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Sunday, September 27, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

लखनऊः राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य किसी तय भारांक के आधार पर नहीं, बल्कि स्कूल की वास्तविक जरूरत देखकर तय होंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था खत्म कर दी है। 


नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक स्कूल की जरूरत का आकलन कर जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को भेजेंगे। इससे जरूरी कामों के प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले सरल होने की उम्मीद है।

 डीआइओएस प्रस्ताव के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्था से एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआइओएस सदस्य सचिव होंगे।

Saturday, September 26, 2026

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे, चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे,  चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

लखनऊ। बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग की आदत कम करने और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नया कदम उठाएगा। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब टॉप-5 स्टूडेंट रीडर चुने जाएंगे। इसके अलावा हर विद्यालय में 'रीडर ऑफ द वीक' भी चुना जाएगा। स्कूलों में समाचार पत्र और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की समीक्षा बैठक हुई। इसमें उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, आत्मरक्षा, कला और क्राफ्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में दक्ष बनाने के लिए प्रोफेशनल कोच की मदद ली जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को खेलों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र खरीदने के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी नियमित रूप से समाचार पत्र और किताबें पढ़ें। बैठक में बताया गया कि 25,790 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं।

मंत्री ने इनके प्रभावी उपयोग के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए। छात्रों के संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और शारीरिक विकास की निगरानी के लिए समग्र प्रगति पत्र लागू किया गया है, जिसे अपार आईडी और प्रेरणा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है।

Sunday, September 20, 2026

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

स्कूलों में छठी से लेकर 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, माहवारी स्वास्थ्य नीति बनेगी

विभिन्न विभागों में तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक 


लखनऊ। राज्य सरकार यूपी के सरकारी व सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य हितों को देखते हुए माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता नीति बना रही है। इससे किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य व स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा। इनके साथ स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराई जाएगी। किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की शनिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर मंथन किया गया। सरकारी व एडेड विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन दिए जाएंगे।


भ्रांतियां दूर करने पर जोर

विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन के साथ किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा और जागरूकता सत्रों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। किशोरियों को इसके बारे में जरूरी जानकारी देने और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी व्यवहार को बढ़ावा देने के साथ इससे जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने पर भी जोर रहेगा।

Thursday, September 17, 2026

बेसिक-माध्यमिक विद्यालयों में गूंजेगी संगीतमय प्रार्थना, SIET में 12 प्रार्थनाओं की शूटिंग, रिकॉर्डिंग व संपादन होगा

बेसिक-माध्यमिक विद्यालयों में गूंजेगी संगीतमय प्रार्थना,  SIET में 12 प्रार्थनाओं की शूटिंग, रिकॉर्डिंग व संपादन होगा


लखनऊ। प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी, संगीतमय और व्यवस्थित स्वरूप देने की पहल राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) की ओर से की गई है। संस्थान 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की संगीतबद्ध वीडियो सामग्री तैयार कराएगा। बुधवार को एसआईईटी में संगीत शिक्षकों व छात्राओं की कार्यशाला आयोजित की गई।


इसमें संगीत शिक्षकों व छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान प्रार्थनाओं के गायन, सामूहिक प्रस्तुति, संगीत संयोजन व स्टूडियो में रिकॉर्डिंग से जुड़ी तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। एसआईईटी निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने कहा कि बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के मार्गदर्शन में यह पहल शुरू की गई है।


डिजिटल मंचों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा

संस्थान और विभाग के यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य डिजिटल माध्यमों पर इसे उपलब्ध कराया जाएगा ताकि विद्यालय और शिक्षक अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका प्रयोग प्रार्थना सभा में कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सभी 12 प्रार्थनाओं को प्रस्तुति के आधार पर तैयार किया जाएगा। इससे विद्यालयों को प्रार्थना सभा के लिए एक व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संगीतमय सामग्री मिल सकेगी।


12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं की होगी रिकॉर्डिंग

इसके तहत इतनी शक्ति हमें देना दाता, हमको मन की शक्ति देना, ऐ मालिक तेरे बंदे हम, तेरी है जमीन तेरा आसमान, ओ पालनहारे, तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो, तू प्यार का सागर है, ज्योति से ज्योति जगाते चलो, बादल पे पांव है, इंसाफ की डगर पे, हम होंगे कामयाब और आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं जैसी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाओं को वीडियो रूप में तैयार किया जाएगा।

