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Wednesday, July 1, 2020

डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज

फतेहपुर : डरे-सहमें शिक्षक आज से खोलेंगे विद्यालयों के ताले, क्वारन्टीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज


फतेहपुर : कोरोना संक्रमण को लेकर करीब तीन माह से बंद चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एक जुलाई से खोलने का फरमान जारी हो चुका है। संक्रमण को देखते हुए अभी भी परिषदीय शिक्षक स्कूल जाने में सहमें नजर आ रहे हैं। इनका कहना है कि करीब सभी विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था, जिसमें कई सेंटर से कोरोना पॉजिटिव केस भी निकले हैं। अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज तक नहीं कराया गया है।


 ऐसे में विद्यालय में संक्रमण फैलने की अशंका प्रबल हो रही है। करीब साढ़े तीन महीने की लंबी छुट्टी के बाद बुधवार से जिले भर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के ताले स्टाफ के लिए खुल जाएंगे। सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अनुदेशक व शिक्षामित्रों को विद्यालय समय से आना होगा। यह शिक्षक स्कूल पहुंचकर विद्यालयों की रंगाई पुताई, कायाकल्प के तहत कार्य, यूनीफार्म, पुस्तक वितरण समेत अन्य कार्यों को निपटाएंगे। खोले जा रहे विद्यालयों को लेकर शिक्षकों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों की मानें तो संक्रमण काल के दौरान बच्चों के न आने पर शिक्षण कार्य तो होगा नहीं, ऐसे में शिक्षकों को विद्यालय में बुलाना ठीक नहीं है। वहीं शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों को स्कूल बुलाए जाने का विरोध किया है और कहा है कि इसका कोई औचित्य नहीं नहीं है।

विविंग टाइम पर रहती है नजर :  विभाग दीक्षा ऐप के डाउनलोड एवं विविंग टाइम(देखा जाने वाला समय) के आंकड़ों की लगातार समीक्षा करता है। विभाग ने प्रत्येक शिक्षक व स्मार्टफोन धारक अभिभावक के मोबाइल फोन में दीक्षा ऐप डाउनलोड सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विषय के हर पाठ में मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दीक्षा एप का लिंक खुल जाता है। वहां उस पाठ से सम्बन्धित विषय सामग्री मौजूद रहती है। पुस्तक वितरण के बाद बच्चों के लिए इस दौर में पढ़ना आसान होगा। हालांकि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क, स्मार्टफोन की उपलब्धता जैसी व्यवहारिक समस्याएं भी हैं।


क्वारंटीन सेंटर बने विद्यालय नहीं हुए अब तक सेनेटाइज : जनपद के कई स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर भी बनाया गया था। उस समय बाहर से आने वाले व्यक्तियों को 14-14 दिन के लिए यहां रोका गया। हालांकि बाद में नियम बदलकर 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन हो गया है। जो स्कूल क्वारंटीन सेंटर या अस्थाई आश्रय स्थल बने, उनको सेनेटाइज भी नहीं कराया गया है। बीएसए ने बताया कि काफी पहले स्कूलों को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था। 21 दिन से अधिक हो गए हैं। डीएम ने विद्यालयों को सेनेटाइज किए जाने को लेकर निर्देश जारी किए हैं।


गैर जिलों से भी आएंगे शिक्षक :  परिषदीय स्कूलों में अधिकांश शिक्षक गैर जिलों से भी आते हैं। लॉकडाउन के दौरान अपने अपने घरों में पहुंचे शिक्षक स्कूल खुलने पर वापस आएंगे। तमाम ऐसे जिले हैं जहां अधिकांश स्थान हॉटस्पॉट घोषित हैं। जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब दस हजार से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं तैनात हैं। ऐसे में गैर जिलों से आने वाले शिक्षकों के सम्पर्क में तमाम लोग होंगे। जिसको लेकर शिक्षक सहमें नजर आ रहे हैं।

क्या बोले शिक्षक नेता : शासन प्रशासन के आदेश का पालन तो किया जाएगा, लेकिन कोरोना संक्रमण के बचाव को लेकर कोई ठोस कदम न उठाया जाना दुखद है। मांग के बाद भी अभी तक विद्यालयों को सेनेटाइज नहीं कराया गया है। यदि किसी भी शिक्षक को संक्रमण होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। विभाग द्वारा जल्दबाजी में विद्यालय खोले जा रहे हैं। जो कतई ठीक नहीं है। - विजय त्रिपाठी महामंत्री प्राशिसं


शासन के निर्देशों का पालन कराया जा रहा है। बुधवार से विद्यालय खोले जाएंगे। डीएम के आदेश में कई ब्लाकों के विद्यालयों को सेनेटाइज भी किया गया है। सभी विद्यालय सेनेटाइज होंगे। संक्रमण बचाओ को लेकर विभाग गंभीर है।- शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए


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Tuesday, June 30, 2020

संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं

फर्रुखाबाद : संक्रमण के खतरे के कारण स्कूल खुलने को लेकर घबरा रही अध्यापिकाएं


 

Friday, June 26, 2020

अक्टूबर से पहले स्कूलों का खुलना मुश्किल, एमएचआरडी मंत्रालय ने दिए संकेत

अक्टूबर से पहले स्कूलों का खुलना मुश्किल, एमएचआरडी मंत्रालय ने दिए संकेत


केंद्रीय विद्यालयों में हर दिन दो से तीन घंटे लग रही आनलाइन क्लास उपस्थिति जरूरी। आनलाइन पढ़ाई के लिए तेज की मुहिम।...



