जोड़ दी है। इसमें कई कारोबारी सुधार (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) भी शामिल किए गए हैं। इनमें सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) व हॉस्टल बनाने के लिए मंजूरी के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन करने की कार्यवाही भी शामिल है। इसके लिए संबंधित पोर्टल पर एनओसी व अप्रूबल से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया व चेकलिस्ट पब्लिश करनी होगी। 


एनओसी व अप्रूवल से जुड़ी कार्यवाही जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में होगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक कार्यवाही की टाइमलाइन तय की जाएगी। सभी काम तय समय में पूरे होंगे। इससे स्कूल खोलने से जुड़े निवेशक को अनावश्यक दौड़धूप नहीं करनी पड़ेगी। इन सुधारों को लागू करने की कार्यवाही माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्तर से की जानी है। अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में शामिल दोनों कार्यों पर समयबद्ध कार्यवाही के लिए प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला को पत्र लिखा है। उन्हें कहा है कि इन सुधारों पर कार्यवाही कर 31 अक्तूबर तक केंद्र सरकार को बताया जाना है।


विभव टीम लीडर नियुक्त : औद्योगिक विकास विभाग ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित कार्यों के लिए विभव शुक्ला को उद्योग बंधु में टीम लीडर नामित किया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग से कहा गया है कि इस कार्य में किसी सहायता के लिए विभव के मोबाइल नंबर 7536881188 पर सहयोग ले सकते हैं।

स्कूल परिसरों से 50 मीटर की दूरी तक जंक फूड की बिक्री पर रोक की तैयारी

स्कूल परिसरों से 50 मीटर की दूरी तक जंक फूड की बिक्री पर रोक की तैयारी

 
 स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य क्षेत्र के नियामक एफएसएसएआइ ने कमर कस ली है। इसीलिए स्कूलों की कैंटीनों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में ‘जंक फूड’ और बीमार करने वाले भोज्य पर्दाथों की बिक्री और उसका विज्ञापन करने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही स्कूल और कालेज परिसरों से पचास मीटर की दूरी तक भी इनकी ब्रिकी और प्रचार निषिद्ध किया जाएगा। इस बीच, एफएसएसएआइ को ‘ईट इंडिया मूवमेंट विजन’ के तहत फूड सिस्टम विजन ईनाम मिला है।


भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के सीईओ अरुण सिंघल ने रविवार को बताया कि यह संस्था अब पहली बार खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत एक नई नियमावली लेकर आ रही है। इन नये नियमों का मकसद स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और सेहतमंद भोजन उपलब्ध कराना होगा। एफएसएसएआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नये नियम इसलिए बनाए जा रहे हैं ताकि स्कूली बच्चों को अधिक वसा, नमक और शर्करा वाला खाद्य पदार्थ स्कूल में या उसके आसपास नहीं मिले। सेहत के लिए बेहद हानिकारक जंक फूड स्कूलों की कैंटीनों या मेस परिसरों या हॉस्टल मेस में बेचना बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा, शिक्षण संस्थानों के बाहर 50 मीटर की दूरी तक भी जंक फूड जैसे चिप्स, कोल्ड डिंक्स, बर्गर, पीजा आदि की बिक्री पर रोक रहेगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना जारी होने के बाद हरेक स्कूल को इसका सख्ती से पालन करना होगा।

Tuesday, August 4, 2020

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

 
गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


क्या है किस माड्यूल की खासियत

आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए

Monday, August 3, 2020

सरकारी परिषदीय स्कूल अब नहीं बन सकेंगे क्वारंटीन सेंटर

सरकारी परिषदीय स्कूल अब नहीं बन सकेंगे क्वारंटीन सेंटर


बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के सभी चार विकास खंडों और नगर पालिका बिल्हौर व नगर पंचायत शिवराजपुर के प्राथमिक, जूनियर, सहायता-मान्यता प्राप्त विद्यालय कोरोना संदिग्धों के लिए क्वारंटीन केंद्र नहीं बन सकेंगे। शिक्षा विभाग ने कोराना अनलॉक शुरू होने और पठन-पाठन के कार्य शुरू होने के साथ होम क्वारंटीन की सुविधा प्रदेश सरकार द्वारा चालू करने से शिक्षा विभाग ने आदेश लागू किया है।


ककवन क्षेत्र के सिहुरा दाराशिकोह गांव में मानेसर से आए 22 प्रवासी श्रमिकों की जांच में छह लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद ग्राम प्रधान द्वारा शेष 17 लोगों को सरकारी स्कूल में क्वारंटीन करने के लिए खंड शिक्षाधिकारी ककवन से अनुमति मांगी गई थी। अनुमति न मिल पाने से सभी संदिग्ध प्रवासी श्रमिकों को गांव के बाहर एक अन्य स्थान पर ठहराया जा सका था।


खंड शिक्षाधिकारी ककवन धर्म प्रकाश ने बताया कि सरकार के आदेश पर पूर्व में विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया जा चुका है, लेकिन जुलाई से सभी स्कूलों के खुलने और कोरोना अनलाक से किसी भी स्कूल को क्वारंटीन सेंटर नहीं बनाया जाएगा। बेसिक शिक्षाधिकारी कानपुर पवन कुमार की ओर से उन्हें स्पष्ट आदेश भी प्राप्त हुए हैं। स्कूलों के खुल जाने से शिक्षकों के अलावा अभिभावक और अन्य ग्रामीण विद्यालयों में आ जा रहे हैं सुरक्षा के मद्देनजर शिक्षा विभाग द्वारा यह कदम उठाया गया है।