Wednesday, September 9, 2026

ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को मिलेगा प्राकृतिक पोषण

लखनऊ : प्रदेश के प्राथमिक स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के पोषण और प्रकृति से जुड़ाव के नए ठिकाने भी बनेंगे। योगी सरकार प्राथमिक विद्यालयों में खाद्य वन (फ्रूट फारेस्ट) विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए स्कूल परिसर में उपलब्ध जमीन का उपयोग फलदार पौधे लगाने के लिए किया जाएगा। उद्देश्य बच्चों को स्कूल में ही ताजे फल और प्राकृतिक पोषण से जोड़ना है।


खाद्य वन की अवधारणा के तहत स्कूल परिसर की खाली या उपलब्ध जमीन पर ऐसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे, जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और जिनसे बच्चों को समय-समय पर फल मिल सकें। इससे विद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ बच्चों के पोषण में भी प्रत्यक्ष योगदान की उम्मीद है।

खास बात यह है कि बच्चे इन पौधों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें उगते, फलते और विकसित होते हुए अपनी आंखों से देखेंगे। पहले चरण में 16 हजार विद्यालय इसके लिए चिह्नित किए गए हैं। खाद्य वन को स्कूलों में 'पोषण की जीवंत पाठशाला' के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षक बच्चों को पौधों की देखभाल, फलदार वृक्षों के महत्व, पोषण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे।

 इससे विज्ञान और पर्यावरण जैसे विषयों की पढ़ाई को भी व्यावहारिक आधार मिलेगा। बच्चों में पौधों के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के संरक्षण की आदत विकसित करने में भी यह पहल मददगार हो सकती है। स्कूल में पैदा होने वाले फल को बच्चों को खाने के लिए दिए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पोषण का एक अतिरिक्त स्त्रोत तैयार होगा। खाद्य वन की देखभाल में बच्चों की भागीदारी भी होगी।

कक्षा और उम्र के अनुसार बच्चों को पौधों में पानी देने, उनकी वृद्धि दर्ज करने और उनके संरक्षण जैसी गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इससे 'एक पेड़ लगाने' के साथ ही 'एक पेड़ पालने' की संस्कृति विकसित करने का अवसर मिलेगा।

सरकार की यह पहल जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ स्कूलों में हरियाली, बच्चों के पोषण और पर्यावरण शिक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है। यदि इन खाद्य वनों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित हुआ और स्थानीय फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई तो आने वाले वर्षों में ये विद्यालय परिसर बच्चों के लिए पोषण, प्रकृति और सीखने के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।

Friday, September 4, 2026

सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका

सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका 


नई दिल्ली। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर व सिविल सोसाइटी के सदस्यों के प्रवेश व वीडियोग्राफी पर लगी रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बृहस्पतिवार को प्रिया मिश्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह इस पर पर विचार विचार के के लिए इच्छुक नहीं है। 

राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की अनुमति को जरूरी किया था। वहीं, यूपी में अयोध्या के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के बिना अनुमति प्रवेश व वीडियोग्राफी पर रोक लगाई थी। याचिका में इन दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी।


Tuesday, August 25, 2026

एडेड स्कूलों में मानदेय शिक्षक नहीं, न्यूनतम वेतनमान पर हों अस्थायी नियुक्तियां। हाईकोर्ट ने 25 व 30 हजार रुपये मानदेय वाली शिक्षक नीति के शासनादेश निरस्त किए

एडेड स्कूलों में मानदेय शिक्षक नहीं, न्यूनतम वेतनमान पर हों अस्थायी नियुक्तियां। हाईकोर्ट ने 25 व 30 हजार रुपये मानदेय वाली शिक्षक नीति के शासनादेश निरस्त किए 

नियमित शिक्षक मिलने तक आयोग की संस्तुति से नियुक्ति, स्वीकृत पद का न्यूनतम वेतनमान व भत्ते देने का निर्देश

लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहायता प्राप्त माध्यमिक (एडेड) विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर मानदेय के आधार पर नियुक्ति को अनुचित माना है। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत पद रिक्त होने पर नियमित चयनित शिक्षक के उपलब्ध होने तक अस्थायी नियुक्ति की नई नीति बनाई जाए। नियुक्त शिक्षक को संबंधित स्वीकृत पद के न्यूनतम वेतनमान के साथ अनुमन्य भत्ते दिए जाएं। नियुक्ति संबंधित प्राधिकारी की ओर से आयोग की संस्तुति पर की जाए। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मनोज कुमार सिंह समेत करीब 190 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। 