 नई दिल्ली। आने-वाले महीनों में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार की आशंकाओं के बीच स्कूलों का फिलहाल अक्टूबर से पहले खुलना मुश्किल है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद इसके संकेत दिए है। ऐसे में मंत्रालय ने आनलाइन पढ़ाई की भी मुहिम को और तेज किया है। स्कूलों से आनलाइन क्लास लगाने और छात्रों को उससे जोड़ने के निर्देश दिए है। साथ ही स्कूलों के लिए प्रस्तावित 12 नए टीवी चैनलों को लांच करने की योजना पर भी काम तेज किया गया है।


नए शैक्षणिक सत्र को लेकर होगी समीक्षा

मंत्रालय ने इससे पहले स्कूलों के अगस्त तक खुलने की उम्मीद जताई थी। लेकिन हाल ही में दिल्ली सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बहुत तेज हो गई है। मंत्रालय ने हाल ही में यूजीसी को भी परीक्षाओं और नए शैक्षणिक सत्र को लेकर जारी गाइड लाइन की नए सिरे से समीक्षा करने को कहा है।


केंद्रीय विद्यालयों में आनलाइन पढ़ाई शुरु

इस बीच मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय विद्यालयों में आनलाइन पढ़ाई शुरु हो गई है। छात्रों को हर दिन दो से तीन घंटे आनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इस दौरान नोट्स आदि भी तैयार कराने का काम शुरु कर दिया है। हालांकि अभी हर दिन सभी विषय नहीं पढ़ाए जाते है। बल्कि इन्हें तीन से चार दिन ही पढ़ाया जा रहा है। इस बीच छात्रों की उपस्थिति भी जरूरी की गई है। हाल में शुरु हुई आनलाइन क्लास में जो बच्चे नहीं शामिल हो रहे है, उन्हें लेकर स्कूलों ने अभिभावकों को मैसेज किए है। साथ ही कहा है कि वह बच्चे को आनलाइन क्लास से अनिवार्य रूप से जोड़े। संगठन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मौजूदा समय में जो परिस्थितियां बनी हुई है, उनमें फिलहाल आनलाइन ही पढ़ना होगा। इसके जरिए कब तक पढ़ना होगा, यह कहना मुश्किल है।

एडेड माध्यमिक : नियुक्ति देने वालों पर लटकी कार्रवाई की तलवार


एडेड माध्यमिक : नियुक्ति देने वालों पर लटकी कार्रवाई की तलवार


प्रयागराज : एडेड माध्यमिक कालेजों की शिक्षक नियुक्ति में हेराफेरी करने वाले अब निशाने पर हैं। शासन के निर्देश पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को आख्या के साथ तलब किया जा चुका है। सभी से पूछा गया है कि शिक्षक पद का अधियाचन यदि चयन बोर्ड नहीं भेजा गया तो दोषी अधिकारी का नाम क्या है? और उसकी वर्तमान में तैनाती कहां है? इस सवाल से साफ है कि नियुक्ति में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बस जांच पूरा होने का इंतजार है।



असल में, सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह व अन्य बनाम उप्र व अन्य सहित सिविल अपीलों पर 28 फरवरी 2020 को आदेश दिया है। शासन अशासकीय सहायताप्राप्त कालेजों में नियुक्ति पाने वालों की चयन प्रक्रिया जांच रहा है कि वह सही है या नहीं। शासन स्तर पर तय हुआ कि उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड सचिव पिछले वर्षो में मिले अधियाचन की रिपोर्ट देंगी। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक जिलों से भेजें अधियाचन व चयन प्रक्रिया की जांच करेंगे।


प्रयागराज के शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक व डीआइओएस को तलब करके जांच शुरू कर दी है।


इस तरह की मांगी आख्या : जिले का नाम, शिक्षक का नाम व पदनाम, विद्यालय, कब से संबद्ध, रिक्त पद किस विषय का था पूर्व में कार्यरत शिक्षक का नाम, भेजे अधियाचन का पत्रंक व दिनांक, यदि अधियाचन नहीं भेजा दोषी अधिकारी का नाम व वर्तमान तैनाती स्थान, अधियाचन की प्रति चयनित अभ्यर्थी को मिली या नहीं, नियुक्ति की तारीख।


नियुक्ति प्रक्रिया : दो बहुप्रसारित समाचार पत्र में विज्ञापन, चयन समिति का गठन, अर्हता, गुणांक निर्धारण। संस्था ने डीआइओएस को प्रकरण कब संदíभत किया था, वेतन भुगतान व अन्य विवरण

Tuesday, June 23, 2020

परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब


परीक्षाओं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंची गेंद, CBSE ने शीर्ष अदालत को भेजा जवाब



सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई होनी है। ...