Saturday, July 25, 2020

बेसिक स्कूलों में भी बनाया जाए एकेडमिक कैलेंडर, परिषदीय स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट पर ध्यान देने की जरूरत: आनंदीबेन

● परिषदीय स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप आउट पर ध्यान देने की जरूरत: आनंदीबेन

● बेसिक स्कूलों में भी बनाया जाए एकेडमिक कैलेंडर, बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्यपाल को दिया प्रस्तुतीकरण

● दो साल में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित - DGSE

● कहा- प्राथमिक स्कूल के बच्चों का भी शैक्षणिक कैलेंडर होना चाहिए

● वर्तमान परिवेश को देखते हुए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की जरूरत


लखनऊ : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश के वेसिक स्कूल के बच्चों का भी शैक्षणिक कैलेंडर होना चाहिए, जिसमें पूरे साल पड़ने वाले राष्ट्रीय पर्व, महापुरुषों के जन्मदिन और त्योहारों का जिक्र हो। वच्चों का पाठ्यक्रम तैयार करने में इस वात का ध्यान रखना कि उसमें प्रस्तुतिकरण बच्चो के आसपास के परिवेश का हो। 


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेसिक शिक्षा से जुड़े अध्यापकों को इस तरह प्रशिक्षित करने को कहा है कि जिससे वे बच्चों को कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा अंक और अक्षर ज्ञान आसानी से सिखा सकें। उन्होंने बच्चों के ड्राप आउट पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि जिन बच्चों का नामांकन हुआ है, वे अगली कक्षा में भी रहें। इसके लिए बच्चों के साथ उन्होंने अभिभावकों को भी प्रेरित करने का सुझाव दिया।


राजभवन में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के संचालन को लेकर किये गए प्रस्तुतीकरण के दौरान राज्यपाल ने कहा कि एक से आठ तक की उम्र के बच्चों में सीखने की शक्ति ज्यादा होती है। उनमें सुधार की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए बच्चों को आसानी से सिखाने के तौर-तरीके ईजाद किये जाने चाहिए।

पोस्टर व चित्रों से बच्चों को सिखाएं

राज्यपाल ने कहा कि छोटे बच्चों को पोस्टर व चित्रों से सिखाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। विद्यालय की दीवारों पर बच्चों की समझ के हिसाब से पोस्टर व चित्र बनाए जाएं जिन्हें देखकर बच्चे सीख लें। पोस्टर व चित्र बच्चों की लंबाई के हिसाब से लगाए जाएं। उन्होंने बच्चों के ड्रॉप आउट पर विशेष रूप से ध्यान देने को कहा। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिन बच्चों का नामांकन हुआ है, वे अगली कक्षा में भी रहें। इसके लिए बच्चों के अभिभावकों को भी प्रेरित करते रहना चाहिए।


दो साल में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित - DGSE 

महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरण आनंद ने मिशन प्रेरणा के प्रस्तुतीकरण के माध्यम से केंद्र की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार के उठाए गए कदमों की जानकारी दी।


 उन्होंने बताया कि अगले 2 वर्षों में यूपी को टॉप 5 राज्यों की सूची में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उसी के अनुरूप सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश द्विवेदी, अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल, महेश कुमार गुप्ता, अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार भी मौजूद थीं।

Tuesday, July 21, 2020

सतर्कता : स्कूलों में बनाई जाएगी कोविड हेल्प डेस्क

सतर्कता :  स्कूलों में बनाई जाएगी कोविड हेल्प डेस्क


राजधानी लखनऊ  के सभी राजकीय, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में कोविड हेल्प डेस्क बनाना अनिवार्य है। यहां साबुन, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, हैंडवॉश, आगंतुक रजिस्टर की व्यवस्था होनी चाहिए। यह निर्देश जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने सोमवार को सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रिंसिपल के साथ हुई ऑनलाइन बैठक में जारी किए।


डीआईओएस ने सभी प्रिंसिपल को स्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षकों से सम्पर्क करने को कहा। उन्होंने बताया कि इच्छुक शिक्षकों के स्वयंप्रभा चैनल पर प्रसारित हो रहीं 10 वीं और 12वीं की कक्षाओं के लिए लेक्चर की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। डीआईओएस ने कहा कि सभी स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेज का ब्योरा देना है। जिन विद्यार्थियों के पास मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर नहीं हैं, उन्हें पियर ग्रुप से जोड़ें जिससे वह साथी सहपाठी से फोन करके कोर्स की जानकारी ले सकें।

Thursday, July 16, 2020

प्रदेश में सैनिक स्कूलों का विस्तार किया जाएगा: योगी

प्रदेश में सैनिक स्कूलों का विस्तार किया जाएगा: योगी


 लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में सैनिक स्कूलों की श्रृंखला को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैप्टन मनोज पांडेय उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के विकास और सुविधाओं के लिए प्रदेश सरकार हर संभव मदद करेगी, बह खुद इसकी समीक्षा करेंगे।


 स्कूल के हीरक जयंती वर्ष 2020-21 का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल की स्थापना के शिल्पी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ही देश के इस पहले सैनिक स्कूल की आधारशिला वर्ष 1960 में रखी थी। उन्होंने कहा कि आज सैनिक स्कूल मातृभूमि की रक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दिखाई दे रहा है। 


कैप्टन मनोज पांडेय इस विद्यालय की उसी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कारगिल युद्ध के समय जब पाकिस्तान की सेना ने भारत भूमि में घुसने का दुःसाहस किया था और देश पर जबरन एक युद्ध थोपने का कुत्सित प्रयास हुआ था। यह प्रयास किया जाना चाहिए कि वर्ष 2021 में स्कूल के हीरक जयंती समापन कार्यक्रम में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया जाए। कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने भी संबोधित किया। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।