कोर्ट ने नौ नवंबर 2023 और आठ जुलाई 2024 के राज्य सरकार के दोनों शासनादेश निरस्त कर दिए। पहले शासनादेश के तहत लंबे समय से कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को हटाया गया था, जबकि दूसरे में शिक्षकों की कमी के कारण उन्हें दोबारा 25 हजार और 30 हजार रुपये के मानदेय पर रखने की नीति बनाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों शासनादेश एक-दूसरे के विपरीत हैं। एक में तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गईं और दूसरे में उन्हीं में से शिक्षकों को मानदेय पर रखने की अनुमति दी गई। यह 'अपरोबेट एंड रीप्रोबेट' के सिद्धांत के विपरीत है।

याची ऐसे शिक्षक थे, जिन्हें स्वीकृत पदों पर तदर्थ नियुक्ति मिली थी और वे लंबे समय तक नियमित पद का वेतनमान प्राप्त करते रहे। सुप्रीम कोर्ट के 26 अगस्त 2020 के निर्देश पर उन्हें नियमित चयन परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिला। कुछ सफल नहीं हुए और कुछ परीक्षा में शामिल नहीं हुए। इसके बाद 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को हटाने का निर्णय हुआ।

कोर्ट ने कहा कि बाद में सरकार ने सहायता प्राप्त विद्यालयों में हजारों पद रिक्त होने और इससे पढ़ाई प्रभावित होने की बात स्वीकार की। इसी आधार पर मानदेय शिक्षक नीति लाई गई। हाईस्कूल शिक्षक को 25 हजार और इंटरमीडिएट शिक्षक को 30 हजार रुपये देने का प्रविधान किया गया था। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पदों का वेतनमान क्रमशः 44,900 से 1,42,400 रुपये और 47,600 से 1,51,100 रुपये है। ऐसे में मानदेय बेहद कम है। पीठ ने रिक्तियों की सूचना समय पर नहीं भेजने पर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया।

हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय : स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, पंथनिरेपक्षता मजबूत करती है यूनिफार्म

हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय : स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति नहीं, पंथनिरेपक्षता मजबूत करती है यूनिफार्म

कहा-हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं, छात्रा की याचिका खारिज की

स्कूल का ड्रेस कोड तय करना पूरी तरह उचित है और इसमे बदलाव की माग करने वालों की सोच में बदलाव होना चाहिए न कि ड्रेस कोड में। अगर छात्रों को अपनी मर्जी से बदलाव की छूट दी जाने लगे तो इससे यूनिफार्म की अवधारणा ही खत्म हो जाएगी। – इलाहाबाद हाईकोर्ट


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि स्कूल में स्कार्फ अथवा हिजब पहनने की अनुमति नहीं है। स्कूल यूनिफार्म अनुशासन, बच्चों के बीच समानता, संस्थागत पहचान और धर्मनिरपेक्ष माहौल को बढ़ावा देती है, क्योंकि यह सभी धर्मों के छात्रों पर समान रूप से लागू है। प्रयागराज में टैगोर पब्लिक स्कूल की नाबालिग छात्र सुकैना रिजवी की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की है। छात्रा ने स्कूल के तय ड्रेस कोड के साथ अतिरिक्त रूप से स्कार्फ वानी हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी। 


याची छात्रा ने इसी स्कूल से हाईस्कूल उत्तीर्ण की थी और कक्षा 11 में प्रवेश लेना चाहती थी। उसका कहना था कि वह कक्षा छह से ही स्कार्फ पहनकर आती रही है और इस पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। कक्षा 11 में दाखिले के समय स्कूल प्रबंधन ने कहा कि स्कार्फ पहनकर आना ड्रेस कोड का उल्लंघन है, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता। छात्र ने इसके खिलाफ जिलाधिकारी को दो शिकायती पत्र दिए। जिलाधिकारी की और रिपोर्ट मांगे जाने पर सहायक डीआइओएस ने दोनों पक्षों को सुना। प्रधानाचार्या ने स्पष्ट किया कि स्कूल सह शिक्षा संस्था है, जहां सभी समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं और सभी के लिए समान ड्रेस कोड लागू है। किसी एक छात्रा को त्रिशेष छूट देने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। 

छात्रा के वकील ने तर्क दिया कि स्कार्फ पहनना संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। यह उसकी गरिमा व शारीरिक स्वायत्तता से भी जुड़ा है। स्कार्फ पहनना उसके धार्मिक आचरण का हिस्सा है। इससे रोकना अनुच्छेद 14 व 19 (1) (ए) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। 