नई दिल्ली । सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है... जहां मंगलवार को इसे लेकर सुनवाई होनी है। हालांकि, मंत्रालय के रूख से साफ है कि वह कोरोना संक्रमण की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षाएं कराने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है। बावजूद इसके वह परीक्षाओं को लेकर की गई तैयारियों से भी कोर्ट को अवगत कराना चाहता है। यही वजह है कि कोर्ट को भेजे जवाब में परीक्षाएं स्थगित करने सहित उसे कराने से जुड़ी तैयारियों का पूरा ब्यौरा भी शीर्ष अदालत को दिया है।


ट्वीटर पर नो एक्जाम ने किया ट्रेंड

इस ब्‍यौरे में सुरक्षा मानकों के तहत सेल्फ सेंटर सहित ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाने जैसी तैयारियां शामिल हैं। इस बीच पूरे दिन भर ट्वीटर पर नो एक्जाम इन कोविड हैसटैग पहले नंबर पर ट्रेंड करता रहा जिसमें बड़ी संख्या में लोग परीक्षाओं को न कराने की मांग कर रहे थे। हालांकि इस बीच मंत्रालय ने साफ किया है कि जो भी फैसला होगा वह छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही होगा। वहीं मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो परीक्षाएं अब नहीं होगी। सभी बच्चों को प्री-बोर्ड या फिर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक देकर प्रमोट कर दिया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाली गेंद

हालांकि जो छात्र परीक्षाओं के होने पर इससे ज्यादा नंबर लाने की उम्मीद में है उन्हें बाद में अंक सुधार के तहत परीक्षा का मौका दिया जाएगा जिनकी तारीखों का ऐलान संक्रमण की स्थिति के सामान्य होने के बाद किया जाएगा। हालांकि मंत्रालय या सीबीएसई इस पर अपनी ओर से कोई निर्णय लेने के बजाय इस फैसले का ऐलान सुप्रीम कोर्ट के हवाले के कराना चाहती है। ताकि बाद में विवाद की कोई स्थिति ना बननी पाए। मालूम हो कि सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बची परीक्षाएं एक से 15 जुलाई के बीच प्रस्तावित होनी है। इनमें 10वीं की परीक्षाएं केवल दिल्ली के इलाकों में होनी हैं।


नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर अभी इंतजार

दंगे के चलते दिल्‍ली के कुछ इलाकों में 10वीं की परीक्षाएं नहीं हो पायी थीं। मंत्रालय इस बीच नीट और जेईई मेंस जैसी परीक्षाओं को लेकर थोड़ा और इंतजार करने के पक्ष में है। यही वजह है कि परीक्षाओं को लेकर 30 जून के आसपास एक बार फिर से समीक्षा की जाएगी। जिसके बाद उस समय की स्थिति को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी जेईई मेंस की परीक्षाएं 18 से 23 जुलाई और नीट की परीक्षाएं 26 जुलाई को होनी है। ऐसे में इन परीक्षाओं को लेकर अभी समय है। 

Wednesday, June 17, 2020

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण, अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस बढ़ोतरी पर कसी नकेल, राज्यपाल ने दी अनुमति

वित्तविहीन विद्यालयों की फीस वसूली पर होगा अब सरकार का नियंत्रण

निजी विद्यालय अब नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क, राज्यपाल ने राज्य सरकार के अध्यादेश को दी मंजूरी


 वित्तविहीन विद्यालय अब मनमाने तरीके से शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे। फीस वसूली को नियंत्रित करने के लिए कैबिनेट ने यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश-2020 को मंजूरी दे दी है। इसमें अधिनियम-2018 की धारा 2,4,8,9 और 11 में संशोधन किया गया है। इसके तहत शुल्क को नियमित करने का अधिकार प्रदेश सरकार के पास होगा। 


राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। इससे स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। सरकार ने कोरोना संकटकाल में अभिभावकों को राहत देने के लिए वित्तविहीन विद्यालयों को इस वर्ष फीस नहीं बढ़ाने, विद्यार्थियों से लॉकडाउन की अवधि का परिवहन शुल्क नहीं लेने और एकमुश्त फीस नहीं वसूलने का आदेश जारी किया था वित्तविहीन विद्यालयों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


मंडल स्तर पर अपील प्राधिकरण : मनमानी फीस वसूली के मामलों में जिला शुल्क नियामक समिति के निर्णयों के खिलाफ अपीलों के समय पर निस्तारण के लिए अब राज्य स्तर की जगह मंडल स्तर पर मंडलीय स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय अपील प्राधिकरण का भी गठन किया जाएगा। अभिभावक इसके निर्णय के खिलाफ मंडल स्तर पर ही अपील कर सकेंगे।

Saturday, June 13, 2020

बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारंभ, 2000 बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ मिलेगी प्रोत्साहन राशि, खुलेंगे अटल आवासीय विद्यालय

बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारंभ,  2000 बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ मिलेगी प्रोत्साहन राशि, खुलेंगे अटल आवासीय विद्यालय


इस योजना में कक्षा 8,9 व 10 पास करने पर सालाना छह हजार प्रोत्साहन राशि मिलेगी 


लखनऊ, 12 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर प्रदेश के दो हजार बाल श्रमिकों को बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश का श्रम विभाग अब उनकी शिक्षा का पूरा खर्च उठाने के साथ बाल श्रम से मुक्त कराएगा। अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को प्रदेश में बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारंभ किया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। 


योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह कंडीशनल कैश ट्रांसफर स्कीम है जिसका लाभ आठ से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन कामकाजी बच्चों व किशोर किशोरियों को दिया जाएगा जो परिवार की विषम परिस्थितियों के कारण संगठित या असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। योजना के तहत हाईस्कूल उत्तीर्ण करने तक बालकों को 1000 और बालिकाओं को 1200 रुपये प्रति माह की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। कक्षा आठ, नौ व दस उत्तीर्ण करने पर उन्हें प्रत्येक कक्षा के लिए 6000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। 


शुरुआत में इस योजना का लाभ प्रदेश के 2000 बच्चों को दिया जाएगा। पहले चरण में खुलेंगे 18अटल आवासीय विद्यालय सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में पहले चरण में 18 अटल आवासीय विद्यालय खोलने जा रही है। जिसमें बाल श्रम में लगे बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। पहले चरण में 18 अटल आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे। यह सभी मंडल मुख्यालय में 12 से 15 एकड़ के क्षेत्रफल में खोले जाएंगे। 


इसमें प्रवेश के लिए बच्चों को पांच वर्ग में बांटा जाएगा। इनमें बाल श्रम में लगे अनाथ या फिर बेरोजगार दिव्यांग मां-बाप के बच्चों को, असाध्य रोग से पीड़ित अभिभावकों के बच्चों को, भूमिहीन परिवार के बच्चों को या फिर विचार बच्चों को रखकर उसे शिक्षा दी जाएगी।

Thursday, June 11, 2020

कोरोना की दवा आने तक स्कूल बंद रखने के लिए जनहित याचिका

कोरोना की दवा आने तक स्कूल बंद रखने के लिए जनहित याचिका

सीबीएसई और आईसीएसई की बची बोर्ड परीक्षाएं कराने के निर्णय को भी चुनौती


लखनऊ। कोरोना का एक भी मरीज रहने या इसकी दवा आने तक प्रदेश के बारहवीं तक के सभी स्कूलों को बंद रखे जाने के आग्रह वाली जनहित याचिका बुधवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर की गई है। वहीं, एक अन्य जनहित याचिका में दसवीं व बारहवीं बोर्ड की बची परीक्षा कराने के सीबीएसई और आईसीएसई के निर्णय को चुनौती दी गई है।


 दोनों याचिकाएं राजधानी के छात्र अनुज निषाद ने दायर की हैं। इन पर 15 जून को सुनवाई हो सकती है। याची के अधिवक्ता केके पाल के मुताबिक कोरोना के बढ़ रहे मरीजों के मद्देनजर स्कूलों में शारीरिक दूरी व मास्क लगाने के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन संभव नहीं है। 


ऐसे में प्रदेश के बारहवीं तक के सभी स्कूलों को कोविड-19 महामारी पूरी तरह खत्म होने या इसकी दवा आने तक बंद रखे जाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाने चाहिए। दूसरी याचिका में भी कोरोना का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार समेत केंद्रीय बोडों को माध्यमिक स्तर की बची बोर्ड परीक्षाएं न करवाकर विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक दिए जाने के निर्देश देने की गुजारिश की गई है।

राजधानी में निजी स्कूल प्रबंधनों ने जुलाई से स्कूल खोलकर कक्षाएं संचालित करने की तैयारी शुरू की

राजधानी में निजी स्कूल प्रबंधनों ने जुलाई से स्कूल खोलकर कक्षाएं संचालित करने की तैयारी शुरू की। 

जुलाई से स्कूल खोलने को अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, अभिभावक बोले बच्चों की सुरक्षा अहम।


लखनऊ।  राजधानी के निजी स्कूलों ने आगामी जुलाई माह से क्लासेज संचालित करने की तैयारी शुरू कर दी है।अनएडेडे प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से इस संबंध में उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण से बच्चों की पूरी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए स्कूल खोले जाएंगे। 