राज्य सरकार तथा सीबीएसई की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्कूल निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्था है, जो राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण के अधीन नहीं आता। यूनिफार्म तय करना स्कूल प्रशासन की नीति का विषय है, इसका मकसद छात्रों में एकरूपता बनाए रखना है। हाई कोर्ट ने कहा कि पहले आपत्ति न जताया जाना ढिलाई, लापरवाही, इच्छाशक्ति की कमी या शालीनता के कारण भी हो सकता है। फातिमा धरनीम बनाम केरल राज्य मामले में केरल हाई कोर्ट की यह टिप्पणी भी अदालत ने उल्लेखित की कि छात्रा का ड्रेस चुनने का अधिकार व संस्था का प्रबंधन करने का अधिकार दोनों मौलिक हैं, लेकिन जब टकराव हो तो संस्था के व्यापक हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

बाम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी भी दोहराई जिसमें कहा गया है कि सिर ढंकना इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा साबित नहीं होता। कर्नाटक हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ के चर्चित रेशम बनाम कर्नाटक राज्य (हिजाब मामला 2022) के फैसले का भी विस्तार से उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और यूनिफार्म तय करने का अधिकार संस्था के पास है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और वहां दो जजों की पीठ ने बंटा हुआ फैसला दिया था। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का कोई अंतिम और सर्वमान्य निर्णय अब तक नहीं आया है।

Tuesday, August 18, 2026

राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

राजस्थान के स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के नहीं घुस सकेंगे बाहरी, फोटो-वीडियो पर सख्त पाबंदी

सीजेपी के दौरे के एलान के बाद सरकार ने लिया बड़ा फैसला

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटो व वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है। यह फैसला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के उस एलान के बाद आया है, जिसमें उसने राज्य के जर्जर स्कूलों में जाने की बात कही थी। हाल ही में राज्य के कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के भारी संकट को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किए थे।


सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वे जयपुर, अजमेर, जोधपुर समेत कई जिलों में खराब हालत वाले सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने जारी आदेश में कहा, यह कदम बच्चों की सुरक्षा, निजता और गरिमा की रक्षा के लिए उठाया गया है।

नए नियमों के मुताबिक, बिना प्रिंसिपल की अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं, दूसरी ओर इस आदेश के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, सरकार अपनी कमियों और टूटी छतों को सुधारने के बजाय उन्हें दुनिया की नजरों से छिपाना चाहती है। कांग्रेस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर यह आदेश जल्द वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी इसके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करेगी। 

Monday, August 17, 2026

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य

महज 940 शिक्षकों के भरोसे 570 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का भविष्य


प्रयागराज । संस्कृत विद्यालयों में पठन-पाठन की स्थिति खस्ताहाल है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्कृत विद्यालय के छात्रों का भविष्य अधर में है। प्रदेश में 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं। इनमें शिक्षकों के 2549 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 940 शिक्षक ही तैनात हैं। प्रधानाचार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। 657 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 170 प्रधानाचार्य ही कार्यरत हैं।


शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ की छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। प्रांतीय संस्कृत विद्यालय कल्याण समिति के प्रदेश महामंत्री आनंद उपाध्याय का कहना है कि संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों के साथ ही संसाधनों का अभाव है। कुछ विद्यालय संविदा शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं।


प्रबंधकों को भर्ती का अधिकार, आदेश का इंतजार : शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की कमी को देखते हुए शासन ने हाल में संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके तहत माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के बजाय विद्यालयों के प्रबंधकों के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। एडी माध्यमिक कामता राम पाल का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रबंधकों को ही करनी है, चयन आयोग इनकी नियुक्ति नहीं करेगा।

पढ़ाई प्रभावित, परंपरा पर भी असर
संस्कृत केवल एक विषय नहीं बल्कि भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष और शास्त्रीय ज्ञान की प्रमुख भाषा है। विद्यालयों में नियमित पढ़ाई न होने से विद्यार्थियों की रुचि भी कम हो रही है। एक महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सत्यव्रत मिश्र के मुताबिक माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षा कमजोर होने का असर आगे चलकर उच्च शिक्षा और संस्कृत के विद्वानों की नई पीढ़ी पर भी पड़ सकता है।

2011 के बाद भर्ती प्रक्रिया भी सवालों में
शिक्षा निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2011 में मंडलीय समिति के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया हुई थी। इसमें अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन और बस्ती मंडल में नियुक्तियां हुईं। आजमगढ़ मंडल में मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से नियुक्तियां नहीं हो सकीं।

शासन के आदेश पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। - प्रताप सिंह बघेल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा


Tuesday, August 11, 2026

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे


लखनऊ। प्रदेश को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। नए सत्र 2026-27 से यहां प्रवेश व पढ़ाई भी शुरू होगी। शासन ने यहां प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, कनिष्ठ लिपिक आदि के 1810 पदों का सृजन भी कर दिया है। इन स्वीकृत पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा।