उधर, अभिभावकों की ओर से इसका विरोध किया गया है। अभिभावक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कक्षाओं का संचालन स्थितियां सामान्य होने के बाद ही किया जाना चाहिए।

यह है प्रस्तावित कार्यक्रम
निजी स्कूलों के संगठन के प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 20 जुलाई से सीनियर क्लासेज का संचालन किया जा सकता है। इसके अलावा,  तीन अगस्त से जूनियर की कक्षाओं, 10 अगस्त से प्राइमरी की कक्षाओं और 24 अगस्त से प्री-प्राइमरी की कक्षाएं संचालित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।


दो शिफ्ट में क्लासेज चलाने का सुझाव
स्कूल प्रबंधनों के प्रस्ताव में दो शिफ्ट में क्लासेज संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें, कक्षा में छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में विभाजित करने,  सभी स्कूल कैंपस में सैनिटाइजेशन की उचित व्यवस्था करने और  बच्चों की सेफ्टी को विशेष तौर पर वरीयता देने का सुझाव रखा गया है।


अभिभावकों में नाराजगी, बोले जल्दबाजी न करें
अभिभावकों में इस प्रस्ताव को लेकर खासी नाराजगी है। अभिभावक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना का खतरा अभी बरकरार है। निजी स्कूल प्रबंधन इजराइल जैसी गलतियां न करें। वहां, स्कूल खोलने पर सैकड़ों बच्चे संक्रमित हुए हैं। संघ की ओर से इस सत्र को शून्य किए जाने की मांग उठाई गई है।

Wednesday, June 10, 2020

अगस्त से खुलेंगे माध्यमिक स्कूल, दो शिफ्टों में चलेंगी कक्षाएं

अगस्त से खुलेंगे माध्यमिक स्कूल, दो शिफ्टों में चलेंगी कक्षाएं


Unlock-1 विद्यालयों को दो शिफ्टों और एक कक्षा दो से तीन शिफ्ट में चलाए जाने अथवा अल्टर्रनेट दिनों में क्लासेज चलाने की योजना बनाई जा रही है। ...


लखनऊ। अगस्त में माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने की तैयारी को लेकर राजधानी में माध्यमिक शिक्षा विभाग स्कूलों में एक्सरसाइज शुरू कर दी है। विद्यालयों को दो शिफ्टों और एक कक्षा दो से तीन शिफ्ट में चलाए जाने अथवा अल्टर्रनेट दिनों में क्लासेज चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसको लेकर अमीनाबाद इंटर कॉलेज प्रिंसिपल साहब लाल मिश्रा समेत अन्य में विद्यार्थियों को शारीरिक दूरी बनाकर बिठाए जाने के लिए क्लास में सीट पर नंबरिंग की जा रही है।


इन्हीं नंबरो के आधार पर विद्यार्थइयों को बिठाया जाएगा। स्कूलों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षणेत्तर स्टॉफ के प्रवेश के समय उनके सैनिटाइजेशन के लिए टनल लगवाए जाने पर भी विचार है। स्कूल के गेट के पास ही यह टनल लगाए जाएंगे। जिससे बच्चे इन्हीं टनल के नीचे से गुजरें और सैनिटाइज होकर ही कक्षा में जाएं।

कोरोना संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए होंगे यह सख्त नियम

● कॉलेज में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
● विद्यार्थियों और शिक्षकों को मास्क पहनकर ही विद्यालय में प्रवेश की अनुमति होगी। इसके साथ ही सैनिटाइजर की शीशी साथ रखनी होगी।
● स्कूल में प्रवेश और छुट्टी दोनों समय बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों का ट्रेम्परेचर चेक करके रजिस्टर पर एंट्री करनी होगी।
● कॉलेज में छुट्टी के बाद प्रति दिन कक्षाओं और परिसर का होगा सैनिटाइजेशन।
● फुल आस्तीन की शर्ट और फुल पैंट, जूते मोजे पहनकर आना होगा।
● बच्चों को छोड़ने विद्यालय तक पहुंचाने और वापस ले जाने की जिम्मेदारी होगी अभिभावकों की।
● बच्चों के लिए सख्त निर्देश होंगे कि वह न तो किसी की पाठ्य सामग्री छुएं और न ही किसी को दें।
● हर कक्षा के समाप्त होने के बाद बच्चों को साबुन से हाथ धोना होगा। यह व्यवस्था स्कूल प्रबंधन कराएेगा।
● एक क्लास में 10 बच्चे और एक शिक्षक के बैठाए जाने की व्यवस्था, जैसी मूल्यांकन के समय शिक्षकोें के लिए की गई थी।
● बच्चों का झुंड एक जगह नहीं लगेगा।



क्या कहते हैं डीआइओएस ? 
डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक,  ‘अगर अगस्त से विद्यालय खोले जाने की बात चल रही है। शासन ने अगर आदेश दिए तो इसके लिए हमने सभी विद्यालयों को मानक के अनुरूप व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों ने इस संबंध में एक्सरसाइज शुरू कर दी है।’

Sunday, June 7, 2020

जब भी खुलेंगे शिक्षण संस्थान, एक-दूसरे का खाना खाने पर रहेगी रोक, कैंटीन, प्रार्थना सभा व सेमिनार पर भी रोक

शिक्षण संस्थानों में एक-दूसरे का खाना खाने पर रहेगी रोक

कैंटीन, प्रार्थना सभा, सेमिनार पर रोक

कैंटीन, प्रार्थना सभा या फिर अन्य जगह पर भीड़ लगाने पर रोक रहेगी। सार्वजनिक स्थल पर थूकने पर रोक रहेगी


नई दिल्ली। कोविड-19 को देखते है जब भी शिक्षण संस्थान खुलेंगे तो छात्रों और शिक्षकों को एक दूसरे के खाने और सामान का इस्तेमाल करने पर रोक रहेगी। केंद्र सरकार ने स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए कोरोना से बचाव को लेकर अपनी वेबसाइट माईजीओवी पर क्या करें, क्या न करें व किन कार्यों पर रोक रहेगी, की सूचना दी है। 



इसके तहत स्कूल या कॉलेज परिसर में एक दूसरे से बिना हाथ व गले मिलना, कम से एक मीटर की दूरी, हर समय मास्क लगना जरूरी बताया गया है। यह भी कहा गया है कि दोबारा उपयोग में लाए जा सकने वाले मास्क का  इस्तेमाल किया जाए परिसर में रहने के दौरान हर थोडी-थोडी देर में साबुन से हाथ धोना या फिर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करना होगा।


 घर पहुंचने पर मोबाइल, चाबी या अन्य सामान को सैनिटाइज करें। यदि कोविड-19 संबंधी कोई लक्षण दिखे या तबीयत खराब हो तो तो 1075 हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर तुरंत मदद मांगें। ब्यूरो

Saturday, June 6, 2020

अगस्त में खुलेंगे 5वीं तक के स्कूल, जुलाई के आख़िर में 10वीं-12वीं की शुरू हो सकती पढ़ाई

अगस्त में खुलेंगे 5वीं तक के स्कूल, जुलाई के आख़िर में 10वीं-12वीं की शुरू हो सकती पढ़ाई


लखनऊ : प्रदेश में स्कूलों-कॉलेजों को खोलने को लेकर मंथन शुरू हो गया है। जुलाई के आखिर तक 10वीं-12वीं की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। 


सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए दो पालियों में भी पढ़ाई कराई जा सकती है। हालांकि, पांचवी तक के स्कूल अगस्त में ही खोले जाने की संभावना है।

साभार : NBT

देश में 76% पैरंट्स नहीं चाहते वायरस के दौर में खुलें स्कूल

देश में 76% पैरंट्स नहीं चाहते वायरस के दौर में खुलें स्कूल


नई दिल्ली : कोविड-19 संक्रमण इस समय तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते 25 मार्च से ही देश भर के स्कूल बंद हैं। अब कुछ राज्य सरकारें जुलाई में स्कूल दोबारा खोलने की प्लानिंग कर रही हैं। इन सब के बीच देश के अधिकाश पैरंट्स मानते हैं कि कोरोना संक्रमण के बीच स्कूलों को नहीं खोलना चाहिए। देश भर के 76 फीसदी पैरंट्स मानते हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ स्कूलों का संचालन व्यवहारिक नहीं है।


यह बात लोकल सर्कल के एक सर्वे में सामने आई है। इस सर्वे में देश के 224 जिलों के 18 हजार पैरंट्स ने हिस्सा लिया। सर्वे में शामिल 37 प्रतिशत पैरंट्स ने कहा कि जिस जिले में कोरोना के नए मामले 21 दिन तक सामने न आए वहीं पर स्कूलों को खोला जाना चाहिए या फिर जिस स्कूल के 20 किलोमीटर के दायरे में 21 दिन तक कोरोना का कोई नया मामला न आए उन्हें खोला जा सकता है। 16 प्रतिशत ने कहा कि जब तक प्रदेश में कोरोना के मामले आना बंद नहीं होते स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। 


नए मामले जीरो होने के 21 दिन बाद ही संबंधित राज्यों के स्कूल खुलने चाहिए। जबकि 20 प्रतिशत पैरंट्स मानते हैं कि पूरे देश में जब कोरोना संक्रमण के नए मामले आने बंद हो जाए और इसे तीन हफ्ते हो जाए तभी स्कूलों को खोला जाना चाहिए। सर्वे में शामिल महज 11 प्रतिशत पैरंट्स को ही लगता है कि राज्य सरकार के निर्धारित कलेंडर के मुताबिक ही स्कूल को  खुलना चाहिए।