प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत 68 राजकीय इंटर कॉलेज (बालक-बालिका) तथा 58 राजकीय हाईस्कूल कुल 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों का निर्माण व हस्तांतरण किया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 68, प्रधानाध्यापक के 58, प्रवक्ता के 680, सहायक अध्यापक (एलटी) के 819 तथा कनिष्ठ सहायक के 185 नियमित पदों का सृजन किया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भरे जाएंगे। जबकि शेष 50 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इन विद्यालयों में छठवीं व नवीं क्लास में 80-80 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

इन राजकीय इंटर कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, कंप्यूटर, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, भौतिक विज्ञान, रसायन व जीव विज्ञान की पढ़ाई होगी। नए व हस्तांतरित विद्यालयों में से प्रतापगढ़ में एक, बलरामपुर में सात, बाराबंकी में तीन, सुल्तानपुर में चार, अयोध्या में दो, सीतापुर, रायबरेली व लखनऊ में एक-एक समेत आदि जिलों के विद्यालय शामिल हैं। 

Thursday, August 6, 2026

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं


प्रयागराजः पीएम श्री योजना के तहत देशभर के 14500 से अधिक सरकारी स्कूलों को माडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रति स्कूल दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। प्रयागराज में इस योजना के तहत 43 स्कूल चयनित हैं, लेकिन सुविधाओं के बावजूद इन स्कूलों में छात्र संख्या में कमी देखी जा रही है।


सत्र 2025-26 में कुल 11773 पंजीयन हुए थे, जबकि सत्र 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर 10417 रह गया है। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षा, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, पर्यावरण अनुकूल उपायों के तहत सोलर पैनल, एलईडी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका भी विकसित की जा रही हैं। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद छात्र संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है। पीएम श्री पीएस पट्टीनाथ राय में पिछले सत्र में 202 छात्रों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस बार केवल 127 नामांकन हुए। पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उपरदहा में 425 विद्यार्थियों के सापेक्ष सिर्फ 233 पंजीयन हुए हैं। धनुपुर विकासखंड के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल यासीनपुर में 398 के सापेक्ष 317 और जारौन में 271 के सापेक्ष 220 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।

चाका के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उबारी में 400 के सापेक्ष 378 और बहरिया के पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय महपुरा में 154 के सापेक्ष 128 नए नामांकन हुए हैं। बहादुरपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रितैया में पिछले सत्र में 365 छात्रों का पंजीकरण था, जो इस बार 336 पर सीमित रह गया। पीएमश्री पीएस रामपुर में भी पंजीयन का आंकड़ा पिछले सत्र को पार नहीं कर पाया है। सिर्फ 133 नए नामांकन हुए हैं। यही हाल पीएमश्री कंपोजिट स्कूल सराय लहुरी का है, यहां 207 पंजीयन हुआ। जो पिछले सत्र की तुलना में 50 कम है। 

पीएमश्री कंपोजिट स्कूल भगवतपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल जनका, पीएमश्री प्राथमिक विद्यालय बालिका सिरसा, पीएमश्री पीएस छतवा जैसे अन्य स्कूलों में भी छात्र संख्या पिछले सत्र के आंकड़े को नहीं पार कर सकी है। बीएसए अनिल कुमार का कहना है कि सितंबर तक विद्यार्थियों का पंजीयन जारी रहेगा। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं। कुछ स्कूलों ने पिछले सत्र के आंकड़े को पार कर लिया है, जिनमें पीएम श्री पीएस सोरांव प्रथम, पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रमईपुर, और पीएम श्री कंपोजिट स्कूल निकदलपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल तातारगंज जैसे विद्यालय शामिल हैं।

Tuesday, August 4, 2026

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन विद्युत लाइन क्यों?

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन लाइन क्यों? 

पॉवर कॉर्पोरेशन के एमडी को बनाया पक्षकार, स्कूल सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और एसओपी पर मांगी प्रगति रिपोर्ट, स्कूलों की सुरक्षा व आसपास ट्रैफिक जाम पर भी अदालत सख्त


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देकर अगली सुनवाई तक इस संबंध में उनका जवाब पेश करें।


न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि कई मामलों में हाईटेंशन लाइनें स्कूल परिसरों पर गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ी। इस संबंध में हुए अध्ययन और अखबार में प्रकाशित खबरों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय बताते हुए विस्तृत परीक्षण की जरूरत बताई। 


सुनवाई के दौरान डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ ने स्कूलों में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती पर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सात स्कूलों की व्यवस्था अच्छी, पांच की औसत और पांच की खराब पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा।