पैरंट्स के अनुसार कई बच्चों के पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट नहीं है ऐसे में टीचर्स को एसएमएस और फोन पर बच्चों से बात करनी चाहिए। 38 प्रतिशत पैरंट्स मानते हैं कि स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं हो पाएगी।


स्कूल खुलने के बाद विदेश में क्या हुआ : फ्रांस में स्कूल खुलने के एक हफ्ते बाद ही स्कूलों में संक्रमण के 70 मामले सामने आए। डेनमार्क और क्रोएशिया ने भी स्कूलों को खोलने के निर्देश हाल ही में दिए हैं। इस्राइल में पिछले कुछ दिनों के दौरान ही 220 स्टूडेंट्स और टीचर कोविड संक्रमण की चपेट में आ गए।

जुलाई के दूसरे सप्ताह से माध्यमिक विद्यालय खोलने की तैयारी

जुलाई के दूसरे सप्ताह से माध्यमिक विद्यालय खोलने की तैयारी


लखनऊ। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित स्कूलों को जुलाई के दूसरे सप्ताह से चरणबद्ध रूप से खोलने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने शिक्षा अधिकारियों से इस पर सुझाव मांगे हैं। साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद को योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। 


प्रमुख सचिव ने बृहस्पतिवार को सभी डीआईओएस और शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। उन्होंने अफसरों को बताया कि स्कूल खोलने के लिए कई सुझाव मिल रहे हैं। कुछ लोगों ने 11-12वीं की कक्षाएं 6 जुलाई से संचालित करने, के एक सप्ताह बाद 9-10वीं और जुलाई के अंतिम सप्ताह में 6-8 तक की कक्षाएं संचालित करने का सुझाव दिया है। इन सुझावों पर मंथन के बाद निर्णय किया जाएगा।

Tuesday, June 2, 2020

मुहिम : कोरोना खत्म हो या टीका बने तभी स्कूल भेजेंगे बच्चे, भारत समेत कई देशों में अभिभावकों ने छेड़ा अभियान

दो लाख अभिभावकों ने सरकार से कहा...अभी स्कूल नहीं खोलें

अनुरोध : जब तक टीका नहीं बन जाए ऑनलाइन मोड पर ही हो पढ़ाई

मांग : कोरोना के चलते एक साल तक बंद रखे जाएं नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल


मुहिम : कोरोना खत्म हो या टीका बने तभी स्कूल भेजेंगे बच्चे, भारत समेत कई देशों में अभिभावकों ने छेड़ा अभियान


अभिभावक रोजी-रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर घर से निकलने को तो तैयार हैं, लेकिन बच्चों को स्कूल भेजने को राजी नहीं हैं। भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन से लेकर कनाडा तक इसके खिलाफ अभिभावकों ने मुहिम शुरू की है। भारत में स्कूल जुलाई से खुलने के संकेत हैं, लेकिन अभिभावकों ने किसी राज्य में मामले शून्य होने का टीका आने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की मुहिम छेड़ दी है।


 पैरेंट्स एसोसिएशन के चेंज डॉट आर्ग पर शुरू ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान को सवा चार लाख से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला है। अभिभावक पांच लाख हस्ताक्षरों के साथ मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।

 अनुशासन पर भी सवाल 
स्कूलों में जेल जैसे अनुशासन पर भी सवाल उठे। दरअसल, बच्चों को 10-10 के अलग समूह में रखा जाएगा, कक्षाओं में खाना होगा और एक-दूसरे से कुछ साझा नहीं कर सकेंगे। दो गज की सामाजिक दूरी भी जरूरी होगी।



नई दिल्ली। सरकार के जुलाई में स्कूल कॉलेज खोलने के एलान पर चिंता जताते है करीब दो लाख अभिभावकों ने केंद्र सरकार को याचिका देकर अभी स्कूल नहीं खोलने की मांग की। याचिका में कहा गया है कि जब तक कोरोना के हालात सामान्य न हो जाएं या इसका टीका न बन जाए. स्कूलों को बंद ही रखा जाए। 


अभिभावकों ने कहा, जुलाई से स्कूलों को खोलना सरकार का सबसे भयानक फैसला होगा। यह आग से खेलने जैसा कदम है। उन्होंने सरकार से मौजूदा शैक्षणिक सत्र को ई-लर्निंग मोड में ही चलाने की सलाह दी। दलील दी कि जब स्कूल मानते हैं कि ऑनलाइन क्लास में अच्छी पढ़ाई हो रही है तो इसे पूरे सत्र के लिए अपनाने में क्या दिक्कत हो सकती है। सरकार को सौंपी गई याचिका में 2-13 लाख अभिभावकों के दस्तखत हैं। सरकार को सौंपी गई याचिका में 2.13 लाख अभिभावकों के दस्तखत हैं।

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प्रयागराज
जनहित संघर्ष समिति ने सोमवार को भाजपा के महानगर अध्यक्ष गणेश केशरवानी से मुलाकात कर अपनी पांच सूत्रीय मांगें प्रदेश सरकार के समक्ष रखी। 


समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल कुमार केशरवानी ने सरकार से अनुरोध किया कि कोरोना के खतरे को देखते हुए नर्सरी से आठवीं तक के सभी स्कूल एक साल तक बंद रखे जाएं। इस दौरान शलभ पांडेय, कुलदीप चौरसिया, रवि शुक्ला, अभिलाष केशरवानी, राजेश शेरवानी मौजूद रहे।

Sunday, May 31, 2020

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस जारी, स्कूल कॉलेज फिलहाल रहेंगे बंद, राज्य सरकारों से सलाह के बाद लिया जाएगा फैसला

गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस जारी,  स्कूल कॉलेज फिलहाल रहेंगे बंद, राज्य सरकारों से सलाह के बाद लिया जाएगा फैसला


गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन 5.0 के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। इसके तहत पहले फेज में स्कूल-काॅलेज कोचिंग को फिलहाल खोलने की अनुमति नहीं मिली है। ...




गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन 5.0 के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। इसके तहत पहले फेज में स्कूल-काॅलेज, कोचिंग सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों को फिलहाल खोलने की अनुमति नहीं दी गई है। मंत्रालय ने इस बारे में कहा कहा है कि सभी शिक्षण संस्थान खुल सकेंगे लेकिन इनके बारे में राज्य सरकारों से सलाह लेने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके अनुसार फिलहाल स्कूल-कॉलेज खुलने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। बता दें कि देश में फैली कोरोना वायरस की महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सभी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को मार्च 2020 से बंद कर दिया गया है।


 
इसके बाद पीएम मोदी ने 24 मार्च को पहला लॉकडाउन कर दिया था। इसकी अवधि 14 अप्रैल को खत्म होनी थी। इसके बाद लगातर बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 3 मई तक बढ़ाया गया और उसके बाद 17 मई तक तीसरे चरण का लॉकडाउन चला। इसके बाद भी कोरोना वायरस के मामले नहीं थमने की वजह से देशव्यापी बंद की समय सीमा और बढ़ाई गई और चौथे चरण का ऐलान हुआ। यह चरण कल यानी कि 31 मई को खत्म हो रहा है। इसके पहले ही आज यानी कि 30 मई को गृह मंत्रालय की तरफ से लॉकडाउन 5 की नई गाइंडलाइन्स जारी कर दी गई हैं। इसमें कंटेनमेंट जोन को छोड़कर बाकी को सिलसिलेवार खोला जा रहा है।


इसे तीन फेज में बांटा गया है। इसमें पहले चरण में रेड जोन को छोड़कर सभी धार्मिक स्थल, होटल, रेस्त्रा खोले जाएंगे। इसके अलावा दूसरे फेज में स्कूल-कॉलेज और फिर तीसरे फेज में इंटरनेशनल फ्लाइटों, मेट्रो रेल सेवाओं, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, बार, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल और इनके जैसी बाकी जगहों को आम लोगों के लिए खोने जाने की बात कही गई है। वहीं अगर कोरोना वायरस की बात करें तो हर दिन तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। 


Monday, January 6, 2020

चित्रकूट : अंशकालिक अनुदेशकों के जनपद के अंदर विद्यालय परिवर्तन सम्बन्धी विज्ञप्ति जारी, देखें

चित्रकूट : अंशकालिक अनुदेशकों के जनपद के अंदर विद्यालय परिवर्तन सम्बन्धी विज्ञप्ति जारी, देखें।





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Friday, July 5, 2019

फतेहपुर : सत्र 2019-20 में जनपद में अंग्रेजी माध्यम में चयनित विद्यालयों की सूची करें डाउनलोड


फतेहपुर : सत्र 2019-20 में जनपद में अंग्रेजी माध्यम में चयनित विद्यालयों की सूची करें डाउनलोड। 


( काउंसलिंग, पदस्थापन हेतु आवश्यकता पड़ेगी इस सूची की। )








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Monday, July 1, 2019

अब सामान्य बच्चों के साथ पढ़ेंगे दिव्यांग, प्रयागराज समेत चार जिलों में खुलेंगे दिव्यांगो के लिए स्कूल



अब सामान्य बच्चों के साथ पढ़ेंगे दिव्यांग, प्रयागराज समेत चार जिलों में खुलेंगे दिव्यांगो के लिए स्कूल। 




Saturday, June 22, 2019

लखनऊ : कुर्सी न मेज फिर भी  श्रेष्ठ स्कूल, बिना भौतिक सत्यापन किये स्कूलों के मनमाने चयन का लग रहा आरोप, सीएम पोर्टल पर हुई शिकायत



लखनऊ : कुर्सी न मेज फिर भी  श्रेष्ठ स्कूल, बिना भौतिक सत्यापन किये स्कूलों के मनमाने चयन का लग रहा आरोप, सीएम पोर्टल पर हुई शिकायत।