अदालत को यह भी बताया गया कि स्कूलों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। अगली सुनवाई में कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्योरा दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

नाबालिगों की सुरक्षा पर अदालत गंभीर
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। कोर्ट को बताया गया कि परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पुलिस सत्यापन में 2370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 के खिलाफ मिशन भरोसा के तहत प्रतिकूल रिपोर्ट दर्ज मिली है। अदालत ने कहा कि यह नाबालिग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर विषय है। बार के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, स्कूल वैन में महिला चालकों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस सुझाव पर सरकार आवश्यक विचार करेगी।

Sunday, July 26, 2026

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


 लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

Sunday, July 12, 2026

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक, परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी "माई हेल्थ वर्ल्ड" किताबें

छात्रों को जंक फूड और स्क्रीन टाइम पर किया जाएगा जागरूक,  परिषदीय, कस्तूरबा, मान्यता प्राप्त विद्यालय में भेजी जाएंगी  "माई हेल्थ वर्ल्ड"  किताबें


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय, केजीबीवी व मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों को अब मुख्य पढ़ाई के साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव व स्क्रीन टाइम के संतुलित प्रयोग की भी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से माई हेल्थ वर्ल्ड नाम से एक किताब तैयार की गई है। हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यमों में उपलब्ध यह किताब प्रदेश के विद्यालयों में भी उपलब्ध कराई गई है।


इस किताब में छात्रों को संतुलित व पौष्टिक आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियों, योग व खेलकूद के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही बच्चों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित व बेहतर प्रयोग, पर्याप्त नींद लेने के फायदे के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने इसके बेहतर प्रयोग के निर्देश दिए हैं। अध्ययन सामग्री https://eatrightindia.gov.in/ पर भी उपलब्ध हैं। विद्यालयों में बैगलेस डे का आयोजन किया जाए।

Saturday, July 11, 2026

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

प्रशिक्षण व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार, फिर भी ग्रेडिंग काफी नीचे, उत्तर प्रदेश के पीजीआईडी रैंकिंग में गर्वनेंस व प्रशिक्षण में बढ़े नंबर

आधार सीडिंग, आरटीई, प्रबंध पोर्टल व खर्च में स्थिति बेहतर

लखनऊ। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई डी) में प्रदेश की शैक्षिक व्यवस्था में अपेक्षाकृत हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। प्रदेश में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था बेहतर हुई है तो विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर हुई है।

किंतु ओवरऑल यूपी की ग्रेडिंग काफी नीचे है। यूपी का लर्निंग आउटकम एंड क्वालिटी में सत्र 2024-25 में 81 नंबर था जो पिछले सत्र में भी 81 रहा है। वहीं एक्सेस में 2024-25 में 53 नंबर था जो अब 54 हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फैसिलिटी में 73 से बढ़कर 77, इक्विटी में 231 की जगह 231, गर्वनेंस प्रोसेस में 69 की जगह 71 नंबर मिले हैं। इसी तरह शिक्षण-प्रशिक्षण में 62 से बढ़कर 66 नंबर मिले हैं। ओवरआल 1000 में से यूपी को 580 नंबर मिले हैं। प्रदेश में हाल में शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था काफी बेहतर हुई है। 




40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं,  101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत, शिक्षा मंत्रालय की पीजीआईडी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

स्कूलों में बच्चों के रुकने के समय में हुआ सुधार

एक से दूसरे क्लास में जाने की स्थिति भी हुई है बेहतर

लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रों के सीखने के स्तर व आधारभूत सुविधाओं का आकलन करते हुए परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट (पीजीआई डी) 2025-26 जारी की गई है। इसमें जहां प्रदेश की स्कूली शिक्षा में कुछ स्तर पर सुधार देखने को मिला है तो कुछ जगह पर अभी भी हम राष्ट्रीय स्तर से पीछे हैं, इनमें सुधार की जरूरत है।


रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में स्कूलों में बच्चों के रुकने का समय राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से तो कम है। लेकिन प्रदेश के ही पिछले साल के आंकड़ों में सुधार हुआ है। प्राइमरी में जहां ठहराव दर 86.9 फीसदी थी, वह 2025-26 में 86 हो गई है। वहीं उच्च प्राथमिक में गत वर्ष ठहराव दर 70.4 फीसदी था, वह बढ़कर 72 फीसदी हो गई है। 9वीं-10वीं में 49.6 फीसदी से बढ़कर 55 व 11वीं-12वीं में 42.8 से बढ़कर 45 फीसदी हो गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह अभी पीछे है। इसमें सुधार के लिए अभी और काम करना पड़ेगा।

एक से दूसरे क्लास में बच्चों के जाने की दर में भी पिछले साल की अपेक्षा स्थिति बेहतर हुई है। प्राइमरी से अपर प्राइमरी में बच्चों के जाने की दर पिछले सत्र में 91 फीसदी थी जो 2025-26 में 92.2 फीसदी हुई है। अपर प्राइमरी से सेकेंडरी में छात्रों के जाने की दर 78.1 से बढ़कर 78.7 फीसदी हुई है। सेकेंडरी से उच्च स्तर पर जाने की दर 76.6 फीसदी से बढ़कर 79.2 फीसदी हुई है। 


स्कूलों में कंप्यूटर व बिजली कनेक्शन की जरूरत : बेसिक से माध्यमिक तक के सरकारी व निजी स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी है। वहीं 40 हजार विद्यालयों में अभी भी बिजली का कनेक्शन नहीं है। वहीं 101407 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा की जरूरत है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की तुलना में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्कूलों में पिछले साल की तुलना में सुविधाएं बढ़ी हैं। पिछले सत्र में 262358 स्कूल थे और इनकी संख्या बढ़कर 265278 हो गई है।

निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 3397 स्कूल बढ़े हैं। एक साल में स्कूलों की संख्या 2913 बढ़ी है। जबकि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के 69 स्कूल कम हुए हैं।

Sunday, July 5, 2026

सोलर से जगमग होंगे राजकीय माध्यमिक विद्यालय व कार्यालय, कार्यालयों में 25 और विद्यालयों में 5 किलोवाट के लगेंगे पैनल

सोलर से जगमग होंगे राजकीय माध्यमिक विद्यालय व कार्यालय, कार्यालयों में 25 और विद्यालयों में 5 किलोवाट के लगेंगे पैनल


लखनऊ। प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों और उनके सभी भवनों व कार्यालयों में सोलर पैनल लगेंगे। इससे जहां बिजली के बिल की बचत होगी वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने इसके लिए। सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व डीआईओएस को निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में 2884 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक व उप शिक्षा निदेशक के 36, डीआईओएस के 75 व दो संस्कृत विद्यालय हैं। समग्र शिक्षा की ओर से स्वीकृत 1070 राजकीय विद्यालयों की तुलना में अब तक 947 में ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगे हैं। 


माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने योजना की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने अभियान चलाकर सभी 1414 शेष राजकीय माध्यमक विद्यालयों में प्राथमिकता पर सोलर पैनल लगवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि सभी कार्यालयों में 25 व माध्यमिक विद्यालयों में पांच किलोवाट के सोलर पैनल स्थापित कराए जाएं। इसके लिए केंद्र सरकार के निर्धारित माध्यम से प्राप्त करते हुए कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि पहले से जिन विद्यालयों में सोलर पैनल लगे हैं, वे क्रियाशील हैं या नहीं, इसकी भी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। 

Friday, July 3, 2026

उत्तर प्रदेश को मिले 35 नए माध्यमिक विद्यालय, 55 करोड़ रुपये से बेसिक व माध्यमिक विद्यालय किए जाएंगे अपग्रेड

उत्तर प्रदेश को मिले 35 नए माध्यमिक विद्यालय, 55 करोड़ रुपये से बेसिक व माध्यमिक विद्यालय किए जाएंगे अपग्रेड

31 जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड करने की सहमति 

गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर और ललितपुर में आसान होगी पढ़ाई की राह

लखनऊ। प्रदेश में किशोरों को माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के अवसर और बढ़ेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के क्रम में प्रदेश के 31 बेसिक के विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर और चार हाईस्कूल को इंटर कॉलेज के रूप में अपग्रेड करने को मंजूरी दी है। इस तरह प्रदेश को 35 नए माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। इसके लिए 55 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।


प्रदेश में एक ही परिसर में कक्षा एक से इंटर तक की पढ़ाई की सुविधा देने की कवायद चल रही है। इसके लिए हर जिले में दो-दो सीएम मॉडल व अभ्युदय मॉडल कंपोजिट विद्यालयों का तेजी से निर्माण चल रहा है। साथ ही केंद्र सरकार के सहयोग से पहले से चल रहे विद्यालयों को भी अपग्रेड करके इस लक्ष्य को बढ़ाया जा रहा है। ताकि एक बार यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी हाईस्कूल व इंटर की पढ़ाई पूरी करके निकले। इससे ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। 


इसी क्रम में हाल ही में हुई शिक्षा मंत्रालय की प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड (पीएबी) में प्रदेश के 31 जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड करने की सहमति दी गई है। इस पर 46.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, चार हाईस्कूल स्तर के कॉलेजों को इंटर कॉलेज के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इस पर 8.84 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट से इन स्तर की पढ़ाई के लिए आवश्यक क्लासरूम आदि का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद यहां पर विद्यार्थियों का प्रवेश शुरू होगा। इसमें ज्यादातर पिछड़े जिलों के विद्यालयों को अपग्रेड करने की सहमति दी गई है।


इन जिलों के विद्यालय शामिल

चित्रकूट के दो, गाजियाबाद व ललितपुर के एक-एक राजकीय हाईस्कूल अब इंटर में अपग्रेड होंगे। यहां 11वीं व 12वीं की भी पढ़ाई शुरू हो सकेगी। वहीं, सीतापुर, संभल, मिर्जापुर, चित्रकूट व हरदोई के एक-एक, श्रावस्ती, गोंडा, बरेली, बुलंदशहर, सोनभद्र, पीलीभीत व बांदा के दो-दो, झांसी के चार, ललितपुर के आठ जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक विद्यालय व कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इससे यहां 9वीं व 10वीं की भी पढ़ाई शुरू हो सकेगी।

Tuesday, June 30, 2026

वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

लखनऊ। बच्चों को साइबर फ्राड, धोखाधड़ी के साथ बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी देने के लिए बैंकों ने स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल के तहत बैंकों की सभी शाखाओं को एक-एक स्कूल गोद लेना है। फिर विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षर बनाया जाएगा। अभी तक 160 स्कूलों को बैंकों ने गोद लिया है। प्रदेश में कुल बैंक शाखाओं की संख्या करीब 21000 है।


साइबर और बैंक फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए बैंकों ने अब स्कूलों का रुख किया है। भारतीय बैंक संघ ने 'स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम' शुरू किया है, जिसके तहत देशभर की हर बैंक शाखा एक-एक स्कूल को अंगीकृत करेगी। उत्तर प्रदेश में भी इस पहल को तेजी से लागू किया जा रहा है, ताकि बचपन से ही बच्चों को वित्तीय साक्षर और डिजिटल बैंकिंग के प्रति जागरूक बनाया जा सके। 

Monday, June 22, 2026

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

आसपास की दुकानों पर गुटखा तंबाकू की बिक्री बंद कराने के लिए उठाने होंगे कदम

प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चलाया जाना है। सभी परिसर तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य है। 


इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक स्कूल परिसर में तंबाकू, गुटखा खाने, बीड़ी, सिगरेट के प्रयोग पर रोक रहेगी। इन सब चीजों के पाउच भी यदि परिसर में मिल गए तो शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रधानाचार्यों से जवाब तलब होगा। परिसर में यदि कहीं पर पूर्व में पान गुटखा की पीक के निशान हों तो उन्हें तत्काल प्रभाव से हटवाने का दायित्व भी प्रधानाध्यापकों या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों पर है। 

ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने पर अधिकारियों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करके वास्तविक स्थिति देखेगी। स्कूलों में हर छह महीने में कम से कम एक तंबाकू नियंत्रण गतिविधि कराई जाएगी। इन गतिविधियों की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त करते हुए उनके नाम, मोबाइल नंबर और तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगवाया जाएगा।  सभी शिक्षण संस्थाओं में मुख्य द्वार के पास बोर्ड या वाल पेंटिंग कराई जाए, जिसमें तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का उल्लेख हो।

 इसकी रोकथाम के लिए नामित नोडल का नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित होना आवश्यक है। परिसर के भीतर तंबाकू उपयोग का कोई सबूत नहीं होना चाहिए। परिसर में तंबाकू के नुकसान बताने वाले पोस्टर लगवाने के साथ संस्थान की आचार संहिता का उल्लेख किया जाए। शिक्षण संस्थान की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' का चिह्नीकरण आवश्यक है। इस 100 गज के दायरे में यदि तंबाकू आदि की बिक्री वाली दुकानें हों तो उन्हें हटवाना होगा या फिर दुकानों पर ऐसे पदार्थ की बिक्री बंद करानी होगी। 

संस्थान के नोडल अपने स्तर पर नियमों के उल्लंघन पर सांकेतिक जुर्माना या सुधारात्मक संदेश देने वाली कोई कार्रवाई कर सकते हैं। इस संबंध में डीआइओएस संतोष कुमार राय का कहना है कि यह सब विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मन मस्तिष्क को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष में शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान से जुडे राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।